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चीन से भिड़ने के लिए अमेरिका ने भारतवंशी ही चुना, अमित क्षत्रिय बने नासा प्रमुख?
5 Sep, 2025 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन।अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय मूल के वैज्ञानिक अमित क्षत्रिय को नया एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर बनाया है। यह नासा की सिविल सर्विस की सबसे बड़ी और अहम पोस्ट मानी जाती है। इस पद पर रहते हुए अमित सीधे एजेंसी के कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे और नासा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर को सलाह देंगे। अमित करीब दो दशक से नासा में काम कर रहे हैं। अभी तक वो ‘मून टू मार्स प्रोग्राम‘ के डिप्टी इनचार्ज थे। अब नई जिम्मेदारी में वे नासा के 10 सेंटर्स और मिशन डायरेक्टर्स की टीम को लीड करेंगे। साथ ही एजेंसी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की भूमिका भी निभाएंगे। अमित का जन्म अमेरिका के विस्कॉन्सिन में भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ। उनके पिता इंजीनियर और मां केमिस्ट थीं।
नासा के मिशन कंट्रोल फ्लाइट डायरेक्टर बनने का मौका अब तक सिर्फ 100 लोगों को मिला है और अमित उनमें से एक हैं। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की 50वीं एक्सपेडिशन के दौरान लीड फ्लाइट डायरेक्टर के तौर पर बेहतरीन काम किया। इसके लिए उन्हें ‘आउटस्टैंडिंग लीडरशिप मेडल‘ से सम्मानित किया गया था।नासा का कहना है कि अमित की अगुवाई में मिशन को और मजबूती मिलेगी। इस मिशन के जरिए इंसान को दोबारा चांद पर भेजने और फिर मंगल पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर सीन पी। डफी ने कहा, अमित के पास अनुभव, ईमानदारी और दूरदर्शिता है। उनके नेतृत्व में नासा नए कीर्तिमान बनाएगा।
रूसी पनडुब्बी अमेरिका पर परमाणु मिसाइल दागने ही वाली थी, अधिकारी ने रोका विनाश
5 Sep, 2025 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। आज से तकरीबन 63 साल पहले ऐसा मौका आया था, जब दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी हो गई थी। उस वक्त पूर्व सोवियत संघ के एक दूरदर्शी नेवी ऑफिसर ने संभावित थर्ड वर्ल्ड वॉर को अपनी समझदारी से किसी तरह टाल दिया था। उस सोवियत ऑफिसर का नाम वासिली अर्खिपोव था। यह घटना साल 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट से जुड़ी है।
दरअसल, साल 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान एक सोवियत नौसेना अधिकारी वासिली अर्खिपोव (1926–1998) ने ऐसा फैसला लिया, जिसने दुनिया को संभावित तीसरे विश्व युद्ध से बचा लिया था। अमेरिका के सुरक्षा बल उस समय सोवियत पनडुब्बी बी-59 को सतह पर लाने के लिए लगातार अटैक कर रहे थे। सोवियत पनडुब्बी अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में थी और कई दिनों से मॉस्को से संपर्क टूट चुका था। इस कारण पनडुब्बी के क्रू मेंबर्स (चालक दल) को यह संदेह हो गया था कि शायद विश्व युद्ध पहले ही शुरू हो चुका है।
तनाव लगातार बढ़ रहा था। पनडुब्बी की बैटरियां लगभग खत्म हो चुकी थीं, एयर कंडीशनिंग बंद थी और अंदर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। जहाज में ऑक्सीजन की भारी कमी थी। कई नाविक कार्बन डाइऑक्साइड की वजह से हुई घुटन के चलते बेहोश हो गए थे। इस माहौल में पनडुब्बी के कप्तान ने परमाणु टॉरपीडो दागने का निर्णय ले लिया। सामान्य परिस्थितियों में हमले की अनुमति केवल कप्तान और राजनीतिक अधिकारी की मंजूरी से मिल जाती थी, लेकिन संयोग से उस यात्रा पर फ्लोटिला कमांडर वासिली अर्खिपोव भी मौजूद थे। उनके उच्च पद के कारण इस बार तीन अधिकारियों की सहमति जरूरी थी।
निर्णायक क्षण पर अर्खिपोव ने हमले का विरोध किया। कप्तान और राजनीतिक अधिकारी के साथ लंबी बहस के बाद उन्होंने उन्हें मनाया कि पनडुब्बी को सतह पर लाया जाए और मॉस्को से संपर्क स्थापित किया जाए। इस दृढ़ रुख ने परमाणु हमले को रोका और पूरी दुनिया को एक विनाशकारी परमाणु युद्ध से बचा लिया। इतिहासकार और विशेषज्ञ आज भी इस घटना को उस क्षण के रूप में याद करते हैं, जब एक अकेले अधिकारी का विवेक और साहस मानव सभ्यता को महाविनाश से बचा गया। यदि यह अटैक हुआ होता तो तीसरे विश्व युद्ध का खतरा गहरा जाता।
अमेरिका ने कहा बंधकों को रिहा करें, इजरायल बोला- हमास सरेंडर करे या गाजा की बर्बादी देखें
5 Sep, 2025 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरुशलम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि हमास को तुरंत सभी 20 बंधकों को रिहा करना चाहिए। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया नेटवर्क पर लिखा, हमास को तुरंत सभी 20 बंधकों को रिहा करना होगा। ऐसा होते ही हालात तेजी से बदल जाएंगे और यह युद्ध खत्म हो जाएगा। ट्रंप ने इस मुद्दे पर और कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अमेरिका हमास पर तत्काल दबाव बनाने के पक्ष में है।
दूसरी ओर, हमास ने बयान जारी कर कहा है कि वह सभी बंधकों को छोड़ने को तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि युद्ध पूरी तरह खत्म हो और इजराइली सेना गाजा से पीछे हटे। संगठन का दावा है कि उसने दो हफ्ते पहले युद्धविराम प्रस्ताव स्वीकार किया था और अब भी इजराइल की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। हमास ने कहा है कि वह एक व्यापक समझौते के लिए तैयार है, जिसमें ‘प्रतिरोध’ के पास मौजूद सभी बंधकों को रिहा किया जाएगा और बदले में इजराइल को तय संख्या में फिलीस्तीनी कैदियों को रिहा करना होगा। समूह का कहना है कि इस समझौते से गाजा में युद्ध खत्म होगा, इजराइली सेना की पूरी तरह वापसी होगी, बॉर्डर क्रॉसिंग्स खुलेंगी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। संगठन ने यह भी संकेत दिया कि वह गाज़ा प्रशासन चलाने के लिए ‘तकनीकी विशेषज्ञों की स्वतंत्र राष्ट्रीय सरकार’ बनाने को तैयार है। हालांकि, इजरायल का रुख सख्त है। वह तभी किसी सौदे पर सहमत होगा जब हमास आत्मसमर्पण करे और पूरी तरह से हथियार डाल दे।
इधर, इजरायल के रक्षा मंत्री इस्रराइल काट्ज ने चेतावनी दी है कि अगर हमास ने शर्तें नहीं मानीं, तो गाजा सिटी का हाल भी रफा और बेइत हनून जैसा कर दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हमास अब भी धोखे और खोखले बयानों का सहारा ले रहा है। काट्ज ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए इजराइल की शर्तें साफ हैं- सभी बंधकों की रिहाई और हमास का निरस्त्रीकरण। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इजरायल को चेतावनी दी है कि यदि उसने कब्जे वाले वेस्ट बैंक को अपने में मिलाने की कोशिश की तो यह ‘रेड लाइन’ होगी और अब्राहम समझौते की भावना को कमजोर कर देगी। यूएई की वरिष्ठ अधिकारी लाना नुसेइबेह ने कहा कि ऐसा कदम इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के दो-राष्ट्र समाधान को पूरी तरह खत्म कर देगा। फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने यूएई की इस स्थिति का स्वागत किया है। वहीं, इजरायली सरकार ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की है।
गाजा को हाई-टेक मेगासिटी में बदलने की योजना
5 Sep, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा। पिछले 23 महीनों से इजराइली हमलों के चलते गाजा पट्टी पूरी तरह से तबाह हो गई है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की गाजा को दुबई जैसा टूरिस्ट और फाइनेंशियल स्पॉट बनाने की योजना सामने आई है। एक 38 पेज की सरकारी दस्तावेज में गाजा को हाई-टेक मेगासिटी में बदलने की योजना का जिक्र है। इस योजना को गाजा रीकंस्ट्रक्शन, इकोनॉमिक एक्सेलरेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशनल ट्रस्ट नाम दिया गया है।
इसे करीब 9 लाख करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा। ट्रम्प इन इमारतों को ऊंचे दामों पर बेचेंगे। वहीं, इसके लिए 20 लाख लोगों को निकाला जाएगा, जिन्हें शहर छोडऩे के बदले 4 लाख रुपए और बसने के लिए 4 साल तक का किराया दिया जाएगा। साथ ही एक साल तक फ्री भोजन भी देने की बात कही गई है। योजना में गाजा को सऊदी अरब के नियोम प्रोजेक्ट की तर्ज पर 8एआई-संचालित मेगासिटी और एक एलन मस्क मैन्युफैक्चरिंग पार्क में बदलने की बात है, जो पहले इजराइल के नष्ट किए गए ईरेज औद्योगिक क्षेत्र पर बनेगा। गाजा की सीमा के पास की कृषि भूमि को इजराइल के लिए सुरक्षा बफर जोन में बदला जाएगा।
ये नरसंहार की साजिश
दस्तावेज में ट्रम्प, एलन मस्क और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का जिक्र है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और एक्सपट्र्स ने इसे गाजा से लोगों को निकालने और नरसंहार की साजिश करार दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक गाजा से लोगों को निकाल कर मिस्र, कतर जैसे देशों में रखा जाएगा या फिर फिलिस्तीन के ही किसी एक क्षेत्र में रखा जाएगा। इन लोगों को तब तक गाजा से बाहर रहना होगा, जब तक इलाके का पुनर्विकास नहीं हो जाता। जमीन मालिकों को उनकी संपत्ति के बदले डिजिटल टोकन दिए जाएंगे, जबकि रहने वालों को 323 वर्ग फीट के छोटे घरों में रहना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक जितने लोग गाजा छोड़ेंगे, निवेश उतना घटेगा। हर 1 प्रतिशत आबादी के विस्थापन से 40 हजार करोड़ रुपए बचेंगे। गाजा योजना में ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर की भूमिका अहम है। कुशनर पहले भी गाजा के वॉटरफ्रंट को मूल्यवान संपत्ति बताते रहे हैं।
भारी मुनाफा कमाने की योजना
गाजा को 10 सालों तक अमेरिकी ट्रस्टीशिप के तहत चलाया जाएगा। रिपोर्ट में इस योजना के पीछे का मकसद भारी मुनाफा कमाना है। यह योजना कुछ इजराइली विशेषज्ञों और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के विशेषज्ञों ने तैयार की है। इसमें इजराइली-अमेरिकी उद्यमी माइकल आइजेनबर्ग और लिरन टैंकमैन का नाम है। इन्होंने गाजा में एक ग्रेट ट्रस्ट नामक संस्था की स्थापना का सुझाव दिया है। इसके जरिए गाजा पट्टी को पहले हमास मुक्त करने और फिर धीरे-धीरे अमेरिकी नियंत्रण में स्मार्ट सिटी और आर्थिक जोन में बदलने की तैयारी है। हालांकि, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप ने कहा कि यह दस्तावेज उनकी मंजूरी के बिना तैयार किया गया और इस पर काम करने वाले दो वरिष्ठ एक्सपट्र्स को निकाल दिया गया है। व्हाइट हाउस या अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने इस योजना की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। लेकिन यह योजना ट्रम्प के पुराने बयानों से मिलती है जिसमें उन्होंने गाजा को साफ करने और उसे दोबारा बसाने की बता कही थी।
वेनेजुएला की नाव पर हमला, 11 की मौत
5 Sep, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की एक नाव पर हमला किया जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई। अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खुलासा किया है कि खुद ट्रम्प ने नाव पर हमला करने का आदेश दिया था। यह हमला कैरिबियन सागर में हुआ था। रुबियो ने कहा कि वे चाहते तो उस नाव को सीज कर सकते थे, लेकिन ट्रम्प ने इसके बजाय उसे उड़ाने का आदेश दिया। रुबियो ने कहा कि सिर्फ ड्रग्स की खेप जब्त करने से कार्टेल पर असर नहीं पडऩे वाला है। उन्हें खत्म करना है तो उन्हें उड़ाना ही होगा। रुबियो ने यह भी कहा कि नाव पर मौजूद लोगों को कोई चेतावनी नहीं दी गई क्योंकि वह ‘कोकीन या फेंटेनाइल’ ड्रग से भरी हुई थी। यह अमेरिका के लिए सीधा खतरा थी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चेताया, कहा-ट्रम्प भारत-चीन को धमकाना बंद करें
5 Sep, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोनों देशों को टैरिफ से नहीं डरा सकते; अगर वे झुके तो उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी
बीजिंग। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भारत और चीन को टैरिफ के नाम पर धमकाना बंद करने को कहा है। उन्होंने कहा कि दोनों (भारत-चीन) देश उनकी धमकी से डरने वाले नहीं हैं। चीन की विक्ट्री डे परेड में शामिल होने के बाद मीडिया से बात करते हुए पुतिन ने कहा कि ट्रम्प, भारत या चीन से इस तरह से बात नहीं कर सकते। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और चीन का इतिहास हमलों से भरा है। अगर इन देशों का कोई नेता कमजोरी दिखाएगा तो उसका राजनीतिक करियर खत्म हो सकता है।
दरअसल, ट्रम्प भारत पर कई बार आरोप लगा चुके हैं कि भारत रूसी तेल खरीदता है और यूक्रेन जंग को रूस का साथ दे रहा है। ट्रम्प अपने टैरिफ को जंग सुलझाने वाला हथियार बताते हैं। ट्रम्प ने द स्कॉट जेनिंग्स रेडियो शो में कहा था कि इस (टैरिफ) नीति की वजह से अमेरिका को ताकत मिलती है। ट्रम्प ने टैरिफ को जादुई हथियार कहा और दावा किया इसके जरिए उन्होंने 7 जंग रोकी हैं।
ट्रम्प रूढि़वादी मानसिकता वाले इंसान
पुतिन ने अमेरिका के रवैये को पुराना और रूढि़वादी मानसिकता वाला बताया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक युग अब खत्म हो चुका है। अमेरिका को समझना होगा कि वह अपने पार्टनरों से ऐसी भाषा में बात नहीं कर सकता। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में तनाव कम होगा और सामान्य राजनीतिक बातचीत फिर शुरू होगी। पुतिन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत रूसी तेल खरीदने के कारण अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है और चीन अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध में उलझा है।
भारत, चीन और ब्राजील सब टैरिफ लगाते हैं हमने लगाया तो क्या गलत किया: राष्ट्रपति ट्रंप
4 Sep, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । चीन हमें टैरिफ से मारता है, भारत हमें टैरिफ से मारता है, ब्राजील भी यही करता है। लेकिन टैरिफ को मुझसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। भारत पहले सबसे ज्यादा टैरिफ वसूलता था, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि यहां जीरो टैरिफ होगा। ट्रंप ने स्कॉट जेनिंग्स रेडियो शो में बातचीत के दौरान कहा- अमेरिका ने टैरिफ लगाकर एक बड़ी नेगोशिएटिंग पावर हासिल की। उनका दावा है कि अगर अमेरिका दबाव नहीं बनाता, तो भारत कभी इस तरह का प्रस्ताव नहीं रखता।
हाल के दिनों में ट्रंप कई बार ‘जीरो टैरिफ’ की बात दोहरा चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार को एकतरफा नुकसानदायक करार दिया। उनका आरोप है कि भारत अमेरिका को बड़े पैमाने पर सामान बेचता है, लेकिन बदले में अमेरिका को भारत में उतनी पहुंच नहीं मिलती। तनाव तब और बढ़ा जब ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया और बाद में इसे दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया। दरअसल, यह कदम तब उठाया गया जब भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी, जबकि ट्रंप चाहते थे कि भारत यह कदम बंद करे। लेकिन भारत ने साफ कह दिया कि उसके फैसले जनता और बाजार की जरूरतों के हिसाब से होंगे। भारत ने लगातार कहा है कि व्यापार को लेकर बातचीत जारी है। मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बताया कि मतभेद सुलझाने की कोशिश की जा रही है और नवंबर तक द्विपक्षीय व्यापार समझौता यानी बीटीए हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साफ किया है कि भारत अपने घरेलू हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा था कि किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों की भलाई भारत की पहली प्राथमिकता है।
बेडरूम में निर्वस्त्र सो रही थी महिला, बाहर खिड़की साफ कर रहे थे मजदूर, फिर मचा हड़कंप
4 Sep, 2025 07:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेंगदू। चेंगदू शहर के एक अपार्टमेंट में महिला अपने बेडरूम में सो रही थी। खिड़की के पर्दे खुले थे और कमरे की लाइट जल रही थी। इसी दौरान दो खिड़की साफ करने वाले मजदूर वहां पहुंचे और महिला को बिना कपड़ों के देख लिया। महिला के पति ने कहा कि अचानक पत्नी की चीख सुनकर वे कमरे में पहुंचे। उन्होंने देखा कि बाहर दो मजदूर खड़े होकर उनकी पत्नी को घूर रहे थे। तुरंत उन्होंने पर्दे खींच दिए।
इस घटना के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे डिप्रेशन और ऐंग्जाइटी बताया है। पति के मुताबिक, तब से पत्नी बेहद उदास रहती है और सामान्य जीवन नहीं जी पा रही है। कपल ने मैनेजमेंट से माफी और मुआवजे की मांग की। लेकिन मैनेजमेंट ने सिर्फ एक टोकरी फल भेजकर मामला खत्म करने की कोशिश की। मानसिक नुकसान को लेकर उन्होंने कोई चिंता नहीं दिखाई।
जब यह मामला सोशल मीडिया पर फैल गया, तो मैनेजमेंट ने ऑफर दिया कि अगर कपल अगस्त में किराये का कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाता है तो हर महीने 600 युआन की छूट दी जाएगी। पति ने छूट को नकारते हुए कहा- “हम हर महीने 10 हजार युआन का किराया दे सकते हैं। क्या हमें 600 युआन की कमी है? यह छूट उनकी सोच बताती है कि वे असली समस्या को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहते। ये कपल लग्जरी ‘पोर्ट अपार्टमेंट’ में रहता है, जहां वे हर महीने लगभग 1.23 लाख रुपये किराया देते हैं। प्रॉपर्टी मैनेजमेंट ने पहले ही कहा था कि 21 से 30 अप्रैल के बीच खिड़कियां साफ की जाएंगी। कपल ने साफ कहा था कि सफाई से पहले अलग से नोटिस दिया जाए, लेकिन मैनेजमेंट भूल गया।
पुर्तगाल में बड़ा हादसा: केबल ट्रैम पटरी से उतरी, हादसे में 15 लोगों की मौत
4 Sep, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लिस्बन। पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन की ऐतिहासिक और बेहद लोकप्रिय ग्लोरिया फनिक्युलर रेलवे पटरी से उतर गई, जिससे अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हादसे के वक्त ट्रेन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक सवार थे। राहत और बचाव कार्य खबर लिखे जाने तक जारी रहा। कई यात्री मलबे में फंसे हुए बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद कुछ ही मिनटों में चारों तरफ धुआं भर गया और लोग दहशत में आकर खिड़कियों से बाहर कूदने लगे।
शुरुआती जांच में पता चला है कि हादसे का कारण एक ढीली या टूटी हुई ट्रैक्शन केबल थी, जिसके कारण उतरते समय डिब्बों ने कार से नियंत्रण खो दिया। ढलान पर वह तेजी से नीचे जाने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रैम नियंत्रण से बाहर हो गई और एक इमारत से जाकर टकरा गई। लोगों ने बताया कि यह ‘कार्डबोर्ड बॉक्स की तरह’ ढह गया।
लिस्बन के मेयर कार्लोस मोएदास ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा, ‘यह हमारे शहर के लिए बेहद कठिन दिन है। लिस्बन शोक में डूबा है। हमारी सारी टीमें- नगर निगम, आपातकालीन सेवाएं, सिविल प्रोटेक्शन और फायर डिपार्टमेंट पीड़ितों की मदद में जुटी हैं।’ मेयर ने साफ कहा कि यह त्रासदी पूरे शहर के लिए गहरा घाव छोड़ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पटरियों पर गिरी हुई ट्रेन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है और दर्जनों फायर ब्रिगेड, पुलिस और एंबुलेंस की गाड़ियां मौके पर पहुंची हुई हैं।
ग्लोरिया फनिक्युलर ट्रेन लिस्बन का एक प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। 1885 में शुरू हुई यह लाइन पुराने शहर और ऊंचाई वाले इलाके को जोड़ती है। पर्यटकों के बीच इसकी खास लोकप्रियता है और एक बार में यह 42 लोगों को ले जा सकती है। फिलहाल हादसे की वजह साफ नहीं हो पाई है। पुर्तगाल की ज्यूडिशियरी पुलिस की होमिसाइड ब्रिगेड ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, ट्रांसपोर्ट कंपनी कैरिस, जो इस लाइन का संचालन करती है, ने बयान जारी कर कहा है कि सभी संसाधनों को सक्रिय कर दिया गया है और प्राथमिकता पीड़ितों की मदद करना है। पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। वहीं, यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी पुर्तगाली भाषा में एक्स पर शोक संदेश साझा किया और कहा कि यूरोप इस कठिन समय में पुर्तगाल के साथ है।
तानाशाह किम जोंग उन के साथ बीजिंग पहुंची उनकी बेटी किम जू ए......दुनिया भर में इसकी चर्चा
4 Sep, 2025 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बेटी किम जू ए इनदिनों सुर्खियों में है। यह पहली बार था जब वे सार्वजनिक रूप से किसी विदेश यात्रा पर अपने पिता के साथ गई थीं। यात्रा के दौरान, उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे प्रमुख वैश्विक नेताओं से मुलाकात की। किम जोंग उन का अपनी बेटी को विदेश दौरे पर ले जाना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किम जू ए को दुनिया के सामने लाने का यह तरीका इसका संकेत देता है कि वह अपने पिता की संभावित उत्तराधिकारी हो सकती हैं। जिस तरह से उन्हें पुतिन और जिनपिंग से मिलवाया गया, यह एक तरह से उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचय था। यह उनकी राजनीतिक शिक्षा और कूटनीति की शुरुआत हो सकती है। अपने पिता के साथ इसतरह के महत्वपूर्ण मौकों पर शामिल होना उन्हें भविष्य की भूमिका के लिए तैयार करने जैसा है। किम जोंग उन शायद अपनी और अपने परिवार की एक नई, अधिक खुली और स्वीकार्य छवि पेश करना चाहते हैं। अपनी बेटी को ऐसे वैश्विक मंचों पर लाना उत्तर कोरिया की पारंपरिक गोपनीयता से हटकर एक कदम है।
कौन हैं किम जू ए?
किम जू ए के बारे में दुनिया को बहुत कम जानकारी है क्योंकि उत्तर कोरिया अपने नेताओं और उनके परिवारों के बारे में जानकारी गुप्त रखता है। उन्हें पहली बार 2022 में सार्वजनिक रूप से देखा गया था, जब वह अपने पिता के साथ एक बैलिस्टिक मिसाइल लांच कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। पूर्व अमेरिकी एनबीए स्टार डेनिस रॉडमैन ने 2013 में अपनी प्योंगयांग यात्रा के बाद दुनिया को किम जू ए के अस्तित्व के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि किम जोंग उन ने खुद अपनी बेटी से उन्हें मिलवाया था। उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया उन्हें प्यारी बच्ची या होनहार बच्ची जैसे शब्दों से संबोधित करता है, लेकिन उनका नाम शायद ही कभी लेता है। तस्वीरों में अक्सर देखा गया है कि बड़े-बड़े अधिकारी भी उनके सामने सिर झुकाते हैं। किम जोंग उन के अपने तीनों बच्चों में से, केवल किम जू ए को ही अब तक सार्वजनिक मंचों पर देखा गया है, जो उनकी उत्तराधिकारी बनने की अटकलों को और भी मजबूत करता है।
ट्रंप बोले- बहुत जल्द रूस यूक्रेन की जंग रुकवाने के लिए उठाएंगे जरुरी और बड़ा कदम
4 Sep, 2025 09:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन जंग पर सख्त रुख दिखाते हुए मंगलवार को साफ कहा कि वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बेहद निराश हैं। ट्रंप ने इशारों में यह भी जताया कि उनकी सरकार रूस में हो रही मौतों को रोकने के लिए जल्द कदम उठाएगी।
रेडियो शो को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा- ‘मैं पुतिन से बहुत निराश हूं और हम जल्द कुछ ऐसा करेंगे जिससे लोगों की जान बचे। ट्रंप ने अगस्त में अलास्का में पुतिन के साथ शिखर वार्ता की थी। इसके बाद वे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय देशों व नाटो नेताओं से व्हाइट हाउस में मिले। उन बैठकों के बाद ट्रंप ने उम्मीद जताई कि पहले जेलेंस्की और पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात होगी और फिर वे खुद भी शामिल होकर त्रिपक्षीय बैठक करेंगे। लेकिन जेलेंस्की का कहना है कि रूस लगातार इस मुलाकात को रोक रहा है, जबकि रूस का तर्क है कि एजेंडा अभी तैयार नहीं है।
ट्रंप ने जेलेंस्की से वादा किया है कि किसी भी शांति समझौते में अमेरिका यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देगा। उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर रूस ने आगे बढ़कर शांति प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया तो अमेरिका और कड़े प्रतिबंध लगाने से पीछे नहीं हटेगा। वर्तमान में रूस, यूक्रेन के लगभग पांचवें हिस्से पर कब्जा किए हुए है। ट्रंप का कहना है कि किसी भी समझौते में ‘भूमि अदला-बदली और सीमाओं में बदलाव अहम भूमिका निभाएंगे।’ हालांकि यूक्रेन ने यह साफ किया है कि वह अपनी जमीन को कानूनी तौर पर रूस का हिस्सा मानने को तैयार नहीं है।
इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें रूस और चीन की बढ़ती दोस्ती से चिंता है, तो उन्होंने कहा- ‘मुझे बिल्कुल चिंता नहीं है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। वे हम पर कभी हमला नहीं करेंगे। यकीन मानिए।’ इसी बीच, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को पुतिन को ‘पुराना दोस्त’ कहते हुए बीजिंग में उनका स्वागत किया। बुधवार सुबह पुतिन और किम जोंग चीन की विक्ट्री डे परेड में शामिल हुए, इसे वैश्विक ताकत दिखाने की कोशिश माना जा रहा है। इसके बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि किम जोंग, पुतिन और ट्रंप अमेरिका के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
रूस ने यूक्रेन पर हमले बढ़ाए
4 Sep, 2025 08:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। रूस ने देर रात यूक्रेन पर अब तक का बड़ा हमला किया। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने 500 से ज्यादा ड्रोन और करीब दो दर्जन मिसाइलें एक साथ दागीं। इस हमले का सबसे ज्यादा निशाना नागरिक ढांचा, खासतौर पर ऊर्जा संयंत्र बने हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब सर्दियों का मौसम नजदीक आ रहा है और तीन साल से जारी युद्ध ने यूक्रेन की बिजली और हीटिंग व्यवस्था को पहले ही बुरी तरह प्रभावित कर रखा है।
यूक्रेनी वायु सेना ने बताया कि हमले का केंद्र पश्चिमी और मध्य यूक्रेन रहा। इस दौरान कम से कम पांच लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि यह हमला रूस की दम दिखाने की कोशिश है। उन्होंने चेतावनी दी कि व्लादिमीर पुतिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह दिखाना चाहते हैं कि उन पर कोई अंकुश नहीं है।
रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि पुतिन अपनी निर्दयता और दंड से बचने की मानसिकता दिखा रहे हैं। रूस की यह आक्रामकता इसलिए जारी है क्योंकि उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था पर पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं है। अब समय आ गया है कि रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं। जेलेंस्की ने अपने मंगलवार शाम के वीडियो संदेश में बताया कि रूस की तरफ से ड्रोन हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और अब दिनदहाड़े भी हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी सेना ने मोर्चे के कुछ इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पुतिन की कूटनीतिक चाल
इसी बीच, पुतिन चीन में शीर्ष नेताओं से मिल रहे हैं। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। अमेरिका का आरोप है कि ये देश अलग-अलग तरीकों से रूस की मदद कर रहे हैं। उत्तर कोरिया ने रूस को सैनिक और गोला-बारूद भेजा है। चीन और भारत रूस से तेल खरीद रहे हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है।
यूरोपीय देशों से समर्थन जुटा रहे हैं जेलेंस्की
यूक्रेनी राष्ट्रपति लगातार यूरोपीय देशों का दौरा कर रहे हैं ताकि और समर्थन जुटाया जा सके। मंगलवार को वे डेनमार्क पहुंचे, जहां उत्तरी यूरोपीय और बाल्टिक देशों के नेताओं से नई सैन्य मदद और कूटनीतिक समर्थन पर चर्चा की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली भी कीव पहुंचे और यूक्रेनी सेना को मजबूत करने के उपायों पर बैठक की। बुधवार को जेलेंस्की पेरिस जाएंगे, जहां उनकी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात होगी। गुरुवार को पेरिस में एक बड़ी बैठक होगी, जिसमें यूरोपीय और अमेरिकी नेता यूक्रेन के युद्ध के बाद सुरक्षा की गारंटी पर विचार करेंगे।
जिनपिंग ने रखा जीजीआई का प्रस्ताव....अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को मिर्ची लगना तय
3 Sep, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक को संबोधित कर ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव (जीजीआई) का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुपक्षीय व्यवस्था होनी चाहिए और किसी एक देश को ही सर्वशक्तिमान नहीं मानना चाहिए है। जिनपिंग ने एससीओ नेताओं को संबोधित कर कहा यह बात कही, जिस पर रूस ने तत्काल सहमति जाहिर की है। इसके अलावा भारत भी इस पर सहमत है, क्योंकि लंबे समय से पीएम नरेंद्र मोदी भी कहते रहे हैं कि वैश्विक संबंध समानता के आधार पर तय होने चाहिए। जिनपिंग का यह फॉर्मूला सीधे तौर पर अमेरिका के लिए खुला चैलेंज है, जो इन दिनों तमाम देशों पर टैरिफ लगा रहा है।
अमेरिका ने सबसे बड़ा टैरिफ भारत पर लगाया है। इसके बाद जिनपिंग का बयान अहम है। शी ने कहा, मैं आप लोगों के समक्ष ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव का प्रस्ताव रखना चाहता हूं। मैं सभी देशों के साथ काम करने के लिए तत्पर हूं। यह संबंध समानता के आधार पर होनी चाहिए और मानव सभ्यता के साझा भविष्य के निर्माण के लिए सहयोग की भावना पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के लिए यह जरूरी है। जिनपिंग ने कहा कि यह विजन वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
जिनपिंग ने कहा, सबसे पहले हमें समानता के आधार पर बात करनी होगी। हम सभी को यह मानना होगा कि क्षेत्रफल, क्षमता, संपदा से परे सभी देशों को एक समान माना जाए। सभी को ग्लोबल गवर्नेंस में निर्णय लेने का मौका मिले तो वहीं लाभार्थी के तौर पर भी बराबर हों। हमें वैश्विक संबंधों में अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रोत्साहित करना होगा। इसके अलावा विकासशील देशों को भी शामिल करना होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों से बंधे हुए हैं, लेकिन इनका सही ढंग से और यूएन चार्टर के अनुसार पालन होना चाहिए।
जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को सभी पर एक समान तरीके से लागू होना चाहिए। इसमें कोई दोहरा मानदंड नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कुछ देश अपने ही ढंग से नियमों को चलाते हैं और उन्हें दूसरे देशों पर थोपने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों को बहुपक्षीय व्यवस्था की बात करनी चाहिए। हमें साथ मिलकर वैश्विक व्यवस्था की बात करनी होगी।
पुतिन की ओर से जिनपिंग के प्रस्ताव पर जवाब भी आ गया है। उन्होंने कहा कि हम जिनपिंग की इस बात से सहमत हैं कि एक समानता आधारित व्यवस्था होनी चाहिए। यह बात तब महत्वपूर्ण है, जब कुछ देश अपनी ही चीजें थोपने में जुटे हैं। चीन के इस प्रस्ताव का रूस समर्थन करता है। हम खुलकर साथ हैं। इस तरह भारत, चीन और रूस ने खुलकर अमेरिका का नाम तक नहीं लिया, लेकिन पूरी बात उसे लेकर ही कही गई।
बीजिंग में चीन का शक्ति प्रदर्शन: शी जिनपिंग ने किया सैन्य परेड का निरीक्षण, पुतिन और किम भी रहे मौजूद
3 Sep, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । चीन ने बुधवार को द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर राजधानी बीजिंग के तियानआनमेन स्क्वायर में विशाल सैन्य परेड का आयोजन किया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस परेड की अगुवाई की, जिसमें चीन की पूरी सैन्य ताकत दुनिया के सामने प्रदर्शित की गई।
इस दौरान हजारों सैनिकों ने बखूबी मार्च पास्ट किया, जबकि चीन की नवीनतम पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स, टैंक, बैलिस्टिक मिसाइलें, हाइपरसोनिक मिसाइलें, पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन, शुरुआती चेतावनी विमान और जैमिंग सिस्टम ने परेड में शक्ति का प्रदर्शन किया।
इस भव्य परेड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन समेत 26 देशों के नेता शामिल हुए। इन देशों की अधिकतर पहचान गैर-पश्चिमी देशों के रूप में है। शी जिनपिंग ने परेड शुरू होने से पहले विदेशी मेहमानों और चीन के सैन्य दिग्गजों का स्वागत किया। इसके बाद वे गेट ऑफ हेवेनली पीस से परेड का अवलोकन करते रहे।
राष्ट्रपति शी ने 10,000 सैनिकों और नौसेना व वायुसेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि चीन हमेशा “शांतिपूर्ण विकास के मार्ग” पर चलेगा। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध को “जापानी आक्रमण के खिलाफ जीत” बताया और विदेशी देशों का सहयोग देने के लिए आभार जताया।
हालांकि, उन्होंने अमेरिका का नाम नहीं लिया, जबकि अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई थी। शी ने कहा की “मानवता फिर से शांति या युद्ध, संवाद या टकराव, और साझा जीत या शून्य-योग खेल के विकल्पों के सामने खड़ी है। चीनी जनता हमेशा इतिहास के सही पक्ष और मानव प्रगति के साथ खड़ी रहेगी।” शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि चीन को पिछली शताब्दी में विदेशी ताकतों द्वारा झेली गई गुलामी, आक्रमण और अपमान की पीड़ा अब दोबारा सहन नहीं करनी पड़ेगी। यही संदेश चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विचारधारा का अहम हिस्सा है।
शी जिनपिंग ग्रे माओ सूट पहने हुए खुले वाहन में खड़े होकर सैनिकों का अभिवादन करते दिखे। इसके बाद चांगआन एवेन्यू पर परेड शुरू हुई, जिसे करीब 50,000 दर्शकों ने देखा। आकाश में एयरफोर्स के विमानों ने फ्लाईपास्ट किया और बैनर लहराए, जिन पर लिखा था “न्याय की जीत होगी”, “शांति की जीत होगी” और “जनता जीतेगी”।
इस सैन्य प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या शी जिनपिंग अमेरिका की उस भूमिका का जिक्र करेंगे, जिसने चीन को द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी कब्जे से मुक्त कराने में मदद की थी। हालांकि, ट्रंप ने शी को शुभकामनाएं भी दीं। कुल मिलाकर, यह परेड न सिर्फ चीन की सैन्य ताकत का प्रदर्शन थी बल्कि शी जिनपिंग की यह कोशिश भी थी कि दुनिया को दिखाया जाए कि चीन अब किसी दबाव या अलगाव से डरने वाला देश नहीं है।
गाज़ा में इज़राइली हमले में 105 फिलिस्तीनी मारे गए, बच्चों और पत्रकारों की भी मौत
3 Sep, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाज़ा सिटी। इज़राइल ने गाज़ा सिटी पर मंगलवार को भीषण हमला तेज कर दिया, जिसमें कम से कम 105 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में 32 लोग वे थे जो मदद पाने के लिए लाइन में खड़े थे, जबकि कई बच्चे और पत्रकार भी इस हमले की चपेट में आ गए। सबसे ज्यादा तबाही अल-सबरा इलाक़े में हुई, जहां कई दिनों से लगातार बमबारी जारी है। गाज़ा प्रशासन का कहना है कि सिर्फ भोजन और पानी लेने निकले लोग भी अब सीधे निशाने पर हैं।
खान यूनिस के पास अल-मवासी इलाके में, जिसे पहले “सुरक्षित क्षेत्र” घोषित किया गया था, पानी भरने के लिए खड़े 21 लोगों पर ड्रोन से हमला किया गया। इनमें 7 बच्चे शामिल थे। घटनास्थल से मिले वीडियो में खून से सने पानी के डिब्बे और मासूमों के शव दिखाई दिए। फिलिस्तीनी सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसाल ने कहा की “वे लोग सिर्फ पानी लेने लाइन में खड़े थे, तभी उन पर हमला कर दिया गया। जिंदगी की तलाश अब मौत में बदल गई है।”
गाज़ा सिटी में अल-अफ़ परिवार के घर पर भी इज़राइली हमला हुआ, जिसमें 10 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। हमले में दो पत्रकार अल-मनारा के रस्मी सालेम और ईमान अल-ज़ामली की मौत हो गई। अक्टूबर 2023 से अब तक 270 से ज्यादा पत्रकार मारे जा चुके हैं, जिससे यह युद्ध दुनिया का सबसे खतरनाक संघर्ष पत्रकारों के लिए बन गया है।
इज़राइल की नाकाबंदी के कारण लोग सिर्फ हमलों से ही नहीं, बल्कि भूख से भी मर रहे हैं। पिछले 24 घंटे में 13 लोग भूख से मरे, जबकि युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 361 लोग भुखमरी के शिकार हो चुके हैं। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि युद्ध “निर्णायक चरण” में है और सेना गाज़ा सिटी पर कब्ज़े की तैयारी कर रही है। इस बीच हजारों रिजर्व सैनिकों को बुलाया गया, हालांकि इज़राइली मीडिया के अनुसार 365 सैनिकों ने ड्यूटी पर आने से इनकार कर दिया है।
बेल्जियम ने मंगलवार को फिलिस्तीन को मान्यता दी और अन्य देशों से भी ऐसा करने की अपील की। फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम “नरसंहार और जबरन विस्थापन रोकने के लिए ज़रूरी है।” इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने इज़राइल के कई ठिकानों और एक कार्गो जहाज़ को ड्रोन और मिसाइल से निशाना बनाया है। गाज़ा प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग की है कि इज़राइल को रोका जाए और इसे “युद्ध अपराध व नरसंहार” घोषित किया जाए।
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