ख़बर
इमरान को मिल सकती है बड़ी राहत, जेल से अस्पताल शिफ्ट करने की तैयारी
19 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस सप्ताह जेल से अस्पताल शिफ्ट किया जा सकता है। उनकी सेहत, विशेषकर आंखों की रोशनी में गिरावट की रिपोर्ट के बाद सरकार ने यह कदम उठाने के संकेत दिए हैं। जानकारी के मुताबिक 21 से 26 फरवरी के बीच उनकी आंख में इंजेक्शन लगाया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिए जेल प्रशासन अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान को आंखों के विशेष इलाज के लिए एआई-शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल ले जाया जा सकता है। यह अस्पताल आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए जाना जाता है। फिलहाल इस बात पर विचार चल रहा है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती रखा जाए या जरूरी डोज देने के बाद वापस जेल लाया जाए। अंतिम निर्णय डॉक्टरों की मेडिकल टीम लेगी।
इमरान खान 2023 से अदिअला जेल में बंद हैं। हाल ही में आई स्वास्थ्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनकी एक आंख की रोशनी 85 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी है। इस रिपोर्ट के बाद उनके समर्थकों की चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तान की शहबाज सरकार के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने भी कहा है कि इमरान खान की सेहत को देखते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने और उन्हें अस्पताल शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति का संज्ञान लिया है। अदालत ने उनकी आंखों की जांच के लिए मेडिकल टीम गठित करने और परिवार से मुलाकात की अनुमति देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए वकील सलमान ने हाल ही में जेल में उनसे मुलाकात कर स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट अदालत को सौंपी। कोर्ट के निर्देश के बाद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से बातचीत की अनुमति भी दी जा सकती है।
गौरतलब है कि राजनीति में आने से पहले इमरान खान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के प्रमुख ऑलराउंडर और कप्तान रह चुके हैं। दुनियाभर के कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी उनके बेहतर इलाज की मांग उठाई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
शपथ के बाद एक्शन में तारिक रहमान...........हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों पर कार्रवाई शुरु
19 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। तारिक रहमान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। उनके साथ 13 और कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली है। कैबिनेट में दो हिंदू नेताओं को शामिल किया है। भारत की ओर से शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिश्री पहुंचे। वहीं बांग्लादेश के पीएम की शपथ लेते ही तारिक रहमान एक्शन में दिख रहे हैं। रहमान ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे उन पर उन्होंने काम करना भी शुरू कर दिया है। तारिक रहमान का कोई वादा सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, तब वहां था बांग्लादेश की कानून व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना और हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानूनी सुरक्षा तंत्र लागू करना।
शपथ लेने के बाद तारिक रहमान ने हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर बड़ा एक्शन लिया है। जो भी इन हमले के जिम्मेदार रहे हैं उन पर सबसे तगड़ा एक्शन तेज किया है। दरअसल रहमान ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने और चुनाव के दौरान मारपीट करने वाले नेताओं के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। बांग्लादेश के सिराजगंज में अल्पसंख्यकों की दुकानों में तोड़फोड़ और जबरदस्ती वसूली के आरोप में बीएनपी ने तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस दिया है। वोटरों को डराने, धमकाने सहित कई आरोपों में दो और नेताओं को सस्पेंड किया गया है। चुनाव जीतने के बाद से तारिक रहमान की पार्टी ने पार्टी अनुशासन को लेकर कड़ा कदम उठाया है। तारिक चुनाव प्रचार के बाद से ही बांग्लादेश में नॉर्मल हालात बहाल करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है। उनकी पार्टी में अनुशासन को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है। हमलों के आरोप में बीएनपी के तीन नेताओं को कारण बतौर नोटिस दिया है। इसमें फिरोज और आरजू अहमद शामिल हैं।
शपथ से कुछ घंटे पहले भी रहमान ने बड़ा बयान देकर कहा था कि हमें सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश बनाने के लिए सभी का सहयोग चाहिए। किसी भी बहाने से किसी के साथ अन्याय नहीं हो सकता। कानून व्यवस्था हर हाल में बनाए रखनी होगी। तारिक रहमान ने दंगाइयों को चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर हिंसा प्रतिशोध या उकसावे की कारवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्रीलंका में ऐतिहासिक बदलाव: सांसदों की पेंशन खत्म, दिसानायके सरकार ने पूरा किया चुनावी वादा
19 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो। श्रीलंका के सांसदों ने मंगलवार को अपनी पेंशन रद्द करने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान किया है। यह साहसिक कदम देश के गंभीर आर्थिक संकट और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच श्रीलंका सरकार द्वारा किए गए एक प्रमुख चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया है। 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में इस विधेयक को लेकर जबरदस्त सहमति दिखाई दी।
सांसदों ने 225 सदस्यीय सदन में 154 मतों से विधेयक पारित कर दिया, जबकि केवल दो मत इसके विरोध में पड़े। शेष विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। इसके पहले श्रीलंका में सांसद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन पाने के हकदार होते थे। नए कानून के तहत, जो लोग पहले से ही पेंशन प्राप्त कर रहे हैं या इसके लिए पात्र हैं, उन्हें भी पेंशन का भुगतान नहीं होगा।
वर्ष 2024 में चुने गए राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पेंशन संबंधी प्रावधान को समाप्त करने का वादा किया था। इसी तरह दिसानायके सरकार ने जनता की मांग पर पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाली सुविधाओं को सितंबर में समाप्त कर दिया।
इनमें आवास, भत्ते, पेंशन और परिवहन के लिए सरकारी अनुदान शामिल थे। विधि मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने संसद में पेंशन संबंधी विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनावी वादा पूरा किया गया है और सांसदों को ऐसे समय में पेंशन प्राप्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जब देश अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है। श्रीलंका ने 83 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज होने पर अप्रैल 2022 में खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। इसमें से आधे से अधिक कर्ज विदेशी लेनदारों का है।
चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट्स का डांस देख विशेषज्ञ बोले- रोबोटिक्स में चीन ने अमेरिका को दी कड़ी टक्कर
19 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। चीन ने एक भव्य तकनीकी कार्यक्रम में अपनी रोबोटिक्स क्षमता का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया। इंसानों जैसे दिखने वाले करीब 25 ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मंच पर बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स और सिंक्रोनाइज्ड डांस कर दर्शकों को चौंका दिया। रोबोट्स तलवार भांजते, डंडे घुमाते और बैकफ्लिप जैसी जटिल हरकतें करते नजर आए, और खास बात यह रही कि प्रदर्शन के दौरान एक भी रोबोट नहीं गिरा।
यह प्रदर्शन चीन के चर्चित टीवी आयोजन सीसीटीवी स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में हुआ, जिसे दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रमों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मंच लंबे समय से चीन की तकनीकी और औद्योगिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का माध्यम रहा है—चाहे वह अंतरिक्ष कार्यक्रम हो, ड्रोन तकनीक या रोबोटिक्स।
एशिया स्थित टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी फर्म के प्रमुख जॉर्ज स्टीलर के अनुसार, इस तरह के राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन का सीधा संबंध सरकार की औद्योगिक नीति से होता है। जिन कंपनियों को यहां अपने उत्पाद दिखाने का अवसर मिलता है, उन्हें बाद में सरकारी ऑर्डर, निवेश और बाजार में बेहतर पहुंच जैसे लाभ मिल सकते हैं।
रोबोट्स के विकास में चीन की कंपनी युनिट्री रोबोटिक्स का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते एक वर्ष में रोबोट्स की चाल-ढाल, संतुलन और रियल-टाइम मूवमेंट में जबरदस्त सुधार हुआ है। पिछले साल जहां ये रोबोट साधारण हरकतें करते दिखे थे, वहीं इस बार उन्होंने जटिल मार्शल आर्ट्स मूव्स को भी सटीकता से अंजाम दिया।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रगति केवल हार्डवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रोबोट्स के ‘दिमाग’ को इस तरह प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे भविष्य में फैक्ट्रियों, लॉजिस्टिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बारीक और वास्तविक काम कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि रोबोटिक्स और एआई के क्षेत्र में चीन अब अमेरिका को कड़ी चुनौती दे रहा है। हालांकि, तकनीकी प्रतिस्पर्धा का यह दौर आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है, जहां दोनों देश उन्नत रोबोटिक्स, स्वचालन और स्मार्ट मशीनों के विकास में निवेश बढ़ा रहे हैं।
पात्र छात्र समय रहते भरें फॉर्म, अंतिम तिथि नजदीक
19 Feb, 2026 07:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विमुक्त जनजाति के विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। पात्र विद्यार्थियों को नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है। विद्यार्थी 28 फरवरी तक www.scholarships.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं। विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सरकारी या निजी शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। योजना के तहत उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि कोई भी छात्र पैसों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए अनुसूचित जाति के विद्यार्थी पीएमएस-एससी श्रेणी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग या विमुक्त जनजाति के विद्यार्थी पीएम-यशस्वी घटक-2 के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदक हरियाणा का निवासी हो और परिवार की वार्षिक आय 2 लाख 50 हजार रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। ब्यूरो
इंडिया AI समिट में 'चीनी रोबोट' पर बवाल: गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर सरकार का सख्त एक्शन, स्टॉल खाली करने के आदेश
18 Feb, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' में आज उस समय हड़कंप मच गया जब सरकार ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल तुरंत खाली करने और समिट से बाहर निकलने का आदेश दे दिया। यह कड़ी कार्रवाई तब की गई जब यूनिवर्सिटी द्वारा 'स्वदेशी आविष्कार' के रूप में पेश किया गया एक रोबोटिक कुत्ता असल में एक चीनी कंपनी का प्रोडक्ट निकला।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में वे 'ओरियन' (Orion) नामक एक रोबोटिक कुत्ते का प्रदर्शन कर रही थीं और दावा कर रही थीं कि इसे यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने विकसित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI क्षेत्र में 350 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है और यह रोबोटिक कुत्ता सर्विलांस और मॉनिटरिंग के लिए बनाया गया है।
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, टेक एक्सपर्ट्स और नेटिजन्स ने इसे तुरंत पहचान लिया। जांच में पाया गया कि यह कोई स्वदेशी आविष्कार नहीं, बल्कि चीनी कंपनी 'Unitree Robotics' का कमर्शियल मॉडल 'Unitree Go2' है, जो बाजार में करीब 2.5 से 3 लाख रुपये में आसानी से उपलब्ध है।
सरकार का सख्त रुख और एक्शन
शिखर सम्मेलन की गरिमा और भारत की 'इनोवेशन इमेज' को पहुंच रहे नुकसान को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने त्वरित कार्रवाई की: सरकारी सूत्रों के अनुसार, यूनिवर्सिटी को प्रदर्शनी क्षेत्र से तत्काल हटने के निर्देश दिए गए। विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली सप्लाई भी काट दी गई ताकि गलत जानकारी का प्रसार रोका जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर के मंच पर विदेशी उत्पादों को स्वदेशी बताकर पेश करना गंभीर धोखाधड़ी है और इसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
विवाद से जुड़ी प्रमुख धाराएं और कानूनी पहलू
यद्यपि यह मामला अभी प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के कृत्य पर निम्नलिखित कानूनी धाराओं के तहत विचार किया जा सकता है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी): यदि कोई संस्थान गलत जानकारी देकर किसी को गुमराह करता है या लाभ प्राप्त करने की कोशिश करता है, तो यह धोखाधड़ी (पुराने IPC की धारा 420) के अंतर्गत आता है।
कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा कानून (IPR Laws): किसी दूसरे देश या कंपनी के पेटेंटेड उत्पाद को अपना बताकर पेश करना बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन है।
IT एक्ट की धाराएं: डिजिटल माध्यमों और सार्वजनिक मंचों पर गलत सूचना (Misinformation) फैलाने के लिए आईटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई संभव है।
यूनिवर्सिटी की सफाई
चौतरफा घिरने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर इसे 'गलतफहमी' बताया। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोट उन्होंने बनाया है, बल्कि इसे छात्रों को सिखाने के लिए एक 'लर्निंग टूल' के रूप में लाया गया था। प्रोफेसर ने भी अपनी बात को शब्दों का चयन करने में हुई गलती करार दिया है।
विपक्ष का हमला
इस घटना ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने इसे सरकार का 'पीआर तमाशा' बताते हुए कहा कि समिट में भारतीय प्रतिभा की जगह चीनी उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो देश के लिए शर्मिंदगी की बात है।
जेफ्री पर मरती थी निकोल, ई-मेल में लिखा– क्या तुम मेरे साथ बच्चा करोगे?
18 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। एप्सटीन फाइल्स में दुनिया के कोने-कोने में मौजूद मशहूर लोगों के ऐसे राज छिपे हैं, जो उनकी छवि को खराब कर सकते हैं। क्या राजनेता, क्या अभिनेता और क्या कारोबारी, हर किसी का नाम जेफ्री एप्सटीन के ई-मेल्स में है। हाल ही में जर्मनी में जन्मी निवेशक और काउंटेस निकोल जंकरमैन को जेफ्री एप्सटीन से जुड़े नए खुलासों के बाद अपने सार्वजनिक पदों से इस्तीफा देना पड़ा है। अमेरिकी न्याय विभाग के जारी दस्तावेजों में सामने आया कि जंकरमैन सालों तक एप्सटीन के साथ ईमेल संपर्क रहा था। जब उनका नाम फाइल्स में बाहर आया, तो बढ़ते विवाद और सार्वजनिक दबाव के बीच उन्होंने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल मार्सडेन कैंसर चैरिटी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक निकोल जंकरमैन एक काउंटेस हैं और उनका शाही परिवार से करीबी नाता है। ऐसे में उनका नाम इस तरह की फाइल में आना और सीधा जेफ्री एप्सटीन से संवाद करना न सिर्फ उनकी बल्कि रॉयल फैमिली की भी प्रतिष्ठा को कहीं न कहीं नुकसान पहुंचाने वाला है। यही वजह है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। निकोल जंकरमैन एक जानी-मानी व्यवसायी हैं। वह लंदन में रहकर टेक्नोलॉजी, बायोटेक और फाइनेंस क्षेत्र में सक्रिय रही हैं।
2023 के अंत में उन्हें रॉयल मार्सडेन कैंसर चैरिटी का ट्रस्टी बनाया गया था। यह चैरिटी ब्रिटेन के प्रमुख कैंसर अस्पताल रॉयल मार्सडेन से जुड़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक निकोल का शाही परिवार से भी संबंध रहा है। दरअसल वे एक काउंटेस हैं, यानि उनका परिवार, शाही क्रम में दूसरे नंबर पर आता है। हाल ही में जारी एप्सटीन फाइल्स में जंकरमैन का नाम सैकड़ों बार सामने आया। रिपोर्ट कहती हैं कि उनके और एप्सटीन के बीच करीब दो दशकों तक ईमेल संवाद हुआ, जिनमें कुछ संदेश 2008 में एप्सटीन की सजा के बाद के भी बताए जा रहे हैं। एक ईमेल में उन्होंने सो कॉल्ड पर्सनल और जोशीले शब्दों का इस्तेमाल किया था। यहां तक कि एक ई-मेल में लिखा था– ‘क्या तुम मेरे साथ बच्चा करोगे?’ इस ई-मेल के बाद इन दोनों के रिश्तों को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि इन दस्तावेजों में नाम आने का मतलब किसी अपराध में शामिल होना नहीं माना गया है, लेकिन सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए ऐसे संबंध गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
निकोल के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि वे उस वक्त एप्सटीन की ओर से भ्रमित और गुमराह की गई थीं और उन्हें इस संपर्क पर गहरा पछतावा है। उन्होंने एप्सटीन के कृत्यों को घृणित बताया और उसके पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताई। बता दें अमेरिकी नागरिक जेफ्री एप्सटीन नाबालिग लड़कियों के शोषण के मामलों में दोषी ठहराया गया था। वो साल 2019 में जेल में मृत पाया गया था, लेकिन उसकी मौत के वर्षों बाद भी उससे जुड़े खुलासे दुनिया भर के प्रभावशाली लोगों और संस्थानों को झकझोर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन एपस्टीन फाइल्स दस्तावेजों को पारदर्शी तरीके से सामने नहीं ला रहा: हिलेरी
18 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बर्लिन में आयोजित वर्ल्ड फोरम के दौरान एकए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। हिलेरी ने मांग की है कि जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया को जान-बूझकर धीमा किया जा रहा है। हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि फाइलें जारी कीजिए। उन्होंने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन इन दस्तावेजों को पारदर्शी तरीके से सामने नहीं ला रहा है। यह मामला तब और गंभीर हो गया है जब बिल और हिलेरी क्लिंटन दोनों को अमेरिकी कांग्रेस की समिति के सामने पेश होना है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हिलेरी के आरोपों पर व्हाइट हाउस ने जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने फाइलें जारी करके पीड़ितों के लिए डेमोक्रेट्स की तुलना में कहीं अधिक काम किया है। बिल क्लिंटन और एपस्टीन का संबंध एपस्टीन, जो 2019 में जेल में मृत पाया गया था, पर यौन अपराधों के गंभीर आरोप थे। इन फाइलों में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का नाम शामिल होना विवाद का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि बिल क्लिंटन का दावा है कि उन्होंने करीब दो दशक पहले ही एपस्टीन से अपने सारे संबंध खत्म कर लिए थे, लेकिन समिति के सामने उनकी पेशी इस दावे की अग्निपरीक्षा होगी।
बता दें फरवरी के आखिरी हफ्ते में होने वाली यह पेशी अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करेगी। क्या इन फाइलों में कुछ ऐसा है जो क्लिंटन परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, या यह केवल ट्रंप प्रशासन द्वारा राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है?
हसीना का प्रत्यर्पण............दोनों देशों के रिश्तों में खटास की वजह नहीं बनेगा
18 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के करीब डेढ़ साल बाद देश को आज नया प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रुप में मिल गया। इसके साथ ही बांग्लादेश में एक नए युग की शुरुआत हो गई। जहां मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बांग्लादेश ने खुलकर भारत विरोधी स्टैंड अपनाया, वहीं बीएनपी ने सत्ता में वापसी से पहले अच्छे संकेत दिए हैं। बीएनपी ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है। वहीं पार्टी के सेक्रेटरी जनरल ने हाल ही में एक बयान में साफ किया है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला दोनों देशों के रिश्तों में खटास की वजह नहीं बनेगा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सेक्रेटरी जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने शपथ ग्रहण से ठीक पहले यह बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश कानूनी तरीकों से हसीना के प्रत्यर्पण की कोशिश करता रहेगा, लेकिन मुद्दे की वजह से भारत के साथ सहयोग को पटरी से नहीं उतरने देगा। गौरतलब है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में देश में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद से भारत में ही रह रही हैं। बांग्लादेश में उन्हें भगौड़ा और हत्यारा घोषित किया है। आलमगीर ने बताया, “हमारा मानना है कि पूर्व पीएम हसीना ने सच में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किया हैं। उन्हें सजा देने की मांग है। हमारा मानना है कि भारत को उन्हें हमें सौंप देना चाहिए। लेकिन हसीना को बांग्लादेश को ना सौंपना भारत के साथ हमारे रिश्तों में रुकावट नहीं डालेगा। हम और भी बेहतर रिश्ते बनाना चाहते हैं।” इस दौरान फखरुल ने माना कि दोनों देशों में मतभेद ज़रूर हैं लेकिन उन्हें दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अमेरिका और चीन के रिश्तों में कई मुश्किलें हैं, फिर भी वे एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। हमें भारत-बांग्लादेश रिश्तों में सिर्फ एक मुद्दे पर नहीं अटकना चाहिए।” वहीं बांग्लादेशी नेताओं की तरफ से हो रही भड़काऊ बयानबाजियों को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ युद्ध नहीं लड़ सकते। हमें बात करने की जरूरत है। जो लोग भारत से लड़ने की बात करते हैं, वे पागलों की तरह बोल रहे हैं।” इसके अलावा उन्होंने गंगा जल संधि जैसे मुद्दों को भी अहम माना। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कूटनीतिक जुड़ाव की जरूरत होगी।
अभी जिंदा है जेफ्री एप्सटीन
18 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन की मौत को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में सामने आए नए दस्तावेज़ों, वीडियो फुटेज और अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषक द्वारा लिए जा रहे इंटरव्यूज़ में हुए खुलासों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एप्सटीन की मौत से जुड़ी कहानी पूरी तरह सही है। हालांकि ये सभी दावे और आरोप अभी सार्वजनिक बहस और जांच के दायरे में हैं, न कि किसी अदालत द्वारा स्थापित तथ्य।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक इंटरव्यू में फॉरेंसिक विश्लेषक ने दावा किया है कि अस्पताल से बाहर ले जाए गए जिस शव की तस्वीरें मीडिया में आई थीं, उसके कान और नाक एप्सटीन से मेल नहीं खाते। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया फाइलों में एफबीआई ने स्वीकार किया है कि प्रेस को “गुमराह” करने के लिए एक नकली शव इस्तेमाल किया गया। विश्लेषक के मुताबिक एप्सटीन की ऑटोप्सी रिपोर्ट में कई अहम विवरण गायब हैं। रिपोर्ट में उन्हें “सामान्य खतना किया हुआ पुरुष” बताया गया, जबकि पीड़िताओं ने उनके शरीर को अलग और विकृत बताया था। एक और बड़ा सवाल यह है कि एप्सटीन की मौत की घोषणा से जुड़ी एफबीआई प्रेस रिलीज़ कथित तौर पर मौत से एक दिन पहले की तारीख की बताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू में यह भी दावा किया गया है कि जिस जेल में एप्सटीन बंद था, वहां के कैमरे उसी समय काम करना बंद कर गए जब वे वापस लाए गए और उनकी मौत के अगले दिन फिर से ठीक हो गए। उन्होंने ऐसे फुटेज भी खोजे हैं, जिनके बारे में काननी विभाग ने पहले दावा किया था कि वे रिकॉर्ड ही नहीं हो रहे थे। नई फाइलों में ऐसे ईमेल्स का जिक्र है जिनमें “पिज़्ज़ा”, “चीज़”, “बीफ जर्की”, “श्रिम्प” और “व्हाइट शार्क” जैसे शब्द अजीब संदर्भों में इस्तेमाल हुए हैं। फॉरेंसिक विश्लेषक का दावा है कि ये शब्द नाबालिग लड़कियों के लिए कोड थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
एक अन्य इंटरव्यू में एप्सटीन की पीड़िता जूलियट ब्रायंट ने आरोप लगाया कि 2002 से 2004 के बीच एप्सटीन के प्रभाव में रहते हुए उन्हें डराया-धमकाया गया था। उन्होंने दावा किया कि एप्सटीन खुद को खुफिया एजेंसियों से जुड़ा बताता था और पूरी तरह बेखौफ था। जूलियट ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ बिना सहमति के मेडिकल प्रक्रियाएं की गईं। विश्लेषक के मुताबिक एप्सटीन के पास कई प्रभावशाली लोगों के “बैकअप” थे, जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेल के लिए किया जा सकता था। एक मशहूर फिल्ममेकर के कथन का भी जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने एप्सटीन को “काउंट ड्रैकुला की तरह लोगों को इकट्ठा करने वाला” बताया था। इन सभी इंटरव्यूज़ और फाइलों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि एप्सटीन की मौत के मामले में अभी भी कई सवाल मौजूद हैं। हर नई जानकारी सच्चाई साफ करने के बजाय और संदेह पैदा कर रही है। हालांकि, जांच एजेंसियों की ओर से इन दावों पर कोई नया निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
तारिक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति ने दिलाई पद व गोपनीयता की शपथ
18 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। तारिक रहमान ने मंगलवार को बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने संसद भवन में आयोजित एक सादे समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही देश में पिछले 18 महीनों से कार्यरत अंतरिम सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया।
इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री के साथ ही 25 कैबिनेट मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों को भी पद की शपथ दिलाई गई। नई मंत्रिपरिषद में 25 कैबिनेट मंत्रियों में से 17 नए चेहरे हैं, जबकि 24 राज्य मंत्रियों में अधिकांश पहली बार मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हैं। मंत्रिमंडल में एक हिंदू मंत्री को भी शामिल किया गया है। स्वयं तारिक रहमान भी पहली बार किसी मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं। इससे पहले दिन में पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों ने उन्हें संसदीय दल का नेता चुना था। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं। लगभग 17 वर्षों तक लंदन में रहने के बाद वे दो महीने पहले ही बांग्लादेश लौटे थे। उनका कार्यकाल पांच वर्षों का होगा।
गौरतलब है कि पिछले गुरुवार को हुए आम चुनाव में बीएनपी ने 299 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। सरकार बनाने के लिए आवश्यक 150 सीटों के आंकड़े को पार्टी ने आसानी से पार कर लिया। इसके अलावा तीन सीटों पर उसकी सहयोगी दलों ने जीत दर्ज की, जिससे गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई।
नई सरकार के गठन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार आर्थिक सुधार, राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मोर्चे पर किस तरह की प्राथमिकताएं तय करती है।
रोहित शेट्टी फायरिंग केस: मुख्य शूटर सहित 7 और आरोपी गिरफ्तार, 25 फरवरी तक बढ़ी पुलिस कस्टडी
17 Feb, 2026 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने मुख्य शूटर सहित सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ताजा अपडेट के मुताबिक, मुंबई की एक विशेष अदालत ने हाल ही में पकड़े गए इन सभी आरोपियों को 25 फरवरी 2026 तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।
हरियाणा और यूपी से हुई गिरफ्तारियां
मुंबई क्राइम ब्रांच और हरियाणा एसटीएफ (STF) ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर मुख्य शूटर दीपक चंद्रा (उर्फ शर्मा) को झज्जर, हरियाणा से दबोचा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के आगरा और नोएडा से भी अन्य मददगारों की गिरफ्तारी हुई है। इस केस में अब तक कुल 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
पुलिस की अब तक की जांच में कई महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ती नजर आ रही हैं:
बिश्नोई गैंग का कनेक्शन: जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड शुभम लोणकर है, जो कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ा है। शुभम ने ही सोशल मीडिया पर इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
मकोका (MCOCA) के तहत कार्रवाई: मामले की गंभीरता और संगठित अपराध के सबूतों को देखते हुए पुलिस ने सभी आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगा दिया है।
रेकी और प्लानिंग: आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि फायरिंग से पहले उन्होंने रोहित शेट्टी के घर की कई बार रेकी की थी। मुख्य शूटर दीपक ने बताया कि उसने वारदात को अंजाम देने से पहले शराब का सेवन किया था क्योंकि वह घबरा रहा था।
हथियारों की तलाश: पुलिस अभी भी उस हथियार (सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल) की तलाश कर रही है जिसका इस्तेमाल 1 फरवरी की रात को किया गया था।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रोहित शेट्टी के घर पर हुई 5 राउंड फायरिंग के बाद फिल्म इंडस्ट्री में दहशत का माहौल है। इसके मद्देनजर निर्देशक की सुरक्षा को 'Y+' श्रेणी तक बढ़ा दिया गया है और उनके घर के बाहर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। पुलिस अब फरार मास्टरमाइंड शुभम लोणकर की तलाश में छापेमारी कर रही है।
सहमति से संबंध 'रेप' नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारी पर दर्ज केस किया रद्द
17 Feb, 2026 05:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यक्तिगत संबंधों और कानून के दुरुपयोग को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ दर्ज धारा 376 (दुष्कर्म) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत चल रहे मामले को पूरी तरह रद्द कर दिया है। अदालत का यह फैसला स्पष्ट करता है कि सहमति से बने लंबे संबंधों को बाद में 'शादी का झांसा' देकर किया गया रेप नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब मामला ब्लैकमेलिंग से प्रेरित नजर आए।
पूरा मामला क्या है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के एक सरकारी विभाग में तैनात दो अधिकारियों से जुड़ा है। पीड़िता (शिकायतकर्ता) ने आरोप लगाया था कि आरोपी अधिकारी ने उसे शादी का झांसा दिया और साल 2017 से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला का आरोप था कि अधिकारी ने बाद में शादी करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्ष बालिग हैं और लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे। उनके बीच जो भी संबंध बने, वे पूरी तरह आपसी सहमति से थे। बचाव पक्ष ने यह भी सबूत पेश किए कि एफआईआर दर्ज कराने से पहले महिला ने अधिकारी से पैसों की मांग की थी और उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी दी थी।
हाईकोर्ट का कानूनी दृष्टिकोण और धाराएं
जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं और कानूनी सिद्धांतों की गहरी व्याख्या की:
IPC की धारा 376 (दुष्कर्म): कोर्ट ने कहा कि धारा 376 के तहत अपराध तभी बनता है जब संबंध महिला की इच्छा के विरुद्ध या धोखे से बनाए गए हों। इस मामले में, चूंकि महिला शिक्षित थी और 5-6 वर्षों तक रिश्ते में रही, इसलिए इसे 'सहमति' माना गया।
शादी का वादा बनाम झूठा वादा: कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि 'शादी का वादा पूरा न कर पाना' (Breach of Promise) और 'शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा करना' (False Promise) दो अलग बातें हैं। अगर संबंध शुरू होते समय पुरुष का इरादा शादी करने का था, लेकिन बाद में किन्हीं कारणों से शादी नहीं हो पाई, तो इसे रेप नहीं कहा जा सकता।
धारा 482 (CrPC) का उपयोग: हाईकोर्ट ने अपनी अंतर्निहित शक्तियों (Inherent Powers) का इस्तेमाल करते हुए इस एफआईआर और पूरी कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया, क्योंकि कोर्ट को लगा कि यह मामला न्याय के लिए नहीं बल्कि 'ब्लैकमेलिंग' और पैसे ऐंठने के लिए दर्ज किया गया था।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एक बालिग और समझदार महिला, जो खुद एक सरकारी पद पर है, उसे अच्छी तरह पता होता है कि बिना शादी के शारीरिक संबंध बनाने के क्या परिणाम हो सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
"यदि कोई महिला किसी पुरुष के साथ वर्षों तक स्वेच्छा से रहती है और संबंध बनाती है, तो बाद में शादी न होने पर वह इसे हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकती। कानून का इस्तेमाल किसी निर्दोष को प्रताड़ित करने या उससे पैसे वसूलने (Extortion) के लिए नहीं किया जाना चाहिए।"
कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने आरोपी से एक बड़ी राशि की मांग की थी, जो यह साबित करता है कि शिकायत का आधार 'यौन शोषण' नहीं बल्कि 'आर्थिक लाभ' था। इसी आधार पर अदालत ने अधिकारी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
महाकाल मंदिर में पहचान छिपाकर घुसा मुस्लिम युवक: भगवा वस्त्र और तिलक लगाकर हिंदू युवती के साथ पकड़ा गया
17 Feb, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के दरबार में हाल ही में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने मंदिर की सुरक्षा और धार्मिक मर्यादाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक मुस्लिम युवक अपनी हिंदू महिला मित्र के साथ दर्शन करने पहुँचा था, लेकिन उसकी वेशभूषा ने सभी को हैरान कर दिया। युवक ने मंदिर में प्रवेश पाने और अपनी पहचान छिपाने के लिए माथे पर तिलक लगा रखा था, शरीर पर भगवा कपड़े धारण किए थे और गले में रुद्राक्ष की माला पहनी हुई थी। वह पूरी तरह से एक सनातनी श्रद्धालु के रूप में नजर आ रहा था ताकि किसी को उस पर संदेह न हो। वह एक युवती के साथ उज्जैन आया था। नानाखेड़ा क्षेत्र में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पकड़कर उससे पूछताछ की और बाद में मारपीट की। बजरंग दल को सूचना मिली थी कि अलग-अलग राज्यों से आए युवक-युवती एक होटल में ठहरे हुए हैं। होटल के बाहर धोती-कुर्ता पहने जफर खान नाम के युवक को कार्यकर्ताओं ने पकड़ लिया।
इस खुलासे के बाद मंदिर परिसर में हड़कंप मच गया। युवक पर आरोप है कि उसने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाई और हिंदू धर्म के पवित्र प्रतीकों का गलत इस्तेमाल किया। संगठनों ने इसे मंदिर की पवित्रता के साथ खिलवाड़ और 'लव जिहाद' का संदिग्ध मामला बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, साथ आई युवती ने पूछताछ में बताया कि वे दोनों दोस्त हैं और युवक उसे दर्शन कराने लाया था।
सूचना मिलते ही महाकाल थाना पुलिस मौके पर पहुँची और युवक को हिरासत में ले लिया। पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि युवक का असली मकसद क्या था और क्या उसने मंदिर में प्रवेश के लिए किसी फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया था। इस घटना के बाद महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। अब मंदिर में प्रवेश के लिए आधार कार्ड की जांच को अनिवार्य और अधिक सख्त बनाया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अप्रिय स्थिति या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली घटना से बचा जा सके।
लंदन में इकलौते मंदिर को बचाने हिंदू समाज ने लगाई पीएम मोदी से गुहार
17 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। लंदन में भारत हिंदू समाज ने आरोप लगाया है कि पीटरबरो सिटी काउंसिल के कैबिनेट फैसले के बाद इकलौता हिंदू मंदिर और सामुदायिक केंद्र बंद होने जा रहा है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि एक मुस्लिम संस्था को उस जगह पर अधिकार दिया जा सकता है। हिंदू समुदाय ने पीएम मोदी से मंदिर को बचाने की गुहार लगाई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीटरबरो सिटी काउंसिल की कैबिनेट ने अपने बजट को संतुलित करने में मदद के लिए इस स्थल को बेचने पर सहमति जताई। यह केंद्र पिछले 40 सालों से पूजा, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों का मुख्य स्थान रहा है और 35–40 मील के दायरे में यही एकमात्र हिंदू मंदिर है। समाज का कहना है कि इस फैसले से करीब 18 हजार हिंदू श्रद्धालु प्रभावित होंगे। यहां बुज़ुर्गों के लिए भोजन, बच्चों के लिए सांस्कृतिक शिक्षा और सामाजिक सहयोग जैसी सेवाएं दी जाती थीं। बीएचएस ने बताया कि उन्होंने 14 साल तक परिषद से बातचीत की और केंद्र को खरीदने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन इसके बावजूद फैसला बदलने पर ध्यान नहीं दिया गया।
समुदाय का आरोप है कि समानता, अल्पसंख्यक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया गया। यह सिर्फ जमीन या इमारत का मामला नहीं, बल्कि सम्मान, आस्था और बराबरी के अधिकार का सवाल है। संगठन ने ऐलान किया है कि वह अपने मंदिर और पूजा के अधिकार की रक्षा के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
राशिफल 27 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान
सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत
मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी राकेश कुमार कुशवाह ने ओपन इंडिया प्री-स्टेट शूटिंग प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधी जिले में बने 1500 तालाबों और नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों का मन की बात में किया उल्लेख
युवाओं के नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा नया आयाम : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
जैविक खेती से एरिन भगत बनीं आत्मनिर्भर, प्राकृतिक कृषि से घटी खेती की लागत
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस में भोपाल में "रन फॉर टाइगर का भव्य आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवाड़ी के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन का किया लोकार्पण
बिहान योजना से मिली नई पहचान, पोषण सखी बन महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की बनीं संरक्षक
