धर्म एवं ज्योतिष
सावन शुरू होने से पहले करें ये बदलाव
26 Jun, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना आते ही शिव भक्ति का माहौल पूरे देश में छा जाता है. व्रत, पूजा और हर सोमवार का विशेष महत्व इस माह को बेहद पवित्र बना देता है पर केवल व्रत या जलाभिषेक करना ही पर्याप्त नहीं होता? अगर आपके घर में कुछ वास्तु दोष हैं या पूजा से पहले साफ-सफाई में लापरवाही बरती जाती है, तो शिवजी की कृपा पूर्ण रूप से नहीं मिल पाती। इसलिए सावन शुरू होने से पहले कुछ खास बदलाव जरूरी माने गए हैं.
इस बार सावन में चार सोमवार होंगे 14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई और 4 अगस्त
सावन से पहले करें ये जरूरी कार्य
पूरे घर की सफाई करें
पूजा से पहले घर का हर कोना विशेष रूप से पूजा स्थल को स्वच्छ करें। वहां गंगाजल छिड़कें, धूल-मिट्टी हटाएं। साफ वातावरण में शिव की उपासना अधिक प्रभावशाली मानी जाती है।
इन वस्तुओं को तुरंत हटा दें
शराब, सिगरेट या कोई भी नशीली वस्तु
लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन
ये चीजें घर की पवित्रता को नष्ट करती हैं और पूजा का सकारात्मक प्रभाव कम कर सकती हैं।
खंडित मूर्तियों को न रखें
यदि आपके घर में किसी देवी-देवता की टूटी या खंडित मूर्ति है, तो उसे पीपल के नीचे रखें या बहते जल में प्रवाहित करें। इन्हें घर में रखना अशुभ होता है।
सावन में करें ये सरल उपाय
रोज सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं, यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
हर सोमवार को व्रत रखें और संभव हो तो शाम को दीपक जलाकर शिवजी की आरती करें।
इस माह का महत्व
सावन केवल व्रत और धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं, बल्कि यह आत्मशुद्धि, आस्था और ईश्वर से जुड़ने का सुनहरा अवसर है। इन छोटे-छोटे वास्तु उपायों को अपनाकर आप न केवल शिव कृपा के अधिकारी बन सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी ला सकते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की हर लीला भक्तों के मन को है लुभाती
26 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भक्ति की परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाले भगवान हैं। योगेश्वर रूप में वे जीवन का दर्शन देते हैं तो बाल रूप में उनकी लीलाएं भक्तों के मन को लुभाती है।आज पूरब से लेकर पश्चिम तक हर कोई कान्हा की भक्ति से सराबोर है। चैतन्य महाप्रभु के भक्ति आन्दोलन के समय श्रीकृष्ण का जो महामंत्र प्रसिद्ध हुआ, वह तब से लेकर अब तक लगातार देश दुनिया में गूंज रहा है। आप भी मुरली मनोहर श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए उनके मंत्र के जाप की शुरुआत कर सकते हैं।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे॥
१५वीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु के भक्ति आन्दोलन के समय प्रसिद्ध हुए इस मंत्र को वैष्णव लोग महामन्त्र कहते हैं। इस्कान के संस्थापक के श्रील प्रभुपाद जी अनुसार इस महामंत्र का जप उसी प्रकार करना चाहिए जैसे एक शिशु अपनी माता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए रोता है।
ॐ नमो भगवते श्री गोविन्दाय
भगवान श्रीकृष्ण के इस द्वादशाक्षर (12) मंत्र का जो भी साधक जाप करता है, उसे सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। प्रेम विवाह करने वाले अभिलाषा रखने वाले जातकों के लिए यह रामबाण साबित होता है।
कृं कृष्णाय नमः
यह पावन मंत्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताया गया है। इसके जप से जीवन से जुड़ी तमाम बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है।
ॐ श्री कृष्णाय शरणं मम्।
जीवन में आई विपदा से उबरने के लिए भगवान श्रीकृष्ण का यह बहुत ही सरल और प्रभावी मंत्र है। इस महामंत्र का जाप करने से भगवान श्रीकृष्ण बिल्कुल उसी तरह मदद को दौड़े आते हैं जिस तरह उन्होंने द्रौपदी की मदद की थी।
आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वद्र्धनम्।
माया पूज निकासु ताप हरणं गौवद्र्धनोधरणम्।।
कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्।
एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्।।
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।
श्रद्धा और विश्वास के इस मंत्र का जाप करने से न सिर्फ तमाम संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। सुख, समृद्धि और शुभता बढ़ाने में यह महामंत्र काफी कारगर साबित होता है।
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 1 ।।
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 2 ।।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 3 ।।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 4 ।।
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 5 ।।
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 6 ।।
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 7 ।।
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 8 ।।
कन्हैया की स्तुति करने के लिए तमाम मंत्र हैं लेकिन यह मंत्र उनकी मधुर छवि का दर्शन कराती है। इस मंत्र की स्तुति में कान्हा की अत्यंत मनमोहक छवि उभर कर सामने आती है। साथ ही साथ योगेश्वर श्रीकृष्ण के सर्वव्यापी और विश्व के पालनकर्ता होने का भी भान होता है।
हृदय रेखा छोटी सा फिर हल्कीं होना अच्छा नहीं
26 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विवाह के लिए वर-वधू का योग देखने में हस्तशरेखा का बहुत बड़ा योगदान होता है। किसी भी विवाह का भविष्यं वर और कन्यास की हथेली पर उपस्थित विभिन्ना रेखाओं, पर्वतों और चिह्नों की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ ऐसी रेखाओं के बारे में जान लें जो विवाह के मामले में अच्छी साबित नहीं होतीं।
हृदय रेखा
यदि आपकी हृदय रेखा छोटी सा फिर हल्कीो है तो आपके लिए वैवाहिक संयोग अच्छें नहीं हैं। ऐसे में विवाह होने के बाद भी आपके संबंधों में विच्छेंद हो सकता है।
मंगल पर्वत
यदि आपका मंगल पर्वत जरूरत से ज्या दा विकसित हो या फिर मंगल पर दोषपूर्ण चिह्न हो तो ऐसे में विवाह करना आपके लिए सही नहीं होगा।
शुक्र पर्वत हों कम विकसित
शुक्र पर्वत कम विकसित होने पर वैवाहिक जीवन में शारीरिक संतुष्टि नहीं प्राप्तण होती। चंद्र पर्वत और बृहस्पवति के कम विकसित होने पर भी ऐसा ही होता है।
हृदय रेखा पर काले चिह्न अशुभ
यदि आपकी हृदय रेखा पर किसी प्रकार के काले चिह्न शुभ नहीं है। मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा में जरूरत से ज्याकदा दूरी होना सही नहीं है। हाथ का निचला क्षेत्र अत्य धिक विकसित होना अच्छा् नहीं माना जाता। ये सभी बातें विवाह पश्चा्त शारीरिक अनुकूलता के लिए सही नहीं है। ये सभी विकार असंतुष्ट यौन संबंधों को दर्शाते हैं।
संतान सुख नहीं मिल पाता इनको
अगर आपकी हृदय रेखा छोटी है और शुक्र व गुरु पर्वत के उभार भी कम हैं। विवाह रेखा के ऊपर क्रॉस है। जिस स्थारन पर मस्तिष्कक रेखा बुध रेखा को काटती है, अगर वहां तारा है तो यह शुभ नहीं है।
ऐसे में हो सकता है तलाक भी
विवाह रेखा अंत में दो भागों में बंट रही हो। शुक्र पर्वत पर जाल या फिर एक-दूसरे को काटती हुई रेखाएं हो तो ये शारीरिक अक्षमता को दर्शाता है। विवाह रेखा को कोई रेखा काटे तो तलाक की आशंका बढ़ जाती है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 26 जून 2025)
26 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- स्त्री सुख, पुत्र सुख मध्यम होगा तथा यश-प्रतिष्ठा की प्राप्ति अवश्य होगी।
वृष :- साप्ताहिक कार्य में रुचि बढ़ेगी, इच्छित कार्य की प्राप्ति होगी, कार्य व्यावसाय का ध्यान रखें।
मिथुन :- कार्य क्षेत्र में विफलता, अल्प व्यावसाय भय होगा, उठा रोग दब जायेगा।
कर्क :- कोई मित्र शत्रु हानि पहुंचाने की चेष्ठा करेगा तथा अभिष्ठ कार्य में सफलता मिलेगी।
सिंह :- कार्य क्षेत्र में विफलता, अल्प व्यवस्थित जीवन, प्रभावशाली कार्य बनें अवसर मिलेगा।
कन्या :- पुराने व्यापार में वृद्धि होगी, नये व्यापार में हानि होगी, स्वजनों से मिलन होगा।
तुला :- राजकीय कार्य में प्रतिष्ठा, अन्य योजनाओं में आर्थिक लाभ अवश्य ही मिलेगा।
वृश्चिक :- भौतिक सुख-साधनों की कमी, प्रियजनों की उपेक्षा से हानि तथा पारिवारिक क्लेश बनेगा।
धनु :- कार्य सिद्धी, शारीरिक शिथिलता का निवारण होगा, गृहस्थ जीवन सुखमय रहेगा।
मकर :- पुरजन व्यक्तियों से कष्ट, अनियंत्रित दिनचर्या, मानसिक व्यथा बढ़ेगी।
कुम्भ :- लापरवाही अधिक, निद्रा से हानि संभव, सामान्य सुविधा अवश्य ही बनेगी।
मीन :- सामान्य ब्योहार का वातावरण करना उचित रहेगा, व्यावसायिक यात्रा योग बनेंगे।
कब से शुरू हैं गुप्त नवरात्रि? इस दौरान भूलकर भी न करें ये काम, जानें पूजा विधि समेत सबकुछ
25 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिस तरह हिंदू धर्म में शारदीय और चैत्र नवरात्रि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. ठीक उसी तरह गुप्त नवरात्रि भी महत्वपूर्ण होती है. गुप्त नवरात्रि के दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा आराधना की जाती है. वैसे तो साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें एक शारदीय नवरात्रि, दूसरा चैत्र नवरात्रि और एक माघ माह की गुप्त नवरात्रि तथा दूसरा आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि होती है. गुप्त नवरात्रि में माता दुर्गा की गुप्त रूप से पूजा आराधना की जाती है. यानी गोपनीय तरह से तंत्र विद्या सीखने वाले लोग माता रानी को प्रसन्न करते हैं. आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि 26 जून से शुरू हो रही है. जिसका समापन 4 जुलाई को होगा. गुप्त नवरात्रि में कुछ सावधानियां भी बरतनीं चाहिए. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं.
दरअसल अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम बताते हैं कि सनातन धर्म में तंत्र विद्या सीखने वाले लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद महत्वपूर्ण होती है. इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 26 जून से शुरू हो रही है. जिसका समापन 4 जुलाई को होगा. गुप्त नवरात्रि में घट स्थापना करते समय कुछ बातों की सावधानी रखनी चाहिए.
गुप्त नवरात्रि के दौरान मांस मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दौरान तंत्र साधना की जाती है. इसलिए इसकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए तामसिक भोजन से परहेज करें. इसके अलावा गुप्त नवरात्रि के दौरान साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. पूजा स्थल पर कोई भी फटा तस्वीर भगवान की नहीं रखनी चाहिए. न ही किसी को अपशब्द बोलना चाहिए .
गुप्त नवरात्रि में क्रोध पर कंट्रोल करना चाहिए. वाणी पर संयम रखना चाहिए. आप शब्दों से दूरी बनाकर रखें. गुप्त नवरात्रि में किसी का अपमान नहीं करना चाहिए. न ही झूठ बोलना चाहिए. ऐसा करने से माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और विभिन्न कार्य संपन्न भी होते हैं.
आषाढ़ अमावस्या पर धरती पर आते हैं पितर, इस दिन जरूर कर लें बस यह 1 काम, पितर भर भरके देंगे आशीर्वाद
25 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि इस बार बेहद खास होने वाली है, इस बार यह शुभ तिथि 25 जुलाई दिन बुधवार को है. इस दिन दर्श, अन्वाधान और आषाढ़ अमावस्या का योग बन रहा है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के तर्पण करने का विशेष महत्व है. अगर आप तीर्थ स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में ही जल में काले तिल डालकर स्नान करने से पापों का शमन होता है. आषाढ़ अमावस्या विशेष रूप से पितृ, तर्पण, स्नान, दान और ग्रह दोष निवारण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. पंचांग के अनुसार, इस दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है लेकिन राहुकाल का समय दोपहर 12:24 से 02:09 बजे तक रहेगा.
अमावस्या तिथि पर करें इन चीजों का दान
हर मास की अमावस्या तिथि को दर्श अमावस्या के रूप में मनाया जाता है. अमावस्या तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. दर्श शब्द का अर्थ है देखना या दर्शन करना और अमावस्या उस दिन को कहते हैं जब चंद्रमा आकाश में अदृश्य होता है. अमावस्या के दिन पितरों के नाम अन्न, वस्त्र, काला तिल, तेल, जूता-चप्पल, छाता आदि का दान अत्यंत पुण्यदायक है. साथ ही इस दिन की रात्रि को मौन, एकांत, दीप जलाकर साधना करना फलवर्धक माना गया है.
पितरों को समर्पित है आषाढ़ अमावस्या
वैदिक ग्रंथों के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और जलदान के लिए सर्वोत्तम मानी गई है. जो व्यक्ति पितृदोष, अनजाने पूर्वजों की बाधा या कुल की रुकावटें झेल रहे हों, उन्हें इस दिन तर्पण करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या के दिन पितर धरती पर आते हैं. यह दिन पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन दान और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष की समस्या का भी समाधान होता है.
25 जून को आषाढ़ अमावस्या
पंचांग के अनुसार, दर्श अमावस्या का शुभ मुहूर्त 24 जून की शाम 6 बजकर 59 मिनट से आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 25 जून को दोपहर 4 बजे होगा. ऐसे में आषाढ़ मास की अमावस्या का पर्व 25 जून दिन बुधवार को मनाया जाएगा.
आषाढ़ अमावस्या को अन्वाधान व्रत
पुराणों में अमावस्या के दिन अन्वाधान व्रत का उल्लेख है. यह व्रत मुख्य रूप से वैष्णव संप्रदाय में अमावस्या के दिन मनाया जाता है. अन्वाधान का अर्थ है, हवन के बाद अग्नि को प्रज्वलित रखने के लिए उसमें ईंधन जोड़ना. यह व्रत भगवान विष्णु और अग्नि की पूजा से संबंधित है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो पितृदोष, कुल बाधा, संतान रुकावट, अथवा वंश रुकने जैसी समस्याओं से ग्रस्त हों.
आषाढ़ अमावस्या का महत्व
आषाढ़ मास की अमावस्या को विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह वर्षा ऋतु के प्रारंभ का संकेत देती है और पितृ तर्पण, व्रत, साधना एवं दान के लिए शुभ मानी जाती है. इस दिन गंगा स्नान, पीपल पूजन और श्राद्धकर्म करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है. जब चांद नहीं होता, तब आंतरिक शांति और ध्यान के लिए उपयुक्त वातावरण बनता है. योगी और साधक इस दिन साधना करते हैं.
आषाढ़ अमावस्या 2025 उपाय
उपाय के रूप में इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करना, पीपल के वृक्ष पर कच्चा दूध और काला तिल चढ़ाना चाहिए. इसके साथ ही कौओं, गायों और कुत्तों को भोजन कराने का भी महत्व पता चलता है, जिससे पितृ दोष शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
धन, भौतिक सुख सुविधा, संपत्ति, प्रेम चाहिए तो भारत के इन मंदिरों में असुरों के गुरु के करें दर्शन
25 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैदिक ज्योतिष के अनुसार प्रेम, विलासिता और रिश्तों का ग्रह शुक्र को माना जाता है. शुक्र भौतिक सुख-सुविधाओं, विलासिता, प्रेम, अंतरंगता, आभूषण, जुनून, धन, दिखावट, कामुक संतुष्टि और जीवंतता का सूचक है. ऐसे में यह मूल धारणा है कि ‘पुरुष मंगल से हैं और महिलाएं शुक्र से हैं.’ शुक्र देव श्वेत वर्ण के हैं. उनमें स्त्रीत्व का गुण अधिक है. इसके लिए ज्योतिष शुक्र देव को स्त्री ग्रह मानते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्र या शुक्र ग्रह को राक्षसों का गुरु माना जाता है और उन्हें असुर गुरु कहा जाता है. हालांकि, उन्हें धन और खुशी का एक शुभ ग्रह माना जाता है.
असुरों के गुरु हैं शुक्र देव
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुक्र देव असुरों के गुरु थे और उन्हें मृत संजीवनी मंत्र का ज्ञाता माना जाता है. शुक्र देव को सौंदर्य और आकर्षण का देवता भी माना जाता है. शुक्र देव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को धन वृद्धि के साथ-साथ ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
वृषभ और तुला राशि के स्वामी
अगर आपकी कुंडली में शुक्र की स्थिति कमजोर है, तो यह आपके जीवन में संघर्ष की स्थिति निर्मित कर सकता है. ज्योतिषियों की मानें तो शुक्र देव वृषभ और तुला राशि के स्वामी हैं. वहीं, मीन राशि में उच्च के होते हैं. अतः मीन राशि के जातकों पर शुक्र देव की विशेष कृपा बरसती है. उनकी कृपा से जातक को जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है. कुंडली में शुक्र की महादशा 20 वर्षों तक चलती है. शुक्र की अंतर्दशा तीन साल तीन महीने की होती है. शुक्र देव एक राशि में 25 दिनों तक रहते हैं.
शुक्र ग्रह के फायदे
खगोल विज्ञान के अनुसार, आसमान में चंद्रमा के बाद अगर कोई सबसे चमकीली चीज है तो वो सिर्फ शुक्र ही है. ऐसे में शुक्र जिस भी जातक के जीवन में मेहरबान होते हैं उसका जीवन चमक उठता है. स्कंद पुराण, शिव पुराण और काशी खंड में एक ऐसे शिवलिंग का वर्णन है जिसकी पूजा-अर्चना करने से शुक्र के सभी दोषों से मुक्ति तो मिलती ही है, साथ ही जातक का पूरा जीवन सुख, समृद्धि और खुशियों से भर जाता है. जातक को संतान का सुख मिलता है.
भारत के इन मंदिरों में करें दर्शन
शुक्र द्वारा स्थापित यह शुक्रेश्वर महादेव मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के पास माता अन्नपूर्णा के मंदिर के ठीक पीछे स्थित कालिका गली में अवस्थित है. मंदिर के पास ही शुक्र द्वारा खोदा गया कुआं आज भी है. उसे शुक्र कूप कहा जाता है. इस कूप के जल को पीने या उससे स्नान करने से ग्रह दोषों का निवारण होता है.
इसके साथ ही एक शुक्रेश्वर मंदिर भारत के असम राज्य में स्थित है. भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में लोग दर्शन करने आते हैं. यह मंदिर गुवाहाटी शहर के पानबाजार इलाके में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर शुक्रेश्वर पहाड़ी पर स्थित है. इस मंदिर को भगवान शिव के सबसे बड़े लिंगम और छठे ज्योतिर्लिंग लिंगम के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर का इतिहास संत शुक्र से जुड़ा है, जिन्होंने शुक्रेश्वर पहाड़ी पर एकांतवास किया था, जहां वह नियमित रूप से भगवान शिव का ध्यान और पूजा करते थे.
कुंडली में इस तरह करें गुरु ग्रह को मजबूत, संतान और धन-धान्य चाहिए तो इन मंदिरों में जाकर करें दर्शन
25 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 9 ग्रहों में से बृहस्पति ग्रह को देवताओं का गुरु बताया गया है. यानी गुरु ग्रह ज्ञान, सोच, संवाद, वाणी, धन, स्वास्थ्य और मान-प्रतिष्ठा के कारक हैं. शास्त्रों के अनुसार देवताओं ने भी भगवान बृहस्पति देव (गुरु) से ही ज्ञान प्राप्त किया था. सबसे जरूरी बात यह है कि गुरु को ज्योतिष के अनुसार शिक्षा का कारक कहा जाता है. कुंडली में मजबूत बृहस्पति धन और बुद्धि देते हैं. यह व्यक्ति को उच्च ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि, और भाग्य का उदय करने वाले हैं. यह जीवन के क्षेत्रों में विस्तार का कारण बनते हैं.
धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु ग्रह
कुंडली में शुभ मंगल जहां आपको सुंदर जीवन साथी प्रदान करता है, वहीं शुभ बृहस्पति की उपस्थिति जातक की शादी को बनाए रखने में मदद करती है. बृहस्पति वैसे तो सभी ग्रहों में सबसे अधिक लाभकारी माना गया है. लेकिन, कभी-कभी, यह नीच या क्रूर ग्रहों के प्रभाव के कारण प्रतिकूल प्रभाव भी डालता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु ग्रह को धनु और मीन राशि का स्वामी कहा जाता है. वहीं मकर इसकी नीच राशि है. ऐसे में किसी भी जातक की कुंडली में गुरु का शनि या केतु के साथ संबंध बेहद बुरा माना जाता है.
ऐसे करें गुरु ग्रह को मजबूत
ऐसे में जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर या नीच के हों उन्हें शक्कर, केला, पीला वस्त्र, केसर, नमक, पीली मिठाईयां, हल्दी, पीला फूल और भोजन का दान करना उत्तम माना गया है. इसके साथ ही रक्त दान करने से भी गुरु ग्रह का शुभ लाभ मिलता है. गुरुवार को केले की जड़ की पूजा करना और भगवान विष्णु की पूजा करना, बृहस्पतिवार के व्रत कथा का श्रवण करना, इस दिन उपवास रखना और रात्रि में पीला भोजना करना अच्छा माना गया है. इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा भी करनी चाहिए.
गाय की सेवा करें और हरा चारा खिलाएं
बृहस्पति को शुभ बनाने के लिए आप अपने माथे पर चंदन का लेप या तिलक लगा सकते हैं. आप पीले रंग के आभूषण जिसमें सोना सबसे शुभ माना जाता है, धारण कर सकते हैं. साथ ही इस दिन पीले परिधान भी धारण कर सकते हैं. गुरुवार को गुरु का दिन माना गया है, इस दिन गाय को चारा खिलाना चाहिए, उसकी सेवा करनी चाहिए, इससे कुंडली में गुरु ग्रह के शुभ प्रभावों में वृद्धि होती है. इससे नवग्रहों की शांति भी होती है.
भारत के इन मंदिरों में करें गुरु ग्रह के दर्शन
वाराणसी यानी भगवान शिव की नगरी, जिस काशी के नाम से जानते हैं. कहा जाता है कि यह भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा हुआ है. यहां भगवान शिव के मंदिर के अलावा गुरु बृहस्पति का भी एक मंदिर है, जो प्राचीन और बेहद प्रसिद्ध है. ज्योतिष की मानें तो जब भोलेनाथ इस काशी नगर को बसा रहे थे, उस वक्त उन्होंने गुरु बृहस्पति को भी यहां रहने की जगह दी थी. दशाश्मेध घाट मार्ग और बाबा विश्वनाथ के निकट ही स्थित है यहां गुरु बृहस्पति मंदिर. इस मंदिर में तभी से सतत गुरु बृहस्पति देव की पूजा आराधना होती आई है. भगवान विष्णु के अंशावतार होने के बाद भी यहां देव बृहस्पति शिव रूप में पूजे जाते हैं और बाबा विश्वनाथ की ही तरह इनका भी जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक व बेल पत्रों से श्रृंगार होता है. इस मंदिर को लेकर हिंदू शास्त्र के अनुसार यहां गुरु बृहस्पति साक्षात मौजूद हैं. संतान की प्राप्ति करने के लिए श्रद्धालु यहां दूर-दूर से आकर गुरु बृहस्पति की पूजा आराधना करते है.
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र में देवगुरु बृहस्पति का मंदिर है. जो कि देवगुरु पर्वत की चोटी पर स्थित है . इस मंदिर को देवगुरु बृहस्पति की तपस्थली माना जाता है. कहा जाता है यहां बृहस्पति देव ने तपस्या की थी. इसलिए इस पर्वत को देवगुरु पर्वत कहा जाता है.
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भगवान बृहस्पति देव का एक मंदिर है. यह जयपुर के महारानी फार्म में स्थित है. इस मंदिर में शुद्ध सोने की बृहस्पति देव की प्रतिमा स्थापित है.
दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के तिरुवरूर जिले से 38 किमी दूर गांव है अलंगुड़ी. यहां श्री आपत्सहायेश्वर महादेव का मंदिर है. लोक मान्यता है कि ये वही स्थान है जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पीया था. इसी कारण यहां महादेव का नाम आपत्सहायेश्वर है. अर्थ है जो आपत्ति में सहायक हो. इसी मंदिर में भगवान बृहस्पति की प्रतिमा मौजूद है. इन्हें गुरु भगवान बृहस्पति दक्षिणमूर्ति कहा जाता है. आपत्सहायेश्वर महादेव में ही देवगुरु बृहस्पति का भवन भी मौजूद है. यहां लोग कुंडली के ग्रह दोषों की शांति के लिए मंदिर की 24 परिक्रमा करते है, 24 बत्तियों वाला दीपक भी लगाते हैं. इसको लेकर मान्यता है कि इससे कुंडली के गुरु जनित दोष दूर होते हैं, गुरु ग्रह का शुभ फल मिलने लगता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 25 जून 2025)
25 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- राजकीय सम्मान तथा उच्चपद की प्राप्ति संभव है तथा संतान का सुख अवश्य मिलेगा।
वृष :- धन-स्वास्थ्य लाभ, मित्र-कुटुम्बियों से प्रेम, सहयोग बढ़ेगा तथा रुके कार्य बन जायेंगे।
मिथुन :- उत्तम विचार, भाग्य की उन्नति होगी, मानसिक अशांति, सुख, स्वजनों की कमी में मिलन होगा।
कर्क :- जमीन-जायजाद का लाभ मिलेगा, स्वास्थ्य कष्ट होगा, ध्यान रखें।
सिंह :- दाम्पत्य जीवन में उल्लास, पुत्र का भाग्योदय होगा तथा मौसमी प्रकोप हो सकता है।
कन्या :- दाम्पत्य में आकस्मिक झंझट आयेगा, पड़ोसियों से कष्ट, विवाद बनेगा, द्वोष, विचार रहेगा।
तुला :- भाग्योदया होगा, व्यावसायिक जीवन में उन्नति के लिए एक नया अवसर प्राप्त होगा।
वृश्चिक :- कार्य सिद्ध, स्त्री-पुत्रादि की कमी तथा मन अशांत रहेगा तथा कार्य जीवन सुखी रहेगा।
धनु :- सांसारिक सुखों की प्राप्ति, मित्र मिलाप, आमोद-प्रमोद तथा ब्यौहार में सफलता मिले।
मकर :- शैक्षणिक प्रगति में बाधा होगी, अनावश्यक व्यय से कार्य बनेंगे, क्रोध शांत रखें।
कुम्भ :- चतुराई एवं बैद्धिक विकास तथा अधिकांश प्रयत्नों से निश्चय लाभ होगा, ध्यान रखें।
मीन :- विभिन्न रोगों से शरीर पीड़ित रहेगा, संतान शिक्षा से अधिकारी से पीड़ा होगी।
आषाढ़ अमावस्या: इन जगहों पर जला दें 5 दीपक, देवी लक्ष्मी दौड़ी आएंगी, पितर खुश होकर भर देंगे घर!
24 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आषाढ़ अमावस्या आने वाली है. यह दिन पितरों को समर्पित माना गया है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है. इससे पितृ भी तृप्त होते हैं. इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. वहीं, अगर आप नदी में स्नान या दान-पुण्य न कर पाएं तो कुछ उपाय से भी पितरों को लाभ पहुंचाया जा सकता है. इसमें दीपक के विशेष उपाय शामिल हैं.
कब है आषाढ़ अमावस्या?
आषाढ़ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत पंचांग के अनुसार 24 जून की शाम 7 बजकर 2 मिनट से होगी. वहीं इसकी समाप्ति 25 जून की शाम 4 बजकर 4 मिनट पर हो जाएगी. उदयातिथि की मान्यता के अनुसार आषाढ़ अमावस्या तिथि 25 जून को मानी जाएगी. इसी दिन तर्पण, दान-पुण्य और धार्मिक क्रियाकलापों को करना शुभ माना जाएगा.
जरूर जलाएं यहां दीपक
आषाढ़ अमावस्या पर माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. साथ में एक लोटा जल रखें. शाम के समय घर का दरवाजा खुला रखें. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां लक्ष्मी का आगमन होता है.
तो आशीर्वाद देंगे पितृ
आषाढ़ अमावस्या पर पितृ देव की कृपा पाने के लिए एक दीपक सरसों के तेल का मुख्य द्वार पर लगाना चाहिए. मान्यता है कि अमावस्या की शाम पितर धरती से अपने लोक की ओर लौटते हैं. उन्हें मार्ग में प्रकाश मिले तो वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.
तस्वीर पर जरूर जलाएं दीपक
ऐसे तो कई लोग रोजाना देवी-देवताओं के साथ पितरों की तस्वीर के आगे दीपक लगाते हैं, लेकिन आषाढ़ माह की अमावस्या पर घर में जहां पितरों की तस्वीर लगाई हो, वहां दीपक जरूर जलाना चाहिए. यह श्रद्धा का प्रतीक है.
पीपल के नीचे दो दीपक
आषाढ़ अमावस्या पर पीपल की पूजा विशेष फलदायी होती है. पीपल के नीचे देवताओं के लिए तिल तेल और पितरों के लिए सरसों के तेल का दीप जलाएं. इससे खूब लाभ होगा.
75 करोड़ की कमाई छोड़ साधु बने प्रकाश शाह, अब नंगे पांव चल रहे हैं शांति की राह, जानें सफलता के शिखर से साधु जीवन तक का सफर
24 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किसी बड़ी कंपनी का ऊंचा पद, शानदार सैलरी और दुनिया की तमाम सुख सुविधाएं. आमतौर पर लोग इसी जीवन को पाने की कोशिश करते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सब कुछ होते हुए भी भीतर की शांति की तलाश में निकल पड़ते हैं. ‘प्रकाश शाह’ ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, जिन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज में वाइस प्रेसिडेंट जैसे अहम पद और सालाना 75 करोड़ रुपये की सैलरी को छोड़कर संन्यास का रास्ता चुना.
महावीर जयंती पर लिया दीक्षा का फैसला
प्रकाश शाह और उनकी पत्नी नैन शाह ने महावीर जयंती के मौके पर दीक्षा लेकर साधु जीवन अपना लिया. इस दीक्षा के बाद उन्होंने न केवल सांसारिक सुखों का त्याग किया, बल्कि अपने पुराने नाम और पहचान को भी छोड़ दिया. अब वह जैन साधु के रूप में वैराग्य, तप और आत्मअनुशासन के मार्ग पर चल रहे हैं.
रिलायंस में था बड़ा ओहदा
शाह रिलायंस इंडस्ट्रीज में वाइस प्रेसिडेंट थे और कंपनी के कई बड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका थी. खास तौर पर पेटकोक मार्केटिंग और जामनगर की गैसीफिकेशन परियोजना जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान सराहनीय रहा. उनकी पहचान एक कुशल प्रबंधक और रणनीतिकार के रूप में थी, जिनका भरोसा खुद मुकेश अंबानी भी करते थे.
IIT बॉम्बे से पढ़ाई, केमिकल इंजीनियरिंग में महारत
प्रकाश शाह ने आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की है और वह एक केमिकल इंजीनियर हैं. पढ़ाई के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया में कदम रखा और मेहनत के बल पर खुद को ऊंचे ओहदे तक पहुंचाया. लेकिन इतने बड़े मुकाम पर पहुंचने के बाद भी उनके भीतर कुछ खालीपन था, जिसे वह सांसारिक साधनों से भर नहीं पाए.
साधु जीवन की ओर झुकाव पहले से था
शाह के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें वर्षों से जैन दर्शन और आत्मिक शांति में गहरी रुचि थी. वे कई बार धर्म और ध्यान से जुड़े आयोजनों में शामिल होते थे. धीरे धीरे यह झुकाव इतना मजबूत हो गया कि उन्होंने अपने पूरे जीवन की दिशा ही बदल दी. सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें वह सफेद कपड़े पहने, नंगे पैर चलते हुए और बिना किसी विलासिता के नजर आ रहे हैं.
अब कैसी है उनकी दिनचर्या
साधु बनने के बाद प्रकाश शाह अब बेहद सादा जीवन जी रहे हैं. वह ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं, भिक्षा से जीवन यापन करते हैं और दिन का अधिकांश समय ध्यान, स्वाध्याय और सेवा में बिताते हैं. उन्होंने मोबाइल, गाड़ी, एसी ऑफिस, आलीशान घर और सभी प्रकार की सुविधा छोड़ दी है.
प्रेरणा देने वाली कहानी
प्रकाश शाह की कहानी उन लोगों के लिए एक गहरा संदेश है जो यह मानते हैं कि पैसा और पद ही सब कुछ हैं. उन्होंने दिखाया कि असली खुशी भीतर की शांति में है, न कि भौतिक चीजों में. उनका यह कदम न केवल जैन धर्म के मूल विचारों को दर्शाता है, बल्कि उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो जिंदगी में गहराई से कुछ तलाश रहे हैं.
तुलसी के पौधे में दिखने लगें ये बदलाव तो समझिए होने वाली है पैसों की बारिश! ये हैं अमीर होने के संकेत
24 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तुलसी का पौधा हर घर में होता है और हर कोई इस पौधे को पूजता है. इससे जुड़ी तमाम मान्यताएं हैं जैसे अगर पौधा स्वस्थ रहे, तो घर में बरकत होती है. पौधा मुरझा जाए तो समझो कोई परेशानी है. एक्सपर्ट ये भी कहते हैं कि किसी जगह का वास्तु देखने के लिए तुलसी का पौधा लगाना चाहिए. अगर वो न सूखे तो जगह अच्छी है और सूख जाए तो वास्तु दोष है. इसी क्रम में आज हम आपको बताने वाले हैं कि तुलसी से कैसे पता चलता है कि माता लक्ष्मी आप पर प्रसन्न होने वाली हैं.
अमीर बनने से पहले दिखता है ये चमत्कार
सभी लोगों के घर में तुलसी का पौधा होता है. ये औषधीय गुणों से भरपूर होता है और सनातन धर्म में इसका बहुत महत्व है. किसी भी पूजा-पाठ और शुभ कामों में इसकी जरूरत पड़ती है लेकिन अगर आपके घर के तुलसी के पौधे में अचानक ये बदलाव देखने को मिलें, तो समझिए आपको अमीर होने का संकेत मिल रहा है.
सनातन धर्म में तुलसी को माता लक्ष्मी का रूप मानकर पूजा जाता है. मान्यता है कि जिस घर में तुलसी माता की पूजा होती है वहां कभी भी धन-दौलत की कमी नहीं होती. वहां माता लक्ष्मी की हमेशा कृपा बनी रहती है.
क्या कहना है एक्सपर्ट का
इस बारे में जानकारी देते हुए पूर्णिया के पंडित मनोत्पल झा कहते हैं कि वास्तु शास्त्र के मुताबिक इंसान के अमीर बनने से पहले उसके घर में लगा तुलसी का पौधा भी कुछ संकेत देता है. अगर आपका पूजा वाला तुलसी का पौधा अचानक बहुत हरा-भरा दिखने लगे और उसमें फूल और मंजरी (बीज के फूल) दिखने लगें, तो इसका मतलब है कि आपके ऊपर लक्ष्मी माता की कृपा बरसने वाली है. ये व्यापार में कमाई बढ़ने, अचानक आय में वृद्धि या बिना सोचे-समझे पैसा मिलने के संकेत भी हो सकते हैं.
अगर पास उग आए ये घास
इसके अलावा उन्होंने बताया कि तुलसी के पौधे के पास अगर दूर्वा यानी हरी घास उगने लगे, तो यह भी अमीर बनने का बड़ा शुभ संकेत माना जाता है. दूर्वा भगवान गणेश को बहुत प्रिय है. दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं, ऐसे में तुलसी और दूर्वा के सामने दीपक जलाना बहुत अच्छा माना जाता है. इससे आपको और भी फायदे हो सकते हैं और लंबे समय से चली आ रही रुकावटें खत्म हो सकती हैं.
सपने में दिखाई दे ये मां लक्ष्मी का ये प्रिय फूल...तो समझें होगी पैसों की बारिश
24 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिस तरह ज्योतिष शास्त्र का इंसानी जीवन में विशेष महत्व होता है, उसी तरह स्वप्न शास्त्र का भी महत्व माना जाता है. हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार, कई बार सपने भविष्य के संकेत देते हैं. आमतौर पर रात को जब हम लोग गहरी नींद में होते हैं, तो वे कई तरह के सपने देखते हैं. कई बार इन सपनों में छिपे संकेत इंसान को गरीब से अमीर बना सकते हैं और भविष्य में आने वाली परेशानियों से भी बचा सकते हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने शुभ और अशुभ दोनों होते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि हर सपना अशुभ हो. कुछ सपने शुभ संकेत भी देते हैं, जिससे इंसान की किस्मत चमक सकती है. तो चलिए, इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि अगर आप अपने सपने में फूल देखते हैं तो उसका क्या मतलब होता है.
अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम बताते हैं कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में अगर कमल का फूल दिख जाए तो यह बेहद ही शुभ माना जाता है. कमाल का फूल संकेत देता है कि आने वाले दिनों में धन लाभ होने वाला है, आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलेगा और लंबे समय से रुका हुआ धन भी वापस मिलेगा.
धन आगमन के शुभ संकेत
इतना ही नहीं धार्मिक मान्यता है कि कमल का संबंध ज्ञान और विद्या से भी होता है क्योंकि माता लक्ष्मी और माता सरस्वती कमल पर ही विराजमान होती हैं. सपने में अगर आप कमल का फूल देखते हैं, तो इससे धन के साथ-साथ जीवन में आ रही तमाम परेशानियां भी दूर होती हैं और सफलता के नए मार्ग खुलते हैं.
स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों से मिलेगी राहत
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों से जूझ रहा है और वह सपने में कमल का फूल देखता है, तो यह सपना जल्द स्वस्थ होने का संकेत देता है. घर-परिवार में हर प्रकार के रोग दूर होते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 24 जून 2025)
24 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- यात्रा से लाभ, परिवार से लाभ, कार्य में रुकावट होगी, समय का ध्यान रखें।
वृष :- धार्मिक कार्यों में खर्च होगा, धन का आभाव मन में खेद तथा दुख: अवश्य होगा।
मिथुन :- व्यापारिक योजना बने, शरीर सुख तथा लाभ के कार्य में बाधा होगी।
कर्क :- चिन्ताओं की समाप्ति होगी, नये कार्य-व्यापार से लाभ के कार्य होंगे तथा बाधा बनेगी।
सिंह :- शारीरिक कष्ट, परेशानी, स्त्री से अनवन तथा सामान्य लाभ होगा।
कन्या :- संघर्ष, कार्य व्यापार मेंं अशांति हो, संतान से सुख समाचार मिले।
तुला :- रोग, शरीर व्याधि से कष्ट धन की कमी, घर में कलह होगी, ध्यान दें।
वृश्चिक :- मेहनत से कार्य पूर्ण हों, स्त्री का सहयोग फलदायी होगा, व्यय की वृद्धि होगी।
धनु :- खांसी-जुकाम का प्रभाव रहेगा, स्त्री से मन-मुटाव होगा, ध्यान रखें।
मकर :- व्यापार में सुधार होगा, शत्रुपक्ष से सावधान रहें, स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
कुम्भ :- संघर्षपूर्ण स्थिति होगी, लाभ तथा व्यय होगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
मीन :- व्यापार में लाभ, कार्यक्षेत्र में सुधार, भूमि-भवन की खरीद-फरोख्त अवश्य होगी।
क्या चाहते हैं मनचाहा फल?, पश्चिम की इस दिशा में मंदिर रखिए, हर कामना होगी पूरी
23 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर इंसान की कुछ न कुछ इच्छाएं होती हैं. कोई धन चाहता है, कोई नौकरी, कोई संतान सुख, तो कोई मन की शांति. लेकिन इन सबके लिए लोग क्या करते हैं? पूजा-पाठ, व्रत, दान और मंदिर जाना – यह सब बहुत आम है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप सिर्फ अपने घर के मंदिर की दिशा को सही कर दें, तो आपकी इच्छाएं पूरी होने लगती हैं? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
बहुत से लोग सुबह उठते ही ईश्वर का नाम लेते हैं, दोपहर को भी मन ही मन कुछ मांगते हैं और रात को सोते समय भी किसी न किसी रूप में परमात्मा से अपनी बातें करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि जो चीज़ आप रोज मांगते हैं, वह आपको मिल क्यों नहीं रही?
मंदिर की दिशा बदल सकती है किस्मत
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मंदिर रखने की सही दिशा बहुत मायने रखती है. खासतौर पर अगर आप अपनी इच्छाएं जल्दी पूरी करना चाहते हैं, तो मंदिर को पश्चिम की चौथी उपदिशा यानी W4 में रखना बहुत असरदार होता है.
W4 का संबंध सीधे उन भावनाओं से है, जिनमें इंसान कुछ चाहता है, मांगता है और उम्मीद करता है. जब आप इसी दिशा में मंदिर रखते हैं और वहां ईश्वर के सामने प्रार्थना करते हैं, तो आपकी इच्छाएं ब्रह्मांड में एक खास ऊर्जा के साथ फैलती हैं.
क्या होता है जब आप W4 में मंदिर रखते हैं?
जब आप अपने घर की W4 दिशा में मंदिर रखते हैं और उसके सामने बैठकर प्रार्थना करते हैं, तो आप अपनी बात सिर्फ बोलते नहीं, बल्कि अपने अवचेतन मन से ऊर्जा के रूप में उसे बाहर भेजते हैं. यह ऊर्जा सीधी ब्रह्मांड तक जाती है.
आपका मन, शरीर और आस-पास की सारी ऊर्जा एक ही दिशा में काम करने लगती है – आपकी इच्छा पूरी करने के लिए. यही वजह है कि इसे बहुत शक्तिशाली उपाय माना गया है.
कैसे करें मंदिर की स्थापना?
-सबसे पहले घर के नक्शे के अनुसार W4 दिशा को पहचानिए.
-वहां साफ-सुथरी जगह बनाकर लकड़ी या संगमरमर का मंदिर स्थापित करें.
-मंदिर की ऊंचाई ज़मीन से थोड़ी ऊपर रखें और वहां रोज एक दिया जरूर जलाएं.
-वहां बैठकर दिन में कम से कम दो बार प्रार्थना करें – सुबह और रात को.
-जो भी चाहत हो, वह मन से बोलें और यकीन रखें कि वो पूरी होगी.
नतीजा क्या मिलेगा?
अगर आपने यह उपाय सही तरीके से किया, तो आपको न सिर्फ आत्मिक शांति मिलेगी, बल्कि कुछ ही समय में जीवन में नए मौके, सुख और समाधान भी दिखने लगेंगे. कई बार बिना कहे ही ब्रह्मांड आपके मन की बात समझ लेता है, बस तरीका सही होना चाहिए.
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