धर्म एवं ज्योतिष
जानें, मंगलसूत्र धारण करने के नियम और इसका महत्व
3 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में विवाह में मंगलसूत्र का सबसे अहम स्थान है। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन का प्रतीक माने जाने वाले मंगलसूत्र को धारण करने के नियम और सावधानियां भी बतायी गयी हैं।
मंगलसूत्र एक काले मोतियों की माला होती है, जिसे महिलाएं अपने गले में धारण करती हैं। इसके अंदर बहुत सारी चीज़ें जुड़ी होती हैं और हर चीज़ का सम्बन्ध शुभता से होता है। माना जाता है कि मंगलसूत्र धारण करने से पति की रक्षा होती है और पति के जीवन के सारे संकट कट जाते हैं जबकि यह महिलाओं के लिए भी रक्षा कवच और सम्पन्नता का काम करता है।
मंगलसूत्र के अंदर क्या-क्या चीज़ें होती हैं?
मंगलसूत्र में पीला धागा होता है
इसी पीले धागे में काली मोतियाँ पिरोई जाती हैं
साथ में एक सोने या पीतल का लॉकेट भी लगा हुआ होता है
यह लॉकेट गोल या चौकोर , दोनों हो सकता है
मंगलसूत्र में सोना या पीतल भले ही न लगा हो पर पीले धागे में काली मोतियाँ जरूर होनी चाहिए
मंगलसूत्र में लगी हुयी चीज़ें कैसे ग्रहों को नियंत्रित करती हैं ?
मंगलसूत्र का पीला धागा और सोना या पीतल बृहस्पति का प्रतीक है
जिससे महिलाओं का बृहस्पति मजबूत होता है
काले मोतियों से महिलाएं और उनका सौभाग्य बुरी नज़र से बचे रहते हैं
यह भी मानते हैं कि मंगलसूत्र का पीला हिस्सा माँ पार्वती है और काले हिस्सा भगवान शिव
शिव जी की कृपा से महिला और उसके पति की रक्षा होती है
तथा माँ पार्वती की कृपा से वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है
मंगलसूत्र धारण करने के नियम और सावधानियां क्या हैं ?
मंगलसूत्र या तो स्वयं खरीदें या अपने पति से लें
किसी अन्य से मंगलसूत्र लेना उत्तम नहीं होता
मंगलसूत्र मंगलवार को न खरीदें
धारण करने के पूर्व इसे माँ पार्वती को अर्पित करें
जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो मंगलसूत्र को न उतारें
मंगलसूत्र में लगा हुआ सोना अगर चौकोर हो तो बहुत उत्तम होगा
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 03 जुलाई 2025)
3 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- यात्रा विवाद, मातृ कष्ट, व्यय तथा विरोध होगा, मानसिक कष्ट बनेगा|
वृष राशि :- धन व्यय, व्यापार मे प्रगति, शुभ कार्य होंगे, परिणाम अनुरुप ही रहेंगे|
मिथुन राशि :- यात्रा, शत्रु भय, प्रवेश विरोध, लाभ, हर्ष, गृह कार्य, व्यवस्था पूर्ण अवश्य ही बनेगी|
कर्क राशि :-यात्रा, शत्रु भय, प्रवेश विरोध, लाभ, हर्ष, गृह कार्य, व्यवस्था पूर्ण अवश्य ही बनेगी।
सिंह राशि :- यात्रा शुभ, भूमि, खेती लाभ हर्ष, दूषित वातावरण अवश्य ही होगा, ध्यान रखे।
कन्या राशि :- धन लाभ, नेत्र पीड़ा अवश्य होगी, यात्रा परेशानी युक्त होगी, ध्यान दें|
तुला राशि :- सुख सफलता निर्माण, कार्य प्रवास व राजकार्य में व्यवस्था से लाभ अवश्य ही होगा।
वृश्चिक राशि :- मानिसक तनाव अवश्य ही बढ़ेगा तथा स्वजनों की सहानुभूति अवश्य ही होगी।
धनु राशि :- व्यवसाय की उन्नति से आर्थिक विशेष सुधार हो विरोध कार्य होगा।
मकर राशि :- विलास सामग्री का संचय होगा, अधिकारी वर्ग की कृपा का लाभ अवश्य मिलेगा।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्रों से अच्छा सहयोग मिले, उत्तम लाभ के योग अवश्य ही बनेंगे, ध्यान रखे|
मीन राशि :- गृह कलह, हीन मनोवृत्ति, शरीर पीड़ा तथा परदेश जाने की यात्रा अवश्य बनेगी।
शिव के प्रिय मास सावन में भूलकर भी ना खाएं ये चीजें, हो जाएंगे बर्बाद, हमेशा रहेंगे बेचैन
2 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना शुरू होते ही शिवभक्ति का रंग चढ़ने लगता है. मंदिरों में ‘बोल बम’ की गूंज सुनाई देती है, कांवरियों की कतारें निकलती हैं और हर घर में भोलेनाथ की पूजा होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पवित्र माह में कुछ चीजें ऐसी हैं, जिन्हें खाना धार्मिक रूप से वर्जित माना गया है? सिर्फ परंपरा नहीं, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं. अगर आप भी चाहते हैं शिवजी की कृपा बनी रहे, तो सावन में इन खास चीजों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि आखिर किन चीजों को खाने से सावन में मना किया गया है और क्यों..
भोलेनाथ का प्रिय मास सावन माना जाता है और इस वर्ष 11 जुलाई दिन शुक्रवार से शुरू हो रहा है. बड़े बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि सावन मास में कुछ चीजों का खाना वर्जित है. इस मास में संयम, शुद्धता, सात्विकता और व्रत के माध्यम से तन-मन को पवित्र किया जाता है. उसका धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारण भी होता है. सावन मास से कई लोग अपने दैनिक जीवन में बदलाव करते हैं. इसमें लोग रहन-सहन से लेकर अपने खाने-पीने के तरीकों में भी बदलाव करते हैं.
भारत के गांवों में, विशेषकर हिंदी पट्टी में, एक लोकोक्ति बहुत मशहूर है जो बड़े सहज भाव से बताती है कि किस मौसम में क्या खाएं और किस चीज से परहेज करें. इसी लोक कहावत में 'सावन साग न भादो दही' का जिक्र है. सावन में दूध से बने उत्पादों का सेवन करने से इसलिए बचना चाहिए क्योंकि इन दिनों जमीन में दबे अधिकांश कीड़े ऊपर आ जाते हैं और घास या हरी चीजों को संक्रमित कर देते हैं.
घास गाय या भैंस उसी को खाते हैं, जिसका दूध हमारे घरों में आता है, जो कि सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. दही इसलिए नहीं खानी चाहिए क्योंकि इन दिनों वातावरण में नमी और कीटाणुओं की वृद्धि होती है, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया पनपते हैं. इसके अलावा, दही की तासीर ठंडी होती है, जिससे सर्दी-जुकाम होने का डर भी रहता है. आयुर्वेद का मत है कि बारिश के कारण लोगों की पाचन शक्ति कमजोर होती है, वहीं, लहसुन और प्याज की तासीर गरम होती है, जिसे खाने से पेट फूलना, गैस और अपच होने की संभावना रहती है.
चरक संहिता में सावन के महीने में बैंगन न खाने की सलाह दी गई है, जिसका मुख्य कारण इसकी प्रकृति और पाचन पर पड़ने वाला प्रभाव है. बैंगन को 'गंदगी में उगने वाली सब्जी' माना जाता है, और सावन में नमी के कारण इसमें कीड़े लगने की संभावना अधिक होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. सुश्रुत संहिता में सावन में हरी पत्तेदार सब्जियों को खाने से इसलिए वर्जित माना जाता है क्योंकि इस मौसम में जमीन में दबे अधिकांश कीड़े ऊपर आ जाते हैं और हरी पत्तेदार सब्जियों को संक्रमित कर देते हैं, जिससे वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ने का डर बना रहता है.
सावन में हरी चूड़ियां क्यों पहनती हैं सुहागिन महिलाएं? महाकाल से जुड़ा है मामला, जानें रहस्य
2 Jul, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में श्रावण माह भगवान भोलेनाथ को समर्पित है. श्रावण मास को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है. भगवान शिव को समर्पित यह महीना भक्ति, तपस्या और श्रद्धा का प्रतीक होता है, यह माह भगवान शिव शंकर की भक्तों पर कृपा बरसती है. इस दौरान प्रकृति चारों ओर हरियाली से सराबोर रहती है. सुहागिन महिलाओं द्वारा सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे कई धार्मिक, ज्योतिषीय महत्व है. इस बार सावन महीने की शुरुआत 11 जुलाई से होगी. वहीं, इस माह का समापन 09 अगस्त को होगा.
क्यों पहनते है कांच की चूड़ियां
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई प्रकार के जतन के साथ कई तरह के उपाय भी करता है. इस पवित्र महीने में हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. बता दें कि, कांच की चूड़ियां पहनने से उनसे आने वाली आवाज से आसपास की निगेटिविटी समाप्त होती है और नई ऊर्जा का संचार होने लगता है.
जानिए क्या है हरे रंग का महत्व
हरे रंग के पीछे कई रहस्य हैं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हरे रंग का महत्व बुध से जुड़ा हुआ है. यह हरियाली का प्रतिक है. हरे रंग के वस्त्र धारण करने से बुध प्रसन्न रहता है तथा वाणी को नियंत्रण में रखता है. यही कारण है कि सुहागिन स्त्रियां सावन मास में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हरे रंग की चुड़ियां व हरे कपड़े पहनती हैं.
प्रकृति और शिव का संबंध
भगवान शिव और प्रकृति के बीच गहरा संबंध होता है. क्योंकि भगवान शिव ऐसे देव हैं, जिन्हें प्रकृति से जुड़ी चीजें अधिक प्रिय होती हैं. महादेव का वास भी प्रकृति की गोद हिमालय में होता है और उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी चीजें अर्पित की जाती है, जो हरे रंग की होती है. इसलिए सावन में हरे रंग का विशेष महत्व होता है.
बुद्धि, धन व ज्ञान प्राप्ति के लिए करें गणेशजी का व्रत, जानें पूजन विधि, महत्व, मंत्र और आरती
2 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुधवार का दिन भगवान गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह को समर्पित माना जाता है. इस दिन व्रत रखकर प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. यह व्रत विशेषतः बुद्धि, वाणी, व्यवसाय, संतान सुख, और त्वचा संबंधी रोगों के निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है. शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, बुधवार को गणपति की उपासना करने से जीवन की जटिलताएं सरल होती हैं. पुराणों में बताया गया है कि भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से बुध समेत सभी ग्रहों के दोष दूर होते हैं. आइए जानते हैं बुधवार व्रत के फायदे और पूजा विधि…
2 जुलाई को शुभ योग
दृक पंचांगानुसार, 2 जुलाई को सप्तमी तिथि सुबह 11 बजकर 58 मिनट तक रहेगी, फिर उसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी. उदिया तिथि को मानते हुए इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है और राहुकाल का समय 12 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 02 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. 2 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा और मिथुन राशि में सूर्य और गुरु की युति से गुरु आदित्य योग भी बना रहेगा.
बुधवार व्रत का महत्व
बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से सभी विघ्न व बाधाएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. साथ ही कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति भी मजबूत रहती है, जिससे नौकरी व कारोबार में अच्छी सफलता भी मिलती है. स्कंद पुराण के अनुसार बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से बुद्धि, ज्ञान और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
बुधवार व्रत पूजा विधि व मंत्र
बुधवार का व्रत करने से बुध ग्रह से संबंधित दोष भी दूर होते हैं. व्रत शुरू करने के लिए आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें. एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें, फिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की ओर मुख करके आसन पर बैठें. इसके बाद श्री गणेश को दूर्वा और पीले पुष्प अर्पित करें, साथ ही बुध देव को हरे रंग के वस्त्र चढ़ाएं. पूजा के दौरान श्री गणेश और बुध देव के “ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ. निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” मंत्रों का जाप करें. फिर व्रत कथा सुनें और उनकी पूजा करें. अंत में, श्री गणेश को हलवे का भोग लगाएं और फिर श्री गणेश व बुध देव की आरती करें. उसके बाद आरती का आचमन करें.
बुधवार को इन चीजों से रहें दूर
पूजा समाप्त होने पर भोग को प्रसाद के रूप में सभी में बांट दें. शाम के समय फलाहार से व्रत का पारण करें. पूजा अर्चना करने के बाद यथासंभव गरीबों को दान अवश्य करें. इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना और तेल मालिश करना वर्जित माना गया है. व्रत का उद्यापन 12 व्रतों के बाद किया जाता है.
श्री गणेश जी आरती (Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Aarti )
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
सावन के पहले सोमवार पर बन रहे हैं 6 दुर्लभ संयोग, इस शुभ समय में करें पूजा, भोलेनाथ बरसाएंगे कृपा!
2 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना आने वाला है, जो भगवान भोलेनाथ को बेहद प्रिय है. इस पवित्र महीने में शिव भक्त खासतौर पर व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं. इस बार सावन का पहला सोमवार बेहद खास रहने वाला है क्योंकि ग्रह-नक्षत्रों की ऐसी स्थिति बन रही है, जो बहुत शुभ मानी जाती है. 14 जुलाई को सावन का पहला सोमवार पड़ेगा और इस दिन कुल 6 विशेष योग एक साथ बन रहे हैं. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि करीब 100 साल बाद सावन के पहले सोमवार पर ऐसा अद्भुत संयोग बनने जा रहा है.
11 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत हो रही है, जो 9 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान हर सोमवार शिव भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करेंगे. खास बात यह है कि इस बार सावन के पहले सोमवार को प्रीति योग, आयुष्मान योग, सुकर्मा योग, शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग एक साथ बन रहे हैं. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ये छह योग सावन के पहले सोमवार का महत्व हजारों गुना बढ़ा देते हैं. इसलिए इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होगी.
इस तरह करें पूजा
ज्योतिषियों का मानना है कि सावन के पहले सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान शिव का षोडशोपचार, दशोपचार या राजोपचार विधि से पूजन करें। जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल आदि अर्पित करना अत्यंत फलदायी रहता है.
इन शुभ समय पर करें पूजा
हिंदू पंचांग के मुताबिक, सावन के पहले सोमवार पर सुबह 10 बजे से रात 10:30 बजे तक प्रीति योग रहेगा. इसके अलावा दोपहर 12:18 बजे से 1:51 बजे तक आयुष्मान योग का संयोग रहेगा. दोपहर 1:33 बजे से 2:33 बजे तक सुकर्मा योग बन रहा है. वहीं शाम 5:19 बजे से रात 7:15 बजे तक शिव योग का संयोग रहेगा. इन शुभ योगों के दौरान भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है.
सावन का हर दिन बनेगा शुभ, मिलेगा पुण्य
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब किसी एक दिन में 4 या उससे ज्यादा शुभ योग बनते हैं, तो वह दिन विशेष रूप से पुण्यकारी हो जाता है. इस दिन शिवजी की सच्चे मन से पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होगा और जीवन की हर कठिनाई दूर होगी.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 02 जुलाई 2025)
2 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य-व्यवसाय गति उत्तम बनेगी, समय पर कार्य करें।
वृष राशि :- धन प्राप्ति के योग बनेंगे, नवीन मैत्री मंत्रणा प्राप्त होगी, समय का ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र सहायक रहेगा, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, रुके कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- सामाजिक मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, कार्य कुशलता से संतोष, रुके कार्यों पर ध्यान अवश्य दें।
सिंह राशि :- सोचे कार्य परिश्रम से समय पर पूर्ण होंगे, व्यवसाय गति उत्तम होगी, स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, कार्य कुशलता से संतोष होगा, प्रयास से समस्या का समाधान होगा।
तुला राशि :- दैनिक कार्यगति उत्तम बनेगी तथा व्यवसायिक चिंता अवश्य ही बनेगी, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार होगा, असमंजस का वातावरण रहेगा, कार्य अवरोध होगा, सफलता मिलेगी।
धनु राशि :- स्थिति अनियंत्रित रहेगी, धैर्य एवं शांति से कार्य पर नियंत्रण अवश्य करें, समय का ध्यान रखें।
मकर राशि :- मानसिक चिन्ता, स्वाभाव में मानसिक उद्विघ्नता अवश्य ही बनेगी, समय स्थिति को देखकर कार्य करें।
कुंभ राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, कष्टकारी परिस्थिति रहेगी।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यकुशलता से संतोष होगा, परिश्रम से लाभ अवश्य होगा।
काले तिल के ये 3 टोटके एक बार जरूर आज़माएं, शनि दोष और दुख-दर्द दोनों होंगे दूर, साढ़ेसाती से भी मिलेगी राहत!
1 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनिवार का दिन माना जाता है न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित. जिनके जीवन में दुख-दर्द, रुकावटें या आर्थिक परेशानी लगातार बनी रहती हैं, उनके लिए शनिवार का दिन उम्मीद की किरण जैसा हो सकता है. खासतौर पर अगर आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं, तो इस दिन कुछ आसान उपाय करके शनिदेव की कृपा पाई जा सकती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
पुराने समय से ही यह मान्यता रही है कि शनिदेव को काले तिल बहुत प्रिय होते हैं. इन्हें शक्ति का प्रतीक माना गया है और इनका इस्तेमाल कई धार्मिक उपायों में होता है. यहां हम बता रहे हैं ऐसे तीन असरदार उपाय, जिनमें से किसी एक को भी शनिवार के दिन श्रद्धा से करने पर अच्छे फल मिल सकते हैं.
1. शनिदेव को काले तिल और तेल से दीपक अर्पित करें
शनिदेव को सरसों का तेल और काले तिल बहुत पसंद हैं. इस उपाय को करने से नकारात्मक असर कम होता है और शनि की दशा शांत होती है.
कैसे करें:
1. शनिवार शाम को नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें.
2. घर में या शनि मंदिर में शनिदेव के सामने एक दीपक जलाएं.
3. इस दीपक में सरसों का तेल डालें और उसमें थोड़े से काले तिल मिला लें.
4. दीपक जलाने के बाद “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें.
5. चाहें तो शनि चालीसा का पाठ भी करें और अपने दुख-दर्द दूर करने की प्रार्थना करें.
2. काले तिल का दान करें
दान को सबसे सरल और फलदायक उपाय माना गया है. काले तिल का दान करने से दुर्भाग्य टलता है और जीवन में सुख-शांति आती है.
कैसे करें:
1. शनिवार को सुबह या शाम के समय एक मुट्ठी काले तिल लें.
2. इसे किसी गरीब, जरूरतमंद या भिखारी को दें.
3. चाहें तो किसी शनि मंदिर में भी यह तिल अर्पित कर सकते हैं.
4. यह उपाय खासतौर पर आर्थिक परेशानी दूर करने में मदद करता है.
3. काले तिल वाला जल पीपल को चढ़ाएं
पीपल का पेड़ धर्म और आस्था दोनों का प्रतीक है. इसमें शनिदेव समेत कई देवताओं का वास माना जाता है.
कैसे करें:
1. शनिवार सुबह स्नान के बाद एक लोटा साफ जल लें.
2. उसमें थोड़े से काले तिल मिलाएं.
3. इस जल को किसी पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करें.
4. जल चढ़ाते समय “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र बोलें.
5. इसके बाद पीपल की सात परिक्रमा करें.
उपाय करते समय इन बातों का ध्यान रखें
1. मन साफ और श्रद्धा से भरपूर होना चाहिए.
2. शनिवार को नशा या मांसाहार से बचें.
3. पूरी निष्ठा के साथ शनि देव को याद करें.
4. उपाय करने से पहले अपने पंडित या ज्योतिषी की सलाह भी ले सकते हैं.
बेटी की विदाई पर क्यों दिया जाता है खोइछा? पंडित जी से जानिए हर चीज़ के पीछे छिपा गहरा मतलब
1 Jul, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शादी सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं होता, यह दो परिवारों का रिश्ता भी बनाता है और जब बात बेटी की विदाई की आती है, तो हर आंख नम हो जाती है. लेकिन इस भावुक मौके पर एक रस्म होती है जो बेटी को सिर्फ चीजें नहीं देती, बल्कि उसके नए जीवन के लिए ढेरों आशीर्वाद साथ भेजती है. इस रस्म को खोइछा कहा जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
बिहार समेत पूर्वी भारत के कई इलाकों में यह परंपरा बहुत मायने रखती है. जब बेटी अपने ससुराल के लिए रवाना होने लगती है, तो मां या घर की कोई बड़ी महिला उसकी गोद में चुनरी या साड़ी का पल्लू फैलाकर उसमें कुछ चीजें डालती है. इसे खोइछा देना कहते हैं. माना जाता है कि इसमें जो भी रखा जाता है, उसका जुड़ाव बेटी के आने वाले जीवन से होता है. आइए जानते हैं, खोइछा में क्या-क्या रखा जाता है और क्यों.
हल्दी की गांठ – नए जीवन के लिए शुभ शुरुआत
हल्दी को हमेशा से ही शुभ माना गया है. यह न सिर्फ शरीर को साफ रखने वाली चीज़ है, बल्कि इसे सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है. जब मां अपनी बेटी के खोइछा में साबुत हल्दी की गांठ रखती है, तो यह इशारा होता है कि उसका जीवन हमेशा सकारात्मक और ऊर्जा से भरा रहे. यह बुरी नजर से भी बचाव करती है.
दूर्वा घास – रिश्ते की हरी-भरी उम्र
दूर्वा घास को गणेश जी को अर्पित किया जाता है, और यह शुभ मानी जाती है. जब इसे खोइछा में रखा जाता है, तो इसका मतलब होता है कि बेटी का वैवाहिक जीवन हमेशा हरा-भरा, खुशहाल और स्थिर बना रहे. यह एक तरह से प्रेम और अपनापन बनाए रखने का प्रतीक होता है.
कुमकुम – रिश्तों में रंग भरने वाला संकेत
कुमकुम सिर्फ सजने-संवरने की चीज़ नहीं, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. जब खोइछा में इसे रखा जाता है, तो यह दुआ होती है कि बेटी के रिश्ते हमेशा मजबूत रहें और उसका वैवाहिक जीवन रंगों से भरा हो.
चावल और पैसे – सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
चावल को समृद्धि और स्थिरता से जोड़ा जाता है. जब मां बेटी के खोइछा में चावल रखती है, तो वह उसके जीवन में बरकत की कामना करती है. साथ में कुछ पैसे भी रखे जाते हैं, ताकि बेटी के नए घर में कभी आर्थिक तंगी न हो और उसका जीवन सदा भरा-पूरा बना रहे.
धरोहर: खंडवा का 12वीं सदी का रहस्यमयी शिव मंदिर, जहां 24 घंटे गूंजता है "ॐ नमः शिवाय"
1 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खंडवा की ऐतिहासिक और धार्मिक धरती पर स्थित महादेवगढ़ शिव मंदिर एक ऐसी विरासत है, जो न सिर्फ आध्यात्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि मध्यकालीन स्थापत्य कला और संस्कृति की जीवित धरोहर भी है. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां 24 घंटे \”ॐ नमः शिवाय\” का अखंड जाप होता है, जो श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आस्था और शांति का केंद्र बन चुका है.
12वीं सदी की धरोहर
खंडवा शहर के इतवारा बाजार क्षेत्र में स्थित यह मंदिर 12वीं शताब्दी का माना जाता है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह मंदिर परमार कालीन स्थापत्य शैली में निर्मित है, जो मालवा क्षेत्र में फैली कई प्राचीन संरचनाओं से जुड़ा है. मंदिर की प्राचीनता का प्रमाण खुद मंदिर में मौजूद पत्थरों पर उकेरे गए चित्र, नक्काशी, और शिवलिंग की शैली से मिलता है.
माना जाता है कि यह शिवलिंग स्वयंभू है, यानी यह पृथ्वी से स्वयं प्रकट हुआ था. वर्षों तक यह मंदिर अज्ञात अवस्था में रहा, समय के थपेड़ों ने इसकी पहचान को लगभग मिटा दिया था. कई वर्षों तक यहां भैंसों का तबेला था, और पास बहने वाली नदी को भी अवैध निर्माणों ने बाधित कर दिया था.
मंदिर को पुनर्जीवित करने की कानूनी लड़ाई
जब मंदिर की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी, तो इस धरोहर को बचाने के लिए आवाज उठाई गई. सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद लियाकत पवार ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है और एक ऐतिहासिक स्थल खतरे में है. इसके बाद न्यायालय के आदेश पर जिला प्रशासन ने इंदौर पुरातत्व विभाग से मंदिर का सर्वेक्षण करवाया. 13 फरवरी 2015 को तकनीकी सहायक डॉ. जी. पी. पांडे द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि यह मंदिर 12वीं शताब्दी की संरचना है, और इसे ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए.
संरचना और धार्मिक महत्व
वर्तमान में यह मंदिर एक टीन शेड के नीचे स्थित है, लेकिन इसके भीतर आज भी मूल शिवलिंग, खंडित नंदी की मूर्ति, और प्राचीन खंभा मौजूद हैं, जो इसकी गौरवशाली स्थापत्य परंपरा की गवाही देते हैं. पत्थरों की उकेरन और मूर्तियों की शैली यह स्पष्ट करती है कि यह स्थान परमार काल के दौरान एक प्रमुख धार्मिक स्थल रहा होगा.
यहां विशेष बात यह है कि सावन मास में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है. स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं, दूर-दराज से भी लोग यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. सावन के दौरान 24 घंटे \”ॐ नमः शिवाय\” का अखंड जाप होता है, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है.
जनभागीदारी और संरक्षण
मंदिर को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सराहनीय रही है. यह स्थल अब सिर्फ पूजा का स्थान नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता और विरासत संरक्षण का प्रतीक बन चुका है. मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है और सामाजिक आयोजन भी शुरू हो गए हैं. खंडवा का यह महादेवगढ़ शिव मंदिर एक ऐसी प्राचीन धरोहर है, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि एक जागरूक समाज और कानूनी प्रक्रिया के बलबूते पुनः अस्तित्व में आया है. इस मंदिर की विशेषता सिर्फ इसका ऐतिहासिक महत्व ही नहीं, बल्कि अखंड मंत्र जाप और स्थानीय श्रद्धा में भी निहित है. यह स्थान हमें यह सिखाता है कि यदि समाज जागरूक हो, तो धरोहरों को बचाया जा सकता है, और इतिहास को फिर से जीवंत किया जा सकता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 01 जुलाई 2025)
1 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यापार में प्रगति, यात्रा में सुख, खर्च अधिक होगा तथा कार्य अवरोध होगा।
वृष राशि :- कलह, अभीष्ट सिद्धी, धन लाभ, चिन्ता, शरीर सुख, मांगलिक कार्य में अवरोध होगा।
मिथुन राशि :- भ्रमण, व्यापार में लाभ, रक्त-विकार, सामाजिक कार्य में बाधा, धन व्यय होगा।
कर्क राशि :- विद्या बाधा, व्यापार मध्यम, धार्मिक एवं शुभ कार्यों में व्यय होगा, कार्य पर ध्यान दें।
सिंह राशि :- स्त्री-संतान सुख, यात्रा बाधा, कार्य में आर्थिक सुधार अवश्य होगा, समय पर कार्य करें।
कन्या राशि :- भूमि लाभ, प्रवास, कष्ट, व्यापार बढ़ेगा, शुभ समाचार प्राप्ति से प्रसन्नता होगी।
तुला राशि :- करोबार मध्यम, सफलता, स्त्री कष्ट, व्यर्थ अनाप-शनाप व्यय होगा, परेशानी बढ़ेगी।
वृश्चिक राशि :- अल्प लाभ, खेती की चिन्ता, शिक्षा की स्थिति सामान्य लाभप्रद रहेगी, धैर्य रखें।
धनु राशि :- सुख, उन्नति से खेती के कुछ अच्छे योग बनेंगे, हानि की संभावना, समय पर कार्य करें।
मकर राशि :- हर्ष, भूमि लाभ, यश, कारोबार बढ़ेगा, करोबार में सहयोगी सहायक रहेंगे।
कुंभ राशि :- हानि, राजभय, स्त्री सुख, कार्यसिद्धी, जमीन-जायजाद, गृहकार्य में लाभ होगा।
मीन राशि :- विद्या बाधा, विवाद, चोरों से सावधान रहें, पारिवारिक लोगों से लाभ तथा सहायता मिलेगी।
सावन मास में नहीं होते हैं ये काम, 11 जुलाई से पहले निपटा लें फिर नहीं मिलेगा मौका
30 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव को प्रिय मास सावन की शुरुआत 11 जुलाई दिन शुक्रवार से हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त को होगा. यह पूरा माह भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है इसलिए इस दौरान कुछ ऐसे कार्य हैं, जो सावन मास में नहीं करने चाहिए अन्यथा इस मास में किया गया व्रत पूजन व्यर्थ चला जाता है
सावन मास का हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व होता है. भगवान शिव को समर्पित सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई दिन शुक्रवार से हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त को होगा. सावन के पूरे महीने विशेष शिव पूजा-अर्चना, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है. शिव पुराण के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव और माता पार्वती की हर रोज पूजा अर्चना करने से सभी दुख व कष्ट से मुक्ति मिलती है और हर मनोकामना पूरी होती है. हालांकि इस पवित्र महीने में कुछ ऐसे कार्य हैं, जिन्हें परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्जित माना गया है. आइए जानते हैं कौन-कौन से काम सावन के महीने में नहीं करने चाहिए...
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सावन मास में चातुर्मास रहता है इसलिए इस मास में कुछ विशेष कार्यों की मनाही होती है. इस दौरान आप शादी-विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए. इसलिए सावन मास शुरू होने से पहले ही शुभ व मांगलिक कार्य संपन्न कर लें. सावन मास में इन कार्यों को करने पर सफलता नहीं मिलती है.
सावन का पूरा माह धार्मिक होता है और इस काल में चंद्रमा की स्थिति और सोम का योग भगवान शिव के प्रभाव को जाग्रत करता है. सावन मास में नाखुन, दाढ़ी, मूंछ और सिर के बाल कटवाना शुभ नहीं माना जाता है. इस मास में शारीरिक शुद्धि और मानसिक शांति के लिए बाहरी श्रृंगार और सौंदर्यीकरण से बचना चाहिए. यह शरीर के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकता है.
सावन मास में नई शुरुआत करना जैसे नया घर या फ्लैट लेना, नया वाहन खरीदना, नए बिजनस की शुरुआत करना या जमीन-जायदाद का सौदा करना अशुभ फल दे सकता है. इसलिए अगर आपको ये सभी कार्य करना है, तो पहले ही निपटा लें, ताकि सावन मास में किसी भी तरह की समस्या ना हो. चातुर्मास में स्थिरता और शांति बनाए रखना ही श्रेयस्कर होता है.
जो लोग घर में तामासिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज रखते हैं वो सावन मास शुरू होने से पहले ही इन सभी चीजों को घर से निकाल दें. साथ ही मांस-मदिरा, अंडे भूलकर भी घर में ना रखें. सावन को सात्विकता और संयम का महीना माना जाता है. इस दौरान मांसाहार और शराब पीना वर्जित है क्योंकि ये शरीर और मन को दूषित कर सकते हैं. इससे पूजा का शुभ फल भी नहीं प्राप्त हो पाता है.
सावन मास में कांसे के बर्तन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. सावन शुरू होने से पहले इनको साफ करके रख दें और स्टील के बर्तन निकाल लें. सावन मास में स्टील के बर्तन में भोजन करना उत्तम माना जाता है. सावन मास में शरीर पर तेल लगाने की भी मनाही होती है इसलिए सावन में इन चीजों का प्रयोग करने से बचें.
सावन मास में शिव पूजन के समय कोई गलती ना करें. जैसे शिवलिंग पर तुलसी, केतकी का फूल, हल्दी और कुमकुम अर्पित करना निषेध है. साथ ही ध्यान रखें कि सावन मास में गद्देदार बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए. संभव हो सके तो इस मास में भूमि पर सोना शुभ माना जाता है. सावन मास में सुबह देर से उठना और देर तक सोना सही नहीं माना जाता है और इस मास में दिन के समय सोने से बचें.
सावन मास में पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, साग, तेल या मसालेदार भोजन, मूली, बैंगन, गुड़, कच्चा दूध, कढ़ी, शहद और शक्कर का त्याग कर देना चाहिए. सावन मास में इन चीजों का सावन करने से कई तरह के रौग जन्म ले लेते हैं. साथ ही इश मास में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक माना गया है. सावन मास में अगर कोई आपके दरवाजे पर आए तो उसको भगाना नहीं चाहिए.
चाहते हैं कि आप पर बरसती रहे देवी मां कृपा, तो नवरात्रि के दौरान घर में रखें ये 5 चीजें
30 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कलश स्थापना के आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का 26 जून दिन गुरुवार से शुभारंभ हो गया है. वास्तु में ऐसी कई वस्तुएं बताई गई हैं, जिनका खास संबंध किसी विशेष देवी-देवता या दिन से माना जाता है. वास्तु के अनुसार, देवी से संबंधित ये 5 चीजें नवरात्रि के दौरान घर में लाई जाएं तो देवी प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार पर देवी की विशेष कृपा बनी रहती है. अब सवाल है कि आखिर गुप्त नवरात्रि में कौन सी चीजें घर में रखना शुभ होगा? गुप्त नवरात्रि में देवी मां की कृपा पाने के लिए क्या करें?
गुप्त नवरात्रि के दौरान घर में इन 5 चीजों को रखना शुभ
कमल का फूल या तस्वीर: ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, कमल का फूल देवी लक्ष्मी को विशेष रूप से प्रिय है. नवरात्रि के दौरान यदि घर में कमल का फूल या उससे संबंधी कोई तस्वीर लगाई जाए तो देवी लक्ष्मी की कृपा घर-परिवार पर हमेशा बनी रहती है.
चांदी या सोने का सिक्का: नवरात्रि के दौरान घर में चांदी या सोने का सिक्का लाना शुभ माना जाता है. सिक्के पर यदि देवी लक्ष्मी या भगवान गणेशजी का श्रीचित्र अंकित हो तो और शुभाशुभ रहेगा.
मां लक्ष्मी की तस्वीर: घर में हमेशा धन-धान्य बनाए रखना चाहते हैं तो नवरात्रि के दौरान देवी लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर घर में लाएं, जिसमें कमल के फूल पर माता लक्ष्मी बैठी दिखाई दे रही हों. साथ ही, उनके हाथों से धन की वर्षा हो रही हो.
मोर पंख: ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, देवी के सरस्वती स्वरूप में देवी का वाहन मोर माना जाता है, इसलिए नवरात्रि के दौरान घर में मोर पंख ला कर उसे मंदिर में स्थापित करने से कई फायदे होते हैं.
सोलह शृंगार का सामान: नवरात्रि के दौरान सोलह-शृंगार का सामान घर लाना चाहिए और उसे घर के मंदिर में स्थापित कर देना चाहिए. ऐसा करने से देवी मां की कृपा हमेशा घर पर बनी रहती है.
हर दिन चांदी, लेकिन इस दिन सोने में चमकते हैं बाबा... दुर्लभ दर्शन को लगी लंबी कतारें, एक झलक पाने की जिद!
30 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लोक देवता बाबा रामदेव की कर्मस्थली रामदेवरा में आषाढ़ शुक्ल दूज पर आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला. सालभर में केवल इसी दिन बाबा को सोने का मुकुट धारण कराया जाता है. इस दुर्लभ दर्शन के लिए रामदेवरा धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. जैसे ही बाबा को सोने का मुकुट पहनाया गया, मंदिर परिसर ‘जय बाबा री’ के नारों से गूंज उठा.
पोकरण स्थित रामदेवरा धाम पर परंपरागत तरीके से बाबा रामदेव को अभिषेक के बाद मुकुट धारण करवाया गया. सामान्य दिनों में चांदी का मुकुट पहनाने की परंपरा है, लेकिन आषाढ़ शुक्ल दूज पर वर्षों पुरानी परंपरा के तहत सोने का मुकुट धारण कराया जाता है. यह अवसर बेहद दुर्लभ माना जाता है और भक्त इस दिन को बेहद पावन मानते हैं.
भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था
दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई. बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन के लिए लगभग 1 किलोमीटर लंबी कतारों में श्रद्धालु खड़े रहे. कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था बाबा रामदेव समाधि समिति द्वारा की गई. दर्शन के बाद श्रद्धालु पास स्थित पवित्र तालाब में स्नान करने पहुंचे.
रामसा पीर के दरबार में सभी धर्मों का सम्मान
बाबा रामदेवजी का मंदिर धार्मिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है. यह स्थान हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करता है. इसलिए बाबा को रामसा पीर भी कहा जाता है. यहां अमीर-गरीब, हिंदू-मुस्लिम सभी श्रद्धालु समान भाव से सिर झुकाते हैं. यही कारण है कि रामदेवरा धाम पूरे भारत में आस्था का केंद्र बना हुआ है.
3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू, क्या अब करवा सकते हैं रजिस्ट्रेशन
30 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर हर महादेव! अमरनाथ यात्रा 2025 की शुरुआत 3 जुलाई दिन गुरुवार से हो रही है. अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रकिया 14 अप्रैल से ही शुरू हो चुकी है. अगर आप अमरनाथ यात्रा पर जाना चाहते हैं और अब भी ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. इसके लिए आपको बेहद सिंपल प्रोसेज फॉलो करना है. हिंदू धर्म में अमरनाथ यात्रा का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि अमरनाथ यात्रा करने से व्यक्ति के सभी दुख व परेशानी दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. साल 2025 में अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से होगी और सावन पूर्णिमा के दिन यानी 9 अगस्त को समापन होगा. आइए जानते हैं अमरनाथ यात्रा रजिस्ट्रेशन की संपूर्ण प्रक्रिया के बारे में…
अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन ऐसे करवाएं – Amarnath Yatra Online Registration
सबसे पहले आप यह जान लें कि अमरनाथ यात्रा की रजिस्ट्रेशन फी 220 रुपए है, फिर चाहें आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाएं या ऑफलाइन. अमरनाथ यात्रा के लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने पूरे भारत में 533 से ज्यादा बैंक ब्रांच तय किए हैं. आप Punjab National Bank (PNB), Jammu & Kashmir Bank, YES Bank, ICICI Bank और SBI Bank में जाकर ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. आपको इन शाखाओं में जाकर यात्रा फॉर्म भरना होगा और फिर मेडिकल सर्टिफिकेट और आईडी दिखानी होगी. इसके बाद शुल्क जमा करना होगा. इसके साथ ही आप महाजन हॉल, पंचायत भवन और वैष्णवी धाम जैसे जगहों पर टोकन पर्चियां बांटी जाती हैं. इसके बाद अगले दिन मेडिकल जांच के लिए आप सरस्वती धाम जाएं, फिर आप विशिष्ट स्थान पर से यात्रा के लिए आरएफआईडी कार्ड ले लें.
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ऐसे करवाएं – Amarnath Yatra Ofline Registration
अमरनाथ यात्रा के लिए अगर आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं तो आप https://jksasb.nic.in — (श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट) पर जाएं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए सभी डॉक्यूमेंट्स पहले ही अपने पास रख लें, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID, 4 पासपोर्ट साइज फोटो और Compulsory Health Certificate (CHC). फिर आप Online Servies पर जाकर Yatra Permit Registration पर क्लिक करें. यात्रा के संबंध में दिशा निर्देश आएंगे, इनको अच्छे से पढ़ लें और फिर I Agree पर क्लिक करें, Register पर क्लिक करें. इसके बाद एक फॉम खुलेगा, जहां यात्रा का रूट, यात्रा की तारीख, आपका नाम, मोबाइल नंबर, माता-पिता का नाम, डेट ऑफ बर्थ, इमरजेंसी नंबर, ईमेल, पासपोर्ट साइज फोटो आदि कई चीजों को अपलोड करें. इसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी को बताकर मोबाइल वेरिफाइ करवाएं, 220 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस भरें. रजिस्ट्रेशन पेमेंट हो जाने के बाद पोर्टल से यात्रा रजिस्ट्रेशन पर्मिट डाइनलोड करके अपने पास रख लें.
हेल्थ सर्टिफिकेट (CHC) कैसे बनवाएं?
अमरनाथ यात्रा के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट होना बहुत जरूरी है, बिना इस सर्टिफिकेट यात्रा नहीं कर पाएंगे. यह श्राइन बोर्ड द्वारा अधिकृत चिकित्सालयों से ही प्रमाणपत्र मान्य होता है.दरअसल 15,000 फीट की ऊंचाई पर यात्रा के लिए हृदय, फेफड़े और बीपी की स्थिति ठीक होनी चाहिए. बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी यात्री यात्रा नहीं कर सकता.
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