धर्म एवं ज्योतिष
बस एक गुप्त उपाय से बदल सकती है किस्मत, गुप्त नवरात्रि में जरूर करें ये काम, ग्रह बाधा भी होगी दूर
20 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुप्त नवरात्रि को सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक और साधनात्मक महत्व प्राप्त है. इस दौरान भक्तजन देवी दुर्गा की 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से पूजा करते हैं. इस साल आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रि 26 जून से प्रारंभ होकर 4 जुलाई तक चलेंगे. गुप्त नवरात्रि में विशेष विधि-विधान के साथ पूजन और साधना की जाती है. इस दौरान रात के समय किए गए कुछ गुप्त उपाय अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं. जैसे कि अखंड दीप जलाकर काली मिर्च का प्रयोग, या फिर कपूर व लौंग का धुआं ग्रह कलेश से मुक्ति दिलाता है. यह नवरात्रि साधना और शक्ति की उपासना का शुभ समय माना जाता है.
गृह क्लेश से मुक्ति
दरअसल, अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना और विद्या सीखने वालों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समय होता है. इस दौरान किए गए विशेष उपाय गुप्त रूप से किए जाते हैं और इनका फल भी कई गुना अधिक मिलता है. पंडित कल्कि राम के अनुसार, यदि साधक या कोई भी व्यक्ति गुप्त नवरात्रि की रात में कुछ विशेष उपाय करता है, तो इससे न केवल जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति संभव होती है, बल्कि घर-परिवार में चल रहे कलह और गृह क्लेश से भी मुक्ति मिलती है.
शाम के समय जलाएं अखंड दीप
गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों तक यदि आप अपने घर के मंदिर में नियमित रूप से शाम के समय एक अखंड दीपक जलाते हैं, तो यह बेहद फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता का वास होता है. इसके साथ ही देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे धन-संबंधी समस्याएं भी दूर होने लगती हैं. यह उपाय साधकों और गृहस्थों दोनों के लिए शुभ और लाभकारी माना गया है.
जानें गुप्त उपाय
गुप्त नवरात्रि के दौरान रात में एक कटोरी में थोड़ी सी काली मिर्च लेकर उसे घर के किसी ऐसे कोने में रख दें, जहां किसी की नजर न पड़े. मान्यता है कि यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है. फिर अगली सुबह उस काली मिर्च को या तो किसी निर्जन स्थान पर फेंक दें या घर के बाहर मिट्टी में दबा दें. ऐसा नियमित नौ दिनों तक करने से घर में मौजूद बुरी शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है और पारिवारिक क्लेश से मुक्ति मिलने लगती है. यह उपाय गुप्त रूप से करने पर अधिक प्रभावी माना जाता है.
दुर्गा सप्तशती का करें पाठ
गुप्त नवरात्रि में रात को सोने से पहले एक मिट्टी के दीपक में कपूर और लौंग डालकर पूरे घर में घुमाना बहुत ही शुभ माना जाता है. इससे न केवल घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, बल्कि वातावरण भी शुद्ध होता है और सुख-शांति बनी रहती है. इसके साथ ही गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है. यह पाठ शक्ति की उपासना का सर्वोत्तम माध्यम है, जो जीवन में आ रहे हर प्रकार के संकट, क्लेश और आर्थिक तंगी को दूर करता है. श्रद्धा और नियम से किया गया यह पाठ मानसिक बल भी प्रदान करता है और जीवन में सफलता के मार्ग खोलता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 20 जून 2025)
20 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, मानसिक अशांति एवं कष्ट, मन विक्षुब्ध रहे, विलम्ब से रुके कार्य बनेंगे।
वृष :- चिन्ता ग्रस्त होने से बचें, व्यावसायिक क्षमता अनुकूल अवश्य ही बनेगी, प्रसन्नता बनी रहेगी।
मिथुन :- तनाव व क्लेश, अशांति, असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद होगा, ध्यान अवश्य रखें।
कर्क :- किसी प्रलोभन से बचें, अन्यथा परेशानी में फंस सकते हैं, समय का ध्यान रखें।
सिंह :- तनाव, क्लेश व अशांति, असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद होगा, विचार कर चलेंगे।
कन्या :- विवादग्रस्त होने की संभावना है, सोचे हुए कार्य समय पर हो जायेंगे, सुख प्राप्त होगा।
तुला :- कुटुम्ब की समस्याएं सुलझें, कार्यगति में सुधार, कार्य योजना फलीभूत अवश्य ही होगी।
वृश्चिक :- कार्य कुशलता से संतोष होगा, दैनिक समृद्धि के साधन बनेंगे, व्यावसाय में वृद्धि होगी।
धनु :- अधिकारियों से तनाव, मित्र वर्ग से उपेक्षा से मन अशांत तथा कार्य में बाधा अवश्य होगी।
मकर :- मान-प्रतिष्ठा में आंच आने का समय व भय होगा, कार्य में बाधा होगी, ध्यान रखें।
कुम्भ :- किसी घटना का शिकार होने से बचें, चोट आदि कष्ट का भय अवश्य ही बनेगा।
मीन :- स्त्री वर्ग से हर्ष मिले, बिगड़े कार्य बनेंगे, समय का लाभ ले, कार्य बन ही जायेंगे।
आषाढ़ महीने की गुप्ति नवरात्रि 26 जून से होगी शुरु
19 Jun, 2025 07:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व को बेहद महत्वे दिया गया है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की आराधना के लिए विशेष होते हैं। साल में 4 बार नवरात्रि पड़ती हैं। इनमें से 2 प्रत्यनक्ष नवरात्रि होती हैं और 2 गुप्ति नवरात्रि होती हैं आषाढ़ महीने की गुप्त् नवरात्रि आषाढ़ शुक्ले प्रतिपदा से प्रारंभ होंगी और नवमी को समाप्तर होंगी। इस दौरान 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। इस साल आषाढ़ महीने की गुप्तत नवरात्रि 26 जून से 4 जुलाई 2025 तक चलेंगी।
गुप्ता नवरात्रि का समय बेहद पवित्र होता है। इन 9 दिनों में गलती से भी लहसुन-प्या ज, मांसाहार, शराब, नशीली चीजों का सेवन ना करें। गुप्त नवरात्रि के दौरान केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
प्रत्यपक्ष नवरात्रि में घटस्थाहपना के समय जवारे बोए जाते हैं। आखिरी दिन जवारों का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है लेकिन गुप्ते नवरात्रि में जवारे बोना वर्जित होता है। यदि ऐसा हो तो व्यबक्ति पुण्यि की बजाय पाप का भागीदार बनता है।
गुप्त् नवरात्रि में आमतौर पर मां दुर्गा की तस्वीोर घर में स्थाहपित करके उसकी पूजा की जाती है। साथ ही अखंड ज्यो ति प्रज्वकलित की जाती है। इस दौरान ध्यामन रहे कि मां दुर्गा के रौद्र रूप की तस्वी्र गलती से भी ना लगाएं। ऐसा करने से जीवन में समस्यातएं बढ़ सकती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करना अशुभ माना जाता है। यदि बहुत जरूरी हो तो भगवान से प्रार्थना करके ही यात्रा पर निकलें। साथ ही घर से निकलते समय कुछ कदम आगे बढ़कर वापस आएं और फिर यात्रा शुरू करें।
केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति रहता है परेशान
19 Jun, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यदि जन्म कुंडली में चन्द्रमा किसी भी भाव में अकेला बैठा हो, उससे आगे और पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम दोष बनता है। केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा परेशान होता है। उसे हमेशा एक अज्ञात भय रहता है। उसके जीवन काल में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। आर्थिक रूप से ऐसे व्यक्ति कमजोर ही रहते हैं। जीवन में अनेकों बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति खुद को बहुत समझदार समझते हैं। उन्हें लगता है की उनसे अधिक बुद्धिमान व्यक्ति कोई नहीं है। ऐसे व्यक्ति चिड़चिड़े और शक्की स्वभाव के होते हैं। संतान से कष्ट पाते हैं परन्तु दीर्घायु होते हैं। कुछ परिस्थितियों में केमद्रुम योग भंग या निष्क्रिय भी हो जाता है।
जन्म कुंडली में केमद्रुम दोष हो परन्तु चन्द्रमा के ऊपर सभी ग्रहों की दृष्टि हो तो केमद्रुम दोष के दुष्प्रभाव निष्क्रिय हो जाते हैं।-यदि चन्द्रमा शुभस्थान (केंद्र या त्रिकोण) में हो तथा बुद्ध, गुरु एवं शुक्र किसी अन्य भाव में एक साथ हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।-यदि दसवें भाव में उच्च राशि का चन्द्रमा केमद्रुम दोष बना कर बैठा हो परन्तु उस पर गुरु की दृष्टि हो तो भी केमद्रुम दोष भंग माना जायेगा।यदि केंद्र में कहीं भी चन्द्रमा केमद्रुम दोष का निर्माण कर रहा हो परन्तु उस पर सप्तम भाव से बली गुरु की दृष्टि पड़ रही हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।
अंगूठा बता देता कई राज
19 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सभी को भविष्य में क्या छिपा है यह राज जानने की जिज्ञासा होती है। जन्मकुंडली के साथ ही हाथ की रेखाएं देखकर भी भविष्य के राज जाने जा सकते हैं। हस्तरेखा विज्ञान में अंगूठे को चरित्र का आइना कहा जाता है। आप इसे देखकर व्यक्ति के बारे में कई बातें जान सकते हैं। व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, बचत, काम वासना और रोगों का पता भी अंगूठे से लग जाता है।
अंगूठा लंबा
जिनका अंगूठा लंबा होता है वह बुद्धिमान और उदार होते हैं। ऐसे व्यक्ति शौकीन भी खूब होते हैं। अगर अंगूठा तर्जनी उंगली के दूसरे पोर तक पहुंच रहा है तो व्यक्ति नेक होता है और कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता।
अंगूठा छोटा
अंगूठा छोटा होना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे लोगों के उधार और कर्ज देने से बचना चाहिए क्योंकि पैसा डूबने का डर रहता है। इन्हें जीवन में कई बार हानि उठानी पड़ती और पारिवारिक जीवन में भी उथल-पुथल मचा रहता है।
अंगूठा अधिक चौड़ा
अगर अंगूठा अधिक चौड़ा हो तो व्यक्ति खर्चीले स्वभाव का होता है। ऐसे लोग अक्सर कोई न कोई बुरी लत अपना लेते हैं।
कम खुलने वाला अंगूठा
कम खुलने वाला अंगूठा हस्तरेखा विज्ञान में अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे लोगों के हर काम में बाधा आती रहती है और सफलता देर से मिलती है। ऐसे लोग चाहकर भी कमाई के अनुसार बचत नहीं कर पाते हैं।
ऊपर मोटा और गोल हो तो
अगर अंगूठा नीचे पतला और ऊपर मोटा और गोल हो तो ऐसा व्यक्ति शंकालु होते और इन्हे भी अपने काम में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन हाथ भारी हो तो उन्नति करते हैं।
अंगूठा हो लंबा पतला तो
अंगूठा पतला और लंबा हो तो व्यक्ति शांत स्वभाव का होता है। ऐसे व्यक्ति अपने काम वासना पर नियंत्रण रखने में कुशल होते हैं। इन्हें व्यवहारकुशल भी माना जाता है। ऐसे लोग भावुक भी खूब होते हैं।
ऐसे लोग धनी होते हैं
जिनका अंगूठा ज्यादा खुलता है ऐसे लोग धनी होते हैं। अपने व्यक्तित्व के कारण इन्हें समाज में खूब सम्मान मिलता है।
गुरुवार को न करें ये काम
19 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय सभ्यता में हर दिन का अलग महत्व है। खासतौर से गुरुवार को तो धर्म का दिन मानते हैं। गुरु को लेकर एक भी मान्यता है कि यह दूसरे ग्रहों के मुकाबले ज्यादा भारी होते है। इसलिए इस दिन कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे शरीर या घर में हल्कापन आता हो क्योंकि गुरु के प्रभाव में आने वाले कारक तत्वों का प्रभाव हल्का हो जाता है. वो काम कौन से हैं, जिन्हें गुरुवार को नहीं करना चाहिए, आप भी जानिये।
ना बाल धोएं ना कटाएं
शास्त्रों के अनुसार महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति और संतान का कारक होता है। इसका मतलब यह है कि गुरु ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में गुरुवार को महिलाएं अगर अपना सिर धोती हैं या बाल कटाती हैं तो इससे बृहस्पति कमजोर होता है और पति व संतान की उन्नति रुक जाती है।
गुरु ग्रह को जीव भी कहा जाता है। जीव यानी कि जीवन। जीवन से तात्पर्य है आयु. गुरुवार को नाखून काटने और शेविंग करने से गुरु ग्रह कमजोर होता है, जिससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उम्र में से दिन कम हो जाता है।
घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोने, कबाड़ घर से बाहर निकालने, घर को धोने या पोछा लगाने से बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर शुभ प्रभाव में कमी आती है।
गुरुवार को नारायण का दिन होता है, ये बात तो ठीक है. पर नारायण तभी प्रसन्न होंगे जब आप उनके साथ उनकी पत्नी यानी कि लक्ष्मी जी की भी पूजा करेंगे। गुरुवार को लक्ष्मी-नारायण दोनों की एक साथ पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं और पति-पत्नी के बीच कभी दूरियां नहीं आतीं। साथ ही धन में भी वृद्धिल होती है।
सड़क पर मिली हुई ये चीजें देती हैं जीवन में बदलाव के संकेत
19 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आम तौर पर कई बार ऐसा होता है कि चलते-चलते रास्ते में बहुत सी चीज़े मिलती है । कई बार रास्ते में पैसे गिरे हुए मिल जाते है या कई बार सिक्के तो ऐसे में ज्यादातर लोग इन्हें बिना कुछ सोचे तुरंत उठा कर अपने पास रख लेते है या कुछ लोग इन्हें जरूरतमंदों को दान कर देते हैं या मंदिर में चढ़ा देते हैं। इनके अलावा भी कई चीज़े होती है जैसे फूल, मोर पंख, अनाज जो कई बार रास्ते में नीचे गिरे हुए मिलती है। वास्तु शास्त्र की मानें तो ऐसा देखा जाता है कि सड़क पर गिरी हुई ये चीज़े आपके आने वाले जीवन में बदलाव का कोई संकेत हो सकती है। कई चीज़े ऐसी होती है जिनका रास्ते पर मिलना शुभ होता है। लेकिन आखिर कौन सी है ये चीज़े और क्या है इनका मतलब। तो आइए जानते हैं कि ऐसी ही कुछ चीज़ों के बारे में-
सबसे पहली चीज की बात करें तो अगर रास्ते में चलते वक्त अचानक से कोई नोट या सिक्का पड़ा हुआ दिखें तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। इसका मतलब होता है कि जल्द ही कोई धन से संबंधित लाभ हो सकता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि अगर किसी काम के लिए जाते समय रास्ते में सिक्का या नोट मिले तो इसका मतलब ये होता है कि आपको उस काम में सफलता ज़रूर मिलेगी या अगर किसी वजह से कोई काम अटका हुआ था या अधूरा था तो वो भी पूरा हो जाएगा।
अगर रास्ते में कहीं मोर पंख पड़ा हुआ दिखें या मिल जाए तो ऐसा माना जाता है कि ये सफलता और सौभाग्य की ओर इशारा करता है। मोर पंख को श्री कृष्ण का प्रिय माना जाता है इसलिए इसे मंदिर में रखना भी शुभ माना जाता है।
अगर किसी को सड़क या रास्ते पर जाते समय अचानक से कोई सफेद कौड़ी या गोमती चक्र पड़ा हुआ मिल जाए तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन दोनों चीजों का संबंध सीधे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु से माना गया है, ऐसे में यदि ये दोनो चीज़े रास्ते में पड़ी हुई दिख जाए तो इसे धन और समृद्धि का संकेत माना जाता है।
इसके अलावा अगर रास्ते में चलते समय पीपल का ताज़ा पत्ता या फूल मिले तो इसे भी शुभ संकेत माना गया है। कहा जाता है ऐसा होने पर इसका मतलब होता है कि आपके जीवन में कोई शुभ अवसर आने वाला है। अगर सड़क पर अन्न या अनाज पड़ा हुआ मिले तो ये भी बेहद शुभ होता है। इसे घर में सुख शांति और समृद्धि का संकेत माना जाता है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 19 जून 2025)
19 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- इष्ट मित्रों से लाभ होगा, भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी तथा रुके कार्य बन जायेंगे|
वृष :- अपनों से तनाव, प्रत्येक कार्य में बाधा, लाभकारी योजना हाथ से निकल जायेगी|
मिथुन :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, तथा कार्य वृत्ति में सुधार होगा, रुके कार्य बनेंगे|
कर्क :- कार्य योजना फलीभूत होगी, दैनिक सफलता के कार्य संभव होंगे तथा तनाव से बचें रहे|
सिंह :-इष्ट मित्रों से सुख वर्धक हो, मनोबल उत्साह वर्धक बना ही रहेगा, कार्य गति में सुधार होगा|
कन्या :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, दैनिक व्यवसाय में सुधार होगा, चिन्ता मुक्त होगे|
तुला :- आर्थिक योजना सफल होगी, समय पर सोचे कार्य बने तथा किसी के धोखे से बचेंगे|
वृश्चिक :- दूसरों के कार्य में भटकना पड़ेगा, समय को बचाकर चलने से लाभ अवश्य ही होगा|
धनु :- दैनिक कार्य गति में सुधार , कार्य योजना फलीभूत होगी, कार्य का ध्यान रखे|
मकर :- किसी का कार्य बनने से संतोष, चिन्ता निवृत्ति व्यावसायिक स्थिति में सुधार अवश्य होगा|
कुम्भ :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बैचेनी, उदर विकार, विद्या बाधा, कार्य बाधा अवश्य ही होगी|
मीन :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, मित्रों का सहयोग अवश्य मिलेगा|
जून मासिक शिवरात्रि कब है? बन रहे 4 शुभ संयोग, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व
17 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जून की मासिक शिवरात्रि आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी. हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. इस बार जून के मासिक शिवरात्रि पर 4 शुभ संयोग बन रहे हैं. जिसकी वजह से मासिक शिवरात्रि और भी पुण्य फलदायी हो गई है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि जून की मासिक शिवरात्रि कब है? मासिक शिवरात्रि पर कौन से 4 शुभ संयोग बन रहे हैं? मासिक शिवरात्रि का मुहूर्त क्या है?
जून मासिक शिवरात्रि 2025 तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 23 जून सोमवार को रात 10 बजकर 9 मिनट पर प्रारंभ होगी. इस तिथि का समापन 24 जून दिन मंगलवार को शाम 6 बजकर 59 मिनट पर होगा. मासिक शिवरात्रि के पूजा मुहूर्त के आधार पर जून की मासिक शिवरात्रि? 23 जून सोमवार को है.
4 शुभ संयोग में है जून मासिक शिवरात्रि 2025
जून की मासिक शिवरात्रि पर 4 शुभ संयोग बन रहे हैं. पहला संयोग है सोम प्रदोष व्रत का, दूसरा संयोग है सोमवार का, तीसरा संयोग है मासिक शिवरात्रि का और चौथा संयोग है सर्वार्थ सिद्धि योग का.
इस बार की मासिक शिवरात्रि के साथ प्रदोष व्रत और सोमवार व्रत भी है. ये तीनों ही व्रत भगवान शिव की पूजा और आराधना के लिए हैं. वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं. आप जिस भी मनोकामना से शिवरात्रि व्रत रखकर सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करेंगे, आपकी मनोकामना पूर्ण होगी. शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर में 03 बजकर 16 मिनट से 24 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट तक रहेगा.
जून मासिक शिवरात्रि 2025 मुहूर्त
23 जून सोमवार को जून मासिक शिवरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त देर रात 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक है. इस निशिता मुहूर्त में आपको शिव पूजा के लिए 40 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. वैसे जिन लोगों को सामान्य पूजा करनी है, वे दिन में भी कर सकते हैं.
जून मासिक शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:04 ए एम से 04:44 ए एम तक है, वहीं उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक है. अमृत काल दोपहर में 01 बजकर 07 मिनट से दोपहर 02 बजकर 33 मिनट तक है. विजय मुहूर्त दोपहर में 02 बजकर 43 मिनट से दोपहर 03 बजकर 39 मिनट तक है.
मासिक शिवरात्रि पर धृति योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 1 बजकर 17 मिनट तक है, उसके बाद से शूल योग है. शिवरात्रि पर कृत्तिका नक्षत्र प्रात:काल से दोपहर 03 बजकर 16 मिनट तक है, उसके बाद से रोहिणी नक्षत्र है.
जून मासिक शिवरात्रि 2025 भद्रा का समय
जून मासिक शिवरात्रि के दिन भद्रा लगेगी, लेकिन उसका वास स्थान स्वर्ग है, इस वजह से उसका कोई दुष्प्रभाव धरती पर नहीं होगा. भद्रा का समय रात में 10 बजकर 09 मिनट से 24 जून को प्रात: 05 बजकर 25 मिनट तक है.
मासिक शिवरात्रि का महत्व
मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं. उस दिन भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, मदार पुष्प, धतूरा, शमी के पत्ते, गंगाजल, गाय का दूध, शहद, चंदन, धूप आदि अर्पित करते हैं. मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा सुनते हैं और शिवजी की आरती करते हैं. शिव कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, दुख दूर होते हैं.
तनाव, डर और थकान को कहें अलविदा, कपूर जलाने से घर में घुलती है सुकून भरी हवा
17 Jun, 2025 06:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Remove Negative Energies : घर में कभी-कभी ऐसा माहौल बन जाता है कि बिना किसी वजह के मन भारी लगता है, काम में मन नहीं लगता, हर वक्त थकावट महसूस होती है और बेवजह गुस्सा या चिड़चिड़ापन आता है. यह सब संकेत होते हैं उस नकारात्मक ऊर्जा के, जो हमारे आसपास मौजूद होती है लेकिन दिखाई नहीं देती. हिंदू परंपराओं में ऐसी स्थिति से निपटने के कई उपाय बताए गए हैं, जिनमें से एक है – कपूर जलाना. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
कपूर क्या है और इसे क्यों जलाया जाता है?
कपूर एक सफेद रंग का, तेज़ खुशबू वाला पदार्थ होता है, जो पेड़ की छाल से तैयार किया जाता है. इसे जलाने पर यह पूरी तरह वाष्प में बदल जाता है, यानी इसमें कोई राख नहीं बचती. यह गुण इसे खास बनाता है. हिंदू धार्मिक कार्यों में इसे शुद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है. मंदिरों में भगवान की मूर्तियों के सामने कपूर जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है.
विज्ञान भी मानता है कपूर की शक्ति
विज्ञान के अनुसार कपूर में मौजूद कुछ तत्व हवा को शुद्ध करने का काम करते हैं. इसे जलाने से घर में मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और वायरस खत्म होते हैं. साथ ही इसकी खुशबू दिमाग को शांत करती है, जिससे तनाव कम होता है और नींद भी बेहतर आती है.
नकारात्मक ऊर्जा को कैसे पहचानें?
अगर आप बार-बार थकान महसूस करते हैं, बिना वजह गुस्सा आता है, घर में लड़ाई-झगड़े बढ़ गए हैं या फिर कोई बीमारियों से घिरा रहता है – तो समझिए कि आपके आसपास नकारात्मक ऊर्जा का असर है. यह ऊर्जा धीरे-धीरे हमारे जीवन को प्रभावित करती है, इसलिए इसे समय रहते हटाना ज़रूरी है.
कपूर जलाने का सही तरीका
रोज़ शाम या सुबह, एक छोटा-सा दीपक या स्टील की कटोरी लें. उसमें दो-तीन कपूर रखें और उन्हें जलाकर पूरे घर में घुमा लें. इस दौरान आप कोई शांत करने वाला मंत्र या सकारात्मक शब्द भी बोल सकते हैं, जैसे – “शांति”, “साफ हवा”, “अच्छी ऊर्जा” आदि. यह प्रक्रिया घर के हर कोने में करें – खासतौर पर उस जगह पर जहां आप सोते हैं या ज़्यादा वक्त बिताते हैं.
क्या आपके घर की सही दिशा में रखा है इन्वर्टर? जानिए इसका सीधा असर दिमाग पर, कैसे बनती है सोच की रुकावट?
17 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Inverter In North East : हर घर का एक अलग माहौल होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर की दिशा भी आपकी सोच और काम करने की ताकत को प्रभावित कर सकती है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की नॉर्थ-ईस्ट यानी उत्तर-पूर्व दिशा सबसे साफ और हल्की ऊर्जा वाली दिशा मानी जाती है. इसे देवताओं की दिशा भी कहा जाता है और यह इंसान के दिमाग, विचार और कल्पना शक्ति से जुड़ी होती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं इंदौर निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.इस दिशा का सीधा संबंध विचारों की शुद्धता, मानसिक शांति और नए आइडिया आने की ताकत से होता है. जब यह दिशा खुली और साफ होती है, तो इंसान को सही समय पर सही सोच मिलती है और वह आगे बढ़ पाता है. लेकिन अगर इस दिशा में भारी सामान या इलेक्ट्रॉनिक मशीनें रख दी जाएं, तो सोचने की शक्ति पर असर पड़ता है.
इन्वर्टर और कन्फ्यूजन का रिश्ता
अब बात करते हैं इन्वर्टर की. इन्वर्टर एक भारी और ऊर्जा को उलटने वाली मशीन है, जो बैटरी से बिजली खींचकर उसे जरूरत के समय बाहर देती है. अब सोचिए, अगर इस तरह की उलझी हुई ऊर्जा नॉर्थ-ईस्ट दिशा में रख दी जाए तो क्या होगा?इसका सीधा असर इंसान के दिमाग पर होता है. जब यह दिशा प्रभावित होती है, तो व्यक्ति को एक साथ कई विचार आने लगते हैं. कभी एक आइडिया आया, उसे ठीक से सोच नहीं पाए, तभी दूसरा आ गया, फिर तीसरा… और इसी तरह दिमाग उलझता चला जाता है.
इसे कहते हैं कन्फ्यूज्ड स्टेट ऑफ माइंड.
ऐसी स्थिति में व्यक्ति सोच तो बहुत रहा होता है, लेकिन किसी एक विचार पर टिक नहीं पाता. न कोई फैसला ले पाता है और न ही किसी दिशा में आगे बढ़ पाता है. इसका असर निजी जीवन से लेकर कामकाज तक हर जगह दिखाई देता है.
नॉर्थ-ईस्ट को रखें साफ और हल्का
अगर आप चाहते हैं कि आपके घर का माहौल शांत, साफ और प्रेरणादायक बना रहे, तो नॉर्थ-ईस्ट दिशा को हमेशा खुला और साफ रखें. यहां पूजा स्थान, छोटा फव्वारा, विंड चाइम या कोई शांतिपूर्ण चित्र लगाना फायदेमंद हो सकता है. इस दिशा में हल्के रंगों का इस्तेमाल करें और कोशिश करें कि कोई भारी सामान या इलेक्ट्रॉनिक आइटम यहां न हो.
क्या करें अगर इन्वर्टर पहले से नॉर्थ-ईस्ट में हो?
अगर किसी वजह से इन्वर्टर पहले से नॉर्थ-ईस्ट में है और उसे हटाना फिलहाल संभव नहीं है, तो उसके चारों तरफ सफेद पर्दा लगाएं या उसके ऊपर सफेद कपड़ा ढक दें. साथ ही पास में तुलसी का पौधा या कोई सकारात्मक वस्तु रखें, ताकि उसका नकारात्मक असर थोड़ा कम हो सके.
घर में शांति और बरकत चाहिए? आईने से बदलें दिशा की ऊर्जा, जानिए मिरर से वर्चुअल एंट्रेंस बनाने का तरीका
16 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Vastu Tips for Mirror : घर की मुख्य एंट्रेंस केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होती, बल्कि यह ऊर्जा के प्रवेश का सबसे बड़ा स्रोत होती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस दिशा में घर की एंट्रेंस होती है, उसका सीधा असर वहां रहने वालों की सेहत, धन और कामयाबी पर पड़ता है. कुछ दिशाएं ऐसी होती हैं जो घर में नकारात्मकता लाती हैं, जबकि कुछ दिशा की एंट्रेंस पॉजिटिव ऊर्जा को खींचती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं इंदौर निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह. अगर आपका घर W1 या W2 दिशा में खुलता है, तो यह एक नकारात्मक एंट्रेंस मानी जाती है. इसके मुकाबले W3 और W4 जैसी दिशाएं बहुत शुभ मानी जाती हैं और ये घर में बरकत और खुशहाली लाती हैं. लेकिन सवाल ये है कि अगर आपके घर की एंट्रेंस गलत दिशा में बनी हुई है, तो क्या आप कुछ कर सकते हैं?
आईना यानी मिरर से बदली जा सकती है दिशा की ऊर्जा
वास्तु में आईने का इस्तेमाल केवल सजावट के लिए नहीं होता, बल्कि यह दिशा और ऊर्जा को सुधारने का एक असरदार ज़रिया भी होता है. अगर आपके घर की एंट्रेंस W1 या W2 में है और आप उसमें बदलाव नहीं कर सकते, तो वर्चुअल एंट्रेंस बनाना एक आसान और असरदार उपाय हो सकता है.
इसका तरीका यह है कि आप ऐसी जगह पर मिरर लगाएं जहां W3 या W4 की दिशा का आभास हो सके. उदाहरण के लिए, अगर आपके घर की दीवार या कोई कोना W3 की ओर है, तो वहां एक बड़ा मिरर इस तरह लगाएं कि वो दरवाज़े के ठीक सामने दिखाई दे. इससे वर्चुअली ऐसा प्रतीत होगा जैसे आपके घर की एंट्रेंस शुभ दिशा में है.
मिरर लगाते समय रखें ये सावधानियां
आईना लगाना जितना आसान लगता है, उससे कहीं ज़्यादा ध्यान देने वाला काम है. अगर मिरर गलत दिशा में या गलत एंगल पर लगाया गया, तो इसका असर उल्टा भी हो सकता है. जिस एंट्रेंस को पॉजिटिव करना चाह रहे थे, वह और ज़्यादा नेगेटिव असर देने लगती है.
इसलिए मिरर लगाते समय कुछ बातें ज़रूर ध्यान में रखें-
-मिरर हमेशा साफ-सुथरा और बिना दरार वाला होना चाहिए.
-अगर दीवार नहीं है, तो आप स्टैंडिंग मिरर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
-मिरर का फ्रेम हल्का और सादा रखें, ताकि फोकस ऊर्जा पर रहे.
-मिरर की पोजिशन इस तरह हो कि वो बाहर की पॉजिटिव दिशा को दिखाए, न कि कोई बिखरी हुई या भारी चीज़ों को.
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16 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार. कहा जाता है कि ज्योतिष शास्त्र में मनुष्य की सभी समस्याओं का समाधान है. ग्रह संबंधित दोष हो या पितृ दोष सभी समस्याओं का निवारण ज्योतिष शास्त्र में विस्तार से बताया गया है. ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से सभी नवग्रहों का एक रत्न और उनके उपरत्न धारण करने से व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अगर किसी जातक की कुंडली में कोई ग्रह नकारात्मक भाव में विराजमान है और जातक की कुंडली पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ रहा तो उस ग्रह संबंधित रत्न को विधि अनुसार धारण करने की सलाह दी जाती है. सभी रत्नों में पुखराज रत्न ऐसा है जिसे धारण करने के बाद सोई हुई किस्मत जाग जाती है और धारक मालामाल हो जाता है.
धारण करने के कई लाभ
ज्योतिष शास्त्र के जानकार पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि सभी नवग्रहों के अलग-अलग रत्न होते हैं, जिनको धारण करने पर ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाता है. बृहस्पति ग्रह सभी ग्रहों के गुरु और सर्व शक्तिशाली है. अपार धन की प्राप्ति सभी कार्यों में सफलता और जीवन में सुख समृद्धि खुशहाली के लिए पुखराज रत्न को धारण किया जाता है. गुरु बृहस्पति ग्रह पुखराज रत्न, गुरु बृहस्पति ग्रह का रतन है जिसे सभी 12 राशियों के जातक धारण कर सकते हैं. जिसके जीवन में धन का अभाव है, पुखराज रत्न को विधि अनुसार धारण कर ले तो वो मालामाल हो जाता है.
कैसे करें पहचान
ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि पुखराज रत्न को धारण करने से पहले अपनी कुंडली ज्योतिष के जानकार को जरूर दिखाएं. सभी रत्नों में पुखराज रत्न धन की प्राप्ति, सभी कार्यों में सफलता और गुरु बृहस्पति के लिए पहना जाता है. इस रत्न को धारण करने से पूर्व अभिमंत्रित करना बेहद जरूरी होता है. पुखराज को धारण करने के लिए एक दिन पहले यानी बुधवार के दिन शाम को गंगाजल, दूध, शहद, दही, मिश्री आदि में डालकर रख दें और साफ करके बाहर निकल लें. उसके बाद गुरु बृहस्पति के बीज मंत्र का जाप करें और प्रार्थना करें कि यह रत्न आपके लिए अनुकूल है. रात को सोने से पहले इसे पीले वस्त्र में बांधकर अपने तकिए के नीचे रखें और सुबह पवित्र होकर इस रत्न को हाथ की उंगली में धारण कर लें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 16 जून 2025)
16 Jun, 2025 12:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- धन लाभ एवं योजनाएं फलीभूत हों, कार्य कुशलता से पूर्ण संतोष अवश्य होगा, ध्यान रखें।
वृष :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, समय स्थिति का ध्यान रखें।
मिथुन :- मनोबल उत्साह वर्धक रहे, व्यावसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
कर्क :- मनोबल संवेदनशील रहे, भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्य कुशलता से संतोष व्यावसाय अनुकूल होगा।
कन्या :- इष्ट मित्रों से मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, समय पर सोचे कार्य पूर्ण हो जायेंगे
तुला :- कुटुम्ब की समस्याओं में धन व्यय होगा तथा भ्रमणशील स्थिति बनी रहेगी।
वृश्चिक :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, सफलता के साधन बने, इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे, कार्य बनेंगे।
धनु :- धन लाभ, अधिकारियों से मेल मिलाप होगा, कार्य कुशलता स्थिति अच्छी सुलभ हो जायेगी।
मकर :- कार्यवृत्ति में सुधार, स्थिति में नियंत्रण रखें, स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास अवश्य ही होगा।
कुम्भ :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी, कार्य अवरोध संभव होगा।
मीन :- प्रयास सफल हों, इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, दैनिक कार्य उत्तम, सफलता अवश्य मिलेगी।
बिना गोत्र के अधूरी है पूजा! जानें कैसे करें अपने गोत्र की पहचान
15 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किसी की पहचान सिर्फ उसके नाम या गांव से नहीं होती बल्कि हमारे पुरखों की परंपरा और ऋषियों की स्मृति भी उसमें जुड़ी होती है, यही संबंध गोत्र कहलाता है. यह सिर्फ एक पारिवारिक नाम नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों से जुड़ी हुई एक पवित्र परंपरा है, जो आज भी विवाह, उपनयन संस्कार और पूजा-पाठ जैसे कई धार्मिक कार्यों में अनिवार्य रूप से पूछी जाती है. गोत्र व्यक्ति के आध्यात्मिक वंश को बताता है, जैसे सरनेम से सामाजिक पहचान होती है, वैसे ही गोत्र से ऋषि परंपरा की. लेकिन कई बार पूजा अर्चना के समय पंडितजी गोत्र पूछते हैं, कुछ लोगों को गोत्र के बारे में जानकारी होती है तो कुछ लोगों को नहीं. ऐसे में आप इस आर्टिकल के माध्यम से अपने गोत्र के बारे में जान सकते हैं और पूजा अर्चना में यह नाम ले सकते हैं…
क्यों जरूरी है गोत्र?
हिंदू धर्म में समान गोत्र में विवाह वर्जित होता है, इसे सगोत्र विवाह निषेध कहा जाता है. इसका उद्देश्य रक्त संबंधी विवाह से बचना है, जिससे आनुवंशिक दोष न बढ़ें. गोत्र का उपयोग पितरों का तर्पण और श्राद्ध करते समय आवश्यक होता है, जिससे वे सही आत्मा तक पहुंच सकें. साथ ही गोत्र का उच्चारण पूजा, संकल्प और हवन आदि में किया जाता है, जैसे ‘मम गोत्र फलाने ऋषेः…’ यह बताता है कि हम किस ऋषि परंपरा से हैं और उसी के अनुसार अनुष्ठान किया जाता है. हिंदू धर्म में माना जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी सप्तर्षि या उनके वंशज से उत्पन्न है। उसी ऋषि का नाम व्यक्ति के गोत्र के रूप में चलता है. उदाहरण के लिए भारद्वाज गोत्र, वशिष्ठ गोत्र, कश्यप गोत्र, अत्रि गोत्र आदि.
ब्रह्माजी के 10 मानस पुत्र
ब्रह्माजी ने सृष्टि के निर्माण से पहले 10 मानस पुत्र उत्पन्न किए, जिनके नाम हैं: ऋषि मरीचि, ऋषि अत्रि, ऋषि अंगिरा, ऋषि पुलस्त्य, ऋषि पुलह, ऋषि क्रतु, ऋषि भृगु, गुरु वशिष्ठ, दक्ष और नारद. इन 10 मानस पुत्रों के अलावा, सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार को भी ब्रह्माजी का मानस पुत्र माना जाता है. ये सभी मानस पुत्र ब्रह्माजी की इच्छा से उनके मन से उत्पन्न हुए थे इसलिए इनको मानस पुत्र कहा जाता है.
ऋषि कश्यप की 13 पत्नियां
ऋषि मरीचि के पुत्र हुए ऋषि कश्यप थे और इनको सृष्टि के रचयिता के रूप में भी जाना जाता है. वहीं पुराणों में, प्रजापति दक्ष की 60 पुत्रियों का उल्लेख है, जिनका विवाह विभिन्न देवताओं और ऋषियों से हुआ था. जिनमें 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रमा से, 10 पुत्रियों का विवाह धर्म से और 13 पुत्रियों का विवाह ऋषि कश्यप हुआ. सति का विवाह भगवान शिव और बाकी की पुत्रियों के विवाह अलग अलग ऋषि-मुनि और देवताओं से हुए. यही संबंध सृष्टि की रचना के आधार बने. इन्हीं विवाहों से ही संसार के सभी प्राणी उत्पन्न हुए, जिनमें देवता, असुर और मनुष्य शामिल हैं.
पूरी सृष्टि का हुआ निर्माण
ऋषि कश्यप की 13 पत्नियां थीं, जिनमें अदिती और दिति प्रमुख थीं. अदिती से देवताओं यानी आदित्यों का जन्म हुआ, जिनमें से सूर्यदेव ब्रह्मांड की ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत बने और इंद्र, देवताओं के राजा बने. वहीं दिति से असुरों का जन्म हुआ, जिनमें सबसे बड़े हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप थे. अदिति से आदित्य (सूर्य, इंद्र, जल, अग्नि, धर्म सहित 12 पुत्र), दिति से दैत्य (असुर), दनु से दानव, कद्रू से नागों, विनता से गरुड़ और वरुण, अरिष्टा से गंधर्व, मुनि से अप्सराएं, इला से वृक्ष, लताएं आदि वनस्पतियों का जन्म, सुरासा से नागों के दूसरे वंश, काष्ठा से घोड़े आदि एक खुर वाले पशु, सुराभि से गौ माताएं, भैंस, क्रोधवशा से विष वाले जीव अर्थात बिच्छू जैसे, इरा से रेंगने वाले जीवों को जन्म दिया, ताम्रा से बाज, गिद्ध आदि शिकारी पंक्षी.
मनु की वजह से कहलाए मनुष्य
ऋषि कश्यप के पुत्र विस्वान से वैवस्वत मनु का जन्म हुआ, जो हिंदू धर्म के अनुसार, संसार के प्रथम पुरुष थे और इनसे ही मनुष्य का जन्म हुआ. मनु की संतान होने की वजह से ही मनुष्य कहा जाता है. जितने भी देवता, पशु, पक्षी, असुर, मनुष्य हैं, ये सभी आपस में भाई बहन ही हैं. एक ऋषि कश्यप की ही हम सभी संतान हैं. इसलिए अगर आप पूजा पाठ करवा रहे हों और गोत्र पता ना हो तो आप कश्यप गोत्र कहकर भी पूजा अर्चना कर सकते हैं. वहीं अगर आपको अपना गोत्र पता है तो यह और भी अच्छी बात है.
भारत में प्रचलित प्रमुख गोत्र
कश्यप गोत्र
भारद्वाजगोत्र
वशिष्ठगोत्र
अत्रि गोत्र
गौतम गोत्र
वत्स गोत्र
जमदग्नि गोत्र
विश्वामित्र गोत्र
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