धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 30 जून 2025)
30 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- किसी के द्वारा धोखा देने से मनोवृत्ति खिन्न रहेगी, धन का व्यय तथा परिश्रम विफल होगा।
वृष :- समय अनुकूल नहीं है, लेन-देन के मामले विफल रहेंगे, व्यर्थ विवाद से बचें।
मिथुन :- व्यर्थ समय नष्ट होगा, यात्रा प्रसंग में थकावट व बेचैनी बनी रहेगी, समय समस्या का ध्यान रखें।
कर्क :- प्रयत्नशीलता विफल हो, परिश्रम करने में ही कुछ सफलता अवश्य मिलेगी।
सिंह :- परिश्रम से कार्यपूर्ण होंगे, तर्क-वितर्क से विजय प्राप्त हो, सफलता मिले, धन का लाभ होगा।
कन्या :- व्यावसायिक अनुकूलता से असंतोष किन्तु कार्य-व्यवस्था अनुकूल बनी रहेगी।
तुला :- किसी तनावपूर्ण वातावरण से बचिये, कुछ उदविघ्नता से परेशानी बने, मित्रों से लाभ होगा।
वृश्चिक :- परिश्रम से कार्य में सुधार होते हुए भी फलप्रद नहीं, कार्य विफलत्व की चिन्ता बनेगी।
धनु :- स्त्री वर्ग से उल्लास, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे तथा रुके कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
मकर :- स्वभाव में क्लेश व अशांति, व्यर्थ विभ्रम, भय तथा उद्विघ्नता अवश्य बनेगी।
कुम्भ :- कार्यगति अनुकूल रहेगी, चिन्ताऐं कम होंगी तथा विलासिता के साधन जुटायेंगे।
मीन :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा तथा इष्ट मित्रों का समर्थन फलप्रद होगा।
द्रौपदी के वो 3 अवगुण, जो खुद युधिष्ठिर ने बताए थे, जिस वजह से पूरी नहीं कर पाईं स्वर्ग की यात्रा
29 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाभारत सिर्फ एक युद्ध या राजघरानों की राजनीति की कहानी नहीं है, बल्कि ये मानवीय गुणों, दोषों और उनके परिणामों की भी गहरी सीख देती है. इस महाकाव्य में जितनी चर्चा अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर, दुर्योधन जैसे वीरों की होती है, उतनी ही चर्चा द्रौपदी की भी होती है. द्रौपदी को महाभारत की सबसे अहम महिला पात्रों में गिना जाता है. वो बेहद सुंदर, चतुर और हाजिरजवाब थीं. उनके साहस और आत्मसम्मान की मिसालें आज भी दी जाती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि इन तमाम खूबियों के बावजूद द्रौपदी में कुछ ऐसे अवगुण भी थे जो उनकी सबसे बड़ी कमियां बन गए? महाभारत के एक प्रसंग में खुद युधिष्ठिर ने इन तीन अवगुणों का जिक्र अपने भाइयों से किया था. उन्होंने ये सब तब बताया जब पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ स्वर्ग जाने के लिए कठिन यात्रा पर निकले थे. आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से.
युधिष्ठिर ने कब बताए द्रौपदी के दोष
महाभारत युद्ध के बाद जब पांडवों ने हस्तिनापुर का राज्य छोड़ दिया, तब उन्होंने अपने शरीर के साथ ही स्वर्ग जाने का निश्चय किया. वे सभी भाई और द्रौपदी हिमालय की ओर चल पड़े. इस यात्रा को स्वर्गारोहण कहा गया. यात्रा के दौरान सबसे पहले द्रौपदी इस यात्रा में पीछे छूट गईं. बद्रीनाथ के आस-पास का कठिन इलाका पार करते ही द्रौपदी थककर गिर पड़ी और फिर दोबारा नहीं उठ सकीं. तब उनके पति युधिष्ठिर ने बाकी भाइयों को बताया कि आखिर द्रौपदी स्वर्ग की यह कठिन यात्रा क्यों पूरी नहीं कर पाईं
द्रौपदी का पहला अवगुण- सौंदर्य और बुद्धि का अहंकार
युधिष्ठिर ने सबसे पहले कहा कि द्रौपदी को अपने सौंदर्य और बुद्धिमत्ता का घमंड था. उन्हें लगता था कि वे सबसे सुंदर और चतुर हैं. किसी भी चीज का अहंकार इंसान को गिरा देता है. चाहे रूप हो, विद्या हो या धन, अगर उस पर घमंड किया जाए तो वही सबसे बड़ा दुर्गुण बन जाता है. द्रौपदी के इसी घमंड ने उनके स्वर्गारोहण में बाधा डाली.
दूसरा अवगुण- सभी पतियों से समान प्रेम न करना
द्रौपदी के पांच पति थे. वे सभी पांडव उनके जीवन में समान रूप से महत्वपूर्ण थे. लेकिन युधिष्ठिर ने बताया कि द्रौपदी ने अपने सभी पतियों से बराबर प्रेम नहीं किया. उन्हें अर्जुन सबसे ज्यादा प्रिय थे. युधिष्ठिर ने साफ कहा कि किसी एक की ओर विशेष झुकाव होना और बाकी के साथ समान व्यवहार न करना भी एक दोष है. यही असमानता उनकी परीक्षा में कमी बन गई.
तीसरा अवगुण- उनका हठ
युधिष्ठिर ने द्रौपदी का तीसरा दोष उनका हठी स्वभाव बताया. द्रौपदी ने दुर्योधन के अपमान के बाद बदला लेने की ठान ली थी. उन्होंने प्रतिज्ञा की कि जब तक दुर्योधन की जांघ पर चोट नहीं पड़ेगी, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगी. इसी प्रतिज्ञा और हठ ने महाभारत के महासंग्राम को जन्म दिया, जिसमें लाखों योद्धा मारे गए. उनका यह हठ न केवल उनके लिए बल्कि पूरी पृथ्वी के लिए विनाशकारी साबित हुआ.
इस कथा से क्या सीख मिलती है?
महाभारत की इस घटना से यह साफ होता है कि इंसान कितना भी बुद्धिमान, शक्तिशाली या सुंदर क्यों न हो, अगर उसके भीतर अहंकार, पक्षपात और हठ जैसे अवगुण हैं तो वो जीवन की सबसे अहम यात्राओं को भी पूरा नहीं कर पाता. द्रौपदी के इन तीन अवगुणों ने उन्हें स्वर्ग की यात्रा बीच में ही रोक दी.
इसलिए हमें अपने जीवन में हमेशा विनम्र, न्यायप्रिय और सहज रहना चाहिए. अगर हमें ईश्वर तक पहुंचना है या जीवन की ऊंचाइयों को छूना है, तो इन दुर्गुणों को अपने भीतर से निकालना जरूरी है. यही महाभारत की असली सीख है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी.
किचन में लगा लें यह तस्वीर भरे रहेंगे अन्न के भंडार, बिना तोड़ फोड़ और पूजा पाठ का मिलेगा अच्छा लाभ, बढ़ेगा धन
29 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घर का किचन यानी रसोईघर न सिर्फ स्वाद का केंद्र होती है, बल्कि समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी मुख्य स्रोत मानी जाती है. भारत में किचन को गृह लक्ष्मी का स्थान दिया जाता है और यहीं से पूरे घर को ऊर्जा मिलती है. इसी वजह से वास्तु शास्त्र में घर के किचन का विशेष महत्व है. मान्यताओं के अनुसार, किचन यानी रसोई का सही वास्तु परिवार में प्रेम, समझ और आर्थिक स्थिरता लाता है और धन धान्य की कभी कमी नहीं होती. लेकिन अगर आप घर में तोड़ फोड़ करवा पाने की स्थिति में नही हैं तो किचन में एक तस्वीर लगा दें, इससे आपके घर के भंडार भरे रहेंगे. आइए जानते हैं किचन में कौन सी तस्वीर लगा दें…
मां अन्नपूर्णा की तस्वीर लगाएं
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में किचन सबसे महत्वपूर्ण जगहों में से एक है. किचन की खूबसूरती और सौभाग्य का ध्यान रखते हुए किचन में एक अन्नपूर्णा मां की फोटो लगा लें. मां अन्नपूर्णा अन्न की अधिष्ठात्री देवी हैं, इनकी पूजा या चित्र लगाने से कभी अन्न की कमी नहीं होती है. साथ ही इस उपाय से घर में तिजोरी भी कभी खाली नहीं होती है और अन्न के भंडार सदैव भरे रहते हैं.
मां अन्नपूर्णा की तस्वीर लगाने के फायदे
हर घर की रसोई को मां अन्नपूर्णा की कृपा का स्थान माना गया है. यहां पकने वाला अन्न-संस्कार न सिर्फ पेट भरता है बल्कि जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख-शांति लाता है. कहा जाता है कि जहां मां अन्नपूर्णा का वास होता है, वहां भूख और गरीबी फटकती भी नहीं. किचन में मां अन्नपूर्णा की तस्वीर उत्तर-पूर्व दिशा में लगाएं. तस्वीर में मां अन्नपूर्णा के हाथ में अन्न का पात्र हो, ये विशेष शुभ माना जाता है.
कई ग्रह दोष होते हैं दूर
मां की उपस्थिति किचन को सात्त्विक बनाती है. इससे जो भोजन पकाया जाता है, वह सिर्फ स्वादिष्ट नहीं बल्कि ओजसपूर्ण (ऊर्जादायक) होता है. अगर कुंडली में चंद्र, शुक्र या राहु संबंधी दोष हैं जो अन्न या भुखमरी से जुड़े होते हैं, तो उनकी शांति में भी यह सहायता करती हैं. साथ ही मां अन्नपूर्णा को ज्ञान और वाणी की देवी भी कहा गया है. किचन में उनका चित्र नारी में सृजनात्मकता और संतुलन बढ़ाता है.
सुख-समृद्धि के लिए करें रविवार का व्रत, गुप्त नवरात्रि का चौथा और जगन्नाथ रथयात्रा का तीसरा दिन भी
29 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रविवार का दिन ग्रहों के राजा भगवान भास्कर को समर्पित माना जाता है. अग्नि पुराण में सूर्य देव को साक्षात ब्रह्म माना गया है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं. साथ ही सूर्य देव को इस चराचर जगत का पालन करने वाला भी माना जाता है. इस दिन विशेष विधि से पूजा से मनोवांछित लाभ प्राप्त होता है. मान्यता है कि रविवार के दिन व्रत रहने से और सूर्यदेव को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और सम्मान व धन में वृद्धि होगी. आइए जानते हैं रविवार के दिन कौन कौन से पर्व मनाए जाएंगे और इस दिन का महत्व…
गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन
रविवार के दिन गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है और इस दिन दस महाविद्याओं की चौथी देवी मां भुवनेश्वरी देवी की पूजा अर्चना की जाएगी. गुप्त नवरात्रि का समापन 4 जुलाई को भड़रिया नवमी के दिन होगा. साथ ही रविवार को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का तीसरा दिन है. भगवान जगन्नाथ रथयात्रा 12 दिनों तक चलती है, जिसकी शुरुआत 27 जून को हुई और समापन 8 जुलाई को नीलाद्रि विजय के साथ होगा. इस दिन भगनान फिर से अपने मूल मंदिर लौट आएंगे और गर्भग्रह में स्थापित हो जाएंगे.
29 जून को आषाढ़ मास की पंचमी तिथि
दृक पंचागानुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगी, फिर उसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी. उदिया तिथि को मानते हुए 29 जून को पंचमी तिथि मनाई जाएगी. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. वहीं राहुकाल का समय 5 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. साथ ही रवि योग सुबह 5 बजकर 27 मिनटे से अगले दिन सुबह 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा.
29 जून को कई शुभ योग
29 जून का दिन ग्रह-नक्षत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दरअसल इस दिन चंद्रमा कर्क से सूर्य देव की राशि सिंह में प्रवेश करेंगे. साथ ही मिथुन राशि में सूर्य देव और गुरु ग्रह मौजूद रहेंगे, गुरु आदित्य योग बनेगा. वहीं रविवार को शुक्र ग्रह वृषभ राशि में गोचर करने वाले हैं, जिससे मालव्य राजयोग का निर्माण होगा. गुरु आदित्य और मालव्य राजयोग के अलावा रवि योग और सिद्धि योग भी बना रहेगा.
कुंडली में सूर्य होते हैं मजबूत
अग्नि और स्कंद पुराणों के अनुसार, रविवार के दिन व्रत रखने से सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू करना शुभ माना जाता है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है, जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है. कुंडली में अगर सूर्य की स्थिति मजबूत होती है तो जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती और हमेशा तरक्की मिलती है. रविवार को आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन भी है और इस दिन मां भुवनेश्वरी देवी की पूजा की जाएगी.
रविवार व्रत पूजा विधि
व्रत शुरू करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत्त होकर, मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और चारों तरफ गंगाजल छिड़काव कर शुद्ध करें. फिर एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें, फिर सूर्य देव की पूजा करें, फिर रविवार व्रत की कथा सुनें और पूजा करें. इसके बाद सूर्य देव को तांबे के बर्तन में जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से विशेष लाभ मिलता है. इसके अलावा रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने, सूर्य देव के मंत्र “ऊं सूर्याय नमः” या “ऊं घृणि सूर्याय नमः” का जप करने से भी विशेष लाभ मिलता है.
रविवार व्रत पूजा उपाय
रविवार के दिन गुड़ और तांबे के दान का भी विशेष महत्व है. इन उपायों को करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता मिलती है. एक समय भोजन करें, जिसमें नमक का सेवन न करें. गरीबों को दान करें. रविवार के दिन काले या नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए. इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना, तेल मालिश करना और तांबे के बर्तन बेचना भी वर्जित माना गया है. व्रत का उद्यापन 12 व्रतों के बाद किया जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 29 जून 2025)
29 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- संसारिक धन की प्राप्ति, स्त्री सुख तथा कल्याणकारी कार्य बनेंगे, समाचार प्राप्त होगा।
वृष :- अचानक संतान को श्रेष्ठ लाभ होगा, रोगों की वृद्धि से समय का लाभ लवें।
मिथुन :- व्यर्थ की दौड़धूप होगा, संतान कष्ट होगा तथा शत्रु पराजित होंगे।
कर्क :- वाहन से मानकिस कष्ट, व्यय, तनाव से मानसिक पीड़ा अवश्य ही होगा।
सिंह :- जमीन-जायजाद तथा संतान से सुख की प्राप्ति होगी, योजना गुप्त रखें।
कन्या :- यश, सुख की प्राप्ति होगी, संतान के कार्यों में यश प्राप्त होगा, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
तुला :- मित्र व सहयोगियों से लाभ होगा, रोजगार का प्रस्ताव प्राप्त होगा, अर्थ व्यवस्था बिगड़ेगी।
वृश्चिक :- अभिष्ट सिद्धी की प्राप्ति होगी, अधिकार प्राप्त होगा किन्तु खर्च से मन बेचैन रहेगा।
धनु :- नये निर्माण की योजना पर धन व्यय होगा किन्तु लाभ अवश्य ही प्राप्त होगा।
मकर :- व्यापार से आय का लाभ बराबर बना रहेगा तथा नवीन कार्य योजना की प्राप्ति होगी।
कुम्भ :- अचानक कार्य लाभ होगा परंतु नई समस्या तत्काल ही खड़ी हो जायेगी।
मीन :- नये कार्यों में में खर्च बढ़े, यात्रा, व्यापार से लाभ अवश्य ही होगा, ध्यान दें।
छिपकली का गिरना कब शुभ और कब अशुभ? जानिए इस संकेत पर क्या कहता है शास्त्र
28 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे जीवन में आस पास होने वाली छोटी मोटी एक्टिविटी कई बार भविष्य का संकेत करती है. हालांकि इसे जानना और समझ पाना हर किसी के बस में नहीं होता है.इसके बलिये ज्योतिष के अंतर्गत पूरा विज्ञान है.जिसका विस्तृत वर्णन शकुन शास्त्र में है.शकुन शास्त्र में मानव जीवन के आस पास रहने वाले पशु-पक्षियों के एक्टिविटी के जरिए भविष्य के कुछ संकेतो के बारे में बताया गया है.
आम तौर पर वे जानकार जो घर में रहते है या जिनका सीधा संबंध मनुष्य से होता है. छिपकली भी उनमें से एक है.आज कल घर में छिपकली का आना आम बात है.लेकिन इस छिपकली की कुछ एक्टिविटी शुभ और अशुभ होने का सूचना देती है.
ऑफत का मिलता है संदेश
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के धर्म विद्या विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर पंडित विनय पांडेय ने बताया कि छिपकली का मानव शरीर पर कूदना या गिरना कई बार शुभ संदेश देता है और कई बार इससे मनुष्य के जीवन में आने वाली ऑफत का पता चलता है.
इस अंगों पर गिरना बेहद अनिष्टकारी
मनुष्य के शरीर के दाएं बाजू पर छिपकली का गिरना किसी संकट का सूचक होता है.इससे मनुष्य को धन की हानि हो सकती है. वहीं यदि मनुष्य के नासिका यानी नाक पर छिपकली गिरती है तो इससे मनुष्य को रोग,व्याधि और शारिरिक कष्ट होता है. जो धन नाश का कारण भी बनता है.
सिर्फ कूदने या गिरने का होता है फल
हालांकि ये सिर्फ छिपकली के मानव शरीर पर गिरने या कूदने से होता है. यदि कोई व्यक्ति सोया है और तब छिपकली रेंगते या दौड़ते हुए मनुष्य के बाजू पर चढ़ती है तो इसका कोई शुभ अशुभ फल नहीं होता है.
घर में चीटियों की हो जाए भरमार तो इसके क्या हैं संकेत, लाल चीटियां अशुभ या काली? किससे मिलता है शुभ फल
28 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय संस्कृति में काली चींटियों को शुभ और लाल चींटियों को अशुभ माना जाता है. काली चींटियां आर्थिक लाभ का संकेत देती हैं, जबकि लाल चींटियां खतरे का संकेत हो सकती हैं.
घर में चीटियों का दिखना एक आम बात है, लेकिन भारतीय संस्कृति और ज्योतिषशास्त्र में इसके पीछे कई मान्यताएं और संकेत जुड़े होते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि घर में चींटियों का आना सिर्फ गंदगी या मिठाई गिरने की वजह से होता है, लेकिन पुराने समय से ही लोग इसे शुभ-अशुभ संकेतों से भी जोड़ते आए हैं. विशेष रूप से काली और लाल चींटियों को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं, जो हमें आने वाले समय के संकेत देती हैं.
अगर बात करें काली चींटियों की, तो इन्हें आमतौर पर शुभ माना जाता है. मान्यता है कि अगर आपके घर में बिना किसी खाद्य पदार्थ के काली चींटियां चलती दिखें, तो यह संकेत देता है कि घर में लक्ष्मी का आगमन होने वाला है. इसका मतलब यह होता है कि आपको आर्थिक लाभ मिल सकता है या कोई अच्छा समाचार आने वाला है. कई बार यह इस बात का भी संकेत होता है कि आपके जीवन में स्थिरता और समृद्धि आने वाली है. कुछ मान्यताओं के अनुसार, काली चींटियों को आटे में मिलाकर खिलाना पुण्य का कार्य माना गया है.
वहीं, लाल चींटियों को थोड़ा अलग नजरिये से देखा जाता है. इनका घर में ज्यादा मात्रा में दिखना कई बार किसी खतरे या अशुभ घटना का संकेत माना जाता है. कहा जाता है कि लाल चींटियां अगर घर में तेजी से चलती नजर आएं, तो यह किसी झगड़े, बीमारी या कलह की ओर संकेत कर सकती हैं.
हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको डरने की जरूरत है, बल्कि यह संकेत हो सकता है कि आपको सतर्क रहना चाहिए और अपने आसपास के माहौल का ध्यान रखना चाहिए.
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में चींटियों का अधिक होना इस बात का संकेत हो सकता है कि घर की ऊर्जा में असंतुलन है. अगर आपके घर में सफाई के बावजूद बार-बार चींटियां आ रही हैं, तो यह जरूरी है कि आप अपने घर के वातावरण पर ध्यान दें.
कई बार नकारात्मक ऊर्जा या वास्तु दोष की वजह से भी घर में चींटियों का अधिक प्रकोप देखने को मिलता है. इसके लिए घर की साफ-सफाई के साथ-साथ नमक या कपूर जलाने जैसे उपाय भी किए जा सकते हैं.
कुछ लोग मानते हैं कि चींटियों का व्यवहार मौसम में बदलाव का भी संकेत देता है. उदाहरण के लिए, अगर चींटियां बहुत सारा भोजन इकट्ठा कर रही हैं, तो यह आने वाले बारिश या मौसम में बदलाव का संकेत हो सकता है. प्राचीन काल में किसान भी चींटियों के व्यवहार के आधार पर खेती और मौसम से जुड़े निर्णय लिया करते थे.
चित्रकूट के इस मंदिर में निसंतान दंपतियों की लगती है भीड़, यहां ठाकुर जी को बांसुरी भेंट करने से मिलता है संतान सुख
28 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूपी के चित्रकूट की पावन धरती पर एक ऐसा मंदिर स्थित है, जिसकी आभा और आस्था दूर-दूर तक लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. हम बात कर रहे हैं रामघाट के समीप स्थित चरखारी राधा-कृष्ण मंदिर की, जिसे सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कारों से जुड़ा जीवंत केंद्र माना जाता है, यह वही स्थान है जहां प्रभु श्रीराम ने वनवास काल का साढ़े ग्यारह वर्ष बिताया था.
पवित्र प्रेम और त्याग की प्रेरणादायक कहानी
इस दिव्य मंदिर का निर्माण 1700 से 1800 ईस्वी के बीच पन्ना स्टेट की महारानी रूप कुंवर द्वारा करवाया गया था. यह वही रूप कुंवर थीं, जिनके पति महाराज मलखान सिंह युद्ध भूमि में वीरगति को प्राप्त हो गए थे. पति की मृत्यु के उपरांत, महारानी ने सांसारिक मोह छोड़कर स्वयं को भगवान राधा-कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया था, वे ठाकुर जी को बाल रूप में मानती थीं और दिनचर्या में उनकी सेवा उसी भाव से करती थीं जैसे कोई माता अपने बालक की सेवा करती है. यही भावना आज भी मंदिर में हर गतिविधि और सेवा में झलकती है.
संतान सुख की विशेष मान्यता
उन्होंने मंदिर की मान्यता के बारे में बताया कि यदि निःसंतान दंपत्ति यहां सच्चे मन से ठाकुर जी को बांसुरी अर्पित करें, तो उन्हें शीघ्र ही संतान सुख की प्राप्ति होती है. मंदिर परिसर के भीतर स्थित हवेली भी अपने आप में एक ऐतिहासिक धरोहर है. यह राजा-महाराजाओं के समय की हवेली आज भी वैभव और भव्यता का प्रमाण है. बताया जाता है कि इस हवेली में तत्कालीन राजपरिवार रहा करता था और यहीं से मंदिर की सभी गतिविधियों का संचालन होता था. मंदिर में दूर दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं.
सावन शुरू होने से पहले घर से हटा दें ये चीजें, नहीं तो बन सकती हैं दुर्भाग्य और बीमारी का कारण
28 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना हिंदू धर्म में बहुत पवित्र और ऊर्जा से भरा हुआ माना जाता है. यह समय होता है जब भगवान शिव की खास कृपा पाने के लिए व्रत, उपवास और पूजा-पाठ किए जाते हैं. लेकिन क्या सिर्फ पूजा करना ही काफी है? नहीं. ज्योतिष और वास्तु जानकार रवि पाराशर के अनुसार, सावन आने से पहले घर की सफाई और गलत या बेकार चीजों को हटाना भी उतना ही जरूरी है. उनके मुताबिक कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें अगर समय रहते नहीं हटाया गया तो वे न सिर्फ दुर्भाग्य को बुलावा देती हैं, बल्कि परिवार की सेहत और पैसों की स्थिति पर भी बुरा असर डाल सकती हैं. इनका असर पूजा-पाठ पर भी पड़ता है. इसलिए सावन से पहले घर को ताजगी और पॉजिटिव ऊर्जा से भर देना बहुत जरूरी होता है.
1. टूटी या फटी तस्वीरें और मूर्तियां
घर में अगर भगवान की कोई टूटी-फूटी मूर्ति या तस्वीर रखी है तो इसे तुरंत हटा देना चाहिए. खासकर सावन से पहले इनका होना घर के सौभाग्य में बाधा बनता है. ऐसी तस्वीरें नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और पूजा-पाठ का असर भी कम कर देती हैं.
2. बंद घड़ी या रुके हुए कैलेंडर
अगर आपके घर में कोई घड़ी बंद पड़ी है या पुराना कैलेंडर दीवार पर टंगा है तो यह जीवन में रुकावटें और आलस्य बढ़ाता है. सावन शुरू होने से पहले इन चीजों को बदलना जरूरी है क्योंकि यह समय नई शुरुआत और ऊर्जा का प्रतीक होता है.
3. मुरझाए हुए पौधे और सूखी तुलसी
तुलसी के पौधे को पवित्र माना जाता है लेकिन अगर वह सूख गया है या घर में कोई और पौधा मुरझाया हुआ पड़ा है तो यह दुर्भाग्य को बुलावा देता है. सावन में खासतौर पर हरियाली और प्रकृति से जुड़े तत्वों को जीवित और हरा-भरा रखना जरूरी होता है.
4. टूटे बर्तन और क्रैक वाले शीशे
घर में टूटे हुए बर्तन या दरार वाले शीशे रखना आर्थिक नुकसान और पारिवारिक तनाव का कारण बन सकता है. वास्तु शास्त्र में ऐसे सामानों को घर में रखना दोषपूर्ण बताया गया है. सावन के पहले इन चीजों से छुटकारा पाना शुभ होता है.
5. पुराने और गंदे झाड़ू
झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. अगर घर में फटा हुआ, टूटा या गंदा झाड़ू पड़ा है तो यह दरिद्रता और नकारात्मकता को बढ़ाता है. सावन के पहले नया झाड़ू लाना और पुराने को सही तरीके से नष्ट करना शुभ फल देता है.
6. बेकार पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान
घर में कई बार खराब पड़े मिक्सर, प्रेस, टीवी या मोबाइल जैसी चीजें यूं ही जगह घेरती रहती हैं. इनसे नकारात्मक ऊर्जा बनती है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है. सावन की शुरुआत एक साफ-सुथरे और व्यवस्थित घर से करें.
7. बंद पड़ी अलमारी और अनयूज्ड सामान
अगर घर में कोई अलमारी सालों से बंद है या कोई कमरा लंबे समय से नहीं खोला गया है तो सावन से पहले उसे जरूर साफ करें. अनयूज्ड सामान और धूल मिट्टी से घर में स्थिरता और सुस्ती आती है जो विकास में बाधा बनती है.
8. जले हुए या आधे खत्म किए अगरबत्ती और दीपक
पूजा के बाद बचे हुए जले हुए दीपक या अगरबत्ती को पूजा स्थान पर यूं ही पड़ा छोड़ देना अशुद्धि को दर्शाता है. सावन में यह आदत भगवान की कृपा में कमी कर सकती है. हर दिन पूजा के बाद सफाई जरूरी है.
सावधानी और सजगता है सबसे बड़ा उपाय
सावन न सिर्फ पूजा-पाठ का महीना है बल्कि यह खुद को और अपने घर को शुद्ध और ऊर्जावान बनाने का अवसर भी है. जब हम घर से नकारात्मक चीजों को बाहर करते हैं तो उसमें सुख, शांति और समृद्धि स्वत: ही आने लगती है. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से न केवल भगवान शिव की कृपा बनी रहती है बल्कि पूरे परिवार का स्वास्थ्य और भाग्य भी मजबूत होता है.
सावन शुरू होने से पहले अपने घर में मौजूद उन चीजों को पहचानें जो अशुभ मानी जाती हैं और उन्हें तुरंत हटा दें. ये न सिर्फ किस्मत और सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि तनाव और पैसों की रुकावटें भी ला सकती हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 28 जून 2025)
28 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- इस सप्ताह खर्च बढ़ेगा, व्यावसाय कार्य अल्प लाभ होगा, ध्यान दें।
वृष :- सज्जनों की संगति से लाभ होगा, कार्य में चतुराई से ही लाभ होगा, ध्यान रखें।
मिथुन :- मित्रों के अधिक विश्वास से विश्वासघात हो सकता है, ध्यान रखें।
कर्क :- व्यावसाय में अच्छा लाभ मिलेगा, किसी उत्सव में समलित होने का अवसर मिलेगा।
सिंह :- धन लाभ होगा, आनंद प्राप्ती के अवसर प्राप्त होंगे, हर्ष तथा यात्रा में सफलता मिले।
कन्या :- धन लाभ होगा, स्वास्थ्य सुधार होगा, समस्याओ का समाधान होगा, लाभ होगा।
तुला :- अधिकारियों से लाभ मिलेगा, शत्रुदल अकारण दब जायेगा किन्तु लाभ होगा।
वृश्चिक :- दाम्पत्य जीवन का मधुर संबंध अवश्य रहेगा, खुश रहेंगे, आनंद प्राप्त होगा।
धनु :- विरोधियों से आप सतर्क रहें, मानसिक तनाव बढ़ेगा तथा विरोध होगा, ध्यान दें।
मकर :- माता तथा सुतान की ओर से विपरीत व्यवहार मिलेगा, शत्रु पक्ष परेशान रहे।
कुम्भ :- सामाजिक उत्सव में शामिल होंगे, बुधवार व गुरुवार को कार्यों से लाभ मिलेगा।
मीन :- स्थिति में कुछ सुधार होगा, स्वास्थ्य खराब होगा तथा व्यय अधिक होगा, ध्यान रखें।
दही, साग... सावन में क्यों नहीं खाते ये 4 चीजें? केवल धार्मिक नहीं, इसके पीछे की साइंस भी कर देगी हैरान
27 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है. इस दौरान भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है और व्रत-उपवास रखने से लेकर खानपान तक में खास सावधानी बरती जाती है. खासकर सावन में कुछ चीजें खाने से मना किया जाता है, जैसे दही, हरी पत्तेदार सब्जियां (साग) और बैंगन. लोग इसे धार्मिक मान्यताओं से जोड़ते हैं, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं, जो हमारे स्वास्थ्य से जुड़े हैं. आइए जानते हैं कि आखिर सावन में इन चीजों को क्यों खाने से मना किया जाता है और इससे जुड़ी साइंस क्या कहती है.
दही क्यों नहीं खाते सावन में?
दही वैसे तो पाचन के लिए अच्छा माना जाता है और गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए इसका सेवन किया जाता है. लेकिन सावन के समय वातावरण में नमी और उमस बहुत ज्यादा होती है, जिससे बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं. इस मौसम में दही जल्दी खट्टा हो जाता है, और इसमें हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं. इसे खाने से पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, अपच, दस्त और फूड पॉइजनिंग हो सकती हैं. आयुर्वेद के अनुसार, सावन में वात दोष बढ़ता है और दही का सेवन इस दोष को और बढ़ा सकता है, जिससे शरीर में असंतुलन हो सकता है. इसलिए इस महीने में दही की बजाय छाछ या मट्ठे का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
साग क्यों नहीं खाते सावन में?
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, सरसों, मेथी आदि को भी सावन के महीने में खाने से परहेज किया जाता है. इसका कारण यह है कि इस मौसम में मिट्टी में ज्यादा नमी होती है, जिससे सब्जियों की जड़ों और पत्तियों में कीड़े लगने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा, बारिश का पानी खेतों में जमा हो जाता है जिससे सब्जियों में फंगस और बैक्टीरिया पनप सकते हैं. अगर इस तरह की सब्जियां ठीक से न धोई जाएं, तो यह पेट संक्रमण, दस्त या टाइफाइड जैसी बीमारियों का कारण बन सकती हैं. इसलिए आयुर्वेद और विज्ञान दोनों यही सलाह देते हैं कि सावन में हरी सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए या बहुत अच्छे से साफ करके पकाना चाहिए.
बैंगन क्यों नहीं खाया जाता सावन में?
बैंगन को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यह एक तामसिक भोजन है और भगवान शिव को सात्विक भोजन चढ़ाया जाता है. इसके अलावा, बैंगन को ‘गंदगी में उगने वाली सब्जी’ माना जाता है क्योंकि इसकी खेती गीली और कीट-पतंगों से भरी मिट्टी में होती है. वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो सावन में बैंगन में कीड़ों के अंडे होने की संभावना ज्यादा रहती है, क्योंकि यह सब्जी आसानी से संक्रमित हो सकती है. यह भी एक कारण है कि सावन में बैंगन खाने से मना किया जाता है, ताकि संक्रमण से बचा जा सके.
सावन में क्यों नहीं खाते हैं कढ़ी?
सावन के महीने में कढ़ी खाना मना किया जाता है क्योंकि यह दही से बनती है, जो इस मौसम में वात और कफ दोष को बढ़ा सकती है. इस समय पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, ऐसे में खट्टी और भारी चीजें पेट को नुकसान पहुंचा सकती हैं. कढ़ी जल्दी खराब भी हो जाती है जिससे फूड पॉइजनिंग या पेट की समस्याएं हो सकती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में सात्विक और हल्का भोजन करना शुभ माना गया है. इसलिए कढ़ी, दही और साग जैसी चीजों से परहेज करना बेहतर होता है.
कब है आषाढ़ महीने की विनायक चतुर्थी? अयोध्या के ज्योतिषी से जानें पूजा विधि और मुहूर्त
27 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म धर्म में भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है. हिंदू धमिक मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार हर महीने चतुर्थी तिथि पर व्रत करने और गणेश भगवान की पूजा-अर्चना करने से लोगों के जीवन में आ रही सभी बाधाएं खत्म हो जाती हैं. गौरतलब है कि हर महीने में दो बार चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि कब है आषाढ़ माह की विनायक चतुर्थी.
दरअसल, अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 28 जून को सुबह 6:23 बजे से हो रहा है जिसका समापन 29 जून को प्रातः 5:44 बजे रहोगा. उदया तिथि के अनुसार आषाढ़ माह की विनायक चतुर्थी का व्रत 28 जून को रखा जाएगा. इस दिन भगवान गणेश की विधि विधान पूर्वक पूजा करने का विधान है.
विनायक चतुर्थी के दिन करें ये काम
पंडित कल्कि राम ने बताया कि विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा आराधना करते समय 21 दूर्वा अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा बनी रहती है. इसके साथ ही श्री गणेशाय नमः मंत्र का जाप करें. इस मंत्र का जाप करने से विघ्नहर्ता की कृपा बनी रहती है और जीवन में सभी तरह की बाधाएं भी खत्म होती है साथ ही विनायक चतुर्थी के दिन पूजा पाठ करते वक्त भगवान गणेश को उनके प्रिय मोदक अथवा बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए. इसके साथ ही सिंदूर, लाल फूल, नारियल सुपारी, कलावा और जनेऊ अर्पित करना भी शुभ माना जाता है
सांप काटे तो डॉक्टर नहीं, सीधा यहां पहुंचते हैं लोग… कहते हैं इस जगह पर जहर भी तोड़ देता है दम, महाभारत काल से है कनेक्शन
27 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर कोई सांप डस ले तो सबसे पहले अस्पताल का ख्याल आता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक ऐसा मंदिर है, जहां लोग मानते हैं कि यहां आने भर से ही सांप के जहर का असर खत्म हो जाता है. रायबरेली जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर, लखनऊ-इलाहाबाद हाईवे किनारे हरचंदपुर विकास क्षेत्र के लालूपुर गांव में आस्तिक बाबा (Astik Baba Mandir) का ये प्रसिद्ध मंदिर स्थित है.
लोगों की मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति आस्तिक बाबा का नाम भी ले लेता है तो उसे सांपों से डर नहीं लगता. यहां तक कि अगर किसी को जहरीले सांप ने काट लिया हो, तो मंदिर में पहुंचने पर वो पूरी तरह ठीक हो जाता है. खास बात ये है कि इसके लिए किसी दवाई या इलाज की जरूरत नहीं पड़ती.
महाभारत काल से जुड़ी है मान्यता
मंदिर के पुजारी अमित तिवारी बताते हैं कि आस्तिक बाबा मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है. मान्यता के मुताबिक, एक बार राजा परीक्षित जंगल में शिकार पर गए थे. वहां उनके तीर से एक हिरण घायल हो गया, लेकिन वो हिरण अचानक गायब हो गया. तभी राजा ने एक ऋषि को ध्यान में लीन देखा. जब राजा ने उनसे सवाल किए और जवाब नहीं मिला तो गुस्से में आकर राजा ने ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया.
तक्षक नाग से जुड़ी है ये कहानी
कहा जाता है कि ये देखकर ऋषि के पुत्र श्रंगी ने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि एक सप्ताह के भीतर तक्षक नाग उन्हें डस लेगा. बाद में जब राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय को ये बात पता चली तो उन्होंने नागों को खत्म करने के लिए विशाल यज्ञ करवाया. तभी आस्तिक महाराज ने यज्ञ रोककर तक्षक नाग की जान बचाई. तभी से ऐसा माना जाता है कि आस्तिक बाबा का नाम लेने से सांपों का भय खत्म हो जाता है.
सावन में लगता है विशाल मेला
सावन माह की चतुर्दशी को यहां विशाल मेला लगता है. सिर्फ रायबरेली ही नहीं, आसपास के जिलों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में नाग पंचमी से ठीक एक दिन पहले हजारों लोग जुटते हैं ताकि सालभर सांपों का कोप उनके ऊपर न पड़े.
श्रद्धालु की जुबानी चमत्कार की कहानी
रायबरेली के लालूपुर गांव की रहने वाली श्रद्धालु पार्वती देवी बताती हैं कि पिछले साल सावन के महीने में उनकी बहू को सांप ने डंस लिया था. इलाज के बजाय वो सीधे आस्तिक बाबा के मंदिर आईं. यहां पूजा-अर्चना के बाद उनकी बहू पूरी तरह ठीक हो गई. अब वह परिवार सहित यहां पूजा करने आती हैं.
गुप्त नवरात्रि में छुपकर की जाती है ये खास पूजा, जानिए कैसे होती है देवी की साधना और क्यों माना जाता है इसे बेहद फलदायक
27 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार: साल में चार बार देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की विशेष आराधना करने का विधान है. साल में चार बार नवरात्रि के व्रत किए जाते हैं, जिनमें दो बार गुप्त नवरात्रि का आगमन होता है और दो बार प्रकट नवरात्रि के व्रत किए जाते हैं. इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 26 जून से शुरू है और 4 जुलाई को समाप्त है. हिंदू धर्म में समय की गणना वैदिक पंचांग से की जाती है, जो चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है. साल की शुरुआत होते ही चैत्र नवरात्रि भी आती हैं, जिनमें देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा-पाठ, अर्चना, स्तोत्र और धार्मिक ग्रंथ दुर्गा सप्तशती आदि का पाठ किया जाता है.
गुप्त नवरात्रि पर सिद्धि पाने के लिए पूजा
हरिद्वार के विद्वान धर्माचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि साल में मुख्य रूप से चैत्र नवरात्रि (चैत्र माह) और शारदीय नवरात्रि (आश्विन माह) प्रकट नवरात्रि मानी जाती हैं, जबकि आषाढ़ और माघ माह में गुप्त नवरात्रि के व्रत किए जाते हैं. प्रकट नवरात्रि में देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा, आराधना, व्रत आदि किए जाते हैं, जबकि गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की आराधना सिद्धि प्राप्त करने के लिए की जाती है.
प्रकट नवरात्रि की तरह ही गुप्त नवरात्रि में भी घट स्थापना, पूजा-पाठ, स्तोत्र आदि का पाठ किया जाता है, लेकिन यह सभी कार्य गुप्त रूप से करने का विधान है.
गुप्त नवरात्रि पर इन स्तोत्र, मंत्र का करें जाप
यदि किसी व्यक्ति को जीवन में कोई समस्या, परेशानी या बाधा आदि आ रही हो, तो देवी दुर्गा की गुप्त साधना से सब खत्म हो जाती हैं. शक्ति की देवी दुर्गा को सिद्ध करने और मनचाही मनोकामना पूर्ण करने के लिए गुप्त नवरात्रि विशेष फलदायक होते हैं. गुप्त नवरात्रि में मुख्य रूप से धार्मिक ग्रंथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बेहद जरूरी होता है.
दुर्गा सप्तशती में वर्णित देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और किलक स्तोत्र का पाठ करने के बाद ही अन्य स्तोत्र, मंत्र आदि का पाठ करना चाहिए. यदि इनका पाठ करने से पूर्व दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं किया जाता है, तो साधक को नवरात्रि का कोई फल प्राप्त नहीं होता. सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्त करने और उन्हें निर्विघ्न पूर्ण करने के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद ही फलदायक मानी जाती हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 26 जून 2025)
27 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- शत्रु पक्ष से हानि, शारीरिक विकार उत्पन्न होंगे तथा परेशानी अवश्य ही बनेगी।
वृष :- स्त्री सुख में कमी बने, कार्य में अड़चन पैदा होने से कार्य में उलझने बनेंगी।
मिथुन :- व्यापार में लाभ, खर्च रुकेंगे, कार्य पूर्ण होंगे, स्त्री-मित्रों में खर्च अवश्य होगा।
कर्क :- शारीरिक सुख, पुत्र चिन्ता, यश के कार्य में अपयश मिलेगा, ध्यान दें।
सिंह :- धन लाभ, कार्य सफल होंगे, मान-सम्मान बढ़े, भाग्योदय तथा आय अवश्य होगी।
कन्या :- यात्रा से लाभ, पारिवार में सुख-शांति तथा कार्य में रुकावट होगी।
तुला :- धार्मिक कार्यों में खर्च बढ़े, धन का आभाव किन्तु विशेष सुख होगा, ध्यान दें।
वृश्चिक :- चिन्ताओं की समाप्ति होगी, नये कार्य-व्यापार में लाभ के कार्य अवश्य होंगे।
धनु :- संघर्ष कार्य, अशांति, व्यापार में अशांति, संतान से सुख समाचार मिलेगा।
मकर :- रोग, शरीर व्याधि से कष्ट, धन की कमी, घर में अवश्य रहेगी।
कुम्भ :- व्यापार में सुधार होगा, शत्रु पीड़ा से सावधान रहें, स्वास्थ्य में कुछ खराबी होगी।
मीन :- व्यापार से लाभ, कार्यक्षेत्र-व्यावसाय में लाभ, भूमि-भवन की खरीदारी होगी।
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