धर्म एवं ज्योतिष
इस तीज पर बनाएं ये दो ट्रेडिशनल डिशेज, स्वाद और भक्ति दोनों से भर जाएगा त्योहार
26 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाली तीज का त्योहार सिर्फ व्रत और पूजा का नहीं, बल्कि घर में बने खास पकवानों से भी जुड़ा होता है. इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, सजती-संवरती हैं और शाम को शिव-पार्वती की पूजा करती हैं. पूजा के बाद घर में मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू फैल जाती है. तीज के दिन कुछ खास डिशेज बनाई जाती हैं जो स्वाद के साथ-साथ परंपरा से भी जुड़ी होती हैं. इन डिशेज को परिवार के साथ मिलकर खाना और बांटना त्योहार की मिठास को दोगुना कर देता है. आजकल की भागदौड़ वाली लाइफ में जब कुछ आसान और झटपट बनने वाली रेसिपीज़ की बात हो, तो तीज जैसे त्योहार पर भी स्वाद और सेहत दोनों को बैलेंस करना जरूरी हो जाता है. इन पारंपरिक पकवानों में प्यार और परंपरा दोनों का तड़का लगता है. बच्चे हो या बड़े, तीज पर बनने वाले घेवर और गुजिया सभी को बेहद पसंद आते हैं.
खास बात ये है कि ये रेसिपी ज़्यादा मेहनत नहीं मांगती, लेकिन टेस्ट में किसी होटल से कम नहीं होती. इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं हरियाली तीज पर बनाई जाने वाली दो सबसे पॉपुलर डिशेज- घेवर और मावे के गुजिया. ये दोनों डिशेज़ त्योहार को और भी स्पेशल बना देती हैं. तो चलिए जानते हैं इन्हें बनाने का आसान और स्वादिष्ट तरीका.
1. राजस्थानी घेवर रेसिपी (Ghevar Recipe)
सामग्री:
मैदा – 1 कप
घी – 2 टेबलस्पून
ठंडा दूध – 1/2 कप
बर्फ के टुकड़े – 3-4
पानी – 1 कप या जरूरत के अनुसार
शक्कर – 1 कप
पानी (चाशनी के लिए) – 1/2 कप
केसर – कुछ धागे
इलायची पाउडर – 1/4 टीस्पून
ड्राय फ्रूट्स – सजाने के लिए
घी – तलने के लिए
राजस्थानी घेवर बनाने की विधि स्टेप बाय स्टेप
1. एक बड़े बर्तन में घी और बर्फ के टुकड़े डालें और हाथ या मिक्सर से तब तक फेंटें जब तक घी सफेद और क्रीमी न हो जाए.
2. अब इसमें मैदा डालें और धीरे-धीरे ठंडा दूध और फिर पानी डालकर एकदम पतला, रनिंग बैटर बना लें. ध्यान रखें, घोल में कोई गांठ न हो.
3. कढ़ाई में घी गर्म करें. जब घी अच्छे से गर्म हो जाए तो एक करछी घोल ऊंचाई से डालें. घोल डालते ही बुलबुले बनने लगेंगे.
4. जैसे ही बुलबुले शांत हों, फिर से घोल डालें. यह प्रक्रिया 4-5 बार दोहराएं जब तक घेवर गोल और क्रिस्पी शेप में न आ जाए.
5. अब इसे बाहर निकालकर ठंडा होने दें.
6. दूसरी ओर, शक्कर, पानी और केसर मिलाकर एक तार की चाशनी तैयार करें.
7. अब ठंडा घेवर चाशनी में डुबोएं और निकाल कर ऊपर से ड्राय फ्रूट्स और इलायची पाउडर से सजाएं. चाहें तो ऊपर से मावा या मलाई भी डाल सकते हैं.
घी – 2 टेबलस्पून (मोयन के लिए)
मावा – 1 कप
शक्कर – 1/2 कप
इलायची पाउडर – 1/4 टीस्पून
नारियल बूरा – 2 टेबलस्पून
किशमिश – 1 टेबलस्पून
घी – तलने के लिए
मावा गुजिया बनाने की विधि स्टेप बाय स्टेप
1. मैदा में घी डालकर मोयन बनाएं और सख्त आटा गूंथ लें. इसे 15-20 मिनट ढककर रखें.
2. मावा को नॉनस्टिक पैन में हल्की आंच पर भून लें जब तक हल्का सुनहरा रंग न आ जाए. फिर इसे ठंडा होने दें.
3. अब मावा में शक्कर, नारियल बूरा, किशमिश और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें.
4. आटे से छोटी लोइयां बनाएं और बेल लें. बीच में मावा वाला मिश्रण रखें और आधा चांद आकार में मोड़कर किनारों को अच्छे से दबा दें.
5. चाहें तो गुजिया मोल्ड का इस्तेमाल करें ताकि सभी गुजिया एक जैसे बनें.
6. अब एक कढ़ाई में घी गर्म करें और धीमी आंच पर गुजिया को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें.
7. ठंडा होने पर एयर टाइट डिब्बे में स्टोर करें.
हरियाली तीज जैसे पारंपरिक त्योहारों पर घर में बने ये स्वादिष्ट व्यंजन त्योहार की रौनक को दोगुना कर देते हैं. घेवर और मावा गुजिया न सिर्फ स्वाद में शानदार हैं बल्कि तीज की धार्मिक और सांस्कृतिक भावना से भी जुड़े हुए हैं. तो इस बार तीज पर बाजार से कुछ खरीदने की जगह घर पर खुद से ये डिशेज बनाएं और पूरे परिवार के साथ त्योहार का मजा उठाएं.
अशुभ होता है सावन में तुलसी का सूखना...इस दिन करें ये उपाय, परेशानियां ले लेंगी यू-टर्न!
26 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर सनातनी के घर में तुलसी का पौधा होता ही है. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, क्योंकि तुलसी का पौधा साक्षात मां लक्ष्मी का प्रतीक होता है. हर रोज तुलसी पूजने से घर में आर्थिक तंगी दूर होती है और सुख-समृद्धि की बढ़ोतरी होती है. लेकिन कभी-कभी देखा जाता है कि अचानक तुलसी का पौधा सूख जाता है, जो कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है.
फिलहाल सावन का महीना चल रहा है और सावन के महीने में अगर अचानक तुलसी का पौधा सूख जाए तो क्या कुछ संकेत दे रहा है, कि अगर ऐसा हो तो क्या करना चाहिए और सूखी तुलसी को घर में रखना चाहिए या नहीं.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
11 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है और 9 अगस्त तक सावन महीना चलने वाला है. सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित रहता है.
इस महीने में भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से हर मनोकामना जरूर पूरी होती है. वहीं, इस महीने में माता तुलसी की भी पूजा की जाती है. लेकिन अगर वही तुलसी का पौधा सावन के महीने में सूख जाए तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है.
सावन के महीने में तुलसी पौधा सूखने से क्या संकेत मिलता है
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि अगर सावन के महीने में अचानक तुलसी का पौधा सूखने लगे तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है. घर में अचानक आर्थिक तंगी हो सकती है. नकारात्मक असर ज्यादा पड़ सकता है. घर में गृह कलह भी बढ़ सकती है.
सूखे हुए तुलसी के पौधे को हटाकर सावन महीने की एकादशी के दिन लक्ष्मी-नारायण की विधि-विधान से पूजा करके नया तुलसी का पौधा लगा दें, सब ठीक हो जाएगा. ध्यान रहे कि पौधे को ठीक से विसर्जित करें, सूखी पत्तियां, मंजरी और लकड़ी सब अपने पास रख लें. ये सब बहुत काम आते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 26 जुलाई 2025)
26 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- आशानुकूल सफलता का संतोष होगा तथा सफलता के साधन अवश्य ही बनेंगे ध्यान दें।र्
वृष राशि :- समय आराम से बीतेगा, व्यवसायिक क्षमता का ध्यान अवश्य रखें, समय का ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहेगा, किन्तु इष्ट मित्रों से परेशानी बनेगी, कार्य पर ध्यान दें।
कर्क राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, कार्य समय पर निपटा लें।
सिंह राशि :- प्रतिष्ठा वृद्धि एवं बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा, कार्य पर ध्यान अवश्य दें।
कन्या राशि :- संघर्ष से सफलता, व्यवसायिक क्षमता से संतोष, आशानुकूल लाभ से हर्ष होगा।
तुला राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि एवं बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा, कार्य बनेंगे।
वृश्चिक राशि :- सामाजिक कार्य में सुधार, कार्यगति में अनुकूलता बनेगी, इष्ट मित्र सुखवर्धक रहेगा।
धनु राशि :- अचानक शुभ समाचार प्राप्ति से कार्यगति में सुधार होगा, चिन्तायें कम होंगी।
मकर राशि :- कार्य स्थिति यथावत् रहेगी, सोचे कार्य समय पर पूर्ण होंगे, कार्य समय पर करें।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, शारीरिक कष्ट एवं चिन्ता, असमंजस की स्थिति बनेगी।
मीन राशि :- इष्ट मित्र सहायक होगा, दैनिक कार्यगति अनुकूल होगी, समय स्थिति का ध्यान अवश्य रखें।
विघ्नहर्ता गजानन की पूजा से दूर होते हैं वास्तुदोष
25 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वास्तु दोष से मुक्त सुन्दर व अच्छा घर बनाना या उसमें रहना हर व्यक्ति की इच्छा होती है पर थोड़ा सा भी वास्तु दोष आपको काफी कष्ट दे सकता है लेकिन वास्तु दोष निवारण के महंगे उपायों को अपनाने से पहले विघ्नहर्ता गजानन के आगे मस्तक जरूर टेक लें क्योंकि आपके कई वास्तु दोषों का ईलाज गणपति पूजा से ही हो जाता है।
वास्तु पुरुष की प्रार्थना पर ब्रह्मजी ने वास्तुशास्त्र के नियमों की रचना की थी। यह मानव कल्याण के लिए बनाया गया था, इसलिए इनकी अनदेखी करने पर घर के सदस्यों को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक हानि भी उठानी पड़ती है।
अत: वास्तु देवता की संतुष्टि के लिए भगवान गणेश जी को पूजना बेहतर लाभ देगा। इनकी आराधना के बिना वास्तुदेवता को संतुष्ट नहीं किया जा सकता। बिना तोड़-फोड़ अगर वास्तु दोष को दूर करना चाहते हैं तो इन्हें आजमाएं।
गणपति जी का वंदन कर वास्तुदोषों को शांत किए जाने में किसी प्रकार का संदेह नहीं होता है। मान्यता यह है कि नियमित गणेश जी की आराधना से वास्तु दोष उत्पन्न होने की संभावना बहुत कम होती है। इससे घर में खुशहाली आती है और तरक्की होती है।
मुख्य द्वार पर लगाये प्रतिमा
यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर गणेश जी की प्रतिमा इस प्रकार लगाए कि दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे। इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है। भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिंदूर से स्वास्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है।
घर या कार्यस्थल के किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा अथवा चित्र लगाए जा सकते हैं। किंतु प्रतिमा लगाते समय यह ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैर्ऋत्य कोण में नहीं हो। इसका विपरीत प्रभाव होता है।
घर में बैठे हुए गणेश जी तथा कार्यस्थल पर खड़े गणपति जी का चित्र लगाना चाहिए, किंतु यह ध्यान रखें कि खड़े गणेश जी के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कार्य में स्थिरता आने की संभावना रहती है।
भवन के ब्रह्म स्थान अर्थात् केंद्र में, ईशान कोण एवं पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति अथवा चित्र लगाना शुभ रहता है। किंतु टॉयलेट अथवा ऐसे स्थान पर गणेशजी का चित्र नहीं लगाना चाहिए जहां लोगों को थूकने आदि से रोकना हो। यह गणेशजी के चित्र का अपमान होगा। सुख, शांति, समृद्धि की चाह रखने वालों के लिए घर में सफेद रंग के विनायक की मूर्ति, चित्र लगाना चाहिए।
सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल नहीं
सर्व मंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। इससे शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। विघ्नहर्ता की मूर्ति अथवा चित्र में उनके बाएं हाथ की ओर संूड घुमी हुई हो इस बात का ध्यान रखना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेश जी हठी होते हैं तथा उनकी साधना-आराधना कठिन होती है। शास्त्रों में कहा गाया है कि दाएं सूंड वाले गणपति देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।
मंगल मूर्ति भगवान को मोदक एवं उनका वाहन मूषक अतिप्रिय है। अत: घर में चित्र लगाते समय ध्यान रखें कि चित्र में मोदक या लड्डू और चूहा अवश्य होना चाहिए। इससे घर में बरकत होती है। इस तरह आप भी बिना तोड़-फोड़ के गणपति पूजन के द्वारा से घर के वास्तुदोष को दूर कर सकते हैं।
तो आप खूब करेंगे यात्रा
25 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हाथ भी आपके व्यवहार और जीवनशैली की जानकारी दे देते हैं। जिन व्यक्तियों के हाथ की उंगलियां चौड़े सिरों वाली यानी सिरे पर से पहले एवं दूसरे जोड़ की अपेक्षा अधिक चौड़ी होती हैं ऐसे व्यक्ति में कर्म करने की तीव्र इच्छा रहती है। ये व्यक्ति खाली नहीं बैठ सकते, लेकिन अस्थिर प्रवृत्ति के होते हैं। ऐसे व्यक्ति यात्रा प्रेमी होते हैं और जीवन में बदलाव के पक्षपाती भी होते हैं। ऐसे व्यक्ति आविष्कारक एवं यान्त्रिक दक्षता वाली प्रवृत्ति के होते हैं। विस्तार, शोध एवं अनुसंधान से इन्हें विशेष प्रेम होता है।
जिन व्यक्तियों की हाथ की उंगलियों के सिरे मिश्रित हों अर्थात एक उंगली का सिरा नोकदार दूसरी उंगली का सिरा वर्गाकार, तीसरी का सिरा चौड़ा हो, ऐसा व्यक्ति बहुमुखी प्रतिभा का स्वामी होता है। ऐसा व्यक्ति ग्रहणशील होता है और किसी भी कार्य को अनायास ही करने में सक्षम होता है। ऐसा व्यक्ति सब कार्यों में दखल तो रखता है, किन्तु दक्ष किसी कार्य में नहीं होता। ऐसा व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न तो होता है, किन्तु उसमें विशेषज्ञता की कमी होती है। हर प्रकार के व्यक्ति से वह सही व्यवहार कर सकता है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 25 जुलाई 2025)
25 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मन में अशांति, किसी परेशानी से अवश्य बचिये, कुटुम्ब की समस्या बनेगी।
वृष राशि :- मानसिक कार्य में सफलता से संतोष होगा, धन का लाभ होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- मानसिक कार्य में सफलता, धन का व्यय होगा, बिगड़े कार्य बना लें।
कर्क राशि :- उत्तम कार्य बनें, अधिकारियों के सहयोग से रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे, ध्यान दें।
सिंह राशि :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल रहे, स्थिति पूर्ण नियंत्रण में बलबती रहेगी, समय का उपयोग करें।
कन्या राशि :- सामाजिक कार्य में प्रभुत्व वृद्धि होगी, धन लाभ तथा आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
तुला राशि :- अधिकारी वर्ग से विशेष समर्थन फलप्रद होगा तथा रुके कार्य बन जायेंगे।
वृश्चिक राशि :- धन लाभ तथा कार्य-कुशलता से संतोष, पराक्रम तथा समृद्धि के योग बनेंगे।
धनु राशि :- स्त्री-शरीर कष्ट, चिन्ता विवादग्रस्त होने से बचें, कार्य बनने के योग बन जायेंगे।
मकर राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक हो, दैनिक कार्यगति में सफलता अवश्य ही मिलेगी, समय पर कार्य करें।
कुंभ राशि :- कार्य-व्यवसाय में उत्तेजना, धन का व्यय एवं शक्ति शिथिल होगी, ध्यान रखें।
मीन राशि :- अधिकारी वर्ग का समर्थन फलप्रद होगा तथा कार्य-प्रतिष्ठा बढ़े।
3 दुर्लभ संयोग में नाग पंचमी... इस खास योग में करें पूजा! खत्म हो जाएगा काल सर्प दोष
24 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में हर महीने का विशेष महत्व होता है. लेकिन सावन के पवित्र महीने की बात ही कुछ अलग है. यह महीना भगवान शंकर को समर्पित होता है. इस पूरे महीने श्रद्धालु व्रत, उपवास और शिव पूजन के माध्यम से भगवान शंकर को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं. इसी सावन के महीने की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है. वहीं ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार नाग पंचमी पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि कब है नाग पंचमी, क्या है शुभ योग और पूजा का महत्व.
कि हिंदू पंचांग के अनुसार 29 जुलाई को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा. वैदिक पंचांग के अनुसार सावन महीने की पंचमी तिथि की शुरुआत 28 जुलाई की रात 11:28 बजे से होगी वहीं 29 जुलाई की रात 12:23 बजे पर इसका समापन होगा. उदया तिथि के अनुसार नाग पंचमी 29 जुलाई को मनाई जाएगी. ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जिसमें नागदेव की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होगा.
कब है नाग पंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त?
कल्कि राम बताते हैं कि नाग पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से लेकर दोपहर 1:25 बजे तक रहेगा. अगर आपके पास नाग मंदिर नहीं है तो शिवलिंग पर दूध, लावा, पुष्प और चावल अर्पित करके नाग देवता की पूजा करनी चाहिए. इस दिन व्रत रखने और ब्राह्मण अथवा गरीब को खीर का भोग खिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और ग्रह दोष भी शांत होते हैं.अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग अथवा राहु-केतु दोष है तो इस पूरे दिन विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से नाग देवता की विशेष कृपा प्राप्त होगी और सभी तरह के दोष से मुक्ति मिलेगी.
सावन में यहां करें दर्शन, दांपत्य जीवन में कभी नहीं आएगी दरार, ये शिव मंदिर है बेहद चमत्कारी
24 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब बात आस्था और भरोसे की हो, तो उत्तराखंड की धरती पर मौजूद हर मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है. लेकिन बागेश्वर जिले में स्थित बाबा बागनाथ मंदिर (Baghnath Mandir) एक ऐसा धार्मिक स्थान है, जहां सावन के महीने में शादीशुदा जोड़े विशेष रूप से दर्शन करने पहुंचते हैं. माना जाता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख और संतान सुख की प्राप्ति होती है.
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और सरयू, गोमती और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है. यह संगम धार्मिक रूप से बहुत पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान शिव खुद प्रकट हुए थे. इसलिए इसे सिद्धपीठ के रूप में भी पूजा जाता है.
सावन में विशेष पूजा से मिलता है फल
बागेश्वर के स्थानीय आचार्य कैलाश उपाध्याय के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. इस दौरान बाबा बागनाथ मंदिर में सुबह से शाम तक जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं. शादीशुदा जोड़े यहां शिवलिंग पर दूध और पंचामृत चढ़ाकर शिव-पार्वती की तरह सुखमय जीवन की कामना करते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो भी दंपती संतान सुख के लिए सच्चे मन से बाबा बागनाथ की पूजा करता है, उसकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं.
आस्था के साथ जुड़ी लोक परंपराएं भी
श्रद्धालु विरेन्द्र सिंह बताते हैं कि बाबा बागनाथ केवल भगवान शिव के रूप में पूजे नहीं जाते, बल्कि उन्हें स्थानीय लोगों का रक्षक देवता भी माना जाता है. सावन के दौरान मंदिर में सिर्फ पूजा ही नहीं होती, बल्कि सांस्कृतिक झांकियों, लोकगीतों और पारंपरिक मेलों का भी आयोजन किया जाता है.
हर साल सावन में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए रहने, खाने और पूजा की व्यवस्था मंदिर समिति और प्रशासन की तरफ से अच्छे से की जाती है.
एक बार जरूर करें बाबा बागनाथ मंदिर
बाबा बागनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और विश्वास का प्रतीक बन चुका है. यहां आकर लोग न सिर्फ मानसिक शांति महसूस करते हैं, बल्कि वैवाहिक जीवन की परेशानियों से राहत भी मिलती है.
अगर आप भी अपने जीवनसाथी के साथ रिश्ते में और अधिक मधुरता, स्थिरता और संतान सुख की इच्छा रखते हैं, तो इस सावन एक बार बागेश्वर के बाबा बागनाथ मंदिर के दर्शन जरूर करें. यह स्थान आपको न केवल धार्मिक ऊर्जा से भर देगा, बल्कि आपके रिश्ते में भी नया उजाला ला सकता है.
हरियाली तीज पर बरतें ये 7 सावधानियां, व्रत रहेगा सफल और मिलेगा मां पार्वती का आशीर्वाद, जानें क्या करें और क्या नहीं
24 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाली तीज का नाम सुनते ही आंखों के सामने हरियाली, मेहंदी, झूले और सज-धज कर व्रत रखने वाली महिलाएं नजर आने लगती हैं, ये दिन हर शादीशुदा महिला के लिए बहुत खास होता है, क्योंकि इस दिन वो अपने पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए व्रत रखती है, लेकिन कई बार कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियां इस व्रत को खंडित कर देती हैं और इसका पूरा फल नहीं मिल पाता, अगर आप भी इस बार 27 जुलाई को तीज का व्रत रखने जा रही हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान ज़रूर रखें ताकि आपका व्रत सफल और फलदायक हो सके.
1. निर्जला व्रत का सही पालन करें
हरियाली तीज का व्रत बिना पानी पिए यानी निर्जला रखा जाता है. इस दिन कुछ महिलाएं गलती से फल, चाय या पानी पी लेती हैं, जिससे व्रत टूट सकता है. अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं रहती या गर्भवती हैं, तो डॉक्टर की सलाह से ही फलाहार करें, लेकिन अगर शरीर स्वस्थ है तो पूरे दिन बिना पानी के व्रत रखना सही माना जाता है.
2. शांत मन और अच्छा व्यवहार रखें
इस दिन गुस्सा करना, लड़ाई-झगड़ा करना या किसी से बहस करना व्रत की पवित्रता को खराब कर सकता है. कोशिश करें कि मन शांत रखें और किसी से उलझने से बचें. मां पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करें, भजन गाएं और सकारात्मक सोच बनाए रखें.
3. न करें दिन में सोने की गलती
कई महिलाएं व्रत के चलते दिन में थककर सो जाती हैं, लेकिन तीज के दिन सोना वर्जित माना गया है. ऐसा करने से व्रत का पुण्य घट जाता है. इस दिन ध्यान, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करना ज़्यादा फलदायक होता है.
4. कपड़ों और रंगों का रखें ध्यान
हरियाली तीज के दिन काले और सफेद रंग से परहेज करें. हरे रंग को तीज का प्रतीक माना जाता है, जो हरियाली और सौभाग्य दर्शाता है. इसके अलावा लाल, पीला, गुलाबी जैसे शुभ रंग पहनें, जिससे दिन की ऊर्जा बनी रहे.
5. सोलह श्रृंगार है जरूरी
हरियाली तीज का त्योहार सोलह श्रृंगार और सुहाग की निशानी है. इस दिन बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, गहने और खासकर मेहंदी लगाना जरूरी माना जाता है. कुछ महिलाएं बिना श्रृंगार व्रत कर लेती हैं जो अधूरा माना जाता है.
6. व्रत के बाद करें दान
व्रत पूरा होने के बाद जल और अन्न का दान करना बहुत शुभ होता है. यह व्रत केवल पूजा तक सीमित नहीं होता, बल्कि दान-पुण्य से ही इसका फल पूर्ण होता है. जो महिलाएं व्रत के बाद दान नहीं करतीं, उनके पुण्य का असर अधूरा रह सकता है.
7. इन चीजों से करें परहेज
हरियाली तीज पर नुकीली चीजों जैसे सुई, कैंची आदि का इस्तेमाल न करें. मान्यता है कि इससे नेगेटिव एनर्जी का असर हो सकता है. साथ ही तुलसी के पत्ते तोड़ना भी मना है क्योंकि इस दिन देवी लक्ष्मी को परेशान करना ठीक नहीं माना जाता हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 24 जुलाई 2025)
24 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य-व्यवसाय गति उत्तम बनी रहेगी।
वृष राशि :- धन प्राप्ति के योग बनेंगे, नवीन मैत्री व मंत्रणा प्राप्त होगी, समय का ध्यान अवश्य रखें।
मिथुन राशि :- इष्ट-मित्र सहायक रहें, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, रुके कार्य बन जायेंगे।
कर्क राशि :- सामाजिक मान-प्रतिष्ठा, कार्य-कुशलता से संतोष तथा रुके कार्य बन ही जायेंगे।
सिंह राशि :- परिश्रम से समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे तथा व्यवसाय-गति उत्तम रहेगी।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहे, कार्य-कुशलता से संतोष रहेगा।
तुला राशि :- दैनिक व्यवसाय गति उत्तम तथा व्यवसायिक चिन्ता अवश्य ही बनेगी।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार होगा, असमंजस तथा सफलता न मिले, कार्य अवरोध होगा।
धनु राशि :- स्थिति अनियंत्रित रहे तथा नियंत्रण करना अवश्य होगा, ध्यान अवश्य देवें।
मकर राशि :- मानसिक चिंता एवं स्वाभाव में मानसिक खिन्नता अवश्य ही बन जायेगी, धैर्य रखें।
कुंभ राशि :- कार्य-योजना फलीभूत होगी, विघटनकारी तत्व परेशान अवश्य करेंगे।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा तथा कार्य-कुशलता से संतोष अवश्य होगा।
बेकार जा रही कमर तोड़ मेहनत, आते हैं अजीब-अजीब सपने, ये समस्या भूत-प्रेत से ज्यादा खतरनाक, इस ट्रिक से छुड़ाएं पिंड
22 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का पवित्र महीना चल रहा. इस महीने में भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा-आराधना की जाती है. ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शास्त्रों में सावन को महादेव की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. कहा जाता है कि इसी माह में भगवान शंकर ने देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. यही वजह है कि सावन में की गई आराधना से भगवान शंकर शीघ्र प्रसन्न होते हैं. सावन में भगवान शंकर को खुश करने के लिए कुछ खास उपाय अपनाने से कालसर्प दोष से भी मुक्ति मिलती है. कालसर्प दोष ज्योतिष में एक ऐसी स्थिति है जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु नामक दो छाया ग्रहों के बीच आ जाते हैं. इससे बुरे सपने आना, खासकर सांपों से जुड़े, मानसिक तनाव और बेचैनी, शिक्षा और करियर में बाधाएं, वैवाहिक जीवन में समस्याएं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं.
इसके 12 प्रकार
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि सावन का पवित्र महीना चल रहा है. भगवान शंकर को समर्पित इस महीने में तमाम श्रद्धालु भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए अनेक प्रकार के उपाय करते हैं. सावन के महीने में मान्यता है कि अगर कालसर्प का पूजन किया जाए तो उसका अनंत फल मिलता है और कालसर्प दोष से मुक्ति भी मिलती है. जब व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु विपरीत स्थिति में होते हैं या राहु और केतु के बीच में कई ग्रह एक साथ आ जाएं तब कालसर्प दोष का निर्माण होता है. कालसर्प दोष 12 प्रकार के होते हैं और सभी के अलग-अलग विधान है. कालसर्प से मुक्ति के लिए राहु और केतु के मंत्र का जाप किया जाता है.
इन मंत्रों का डेली करें जाप
ज्योतिष पंडित कल्कि राम कहते हैं कि भगवान शंकर के सम्मुख ही कालसर्प दोष का पूजन किया जाता है तभी उसका परिणाम आता है. भ्रम में पड़कर जो लोग अपने घर में कालसर्प दोष का पूजन करते हैं वो किसी भी प्रकार का फल नहीं पाते. इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए. कालसर्प दोष का पूजन शिव मंदिर में ही करना चाहिए. कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए सबसे पहले नाग-नागिन का जोड़ा रखकर विधि विधान पूर्वक पूजा की जाती है. इसके बाद राहु और केतु के मंत्र का जाप करें. महामृत्युंजय मंत्र के जाप का भी विधान है. सावन में प्रतिदिन भगवान शंकर का अभिषेक करने पर कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है. इस दौरान नाग स्तोत्र का पाठ आवश्यक करना चाहिए. इससे व्यापार, नौकरी और करियर में आ रही बाधा समाप्त होगी और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी.
रावणेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो मशहूर है कामना लिंग के नाम से, यहां शिव-शक्ति एक साथ हैं विराजमान
22 Jul, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना चल रहा है और आज हम आपको बताएंगे महादेव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से पांचवें नंबर पर आने वाले बाबा बैद्यनाथ धाम के बारे में, जिसे रावणेश्वर ज्योतिर्लिंग या फिर कामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है. यह द्वादश ज्योतिर्लिंग में अकेला ऐसा शिवलिंग है, जहां माता पार्वती और महादेव एक साथ विराजते हैं. कहते हैं यहां माता सती का हृदय भाग गिरा था. ऐसे में यहां दर्शन-पूजन से भक्तों को महादेव के साथ माता पार्वती का भी आशीर्वाद मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसलिए इसे मनोकामना लिंग या कामना लिंग भी कहा जाता है.
इसलिए है देवघर बाबा के नाम से प्रसिद्ध
झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ के इस धाम को शिव-शक्ति का मिलन स्थल माना जाता है. इसके साथ ही यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां शिव-शक्ति एकसाथ विराजमान हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार यह हृदय पीठ या हृदय तीर्थ के नाम से भी मशहूर है. यहां का शक्तिपीठ देवी पार्वती के एक रूप जया दुर्गा को समर्पित है. जहां पर यह मंदिर स्थित है उस स्थान को देवघर अर्थात देवताओं का घर कहते हैं.
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोत में इसके बारे में वर्णित है….
पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम् |
सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि ||
जो भगवान शंकर पूर्वोत्तर दिशा में चिताभूमि वैद्यनाथ धाम के अन्दर सदा ही पार्वती सहित विराजमान हैं, और देवता व दानव जिनके चरण कमलों की आराधना करते हैं, उन्हीं श्री वैद्यनाथ नाम से विख्यात शिव को मैं प्रणाम करता हूं.
मंदिर के उपर लगा है पंचशूल
अब आपको बता दें कि त्रिशूल और पंचशूल में क्या अंतर है. दरअसल, त्रिशूल भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बोधक हैं, वहीं अध्यात्म और सनातन धर्म के अनुसार पंचशूल ब्रह्मांड के पांच तत्वों का प्रतीक है. अब बाबा के मंदिर के ऊपर लगे पंचशूल के बारे में बताते हैं. इसे सुरक्षा कवच के तौर पर पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है. कहते हैं कि ऐसा ही पंचशूल रावण ने लंका के चारों तरफ लगाया था, जिससे वह पूरी तरह से सुरक्षित हो गई थी. बाबा बैद्यनाथ के मंदिर के ऊपर लगे इस सुरक्षा कवच की वजह से ही आज तक किसी भी प्राकृतिक आपदा का इस मंदिर पर असर नहीं हुआ है. यहां भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर के शिखर के गठबंधन की परंपरा है.
दर्शन मात्र से ही जीवन के पांच कष्ट से मिलती है मुक्ति
मान्यता है कि देवघर में पंचशूल के दर्शन मात्र से ही जीवन के पांच कष्ट रोग, दुख, भय, काल और दरिद्रता समाप्त हो जाते हैं. इसके साथ एक मान्यता यह भी है कि जब महादेव पंचमुखी रूप में अवतरित होते हैं तो वह पंचशूल धारण करते हैं. इसके साथ ही इस पंचशूल को पांच तत्वों क्षितिज, जल, पावन, गगन, समीर का प्रतीक भी माना गया है. इसके साथ ही भगवान शिव को भी पंचानंद कहा जाता है. यह पंचशूल उन्हीं पंचानंद का प्रतीक है.
इसलिए है शिव और शक्ति का मिलन स्थल
बाबा बैद्यनाथ धाम के बारे में यह भी कहा जाता है कि यहां पहले शक्ति की स्थापना हुई और फिर शिवलिंग की स्थापना हुई. सती के हृदय भाग के ऊपर भगवान भोले का शिवलिंग स्थित है. इसलिए इसे शिव और शक्ति का मिलन स्थल भी कहा जाता है.
मंदिर के परिसर में हैं 22 मंदिर
बाबा बैद्यनाथ के इस मंदिर परिसर में 22 मंदिर हैं. इनके बारे में पौराणिक मान्यता है कि देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने इन 22 मंदिरों का निर्माण एक पत्थर को एक रात में तराश कर किया था. मंदिर के निर्माण के दौरान उजाला होने लगा तो एक मंदिर अधूरा रह गया. बाबा बैद्यनाथ के मंदिर परिसर में उत्तर दिशा में मां काली, मां तारा, गौरी शंकर और अन्नपूर्णा देवी का मंदिर स्थापित है. दक्षिण दिशा में मां सरस्वती, माता मनसा देवी, हनुमान, कुबेर भगवान, महाकाल भैरव, संध्या माता, भगवान ब्रह्मा और गणेश स्थापित हैं. इसी तरह पश्चिम दिशा में आनंद भैरव, राम-सीता, लक्ष्मण मंदिर, बंगला देवी, सूर्य नारायण भगवान का मंदिर स्थापित है. जबकि, पूर्व दिशा में मां पार्वती, नीलकंठ भगवान, चंद्रगुप्त भगवान, लक्ष्मी नारायण भगवान का मंदिर स्थापित है.
मंदिर के आसपास हैं कई मंदिर
झारखंड के देवघर में ही बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर दूर नौलखा मंदिर है. यह राधा-कृष्ण का मंदिर है. मंदिर के निर्माण में 9 लाख रुपए लगे थे, इसलिए इस मंदिर का नाम नौलखा मंदिर पड़ा. बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर नंदन पहाड़ है. जहां शिवजी, पार्वतीजी, गणेशजी और कार्तिकेय जी के मंदिर के साथ नंदी मंदिर बना है. बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 13 किलोमीटर दूर तपोवन पर्वत है. यहां पर तपोनाथ महादेव का मंदिर है. पर्वत के नीचे एक जलकुंड है. ऐसा कहते हैं कि माता सीता इसमें स्नान करती थीं.
पहाड़ी में तीन मुख्य चोटियां
देवघर से लगभग 10 किलोमीटर दूर त्रिकुट पर्वत (2,470 फीट ऊंचा) है. पहाड़ी में तीन मुख्य चोटियां हैं, इसलिए इसका नाम त्रिकुट रखा गया है. रोपवे की सवारी आपको पहाड़ी की चोटी पर ले जाएगी. घने जंगल में प्रसिद्ध त्रिकुटांचल महादेव मंदिर और ऋषि दयानंद का आश्रम है.बाबा बैद्यनाथ मंदिर से 12 किमी दूर रिखिया आश्रम स्थित है. यह देश के सबसे पुराने योग आश्रमों में से एक है. इसकी स्थापना स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने की थी.
मंदिर के पास ही है बासुकीनाथ मंदिर
बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर दुमका जिले के जरमुंडी के पास बासुकीनाथ मंदिर है. जहां बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालु जरूर बाबा बासुकीनाथ के दर्शन के लिए पधारते हैं. इन्हें नागनाथ भी कहा जाता है. बासुकीनाथ धाम स्थित भगवान भोलेनाथ को ‘फौजदारी बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि यहां एक साथ भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती लोगों की फरियाद और अर्जी सुनते हैं.
शिवजी के साथ इस तरह करें हनुमानजी की पूजा अर्चना, जीवन में आएगी सुख, शांति और समृद्धि
22 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
22 जुलाई दिन मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है और यह सावन मास का पहला प्रदोष व्रत है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है. भौम प्रदोष व्रत के दिन हनुमानजी की भी पूजा अर्चना की जाएगी क्योंकि मंगलवार का दिन हनुमानजी को समर्पित है तो प्रदोष तिथि भगवान शिव को. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष तिथि का व्रत करने से सभी कष्टों व परेशानियों से मुक्ति मिलती है और भक्तों की सभी इच्छाएं भी पूरी होती हैं. साथ ही भगवान शिव के साथ हनुमानजी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत के दिन किस तरह करें शिवजी के साथ हनुमानजी की पूजा…
भौम प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत के दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर के 12 बजे से शुरू होकर 12:55 तक रहेगा. राहुकाल दोपहर के 03 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 05 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इस दिन द्वादशी मंगलवार की सुबह 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि की शुरुआत हो जाएगी. सूर्य कर्क राशि में रहेंगे और चंद्रमा सुबह 08 बजकर 15 मिनट से वृषभ राशि में रहेंगे, इसके बाद मिथुन राशि में गोचर करेंगे. हनुमानजी की पूजा अभिजीत मुहूर्त में करना उत्तम रहेगा.
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
भौम प्रदोष व्रत उस तिथि को कहा जाता है, जो मंगलवार को पड़ती है. यह भगवान शिव के साथ-साथ मंगल ग्रह की शांति के लिए भी अत्यंत फलदायक माना जाता है. इस दिन व्रत रखने से कर्ज, भूमि विवाद, शत्रु बाधा और रक्त से जुड़ी बीमारियों से राहत मिलती है. शिव पुराण के अनुसार, अगर किसी की कोई इच्छा पूरी नहीं हो रही है, तो उन्हें इस व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए. इस व्रत के माध्यम से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और जीवन की तमाम समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है.
इस तरह करें हनुमानजी की पूजा
त्रयोदशी तिथि को मंगलवार के दिन पड़ रही है इसलिए इस दिन बजरंग बली का व्रत भी किया जाएगा. स्कंद पुराण के अनुसार मंगलवार के दिन ही हनुमानजी का जन्म हुआ था. अंजनी पुत्र को प्रसन्न करने के लिए किए गए कुछ उपाय अपनाकर भक्त उनकी कृपा का पात्र बन सकते हैं. इसके लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लाल रंग का वस्त्र धारण कर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें. एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें. चौकी पर हनुमान भगवान की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद, हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ कर सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और प्रसाद चढ़ाएं.
शाम को भी हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी की आरती करें. व्रत में केवल एक बार भोजन करें और नमक का सेवन न करें. मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से शक्ति और साहस में वृद्धि होती है. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है. मान्यता है कि नियमपूर्वक बजरंगबली की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
साल 2025 में 2 अगस्त नहीं 21 सितंबर को लगेगा सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण, क्या-क्या प्रभाव पड़ेगा
22 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल 2025 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर दिन रविवार को लगेगा, जो कि आंशिक सूर्य ग्रहण होगा. पंचांग के अनुसार, 21 सितंबर को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को लग रहा है, इसे सर्व पितृ अमावस्या या महालय अमावस्या भी कहा जाता है. यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है, जब पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सर्व पितृ अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण का होना विशेष दुर्लभ माना जाता है. इस दिन जप-तप व दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कुंडली में मौजूद दोष भी दूर होते हैं. आइए जानते हैं साल 2025 के अंतिम सूर्य ग्रहण के बारे में…
भारत में दिखाई नहीं देगा
पितृ पक्ष के अंतिम दिन साल 2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण पड़ने वाले हैं और यह ग्रहण बुध ग्रह की राशि कन्या और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगने जा रहा है. सर्व पितृ अमावस्या के दिन लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. भारत में जब कोई ग्रहण दिखाई नहीं देता, तो यहां सूतक काल लागू नहीं होता. इसलिए इस दिन मंदिर बंद नहीं किए जाएंगे और पूजा-पाठ सामान्य रूप से होता रहेगा. भारत में यह ग्रहण खगोलीय घटना ज्योतिषीय मान्यताओं, धार्मिक परंपराओं और वैश्विक प्रभावों के चलते चर्चा में है. चाहे यह भारत में दृश्य हो या नहीं, ग्रहण का असर राशियों से लेकर मौसम, मानव मन और आध्यात्मिक अभ्यासों तक माना जाता है.
क्या है सूर्य ग्रहण?
जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य की रोशनी को पूरी या आंशिक रूप से ढक देता है, तो उसे सूर्य ग्रहण कहा जाता है. यह एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. 21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा अर्थात चंद्रमा द्वारा सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ही ढका जाएगा. भले ही यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, फिर भी इसके कुछ अप्रत्यक्ष प्रभाव माने जा सकते हैं.
ग्रहण के लिए वैदिक सुझाव
चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सामान्य जनजीवन और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई निषेध नहीं है. लेकिन ज्योतिषीय प्रभाव अवश्य हो सकता है, विशेष रूप से उन जातकों पर जिनकी कुंडली में सूर्य बलहीन या ग्रहण से प्रभावित स्थिति में है. ऐसे में स्थिति में सूर्य ग्रहण के समय ये वैदिक कार्य अवश्य करें.
– सूर्य अर्घ्य देना (ग्रहण वाले दिन प्रातः या अगले दिन सूर्योदय पर).
– आदित्य ह्रदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जाप.
– ताम्र पात्र में जल भरकर उसमें लाल चंदन, अक्षत और पुष्प डालकर सूर्य को अर्पण.
– ग्रहण के समय सूर्य को वस्त्र, गेहूं या गुड़ का दान करना.
खगोलीय अनुसंधान का अवसर
विश्व भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए यह एक सुनहरा मौका होता है जब वे सूर्य के कोरोना का अध्ययन कर पाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बलों में मामूली परिवर्तन आता है, जिससे समुद्रों में हल्की ज्वारीय लहरों में बदलाव आ सकता है. कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ लोगों को थकावट, चिंता या अनिद्रा जैसी समस्याएं होती हैं. हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, तो असर भी न्यूनतम रहेगा.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 22 जुलाई 2025)
22 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समय विफल होगा, कार्यगति में बाधा, चिन्ता एवं व्यर्थ भ्रमण होगा, कार्य अवरोध होगा।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों से मेल-मिलाप होगा तथा रुके कार्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे, समय का लाभ लेवें।
कर्क राशि :- भाग्य प्रबल होगा, रुके कार्य समय पर बना लें, समस्याओं का समाधान अवश्य निकालें।
सिंह राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, स्त्री वर्ग से हर्ष होगा।
कन्या राशि :- भावनायें संवेदनशील रहेंगी, कुटुम्ब में सुख, अचानक धन प्राप्ति से हर्ष होगा।
तुला राशि :- समय अनुकूल नहीं, स्वास्थ्य नरम रहेगा, किसी धारणा की अनदेखी अवश्य होगी।
वृश्चिक राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी, स्वभाव में अस्थिरता अवश्य रहेगी धैर्य से काम लें।
धनु राशि :- आशानुकूल सफलता में सुधार होगा, व्यवसाय गति उत्तम अवश्य होगी लाभ लें।
मकर राशि :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, मानसिक उद्विघ्नता हानिप्रद होगी, समय का ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सहयोगी होगा, कार्य बनेंगे, कार्यगति अनुकूल होगी ध्यान दें।
मीन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य समय पर बना लें, कार्य पर ध्यान अवश्य दें।
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