धर्म एवं ज्योतिष
राखी बांधते समय बहनें 3 गांठ क्यों लगाती हैं? जानें रक्षाबंधन की पौराणिक परंपरा और पूजा विधि
2 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत करने वाला एक खास त्योहार है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को आने वाला यह त्योहार पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है. रक्षाबंधन से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिनका पालन बहनें खास ध्यान से करती हैं. आपने देखा होगा कि राखी बांधते समय बहनें इसमें 3 गांठें लगाती हैं. आखिर ऐसा क्यों? क्या इन गांठों का कोई धार्मिक महत्व है? और पूजा की थाली में किन चीजों का होना जरूरी है ताकि विधि-विधान से यह पर्व मनाया जा सके? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
रक्षाबंधन 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त
2025 में रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा. ज्योतिष के मुताबिक, उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:22 से 5:04 बजे तक रहेगा, अगर दिन में राखी बांधना है तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12:53 तक सबसे अच्छा माना गया है. इसी दौरान अगर बहनें अपने भाई को राखी बांधेंगी तो उसका शुभ फल कई गुना बढ़ जाएगा.
पूजा की थाली में क्या होना चाहिए?
रक्षाबंधन की पूजा की थाली को बहुत ध्यान से तैयार किया जाता है. इसमें शामिल की जाने वाली हर चीज का अपना महत्व होता है. थाली में ये चीजें जरूर होनी चाहिए:
1. रोली और अक्षत (चावल) – तिलक के लिए
2. हल्दी – इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है
3. नारियल – समृद्धि का संकेत
4. राखी – भाई की कलाई पर बांधने के लिए
5. दीपक – पूजा के समय जलाने के लिए
6. मिठाई – जैसे मावा से बनी मिठाई या खीर
माना जाता है कि इन चीजों के बिना रक्षाबंधन की पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए थाली पूरी तरह सजी होनी चाहिए.
राखी में 3 गांठों का महत्व
राखी बांधते समय 3 गांठ लगाने की परंपरा काफी पुरानी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन गांठों का सीधा संबंध त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश से होता है.
1. पहली गांठ – भाई की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए
2. दूसरी गांठ – बहन की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए
3. तीसरी गांठ – भाई-बहन के रिश्ते में प्यार और मिठास बनाए रखने के लिए
कहा जाता है कि इन तीनों गांठों से बंधन और मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. यही कारण है कि हर बहन राखी बांधते समय 3 गांठ लगाना शुभ मानती है.
त्योहार का महत्व
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते की गहराई को दर्शाता है. यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में रिश्तों का कितना महत्व है. बहनें भाई की रक्षा और सुख की कामना करती हैं, वहीं भाई भी बहन की खुशियों और सुरक्षा का वचन देते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 02 अगस्त 2025)
2 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समृद्धि एवं सफलता के योग बनेंगे, अनिष्टता से बचने की चेष्ठा बनेगी।
वृष राशि :- कार्य में अशांति व अस्थिरता, मानसिक अवरोध बढ़े, असमंजस में रुकें।
मिथुन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो तथा व्यवसायिक क्षमता अनुकूल बनी ही रहेगी।
कर्क राशि :- लेन-देन के मामले में हानि होगी, कोर्ट के मामले स्थगित रखें, किसी के चंगुल में फंसने से बचें।
सिंह राशि :- लेनदेन के मामले में हानि होगी, धन प्राप्ति में बाधा होगी, सतर्कता से कार्य करने पर लाभ होगा।
कन्या राशि :- क्रोध व क्लेश से हानि संभव तनाव व बेचैनी तथा मानसिक परेशानी बनेगी।
तुला राशि :- सोचे हुये कार्य पूर्ण होंगे, अधिकारियों से समर्थन प्राप्त होगा, विशेष कार्य बनें।
वृश्चिक राशि :- अनावश्य वाद-विवाद से बचें, अधिकारियों से समर्थन अवश्य प्राप्त होगा।
धनु राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, अनावश्य विवाद से बचें, समय का ध्यान देवें।
मकर राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन जुटायें, तथा समय व धन व्यर्थ नष्ट न करें, ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, समय अनुकूल नहीं, लेन-देन से विचलित न होवें।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता से संतोष होगा, कार्यगति में सुधार अवश्य होगा ध्यान दें
शिवलिंग के पास रखा दिखे पीला फूल तो भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानिए इसका आध्यात्मिक अर्थ और भगवान शिव का छिपा हुआ इशारा
1 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कई बार मंदिर में दर्शन करते समय हमारी नजर शिवलिंग के पास रखे हुए एक पीले फूल पर जाती है. अक्सर यह कनेर का फूल होता है, जो सामान्य नजर में एक साधारण चीज लगती है, लेकिन इसके पीछे गहरी आस्था और संकेत छिपे होते हैं. खासतौर पर जब यह फूल पूजा के समय अकेले शिवलिंग पर रखा हो, तो यह भगवान की तरफ से कोई संदेश भी हो सकता है. कई भक्त मानते हैं कि यह फूल कुछ कह रहा है-शायद कोई जवाब, कोई आश्वासन या कोई चेतावनी. यह लेख उसी रहस्य को खोलता है कि आखिर शिवलिंग के पास रखा पीला कनेर का फूल क्या संकेत देता है और इससे जीवन में कैसे बदलाव आ सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
कनेर का फूल और शिव उपासना का जुड़ाव
कनेर का फूल खासतौर पर भगवान शिव को प्रिय माना जाता है. इसे पूजा में चढ़ाने से मनोकामना पूरी होने का विश्वास है. यह फूल सालभर उपलब्ध रहता है और इसमें विशेष ऊर्जा मानी जाती है. जब यह फूल बिना किसी के चढ़ाए पहले से ही शिवलिंग या उसके पास रखा दिखाई दे, तो इसे यूं ही नजरअंदाज न करें.
शिवलिंग के पास पीला फूल मिलना क्या दर्शाता है?
अगर किसी मंदिर में या किसी एकांत स्थान पर शिवलिंग के पास आपको पीला कनेर का फूल रखा दिखे, तो यह संयोग नहीं होता. यह एक संकेत हो सकता है कि आपकी परेशानी सुनी जा चुकी है या कोई समाधान आने वाला है.
यह भी माना जाता है कि जब मन बहुत बेचैन हो और अचानक ऐसे फूल के दर्शन हो जाएं, तो यह भगवान शिव का दिलासा होता है कि “सब ठीक होगा.”
पांच जगहों का स्पर्श और मन्नत का तरीका
अगर आप इस फूल को देखकर भावुक हो जाएं या कोई सवाल मन में हो, तो इसे शिवलिंग से हटाए बिना बस मन ही मन पांच स्थानों का ध्यान करते हुए-
1. सिर
2. हृदय
3. दोनों हथेलियां
4. चरण
5. आंखें
इन स्थानों का स्मरण कर मन की बात शिव से कहें. फिर फूल को वहीं छोड़ दें. यह तरीका बहुत से भक्तों ने अपनाया है और उन्हें समय के साथ शांति व समाधान मिला है.
यह संकेत हर किसी को नहीं मिलता
ऐसा नहीं कि हर व्यक्ति को ये फूल दिखे तो उसका अर्थ एक जैसा हो. यह संकेत केवल उन्हें मिलता है जिनका मन वास्तव में दुखी हो, जो किसी गहरी उलझन में हों या जो सचमुच ईमानदारी से भगवान से बात करने आए हों. ये फूल कहीं न कहीं शिव की उपस्थिति का एहसास दिलाते हैं और मन को संतुलन कर देते हैं.
क्या करें जब दिखे यह फूल?
1. फूल को न हटाएं
2. मन से शिव का स्मरण करें
3. एकांत में कुछ पल वहीं बैठें
4. अपनी परेशानी को शब्दों में कहने के बजाय भावना से कहें
5. धन्यवाद कहकर लौट जाएं
मां कामाख्या ने अपने प्रिय पुजारी को क्यों बना दिया पत्थर?
1 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मां कामाख्या मंदिर की गिनती भारत के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली मंदिरों में होती है. यह मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित है और यहां देवी शक्ति के तंत्र स्वरूप की पूजा होती है. माना जाता है कि यहां देवी मां सीधे अपने भक्तों को आशीर्वाद देने आती हैं. इस मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी कहानियां प्रचलित हैं जिनमें से एक सबसे अनोखी कहानी है मां कामाख्या और उनके भक्त पुजारी केंद्रकलाई की. कहा जाता है कि मां कामाख्या ने खुद अपने प्रिय पुजारी को मार डाला था. आखिर क्यों मां को ऐसा करना पड़ा? इस घटना के पीछे की कहानी जानकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे.
मां कामाख्या मंदिर का इतिहास
करीब 600 साल पहले की बात है जब मां कामाख्या मंदिर के गर्भगृह में पूजा करने का जिम्मा केंद्रकलाई नाम के पुजारी के पास था. वह मां के सच्चे भक्त थे और हर शाम गर्भगृह का दरवाजा बंद करके आंखें मूंदकर मां की आरती करते थे. कहा जाता है कि इसी समय मां कामाख्या वहां स्वयं प्रकट होकर नृत्य करती थीं. केंद्रकलाई ने कभी अपनी आंखें नहीं खोलीं, लेकिन मां के पायल की मधुर आवाज सुनते रहते थे.
राजा नर नारायण की इच्छा
उस समय कोच वंश के राजा नर नारायण को जब यह बात पता चली कि मां स्वयं प्रकट होकर नृत्य करती हैं, तो उन्होंने भी यह नजारा देखने की इच्छा जताई. केंद्रकलाई ने राजा को समझाने की कोशिश की कि ऐसा करना सही नहीं होगा, लेकिन राजा के दबाव में उन्हें मानना पड़ा. अगले दिन आरती के समय राजा ने मंदिर की दीवार में बने एक छोटे से छेद से मां को देखने की कोशिश की.
मां का श्राप और राजा की सजा
जैसे ही राजा की नजर मां पर पड़ी, उनकी आंखों की रोशनी चली गई. मां कामाख्या को सब समझ में आ गया कि उनका नृत्य किसी ने देख लिया है. वह बहुत क्रोधित हो गईं और उन्होंने तुरंत श्राप दिया कि अब से अगर कोच वंश का कोई भी व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करेगा, तो या तो वह अंधा हो जाएगा या उसकी मृत्यु हो जाएगी. आज भी कोच वंश से जुड़े लोग मां कामाख्या मंदिर में प्रवेश नहीं करते.
केंद्रकलाई का अंत
राजा की इस हरकत से मां कामाख्या बेहद दुखी और क्रोधित थीं. उन्हें यह भी महसूस हुआ कि केंद्रकलाई ने राजा को रोकने में कमजोरी दिखाई. मां ने अपने प्रिय पुजारी को पत्थर का बना दिया. कहा जाता है कि आज भी गर्भगृह के पास केंद्रकलाई का पत्थर का रूप मौजूद है. यह घटना भक्तों को यह संदेश देती है कि मां के नियमों का पालन करना कितना जरूरी है.
आज का मंदिर और आस्था
आज भी मां कामाख्या मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. लोग मानते हैं कि यहां मां शक्ति का वास है और सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती. मंदिर का माहौल रहस्यमयी होने के साथ-साथ बेहद शक्तिशाली भी है. मां कामाख्या की यह कथा हमें यह भी सिखाती है कि भक्ति में अनुशासन और विश्वास कितना महत्वपूर्ण होता है.
घर हो या ऑफिस, इस दिशा में लगाएं स्वास्तिक और खुद देखें शुभता, धन और अवसरों का अद्भुत असर
1 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्वास्तिक हमारे जीवन में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. यह सिर्फ धार्मिक चिन्ह नहीं है, बल्कि वास्तुशास्त्र में भी इसका बहुत बड़ा महत्व है. प्राचीन काल से ही स्वास्तिक को घर, दुकान और ऑफिस में लगाने की परंपरा रही है, क्योंकि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करता है. सही दिशा में सही रंग का स्वास्तिक लगाने से जीवन में तरक्की, खुशहाली और अवसरों की वृद्धि होती है, लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि किस दिशा में किस रंग का स्वास्तिक लगाना चाहिए, अगर आप भी स्वास्तिक को सही तरीके से इस्तेमाल करेंगे, तो यह आपके जीवन में अचूक परिणाम दे सकता है. आइए जानते हैं इसका सही तरीका और फायदे.
स्वास्तिक क्या है?
स्वास्तिक एक बेहद शक्तिशाली और शुभ चिन्ह है. इसका अर्थ है “स्वयं होने वाला” यानी जो अपने आप घटित हो. यह चार दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है और घर या कार्यस्थल में ऊर्जा को संतुलित करता है. इसे लगाने से घर में सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है.
किस दिशा में किस रंग का स्वास्तिक लगाना चाहिए?
स्वास्तिक को सही दिशा और सही रंग में लगाने से इसके प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं. वास्तु के अनुसार इसे इस प्रकार लगाएं –
1. उत्तर दिशा (North):
उत्तर दिशा को अवसरों की दिशा माना जाता है. यहां नीले रंग का स्वास्तिक लगाएं. इससे आपके जीवन में नए मौके और प्रगति के रास्ते खुलेंगे.
2. दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East):
इस दिशा का संबंध धन और आर्थिक स्थिरता से है. यहां लाल रंग का स्वास्तिक लगाना शुभ माना जाता है. इससे पैसे का प्रवाह बढ़ता है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.
3. पश्चिम दिशा (West):
पश्चिम दिशा का संबंध रिश्तों और सामाजिक पहचान से जुड़ा है. यहां सफेद रंग का स्वास्तिक लगाएं. इससे अच्छे रिश्ते बनते हैं और समाज में सम्मान मिलता है.
स्वास्तिक लगाने के समय ध्यान देने वाली बातें
1. स्वास्तिक हमेशा साफ-सुथरी जगह पर लगाएं.
2. इसे दरवाजे पर लगाते समय ध्यान रखें कि यह उल्टा न हो.
3. स्वास्तिक को रोजाना साफ करें और समय-समय पर इसे नए रंग से सजाएं.
4. इसे लगाते समय मन में अच्छे विचार रखें और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करें.
स्वास्तिक लगाने के फायदे
1. घर में सुख-समृद्धि आती है और पारिवारिक कलह कम होती है.
2. आर्थिक समस्याओं में सुधार होता है और बिजनेस में तरक्की मिलती है.
3. रिश्तों में प्यार और सहयोग बढ़ता है.
4. नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन शांत रहता है.
बरसात में नमक की सीलन से हैं परेशान? अपनाएं ये 2 आसान और फ्री देसी जुगाड़, असर देख चौंक जाएंगे
1 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मानसून आते ही ठंडी हवा, हरियाली और बरसात की बूंदें दिल को सुकून देने लगती हैं, लेकिन यही मौसम किचन के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है. वजह है – बढ़ती नमी. इस सीजन में जहां कपड़े सूखने में समय लेते हैं, वहीं खाने-पीने की चीजों में भी सीलन की दिक्कत शुरू हो जाती है. खासकर नमक, जो सबसे पहले नमी की चपेट में आता है. आपने भी नोटिस किया होगा कि बारिश के दिनों में नमक की डिब्बी या शेकर बोतल से नमक निकालना कितना मुश्किल हो जाता है. कभी तो नमक पत्थर जैसा जमा हुआ मिलता है, तो कभी शेकर में रहकर भी बाहर नहीं आता. इसका कारण सिर्फ और सिर्फ हवा में मौजूद नमी है, जो नमक में जाकर उसे गीला कर देती है.
अब हर बार नया नमक खरीदना या उसे किसी महंगे एयरटाइट डिब्बे में रखना भी हर किसी के लिए मुमकिन नहीं होता हैं. इसलिए हम लाए हैं आपके लिए दो ऐसे बेहद आसान और फ्री के जुगाड़, जिन्हें आजमाकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं. सबसे खास बात ये है कि इसके लिए न आपको कोई मेहनत करनी है और न ही कोई खर्च करना है.
नमक को बारिश में सीलन से कैसे बचाएं?
नीचे दिए गए ये दो घरेलू उपाय आपकी नमक से जुड़ी सारी परेशानियों को दूर कर सकते हैं. बस आपको उन्हें एक बार ट्राय करना है.
1. काबुली चने वाला तरीका – नमी को खींचकर रखे सूखा
किचन में मौजूद सफेद काबुली चने सिर्फ छोले-भटूरे के काम नहीं आते, बल्कि ये आपके नमक को भी खराब होने से बचा सकते हैं, ये एक बहुत ही पुरानी लेकिन कारगर ट्रिक है जिसे आज भी कई लोग अपनाते हैं.
कैसे करें इस्तेमाल:
1. किसी भी कांच या प्लास्टिक के जार में रखा नमक लें.
2. उसमें 8-10 काबुली चने डाल दें.
3. अब जार को अच्छी तरह से बंद कर दें.
बस इतना करने से ही चने नमक के आसपास मौजूद नमी को सोख लेते हैं. इससे नमक लंबे समय तक सूखा और बगैर ढेलों वाला बना रहता है. इस हैक को आप शेकर बोतल में भी आजमा सकती हैं.
2. ब्लोटिंग पेपर से करें नमी को बाहर
ब्लोटिंग पेपर एक ऐसा साधन है जो नमी को तेजी से सोखने की ताकत रखता है. जैसे यह तैलीय खाने से एक्स्ट्रा ऑयल को खींच लेता है, वैसे ही ये नमक की सीलन को भी दूर कर सकता है, अगर आपके पास ये पेपर नहीं है तो इसे स्टेशनरी की दुकान से बड़ी आसानी से लाया जा सकता है.
कैसे करें इस्तेमाल:
1. अपने नमक के डिब्बे या शेकर की सबसे नीचे एक परत ब्लोटिंग पेपर की बिछा दें.
2. अब ऊपर से नमक भरें.
3. चाहें तो जार के ढक्कन के अंदर भी ब्लोटिंग पेपर चिपका दें ताकि बाहर की नमी अंदर न जा सके.
इस आसान जुगाड़ से आपका नमक पूरी बारिश सीजन तक सुरक्षित रह सकता है और हां, अगर आपको ये ट्रिक्स फायदेमंद लगे हों तो इन्हें अपनी दोस्तों और घरवालों के साथ जरूर शेयर करें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 01 अगस्त 2025)
1 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समय से कार्यों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं, कार्य सिद्धी अवश्य होगी ध्यान दें।
वृष राशि :- सफलता, प्रभुत्व वृद्धि कार्य कुशलता से संतोष होगा, बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा।
मिथुन राशि :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
कर्क राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, असमंजस, विभ्रम की स्थिति रहेगी, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी।
सिंह राशि :- समय और सार्म्थय विफल होगा तथा अर्थ-व्यवस्था में बाधा आयेगी।
कन्या राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, कार्यगति अनुकूल बनेगी, सफलता से हर्ष होगा।
तुला राशि :- वृथा धन और समय नष्ट न होवें, अर्थ-व्यवस्था में बाधा बनने से कार्य रुकेंगे।
वृश्चिक राशि :- असमर्थता का वातावरण रहेगा, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी।
धनु राशि :- सामाजिक कार्य में मान-प्रतिष्ठा तथा प्रभुत्व वृद्धि के योग अवश्य बनेंगे।
मकर राशि :- विरोधी तत्वों से परेशान, प्रबलता तथा प्रभाव अवश्य बनाये रखें, कार्य बनें।
कुंभ राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, रुके कार्य अवश्य बनेंगे ध्यान दें।
मीन राशि :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
इस प्रकार महादेव होंगे प्रसन्न
31 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कालों के काल महाकाल शिव शंकर की महिमा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। कहते हैं कि देवों के देव महादेव को प्रसन्न करना बहुत आसान है। इनकी पूजा पूरी श्रद्धा और भाव से की जाए तो आप पर भोलेनाथ की कृपा बनी रहेगी। सावन में तो भागवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है।
इस शिव स्तुति से करें प्रभु के हर रूप का ध्यान। जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करूणाकर करतार हरे। जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशी सुखसार हरे। जय शशिशेखर, जय डमरूधर, जय जय प्रेमागार हरे।जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, नित्य अनन्त अपार हरे। निर्गुण जय जय सगुण अनामय निराकार साकार हरे। पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।जय रामेश्वर, जय नागेश्वर, वैद्यनाथ, केदार हरे।मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, जय महाकार, ओंकार हरे।जय त्रयम्बकेश्वर, जय भुवनेश्वर, भीमेश्वर, जगतार हरे।काशीपति श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अधहार हरे।नीलकंठ, जय भूतनाथ, जय मृतुंजय अविकार हरे।पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे। भोलानाथ कृपालु दयामय अवढर दानी शिवयोगी।निमिष मात्र में देते है नवनिधि मनमानी शिवयोगी। सरल हृदय अति करूणासागर अकथ कहानी शिवयोगी। भक्तों पर सर्वस्व लुटाकर बने मसानी शिवयोगी।
स्वयं अकिंचन जन मन रंजन पर शिव परम उदार हरे। पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।
आशुतोष इस मोहमयी निद्रा मुझे जगा देना। विषय वेदना से विषयों की मायाधीश छुड़ा देना। रूप सुधा की एक बूद से जीवन मुक्त बना देना। दिव्य ज्ञान भण्डार युगल चरणों की लगन लगा देना। एक बार इस मन मन्दिर में कीजे पद संचार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे। दानी हो दो भिक्षा में अपनी अनपायनी भक्ति विभो।
शक्तिमान हो दो अविचल निष्काम प्रेम की शक्ति प्रभो। त्यागी हो दो इस असार संसारपूर्ण वैराग्य प्रभो।
परम पिता हो दो तुम अपने चरणों में अनुराण प्रभो। स्वामी हो निज सेवक की सुन लीजे करूण पुकार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।
तुम बिन व्यकुल हूं प्राणेश्वर आ जाओ भगवन्त हरे। चरण कमल की बॉह गही है उमा रमण प्रियकांत हरें।
विरह व्यथित हूं दीन दुखी हूं दीन दयाल अनन्त हरे। आओ तुम मेरे हो जाओ आ जाओ श्रीमंत हरे।
मेरी इस दयनीय दशा पर कुछ तो करो विचार हरे। पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे। जय महेश जय जय भवेश जय आदि देव महादेव विभो। किस मुख से हे गुणातीत प्रभुत तव अपार गुण वर्णन हो। जय भव तारक दारक हारक पातक तारक शिव शम्भो। दीनन दुख हर सर्व सुखाकर प्रेम सुधाकर की जय हो। पार लगा दो भवसागर से बनकर करूणा धार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे। जय मनभावन जय अतिपावन शोक नसावन शिवशम्भो।
विपति विदारण अधम अधारण सत्य सनातन शिवशम्भो। वाहन वृहस्पति नाग विभूषण धवन भस्म तन शिवशम्भो।
मदन करन कर पाप हरन धन चरण मनन धन शिवशम्भो। विश्वन विश्वरूप प्रलयंकर जग के मूलाधार हरे।
पारवती पति हर हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।
इन उपायों से सुखमय और खुशहाल होगा जीवन
31 Jul, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सभी लोग सुख और खुशहाली से रहना चाहते हैं और इसके लिए धन सबसे अहम होता है। धन के बिना किसी प्रकार के कामकाज नहीं हो सकते। कई बार धन की कमी के पीछे कुछ ऐसे कारण होते हैं जिन्हें हम ज्योतिष उपायों से ठीक कर सकते हैं। इसका कारण यह है कि जिस घर में कलह होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता। हर किसी की अपने गृहस्थ जीवन में सुख और शांति की कामना होती है। घर और जीवन की खुशहाली ही व्यक्ति को जीवन में प्रगति के मार्ग पर ले जाती है। परिवार में व्याप्त कलह यानी की क्लेश से व्यक्ति का जीवन कठिनाइयों से भर जाता है। गृह क्लेश से बचने या उसे कम करने के लिए ज्योतिष में कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। हम आगे आपको ऐसे ही कुछ उपाय बता रहे हैं, जिनके इस्तेमाल से आपका जीवन सुखमय और खुशहाल बनाया जा सकता है।
पूर्व की और सिर रखकर सोए
आप किस दिशा में सिर और पैर करके सोते हैं यह गृह कलह में काफी अहम भूमिका निभाता है। गृह कलह से मुक्ति के लिए रात को सोते समय पूर्व की और सिर रखकर सोए। इससे आपको तनाव से राहत मिलेगी। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हनुमान जी की पूजा करें
हनुमान जी की नियमित रूप से की गई उपासना आपको सभी प्रकार के संकट और गृह कलह से दूर रखता है। यदि कोई महिला गृह कलह से परेशान हैं तो भोजपत्र पर लाल कलम से पति का नाम लिखकर तथा ‘हं हनुमंते नम:’ का 21 बार उच्चारण करते हुए उस पत्र को घर के किसी कोने में रख दें। इसके अलावा 11 मंगलवार नियमित रूप से हनुमान मंदिर में चोला चढाएं एवं सिंदूर चढाएं। ऐसा करने से परेशानियों से राहत प्राप्त होगी।
शिवलिंग पर जल चढ़ायें
प्रतिदिन सुबह में स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर मंदिर या घर पर शिवलिंग के सामने बैठकर शिव उपासना करें। आप ‘ऊँ नम: सम्भवाय च मयो भवाय च नम:। शंकराय च नम: शिवाय च शिवतराय च:।।’ मंत्र का 108 बार उच्चारण कर सकते हैं। इसके बाद आप शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। ऐसा नियमित करने से प्पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनी रहती है।
गणेश जी की उपासना करें
यदि किसी घर में पति-पत्नी या बाप-बेटे के बीच कलह है या किसी भी बात पर विवाद चल रहा है तो इसमें गणेश उपासना फायदेमंद रहेगी। वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए आप नुक्ति के लड्डू का भोग लगाकर प्रतिदिन श्री गणेश जी और शक्ति की उपासना करे।
चीटियों को शक्कर या आटा डालें
चीटियों के बिल के पास शक्कर या आटा व चीनी मिलाकर डालने से गृहस्थ की समस्याओं का निवारण होता है। ऐसा नियमित 40 दिन तक करें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में कोई नागा न हो।
कुमकुम लगाए
एक गेंदे के फूल पर कुमकुम लगाकर उसे किसी देव स्थान में मूर्ति के सामने रख दें। ऐसा करने से रिश्तों में आया तनाव और मतभेद दूर होते हैं। साथ ही छोटी कन्या को शुक्रवार को मीठी वस्तु खिलाने और भेंट करने से आपके संकटों का निवारण होता है।
घर मे व्याप्त कलह क्लेश को कम करने के लिए पति-पत्नी को रात को सोते समय अपने तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और कपूर रखें। सुबह में सूर्योदय से पहले उठकर सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें और कपूर को निकालकर अपने कमरे में जला दें। ऐसा करने से लाभ मिलेगा।
भोजन करने संबंधी कुछ जरूरी नियम
31 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन ध्रर्म में आहार ग्रहण करने के दौरान भी कुछ नियमों का पालन करना जरुरी माना गया है। माना गया है कि जिसप्रकार हम आहार करेंगे वैसे ही हमारे विचार भी होंगे।
सर्वप्रथम : भोजन करने से पूर्व हाथ पैरों व मुख को अच्छी तरह से धोना चाहिये। भोजन से पूर्व अन्नदेवता, अन्नपूर्णा माता की स्तुति करके उनका धन्यवाद देते हुए तथा सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो, ईश्वर से ऐसी प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए।
वहीं भोजन बनाने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से, मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाएं और सबसे पहले 3 रोटियां (गाय, कुत्ते और कौवे हेतु) अलग निकालकर फिर अग्निदेव को भोग लगाकर ही घर वालों को खिलाएं।
भोजन के समय
प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है, क्योंकि पाचनक्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक एवं सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले तक प्रबल रहती है।
जो व्यक्ति सिर्फ एक समय भोजन करता है वह योगी और जो दो समय करता है वह भोगी कहा गया है
एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है सुबह का खाना स्वयं खाओ, दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन दुश्मन को दो
भोजन की दिशा:
भोजन पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है। पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है।
ऐसे में न करें भोजन:
शैया पर, हाथ पर रखकर, टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए।
मल-मूत्र का वेग होने पर, कलह के माहौल में, अधिक शोर में, पीपल, वटवृक्ष के नीचे भोजन नहीं करना चाहिए।
परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए।
ईर्ष्या, भय, क्रोध, लोभ, रोग, दीनभाव, द्वेषभाव के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है।
खड़े-खड़े, जूते पहनकर सिर ढंककर भोजन नहीं करना चाहिए
ये भोजन न करें:
गरिष्ठ भोजन कभी न करें।
बहुत तीखा या बहुत मीठा भोजन न करें।
किसी के द्वारा छोड़ा हुआ भोजन न करें।
आधा खाया हुआ फल, मिठाइयां आदि पुनः नहीं खाना चाहिए।
खाना छोड़कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए।
जो ढिंढोरा पीटकर खिला रहा हो, वहां कभी न खाएं।
पशु या कुत्ते का छुआ, रजस्वला स्त्री का परोसा, श्राद्ध का निकाला, बासी, मुंह से फूंक मारकर ठंडा किया, बाल गिरा हुआ भोजन न करें।
अनादरयुक्त, अवहेलनापूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करें।
*कंजूस का, राजा का, वेश्या के हाथ का, शराब बेचने वाले का दिया भोजन और ब्याज का धंधा करने वाले का भोजन कभी नहीं करना चाहिए।
भोजन करते वक्त क्या करें:
भोजन के समय मौन रहें।
रात्रि में भरपेट न खाएं।
बोलना जरूरी हो तो सिर्फ सकारात्मक बातें ही करें।
भोजन करते वक्त किसी भी प्रकार की समस्या पर चर्चा न करें।
भोजन को बहुत चबा-चबाकर खाएं।
गृहस्थ को 32 ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए।
सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन, अंत में कड़वा खाना चाहिए।
सबसे पहले रसदार, बीच में गरिष्ठ, अंत में द्रव्य पदार्थ ग्रहण करें।
थोड़ा खाने वाले को आरोग्य, आयु, बल, सुख, सुंदर संतान और सौंदर्य प्राप्त होता है।
भोजन के पश्चात क्या न करें:
भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए।
भोजन के पश्चात क्या करें:
भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। भोजन के एक घंटे पश्चात मीठा दूध एवं फल खाने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।
क्या-क्या न खाएं:
रात्रि को दही, सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए।
दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना।
दूध-खीर के साथ खिचड़ी नहीं खाना चाहिए।
बुधवार को भगवान गणेश की होती है पूजा, रखा जाता है व्रत
31 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में सप्ताह के सारे दिन किसी न किसी भगवान को समर्पित हैं। जिस तरह से सोमवार का दिन भगवान शिवजी का और मंगलवार का दिन हनुमान जी का है। उसी तरह से बुधवार को भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके लिए व्रत रखा जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक व्रत रखने से भगवान खुश होते हैं। आज हम आपके लिए लाए हैं बुधवार के व्रत की कथा। व्रत रखने वाले लोगों को इस दिन यह कथा सुननी होती है।
प्राचीन काल की बात है एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल गया। कुछ दिन अपने ससुराल में रुकने के बाद व्यक्ति ने अपने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने को कहा लेकिन सास-ससुर ने कहा कि आज बुधवार है और इस दिन हम गमन नहीं करते हैं लेकिन व्यक्ति ने उनकी बात को मानने से साफ इनकार कर दिया। आखिरकार लड़की के माता-पिता को अपने दामाद की बात माननी पड़ी और अपनी बेटी को साथ भेज दिया। रास्ते में जंगल था, जहां उसकी पत्नी को प्यास लग गई। पति ने अपना रथ रोका और जंगल से पानी लाने के लिए चला गया। थोड़ी देर बाद जब वो वापस अपनी पत्नी के पास लौटा तो देखकर हैरान हो गया कि बिल्कुल उसी के जैसा व्यक्ति उसकी पत्नी के पास रथ में बैठा था।
ये देखकर उसे गुस्सा आ गया और कहा कि कौन है तू और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठा है। लेकिन दूसरे व्यक्ति को जवाब सुनकर वो हैरान रह गया। व्यक्ति ने कहा कि मैं अपनी पत्नी के पास बैठा हूं। मैं इसे अभी अपने ससुराल से लेकर आया हूं। अब दोनों व्यक्ति झगड़ा करने लगे। इस झगड़े को देखकर राज्य के सिपाहियों ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
यह सब देखकर व्यक्ति बहुत निराश हुआ और कहा कि हे भगवान, ये कैसा इंसाफ है, जो सच्चा है वो झूठा बन गया है और जो झूठा है वो सच्चा बन गया है। ये कहते है कि फिर इसके बाद आकाशवाणी हुई कि ‘हे मूर्ख आज बुधवार है और इस दिन गमन नहीं करते हैं। तूने किसी की बात नहीं मानी और इस दिन पत्नी को ले आया।’ ये बात सुनकर उसे समझ में आया की उसने गलती कर दी। इसके बाद उसने बुधदेव से प्रार्थना की कि उसे क्षमा कर दे।
इसके बाद दोनों पति-पत्नि नियमानुसार भगवान बुध की पूजा करने लग गए। ज्योतिषियों के मुताबिक जो व्यक्ति इस कथा को याद रखता उसे बुधवार को किसी यात्रा का दोष नहीं लगता है और उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। बुधवार के दिन अगर कोई व्यक्ति किसी नए काम की शुरुआत करता है तो उसे भी शुभ माना जाता है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 31 जुलाई 2025)
31 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- बढ़िया यात्रा, विवाद, कष्ट, मातृ कष्ट, व्यय, विरोध होगा, आंशिक हानि की संभावना।
वृष राशि :- धन लाभ, व्यापार में प्रगति, शुभ कार्य होगा, आशानुकूल परिणाम से हर्ष होगा।
मिथुन राशि :- पितृ कष्ट, यात्रा योग, व्यय लाभ, अशांति का वातावरण रहेगा, धैर्य रखें।
कर्क राशि :- यात्रा शुभ होगी, भूमि लाभ, हर्ष, कार्य सिद्धी, गृहकार्य की व्यवस्था पूर्ण होगी
सिंह राशि :- शत्रु भय, प्रवास, विरोध, उद्योग-व्यापार में लाभ, लाभ के कार्य सफल होंगे।
कन्या राशि :- लाभ, सिर-नेत्र पीड़ा होगी, यात्रा परेशानीयुक्त होगी, धैर्य के साथ कार्य पूर्ण करें।
तुला राशि :- सुख, सफलता, निर्माण कार्य होगा, प्रवास, राजकार्य में व्यावस्था से लाभ होगा।
वृश्चिक राशि :- मानसिक तनाव आकस्मिक बढ़ेगा, स्वजनों से सहानुभूति अवश्य मिलेगी।
धनु राशि :- व्यवसाय की उन्नति से आर्थिक स्थिति में विशेष सुधार होगा, समय का लाभ लें।
मकर राशि :- विलास सामग्री का संचय होगा, अधिकारी वर्ग की कृपा का लाभ मिलेगा।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्रों से लाभ, अच्छा सहयोग मिलेगा, उत्तम लाभ के योग बनेंगे।
मीन राशि :- गृह कलह, हीन मनोवृत्ति रहेगी, शरीर पीड़ा तथा परेशानी अवश्य ही बनेगी।
300 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है यहां का बड़ और इमली का पेड़, सच्चे मन से धागा बांधने पर मन्नत होती है पूरी
30 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित प्राचीन खोड़ा गणेश मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि जन आस्था और विश्वास का एक प्रमुख केंद्र भी है. यह मंदिर अपने चमत्कारी प्रभाव और विशेष मान्यताओं के लिए जाना जाता है. यहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना करते हैं.
इस मंदिर की एक खास पहचान यहां मंदिर परिसर में स्थित बड़ और इमली के पेड़ से भी है जो कि लगभग 300 वर्षों से भी अधिक पुराना है.यह कोई साधारण वृक्ष नहीं है, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है. मान्यता है कि दोनों पेड़ों के मिले हुए तनों में 12 स्थानों पर भगवान गणेश की आकृति उभरती हुई दिखाई देती है, जिसे श्रद्धालु दिव्य चमत्कार मानते हैं.
पेड़ पर धागा बांधने से मन्नत होती है पूरी
कि मंदिर परिसर में 300 वर्षों से भी अधिक पुराना बड़ और इमली का पेड़ है, जिसका तना आपस में जुड़ा हुआ है. दोनों पेड़ों के आपस में मिले तनों में 12 जगह पर भगवान गणेश की आकृति के दर्शन होते हैं. यहां पर श्रद्धालु अपनी मन्नत का धागा बांधते हैं. पुजारी ने आगे बताया कि परिवार में किसी की शादी विवाह नहीं हो रहे हो तो यहां बड़ और इमली के पेड़ पर सच्चे मन से मनोकामना का धागा बांधने से शादी विवाह की मन्नत पूरी होती है. वहीं जब किसी श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है, तो वह यहां आकर कई प्रकार के आयोजन और भंडारा कराते हैं.
मन्नत पूरी होने पर भक्त करते हैं धार्मिक आयोजन
पुजारी पवन कुमार शर्मा आगे बताते हैं कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी मुरादें अवश्य पूरी होती है. अनेक लोगों ने इस स्थान पर आकर मन्नत का धागा बांधा और जब उनकी शादी या अन्य इच्छाएं पूरी हुई. मन्नत पूरी होने के बाद लोग इस पवित्र स्थल पर पहुंचते हैं और धन्यवाद स्वरूप भंडारा और अन्य धार्मिक आयोजन करते हैं.
पूजा की थाली में छुपा सेहत का खजाना...महादेव को चढाएं ये फूल, मिलेंगे कई चमत्कारिक फायदे
30 Jul, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दक्षिण भारत में नागकेसर के फूल का उपयोग शिव पूजा के लिए किया जाता है ऐसी मान्यता है की नागकेसर का फूल भगवान शिव को अत्यंत पसन्द है. इसकी उत्पत्ति से जुड़ी एक पौराणिक कथा है समुद्र मंथन से जुड़ी कथा है की जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया तो उसमें से कई रत्न और विष निकले. इसी प्रक्रिया में नागकेसर का फूल भी प्रकट हुआ. कहा जाता है कि भगवान शिव ने इस फूल को अपने शीश पर धारण किया जिसके बाद से यह उनकी पूजा में विशेष स्थान रखता है.
मान्यता के अनुसार नागकेसर के फूलों से शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं. इस फूल का उपयोग शनि और केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए भी किया जाता है.
सेहत के लिए फायदेमंद
नागकेसर को भारतीय लौंग भी कहा जाता है और आयुर्वेद में इसे एक रसायन माना गया है. इससे हमारेस्वास्थ्य फायदा होता हैं जैसे पेट दर्द, गैस और अपच में राहत देता है.चूर्ण में इसका उपयोग होता है. इसका तेल घाव, खुजली और एक्जिमा में लाभदायक है और चेहरे के दाग-धब्बों को दूर करने में मददगार है इसकी सुगंध मन को शांत करती है.
वास्तु एवं ज्योतिषीय उपाय
नागकेसर के फूलों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन लाभ होता है. शनिवार को शनि मंदिर में नागकेसर और सरसों का तेल चढ़ाने से शनि का कोप शांत होता है. घर में नागकेसर की लकड़ी या फूल रखने से वास्तु दोष दूर होते हैं और पॉजिटिव ऊर्जा आती है
नागकेसर का उपयोग कैसे करें?
चाय या काढ़ा इसके फूलों को उबालकर पीने से सर्दी-खांसी में आराम मिलता है. नारियल तेल में नागकेसर मिलाकर लगाने से जोड़ों का दर्द कम होता है. पूजा में शिवलिंग पर दूध और नागकेसर चढ़ाने से विशेष फल मिलता है.
पहली बार बांधने जा रही हैं राखी तो जान लें सही नियम, वरना हो जाएगा सब उल्टा-पुल्टा
30 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में हर पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है. हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन मनाया जाता है. इस साल रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त को होगा. मान्यता के अनुसार, इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख, समृद्धि और सुरक्षा की कामना के लिए उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं. राखी के त्यौहार को खास बनाने के लिए बहनें पहले से ही तैयारी करती हैं, जिसमें पूजा की थाली सजाना भी अहम होता है. सवाल है कि पूजा की थाली में किन-किन वस्तुओं को शामिल करें ताकि शुभ फल प्राप्त हो. जो बहनें पहली बार राखी बांधने जा रही हैं, उनके लिए ये जानना तो और भी जरूरी है.
हर चीज किसी न किसी का प्रतीक
कि रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के सौहार्द को दर्शाता है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधते हैं. इसके बदले में भाई अपने बहन को रक्षा के लिए वचन देता है. रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से पहले बहनें खाली थाली को सजाती हैं, जिसमें कुमकुम, रोली, चावल, दीपक, मिठाई और नारियल रखना बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है. अगर आप अपने भाई की कलाई में राखी बांध रही हैं तो सबसे पहले थाली में कुमकुम या रोली जरूर होनी चाहिए. यह विजय और समृद्धि का प्रतीक है.
इसलिए उतारते हैं आरती
सनातन धर्म में कोई भी पूजा हो, उसमें कच्चे चावल जरूर होता है. ये सुभिता का प्रतीक होता है. भाई के मस्तिष्क पर अक्षत लगाना, रक्षाबंधन की पूजा का एक अंग है. बहनें राखी बांधने के बाद अपने भाई को मिठाई भी खिलाती हैं, यह भाई बहन के रिश्ते की मिठास को दर्शाता है. थाली में एक दीपक भी रखा जाता है. राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारी जाती है ताकि उसे बुरी नजर से बचाया जा सके. ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. रक्षाबंधन की थाली में नारियल को होना भी बेहद शुभ है. यह श्रीफल होता है, जो माता लक्ष्मी का प्रतीक है. इसे रखने से भाई को तरक्की और समृद्धि प्राप्त होती है.
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