धर्म एवं ज्योतिष
सिंदूर और तिलक: भारतीय समाज में रिश्तों, ऊर्जा और पहचान को जोड़ने वाले गहरे प्रतीक, जानिए दोनों का महत्व
30 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिंदूर, जिसे कई जगहों पर कुमकुम भी कहा जाता है, विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा उपयोग में लाया जाता है. इसे मांग में भरा जाता है और यह विवाह के बाद स्त्री की सामाजिक पहचान का प्रतीक बन जाता है. यह न केवल बाहरी सज्जा का हिस्सा है, बल्कि इसके पीछे गहरी भावनाएं और आस्था जुड़ी होती हैं. समय भले ही बदल रहा हो, पर इन प्रतीकों का महत्व आज भी उतना ही गहरा है जितना सदियों पहले था.
1. वैवाहिक जीवन की पहचान
सिंदूर लगाना यह दर्शाता है कि महिला विवाहित है. यह उसके पति के साथ उसके संबंध की स्थिरता और गहराई को दर्शाता है. यह विवाह के बंधन की सार्वजनिक घोषणा भी होती है.
2. जीवनसाथी की कुशलता की कामना
सिंदूर लगाने का प्रमुख उद्देश्य अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करना होता है. यह प्रेम और समर्पण का अदृश्य रूप है.
3. शुभ संकेत
सिंदूर को सौभाग्य और समृद्धि से जोड़ा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इसे लगाने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
4. सामाजिक परंपरा
विवाह के पश्चात महिला को सिंदूर लगाना अनिवार्य माना जाता है. यह परंपरा उसे समाज में एक विशेष सम्मान और पहचान दिलाती है
5. रूप और तरीका
कुछ महिलाएं इसे केवल बालों के बीच भरती हैं, जबकि कुछ माथे पर भी सिंदूर लगाती हैं. इसका तरीका क्षेत्रीय परंपराओं पर निर्भर करता है.
तिलक: श्रद्धा और ऊर्जा का केंद्र
तिलक का संबंध केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. यह भारतीय जीवनशैली का वह हिस्सा है जो आत्मिक ऊर्जा, सम्मान और शुभ विचारों का प्रतीक है. माथे के बीचोंबीच लगाया जाने वाला तिलक, शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है और आंतरिक शांति को बढ़ाता है.
1. शुभ संकेत और मानसिक शक्ति
तिलक लगाने से मस्तिष्क के उस भाग को सक्रिय किया जाता है, जिसे ऊर्जा केंद्र माना जाता है. इससे मन में स्थिरता और एकाग्रता आती है.
2. नकारात्मकता से सुरक्षा
ऐसा माना जाता है कि तिलक लगाने से नकारात्मक सोच और बुरी ऊर्जा दूर रहती है, और आत्मबल में वृद्धि होती है.
3. विविधता में आस्था
चंदन, भस्म, रोली या कुमकुम से बनाए गए तिलक, अलग-अलग मान्यताओं और परंपराओं से जुड़े होते हैं. प्रत्येक का अपना आध्यात्मिक अर्थ होता है.
4. सामाजिक सम्मान
किसी अतिथि या सम्माननीय व्यक्ति को तिलक लगाकर आदर प्रकट किया जाता है. यह अपनापन और आदर जताने का सुंदर तरीका है.
5. विधि और परंपरा
तिलक लगाने में अनामिका उंगली का प्रयोग किया जाता है, और इसे दाएं हाथ से लगाया जाना शुभ माना जाता है. तिलक लगाते समय सिर पर हाथ या कपड़ा रखना भी परंपरागत रूप से शुभ माना गया है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 30 जुलाई 2025)
30 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, समय स्थिति का ध्यान रखेंगे।
वृष राशि :- हर्ष पूर्ण स्थिति रहेगी, सुख-सफलता की प्राप्ति, गृह कलह से हानि तथा मानसिक अशांति रहेगी।
मिथुन राशि :- व्यापार में लाभ, यात्रा विवाद, उद्योग-व्यापार में कमी, हानि की संभावना।
कर्क राशि :- शरीर बाधा, भूमि व राजभय, लाभ, सफलता मिलेगी, रुके कार्य बन जायेंगे।
सिंह राशि :- वाहन भय, कष्ट, राजसुख, यात्रा होगी, शुभ कार्य में व्यवधान अवश्य ही होगा।
कन्या राशि :- व्यय, प्रवास, विरोध, भूमि लाभ होगा, शेष कार्य में लाभ अवश्य ही होगा।
तुला राशि :- रोगभय, यात्रा सुख, यात्रा व्यापार में सुधार, रुक कार्य बनेंगे, समय का ध्यान रखें।
वृश्चिक राशि :- कार्य सिद्धी, विशेष लाभ, राजकार्य में व्यावधान होगा, धैर्य से समय पर कार्य पूर्ण करें।
धनु राशि :- लाभ, खर्च, यश, हर्ष, यात्रा, भूमि लाभ, राजकार्य, शिक्षा सामान्य होगी।
मकर राशि :- विरोध होगा, व्यापार में हानि, शारीरिक कष्ट, धार्मिक कार्य में व्यय होगा।
कुंभ राशि :- लाभ-हानि, व्यय, प्रभाव-प्रतिष्ठा में वृद्धि, रोगभय, विरोधी असफल होंगे।
मीन राशि :- राजभय, यश, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि, राजकार्य में विलम्ब होगा तथा परेशानी होगी।
राहु-केतु से बचने के लिए नक्षत्र के आधार पर करें 5 उपाय, विवाह की अड़चनें होंगी दूर, संतान सुख भी मिलेगा!
29 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का बहुत महत्व है. इसके जरिए मानव जीवन में घटित होने वाली घटनाओं की जानकारी मिलती है. ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है, लेकिन इनका प्रभाव मानव जीवन में गहरा होता है. जब कुंडली में ये ग्रह अशुभ स्थान पर होते हैं या राहु-केतु दोष, कालसर्प योग, पितृ दोष आदि बनते हैं, तो जीवन में रुकावटें, मानसिक तनाव, दुर्घटनाएं, कोर्ट केस, रोग, विवाह या संतान की बाधाएं आ सकती हैं. खराब स्थिति में केतु दिमाग को भ्रष्ट कर देता है और लोगों को धोखे का सामना करना पड़ता है, वहीं राहु गलत कार्यों की ओर व्यक्ति को ले जाता है. राहु और केतु के दोष निवारण के लिए आप ज्योतिष उपाय कर सकते हैं.
नक्षत्र के आधार पर राहु-केतु से बचने के उपाय
मंत्रों का जाप: ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, राहु और केतु की शांति के लिए आपको इनके मंत्रों का जाप करना चाहिए. राहु के लिए ॐ रां राहवे नम: या ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः मंत्र का जाप कर सकते हैं. वहीं केतु के लिए ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः या ॐ कें केतवे नम: मंत्र का जाप करें. यह मंत्र जाप एक माला यानि 108 बार करना है. इन मंत्रों का जाप शनिवार को करें.
गणेशजी दूर्वा अर्पित करें: राहु-केतु दोष निवारण के लिए बुधवार को गणेश पूजन और दूर्वा का उपाय करें. हर बुधवार 21 दूर्वा गणेश जी को चढ़ाएं और उस समय ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें.
महामृत्युंजय मंत्र का जाप: भगवान शिव से बढ़कर कुछ भी नहीं है. राहु और केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ इस मंत्र का जाप प्रतिदिन 108 बार करें. सोमवार को इसकी संख्या बढ़ा सकते हैं.
इन चीजों का दान: राहु-केतु दोष कम करने के लिए दान करना चाहिए. राहु की शांति के लिए काले तिल, सरसों का तेल, कंबल, लोहे के बर्तन, नारियल, नीले वस्त्र आदि का दान करें. वहीं केतु दोष निवारण के लिए कुत्ते को रोटी, सफेद चना, मोती, धूप, चांदी, नीम की लकड़ी आदि का दान करें. इससे लाभ होगा.
नाग देवता की पूजा: राहु और केतु के कारण कुंडली में कालसर्प दोष बनता है. इस वजह से नाग देवता की पूजा करें. सोमवार और नाग पंचमी पर काले तिल, दूध, कुश और अक्षत चढ़ाएं. इसके अलावा आप सांप न मारे, उसे तंग न करें. ये कार्य राहु-केतु को नाराज़ कर सकता है
घर के बाहर गोबर से सांप क्यों बनाते हैं?, जानें इससे जुड़े रहस्य, मान्यताएं और फायदे
29 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार बड़े श्रद्धा और विश्वास से मनाया जाता है. इस दिन लोग नाग देवता की पूजा करते हैं और उन्हें दूध अर्पित करते हैं, लेकिन एक खास परंपरा जो बहुत लोगों को चौंकाती है, वो है – घर के बाहर गोबर से नाग की आकृति बनाना. गांव हो या शहर, ये परंपरा आज भी कई जगह निभाई जाती है. ऐसा क्यों किया जाता है? इस सांप की आकृति का क्या मतलब होता है? क्या सिर्फ मान्यता है या इसके पीछे कोई गहरी सोच भी है? आइए जानते हैं इस प्राचीन परंपरा का पूरा रहस्य. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
नाग पंचमी तिथि और समय
दिनांक: मंगलवार, 29 जुलाई 2025. आरंभ तिथि 28 जुलाई 2025 को 19:54, इसकी समाप्ति: 29 जुलाई 2025 को 21:16, पर होगी.
-पूजा का समय:
29 जुलाई 2025 को सुबह 05:41 से 08:23. 2 घंटे 43 मिनट का होगा.
इस दिन नाग देवता की पूजा करके लोग जीवन में सुख, शांति और बरकत की कामना करते हैं.
घर के बाहर गोबर से सांप क्यों बनाया जाता है?
नाग पंचमी के दिन सुबह-सुबह लोग घरों के दरवाजे के दोनों ओर गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाते हैं. यह परंपरा बहुत पुरानी है और इसे आज भी ग्रामीण इलाकों में खास तौर पर निभाया जाता है. इसके पीछे कुछ मान्यताएं हैं:
1. गोबर को शुद्ध और पवित्र माना जाता है.
2. नाग देवता को अन्न, जल और धन का प्रतीक माना गया है.
3. गोबर से नाग बनाकर पूजा करने से वर्षा अच्छी होती है, फसलें लहलहाती हैं.
4. ऐसा माना जाता है कि इससे घर में कभी सांप का डर नहीं रहता और परिवार सुरक्षित रहता है.
भगवान शिव से जुड़ाव
नाग देवता को भगवान शिव के गले का आभूषण माना जाता है. गोबर से नाग बनाकर जब लोग शिव और पार्वती की पूजा करते हैं, तो इसे एक प्रकार से पूरे परिवार की भलाई की कामना के रूप में देखा जाता है. इससे घर में:
1. सुख-शांति आती है.
2. बीमारी और नेगेटिव एनर्जी दूर रहती है.
3. बच्चों की सेहत और पढ़ाई में सुधार होता है.
4. आर्थिक स्थिति बेहतर होती है.
सांप की आकृति और उसका आध्यात्मिक असर
कुछ मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर बनी यह नाग आकृति न सिर्फ सांपों से बचाव करती है, बल्कि घर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा देती है. कहा जाता है कि:
1. इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है.
2. बुरी नजर से बचाव होता है.
3. वास्तु दोष दूर होते हैं.
इस नाग पंचमी पर आप भी इस परंपरा को निभाएं और परिवार की खुशहाली के लिए नाग देवता से आशीर्वाद पाएं.
नाग पंचमी पर रोटी बनाना राहु को देता है आमंत्रण, जानें इस दिन क्यों नहीं गर्म करते तवा?
29 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 29 जुलाई को है. नाग पंचमी हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष के अनुसार अत्यंत पवित्र और गूढ़ रहस्य वाला पर्व है. नाग पंचमी राहु और केतु से संबंधित नाग दोष, कालसर्प दोष, आदि के निवारण के लिए अत्यंत शुभ दिन है. ज्योतिष शास्त्र में नाग पंचमी के दिन का महत्व बताते हुए कुछ विशेष नियम के बारे में भी बताए गए हैं. इन नियमों का सही से पालन नहीं किया जाए तो कई तरह के दोष लग सकते हैं, जैसे नाग पंचमी के दिन रोटी बनाना . आइए जानते हैं नाग पंचमी के दिन रोटी क्यों नहीं बनानी चाहिए…
राहु का प्रतीक है तवा
नाग पंचमी पर रोटी नहीं बनाने की परंपरा एक धार्मिक मान्यता से जुड़ी हुई है. हिंदू धर्म के अनुसार, इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और रोटी बनाना वर्जित माना जाता है क्योंकि इस दिन तवे का या किसी भी लोहे की चीज का इस्तेमाल करना अशुभ माना गया है. रोटी बनाने वाला तवा सांप के फन का प्रतिरूप होता है और तवा राहु का भी प्रतीक माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में इसलिए नाग पंचमी के दिन रोटी बनाना अशुभ बताया गया है.
इसलिए नहीं बनाई जाती नाग पंचमी पर रोटी
नाग पंचमी के रोटी बनाने से जीवन में राहु का प्रभाव बढ़ जाता है. नाग पंचमी के दिन नाग देवता की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने पर राहु केतु से संबंधित नाग दोष, कालसर्प दोष से राहत मिलती है. लेकिन इस दिन अगर आप रोटी बनाते हैं तो नाग देवता आपसे नाराज भी हो सकते हैं, ऐसा करने से परिवार में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं और पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में कोई ना कोई परेशानी बनी रहती है. हालांकि नाग पंचमी के दिन हलवा पूरी खाना बहुत अच्छा माना जाता है.
नाग पंचमी और राहु का संबंध
राहु एक छाया ग्रह है, जिसका संबंध भूत, पिशाच, भ्रम और सर्प दोष से है. ज्योतिषीय दृष्टि से, नाग (सर्प) राहु के प्रतीक हैं. अतः नाग पंचमी का दिन राहु की शांति और प्रसन्नता के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है. तवे पर रोटी बनाना, विशेषकर इस दिन, राहु तत्व को सक्रिय करता है, जिससे राहु उग्र हो सकता है. तवे पर रोटी बनाने में अग्नि, लोहा और अन्न ये तीनों राहु के प्रिय माध्यम हैं. राहु वैसे ही अकारण क्रोध और भ्रम फैलाने वाला ग्रह है. अगर इस दिन अन्न, अग्नि और उसका रंग (काला) एक साथ देते हैं, तो यह राहु को आमंत्रण देने जैसा होता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 29 जुलाई 2025)
29 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट मित्रों से धोखे की संभावना, सतर्कता से कार्य करें, विशेष लाभ होगा।
वृष राशि :- समय हर्ष-उल्लास से बीतेगा, धन लाभ, अधिकारी वर्ग से समर्थन प्राप्त होगा।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटायेंगे, तनाव पूर्ण स्थिति से बचिये, कार्यगति मंद होगी।
कर्क राशि :- स्थिति में सुधार, स्त्री वर्ग से हर्ष होगा, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल अवश्य होगी।
सिंह राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा, स्थिति में सुधार होगा तथा रुके कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, दूसरों के कार्यों में हस्ताक्षेप करने से तनाव अवश्य होगा।
तुला राशि :- कार्यगति अनुकूल होगी, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, मित्र सहयोग करेंगे।
वृश्चिक राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रतिष्ठा-प्रभुत्व वृद्धि एवं कार्य कुशलता से संतोष होगा।
धनु राशि :- कार्य कुशलता से हर्ष, कार्य योजना फलीभूत होगी तथा नये कार्य अवश्य बनेंगे।
मकर राशि :- अधिकारियों के समर्थन से बचें, तनाव, क्लेश तथा अशांति अवश्य ही बनेगी।
कुंभ राशि :- उद्विघ्नता-असमंजस का वातावरण मन को क्लेशयुक्त रखेगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
मीन राशि :- बिगड़े कार्य बनेंगे, योजनायें फलीभूत होंगी, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
सपने में दिख जाए ये चीज.. तो समझ जाए रातों-रात बदलने वाली है आपकी किस्मत, दूर हो जाएंगे सभी आर्थिक संकट और कष्ट
28 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब भी व्यक्ति सोता है तो सोते वक्त कुछ ना कुछ सपना अवश्य देखता है वह सपना कोई ना कोई संकेत देता है. कुछ सपने हमें शुभ संकेत देते हैं तो कुछ सपने हमें अशुभ संकेत देते हैं. सावन का महीना चल रहा है. सावन का महीना भगवान शिव माता पार्वती को समर्पित रहता है. इस महीने में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा आराधना करने से सभी प्रकार के कष्ट समाप्त हो जाते हैं और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है. वहीं कुछ ऐसे सपने होते हैं जो इस महीने में ब्रह्म मुहूर्त में अगर व्यक्ति देख ले तो उसकी किस्मत रातों-रात चमक जाती है. भगवान भोलेनाथ की कृपा उस भक्ति पर हमेशा बनी रहती है. कौन सी है वह वस्तु जो सपने में देखना शुभ है?
अक्सर ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया सपना अवश्य पूर्ण होता है या फिर वह सपना कुछ संकेत दे रहा होता है. फिलहाल सावन का महीना चल रहा है. सावन के महीने में अगर स्वप्न में भगवान शिव से जुड़ी कुछ वस्तु को देख ले तो रातो रात आपकी किस्मत बदल जाएगी. साक्षात् भगवान भोलेनाथ की कृपा भक्ति पर बरसेगी. लेकिन वह देखा गया सपना ब्रह्म मुहूर्त का हो. क्योंकि सनातन धर्म में ब्रह्म मुहूर्त का बेहद खास महत्व होता है.
सावन में सपने में इन चीजों को देखना होता है शुभ
नंदी: अगर आप सो रहे हैं और ब्रह्म मुहूर्त के समय नंदी यानी बैल अगर घर की चौखट पर खड़े होते हुए सपने में देख ले तो समझ जाइए आपकी किस्मत बदलने वाली है. भगवान भोलेनाथ आपके घर पर पधारने वाले हैं.
डमरू: भगवान भोलेनाथ के एक हाथ में डमरू अवश्य रहता है. अगर आप सपने में डमरू देखे तो समझ जाइए आपके घर में खुशहाली आने वाली है और सुख समृद्धि की वृद्धि होने वाली है.
सकंट और दुख दूर होंगे
अगर आप अपने स्वप्न में ब्रह्म मुहूर्त के समय भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना करते हुए देख ले तो बिगड़ी हुई किस्मत संवर जाएगी. सभी प्रकार के संकट दुख दूर हो जाएंगे.
नाग देवता: अगर आप अपने स्वप्न में नाग देवता को देख ले तो वह बेहद शुभ माना जाता है. आपके घर से आर्थिक तंगी दूर होने वाली है और आप धनवान होने वाले हैं.
झगड़े, तनाव, दुर्भाग्य को दूर करता है अशोक का पेड़, लाता है सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा, जानें कैसे कहां लगाएं इसे
28 Jul, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे देश में पेड़-पौधों को केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का आधार माना जाता है. हर पेड़ के साथ कोई न कोई आस्था जुड़ी होती है. कुछ पेड़ हवा को शुद्ध करने के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ को जीवन में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है. उन्हीं में से एक है अशोक का पेड़, जो देखने में जितना सुंदर होता है, उतना ही अधिक इसके पीछे छिपे हैं चमत्कारी और ज्योतिषीय फायदे. हिन्दू मान्यताओं में अशोक के पेड़ को दुखों का नाशक और दरिद्रता को हरने वाला माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि जहां अशोक का पेड़ होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा हमेशा बनी रहती है और नकारात्मकता टिक नहीं पाती. यही कारण है कि पुराने समय से ही घरों, मंदिरों और आश्रमों में अशोक के पेड़ को खास स्थान दिया गया है. आइए जानते हैं कि अशोक का पेड़ क्यों इतना शुभ माना जाता है, इसे कहां और कैसे लगाना चाहिए और इसके क्या-क्या लाभ होते हैं.
अशोक का पेड़ सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी शक्ति और ऊर्जा के लिए जाना जाता है. इसकी पत्तियां हमेशा हरी रहती हैं जो जीवन में ताजगी और हरियाली का प्रतीक मानी जाती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह पेड़ नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और घर के वातावरण को शुद्ध और शांत बनाता है. यह मानसिक तनाव को दूर करने और भावनात्मक स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक माना गया है. धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह पेड़ माता सीता और भगवान राम की कथाओं से भी जुड़ा हुआ है, जहां इसे शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है. इसलिए घर में अशोक का पेड़ लगाना शुभ माना जाता है.
घर में लगाने से होते हैं ये चमत्कारी फायदे
अशोक का पेड़ न केवल वातावरण को शुद्ध करता है, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और पारिवारिक जीवन में भी संतुलन लाता है. इसे घर में लगाने से रिश्तों में मिठास आती है और आपसी झगड़े कम होते हैं. पति-पत्नी के संबंधों में समझदारी बढ़ती है और घर का माहौल शांतिपूर्ण बनता है. अशोक का पेड़ घर में रोजमर्रा की बीमारियों को भी दूर रखने में मददगार माना गया है. यह पेड़ शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बढ़ाता है जिससे अच्छी नींद आती है और मन खुश रहता है. ऐसा भी माना जाता है कि इस पेड़ की उपस्थिति से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक स्थिति बेहतर होती है.
अगर आप अशोक का पेड़ घर में लगाना चाहते हैं तो इसे आंगन या बगीचे में उस स्थान पर लगाएं जहां सूरज की रोशनी भरपूर मिलती हो. ध्यान रखें कि यह पेड़ किसी गंदगी या टॉयलेट के पास न हो क्योंकि इससे इसकी ऊर्जा प्रभावित होती है. अगर आपके पास ज्यादा जगह नहीं है तो इसे बड़े गमले में भी लगाया जा सकता है, बस इतना ध्यान रखें कि इसकी जड़ें फैलने के लिए पर्याप्त जगह हो. इसे घर के उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है.
अशोक का पेड़ केवल एक सजावटी पौधा नहीं बल्कि घर में शांति, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला एक दिव्य वृक्ष है. अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और बुरी शक्तियां पास न फटकें, तो आज ही अशोक का पेड़ लगाएं. यह आपके घर को स्वर्ग जैसा शांत और सौम्य बना सकता है. इसके पीछे छिपी मान्यताएं भले ही धार्मिक हों, लेकिन इसके प्रभाव को महसूस करना एक अद्भुत अनुभव है.
नाग पंचमी पर करें इन मंत्रों का जाप, सांपों से नहीं होगा खतरा, मिटेगा कालसर्प दोष
28 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नाग पंचमी 29 जुलाई को मनाई जाएगी. नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा के समय आपको नाग मंत्रों का जाप करना चाहिए. नाग मंत्र का जाप करने से आपको सुरक्षा प्राप्त होगी, सांपों से भय नहीं होगा और कुंडली में बना कालसर्प दोष भी मिट जाएगा. कठिन से कठिन कार्यों में आपको सफलता प्राप्त होगी. आपके यश और कीर्ति में बढ़ोत्तरी होगी और महादेव की भी कृपा प्राप्त होगी. आइए जानते हैं नाग पंचमी के मंत्रों के बारे में.
नाग पंचमी के मंत्र
1. ओम नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय।।
भगवान शिव सभी जीवों के नाथ हैं, इसलिए उनको पशुपतिनाथ, भोलेनाथ, दीनानाथ जैसे कई नामों से पुकारा जाता है. भगवान शिव के गले में उनके भक्त वासुकी हैं, इसलिए कहा जाता है महादेव नाग का हार पहनते हैं. यदि आपको नाग, सर्प आदि से कोई भय है तो इस नाग पंचमी नागेंद्रहाराय मंत्र का जाप करें.
2. कालसर्प दोष निवारण मंत्र
ओम क्रौं नमो अस्तु सर्पेभ्यो कालसर्प शांति कुरु कुरु स्वाहा.
ओम नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नम:.
यदि आपको कालसर्प दोष से मुक्ति चाहिए तो नाग पंचमी के दिन इन दो मंत्रों में से किसी भी एक मंत्र का जाप कर सकते हैं.
3. नाग पूजा मंत्र
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ सकते हैं. या फिर ओम श्री भीलट देवाय नम: मंत्र का उच्चारण करके भी नाग पंचमी पूजा कर सकते हैं.
4. नाग गायत्री मंत्र
ओम नवकुलाय विद्महे, विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प प्रचोदयात्।।
5. नाग मंत्र
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात: काले विशेषत:।।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।
नाग पंचमी या प्रतिदिन आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. इस मंत्र का जाप करने से किसी भी प्रकार का विष भय नहीं रहता है.
6. नाग पंचमी के राशि अनुसार नाग मंत्र
मेष: ओम गिरी नम:
वृषभ: ओम भूधर नम:
मिथुन: ओम व्याल नम:
कर्क: ओम काकोदर नम:
सिंह: ओम सारंग नम:
कन्या: ओम भुजंग नम:
तुला: ओम महिधर नम:
वृश्चिक: ओम विषधर नम:
धनु: ओम अहि नम:
मकर: ओम अचल नम:
कुंभ: ओम नगपति नम:
मीन: ओम शैल नम:
नाग पंचमी के अवसर पर आप अपनी राशि के अनुसार प्रभावशाली नाग मंत्र का जाप कर सकते हैं. इससे भी आपको लाभ होगा.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 28 जुलाई 2025)
28 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य बाधा, स्वाभाव में उद्विघ्नता तथा दु:ख अवश्य ही बनेगा, धैर्य से कार्य करें।
वृष राशि :- किसी आरोप से बचें, कार्यगति मंद रहेगी, क्लेश व अशांति का वातावरण बनेगा।
मिथुन राशि :- योजनायें पूर्ण होंगी, धन लाभ होगा, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
कर्क राशि :- मित्र सुखवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, चिन्तायें कम होंगी, धैर्य रखें।
सिंह राशि :- कार्य और धन अस्त-व्यस्त होगा, सतर्कता से कार्य अवश्य निपटा लें।
कन्या राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, चिन्ता कम होगी।
तुला राशि :- मान-प्रतिष्ठा के साधन बनेंगे, स्त्री से सुख-शांति अवश्य बनेगी, समय का लाभ लें।
वृश्चिक राशि :- अग्नि-चोटादि का भय, व्यर्थ भ्रमण, धन का व्यय होगा, कार्य अवरोध होगा।
धनु राशि :- क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम, क्लेश तथा भय बना ही रहेगा, ध्यान दें।
मकर राशि :- विवादग्रस्त होने से बचिये, तनाव, क्लेश, मानसिक अशांति अवश्य बनेगी।
कुंभ राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा।
मीन राशि :- धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति, समय उल्लास से बीतेगा, मनोवृत्ति उत्तम होगी।
हर काम में मिलेगी सफलता, खुशियों से भर जाएगा जीवन! बस कर लें हनुमान चालीसा की इस चौपाई का जाप
27 Jul, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनुमान जी को अगर आप प्रसन्न करना चाहते हैं, उनकी कृपा दृष्टि प्राप्त करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. दरअसल हनुमान चालीसा का पाठ प्रतिदिन करने से व्यक्ति को हनुमान जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त होता है. अगर आप भी प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं, हनुमान जी महाराज की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना कर रहे हैं .तो ऐसा करने से जीवन में आ रही तमाम तरह की परेशानियों से मुक्ति भी मिलेगी और हनुमान जी महाराज हमेशा प्रसन्न भी होंगे. ऐसी स्थिति में गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में कई ऐसी चमत्कारी चौपाई का उल्लेख किया है, जिसका अनुसरण करने से व्यक्ति को सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं. तो चलिए हनुमान चालीसा की कुछ चौपाई के बारे में विस्तार से समझते हैं.
दरअसल हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि ‘और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै’… इस चौपाई के जाप करने से हनुमान जी महाराज की कृपा अपने भक्तों पर ऐसी रहती है कि उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है. हनुमान चालीसा में कई ऐसे चमत्कारी चौपाइयां हैं, जिसका प्रतिदिन जाप करना चाहिए. जाप करते समय इस बात का ध्यान रहे कि उसका अर्थ आसानी से समझ में आ सके. तभी उसका पुण्य भी प्राप्त होता है. इस चौपाई के बारे में शशिकांत दास विस्तार से बताते हैं.
और मनोरथ जो कोई लावै… अर्थात कोई भी इच्छा मनोकामना अभिलाषा लेकर भक्त हनुमान जी महाराज के दरबार में आता है. सोई अमित जीवन फल पावै… अर्थात उस भक्त की सभी मनोकामना पूरी होती है. उसे ऐसा फल हनुमान जी महाराज के द्वारा प्राप्त होता है, जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती है.
शशिकांत दास बताते हैं हनुमान चालीसा के इस चौपाई में हनुमान जी की कृपा और भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करने की शक्ति को दर्शाया गया है. इस चौपाई के जाप करने से व्यक्ति की सभी इच्छा हनुमान जी महाराज पूरी करते हैं. ऐसा फल प्राप्त होता है, जिसकी कल्पना व जीवन भर नहीं कर सकते. प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में चल रहे परेशानियों से मुक्ति भी मिलती है.
हरियाली तीज पर राशि अनुसार करें दान, महादेव के साथ पितरों का भी मिलेगा आशीर्वाद
27 Jul, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
27 जुलाई दिन रविवार को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है, यह पर्व हर वर्ष सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. सावन के झूले, हरे रंग की चूड़ियां, मेंहदी की महक और भगवान शिव-पार्वती की पूजा हरियाली तीज का त्यौहार हर महिला के जीवन में खास होता है. हरियाली तीज का व्रत मुख्यतः सौभाग्य, प्रेम और पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन अगर अपनी राशि के अनुसार दान किया जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन तेजी से होता है और महादेव व पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हरियाली तीज के दिन राशि अनुसार दान करने से महादेव की कृपा से सभी ग्रहों का शुभ प्रभाव भी मिलता है. आइए जानते हैं हरियाली तीज पर राशि अनुसार क्या दान करें…
हरियाली तीज 2025 पर राशि अनुसार दान (Hariyali Teej 2025 Rashi Anusar Daan)
मेष राशि
मेष राशि के स्वामी ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह हैं इसलिए मेष राशि वाले हरियाली तीज पर मसूर की दाल, लाल वस्त्र, तांबे के बर्तन का दान करें. ऐसा करने से क्रोध शांत होगा और वैवाहिक जीवन में मिठास बढ़ेगी.
वृषभ राशि
वृषभ राशि के स्वामी भौतिक सुख सुविधा के स्वामी शुक्र ग्रह हैं इसलिए वृषभ राशि वाले हरियाली तीज पर सफेद मिठाई, चांदी के सिक्के, और गाय को भोजन का दान करें, ऐसा करने से धन-संपत्ति में वृद्धि होगी और पितरों की भी कृपा मिलेगी.
मिथुन राशि
मिथुन राशि के स्वामी ग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह हैं इसलिए मिथुन राशि वाले हरियाली तीज पर मिथुन राशि वाले हरे वस्त्र, मूंग की दाल, कलम-कागज का दान करें, ऐसा करने से पढ़ाई और बुद्धि से जुड़े कामों में सफलता मिलेगी. साथ ही कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होगी.
कर्क राशि
कर्क राशि के स्वामी मन व माता के कारक ग्रह चंद्र देव हैं इसलिए कर्क राशि वाले हरियाली तीज पर दूध, चावल और सफेद वस्त्र का दान करें. ऐसा करने से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख मिलेगा. साथ ही पितरों के आशीर्वाद से आपके सभी कार्य आसानी से पूरे हो जाएंगे.
सिंह राशि
सिंह राशि के स्वामी ग्रहों के राजा सूर्यदेव हैं इसलिए सिंह राशि वाले हरियाली तीज पर गुड़, गेहूं, पीले कपड़े, सोना आदि का दान करें. ऐसा करने से सूर्यदेव की कृपा से आत्मविश्वास बढ़ेगा और नेतृत्व क्षमता में निखार आएगा. साथ ही भाग्य का साथ मिलेगा और समाज में सम्मान भी बढ़ेगा.
कन्या राशि
कन्या राशि के स्वामी बुद्धि व कारोबार के कारक ग्रह बुध देव हैं इसलिए कन्या राशि वाले हरियाली तीज पर हरी सब्जियां, किताबें, अनाज, हरे वस्त्र आदि का दान करें. ऐसा करने से सेवा भाव और परोपकार से जीवन में स्थिरता आएगी. साथ ही आपकी धन से संबंधित सभी समस्याएं दूर होंगी.
तुला राशि
तुला राशि के स्वामी असुरों के गुरु शुक्र ग्रह हैं इसलिए तुला राशि वाले हरियाली तीज पर इत्र, सुंदर वस्त्र, दर्पण, चीन, चावल आदि सफेद चीजों का दान करें. ऐसा करने से वाणी में मिठास आएगी और रिश्तों में सुधार होगा. साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और बैंक बैलेंस बढ़ेगा.
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रहों के सेनापति मंगल देव हैं इसलिए वृश्चिक राशि वाले हरियाली तीज पर लाल फल, लाल चंदन, लाल वस्त्र, मूंग दाल और पीपल को जल दें. ऐसा करने से क्रोध और तनाव कम होगा. साथ ही साहस व पराक्रम में वृद्धि होगी और मंगल ग्रह की स्थिति अनुकूल होगी.
धनु राशि
धनु राशि के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं इसलिए धनु राशि वाले हरियाली तीज पर पीली मिठाई, पीले वस्त्र, धार्मिक ग्रंथ, केले का दान करें. ऐसा करने से जीवन के हर क्षेत्र में भाग्य का साथ मिलेगा और नई शुरुआत के योग भी बनेंगे. साथ ही कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होगी.
मकर राशि
मकर राशि के स्वामी न्याय व कर्म के कारक ग्रह शनिदेव हैं इसलिए मकर राशि वाले हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. साथ ही लोहे के बर्तन, उड़द की दाल, जूते-चप्पल आदि का दान करें. ऐसा करने से कर्ज से राहत मिलेगी और करियर में सुधार होगा. साथ ही अटके हुए सभी कार्य पूरे होंगे.
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के स्वामी शनिदेव ही हैं इसलिए हरियाली तीज पर कुंभ राशि वाले नीले वस्त्र, कंबल, जूते-चप्पल, तिल आदि चीजों का दान करें. ऐसा करने से मानसिक संतुलन मिलेगा और सामाजिक जीवन में सम्मान बढ़ेगा. साथ ही शनिदेव का शुभ प्रभाव भी बढ़ेगा.
मीन राशि
मीन राशि के स्वामी भाग्य व धर्म के कारक ग्रह गुरु ग्रह हैं इसलिए हरियाली तीज पर मीन राशि वाले चावल, मिश्री, पूजा की थाली आदि का दान करें. ऐसा करने से मनोकामना पूरी होगी और भक्ति भाव भी बढ़ेगा. साथ ही हर क्षेत्र में फायदा मिलेगा और शत्रुओं से मुक्ति मिलेगी.
नाग पंचमी के दिन ऐसे करें भगवान शिव की पूजा, हर पाप हो जाएगा खत्म, जीवन में आने वाले सभी संकट भी हो जाएंगे समाप्त
27 Jul, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फिलहाल सावन का महीना चल रहा है और सावन महीने की हर तिथि बेहद शुभ और पवित्र होती है. वहींं सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरे देश भर में नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन नाग देवता की पूजा आराधना की जाती है इसके साथ ही भगवान शिव की भी अगर विधि विधान के साथ इस दिन पूजा आराधना की जाए तो भगवान भोलेनाथ जल्द प्रसन्न हो जाते हैं. इसके साथ ही मनोवांछित फल की भी प्राप्ति होती है. क्योंकि सर्प को भी भगवान भोलेनाथ का ही दूत माना जाता है. तो आइये देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि नाग पंचमी में कैसे करें भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न?
सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस साल 29 जुलाई को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन सभी शिव मंदिर के साथ-साथ सांपों के मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ती है. इस दिन सांपों को दूध पिलाने से या शिवलिंग के ऊपर दूध अर्पण करने से कालसर्प दोष से तो मुक्ति मिलती है इसके साथ ही ऐसे बड़े और छोटे से छोटे पाप भी समाप्त हो जाता है और जीवन में आने वाले सभी संकट समाप्त हो जाता है.
कैसे करें नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा आराधना के साथ शिवलिंग के ऊपर दूध से अभिषेक अवश्य करें. इसके साथ ही इस दिन भगवान शिव की पूजा षोंड़शोपचार विधि से पूजा आराधना करना चाहिए. इसमें षोडशोपचार विधि से पूजा करने पर 16 चरणों में पूजा की जाती है. इसमें पाद्य, अर्घ्य, आमचन, स्नान, वस्त्र, उपवस्त्र (यज्ञोपवीत या जनेऊ) आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, स्तवन पाठ, तर्पण और नमस्कार किया जाता है.
क्या पूजा करते समय जूते उतारना जरूरी है? जानें सनातन परंपरा में इसके पीछे की भावना
27 Jul, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ सिर्फ एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि आत्मा की शुद्धता और आस्था का प्रतीक माना गया है. जब भी कोई व्यक्ति भगवान के सामने जाता है, तो उससे यह उम्मीद की जाती है कि वह तन और मन से पूरी तरह साफ और विनम्र हो. ऐसे में एक सवाल अक्सर उठता है. क्या चप्पल या जूते पहनकर पूजा करना गलत है? क्या ऐसा करने से पूजा का असर घटता है या ईश्वर का अपमान होता है? यह केवल एक सामाजिक नियम नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और भावना से जुड़ा विषय है, जिसे समझना जरूरी है. आइए जानते हैं कि शास्त्र, संस्कृति और व्यवहार इस बारे में क्या कहते हैं. इस बारे में बता रहे हैं भोपाल स्थित ज्योतिषाचार्य रवि पाराशर.
चप्पल-जूते पहनकर पूजा: क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?
सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में पूजा को बेहद पवित्र और ध्यानयुक्त प्रक्रिया बताया गया है. मनुस्मृति, गरुड़ पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में लिखा गया है कि पूजा से पहले व्यक्ति को नहाना चाहिए, साफ कपड़े पहनने चाहिए और जूते-चप्पल को बाहर उतारने चाहिए. इसका सीधा अर्थ है कि जूते पहनकर पूजा करना भगवान के सामने अशुद्ध अवस्था में जाने जैसा है, जो सही नहीं माना जाता है. ग्रंथों में ये बातें नियम के तौर पर नहीं, बल्कि भक्ति और सम्मान के भाव से जोड़ी गई हैं. जूते-चप्पल पहनकर पूजा करना किसी तरह की सजा योग्य गलती तो नहीं, लेकिन इससे व्यक्ति की आस्था और समझ पर सवाल उठ सकता है.
परंपरा और संस्कृति में इसका क्या महत्व है?
भारत में मंदिरों, आश्रमों और यहां तक कि घरों के पूजा स्थलों में भी जूते पहनकर प्रवेश करना सामान्य रूप से वर्जित होता है. यह नियम केवल सफाई के लिए नहीं, बल्कि विनम्रता और समर्पण के प्रतीक के तौर पर माना जाता है. जब हम अपने जूते बाहर उतारते हैं, तो यह संकेत देता है कि हम अपने घमंड, सांसारिक सोच और अहंकार को छोड़कर भगवान के चरणों में आए हैं. नंगे पांव चलना एक तरह से नम्रता और श्रद्धा को दर्शाता है, जिससे मन पूरी तरह ईश्वर की ओर केंद्रित हो पाता है.
क्या जूते पहनकर पूजा करना पाप है?
शास्त्रों में कहीं भी इसे पाप नहीं कहा गया है, लेकिन इसे सही नहीं माना गया है. पूजा एक ऐसा समय होता है जब व्यक्ति को अपने भीतर की भावनाओं को भगवान के सामने रखना होता है. उस समय अगर कोई व्यक्ति चप्पल या जूते पहनकर पूजा करता है, तो यह न सिर्फ पूजा की पवित्रता को कम करता है, बल्कि ईश्वर के प्रति अनादर जैसा भी माना जा सकता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 27 जुलाई 2025)
27 Jul, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- किसी से अचानक परेशानी, स्त्री-वर्ग से तनाव तथा मानसिक बेचैनी होगी।
वृष राशि :- स्त्री-शरीर बाधायें, अस्थिरता एवं व्यवसायिक उद्विघ्नता का वातावरण बनेगा।
मिथुन राशि :- अनावश्यक बाधायें पीड़ित रखें, कुछ चिन्तायें बनी ही रहेंगी, ध्यान दें।
कर्क राशि :- सोचे हुये कार्य पूरा करने का प्रयास करें अन्यथा रुकावट व कष्ट बनेगा।
सिंह राशि :- किसी धोखे व हानि से बचें, बाधा से विपरीत कार्यगति अवश्य ही बनेगी।
कन्या राशि :- स्त्री-वर्ग से उल्लास, योजनायें फलीभूत होंगी, सोचे हुये कार्य अवश्य बनेंगे।
तुला राशि :- कुछ कार्यों में स्थायित्व, सामर्थ वृद्धि, प्रयत्न सफल अवश्य होंगे, ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- कुटुम्ब में परेशानी, स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी अवश्य बनेगी।
धनु राशि :- तनाव व क्लेश, स्त्री-शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी तथा खिन्नता अवश्य होगी।
मकर राशि :- इष्ट-मित्र फलप्रद हों, समयानुकूल सफलता से हर्ष हो, विशेष लाभ होगा।
कुंभ राशि :- मानसिक बेचैनी, अर्थ-व्यवस्था बढ़े, परिश्रम से अनुकूल कार्य अवश्य बनेंगे।
मीन राशि :- मन में खिन्नता, बेचैनी, उद्विघ्नता तथा असमंजस का वातावरण बनेगा।
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