धर्म एवं ज्योतिष
इस रक्षाबंधन पूजा की थाली में रखें ये 5 चीजें, भाई की उम्र और सौभाग्य दोनों बढ़ेंगे!
5 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित रक्षाबंधन का त्योहार कुछ ही दिनों में पूरे देश में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इस साल यह पर्व 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा. यह सिर्फ एक धागा बांधने की परंपरा नहीं है, बल्कि भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है. हर साल रक्षाबंधन के समय बहनों के मन में एक सवाल जरूर रहता है कि राखी (Rakhi 2025) बांधने का सही समय क्या है और क्या भद्रा का असर रहेगा.
उन्होंने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 9 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दोपहर 2 बजकर 15 मिनट तक सौभाग्य योग और ब्रह्म मुहूर्त (Rakhi Murhat) का संयोग रहेगा. फिर उसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा.
इस बार नहीं रहेगा भद्रा
पंडित दीपलाल ने स्पष्ट किया कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा. न ही कोई ग्रहण का असर होगा. यानी इस बार रक्षाबंधन पर कोई रुकावट नहीं आएगी और बहनें पूरे विधि-विधान से अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी. उन्होंने बताया कि इस बार ब्रह्म मुहूर्त में भाई स्नान और ध्यान करके पूजा-पाठ के बाद बहन के घर जाए. बहन पूजा की थाली तैयार करके उसमें हल्दी लगे पीले चावल, मिठाई, घी का दीपक, धूप और रक्षासूत्र रखे.
उन्होंने बताया कि (Rakhi Puja Vidhi) पूजा के समय पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुंह करके भाई को बैठाए. पहले तिलक लगाए, फिर अक्षत चढ़ाए और मिठाई खिलाकर राखी बांधे. यह प्रक्रिया श्रद्धा के साथ करनी चाहिए ताकि भाई-बहन के रिश्ते में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.
राखी बांधते समय इस मंत्र का करें जाप
पंडित दीपलाल जयपुरी ने बताया कि राखी बांधते समय बहन को एक विशेष मंत्र का उच्चारण करना चाहिए. यह मंत्र है — “येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः,vतेन त्वां मनु बध्नामि, रक्षे माचल माचल.”
उन्होंने बताया कि यह मंत्र सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है. रक्षाबंधन का त्योहार त्रेतायुग के राक्षस कुल में जन्मे राजा बलि की कहानी से भी जुड़ा है. राजा बलि एक महान दानी और शक्तिशाली राजा थे. उन्होंने कई यज्ञ करके स्वर्ग पर अधिकार करने की कोशिश की थी. तब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी और भगवान ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी.
जब राजा बलि की वीरता से खुश हुए विष्णु
राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान में दे दी. भगवान विष्णु ने पहले पग में आकाश, दूसरे में पाताल को नाप लिया और तीसरे पग के लिए जब जगह नहीं बची तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया. राजा बलि की इस दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे वरदान मांगने को कहा. राजा बलि ने वर मांगा कि भगवान विष्णु उनके साथ पाताल लोक में रहें. भगवान ने वचन निभाया और पाताल चले गए.
इससे देवी लक्ष्मी बहुत चिंतित हुईं. अपने पति को वापस लाने के लिए उन्होंने भगवान शिव से सहायता मांगी. भगवान शिव ने उन्हें प्रिय वासु नाग का रक्षासूत्र दिया. जिसके बाद लक्ष्मी एक नाग कन्या के रूप में राजा बलि के पास गईं और उन्हें भाई मानते हुए राखी बांधी. बदले में उन्होंने भगवान विष्णु को वापस भेजने का वचन लिया. इस प्रकार लक्ष्मी जी द्वारा राजा बलि को राखी बांधने की यह कथा रक्षाबंधन के पर्व से जुड़ी हुई है.
पैसा चुंबक की तरह खिंचा आएगा! दुर्भाग्य हो जाएगा दूर, बस 2 चीजों को पानी में मिलाकर घर के दरवाजे पर छिड़कें
5 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में ज्योतिष शास्त्र की तरह वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि घर में अगर किसी वस्तु को सही दिशा में रखा गया है, तो इससे इंसान को घर में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होगा. इसीलिए, ज्योतिषविद घर बनाने से लेकर उसे सजाने तक में वास्तु का ध्यान रखने की सलाह देते हैं. यही नहीं, घर बनने के बाद उसमें लगने वाले पौधे, चीजों के रखरखाव आदि में वास्तु का अपना महत्व है. ऐसा करने से घर में सुख-समृद्ध बनी रहती है. इसी तरह पानी के कुछ प्रयोग करना भी शुभ माना जाता है. अब सवाल है कि आखिर पानी में किन चीजों को मिलाकर छिड़काव करें? जल का छिड़काव करने के लाभ क्या हैं?
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, शास्त्रों में कई चीजों का वर्णन है. इसी तरह पानी के छिड़काव का भी है. हालांकि, पानी का छिड़काव करना तभी फायदेमंद है, जब आपको इससे जुड़ी जानकारी होगी. इस पानी में कुछ चीजों को मिलाना है और नियमत उचित समय पर छिड़कना है.
इन चीजों का करें छिड़काव
घर के मुख्य द्वार पर सुबह उठकर स्नान आदि के बाद तांबे के कलश में जल भरकर उसमें 1 चुटकी हल्दी मिला लें. इसके बाद इस पानी से छिड़काव मुख्य द्वार के दोनों तरफ करें. इस उपाय को करने से आसपास का माहौल स्वस्थ रहेगा, साथ ही घर में धन और ऐश्वर्य की कमी नहीं होगी.
किस समय करें छिड़काव
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर नियमित घर के मुख्य द्वार पर तांबे के कलश में जल भरकर छिड़काव करें.
हल्दी पानी के छिड़काव के लाभ
धन-लाभ के बनेंगे योग: इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है. साथ ही घर में कलह से भी मुक्ति मिल सकती है. ऐसा करने से घर से नकारात्मक शक्तियां निकल जाएंगी.
रोग-दोष से मुक्ति: ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, घर के मुख्य द्वार पर नमक पानी का हफ्ते में एक बार छिड़काव जरूर कर देना चाहिए. माना जाता है कि नमक से नकारात्मकता तो दूर होती ही है. साथ ही रोग, दोष भी पास नहीं आते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 05 अगस्त 2025)
5 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मित्र से पीड़ा, विवाद, मातृ कष्ट, व्यर्थ कार्य होगें, पड़ोसियों से विवाद होगा।
वृष राशि :- धन व्यय, व्यापार में प्रगति, शुभ कार्य होंगे, परिवार में अनुकूल बना ही रहेगा।
मिथुन राशि :- पितृ कष्ट, यात्रा योग, व्यय लाभ अस्थिर व अशांति का वातावरण बना रहेगा।
कर्क राशि :- यात्रा सुख, भूमि लाभ, हर्ष सिद्ध खेती व गृह लाभ कार्य की व्यवस्था उत्तम बनेंगी।
सिंह राशि :- शरीर कष्ट, आय व्यय, कार्य में सफलता, आर्थिक सुधार के साथ लाभ अवश्य होगा।
कन्या राशि :- खर्च विवाद स्त्री कष्ट, विद्या लाभ, धीरे-धीरे सुधार के साथ लाभ की स्थिति अवश्य बनेगी।
तुला राशि :- यात्रा से लाभ होगा, शरीर कष्ट, खर्च की अधिकता रहेगी, कार्यों पर ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- वृत्ति से लाभ, यात्रा, सम्पत्ति से लाभ, व्यापार में सुधार हो, खर्चें होते रहेंगे।
धनु राशि :- अल्प लाभ, चोट अग्नि-शरीर भय, मानसिक परेशानी, अपवाद से मानसिक उलझन बढ़ेगी।
मकर राशि :- शत्रु से हानि, अपव्यय होगा, शरीरादि सुख होवें, कमी की स्थिति रहेगी।
कुंभ राशि :- शुभ कार्यों में व्यय होगा, संतान सुख, कार्यों में सफलता मिलेगी, उत्साह की वृद्धि होगी।
मीन राशि :- पदोन्नति होगी, राजभय, लाभ-हानि की स्थिति रहेगी, अधिकारियों से मनमुटाव होगा।
क्या केले और नारियल पवित्र फल हैं?... आखिर भगवान को केवल ये दो ही फल क्यों चढ़ाए जाते हैं!
4 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू परंपरा में, भगवान और मंदिर को भक्ति और सम्मान का प्रतीक माना जाता है. कई लोग अपने इष्ट देवों के दर्शन करने के लिए मंदिर जाते हैं. वे भगवान से मनोकामनाएं और मन्नतें मांगते हैं. मनोकामना पूरी होने के बाद, भगवान के दोबारा दर्शन कर धन्यवाद करते हैं. ऐसी यात्राओं के दौरान, कई लोग मंदिर में नारियल और केले चढ़ाते हैं. आखिर मंदिर में सबसे ज्यादा नारियल और केला ही क्यों अर्पित किया जाता है. अन्य फल बीजों द्वारा प्रजनन करते हैं. यदि जानवरों, पक्षियों या मनुष्यों द्वारा खाए जाने के बाद बीज गिर जाते हैं, तो उस बीज से एक नया पौधा उगता है. इसलिए, फलों में पिछली इच्छा के अंश, अन्य जीवों के अवशेष हो सकते हैं लेकिन नारियल और केले इस तरह प्रजनन नहीं करते. ये अपने आप में पूर्ण ज्ञान से युक्त फल हैं. इसीलिए इन्हें पवित्र माना जाता है.
आत्म समर्पण को दर्शाता है नारियल
नारियल को फोड़ने से अहंकार का नाश होता है, इसका कठिन आवरण हमारे अहं को दर्शाता है, जिसे तोड़कर हम आत्म समर्पण करते हैं. यह संस्कारिक दृष्टि से पूजा में स्वयं को समर्पित करने का संकेत है. इसके अंदर का सफेद हृदय हमारे मन का प्रतिबिंब है. नारियल का पानी हमारे भीतर के प्रेम और भक्ति के साथ प्रवाहित होता रहता है.
लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाया जाता है नारियल
नारियल को श्रीफल कहा गया है. यह धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाया जाता है. यह फल तीन आंखों वाला होता है, जो त्रिनेत्र शिवजी का भी प्रतीक है. नारियल की तीन आंखें, भूतकाल के लिए, दूसरी वर्तमान के लिए और तीसरी भविष्य को दर्शाती हैं. इन तीन आंख को शरीर का प्रतीक भी माना जाता है – स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर. अगर नारियल को मिट्टी में गाड़ दिया जाए, तो वह एक पेड़ बन जाता है. यह जीवन चक्र की एक सुंदर शिक्षा है.
त्याग को दर्शाता है केला
नारियल के अलावा केला भी बहुत खास फल है. अगर आप केला खाकर उसका छिलका फेंक दें, तो उसमें से कोई नया पौधा नहीं निकलेगा. केले के पेड़ के तने से नई कोंपलें निकलेंगी. केले का पेड़ जीवन में सिर्फ एक बार फल देता है. लेकिन अंत में वह मर जाता है और अपनी जगह उससे उगी नई कोंपलों को दे देता है. यह त्याग और जीवन के सद्गुण का एक बेहतरीन उदाहरण है.
केले का हर भाग पवित्र
ब्रह्मवैवर्त पुराण एवं तंत्र साहित्य में वर्णन मिलता है कि विष्णु जी एवं लक्ष्मी जी को केले के वृक्ष की पूजा और केले के फल का अर्पण विशेष रूप से प्रिय है. लक्ष्मी पूजन में केले के पत्तों और फलों का उपयोग अत्यंत शुभ माना गया है. सत्यनारायण की कथा में केला के फल का भोग और केले के पेड़ की पत्तियों का प्रयोग किया जाता है.
इसलिए नारियल और केले का होता है प्रयोग
यह जानकर, हमें यह स्पष्ट हो जाता है कि भगवान को नारियल और केले क्यों चढ़ाए जाते हैं. ये शुद्ध फल माने जाते हैं, पूरी तरह से तैयार और अन्य जीवों के प्रभाव से मुक्त. इसलिए, जब भी कोई भगवान के सान्निध्य में जाता है, तो इन्हें ग्रहण करना न केवल एक परंपरा है, बल्कि एक आध्यात्मिक प्रक्रिया भी है.
बरसती रहेगी कान्हा की कृपा...जन्माष्टमी से पहले घर ले आएं ये शुभ चीजें
4 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार हैं. भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है. इस दिन लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद माह के अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ था. कई चीज ऐसी हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण को बेहद प्रिय हैं. माना जाता है कि अगर ऐसी चीजों को घर में रखें, तो उस घर में कान्हा का साक्षात वास होता है. अगर इस साल जन्माष्टमी से पहले आप अपने घर में कुछ वस्तुएं ले आते हैं, तो आपका जीवन खुशहाली से भर जाएगा और घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होगी. ये चीजें क्या हैं
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11 बजकर 49 मिनट के लगभग प्रारंभ होगी और 16 अगस्त को रात 09 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. इस बार गृहस्थों की जन्माष्टमी 15 अगस्त और वैष्णव की जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी. जन्माष्टमी से पहले आपको क्या अपने घर लाना है, जान लीजिए:
लड्डू गोपाल- अगर आप इस साल लड्डू गोपाल की मूर्ति की स्थापना करना चाहते हैं, तो जन्माष्टमी का दिन इसके लिए सबसे शुभ है. अपनी इच्छा और पसंद के हिसाब से आप लड्डू गोपाल के साइज का चयन कर सकते हैं. जन्माष्टमी वाले दिन लड्डू गोपाल को स्नान करवाने के बाद उनकी पसंदीदा चीजों का भोग जरूर लगाएं. इसके बाद उन्हें झूले पर जरूर बैठाएं.
बांसुरी- भगवान श्रीकृष्ण को बांसुरी अति प्रिय है. अगर घर में जन्माष्टमी से पहले बांसुरी लाकर रख देते हैं, तो घर में कभी भी पारिवारिक कलह नहीं होगी.
मोर पंख- श्रीकृष्ण भगवान को मोर पंख अति प्रिय है. शायद ही आपको बिना मोर पंख के कान्हा की कोई तस्वीर देखने को मिलेगी, इसलिए जन्माष्टमी से पहले एक मोर पंख घर के पूजा स्थल पर अवश्य रख लें. इससे घर में हमेशा धन की बढ़ोतरी होगी और परिवार में शांति का माहौल रहेगा.
कामधेनु- जन्माष्टमी के दिन या उससे पहले गाय और बछड़े की मूर्ति अवश्य खरीद लें. इसे कामधेनु गाय का प्रतीक माना जाता है. यह समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक है. इस मूर्ति को खरीदकर अगर आप अपने पूजा स्थल पर रख लेते हैं, तो घर में संतान सुख की प्राप्ति होगी. वहीं मानसिक और शारीरिक तनाव से मुक्ति मिलेगी.
माखन और मिश्री- माखन और मिश्री के बिना तो जन्माष्टमी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. भगवान श्रीकृष्ण को मक्खन-मिश्री काफी पसंद है. जन्माष्टमी से पहले इसे घर में ले आएं और जन्मोत्सव पर कान्हा को भोग लगाएं.
सावन में करें शिव के 108 नामों का जाप, हर इच्छा होगी पूरी और मन को मिलेगी शांति, जानें कब और कैसे करें जप?
4 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र समयों में से एक माना जाता है. यह महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित होता है. हर साल जब सावन आता है, तो भक्तों के मन में भक्ति और आस्था की लहर दौड़ जाती है. इस साल सावन 11 जुलाई से शुरू हुआ है और 9 अगस्त तक रहेगा. इस दौरान हर सोमवार का विशेष महत्व होता है जिसे श्रावण सोमवार कहते हैं. इस समय में भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों में जाकर जल अर्पित करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव के 108 नामों का जाप भी विशेष फलदायी माना गया है? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
क्यों करें शिव जी के 108 नामों का जाप?
भक्तों की मान्यता है कि शिव जी के 108 नामों का जाप करने से मन शांत होता है, मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. यह जाप विशेष रूप से तब फल देता है जब इसे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सावन के महीने में किया जाए.
108 संख्या का विशेष महत्व है. यह सिर्फ एक संख्या नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है. हमारे शरीर में 108 ऊर्जा केंद्र माने जाते हैं, और शिव जी के इन नामों से इन सभी केंद्रों को सक्रिय किया जा सकता है.
कौन कर सकता है यह जाप?
-कोई भी महिला या पुरुष, उम्र की कोई सीमा नहीं.
-विवाह योग्य कन्याएं सोमवार का व्रत रखकर इन नामों का जाप करें तो उन्हें योग्य जीवनसाथी मिलने की संभावना बढ़ती है.
-जो लोग मानसिक तनाव या किसी बड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं, उन्हें ये नाम मानसिक शांति प्रदान कर सकते हैं.
जाप करने का सही तरीका
1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें.
2. भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें.
3. एक रुद्राक्ष की माला लें और हर माला में 108 बार नामों का जाप करें.
4. अगर माला न हो तो मन ही मन श्रद्धा से नाम पढ़ें या बोलें.
5. जल, बेलपत्र, धतूरा और दूध से शिवलिंग का पूजन करें.
कब और कहां करें?
-सुबह का समय सर्वोत्तम माना गया है.
-घर में पूजा स्थल या किसी मंदिर में बैठकर जाप करें.
-यदि संभव न हो तो यात्रा या कार्यस्थल पर भी मन ही मन ये नाम लिए जा सकते हैं.
भगवान शिव के 108 नाम
ॐ भोलेनाथ नमः
ॐ कैलाश पति नमः
ॐ भूतनाथ नमः
ॐ नंदराज नमः
ॐ नन्दी की सवारी नमः
ॐ ज्योतिलिंग नमः
ॐ महाकाल नमः
ॐ रुद्रनाथ नमः
ॐ भीमशंकर नमः
ॐ नटराज नमः
ॐ प्रलेयन्कार नमः
ॐ चंद्रमोली नमः
ॐ डमरूधारी नमः
ॐ चंद्रधारी नमः
ॐ मलिकार्जुन नमः
ॐ भीमेश्वर नमः
ॐ विषधारी नमः
ॐ बम भोले नमः
ॐ ओंकार स्वामी नमः
ॐ ओंकारेश्वर नमः
ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः
ॐ विश्वनाथ नमः
ॐ अनादिदेव नमः
ॐ उमापति नमः
ॐ गोरापति नमः
ॐ गणपिता नमः
ॐ भोले बाबा नमः
ॐ शिवजी नमः
ॐ शम्भु नमः
ॐ नीलकंठ नमः
ॐ महाकालेश्वर नमः
ॐ त्रिपुरारी नमः
ॐ त्रिलोकनाथ नमः
ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
ॐ बर्फानी बाबा नमः
ॐ जगतपिता नमः
ॐ मृत्युन्जन नमः
ॐ नागधारी नमः
ॐ रामेश्वर नमः
ॐ लंकेश्वर नमः
ॐ अमरनाथ नमः
ॐ केदारनाथ नमः
ॐ मंगलेश्वर नमः
ॐ अर्धनारीश्वर नमः
ॐ नागार्जुन नमः
ॐ जटाधारी नमः
ॐ नीलेश्वर नमः
ॐ गलसर्पमाला नमः
ॐ दीनानाथ नमः
ॐ सोमनाथ नमः
ॐ जोगी नमः
ॐ भंडारी बाबा नमः
ॐ बमलेहरी नमः
ॐ गोरीशंकर नमः
ॐ शिवाकांत नमः
ॐ महेश्वराए नमः
ॐ महेश नमः
ॐ ओलोकानाथ नमः
ॐ आदिनाथ नमः
ॐ देवदेवेश्वर नमः
ॐ प्राणनाथ नमः
ॐ शिवम् नमः
ॐ महादानी नमः
ॐ शिवदानी नमः
ॐ संकटहारी नमः
ॐ महेश्वर नमः
ॐ रुंडमालाधारी नमः
ॐ जगपालनकर्ता नमः
ॐ पशुपति नमः
ॐ संगमेश्वर नमः
ॐ दक्षेश्वर नमः
ॐ घ्रेनश्वर नमः
ॐ मणिमहेश नमः
ॐ अनादी नमः
ॐ अमर नमः
ॐ आशुतोष महाराज नमः
ॐ विलवकेश्वर नमः
ॐ अचलेश्वर नमः
ॐ अभयंकर नमः
ॐ पातालेश्वर नमः
ॐ धूधेश्वर नमः
ॐ सर्पधारी नमः
ॐ त्रिलोकिनरेश नमः
ॐ हठ योगी नमः
ॐ विश्लेश्वर नमः
ॐ नागाधिराज नमः
ॐ सर्वेश्वर नमः
ॐ उमाकांत नमः
ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिकालदर्शी नमः
ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः
ॐ महादेव नमः
ॐ गढ़शंकर नमः
ॐ मुक्तेश्वर नमः
ॐ नटेषर नमः
ॐ गिरजापति नमः
ॐ भद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिपुनाशक नमः
ॐ निर्जेश्वर नमः
ॐ किरातेश्वर नमः
ॐ जागेश्वर नमः
ॐ अबधूतपति नमः
ॐ भीलपति नमः
ॐ जितनाथ नमः
ॐ वृषेश्वर नमः
ॐ भूतेश्वर नमः
ॐ बैजूनाथ नमः
ॐ नागेश्वर नमः
पैसे की तंगी से छुटकारा चाहिए? घर की तिजोरी मालामाल करने वाला उपाय, जिसे करना है बेहद आसान और असरदार
4 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर इंसान चाहता है कि उसके घर में पैसों की कभी कमी न हो और तिजोरी हमेशा भरी रहे, लेकिन कई बार मेहनत करने के बाद भी मनचाही आर्थिक तरक्की नहीं हो पाती. ऐसे में लोग तरह-तरह के उपाय आजमाते हैं ताकि पैसा टिके और बढ़े. आज हम आपके लिए एक ऐसा बेहद आसान और असरदार उपाय लेकर आए हैं, जिसे करने से आपके घर की तिजोरी हमेशा मालामाल रह सकती है. यह उपाय इतना खास है कि अगर इसे सही तरीके से कर लिया जाए तो आपके घर में कैश फ्लो इतना बढ़ जाएगा कि आपको पैसों को रखने के लिए नई तिजोरी तक खरीदनी पड़ सकती है. इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं है और इसे कोई भी व्यक्ति घर पर कर सकता है. आइए जानते हैं इस उपाय को करने का सही तरीका और इसके फायदे. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
तिजोरी किस दिशा में होनी चाहिए
सबसे पहले यह समझ लें कि घर की तिजोरी का मुंह किस दिशा में होना चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर तिजोरी का दरवाजा पश्चिम दिशा की ओर खुलता है तो यह बहुत शुभ माना जाता है. इसका मतलब यह है कि जब आप तिजोरी खोलें तो आपका चेहरा पूरब दिशा की ओर होना चाहिए. यह स्थिति धन स्थिरता और तरक्की के लिए बेहद शुभ मानी जाती है, अगर आपकी तिजोरी का मुंह किसी दूसरी दिशा में है तो कोशिश करें कि उसे पश्चिम की ओर खुलने की व्यवस्था करें.
तिजोरी में रखिए पांच तेज पत्ते
अब बात करते हैं इस खास उपाय की. आपको पांच तेज पत्ते लेने हैं. ध्यान रहे कि इन पत्तों में से कोई भी फटा हुआ या खंडित नहीं होना चाहिए. इन पत्तों को नीले रंग के कपड़े में अच्छे से लपेटें और उस पर सुगंधित इत्र छिड़क दें. इसके बाद इस बंडल को अपनी तिजोरी में रख दें.
कब और कैसे करें यह उपाय
इस उपाय को करने का सबसे शुभ समय शनिवार को सूर्योदय के समय या शनिवार की अमावस्या माना गया है. इस समय शनि की विशेष ऊर्जा सक्रिय होती है और धन वृद्धि में मदद करती है. इसलिए तय दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध मन से यह उपाय करें. नीले कपड़े में लिपटे तेज पत्तों के बंडल को अपनी तिजोरी में रखते समय भगवान शनि से प्रार्थना जरूर करें कि आपके घर में सुख-समृद्धि और धन की बरकत बनी रहे.
फायदा क्या मिलेगा?
अगर यह उपाय सही समय और तरीके से किया जाए तो आपके घर में पैसों का प्रवाह बढ़ सकता है. आपकी तिजोरी कभी खाली नहीं होगी और आप आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं. इस उपाय का असर जल्दी दिख सकता है, इसलिए मन में विश्वास रखना बहुत जरूरी है.
ध्यान रखने वाली बातें
1. पत्ते बिल्कुल सही और बिना टूटे हुए हों.
2. नीले रंग का कपड़ा साफ और नया हो.
3. इत्र की खुशबू अच्छी होनी चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.
4. तिजोरी को हमेशा साफ-सुथरा रखें और उसमें बेकार सामान न रखें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 04 अगस्त 2025)
4 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- उदर रोग, मित्र लाभ, राजभय, दाम्पत्य जीवन पूर्ण संतोषजनक स्थिति बनेंगी।
वृष राशि :- शत्रुभय, शुभ मंगल कार्य, विशेष मामले-मुकदमे में प्राय: जीत अवश्य होगी।
मिथुन राशि :- कुसंग से हानि, रोगभय, यात्रा, उद्योग-व्यापार की स्थिति लाभ-हानि की रहेगी।
कर्क राशि :- पराक्रम से कार्य सिद्ध, व्यापार लाभ, खेती एवं गृहकार्य में व्यवस्था बनी रहेगी।
सिंह राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा, स्थिति में सुधार अवश्य होगा, कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- धन का व्यर्थ व्यय, कार्य में हानि, हस्तक्षेप से दूसरों से तनावपूर्ण अवश्य बनेगा।
तुला राशि :- कार्यगति अनुकूल रहेगी, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, मित्रों से सहयोग मिलेगा।
वृश्चिक राशि :- सामाजिक कार्य में प्रतिष्ठा व प्रभुत्व वृद्धि एवं कार्य कुशलता से संतोष होगा।
धनु राशि :- कार्य योजना फलीभूत होगी, कार्य कुशलता से हर्ष, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मकर राशि :- अधिकारियों के सम्पर्क से बचें, तनाव, क्लेश व अशांति बेचैनी अवश्य बनेगी।
कुंभ राशि :- उद्विघ्नता व असमंजस का वातावरण मन को क्लेशयुक्त बना ही रहेगा।
मीन राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, योजनायें फलीभूत होंगी, सफलता के साधन अवश्य ही जुटायेंगे।
सावन के अंतिम सोमवार पर 5 शुभ योग, शिवलिंग पर भूलकर भी ना करें ये चीज अर्पित
3 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का अंतिम सोमवार 4 अगस्त को है और इस दिन भगवान शिव की पूजा ध्यान पूर्वक करें. भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और सुख सौभाग्य में वृद्धि के लिए भक्तों के पास यह आखिरी मौका है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार सावन के अंतिम सोमवार पर एक या दो नहीं बल्कि 5 शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. सावन सोमवार को ब्रह्म योग, इंद्र योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि नामक शुभ योग बन रहा है. साथ ही मिथुन राशि में गुरु और शुक्र ग्रह की युति से गजलक्ष्मी योग भी बन रहा है. इन शुभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से सभी दुख व परेशानियों से मुक्ति मिलती है लेकिन कुछ चीजों का विशेष ध्यान भी रखना पड़ता है. आइए जानते हैं सावन के अंतिम सोमवार पर शिवलिंग पर किन चीजों का अर्पित करने से बचें.
सावन के अंतिम सोमवार कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें
1- सावन के अंतिम सोमवार को शिव पूजन के समय काले व नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें.
2- सावन के अंतिम सोमवार को अपशब्द और झूठ बोलने से बचें. किसी को कष्ट पहुंचाने से बचें और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर रखें.
3- सावन के अंतिम सोमवार को शिवलिंग पर तुलसी, सिंदूर, हल्दी, केतकी के फूल आदि चीजों को अर्पित करने से बचें.
4- सावन के अंतिम सोमवार को शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित ना करें और ना ही नारियल अर्पित करें.
5- सावन के अंतिम सोमवार को दिन में सोने से बचें और रात के समय भजन कीर्तन अवश्य करें.
6- सावन के अंतिम सोमवार को घमंड या अहंकार करने से बचें और गरीब व जरूरतमंद लोगों की मदद करें.
7- सावन के अंतिम सोमवार को प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा जैसे तामिसक भोजन से दूर रहें और सात्विक भोजन को अपनाएं.
लाल किताब की उपयोगी बातें
1- सावन के अंतिम सोमवार को सफेद वस्त्र पहनकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं.
2- प्रदोष काल के समय पीतल या तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर शिवलिंग पर अर्पित करें.
3- कुंडली में कोई दोष या मानसिक तनाव हो, तो दूध में कपूर मिलाकर शिवलिंग पर अर्पण करें.
सावन के अंतिम सोमवार करें ये उपाय
1– शाम को शिव-पार्वती का दीपक लगाकर पूजन करें. ‘हे गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रियाः। तथा मां कुरु कल्याणि कान्त कांता सुदुर्लभाम्॥’ मंत्र का जप करें.
2- रोग नाश के लिए काले तिल और जल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं. साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें.
3- ऋण और दरिद्रता मुक्ति के लिए साबुत चावल, सफेद कपड़ा और चांदी या चांदी रंग का सिक्का शिवलिंग पर चढ़ाएं.
4- राहु-केतु दोष शांति के लिए नारियल को सिर से 7 बार वारकर शिवलिंग पर अर्पण करें या नदी में प्रवाहित करें.
पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए हर रोज करें हनुमानजी के ये पाठ, हर प्रकोप, भय और दोष होगा दूर
3 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्या आपको बार-बार असफलता का सामना करना पड़ रहा है? क्या घर में अकारण तनाव, रोग, आर्थिक तंगी या रिश्तों में कड़वाहट महसूस हो रही है? अगर हां, तो हो सकता है कि आप पितृदोष के असर से जूझ रहे हों. यह दोष वह अदृश्य बाधा है, जो पुरखों की अपूर्ण इच्छाओं या अनजाने कर्मों के कारण हमारी जिंदगी को प्रभावित कर सकती हैं. लेकिन अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पितृदोष से राहत पाने के लिए अगर आप प्रतिदिन हनुमानजी के कुछ विशेष पाठ पूरे श्रद्धा और नियम से करें, तो इसका असर जल्द दिखने लगता है और आपको पितृदोष समेत सभी तरह के भय और प्रकोप से मुक्ति भी मिलेगी.
परिवार का माहौल रहता है अच्छा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसरा, पितरों से मुक्ति के लिए हर रोज गीता का पाठ करना उत्तम माना गया है. ऐसा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितर प्रसन्न भी होते हैं. पितरों जब प्रसन्न होते हैं, तब वह वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और परिवार का माहौल खुशनुमा बना रहता है.
सभी कष्ट होते हैं दूर
सभी तरह के दोष और भय से मुक्ति के लिए हर रोज भगवान राम और माता सीता के नाम का संकीर्तन करें. साथ ही सुंदरकांड का पाठ और गीता का पाठ करें. जिस जगह पर राम नाम का संकीर्तन होता है, वहां हनुमानजी जरूर पहुंचते हैं इसलिए नियमित रूप से घर में कुछ समय के लिए राम नाम का संकीर्तन अवश्य करें और ईश्वर से कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें.
सभी बाधाओं से मिलती है मुक्ति
पितृ दोष और कार्यों में चल रही बाधाओं से मुक्ति के लिए हर रोज बजरंग बाठ का पाठ अवश्य करें. बजरंग बाण का पाठ करने से सभी तरह के दुख दर्द और भय दूर हो जाते हैं. मान्यता है कि हनुमानजी के सामने बजरगं बाठ का पाठ और गुड़ व चने का भोग लगाने से हर इच्छा पूरी होती है और सभी तरह को दोष व बाधाएं भी दूर होती हैं. साथ ही सुख व सौभाग्य में वृद्धि होती है.
हर क्षेत्र में मिलती है सफलता
हर रोज हनुमान चालीसा और सुंदरकाठ का पाठ करने से हनुमानजी का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही सभी तरह के कष्ट व दुखों से मुक्ति मिलती है और ग्रह-नक्षत्र का भी शुभ फल प्राप्त होता है. अगर आप हनुमान चालीसा और सुंदरकाठ का पाठ हर रोज करने में असमर्थ हैं तो शनिवार व मंगलवार के दिन अवश्य करें. इन पाठ के करने से पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में सफलता मिलती है और कष्ट भी दूर होते हैं.
किस तरह करें पाठ
– रोज सुबह सूर्योदय से पहले उठें.
– स्नान कर लाल या केसरिया वस्त्र पहनें.
– घर के मंदिर या साफ स्थान पर हनुमानजी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं.
– लाल फूल, सिंदूर और चोला चढ़ाएं.
– ऊपर दिए गए पाठ में से कम से कम एक का संकल्पपूर्वक पाठ करें.
पाठ करते समय इन गलतियों से बचें
– पाठ करते समय जप में जल्दबाजी न करें.
– पाठ के दिन मांस, मदिरा, अधिक क्रोध या अपवित्र आचरण से बचें.
– किसी का उपहास या अपमान न करें, गरीब व जरूरतमंद, माता-पिता या वृद्ध आदि का.
सोना, चांदी, रेशम या सूत? बहनें जान लें भाइयों को कब फायदा करेगी...कौन सी राखी
3 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन के आखिरी दिन यानी सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है. बहन-भाई के अटूट संबंध का प्रतीक यह पर्व साल 2025 में अगस्त महीने में पड़ेगा. इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुरक्षा और खुशहाली की कामना करेंगी. भाई भी बहनों की रक्षा का वादा करेंगे. रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय धागे की सामग्री का भी महत्व होता है.
कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन?
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रही है, जो 9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा.
रेशम या सूत?
अक्सर देखा जाता है कि रक्षाबंधन के लिए सबसे पारंपरिक और आम धागा रेशम या सूत का होता है. रेशम की राखी को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह पवित्रता, कोमलता और प्रेम का प्रतीक है. रेशम की राखी नरम होती है, जो रिश्तों की नाजुकता और मजबूती दोनों को दर्शाती है. सूत या रेशम की राखी पहनने से भाई की रक्षा का आशीर्वाद मिलता है और यह परंपरा से जुड़ी एक सुंदर अभिव्यक्ति होती है.
चांदी की राखी शुभ या अशुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी का संबंध चंद्रमा से हो गया है, इसलिए जिन भाइयों की कुंडली में चंद्र दोष हो उनकी बहनें चांदी की राखी बांधें तो इस दोष से मुक्ति मिल सकती है, इसलिए चांदी की राखी बांधना शुभ होता है. चांदी शीतलता और मानसिक शांति का प्रतीक है, जो मनोवैज्ञानिक रूप से भी भाई को सुकून देती है.
सोने की राखी शुभ या अशुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोना सदैव से धन, समृद्धि और वैभव का प्रतीक रहा है. सोने की राखी भी खास अवसरों पर बहनें अपने भाइयों को बांधती हैं. सोने की राखी न केवल भाई के लिए बहन के गहरे स्नेह को दर्शाती है, बल्कि यह उसकी उन्नति और खुशहाली की कामना भी करती है. इसलिए, शास्त्रों में सोने की राखी बांधना शुभ माना जाता है.
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा बिना शिवालय दर्शन के पूरी नहीं, संतान प्राप्ति के लिए लोग करते हैं दर्शन
3 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन का महीना अब अपने अंतिम दौर में चल रहा है और आज हम आपको बारह ज्योतिर्लिंगों में एक घृष्णेश्वर महादेव के बारे में बताएंगे, जो महाराष्ट्र के संभाजीनगर में विराजते हैं. यह प्राचीन मंदिरों में से एक है. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शंकर को समर्पित है. भगवान शिव के करुणामय स्वरूप का प्रतीक यह मंदिर, जहां शिव को घृष्णेश्वर या करुणा के ईश्वर के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं और इसके स्मरण मात्र से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है. यह मंदिर एलोरा की विश्वप्रसिद्ध गुफाओं के पास स्थित है.
दर्शन मात्र से सभी पाप हो जाते हैं नष्ट
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पूर्वमुखी है. इसको लेकर कहा जाता है कि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और देवगिरि दुर्ग के बीच एक सहस्रलिंग पातालेश्वर (सूर्येश्वर) महादेव का मंदिर है, जिनकी आराधना सूर्य भगवान करते हैं. इसीलिए यह ज्योतिर्लिंग भी पूर्वमुखी है. मान्यता है कि सूर्य द्वारा पूज्य होने के कारण घृष्णेश्वर त्रिविध तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) का हरण कर धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष जैसे सुख प्रदान करते हैं. शिव पुराण के अनुसार जिस तरह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा में चंद्रमा को देखकर सुख की अनुभूति होती है, उसी प्रकार घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन कर मनुष्य पाप मुक्त हो जाता है.
शयन आरती का है विशेष महत्व
वहीं पद्मपुराण में इस ज्योतिर्लिंग के बारे में वर्णित है कि यहां रात में महादेव इसी शिवालय तीर्थ के पास ही बसते हैं. इसीलिए घृष्णेश्वर में शयन आरती का विशेष महत्व है. सभी जगह 108 शिवलिंग का महत्व बताया जाता है किंतु यहां पर 101 का महत्व है. 101 पार्थिव शिवलिंग बनाए जाते हैं और 101 ही परिक्रमा की जाती है.
इस ज्योतिर्लिंग को लेकर द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोत में लिखा है…
इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम् . वन्दे महोदारतरस्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणम् प्रपद्ये ॥
जो इलापुर के सुरम्य मंदिर में विराजमान होकर समस्त जगत् के आराध्य हैं, जिनका स्वभाव बड़ा ही उदार है, उन घृष्णेश्वर नामक ज्योतिर्मय भगवान शिव की शरण में मैं जाता हूं.
मंदिर के पास ही है लक्ष विनायक का मंदिर
यहां पास में एक सरोवर भी है, जिसे शिवालय के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग की यात्रा बिना शिवालय दर्शन के पूरी नहीं होती. यहां पास में लक्ष विनायक का मंदिर है. कथा के अनुसार तारकासुर के वध के बाद भगवान शंकर ने यहां गणेशजी की स्थापना कर उनकी पूजा की थी. यहां स्कंदमाता ने मूर्ति स्थापित की थी. यह मंदिर 21 गणेश पीठों में से एक है. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित एलोरा की गुफाएं यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं. इन गुफाओं में अद्भुत मूर्तियां और कलाकृतियां हैं, जिनमें छठी और नौवीं शताब्दी के हिंदू, बौद्ध और जैन शैलकृत मंदिर और मठ हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 03 अगस्त 2025)
3 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- तनाव व उदर रोग, मित्र लाभ, राजभय तथा दाम्पत्य पूर्ण संतोषप्रद रहेगा।
वृष राशि :- शत्रुभय, सुख मंगल कार्यों का विरोध होगा, मामले-मुकदमे में प्राय: जीत होगी ध्यान दें।
मिथुन राशि :- कुसंग से हानि, रोगभय, यात्रा सुख में वृद्धि, व्यापार में स्थिति लाभ-हानि की रहेगी ध्यान दें।
कर्क राशि :- पराक्रम से कार्य सिद्ध होगा, व्यापार में लाभ, खेती व गृहकार्य में व्यवस्था अवश्य बनेगी।
सिंह राशि :- तनावपूर्ण स्थिति से बचें, विरोध चिन्ता, उद्योग-व्यापार में लाभ के कार्य सफल होंगे।
कन्या राशि :- भूमि लाभ, स्त्री सुख, प्रगति के योग हैं, उद्योग-व्यापार में अड़चनों का सामना करना पड़ेगा।
तुला राशि :- प्रगति, वाहन भय, भूमि लाभ, कष्ट, व्यर्थ अनाप-शनाप व्यय से परेशानी बढ़ेगी।
वृश्चिक राशि :- कार्य सिद्धी, विरोध एवं कष्ट होगा, व्यापार में सुधार संभव है।
धनु राशि :- यात्रा से हानि, मातृ-पितृ कष्ट, हर्ष होगा, लिखा-पढ़ी व शिक्षा जगत से सुख होगा।
मकर राशि :- शुभ कार्यों की वृद्धि होगी, वाहनादि भय, रोगभय, नौकरी में स्थिति सामान्य रहेगी।
कुंभ राशि :- अभीष्ट कार्य सिद्धी, भय, लाभ कार्य में बाधा आयेगी, धार्र्मिक व कुछ अच्छे कार्य बनेंगे।
मीन राशि :- अल्प हानि, रोगभय, सम्पत्ति लाभ, मित्रों व पारिवारिक लोगों से सावधान रहें।
पूरे सावन माह में नहीं कर पाए भोलेनाथ की पूजा, बस सावन पूर्णिमा राशि अनुसार कर लें ये उपाय, मिलेगा पूरा फल
2 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित है. शिव भक्तों को सावन मास का पूरे साल इंतजार रहता है. इस साल सावन माह 11 जुलाई 2025 से शुरु हुआ था. जिसके बाद देशभर के शिवालयों में भोले के भक्तों की भारी भीड़ जमा होने लगी. कांवड़ यात्रा शुरू हो गई. अब धीरे-धीरे यह पवित्र महीना समाप्त होने को है. पंचांग के अनुसार, जिस श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को यह पावन महीना पूर्ण होगा, वह इस साल 9 अगस्त को पड़ेगी. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, अगर कोई जातक सावन मास में शिव का पूजन-अर्चन नहीं कर पाया है, तो सावन पूर्णिमा पर राशि अनुसार कुछ उपाय करने से उसे पूरे सावन मास का दान-पुण्य का फल प्राप्त होगा. शिव की कृपा के साथ लक्ष्मी-नारायण भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
मेष- इस राशि के जातकों को सावन पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए खीर का दान करना चाहिए. ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और घर में सालभर सुख-समृद्धि का वास होगा.
वृषभ- सावन पूर्णिमा पर वृषभ राशि के जातक गरीबों को दही या घी का दान करें. इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं.
मिथुन- इस राशि के जातकों को व्यापार में मुनाफे की जगह लगातार घाटा हो रहा है, तो सावन पूर्णिमा के दिन उन्हें दूध या चावल का दान करना चाहिए.
कर्क- मां लक्ष्मी की असीम कृपा पाने के लिए कर्क राशि वाले सावन पूर्णिमा के दिन मिश्री युक्त दूध का दान करें. साथ ही इससे उन्हें हर कार्य में सफलता मिलेगी.
सिंह- इस राशि के जातकों को ग्रहों की बाधा दूर करनी हो, तो सावन पूर्णिमा के दिन गुड़ का दान अवश्य करना चाहिए. ऐसा करने से ग्रहों की स्थिति मजबूत होगी.
कन्या- इस राशि के जातकों को सावन पूर्णिमा के दिन खीर का दान करना चाहिए. ऐसा करने से सालभर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
तुला- लक्ष्मी माता की असीम कृपा पाने के लिए इस राशि के जातक दूध, चावल और घी का दान कर सकते हैं. ऐसा करने से लक्ष्मी-नारायण प्रसन्न होंगे.
वृश्चिक- आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो और ग्रह दोष हों, तो वृश्चिक राशि के जातकों को सावन पूर्णिमा के दिन लाल रंग की वस्तु का दान करना उत्तम माना गया है. ऐसा करने से ग्रह दोष दूर होंगे.
धनु- इस राशि के जातक सावन पूर्णिमा के दिन दाल का दान कर सकते हैं. इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होगा.
मकर- इस राशि के जातकों को सावन पूर्णिमा के दिन बहते हुए जल में अक्षत प्रवाहित करने से सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलेगी और आर्थिक लाभ होगा.
कुंभ- सावन पूर्णिमा के दिन कुंभ राशि वाले जरूरतमंद लोगों को भोजन का दान करें. इससे आर्थिक समस्याएं दूर होंगी. साथ ही मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
मीन- इस राशि के जातकों को सावन पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की उपासना जरूर करनी चाहिए. साथ ही ब्राह्मणों को भोजन खिलाने से भी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.
बुध और बृहस्पति की टकराहट कैसे बिगाड़ सकती है आपकी जिंदगी, जानें इसके आसान उपाय, पाएं सुख, सफलता और सम्मान
2 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारी जिंदगी में ग्रहों का असर कई बार इतना गहरा होता है कि हम समझ ही नहीं पाते कि आखिर मुसीबतें क्यों आ रही हैं. ज्योतिष के अनुसार बुध और बृहस्पति जैसे ग्रह हमारी बुद्धि, इज्जत, रिश्ते और जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करते हैं, अगर इन ग्रहों की स्थिति सही हो तो इंसान को कामयाबी, सम्मान और सुख मिलता है, लेकिन जब ये ग्रह खराब होते हैं तो जिंदगी में कई तरह की परेशानियां घेर लेती हैं. आज हम बात करेंगे कि बुध और बृहस्पति हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं और इन्हें ठीक करने के क्या आसान उपाय हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
बुध को सरल भाषा में समझें तो यह कांच जैसा है. जैसे घर में टूटा हुआ कांच अशुभ माना जाता है, वैसे ही बुध खराब हो जाए तो दिक्कतें आती हैं. बुध का सीधा संबंध व्यापार, बुद्धि, दांतों, बेटियों, बुआ और मासी जैसे रिश्तों से भी माना जाता है, अगर आपके दांत बार-बार खराब हो रहे हों या इन रिश्तों में तनाव हो रहा हो तो समझ लीजिए कि बुध मजबूत नहीं है. दूसरी ओर बृहस्पति को गुरु और बड़े बुजुर्गों का प्रतीक माना जाता है. यह ऑक्सीजन की तरह है जो जीवन में इज्जत, मान-सम्मान और स्थिरता देता है.
समस्या तब आती है जब बुध और बृहस्पति आपस में टकराव की स्थिति में आ जाते हैं, ये दोनों ग्रह एक-दूसरे के कट्टर शत्रु माने जाते हैं. जब कुंडली में बुध और बृहस्पति का मेल सही नहीं होता, तो व्यक्ति के जीवन में ऐसे हालात बन जाते हैं कि उसके द्वारा लिया गया एक गलत कदम बड़े बुजुर्गों की इज्जत को नुकसान पहुंचा देता है. यही नहीं, बुध-राहु का योग भी कई बार परेशानी खड़ी कर देता है. ऐसे योग बनने पर व्यक्ति की बुद्धि भटक सकती है और रिश्तों में दरार आ सकती है.
जिन लोगों की कुंडली में बुध, चंद्रमा या मंगल कमजोर होते हैं, उन्हें नजर लगने और तंत्र-मंत्र जैसी चीजों का असर जल्दी होता है. मंगल के कमजोर होने पर व्यक्ति की खुशियों में बार-बार रुकावट आती है. कभी पार्टी का मजा बिगड़ जाता है, कभी खुशी के मौके पर अचानक परेशानी खड़ी हो जाती है.
अब सवाल है कि इन ग्रहों को मजबूत करने के लिए क्या किया जाए. सबसे आसान उपाय यह है कि आप नीम की लकड़ी से बनी कंघी का इस्तेमाल शुरू कर दें. यह उपाय खास तौर पर मंगल दोष को खत्म करने में मदद करता है. नीम की कंघी किसी भी दुकान पर आसानी से मिल जाएगी. इसे रोजाना बालों में इस्तेमाल करें और कोशिश करें कि इसे घर से बाहर कहीं भूलें नहीं. माना जाता है कि यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है और आपको नजर लगने से बचाता है.
इसी तरह बुध को मजबूत करने के लिए घर में टूटा हुआ कांच न रखें, अगर कोई शीशा या कांच का सामान टूट जाए तो तुरंत हटा दें. रिश्तों को संभालें, खासकर बेटियों, बुआ और मासी जैसे रिश्तों को सम्मान दें. बुध से जुड़े ये रिश्ते मजबूत होंगे तो ग्रह भी अच्छा असर देने लगेंगे.
बृहस्पति को मजबूत करने के लिए बड़े बुजुर्गों का सम्मान करना सबसे जरूरी है. उनसे आशीर्वाद लें और अगर संभव हो तो हर गुरुवार को पीले कपड़े पहनें या पीली दाल का दान करें, ये छोटे-छोटे उपाय धीरे-धीरे आपके जीवन में बदलाव लाते हैं और मुसीबतों से बचाते हैं.
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