धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 09 अगस्त 2025)
9 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समृद्धि एवं सफलता के योग बनेंगे, अनिष्टता से बचने की चेष्ठा बनेगी।
वृष राशि :- कार्य में अशांति व अस्थिरता, मानसिक अवरोध बढ़े, असमंजस में रुकें।
मिथुन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो तथा व्यवसायिक क्षमता अनुकूल बनी ही रहेगी।
कर्क राशि :- लेन-देन के मामले में हानि होगी, कोर्ट के मामले स्थगित रखें, किसी के चंगुल में फंसने से बचें।
सिंह राशि :- लेनदेन के मामले में हानि होगी, धन प्राप्ति में बाधा होगी, सतर्कता से कार्य करने पर लाभ होगा।
कन्या राशि :- क्रोध व क्लेश से हानि संभव तनाव व बेचैनी तथा मानसिक परेशानी बनेगी।
तुला राशि :- सोचे हुये कार्य पूर्ण होंगे, अधिकारियों से समर्थन प्राप्त होगा, विशेष कार्य बनें।
वृश्चिक राशि :- अनावश्य वाद-विवाद से बचें, अधिकारियों से समर्थन अवश्य प्राप्त होगा।
धनु राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, अनावश्य विवाद से बचें, समय का ध्यान देवें।
मकर राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन जुटायें, तथा समय व धन व्यर्थ नष्ट न करें, ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, समय अनुकूल नहीं, लेन-देन से विचलित न होवें।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता से संतोष होगा, कार्यगति में सुधार अवश्य होगा ध्यान दें
रक्षाबंधन पर बहन को दें ऐसा गिफ्ट, जो सात जन्मों तक आए काम, मुसीबत छू न पाए
8 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाई-बहन के रिश्ते में कभी तकरार तो कभी प्यार लगा रहता है. रक्षाबंधन एक ऐसा मौका होता है जब ये नोकझोंक किनारे हो जाती है और रिश्ता प्यार की डोर में बंध जाता है. हर भाई चाहता है कि इस खास दिन पर अपनी बहन को कुछ ऐसा दे, जिससे उसका चेहरा खिल उठे. इस गिफ्ट से अगर उसका भाग्य भी दमक जाए, तो सोने पर सुहागा वाली बात होगी. अगर ये गिफ्ट राशियों के हिसाब से दिए जाएं तो कहने ही क्या हैं. आइये जानते हैं कि राशियों के अनुसार बहनों को क्या गिफ्ट देना ज्यादा शुभ रहेगा.
राखी के रंगों का चयन भी रखें ठीक
कि रक्षाबंधन पर अगर बहनों को उनकी राशि के अनुसार तोहफा दिया जाए तो वह न सिर्फ उन्हें पसंद आता है बल्कि उनके जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य भी लाता है. अगर भाई की राशि मेष है तो उसे लाल रंग की राखी बांधना सबसे शुभ माना गया है. राखी में मूंगा या रुद्राक्ष जरूर होना चाहिए. बहन टीका करते समय केसर, लाल चंदन का उपयोग करें और घी का दीपक जलाकर राखी बांधें. भाई अपनी बहन को लाल रंग की चीजें जैसे रिंग या घड़ी गिफ्ट करें.
इस बात का रखें ध्यान
वृषभ राशि वालों के लिए गुलाबी, क्रीम और सफेद रंग की राखी सबसे उत्तम मानी गई है. राखी में कांच का काम हो तो सोने पर सुहागा. भाई अपनी बहन को सफेद रंग का रुमाल या कोई सजावटी चीज गिफ्ट करें. मिथुन राशि वाले हरे रंग के दीवाने होते हैं. बहन को चाहिए कि वो केसरिया रंग की राखी में हरे रंग की मोती या मनके लगाए. हरे रंग की मिठाई या चीज गिफ्ट में दी जाए तो वह बहन के लिए सौभाग्यशाली साबित होगा. कर्क राशि के भाई को राखी बांधते समय बहन सफेद रंग की राखी चुनें जिसमें अमेरिकन डायमंड या कांच का काम हो. सफेद रंग की वस्तुएं जैसे मोती, रुमाल या पर्स बहन को गिफ्ट दें. इससे उसकी किस्मत के दरवाजे खुल सकते हैं.
सात जन्मों का आशीर्वाद
रक्षाबंधन पर भावनाओं की मिठास के साथ यदि राशियों का तड़का भी लग जाए तो रिश्ते में और भी मिठास घुल जाती है. ज्योतिषाचार्य उमा चंद्र मिश्रा कहते हैं कि राखी बांधने का शुभ मुहूर्त राहुकाल के बाद होता है. राहुकाल में राखी न बांधें. पूजन करके भगवान का आवाहन करके जब राखी बांधी जाती है तो वह रिश्ते में सात जन्मों का आशीर्वाद भर देती है
बेहद शक्तिशाली है हनुमान चालीसा की ये चौपाई, रोजाना करें जाप, मिलेगा चमत्कारी लाभ
8 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है. ठीक उसी प्रकार मंगलवार और शनिवार का दिन पवन पुत्र हनुमान को समर्पित है. इस दिन हनुमान मंदिरों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर हनुमान जी महाराज के दर्शन पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. अगर आप भी हनुमान जी महाराज को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. हनुमान जी महाराज को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन उनकी चालीसा का पाठ आवश्यक करना चाहिए. हनुमान चालीसा में कई ऐसी चौपाई हैं, जिसका अनुसरण करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं.
हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास ने कई ऐसी चौपाई लिखी हैं, जिसका अनुसरण करने से व्यक्ति को सभी मनोरथ प्राप्त होते हैं. संतों का भी ऐसा मानना है कि अगर व्यक्ति हनुमान चालीसा का पाठ करता है और उसके चौपाई का अर्थ समझता है, तो उसे सभी तरह के पुण्य प्राप्त होते हैं. गोस्वामी तुलसीदास हनुमान चालीसा में लिखते हैं ‘तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय महं डेरा’… इस चौपाई के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास हनुमान जी महाराज से आग्रह कर रहे हैं. इस चौपाई के बारे में विस्तार से शशिकांत दास बताते हैं.
तुलसीदास सदा हरि चेरा…अर्थात तुलसीदास हमेशा से भगवान राम के सेवक हैं और प्रभु राम से प्रार्थना भी करते हैं कि हमें अपने हृदय में स्थान दीजिए. मेरे हृदय में निवास कीजिए.
कीजै नाथ हृदय महं डेरा…अर्थात गोस्वामी तुलसीदास प्रभु राम से प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु राम मेरे हृदय में अपना घर बनाएं.
यह चौपाई हनुमान जी से प्रार्थना है. जिसमें गोस्वामी तुलसीदास हनुमान जी से अपने हृदय में निवास करने का आग्रह कर रहे हैं. क्योंकि हनुमान जी भगवान राम के भक्त हैं और तुलसीदास भगवान राम के दास हैं. शशिकांत दास बताते हैं कि इस चौपाई के जाप करने से प्रभु राम के साथ पवन पुत्र हनुमान की विशेष कृपा भक्त को प्राप्त होती है.
कब है श्रावण पूर्णिमा, 8 या 9 अगस्त? जानें कौन सा दान चमका सकता है किस्मत?
8 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रावण पूर्णिमा का दिन त्योहार, व्रत, स्नान और दान के लिए काफी महत्वपूर्ण है. श्रावण पूर्णिमा को भगवान शिव के प्रिय माह सावन का समापन होता है. श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर भाई और बहन के प्रेम का उत्सव रक्षाबंधन भी मनाया जाता है. इस बार श्रावण पूर्णिमा की तिथि 8 अगस्त और 9 अगस्त को दो दिन है. ऐसे में असमंजस की स्थिति है कि श्रावण पूर्णिमा कब है? काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि श्रावण पूर्णिमा 8 अगस्त को है या फिर 9 अगस्त को? श्रावण पूर्णिमा पर किन दान किस्मत चमक सकती है?
श्रावण पूर्णिमा की सही तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा की तिथि 8 अगस्त दिन शुक्रवार को दोपहर में 2 बजकर 12 मिनट से प्रारंभ हो जा रही है यानि दोपहर से ही श्रावण पूर्णिमा लग जाएगी. इसका समापन 9 अगस्त दिन शनिवार को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर होगा. ऐसे में श्रावण पूर्णिमा तिथि 9 अगस्त को दोपहर तक रहेगी. ऐसे में श्रावण पूर्णिमा दो दिन हो रही है.
कि मुहूर्त चिंतामणि में तिथि का निर्धारण उदयातिथि के आधार पर किया जाता है. इसका मतलब यह है कि जिस तिथि में सूर्योदय होगा, उस दिन की तिथि वही मान्य होगी. इस आधार पर देखा जाए तो श्रावण पूर्णिमा की तिथि में सूर्योदय 9 अगस्त को हो रहा है क्योंकि 8 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा तिथि दोपहर से लग रही है. ऐसे में श्रावण पूर्णिमा 9 अगस्त शनिवार को है.
श्रावण पूर्णिमा पर होगा स्नान, दान और रक्षाबंधन
9 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन स्नान और दान किया जाएगा. श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर आप किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें, उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. नदी स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर पर ही स्नान करें और दान करें. श्रावण पूर्णिमा को स्नान और दान करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
श्रावण पूर्णिमा का दान, चमका सकता है किस्मत
श्रावण पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा है. इस दिन स्नान करने के बाद व्यक्ति को चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान करना चाहिए. ऐसे में आप श्रावण पूर्णिमा को चावल, सफेद वस्त्र, शक्कर, दूध, खीर, बताशे, दही, सफेद फूल, मोती, चांदी आदि का दान कर सकते हैं.
श्रावण पूर्णिमा पर इन वस्तुओं का दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है. यदि चंद्र दोष है तो वह दूर होगा, चंद्रमा का अशुभ प्रभाव कम होगा. ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. चंद्रमा शुभ फल देगा तो आपका मन स्थिर होगा और मनोबल मजबूत होगा. आप भावनात्मक रूप से मजबूत रहेंगे और सही फैसले करने में सक्षम होंगे.
चंद्रमा के शुभ फल से व्यक्ति को धन, संपत्ति, वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होती है. चंद्रमा जल का भी प्रतिनिधित्व करता है, जो लोग जल से जुड़े बिजनेस करते हैं, उनको लाभ होगा. लाइफ पार्टनर, माता-पिता और संतान से संबंध अच्छे होंगे.
09 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षा बंधन
8 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना गया है। हर साल सावन माह की पूर्णिमा को रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है। इस साल रक्षा बंधन 09 अगस्त को है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इस दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भद्राकाल व राहुकाल में राखी बांधने की मनाही है। हिंदू धर्म में भद्रा व राहुकाल के समय राखी बांधना अशुभ माना गया है लेकिन इस साल भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी, जिससे भद्रा का साया नहीं रहेगा। रक्षा बंधन के दिन राहुकाल की अवधि करीब डेढ़ घंटे की रहेगी। जानें रक्षा बंधन पर राहुकाल का समय व राखी बांधने के लिए ब्रह्म व चौघड़िया मुहूर्त:
राहुकाल का समय: रक्षा बंधन के दिन राहुकाल सुबह 09 बजकर 07 मिनट से सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल के दौरान शुभ व मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए।
राखी बांधने के लिए चौघड़िया मुहूर्त:
शुभ - उत्तम: 07:27 ए एम से 09:07 सुबह
लाभ - उन्नति: 02:06 पी एम से 03:46 दोपहर बाद
अमृत - सर्वोत्तम: 03:46 पी एम से 05:26 शाम
लाभ - उन्नति: 07:06 पी एम से 08:26 शाम
राखी बांधने के लिए ब्रह्म मुहूर्त: रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 22 मिनट से सुबह 05 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05:47 से दोपहर 02:23 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से दोपहर 03 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 08 अगस्त 2025)
8 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- हर्ष, यात्रा, राजसुख, सफलता, हानि, खर्च अधिक होगा, व्यर्थ का विरोध होगा।
वृष :- विरोध, व्यय, कष्ट, अशांति, कार्यलाभ की स्थिति संतोषप्रद बनी ही रहेगी।
मिथुन :- व्यापार में क्षति, यात्रा, विवाद, गृहकार्य-राजकार्य में व्यवस्था कुछ हानिप्रद रहेगी।
कर्क :- शरीर दिव्य, भूमि व राज लाभ, वायु विकार का योग, शरीर कष्ट होगा।
सिंह :- वाहन आदि का भय, कष्ट, राजसुख, यात्रा की स्थिति में विकाश होगा।
कन्या :- व्यय, प्रवास, विरोध, भूमिलाभ, उद्योग-व्यापार में अड़चने होंगी, ध्यान रखें।
तुला :- कार्यसिद्धी, लाभ, विरोध, प्रगति, कुछ अच्छे कार्य भी होंगे, संतान से प्रसन्नता मिले।
वृश्चिक :- रोगभय, मातृदु:ख, कष्ट, यात्रा, गृहकार्य व राजकार्य में रुकावट बनेगी, ध्यान दें।
धनु :- राजधर्म में रुचि, यात्रा, कार्यों मेंं रुकावट बनेगी, भयभीत व्यवस्था रहेगी।
मकर :- विरोध, व्यापार में हानि, शरीर कष्ट, धार्मिक खर्च बनेंगे, कार्य मेंं रुकावट होगी।
कुम्भ :- व्यय, प्रवास लाभ, प्रतिष्ठा, रोग, सामाजिक कार्य में रुकावट की अनुभूति होगी।
मीन :-राजभय, यशलाभ, मान, चोट-चपेट का भय, मित्रों व पारिवारिक लोगों से परेशानी होगी।
दान से होता है भाग्योदय
7 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय संस्कृति में दान का इतिहास काफी पुराना है। दान करने से न केवल आत्मसंतुष्टि व किसी जरूरतमंद की आवश्यकता की पूरी होती है, अपितु आपके जीवन से अशुभता भी घटने लगती है। जानिए कैसे दें दान क्या है इसकी विधि व महत्त्व।
सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए हर मनुष्य प्रयत्नशील रहता है। ऐसे में वह व्यवसाय, नौकरी आदि करता है। लेकिन जब इससे भी उसकी आकांक्षाओं की पूर्ति नहीं हो पाती तो वह अन्य उपायों को अपनाता है। इसका कारण यह है कि सुख-समृद्धि से ही व्यक्ति की पहचान होती है और समाज में मान-सम्मान मिलता है। सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए दान का विशेष महत्त्व है। दान से जहां दूसरों का हित साधन होता है, वहीं स्वयं का भी भाग्योदय हो जाता है। यदि आप खुशहाल जिंदगी जीने के इच्छुक हैं तो दान करने के निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं -
शिवरात्रि व्रत वाले दिन लाल धागे में पिरोए पंचमुखी रुद्राक्ष की माला शिव मंदिर में दान करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं। इससे व्यक्ति सदैव खुशहाल रहता है।
प्रात:काल स्नान आदि करने के पश्चात् किसी पंडित से मस्तक पर चंदन का तिलक कराएं और कुछ धन दान में देकर अपने काम-धंधे में लगें। इससे भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और समृद्धि बढ़ती है।
किसी शुभ दिन प्रात:काल बारह अंगुल की पलाश की लकड़ी ले आएं। फिर किसी विद्वान पंडित को बुलाकर उसका शुद्धिकरण कराएं और पूजादि कराकर उसे घर में कहीं ब्राह्मïण के हाथों गड़वा दें। इसके बाद पंडित को मीठा भोजन कराकर एवं कुछ दान-दक्षिणा देकर विदा करें। इसके प्रभाव से घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
यदि घर से निकलते ही मार्ग में कोई सफाई कर्मचारी सफाई करता दिखाई दे जाए, तो उसे कुछ दान-दक्षिणा अवश्य दें। इससे परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। अपने भोजन में से कुछ भाग पहले निकाल लें तथा भोजन के पश्चात् उसे गाय, भैंस आदि को दे दें। इस उपाय से भी सुख-समृद्धि बनी रहती है।
एक कटोरी में जल लेकर उसमें गुलाब का पुष्प, कुमकुम एवं थोड़े से चावल डालकर रात को घर में रखें और सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर उसे किसी मंदिर के पुजारी को दान कर आएं। दक्षिणा के रूप में पांच-दस रुपए भी दें। इस क्रिया से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
यदि प्रात:काल दुकान आदि पर जाते समय रास्ते में कोई ब्राह्मïण, भिखारी या हिजड़ा दिखाई दे, तो उसे कुछ दान अवश्य दें। इससे दुकान का कारोबार बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गुरुवार और शनिवार को गरीबों को कुछ दान करके पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। इससे भी परिवार में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है।
यदि गुरुवार को दुकान आदि में कोई फकीर लोबान की धूनी देने आए तो उसे कुछ दान-दक्षिणा देने से सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
शनिवार के दिन विधारा की जड़ को कपड़े में सिलकर गले अथवा दाएं बाजू पर बांधें और छोटा सा निर्दोष नीलम रत्न दान करें। शनि के कारण उत्पन्न कष्ट दूर होकर सुख-समृद्धि प्राप्त होगी।
किसी शुभ समय में बछड़े सहित गाय का दान गौशाला में करें। इससे सुख-समृद्धि तथा मान-सम्मान की वृद्धि होती है।
घर में किसी बच्चे के जन्मदिन अथवा किसी अन्य उत्सव पर किसी आश्रम में जाकर कुछ दान करने से व्यक्ति सदैव खुशहाल रहता है।
प्रात:काल एक सूखे नारियल पर काला सूती धागा लपेटकर पूजा स्थान पर रख दें। सायंकाल उसे किसी बर्तन में डालकर धागे सहित जला दें। दूसरे दिन उसकी भस्म एक कागज में रखकर किसी वृक्ष की जड़ में डाल आएं। यह क्रिया नित्य आठ दिन करें। नौवें दिन पानी वाला नारियल लाएं और उस पर कलावा लपेट दें। संध्या समय उस नारियल के साथ थोड़ा सा मिष्ठान और ग्यारह रुपए रखकर किसी ब्राह्मण को दान कर दें। इससे घर में खुशहाली आ जाएगी और सुख-समृद्धि का वातावरण व्याप्त हो जाएगा।
किसी भी दिन सूर्यास्त के समय एक सिला हुआ कुर्ता-पायजामा, एक पानी वाला नारियल, पंचमेल मिठाई, एक कच्चे दूध की थैली तथा एक शहद की शीशी ब्राह्मण को दान कर दें। फिर उसे कुछ रुपए देकर उससे थोड़ा दूध और शहद ले लें। फिर दूध और शहद को मिलाकर उसके छींटे घर में चारों ओर दें तथा पात्र को किसी चौराहे पर रख आएं। इससे ग्रहों का कुप्रभाव नष्ट होकर भौतिक सुखों की प्राप्ति तथा वृद्धि होती है।
नित्य प्रात:काल अपने भोजन में से थोड़ा सा भाग निकालकर कौओं को देने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
सात गोमती चक्र और काली हल्दी को पीले कपड़े में बांधकर किसी धर्म स्थान पर देने से मनुष्य खुशहाल हो जाता है।
रात्रिकाल स्नान आदि करके अपने सामने चौकी पर एक लाल वस्त्र बिछाएं। फिर उस पर पीतल का कलश रखें। कलश पर शुद्ध केसर से स्वस्तिक का चिह्न बनाकर उसमें जल भर दें। इसके पश्चात् उसमें चावल के कुछ दाने, दूर्वा और एक रुपया रख दें। तत्पश्चात् पीतल की छोटी सी प्लेट को चावलों से भरकर कलश के ऊपर रख दें। उसके ऊपर श्रीयंत्र की स्थापना करें। तदनंतर उसके निकट घी का चौमुखा दीपक जलाकर उसका कुमकुम और अक्षत से पूजन करें। इसके बाद दस मिनट तक भगवती लक्ष्मी का ध्यान करें। प्रात:काल ब्राह्मण को बुलाकर श्रीयंत्र का पूजन करवाकर, यंत्र को पूजा ग्रह में स्थापित करें तथा कलश आदि ब्राह्मïण को कुछ दक्षिणा सहित दान कर दें। इस दानगाय के गोबर का एक छोटा सा दीपक बनाकर उसमें पुराने गुड़ की एक डली तथा मीठा तेल डालें। फिर दीपक जलाकर उसे घर के मुख्य द्वार के मध्य रख दें। यह कार्य घर की कोई स्त्री करे। पुरुष रात में दुकान बंद करने के बाद दुकान के द्वार के बाहर पांच-दस रुपए के सिक्के पर छोटी सी चंदन की धूप जलाकर रखें और घर आ जाएं। यदि सुबह वो सिक्का न मिले तो बहुत अच्छी बात है। यदि सिक्का अपनी जगह रखा मिल जाए, तो इस क्रिया को पुन: करें। इसके बाद दुकान में हवन और घर में सत्यनारायण भगवान की कथा कराएं। पंडित को दान-दक्षिणा देकर खुशी-खुशी विदा करें। इससे दुकान के कारोबार में आशातीत वृद्धि होगी तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहेगी।
भोजन करने संबंधी कुछ जरूरी नियम
7 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन ध्रर्म में आहार ग्रहण करने के दौरान भी कुछ नियमों का पालन करना जरुरी माना गया है। माना गया है कि जिसप्रकार हम आहार करेंगे वैसे ही हमारे विचार भी होंगे।
सर्वप्रथम : भोजन करने से पूर्व हाथ पैरों व मुख को अच्छी तरह से धोना चाहिये। भोजन से पूर्व अन्नदेवता, अन्नपूर्णा माता की स्तुति करके उनका धन्यवाद देते हुए तथा सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो, ईश्वर से ऐसी प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए।
वहीं भोजन बनाने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से, मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाएं और सबसे पहले 3 रोटियां (गाय, कुत्ते और कौवे हेतु) अलग निकालकर फिर अग्निदेव को भोग लगाकर ही घर वालों को खिलाएं।
भोजन के समय
प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है, क्योंकि पाचनक्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक एवं सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले तक प्रबल रहती है।
जो व्यक्ति सिर्फ एक समय भोजन करता है वह योगी और जो दो समय करता है वह भोगी कहा गया है
एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है सुबह का खाना स्वयं खाओ, दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन दुश्मन को दो
भोजन की दिशा:
भोजन पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है। पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है।
ऐसे में न करें भोजन:
शैया पर, हाथ पर रखकर, टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए।
मल-मूत्र का वेग होने पर, कलह के माहौल में, अधिक शोर में, पीपल, वटवृक्ष के नीचे भोजन नहीं करना चाहिए।
परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए।
ईर्ष्या, भय, क्रोध, लोभ, रोग, दीनभाव, द्वेषभाव के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है।
खड़े-खड़े, जूते पहनकर सिर ढंककर भोजन नहीं करना चाहिए
ये भोजन न करें:
गरिष्ठ भोजन कभी न करें।
बहुत तीखा या बहुत मीठा भोजन न करें।
किसी के द्वारा छोड़ा हुआ भोजन न करें।
आधा खाया हुआ फल, मिठाइयां आदि पुनः नहीं खाना चाहिए।
खाना छोड़कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए।
जो ढिंढोरा पीटकर खिला रहा हो, वहां कभी न खाएं।
पशु या कुत्ते का छुआ, रजस्वला स्त्री का परोसा, श्राद्ध का निकाला, बासी, मुंह से फूंक मारकर ठंडा किया, बाल गिरा हुआ भोजन न करें।
अनादरयुक्त, अवहेलनापूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करें।
*कंजूस का, राजा का, वेश्या के हाथ का, शराब बेचने वाले का दिया भोजन और ब्याज का धंधा करने वाले का भोजन कभी नहीं करना चाहिए।
भोजन करते वक्त क्या करें:
भोजन के समय मौन रहें।
रात्रि में भरपेट न खाएं।
बोलना जरूरी हो तो सिर्फ सकारात्मक बातें ही करें।
भोजन करते वक्त किसी भी प्रकार की समस्या पर चर्चा न करें।
भोजन को बहुत चबा-चबाकर खाएं।
गृहस्थ को 32 ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए।
सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन, अंत में कड़वा खाना चाहिए।
सबसे पहले रसदार, बीच में गरिष्ठ, अंत में द्रव्य पदार्थ ग्रहण करें।
थोड़ा खाने वाले को आरोग्य, आयु, बल, सुख, सुंदर संतान और सौंदर्य प्राप्त होता है।
भोजन के पश्चात क्या न करें:
भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए।
भोजन के पश्चात क्या करें:
भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। भोजन के एक घंटे पश्चात मीठा दूध एवं फल खाने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।
क्या-क्या न खाएं:
रात्रि को दही, सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए।
दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना।
दूध-खीर के साथ खिचड़ी नहीं खाना चाहिए।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 07 अगस्त 2025)
7 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- यात्रा से लाभ, कुसंग हानि, गृह कलह, मानसिक अशांति अवश्य ही बनेगी।
वृष :- आर्थिक व्यय, स्वजन कष्ट, विवाद, अस्थिरता व अशांति का वातावरण बना ही रहेगा।
मिथुन :- शुभ कार्य, भूमि हानि, कार्य सिद्धी, लॉटरी-सट्टा से हानि की सम्भावना बनी ही रहेगी।
कर्क :- धन हानि, रोगभय, नौकरी में चिन्ता, राजकार्य, गृहकार्य में व्यवस्था होती ही रहेगी।
सिंह :- कार्य में निराशा, खेती में लाभ तथा शत्रुभय बना ही रहेगा, उद्योग व्यापार से लाभ।
कन्या :- शरीर कष्ट, राजलाभ, व्ययभार बढ़ेगा, दाम्पत्य जीवन असमंजस सा बना रहेगा।
तुला :- चोट-अग्नि भय, धार्मिक कार्य, कष्ट व्यापार में उलझन की स्थिति बनी ही रहेगी।
वृश्चिक :- बाधा, धन लाभ, यात्रा, कष्ट, गृहकार्य, राजकार्य में रुकावट की स्थिति रहेगी।
धनु :- रोगभय, मुकदमें में जीत, मानसिक परेशानी, अपवाद तथा व्यर्थ उलझन बढ़ जायेगी।
मकर :- व्यापार में लाभ, शत्रुभय, धनसुख, कार्यों में सफलता का योग, रुके कार्य बनेंगे।
कुम्भ :- कलह, व्यर्थ खर्च, सफलता प्राप्त, सामाजिक कार्यों में रुकावट का अनुभव होगा।
मीन :- स्वजन सुख, पुत्र चिन्ता, धन हानि, राजकार्य में विलम्ब, परेशानी बढ़ सकती है।
क्या है 13 मुखी रुद्राक्ष की असली ताकत? जानें लाभ, ज्योतिषीय महत्व और पहनने का तरीका
6 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
13 मुखी रुद्राक्ष को एक ऐसा मनका माना जाता है, जो न सिर्फ दिखने में खास होता है, बल्कि इसके पीछे छुपे आध्यात्मिक और ज्योतिषीय राज भी उतने ही गहरे होते हैं, ये रुद्राक्ष बहुत दुर्लभ होता है और माना जाता है कि इसमें भगवान इंद्र की शक्ति समाई होती है. इसे पहनने से सिर्फ शरीर और मन को ही नहीं, बल्कि आत्मा को भी एक खास शांति और ऊर्जा मिलती है. इस मनके को लेकर मान्यता है कि ये गले के चक्र को एक्टिव करता है, जिससे बोलने की ताकत और आत्म-विश्वास दोनों में सुधार आता है. आइए जानते हैं
1. क्या है 13 मुखी रुद्राक्ष?
13 मुखी रुद्राक्ष एक ऐसा बीज होता है, जिसकी सतह पर 13 अलग-अलग लाइनें होती हैं. इन रेखाओं को ‘मुख’ कहा जाता है. इसका संबंध भगवान इंद्र से जोड़ा जाता है, जो देवताओं के राजा माने जाते हैं. पुरानी मान्यताओं के मुताबिक, ये रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से बना है और इसे पहनने वाला इंसान आध्यात्मिक रूप से मजबूत हो जाता है.
2. इसकी खास बनावट और पहचान
13 मुखी रुद्राक्ष दिखने में आमतौर पर भूरे या गहरे रंग का होता है. ये गोल होता है और इसकी सतह पर साफ-साफ 13 धारियां दिखाई देती हैं. असली रुद्राक्ष की सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि ये एकदम नैचुरल होता है, यानी इसकी रेखाएं किसी तरह से बनाई नहीं जातीं, वो खुद उभरी होती हैं.
3. मानसिक फायदे
1. एकाग्रता और ध्यान बढ़ाता है
2. सोचने और समझने की क्षमता मजबूत करता है
3. तनाव और बेचैनी को कम करता है
4. आत्मविश्वास बढ़ाता है
अगर आप किसी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं या ऑफिस के काम में लगातार फोकस नहीं कर पा रहे हैं, तो ये रुद्राक्ष आपके दिमाग को शांत और स्थिर रखने में मदद कर सकता है.
4. आध्यात्मिक फायदे
1. गले के चक्र को एक्टिव करता है
2. आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध गहरा करता है
3. तीसरी आंख चक्र (आज्ञा चक्र) को खोलता है
4. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा देता है
जो लोग ध्यान या मेडिटेशन करते हैं, उनके लिए ये रुद्राक्ष बेहद फायदेमंद होता है. इससे आपके अंदर की ऊर्जा संतुलित रहती है और मानसिक शांति मिलती है.
5. शारीरिक फायदे
1. थायरॉइड और गले से जुड़ी समस्याओं में राहत
2. ब्लड प्रेशर को संतुलित करता है
3. पाचन तंत्र को मजबूत करता है
4. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
इस रुद्राक्ष को पहनने से न सिर्फ मानसिक, बल्कि शारीरिक तंदरुस्ती भी बनी रहती है. खासतौर पर गले से जुड़ी परेशानियों में इसका असर अच्छा बताया गया है.
6. ज्योतिष में महत्व
ज्योतिष के अनुसार, 13 मुखी रुद्राक्ष पर शुक्र ग्रह का प्रभाव होता है. शुक्र प्रेम, सौंदर्य और कला से जुड़ा होता है. माना जाता है कि इसे पहनने से रिश्तों में मिठास आती है, और कला या रचनात्मक क्षेत्रों में काम करने वालों को कामयाबी मिलती है.
7. चक्र संतुलन में भूमिका
हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं, जिनका संतुलन बहुत जरूरी होता है. 13 मुखी रुद्राक्ष खासकर गला चक्र को एक्टिव करता है, जिससे व्यक्ति बेहतर तरीके से अपनी बात रख सकता है. इसके अलावा ये तीसरी आंख चक्र को भी खोलने में मदद करता है, जिससे आपकी अंतर्दृष्टि और निर्णय लेने की ताकत बढ़ती है.
8. किन लोगों को पहनना चाहिए?
1. जो लोग राजनीति, मीडिया या मैनेजमेंट फील्ड में हैं
2. जिनका काम बोलने, समझाने और नेतृत्व करने से जुड़ा है
3. जिन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है
4. जो ध्यान या साधना करते हैं
गणेश जी की पत्नी का नाम क्या है? कैसे हुआ गणपति बप्पा का विवाह?
6 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का जन्म माता पार्वती के उबटन से हुआ था. गणपति बप्पा जब शिव जी को देवी पार्वती ने मिलने नहीं देते हैं, तो महादेव गुस्से में आकर उनका सिर काट देते हैं. बाद में उनको हाथी का सिर लगाया जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी का शरीर बेडौल था. उनका पेट निकला था, सिर हाथी का था. इससे वे काफी दुखी थे. इस वजह से उन्होंने ब्रह्मचारी रहने का निर्णय लिया था, लेकिन तुलसी जी ने उनको श्राप दिया था कि गणेश जी की दो पत्नियां होंगी. आइए जानते हैं कि गणेश जी की पत्नी का नाम क्या है? गणेश जी का विवाह कैसे हुआ?
गणेश जी की पत्नी का नाम
मंगलमूर्ति गणेश जी की पत्नी का नाम रिद्धि् और सिद्धि है. रिद्धि् और सिद्धि ब्रह्मा जी की मानस पुत्रियां हैं. रिद्धि समृद्धि, ऐश्वर्य और संपन्नता प्रदान करने वाली देवी हैं, जबकि सिद्धि सफलता, उपलब्धि और सिद्धि प्रदान करती हैं. गणेश जी के दो पुत्र शुभ और लाभ बताए गए हैं.
जब आप किसी भी कार्य का शुभारंभ गणेश जी के पूजन से करते हैं तो आपको रिद्धि् और सिद्धि की कृपा भी सहज मिल जाती है. गणपति पूजा से व्यक्ति को बुद्धि और शुभता के साथ सफलता, समृद्धि भी प्राप्त होती है.
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तुलसी जी गणेश जी पर मोहित हो गईं. उन्होंने गणेश जी से विवाह करने की बात कही. तब तपस्या कर रहे गणेश जी ने उनके प्रस्ताव को नकार दिया. इससे तुलसी नाराज हो गईं. उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि आपकी दो पत्नियां होंगी. इससे नाराज होकर गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया. इस वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी का उपयोग नहीं करते हैं. तुलसी के श्राप की वजह से गणेश जी का विवाह रिद्धि् और सिद्धि से हुआ.
एक अन्य कथा के अनुसार, बेडौल शरीर के कारण गणेश जी दुखी थे कि उनसे कोई विवाह नहीं कर रहा. जहां भी विवाह होता तो गणेश जी उसमें बाधा डाल देते थे. उनके इस व्यवहार से सभी देवी और देवता परेशान हो गए. तो वे ब्रह्मा जी के पास इस समस्या को लेकर गए. ब्रह्मा जी ने अपनी दो पुत्रियों रिद्धि और सिद्धि को प्रकट किया.
वे रिद्धि् और सिद्धि को लेकर गणेश जी के पास गए. उन्होंने गणेश जी से उन दोनों को शिक्षा देने का आग्रह किया. गणेश जी रिद्धि् और सिद्धि को शिक्षा देने के लिए सहमत हो गए तो ब्रह्मा जी वहां से चले गए. अब गणेश जी के पास विवाह की कोई जानकारी आती तो रिद्धि् और सिद्धि उनका ध्यान भटका देती थीं. इससे दूसरों के विवाह होने लगे.
काफी समय व्यतीत होने पर गणेश जी को मालूम हुआ कि लोगों का विवाह हो रहा है. रिद्धि् और सिद्धि के कारण ऐसा हुआ है क्योंकि वे दोनों गणेश जी को दूसरे के विवाह में विघ्न डालने नहीं दे रही थीं. गणेश जी नाराज हुए, वे रिद्धि् और सिद्धि को श्राप देने जा रहे थे, तभी ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उनको रोका. ब्रह्मा जी ने गणेश जी के समक्ष रिद्धि् और सिद्धि से विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे वे मान गए. इसके बाद रिद्धि् और सिद्धि से गणेश जी का विवाह हुआ.
रक्षाबंधन पर 95 साल बाद दुर्लभ संयोग, जानें राखी बांधने की सही विधि, जानें कितने गांठ होती हैं शुभ
6 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 9 अगस्त दिन शनिवार को है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करती हैं. राखी बांधने के बाद भाई बहनों को रक्षा और सहयोग का वचन देता है. इस साल रक्षाबंधन पर 95 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, इससे पहले ऐसा संयोग साल 1930 में बना था. उस समय भी तिथि, नक्षत्र और योग लगभग एक ही थे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राखी बांधन के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. इन नियमों का पालन करते हुए राखी बांधना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं राखी बांधने की सही विधि क्या है…
रक्षाबंधन का महत्व
भाई बहन का यह पवित्र त्योहार सभी त्योहार में सबसे ज्यादा खुशियां देने वाला होता है. इस दिन बहनें सुबह तैयार होती हैं और भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं. जब बहनें राखी बांधती हैं, तब भाई की लंबी उम्र, उज्जल भविष्य, सुख-शांति की कामना करती हैं. ज्योतिष में राखी बांधने की एक विधि बताई गई है, इसी विधि के साथ राखी बांधने का ध्यान रखने से इस पर्व का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. राखी बांधना कोई मात्र सांस्कृतिक रस्म नहीं है, यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसकी सही विधि शास्त्रों में दी गई है.
पूजा सामग्री (सामग्री सूची)
एक थाली (पूजन थाली)
रक्षा सूत्र (राखी)
कुमकुम (या रोली)
अक्षत (चावल)
दीपक (घी या तेल का)
मिठाई (गृहनिर्मित हो तो श्रेष्ठ)
जल पात्र
नारियल (ऐच्छिक)
राखी बांधने की सही विधि
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले उस जगह पर गंगाजल से छिड़काव करें, जहां पर राखी बांधने वाले हों. इसके बाद राखी और राखी की थाली पर भी गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद आटे या रंग से एक चौक बनाएं. फिर राखी की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, जल पात्र, नारियल आदि सामान रखें. राखी की थाली पूरी करने के बाद एक चौकी पर आसन बिछाकर भाई को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठा दें और बहनें भी उसी दिशा की तरह मुख करके बैठें.
राखी बांधते समय कितने गांठ होती हैं शुभ
भाई के सिर पर एक रुमाल रख दें और तिलक लगाएं. अब राइट हैंड की कलाई पर राखी बांधें. राखी बांधते समय तीन गांठे बांधने की परंपरा है. मान्यता है कि राखी की तीन गांठ का महत्व ब्रह्मा, विष्णु और महेश से है. राखी बांधते समय ॐ येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल: मत्र का अवश्य जप करें. इसके बाद मिठाई खिलाकर आरती करें. अंत में भाई बहनों को गिफ्ट दें.
रक्षाबंधन 2025 पर भद्रा का साया नहीं रहने वाला है लेकिन राहुकाल भी ध्यान रखना पड़ता है. भद्रा की तरह राहुकाल में भी शुभ व मांगिलक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं. इसलिए 9 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक राखी ना बांधें.
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: 9 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक है. इस दिन रक्षाबंधन के लिए 7 घंटे 37 मिनट तक का शुभ मुहूर्त है.
9 अगस्त को रक्षाबंधन के अलावा सावन पूर्णिमा, अमरनाथ यात्रा समापन के साथ 6 धार्मिक कार्यक्रम और...
6 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
9 अगस्त दिन शनिवार को सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और यह पंचांग व ज्योतिष दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट है. इस दिन ना केवल रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा बल्कि सावन पूर्णिमा, अमरनाथ यात्रा का समापन, शनि पूजा, पंचक प्रारंभ और ग्रहों के राजकुमार बुध का भी इसी दिन उदय भी हो रहा है. इसलिए 9 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है. 9 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग, सौभाग्य समेत कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. इसी के साथ आइए जानते हैं 9 अगस्त को कौन कौन से पर्व और धार्मिक कार्यक्रम किए जाएंगे…
श्रावण पूर्णिमा/सावन पूर्णिमा 2025
9 अगस्त को सावन मास की पूर्णिमा तिथि है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों को तर्पण किया जाता है. श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन, उपाकर्म (यज्ञोपवीत संस्कार/जनेऊ बदलना), ऋषि पूजन आदि किए जाते हैं. दान, स्नान और जप इस दिन के लिए विशेष पुण्यकारी होते हैं. यह दिन सावन मास का अंतिम दिन होता है इसलिए इस दिन शिवजी की विशेष पूजन किया जाता है. शिवजी के साथ इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है.
रक्षा बंधन 2025 (श्रावणी पर्व)
9 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा. रक्षाबंधन हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है जो भाई-बहन के रिश्ते की मर्यादा, प्रेम और कर्तव्य को दर्शाता है. इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उसकी दीर्घायु, आरोग्य और सफलता की कामना करती हैं, और भाई जीवन भर उसकी रक्षा करने का संकल्प करता है. मान्यता है कि सबसे पहले द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को रक्षा सूत्र बांधा था, और श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय उसकी रक्षा की थी.
अमरनाथ यात्रा समापन
सावन पूर्णिमा के दिन अमरनाथ यात्रा बाबा बर्फानी के पूजन के साथ समाप्त हो जाती है लेकिन साल 2025 में पहले ही यात्रा स्थगित कर दी गई हैं. मिली जानकारी के अनुसार, खराब मौसम और यात्रा मार्गों की बिगड़ती स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा को समय से पहले बंद कर दिया गया है. हालांकि अमरनाथ यात्रा का अंतिम चरण छड़ी मुबारक 9 अगस्त को ही होगा. सनातन धर्म में अमरनाथ यात्रा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि अमरनाथ यात्रा करने वाला व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
शनिदेव पूजन
9 अगस्त 2025 को शनिवार पड़ रहा है. साथ ही यह पूर्णिमा भी है इसलिए इस दिन शनिदेव का पूजन करने का विशेष महत्व है. इस दिन शनिदेव की तेल से अभिषेक, नील पुष्प, काले तिल, उड़द व काले वस्त्र दान करना अत्यंत शुभफलदायक होता है. शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या, या शनि की महादशा से पीड़ित जातकों के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ है. इस दिन शनिदेव की पूजा और शनि चालीसा का पाठ करने से शनि दोष से राहत मिलती है.
बुध ग्रह का उदय
9 अगस्त को रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा के अलावा ग्रहों के राजकुमार बुध कर्क राशि में उदय होने जा रहे हैं. हालांकि 11 अगस्त को बुध इसी राशि में मार्गी भी हो जाएंगे. बुध ग्रह का उदय व्यापार, संचार, बुद्धि, शिक्षा, लेखन आदि क्षेत्रों में सक्रियता लाता है. अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह बलहीन है, तो इस दिन बुध स्तोत्र, ओम बुधाय नमः मंत्र का जप करें. गौरी पूजन, हरित द्रव्य का दान (हरा वस्त्र, मूंग आदि) करें.
पंचक काल प्रारंभ
9 अगस्त के दिन भद्रा का साया तो नहीं रहेगा लेकिन 5 दिन का पंचक काल प्रारंभ हो रहा है. शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है, जो ज्योतिष शास्त्र में अशुभ माना जाता है. पंचक का अर्थ है चंद्रमा का धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में भ्रमण. पंचक काल में कोई भी शुभ व मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं. साथ ही इन 5 दिनों में घर बनाना, लकड़ी का काम करवाना आदि कार्य नहीं करने चाहिए.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 06 अगस्त 2025)
6 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- यात्रा में कष्ट, व्यापार बाधा, लाभ होगा, पारिवारिक समस्या उलझती जायेंगी।
वृष राशि :- शत्रु भय, रोग, स्वजन सुख, लाभ, शिक्षा व लेखन कार्यों में सफलता, प्रगति का योग हैं।
मिथुन राशि :- वाहन भय, यात्रा कष्ट, अस्थिरता व अशांति का वातावरण रहेगा, कार्य पर ध्यान दें।
कर्क राशि :- सफलता व उन्नति, शुभ कार्य, विवाद, राजकार्य व मामलें मुकदमें में स्थिति ठीक रहेगी।
सिंह राशि :- शरीर कष्ट, आय-व्यय, कार्य में सफलता, आर्थिक सुधार, अर्थ लाभ के कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- खर्च विवाद, स्त्रीकष्ट, विद्या लाभ, धीरे-धीरे सुधार के साथ आर्थिक लाभ होगा।
तुला राशि :- यात्रा से हानि, राजलाभ, शरीर कष्ट तथा खर्च की यात्रा कष्ट दायक होगी।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में लाभ, यात्रा संपत्ति लाभ, व्यापार में सुधार, खर्च होगा।
धनु राशि :- अल्प लाभ, चोट अग्नि, शरीर भय, यात्रा से मानसिक परेशानी अपवाद बनेंगा।
मकर राशि :- शत्रु से हानि, अपव्यय, शारीरिक सुख में कमी, व्यवस्थाओं में कमी का अनुभव होगा।
कुंभ राशि :- शुभ व्यय, संतान सुख कार्य में सफलता, उत्साह वृद्धि होगी, कार्य बनेंगे।
मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय लाभ, धन हानि, अधिकारियों से मन मुटाव की स्थिति बनेगी।
मां लक्ष्मी को पसंद है ये पौधा, घर में इस तरह से लगाएं, धन की होगी बरसात, कभी खाली नहीं होगी तिजोरी
5 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिले में अब एक नए पौधे की मांग बढ़ गई है. इस पौधे को यहां के लोग कुबेर का पौधा भी कहते हैं. फिलहाल जिले की सभी नर्सरी में इस पौधे की मांग बढ़ गई है. लेकिन लोगों को नर्सरी में जब यह पौधा नहीं मिलता है तो यूपी के शहरों की नर्सरी में जाकर इस पौधे को ला रहे हैं.
एक समय था जब घर,ऑफिस और दुकानों में मनी प्लांट का पौधा दिखता था, लेकिन छतरपुर में अब एक नया पौधा देखने को मिल रहा है. बता दें, इस पौधे को क्रासुला, जेड प्लांट या मनी ट्री नाम से भी जाना जाता है.
कि इसे वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसकी मोटी, गोल पत्तियां सिक्कों की तरह दिखती हैं, जो इसे आर्थिक लाभ से जोड़ती हैं. इसे घर या दफ्तर के प्रवेश द्वार पर रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और धन की वृद्धि होती है.
क्रासुला प्लांट कम देखभाल की आवश्यकता वाला पौधा है, जो सूखे को सहन कर सकता है और लंबे समय तक हरा-भरा रहता है. इसलिए, क्रासुला का पौधा घर या कार्यालय में लगाने से सुख और समृद्धि का वास होता है. इसे उत्तर या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है.
वास्तु शास्त्र और फेंगशुई के अनुसार, क्रासुला का पौधा धन और समृद्धि लाने के लिए घर या कार्यालय की उत्तर या दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है.
उत्तर दिशा को कुबेर, धन के देवता की दिशा मानी जाती है. जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा को लक्ष्मी, समृद्धि की देवी से जोड़ा जाता है. इन दिशाओं में क्रासुला का पौधा लगाने से आर्थिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है.
क्रासुला रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जिससे मानसिक तनाव और चिंता में कमी आती है. यह पौधा वातावरण को सुखद और ताजगी भरा बनाता है. इसके अलावा, इसकी सुंदरता और आकार इसे घर या ऑफिस की सजावट के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाते हैं. इन सभी फायदों के कारण, क्रासुला का पौधा न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक और भौतिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है.
क्रासुला पौधे की कीमत की बात करें तो अलग-अलग नर्सरी के अनुसार इसका प्राइस होता है. इसके अलावा पौधे की साइज के अनुसार भी प्राइस अलग- अलग देखने को मिल जाते हैं. क्रॉसुला के एक पौधे की कीमत 150 से 250 रुपए होती है.
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