धर्म एवं ज्योतिष
15 अगस्त 2025 का राशिफल: जानिए आज का दिन आपके लिए क्या खास लेकर आया है
16 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- धन लाभ एवं योजनाएं फलीभूत हों, कार्य कुशलता से पूर्ण संतोष अवश्य होगा, ध्यान रखें।
वृष :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, समय स्थिति का ध्यान रखें।
मिथुन :- मनोबल उत्साह वर्धक रहे, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
कर्क :- मनोबल संवेदनशील रहे, भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्य कुशलता से संतोष व्यवसाय अनुकूल होगा।
कन्या :- इष्ट मित्रों से मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, समय पर सोचे कार्य पूर्ण हो जायेंगे
तुला :- कुटुम्ब की समस्याओं में धन व्यय होगा तथा भ्रमणशील स्थिति बनी रहेगी।
वृश्चिक :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, सफलता के साधन बने, इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे, कार्य बनेंगे।
धनु :- धन लाभ, अधिकारियों से मेल मिलाप होगा, कार्य कुशलता स्थिति अच्छी सुलभ हो जायेगी।
मकर :- कार्यवृत्ति में सुधार, स्थिति में नियंत्रण रखें, स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास अवश्य ही होगा।
कुम्भ :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी, कार्य अवरोध संभव होगा।
मीन :- प्रयास सफल हों, इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, दैनिक कार्य उत्तम, सफलता अवश्य मिलेगी।
आर्थिक तंगी को मार भगाएंगे ये तीन ट्रिक, जन्माष्टमी पर जरूर आजमाएं, अब यही आखिरी रास्ता
15 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार. आर्थिक तंगी पीछा नहीं छोड़ रही या कर्जदार घर के चक्कर लग रहे हैं, अगर आप इसे लेकर मानसिक रूप से परेशान हैं तो जन्माष्टमी के दिन कुछ खास उपाय करने पर इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा. धार्मिक ग्रंथो में अनेक उपायों का वर्णन किया गया है, जिनको करने से संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है. साल 2025 में जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त शनिवार को होगा. इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा अर्चना करते हुए भजन कीर्तन के माध्यम से उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन कुछ खास उपाय करने पर आर्थिक तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है और लक्ष्मी का आगमन होता है.
हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष पर्वों में से एक है. इस दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही कृष्ण भगवान के भजन कीर्तन, पूजा पाठ, आराधना आदि शुरू कर दी जाती है. रात के 12:00 बजते ही उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. जन्माष्टमी के दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो जीवन से आर्थिक तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है.
उपाय-1
जन्माष्टमी के दिन दक्षिणवर्ती शंख और पीले फूल (गेंदे के फूल) घर लाएं. सबसे पहले दक्षिणवर्ती शंख में गंगाजल भरकर उससे लड्डू गोपाल या श्री कृष्ण भगवान की मूर्ति का जलाभिषेक करें. ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि, खुशहाली और धन का आगमन होता है. परिवार के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है. पीले फूलों की माला बनाकर कृष्ण भगवान की मूर्ति पर अर्पित करने से दरिद्रता का नाश, संबंधों में मधुरता, धन आगमन में सभी रुकावटें खत्म हो जाती हैं.
उपाय-2
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन ताम्बूल यानी पान का पत्ता कृष्ण भगवान को अर्पित करें. इसके बाद पान के पत्ते पर रोली से “श्री” लिखकर कृष्ण भगवान का भजन कीर्तन, उनकी पूजा आराधना, स्तोत्र आदि का पाठ करें. इस पान के पत्ते को अपने धन वाले स्थान पर रखें. ऐसा करने से धन संबंधी सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. पान के पत्ते पर श्री लिखकर धन वाले स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है और कृष्ण भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है.
उपाय-3
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन चांदी या दूसरी धातु की बांसुरी घर लाएं और कृष्ण भगवान को अर्पित करके उनकी पूजा अर्चना, आराधना, भजन कीर्तन आदि का पाठ करें. इसके बाद इस बांसुरी को अपने पर्स या अपनी तिजोरी में रखें. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. उम्रभर के लिए आर्थिक तंगी खत्म हो जाएगी.
मटकी फोड़ से लेकर कृष्ण लीला तक… उदयपुर में जन्माष्टमी का महा उत्सव! जानें क्या होगा खास?
15 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उदयपुर. झीलों की नगरी में इस बार जन्माष्टमी उत्सव तीन दिन तक धूमधाम से मनाया जाएगा. शहर के जगदीश मंदिर, इस्कॉन जगन्नाथ मंदिर और अन्य प्रमुख मंदिरों में 15 से 17 अगस्त तक विशेष आयोजन होंगे. वहीं शहर के चार प्रमुख स्थानों पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी. 16 अगस्त को सुभाष चौक, 17 अगस्त को जगदीश चौक और 18 अगस्त को हिरण मंगरी क्षेत्र में विशाल मटकी फोड़ आयोजन होगा.
गंगूकुंड स्थित इस्कॉन जगन्नाथ मंदिर में 15 अगस्त से तीन दिवसीय विशाल जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत होगी. मुख्य कार्यक्रम 16 अगस्त को प्रातः मंगला आरती से प्रारंभ होकर रात 12:15 बजे महा आरती तक चलेगा. इस दिन आने वाले सभी भक्तों को फलाहारी प्रसाद वितरित किया जाएगा. मंदिर अध्यक्ष मायापुर वासी प्रभु ने बताया कि शाम 6 बजे से हरिनाम संकीर्तन, भजन और कथा के बाद इस्कॉन के बच्चों द्वारा कृष्ण लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी.
जन्माष्टमी महोत्सव की विशेष झलकियां
रात 8:30 बजे राधा-कृष्ण की शोभायात्रा के साथ भगवान को मुख्य मंच पर विराजमान कराया जाएगा, जिसके बाद गंगाजल, पंचामृत और नारियल जल से अभिषेक किया जाएगा. पुष्पों की वर्षा के साथ भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाएगा. इस अवसर पर पूना के श्यामानंद गौर प्रभु, दिल्ली के असित प्रभु और वृंदावन के दामोदर हरि प्रभु के श्रीमुख से कथा श्रवण का अवसर मिलेगा. मंदिर में भक्तों के हाथों से तैयार दस हजार से अधिक शुद्ध व्यंजनों का छप्पन भोग लगाया जाएगा, जो एक कीर्तिमान होगा.
सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष तैयारियां
15 अगस्त की शाम 4 से 8 बजे तक स्वतंत्रता दिवस थीम पर शिक्षाप्रद धार्मिक नाटिकाएं, जादू शो और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित होगी. इस दौरान बच्चों का मटकी फोड़ कार्यक्रम भी होगा, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा. वहीं 17 अगस्त को सुबह 9 बजे से नंदोत्सव और संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद की व्यास पूजा, कथा व अभिषेक आरती होगी. मंदिर को अंदर-बाहर रंग-बिरंगी फूलमालाओं, बंदनवार और लाइटिंग से सजाया जा रहा है. पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग दर्शन व्यवस्था, पार्किंग की सुविधा सत्यम गार्डन और सांवरिया गार्डन में रहेगी. 300 सेवकों की टीमें आयोजन को सफल बनाने में जुटी हैं.
आज का राशिफल (15 अगस्त 2025): किस राशि की चमकेगी किस्मत, किसे करना होगा सतर्क?
15 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- भाग्य का सितारा साथ देगा, इष्ट मित्र सहयोगी होंगे, रुके कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
वृष :- इष्ट मित्र सुख वर्धक हों, मनोबल बनाये रखें, उत्साह हीनता से हानि अवश्य ही होगी।
मिथुन :- इष्ट मित्रों से परेशानी, कष्ट व अशांति, दैनिक कार्यगति अनुकूल अवश्य ही बनेगी।
कर्क :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, समृद्धि के साधन अवश्य जुटायें।
सिंह :- कार्यगति अनुकूल हो, सामाजिक प्रभुत्व वृद्धि एवं प्रतिष्ठा अवश्य ही बढ़ेगी।
कन्या :- कुटुम्ब की परेशानी, चिन्ता, व्यग्रता तथा उद्विघ्नता से बचिये, कार्य अवरोध होगा।
तुला :- धन हानि, शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी, व्यर्थ भ्रमण, धन का व्यय संभावित होवेगा।
वृश्चिक :- इष्ट मित्र सुखवर्धक हों, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद अवश्य ही होगा।
धनु :- कार्य कुशलता से संतोष, दैनिक समृद्धि के साधन अवश्य ही बनेंगे, समय का ध्यान रखें।
मकर :- दैनिक कार्यगति में सुधार, योजना फलीभूत होंगी, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
कुम्भ :- विशेष कार्यगति स्थिगित रखें, दैनिक मानसिक विभ्रम, किन्तु उद्विघ्नता से बचिये।
मीन :- कार्य विफलता, सफलता मेहनत करने पर भी दिखाई न दे, कार्य अवरोध होगा।
कैसे चक्र और यंत्र खोलते हैं भविष्य के द्वार? जानिए सटीक उपाय
14 Aug, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म के अनेक ग्रंथों में कई तरह के चक्रों और यंत्रों के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है। जिनमें राम शलाका प्रश्नावली, हनुमान प्रश्नावली चक्र, नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र, श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र आदि प्रमुख हैं। कहते हैं इन चक्रों और यंत्रों की सहायता से लोग अपने मन में उठ रहे सवालों, जीवन में आने वाली कठिनाइयों आदि का समाधान पा सकते हैं। इन चक्रों और यंत्रों की सहायता लेकर केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि ज्योतिष और पुरोहित लोग भी सटीक भविष्यवाणियां तक कर देते हैं।
श्री राम शलाका प्रश्नावली
श्री राम शलाका प्रश्नावली का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में प्राप्त होता है। यह राम भक्ति पर आधारित है। इस प्रश्नावली का प्रयोग से लोग जीवन के अनेक प्रश्नों का जवाब पाते हैं। इस प्रश्नावली का प्रयोग के बारे कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए किसी सवाल को मन में अच्छी तरह सोच लिया जाता है।फिर शलाका चार्ट पर दिए गए किसी भी अक्षर पर आंख बंद कर उंगली रख दी जाती है। जिस अक्षर पर उंगली रखी जाती है, उसके अक्षर से प्रत्येक 9वें नम्बर के अक्षर को जोड़ कर एक चौपाई बनती है, जो प्रश्नकर्ता के प्रश्न का उत्तर होती है।
हनुमान प्रश्नावली चक्र
यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि हनुमानजी एक उच्च कोटि के ज्योतिषी भी थे। इसका कारण शायद यह हो सकता है कि वे शिव के ग्यारहवें अंशावतार थे, जिनसे ज्योतिष विद्या की उत्पत्ति हुई मानी जाती है। कहते हैं, हनुमानजी ने ज्योतिष प्रश्नावली के 40 चक्र बनाए हैं। यहां भी प्रश्नकर्ता आंख मूंद कर चक्र के नाम पर उंगली रखता है। अगर उंगली किसी लाइन पर रखी गई होती है, तो दोबारा उंगली रखी जाती है। फिर नाम के अनुसार शुभ-अशुभ फल का निराकरण किया जाता है। कहते हैं। रामायण काल के परम दुर्लभ यंत्रों में हनुमान चक्र श्रेष्ठ यंत्रों का सिरमौर है।
नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र
अनेक लोग, विशेष देवी दुर्गा के परम भक्त, यह मानते हैं कि नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र एक चमत्कारिक चक्र है, जिसे के माध्यम से कोई भी अपने जीवन की समस्त परेशानियों और मन के सवालों का संतोषजनक हल आसानी से पा सकते हैं। इस चक्र के उपयोग की विधि के लिए पहले पांच बार ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करना पड़ता फिर एक बार या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: मंत्र का जप कर, आंखें बंद करके सवाल पूछा जाता है और देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक दिया जाता है, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र
हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश प्रथमपूज्य हैं। वे सभी मांगलिक कार्यों में सबसे पहले पूजे जाते हैं। उनकी पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र के माध्यम से भी लोग अपने जीवन की सभी परेशानियों और सवालों के हल जानने की कोशिश करते हैं। जिसे भी अपने सवालों का जवाब या परेशानियों का हल जानना होता है, वे पहले पांच बार ऊँ नम: शिवाय: और फिर 11 बार ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करते हैं और फिर आंखें बंद करके अपना सवाल मन में रख भगवान गणेश का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
शिव प्रश्नावली यंत्र
इस यंत्र में भगवान शिव के एक चित्र पर 1 से 7 तक अंक दिए गए होते हैं। श्रद्धालु अपनी आंख बंद करके पूरी आस्था और भक्ति के साथ शिवजी का ध्यान करते हैं और और मन ही मन ऊं नम: शिवाय: मंत्र का जाप कर उंगली को शिव यंत्र पर घुमाते हैं और फिर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है। इन प्रश्नावलियों और यंत्रों के अलावा अनेक लोग साईं प्रश्नावली का उपयोग भी अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब पाने के लिए करते हैं।
शिव के अनन्य भक्त नंदी: क्यों होती है हर शिवलिंग के सामने उनकी स्थापना?
14 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव के किसी भी मंदिर में शिवलिंग के आसपास एक नंदी बैल जरूर होता है क्योंो नंदी के बिना शिवलिंग को अधूरा माना जाता है। इस बारे में पुराणों की एक कथा में कहा गया है शिलाद नाम के ऋषि थे जिन्होंशने लम्बेी समय तक शिव की तपस्या की थी। जिसके बाद भगवान शिव ने उनकी तपस्यात से खुश होकर शिलाद को नंदी के रूप में पुत्र दिया था।शिलाद ऋषि एक आश्रम में रहते थे। उनका पुत्र भी उन्हींं के आश्रम में ज्ञान प्राप्तर करता था। एक समय की बात है शिलाद ऋषि के आश्रम में मित्र और वरुण नामक दो संत आए थे। जिनकी सेवा का जिम्माा शिलाद ऋषि ने अपने पुत्र नंदी को सौंपा। नंदी ने पूरी श्रद्धा से दोनों संतों की सेवा की। संत जब आश्रम से जाने लगे तो उन्होंरने शिलाद ऋषि को दीर्घायु होने का आर्शिवाद दिया पर नंदी को नहीं।
इस बात से शिलाद ऋषि परेशान हो गए। अपनी परेशानी को उन्होंिने संतों के आगे रखने की सोची और संतों से बात का कारण पूछा। तब संत पहले तो सोच में पड़ गए। पर थोड़ी देर बाद उन्होंलने कहा, नंदी अल्पायु है। यह सुनकर मानों शिलाद ऋषि के पैरों तले जमीन खिसक गई। शिलाद ऋषि काफी परेशान रहने लगे।
एक दिन पिता की चिंता को देखते हुए नंदी ने उनसे पूछा, ‘क्या बात है, आप इतना परेशान क्योंे हैं पिताजी।’ शिलाद ऋषि ने कहा संतों ने कहा है कि तुम अल्पायु हो। इसीलिए मेरा मन बहुत चिंतित है। नंदी ने जब पिता की परेशानी का कारण सुना तो वह बहुत जोर से हंसने लगा और बोला, ‘भगवान शिव ने मुझे आपको दिया है। ऐसे में मेरी रक्षा करना भी उनकी ही जिम्मेलदारी है, इसलिए आप परेशान न हों।’
नंदी पिता को शांत करके भगवान शिव की तपस्या करने लगे। दिनरात तप करने के बाद नंदी को भगवान शिव ने दर्शन दिए। शिवजी ने कहा, ‘क्या इच्छा् है तुम्हावरी वत्स’. नंदी ने कहा, मैं ताउम्र सिर्फ आपके सानिध्य में ही रहना चाहता हूं। नंदी से खुश होकर शिवजी ने नंदी को गले लगा लिया। शिवजी ने नंदी को बैल का चेहरा दिया और उन्हें अपने वाहन, अपना मित्र, अपने गणों में सबसे उत्ताम रूप में स्वीकार कर लिया।इसके बाद ही शिवजी के मंदिर के बाद से नंदी के बैल रूप को स्था पित किया जाने लगा।
सनातन धर्म में तुलसी से जुड़ी है कई मान्यताएं
14 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसके अलावा, तुलसी को लेकर तमाम मान्यताएं भी हैं। , तुलसी के पास छिपकली का दिखना शुभ संकेत है। माना जाता है कि, यदि तुलसी के पौधे के पास छिपकली दिखाई देती तो इसका मतलब है कि धन-लाभ और समृद्धि हो सकती है।
यह घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाने वाला माना जाता है। इसके अलावा तुलसी के पौधे के पास छिपकली का दिखना घर में सकारात्मक ऊर्जा के बढ़ने और अच्छे समय के आगमन का प्रतीक माना जाता है। अगर तुलसी पर छिपकली दिखाई दे और वह सुरक्षित रूप से चली जाए, तो इसे शुभ माना जाता है और यह संकेत करता है कि आपकी मनोकामनाएं पूरी होने वाली हैं। कुछ संस्कृतियों में, छिपकली को बुरी शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है। इसलिए, तुलसी के पास छिपकली का दिखना घर और परिवार की सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लेकिन यदि छिपकली बार-बार तुलसी के पौधे पर आती दिखे, तो यह घर में कलह या विवाद का संकेत हो सकता है। तुलसी में मंजरी आने का मतलब है कि जीवन में आने वाले संकटों से निजात मिलेगी। इसके लिए तुलसी की मंजरी को लाल कपड़े में बांधकर अपने घर के उस स्थान पर रख दें, जहां आप अपना धन रखते हैं। ऐसा करने से आपके घर में मां लक्ष्मी का वास होगा.
इस प्रकार मिलेगी प्रेम में सफलता
14 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जीवन में प्रेम का भी अहम स्थान होता है पर कई लोगों को यह नहीं मिलता। ऐसे लोगों के लिए यहां प्रस्तुत हैं कुछ उपाय। यह तो सभी जानते हैं कि शरद रितु प्रेम के लिए उत्तम मानी गई है, ऐसे में प्रेम के देवता भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसी समय महारास रचाया था। इस रितु का चंद्रमा आपको मनचाहे प्रेम का वरदान देता प्रतीत होता है। इसलिए प्रेम चाहने वाले यदि यह उपाय करें तो वो सफल अवश्य ही होंगे।
शाम के समय राधा-कृष्ण की उपासना करें।
दोनों को संयुक्त रूप से एक गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें।
मध्य रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करके चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
इसके बाद ॐ राधावल्लभाय नमः मंत्र का कम से कम 3 माला जाप करें।
या मधुराष्टक का कम से कम 3 बार पाठ करें।
फिर मनचाहे प्रेम को पाने की प्रार्थना करें।
भगवान को अर्पित की हुई गुलाब की माला को अपने पास सुरक्षित रख लें।
इन उपायों से निश्चित ही मनचाहे प्रेम की प्राप्ति होती है और सभी संबंधों में प्रेम और लगाव बढ़ने लगता है।
तिरुपति से जुड़ी हैं कई मान्यताएं
14 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के ऐतिहासिक और सबसे अमीर मंदिरों में से एक है तिरुपति बालाजी मंदिर है। तिरुपति महाराज जी के दरबार में देश-विदेश के भक्तों की भीड़ रहती है। यहां अमीर और गरीब दोनों जाते हैं। हर साल लाखों लोग तिरुमाला की पहाडिय़ों पर उनके दर्शन करने आते हैं। तिरुपति के इतने प्रचलित होने के पीछे कई कथाएं और मान्यताएं हैं। इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी हैं।
माना जाता है कि तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं।
तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी।
मान्यता है कि बालरूप में एक बार बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था। इसके बाद से ही बालाजी की प्रतिमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ।
कहते हैं कि बालाजी के सिर रेशमी बाल हैं और उनके रेशमी बाल कभी उलझते नहीं।
कहते हैं कि तिरुपति बालाजी मंदिर से करीब करीब 23 किलोमीटर दूर एक से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं। इतना ही नहीं वहीं से भगवान को चढ़ाई जाने वाली दूसरी वस्तुएं भी आती हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि वास्तव में बालाजी महाराज मंदिर में दाएं कोने में विराजमान हैं, लेकिन उन्हें देख कर ऐसा लगता है मानों वे गर्भगृह के मध्य भाग में हों।
तिरुपति बालाजी मंदिर में बालाजी महाराज को रोजाना धोती और साड़ी से सजाया जाता है।
कहते हैं कि बालाजी महाराज की मूर्ती की पीठ पर कान लगाकर सुनने से समुद्र घोष सुनाई देता है और उनकी पीठ को चाहे जितनी बार भी क्यों न साफ कर लिया जाए वहां बार बार गीलापन आ जाता है।
14 अगस्त 2025 राशिफल: कैसा रहेगा आपका दिन? जानें प्रेम, करियर और स्वास्थ्य का हाल
14 Aug, 2025 12:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- कार्यकुशलता एवं समृद्धि के योग, फलप्रद हो तथा उत्साह से कार्य बनेंगे, धैर्य से कार्य करें।
वृष :- कार्य तत्परता से लाभ होगा एवं इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे रुके कार्य तत्काल बना लेवें।
मिथुन :- व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि, कार्य कुशलता से संतोष, बिगड़े कार्य शनै: शनै: बन जायेंगे।
कर्क :- धन सोचसमझा कर खर्च करें अन्यथा हानि की संभावना होगी, मानसिक विभ्रम-भय क्लेश होगा।
सिंह :- समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थिगित रखें, लेनदेन के मामले में हानि हो सकती है।
कन्या :- मानसिक विभ्रम के कारण किसी आरोप में फंस सकते हैं, सतर्कता से कार्य अवश्य करेंगे।
तुला :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, कार्य अवश्य बनेंगे, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
वृश्चिक :- कार्य कुशलता से संतोष, कार्य योजना फलीभूत होगी, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
धनु :- धन लाभ, सफलता के साधन जुटायें, आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा, ध्यान अवश्य रखें।
मकर :- आरोप प्रत्यारोप व क्लेश संभव, धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
कुम्भ :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, स्त्री शरीर कष्ट, चिन्ता व असमंजस से बचकर चलें।
मीन :- इष्ट मित्र सहायक रहें, दैनिक कार्य में अनुकूलता बनेगी, ध्यान रखकर कार्य करें, कार्य उत्तम होगा।
हलषष्ठी क्यों मनाई जाती है? श्रीकृष्ण से इस व्रत का क्या संबंध
13 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में तीज-त्योहारों और व्रत पूजन का विशेष महत्व है. होली-दिवाली और जन्माष्टमी की तरह हल षष्ठी का व्रत भी इनमें से एक है. इसे हल छठ, हर छठ या ललही छठ व्रत के नाम से भी जानते हैं. यह व्रत भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के लिए रखा जाता है. बता दें कि, हल षष्ठी व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है. हल षष्ठी का व्रत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से ठीक पहले रखा रहा है. इस दिन माताएं अपनी संतान के सुखी जीवन और दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं. अब सवाल है कि आखिर हलषष्ठी क्यों मनाई जाती है? इस बार कब है हरछठ का व्रत? श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का हल षष्ठी का क्या संबंध? आइए जानते हैं इस बारे में-
हल षष्ठी का व्रत कब रखा जाएगा
ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल हल षष्ठी 14 अगस्त दिन गुरुवार को है. पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 14 अगस्त को प्रात:काल में 4 बजकर 23 मिनट से प्रारंभ है, जो 15 अगस्त शुक्रवार को मध्य रात्रि 2 बजकर 7 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, हल षष्ठी 14 अगस्त को मनाना शास्त्र सम्मत है.
क्यों मनाई जाती है हल षष्ठी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हलषष्ठी का पर्व भगवान बलराम के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. बता दें कि, द्वापर युग में भाद्रपद कृष्ण षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था. इसलिए इस तिथि को बलराम जयंती भी कहते हैं. हल षष्ठी के दिन बलराम जी और छठ मैय्या की पूजा करने का विधान है. बलराम जी का शस्त्र हल था, इसलिए उनको हलधर कहते थे. षष्ठी के दिन जन्म और शस्त्र हल होने से दोनों को मिलाकर हल षष्ठी बना है. हल षष्ठी को हर छठ या हल छठ भी कहते हैं.
त्योहार से जुड़ी मान्यताएं
हलषष्ठी का पर्व कृषि से भी जुड़ा है, क्योंकि बलराम जी को कृषि और बल का प्रतीक माना जाता है. इस दिन, महिलाएं हल से जुती हुई चीजों का सेवन नहीं करती हैं, जैसे कि तालाब में उगाया गया चावल या महुआ. वहीं, कुछ क्षेत्रों में, इस दिन भगवान शिव के परिवार (शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय) की भी पूजा की जाती है.
दुर्गा चालीसा पढ़ने से होते हैं 12 फायदे, संकटों से रक्षा करती हैं मां दुर्गा, शत्रु, दुख, दरिद्रता का होगा नाश
13 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुर्गा चालीसा की शुरूआत नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी, से होता है. शुक्रवार व्रत, दुर्गाष्टमी और नवरात्रि के समय में दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है. दुर्गा चालीसा में आदिशक्ति मां दुर्गा की महिमा का वर्णन किया गया है. जो लोग नियमित तौर पर या फिर शुक्रवार व्रत, दुर्गाष्टमी और नवरात्रि में दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं, उनके 12 फायदे होते हैं. इतना ही नहीं मां दुर्गा उस व्यक्ति की संकटों से रक्षा करती हैं. उसके दुखों को दूर करती हैं. आइए जानते हैं दुर्गा चालीसा पढ़ने के फायदे के बारे में.
दुर्गा चालीसा पढ़ने के फायदे
1. दुर्गा चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है. व्यक्ति के मन और उसके घर दोनों जगहों की नकारात्मकता दूर होती है.
2. जिस शक्ति की जरूरत होती है, उसे दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए. मां दुर्गा शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं.
3. दुर्गा चालीसा पढ़ने से व्यक्ति को मां दुर्गा की भक्ति प्राप्त होती है. मां दुर्गा की कृपा से परिवार में सुख और शांति आती है.
4. जो दुर्गा चालीसा का पाठ करता है, उसके अंदर से हर प्रकार का भय, असुरक्षा मिट जाता है. उसके मनोबल और साहस में वृद्धि होती है. उसका पराक्रम बढ़ता है.
5. शत्रुओं से सुरक्षा प्राप्ति के लिए भी दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है. मां दुर्गा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं.
6. धन संकट को दूर करने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए भी दुर्गा चालीसा पढ़ते हैं. लक्ष्मी स्वरूपा मां दुर्गा की कृपा से धन, संपत्ति, समृद्धि की प्राप्ति होती है. दरिद्रता मिट जाती है.
7. रोग, सेहत में सुधार के लिए भी लोग मां दुर्गा की पूजा करते हैं. दुर्गा चालीसा का पाठ इसमें सहायक होता है.
8. दुर्गा चालीसा पढ़ने से मन शांत और स्थिर होता है. चिंता और अवसाद दूर होता है. शंका, बेचैनी जैसी नकारात्मकता मिटती है.
9. घर में कलह, अशांति, वाद विवाद की स्थिति को दूर करने के लिए दुर्गा चालीसा पढ़ते हैं.
10. जो लोग दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं, उन पर नवदुर्गा की कृपा होती है. उनको सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है.
11. मां दुर्गा अन्नपूर्णा हैं. जो दुर्गा चालीसा पढ़ता है, उसके घर में कभी अन्न्, धन और धान्य की कोई कमी नहीं होती है.
12. दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥ दुर्गा चालीसा पढ़ने वालों को सभी प्रकार के सुख और भोग प्राप्त होते हैं.
भगवान विष्णु की पत्नी के इन 12 नाम लेने से पूर्ण होंगे सभी काम, घर आएगी सुख और समृद्धि
13 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी के हर दिन नाम जप करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. माता लक्ष्मी के 12 नाम का जप करने के अनेक आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ बताए गए हैं, जो शास्त्रों और अनुभव दोनों से सिद्ध हैं. लक्ष्मी जी को धन, वैभव और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है और उनके 12 नाम का श्रद्धा से जप करने से घर में आर्थिक स्थिरता आती है और आय के नए अवसर खुलते हैं. आइए जानते हैं माता लक्ष्मी के 12 नाम का जप करने के फायदे…
माता लक्ष्मी के 12 नाम जप करने के फायदे
देवी लक्ष्मी के हर दिन 12 नाम जप करने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और ग्रहों का भी शुभ फल प्राप्त होता है. लक्ष्मी जी का नाम सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे घर-परिवार में सुख, शांति और आपसी प्रेम बढ़ता है. साथ ही आर्थिक रुकावटें कम होती हैं और पुराने कर्ज से छुटकारा मिलने की संभावना बढ़ती है. माता लक्ष्मी के नामजप से मन एकाग्र होता है और जीवन में आशा तथा आत्मबल का संचार होता है. व्यक्ति को लगता है कि वह देवी की कृपा में सुरक्षित और संरक्षित है.
माता लक्ष्मी के 12 नाम
ईश्वरी
कमला
लक्ष्मी
चला
भूति
हरिप्रिया
पद्मा
पद्मालया
संपद्
रमा
श्री
पद्मधारिणी
माता लक्ष्मी के मंत्र
महालक्ष्मी मूल मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
लक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे
विष्णुपत्नी च धीमहि
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्
अष्टलक्ष्मी मंत्र
ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः
ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः
ॐ धैर्यलक्ष्म्यै नमः
ॐ गजलक्ष्म्यै नमः
ॐ संतानलक्ष्म्यै नमः
ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः
ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः
ॐ धनलक्ष्म्यै नमः
कनकधारा स्तोत्र मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को लगाएं ये खास भोग, कान्हा खुद पधारेंगे आपके घर
13 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भक्ति, उल्लास और आस्था का जीवंत प्रतीक है. यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए पूजन और भोग से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होकर अपने भक्तों के घर पधारते हैं, और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. शास्त्रों और पुराणों में पंचामृत का विशेष महत्व बताया गया है. पंचामृत पांच पवित्र तत्वों दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल के मिश्रण से बनाया जाता है. इसे न केवल भोग के रूप में, बल्कि भगवान को स्नान कराने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराने की परंपरा है, जिसके बाद इसे प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया जाता है.
पंचामृत के भोग का लाभ
बागेश्वर के पंडित कैलाश उपाध्याय ने लोकल 18 को बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार पंचामृत का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है. दूध और दही शरीर को ठंडक और पोषण देते हैं, घी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. शहद ऊर्जा का स्रोत है, और गंगाजल पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. पंचामृत बनाते समय पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसे तैयार करते समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनना, मन में भगवान का ध्यान रखना और शुद्ध पात्रों का प्रयोग करना आवश्यक है. परंपरागत रूप से चांदी या पीतल के पात्र में पंचामृत बनाना शुभ माना जाता है.
बागेश्वर में जन्माष्टमी की धूम
जन्माष्टमी के दिन पंचामृत से लड्डू गोपाल का अभिषेक करने के बाद, उन्हें फूल, माखन-मिश्री, सूखे मेवे और ताजे फलों का भोग लगाया जाता है. इसके बाद रात 12 बजे, जो श्रीकृष्ण का जन्म समय माना जाता है. भजन-कीर्तन और आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है. पूजा के बाद भक्त पंचामृत को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. जिसे सौभाग्य और आशीर्वाद प्राप्ति का माध्यम माना जाता है. इस बार जन्माष्टमी पर बागेश्वर के कई मंदिरों में विशेष पंचामृत महाभिषेक की तैयारियां चल रही हैं. मंदिरों को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जा रहा है. श्रद्धालु बड़े उत्साह से पंचामृत और अन्य भोग की व्यवस्था कर रहे हैं.
कि आपके घर में भगवान का आशीर्वाद स्थायी रूप से बना रहे, तो पंचामृत का भोग अवश्य लगाएं और प्रसाद स्वरूप परिवार के सभी सदस्यों को ग्रहण कराएं. आस्था और परंपरा का यह संगम न केवल धार्मिक अनुभूति कराता है, बल्कि परिवार और समाज में एकता, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है. इसलिए इस जन्माष्टमी पर पंचामृत का भोग लगाकर आप भी भगवान कृष्ण की कृपा के अधिकारी बन सकते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 13 अगस्त 2025)
13 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे, प्रयास जारी रखें, प्रयत्नशीलता व सफलता से लाभ होगा।
वृष :- समय पर सोचे हुए कार्य निपटा लेवें, कार्य तत्परता से लाभ अवश्य ही होगा।
मिथुन :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी तथा कार्य में संतोष हो।
कर्क :- परीक्षा से सफलता सम्भव है, सामर्थ्य के अनुसार प्रयास अवश्य करें, लाभ होगा।
सिंह :- कार्यवृत्ति में सुधार, चिन्ताऐं कम हों, सफलता के साधन जुटायें, कार्य निपटा लेवें।
कन्या :- परिश्रम करने पर भी सफलता दिखायी न दे, स्त्री वर्ग से तनाव तथा कष्ट होगा।
तुला :- कुछ लोगों से मेल मिलाप फलप्रद हो, क्षमता अनुकूल रहे, रुके कार्य अवश्य होंगे।
वृश्चिक :- स्वास्थ्य नरम रहे, चोट आदि का भय, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्य अवश्य बन जायेंगे।
धनु :- कार्यकुशलता से संतोष, दैनिक कार्यगति में सुधार होगा, कार्य बन ही जायेंगे।
मकर :- मनोबल उत्साहवर्धक हो, मित्रों से परेशानी, किसी धोखें से बचकर रहें।
कुम्भ :- कार्य व्यवसाय गति मंद होते हुए साधन सफलता अवश्य बनी ही रहेगी।
मीन :- विघटनकारी तत्वों से परेशानी होगी, अनायास कुछ बाधायें सम्भव हैं।
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