धर्म एवं ज्योतिष
इसे लगाकर ही करनी चाहिए देवी-देवताओं की आराधना, वरना अधूरा रह जाता है पूजा-हवन का फल!
22 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है. कहते हैं कि पूजा-पाठ करने से मन शांत रहता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव मानव जीवन पर नहीं पड़ता है. इसके साथ ही जीवन में देवी-देवताओं की कृपा से सुख-समृद्धि की भी वृद्धि होती है. वहीं पूजा-पाठ के समय कई ऐसी परंपराएँ निभाई जाती हैं जो सदियों से चली आ रही हैं, जैसे घंटी या शंख बजाना, तिलक लगाना आदि. सनातन धर्म में तिलक धारण करना बेहद महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है.
चाहे वह किसी भी संप्रदाय के लोग हों, तिलक अवश्य धारण करना चाहिए. लेकिन आपके मन में भी एक न एक बार यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर पूजा-पाठ से पहले तिलक क्यों धारण किया जाता है. इस सवाल का जवाब जानते हैं बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी जी से.
क्या कहते हैं बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित
बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने लोकल18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि घर या मंदिर में कहीं भी पूजा-पाठ से पहले माथे पर तिलक जरूर लगाना चाहिए. यह हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है. बिना तिलक लगाए कोई भी पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होता है. अगर भक्त रोज पूजा-पाठ कर अपने मस्तिष्क पर तिलक लगाए तो उसका मन बेहद सकारात्मक रहता है और ध्यान भगवान की भक्ति में लीन रहता है.
आखिर क्यों लगाना चाहिए माथे पर तिलक
तीर्थपुरोहित बताते हैं कि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार चंदन, कुमकुम, रोली, भस्म या कोई भी वह चीज जो भगवान पर अर्पित की जाती है, अगर आप उसका तिलक अपने माथे पर लगाते हैं तो बड़े से बड़े उग्र ग्रह भी शांत हो जाते हैं और उनके नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं. मन बेहद शांत और सात्विक रहता है. किसी भी प्रकार के गलत विचार मन में नहीं आते हैं.
मन शांत रखकर ही भगवान की भक्ति करनी चाहिए. इससे स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है. मस्तिष्क की तंत्रिकाएं शांत अवस्था में रहती हैं और सिर दर्द जैसी समस्याएं भी समाप्त हो जाती हैं.
छोटे-छोटे उपायों से करें ग्रहों की शांति, बिना खर्च और पूजा के ये सरल उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत और ग्रहों का प्रभाव
22 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हम सबकी जिंदगी में ग्रह-नक्षत्रों का असर किसी न किसी रूप में जरूर पड़ता है. कभी काम बनते-बनते रुक जाते हैं, तो कभी सेहत या रिश्तों में दिक्कतें आने लगती हैं. ऐसे में ज्योतिष में कई सरल और आसान उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर इंसान अपने ग्रहों को शांत कर सकता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ा सकता है. इन उपायों में सबसे खास बात यह है कि इनमें किसी भारी-भरकम पूजा या खर्चे की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटे-छोटे दान और सेवा से ही अच्छे फल मिलने लगते हैं. जैसे जानवरों को भोजन कराना, पक्षियों को दाना डालना या किसी गरीब बच्चे की मदद करना. जिनसे बुध, शनि और बृहस्पति जैसे ग्रह भी शुभ फल देने लगते हैं.
बुध को मजबूत करने के आसान उपाय
बुध ग्रह बुद्धि, बोलचाल और व्यापार का कारक माना जाता है, अगर यह कमजोर हो तो इंसान को काम में दिक्कतें आने लगती हैं और रिश्तों में भी खटास पैदा हो सकती है. बुध को मजबूत करने के लिए हर बुधवार को एक मुट्ठी हरी मूंग की दाल दान करना बहुत अच्छा माना जाता है. इसे आप किसी जरूरतमंद को दे सकते हैं या फिर गौशाला में गायों के लिए भी दे सकते हैं. इसके अलावा बुधवार के दिन हरे रंग के कपड़े पहनना और हरे फल-सब्जियों का सेवन करना भी लाभकारी होता है.
शनि और बृहस्पति को प्रसन्न करने के उपाय
शनि और बृहस्पति का जीवन में बेहद खास स्थान होता है. शनि कर्म और न्याय का ग्रह है जबकि बृहस्पति ज्ञान, धन और भाग्य का कारक है. इन दोनों ग्रहों को अच्छा करने के लिए एक आसान उपाय है—थोड़े से पाव के बिस्किट लेकर कुत्तों को खिला दीजिए. इसके अलावा अगर आप गाठिया या आटा लेकर कौओं, चीलों और अन्य पक्षियों को डालते हैं तो शनि और बृहस्पति दोनों ग्रह शुभ असर देने लगते हैं. कहते हैं कि यह दान न केवल ग्रहों को शांत करता है बल्कि हमारे पितरों को भी तृप्त करता है.
शुक्र और बुध को शांत करने के उपाय
कई बार जीवन में रिश्तों में तनाव, वैवाहिक दिक्कतें या प्रेम संबंधों में परेशानी शुक्र ग्रह की वजह से भी आती हैं. शुक्र और बुध दोनों को अच्छा करने का उपाय है कि दो या तीन खीरे लेकर गाय को खिला दें. यह छोटा सा काम आपके जीवन में बड़ा असर डाल सकता है. गाय को भोजन कराने से सुख-समृद्धि बढ़ती है और घर-परिवार में खुशहाली आती है.
छोटे बच्चों की मदद से मिलने वाला पुण्य
अगर आपको कहीं कोई छोटा बच्चा या बच्ची दिख जाए तो उसे नमकीन, बिस्किट या चॉकलेट खिला दें. यह काम बहुत छोटा लगता है लेकिन इसका फल बेहद बड़ा होता है. बच्चों की मुस्कान भगवान की दुआ के बराबर होती है. कहा जाता है कि जब बच्चे आपके लिए दिल से दुआ करते हैं तो जीवन की कई मुश्किलें अपने आप दूर हो जाती हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 22 अगस्त 2025)
22 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- योजनाएं फलीभूत हों, प्रत्येक कार्य में विलम्ब के कारण विशेष लाभ नही होगा।
वृष :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, परिश्रम से सोचे गये कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मिथुन :- परिश्रम से सफलता के कार्य जुटायें, सोचे हुए कार्य पूर्ण अवश्य ही होवेंगे, ध्यान रखें।
कर्क :- आर्थिक चिन्ताऐं संभव हों, योजनाऐं फलीभूत होंगी, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह :- मानसिक बेचैनी, मित्रों से धोखा, अनायास विभ्रम कष्टप्रद होगा, ध्यान रखें।
कन्या :- इष्ट मित्र सुखवर्धक हों तथा मित्रों से मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि अवश्य होगी।
तुला :- मान-प्रतिष्ठा पर आंच का भय, किसी की सहायता से सुरक्षा संभव होगी।
वृश्चिक :- आर्थिक योजन पूर्ण हों, सफलता के साधन बनेंगे, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
धनु :- असमंजस की स्थिति बनी ही रहेगी, समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे।
मकर :- समय की अनुकूलता से लाभांवित हों, कल्याणकारी योजना अवश्य ही बनेगी।
कुम्भ :- तनाव-क्लेश, अशांति, मानसिक विभ्रम तथा उत्तेजना की वृद्धि होगी, ध्यान रखें।
मीन :- मानसिक तनाव व क्लेश, अशांति, धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, कार्य बनेंगे।
27 अगस्त को मनायी जाएगी गणेश चतुर्थी
21 Aug, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है। । गणेश पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर भक्तजन अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। पंचांग की गणना के अनुसार गणेश चतुर्थी तिथि का आरंभ 26 अगस्त को दोपहर में 1 बजकर 55 मिनट पर होगा और 27 अगस्त को 3 बजकर 45 मिनट तक चतुर्थी तिथि रहेगी। ऐसे में गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से शुरू होगा। हालांकि, जो लोग गणेश चतुर्थी का व्रत करना चाहते हैं तो उन्हें 26 अगस्त को व्रत रखना चाहिए। क्योंकि, चतुर्थी का व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है। ऐसे में 26 अगस्त को रात के समय चतुर्थी तिथि रहेगी इसलिए व्रत 26 अगस्त को किया जाएगा। हालांकि, गणेशजी की स्थापना 27 अगस्त को करना ही शुभ रहेगा। क्योंकि, गणेश पुराण के अनुसार गणेशजी का जन्म दोपहर के समय हुआ था और 27 तारीख को उदय तिथि में गणेश चतुर्थी दोपहर तक रहने वाली है इसलिए गणेश जी की स्थापना 27 अगस्त को की जाएगी। बता दें कि गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से 6 सितंबर अनंत चतुर्दशी तिथि के दिन तक रहेगा।
गणेश चतुर्थी पर इन बातों का ख्याल
1 ) भगवान गणेश की जिस मूर्ति में उनकी सूंड बाई तरफ होती है वैसी मूर्ती घर लाना बहुत ही शुभ माना जाता है।
2 )बैठी हुई प्रतिमा ही घर लाएं। इससे घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है।
3 ) भगवान गणेश का हाथ आशीर्वाद देती हुई मुद्रा में होना चाहिए और दूसरे हाथ में मोदक होना चाहिए। ऐसी प्रतिमा की स्थापना करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
4 ) भगवान गणेश की स्थापना ईशान कोण में करनी चाहिए और बप्पा को इस तरह से विराजमान करें की उनका मुख उत्तर की तरफ हो।
5) बप्पा को स्थापित करने से पहले लकड़ी की चौकी को अच्छे से साफ करके और गंगाजल से शुद्ध करके फिर उसपर लाल कपड़ा बिछाकर ही बप्पा को विराजमान करें।
भादों में करें ध्रर्म के अनुसार आचरण
21 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू पंचांग का छठा माह भाद्रपद अर्थात भादो चल रहा है। सनातन धर्म के अनुसार भाद्रपद माह चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में से दूसरा महीना है। इसलिए इसमें कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है। भाद्रपद माह की पूर्णिमा सदैव पूर्वा या उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में पड़ती है तथा आकाशगंगा में पूर्वा भाद्रपद अथवा उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के योग बनने से इस माह का नाम भाद्रपद व भादो रखा गया है।
भाद्रपद माह में स्नान, दान तथा व्रत करने से जन्म-जन्मान्तर के पाप नाश हो जाते हैं। भादो में अनेक लोक व्यवहार के कार्य निषेध होने के कारण यह माह शून्य मास भी कहलाता है। भादो में नए घर का निर्माण, विवाह, सगाई आदि मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते, इसलिए भादो में भक्ति, स्नान-दान के लिए उत्तम समय माना गया है। इस दौरान जमीन पर ही सोना चाहिय और संयमित जीवन व्यतीत करना चाहिये।
भाद्रपद माह धार्मिक तथा व्यावहारिक नजरिए से जीवनशैली में संयम और अनुशासन को अपनाना दर्शाता है। इसलिए इसमें कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है। शास्त्रनुसार भाद्रपद माह में कुछ कार्य निषेद्ध हैं तथा कुछ खाद्य सामाग्री पर भी वर्जना बताई गयी है। भादो में हरी शाक सब्जियों के अलावा शहद गुड, तिल, दही और नारियल के तेल का सेवन नहीं करना चाहिये। वहीं दूध , घी और मक्खन का अधिक से अधिक सेवन लाभ कारी रहता है।
भादों में पड़ने वाली तीज का महिलाओं को इंतजार रहता है। हिन्दू धर्म में चार प्रकार की तीज मनायी जाती है। जिसमें अखा तीज, हरियाली तीज, कजरी, और हरतालिका तीज शामिल है। इस दौरान आकाश में घुमड़ती काली घटाओं के कारण इस पर्व को कजली अथवा कजरी तीज कहा जाता है। कजरी तीज को लेकर मान्याता है कि शिव-गौरी की पूजा करने से सौभाग्यवती स्त्री को अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है। दांपत्यद जीवन सुखमय होने के साथ ही इसमें प्रेम का वास होता है। वहीं कुंवारी कन्या्ओं के व्रत रखने को लेकर माना जाता है कि उन्हेंन अच्छे वर की प्राप्ति होती है।
व्रत रखने से मिलता है फल
21 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में सप्ताह के सारे दिन किसी न किसी भगवान को समर्पित हैं। जिस तरह से सोमवार का दिन भगवान शिवजी का और मंगलवार का दिन हनुमान जी का है। उसी तरह से बुधवार को भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके लिए व्रत रखा जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक व्रत रखने से भगवान खुश होते हैं। आज हम आपके लिए लाए हैं बुधवार के व्रत की कथा। व्रत रखने वाले लोगों को इस दिन यह कथा सुननी होती है।
प्राचीन काल की बात है एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल गया। कुछ दिन अपने ससुराल में रुकने के बाद व्यक्ति ने अपने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने को कहा लेकिन सास-ससुर ने कहा कि आज बुधवार है और इस दिन हम गमन नहीं करते हैं लेकिन व्यक्ति ने उनकी बात को मानने से साफ इनकार कर दिया। आखिरकार लड़की के माता-पिता को अपने दामाद की बात माननी पड़ी और अपनी बेटी को साथ भेज दिया। रास्ते में जंगल था, जहां उसकी पत्नी को प्यास लग गई। पति ने अपना रथ रोका और जंगल से पानी लाने के लिए चला गया। थोड़ी देर बाद जब वो वापस अपनी पत्नी के पास लौटा तो देखकर हैरान हो गया कि बिल्कुल उसी के जैसा व्यक्ति उसकी पत्नी के पास रथ में बैठा था।
ये देखकर उसे गुस्सा आ गया और कहा कि कौन है तू और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठा है। लेकिन दूसरे व्यक्ति को जवाब सुनकर वो हैरान रह गया। व्यक्ति ने कहा कि मैं अपनी पत्नी के पास बैठा हूं। मैं इसे अभी अपने ससुराल से लेकर आया हूं। अब दोनों व्यक्ति झगड़ा करने लगे। इस झगड़े को देखकर राज्य के सिपाहियों ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
यह सब देखकर व्यक्ति बहुत निराश हुआ और कहा कि हे भगवान, ये कैसा इंसाफ है, जो सच्चा है वो झूठा बन गया है और जो झूठा है वो सच्चा बन गया है। ये कहते है कि फिर इसके बाद आकाशवाणी हुई कि ‘हे मूर्ख आज बुधवार है और इस दिन गमन नहीं करते हैं। तूने किसी की बात नहीं मानी और इस दिन पत्नी को ले आया।’ ये बात सुनकर उसे समझ में आया की उसने गलती कर दी। इसके बाद उसने बुधदेव से प्रार्थना की कि उसे क्षमा कर दे।
इसके बाद दोनों पति-पत्नि नियमानुसार भगवान बुध की पूजा करने लग गए। ज्योतिषियों के मुताबिक जो व्यक्ति इस कथा को याद रखता उसे बुधवार को किसी यात्रा का दोष नहीं लगता है और उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। बुधवार के दिन अगर कोई व्यक्ति किसी नए काम की शुरुआत करता है तो उसे भी शुभ माना जाता है।
तो केमद्रुम दोष बनता है
21 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यदि जन्म कुंडली में चन्द्रमा किसी भी भाव में अकेला बैठा हो, उससे आगे और पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम दोष बनता है। केमद्रुम दोष में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा परेशान होता है। उसे हमेशा एक अज्ञात भय रहता है। उसके जीवन काल में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। आर्थिक रूप से ऐसे व्यक्ति कमजोर ही रहते हैं। जीवन में अनेकों बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति खुद को बहुत समझदार समझते हैं। उन्हें लगता है की उनसे अधिक बुद्धिमान व्यक्ति कोई नहीं है। ऐसे व्यक्ति चिड़चिड़े और शक्की स्वभाव के होते हैं। संतान से कष्ट पाते हैं परन्तु दीर्घायु होते हैं। कुछ परिस्थितियों में केमद्रुम योग भंग या निष्क्रिय भी हो जाता है।
जन्म कुंडली में केमद्रुम दोष हो परन्तु चन्द्रमा के ऊपर सभी ग्रहों की दृष्टि हो तो केमद्रुम दोष के दुष्प्रभाव निष्क्रिय हो जाते हैं।-यदि चन्द्रमा शुभस्थान (केंद्र या त्रिकोण) में हो तथा बुद्ध, गुरु एवं शुक्र किसी अन्य भाव में एक साथ हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।-यदि दसवें भाव में उच्च राशि का चन्द्रमा केमद्रुम दोष बना कर बैठा हो परन्तु उस पर गुरु की दृष्टि हो तो भी केमद्रुम दोष भंग माना जायेगा।यदि केंद्र में कहीं भी चन्द्रमा केमद्रुम दोष का निर्माण कर रहा हो परन्तु उस पर सप्तम भाव से बली गुरु की दृष्टि पड़ रही हो तो भी केमद्रुम दोष भंग हो जाता है।
गुरुवार को न करें ये काम
21 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय सभ्यता में हर दिन का अलग महत्व है। खासतौर से गुरुवार को तो धर्म का दिन मानते हैं। गुरु को लेकर एक भी मान्यता है कि यह दूसरे ग्रहों के मुकाबले ज्यादा भारी होते है। इसलिए इस दिन कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे शरीर या घर में हल्कापन आता हो क्योंकि गुरु के प्रभाव में आने वाले कारक तत्वों का प्रभाव हल्का हो जाता है. वो काम कौन से हैं, जिन्हें गुरुवार को नहीं करना चाहिए, आप भी जानिये।
ना बाल धोएं ना कटाएं
शास्त्रों के अनुसार महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति और संतान का कारक होता है। इसका मतलब यह है कि गुरु ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में गुरुवार को महिलाएं अगर अपना सिर धोती हैं या बाल कटाती हैं तो इससे बृहस्पति कमजोर होता है और पति व संतान की उन्नति रुक जाती है।
गुरु ग्रह को जीव भी कहा जाता है। जीव यानी कि जीवन। जीवन से तात्पर्य है आयु. गुरुवार को नाखून काटने और शेविंग करने से गुरु ग्रह कमजोर होता है, जिससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उम्र में से दिन कम हो जाता है।
घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोने, कबाड़ घर से बाहर निकालने, घर को धोने या पोछा लगाने से बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर शुभ प्रभाव में कमी आती है।
गुरुवार को नारायण का दिन होता है, ये बात तो ठीक है. पर नारायण तभी प्रसन्न होंगे जब आप उनके साथ उनकी पत्नी यानी कि लक्ष्मी जी की भी पूजा करेंगे। गुरुवार को लक्ष्मी-नारायण दोनों की एक साथ पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं और पति-पत्नी के बीच कभी दूरियां नहीं आतीं। साथ ही धन में भी वृद्धिल होती है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 21 अगस्त 2025)
21 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य विफलत्व, समय में योजनाएं फलीभूत हों किन्तु लाभ से वंचित अवश्य ही रहेगा।
वृष राशि :- कहीं विस्फोटक स्थित कष्टप्रद हो किन्तु भाग्य का सितारा प्रबल रहे, लाभ अवश्य होगा।
मिथुन राशि :- कुटुम्ब की चिन्तायें मन व्याग्र रखें, आकस्मिक भय अवश्य होगा, ध्यान रखें।
कर्क राशि :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा एवं धन लाभ का योग अवश्य ही बनेगा, ध्यान दें।
सिंह राशि :- धन लाभ, कार्य-कुशलता से संतोष, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल अवश्य ही बन जायेगी।
कन्या राशि :- दैनिक कार्यगति मंद, मन में उद्विघ्नता बनेगी, रुके कार्यों को पूरा करने में मन लगायेंगे।
तुला राशि :- मानसिक उद्विघ्नता बनें, स्वास्थ्य नरम रहेगा, कार्य में संतोष होगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
वृश्चिक राशि :- सफलता के साधन बनें, इष्ट-मित्र फलप्रद एवं सुखवर्धक होंगे, कर्मचारी सहयोग करेंगे।
धनु राशि :- विरोधी तत्व परेशान करेंगे, अनायास बाधा, शरीर कष्ट, बचकर चलने से लाभ होगा।
मकर राशि :- मानसिक बेचैनी, अशांति, तनाव, अधिकारियों से विरोध बनेगा, ध्यान अवश्य रखें।
कुंभ राशि :- लोगों से मेल-मिलाप के पश्चात् कार्य अवरोध तथा बेचैनी अवश्य ही बनेगी।
मीन राशि :- भाग्य का सितारा मंद रहेगा, तनाव-क्लेश व अशांति अवश्य बनेगी, धन का व्यय होगा।
पीलीभीत में भी गूंज रहा है न्याय के देवता गोलू देवता का दरबार, अर्जी लगाते ही मिलती फरियाद की सुनवाई
20 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैसे तो प्रमुख रूप से गोलू देवता में पर्वतीय समाज के लोगों की आस्था होती है. मगर कलयुग में लगातार बढ़ रहे अन्याय के बीच सभी लोगों के मन में न्याय के देवता कहे जाने वाले गोलू देवता में विश्वास बढ़ता जा रहा है. ऐसी मान्यता है कि इस दरबार में अर्जी लगा देने मात्र से ही व्यक्ति को त्वरित न्याय मिलता है. गोलू देवता को भगवान शिव का अवतार माना जाता है. उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के प्रसिद्ध चितई गोलू देवता मंदिर से प्रेरित होकर, कुछ साल पहले पर्वतीय समाज के लोगों ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में भी इसी आस्था से यह मंदिर बनवाया.
यह मंदिर पीलीभीत शहर के नकटादाना चौराहे के पास साईं धाम मंदिर के ठीक सामने स्थित है. मंदिर के महंत नवीन पांडे बताते हैं कि सोमवार का दिन गोलू देवता को समर्पित होता है. इस दिन श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं या समस्याएं एक कागज़ पर लिखते हैं. जिसे अर्जी कहा जाता है. फिर उसे मंदिर परिसर में मौजूद मसान देवता को उड़द की दाल की खिचड़ी अर्पित कर, गोलू देवता के सामने रखा जाता है. मान्यता है कि इस तरीके से अर्जी लगाने से न्याय मिलता है और मुश्किलें दूर हो जाती हैं.
भगवान शिवजी के अवतार का ये दरबार
गोलू देवता के मंदिर में घंटी चढ़ाने की एक और खास परंपरा है. जब किसी की मनोकामना पूरी हो जाती है या न्याय मिल जाता है, तो वह श्रद्धा से मंदिर में आकर घंटा चढ़ाता है. यहां भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कोई भी चीज़ अर्पित कर सकते हैं, इसमें कोई बंधन नहीं है. इस मंदिर में आने वाले ज़्यादातर लोग उत्तराखंड और आसपास के पर्वतीय समाज से ताल्लुक रखते हैं. लेकिन अब यहां दूर-दराज से भी लोग पहुंचने लगे हैं. यह स्थान सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था का वो ठिकाना बन चुका है. जहां उन्हें भरोसा है कि उनकी बात सुनी जाएगी और न्याय ज़रूर मिलेगा.
बप्पा आने से पहले करें ये उपाय, घर में आए सुख-शांति, दूर होंगे सारे दुख और क्लेश
20 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गणपति बप्पा मोरया! यह उद्घोष जल्दी ही पूरे देश में सुनाई देगा, क्योंकि गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त, बुधवार से शुरू होने जा रहा है. पौराणिक कथाओं के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था. गणेश चतुर्थी पर कुछ खास उपाय करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है.
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता माने जाने वाले भगवान गणेश का जन्म हुआ था. गणेश चतुर्थी के दिन सनातन धर्म को मानने वाले लोग भगवान गणेश को अपने घरों में स्थापित करते हैं.
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन पूरी श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा की पूजा की जाती है और उनके निमित्त व्रत रखा जाता है. वहीं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन कुछ खास उपाय करने से भगवान गणेश को प्रसन्न करके उनकी विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है.
कि भगवान गणेश ऐसे देवता माने जाते हैं, जिनकी वंदना किसी भी शुभ अथवा मांगलिक कार्य से पहले करना आवश्यक है. ऐसे में गणेश चतुर्थी के दौरान कुछ खास उपाय करना जरूरी माना जाता है.
अगर आप आर्थिक संकट से परेशान हैं और इससे मुक्ति पाना चाहते हैं, तो गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश की पूजा-आराधना करें. हाथी को हरा चारा खिलाएं और गौ माता को हरा चारा दें. ऐसा करने से धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
अगर आप अपने घर में गृह क्लेश से परेशान हैं, तो ऐसी स्थिति में गणेश चतुर्थी के पावन दिन भगवान गणेश को गुड़ का भोग अर्पित करें और गौ माता की सेवा करें. ऐसा करने से गृह क्लेश से मुक्ति मिलेगी.
अगर आप कोई नई चीज की शुरुआत करने जा रहे हैं और कई बार रुकावट का सामना कर रहे हैं, जिससे आपकी मनोकामना पूरी नहीं हो पा रही है, तो ऐसी स्थिति में गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को 21 गुड़ की गोलियांऔर दूर्वा अर्पित करें और भगवान गणेश के मंत्र का उच्चारण करें. ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
अगर आप पापों की मुक्ति पाना चाहते हैं, तो गणेश चतुर्थी के दौरान व्रत रखें और गरीब व जरूरतमंद लोगों की मदद करें. ऐसा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है.
पितृ पक्ष में जीवों को भोजन कराने से नहीं मिलता सिर्फ पूर्वजों का आशीर्वाद, सबसे ज्यादा बरसती है ये वाली सीक्रेट कृपा
20 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का अलग रुतबा है. इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है. यह अवधि हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा के बाद शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलती है. पितृ पक्ष को पूर्वजों को समर्पित समय कहा गया है. इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों का आशीर्वाद देते हैं. माना जाता है कि जो व्यक्ति पितृ पक्ष में श्राद्ध, दान और सेवा करता है, उसके जीवन से संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
कि पितृ पक्ष सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है. इस दौरान गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों को भोजन करवाना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है. यह परंपरा हमारे समाज में करुणा, दया और सेवा की भावना को मजबूत करती है. मान्यता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहती है.
पितृ पक्ष की धार्मिक मान्यता
शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में किए गए दान और सेवा से पूर्वज प्रसन्न होते हैं. यह समय सिर्फ पूजा-पाठ का नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का होता है. लोग तर्पण करते हैं और ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं. कुछ विशेष जीवों को भोजन करवाने का महत्त्व भी बताया गया है. यह जीव प्रतीकात्मक रूप से पितरों से जुड़े माने जाते हैं. जब इन्हें भोजन कराया जाता है तो माना जाता है कि इसका पुण्य सीधा पितरों तक पहुंचता है.
गाय को भोजन कराना
गाय को हिंदू धर्म में माता का दर्जा प्राप्त है. पितृ पक्ष के दौरान गाय को भोजन कराने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि गाय को भोजन कराने से पितर प्रसन्न होते हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. गाय को हरा चारा, गुड़ या आटा खिलाना बहुत शुभ माना जाता है. यह भी कहा गया है कि यदि पितृ दोष किसी की कुंडली में हो तो गाय को नियमित रूप से भोजन कराने से दोष का प्रभाव कम होता है.
कौवे से क्या फायदा
कौवा पितरों का प्रतीक माना जाता है. पितृ पक्ष के दौरान कौवे को भोजन कराने की परंपरा बहुत प्रचलित है. कहा जाता है कि कौवे के माध्यम से पितर अपने अंश को ग्रहण करते हैं. यदि कौवा प्रसन्न होकर भोजन कर लेता है तो यह संकेत होता है कि पितर तृप्त और प्रसन्न हुए हैं. कौवे को चावल, रोटी और मीठा खिलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
कुत्ते को भोजन के लाभ
कुत्ते को धर्म और रक्षक का प्रतीक माना गया है. पितृ पक्ष में कुत्ते को भोजन कराने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. मान्यता है कि कुत्ते को भोजन कराने से जीवन में आने वाले संकट कम होते हैं और बाधाएं दूर होती हैं. कुत्ते को रोटी, दूध और गुड़ खिलाना शुभ माना जाता है. कई लोग मानते हैं कि कुत्ते को भोजन करवाने से घर में वफादारी और सुरक्षा बनी रहती है.
चींटियों से क्या लाभ
चींटी को भोजन कराना छोटा सा कार्य दिख सकता है लेकिन इसके पीछे गहरी धार्मिक भावना जुड़ी है. शास्त्रों में कहा गया है कि चींटियों को आटा या शक्कर खिलाने से पितर प्रसन्न होते हैं. यह कार्य बहुत पुण्यदायी माना गया है. चींटियों को भोजन करवाने से घर में दरिद्रता और रोग दूर होते हैं. यह कार्य अहिंसा और दया का प्रतीक भी है.
पितृ दोष के नुकसान
जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके जीवन में बाधाएं और परेशानियां आती हैं. ऐसे लोगों को पितृ पक्ष के दौरान इन जीवों को भोजन कराने की विशेष सलाह दी जाती है. यह उपाय पितृ दोष को कम करने वाला और जीवन को सकारात्मक ऊर्जा देने वाला माना जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 20 अगस्त 2025)
20 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, मानसिक अशांति एवं कष्ट, मन विक्षुब्ध रहे, विलम्ब से रुके कार्य बनेंगे।
वृष :- चिन्ता ग्रस्त होने से बचें, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल अवश्य ही बनेगी, प्रसन्नता बनी रहेगी।
मिथुन :- तनाव व क्लेश, अशांति, असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद होगा, ध्यान अवश्य रखें।
कर्क :- किसी प्रलोभन से बचें, अन्यथा परेशानी में फंस सकते हैं, समय का ध्यान रखें।
सिंह :- तनाव, क्लेश व अशांति, असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद होगा, विचार कर चलेंगे।
कन्या :- विवादग्रस्त होने की संभावना है, सोचे हुए कार्य समय पर हो जायेंगे, सुख प्राप्त होगा।
तुला :- कुटुम्ब की समस्याएं सुलझें, कार्यगति में सुधार, कार्य योजना फलीभूत अवश्य ही होगी।
वृश्चिक :- कार्य कुशलता से संतोष होगा, दैनिक समृद्धि के साधन बनेंगे, व्यावसाय में वृद्धि होगी।
धनु :- अधिकारियों से तनाव, मित्र वर्ग से उपेक्षा से मन अशांत तथा कार्य में बाधा अवश्य होगी।
मकर :- मान-प्रतिष्ठा में आंच आने का समय व भय होगा, कार्य में बाधा होगी, ध्यान रखें।
कुम्भ :- किसी घटना का शिकार होने से बचें, चोट आदि कष्ट का भय अवश्य ही बनेगा।
मीन :- स्त्री वर्ग से हर्ष मिले, बिगड़े कार्य बनेंगे, समय का लाभ लें, कार्य बन ही जायेंगे।
घर में चोरी करके लगाया गया मनी प्लांट सचमुच लाता है पैसा और खुशहाली?
19 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय परंपरा में पेड़-पौधों का खास महत्व माना गया है. इन्हें सिर्फ पर्यावरण को साफ रखने वाला ही नहीं बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला भी माना जाता है. ऐसे ही पौधों में एक खास पौधा है – मनी प्लांट (Money Plant). इसके बारे में लोगों की मान्यता है कि यह घर में धन और खुशहाली लाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह पौधा सकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक उन्नति और समृद्धि का प्रतीक है. यही वजह है कि लोग इसे अपने घर, ऑफिस और बगीचों में लगाना पसंद करते हैं.
मनी प्लांट की पहचान और महत्व
मनी प्लांट एक हरे-भरे बेलनुमा पौधा है जिसे गमले या पानी में आसानी से उगाया जा सकता है. इसके पत्ते हरे और दिल के आकार के होते हैं. जितने अधिक और बड़े पत्ते होंगे, घर में उतनी ही समृद्धि और खुशहाली बढ़ती है. वास्तु के अनुसार यह पौधा आर्थिक बाधाओं को दूर करता है और धन की स्थिरता बनाए रखता है. साथ ही यह घर के वातावरण को भी सुखद और शांत बनाता है.
चोरी करके लगाना शुभ या अशुभ?
मनी प्लांट को चोरी करके लगाने से वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और आर्थिक परेशानियां आने लगती हैं. माना जाता है कि ऐसे पौधे से सुख-समृद्धि की जगह दुर्भाग्य बढ़ता है और परिवार में तनाव का माहौल पैदा होता है. चोरी किया गया पौधा कभी फलता-फूलता नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे सूखने लगता है. इसके साथ ही घर के मुखिया के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता पर भी बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए मनी प्लांट हमेशा खुद खरीदकर ही लगाना शुभ माना गया है.
मनी प्लांट के बारे में एक पुरानी मान्यता यह भी है कि इसे खरीदकर नहीं बल्कि चोरी करके लाना शुभ होता है. ऐसा करने से घर में लगातार धन की आवक बनी रहती है और आर्थिक तंगी दूर रहती है. हालांकि आज के समय में लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन कई लोग अभी भी इस परंपरा को निभाते हैं.
मनी प्लांट लगाने की सही दिशा
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार मनी प्लांट को घर के दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है. यह दिशा धन और समृद्धि की दिशा है. अगर इसे उत्तर-पूर्व में लगाया जाए तो इसके विपरीत नकारात्मक असर पड़ सकता है. पौधे को कभी भी सूखने न दें और इसके पत्तों की समय-समय पर देखभाल करें. हरे-भरे पत्ते सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं जबकि सूखे पत्ते नकारात्मक ऊर्जा दिखाते हैं.
मनी प्लांट की देखभाल
मनी प्लांट की देखभाल आसान है लेकिन जरूरी है. इसे सीधी धूप से बचाएं और पानी नियमित रूप से दें. पानी में लगाने पर हर सप्ताह पानी बदलें. पौधे को हरा-भरा रखना ही शुभ माना जाता है. जितना पौधा बढ़ेगा उतना ही घर में धन और खुशहाली बढ़ेगी. अगर पौधा सूख जाए तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है.
पितृपक्ष के पहले दिन चंद्र ग्रहण, इन टोटकों से पितर होंगे प्रसन्न और घर आएगी समृद्धि
19 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृपक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर दिन रविवार से हो रही है और इस दिन साल 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है. जब पितृपक्ष के पहले दिन ही चंद्र ग्रहण आ जाए तो इसे अत्यंत विशेष और शक्तिशाली संयोग माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पितर पृथ्वी लोक पर आते हैं और परिजनों के साथ आते हैं और उनके साथ रहते हैं. इस दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए परिजन श्राद्ध कर्म, पिंडदान और दान पुण्य जैसे अनुष्ठान करते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृपक्ष के पहले दिन चंद्र ग्रहण का अद्भुत संयोग है और अगर इस दिन लाल किताब के कुछ टोटके किए जाएं तो इससे ना सिर्फ धन, दौलत, वंश, संपत्ति में वृद्धि होगी बल्कि पितर भी प्रसन्न होंगे. आइए जानते हैं पितृपक्ष में किए जाने वाले इन टोटकों के बारे में…
इस उपाय से होगी विष्णु कृपा
ज्योतिश शास्त्र के अनुसार, पितृपक्ष के हर दिन पीपल या बरगद के वृक्ष में जल चढ़ाते रहें और केसर का तिलक भी लगाएं. साथ ही इस अवधि में एकादशी का व्रत कर विष्णुजी की पूजा करें और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ भी करें. ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलेगी और भगवान विष्णु की कृपा भी रहेगी.
इस उपाय हर क्षेत्र में मिलेगी सफलता
परिवार में सभी सदस्यों से बराबर मात्रा में सिक्के इकट्ठा कर लें और उनको आप किसी मंदिर में दान कर दें. ऐसा आप लगातार 5 गुरुवार को करें. मतलब अगर आप जेब से 10 रुपए ले रहे हैं तो घर के सभी सदस्यों से 10-10 रुपए इकट्ठे कर लें और मंदिर में दान कर दें. या फिर आप घर में दादाजी हैं तो उनको जाकर दान कर दें. ऐसा करने से पितरों की कृपा से घर में
इस उपाय से होगा भाग्योदय
पितृपक्ष में हर रोज सुबह व शाम के समय कपूर जलाकर पूजा अर्चना करें. साथ ही कपूर को पूरे घर में भी दिखाएं. ऐसा हर रोज करने से देव दोष के साथ पितृदोष भी दूर होता है. कपूर को आप कभी घी में डूबोकर जलाएं तो कभी गुढ़ के साथ मिलाकर जलाएं. ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और घर के सभी सदस्यों का भाग्योदय होता है.
इल उपाय से पितर होंगे संतुष्ट
पितृपक्ष के पहले दिन ग्रहण है तो इस दौरान काले तिल, जल और दूध से पितरों का तर्पण करें. साथ ही गरीब व जरूरतमंद , गौ और ब्राह्मण को अन्न-दान करें. ऐसा करने से पितृदोष शांत होता है और सभी सदस्यों की सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है. साथ ही ग्रहण काल में घर के आंगन या पीपल के नीचे तिल का दीपक जलाने से पितर संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं.
इस उपाय से पितृदोष होगा दूर
पितृपक्ष में हर रोज कुत्ते, गाय, चीढ़िया, कौवा को हर रोज रोटी अवश्य खिलाएं. अगर कोई भी मिल जाए तो उस समय अवश्य खिला दें. साथ ही ग्रहण के समय मौन रहकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. साथ ही पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष दूर होता है.
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