धर्म एवं ज्योतिष
भाद्र पद की पहली एकादशी पर तुलसी को करें प्रसन्न, मां लक्ष्मी बरसाएंगी धन! तंगी होगी खत्म
19 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाद्रपद माह की पहली एकादशी आने वाली है. कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं. इस बार यह एकादशी 19 अगस्त को है. उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, अजा एकादशी पर सिद्धि योग और शिववास योग बन रहा है, जो इस दिन को और खास बनाता है. इस दिन अगर तुलसी से जुड़े कुछ उपाय कर लिए जाएं, तो लक्ष्मी नारायण प्रसन्न होते हैं. मान्यता है कि एकादशी पर तुलसी को प्रसन्न करने से लक्ष्मी धन की कमी को दूर करती हैं. क्योंकि, शास्त्रों में तुलसी को लक्ष्मी स्वरूपा ही बताया गया है.
एकादशी पर जरूर करें तुलसी से जुड़े ये अचूक उपाय
1. बहुत प्रयास के बाद सफलता हाथ नहीं लग रही है, धन घर में टिक नहीं रहा है, तो अजा एकादशी पर स्नान- ध्यान करने के बाद भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें. पूजा के समय गाय के कच्चे दूध में तुलसी की मंजरी मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए. यह उपाय करने से आर्थिक स्थिति में सुधार आता है.
2. अगर आप जीवन में किसी प्रकार के संकट या दुख से जूझ रहे हैं तो अजा एकादशी के दिन तुलसी की माला से श्री हरि विष्णु के मंत्र का जाप करें. ऐसा करने से जीवन में आ रहे संकट और दुख दूर होते हैं.
3. नौकरी में अगर बहुत प्रयास के बाद भी विघ्न-बाधा आ रही है तो एकादशी के दिन तुलसी पर 11, 21 या 51 दीपक जलाकर तुलसी चालीसा का पाठ करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा विघ्न दूर दूर होते हैं.
4. अगर वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं है तो अजा एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. यह बहुत ही लाभकारी उपाय है. इससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है. अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 19 अगस्त 2025)
19 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- इष्ट मित्रों से लाभ, स्त्री वर्ग से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ती होगी, रुके कार्य बन जायेंगे।
वृष :- अपने प्रत्येक कार्य में बाधा, लाभकारी कार्य हाथ से निकल जाये, संभलकर चलें।
मिथुन :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्यगति में सुधार, कार्य अनुकूल बन जायेंगे।
कर्क :- कार्य योजनाएं फलीभूत होंगी, दैनिक सफलता के साधन जुटायें, प्रलोभन से आप बचें।
सिंह :- इष्ट मित्र सुखवर्धक हों, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा।
कन्या :- आशानुकूल सपुलता का हर्ष, दैनिक व्यवसाय में सुधार होगा, चिन्ता मुक्त होंगे।
तुला :- आर्थिक योजना सफल होगी, समय पर सोचे कार्य बने तथा किसी के धोके से बचें।
वृश्चिक :- दूसरों के कार्य में भटकना पड़ेगा, समय को बचाकर चलने से लाभ अवश्य ही होगा।
धनु :- दैनिक कार्यगति में सुधार होगा, कार्य योजना फलीभूत होगी, कार्य का ध्यान रखें।
मकर :- किसी का कार्य बनने से संतोष होगा, चिन्ता निवृत्ति, व्यवसायिक स्थिति में सुधार होगा।
कुम्भ :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी, उदर विकार, विद्या बाधा, कार्य बाधा अवश्य ही होगी।
मीन :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, बिगड़े कार्य में मित्रों का सहयोग अवश्य मिलेगा।
1 दिन बाद शुभ योग में अजा एकादशी, जानें महत्व, पूजा विधि और श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए खास उपाय
18 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व होता है. हर साल 24 एकादशियां आती हैं, इनमें से भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी अजा एकादशी को बेहद खास माना जाता है. इस बार यह शुभ तिथि 19 अगस्त दिन मंगलवार को है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी के दिन विधि पूर्वक व्रत रखने, पूजा करने और कुछ खास उपायों को अपनाने से व्यक्ति के जीवन में चल रही कई समस्याएं खत्म हो सकती हैं. साथ ही आर्थिक संकट और पारिवारिक तनाव से भी मुक्ति मिल सकती है. आइए जानते हैं अजा एकदाशी का महत्व और उपाय…
अजा एकादशी 2025 शुभ योग
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 18 अगस्त को शाम 5 बजकर 22 मिनट से हो रही है और समापन 19 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को मानते हुए अजा एकादशी का व्रत 19 अगस्त दिन मंगलवार को ही मान्य होगा. अजा एकादशी के दिन त्रिपुष्कर योग और सिद्धि योग बन रहा है. इन शुभ योग में भगवान नारायण की पूजा अर्चना करने से सभी कष्टों व परेशानियों से मुक्ति मिलेगी.
अजा एकादशी 2025 पूजा विधि
अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर जल, फल और तुलसी से श्रीहरि की पूजा करते हैं. इसके अलावा, मां लक्ष्मी की आराधना भी की जाती है ताकि घर में धन-धान्य और समृद्धि बनी रहे. पौराणिक कथाओं में भी इस व्रत के महत्व का उल्लेख मिलता है, जहां इसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताया गया है.
अजा एकादशी 2025 उपाय
ज्योतिषियों की मानें तो, अजा एकादशी के दिन कुछ सरल उपाय अपनाना बहुत लाभदायक होता है. जैसे कि, इस दिन भगवान विष्णु को पीले फूल और मिठाई अर्पित करने से कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर होती हैं. वहीं, हल्दी मिले जल से स्नान और केले के पेड़ की पूजा करने से भाग्य का साथ मिलने लगता है. अजा एकादशी को लेकर मान्यता है कि इसका व्रत करने से हजारों गोदान जितना पुण्य प्राप्त होता है. यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं.
धन और सुख चाहिए? मंगलवार को हनुमान मंदिर से लाकर रखें ये चीज़, जीवन में आने लगेगा सकारात्मक बदलाव
18 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जीवन में कभी-कभी ऐसे हालात आ जाते हैं जब मेहनत के बावजूद पैसा टिकता नहीं या अचानक खर्चे बढ़ जाते हैं. ऐसे समय में इंसान को उम्मीद की किरण ढूंढनी पड़ती है. हमारी संस्कृति में आस्था और विश्वास को बहुत महत्व दिया गया है. माना जाता है कि भगवान हनुमान जी की कृपा से बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है. मंगलवार का दिन खास तौर पर हनुमान जी को समर्पित माना जाता है, और इस दिन किए गए कुछ आसान उपाय से जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस किया जा सकता है. एक छोटा-सा, लेकिन बेहद असरदार उपाय है – हनुमान मंदिर से फूल लाकर धन स्थान पर रखना. यह न केवल आर्थिक स्थिति में सुधार लाता है, बल्कि मानसिक शांति भी देता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
उपाय करने का तरीका
इस उपाय को मंगलवार की सुबह करना सबसे अच्छा माना जाता है. सबसे पहले नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें और मन को शांत करें. फिर नजदीकी हनुमान मंदिर जाएं. वहां से एक ताजा फूल लाएं, जो हनुमान जी के चरणों में चढ़ा हो. इस फूल को लाल कपड़े में लपेटें. कपड़े में 11 चावल के दाने और एक सिक्का भी रखें. यह छोटी-सी पोटली तैयार करने के बाद इसे अपने घर के धन स्थान पर सुरक्षित रखें. धन स्थान का मतलब है वह जगह जहां आप पैसे, गहने या महत्वपूर्ण कागजात रखते हैं.
यह उपाय क्यों माना जाता है खास
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है, जबकि चावल शुद्धता और स्थिरता का संकेत देते हैं. सिक्का समृद्धि और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. जब ये तीनों चीजें एक साथ रखी जाती हैं, तो यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं. हनुमान जी के मंदिर से आया फूल इस ऊर्जा को और भी मजबूत बनाता है, क्योंकि यह आस्था और भक्ति का प्रतीक है.
कब तक रखें पोटली
इस पोटली को तब तक धन स्थान में रखें जब तक आपकी आर्थिक स्थिति सुधर न जाए. जैसे ही आपको लगे कि हालात बेहतर हो गए हैं, इसे खोलें और मंदिर जाकर हनुमान जी को एक लड्डू चढ़ाएं. यह आभार जताने का तरीका है, जिससे आपकी भक्ति और मजबूत होती है और भविष्य में भी सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.
आस्था और विश्वास की ताकत
किसी भी उपाय की असली ताकत उसमें रखे गए विश्वास में होती है, अगर आप इसे केवल औपचारिकता समझकर करेंगे, तो इसका असर उतना गहरा नहीं होगा, लेकिन अगर आप इसे पूरी श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ करेंगे, तो यह आपके मनोबल को बढ़ाएगा और आपको मानसिक शांति देगा. यही शांति आपको सही फैसले लेने और जीवन को सही दिशा देने में मदद करती है.
बाबा नीम करौली का संदेश
कई श्रद्धालु मानते हैं कि बाबा नीम करौली महाराज भी आस्था की ताकत पर जोर देते थे. उनका कहना था कि जब इंसान का मन भगवान में लगता है, तो उसकी परेशानियां हल्की होने लगती हैं. यह उपाय भी उसी सिद्धांत पर आधारित है-भगवान पर भरोसा रखें और अच्छे कर्म करें, बाकी रास्ता अपने आप बनता चला जाएगा.
पहली बार कर रहीं हैं हरतालिका तीज व्रत?
18 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं. भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं. इससे उनका वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. हरतालिका तीज भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस साल हरतालिका तीज का व्रत 26 अगस्त को रखा जाएगा. विशेष कर जो महिलाएं इस साल पहली बार हरतालिका तीज का व्रत रखना चाहती हैं, उनके लिए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानें इस दिन व्रत और पूजा-अर्चना करने की विधि.
क्या कहते है देवघर के ज्योतिषाचार्य
26 अगस्त को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा. हर सुहागिन महिला को यह व्रत अवश्य रखना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार इसी तिथि में भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में प्राप्त किया था, इसलिए इस तिथि का विशेष महत्व होता है. हर पूजा-पाठ नियम और विधि के अनुसार ही करनी चाहिए ताकि शुभ फल प्राप्त हो. जो सुहागिन महिलाएं पहली बार हरतालिका तीज का व्रत कर रही हैं, उन्हें पूजा-पाठ के नियम और विधि अवश्य पता होनी चाहिए.
इन नियम विधि के साथ करें पूजा पाठ
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पार्थिव शिवलिंग बनाएं और चार प्रहर में पूजा और आराधना करें. यानी हरतालिका तीज के दिन प्रदोष प्रहर से ही पूजा आराधना शुरू कर दें. हर प्रहर में षोडशोपचार विधि से पूजा करें. इस दिन रात में जागरण का विधान भी है, इसलिए रात्रि में जागकर तीज व्रत की कथा अवश्य सुनें. पूजा में माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पण करें, इससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी. यदि संभव हो तो हरतालिका तीज के दिन निर्जला व्रत रखें, अन्यथा फलाहार करके भी चार प्रहर में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती को खीरा अवश्य अर्पण करें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 18 अगस्त 2025)
18 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- इष्ट मित्रों से लाभ, स्त्री वर्ग से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, रुके कार्य एक-एक करके बन जायेंगे।
वृष :- अपने प्रत्येक कार्य में बाधा, लाभकारी कार्य हाथ से निकल जाये, संभलकर चलें।
मिथुन :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्यगति में सुधार, कार्य अनुकूल बन जायेंगे।
कर्क :- योजनाएं फलीभूत होंगी, दैनिक सफलता के साधन जुटायें, प्रलोभन से आप बचें।
सिंह :- प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, अनेक समस्याएं असमंजस में रखें, कार्य की बेचैनी बढ़ेगी।
कन्या :- स्त्री वर्ग से तनाव के बाद शांति, भाग्य का सितारा साथ देगा, मानसिक बेचैनी होगी।
तुला :- भाग्य का सितारा साथ देगा, समय अनुकूल हो, कार्य कुशलता से संतोष अवश्य होगा।
वृश्चिक :-आर्थिक योजना सफल होंगी, समय पर सोचे कार्य बनेंगे, कार्य योजना पर विचार होगा।
धनु :- अर्थ लाभ, कार्य कुशलता में बाधा, स्वास्थ्य नरम रहे, पराक्रम उत्साह वर्धक होगा।
मकर :- उद्विघ्नता बनी ही रहेगी, किसी उत्तम समाचार से हर्ष होगा तथा प्रसन्नता बनी ही रहेगी।
कुम्भ :- विरोधियों से परेशानी, चिन्ता व्याग्रता बनी रहे, विपरित स्थिति का सामना करना होगा।
मीन :- अपव्यय होगा, सामान्य शारीरिक कष्ट, कार्यक्षमता मंद होगी, कार्य में रुकावट बनेगी।
17 अगस्त को है सिंह संक्रांति, महा पुण्यकाल में होगा स्नान-दान, जानें मुहूर्त, प्रभाव, क्या करें दान?
17 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिंह संक्रांति का पर्व 17 अगस्त दिन रविवार को है. सूर्य देव जब अपनी ही राशि सिंह में जिस समय प्रवेश करेंगे, उस समय सिंह संक्रांति होगी. सिंह राशि में सूर्य का गोचर होगा. सिंह संक्रांति के दिन स्नान और दान करने का महत्व है. ऐसा करने से पुण्य लाभ होता है, पाप मिटते हैं. इस बार सिंह संक्रांति का स्नान और दान महा पुण्यकाल में होगा. इस अवसर पर सूर्य से जुड़ी वस्तुओं का दान करते हैं. आइए जानते हैं सिंह संक्रांति के महा पुण्यकाल, स्नान दान समय और प्रभाव के बारे में.
सिंह संक्रांति की तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 17 अगस्त को 2:00 एएम पर सिंह राशि में गोचर करेंगे. उस समय सिंह संक्रांति का क्षण होगा. सिंह संक्रांति के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है. इस दिन व्याघात योग और रोहिणी नक्षत्र है.
सिंह संक्रांति का महा पुण्यकाल
इस बार सिंह संक्रांति का महा पुण्यकाल 2 घंटे का है. महा पुण्यकाल का प्रारंभ सुबह 05 बजकर 51 मिनट से होगा और यह सुबह 08 बजकर 03 मिनट तक रहेगा.
सिंह संक्रांति का पुण्यकाल
सिंह संक्रांति के दिन का पुण्यकाल 6 घंटे 34 मिनट तक है. उस दिन पुण्यकाल सुबह में 5 बजकर 51 मिनट से शुरू होगा और दोपहर में 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा.
सिंह संक्रांति का स्नान-दान मुहूर्त
सिंह संक्रांति के अवसर पर स्नान और दान महा पुण्यकाल में करन उत्तम है. इस दिन आप स्नान और दान सुबह 05:51 बजे से सुबह 08:03 बजे के बीच कर सकते हैं. जो लोग किसी कारणवश इस समय में स्नान और दान नहीं कर सकते हैं, तो वे पुण्यकाल में कर सकत हैं. इसमें आपको सुबह से दोपहर 12:25 बजे तक का समय मिलेगा.
गर्दभ पर सवार हो उत्तर में गमन करेंगे सूर्य देव
इस सिंह संक्रांति का नाम राक्षसी है. भगवान सूर्य का वाहन गर्दभ है. वे गुलाबी वस्त्र पहने, हाथ में दंड लिए, गर्दभ पर सवार होकर, दृष्टि ईशान कोण में रखे, कांसे के पात्र में पकवान खाते हुए उत्तर दिशा में गमन करेंगे. उनकी मुद्रा हास्य की होगी. इस दिन सूर्य देव को केतकी का फूल अर्पित करें.
सिंह संक्रांति का प्रभाव
यह सिंह संक्रांति पशुओं के लिए ठीक होगी. उम्मीद है कि सिंह संक्रांति में वस्तुओं की कीमतें कम हों. हालांकि इस समय में भी देशों के बीच झगड़े, विवाद बढ़ने की आशंका है. संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी. बदलते हुए मौसम में लोग खांसी, सर्दी और जुकाम से परेशान हो सकते हैं.
सिंह संक्रांति पर क्या दान करें?
सिंह संक्रांति पर आप स्नान करने के बाद गेहूं, लाल चंदन, लाल फल, लाल फूल, केसर, लाल वस्त्र, तांबा, गुड़, घी आदि का दान करें. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप मिटते हैं और पुण्य मिलता है. इन वस्तुओं के दान से कुंडली का सूर्य दोष मिटता है. सूर्य का शुभ फल प्राप्त होगा. इससे नौकरी, धन, धान्य, पिता से संबंधों में बढ़ोत्तरी होगी.
रविवार को जपें सूर्य देव के 108 नाम, बढ़ेगा धन-धान्य, नौकरी में होगी तरक्की, पिता से संबंध होंगे मजबूत
17 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है. सूर्य के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को अच्छा पद, यश, जॉब, धन, धान्य आदि की प्राप्ति होती है. पिता का सहयोग भी मिलता है. लेकिन जब सूर्य खराब होता है तो उसके नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के जीवन में दिखाई देने लगते हैं. नौकरी नहीं मिलती है, या नौकरी में काफी मेहनत के बाद भी तरक्की नहीं होती है. पिता से संबंध खराब होते हैं. पिता का कोई सहयोग प्राप्त नहीं होता है. यदि आपकी कुंडली में सूर्य दोष है, या सूर्य कमजोर है तो आपको एक उपाय करना चाहिए. हर रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करें, उनको जल से अर्घ्य दें. उसके बाद सूर्य देव के 108 नाम का जाप करें. आइए जानते हैं सूर्य देव के 108 नामों के बारे में.
सूर्य देव के 108 नाम
ओम सूर्याय नमः
ओम श्रीमते नमः
ओम नारायणाय नमः
ओम नित्यानन्दाय नमः
ओम दीप्तमूर्तये नमः
ओम सौख्यप्रदाय नमः
ओम श्रेयसे नमः
ओम निखिलागमवेद्याय नमः
ओम शरण्याय नमः
ओम अरुणाय नमः
ओम भास्कराय नमः
ओम अहस्कराय नमः
ओम परस्मै ज्योतिषे नमः
ओम सौख्यदायिने नमः
ओम सम्पत्कराय नमः
ओम तेजोरूपाय नमः
ओम ग्रहाणांपतये नमः
ओम अमरेशाय नमः
ओम परेशाय नमः
ओम कवये नमः
ओम हिरण्यगर्भाय नमः
ओम सकलजगतांपतये नमः
ओम अं सुप्रसन्नाय नमः
ओम ऐं इष्टार्थदाय नमः
ओम करुणारससिन्धवे नमः
ओम आदिमध्यान्तरहिताय नमः
ओम तरुणाय नमः
ओम अच्युताय नमः
ओम आत्मरूपिणे नमः
ओम अचिन्त्याय नमः
ओम जगदानन्दहेतवे नमः
ओम जयिने नमः
ओम दशदिक्संप्रकाशाय नमः
ओम अन्तर्बहिः प्रकाशाय नमः
ओम अब्जवल्लभाय नमः
ओम आर्तरक्षकाय नमः
ओम असमानबलाय नमः
ओम कमनीयकराय नमः
ओम असुरारये नमः
ओम उच्चस्थान समारूढरथस्थाय नमः
ओम ओजस्कराय नमः
ओम भक्तवश्याय नमः
ओम जन्ममृत्युजराव्याधिवर्जिताय नमः
ओम शौरये नमः
ओम हरिदश्वाय नमः
ओम लूनिताखिलदैत्याय नमः
ओम खद्योताय नमः
ओम शर्वाय नमः
ओम ऐश्वर्यदाय नमः
ओम ब्रह्मणे नमः
ओम बृहते नमः
ओम घृणिभृते नमः
ओम सत्यानन्दस्वरूपिणे नमः
ओम कनत्कनकभूषाय नमः
ओम घनाय नमः
ओम गुणात्मने नमः
ओम सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे नमः
ओम भगवते नमः
ओम एकाकिने नमः
ओम आर्तशरण्याय नमः
ओम अपवर्गप्रदाय नमः
ओम कान्तिदाय नमः
ओम शान्ताय नमः
ओम लुप्तदन्ताय नमः
ओम हृषीकेशाय नमः
ओम उद्यत्किरणजालाय नमः
ओम पुष्कराक्षाय नमः
ओम ऋक्षाधिनाथमित्राय नमः
ओम उज्ज्वलतेजसे नमः
ओम ऋकारमातृकावर्णरूपाय नमः
ओम नित्यस्तुत्याय नमः
ओम ऋजुस्वभावचित्ताय नमः
ओम ऋक्षचक्रचराय नमः
ओम रुग्घन्त्रे नमः
ओम ऋषिवन्द्याय नमः
ओम वसवे नमः
ओम वसुप्रदाय नमः
ओम सुवर्चसे नमः
ओम सुशीलाय नमः
ओम सुप्रसन्नाय नमः
ओम ऊरुद्वयाभावरूपयुक्तसारथये नमः
ओम जयाय नमः
ओम निर्जराय नमः
ओम वीराय नमः
ओम ऊर्जस्वलाय नमः
ओम विवस्वते नमः
ओम ऊर्ध्वगाय नमः
ओम उग्ररूपाय नमः
ओम उज्ज्वल नमः
ओम वासुदेवाय नमः
ओम ईशाय नमः
ओम वन्दनीयाय नमः
ओम इन्दिरामन्दिराप्ताय नमः
ओम अच्युताय नमः
ओम अखिलागमवेदिने नमः
ओम आदिभूताय नमः
ओम आदित्याय नमः
ओम भानवे नमः
ओम इन्द्राय नमः
ओम इज्याय नमः
ओम विश्वरूपाय नमः
ओम इनाय नमः
ओम अनन्ताय नमः
ओम अखिलज्ञाय नमः
ओम वरेण्याय नमः
ओम परमात्मने नमः
ओम हरये नमः
ओम रवये नमः
गणेश चतुर्थी : कब है व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त?
17 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैसे तो भगवान गणेश की पूजा आराधना प्रतिदिन करनी चाहिए, लेकिन साल के प्रत्येक महीने में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा आराधना के लिए समर्पित मानी जाती है. इस शुभ तिथि पर गणपति बप्पा की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना की जाती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का अवतरण हुआ था, इसलिए इस तिथि को गणेश चतुर्थी के रूप में पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है.
कि हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त दोपहर 1:54 से हो रही है, जिसका समापन 27 अगस्त दोपहर 3:44 पर होगा. उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी.
जिसमें शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 से लेकर दोपहर 1:29 तक रहेगा. इस दौरान किसी भी समय गणपति बप्पा की पूजा की जाती है.
गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में भगवान गणेश को विराजमान कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. कोई पांच दिन, कोई सात दिन तो कोई दस दिनों तक विघ्नहर्ता की उपासना करता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर होती हैं और बिगड़े काम भी पूरे हो जाते हैं.
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए. इसके बाद गणपति बप्पा का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए और दीप प्रज्वलित करना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से विघ्नहर्ता प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं.
आरती करते वक्त आंखें खुली रखें या बंद? जानें शास्त्रों के अनुसार कौन-सा तरीका देता है सच्चा आध्यात्मिक अनुभव
17 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हम सभी जानते हैं कि पूजा-पाठ में आरती का खास महत्व होता है. मंदिर हो या घर, पूजा के अंत में आरती जरूर की जाती है. आरती सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भगवान से जुड़ने का सुंदर तरीका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आरती के समय आंखें बंद करनी चाहिए या खुली रखनी चाहिए? कई लोग श्रद्धा के भाव में आंखें बंद कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रों और परंपरा के अनुसार यह तरीका सही नहीं माना जाता. वजह यह है कि आरती के दौरान भगवान को देखना और उनकी ज्योति का अनुभव करना ही पूजा का असली सार है, अगर हम आंखें बंद कर लें, तो यह मानो भगवान के सामने होते हुए भी उन्हें अनदेखा करना जैसा है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य रवि पराशर से आखिर क्यों आरती के समय आंखें खुली रखना जरूरी है और इसके पीछे क्या गहरा अर्थ छिपा है.
आरती के समय आंखें बंद क्यों न करें
आरती को भगवान का साक्षात स्वागत माना जाता है. मान्यता है कि जब हम आरती करते हैं, तो देवता वहां उपस्थित होते हैं. ऐसे में आंखें बंद करना ऐसा है जैसे हम उनसे मिलने का मौका गंवा दें. आरती करते समय आंखें खुली रखकर भगवान की मूर्ति, तस्वीर या ज्योति को एकटक निहारने से भक्ति भाव गहरा होता है और मन पूरी तरह भगवान पर केंद्रित रहता है.
इसके अलावा, जब हम भगवान की छवि देखते हैं, तो कई बार हमें दिव्य अनुभूति भी होती है. यह अनुभव केवल तभी संभव है जब हम आंखें खुली रखें. जहां मंत्र-जाप या ध्यान के समय आंखें बंद रखना अच्छा माना जाता है, वहीं आरती में आंखें खुली रखना जरूरी है, ताकि हम भगवान की ऊर्जा और आशीर्वाद को महसूस कर सकें.
आरती करने के सही नियम
1. खड़े होकर आरती करें – खड़े होकर आरती करना सम्मान और आदर का प्रतीक है. यह दर्शाता है कि हम पूरे मन से भगवान का स्वागत कर रहे हैं.
2. आरती की थाली में आवश्यक सामग्री रखें – दीपक के साथ फूल, कपूर और अक्षत रखना शुभ होता है. दीपक में पर्याप्त घी या तेल डालें ताकि वह बीच में न बुझे.
3. आरती घुमाने का सही तरीका – पहले भगवान के चरणों की ओर चार बार, नाभि की ओर दो बार और मुख की ओर एक बार दीपक घुमाएं. इसके बाद पूरे विग्रह के सामने आरती करें.
4. शंख बजाना और जल छिड़कना – आरती के बाद शंख बजाना बहुत शुभ माना जाता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. फिर शंख में जल भरकर चारों दिशाओं में छिड़कें, जिससे घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है.
आंखें खुली रखने का आध्यात्मिक महत्व
जब हम आरती में भगवान को देखते हैं, तो यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं रहती, बल्कि आत्मा और ईश्वर का मिलन बन जाती है. दीपक की लौ को देखना हमें यह याद दिलाता है कि अंधकार चाहे कितना भी हो, एक छोटी सी ज्योति उसे मिटा सकती है. इसी तरह, भगवान की ओर ध्यान केंद्रित करना जीवन के संकटों को हल्का कर देता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 17 अगस्त 2025)
17 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- विरोधी तत्व परेशान करेंगे, अधिकारियों से तनाव, इष्ट मित्र कष्टप्रद बने रहेंगे।
वृष :- कार्यकुशलता से संतोष, व्यवसयिक गति में सुधार तथा कार्य योजना अवश्य ही बनेगी।
मिथुन :- इष्ट मित्रों से लाभ, स्त्री से मन प्रसन्न रहेगा, मनोवृत्ति संवेदनशील बनी ही रहेगी।
कर्क :- मनोबल उत्साहवर्धक होवें, कार्य कुशलता से संतोष होवे, कार्य व्यवसाय उत्तम होगा।
सिंह :- चोटचपेट होने का भय, कार्यगति में बाधा होगी किन्तु अधिकारियों का सहयोग मिले।
कन्या :- यात्रा से लाभ, परिवार में सुख-शांति तथा कार्य में रुकावट होगी।
तुला :- अधिकारी वर्ग सहायक होंगे, भाग्य का सितारा साथ देगा तथा रुके कार्य बन ही जायेंगे।
वृश्चिक :- किसी के धोखे से विवाद होने की संभावना बने, धन हानि, व्यर्थ भ्रमण होगा।
धनु :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, भोग-ऐश्वर्य में समय बीते तथा कार्य में बाधा अवश्य होगी।
मकर :- स्थिति में सुधार होते हुए भी फलप्रद नहीं, कार्य विफलत्व, चिन्ताप्रद कार्य होगा।
कुम्भ :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, कार्य बनें, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद हो।
मीन :- समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थिगित रखें, कार्य अवरोध अवश्य ही होगा।
आर्थिक तंगी को मार भगाएंगे ये तीन ट्रिक, जन्माष्टमी पर जरूर आजमाएं, अब यही आखिरी रास्ता
16 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आर्थिक तंगी पीछा नहीं छोड़ रही या कर्जदार घर के चक्कर लग रहे हैं, अगर आप इसे लेकर मानसिक रूप से परेशान हैं तो जन्माष्टमी के दिन कुछ खास उपाय करने पर इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा. धार्मिक ग्रंथो में अनेक उपायों का वर्णन किया गया है, जिनको करने से संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है. साल 2025 में जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त शनिवार को होगा. इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा अर्चना करते हुए भजन कीर्तन के माध्यम से उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन कुछ खास उपाय करने पर आर्थिक तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है और लक्ष्मी का आगमन होता है.
हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष पर्वों में से एक है. इस दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही कृष्ण भगवान के भजन कीर्तन, पूजा पाठ, आराधना आदि शुरू कर दी जाती है. रात के 12:00 बजते ही उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. जन्माष्टमी के दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो जीवन से आर्थिक तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है.
उपाय-1
जन्माष्टमी के दिन दक्षिणवर्ती शंख और पीले फूल (गेंदे के फूल) घर लाएं. सबसे पहले दक्षिणवर्ती शंख में गंगाजल भरकर उससे लड्डू गोपाल या श्री कृष्ण भगवान की मूर्ति का जलाभिषेक करें. ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि, खुशहाली और धन का आगमन होता है. परिवार के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है. पीले फूलों की माला बनाकर कृष्ण भगवान की मूर्ति पर अर्पित करने से दरिद्रता का नाश, संबंधों में मधुरता, धन आगमन में सभी रुकावटें खत्म हो जाती हैं.
उपाय-2
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन ताम्बूल यानी पान का पत्ता कृष्ण भगवान को अर्पित करें. इसके बाद पान के पत्ते पर रोली से “श्री” लिखकर कृष्ण भगवान का भजन कीर्तन, उनकी पूजा आराधना, स्तोत्र आदि का पाठ करें. इस पान के पत्ते को अपने धन वाले स्थान पर रखें. ऐसा करने से धन संबंधी सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. पान के पत्ते पर श्री लिखकर धन वाले स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है और कृष्ण भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है.
उपाय-3
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन चांदी या दूसरी धातु की बांसुरी घर लाएं और कृष्ण भगवान को अर्पित करके उनकी पूजा अर्चना, आराधना, भजन कीर्तन आदि का पाठ करें. इसके बाद इस बांसुरी को अपने पर्स या अपनी तिजोरी में रखें. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. उम्रभर के लिए आर्थिक तंगी खत्म हो जाएगी.
सागर का गुप्त 'वृंदावन', जहां जब भगवान ने कहा – यहीं रहूंगा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर चलेगा बधाई नृत्य उत्सव
16 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सागर के बड़ा बाजार में पतली पतली गलियां और उनमें जगह पर ऐतिहासिक प्राचीन और प्रसिद्ध श्री राधा कृष्ण के अलग-अलग स्वरूप में अनेक मंदिर है. जिसकी वजह से इस क्षेत्र को मिनी वृंदावन या गुप्त वृंदावन के नाम से जाना जाता है. यहां भगवान श्री कृष्णा से जुड़े त्यौहार बड़े ही हर्ष उल्लास और धूमधाम के साथ मनाए जाते हैं. इस कृष्ण जन्माष्टमी पर भी श्री देव अटल बिहारी मंदिर में दो दिन का जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से बुंदेली बधाई और नृत्य किया जाएगा यहां हजारों की संख्या में भक्त दर्शनों को उमड़ते हैं.
ऐसे ही यहां पर बांके बिहारी का 350 साल पुराना चमत्कारिक मंदिर है,जहां एक बार दर्शन करने के बाद ही लोग भगवान के हो जाते हैं. मंदिर में जाते ही वृंदावन की अनुभूति होने लगती है. भगवान श्री कृष्णा और राधा रानी की अनुपम छवि लोगों का मन मोह लेती है.
इस मंदिर की खास बात यह है कि बांके बिहारी को यहां पर श्री देव अटल बिहारी के नाम से जाना जाता है. इसको लेकर एक कहानी यहां पर चलती है जिसके मुताबिक भगवान बांके बिहारी की यहां पर स्थापना नहीं की गई थी बल्कि वह खुद चलकर आए थे तब से यहीं पर है.
मंदिर के पुजारी अमित चांचौदिया के मुताबिक माना जाता है कि पहले साधुओं की टोली जब पैदल तीर्थ यात्राएं करती थी तो वह बांके बिहारी को डोली में लेकर चलती थी. ऐसे ही एक टोली तीर्थ यात्रा पर थी और अपनी इस यात्रा के दौरान जब सागर का पड़ाव आया और रात होने की वजह से उन्होंने विश्राम लिया, तो बांके बिहारी को भी बैठा दिया, सुबह पूजन ध्यान करने के बाद जब उन्होंने आगे बढ़ने के लिए बिहारी जी को उठाया तो वह 1 इंच तक नहीं हिले, साधुओं के सारे प्रयास नाकाम रहे प्रभु की इच्छा मानकर उनको यही विराजमान कर दिया, इस तरह बांके बिहारी अटल बिहारी हो गए.
बिना कारण जीवन में आ रही बाधाओं का कारण है पितृ दोष?
16 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे जीवन में कई बार ऐसा लगता है कि मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही, घर में बिना वजह तनाव बना रहता है या स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता रहता है. ऐसे हालात में लोग कई बार ज्योतिष से सलाह लेते हैं और वहां से पता चलता है कि किसी पितृ दोष की वजह से जीवन में रुकावटें आ रही हैं. पितृ दोष का मतलब होता है पूर्वजों की अधूरी इच्छाएं या उनके अंतिम संस्कार में कोई गलती. इन्हीं को शांत करने के लिए किया जाता है त्रिपिंडी श्राद्ध. यह श्राद्ध खासतौर पर उन आत्माओं के लिए किया जाता है जो किसी वजह से असंतुष्ट हैं और अभी तक मोक्ष की ओर नहीं जा पाई हैं. आइए जानते हैं कि त्रिपिंडी श्राद्ध क्या होता है, इसका महत्व क्या है और इसे कैसे किया जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
त्रिपिंडी श्राद्ध क्या होता है?
त्रिपिंडी श्राद्ध का मतलब है – तीन पीढ़ियों के पितरों का पिंडदान. इसमें खासतौर पर उन पूर्वजों को पिंड दिया जाता है जिनकी आत्मा किसी वजह से अभी तक शांति नहीं पा सकी है. इस श्राद्ध में ब्रह्मा, विष्णु और शिव की उपस्थिति भी मानी जाती है, इसलिए इसे खास माना जाता है. मान्यता है कि अगर किसी परिवार में कोई पूर्वज नाराज़ है तो वह आने वाली पीढ़ियों को परेशान कर सकता है. ऐसे में त्रिपिंडी श्राद्ध करके उसे शांत किया जाता है ताकि वह परम गति को प्राप्त कर सके.
क्यों ज़रूरी है त्रिपिंडी श्राद्ध?
अगर किसी की कम उम्र में या अचानक मृत्यु हो जाती है और उनका अंतिम संस्कार सही तरीके से नहीं हुआ हो तो आत्मा भटकती रहती है. ऐसी स्थिति में त्रिपिंडी श्राद्ध करके उस आत्मा को शांति दी जाती है. इसके अलावा अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष है तो यह श्राद्ध करवाना बहुत फायदेमंद होता है. यह माना जाता है कि इससे जीवन की कई रुकावटें दूर हो सकती हैं और मन को भी शांति मिलती है.
किन लोगों के लिए किया जाता है यह श्राद्ध?
त्रिपिंडी श्राद्ध उन लोगों के लिए किया जाता है जिनकी असमय मौत हुई हो – जैसे बचपन में, युवावस्था में, किसी हादसे में या जलने जैसे किसी अप्राकृतिक कारण से, अगर किसी परिवार में बार-बार दुःखद घटनाएं हो रही हैं, तो भी यह श्राद्ध करवाना जरूरी माना जाता है.
त्रिपिंडी श्राद्ध कब किया जाता है?
इस श्राद्ध को करने के लिए पितृ पक्ष का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. खासकर अमावस्या के दिन इसे करना बहुत फलदायक होता है. हालांकि, गया जैसे तीर्थस्थलों पर इसे सालभर भी किया जा सकता है, लेकिन पितृपक्ष का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि उस दौरान पितरों की आत्माएं धरती पर आती हैं और अपने वंशजों से तर्पण की उम्मीद करती हैं.
क्या हैं इसके नियम?
त्रिपिंडी श्राद्ध करते समय कुछ बातें खासतौर पर ध्यान रखनी होती हैं:
1. इस श्राद्ध में किसी खास पूर्वज का नाम या गोत्र नहीं लिया जाता.
2. ऐसा इसलिए क्योंकि यह माना जाता है कि करने वाला व्यक्ति नहीं जानता कि किस पूर्वज की आत्मा को शांति चाहिए.
3. इसे परिवार का कोई भी पुरुष सदस्य कर सकता है, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित.
4. सिर्फ अविवाहित महिलाएं यह श्राद्ध नहीं कर सकतीं.
भाद्रपद माह में करें यह छोटा सा उपाय, तुलसी की लकड़ी का दीया जलाने से खुलेंगे धन के दरवाजे, दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा
16 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाद्रपद माह अपने आप में बेहद खास माना जाता है. इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के कई सरल और असरदार उपाय बताए गए हैं. खासकर अगर घर में पैसों की कमी हो, कर्ज बढ़ रहा हो या आर्थिक हालात ठीक न हों, तो इस महीने में एक खास उपाय करने से आपकी किस्मत बदल सकती है. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह में तुलसी की सूखी लकड़ी का दीया जलाना बेहद शुभ माना जाता है. यह सिर्फ पैसों की समस्या ही नहीं, बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है. माना जाता है कि इस छोटे से उपाय से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, कर्ज कम होता है और राहु-केतु जैसे ग्रहों का दुष्प्रभाव भी मिटता है.
क्यों खास है भाद्रपद माह?
भाद्रपद माह भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना है. इसी महीने में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है और मान्यता है कि इसी समय राधा रानी से उनका ब्रह्म विवाह हुआ था. इस वजह से यह महीना प्रेम, भक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस समय किए गए शुभ काम और पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है.
किस लकड़ी का दीया जलाएं?
इस महीने में तुलसी की सूखी लकड़ी का दीया जलाना सबसे शुभ माना गया है, अगर घर में गणेश जी की पूजा होती है तो तुलसी के स्थान पर दूर्वा घास का दीया जलाना बेहतर है, क्योंकि गणेश पूजन में तुलसी वर्जित होती है. तुलसी की सूखी लकड़ी से जलने वाला दीया सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक तरह से घर के वातावरण को भी पवित्र करता है.
तुलसी की सूखी लकड़ी का दीया जलाने के फायदे
1. माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन का आगमन होता है.
2. पैसों से जुड़ी दिक्कतें और कर्ज कम होने लगते हैं.
3. घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक माहौल बनता है.
4. ग्रह दोष, खासकर राहु-केतु का असर कम होता है.
5. घर का वास्तु संतुलित होता है और पारिवारिक शांति बनी रहती है.
दीया जलाने की सही विधि
1. एक साफ मिट्टी का दीया लें.
2. इसमें घी डालें, घी न हो तो सरसों का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
3. तुलसी के पौधे से सूखी लकड़ी का छोटा टुकड़ा लें (ध्यान रखें, कोई हरी पत्ती न हो).
4. दीये में रुई की बाती रखें और उसके साथ तुलसी की सूखी लकड़ी का टुकड़ा भी रखें.
5. शाम के समय दीया जलाएं और तुलसी के पौधे के पास रखें.
6. दीया जलाते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें.
7. चाहें तो तुलसी चालीसा या तुलसी स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं.
8. दीया कभी जमीन पर न रखें, इसे थाली या ऊंचे स्थान पर रखें.
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