धर्म एवं ज्योतिष
शरद पूर्णिमा पर राशि अनुसार करें उपाय, चंद्र दोष होगा दूर, मंत्र जाप से पाएं लाभ
6 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर सोमवार के दिन है. शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर बनाकर रखते हैं और उसे अगले दिन खाते हैं. इस बार शरद पूर्णिमा के दिन सोमवार है. सोमवार भी चंद्र देव का दिन है और शरद पूर्णिमा भी. ऐसे में इस साल शरद पूर्णिमा पर आप कुंडली के चंद्र दोष को दूर करने के उपाय कर सकते हैं. चंद्र दोष दूर होने से मानसिक शांति, सुख और समृद्धि मिलती है. आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष दूर करने के उपायों के बारे में.
शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष दूर करने के उपाय
मेष: शरद पूर्णिमा के दिन मेष राशि के लोग दूध और चावल का दान करें. पूजा के समय शिवलिंग का दूध और शहद से अभिषेक करें. इस दिन आपको ॐ चंद्राय नमः मंत्र का जप करना चाहिए.
वृषभ: शरद पूर्णिमा के अवसर पर वृषभ वालों को खीर बनाकर गरीबों को खिलाना चाहिए. इस दिन घर पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें. उसके बाद चांदी का दान करें. आपको चंद्र दोष दूर होगा.
मिथुन: शरद पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर शिव पूजा करें. उसके बाद हरी मूंग और हरे कपड़े का दान करें. तुलसी के पौधे पर जल अर्पित करें.
कर्क: शरद पूर्णिमा पर आपनी मां की सेवा करें, उनका आशीर्वाद लें. गौशाला में चारा दान करें. शिव जी को दूध अर्पित करें. रात में पानी में दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें.
सिंह: शरद पूर्णिमा को चंद्र दोष से मुक्ति के लिए चंद्रमा की पूजा करें. सफेद फूल और शक्कर चढ़ाए. ब्राह्मण को वस्त्र दान करें और भोजन कराएं.
कन्या: शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष मुक्ति के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. उसके बाद साबुत मूंग, हरे वस्त्र और तुलसी पत्तों का दान करें.
तुला: शरद पूर्णिमा को तुला वालों को दही और सफेद वस्त्र का दान करना चाहिए. कन्याओं को भोजन कराएं और लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें.
वृश्चिक: चंद्र दोष मुक्ति के लिए शरद पूर्णिमा को आप शिवलिंग पर शहद, दूध और जल से अभिषेक करें. इस दौरान ओम नम: शिवाय मंत्र जाप करें.
धनु: शरद पूर्णिमा के दिन विष्णु मंदिर में जाकर पूजा करें. केले का भोग लगाएं, अपने गुरु को पीले वस्त्र, हल्दी और केसर वाली खीर दान करें. चंद्र दोष दूर होगा.
मकर: चंद्र दोष दूर करने लिए मकर वाले शरद पूर्णिमा पर शिव पूजा करें. पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और चंद्र मंत्र का जाप करें.
कुंभ: आपकी राशि के लोग चंद्र दोष से मुक्ति के लिए पानी में सफेद चंदन डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें. मजदूरों को खीर का दान करें.
मीन: शरद पूर्णिमा को मीन राशि के लोगों को दूध, सफेद मिठाई और चांदी का दान करना चाहिए. ॐ सोमाय नमः मंत्र का जाप करें. चंद्र दोष दूर होगा.
जाना है बाबा खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए? इस प्लानिंग से करें यात्रा, कैसे पहुंचे, कहां रुके और कितना होगा खर्च? जानें सबकुछ
6 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर आप भी खाटू श्याम बाबा के सच्चे भक्त हैं और उनके दरबार जाने की सोच रहे हैं तो ये आर्टिकल आपके बहुत काम का है. राजस्थान के सीकर जिले में स्थित बाबा खाटू श्याम जी का मंदिर पूरे देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक प्रसिद्ध है. हर साल लाखों श्रद्धालु यहां बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं और अपने जीवन की हर परेशानी से राहत पाने की उम्मीद रखते हैं. कहते हैं जो भी सच्चे मन से बाबा को याद करता है, उसकी झोली खाली नहीं लौटती. इस आर्टिकल में आपको यहां पहुंचने का तरीका, रहने और खाने की व्यवस्था, यात्रा का बजट और खास टिप्स सब कुछ विस्तार से मिलेगा ताकि आपकी यात्रा आसान और यादगार बन सके.
खाटू श्याम जी तक पहुंचने का तरीका
बाबा श्याम का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है. यहां पहुंचने के लिए सबसे आसान रास्ता जयपुर से होकर जाता है. जयपुर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन देश के लगभग हर बड़े शहर से कनेक्टेड हैं. जयपुर से खाटू की दूरी करीब 70 किलोमीटर है.
1. ट्रेन से: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रिंगस है, जो खाटू से सिर्फ 16 किमी दूर है. यहां से जीप या टैक्सी लेकर आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है.
2. बस से: जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड से खाटू के लिए सीधी बसें मिलती हैं. सरकारी बस का किराया लगभग ₹80 और प्राइवेट बस का ₹100 तक होता है.
3. टैक्सी से: जयपुर से सीधे टैक्सी लेकर भी जाया जा सकता है, जिसका चार्ज लगभग ₹2000 से ₹2500 तक होता है.
4. अपनी गाड़ी से: अगर आप कार से जाते हैं तो पार्किंग की सुविधा मंदिर के पास ही मिल जाती है, चार्ज ₹100-₹150 तक रहता है.
पैदल यात्रा का अलग ही आनंद
बहुत से श्रद्धालु रिंगस से बाबा का निशान लेकर पैदल 16 किलोमीटर की यात्रा करते हैं. रास्ते में ढोल-नगाड़े, नाच-गाना और भक्ति का माहौल देखते ही बनता है. यह पैदल यात्रा भक्तों के लिए खास अनुभव होती है.
रहने की सुविधा
खाटू में धर्मशालाओं से लेकर अच्छे होटलों तक, हर बजट के हिसाब से ठहरने की जगह मिल जाती है.
1. धर्मशालाएं: ₹300 से ₹600 तक के बजट में साफ-सुथरे कमरे आसानी से मिल जाते हैं. जैसे कि वृंदावन धाम धर्मशाला, जहां चार लोगों का कमरा ₹300 से शुरू होता है.
2. होटल: अगर आप प्राइवेट होटल लेना चाहें तो ₹800 से ₹1500 तक में अच्छा रूम मिल जाएगा.
3. ज्यादातर जगहों पर खाने-पीने की व्यवस्था भी मिल जाती है, जिससे भक्तों को अलग से चिंता नहीं करनी पड़ती.
खाने-पीने का इंतजाम
खाटू की मार्केट में छोटे-छोटे रेस्टोरेंट और भोजनालय हैं, जहां थाली का रेट ₹60 से शुरू हो जाता है. सादा भोजन से लेकर खास राजस्थानी थाली तक यहां उपलब्ध है. साथ ही, प्रसाद और हलवा भी जरूर ट्राई करें, जो बाबा श्याम के दरबार की पहचान है.
मंदिर दर्शन और मान्यता
खाटू श्याम बाबा को महाभारत काल का बर्बरीक माना जाता है, जो भीम और हिडिंबा के पुत्र घटोत्कच के बेटे थे. कहा जाता है कि जब श्रीकृष्ण ने उनसे युद्ध में पक्ष चुनने को कहा तो उन्होंने जवाब दिया—“मैं हमेशा हारने वाले की तरफ रहूंगा,” यह सुनकर श्रीकृष्ण ने उनसे उनका शीश दान में मांग लिया और बर्बरीक ने बिना देर किए शीश दान कर दिया. इसी बलिदान के बाद उन्हें आशीर्वाद मिला कि कलयुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे.
मंदिर में बाबा के शीश की पूजा होती है. यहां की भीड़ और भक्ति का माहौल दिल को छू लेता है. दर्शन के लिए रेलिंग और बैरिकेडिंग का अच्छा इंतजाम रहता है ताकि भीड़ में कोई समस्या न हो.
श्याम कुंड और आसपास के स्थल
मंदिर दर्शन के बाद श्रद्धालु श्याम कुंड में स्नान करना जरूरी मानते हैं. माना जाता है कि इस कुंड में डुबकी लगाने से कई बीमारियां दूर होती हैं. इसके अलावा यहां की मार्केट से आप उपहार, धार्मिक वस्तुएं और बाबा के फोटो-फ्रेम भी ले सकते हैं.
यात्रा का बजट
अगर आप जयपुर से बस या ट्रेन के जरिए खाटू श्याम आते हैं और एक रात रुकते हैं तो दो लोगों का खर्च लगभग ₹1500 से ₹2000 तक आता है. इसमें आना-जाना, ठहरना और खाना-पीना सब शामिल है. जयपुर तक पहुंचने का खर्च अलग से होगा क्योंकि वो आपके शहर पर निर्भर करता है.
खास टिप्स
1. दर्शन के समय भीड़ रहती है, इसलिए बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें.
2. प्रसाद और जूते-चप्पल मंदिर के बाहर बनी दुकानों पर ही जमा करें.
3. पैदल यात्रा करने पर आराम-आराम से चलें और पानी साथ रखें.
4. अगर हो सके तो होली मेले के समय जरूर आएं, तब खाटू का नजारा देखते ही बनता है.
धनतेरस पर नहीं चाहिए सोना-चांदी, ये सस्ते उपाय भी भर देंगे तिजोरी, मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न
6 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में सालभर में कई उत्सव आते हैं. उन्हीं उत्सव में से एक धनतेरस का त्योहार दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है. यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इसी दिन से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य का आगमन होता है. धनतेरस पर विशेष रूप से सोना और चांदी खरीदना शुभ मानते हैं, लेकिन अगर आप सोना-चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं, तो घबराएं नहीं. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, कुछ अन्य वस्तुएं भी हैं, जिन्हें धनतेरस के दिन खरीदना बहुत मंगलकारी होता है और यह आपके घर में सुख-समृद्धि लाती हैं.
वैदिक पंचांग के अनुसार धनतेरस त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर, शनिवार को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर होगी और इसका समापन 19 अक्टूबर, रविवार को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर होगा. हिंदू धर्म में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, यानी वह तिथि जो सूर्योदय के समय मौजूद हो. इस साल, 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी. इसलिए, धनतेरस का पर्व शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा.
धनतेरस पर ये चीज़ें खरीदना भी है शुभ!
पीतल – पीतल को भगवान धन्वंतरि की धातु माना जाता है. मान्यता है कि पीतल के बर्तन खरीदने से घर में आरोग्य, सौभाग्य और 13 गुना धन लाभ होता है.
झाडू – धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि नया झाड़ू घर से दरिद्रता को दूर करता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. इस झाड़ू को घर लाकर उसका उपयोग करने से पहले उसकी पूजा अवश्य करें.
धनिया – धनतेरस पर धनिया खरीदना और उसे मां लक्ष्मी को अर्पित करना शुभ माना जाता है. धनिया को धन का प्रतीक भी कहा जाता है. पूजा के बाद इन बीजों को अपनी तिजोरी या धन के स्थान पर रखने से बरकत आती है.
गोमती चक्र – इस चीज को बहुत पवित्र और चमत्कारी माना जाता है. धनतेरस के दिन 11 गोमती चक्र खरीदकर उन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन की कमी दूर होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
कौड़ी – पीली कौड़ी को मां लक्ष्मी से जुड़ा माना जाता है. धनतेरस के दिन कौड़ी खरीदकर लाएं और उन्हें हल्दी में रंग कर (अगर पहले से रंगी हुई न हो तो) दिवाली की रात पूजा करने के बाद अपनी तिजोरी में रखें. इससे घर में धन का प्रवाह बना रहता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (06 अक्टूबर 2025)
6 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, कार्य व्यवसाय गति अनुकूल रहेगी, चिन्ता बनेगी।
वृष राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार होगा, धन लाभ, मनोवृत्ति उत्तम रहेगी, मन उत्सावर्धक रहेगा, कार्य योजना बनेगी।
मिथुन राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल रहेगी।
कर्क राशि :- समय की अनुकूलता के कारण बिगड़े कार्य बनेंगे, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल रहेगी, समय का लाभ लें।
सिंह राशि :- मनोबल कमजोर होगा, विरोधियों से परेशानी बनेगी, कार्य असफलता से समय नष्ट होगा, धैर्य रखें।
कन्या राशि :- थकावट व बेचैनी का अनुभव होगा, दूसरों के कार्यों फंसने से तनाव बनेगा, मन असमंजस में रहेगा।
तुला राशि :- संघर्ष में सफलता के कार्य बनने से हर्ष होगा, समय स्थिति को ध्यान में रखकर आगे बढ़े, धैर्य अवश्य रखें।
वृश्चिक राशि :- सफलता के योग बनेंगे किन्तु समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थगित रखें, अपने काम से काम रखें।
धनु राशि :- कार्य कुशलता से संतोष होगा, सामाजिक कार्य में प्रभुत्व वृद्धि होगी, कार्य समय पर बनेंगे ध्यान अवश्य दें।
मकर राशि :- कार्य सिद्धि, चिन्ता निवृत्ति, योजना फलीभूत होगी, बिगड़े कार्य परिश्रम से समय पर बनेंगे, मन शांत रखें।
कुंभ राशि :- धन हानि होगी, व्यर्थ क्लेश व अशांति से मानसिक विभ्रम, मन में उद्विघ्नता रहेगी, धन के व्यर्थ व्यय से बचें।
मीन राशि :- व्यवसायिक क्षमता मंद रहेगी, स्त्री शरीर कष्ट, मनोबल उत्साहवर्धक रहेगा, परिश्रम से कार्य बनेंगे ध्यान दें।
रोजाना बस एक इलाइची....खुल जाएंगे बंद किस्मत के ताले, बदल जाएगा जीवन! बड़ा ही चमत्कारी है यह टोटका
5 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे जीवन में कई बार ऐसा होता है कि मेहनत करने के बावजूद मनचाही सफलता हाथ नहीं लगती. रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है और जीवन में नकारात्मकता बढ़ने लगती है. भारतीय परंपरा में ऐसे समय में घरेलू नुस्खे और टोटके अपनाने की सलाह दी जाती है. इन्हीं में से एक है इलायची से जुड़े उपाय. इलायची सिर्फ स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाली मसाला नहीं है बल्कि तंत्र शास्त्र और धार्मिक दृष्टिकोण से यह सकारात्मक ऊर्जा का वाहक भी मानी जाती है. इलायची के सरल और आसान टोटके आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं.
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान ज्योतिषी शकुंतला ने कहा कि इलायची को चाय, मिठाई और भोजन में स्वाद और महक के लिए डाला जाता है. लेकिन तंत्र शास्त्र के अनुसार, इलायची सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी सोई हुई किस्मत को भी जगा सकती है. कहा जाता है कि इलायची में इतनी शक्ति है कि यह व्यक्ति के भाग्य को संवार सकती है और रिश्तों में मिठास घोल सकती है.अगर आप मेहनत के बावजूद सफलता नहीं पा रहे हैं तो इलायची का एक सरल उपाय किया जा सकता है. इसके लिए आपको हर रोज हरी इलायची लेकर उसे हरे कपड़े में बांधना होगा और फिर उसे रात में सोते समय अपने तकिए के नीचे रखना होगा. अगले दिन सुबह उठकर वह इलायची किसी बाहरी व्यक्ति को खाने के लिए दे दें. यह उपाय निरंतर करने से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगेंगे और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने लगेगी. इस प्रयोग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और मेहनत का फल मिलने में आ रही बाधाओं को समाप्त करता है.
इलायची का दूसरा उपाय वैवाहिक जीवन की मधुरता के लिए किया जाता है. अगर पति-पत्नी के बीच प्रेम धीरे-धीरे कम हो रहा है, तो शुक्रवार के दिन यह टोटका बहुत असरदार साबित हो सकता है. इसके लिए सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और तीन इलायचियों को अपने शरीर से स्पर्श कराएं. इसके बाद उन इलायचियों को किसी रूमाल या पल्लू में बांधकर पूरे दिन अपने पास रखें. अगले दिन यानी शनिवार की सुबह इन इलायचियों को पीसकर किसी मिठाई या व्यंजन में मिलाकर अपने जीवनसाथी को खिलाएं. यह प्रक्रिया लगातार तीन शुक्रवार तक करें. ऐसा करने से रिश्तों में प्यार और मधुरता बढ़ेगी और पति-पत्नी के बीच की दूरियां कम हो जाएंगी.इलायची को कई अन्य धार्मिक कार्यों में भी उपयोगी माना गया है. पूजा-पाठ में इसका प्रयोग वातावरण को पवित्र और सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. तंत्र शास्त्र के अनुसार, इलायची का सेवन और इसका प्रयोग व्यक्ति की मानसिक शांति के लिए लाभकारी होता है. यह आत्मविश्वास को बढ़ाती है और व्यक्ति के अंदर सकारात्मक सोच को जागृत करती है. यही कारण है कि इसे सफलता और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है.
संतान सुख की प्राप्ति या लम्बी उम्र की है कामना? तो इस महीने जरूर रखे यह व्रत
5 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में तीन से चार व्रत ऐसे होते हैं जब मॉ अपनी संतान की लम्बी उम्र के लिए या संतान सुख की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं. उसी में से एक है अहोई अष्टमी का व्रत. इस दिन सभी मां अपने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के लिए या संतान इच्छुक महिलाएं को संतान प्राप्ति के लिए व्रत अवश्य रखना चाहिए. इस दिन अहोई माता की भक्ति और तारों को अर्घ्य देने की परंपरा घर में खुशियों का संदेश देती है. अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद मनाया जाता है. इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं.
अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखते हैं. इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा. इस दिन संतान की सुरक्षा के लिए व्रत रखकर अहोई माता की पूजा की जाती है. इस व्रत में तारों को देखकर पारण करते हैं, वहीं कुछ स्थानों पर चंद्रोदय के बाद पारण का विधान है. इसमें मातांए अन्न और जल का सेवन नहीं करती हैं.
कब से शुरू हो रहा अहोई अष्टमी की तिथि
अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर, 2025 को दोपहर 12:24 बजे शुरू होगी. अष्टमी तिथि 14 अक्टूबर, 2025 को सुबह 1:09 बजे समाप्त होगी. अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त शाम 5:53 बजे से शाम 7:08 बजे तक रहेगा. पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अहोई अष्टमी व्रत 13 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा.
बन रहा है शुभ संयोग
इस साल अहोई अष्टमी के दिन कई शुभ संयोग भी बन रहा है. इस दिन शिव और सिद्ध के साथ आद्रा और पुनर्वसु नक्षत्र भी रहने वाला है. जिससे इस दिन का महत्व और भी शुभ हो जाता है.
शरद पूर्णिमा पर महासंयोग! एक ही रात में पाएं मां लक्ष्मी और महादेव का दोहरा वरदान
5 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल के 12 महीनों में आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व होता है, लेकिन शरद पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है. वहीं पवित्र नदी में स्नान और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है.
इस वर्ष शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर को
मिथिला पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना से सभी दुख दूर होते हैं. जीवन में खुशियों का आगमन होता है. साथ ही घर-परिवार में धन-धान्य की वृद्धि होती है.
सभी मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण
पूर्णिया के पंडित मनोत्पल झा के अनुसार, शरद पूर्णिमा का दिन न सिर्फ भगवान विष्णु और लक्ष्मी बल्कि भोलेनाथ की उपासना के लिए भी बेहद शुभ होता है. मान्यता है कि इस दिन यदि शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही जीवन में स्थायी सुख-शांति बनी रहती है.
शरद पूर्णिमा पर करें ये विशेष अभिषेक
पंडित झा बताते हैं कि शरद पूर्णिमा की सुबह स्नान करने के बाद शिव मंदिर जाएं और श्रद्धा के साथ जलाभिषेक करें. इसके बाद केसर, बेलपत्र और फूल अर्पित करें. फिर शिवलिंग पर गन्ने का रस, दूध, दही और शहद से अभिषेक करें. अभिषेक के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.
महादेव की मिलती है विशेष कृपा
ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, आर्थिक तंगी दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. शरद पूर्णिमा का यह दिन तीनों देवताओं-विष्णु, लक्ष्मी और महादेव को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम अवसर माना गया है.
करवा चौथ के दिन महिलाएं भूलकर भी ना करें यह गलतियां, वरना पति की बढ़ेगी मुश्किलें
5 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्णिया. करवा चौथ का व्रत शादीशुदा औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए करती हैं. इस दिन शादीशुदा औरतें उपवास के सोलह श्रृंगार कर कुछ खास नियमों का भी पालन करती हैं. जबकि कुछ औरतें कुछ नियमों को अनदेखा कर देती हैं जिस कारण उन्हें आने वाले दिनों में कई समस्याएं देखनी पड़ती हैं और व्रत का फल भी कम मिलता है.
बता दें कि करवा चौथ व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत में रहकर 16 श्रृंगार कर भगवान भोलेनाथ माता पार्वती और करवा माता की पूजा आराधना करती हैं और अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं.
जानकारी देते हुए पूर्णिया के पंडित मनोतपल झा कहते हैं कि कोई भी व्रत नियमों से भरा होता है. नियम का पालन करना ही व्रत होता है. ऐसे में उन्होंने कहा कि आगामी 10 को करवा चौथ का व्रत होगा. जबकि उन्होंने कहा कि इस व्रत में व्रती के लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं. इन नियमों का पालन करना व्रती के लिए बहुत जरूरी होता है. हालांकि, यह सदियों पुराने नियम हैं.
इन चीजों को छूने से घटेगी पति की आयु
वहीं करवा चौथ व्रत के दिन व्रती महिलाओं को धारदार वाली चीजों का उपयोग न करें,चाकू, सुई और किसी भी नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वहीं इसका उपयोग करने से व्रत में अशुभ माना जाता है.करवा चौथ का व्रत निर्जला होता है इसका मतलब है कि पूरे दिन खाना पीना से बचना चाहिए. सूर्योदय के बाद और चंद्रमा निकलने से पहले कुछ भी मुंह में डालने से व्रत टूट सकता है.ऐसे में कभी भूल चूक से करवा चौथ के दिन अगर कुछ भी मुंह में गलती से चला भी जाए तो आप तुरंत नहा धो कर साफ कपड़े पहने और भगवान शिव ,पार्वती ,गणेश और करवा माता से क्षमा याचना करें.और फिर व्रत जारी रखने का संकल्प लें.
काले, ब्लू और सफेद रंग के कपड़े ना पहने
इस दिन काले, नीले या फिर सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए. काले या नीले रंग को नेगेटिव माना जाता है. जबकि सफेद रंग को विधवा का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लाल, गुलाबी, पीला, नारंगी जैसे चमकीले रंगों का कपड़ा पहनना ही शुभ माना जाता है.
भूलकर भी अपनी ये सामान किसी औरत को ना दें
वहीं करवा चौथ व्रत के दिन आप अपनी मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदिया या किसी भी प्रकार का सुहाग का सामान दूसरी औरत को इस दिन भूलकर भी ना दे. ऐसा करने से आपका सौभाग्य कम होता है. वहीं करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को शांत और विनम्र रहना चाहिए. किसी से भी झगड़ा या गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. किसी भी तरह की गलत बातों और बेकार के गुस्से से बचना चाहिए.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (05 अक्टूबर 2025)
5 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे ध्यान दें।
वृष राशि :- मनोवृत्ति शील बनेगी, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, कार्यगति पर ध्यान देने से लाभ के अवसर बनेंगे।
मिथुन राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, बिगड़े कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- मन अशांत रहेगा, तनाव व उपद्रव से मानसिक बेचैनी तथा धन का व्यर्थ व्यय होगा, कार्य रुकेंगे।
सिंह राशि :- क्लेश व अशांति का वातावरण रहेगा, धन का व्यर्थ व्यय करने से बचें, कार्य में बाधा बनेगी।
कन्या राशि :- किसी के शुभ कार्य में समय बीतेगा, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, रुके कार्य ध्यान देने से बनेंगे।
तुला राशि :- स्थिति पर नियंत्रण रखें, कार्य-व्यवसाय क्षमता में वृद्धि होगी, रुके कार्य बनेंगे, आलस्य से हानि होगी।
वृश्चिक राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति से मन उद्विघ्न रहेगा, अर्थ लाभ से कार्य सिद्धि होगी, प्रयोजन से सुख होगा।
धनु राशि :- कुटुम्ब में सुख-ऐश्वर्य, कार्ययोजना फलीभूत होगी, सफलता के साधन जुटायेंगे, कार्य को समय पर पूरा करें।
मकर राशि :- मानसिक विभ्रम, मन में उद्विघ्नता रहेगी, धन का व्यय होगा, रुके कार्य बनेंगे, कार्य बाधा से कष्ट।
कुंभ राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, परिवार में सुख-शांति रहेगी, हर्ष का वातावरण रहेगा।
मीन राशि :- अधिकारियों के मेल-मिलाप से लाभ होगा, स्त्री वर्ग से प्रसन्नता रहेगी, वातावरण अनुकूल रहेगा।
कोजागरी पूर्णिमा पर करें ये 7 आसान उपाय, लक्ष्मी कृपा से धन-धान्य से भर जाएगा घर
4 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोजागरी पूर्णिमा आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि को होता है. इस साल कोजागरी पूर्णिमा 6 अक्टूबर दिन सोमवार को है. कोजागरी पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं, ऐसे में आप उस रात ज्योतिष के कुछ आसान उपायों को करके अपने धन और धान्य में बढ़ोत्तररी कर सकते हैं. कोजागरी पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से दरिद्रता और धन संकट दूर होता है. जीवन में सुख, समृद्धि, धन और वैभव की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं कोजागरी पूर्णिमा पर धन और लक्ष्मी कृपा प्राप्ति के ज्योतिष उपायों के बारे में.
कोजागरी पूर्णिमा के उपाय
1. कोजागरी पूर्णिमा की रात आप माता महालक्ष्मी की विधि विधान से पूजा करें. देवी लक्ष्मी को सफेद फूल और पीली कौड़ी चढ़ाएं. लक्ष्मी जी को खीर का भोग लगाएं. इस दौरान मंत्र ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का जाप करें. इस उपाय से आपके धन, संपत्ति, सुख और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होगी.
2. कोजागरी पूर्णिमा के अवसर पर शाम के समय तुलसी की पूजा करें. उसके नीचे गाय के घी का दीपक जलाएं और खीर का भोग अर्पित करें. ऐसा करने से घर में सुख और शांति आती है. परिवार समृद्ध होता है. घर पर लक्ष्मी जी की कृपा होती है.
3. कोजागरी पूर्णिमा पर व्रत रखकर चंद्रमा की पूजा करें. रात के समय में पानी में गंगाजल, सफेद फूल, शक्कर डालकर चंद्र देव को अर्घ्य दें. इस उपाय को करने से मानसिक शांति मिलती है और आर्थिक उन्नति होती है.
4. कोजागरी पूर्णिमा के दिन धन और संपत्ति में बढ़ोत्तरी के लिए माता लक्ष्मी को 11 पीली कौड़ियां अर्पित करें. फिर अगले दिन इन सभी कौड़ियों को अपनी तिजोरी या पर्स में रख सकते हैं. ऐसा करने से लाभ होगा.
5. कोजागरी पूर्णिमा को चावल, दूध और शक्कर से खीर बनाएं. उसे चंद्रमा की रोशनी में रख दें. आधे या एक घंटे बाद उस खीर को खाएं और परिवार के अन्य लोगों को भी दें. कोजागरी पूर्णिमा की खीर का सेवन करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है.
6. कोजागरी पूर्णिमा की रात दीपदान करें. इसके लिए मिट्टी या पीतल के दीपक में गाय के घी और रुई की बत्ती से एक दीपक जलाएं. माता लक्ष्मी का स्मरण करके उसे घर के मुख्य द्वार पर रख दें और दरवाजे को खोल दें. आपके घर में मां लक्ष्मी का वास होगा. दुख और दरिद्रता दूर होगी.
7. कोजागरी पूर्णिमा को रात में लक्ष्मी जी की पूजा करें और उनके चरणों में चांदी का एक सिक्का अर्पित करें. पूजा के अलगे दिन सुबह में उस चांदी के सिक्के को उठाकर तिजोरी या धन स्थान पर रख दें. आपके धन संपत्ति में बढ़ोत्तरी होगी और बिजनेस में भी उन्नति होगी.
दरिद्रता होगी दूर, तो घर में सुख-समृद्धि का भी होगा वास… जौ का ये टोटका कर देगा चमत्कार
4 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मनुष्य का जीवन सुख-दुख, उतार-चढ़ाव और चुनौतियों से भरा होता है. हर इंसान चाहता है कि उसके जीवन में खुशहाली, शांति और समृद्धि बनी रहे. लेकिन कई बार मेहनत और संघर्ष के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगती. इसके पीछे कर्मों के साथ-साथ ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव भी जिम्मेदार हो सकता है. ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर इंसान अपनी परेशानियों को कम कर सकता है और जीवन में सकारात्मकता ला सकता है. इन्हीं उपायों में जौ का विशेष महत्व है. धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जौ न केवल ग्रह दोषों को दूर करता है बल्कि घर में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा भी लाता है.
भारतीय संस्कृति में जौ को माना गया है पवित्र
जौ को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में पवित्र माना गया है. प्राचीन समय से ही जौ का उपयोग यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता रहा है. यह सिर्फ अनाज ही नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम भी माना जाता है.
जौ से किस्मत बदलने वाले उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जौ से किए गए कुछ उपाय मनुष्य की किस्मत को बदल सकते हैं और जीवन की बाधाओं को कम कर सकते हैं. यदि कोई व्यक्ति राहु के अशुभ प्रभाव से परेशान है तो शनिवार के दिन विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है. इसके लिए जौ के साथ कोयला, कच्चा दूध, नारियल, तिल, तांबा और दूर्वा लेकर बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए. ऐसा करने से राहु के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति स्थापित होती है. यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जिनके जीवन में बार-बार असफलताएं आ रही हों और मानसिक तनाव बना रहता हो.
जौ का हवन करना अत्यंत शुभ
इसी तरह पूर्णिमा या अमावस्या के दिन जौ का हवन करना अत्यंत शुभ माना गया है. हवन में जौ अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही यह उपाय नकारात्मक शक्तियों को भी दूर करता है. हवन से वातावरण पवित्र होता है और घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है.जौ का प्रयोग घर की दरिद्रता दूर करने के लिए भी किया जाता है.
आर्थिक तंगी को दूर करने के उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि घर में लगातार आर्थिक तंगी बनी रहती है और पैसे आते ही खर्च हो जाते हैं तो शुक्रवार के दिन जौ से मां लक्ष्मी का पूजन करना लाभकारी होता है. इसके अलावा जौ को तांबे के बर्तन में रखकर घर के उत्तर दिशा में रखने से भी आर्थिक प्रगति होती है.
इस चमत्कारी मंदिर में बलि देने के कुछ समय बाद ही जिंदा हो जाता है बकरा, मुगलों ने भी किया था आक्रमण
4 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देशभर में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपने चमत्कार और रहस्य के लिए प्रसिद्ध हैं. देश के कुछ हिस्सों में मां काली और मां के रौद्र रूपों पर पशु बलि देना शुरू हो जाता है, लेकिन बिहार में कैमूर जिले में स्थित 51 शक्तिपीठ में से एक मुंडेश्वरी भवानी शक्तिपीठ में अनोखे तरीके से बलि दी जाती है. इसकी खास बात ये है कि बिना खून बहाए इस प्रथा का निर्वहन किया जाता है. मान्यता है कि बलि देने से मां प्रसन्न होती है और मनोकामना को पूरा करती हैं. इसे भारत के सबसे प्राचीन जीवित मंदिरों में गिना जाता है और यहां देश-विदेश से लाखों भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
इस तरह दी जाती है बलि
मुंडेश्वरी भवानी शक्तिपीठ पंवरा पहाड़ी के शिखर पर बना है और पहाड़ से गुजरकर भक्त मां भवानी के दर्शन करने जाते हैं. इस मंदिर में सात्विक बलि परंपरा की प्रथा चलती आई है. यहां बकरे को मां भवानी के सामने रखा जाता है, फिर पंडित अक्षत और रोली से कुछ मंत्र पढ़कर बकरे पर पानी की छींटे मारते हैं, जिससे बकरा बेहोश होकर गिर जाता है. इसे ही मंदिर में बलि माना जाता है. कुछ देर बाद जब बकरा होश में आ जाता है तो उसे छोड़ दिया जाता है. मंदिर में बकरे या किसी भी पशु के साथ हिंसा नहीं की जाती.
इस तरह पड़ा मां का नाम मुंडेश्वरी
मां मुंडेश्वरी मंदिर में मां का आशीर्वाद पाने के लिए नारियल और लाल चुनरी चढ़ाने की प्रथा है, लेकिन किसी मनोकामना के लिए पशु को बिना दर्द दिए माता के चरणों में समर्पित किया जाता है. कहा जाता है कि मां ने राक्षस मुंड को मारने के लिए अवतार लिया और उसका वध किया, जिसकी वजह से भक्तों के बीच उन्हें मां मुंडेश्वरी के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि यह मंदिर 5वीं शताब्दी में बनाया गया था. मंदिर के प्रांगण से मां के दर्शन करने तक का सफर सीढ़ियों से होकर पूरा करना पड़ता है.
शिव-शक्ति का संगम है यह मंदिर
इसके अलावा मंदिर को मुगल इतिहास से भी जोड़ा गया है. कहा जाता है कि पहले ये मंदिर बहुत बड़ा था, लेकिन मुगलों के आक्रमण के बाद मंदिर का कुछ हिस्सा टूट गया. इस मंदिर में मां भगवती अकेली नहीं हैं, बल्कि मंदिर के गर्भ ग्रह में पंचमुखी शिव विराजमान हैं, यह स्थान शिव-शक्ति के संगम का प्रतीक है. मंदिर अष्टकोणीय आकार का है, जो भारत में अद्वितीय माना जाता है और इसमें नागर शैली की झलक देखने को मिलती है. इस मंदिर के शिलालेख और मूर्तियां गुप्तकालीन कला की झलक प्रस्तुत करते हैं.
करवाचौथ पर कैसे हुई सरगी की शुरूआत, इसको खाने के क्या होते है नियम
4 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धर्म, करवाचौथ का व्रत सभी सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिये करती हैं. इस दिन कई राज्यों में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सरगी देने की परंपरा होती है. ये परंपरा आदिकाल से चलती आ रही है. करवाचौथ पर सरगी की परंपरा और इसके नियम बहुत ही खास और भावनात्मक होते हैं. यह न सिर्फ एक व्रत की शुरुआत होती है, बल्कि सास के आशीर्वाद और प्यार का प्रतीक भी है.
सरगी की परंपरा कैसे शुरू हुई?
सरगी की परंपरा दो प्रमुख पौराणिक कथाओं से जुड़ी है:
1. माता पार्वती की कथा
जब माता पार्वती ने पहली बार करवाचौथ का व्रत रखा था, उनकी सास नहीं थीं. ऐसे में उनकी मां मैना देवी ने उन्हें सरगी दी थी. तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि अगर सास न हो, तो मां भी सरगी दे सकती है.
2. महाभारत काल की कथा
जब द्रौपदी ने पांडवों की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखा, तो उनकी सास कुंती ने उन्हें सरगी दी थी. इससे यह परंपरा ससुराल पक्ष से भी जुड़ गई.
सरगी खाने के नियम और सही समय
सरगी खाने का समय:
ब्रह्म मुहूर्त में यानी सूर्योदय से पहले, लगभग सुबह 4:00 से 5:30 बजे के बीच सरगी खाई जाती है.
सूरज निकलने के बाद सरगी खाना व्रत के नियमों के विरुद्ध माना जाता है.
सरगी में क्या-क्या होता है?
सरगी की थाली में शामिल होती हैं.
फल: सेब, केला, अनार, पपीता आदि
सूखे मेवे: बादाम, काजू, किशमिश
मिठाई: हलवा, खीर या सेवई
नारियल पानी या दूध
सात्विक भोजन: मठरी, पराठा (बिना मसाले)
श्रृंगार का सामान: बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, साड़ी आदि
क्या न खाएं सरगी में?
तेल और मसालेदार चीजें
भारी भोजन जो व्रत में परेशानी पैदा कर सकता है
सरगी का भावनात्मक महत्व
सरगी सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि सास का आशीर्वाद, प्यार, और स्नेह होता है. यह बहू को व्रत के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (04 अक्टूबर 2025)
4 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- आरोग्य भय बाधा से बचें, इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, आशानुकूल सफलता से लाभ होगा।
वृष राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, स्त्री वर्ग से हर्ष होगा, सुखद वातावरण रहेगा।
मिथुन राशि :- लेन-देन के मामले में अधिक व्यय संभव है, इष्ट मित्र से सुख एवं लाभ होगा, समय स्थिति का लाभ लें।
कर्क राशि :- अधिकारियों के मेल-मिलाप से सुख-सामर्थ्य में वृद्धि होगी, कार्य-कुशलता से लाभ अवश्य होगा ध्यान दें।
सिंह राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- परिश्रम से कुछ सफलता जुटा सकते हैं, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, परिश्रम से धन लाभ के योग बनेंगे।
तुला राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा, सामाजिक कार्यों में प्रतिष्ठा-प्रभुत्व वृद्धि होगी, कार्य समय पर करने का प्रयास करें।
वृश्चिक राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, तनाव, क्लेश व अशांति से मन विक्षुब्ध रहेगा, आरोप व विभ्रम की स्थिति रहेगी।
धनु राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक व्याधि का सामना करना पड़ेगा, स्वाभाव में उद्विघ्नता अवश्य बनेगी, धैर्य रखें।
मकर राशि :- धन लाभ होगा, सोचे कार्य समय पर पूर्ण होंगे, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, अधिकारी वर्ग से तनाव बनेगा, कार्य सावधानी से करें, स्थिति को ध्यान में रखकर आगे बढ़ें।
मीन राशि :- कार्यगति अनुकूल होगी, चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायेंगे, समय स्थिति का लाभ लें।
क्या आपने घर की दहलीज पर लगाई है नरसिंह भगवान की तस्वीर?
3 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घर की दहलीज यानी मुख्य दरवाजे की चौखट पर भगवान नरसिंह की तस्वीर लगाना सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं है, बल्कि यह जीवन में सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा लाने का एक उपाय भी माना जाता है. भगवान नरसिंह, जो भगवान विष्णु के अवतार हैं, ने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए हिरण्यकश्यप का वध किया था. उनके साहस और शक्ति का प्रतीक होने के कारण, उनके चित्र को घर की दहलीज पर रखना परिवार और घर की सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. इससे न केवल घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश भी रुक जाता है. जानिए क्यों चौखट पर नरसिंह भगवान की तस्वीर लगाना आपके जीवन के लिए लाभकारी हो सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं ज्योतिषाचार्य रवि पराशर से.
चौखट पर नरसिंह भगवान की तस्वीर लगाने का महत्व
भगवान नरसिंह ने भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए अपना शक्ति रूप प्रकट किया. उनका यह रूप न केवल भय और अन्याय का अंत करता है, बल्कि यह घर और परिवार में सुरक्षा का प्रतीक भी बनता है. जब उनकी तस्वीर घर की दहलीज पर लगाई जाती है, तो यह माना जाता है कि घर और परिवार की सुरक्षा स्वयं भगवान द्वारा सुनिश्चित होती है.
इसके अलावा, नरसिंह भगवान के चित्र को घर की चौखट पर रखने से नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से भी बचाव होता है. यह घर में शांति, स्थिरता और सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करता है.
भय और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध करके सभी प्रजा को डर और भय से मुक्त किया था. इसी कारण उनके चित्र को घर की दहलीज पर रखने से परिवार के सदस्यों के मन में किसी भी प्रकार का डर नहीं रहता. नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पाती और घर का माहौल हमेशा शांत और सकारात्मक बना रहता है.
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू धर्म में नरसिंह भगवान को शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. घर की चौखट पर उनकी तस्वीर लगाने से केवल सुरक्षा ही नहीं मिलती, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बढ़ता है. यह घर में श्रद्धा और भक्ति की भावना को जगाता है और सभी सदस्य अपने जीवन में मानसिक शांति महसूस करते हैं.
सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य
मान्यता है कि यदि नरसिंह भगवान की तस्वीर चौखट पर लगाई जाए और समय-समय पर उनकी पूजा की जाए, तो यह घर में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य लाती है. साथ ही यह रोग, द्वेष, नुकसान और हानि से भी बचाव करती है.
नोट: नरसिंह भगवान की कभी भी क्रोधी या गुस्से वाली तस्वीर चौखट पर न लगाएं. उनके शांत और मित्रवत अवतार की तस्वीर लगाना सबसे अच्छा माना जाता है. इसके साथ भक्त प्रहलाद की तस्वीर भी लगाई जा सकती है. इससे घर का माहौल और अधिक भक्तिमय और सकारात्मक बनता है.
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