धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (10 अक्टूबर 2025)
10 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल रहेगी, किसी तनाव या विवादग्रस्त होने से बचें, कार्य में सावधानी अवश्य रखें।
वृष राशि :- स्त्री वर्ग से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्य संतोषप्रद रहेगा, स्त्री वर्ग से हानि होगी, समय का ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा व प्रभुत्व वृद्धि होगी, कार्य कुशलता से संतोष अवश्य होगा।
कर्क राशि :- कार्य कुशलता से संतोष एवं नवीन कार्य योजना फलप्रद होगी, रुके कार्य परिश्रम से बनेंगे ध्यान अवश्य दें।
सिंह राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व में वृद्धि होगी, अधिकारियों की अपेक्षा से कार्य हानि होगी, कार्यगति पर ध्यान अवश्य दें।
कन्या राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार होगा, तत्परता से रुके कार्य निपटा लें, कार्य बनने से चिन्तामुक्त होंगे।
तुला राशि :- तनाव व अशांति से कष्ट होगा, दुर्घटनाग्रस्त होने से बचें, रुके कार्य समय पर करने का प्रयास अवश्य करें।
वृश्चिक राशि :- स्त्री शरीर सुख, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, आपके कार्यों का विरोध होगा, कार्य अवरोध से हानि होगी।
धनु राशि :- स्वाभाव में उद्विघ्नता व क्लेश से मन अशांत रहेगा, तनाव से बचें, कार्य अवरोध होगा, धैर्य अवश्य रखें।
मकर राशि :- सफलता के साधन जुटायेंगे, मनोबल उत्साहवर्धक रहेगा, समय का ध्यान अवश्य रखें, कार्य पर ध्यान दें।
कुंभ राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, सामाजिक विभ्रम व उद्विघ्नता से बचें, समय परिस्थिति को समझकर आगे बढ़ें।
मीन राशि :- किसी तनाव व क्लेश से बचें, मानसिक उद्विघ्नता का वातावरण बनेगा, परेशानी का अनुभव होगा।
पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए इस प्रकार करें करवाचौथ का व्रत
9 Oct, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करवाचौथ का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। सनातन धर्म में पत्नी द्वारा पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए ये व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत शिव और पार्वती जी के आदर्श प्रेम का प्रतीक भी है। करवाचौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। व्रत का संकल्प, सूर्य-चंद्र पूजा, करवे का पूजन और निर्जला व्रत करने से पति की लंबी उम्र और दंपति के बीच प्रेम बढ़ता है।
पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के उपाय: करवाचौथ पर पति की लंबी उम्र और दंपति के प्रेम को बढ़ाने के लिए निम्न उपाय किए जाते हैं-
सुबह का स्नान और साफ-सफाई
व्रत वाले दिन सुहागिन महिलाएं गंगा या किसी पवित्र जल में स्नान करके दिन की शुरुआत करें। घर और पूजा स्थल की सफाई कर, दीप और फूलों से सजाएं।
सूर्य देव और चंद्रमा की पूजा
सुबह सूर्य को अर्घ्य दें और शाम को चंद्रमा की पूजा करें। शास्त्रों में कहा गया है कि सूर्य और चंद्रमा की पूजा जीवन शक्ति और प्रेम बढ़ाने में सहायक होती है।
करवा और सिंदूर का पूजन
मिट्टी या धातु के करवे में जल और हल्दी, गुड़, चावल रखकर उसकी पूजा करें। सिंदूर और मेहंदी का विशेष महत्व है। इसे अपने हाथों और करवे में रखें।
व्रत का संकल्प और कथा का पाठ
करवाचौथ व्रत का संकल्प लें और कथा सुनें। कथा में शिव-पार्वती और समर्पण का महत्व बताया गया है, जो पति-पत्नी के प्रेम को बढ़ाता है।
उपवास और रात का चंद्र दर्शन
दिनभर निर्जला व्रत रखें और रात में साथ बैठकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। पति का हाथ पकड़कर उन्हें देखने से प्रेम और श्रद्धा बढ़ती है।
करवा चौथ शास्त्रीय महत्व
शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ व्रत रखने से पति की लंबी उम्र होती है। दंपति के बीच आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ता है। परिवार में सुख, समृद्धि और सामंजस्य बना रहता है।
हथेली से जानें व्यक्ति का स्वभाव
9 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आप किसी भी व्यक्ति की हथेली को देखकर जान सकते हैं कि वह इंसान क्रोधी स्वभाव का है या फिर शांत यानि मृदु स्वभाव का है। इसको जानने से पहले आपको हथेली को ध्यान से देखना होगा, इसके लिए कुछ बात का ध्यान रखना होगा।
ऐसी हथेली वाले होते हैं गुस्सैल
अपने किसी भी हाथ की हथेली को सामने की ओर सीधा खोलकर रख लें। अब आप अपनी तर्जनी अंगुली यानि अंगूठे के बाद वाली अंगुली और अंगुठे को ध्यान से देखें। यदि आपका अंगूठा तर्जनी अंगुली के मूल भाग के बराबरी पर आता है तो आप गुस्सैल स्वाभाव के हो सकते हैं। आपको जल्दी गुस्सा आता है। आप छोटी छोटी बातों पर गुस्सा होने वाले व्यक्ति हो सकते हैं।
ऐसी हथेली वाले होते हैं शांत स्वभाव वाले
यदि आपका अंगूठा तर्जनी अंगूली के मूल भाग से आगे तक जाता है तो आप शांत यानि मृदु स्वभाव के हो सकते हैं। आप प्राय: शांत रहने वाले व्यक्ति हो सकते हैं। आप छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं होते है। गुस्सा आता भी है तो जल्द ही खत्म भी हो जाता है।
व्रत रखने से मिलता है फल
9 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में सप्ताह के सारे दिन किसी न किसी भगवान को समर्पित हैं। जिस तरह से सोमवार का दिन भगवान शिवजी का और मंगलवार का दिन हनुमान जी का है। उसी तरह से बुधवार को भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके लिए व्रत रखा जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक व्रत रखने से भगवान खुश होते हैं। आज हम आपके लिए लाए हैं बुधवार के व्रत की कथा। व्रत रखने वाले लोगों को इस दिन यह कथा सुननी होती है।
प्राचीन काल की बात है एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल गया। कुछ दिन अपने ससुराल में रुकने के बाद व्यक्ति ने अपने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने को कहा लेकिन सास-ससुर ने कहा कि आज बुधवार है और इस दिन हम गमन नहीं करते हैं। लेकिन व्यक्ति ने उनकी बात को मानने से साफ इनकार कर दिया। आखिरकार लड़की के माता-पिता को अपने दामाद की बात माननी पड़ी और अपनी बेटी को साथ भेज दिया। रास्ते में जंगल था, जहां उसकी पत्नी को प्यास लग गई। पति ने अपना रथ रोका और जंगल से पानी लाने के लिए चला गया। थोड़ी देर बाद जब वो वापस अपनी पत्नी के पास लौटा तो देखकर हैरान हो गया कि बिल्कुल उसी के जैसा व्यक्ति उसकी पत्नी के पास रथ में बैठा था।
ये देखकर उसे गुस्सा आ गया और कहा कि कौन है तू और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठा है। लेकिन दूसरे व्यक्ति को जवाब सुनकर वो हैरान रह गया। व्यक्ति ने कहा कि मैं अपनी पत्नी के पास बैठा हूं। मैं इसे अभी अपने ससुराल से लेकर आया हूं। अब दोनों व्यक्ति झगड़ा करने लगे। इस झगड़े को देखकर राज्य के सिपाहियों ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
यह सब देखकर व्यक्ति बहुत निराश हुआ और कहा कि हे भगवान, ये कैसा इंसाफ है, जो सच्चा है वो झूठा बन गया है और जो झूठा है वो सच्चा बन गया है। ये कहते है कि फिर इसके बाद आकाशवाणी हुई कि ‘हे मूर्ख आज बुधवार है और इस दिन गमन नहीं करते हैं। तूने किसी की बात नहीं मानी और इस दिन पत्नी को ले आया।’ ये बात सुनकर उसे समझ में आया की उसने गलती कर दी। इसके बाद उसने बुधदेव से प्रार्थना की कि उसे क्षमा कर दे।
इसके बाद दोनों पति-पत्नि नियमानुसार भगवान बुध की पूजा करने लग गए। ज्योतिषियों के मुताबिक जो व्यक्ति इस कथा को याद रखता उसे बुधवार को किसी यात्रा का दोष नहीं लगता है और उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। बुधवार के दिन अगर कोई व्यक्ति किसी नए काम की शुरुआत करता है तो उसे भी शुभ माना जाता है।
गुरुवार को न करें ये काम
9 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय सभ्यता में हर दिन का अलग महत्व है। खासतौर से गुरुवार को तो धर्म का दिन मानते हैं। गुरु को लेकर एक भी मान्यता है कि यह दूसरे ग्रहों के मुकाबले ज्यादा भारी होती है। इसलिए इस दिन कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे शरीर या घर में हल्कापन आता हो क्योंकि गुरु के प्रभाव में आने वाले कारक तत्वों का प्रभाव हल्का हो जाता है. वो काम कौन से हैं, जिन्हें गुरुवार को नहीं करना चाहिए, आप भी जानिये।
ना बाल धोएं ना कटाएं
शास्त्रों के अनुसार महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति और संतान का कारक होता है। इसका मतलब यह है कि गुरु ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में गुरुवार को महिलाएं अगर अपना सिर धोती हैं या बाल कटाती हैं तो इससे बृहस्पति कमजोर होता है और पति व संतान की उन्नति रुक जाती है।
गुरु ग्रह को जीव भी कहा जाता है। जीव यानी कि जीवन। जीवन से तात्पर्य है आयु. गुरुवार को नाखून काटने और शेविंग करने से गुरु ग्रह कमजोर होता है, जिससे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उम्र में से दिन कम हो जाता है।
घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोने, कबाड़ घर से बाहर निकालने, घर को धोने या पोछा लगाने से बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर शुभ प्रभाव में कमी आती है।
गुरुवार को नारायण का दिन होता है, ये बात तो ठीक है. पर नारायण तभी प्रसन्न होंगे जब आप उनके साथ उनकी पत्नी यानी कि लक्ष्मी जी की भी पूजा करेंगे। गुरुवार को लक्ष्मी-नारायण दोनों की एक साथ पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं और पति-पत्नी के बीच कभी दूरियां नहीं आतीं. साथ ही धन में भी वृद्धि होती है।
भगवान राम के आलौकिक कार्य
9 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में भगवान राम को विष्णु का अवतार माना गया है। इनके बारे में कई ग्रंथ लिखे गए. रामचरितमानस में भगवान राम की महिमा को जो वर्णन मिलता है। वह सभी के दिलों को छू लेता है। क्या आप जानते हैं विष्णु जी के सातवें अवतार श्री राम ने मर्यादा की स्थापना और अपनी मां कैकेयी की इच्छापूर्ति के लिए राजगद्दी छोड़ दी थी और वनवास स्वीकार किया था। इसलिए ही श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।
श्री राम के जीवनकाल को महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत महाकाव्य रामयण में वर्णित किया है। राम पर तुलसीदास ने भी रामचरितमानस रचा है। राम के अलौकिक कार्यों को वाल्मीकि ने रामायण महाकाव्य में संस्कृत में वर्णित किया, जिसे तुलसीदासजी ने रामचरितमानस नाम से अवधि में रचा।
कहा जाता है कि भगवान राम का जन्म मनु के 10 पुत्रों में से एक पुत्र इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था।
चैत्र नवमी को भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। इसी उपलक्ष्य में चैत्र नवमी को रामनवमी के रूप में भी जाना जाता है।
ऐसा भी कहा जाता है कि माता सीता की रावण से रक्षा करने जाते समय रास्ते में आए समुद्र को पार करने के लिए भगवान राम ने एकादशी का व्रत किया था।
माना जाता है कि भगवान राम ने रावण को युद्ध में परास्त करने के बाद रावण के छोटे भाई विभीषण को लंका का राजा बना दिया था।
पुराणों में कहा गया है कि माता कैकेयी के कहे अनुसार वनवास जाते समय भगवान राम की आयु 27 वर्ष थी.
राम-रावण के युद्ध के समय इंद्र देवता ने श्री राम के लिए दिव्य रथ भेजा था। इसी में बैठकर भगवान राम ने रावण का वध किया था।
राम-रावण का युद्ध खत्म न होने पर अगस्त्य मुनि ने राम से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने को कहा था।
अरण्य नामक राजा ने रावण को श्राप दिया था कि मेरे वंश से उत्पन्न युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा। इन्ही के वंश में श्री राम ने जन्म लिया था। यह भी कहा जाता है कि गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप दिया था. इस श्राप से उन्हें भगवान राम ने ही मुक्ति दिलाई थी।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (09 अक्टूबर 2025)
9 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, मानसिक अशांति से कष्ट होगा, कार्य में विलम्ब से मन दु:खी होगा।
वृष राशि :- चिन्ताग्रस्त होने से बचें, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, कार्यों को समय पर पूर्ण करने का प्रयास करें।
मिथुन राशि :- तनाव व क्लेश का वातावरण रहेगा, अशांति व असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद रहेगा, धैर्य अवश्य रखें।
कर्क राशि :- किसी व्यर्थ प्रयोजन से बचें अन्यथा परेशानी में फंस सकते हैं तथा समय को ध्यान में रखकर कार्य करें।
सिंह राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति से मन दु:खी रहेगा, असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद अवश्य ही होगा।
कन्या राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, आलस्य से हानि होगी, कार्यगति पर ध्यान दें।
तुला राशि :- विवादग्रस्त होने की संभावना है, वाद-विवाद से बचने का प्रयास करें, सोचे कार्य समय पर पूर्ण होंगे।
वृश्चिक राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष होगा, दैनिक समृद्धि के साधन अवश्य ही बनेंगे, कार्य समय पर करें।
धनु राशि :- अधिकारियों से तनाव, मित्र वर्ग की उपेक्षा से मन अशांत रहेगा, तनाव पूर्ण वातावरण से अवश्य बचें।
मकर राशि :- मान-प्रतिष्ठा में कमी से तनाव, मित्र वर्ग से कष्ट, कार्यगति में बाधा बनेगी, सोचे कार्य पूर्ण करने का प्रयास करें।
कुंभ राशि :- किसी घटना का शिकार होने से बचें, चोटादि का भय बनेगा, कार्य सावधानी से करें, धैर्य अवश्य रखें।
मीन राशि :- स्त्री वर्ग से सुख-हर्ष मिलेगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, समय का लाभ अवश्य लें, अनुकूल वातावरण रहेगा।
महामृत्युंजय महादेव मंदिर का चमत्कारी कुआं, जहां दिवाली पर रोग मुक्ति के लिए आते हैं लोग, धन्वंतरि के बचे थे प्राण!
8 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिवाली का त्योहार आने वाला है. इसमें लोग सुख, समृद्धि, रोग से मुक्ति आदि के लिए मंदिरों में पूजा करते हैं. देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी अलग-अलग मान्यताओं की वजह से जाने जाते हैं. किसी मंदिर में दर्शन से कोर्ट-कचहरी के मामलों से राहत मिलती है, तो कई मंदिर ऐसे हैं, जहां मरीज रोगमुक्त होने की इच्छा लेकर पहुंचते हैं. वाराणसी में महामृत्युंजय महादेव ऐसा ही एक मंदिर है, जहां श्रद्धालु रोग मुक्ति के लिए आते हैं.
पानी के स्पर्श से होता है रोगों का नाश
धनतेरस आने वाला है. इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है. भगवान धन्वंतरि को औषधियों का देवता माना जाता है, जिसकी कृपा से हर बीमारी से मुक्ति मिल जाती है. वाराणसी में भगवान शिव और धन्वंतरि का एक ऐसा मंदिर है, जहां पानी के स्पर्श से ही बीमारियों का नाश होता है.
महामृत्युंजय महादेव मंदिर का कुआं, धन्वंतरि का आशीर्वाद
वाराणसी में महामृत्युंजय महादेव का मंदिर है. माना जाता है कि भक्त यहां आकर असामयिक मृत्यु और रोगों से मुक्ति पाते हैं. इस मंदिर को मौत पर विजय पाने का स्थान भी कहा जाता है. मंदिर में एक चमत्कारी कुआं भी है, जिसको लेकर मान्यता है कि कुएं के पानी में भगवान धन्वंतरि की औषधि और आशीर्वाद है, जिसकी कृपा से रोगों से मुक्ति मिलती है. भक्तों का मानना है कि समुंद्र मंथन के बाद भगवान धन्वंतरि ने इसी कुएं में अपनी औषधियां डाली थीं, जिससे जल चमत्कारी बन गया.
मंदिर को लेकर लोगों के बीच एक और कथा प्रचलित है. माना जाता है कि महाभारत के साथ भगवान धन्वंतरि को तक्षक नाग ने डस लिया था और जहर के प्रकोप से बचने के लिए धन्वंतरि भगवान महादेव के शरण में आए और इसी कुएं के पानी से खुद की जान बचाई.
इस दौरान उन्होंने कुएं में कई स्वास्थ्यवर्धक औषधियां भी छोड़ दीं ताकि आम जनमानस की मदद हो सके. भक्त रोगों से मुक्ति पाने के लिए कुएं के जल को पीते हैं और दूर से आने वाले भक्त अपने परिजनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जल अपने संग लेकर जाते हैं.
कभी नहीं सूखता कुएं का पानी
इतना ही नहीं, मंदिर से जुड़े लोगों का मानना है कि कुएं में मौजूद पानी कभी सूखता नहीं है और शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का काम करता है. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग भी ये मानता है कि मंदिर की मिट्टी और पानी में कई औषधीय गुण मौजूद हैं.
दिवाली पर होती है विशेष पूजा
मंदिर में सिर्फ भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है, जिसकी पूजा करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. यहां महादेव की पूजा करने से मौत के भय से मुक्ति मिलती है. सावन और दिवाली के मौके पर मंदिर में खास पूजा का आयोजन होता है और भक्तों की भीड़ लगती है.
ऐसे करें पारण, मिलेगा व्रत का पूरा फल और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद
8 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करवा चौथ हर सुहागिन महिला के जीवन में खास महत्व रखता है. यह व्रत पति की लंबी उम्र, खुशहाली और घर में सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है. व्रत की खास बात यह है कि इसे निर्जल रखा जाता है और दिन भर भूख-प्यास सहकर महिलाएं अपनी भक्ति दिखाती हैं. करवा चौथ सिर्फ एक धार्मिक दिन नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार, विश्वास और समर्पण को भी मजबूत करता है. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. करवा चौथ का व्रत और पारण सही विधि से करना बेहद जरूरी है, ताकि व्रत का पूरा फल मिल सके. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
करवा चौथ का व्रत क्यों महत्वपूर्ण है?
करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए बहुत अहम माना जाता है. मान्यता है कि यह व्रत पति की लंबी उम्र और घर में खुशहाली लाता है. इस दिन सुबह सरगी खाकर व्रत शुरू होता है और सूरज डूबने तक निर्जल व्रत रखा जाता है. शाम को सोलह श्रृंगार के साथ पूजा की जाती है और व्रत कथा सुनी जाती है. इस दिन महिलाओं द्वारा भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता की पूजा करने से घर में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है.
करवा चौथ 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल महिलाओं में थोड़ी उलझन है कि व्रत 09 अक्टूबर को रखा जाए या 10 अक्टूबर को. पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 09 अक्टूबर 2025, रात 10:54 बजे और समापन 10 अक्टूबर 2025, शाम 07:38 बजे होगा. वैदिक नियम के अनुसार सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो वही सही मानी जाती है. इसलिए, करवा चौथ 2025 10 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन पूजा करना और व्रत करना शुभ रहेगा.
करवा चौथ व्रत पारण विधि
करवा चौथ का व्रत पारण सबसे पहले चंद्रमा दर्शन के बाद किया जाता है. इसके लिए महिलाएं शाम को चंद्रोदय का इंतजार करती हैं.
1. चंद्रोदय होने के बाद भगवान शिव, गणेश और माता पार्वती की पूजा करें.
2. फिर करवा माता और चंद्रमा की पूजा करें.
3. चंद्रमा को छलनी से देखें और अर्घ दें.
4. इसके बाद अपने पति को देखें और उनसे आशीर्वाद लें.
5. पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलें.
6. अंत में कुछ मीठा खाएं.
इस विधि से पारण करने से व्रत सफल माना जाता है और पति-पत्नी के जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
करवा चौथ व्रत का महत्व
करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है. इस दिन चंद्रमा का खास महत्व है. मान्यता है कि चंद्रमा की पूजा और उसके दर्शन करने से जीवन में खुशहाली आती है. इसके अलावा पति की रक्षा होती है और परिवार में सौभाग्य बढ़ता है. इस दिन की पूजा केवल धार्मिक नहीं बल्कि भावनात्मक और पारिवारिक जुड़ाव को भी मजबूत करती है.
टिप्स: व्रत सफल बनाने के लिए
1. सुबह सरगी खाने के बाद पानी का सेवन करें.
2. पूरे दिन निर्जल व्रत रखें और सकारात्मक सोच बनाए रखें.
3. शाम को पूजा और श्रृंगार विधि से करें.
4. पारण के समय पति और परिवार के साथ खुशी और प्यार का माहौल रखें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (08 अक्टूबर 2025)
8 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायेंगे, बिगड़े कार्य बनाने के लिये प्रयास अवश्य करें।
वृष राशि :- तर्क-वितर्क से बचें, दैनिक कार्य योजना बनेगी, सफलता के साधन अवश्य जुटायेंगे, कार्य पर ध्यान दें।
मिथुन राशि :- कार्यवृत्ति अनुकूल बनेगी, कार्य योजना बनेगी, सफलता के साधन जुटायेंगे, समय का ध्यान अवश्य रखें।
कर्क राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, अर्थ-व्यवस्था अनुकूल होगी, कार्य योजना का विस्तार होगा।
सिंह राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखे, लेन-देन के कार्य में हानि की संभावना, झूठे व्यवहार से बचकर चलें।
कन्या राशि :- रुके कार्य समय पर बना लें, पारिवारिक समस्या सुलझेगी, स्त्री वर्ग से हर्ष एवं सुख रहेगा।
तुला राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, सुख लाभ, सामाजिक कार्यों में प्रतिष्ठा निश्चय ही बढ़ेगी, कार्य पर ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, कार्य अवश्य बनेंगे, स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास रहेगा, कार्य पूर्ण अवश्य करें।
धनु राशि :- तनाव, क्लेश, अशांति, किसी के धोके व अरोप में फंसने की संभावना, सावधानी से कार्य करें।
मकर राशि :- इष्ट मित्रों से क्लेश व अशांति, धोके एवं आरोप से बचें, विरोधी की गतिविधि से सावधान अवश्य रहें।
कुंभ राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक अशांति तथा मन को कष्ट होगा, विशेष दु:ख का सामना करना पड़ सकता है।
मीन राशि :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा मिलेगी, लोगों से मेल-मिलाप होगा, समय स्थिति का लाभ अवश्य लें।
इस दिन गंगा नहाने से धुल जाएंगे सारे पाप, हर कांड से मुक्ति का यही रास्ता, ये उपाय भी करें
7 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आश्विन पूर्णिमा को बेहद खास और विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है. इस दिन धार्मिक कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, गंगा स्नान, व्रत आदि करने पर भक्तों को मोक्ष प्राप्त होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भक्ति करने के लिए आश्विन मास बेहद खास है. इस मास में पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और देवी मां स्वर्ग लोक से धरती लोक पर आकर भक्तों का कल्याण करती हैं. आश्विन मास चातुर्मास का महीना है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने पर कई गुना फल प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है. चलिए विस्तार से जानते हैं.
शिव के पास सृष्टि का संचालन
हरिद्वार के विद्वान पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि आश्विन मास भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. इस मास में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना, पूजा पाठ, व्रत आदि किए जाते हैं क्योंकि इस दौरान भगवान शिव ही पूरी सृष्टि का संचालन करते हैं. आश्विन मास कृष्ण पक्ष में जहां पितरों को शांति देने और मोक्ष दिलाने के लिए पितृपक्ष के दिनों का आगमन होता है, वहीं आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रकट नवरात्रि का आगमन होने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. आश्विन मास में ही पितृ पूर्वज अपने वंशजों के पास धरती लोक पर आते हैं और देवी मां भी स्वर्ग लोक से आकर भक्तों का कल्याण करती हैं.
दुखों का नाश
आश्विन मास की पूर्णिमा पर यदि हरिद्वार में गंगा स्नान दान और भगवान शिव माता पार्वती की आराधना पूजा पाठ की जाए तो जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. आश्विन पूर्णिमा 7 अक्टूबर मंगलवार को होगी. इस दिन गंगा में स्नान करने से दैहिक, दैविक और भौतिक यानी शरीर संबंधी समस्याएं, दैविक आपदाएं से होने वाले दुखों और भौतिक प्रकार के दुखों का नाश हो जाता है. हरिद्वार में भगवान शिव की ससुराल है इसलिए आश्विन पूर्णिमा पर यहां गंगा स्नान दान और भगवान शिव की आराधना करने का सबसे अधिक महत्त्व बताया गया है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 4:13 से 6:27 बजे तक गंगा स्नान करने का शुभ मुहूर्त है.
सुनार को भूल जाएं! घर की चीज़ों से मिनटों में चमकाएं अपनी ज्वेलरी, होंगी एकदम नई जैसी
7 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चांदी के गहनों को नया जैसा चमकदार बनाए रखना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. बाजार में मिलने वाले केमिकल उत्पादों की जगह घर पर आसानी से उपलब्ध चीज़ों जैसे बेकिंग सोडा, नींबू, नमक, साबुन और मैदा से भी गहने साफ किए जा सकते हैं. ये सरल और सुरक्षित उपाय गहनों की चमक बरकरार रखते हैं और उन्हें लंबे समय तक नया जैसा बनाए रखते हैं.
चांदी के गहने को घर पर साफ करने के लिए बेकिंग सोडा और एल्युमिनियम फॉइल काफी मददगार होता है. इससे गहनों में नए जैसी चमक आती है. इसका प्रयोग करने के लिए एक बर्तन में एल्युमिनियम फॉइल बिछाकर गर्म पानी डालें, उसमें एक चम्मच बेकिंग सोडा और थोड़ा सा नमक डालें. फिर चांदी के गहने इसमें 10–15 मिनट डालकर रखें, उसके बाद धोकर सूखे कपड़े से पोंछ लें. यह तरीका जमी हुई काली परत जल्दी हटाता है.
चांदी से बने गहने को साफ करने के लिए घर में टूथपेस्ट का भी प्रयोग किया जा सकता है, इसके लिए सफेद टूथपेस्ट चाहिए. प्रयोग करने के लिए थोड़ा सा सफेद टूथपेस्ट गहनों पर लगाएँ, फिर नरम ब्रश से हल्के हाथों से रगड़ें. इसके बाद पानी से धोकर सूखे कपड़े से चमकाएं. ऐसा करने से गहने नए जैसे चमकदार हो जाते हैं.
नींबू और नमक का प्रयोग चांदी के गहने को साफ करने में काफी मदद करता है. इसके लिए आधा नींबू लेकर उसमें थोड़ा नमक डालें, फिर इसे चांदी के गहनों पर रगड़ें. इसके बाद पानी से धोकर कपड़े से पॉलिश करें. ऐसा करने से गहनों की चमक वापस आ जाएगी.
बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट घर पर चांदी के गहनों को साफ करने में बहुत उपयोगी होता है. इसके लिए एक चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी डालकर गाढ़ा पेस्ट बनाइए. इस पेस्ट को गहनों पर लगाकर ब्रश से साफ करें, फिर पानी से धोकर सूखने दें. यह खोई हुई चमक को बरकरार रखने में मदद करता है.
सिरका का प्रयोग ज्यादातर गंदगी को काटने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह एक प्रकार का एसिड है. इसी तरह चांदी के गहने को साफ करने के लिए भी सिरका और बेकिंग सोडा का पेस्ट बनाया जा सकता है. इसके लिए एक कटोरी में ½ कप सफेद सिरका लें, उसमें 2 चम्मच बेकिंग सोडा डालें. फिर गहनों को इसमें 2-3 घंटे के लिए डुबोकर रखें, उसके बाद धोकर कपड़े से पोंछ लें. इससे चांदी के गहने चमक उठेंगे.
बिना किसी केमिकल के चांदी के गहने साफ करने के लिए साबुन और पानी का प्रयोग करें. इसके लिए हल्के गुनगुने पानी में माइल्ड साबुन डालें, उसमें गहनों को 10 मिनट तक भिगोकर रखे. फिर नरम ब्रश से हल्के हाथों से रगड़कर धो लें. हल्की गंदगी के लिए यह सुरक्षित और आसान उपाय है.
चांदी के गहने को साफ करने के लिए मैदा का प्रयोग भी किया जा सकता है. इसके लिए थोड़ा सा मैदा और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें. फिर गहनों पर लगाकर 10 मिनट छोड़ दें, उसके बाद कपड़े से रगड़कर साफ कर लें. इससे गहनों में प्राकृतिक चमक आ जाएगी.
यमराज का दीपक कब और कैसे जलाना चाहिए, कभी नहीं होगी अकाल मृत्यु, जानें जरूरी बातें
7 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी यम देवता की पूजा का पर्व है, जो परिवार पर मृत्यु के भय को दूर करता है और घर में सुख, समृद्धि और सुरक्षा लाता है. इस दिन शाम के प्रदोष काल में चौमुखा दीपक घर के कोनों में घुमाकर जलाना चाहिए और पूजा के बाद इसे दक्षिण दिशा में रखना शुभ होता है. हनुमान चालीसा का पाठ करने से परिवार पर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है
छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी विशेष रूप से यम देवता की पूजा के लिए मनाई जाती है. इस दिन यम का दीपक जलाने से परिवार पर मृत्यु का भय नहीं रहता. यह त्यौहार घर में सुख-समृद्धि और सुरक्षा लाता है.
यम का दीपक जलाने का शुभ समय शाम के प्रदोष काल में होता है. इस समय परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर दीपक जलाते हैं. यह समय अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे पूजा का फल अधिक मिलता है.
यम के लिए बड़े आकार का मिट्टी का दीपक लेना चाहिए. दीपक चौमुखा होना चाहिए और इसमें चार बत्तियां लगाई जाती हैं. दीपक में सरसों का तेल भरकर इसे घर में अलग-अलग स्थानों पर घुमाना चाहिए.
दीपक को घर के कोने-कोने में ले जाकर घुमाना चाहिए. यह घर में बुरी शक्तियों को दूर करता है. दीपक जलाने से घर में सुख-शांति आती है और यम देवता की कृपा से परिवार सुरक्षित रहता है.
दीपक को जलाने के बाद इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखना चाहिए. दक्षिण दिशा यम देवता का स्थान है. दीपक रखने से घर में मृत्यु का भय नहीं रहता और यमराज की कृपा बनी रहती है.
पूजा करते समय हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए. इससे घर में हर तरह की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार पर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. पूजा में सभी सदस्य शामिल होना चाहिए.
दीपक को घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखने के बाद उसके पास नहीं जाना चाहिए. ऐसा करने से यम देवता की कृपा बनी रहती है. यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और सुरक्षित मानी जाती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (07 अक्टूबर 2025)
7 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, धन लाभ होगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे ध्यान अवश्य दें।
वृष राशि :- विवादास्पद स्थिति सामने आयेगी, इष्ट मित्रों से तनाव बनेगा, समय स्थिति को ध्यान में रखकर आगे बढ़ें।
मिथुन राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, आशानुकूल सफलता से लाभ होगा, कार्य पर ध्यान दें।
कर्क राशि :- आर्थिक असमंजस रहेगा, विरोधियों से लाभ होगा किन्तु तनाव तथा मानसिक बेचैनी कष्टप्रद रहेगा।
सिंह राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से विशेष कार्य स्थगित रखें, धन लाभ के अवसर मिलेंगे, विभ्रम की स्थिति रहेगी।
कन्या राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, वाद-विवाद से मन अस्थिर रहेगा, धैर्य से काम लें।
तुला राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति की स्थिति रहेगी, विवाद की संभावना किन्तु अर्थ लाभ से कार्य सिद्धि होगी।
वृश्चिक राशि :- लेन-देन के मामले में हानि, विरोधी तत्व कष्टप्रद होंगे, मित्रों से क्लेश, कार्य सावधानी से करें।
धनु राशि :- सतर्कता से कार्य करें, इष्ट मित्र फलप्रद होगा, क्लेश व अशांति का वातावरण बनेगा, वाद-विवाद से बचें।
मकर राशि :- दैनिक कार्यगति में बाधा आयेगी, मन असमंजस में रहेगा, व्यर्थ की बातों से बचने का प्रयास करें।
कुंभ राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा से मन असमंजस में रहेगा, समय की अनुकूलता से लाभ लें, सोच-विचार कर निर्णय लें।
मीन राशि :- कुटुम्ब की चिन्तायें मन व्याग्र रखें, कार्य विफलत्व से परेशानी होगी, समय परिस्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लें।
धनतेरस पर इस मंदिर में ले जाएं चांदी का सिक्का, कुबेर देव बना देंगे आपको धनवान, मिट्टी लेने दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
6 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूरे देश भर में 18 अक्टूबर दिन शनिवार को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि में धनतेरस का त्योहार मनाया जाने वाला है. धनतेरस के दिन मुख्यत: भगवान धन्वंतरि, भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. धनतेरस पर नमक, झाड़ू, साबुत धनिया और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन हम आपके लिए ऐसे मंदिर की जानकारी लेकर आए हैं, जहां मात्र सिक्का ले जाने से श्रद्धालु मालामाल होता है. उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम नाम का मंदिर है. मान्यता है कि इस मंदिर की मिट्टी घर ले जाने पर बरकत आती है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
शिव और कुबेर दोनों की होती है पूजा
जागेश्वर धाम में कुबेर भगवान एकमुखी शिवलिंग के साथ विराजमान हैं. यहां भगवान शिव और कुबेर दोनों की पूजा होती है. माना जाता है कि अगर किसी का कारोबार ठप पड़ गया है तो इस मंदिर के गर्भगृह की मिट्टी ले जाकर अपनी तिजोरी में रखने से आर्थिक स्थिति सुधरती है और घर में धन-धान्य बना रहता है. भक्त दूर-दूर से यहां मिट्टी लेने के लिए आते हैं.
मंदिर में चांदी का इस्तेमाल
मंदिर की एक और मान्यता है, जिसमें चांदी के सिक्के का इस्तेमाल होता है. कहा जाता है कि आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए या कर्ज से मुक्त होने के लिए चांदी का सिक्का लेकर मंदिर जाएं. वहां मंदिर में मंत्र पढ़कर और सिक्के की पूजा कराकर उसे पीले कपड़े में बांधकर अपने घर ले जाएं तो आर्थिक परेशानी से मुक्ति मिलती है. अपनी मनोकामना को पूरा कराने के लिए यहां कुबेर भगवान को खीर अर्पित की जाती है.
मंदिर की बनावट बहुत पुरानी
दिवाली और धनतेरस के मौके पर मंदिर में खास पूजा अर्चना होती है. धनतेरस पर एकमुखी शिवलिंग के साथ विराजमान कुबेर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है. यहां की मिट्टी अपने घर ले जाने के लिए भक्तों के बीच होड़ लगी रहती है. मंदिर की बनावट बहुत पुरानी है. मंदिर के निर्माण को लेकर भी संशय है. कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में हुआ, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर 9वीं और 14वीं वीं शताब्दी में बना है. मंदिर के सही निर्माण की जानकारी नहीं है. मंदिर प्रांगण में देवी-देवताओं के कई मंदिर मौजूद हैं.
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
दिशा दर्शन भ्रमण आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिले दो प्रतिष्ठित पुरस्कार
राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर
