धर्म एवं ज्योतिष
भगवान राम के वियोग में यहीं भरत ने की थी 14 साल तपस्या, गड्ढा खोदकर बनाया था विश्राम स्थल
22 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देशभर में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है और इस मौके पर अयोध्या की चमक स्वर्ग में बने महल के जैसी होती है, जो दीपों से जगमगा जाती है. अयोध्यावासी हर साल दीपावली पर भगवान राम के स्वागत के लिए दीपों से अयोध्या को सजा देते हैं, लेकिन अयोध्या में एक ऐसी जगह है, जहां भगवान राम के छोटे भाई भरत ने 14 साल की कठोर तपस्या की थी और वहीं से अयोध्या का शासन चलाया था.
भरत ने यहां बनाया था अपना स्थान
त्रेतायुग में मां कैकयी के कहने पर भगवान राम ने भरत को सिंहासन सौंपते हुए वनवास स्वीकार किया था. उस वक्त सभी की आंखों में आंसू थे, लेकिन भरत का मन सबसे ज्यादा व्यथित था. भरत के मन में भी राज्य का राजा बनने का कोई लालच नहीं था और वह अपने भाई को ही अयोध्या पर राज करते देखना चाहते थे. भगवान राम के वनवास जाने के बाद भरत ने अयोध्या से दूर नंदीग्राम में अपना स्थान लिया और 14 साल तक भगवान राम की चरण पादुका को सिंहासन पर रख अयोध्या पर राज किया था.
14 साल कड़ी तपस्या की
नंदीग्राम में बने भरत कुंड में भरत ने वियोग में 14 साल कड़ी तपस्या की थी. अयोध्या के थोड़ा दूर नंदीग्राम में बने भरत कुंड की मान्यता बहुत है. यहां एक सरोवर कुंड है, जहां लोग स्नान करने आते हैं और अपने पितृों का तर्पण भी करते हैं. भरत कुंड में 27 तीर्थों का जल है, जिसकी वजह से इसकी मान्यता बहुत ज्यादा है. माना जाता है कि भगवान राम के अयोध्या लौटने पर इसी जल से उनका अभिषेक किया गया था. वहां छोटे से बने मंदिर में आज भी भगवान राम की चरण पादुका को एक चिन्ह स्वरूप विराजित किया गया है.
वट वृक्ष की लटाएं कभी जमीन को नहीं छूती
इसके अलावा मंदिर के प्रांगण में एक वट वृक्ष भी है. माना जाता है कि इसी वट वृक्ष के नीचे बैठकर भरत ने 14 साल कड़ी तपस्या की थी और इसी वजह से वट वृक्ष की लटाएं कभी जमीन को नहीं छूती हैं. यहीं बैठकर भरत ने हनुमान जी पर कोई राक्षस समझकर बाण चलाया था और भगवान हनुमान मूर्छित होकर गिर गए थे. मूर्छित पड़े हनुमान जी को वट वृक्ष की लताओं ने उठाया था और जमीन पर रखा था. तब से माना जाता है कि लटाओं ने कभी जमीन को नहीं छुआ है. दीपावली के मौके पर नंदीग्राम में बने भरत के तपस्या स्थल पर पूजा का खास आयोजन होता है. भक्त दूर-दूर से भगवान राम और भरत के निश्छल प्रेम को दर्शाते मंदिर को देखने के लिए आते हैं.
गंगाजल का ये सटीक उपाय, घर से तुरंत दूर करेगा नकारात्मक एनर्जी
22 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर इंसान चाहता है कि उसका घर शांत, सुखद और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हो, लेकिन कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे घर में अजीब सी थकान, झुंझलाहट या बेचैनी बनी रहती है, मानो कुछ सही नहीं है. कई बार ये चीज़ें समझ में नहीं आतीं, लेकिन असर जरूर करती हैं. इसे ही लोग अक्सर नकारात्मक ऊर्जा या नेगेटिव एनर्जी कहते हैं. नेगेटिव एनर्जी कोई भूत-प्रेत वाली चीज़ नहीं होती, बल्कि ये वो माहौल है जो धीरे-धीरे हमारे सोचने, बोलने और रिश्तों को प्रभावित करने लगता है. घर में कलह, बीमारियां या बार-बार आर्थिक परेशानी आना भी इसके संकेत हो सकते हैं. ऐसे में कुछ पारंपरिक उपाय आज भी बेहद असरदार माने जाते हैं, जिनमें सबसे आसान और प्रभावी उपाय है गंगाजल का छिड़काव. ये केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि एक मानसिक शांति देने वाली प्रक्रिया भी है, जो कई लोगों के अनुभवों से जुड़ी है. इस आर्टिकल में आप जानेंगे ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी से कि घर में गंगाजल का छिड़काव कैसे करें, क्यों करें और इससे क्या फायदे मिल सकते हैं. साथ ही, इस समय चल रहे महाकुंभ के महत्व पर भी बात करेंगे, जिससे जुड़ा पवित्र जल और भी खास माना जाता है.
गंगाजल क्यों है इतना प्रभावशाली?
गंगाजल को भारत में हमेशा से पवित्र माना गया है. ऐसा माना जाता है कि इसमें सिर्फ पानी नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धता की शक्ति भी होती है. गंगाजल में प्राकृतिक औषधीय गुण होते हैं, जो वातावरण को शुद्ध करने में मदद करते हैं.
जब इसे पूरे घर में छिड़का जाता है, तो न केवल मन को सुकून मिलता है बल्कि एक नई ऊर्जा का संचार भी होता है. इसका असर तुरंत महसूस न हो, लेकिन समय के साथ घर का माहौल बदलने लगता है – जैसे हवा में हल्कापन, मानसिक शांति और रिश्तों में मिठास आना.
गंगाजल का छिड़काव कैसे करें?
1. गंगाजल साफ बर्तन में रखें – कोशिश करें कि बर्तन तांबे या मिट्टी का हो.
2. थोड़ा गंगाजल सामान्य पानी में मिलाएं – ताकि हर कोने में आसानी से छिड़काव हो सके.
3. सभी खिड़की-दरवाज़े खोलें – ताकि नेगेटिव एनर्जी बाहर जा सके.
4. घर के हर कोने में हल्का छिड़काव करें – खासकर जहां अक्सर झगड़े होते हैं या जो जगह भारी महसूस होती है.
5. मन में शांत भाव रखें – छिड़कते समय कोई सकारात्मक मंत्र या प्रार्थना कर सकते हैं.
ऐसा माना जाता है कि गंगा का जल बेहद पावन और प्रभावशाली होता है. अगर आप वहां नहीं जा सकते, तो किसी जान-पहचान वाले से वहां का जल मंगवा सकते हैं. इस जल को एक बोतल में सुरक्षित रख लें और समय-समय पर सामान्य पानी में मिलाकर घर में छिड़कते रहें. यह एक बार लिया गया जल वर्षों तक काम आ सकता है.
छिड़काव के फायदे
-घर का माहौल हल्का और सुकूनभरा होता है
-नींद में सुधार और तनाव में कमी आती है
-लगातार बीमार पड़ने की प्रवृत्ति कम होती है
-आपसी रिश्तों में नमी और टकराव में कमी आती है
-आर्थिक स्थिति में स्थिरता महसूस हो सकती है
-गंगाजल का छिड़काव कोई टोना-टोटका नहीं, बल्कि एक अनुभूत प्रक्रिया है जो पीढ़ियों से चली आ रही है. इसमें विश्वास करना न करना आपकी व्यक्तिगत सोच है, लेकिन इसे एक बार आजमाना चाहें तो नुकसान की कोई गुंजाइश नहीं. साफ-सुथरा वातावरण और सकारात्मक सोच जीवन को बेहतर बना सकती है, और अगर ये एक बोतल जल से शुरू होता है, तो क्यों न इसे अपनाया जाए?
अगले साल अक्टूबर नहीं सर्दी की ठिठुरन में होगी दिवाली, धनतेरस से लेकर छठ तक की सभी तारीख जान लीजिए
22 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूरे देश में दिवाली साल का सबसे बड़ा त्योहार है. इस बार यानी 2025 में दिवाली थोड़ा पहले आ गई. मौसम दिवाली की नहीं थी लेकिन हिन्दू पचांग के अनुासर दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को होती है, इसलिए दिवाली पहले मना ली गई लेकिन अगले साल दिवाली इतनी आगे पहुंच गई है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते. अगले साल यानी 2026 में दिवाली एकदम सर्दी के मौसम में होगी बल्कि सर्दी की ठिठुरन में होगी. हिन्दू पचांग के अनुसार अगले साल दिवाली नवंबर के महीने में होगी. आइए जानते हैं 2026 की दिवाली की तारीख और मुहूर्त.
2026 में दीपावली पूजन कब है? 2026 Diwali Kab hai
एस्ट्रोसेज पंचांग के अनुसार 2026 में दीपावली पूजन 8 नवंबर के दिन किया जाएगा. इससे आप समझ सकते हैं कि अगले साल की दिवाली कितनी आगे पहुंच गई है. अगर इस साल की दीवाली के हिसाब से देखें तो यह लगभग 18 दिन आगे है. इस तरह छठ 14-15 को मनाया जाएगा. यानी उस समय तक सर्दी की शुरुआत हो चुकी होगी और तब ठिठुरन भी हो सकती है. इसी साल दिल्ली और आसपास के इलाके में अभी से सर्दी की शुरुआत हो चुकी है. बहरहाल अब अगले साल दिवाली का शुभ -मुहूर्त और अन्य पर्व त्योहार की तारीख भी जान लीजिए.
2026 दिवाली पूजन मुहूर्त
कार्तिक मास में अमावस्या के दिन प्रदोष काल होने पर दीपावली या महालक्ष्मी पूजन मनाने का विधान है. यदि दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करे तो दूसरे दिन दिवाली मनाने का विधान है. इस हिसाब से 8 नवंबर 2026 को प्रदोष काल 17 बजकर 31 मिनट से लेकर 20 बजकर 08 मिनट तक रहेगा. 8 नवंबर 2026 को प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त तक रहता है. इसी समय लक्ष्मी पूजन का सबसे उत्तम मुहूर्त होता है. इसमें स्थिर लग्न होने से पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए. क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं. मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाए तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है.
2026 धनतेरस की तारीख
पंचांग के अनुसार अगले साल धनतेरस दिवाली से दो दिन पहले 6 नंवबर को मनाया जाएगा. इसी दिन यम दीपक भी मनाया जाएगा.
2026 भैया दूज bhai dooj 2026
अगले साल भैया दूज का त्योहार 11 नवंबर को मनाया जाएगा. 8 नवंबर को भाई दूज तिलक का समय दोपहर एक बजकर 9 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक मनाया जाएगा.
2026 छठ पूजा Chhath Puja 2026
अगले साल यानी 2026 में छठ पूजा की शुरुआत 13 नवंबर से हो जाएगी. इस दिन नहाय खाय पर्व होगा. इसके बाद अगले दिन 14 नवंबर को खरना का मुहूर्त है. वहीं 15 नवंबर को उगते हुए सूर्य को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाएगा. आखिर में 16 नवंबर को उषा अर्ध्य दिया जाएगा और इसी दिन 6 दिवसीय छठ पर्व का समापन हो जाएगा.
गुमला के ये हैं टॉप 4 पूजा पंडाल, यहां काली मां की होती है अनोखी पूजा
22 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुमला शहर के पटेल चौक, डीएसपी रोड, लोहरदगा रोड और बस डिपो में भारतीय नवयुवक संघ, मां महामाया संघ, मां भवानी संघ व विश्व भारती संघ के आकर्षक पूजा पंडाल लोगों को आकर्षित करते हैं. यहां भक्तों की भीड़ लगती है.
गुमला शहर के बीचों बीच पटेल चौक में स्थित भारतीय नवयुवक संघ का पंडाल जिले का आकर्षण का मुख्य केंद्र होता है. यहां की संचालित मूर्ति का प्रदर्शन ,आकर्षक पूजा पंडाल व माता की भक्ति श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. यहां 2004 से काली पूजा की शुरुआत हुई, तो और अब तक होते आ रही है.
गुमला शहर के डीएसपी रोड केदार बगान में मां महामाया संघ द्वारा बहुत ही आकर्षक पंडाल का निर्माण कराया गया है. यहां पंडाल को बांस से बनाया गया है और मिट्टी के क्लशा से आकर्षक ढंग से सजाया गया है ,जो लोगों को आकर्षित कर रही है.
गुमला शहर के लोहरदगा रोड कुम्हार ढलान में मां भवानी संघ द्वारा बहुत भी आकर्षक व मनमोहक पंडाल बनाया गया है. यह पंडाल मुख्य रूप से जूट के बोरा से तैयार किया गया है, जो लोगों को बहुत ही आकर्षित कर रही है.
गुमला शहर के पालकोट रोड स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के पास एक प्राचीन मंदिर है. जहां काली मां की पूजा की जा रही है. यहां की आकर्षक विद्युत साज सज्जा व सजावट लोगों को आकर्षित करती है.
गुमला शहर के लोहरदगा रोड बस डिपो दूंदुरिया में विश्व भारती संघ काली पूजा समिति द्वारा पूजा किया जा रहा है. यह जिले का प्राचीन पूजा समिति में से एक है. आकर्षक पूजा और के साथ-साथ आकर्षक विद्युत साज सज्जा लोगों को आकर्षित करती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (22 अक्टूबर 2025)
22 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- यात्रा भय, कष्ट, व्यापार बाधा, लाभ पारिवारिक समस्या, उलझन भरी रहेगी, ध्यान रखे|
वृष राशि :- राज भय रोग स्वजन सुख शिक्षा व लेखन कार्य में सफलता व प्रगति होगी|
मिथुन राशि :- वाहन भय, मातृ-पितृ कष्ट, हानि, व्यर्थ तनाव, अनाप-सनाप खर्च से परेशानी हो।
कर्क राशि :- सफलता, उन्नति, शुभ-कार्य, विवाद, उद्योग-व्यापार में उच्च की स्थिति बन सकेगी।
सिंह राशि :- शरीर कष्ट, उत्तम व्यय, खर्च, सफलता, व्यवस्था में साधारण लाभ हो सकेगा।
कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री-कष्ट, विद्या लाभ, कुछ अच्छे कार्य भी होंगे तथा संतान प्राप्त होगी।
तुला राशि :- यात्राऐं, हानि, राजभय, लाभ, शरीर कष्ट, व्यापार में सुधार, प्रगति की संभावना है।
वृश्चिक राशि :- वृत्ति से लाभ, यात्रा, सम्पति लाभ, कारोबार में उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी।
धनु राशि :- अल्प-लाभ, शरीर कष्ट, चोट आदि का भय है, शिक्षा की स्थति ठीक रहेगी।
मकर राशि :- शत्रु से हानि होने की संभावना है, शरीर सुख, उद्योग-व्यापार के लिए प्रयास करें।
कुंभ राशि :- लोगों से मेल-मिलाप के पश्चात भी कार्य अवरोध तथा बेचैनी अवश्य ही बनेगी।
मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय, लाभ-हानि, व्यय, जीवन संतोष जनक होगा।
घर की इस दिशा में लगाएं नारियल का पौधा, मिलेगा धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद, सेहत के लिए भी है वरदान
21 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नारियल का पौधा न केवल धार्मिक रूप से शुभता और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है. धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, इसे घर की दक्षिण दिशा में लगाना शुभ होता है।. पूजा-अर्चना में नारियल के उपयोग से घर में लक्ष्मी और वरुण देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह पौधा वातावरण को शुद्ध रखता है और मानसिक शांति प्रदान करता है.
नारियल का पौधा शुभता, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसे घर में लगाना बहुत मंगलकारी माना गया है. धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, घर में नारियल का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. यह पौधा वातावरण को भी शुद्ध करता है और सकारात्मकता बढ़ाता है.
नारियल का पौधा केवल समुद्री इलाकों में ही नहीं, बल्कि घर में गमले में भी आसानी से लगाया जा सकता है. उचित देखभाल और पर्याप्त धूप मिलने पर यह पौधा अच्छी तरह बढ़ता है. यह घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी शुभ माना जाता है. इसे दक्षिण दिशा में लगाना विशेष रूप से फलदायी होता है.
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि आयुर्वेद में नारियल को अमृत फल कहा गया है. यह शरीर को ऊर्जा, पोषण और रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है. नारियल पानी पीने से शरीर में जल संतुलन बना रहता है और पाचन शक्ति मजबूत होती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर को तुरंत ताजगी देते हैं और गर्मियों में यह सर्वोत्तम पेय है.
आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया कि नारियल पानी एसिडिटी, पेट दर्द और अल्सर जैसी समस्याओं में राहत देता है. वहीं, नारियल तेल कब्ज दूर करने और पाचन सुधारने में सहायक है. यह त्वचा को मॉइस्चराइज करता है और झुर्रियों को रोकता है. इसके अलावा नियमित सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि नारियल बालों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है. इसके तेल से सिर की मालिश करने पर बाल मजबूत और घने होते हैं. यह सिर की रूसी और खुजली जैसी समस्याओं को भी दूर करता है. इसके अलावा, नारियल तेल का उपयोग भोजन बनाने में करने से हृदय स्वस्थ रहता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है.
धर्म विशेषज्ञ चंद्रप्रकाश ढांढण ने बताया कि भारतीय धर्म और संस्कृति में नारियल का विशेष महत्व है. हर पूजा और धार्मिक अनुष्ठान में नारियल का उपयोग शुभ माना जाता है. गृह प्रवेश, विवाह, या यज्ञ में इसे देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है. इसे कलश पर रखने से घर में मां लक्ष्मी और वरुण देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, नारियल समृद्धि और वंश वृद्धि का प्रतीक है. हिंदू विवाह में वर-वधू के बीच नारियल का आदान-प्रदान उनके वैवाहिक जीवन की स्थिरता और एकता का संकेत देता है. इसे चढ़ाने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इसलिए नारियल को शुभ फल माना जाता है.
भाई दूज के दिन इस समय करें तिलक, मिलेगा मनचाहा वरदान!
21 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाई दूज का पर्व कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहन अपने भाई का मंगल तिलक करके उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. भैया दूज के पर्व को लेकर अक्सर मन में कई सवाल आते हैं कि यह पर्व कैसे शुरू हुआ आदि? पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज शनिदेव के बड़े भाई हैं, जिनके पिता भगवान सूर्य देव हैं. सूर्य देव की दो पुत्री हैं. यमुना और भद्रा. यमुना का उद्गम स्थल उत्तरकाशी के यमुनोत्री से माना जाता है. वहीं उत्तरकाशी के नचिकेता ताल में यमराज की गुफा भी है, जिसका रास्ता पाताल लोक तक जाने की मान्यता है. मान्यता है कि यमराज हर साल भैया दूज के दिन अपनी बहन यमुना से मिलकर यह पर्व मनाते हैं और उसके बाद वापस लौट जाते हैं. भैया दूज के दिन अपने भाई का मंगल तिलक किस समय करें कि लाभ हो? चलिए जानते हैं…
भैया दूज का पर्व रक्षाबंधन के जैसे ही मनाया जाता है. यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद मनाने का विधान बताया गया है. वैदिक पंचांग के अनुसार साल 2025 में भैया दूज का पर्व 23 अक्टूबर बृहस्पतिवार के दिन मनाया जाएगा. ठाकुर पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर बुधवार की रात 8:16 से शुरू होगी, जो 23 अक्टूबर की रात 10: 46 तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार 23 अक्टूबर को ही यह पर्व मनाने पर इसका लाभ मिलेगा.
ज्योतिषीय गणना के अनुसार भैया दूज के दिन शुभ मुहूर्त में ही भाई का मंगल तिलक करने का विधान बताया गया है. भैया दूज के दिन खास विधि से ही भाई का तिलक करने पर लाभ मिलता है. वह बताते हैं कि तिलक करने से पहले आटे से एक चौक या रंगोली बनाएं इसके बाद अपने भाई को उस चौक के ऊपर ऐसे खड़ा करें कि उनका मुख पूर्व दिशा की तरफ हो जबकि पीठ पश्चिम दिशा की तरफ हो. इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 से 3:28 तक रहेगा. इस 2 घंटे 15 मिनट के समय में ही अपने भाई का मंगल तिलक करके उनकी दीर्घायु की कामना करें.
21 या 22 अक्टूबर कब मनाया जा रहा गोवर्धन पूजन
21 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हर वर्ष गोवर्धन पूजन किया जाता है. यह दीपावली के दिन आने वाला पर्व है लेकिन इस बार अमावस्या तिथि दो दिन होने की वजह से गोवर्धन की पूजा की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. गोवर्धन पूजन दिवाली उत्सव का चौथा सबसे बड़ा उत्सव है, जिसे श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली से गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा के रूप में मनाया जाता है. लेकिन इस बार भी सवाल उठ रहा है गोवर्धन पूजा 21 अक्टूबर को होगी या 22 अक्टूबर को? आइए जानते हैं पंडितजी से कि कौन-सी तारीख सबसे शुभ मानी गई है और इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है…
गोवर्धन पूजा 2025 कब है?
ज्योतिषाचार्य मोहन स्वरूप के अनुसार, गोवर्धन पूजा हमेशा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है. इस बार प्रतिपदा तिथि का आरंभ 21 अक्टूबर की शाम से हो रही है. हिंदू धर्म में कुछ पर्व और व्रत ऐसे हैं, जो उदिया तिथि में ही मनाए जाते हैं. उदिया प्रतिपदा तिथि 22 अक्टूबर को मान्य रहेगी. ऐसे में गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्टूबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा.
कार्तिक प्रतिपदा का आरंभ – 21 अक्टूबर, शाम 5 बजकर 54 मिनट से
कार्तिक प्रतिपदा का समापन – 22 अक्टूबर, रात 8 बजकर 16 मिनट तक
गोवर्धन पूजा मुहूर्त 2025
गोवर्धन पूजा पर दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 49 मिनट तक शुभ मुहूर्त बन रहा है. इस तिथि पर स्वाति नक्षत्र और प्रीति योग का शुभ संयोग रहेगा. सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे, जहां चंद्रमा का भी संचार होने वाला है. ऐसे में यह पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त है.
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व
वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित रामनारायण मिश्रा के अनुसार, गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से है. उस दिन इंद्रदेव के अहंकार को तोड़ने के लिए कृष्ण ने अपने छोटे से अंगूठे पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था और पूरे गांव की रक्षा की थी. तब से इस पर्व पर लोग गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा करते हैं ताकि जीवन में संकट ना आए और सुख-समृद्धि बनी रहे. गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट महोत्सव भी मनाया जाता है. मंदिरों में सैकड़ों प्रकार के व्यंजन बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है. कहा जाता है कि इस दिन जो व्यक्ति भगवान को अन्न का भोग लगाता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती.
गोवर्धन पूजा विधि 2025
सुबह स्नान के बाद पूजन के शुभ मुहूर्त में घर के आंगन या मंदिर में गोबर से गोवर्धन पर्वत का स्वरूप बनाएं. उसके चारों ओर दीपक जलाएं और अन्नकूट (56 भोग) का प्रसाद अर्पित करें. गाय और गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करें और गोवर्धन महाराज की जय का जयघोष करें. पूजा के बाद घर के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करें. इस दिन गाय की पूजा करने और गौसेवा करने से विशेष पुण्य मिलता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (21 अक्टूबर 2025)
21 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- यात्रा भय, कष्ट, व्यापार बाधा, शुभ-समाचार, प्रसन्नता का योग, मित्र सहयोग अवश्य करें।
वृष राशि :- शत्रु भय, रोग, स्वजन सुख-लाभ दायक, जीवन दाम्पत्य सुख उत्तम बना रहेगा।
मिथुन राशि :- वाहन भय, मातृ-पितृ कष्ट, हानि, व्यर्थ तनाव, अनाप-सनाप खर्च से परेशानी हो।
कर्क राशि :- सफलता, उन्नति, शुभ-कार्य, विवाद, उद्योग-व्यापार में उच्च की स्थिति बन सकेगी।
सिंह राशि :- शरीर कष्ट, उत्तम व्यय, खर्च, सफलता, व्यवस्था में साधारण लाभ हो सकेगा।
कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री-कष्ट, विद्या लाभ, कुछ अच्छे कार्य भी होंगे तथा संतान प्राप्त होगी।
तुला राशि :- यात्राऐं, हानि, राजभय, लाभ, शरीर कष्ट, व्यापार में सुधार, प्रगति की संभावना है।
वृश्चिक राशि :- वृत्ति से लाभ, यात्रा, सम्पति लाभ, कारोबार में उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी।
धनु राशि :- अल्प-लाभ, शरीर कष्ट, चोट आदि का भय है, शिक्षा की स्थति ठीक रहेगी।
मकर राशि :- शत्रु से हानि होने की संभावना है, शरीर सुख, उद्योग-व्यापार के लिए प्रयास करें।
कुंभ राशि :- लोगों से मेल-मिलाप के पश्चात भी कार्य अवरोध तथा बेचैनी अवश्य ही बनेगी।
मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय, लाभ-हानि, व्यय, जीवन संतोष जनक होगा।
तिलक लगाते वक्त भाई किस दिशा में बैठे, ताकि रिश्तों में बढ़े प्यार और घर में बनी रहे पॉजिटिविटी
20 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाई दूज का त्योहार हर भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है. यह दिन रिश्ते की उस मिठास और अपनापन का प्रतीक है जो समय के साथ और मजबूत होता जाता है. दीवाली के कुछ दिन बाद मनाया जाने वाला यह पर्व बहनों के लिए अपने भाई की लंबी उम्र, तरक्की और खुशहाली की कामना करने का मौका होता है. इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी आरती करती हैं और स्वादिष्ट व्यंजन खिलाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार तिलक लगाते वक्त बैठने की दिशा का भी बहुत महत्व होता है? जी हां, जिस दिशा की ओर भाई बैठता है, वह उसकी लाइफ और रिलेशनशिप पर सीधा असर डालती है. इसलिए इस बार भाई दूज पर अगर आप चाहते हैं कि भाई के जीवन में पॉजिटिविटी, तरक्की और अच्छी सेहत बनी रहे,
1. तिलक लगाते वक्त भाई किस दिशा में बैठे
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भाई को तिलक लगाते समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए.
उत्तर दिशा धन और अवसरों की दिशा मानी जाती है. इस दिशा में तिलक करने से भाई के करियर और आर्थिक जीवन में स्थिरता आती है.
पूर्व दिशा ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा मानी जाती है. इस दिशा की ओर मुख करके तिलक करने से रिश्तों में समझ और प्यार बढ़ता है.
अगर घर में जगह की कमी हो या दिशा को लेकर कंफ्यूजन हो, तो आप मोबाइल कम्पास से सही दिशा जान सकती हैं.
2. बहन को किस दिशा में बैठना चाहिए
जब भाई उत्तर या पूर्व की ओर देख रहा हो, तो बहन को दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए. इससे एनर्जी का संतुलन बना रहता है और तिलक विधि शुभ मानी जाती है.
3. तिलक में कौन-सा रंग शुभ माना गया है
वास्तु के अनुसार, भाई दूज पर रोली (लाल रंग) से तिलक लगाना सबसे शुभ माना गया है. लाल रंग ऊर्जा, साहस और प्रेम का प्रतीक है. अगर चाहें तो थोड़ा चावल मिलाकर अक्षत तिलक भी लगा सकती हैं. यह तिलक भाई के जीवन में स्थिरता और प्रगति लाता है.
4. तिलक करते समय क्या बोलें
तिलक लगाते समय मन में शुभ विचार और आशीर्वाद रखना बहुत जरूरी है. भाई की लंबी उम्र, तरक्की और सुख-शांति की प्रार्थना करें. आप मन ही मन “सौभाग्यवती भव” या “आयुष्मान भव” जैसे आशीर्वाद के शब्द बोल सकती हैं.
5. भाई की गोद में क्या रखना शुभ होता है
कई घरों में तिलक करते वक्त भाई की गोद में पान का पत्ता, सुपारी या नारियल रखा जाता है. वास्तु के अनुसार, ये सभी चीजें पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक हैं. ये नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती हैं और रिश्ते में मधुरता बनाए रखती हैं.
6. तिलक के बाद दिशा न बदलें तुरंत
तिलक के बाद भाई को थोड़ी देर उसी दिशा में बैठने देना चाहिए. इससे उस दिशा की पॉजिटिव एनर्जी पूरी तरह ग्रहण होती है. इसके बाद बहन भाई को मिठाई खिलाए और आरती करे.
7. किस दिशा में न बैठें
वास्तु के मुताबिक, तिलक लगाते समय भाई को दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या पश्चिम-दक्षिण दिशा की ओर मुख नहीं करना चाहिए. यह दिशा भारीपन और बाधा का संकेत देती है. ऐसी दिशा में तिलक करने से मन में उदासी या झगड़े की संभावना बढ़ सकती है.
भाई दूज पर सिर्फ तिलक लगाने का नहीं बल्कि भावनाओं को जोड़ने का भी समय होता है. अगर इस दिन वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशा और ऊर्जा का ध्यान रखा जाए, तो भाई-बहन का रिश्ता और मजबूत होता है. सही दिशा में बैठकर तिलक करने से न सिर्फ भाई की उम्र लंबी होती है बल्कि परिवार में सुख, समृद्धि और पॉजिटिव एनर्जी भी बनी रहती है.
बिहार, यूपी और झारखंड में छठ पूजा के व्यंजनों में गजब का अंतर, यहां जानें सबकुछ
20 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सादगी का संगम है. बिहार से शुरू हुई यह पूजा अब उत्तर प्रदेश, झारखंड और देशभर में बड़ी श्रद्धा से मनाई जाती है. इस पर्व में सिर्फ पूजा नहीं होती, बल्कि हर घर में तैयार होने वाले पारंपरिक व्यंजन भी इसकी पहचान बन चुके हैं. छठ पूजा के प्रसाद में शुद्धता, देसी स्वाद और परंपरा का रंग साफ झलकता है. खास बात यह है कि हर राज्य में छठ के पकवानों का स्वाद और बनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है. बिहार में जहां ठेकुआ और कसर के लड्डू पूजा की जान माने जाते हैं, वहीं झारखंड में गुड़ की खीर और नारियल लड्डू की खुशबू पूरे माहौल को भक्ति से भर देती है. उत्तर प्रदेश की छठ थाली में सत्तू, चना दाल पुरी और मौसमी फल का भी अपना अलग महत्व है. आइए जानते हैं कि बिहार, यूपी और झारखंड की छठ थाली में क्या खास होता है.
बिहार के छठ प्रसाद की पहचान
बिहार में छठ पूजा का मतलब ही है स्वाद और परंपरा का संगम. यहां ठेकुआ सबसे जरूरी प्रसाद माना जाता है, जो गेहूं के आटे, गुड़ और देसी घी से बनाया जाता है. इसे लकड़ी के सांचे से सजाकर धीमी आंच पर तला जाता है, जिससे इसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है. इसके अलावा कसर के लड्डू, रसीया खीर और भुना चना भी पूजा में बनाए जाते हैं. गांवों में आज भी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की आंच में ये पकवान तैयार किए जाते हैं, जो इनके स्वाद को और भी देसी बना देते हैं.
यूपी की छठ थाली का देसी स्वाद
उत्तर प्रदेश में छठ पूजा के प्रसाद में सादगी और भक्ति दोनों का संगम दिखता है. यहां सत्तू, चावल की खीर, चना दाल पुरी, और कद्दू की सब्जी का विशेष महत्व है. बनारस, गोरखपुर और बलिया जैसे इलाकों में लोग छठ पूजा से पहले दिन कद्दू-भात और दाल का भोजन करते हैं, जिसे नहाय-खाय कहा जाता है. पूजा के दिन प्रसाद में मौसमी फल और ठेकुआ के साथ गुड़ वाली खीर जरूर रखी जाती है. यूपी के छठ व्यंजन हल्के, पवित्र और सादगी से भरे होते हैं, जो व्रत की भावना को और गहरा करते हैं.
झारखंड का पारंपरिक स्वाद
झारखंड में छठ पूजा के व्यंजनों में लोकल टच साफ नजर आता है. यहां लोग नारियल के लड्डू, तिल और गुड़ की मिठाई, अरवा चावल, और धान की पिट्ठी का प्रसाद बनाते हैं. कुछ इलाकों में रतालू की मिठाई और कद्दू-चावल का झोल भी तैयार किया जाता है. झारखंड के लोग आज भी मिट्टी के बर्तनों में ये पकवान बनाना शुभ मानते हैं. इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ता है बल्कि उसमें मिट्टी की खुशबू भी शामिल हो जाती है, जो पूजा की भावना को और गहराई देती है.
हर राज्य में एक ही भावना
चाहे बिहार हो, यूपी या झारखंड- हर जगह एक बात समान है, और वह है छठ पूजा की सच्ची भावना. हर व्यंजन में शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल होता है, बिना प्याज-लहसुन के और पूरे भक्ति भाव से तैयार किए जाते हैं. हर पकवान उस राज्य की संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाता है. बिहार का ठेकुआ जहां परंपरा का प्रतीक है, वहीं यूपी का सत्तू और झारखंड का नारियल लड्डू इस पर्व को और भी विशेष बनाते हैं.
गोवर्धन पूजा के बाद गोबर का क्या करें? फेंकने की तो बिल्कुल न करें भूल, वरना...
20 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिवाली के पांच दिवसीय त्योहारों में से गोवर्धन पूजा भी एक है. यह त्योहार दीपावली के अगले दिन यानी बलिप्रतिपदा को मनाया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण की बेहद लोकप्रिय लीला की याद में मनाए जाने वाले इस पर्व में श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत के प्रतीक की पूजा की जाती है. यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है. इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाते हैं और गाय के गोबर का गोवर्धन पर्वत बनाकर विधि-विधान से उसकी पूजा करते हैं. लेकिन, कई लोगों का एक सवाल हो सकता है कि, गोवर्धन पर्वत की पूजा के बाद गोवर का क्या करें? इधर-उधर फेंक दें तो क्या होगा?
कब है गोवर्धन पूजा 2025
पंचांग के अनुसार, इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्तूबर दिन बुधवार को की जाएगी. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है. वैसे तो गोवर्धन पूजा देश के कई हिस्सों में होती है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी ब्रज क्षेत्र में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है.
गोबर को इधर-उधर फेंकने की न करें भूल
ज्योतिष में गोवर्धन पर्वत में यूज गोबर का विशेष महत्व है. इसलिए इसे पूजा के बाद भी सुरक्षित रखना चाहिए. मान्यता है कि पूजा के बाद कभी भी इस गोबर को कूड़े या किसी अपवित्र स्थान पर नहीं फेंकना चाहिए. जब आपकी पूजा समाप्त हो जाए और तब पूरे दिन आप गोवर्धन पर्वत को उसी स्थान पर बना रहने दें और शाम के समय इसे इकठ्ठा करके एक स्थान पर करें और इसमें पूजा वाली सफ़ेद सींकें लगाएं, जिनका इस्तेमाल करवा चौथ में भी किया गया हो. पूजा के गोबर को एक् साथ इकठ्ठा करके उसके ऊपर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उस पर्वत को घर के आंगन में सुरक्षित रख दें.
पूजा के बाद गोवर्धन के गोबर से करें ये काम
आंगन-छत की लिपाई करें: पूजा के बाद गोवर्धन के गोबर से अपने आंगन या छत की लिपाई कर सकते हैं. मान्यता है कि, ऐसा करने से माता लक्ष्मी का आगमन सदैव बना रहता है और भगवान कृष्ण की भी कृपा बनी रहती है.
उपले बनाएं: पूजा के बाद गोवर्धन के बचे हुए गोबर से महिलाएं कंडे तैयार कर सकती हैं. इन कंडों को आप सर्दियों में खाना बनाने के लिए भी इस्तेमाल में ला सकती हैं. इसे घर में जलाकर वातावरण को शुद्ध भी किया जा सकता है.
खेतों में डालें: पूजा के बाद गोवर्धन पर्वत के गोबर को गोबर को खेतों में डालकर खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है. इससे फसलों की पैदावार बढ़ेगी और मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ेगी.
गमलों में डालें: आप गोबर को गमलों में डालकर पौधों के लिए खाद के रूप में उपयोग कर सकते हैं. इससे पौधे स्वस्थ और हरे-भरे रहेंगे. आप चाहें तो गोबर को स्थानीय गोशाला में भी दे सकते हैं.
दिवाली पर इस गांव में नहीं जलाया जाता एक भी दीपक, पूरी रात रखते हैं अंधेरा, दिलचस्प है इतिहास
20 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब पूरे देश में दीपावली की जगमगाहट फैली होती है, लोग नए कपड़े पहनकर पटाखे फोड़ते हैं, तब उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के कुछ गांवों में सन्नाटा पसरा होता है. इन गांवों में ना रंगोली बनती है, ना दिये जलते हैं और ना ही कोई उत्सव होता है. यहां के लोग इस दिन दीवाली नहीं, बल्कि शोक मनाते हैं. जी हां, राजगढ़ क्षेत्र के भांवा, अटारी और आसपास के कई गांवों में रहने वाले चौहान वंश के क्षत्रिय परिवार दीपावली के दिन कोई जश्न नहीं मनाते.
इसलिए नहीं मनाते हैं दिवाली
चौहान वंश के क्षत्रिय परिवार लोगों का मानना है कि इसी दिन मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की हत्या की थी. पृथ्वीराज चौहान को ये लोग अपने पूर्वज और महान योद्धा मानते हैं. इसलिए इस दिन को खुशियों के बजाय गहरे शोक और सम्मान के रूप में मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग याद में मातम मनाते हैं, जिसकी वजह से ना तो प्रकाश पर्व मनाते हैं और ना ही दिवाली का पर्व. इन गांवों में दीपावली की रात घर अंधेरे में रहते हैं, कोई बिजली की लाइट या तेल का दीया नहीं जलाता. पूजा-पाठ जरूर होती है. एक दीया जलाकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है, लेकिन फिर उस दीये को बुझा दिया जाता है और परिवार के लोग चुपचाप दिन गुजारते हैं.
सदियों से चली आ रही है परंपरा
इन गांवों में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. ये लोग अपने वीर राजा की शहादत वाले दिन कोई उत्सव नहीं मनाते. हालांकि, दीपावली की पूरी खुशी ये लोग त्यौहार के 4-5 दिन बाद एकादशी के दिन मनाते हैं. उस दिन इनके घरों में दीये जलते हैं, मिठाइयां बनती हैं और सभी मिलकर खुशियां बांटते हैं, इसे ये लोग अपनी दीपावली कहते हैं. इस अलग-सी परंपरा ने इन गांवों को बाकियों से बिल्कुल अलग बना दिया है. जहां एक ओर बाकी देश रोशनी और रंगों में डूबा होता है, वहीं यहां के लोग शौर्य, बलिदान और इतिहास को याद करते हैं. यह परंपरा ना सिर्फ श्रद्धांजलि, बल्कि भावी पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है.
पांच दिन का दिवाली पर्व
बता दें कि दिवाली का पर्व पांच दिन मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज को होता है. पांच दिन के पर्व में कार्तिक अमावस्या को गणेश-लक्ष्मी पूजन किया जाता है और यह मुख्य पर्व होता है. इस बार दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर, गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर और भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा. दिवाली महापर्व में दोस्तों और प्रियजनों के यहां मिठाइयां बाटते हैं और दिवाली की शुभकामनाएं देते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (20 अक्टूबर 2025)
20 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- यात्रा भय, कष्ट, व्यापार बाधा, शुभ-समाचार, प्रसन्नता का योग, मित्र सहयोग अवश्य करें।
वृष राशि :- शत्रु भय, रोग, स्वजन सुख-लाभ दायक, जीवन दाम्पत्य सुख उत्तम बना रहेगा।
मिथुन राशि :- वाहन भय, मातृ-पितृ कष्ट, हानि, व्यर्थ तनाव, अनाप-सनाप खर्च से परेशानी हो।
कर्क राशि :- सफलता, उन्नति, शुभ-कार्य, विवाद, उद्योग-व्यापार में उच्च की स्थिति बन सकेगी।
सिंह राशि :- शरीर कष्ट, उत्तम व्यय, खर्च, सफलता, व्यवस्था में साधारण लाभ हो सकेगा।
कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री-कष्ट, विद्या लाभ, कुछ अच्छे कार्य भी होंगे तथा संतान प्राप्त होगी।
तुला राशि :- यात्राऐं, हानि, राजभय, लाभ, शरीर कष्ट, व्यापार में सुधार, प्रगति की संभावना है।
वृश्चिक राशि :- वृत्ति से लाभ, यात्रा, सम्पति लाभ, कारोबार में उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी।
धनु राशि :- अल्प-लाभ, शरीर कष्ट, चोट आदि का भय है, शिक्षा की स्थति ठीक रहेगी।
मकर राशि :- शत्रु से हानि होने की संभावना है, शरीर सुख, उद्योग-व्यापार के लिए प्रयास करें।
कुंभ राशि :- लोगों से मेल-मिलाप के पश्चात भी कार्य अवरोध तथा बेचैनी अवश्य ही बनेगी।
मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय, लाभ-हानि, व्यय, जीवन संतोष जनक होगा।
पति-पत्नी में है मनमुटाव या बच्चों के विवाह में आ रही है अड़चनें, बस दिवाली के दिन करें आटे के दीए से ये उपाय.. बदल जाएगी किस्मत
19 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन हर घर दीपों से जगमगाता है. कहीं घी के दिए जलते हैं तो कहीं तेल के. लेकिन आज भी कई घरों और गांवों में लोग आटे के दिए जलाते हैं. दिखने में साधारण लगने वाले ये आटे के दिए दरअसल गहरी आस्था और मान्यता से जुड़े हैं. माना जाता है कि ये दिए सिर्फ घर को नहीं बल्कि जीवन को भी रोशन करते हैं.
क्या है मान्यताएं
महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने Local18 से बातचीत में बताया कि दीपावली की रात माता लक्ष्मी सभी घरों में भ्रमण करती हैं. ऐसे में घर को दीपों की रोशनी से सजाना बहुत शुभ माना जाता है. कुछ लोग मिट्टी के दिए जलाते हैं, तो कुछ आटे के दिए. आटे के दिए जलाने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं. पहला आर्थिक संकट से मुक्ति के लिए… दूसरा, गृह क्लेश यानी घर के झगड़ों से छुटकारा पाने के लिए और तीसरा विवाह से जुड़ी रुकावटों को दूर करने के लिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार इन तीनों के लिए आटे का दिया जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है.
कौनसी दिशा में जलाएं दीया
स्वामी कामेश्वरानंद जी के अनुसार दिए जलाने की दिशा भी बहुत मायने रखती है. दिए हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर जलाने चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं. दक्षिण दिशा यमराज की दिशा होती है इसलिए, वहां दिया तभी जलाया जाता है जब हम पितरों के लिए दीप जलाते हैं. घर में प्रवेश करते समय दाईं ओर दिया जलाना शुभ माना गया है. अगर कोई पीली सरसों के तेल या घी का दीपक जलाता है तो घर की ओर मुख रखते हुए उल्टे हाथ की दिशा में दीप जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है.
आटे के दीए से अड़चने होती हैं दूर
स्वामी जी बताते हैं कि अगर घर में क्लेश बढ़ रहे हों पति-पत्नी में मनमुटाव हो या बच्चों के विवाह में अड़चनें आ रहा हो, तो दीपावली की रात आटे के दीपक जलाने से यह सब दोष दूर होते हैं. नरक चतुर्दशी जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है के दिन आटे के चौमुखी दिए जलाने की खास परंपरा है. कहा जाता है कि इससे यमराज प्रसन्न होते हैं और नरक के द्वार हमारे लिए बंद हो जाते हैं. यह दीपक अकाल मृत्यु से रक्षा करता है और जीवन में उजाला भर देता है.
मिट्टी का दिया भी होता है शुभ
मिट्टी के दिए भी शुद्धता और पवित्रता के प्रतीक माने गए हैं. घर के बाहर निकलते समय अगर दीपक का मुख सड़क की ओर रखा जाए, तो यह भी शुभ माना जाता है. इससे घर में धन, सुख और शांति बनी रहती है. दीपावली की रात गणेश, लक्ष्मी और कुबेर भगवान की पूजा करने के साथ-साथ श्री सूक्त के 16 मंत्रों या कलक धारा स्रोत का पाठ करने से धन की प्राप्ति होती है.
घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी और सिंदूर से स्वस्तिक और ॐ का चिन्ह बनाएं
स्वामी जी कहते हैं कि लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किसी तांत्रिक प्रयोग में न पड़ें. घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी और सिंदूर से स्वस्तिक और ॐ का चिन्ह बनाएं… यह बहुत ही शुभ माना जाता है. इस तरह दीपावली की रात आटे के दिए जलाना केवल परंपरा नहीं बल्कि समृद्धि, शांति और सुख का प्रतीक है जो अंधकार को मिटाकर जीवन में उजाला भर देता है.
10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
पश्चिम बंगाल में भाजपा के समर्थन में उतरे डॉ. मोहन यादव, जनसभा को किया संबोधित
राहुल गांधी की 6 गारंटियां: तमिलनाडु की महिलाओं और छात्रों को हर महीने मिलेंगे 2000 रुपये।
प्रशासन का सख्त एक्शन: बिना लाइसेंस चल रही चांदी रिफाइनरी सील, मौके से आधुनिक मशीनें बरामद।
ईरान की सख्ती: अब जहाजों को लेनी होगी IRGC की इजाजत
साहब की बहाली के लिए बाबू ने मांगी घूस: 40 हजार रुपये के साथ पकड़े गए स्थापना शाखा प्रभारी।
अनुभव का सम्मान या परीक्षा का दबाव? पात्रता परीक्षा पर मप्र के शिक्षकों ने खोला मोर्चा
ग्रामीणों की बहादुरी से बची दो जानें, लेकिन अंचल और पूनम को नहीं बचा सका कोई
