धर्म एवं ज्योतिष
3 नवंबर को बनेगा दुर्लभ योग! शिव भक्तों को मिलेगा दोगुना फल, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
29 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में हर महीने की दोनों त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. इस खास दिन पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है.
दरअसल, एक महीने में 2 बार प्रदोष व्रत किया जाता है. इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत किया जाता है और भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं नवंबर के महीने में पहला प्रदोष व्रत कब आ रहा है.
इस दिन रखा जाएगा व्रत
वैदिक पंचांग के अनसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 3 नवंबर 2025 को सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर प्रारंभ होगी और 3 और 4 नवंबर 2025 की मध्यरात्रि 02 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में प्रदोष व्रत 3 नवंबर को रखा जाएगा.
सोम प्रदोष का क्या अर्थ?
सोमवार को त्रयोदशी तिथि आने पर इसे सोम प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत रखने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा अशुभ फल दे रहा हो, उसे सोम प्रदोष जरूर नियम पूर्वक रखना चाहिए. अक्सर लोग संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं.
दुर्लभ संयोग में प्रदोष
नवंबर का पहला प्रदोष व्रत 3 नवंबर 2025, सोमवार को पड़ रहा है. सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा. चूंकि सोमवार का दिन और प्रदोष व्रत दोनों ही भगवान शिव को समर्पित हैं, ऐसे में 3 नवंबर को प्रदोष व्रत करने से दोगुना फल मिलेगा. इतना ही नहीं इस दिन रवि योग भी बन रहा है, जिसे पूजा-पाठ, व्रत आदि के लिए बहुत शुभ माना गया है.
जरूर करें इन नियमों का पालन
– प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ देकर व्रत का संकल्प लें.
– इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें.
– इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेल पत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें.
– पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.
4 महीने बाद जागे हैं भगवान विष्णु...करेंगे इन 3 राशियों का कल्याण, अचानक आएगा पैसा
29 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में कार्तिक का माह बेहद महत्त्वपूर्ण माना जाता है. इस महीने कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी महीने भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद जागते हैं और संसार के पालनहार का कार्यभार संभालते हैं. यही वजह है कि इस महीने का महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है. धार्मिक स्थलों पर इस महीने सनातन धर्म को मानने वाले लोग कल्पवास भी करते हैं. इसी महीने देव उठानी एकादशी का पर्व भी मनाया जाता है. देव उठानी एकादशी के दिन से सभी तरह के शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-आराधना विधि विधान पूर्वक की जाती है. इस बार देव उठानी एकादशी के दिन कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं, जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर भी पड़ेगा. आइये जानते हैं कि देव उठानी एकादशी कब है और किन राशियों पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा.
ये रही डेट
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9:11 से शुरू होकर 2 नवंबर को सुबह 7:31 तक समाप्त होगी. ऐसी स्थिति में 1 नवंबर को देव उठानी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. दूसरी तरफ, इस दिन बन रहे अद्भुत संयोग से कुछ राशि के जातकों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. इनमें वृषभ राशि, कन्या राशि और मकर राशि के जातक शामिल हैं. इन राशियों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहेगी. धन की लक्ष्मी प्रसन्न होंगी. व्यापार में वृद्धि होगी.
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातक के लिए अचानक धन की प्राप्ति होगी. सेहत संबंधित परेशानियां दूर होंगी. करियर में सफलता प्राप्त होगी. बिजनेस में उन्नति होगी. पारिवारिक सुख और मानसिक संतुलन भी ठीक रहेगा. भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहेगी
कन्या राशि
कन्या राशि के जातक के लिए देव उठाने एकादशी बेहद शुभ मानी जा रही है. करियर और व्यवसाय में तरक्की मिलने की संभावना रहेगी. पुराने विवाद खत्म होंगे. मानसिक शांति प्राप्त होगी. भाई-बहन के रिश्ते में मजबूती आएगी. कॉलोनी मामले में पक्ष मजबूत होगा. धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होंगी. आ रहीं परेशानियां दूर होंगी.
मकर राशि
मकर राशि के जातकों को नौकरी में तरक्की मिलेगी. कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी. लव लाइफ में मधुरता आएगी. दोस्तों के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जा सकते हैं. स्वास्थ्य और आर्थिक मामले में सुधार होगा. मतभेद दूर होंगे. लंबे समय से रुका हुआ कार्य पूरा होगा. अचानक धन की प्राप्ति होगी.
आंवला नवमी कब? 3:31 घंटे का है मुहूर्त, लेकिन सुबह से चोर पंचक
29 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आंवला नवमी को अक्षय नवमी के नाम से भी जानते हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाई जाती है. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं. भगवान विष्णु को आंवले का भोग लगाते हैं. उस पेड़ के नीचे बैठक भोजन करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा पाठ और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. यह नवमी तिथि अक्षय पुण्य देने वाली है, इसलिए इसे अक्षय नवमी कहा जाता है. इस बार आंवला नवमी के दिन पूजा के लिए आपको 3:31 घंटे का मुहूर्त प्राप्त होगा. लेकिन सुबह से ही चोर पंचक लगेगा. आइए जानते हैं कि आंवला नवमी कब है? आंवला नवमी का मुहूर्त क्या है? अक्षय नवमी का महत्व क्या है?
आंवला नवमी की तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, आंवला नवमी के लिए आवश्यक कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 30 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और यह 31 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 3 मिनट तक मान्य है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर आंवला नवमी या अक्षय नवमी 31 अक्टूबर शुक्रवार को है.
आंवला नवमी मुहूर्त
आंवला नवमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 3 घंटे 31 मिनट तक है. आंवला नवमी पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 32 मिनट से प्रारंभ होगा और यह सुबह 10 बजकर 03 मिनट तक रहेगा. इस शुभ मुहूर्त में आपको आंवला नवमी की पूजा कर लेनी चाहिए.
आंवला नवमी के दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:49 ए एम से 05:41 ए एम तक है. उस दिन का शुभ समय या अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक है.
2 शुभ योग में आंवला नवमी
इस साल आंवला नवमी पर 2 शुभ योग बन रहे हैं. आंवला नवमी पर प्रात:काल में वृद्धि योग बनेगा, जो 1 नवंबर को 04:32 ए एम तक रहेगा. इस योग में आप जो शुभ कार्य करेंगे, उसके फल में वृद्धि होगी.
वहीं आंवला नवमी पर पूरे दिन रवि योग बनेगा. रवि योग में सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं. आंवला नवमी पर धनिष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 06 बजकर 51 मिनट तक है, उसके बाद से शतभिषा नक्षत्र है.
चोर पंचक में आंवला नवमी
इस बार आंवला नवमी के दिन चोर पंचक लग रहा है. चोर पंचक सुबह में 06 बजकर 48 मिनट से प्रारंभ होगा और पूरे दिन रहेगा. शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक होता है. इसमें वस्तुओं की चोरी की आशंका रहती है.
आंवला नवमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवला नवमी के दिन भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करने से पाप मिटते हैं, साथ ही अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
आंवला नवमी पर आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने से सेहत अच्छी होती है. उत्तम आरोग्य का वरदान मिलता है.
आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदें गिरती हैं, इस वजह से उसके नीचे बैठकर भोजन करने की बात कहीं गई है.
आंवला नवमी की पूजा से आपके कष्ट दूर होंगे. जीवन में सुख और शांति आएगी.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (29 अक्टूबर 2025)
29 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- प्रत्येक कार्य में विलम्ब, धन हानि, चिन्ता, असमर्थता का वातावरण क्लेशयुक्त होगा।
वृष राशि :- असमंजस-असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद रखे, सार्म्थय सुरक्षा समय की स्थिति से बनेगा।
मिथुन राशि :- योजनाएं फलीभूत हों, सफलता के साधन जुटायें तथा कार्य-दुर्घटना से बचेंगे।
कर्क राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, प्रयत्न से सफलता मिले, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- समृद्धि के साधन बनें, सतर्कता से रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
कन्या राशि :- समृद्धि के साधन बनेंगे, सामाजिक तनाव व उद्विघ्नता तथा क्लेश से अशांति अवश्य होगी।
तुला राशि :- स्वास्थ्य नरम रहे, असमर्थता के वातावरण से मानसिक उलझन बनी रहेगा।
वृश्चिक राशि :- कुटुम्ब में क्लेश व अशांति, आरोप, विभ्रम, असमंजस का वातावरण बनेगा।
धनु राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार, सफलता की कार्ययोजना बने, विशेष कार्य बन जायेंगे।
मकर राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार, चिन्ता निवृत्ति तथा सफलता के साधन अवश्य ही जुटायें।
कुम्भ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक रहें, दैनिक कार्यगति में सुधार, इष्ट मित्र सहायक बने रहेंगे।
मीन राशि :- आर्थिक कार्ययोजना पूर्ण होगी, दुर्घटना के योग बनेंगे, समय कष्टप्रद, ध्यान रखें।
करियर में सफलता दिलाता है दसवें भाव का शुक्र, लेकिन संबंधों में करवाता है दूरी
28 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शुक्र का ग्रह हमारे जीवन में प्रेम, सुंदरता, वित्तीय स्थिति और सामाजिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है. जब यह ग्रह दसवें भाव में स्थित होता है, तो इसका प्रभाव हमारे करियर, समाज में प्रतिष्ठा और पेशेवर जीवन पर गहराई से दिखाई देता है. दसवां भाव जो कि कर्म भाव भी कहलाता है, यह दिखाता है कि व्यक्ति अपने काम और प्रयासों के जरिए समाज में किस तरह की पहचान बनाता है. ऐसे में शुक्र का यहां होना यह संकेत देता है कि व्यक्ति न केवल अपनी मेहनत से सफलता पा सकता है, बल्कि इसमें आकर्षण और सौंदर्य का भी योगदान होता है. इस स्थिति में व्यक्ति अक्सर दूसरों के साथ सहजता से तालमेल बैठा लेता है, जिससे उसे प्रोफेशनल जीवन में मदद मिलती है. इसमें रचनात्मकता और कला के प्रति रुचि भी बढ़ती है, जिससे नौकरी या व्यवसाय में नई संभावनाएं खुलती हैं, लेकिन सिर्फ अच्छी स्थिति ही नहीं, शुक्र दसवें भाव में होने पर कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आ सकते हैं. कभी-कभी व्यक्ति प्रतिष्ठा के पीछे बहुत अधिक महत्व देने लगता है या फिर अपने संबंधों और करियर में संतुलन बनाए रखने में कठिनाई महसूस करता है. आइए, अब विस्तार से जानते हैं
सकारात्मक प्रभाव
1. करियर में सफलता और प्रतिष्ठा:
शुक्र दसवें भाव में होने से व्यक्ति अपने पेशेवर जीवन में जल्दी सफलता पा सकता है. लोग उसकी क्षमताओं और सौम्यता की सराहना करते हैं, जिससे समाज में उसकी अच्छी छवि बनती है.
2. संपन्नता और वित्तीय स्थिरता:
यह स्थिति व्यक्ति को वित्तीय रूप से मजबूत बनाती है. व्यवसाय या नौकरी में अच्छे अवसर मिलते हैं, जिससे जीवन में आर्थिक सुरक्षा आती है.
3. रचनात्मकता और कला का योगदान:
इस भाव में शुक्र होने से व्यक्ति में कला, संगीत, डिजाइन या रचनात्मक क्षेत्रों में रुचि और प्रतिभा बढ़ती है. यह करियर में नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर देता है.
4. संबंधों में सामंजस्य:
कार्यस्थल पर सहयोगियों और वरिष्ठों के साथ सामंजस्य बना रहता है. लोग अपने फैसले और व्यवहार में उसे समझने लगते हैं.
नकारात्मक प्रभाव
1. आत्मकेंद्रित व्यवहार:
कभी-कभी व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा और सफलता को बहुत अधिक महत्व देने लगता है. इससे वह दूसरों के प्रति संवेदनशील नहीं रह पाता.
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2. संबंधों में दूरी:
करियर के प्रति अधिक ध्यान देने से व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों में दूरी आ सकती है. परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने में कमी हो सकती है.
3. अति महत्वाकांक्षा:
शुक्र की यह स्थिति व्यक्ति में अति महत्वाकांक्षा और लालच पैदा कर सकती है. परिणामस्वरूप वह छोटे फैसलों में भी जल्दबाजी कर सकता है.
उपाय
1. संतुलित जीवन अपनाएं:
करियर और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है. समय प्रबंधन और प्राथमिकताओं को सही ढंग से समझना लाभकारी रहेगा.
2. ध्यान और योग का अभ्यास:
ध्यान और योग के माध्यम से मानसिक शांति और स्थिरता बनाए रखी जा सकती है. यह तनाव कम करने में मदद करता है.
3. संबंधों को महत्व दें:
परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना, उनके सुख-दुख में शामिल होना संबंधों को मजबूत करता है और मन को शांति देता है.
4. सकारात्मक सोच:
अति महत्वाकांक्षा और लालच से बचने के लिए सकारात्मक सोच और अपने कर्मों पर विश्वास रखना महत्वपूर्ण है.
लंका में आग लगाने के बाद हनुमानजी को यहां मिला था आराम, बहती है रहस्यमयी शीतल जलधारा
28 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिव के अवतार अंजनी पुत्र हनुमान की आस्था देश से लेकर विदेश तक में देखने को मिलती है. देश के अलग-अलग राज्यों में रामायण से जुड़े कई प्राचीन और सिद्ध पीठ मंदिर हैं, जहां भक्त मान्यताओं के आधार पर मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं. मध्य प्रदेश के चित्रकूट में भगवान हनुमान का मंदिर है, जिसका संबंध रामायण से है. मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसी जगह पर हनुमान ने अपनी पूंछ में लगी आग की जलन को शांत किया था.
बहुत प्रसिद्ध है यह मंदिर
हनुमान धारा मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित चित्रकूट धाम के पास है, जो सीतापुर से आठ किलोमीटर दूरी पर है. यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. माना जाता है कि विंध्य पर्वत शृंखला के पास मौजूद पहाड़ी पर एक शीतल जल धारा बहती है, जो कहां से निकलती है और कहां विलुप्त हो जाती है, पता नहीं चलता. ये शीतल जलधारा हनुमानजी की पूंछ और कंधे पर गिरती है. भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में भगवान हनुमान के सामने मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.
मंदिर को लेकर कई कथाएं
मंदिर को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. माना जाता है कि रावण की लंका को जलाने के बाद हनुमान के शरीर में गर्मी और जलन का स्तर बढ़ गया था और उन्होंने अपनी परेशानी को श्रीराम जी के सामने रखा. श्रीराम ने हनुमान को चित्रकूट की विंध्य पर्वत शृंखला के पास बहती शीतल धारा के बारे में बताया और कहा कि ये धारा अपनी शीतलता के लिए प्रसिद्ध है, वहां जाकर तुम्हारी समस्याओं का निदान होगा. फिर क्या, इसी शीतल धारा में हनुमान ने अपनी पूंछ की जलन को शांत किया और वहां रहकर तपस्या भी की.
इसी के बाद मंदिर का नाम हनुमान धारा पड़ा. इसी मंदिर से थोड़ा आगे मां सीता की रसोई भी है, जहां आज भी पुराने बर्तन रखे हैं. मान्यता है कि इसी जगह पर मां सीता ने ऋषियों को अपने हाथों से भोजन पका कर ग्रहण करवाया था. मंदिर बहुत प्राचीन है और भगवान हनुमान के दर्शन करने के लिए भक्तों को खड़ी सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है. हालांकि अब मंदिर के पास रोप-वे की सुविधा हो चुकी है.
हनुमानजी की कई छोटी-छोटी मूर्तियां
मंदिर में भगवान हनुमान की कई छोटी-छोटी मूर्तियां मौजूद हैं और एक मूर्ति पहाड़ पर बनाई गई है, जो काफी विशाल है. कहा जाता है कि विज्ञान भी इस बात का पता नहीं लगा पाया है कि शीतल जलधारा का उद्गम कहां से होता है और धारा कहां जाकर मिल जाती है. ये बात आज तक रहस्य बनी हुई है.
AC-कूलर बंद, रबड़ी-दूध शुरू...सर्दियों की दस्तक के साथ बदला रामलला का भोग, जानें अब क्या खा रहे प्रभु
28 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जैसे-जैसे मौसम में परिवर्तन हो रहा है, अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रभु राम के दर्शन अवधि में एक बड़ा बदलाव किया है. प्रभु राम के राग भोग में भी बड़ा बदलाव दिखने लगा है. मौसम के हिसाब से अयोध्या के बालक राम को भोग भी लगाया जाने लगा है. सुबह की ठंडक और शाम की सिहरन को देखते हुए प्रभु राम को अब गुनगुने पानी से स्नान कराया जा रहा है. भोग में मौसमी परिवर्तन के अनुसार बादाम, काजू, पिस्ता और किशमिश जैसे पौष्टिक ड्राई फूड अर्पित किए जा रहे हैं, ताकि प्रभु राम को किसी प्रकार बदलते मौसम में कोई दिक्कत न हो.
क्या-क्या खिलाया जा रहा
अयोध्या में लंबे संघर्ष के बाद प्रभु राम का भव्य मंदिर बना है. अब राम मंदिर में बालक राम 5 वर्ष के रूप में विराजमान है. ऐसे में उनकी सेवा आराधना एक बालक के रूप में पुजारी करते हैं. जब-जब मौसम बदलता है, तब-तब उनके भोग में बदलाव होता है. बदलते मौसम को देखते हुए प्रभु राम को सुबह हल्के गुनगुने पानी से स्नान कराया जा रहा है. भोग की थाली में अब तुलसी दल से सुसज्जित खीर, माखन, मिश्री के साथ पंच मेवा का भोग लगाया जा रहा है. भोग में रबड़ी पेड़ा, काजू बादाम लगाया जाता है. दूध में पिसता मिलाकर गर्म करके प्रभु राम को दिया जा रहा है. भोजन में पूड़ी, सब्जी और हलवा का भोग लगाया जा रहा है. गर्भ गृह में एसी कूलर नहीं चलाया जा रहा है. केवल दोपहर में ही पंखे का उपयोग हो रहा है. जल्द ही बालक राम ऊनी वस्त्र में दर्शन देंगे. कंबल और रजाई की भी व्यवस्था की जाएगी.
मौसम बदलते ही बदलाव
राम मंदिर के एक पुजारी ने बताया कि बदलते मौसम को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. प्रतिवर्ष मौसम के हिसाब से प्रभु राम के भोग राग में बदलाव किया जाता है. राम मंदिर ट्रस्ट के सहयोगी विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि मौसम के हिसाब से प्रभु राम के भोग राग में बदलाव किया जाता है. प्रभु राम को सुबह गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता है. पुजारी गर्मी पहुंचाने वाले पदार्थ का भोग भी लगते हैं.
सिर्फ एक पोटली से बदल जाएगी किस्मत! लक्ष्मी-नारायण रहेंगे सालभर खुश, घर में बरसेगी दौलत
28 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में हर तिथि हर वार का अत्यधिक महत्व शास्त्रों में बताया गया है. उन्हीं तिथियों में से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन विशेष रूप से आंवले के पेड़ का पूजन होता है. अगर आंवला नवमी के दिन कुछ विशेष उपाय कर लिए जाएं तो सालभर लक्ष्मी-नारायण प्रसन्न रहते हैं.
वैदिक पंचांग के अनुसार, 30 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शुरू होकर 31 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी. इसके बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि शुरू होगी. इस अनुसार उदयातिथि के अनुसार 31 अक्टूबर को आंवला नवमी मनाई जाएगी
आंवला नवमी पर जरूर करें यह उपाय
1. लक्ष्मी नारायण की कृपा पाने के लिए इस दिन आंवला के वृक्ष की कपूर और घी के दीपक से आरती करें और 108 बार परिक्रमा करें. इसके साथ ही आंवला के वृक्ष के नीचे ब्राह्मण, गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं. साथ ही खुद भी वृक्ष के पास भोजन करें. ऐसा करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति होती है और परिवार के सदस्यों की उन्नति भी होती है.
2. अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा करें और फिर एक पीला कपड़ा लें. उसमें 4 आंवले जो एक दिन पहले के तोड़े हुए हैं उन्हें उस कपड़े में रख लें. इसके बाद उस पोटली को तांबे या पीतल के बर्तन में रख कर अपने बेडरूम की अलमारी में रख लें. हर माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवले बदलें. ऐसा सिर्फ आपको 5 नवमी तिथियों तक करना है. इससे आपको लाभ दिखने लगेगा.
3. अगर पारिवारिक कलह मचा हुआ है तो, अक्षय नवमी के दिन तिल के तेल का दीया जलाकर उससे आंवले के पेड़ की पूजा करें और आरती उतारें. फिर इसके बाद उस दीपक में अपने और अपने जीवनसाथी से 5 कपूर उसार कर डाल दें और दीपक को आंवले के पेड़ के नीचे रखकर घर आ जाएं. ध्यान रहे कि इस उपाय को पति-पत्नी को साथ में करना है तभी इसका शुभ फल प्राप्त होगा और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आएगी.
4. अक्षय नवमी के दिन आंवले के पौधे का दान करना बहुत उत्तम माना गया है. इसके साथ ही आप भी अपने घर की उत्तर दिशा में आंवला का वृक्ष लगाएं. अगर उत्तर दिशा में पौधा लगाना संभव नहीं है तो पूर्व दिशा में भी लगा सकते हैं. ऐसा करने से वास्तु दोष दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, जिससे परिवार के सभी सदस्यों की समस्याएं दूर होती हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (28 अक्टूबर 2025)
28 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- प्रत्येक कार्य में विलम्ब, धन हानि, चिन्ता, असमर्थता का वातावरण क्लेशयुक्त होगा।
वृष राशि :- असमंजस-असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद रखे, सार्म्थय सुरक्षा समय की स्थिति से बनेगा।
मिथुन राशि :- योजनाएं फलीभूत हों, सफलता के साधन जुटायें तथा कार्य-दुर्घटना से बचेंगे।
कर्क राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, प्रयत्न से सफलता मिले, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- समृद्धि के साधन बनें, सतर्कता से रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
कन्या राशि :- समृद्धि के साधन बनेंगे, सामाजिक तनाव व उद्विघ्नता तथा क्लेश से अशांति अवश्य होगी।
तुला राशि :- स्वास्थ्य नरम रहे, असमर्थता के वातावरण से मानसिक उलझन बनी रहेगी।
वृश्चिक राशि :- कुटुम्ब में क्लेश व अशांति, आरोप, विभ्रम, असमंजस का वातावरण बनेगा।
धनु राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार, सफलता की कार्ययोजना बने, विशेष कार्य बन जायेंगे।
मकर राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार, चिन्ता निवृत्ति तथा सफलता के साधन अवश्य ही जुटायें।
कुम्भ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक रहें, दैनिक कार्यगति में सुधार, इष्ट मित्र सहायक बने रहेंगे।
मीन राशि :- आर्थिक कार्ययोजना पूर्ण होगी, दुर्घटना के योग बनेंगे, समय कष्टप्रद, ध्यान रखें।
यूपी में यहां है अनोखा शिव मंदिर, जहां शिव अकेले विराजमान, माता पार्वती और नंदी नहीं
27 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में स्थित नैमिषारण्य, भारत के प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है। इसे ‘तपस्थली’ और ‘तीर्थों का राजा’भी कहा जाता है. इसी पवित्र भूमि पर स्थित देवदेवेश्वर धाम एक ऐसा शिव मंदिर है, जो अपनी दिव्यता, पौराणिक महत्ता और चमत्कारी परंपराओं के कारण प्रसिद्ध है. श्रद्धालु मानते हैं कि यह मंदिर द्वापर युग में स्थापित हुआ था. यहां भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं. देश विदेश से लोग भगवान शिव की आराधना करने के लिए आते हैं.इस मंदिर की मानता है कि हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है.
देवदेवेश्वर धाम नैमिषारण्य से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह मंदिर गोमती नदी के तट पर बसा है. हरियाली, पवित्र सरिताएं और प्राकृतिक सौंदर्य इस स्थल को अत्यंत आध्यात्मिक बना देते हैं. मंदिर का मुख्य गर्भगृह विशाल शिवलिंग को समर्पित है, जो काला लाल सफेद पत्थर से निर्मित है. जिसके बारे में कहा जाता है कि यह स्वयंभू शिवलिंग हैं. केरल महाराष्ट्र मध्य प्रदेश उत्तराखंड छत्तीसगढ़ कर्नाटक बिहार गुजरात असम अन्य राज्यों से यहां शिव भक्त आते हैं इस मंदिर के आसपास खजूर के वृक्ष काफी संख्या में दिखाई देते हैं.
धार्मिक मान्यता और आस्था
देवदेवेश्वर धाम में पूजा-अर्चना करने से रोग, दुख और बाधाओं का नाश होता है. भक्तों का विश्वास है कि यहाँ जल चढ़ाने मात्र से भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं.सावन के महीने में यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं और रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप एवं शिवपुराण पाठ करते हैं.
मंदिर की विशेषता
देव देवेश्वर धाम की विशेषता है. यह दुनिया का एकमात्र ऐसा शिव धाम है जहां भगवान शिव अकेले निवास करते हैं. यहां माता पार्वती और नंदी विराजमान नहीं है.
नैमिषारण्य का धार्मिक परिप्रेक्ष्य
नैमिषारण्य स्वयं हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है. कहा जाता है कि यहाँ 88,000 ऋषियों ने सप्तऋषि यज्ञ किया था.स्कंद पुराण और महाभारत में नैमिषारण्य का विस्तार से उल्लेख है. इसी भूमि पर व्यास मुनि ने महाभारत का पाठ किया था.इसलिए देवदेवेश्वर धाम का इस क्षेत्र में होना इसकी पवित्रता को और भी बढ़ा देता है.
सावन माह का मेला
इस दौरान लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं. पूरा क्षेत्र “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठता है. भक्ति संगीत, भजन मंडलियाँ, रुद्राभिषेक और झांकियाँ इस पर्व को भव्य बनाती हैं.
महाशिवरात्रि उत्सव
इस दिन मंदिर को फूलों से सजाया जाता है. रातभर भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर दूध, शहद, बेलपत्र चढ़ाते हैं. यह माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव स्वयं इस धाम में प्रकट होते हैं.
क्या है एक हफ्ते वाला निकाह...खुद हो जाता है खत्म, किसको इसकी इजाजत, क्या कहते हैं मौलाना?
27 Oct, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लाम में निकाह को एक पवित्र और स्थायी रिश्ता माना गया है, जो जिम्मेदारी और इज्जत पर आधारित होता है. लेकिन कुछ जगहों पर निकाह मुताह नाम से एक अस्थायी निकाह की बात सामने आती है, जिसे लेकर लोगों में अलग-अलग राय देखने को मिलती है. आखिर क्या है ये निकाह मुताह? इस बारे में पूरी जानकरी करने के लिए लोकल 18 ने अलीगढ़ के चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से बातचीत की. मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन बताते हैं कि निकाह मुताह को इस्लाम में असली निकाह नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह अस्थायी तौर पर कुछ शर्तों के साथ किया जाने वाला संबंध होता है.
कैसे आया सामने
मौलाना इफराहीम के अनुसार, निकाह मुताह में एक तय समय सीमा होती है. जैसे एक दिन, एक हफ्ता या एक महीना और उस अवधि के बाद यह रिश्ता अपने आप खत्म हो जाता है. इसमें तलाक की आवश्यकता नहीं होती. इस तरह का अमल इस्लाम में नाजायज और हराम माना गया है. हां, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दौर में एक समय के लिए इसकी इजाजत दी गई थी. जब जंगों का दौर था और लोग महीनों तक अपने घर-परिवार से दूर रहते थे. उस वक्त फितने या गुनाह से बचने के लिए अस्थायी तौर पर यह अनुमति दी गई थी.
कोई गुंजाइश नहीं
मौलाना इफराहीम बताते हैं कि बाद में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ने खुद इस पर मनादी कर दी और इसे हमेशा के लिए खत्म कर दिया. अब कयामत तक के लिए निकाह मुताह को हराम कर दिया गया है. आज जो लोग निकाह मुताह करते हैं, वे दरअसल एक अस्थायी मजे या संबंध के लिए ऐसा करते हैं और उसे जायज ठहराते हैं. ये इस्लाम की नजर में बिल्कुल गलत है. इस्लाम में इस तरह के निकाह या अस्थायी संबंध की कोई गुंजाइश नहीं है.
धन-संपत्ति में वृद्धि देता है दूसरे भाव का चंद्रमा, जानिए सकारात्मक नकारात्मक असर और उपाय
27 Oct, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्योतिष में चन्द्रमा का स्थान हमारे मन, भावनाओं और जीवन की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालता है. जब चन्द्रमा दूसरे भाव यानी द्वितीय भाव में होता है, तो इसका असर सीधे हमारे धन, परिवार, बोलने की आदत और खाने-पीने की इच्छाओं पर पड़ता है. द्वितीय भाव धन का घर माना जाता है और यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक है. ऐसे में चन्द्रमा के इस स्थान से जुड़े गुण और दोष को समझना बहुत जरूरी है. सकारात्मक रूप में, यदि चन्द्रमा अच्छे दृष्टिकोण में हो, तो व्यक्ति भावुक होते हुए भी अपनी संपत्ति और परिवार के मामलों में संतुलन बनाए रख सकता है. उसे बोलने में मिठास और लोगों से जुड़ने की कला भी मिलती है. वहीं नकारात्मक स्थिति में, चन्द्रमा लालच, चिंता और मानसिक अस्थिरता को जन्म दे सकता है. यह आत्मविश्वास की कमी और पारिवारिक मामलों में विवाद का कारण भी बन सकता है.
इस आर्टिकल में हम जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह से कि जब चन्द्रमा दूसरे भाव में हो तो यह व्यक्ति के जीवन में कैसे बदलाव लाता है, इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव क्या हैं और किन उपायों से इन दोषों को कम किया जा सकता है. साथ ही सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर जीवन में संतुलन और मानसिक शांति लाई जा सकती है.
चन्द्रमा दूसरे भाव के सकारात्मक प्रभाव
1. धन और संपत्ति में वृद्धि
दूसरे भाव में चन्द्रमा अगर अच्छे दशा और दृष्टि में हो, तो व्यक्ति की आमदनी और संपत्ति में वृद्धि होती है. वह अपनी कमाई को समझदारी से इस्तेमाल करता है और वित्तीय मामलों में स्थिरता बनाए रखता है.
2. मधुर वाणी और सामाजिक संपर्क
इस स्थिति में व्यक्ति की बोलने की शैली में मिठास आती है. लोग उससे जुड़ना पसंद करते हैं और सामाजिक संबंध मजबूत बनते हैं. यह व्यक्तित्व को आकर्षक बनाता है और पेशेवर जीवन में भी लाभ पहुंचाता है.
3. खाने-पीने में संतुलन और स्वादबोध
चन्द्रमा दूसरे भाव में होने से व्यक्ति खाने-पीने के मामले में विवेकशील बनता है. उसे स्वाद और पौष्टिकता का ध्यान रखने की आदत होती है, जिससे स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है
चन्द्रमा दूसरे भाव के नकारात्मक प्रभाव
1. धन की चिंता और मानसिक तनाव
यदि चन्द्रमा कमजोर या दोषपूर्ण हो, तो व्यक्ति धन को लेकर हमेशा चिंतित रहता है. वह आर्थिक असुरक्षा महसूस कर सकता है और अनावश्यक खर्चों में उलझ सकता है.
2. भावनात्मक अस्थिरता
दूसरे भाव में कमजोर चन्द्रमा व्यक्ति को अत्यधिक भावुक और संवेदनशील बना सकता है. छोटी-छोटी बातों पर जल्दी दुख या क्रोध हो सकता है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक जीवन प्रभावित होता है.
3. अत्यधिक लालच और विवाद.
कुछ मामलों में यह स्थिति लालच और वाणी में कटुता पैदा कर सकती है. व्यक्ति परिवार और कारोबार में विवादों में फंस सकता है और गलत फैसले लेने की संभावना बढ़ जाती है.
उपाय और सुझाव
1. रूपये और सोने की सुरक्षा
दूसरे भाव में चन्द्रमा कमजोर हो तो अपने धन की देखभाल करें. अनावश्यक खर्च कम करें और निवेश सोच-समझकर करें.
2. पानी और दूध का दान
सप्ताह में किसी गरीब या जरूरतमंद को दूध, पानी या खाने का दान करने से चन्द्रमा की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मानसिक शांति मिलती है.
3. सकारात्मक विचार और ध्यान
रोज़ाना 10–15 मिनट ध्यान या प्राणायाम करने से मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता आती है. यह उपाय चित्त को शांत करने और चिंता को कम करने में मदद करता है.
4. चांदी का गहना या चांदी की थाली
घर में चांदी के बर्तन या गहने रखने से चन्द्रमा की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. विशेष रूप से पूजा में चांदी का इस्तेमाल लाभकारी माना गया है.
महाभारत काल में शुरू हुआ था छठ महापर्व...जानें कौन मनाया था सबसे पहले, पूजा की है अनसुनी कहानी
27 Oct, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छठ पूजा बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों में धूमधाम से मनाई जाती है. ऐसे में आज हम छठ पूजा के बारे में बताएंगे कि सबसे पहले छठ पूजा कौन मनाया था. महाभारत के अनुसार कर्ण ने सूर्य देव की उपासना के लिए छठ पूजा की थी.
छठ महापर्व काफी धूम धाम के साथ मनाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर सबसे पहले यह पर्व किसने मनाया था और क्यों.... महाभारत के अनुसार, कर्ण का जन्म कुंती के गर्भ से हुआ था, जो सूर्य देव के आशीर्वाद से संभव हुआ था. कुंती ने विवाह से पहले सूर्य देव की कृपा से कर्ण को जन्म दिया था. परंतु समाज के डर से उन्हें कर्ण को छोड़ना पड़ा था.
इस घटना के वर्षों बाद जब कर्ण बड़े योद्धा बन चुके थे, तब उन्होंने अपने पिता सूर्य देव की उपासना करने के लिए छठ पूजा की. कर्ण और कुंती के पुनर्मिलन में छठ पूजा की भूमिका महाभारत के युद्ध के दौरान, कुंती और कर्ण का पुनर्मिलन हुआ, जिसमें कुंती ने कर्ण को अपनी सच्चाई बताई.
इसके बाद कर्ण ने कुंती की भावनाओं को सम्मान देते हुए सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए छठ पूजा की. ऐसा माना जाता है कि इस पूजा के माध्यम से उन्होंने सूर्य देव से शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त किया.
यह पूजा न केवल धार्मिकता का प्रतीक है, बल्कि कर्ण के अपने परिवार और समाज के प्रति कर्तव्यों को भी दर्शाती है. छठ पूजा के धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में छठ पूजा का बहुत महत्व है. क्योंकि इसमें भक्तजन भगवान सूर्य से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं.
यह पूजा चार दिन तक चलती है, जिसमें व्रत, स्नान, और अर्घ्य देने जैसे कठिन नियमों का पालन किया जाता है. मान्यता है कि इस पूजा से मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है, और भक्तों को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान मिलता है.
कर्ण की छठ पूजा से जुड़ी धार्मिक शिक्षाएं, कर्ण का छठ पूजा करना कई धार्मिक संदेश भी देता है. धर्म के प्रति आस्था: कर्ण ने समाज और परिवार के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए पूजा की, जो उनकी धार्मिक आस्था को दिखाता है.
परिवार और समाज के प्रति कर्तव्य: कर्ण का जीवन त्याग और साहस का प्रतीक है, और उनकी पूजा से यह संदेश मिलता है कि समाज के प्रति हमारे कर्तव्य कितने महत्वपूर्ण हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (27 अक्टूबर 2025)
27 Oct, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य-व्यवस्था अनुकूल हो, समय पर सोचे कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
वृष राशि :- विरोधी तत्व परेशान करें, आरोप व क्लेश से असमंजस की स्थिति होगी।
मिथुन राशि :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल, धन लाभ व आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
कर्क राशि :- समय अनुकूल नहीं विशेष कार्य स्थिगित रखें तथा शासकीय कार्य में हानि होगी।
सिंह राशि :- सतर्कता से रुके कार्य निपटा लेवें, संघर्ष से सफलता के योग अवश्य बन जायेंगे।
कन्या राशि :- तर्क-वितर्क से बचें, अनेक प्रकार की बाधायें, मन असमंजस में रहे, कार्य अवरोध होगा।
तुला राशि :- धन हानि, असमंजस की स्थिति अवश्य ही बनेगी विशेष कार्य अवरोध होगा।
वृश्चिक राशि :- मान-प्रतिष्ठा, सुख-भोग, एश्वर्य एवं समृद्धि के साधन आप अवश्य ही जुटायेंगे।
धनु राशि :- मानसिक बेचैनी, तनाव संभव तथा कार्यगति में सुधार तथा चिन्ता कम होगी।
मकर राशि :- सामाजिक कार्य में प्रभुत्व वृद्धि बने, धन का लाभ तथा आशानुकूल सफलता मिलेगी।
कुम्भ राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक हो, कार्यकुशलता से संतोष तथा कठिन योजना बन जायेगी।
मीन राशि :- कार्य-कुशलता के योग बनेंगे, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझें, ध्यान रखें।
ग्रह बाधा और कर्ज से चाहिए मुक्ति, तो आज विनायकी चतुर्थी पर करें ये उपाय, संकट होंगे दूर!
26 Oct, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विनायक चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त 10:58 ए एम से 01:12 पी एम के बीच है. आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में है. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. आज कार्तिक विनायक चतुर्थी पर नागुला चविथी भी मनाई जाती है. यह मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मनाई जाती है. मान्यता है कि यह पर्व उत्तर भारत के नाग पंचमी के समान होता है, जिसमें नाग देवता की पूजा की जाती है.
ग्रह बाधा और कर्ज मुक्ति का उपाय
पुराणों में विनायकी चतुर्थी का उल्लेख मिलता है. विनायकी व्रत की शुरुआत करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद पीले वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को साफ करें.
इसके बाद गजानन की प्रतिमा के सामने दूर्वा, सिंदूर और लाल फूल अर्पित करें और बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं. इनमें से 5 लड्डुओं का दान ब्राह्मणों को करें और 5 भगवान के चरणों में रखें और बाकी प्रसाद में वितरित करें.
पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, और संकटनाशक गणेश स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. ‘ऊं गं गणपतये नमः’ ‘मंत्र का 108 बार जाप करें. शाम के समय गाय को हरी दूर्वा या गुड़ खिलाना शुभ माना जाता है.
यदि संभव हो तो चतुर्थी का व्रत रखें, इससे ग्रह बाधा और ऋण जैसे दोष शांत होते हैं. ऋणमोचन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है.
विनायक चतुर्थी का महत्व
मान्यता है कि विनायक चतुर्थी के दिन जातक गणपति से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास भी रख सकते हैं. ज्ञान और धैर्य दो ऐसे नैतिक गुण हैंए जिनका महत्व सदियों से मनुष्य को ज्ञात है. जिस मनुष्य के पास ये गुण हैं, वह जीवन में काफी उन्नति करता है और मनोवान्छित फल प्राप्त करता है.
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