धर्म एवं ज्योतिष
काल भैरव जयंती कब है? भगवान शिव के हैं रौद्र स्वरूप, तंत्र-मंत्र की होगी सिद्धि, जानें तारीख, मुहूर्त
8 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की उत्पत्ति मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था. इस वजह से हर साल इस तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है. काल भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर हो जाती है. तंत्र और मंत्र की सिद्धि के लिए भी काल भैरव पूज्यनीय हैं. ग्रह दोषों से मुक्ति के लिए भी काल भैरव की पूजा होती है. काल भैरव की जयंती के दिन व्रत और पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, रोग और दोष भी मिट जाते हैं. आइए जानते हैं काल भैरव जयंती की तारीख, मुहूर्त और शुभ योग के बारे में.
काल भैरव जयंती की तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, काल भैरव जयंती के लिए मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 नवंबर को रात में 11 बजकर 8 मिनट से होगा. अष्टमी तिथि 12 नवंबर को रात 10 बजकर 58 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर काल भैरव जयंती 12 नवंबर दिन बुधवार को मनाई जाएगी.
इस बार काल भैरव जयंती के दिन 2 शुभ योग बन रहे हैं. काल भैरव जयंती पर शुक्ल और ब्रह्म योग बनेंगे. शुक्ल योग प्रात:काल से शुरू होकर सुबह 08 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से ब्रह्म योग होगा, जो पूरी रात तक रहेगा. उस दिन अश्लेषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 06 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. फिर मघा नक्षत्र होगा.
काल भैरव जयंती मुहूर्त
वैसे तो काल भैरव की पूजा आप दिन में कर सकते हैं. सुबह 06:41 ए एम से लेकर 09:23 ए एम तक शुभ समय है, उसके बाद शुभ-उत्तम मुहूर्त 10:44 ए एम से 12:05 पी एम तक है. काल भैरव जयंती पर निशिता पूजा का महत्व है, इसमें तंत्र और मंत्र की साधना की जाती है. काल भैरव जयंती पर निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से देर रात 12 बजकर 32 मिनट तक है.
काल भैरव जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त 04:56 ए एम से लेकर 05:49 ए एम तक रहेगा. उस दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है. उस दिन का राहुकाल दोपहर में 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 26 मिनट तक है.
क्यों हुई काल भैरव की उत्पत्ति?
स्कंद पुराण की कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्म देव को स्वयं पर घमंड हो गया. उसके आवेग में आकर वे भगवान शिव का अपमान करने लगे. इस दौरान वे काफी क्रोधित हो गए थे, जिससे उनका चौथा सिर जलने लगा था. तब भगवान शिव ने काल भैरव को उत्पन्न किया. शिव आज्ञा पर काल भैरव ने ब्रह्मा जी का चौथा सिर काट दिया.
इस वजह से उन पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा, इससे मुक्ति के लिए काल भैरव शिव की नगरी काशी गए. जहां पर उनको ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिली. फिर काल भैरव काशी में हमेशा के लिए रह गए. वे काशी के कोतवाल के रूप में आज भी पूजे जाते हैं. इनके दर्शन के बिना काशी की यात्रा पूरी नहीं होती है. काल भैरव की एक कथा प्रजापति दक्ष को दंडित करने का है, जो माता सती के पिता थे.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (08 नवंबर 2025)
8 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद हो, कार्यकुशलता से संतोष होगा, ध्यान दें।
वृष राशि :- शारीरिक क्षमता में कमी, उदासीनता, विरोधी तत्वों से बचिये, ध्यान दें।
मिथुन राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, दूसरों के कार्यों से परेशानी, खिन्नता अवश्य बनेगी।
कर्क राशि :- मन में तनाव, धन और सामर्थ्य फलप्रद होगा तथा कार्यगति मन विक्षुब्ध रखेगी।
सिंह राशि :- दूसरों के कार्यों में समय नष्ट न करें, स्त्री-वर्ग से तनाव तथा क्लेश अवश्य होगा।
कन्या राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, अग्नि-चोटादि का भय, आशानुकूल सफलता मिलेगी।
तुला राशि :- प्रयत्न सफल हों, मित्र-वर्ग से तनाव, मानसिक अशांति, विभ्रम बेचैनी बनेगी।
वृश्चिक राशि :- चिन्तायें कम हों, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, धन-लाभ, सफलता के साधन जुटायें।
धनु राशि :- समय व्यर्थ जायेगा, कार्य में विलम्ब व बाधा, इष्ट-मित्रों से हानि होगी, धैर्य रखें।
मकर राशि :- अधिकारियों से तनाव, क्लेश, मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- अनायास विभ्रम, मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता मन को कष्टप्रद रखेगी।
मीन राशि :- धन और शक्ति व्यर्थ जायेगी, मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व में वृद्धि के योग बनेंगे।
आज का पंचांग : रोहिणी व्रत और वृषभ राशि में चंद्रमा, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त
7 Nov, 2025 07:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज 7 नवंबर 2025, शुक्रवार का दिन मार्गशीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि है। इस तिथि के देवता वायु देव हैं, जो धरती पर जीवनदायी हवा के प्रतीक माने जाते हैं। यह दिन नए भवन निर्माण, तीर्थयात्रा और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना गया है। आज रोहिणी व्रत भी है, जो विशेष फलदायी माना जाता है।
आज का पंचांग
विक्रम संवत: 2081
मास: मार्गशीर्ष
पक्ष: कृष्ण पक्ष द्वितीया
दिन: शुक्रवार
योग: परिध
नक्षत्र: रोहिणी
करण: गर
चंद्र राशि: वृषभ
सूर्य राशि: तुला
सूर्योदय: सुबह 06:47 बजे
सूर्यास्त: शाम 05:58 बजे
चंद्रोदय: शाम 06:55 बजे
चंद्रास्त: सुबह 08:37 बजे
शुभ नक्षत्र और कार्य
आज चंद्रमा वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में विराजमान हैं। यह नक्षत्र ब्रह्मा देव का है और इसका स्वामी ग्रह चंद्रमा है। रोहिणी नक्षत्र को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन कुआं खोदने, भूमि खरीदने, मंदिर निर्माण, पौधरोपण, बीज बोने या स्थायी कार्य शुरू करने के लिए उत्तम समय है।
आज का वर्जित समय
आज राहुकाल सुबह 10:59 से 12:23 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करना टालना चाहिए। इसी तरह यमगंड, गुलिक काल, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् समयों से भी बचना बेहतर रहेगा।
आज का राशिफल : वृषभ राशि में चंद्रमा का गोचर, इन राशियों की खुलेगी किस्मत!
7 Nov, 2025 07:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति दूसरे भाव में होगी. आज के दिन अपने निजी विचारों को छोड़कर दूसरों के विचारों को अपनाने की जरूरत है. कार्यस्थल पर भी आप सहयोगात्मक रवैया रखें. बिजनेस में ग्राहकों या बिजनेस पार्टनर को पूरा रेस्पॉन्स दें. परिजनों से बात करते समय आपके लिए समाधानकारी व्यवहार अपनाना उचित रहेगा. वाणी पर संयम बरतें, अन्यथा किसी से वाद-विवाद या मनमुटाव हो सकता है. समय पर भोजन भी मिलने की संभावना कम है. इससे तनाव हो सकता है. आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें. अनावश्यक खर्च हो सकता है.
वृषभ- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति पहले भाव में होगी. आज का दिन उत्साह और प्रसन्नतापूर्ण रहेगा. कार्यस्थल पर आप अपना निर्धारित काम समय पर पूरा करने की कोशिश करेंगे. स्वास्थ्य अच्छा रहने से सुख और आनंद की अनुभूति होगी. सगे-संबंधियों या मित्रों से उपहार मिलेगा. कहीं घूमने जाने का कार्यक्रम बन सकता है. स्वादिष्ट भोजन आपके दिन को खुशहाल बनाएगा. आर्थिक लाभ की संभावना है. वैवाहिक जीवन का उत्तम सुख प्राप्त कर सकेंगे. प्रेम जीवन में आपके साथी का रवैया सकारात्मक रहेगा.
मिथुन- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति बारहवें भाव में होगी. आज तन और मन की अस्वस्थता और बेचैनी रहेगी, इस कारण आपको वाणी और व्यवहार में सावधानी बरतने की जरूरत है. आंखों में दर्द होने की भी संभावना है. परिवार के सदस्यों या सगे- संबंधियों के साथ मतभेद हो सकता है. आपकी बातचीत या व्यवहार के कारण गलतफहमी खड़ी हो सकती है. दुर्घटना से बचें. आय की अपेक्षा व्यय अधिक होने से चिंता बढ़ेगी. व्यर्थ के कार्यों में शक्ति खर्च होगी. किसी के साथ संघर्ष न हो, इसका ध्यान रखें. आध्यात्मिकता और ईश्वर भक्ति से मानसिक शांति मिलेगी.
कर्क- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति ग्यारहवें भाव में होगी. आज आपका मन चिंता से मुक्त होगा. दोस्तों के साथ मुलाकात होगी. मित्रों से विशेष लाभ होगा. नियमित आय में वृद्धि होने के साथ अन्य तरीके से आर्थिक लाभ भी होगा. शादी के इच्छुक व्यक्तियों का रिश्ता पक्का हो सकता है. दांपत्यजीवन में आनंद व्याप्त रहेगा. तन और मन से स्वस्थ रहेंगे. किसी रमणीय पर्यटन स्थल की यात्रा से आपके आनंद में बढ़ोतरी होगी. पत्नी और संतान से लाभ होगा.
सिंह- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति दसवें भाव में होगी. आज आपके सभी काम सरलतापूर्वक पूरे होंगे. व्यवसाय में सफलता मिलेगी. बहुत दिनों से पड़ा अधूरा काम पूरेे होने से आपको प्रसन्नता होगी. आपका प्रभुत्व और प्रभाव बढ़ेगा. सरकारी कामकाज और पिता से लाभ मिलने के संकेत हैं. मानसिक स्वास्थ्य मन को प्रफुल्लित रखेगा. गृहस्थजीवन में आनंद महसूस होगा. परिवार की जरूरत पर धन खर्च करके खुशी मिलेगी. घर के लिए किसी बड़ी वस्तु की खरीदारी का मन बनेगा.
कन्या- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति नवें भाव में होगी. आज का दिन आपके लिए शुभ है. मित्रों और स्नेहीजनों के साथ आपका प्रवास आनंददायक रहेगा. धार्मिक काम के लिए कहीं बाहर जाना हो सकता है. किसी सामाजिक काम में भी धन खर्च कर सकते हैं. मित्रों से लाभ होगा. विदेश में बसनेवाले किसी मित्र या स्नेहीजनों का समाचार मिलने से प्रसन्नता होगी. भाई-बहनों से लाभ होगा. आपके पास पर्याप्त धन की व्यवस्था रहेगी. नौकरीपेशा लोगों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा.
तुला- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति आठवें भाव में होगी. आज किसी भी नए काम का आरंभ ना करें. किसी से भी बातचीत करते समय खूब संभलकर रहने की आवश्यकता है. गुप्त शत्रुओं के जाल में न फंसें, इसका ध्यान रखें. राग- द्वेष से दूर रहें. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आकस्मिक धन लाभ के योग हैं. रहस्यमय विषयों की तरफ आकर्षित होंगे. आध्यात्मिक सिद्धि और ईश्वर भक्ति के लिए समय उत्तम है. गहरे चिंतन- मनन से मानसिक शांति प्राप्त कर सकेंगे.
वृश्चिक- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति सातवें भाव में होगी. आज आपको कुछ खास करने का मन करेगा. अपने लिए समय निकालने की इच्छा होगी. आप मित्रों के साथ बाहर घूमने जाने या साथ भोजन करने का कार्यक्रम बनाएंगे. मौज-मस्ती, मनोरंजन, उत्तम भोजन और नए वस्त्र परिधान से आपका मन खुश रहेगा. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. वाहन सुख मिलेगा. किसी प्रिय व्यक्ति का साथ मिलने से मन प्रसन्न रहेगा. दांपत्यजीवन में निकटता अनुभव होगा.
धनु- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति छठे भाव में होगी. आज आपको वित्तीय लाभ हो सकेगा. नौकरी में लाभ और आय में वृद्धि होगी. सहकर्मियों से मदद मिलती रहेगी. अधिकारी आपके काम से खुश रहेंगे. आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. घर-परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी. आपके विरोधियों की कोई भी चाल आपके खिलाफ सफल नहीं हो सकेगी. आपके काम की सराहना होगी। मित्रों से लाभ मिलने की संभावना है. हालांकि दोपहर के बाद आपका मन विचलित हो सकता है. इस दौरान भी आप सकारात्मक विचार रखें.
मकर- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति पांचवें भाव में होगी. आज आपका मन चिंता और दुविधा में उलझा रहेगा. इस कारण किसी भी विषय में आप ठोस निर्णय पर नहीं ले सकेंगे. आज महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने की सलाह दी जाती है. भाग्य का साथ नहीं मिलने से हताशा पैदा होगी. संतान के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. घर पर बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर आपकी चिंता बढ़ सकती है. ऑफिस में उच्च अधिकारियों की नाराजगी सहन करनी पड़ेगी. गलत जगह धन खर्च हो सकता है. संतान के साथ मतभेद होगा.
कुंभ- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति चौथे भाव में होगी. मन में भय और सुस्ती के कारण आप निराशा का अनुभव करेंगे. कार्यस्थल पर आपकी गति बहुत धीमी होगी. व्यापार में लाभ के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ सकता है. परिवार में संघर्ष और निकटस्थ लोगों के साथ मतभेद हो सकता है. समय पर भोजन नहीं मिलने से चिड़चिड़ापन बढ़ेगा. नींद नहीं ले पाएंगे. मां के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. सार्वजनिक रूप से सम्मान को हानि न पहुंचे इसका ध्यान रखें.
मीन- चंद्रमा राशि बदलकर आज 07 नवंबर, 2025 शुक्रवार को वृषभ राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति तीसरे भाव में होगी. आज नए काम की शुरुआत कर सकेंगे. भाइयों के साथ आनंद के पल गुजारेंगे. मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. सही निर्णय ले सकेंगे। विरोधियों पर आपकी जीत होगी. किसी के साथ प्रेम संबंध में बंधने की संभावना है. आपकी किस्मत के सितारे बुलंद हैं. स्वजनों से मिलकर तथा मान सम्मान प्राप्त करके आप खुश रहेंगे. आप समय पर कार्यस्थल पर मिला टारगेट पूरा कर पाने की स्थिति में रहेंगे. विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा है.
गुरु इस माह से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे
7 Nov, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्योतिष शास्त्र में गुरु इस माह से वक्री होकर मिथुन राशि में प्रवेश करने वाले हैं, जिससे कई राशियों की किस्मत में बड़े परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। यह गोचर 5 दिसंबर 2025 से पूरी तरह प्रभावी होगा, जब गुरु वक्री अवस्था में कर्क से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। यह काल विशेष रूप से उन जातकों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जिनकी कुंडली में गुरु शुभ प्रभाव में हैं।
वर्तमान में गुरु कर्क राशि में भ्रमण कर रहे हैं, जो उनकी उच्च स्थिति मानी जाती है। लेकिन अब जब वे वक्री चाल में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, तब उनका प्रभाव एक नए आयाम में परिवर्तित होगा। यह गोचर ज्ञान, बुद्धि, करियर, संपत्ति और पारिवारिक संबंधों पर सीधा असर डालेगा।
पंडितों के अनुसार, “गुरु का मिथुन में वक्री होना जीवन में पुराने अवसरों को पुनः सक्रिय करेगा। यह वह समय है जब कुछ अधूरे कार्य पूरे होंगे और रुके हुए धन के मार्ग खुलेंगे।” इससे इन राशियों को होगा लाभ
मिथुन राशि
गुरु का आपकी ही राशि में प्रवेश करना आपके लिए अत्यंत शुभ रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और सफलता दोनों मिलेंगी। व्यापार में लाभ की संभावना है और करियर में स्थिरता प्राप्त होगी। दांपत्य जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा तथा प्रेम संबंधों में भी मधुरता आएगी। विद्यार्थियों के लिए भी यह समय उपलब्धियों से भरा रहेगा।
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए यह गोचर सकारात्मक परिणाम लाएगा। आपको नई संभावनाएं मिलेंगी और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। लंबे समय से रुका हुआ कार्य अब गति पकड़ेगा। संपत्ति से जुड़ी योजनाओं में लाभ होगा और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी। यह समय आपकी मेहनत का प्रतिफल लेकर आने वाला है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्यवृद्धि का रहेगा। गुरु का प्रभाव आपके रुके हुए कार्यों को पूर्ण करेगा और धन के नए स्रोत खोलेगा। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी, साथ ही विदेश यात्रा या नई दिशा में विस्तार की संभावना भी बनी रहेगी।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए गुरु का वक्री होना विशेष रूप से लाभदायक रहेगा। आपकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी और निवेश से लाभ मिलेगा। पारिवारिक संबंधों में सुधार आएगा और आप आत्मविश्वास से आगे बढ़ेंगे। करियर में स्थिरता और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
गुरु ग्रह को मजबूत करने के उपाय
• हर गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पूजा करें।
• पीली दाल, हल्दी, या केसर का दान करें।
• “ॐ बृं बृहस्पते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
• गुरुवार का व्रत रखें और भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।
मंदिर में दर्शनों के बाद इसलिए कुछ समय बैठने की है मान्यता
7 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मंदिर में दर्शनों के बाद कुछ समय सीढ़ी बैठने की परंपरा रही है। मान्यता है कि जब भी हम किसी मंदिर में दर्शन करते हैं, तो बाहर आकर थोड़ी देर सीड़ी पर बैठकर भगवान का ध्यान करना चाहिए। मंदिर की सीढ़ी पर बैठते ही एक विशेष श्लोक अनायासेन मरणम्, बिना देन्येन जीवनम्। देहान्त तव सानिध्यम्, देहि में परमेश्वरम्। का पाठ करना चाहिए।
इस श्लोक में यह संदेश है कि हमें सांसारिक वस्तुओं के लिए याचना नहीं करनी चाहिए। घर, धन, नौकरी, पुत्र-पुत्री जैसी चीजें भगवान अपनी कृपा से देते हैं। प्रार्थना का मतलब निवेदन और विशेष अनुरोध है, जबकि याचना सांसारिक इच्छाओं के लिए होती है।
दर्शन करते समय आंखें खुली रखनी चाहिए और भगवान के स्वरूप, चरण, मुखारविंद और श्रृंगार का पूरा आनंद लेना चाहिए। आंखें बंद करना गलत है, क्योंकि हम दर्शन करने आए हैं। लेकिन बाहर आने के बाद, आंखें बंद करके भगवान का ध्यान करना चाहिए।
यदि ध्यान करते समय भगवान का स्वरूप ध्यान में नहीं आता, तो फिर से मंदिर जाकर दर्शन करें और फिर सीड़ी पर बैठकर ध्यान और श्लोक का पाठ करें। यह प्रथा हमारे शास्त्रों और बुजुर्गों की परंपरा में बताई गई है।
इसका उद्देश्य हमारे जीवन में स्वास्थ्य, लंबी उम्र और मानसिक शांति सुनिश्चित करना है। मंदिर में नेत्र खुले और बाहर बैठकर नेत्र बंद करके ध्यान करना हमारी श्रद्धा, ध्यान और भक्ति का प्रतीक है।
शिवतांडव स्तोत्र से मिलती है सिद्धि
7 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिवतांडव स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करने से व्यक्ति को जिस किसी भी सिद्धि की महत्वकांक्षा होती है, भगवान शिव की कृपा से वह आसानी से पूर्ण हो जाती है। इस बारे में एक कथा से जाना जा सकता है। कुबेर व रावण दोनों ऋषि विश्रवा की संतान थे और दोनों सौतेले भाई थे। ऋषि विश्रवा ने सोने की लंका का राज्य कुबेर को दिया था लेकिन किसी कारणवश अपने पिता के कहने पर वे लंका का त्याग कर हिमाचल चले गए। कुबेर के चले जाने के बाद इससे दशानन बहुत प्रसन्न हुआ। वह लंका का राजा बन गया और लंका का राज्य प्राप्त करते ही धीरे-धीरे वह इतना अहंकारी हो गया कि उसने साधुजनों पर अनेक प्रकार के अत्याचार करने शुरू कर दिए।
जब दशानन के इन अत्याचारों की ख़बर कुबेर को लगी तो उन्होंने अपने भाई को समझाने के लिए एक दूत भेजा, जिसने कुबेर के कहे अनुसार दशानन को सत्य पथ पर चलने की सलाह दी। कुबेर की सलाह सुन दशानन को इतना क्रोध आया कि उसने उस दूत को बंदी बना लिया व क्रोध के मारे तुरन्त अपनी तलवार से उसकी हत्या कर दी। कुबरे की सलाह से दशानन इतना क्रोधित हुआ कि दूत की हत्या के साथ ही अपनी सेना लेकर कुबेर की नगरी अलकापुरी को जीतने निकल पड़ा और कुबेर की नगरी को तहस-नहस करने के बाद अपने भाई कुबेर पर गदा का प्रहार कर उसे भी घायल कर दिया लेकिन कुबेर के सेनापतियों ने किसी तरह से कुबेर को नंदनवन पहुँचा दिया। दशानन ने कुबेर की नगरी व उसके पुष्पक विमान पर भी अपना अधिकार कर लिया था, सो एक दिन पुष्पक विमान में सवार होकर शारवन की तरफ चल पड़ा लेकिन एक पर्वत के पास से गुजरते हुए उसके पुष्पक विमान की गति स्वयं ही धीमी हो गई। पुष्पक विमान की ये विशेषता थी कि वह चालक की इच्छानुसार चलता था तथा उसकी गति मन की गति से भी तेज थी, इसलिए जब पुष्पक विमान की गति मंद हो गई तो दशानन को बडा आश्चर्य हुआ। तभी उसकी दृष्टि सामने खडे विशाल और काले शरीर वाले नंदीश्वर पर पडी। नंदीश्वर ने दशानन को चेताया कि-
यहाँ भगवान शंकर क्रीड़ा में मग्न हैं इसलिए तुम लौट जाओ, लेकिन दशानन कुबेर पर विजय पाकर इतना दंभी हो गया था कि वह किसी कि सुनने तक को तैयार नहीं था। उसे उसने कहा कि- कौन है ये शंकर और किस अधिकार से वह यहाँ क्रीड़ा करता है? मैं उस पर्वत का नामो-निशान ही मिटा दूँगा, जिसने मेरे विमान की गति अवरूद्ध की है। इतना कहते हुए उसने पर्वत की नींव पर हाथ लगाकर उसे उठाना चाहा. अचानक इस विघ्न से शंकर भगवान विचलित हुए और वहीं बैठे-बैठे अपने पाँव के अंगूठे से उस पर्वत को दबा दिया ताकि वह स्थिर हो जाए. लेकिन भगवान शंकर के ऐसा करने से दशानन की बाँहें उस पर्वत के नीचे दब गई। फलस्वरूप क्रोध और जबरदस्त पीडा के कारण दशानन ने भीषण चीत्कार कर उठा, जिससे ऐसा लगने लगा कि मानो प्रलय हो जाएगा। तब दशानन के मंत्रियों ने उसे शिव स्तुति करने की सलाह दी ताकि उसका हाथ उस पर्वत से मुक्त हो सके। दशानन ने बिना देरी किए हुए सामवेद में उल्लेखित शिव के सभी स्तोत्रों का गान करना शुरू कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दशानन को क्षमा करते हुए उसकी बाँहों को मुक्त किया।
भोजन करने संबंधी कुछ जरूरी नियम
7 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन ध्रर्म में आहार ग्रहण करने के दौरान भी कुछ नियमों का पालन करना जरुरी माना गया है। माना गया है कि जिसप्रकार हम आहार करेंगे वैसे ही हमारे विचार भी होंगे।
सर्वप्रथम : भोजन करने से पूर्व हाथ पैरों व मुख को अच्छी तरह से धोना चाहिये। भोजन से पूर्व अन्नदेवता, अन्नपूर्णा माता की स्तुति करके उनका धन्यवाद देते हुए तथा सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो, ईश्वर से ऐसी प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए।
वहीं भोजन बनाने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से, मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाएं और सबसे पहले 3 रोटियां (गाय, कुत्ते और कौवे हेतु) अलग निकालकर फिर अग्निदेव को भोग लगाकर ही घर वालों को खिलाएं।
भोजन के समय
प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है, क्योंकि पाचनक्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक एवं सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले तक प्रबल रहती है।
जो व्यक्ति सिर्फ एक समय भोजन करता है वह योगी और जो दो समय करता है वह भोगी कहा गया है
एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है सुबह का खाना स्वयं खाओ, दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन दुश्मन को दो
भोजन की दिशा:
भोजन पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है। पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है।
ऐसे में न करें भोजन:
शैया पर, हाथ पर रखकर, टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए।
मल-मूत्र का वेग होने पर, कलह के माहौल में, अधिक शोर में, पीपल, वटवृक्ष के नीचे भोजन नहीं करना चाहिए।
परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए।
ईर्ष्या, भय, क्रोध, लोभ, रोग, दीनभाव, द्वेषभाव के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है।
खड़े-खड़े, जूते पहनकर सिर ढंककर भोजन नहीं करना चाहिए
ये भोजन न करें:
गरिष्ठ भोजन कभी न करें।
बहुत तीखा या बहुत मीठा भोजन न करें।
किसी के द्वारा छोड़ा हुआ भोजन न करें।
आधा खाया हुआ फल, मिठाइयां आदि पुनः नहीं खाना चाहिए।
खाना छोड़कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए।
जो ढिंढोरा पीटकर खिला रहा हो, वहां कभी न खाएं।
पशु या कुत्ते का छुआ, रजस्वला स्त्री का परोसा, श्राद्ध का निकाला, बासी, मुंह से फूंक मारकर ठंडा किया, बाल गिरा हुआ भोजन न करें।
अनादरयुक्त, अवहेलनापूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करें।
*कंजूस का, राजा का, वेश्या के हाथ का, शराब बेचने वाले का दिया भोजन और ब्याज का धंधा करने वाले का भोजन कभी नहीं करना चाहिए।
भोजन करते वक्त क्या करें:
भोजन के समय मौन रहें।
रात्रि में भरपेट न खाएं।
बोलना जरूरी हो तो सिर्फ सकारात्मक बातें ही करें।
भोजन करते वक्त किसी भी प्रकार की समस्या पर चर्चा न करें।
भोजन को बहुत चबा-चबाकर खाएं।
गृहस्थ को 32 ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए।
सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन, अंत में कड़वा खाना चाहिए।
सबसे पहले रसदार, बीच में गरिष्ठ, अंत में द्रव्य पदार्थ ग्रहण करें।
थोड़ा खाने वाले को आरोग्य, आयु, बल, सुख, सुंदर संतान और सौंदर्य प्राप्त होता है।
भोजन के पश्चात क्या न करें:
भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए।
भोजन के पश्चात क्या करें:
भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। भोजन के एक घंटे पश्चात मीठा दूध एवं फल खाने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।
क्या-क्या न खाएं:
रात्रि को दही, सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए।
दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना।
दूध-खीर के साथ खिचड़ी नहीं खाना चाहिए।
इस प्रकार ज्योतिष उपायों से परीक्षा में मिलेंगे बेहतर परिणाम
7 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कई बच्चों का मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगता, कुछ को तो परीक्षा का भय घेरे रहता है। जिसकी वजह से उन्हें परीक्षा में बेहतर परिणाम प्राप्त नहीं होते ज्योतिष किस प्रकार पढ़ाई में आपकी सहायता कर सकता है आइए जानते हैं। सफलता के लिए आवश्यक है मेहनत और मेहनत तभी सफल होती है जब हम एकाग्र होकर कोई कार्य करें। यहां हम आपको बता रहे हैं ज्योतिष के कुछ ऐसे उपाय जो एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
गुरुवार या रविवार को गायत्री हवन करें तथा पूर्व की ओर उन्मुख होकर उसमें इक्कीस बार आहुति दें।
कौड़ी को चांदी में जड़वाकर लाल धागे या चेन में डालकर बाजू या कलाई में धारण करें। बेहतर परिणाम के लिए इसे धारण करने से पहले ग्यारह दिनों तक गंगा जल में अपने इष्ट देवता के सामने रखें फिर धारण करें।
बुधवार के दिन हरे धागे में तांबे के तीन सिक्कों को गले में धारण करें।
भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें, लाभ होगा।
शनिवार के दिन ज्वार को दूध में धो कर,उसे बहते पानी में प्रवाहित करें।
पढ़ाई में सुधार के लिए लगातार तीन गुरुवार को सूरज ढलने से पहले पांच विभिन्न प्रकार की मिठाइयों को कुछ हरी इलायची के साथ पीपल के पेड़ को अर्पण करें।
पढ़ाई में रुकावट या दिक्कत को कम करने के लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश को हरे कपड़े में हरी साबुत मूंग की दाल, कुछ हरी घास के पत्तों तथा हरी इलायची के साथ अर्पित करें। यदि बच्चा ऐसा स्वयं नहीं कर पाए तो बच्चे का हाथ लगवाकर यह उपाय बच्चे के मां-बाप भी कर सकते हैं।
पढ़ाई में सुधार व बेहतरी के लिए लाल धागे में, दस मुखी रुद्राक्ष, गले या सीधे हाथ की बाजू में धारण करें।
परीक्षा या साक्षात्कार के दिनों में बेहतर परिणाम के लिए गले में चांदी की चेन में तांबे का एक चौकोर छोटा टुकड़ा धारण करें।
स्टडी टेबल के पास सरस्वती यंत्र लगाएं या रखें।
अपने पढऩे या कार्य करने वाली टेबल पर हमेशा पानी का एक गिलास भर कर रखें। यह आपकी एकाग्रता को बढ़ाता है।
बादाम, मीठी सौंफ व कुंजा मिश्री बराबर मात्रा में पीस कर सफेद दखनी मिर्च का सम्पुट लगाकर प्रात: या रात्रि काल में दूध के साथ सेवन कराएं।
ऐसे बच्चों को माता-पिता एवं बड़ों के चरण छूकर आशीर्वाद लेकर परीक्षा में जाना चाहिए।
जिन बच्चों को परीक्षा के दौरान या उससे पहले भय का आभास अधिक होता हो तो एक चौकोर सफेद कागज पर मां का नाम लिखकर सिरहाने के बीच रख देना चाहिए।
परीक्षा वाले दिन बच्चे का हाथ लगवाकर एक देसी पान के पत्ते पर साबुत सुपारी, चार बताशे, चार छोटी इलायची एवं मिश्री रखकर मन्दिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें। यह कार्य परिवार का कोई भी सदस्य कर सकता है।
परीक्षा के प्रथम दिन से अन्तिम दिन तक बच्चा जिस कक्षा में पढ़ता है उसमें 1 जोड़कर उतनी संख्या में बांसुरी एवं दोगुनी संख्या में टॉफियां छोटे बच्चों को देने से लाभ मिलता है।
पढ़ाई में रुकावट या दिक्कत को कम करने के लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश को हरे कपड़े में हरी साबुत मूंग की दाल, कुछ हरी घास के पत्तों तथा हरी इलायची के साथ अर्पित करें।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (07 नवंबर 2025)
7 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, सम्पत्ति विषयक समस्यायें अवश्य कम होंगी।
वृष राशि :- स्त्री-वर्ग से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति अवश्य होगी, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
मिथुन राशि :- कार्य कुशलता में सुधार, बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप सुखवर्धक होगा।
कर्क राशि :- किसी उपद्रव से अशांति संभव है, मान-प्रतिष्ठा मंक वृद्धि के योग बनेंगे।
सिंह राशि :- योजना सफल होगी, शरीर कष्ट व मानसिक बेचैनी बनें, कार्य बन ही जायेंगे।
कन्या राशि :- समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थिगित रखें, लेन-देन के मामले में हानि होगी।
तुला राशि :- कार्य कुशलता से संतोष एवं स्थिति पर नियंत्रण रखें, रुके कार्य बन जायेंगे।
वृश्चिक राशि :- योजनायें सफल होंगी, शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी, कार्य मन लगाकर निपटा लें।
धनु राशि :- थकावट बेचैनी, किसी कष्ट में फंसने से बचिये, व्यापारिक क्षमता से लाभ होगा।
मकर राशि :- विरोधी तत्व परेशान करें, मित्रों से कष्ट, आरोप तथा मानसिक क्लेश बनेगा।
कुंभ राशि :- असमंजस व असमर्थता का वातावरण क्लेशयुक्त रखे, प्रत्येक कार्य में बाधा होगी।
मीन राशि :- विरोध एवं विवाद से बचें, कार्यगति में बाधा, विघटनकारी तत्व परेशान अवश्य करेंगे।
कार्तिक पूर्णिमा की लक्ष्मी पूजा पर करें ये पाठ, धन-दौलत की होगी प्राप्ति, मिट जाएगी दरिद्रता
6 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कार्तिक पूर्णिमा आज मनाई जा रही है. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लोग गंगा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. आज शाम के समय में कार्तिक पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी की पूजा होगी. उस समय आप माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्री सूक्त का पाठ करें. श्री सूक्त का पाठ करने से अपार धन और दौलत की प्राप्ति होती है. श्री सूक्त संस्कृत में लिखा गया है, सभी लोग इसे पढ़ नहीं सकते हैं. यदि आप पढ़ नहीं सकते हैं तो सुनकर करके लाभ उठा सकते हैं. कार्तिक पूर्णिमा पर पढ़ें श्री सूक्त पाठ.
श्री सूक्त पाठ
ओम हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्ण-रजत-स्त्रजाम्,
चन्द्रां हिरण्यमयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आवह।।
तां म आवह जात वेदो, लक्ष्मीमनप-गामिनीम्,
यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम्।।
अश्वपूर्वां रथ-मध्यां, हस्ति-नाद-प्रमोदिनीम्,
श्रियं देवीमुपह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम्।।
ये भी पढ़ें: आज कार्तिक पूर्णिमा की रात करें कोई भी एक उपाय, माता लक्ष्मी हो जाएंगी प्रसन्न, धन से भरेगी तिजोरी!
कांसोऽस्मि तां हिरण्य-प्राकारामार्द्रा ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीं,
पद्मे स्थितां पद्म-वर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्।।
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देव-जुष्टामुदाराम्,
तां पद्म-नेमिं शरणमहं प्रपद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणोमि।।
आदित्य वर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः,
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः।।
उपैतु मां दैव सखः, कीर्तिश्च मणिना सह,
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिं वृद्धिं ददातु मे।।
क्षुत्-पिपासाऽमला ज्येष्ठा, अलक्ष्मीर्नाशयाम्यहम्,
अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वान् निर्णुद मे गृहात्।।
गन्ध-द्वारां दुराधर्षां, नित्य-पुष्टां करीषिणीम्,
ईश्वरीं सर्व-भूतानां, तामिहोपह्वये श्रियम्।।
मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि,
पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः।।
कर्दमेन प्रजा-भूता, मयि सम्भ्रम-कर्दम,
श्रियं वासय मे कुले, मातरं पद्म-मालिनीम।।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि, चिक्लीत वस मे गृहे,
निच देवी मातरं श्रियं वासय मे कुले।।
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं, सुवर्णां हेम-मालिनीम्,
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो ममावह।।
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं, पिंगलां पद्म-मालिनीम्,
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो ममावह।।
तां म आवह जात-वेदो लक्ष्मीमनप-गामिनीम्,
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरूषानहम्।।
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा, जुहुयादाज्यमन्वहम्,
श्रियः पंच-दशर्चं च, श्री-कामः सततं जपेत्।।
भात की रस्म क्यों है खास, कैसे शुरु हुई मामा को भात का न्योता देने की परंपरा, जानें भारतीय परंपरा का सुंदर प्रतीक
6 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं होती, बल्कि दो परिवारों के रिश्तों का संगम होती है. हर शादी के पीछे कुछ अनोखी रस्में और परंपराएं होती हैं, जिनका मकसद सिर्फ रीति निभाना नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तों के बीच प्यार, आदर और जुड़ाव दिखाना भी होता है. ऐसी ही एक प्यारी रस्म है भात की रस्म, जो ज्यादातर उत्तर भारत में निभाई जाती है. इस रस्म में दुल्हन या दूल्हे की मां अपने मायके जाती हैं और अपने भाइयों, यानी मामा को शादी का न्योता देती हैं. इसे ‘भात का न्योता’ कहा जाता है. यह परंपरा सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसके पीछे की भावनाएं बहुत गहरी होती हैं, ये रस्म मां के मायके और ससुराल के बीच एक खूबसूरत रिश्ता जोड़ती है. भात सिर्फ शादी का न्योता नहीं होता, बल्कि इसमें एक बहन अपने भाई से अपनी संतान के जीवन के नए सफर में साथ देने की विनती करती है. यह वही रिश्ता है जो बचपन की यादों, अपनापन और रिश्तों की सच्चाई से जुड़ा होता है.
भात का न्योता क्या होता है?
भात का न्योता एक पारंपरिक आमंत्रण होता है जो शादी से पहले दिया जाता है. इस रस्म के दौरान मम्मी अपने मायके जाकर अपने भाइयों यानी मामा को शादी का न्योता देती हैं.
‘भात’ शब्द का मतलब होता है चावल या अन्न, जो जीवन, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है. इस रस्म के जरिए मामा को शादी में आने और अपनी ओर से उपहार या आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया जाता है.
कई जगहों पर यह रस्म बेहद धूमधाम से निभाई जाती है, जहां बहन अपने भाइयों को चुनरी, मिठाई और शादी का कार्ड देती है, और बदले में मामा अपनी भांजी या भांजे के लिए स्नेह और तोहफे लेकर शादी में शामिल होते हैं.
मामा को ही क्यों दिया जाता है भात का न्योता?
भारतीय संस्कृति में मामा का स्थान हमेशा से खास माना गया है. वह सिर्फ मां का भाई नहीं, बल्कि बच्चों के लिए दूसरे पिता जैसा होता है. पुराने समय में जब आर्थिक हालात उतने मजबूत नहीं होते थे, तो मामा ही अपनी बहन के बच्चों की पहली शादी का खर्च उठाते थे या उन्हें गिफ्ट देते थे.
इसलिए मामा को भात का न्योता देना एक तरह से सम्मान देने का तरीका माना गया, ये रस्म इस बात का प्रतीक है कि मामा अपनी बहन के बच्चों की खुशियों में बराबर का भागीदार हैं.
इसके पीछे भावनात्मक जुड़ाव भी छिपा है – जैसे मां का मायका अपनी बेटी के नए जीवन की शुरुआत में उसके साथ खड़ा है. भात का न्योता इस रिश्ते की गर्माहट और अपनापन दोनों को एक साथ दिखाता है.
भात की रस्म कैसे की जाती है?
शादी से कुछ दिन पहले यह रस्म निभाई जाती है. दुल्हन या दूल्हे की मां एक थाल सजाकर अपने मायके जाती हैं. उस थाल में शामिल होते हैं –
-हल्दी, चावल, मिठाई और नारियल
-एक चुनरी या साफा
-शादी का कार्ड और गोला (पैसे का प्रतीक)
थाल लेकर मां अपने भाइयों को शादी का न्योता देती हैं. जब मामा इसे स्वीकार करते हैं, तो वह शादी में शामिल होने का वचन देते हैं और शादी वाले दिन ‘भात’ लेकर अपनी बहन के घर आते हैं.
भात में मामा की ओर से उपहार, मिठाइयां, कपड़े और कई बार नकद राशि भी दी जाती है. यह सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके आशीर्वाद और स्नेह का प्रतीक होता है.
इस परंपरा का असली मतलब
भात का न्योता देना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक रिश्ता है जो परिवारों को जोड़ता है. इसमें एक बहन अपने भाई से कहती है कि “अब मेरी जिम्मेदारी मेरी संतान की शादी तक पहुंच गई है, इसमें तुम्हारा आशीर्वाद चाहिए.”
यह परंपरा हमें यह भी याद दिलाती है कि रिश्तों की जड़ें सिर्फ खून से नहीं, बल्कि अपनापन और जिम्मेदारी से मजबूत होती हैं. भले ही वक्त के साथ कई रस्में बदल गई हों, लेकिन भात की परंपरा आज भी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है.
आप भी तो नहीं कर रहे हैं ये भूल? उत्पन्ना एकादशी पर गलत दिन रखा व्रत तो नहीं मिलेगा फल
6 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कार्तिक महीने की समाप्ति के बाद मार्गशीर्ष का महीना शुरू हो चुका है. मार्गशीर्ष महिना भगवान श्री कृष्ण को समर्पित रहता है. मार्ग सिर्फ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी पहली एकादशी अत्यंत ही खास रहती है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि को देवी एकादशी की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी एकादशी कहते हैं. इस व्रत और पूजा से पाप मिटेंगे, पुण्य और मोक्ष प्राप्त होगा. तो आइए देवघर बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी से जानते है की कब है उत्पन्ना एकादशी और क्या है पूजा विधि?
क्या कहते है बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थपुरोहित :
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने अगर आप किसी भी एकादशी का व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो मार्गशीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत अवश्य रखें. क्योंकि इस व्रत को करने से जीवन में दरिद्रता समाप्त हो जाती है. सभी दुखों का नाश हो जाता है. धार्मिक शास्त्र के अनुसार सुदामा ने उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा था जिससे उनकी दरिद्रता समाप्त हो गई थी.
कब है उत्पन्ना एकादशी
बैद्यनाथ पंचांग के अनुसार, 15 नवंबर को देर रात 12 बजकर 49 मिनट पर अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी. वहीं, 16 नवंबर को देर रात 02 बजकर 37 मिनट पर मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त होगी. सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना होती है. इसके लिए 15 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी मनाई जाएगी.इस तिथि पर साधक व्रत रख विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं.
कैसे करे उत्पन्ना एकादशी के दिन पूजा विधि
एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को एक दिन पूर्व यानि दशमी की रात्रि में भोजन नहीं करना चाहिए. एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए.इसके बाद भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए और उन्हें पुष्प, जल, धूप, दीप, अक्षत अर्पित करना चाहिए. इस दिन केवल फलों का ही भोग लगाना चाहिए और समय-समय पर भगवान विष्णु का सुमिरन करना चाहिए. रात्रि में पूजन के बाद जागरण करना चाहिए. अगले दिन द्वादशी को पारण करना चाहिए. किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन व दान-दक्षिणा देना चाहिए. इसके बाद स्वयं को भोजन ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए.
कहीं बुध आपके दूसरे भाव में तो नहीं? जानिए कैसे चुरा सकता है आपकी कमाई और खुशियां
6 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जन्म कुंडली में हर ग्रह की अपनी जगह और भूमिका होती है. इनमें बुध ऐसा ग्रह है जो व्यक्ति की बुद्धि, सोचने-समझने की क्षमता, बोलने के तरीके और व्यापारिक समझ को दर्शाता है, अगर बुध मजबूत हो तो इंसान चतुर, हाजिरजवाब और व्यवहारिक होता है, जबकि कमजोर बुध व्यक्ति को उलझन में डाल देता है. जब बुध दूसरे भाव में आता है, तो यह स्थिति जीवन में कई खास बदलाव लाती है चाहे वह धन से जुड़ी बात हो, बोलने का तरीका हो या पारिवारिक माहौल. दूसरे भाव को धन, वाणी और पारिवारिक सुख का घर माना गया है. बुध यहां बैठकर व्यक्ति की कमाई के तरीके, पैसे संभालने की आदत और बोलचाल की कला को प्रभावित करता है. यह स्थिति अगर मजबूत हो तो इंसान अपनी बात से दूसरों को आसानी से प्रभावित कर लेता है, लेकिन अगर बुध अशुभ हो जाए, तो बातों में कड़वाहट, गलतफहमी या आर्थिक उलझनें बढ़ सकती हैं. ज्योतिष में यह भाव बहुत संवेदनशील माना गया है, क्योंकि यहीं से इंसान के भाग्य और मेहनत का सीधा संबंध बनता है. आइए समझते हैं कि बुध के दूसरे भाव में होने से क्या असर पड़ता है, इसके अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं पर नजर डालते हैं, और जानते हैं कौन-से उपाय इसके नकारात्मक असर को कम कर सकते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
बुध दूसरे भाव में होने के सकारात्मक प्रभाव
1. तेज दिमाग और समझदार सोच:
इस भाव में बुध होने से व्यक्ति बहुत समझदार, बुद्धिमान और तेज सोच वाला होता है. वह हर बात को गहराई से समझता है और किसी भी समस्या का हल निकालने में माहिर होता है.
2. बोलने में निपुणता:
बुध वाणी का कारक ग्रह है, इसलिए इस स्थिति में व्यक्ति की वाणी बेहद मीठी और प्रभावशाली होती है. ऐसे लोग अक्सर दूसरों को अपनी बातों से प्रभावित करते हैं.
3. व्यापार और कमाई में सफलता:
बुध अगर शुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति को धन कमाने के नए-नए तरीके सूझते हैं. व्यापार, लेखन, मीडिया, शिक्षा, बैंकिंग, या मार्केटिंग से जुड़े लोग इस स्थिति में खास सफलता पाते हैं.
4. पारिवारिक तालमेल अच्छा:
दूसरे भाव का संबंध परिवार से है. बुध यहां बैठकर घर के माहौल को संतुलित करता है. परिवार में आपसी बातचीत से समस्याएं सुलझ जाती हैं.
5. विदेशी भाषाओं में रुचि:
बुध ग्रह संवाद का प्रतीक है. ऐसे लोग एक से ज्यादा भाषाएं सीखने में रुचि रखते हैं और विदेश से जुड़ी नौकरियों में अच्छा करते हैं.
बुध दूसरे भाव में होने के नकारात्मक प्रभाव
1. बोलचाल में कड़वाहट:
अगर बुध अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो जाए, तो व्यक्ति की वाणी कड़वी हो सकती है. वह अनजाने में ऐसी बातें बोल देता है जिससे रिश्तों में दूरी आ जाती है.
2. पैसों में अस्थिरता:
अशुभ बुध व्यक्ति को गलत निवेश या धोखाधड़ी का शिकार बना सकता है. कभी पैसे अचानक आते हैं और फिर बिना वजह चले जाते हैं.
3. अति सोच और बेचैनी:
ऐसे लोग बहुत सोचते हैं, जिससे निर्णय लेने में देर करते हैं. कई बार ज्यादा सोचने से खुद ही भ्रम में पड़ जाते हैं.
4. परिवार में मनमुटाव:
अगर बुध राहु या शनि से प्रभावित हो, तो घर में बहस या गलतफहमी बढ़ सकती है. व्यक्ति खुद को सही साबित करने के चक्कर में रिश्तों को बिगाड़ सकता है.
बुध के नकारात्मक असर को कम करने के उपाय
1. हर बुधवार को हरी वस्तुएं दान करें:
हरी सब्जियां, मूंग या हरे कपड़े जरूरतमंदों को देने से बुध ग्रह का प्रभाव बेहतर होता है.
2. गाय को हरा चारा खिलाएं:
बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाना शुभ माना गया है. इससे जीवन में स्थिरता और आर्थिक सुधार आता है.
3. बुध मंत्र का जाप करें:
“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” इस मंत्र का रोज या बुधवार को 108 बार जाप करने से बुध की स्थिति मजबूत होती है.
4. पन्ना रत्न पहनें:
अगर कुंडली में बुध कमजोर हो तो किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह से पन्ना रत्न (Emerald) पहन सकते हैं. इससे बोलचाल, याददाश्त और धन की स्थिति सुधरती है.
5. हरी चीजें ज्यादा इस्तेमाल करें:
खाने में हरी सब्जियां, हरा कपड़ा या घर में हरे पौधे लगाने से भी बुध का प्रभाव शुभ होता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (06 नवंबर 2025)
6 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- थकावट, लेन-देन के मामले में हानि होगी तथा स्त्री-शरीर कष्ट अवश्य होगा।
वृष राशि :- मन में कुछ खिन्नता, नवीन योजना फलप्रद होगी तथा स्त्री-वर्ग से हर्ष होगा।
मिथुन राशि :- कार्ययोजना फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटायें, रुके कार्य अपके अनुकूल बनेंगे।
कर्क राशि :- योजना फलीभूत होंगी, प्रयास करने पर सफलता मिलेगी, समय अनुकूलता का ध्यान रखें।
सिंह राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, प्रभुत्व वृद्धि, विशेष लाभ के योग अवश्य ही बनेंगे।
कन्या राशि :- चिन्तायें मन को व्यग्र रखें, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य अवश्य बनेंगे।
तुला राशि :- अधिकारियों से तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक उद्विघ्नता अवश्य ही बनेगी।
वृश्चिक राशि :- दैनिक कार्यगति मंद, स्थिति में सुधार, कार्य नियंत्रण करने में सफल होंगे।
धनु राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित हों तथा सतर्कता से कार्य अवश्य निपटा लें।
मकर राशि :- हाथ में आया हुआ धन व्यर्थ नष्ट जायेगा, कार्यकुशलता से संतोष निश्चय ही होगा।
कुंभ राशि :- कार्य में विलम्ब से बेचैनी संभव है, भाग्य साथ देगा, बिगड़े कार्य बनेंगे ध्यान दें।
मीन राशि :- अनायास परेशानी, शत्रु पक्ष से सतर्क रहें, मान-प्रतिष्ठा पर आंच आने की संभावना है।
देवघर और हजारीबाग में नए चेहरों की एंट्री; झारखंड सरकार ने प्रशासनिक अमले में किया बड़ा उलटफेर।
झारखंड के जंगलों में 'ऑपरेशन मिसिर बेसरा': 10 किमी का घेरा और 50 माओवादी कैद।
झुलसाने वाली धूप और गर्म हवाएं; झारखंड में अगले 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण।
बालेन शाह सरकार से सीधा संवाद: काठमांडू में नई सरकार की प्राथमिकताएं सुनेंगे समीर पॉल कपूर
"नारी शक्ति का अपमान माफ नहीं करेगा देश": बिल गिरने पर विदेश मंत्री जयशंकर ने जताया रोष
उत्तर बनाम दक्षिण: संजय राउत ने महिला आरक्षण बिल के पीछे छिपे 'क्षेत्रीय असंतुलन' पर उठाए सवाल।
संबोधन की तैयारी: महिला आरक्षण बिल पर देश को आगे की रणनीति बता सकते हैं पीएम मोदी
महिला आरक्षण पर आदित्य ठाकरे का सुझाव: 'सीटें बढ़ाए बिना आज से ही लागू करें कोटा'।
ED की पूछताछ के 72 घंटे बाद मौत: जितेंद्र शेल्के की दुर्घटना पर अंजलि दमानिया ने उठाए सवाल।
अभिभावकों को बड़ी राहत: राज्य सरकार ने RTE एडमिशन के लिए दिया 10 दिन का अतिरिक्त समय
