धर्म एवं ज्योतिष
प्रेमानंद महाराज ने माता कैकेयी के बारे में बताया वो सच जो कोई नहीं जानता, कहा- नफरत...
11 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वृंदावन के मशहूर आध्यात्मिक गुरु श्री प्रेमानंद महाराज अपनी सादगी और भक्ति के लिए जाने जाते हैं. वे अपने प्रवचनों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं. धार्मिक जगत में संत प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो इन दिनों खूब चर्चा में है. वीडियो में श्री प्रेमानंद महाराज ने अपने एक प्रवचन में माता कैकेयी के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने माता कैकेयी के ऐसे सत्य के बारे में बताया है, जो शायद आज तक कोई नहीं जानता. महाराजजी ने भगवान राम और माता कैकेयी के बीच हुए संवाद के बारे में भी बताया. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि लोग अक्सर कैकयी को गलत समझ लेते हैं, जबकि उन्होंने जो किया वह श्रीराम के जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए था. आइए जानते हैं प्रेमानंद महाराज ने माता कैकैयी के कौन से सत्य के बारे में बताया है.
प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?
प्रेमानंद महाराज ने कहा है कि कैकेयी मां को कभी भी दोष मत देना क्योंकि अयोध्या में ऐसा कोई प्रेमी नहीं था, जैसी मां कैकेयी प्रेमी थीं, क्योंकि रघुनाथजी का वियोग, भरतजी का वियोग, महाराज दशरथ का वियोग, पूरी अयोध्या वासियों की निंदा का पात्र बनकर रामजी की इच्छा की पूर्ति की. ये माता कैकेयी है, दूसरे किसी व्यक्ति में इतना सामर्थ्य नहीं है. माता कैकेयी रामजी को जितना प्यार करती थीं. शायद है… उतना कोई अवध में प्यार करता हो.
महाराजजी ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम एकांत में माता कैकेयी से कहा, मां… मैंने पूरी अवध में देखा है कि आपसे ज्यादा मुझे कोई प्यार नहीं करता. और ये सामर्थ्य केवल प्यार करने वाले में ही होती है. तो आप मेरे लिए निंदा सहेंगी… मेरे लिए आप अपमान सहेंगी.. मेरे लिए पुत्र वियोग… मेरे लिए पति वियोग, केवल आप ही सह सकती हैं. इतना त्याग आप कर सकती हैं. भगवान राम ने आगे कहा कि मुझे पता है आप हृदय से बहुत बहादुर हैं. माता कैकेयी इतनी बहादुर थीं कि वे देवासुर संग्राम में माता साथ गई थीं चक्रवर्ती महाराज दशरथ के. महाराजी ने कहा कि भगवान रामजी ने माता कैकेयी से इसलिए यहा कहा कि मां कैकयी का हृदय वीर रस से भरा हुआ है. आप सह सकती हो मां. भगवान राम ने कहा कि बस एक मेरी इच्छा है. माता कैकेयी ने कहा कि बोलो राम, मैं अभी तुम्हारे लिए अपने प्राण त्याग कर सकती हूं. तुम्हारे लिए सबकुछ त्याग कर सकती हूं.
भगवान राम ने कहा , हे मां, आपको बस… जिस लिए मेरा अवतार हुआ है, मैं संतों के सुख के लिए अवतरित हुआ हूं. मैं अवध का राजा अभी नहीं बनना चाहता. अभी आपको मुझे 14 वर्षों के लिए वनवास भेजना होगा. महाराजजी ने कहा कि ये ध्यान रखना कि मां कैकेयी ने एकांतिक भगवान की आज्ञा का पालन किया है. मां कैकेयी का हृदय रघुनाथजी के लिए प्रेम में डूबा, ये कोई नहीं जानता. सर्वश्रेष्ठ प्रेम मां कैकेयी का, जिन्होंने अपना अपमान सहा… निंदा सहा… लेकिन रामजी की इच्छा की पूर्ति की. महाराजी ने कहा कि ये अंदर की बात कह रहा हूं, ये भगवान राम और माता कैकेयी के बीच हुए संवाद के बारे में बताया है.
महाराजजी ने आगे कहा कि भरतजी ने मां कैकेयी को रामजी के वनवास के बाद से कभी मां नहीं कहा. जब रामजी वनवास से वापस अयोध्या लौटकर आए तब भगवान राम और मां कैकेयी के बीच हुए संवाद में मां कैकेयी रामजी से कहा कि, बेटा मैंने तुम्हारी पूरी बात मानी थी. लेकिन एक बात मैं नहीं सह सकती. अपने पति का वियोग सह लिया लेकिन भरत ने आज तक मुझे मां नहीं कहा. बेटा अब बस मेरी एक इच्छा है कि भरत से मां कहलवा दो. तो रामजी जा रहे थे… भरतजी को सुचना मिली कि रामजी कहलाने के लिए आ रहे हैं. तब उनकी जो दशा हुई… वो देखकर भगवान वापस हो गए. मां कैकेयी ने रामजी की इच्छा का पालन करते हुए इतना कष्ट सहा है कि कह नहीं सकते इसलिए कभी मां कैकेयी को दोष मत देना.
कोहेड़ा गुट्टा हनुमान मंदिर: जहां आस्था मिलती है अद्भुत नजारों से, सूर्योदय का स्वर्गीय दृश्य बना आकर्षण
11 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में हनुमान जी के अनोखे मंदिरों की कोई कमी नहीं है और हैदराबाद भी इसका एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है. यहां स्थित कोहेड़ा गुट्टा हनुमान मंदिर न सिर्फ 250 साल पुराना एक प्राचीन धार्मिक स्थल है बल्कि शहर के लोगों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट भी है.
शहर के बाहरी इलाके में कोहेड़ा गुट्टा पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर हैदराबाद से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है. लोग यहां न सिर्फ आस्था के लिए, बल्कि यहां के मनमोहक नजारों का आनंद लेने भी पहुंचते हैं. मंदिर से दिखने वाला प्राकृतिक दृश्य इतना खूबसूरत है कि इसे स्वर्ग जैसा नजारा कहा जाता है.
मंदिर की मुख्य विशेषताएं
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां स्थित भगवान हनुमान की तीन प्रतिमाएं हैं. तेज धूप में इन मूर्तियों की चमक दर्शनार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं. यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट पारंपरिक दक्षिण भारतीय वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर बारीक नक्काशी देखने लायक है.
कोहेड़ा गुट्टा से दिखेगा हैदराबाद का मनोरम दृश्य
कोहेड़ा गुट्टा पहाड़ी की चोटी से पूरे हैदराबाद शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. सूर्योदय का नजारा देखने के लिए तो लोग सुबह-सुबह ही यहां पहुंच जाते हैं. इस खूबसूरती के चलते यह जगह प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए भी एक पसंदीदा स्थान बन गई है. साथ ही यहां लोग सुबह जल्दी पहुचने की कोशिश करते हैं ताकि निकलते हुए सूरज की लाली को देख सके और फोटो ले सके.
कैसे पहुंचे ?
कोहेड़ा गुट्टा हनुमान मंदिर पेड्डाम्बरपेट ओआरआर सर्विस रोड के नजदीक स्थित है. धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता, दोनों का आनंद लेने के लिए यह स्थान एकदम सही है.
इस दिन होगा दुनिया का अंत, 90 फीट गहरी गुफा में खुला राज, मंदिर में मौजूद हैं स्वर्ग और नरक के द्वार
11 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तराखंड की गोद में बसे अनगिनत रहस्यमय स्थानों में से एक है पाताल भुवनेश्वर मंदिर. यह मंदिर ना सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपने रहस्यों और प्राकृतिक संरचना के कारण यहां आने वाले हर व्यक्ति को चौंका देता है. कहा जाता है कि इस गुफा मंदिर में दुनिया के खत्म होने का रहस्य छिपा हुआ है और यही बात इसे बाकी मंदिरों से अलग और विशेष बनाती है. जी हां, यह बात एकदम सत्य है. यह गुफा पाताल लोक की तरफ जाती है और इस गुफा में कई ऐसे रहस्य छिपे हुए हैं, जिसे आज तक वैज्ञानिक खोज रहे हैं. इस गुफा में एक शिवलिंग स्थापित हैं और इसी शिवलिंग से दुनिया के अंत के रहस्य भी छिपे हुए हैं. साथ ही यहां स्वर्ग और नरक के दरवाजे भी मौजूद हैं. आइए जानते हैं पाताल भुवनेश्वर मंदिर के बारे में…
दर्शन के लिए 90 फीट गहरी गुफा में नीचे उतरना पड़ेगा
पाताल भुवनेश्वर मंदिर में जाने के लिए आपको इसकी 90 फीट गहरी गुफा में नीचे उतरना पड़ेगा, तब जाकर आप मुख्य मंदिर तक पहुंच पाएंगे, लेकिन नीचे उतरने के लिए कोई आरामदायक सीढ़ियां नहीं हैं, बल्कि आपको पतली और ऊबड़-खाबड़ सुरंगों के जरिए बड़ी सावधानी से उतरना होगा. अंदर जाने के लिए दोनों तरफ लोहे की चेन लगी है ताकि भक्त सुरक्षित उतर सकें. कहा जाता है कि जितनी कठिनाई अंदर जाने में होती है, उतनी ही बाहर निकलने में भी होती है, लेकिन भक्तों की आस्था इतनी गहरी है कि वे हर मुश्किल को पार कर यहां तक पहुंचते हैं.
मंदिर के भीतर चार अद्भुत द्वार
गुफा में प्रवेश करते ही आपको शेषनाग की आकृति दिखाई देती है. मान्यता है कि धरती इन्हीं के फन पर टिकी हुई है. स्थानीय लोग मानते हैं कि यहीं भगवान महादेव शिव निवास करते थे. इसी कारण यह स्थान देवभूमि के सबसे रहस्यमय और पूजनीय स्थलों में गिना जाता है. मंदिर के भीतर स्वर्ग, नरक, मोक्ष और पाप के चार अद्भुत द्वार हैं. कहा जाता है कि यह द्वार जीवन के चार चरणों और कर्मों का प्रतीक हैं. इसके अलावा, यहां 33 करोड़ देवी-देवताओं के स्वरूप और भगवान गणेश के सिर के दर्शन एक साथ होते हैं.
इस दिन होगा दुनिया का अंत
इस रहस्यमय गुफा में स्थित शिवलिंग की एक विशेष मान्यता है. मान्यता है कि यह शिवलिंग लगातार बढ़ रहा है और जब यह गुफा की छत को छू लेगा, तो दुनिया का अंत हो जाएगा. पाताल भुवनेश्वर मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. लगभग 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी यह गुफा अपने आप में एक रहस्यलोक है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (11 नवंबर 2025)
11 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, व्यवसायिक वृत्ति में सुधार अवश्य ही होगा।
वृष राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष होगा, इष्ट-मित्रों से कुछ मानसिक बेचैनी बढ़ेगी।
मिथुन राशि :- अनावश्यक बेचैनी तथा धन हानि संभव है, तनाव पूर्ण वातावरण बनेगा।
कर्क राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, इधर-उधर भटकना पड़ेगा, दूसरों के कार्य बनेंगे ध्यान दें।
सिंह राशि :- सतर्कता से कार्य करें, अधिकारी वर्ग असमंजस में रखेगा, वातावरण अनुकूल होगा।
कन्या राशि :- रुके हुये कार्य निपटा लें, बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा, कार्य बन जायेगा।
तुला राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास तथा कार्य-व्यवसाय गति अनुकूल बनेगी ध्यान रखें।
वृश्चिक राशि :- मानसिक विभ्रम रहेगा, इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, स्त्री-वर्ग से हर्ष होगा।
धनु राशि :- तनाव व अरोप से बचिये, वाद-विवाद की संभावना बनेगी, यात्रा होगी।
मकर राशि :- शुभ समाचार हर्षयुक्त रखेगा, स्थिति यथावत् रहे, इष्ट-मित्र सहयोगी होगा।
कुंभ राशि :- चिन्तायें मन को बेचैनी रखेंगी, तनाव, क्लेश व अशांति, मनोबल बढ़ेगा।
मीन राशि :- प्रयत्न निष्फल होगा, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, व्यवसायिक व्यवस्था बनेगी।
मार्गशीर्ष मास के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान, जानें क्या करें और क्या ना करें?
10 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मार्गशीर्ष मास को अगहन भी कहा जाता है और यह माह अत्यंत पवित्र व शुभ माना गया है. यह माह देवी-देवताओं का प्रिय काल कहा जाता है क्योंकि इस मास में शुभ व धार्मिक कार्य बढ़ जाते हैं और इनका फल कई गुना बढ़ जाता है. इस मास में श्रीकृष्ण की पूजा करने से जीवन में शांति, धन और मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के हर क्षेत्र में लाभ मिलता है. साथ ही व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. ज्योतिष शास्त्र में मार्गशीर्ष मास के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की बात की गई है. अगर आप इन बातों को जीवन में उतार लेते हैं तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है और भगवान कृष्ण की कृपा भी प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं मार्गशीर्ष मास के दौरान क्या करें क्या ना करें…
मार्गशीर्ष मास का महत्व
मार्गशीर्ष मास का भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्वयं गीता में महिमामंडित किया गया है, मासानां मार्गशीर्षोऽहम्। अर्थात मैं महीनों में मार्गशीर्ष मास हूं. यह महीना स्वयं भगवान का स्वरूप है. इस समय साधना, दान, व्रत और भक्ति का जो फल मिलता है, वह कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है. इस महीने सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान, ध्यान और गायत्री जप करने से पाप नष्ट होते हैं. मार्गशीर्ष मास का पालन केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि आत्मोन्नति और ईश्वर-संयोग का काल है.
मार्गशीर्ष मास के दौरान क्या ना करें
मार्गशीर्ष मास में झूठ बोलना, किसी का दिल दुखाना, क्रोध, घमंड या अंहकार करना, चोरी-डकैती जैसी नकारात्मक चीजें करना अशुभ माना गया है.
मार्गशीर्ष मास में मांस-मदिरा, लहसुन-प्या आदि का सेवन करने से बचना चाहिए अन्यथा तन और मन दोनों अशुद्ध हो जाते हैं.
मार्गशीर्ष मास में जीरे का सेवन करना भी वर्जित बताया गया है इसलिए भोजन में जीरे का प्रयोग ना करें.
मार्गशीर्ष मास में में किसी की बुराई या चुगली करने से बचना चाहिए और अपने काम पर ध्यान देना चाहिए.
मार्गशीर्ष मास में बासी या ठंडा भोजन करने से बचना चाहिए, इस मास में हमेशा ताजी भोजन का ही सेवन करें.
मार्गशीर्ष मास के दौरान क्या करें
मार्गशीर्ष मास में हर रोज भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करना चाहिए और शुद्व व सात्विक भोजन करना चाहिए.
मार्गशीर्ष मास में हर दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है.
मार्गशीर्ष मास में सुबह व शाम के समय मंदिर, घर की उत्तर दिशा, तुलसी के पास दीपक अवश्य जलाना चाहिए.
मार्गशीर्ष मास में गरीब व जरूरतमंद लोगों की मदद करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है.
मार्गशीर्ष मास में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए और भगवद्गीता का पाठ करना चाहिए.
मार्गशीर्ष मास में अपने वचन, कर्म और मन से शुद्ध रखें और धार्मिक किताबें पढ़ें.
छतरपुर के 5 चमत्कारी मंदिर, जहां शादी, संतान और स्वास्थ्य तीनों का मिलता है वरदान, दूर-दूर से आते हैं लोग
10 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर आप एमपी के छतरपुर में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां आप 5 ऐसे मंदिर भी घूम सकते हैं जहां शादी और संतान का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही यहां चर्म रोग भी ठीक होते हैं.
अगर आप ठंड सीजन में एमपी के छतरपुर में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां आप 5 ऐसे मंदिर भी घूम सकते हैं, जो दर्शनीय स्थल, तो हैं ही, साथ ही अपने चमत्कार के लिए भी जाने जाते हैं.
खजुराहो में स्थित भगवान शिव का ये मंदिर कुंवर मठ के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर को दूल्हा देव मंदिर के नाम से भी जाना जाता हैं. मंदिर के गर्भगृह में एक सुंदर शिवलिंग स्थापित है.
लोकमान्यता है कि मंदिर के द्वार से बारात के लिए जो दूल्हा निकलता है वह इस मंदिर में आकर आशीर्वाद जरूर लेता है. क्योंकि इस मंदिर में भगवान शिव दूल्हा देव के रुप में विराजमान हैं. मान्यता है कि शिवलिंग की एक परिक्रमा 1000 परिक्रमाओं के बराबर होती है.
छतरपुर के बिजावर तहसील में स्थित जटाशंकर धाम जिसे केदारनाथ मंदिर भी कहा जाता है. यह धाम भगवान शिव की अनूठी कृपा और कई अलौकिक शक्तियों के लिए जाना जाता है. इस धाम के अंदर तीन कुंड मौजूद हैं, जिसमें से ठंडा, गर्म और साधारण पानी आता है. ऐसा माना जाता है कि इन कुंडों में स्नान करने से बड़े से बड़ा चर्म रोग दूर हो जाता है. यही वजह है कि लोग यहां से जल लेकर अपने-अपने घर ले जाते हैं.
खजुराहो में स्थित मंतगेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में अनोखा है. यह मंदिर खजुराहो में सबसे पहले बना था. इस मंदिर का निर्माण 8-9वीं शताब्दी में बना था.शिवलिंग को हांथ से स्पर्श करने पर यहां श्रद्वालुओं की मनोकामना पूरी हो जाती है. हांथ से स्पर्श करने पर श्रद्धालुओं को एहसास होता है कि उनकी मनोकामना पूरी होती है.
छतरपुर जिले के लवकुश नगर मां बंबरबैनी माता मंदिर में एक ऐसा चमत्कारिक कुंड है, जहां संतान के रूप में बेटी की इच्छा पूरी होती है. दरअसल, इस चमत्कारिक कुंड में माता साक्षात विराजमान हैं. इस कुंड में पानी-दूध चढ़ाने के बाद मनोकामना मांगते समय बतासे डालने की परंपरा है. अगर एक बतासा भी ऊपर आ जाता है, तो आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है.
शनि मंदिर मऊ सहानिया, छतरपुर जिले के नौगाँव और धुबेला क्षेत्र में प्राचीन शनि मंदिर स्थित है. ये तालाब के बीचों-बीच स्थित है. हालांकि, यहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है. इस मंदिर में शनि के साथ 9 ग्रह भी विराजमान हैं. इसलिए इसे शनि नवग्रह मंदिर भी कहते हैं. यहां शनिवार को दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं. यहां शनि देव की प्रतिमा पर तिल का तेल, काली तिल और उड़द चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर शनिदेव कृपा बरसाते हैं.
अगर आप मप्र के छतरपुर घूमना चाहते हैं तो यहां के चमत्कारी मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं. हवाई मार्ग से आप खजुराहो आ सकते हैं. साथ ही रेल मार्ग से छतरपुर और खजुराहो रेलवे स्टेशन आ सकते हैं. यहां से आप कार में खजुराहो के मंदिर, बिजावर के जटाशंकर धाम, मऊ सहानिया और लवकुश नगर जा सकते हैं.
अगर बुध बैठा है पांचवें भाव में, तो संभल जाएं! रिश्ते और निर्णय दोनों डगमगा सकते हैं
10 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जन्म कुंडली में बुध को ऐसा ग्रह माना जाता है जो इंसान की सोच, बोलचाल, बुद्धि, निर्णय लेने की क्षमता और व्यापारिक समझ पर सीधा असर डालता है, अगर किसी की कुंडली में बुध पांचवें भाव में बैठा हो, तो उसकी बुद्धि तेज मानी जाती है. ऐसे लोग सोचने-समझने में दूसरों से आगे रहते हैं और बातों में इतनी मिठास होती है कि सामने वाला तुरंत प्रभावित हो जाता है. पांचवां भाव शिक्षा, बच्चों, क्रिएटिव सोच, प्यार और मानसिक स्थिरता से जुड़ा होता है. इसलिए जब बुध यहां आता है, तो व्यक्ति की मानसिक क्षमता और ज्ञान में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है. ऐसे लोग नई-नई बातें सीखने, लिखने या बोलने में काफी निपुण होते हैं, लेकिन हर ग्रह का प्रभाव हमेशा एक जैसा नहीं होता, अगर बुध कमजोर हो जाए या किसी पाप ग्रह की दृष्टि में आ जाए, तो इसका उल्टा असर भी देखने को मिलता है जैसे बातों में झूठ, गलत निर्णय, प्यार में धोखा या बच्चों से जुड़ी परेशानियां. चलिए जानते हैं बुध के पांचवें भाव में होने के सकारात्मक, नकारात्मक प्रभाव और उपाय, जिससे जीवन में संतुलन बना रहे.
बुध के पांचवें भाव में होने के सकारात्मक प्रभाव
1. तेज़ दिमाग और अच्छा निर्णय लेने की क्षमता
इस स्थिति में व्यक्ति का दिमाग बहुत तेज़ चलता है. उसे जल्दी-जल्दी नए आइडिया आते हैं और वह दूसरों से अलग सोचने में माहिर होता है.
2. शिक्षा और पढ़ाई में रुचि
ऐसे लोगों की पढ़ाई में पकड़ मजबूत होती है, वे गणित, लॉजिक, लेखन, या मीडिया जैसे क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, अगर बुध शुभ ग्रहों से जुड़ा हो तो व्यक्ति प्रोफेसर, लेखक, पत्रकार या शिक्षक बन सकता है.
3. बातचीत में आकर्षण और समझदारी
बुध पांचवें भाव में होने से बात करने का तरीका बहुत प्रभावशाली होता है. ऐसे लोग समाज में अपनी बात साफ़ और सटीक तरीके से रखते हैं, जिससे लोग उनकी बातों पर भरोसा करते हैं.
4. क्रिएटिव सोच और कला से जुड़ाव
बुध जब इस भाव में शुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति में रचनात्मकता भरपूर होती है. वे म्यूज़िक, एक्टिंग, डिजाइनिंग या किसी भी आर्ट फील्ड में सफलता पा सकते हैं.
5. प्यार और रिश्तों में समझदारी
बुध यहां प्यार को समझने और निभाने की क्षमता देता है. ऐसे लोग रिश्तों में संवाद को अहम मानते हैं और गलतफहमियों से बचते हैं.
बुध के पांचवें भाव में होने के नकारात्मक प्रभाव
1. अति सोचने की आदत
अगर बुध अशुभ हो जाए, तो व्यक्ति हर बात पर ज़्यादा सोचने लगता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है.
2. रिश्तों में उलझनें
कमजोर बुध वाले व्यक्ति रिश्तों में ज्यादा तर्क-वितर्क करते हैं, ये छोटी-छोटी बातों को बढ़ा देते हैं, जिससे प्यार में दूरी आ सकती है.
3. शिक्षा में रुकावट या ध्यान भटकना
कई बार बुध के अशुभ होने से पढ़ाई में मन नहीं लगता या व्यक्ति जल्दी किसी बात से ध्यान हटा लेता है.
4. झूठ या चालाकी का व्यवहार
कमजोर बुध व्यक्ति को चालाक बना सकता है. ऐसे लोग कभी-कभी झूठ बोलकर काम निकालने की कोशिश करते हैं, जिससे उनकी छवि खराब होती है.
5. बच्चों से जुड़ी परेशानी
जिनकी कुंडली में बुध पांचवें भाव में कमजोर हो, उन्हें संतान सुख में देरी या बच्चे की सेहत से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं.
बुध के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
1. बुधवार का व्रत रखें और हरे रंग के कपड़े पहनें.
2. गणेश जी की पूजा करें, क्योंकि गणपति बुध के कारक देवता माने गए हैं.
3. हरी मूंग दान करें या गौशाला में हरा चारा खिलाएं.
4. हर सुबह तुलसी में जल चढ़ाएं और बुध मंत्र “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” का 108 बार जाप करें.
5. झूठ बोलने से बचें और हमेशा अपनी बात साफ़ रखें, इससे बुध मजबूत होता है.
6. पन्ना रत्न (Emerald) शुभ ग्रह स्थिति में पहनना लाभदायक होता है, लेकिन पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें.
भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के बाद इस काम से सभी पुण्य हो जाते हैं नष्ट, जानें क्यों मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर बैठे हैं यमराज
9 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओडिशा के पुरी का जगन्नाथ मंदिर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमयी मंदिरों में से एक है. हिंदू धर्म में चार पवित्र धाम में से एक जगन्नाथ मंदिर को पृथ्वी का वैकुंठ धाम कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जगन्नाथ मंदिर के दर्शन से मनुष्य पापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मंदिर से लौटते समय की एक छोटी-सी गलती आपके सारे पुण्य नष्ट कर सकती है? अगर आपसे जाने-अनजाने यह गलती हो जाती है तो आपके सभी पुण्य नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा करनी पड़ती है. इसलिए भगवान के दर्शन करने के बाद कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है. आइए जानते हैं भगवान के दर्शन से लौटते समय की गई इस गलती से क्यों खुल जाता है यमलोक का रास्ता…
भगवान जगन्नाथ की तीसरी सीढ़ी की कथा
भगवान जगन्नाथ के मंदिर से जुड़ी एक बेहद रोचक और रहस्यमयी कथा है, जो मंदिर के मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी से जुड़ी हुई है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब भगवान जगन्नाथ के दर्शन से सभी भक्त पाप मुक्त हो रहे थे. लोग सीधे मोक्ष पा रहे थे और यमलोक जाने वालों की संख्या बहुत कम हो गई थी. यह देखकर यमराज चिंतित हो गए. वे स्वयं भगवान जगन्नाथ के पास पहुंचे और बोले, प्रभु आपने पाप मुक्ति का मार्ग इतना सरल बना दिया है कि अब कोई भी यमलोक नहीं आ रहा. अगर ऐसा चलता रहा तो मेरे लोक में सन्नाटा छा जाएगा.
भगवान ने यमराज को दिए निर्देश
यमराज की यह बात सुनकर भगवान जगन्नाथ मुस्कुराए और बोले, ‘यमराज, अब से तुम मेरे मंदिर के मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी पर निवास करो. जो भी व्यक्ति मेरे दर्शन के बाद लौटते समय इस सीढ़ी पर पैर रखेगा, उसके सारे पुण्य नष्ट हो जाएंगे और उसे यमलोक आना ही पड़ेगा. तब से मंदिर की तीसरी सीढ़ी को यमशिला कहा जाने लगा. यह शिला काले रंग की है और बाकी सीढ़ियों से बिल्कुल अलग दिखती है.
यमशिला पर पैर ना रखें
भक्त मानते हैं कि दर्शन करते वक्त तो इस शिला पर पैर रखना शुभ माना जाता है, लेकिन वापस लौटते समय अगर कोई गलती से भी उस पर पैर रख दे, तो उसके सारे पुण्य समाप्त हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप पुरी के जगन्नाथ मंदिर जाएं, तो एक बात जरूर ध्यान रखें कि मंदिर से लौटते समय मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी यानी यमशिला पर पैर ना रखें.
कहीं आपकी किस्मत पर भी लगी है नजर? आज ही करें फिटकरी और नमक का ये चमत्कारी टोटका!
9 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कई बार जिंदगी में ऐसा लगता है जैसे सब कुछ रुक गया है. घर में बिना बात झगड़े शुरू हो जाते हैं, पति-पत्नी के बीच मनमुटाव बढ़ने लगता है या कारोबार जो पहले खूब चल रहा था, अचानक ठहर जाता है. नौकरी में प्रमोशन अटक जाता है, मेहनत के बाद भी रिजल्ट नहीं मिलते या स्टूडेंट्स का मन पढ़ाई से हट जाता है. ऐसा लगता है जैसे किस्मत ने अचानक ब्रेक लगा दी हो, अगर आप भी ऐसी किसी अजीब सी रुकावट या नेगेटिविटी महसूस कर रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके बहुत काम का है. एक बेहद आसान लेकिन असरदार उपाय फिटकरी और नमक का टोटका, जो आपकी रुकी हुई किस्मत को फिर से चलाने की ताकत रखता है. यह उपाय न तो महंगा है, न कठिन. बस थोड़ी श्रद्धा और सही समय पर इसे करना जरूरी है. कई लोगों ने इस उपाय से अपने जीवन में जबरदस्त बदलाव देखे हैं, तो चलिए जानते हैं यह उपाय आखिर कैसे करना है.
कब करें यह उपाय
इस उपाय को शुक्ल पक्ष के शनिवार की रात करना सबसे शुभ माना गया है. यह समय ऊर्जा के बढ़ने का होता है और जो भी काम इस दिन किया जाए, उसका असर जल्दी दिखाई देता है. इस टोटके को परिवार का कोई भी सदस्य कर सकता है महिला या पुरुष, लेकिन कोशिश करें कि घर का कोई बड़ा या जिम्मेदार व्यक्ति इसे करे.
ज़रूरी चीज़ें
-एक छोटा टुकड़ा फिटकरी का
-एक मुट्ठी साधारण नमक (सेंधा नमक या सी साल्ट नहीं, बस वही जो आप रोज़ खाने में इस्तेमाल करते हैं)
ये दोनों चीज़ें आसानी से किराने या पूजा की दुकान में मिल जाएंगी, और चाहें तो ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं.
उपाय करने का सही तरीका
शनिवार की रात जब घर के सारे लोग अपने काम निपटा चुके हों, यानी लगभग रात 9 से 10 बजे के बीच, तभी यह टोटका करें.
1. एक मुट्ठी नमक अपने दाएं हाथ में लें. ध्यान रखें कि नमक ज़मीन पर न गिरे.
2. अब उस पर फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा रख लें.
3. अपनी मुट्ठी बंद कर लें ताकि दोनों चीज़ें अंदर सुरक्षित रहें.
4. अब शांत मन से एक जगह बैठ जाएं और अपने दिल में जो भी परेशानी है, उसे याद करें जैसे नौकरी में अड़चन, घर में झगड़े, पैसों की दिक्कत या मन की बेचैनी.
5. मन ही मन प्रार्थना करें कि “हे भगवान, मेरे जीवन से सारी रुकावटें और नकारात्मकता दूर कर दो.”
6. अब अपने घर के हर कमरे के चारों कोनों में जाकर इस बंद मुट्ठी को हल्के से टच कराएं.
-सबसे पहले बेडरूम
-फिर ड्रॉइंग रूम, किचन और बच्चों का कमरा
-अंत में बाथरूम के चारों कोने
अगर किसी कोने में सामान रखा है तो दीवार के ऊपर वाले हिस्से को टच करा सकते हैं.
अंत में क्या करें
सारे कमरों में टच कराने के बाद आख़िर में बाथरूम में जाएं और वहीं यह फिटकरी और नमक पॉट में डाल दें.
अब अपने हाथ अच्छे से धो लें और फ्लश कर दें. उसके बाद बिना किसी से बात किए, सीधे अपने बेड पर जाकर सो जाएं. इस दौरान किसी को यह बात बताएं नहीं, ये उपाय पूरी तरह गोपनीयता में ही असर दिखाता है.
कितनी बार करें यह उपाय
यह टोटका महीने में एक बार शनिवार की रात किया जाता है. लगातार तीन शनिवार तक इसे करें. तीसरे हफ्ते के बाद ही आपको फर्क महसूस होने लगेगा घर का माहौल हल्का लगेगा, बिजनेस या नौकरी में ग्रोथ दिखेगी और मन में अजीब सी शांति महसूस होगी.
क्यों असर करता है यह उपाय
फिटकरी और नमक दोनों ही चीज़ें ऊर्जा को साफ करने के लिए जानी जाती हैं. नमक नकारात्मकता को सोख लेता है, जबकि फिटकरी उसे खत्म कर देती है. जब आप इन्हें घर के हर कोने में घुमाते हैं, तो यह आपके आस-पास की एनर्जी को क्लीन करता है. यही वजह है कि बहुत से लोग इस उपाय के बाद अपने जीवन में बड़ा बदलाव महसूस करते हैं.
ध्यान रखने वाली बातें
-यह उपाय करते समय मन में किसी के लिए गुस्सा या बुरा भाव न रखें.
-अगर महिला कर रही है तो उस दिन शुद्धता का ध्यान रखे.
-उपाय के दौरान मोबाइल, टीवी या किसी भी तरह की बातों में ध्यान न भटकाएं.
-इसे मज़ाक या जिज्ञासा में नहीं, विश्वास के साथ करें.
नतीजा और अनुभव
बहुत से लोगों ने इस उपाय को करने के बाद बताया कि उनके घर में बरकत बढ़ी, झगड़े कम हुए, और काम में सफलता मिलने लगी. जो विद्यार्थी पढ़ाई से ऊब गए थे, उन्हें फिर से फोकस मिला. इसलिए अगर आप भी जीवन की किसी रुकावट से जूझ रहे हैं, तो एक बार यह उपाय ज़रूर करें बिना किसी डर या शक के.
क्या आपके बच्चे की मुस्कान अचानक गायब हो गई? जानिए 7 अचूक टोटके जो नजर को पलभर में मिटा देंगे!
9 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर मां-बाप के लिए सबसे बड़ी खुशी होती है उनका बच्चा उसकी मुस्कान, उसकी हर छोटी हरकत, लेकिन जब वही बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो जाए, दूध पीना छोड़ दे, या बार-बार रोने लगे, तो दिल परेशान हो जाता है. ऐसे में बहुत से लोग कहते हैं, “बच्चे को नजर लग गई है.” दरअसल, छोटे बच्चे बहुत कोमल होते हैं, उन पर नजर का असर जल्दी पड़ता है चाहे वो किसी बाहर वाले की हो या घर के अपने ही लोगों की. मां-पापा, दादी, नानी, भाई-बहन सबकी नज़र प्यार में भी उतर जाती है, जिसे “मीठी नजर” कहा जाता है, लेकिन अगर नजर गहरी या बुरी हो तो बच्चा बेचैन हो जाता है. ऐसे में कुछ आसान पारंपरिक टोटके और घरेलू उपाय हैं जो सालों से लोग करते आ रहे हैं और आज भी बेहद असरदार माने जाते हैं, ये उपाय न तो कठिन हैं, न महंगे. सिर्फ थोड़ा सा विश्वास और सही तरीका अपनाना ज़रूरी है. तो चलिए जानते हैं 7 जिनसे बच्चों की नजर तुरंत उतर जाती है और उनका मन-मिजाज फिर से खुशहाल हो जाता है.
1. फूल और पानी से नजर उतारना
घर के पूजा स्थल से एक पात्र में थोड़ा सा शुद्ध पानी लें और उसमें एक ताज़ा फूल रख दें चाहे गेंदा, गुलाब या कोई भी पूजा वाला फूल. फिर बच्चे के सिर से पैर तक 7 बार पानी और फूल को घुमाकर नजर उतारें. उसके बाद ये पानी किसी पौधे या गमले में डाल दें. इससे मीठी नजर का असर खत्म होता है.
2. शक्कर से नजर उतारना
अगर आपको लगता है कि बच्चे को अपनों की मीठी नजर लगी है, तो दोनों हथेलियों में थोड़ी सी शक्कर लें और बच्चे के ऊपर से 7 या 11 बार घुमाकर बाहर फेंक दें. शक्कर में मिठास होती है और वो मीठी नजर को अपने साथ लेकर चली जाती है.
3. दूध और शक्कर का उपाय
अगर बच्चा मां के दूध पर है या दूध पीता है, तो थोड़े दूध में शक्कर डालकर बच्चे के ऊपर से 7 बार उतारें और फिर वो दूध शिव मंदिर में जाकर अर्पित कर दें. इससे परिवार की नजर से बच्चे को राहत मिलती है.
4. झाड़ू से नजर हटाना
हर शनिवार को झाड़ू से बच्चे के ऊपर एंटी-क्लॉकवाइज़ दिशा में 7 बार घुमाएं और फिर घर के मुख्य द्वार पर जाकर झाड़ू को तीन बार झाड़ दें. इससे घर के अंदर की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी दृष्टि दोनों दूर होती हैं.
5. बच्चे की चप्पल से नजर उतारना
अगर बच्चा अब चलने लगा है और उसकी छोटी चप्पल या जूते हैं, तो उसकी बायीं चप्पल (लेफ्ट फुट वाली) से एंटी-क्लॉकवाइज़ दिशा में 7 बार नजर उतारें. फिर घर के दरवाजे पर जाकर उस चप्पल को तीन बार झाड़ दें. यह पुराना मगर बहुत असरदार तरीका है.
6. फिटकरी का पारंपरिक उपाय
थोड़ी सी फिटकरी लें और बच्चे के सिर से पैर तक 7 बार उतारें. फिर उस फिटकरी को आग में जला दें. जैसे ही वो जलती है, उसमें से जो धुआं उठता है, वो नजर का असर खत्म कर देता है. फिटकरी को नजर और बुरी ऊर्जा सोखने के लिए जाना जाता है.
7. हनुमान जी के सिंदूर का टीका
शनिवार के दिन हनुमान मंदिर जाएं और हनुमान जी के कंधे वाले सिंदूर का थोड़ा सा भाग लेकर बच्चे के माथे पर टीका लगाएं. इससे बुरी नजर, भय और नकारात्मक प्रभाव तुरंत खत्म हो जाता है. यह सबसे प्रभावशाली उपायों में से एक है.
मांओं के अनुभव से जुड़ी सीख
बहुत सी मांएं बताती हैं कि जब उन्होंने ये उपाय किए, तो बच्चा शांत हो गया, फिर से दूध पीने लगा और उसका मूड भी सामान्य हुआ. कई बार नजर इतनी गहरी होती है कि बच्चे की नींद भी खराब हो जाती है. ऐसे में ये पारंपरिक टोटके सच में राहत देते हैं.
तुलसी का पौधा सूखना सिर्फ इशारा नहीं, आने वाले संकट की चेतावनी भी है
9 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तुलसी का पौधा लगभग हर हिंदू घर की पहचान होता है. सुबह-शाम तुलसी के सामने दीपक जलाना, जल चढ़ाना और परिक्रमा करना हमारी परंपरा का अहम हिस्सा है. ऐसा माना जाता है कि जहां तुलसी रहती है, वहां भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है. यही वजह है कि तुलसी के पौधे को घर की सुख-समृद्धि का प्रतीक कहा गया है, लेकिन कई बार लोग यह गलती कर बैठते हैं कि तुलसी के सूख जाने के बाद भी उसे वहीं छोड़ देते हैं. बहुतों को लगता है कि यह बस एक पौधा है, पर ऐसा नहीं है. धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र दोनों के अनुसार सूखा तुलसी पौधा घर में रखना अशुभ माना जाता है. यह न सिर्फ घर की सकारात्मक ऊर्जा को कम करता है, बल्कि आर्थिक और मानसिक परेशानियां भी ला सकता है. तो आखिर तुलसी के सूखने का क्या मतलब होता है? क्या इसे घर में रखना वाकई अशुभ है? और अगर सूख जाए तो उसे किस तरह विदा करना चाहिए? आइए जानते हैं
धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी देवी का स्थान
तुलसी को देवी का रूप माना गया है. कहा जाता है कि यह भगवान विष्णु की सबसे प्रिय है. जिस घर में तुलसी रहती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है, लेकिन जब तुलसी सूख जाती है, तो इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि घर की ऊर्जा कमजोर हो रही है या घर में कुछ नकारात्मक प्रभाव बढ़ गया है. सूखा तुलसी का पौधा रखना देवी तुलसी का अपमान माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब तुलसी सूख जाए, तो उसे सम्मानपूर्वक मिट्टी में दबा देना चाहिए और उसकी जगह नई तुलसी लगानी चाहिए। ऐसा करने से घर में फिर से सकारात्मकता लौटती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है
वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी पौधे का असर
वास्तु शास्त्र कहता है कि घर में हर हरा पौधा जीवन, विकास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है, लेकिन जब वही पौधा सूख जाता है, तो वह रुकावट और नकारात्मकता फैलाने लगता है.
सूखा तुलसी पौधा घर के वातावरण में उदासी और तनाव बढ़ा सकता है. वास्तु विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आर्थिक रुकावटों, परिवार में मनमुटाव और मानसिक अशांति का कारण बन सकता है. तुलसी का पौधा हमेशा हरा-भरा रहे, इसके लिए उसकी नियमित देखभाल करना जरूरी है.
सूखी तुलसी का क्या करें?
अगर आपके घर की तुलसी सूख गई है तो सबसे पहले यह समझिए कि इसे फेंकना या यूं ही छोड़ देना गलत है. तुलसी को हमेशा सम्मान के साथ विदा किया जाना चाहिए.
1. सूखे पौधे को गंगाजल से हल्का छिड़कें.
2. उसे मिट्टी सहित किसी पवित्र स्थान पर दबा दें.
3. उस जगह दीपक जलाएं और “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जाप करें.
4. फिर उसी स्थान पर नया तुलसी पौधा लगाएं.
यह प्रक्रिया न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से शुभ मानी जाती है, बल्कि इससे घर में फिर से शांति और सकारात्मकता का माहौल बनता है.
तुलसी की देखभाल कैसे करें ताकि वह न सूखे
तुलसी के पौधे को स्वस्थ रखने के लिए थोड़ी सी सावधानी जरूरी है.
-रोज़ाना तुलसी में जल चढ़ाएं, लेकिन ध्यान रखें कि बहुत ज़्यादा पानी डालने से जड़ें सड़ सकती हैं.
-तुलसी को ऐसी जगह रखें जहां सुबह की धूप और हल्की छांव दोनों मिलें.
-सूखे पत्ते और मंजरी समय-समय पर हटाते रहें.
-कार्तिक और मार्गशीर्ष मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस दौरान दीपक जलाना शुभ माना जाता है.
-कभी भी तुलसी के पौधे को पैरों से न छूएं या उस पर गंदा पानी न डालें.
इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से तुलसी हमेशा हरी-भरी रहेगी और घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (09 नवंबर 2025)
9 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- प्रभुत्व वृद्धि, स्त्री-वर्ग से उल्लास, सफलता के साधन अवश्य ही जुटायें।
वृष राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, बिगड़े कार्य बनें, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
मिथुन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्यवृत्ति में सुधार अवश्य ही होगा।
कर्क राशि :- व्यवसायिक क्षमता मंद, किसी से धोखा तथा आरोप लग सकता है सावधान रहें।
सिंह राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास, तनाव, क्लेश व अशांति, सार्थक प्रयोजन बना ही रहेगा।
कन्या राशि :- मानसिक उद्विघ्नता, धन का व्यय होगा, आर्थिक समृद्धि के साधन बनेंगे ध्यान दें।
तुला राशि :- व्यावसायिक क्षमता मंद, भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े कार्य बन ही जायेंगे।
वृश्चिक राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, स्त्री से हर्ष, कार्य-व्यावसाय के साधन बनेंगे।
धनु राशि :- व्यवसायिक चिन्तायें रहेंगी, थकावट, बेचैनी बनें, कपट से बचने का प्रयास करें।
मकर राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार, चिन्तायें कम हों, सफलता के साधन अवश्य बनेंगे।
कुंभ राशि :- स्त्री-वर्ग से तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम, उपद्रव अवश्य ही होगा।
मीन राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक उद्वविघ्नता, स्वभाव में बेचैनी अवश्य बनेगी।
धन बढ़ाने के चक्कर में तुलसी या रुद्राक्ष गलत रखा तो हो सकता है उल्टा असर
8 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हममें से बहुत से लोग अपने पर्स में कुछ ऐसी चीजें रखते हैं जो हमें शुभ लगती हैं किसी को सिक्का रखना अच्छा लगता है, किसी को भगवान की फोटो या किसी को तुलसी का पत्ता या रुद्राक्ष का दाना. ज्यादातर लोग ऐसा इसलिए करते हैं ताकि धन में वृद्धि हो, नज़र न लगे या जीवन में सकारात्मकता बनी रहे, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि ये चीजें वाकई में पर्स में रखनी चाहिए या नहीं? पूजा से जुड़ी वस्तुएं अपनी जगह बहुत पवित्र होती हैं, और उनका असर भी बहुत गहरा होता है, लेकिन इनका सही या गलत तरीके से इस्तेमाल आपके जीवन में बड़ा फर्क ला सकता है. कई बार हम अच्छे इरादे से पवित्र चीजें अपने पास रखते हैं, लेकिन उनका स्थान और देखभाल ठीक न होने से वही चीजें उल्टा असर करने लगती हैं. वृंदावन के कई ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि हर पूजा की वस्तु की अपनी ऊर्जा होती है. अगर उसे सही जगह पर रखा जाए तो वह हमें शुभ फल देती है, लेकिन अगर उसे गंदे या अनुचित स्थान पर रखा जाए तो वही ऊर्जा नकारात्मक हो जाती है. तो आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से क्या तुलसी, रुद्राक्ष या अन्य पूजा की वस्तुएं पर्स में रखनी चाहिए या नहीं?
पर्स सिर्फ पैसे रखने की चीज नहीं है, बल्कि यह हमारी आर्थिक स्थिति और ऊर्जा का भी प्रतीक माना जाता है. इसमें क्या रखा गया है, यह हमारे भाग्य और मनोस्थिति पर असर डाल सकता है. बहुत से लोग मानते हैं कि पर्स में तुलसी का पत्ता या रुद्राक्ष रखने से धन की कमी नहीं होती और नकारात्मकता दूर रहती है. हालांकि यह सच है कि तुलसी और रुद्राक्ष दोनों ही बेहद पवित्र माने जाते हैं, लेकिन इन्हें पर्स में रखने के कुछ नियम हैं जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए.
1. पर्स में तुलसी का पत्ता रखना
तुलसी माता को सबसे पवित्र पौधों में गिना गया है. कहा जाता है कि जहां तुलसी रहती है, वहां भगवान विष्णु का वास होता है, और वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं टिकती, अगर आप पर्स में तुलसी का पत्ता रखना चाहते हैं तो यह शुभ माना जाता है, पर ध्यान रखें कि पर्स गंदा न हो, पर्स में पड़े पुराने बिल, टिकट, कूड़े जैसी चीजें तुरंत निकाल दें. तुलसी के पत्ते को लाल या पीले कपड़े में लपेटकर रखें, अगर पत्ता सूख जाए या टूट जाए तो उसे नदी में प्रवाहित कर नया पत्ता रख लें. इस तरह से रखने पर तुलसी माता आपकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं और नजर दोष से बचाती हैं.
2. पर्स में रुद्राक्ष रखना
रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रतीक है और इसकी ऊर्जा बहुत शक्तिशाली होती है. इसे पर्स में रखने से सकारात्मकता बढ़ती है, और मानसिक शांति मिलती है, लेकिन रुद्राक्ष को कभी भी बिना लपेटे न रखें. इसे लाल या सफेद कपड़े में लपेटकर रखें और कोशिश करें कि इसे कलावे से बांधा गया हो, अगर रुद्राक्ष का मनका पुराना हो गया है या टूटा हुआ है तो उसे पर्स में नहीं रखना चाहिए.. उसे किसी बहते जल में प्रवाहित कर दें. याद रखें कि पर्स को कभी कमर के नीचे न रखें, न ही उस पर बैठें. ऐसा करने से पूजा की वस्तु का अपमान होता है और उसका असर कम हो जाता है.
3. पूजा से जुड़ी अन्य वस्तुएं
कई लोग भगवान की फोटो, चालीसा, या धातु की छोटी मूर्तियां भी पर्स में रख लेते हैं. लेकिन यह करना सही नहीं माना गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि पर्स एक व्यावहारिक वस्तु है जिसमें हम पैसे, रसीदें और कभी-कभी अशुद्ध चीजें रखते हैं. ऐसे में भगवान की तस्वीर या धार्मिक ग्रंथ का पृष्ठ रखना अपवित्र माना जाता है. इससे लाभ के बजाय हानि होती है, अगर आप भगवान की कृपा चाहते हैं तो उनके लॉकेट को पहनना बेहतर है, पर्स में रखना नहीं. वहीं तुलसी के अलावा और किसी पूजा की वस्तु जैसे कमलगट्टे की माला, रुद्राक्ष की माला या धातु की चीजें पर्स में न रखें. इनकी ऊर्जा बहुत संवेदनशील होती है और इन्हें गलत जगह रखने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
4. पर्स को हमेशा पवित्र रखें
अगर आप अपने पर्स में तुलसी या रुद्राक्ष रखते हैं, तो यह ध्यान रखें कि पर्स फटा हुआ या गंदा न हो. पर्स को कभी जमीन पर न रखें और कोशिश करें कि वह हमेशा आपके सिर या सीने के स्तर से ऊपर रहे. पर्स में किसी भी तरह की तामसिक चीजें जैसे सिगरेट, गुटखा या अश्लील तस्वीरें नहीं होनी चाहिए. पर्स को रोजाना संभालकर रखें और समय-समय पर उसमें रखी पवित्र वस्तुओं को बदलें. इससे आपकी आर्थिक स्थिति पर भी अच्छा असर पड़ता है और घर में धन-लक्ष्मी का वास होता है.
5. क्या तुलसी और रुद्राक्ष दोनों साथ रख सकते हैं?
हां, लेकिन केवल तब जब दोनों ठीक तरीके से लपेटे गए हों और पर्स में बहुत ज्यादा दबाव न पड़ रहा हो, अगर पर्स छोटा है या उसमें पहले से बहुत सी चीजें हैं, तो सिर्फ तुलसी ही रखें. रुद्राक्ष की ऊर्जा तेज होती है, जबकि तुलसी की ऊर्जा कोमल मानी जाती है, इसलिए दोनों का संयोजन ध्यान से करें.
सूर्य को अर्घ्य देने के बाद अगर ये नहीं किया, तो शुभ कामों पर लग सकता है ग्रहण!
8 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुबह का समय दिन की शुरुआत का सबसे पवित्र और ऊर्जावान समय माना जाता है. इसी वक्त जब उगता हुआ सूरज अपनी सुनहरी किरणों से आसमान को जगमगाने लगता है, तब बहुत से लोग श्रद्धा से उसे जल अर्पित करते हैं यानी “सूर्य को अर्घ्य” देते हैं. हिंदू धर्म में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. कहा जाता है कि सूर्य देव न सिर्फ हमारे जीवन को रोशनी देते हैं, बल्कि हमें आत्मविश्वास, ऊर्जा और सेहत का वरदान भी देते हैं. कई लोग रोजाना अर्घ्य देते हैं, लेकिन ज्यादातर को यह नहीं पता होता कि जल अर्पित करने के बाद क्या करना चाहिए. आम तौर पर लोग अर्घ्य देकर सीधे अपने कामों में लग जाते हैं, जबकि शास्त्रों में अर्घ्य देने के बाद एक बेहद खास क्रिया बताई गई है जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है, और घर में सुख-समृद्धि का मार्ग खोलती है. वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति हर सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सिर्फ एक काम कर ले, तो सूर्य देव की कृपा लगातार उस पर बनी रहती है. आइए जानते हैं
सूर्य को अर्घ्य देने के बाद क्या करें?
जब आप उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करते हैं, तो वह पानी धरती पर गिरता है और उसकी हर बूंद सूर्य की किरणों से मिलकर एक तरह से ऊर्जा का रूप ले लेती है. यही कारण है कि शास्त्रों में कहा गया है कि अर्घ्य देने के बाद उस गिरे हुए जल को व्यर्थ न जाने दें. आपको सबसे पहले उस जल को हल्के से अपने हाथों से छूना चाहिए और थोड़ा-सा पानी अपने माथे, छाती या बाहों पर लगाना चाहिए. ऐसा करने से उस पवित्र जल में मौजूद सूर्य की ऊर्जा आपके शरीर में समा जाती है.
यह केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि एक तरह की प्राकृतिक प्रक्रिया है. जब सूरज की किरणों से स्पर्श हुआ जल आपके शरीर से मिलता है, तो इससे आपकी त्वचा को हल्की गर्माहट और ऊर्जा महसूस होती है. ऐसा माना जाता है कि इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और मन में स्थिरता आती है.
क्यों जरूरी है यह छोटा-सा कदम?
सूर्य ऊर्जा, शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है. जब आप जल अर्पण करते हैं, तो आप सीधे उस ऊर्जा से जुड़ते हैं, लेकिन अगर आप अर्घ्य देने के बाद तुरंत वहाँ से हट जाते हैं, तो उस पल की ऊर्जा अधूरी रह जाती है.
जब आप उस गिरे हुए जल को अपने शरीर पर लगाते हैं, तो वह सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने जैसा होता है. यह माना जाता है कि इससे शरीर में तेज आता है, चेहरा निखरता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह क्रिया हमारे अंदर के दोषों को भी शांत करती है. यदि किसी की कुंडली में सूर्य कमजोर है या आत्मविश्वास की कमी रहती है, तो रोजाना अर्घ्य देने के बाद यह क्रिया करने से धीरे-धीरे सुधार महसूस होता है.
मानसिक और आध्यात्मिक लाभ
अर्घ्य के बाद जल को शरीर पर लगाने से न केवल शारीरिक ऊर्जा मिलती है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है. यह माना जाता है कि इससे मन में सकारात्मकता बढ़ती है, चिंता और तनाव कम होते हैं, और पूरे दिन का माहौल अच्छा बना रहता है, अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि जो लोग रोजाना श्रद्धा से यह काम करते हैं, उनके चेहरे पर हमेशा एक अलग-सी चमक और आत्मविश्वास झलकता है. यह केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक तरह की ‘एनर्जी थेरेपी’ है जो बिना किसी खर्च के आपको मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाती है.
न करें ये गलती
कई लोग सूर्य को अर्घ्य देने के तुरंत बाद पीछे मुड़ जाते हैं या सीधे घर के अंदर चले जाते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार अर्घ्य देने के बाद कुछ क्षण वहीं खड़े रहना चाहिए, सूर्य देव को प्रणाम कर आशीर्वाद लेना चाहिए, फिर उस जल को अपने माथे पर लगाकर दिन की शुरुआत करनी चाहिए. ऐसा करने से दिनभर के कार्यों में सफलता, आत्मविश्वास और सकारात्मकता बनी रहती है.
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी? शिव योग में होगी पूजा, जानें तारीख, मुहूर्त, चंद्रोदय समय
8 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवंबर 2025 की संकष्टी चतुर्थी यानि गणाधिप संकष्टी चतुर्थी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन व्रत रखकर विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा की जाती है और रात के समय में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बार व्रत का पारण होता है. इस बार गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं. उज्जैन स्थिति महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं कि गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कब है? गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त, चंद्रोदय समय क्या है?
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी तारीख
पंचांग के अनुसार, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के लिए मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से हो रही है और यह तिथि 9 नवंबर को तड़के 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म हो रही है. इस वजह से गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत 8 नवंबर शनिवार को रखा जाएगा.
शिव योग में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं. उस दिन शिव योग प्रात:काल से लेकर शाम 6 बजकर 32 मिनट तक है, उसके बाद से सिद्ध योग है. शिव योग जप, ध्यान, साधना आदि के लिए शुभ फलदायी है, जबकि सिद्ध योग में किए गए कार्य सफल होते हैं.
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर मृगशिरा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 02 मिनट तक है, उसके बाद से आर्द्रा नक्षत्र है.
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:53 ए एम से लेकर 05:46 ए एम तक है. उसके बाद अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक है. यह उस दिन का शुभ समय है.
सुबह में गणेश पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त 08:00 ए एम से 09:21 ए एम तक है. वहीं दोपहर में पूजा का मुहूर्त 12:05 पी एम से लेकर शाम 04:09 पी एम तक है. इसमें भी लाभ-उन्नति का मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से दोपहर 02 बजकर 48 मिनट तक है. चतुर्थी पर निशिता मुहूर्त देर रात 11:39 पी एम से लेकर मध्य रात्रि 12:31 ए एम तक है.
भद्रा में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन भद्रा लग रही है. भद्रा का प्रारंभ सुबह 06:38 ए एम से लेकर 07:32 ए एम तक है. हालांकि इस भद्रा का वास स्वर्ग में है, जिसका बुरा प्रभाव धरती पर नहीं होगा. ऐसे में आप शुभ कार्य कर सकते हैं. उस दिन का राहुकाल 09:21 ए एम से लेकर 10:43 ए एम तक है.
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने वालों को चंद्रोदय का इंतजार रहेगा. चतुर्थी को शाम 07 बजकर 59 मिनट पर चांद निकलेगा. उस समय आप चंद्रमा की पूजा करें और अर्घ्य दें.
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का महत्व
जो व्यक्ति गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करता है, उसके सभी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं.
स्कंद पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत विधि-विधान से करने पर जीवन में सुख-शांति आती है. गणपति कृपा से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं.
गणेश जी के आशीर्वाद से जीवन में शुभता आती है. कार्य सफल होते हैं, करियर में भी उन्नति होती है.
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महिला आरक्षण पर आदित्य ठाकरे का सुझाव: 'सीटें बढ़ाए बिना आज से ही लागू करें कोटा'।
ED की पूछताछ के 72 घंटे बाद मौत: जितेंद्र शेल्के की दुर्घटना पर अंजलि दमानिया ने उठाए सवाल।
अभिभावकों को बड़ी राहत: राज्य सरकार ने RTE एडमिशन के लिए दिया 10 दिन का अतिरिक्त समय
