धर्म एवं ज्योतिष
क्या आपकी ज़िंदगी पर शनि की साढ़ेसाती का साया बढ़ रहा है? देर होने से पहले आजमा लें ये 5 उपाय
19 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनि की साढ़ेसाती को लेकर लोगों के मन में अक्सर डर, तनाव और बेचैनी रहती है. कई लोग इसे जीवन का कठिन दौर मानते हैं, जहां काम धीमे पड़ सकते हैं, रिश्तों में खिंचाव आ सकता है और मानसिक दबाव बढ़ सकता है. पर एक सच यह भी है कि यह समय सिर्फ परेशानी नहीं देता, बल्कि व्यक्ति को मजबूत भी बनाता है. यह दौर इंसान को उसकी सीमाओं से बाहर निकालकर उसे क्षमता, धैर्य और जिम्मेदारी के रास्ते पर ले जाता है. वास्तविक जीवन में साढ़ेसाती का असर हर व्यक्ति पर अलग दिखाई देता है. कोई इसे संघर्ष के रूप में देखता है, तो कोई इसे बदलाव का समय मानता है. यह समझना ज़रूरी है कि शनि का असर हमेशा नकारात्मक नहीं होता. यह ग्रह मेहनतकश लोगों को आगे बढ़ाता है और आलस्य या ग़लत दिशा में बढ़ रहे लोगों को संभालता है. ज्योतिष में कई उपाय बताए जाते हैं जिनका उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि मन को शांत रखना, किसी भी परेशानी का सामना करने की शक्ति देना और जीवन में संतुलन बनाए रखना है. ये उपाय जीवन को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं और मानसिक मजबूती भी बढ़ाते हैं. यहां दिए गए 5 उपाय धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ व्यवहारिक स्तर पर भी प्रभावी माने जाते हैं. इनका मकसद किसी चमत्कार की उम्मीद जगाना नहीं, बल्कि उस सोच को विकसित करना है जो कठिन समय में भी इंसान को स्थिर और स्पष्ट बनाए रख सके. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
1. रोजमर्रा की दिनचर्या को स्थिर रखें
शनि उन लोगों को पसंद करता है जो मेहनत और नियमितता को अपनी आदत बना लेते हैं. समय पर जागना, शरीर को सक्रिय रखना, अपने कामों को योजना के साथ करना और खर्चे नियंत्रित रखना इस दौर में काफी मदद करता है. जीवन में थोड़ी स्थिरता आती है, जिससे उलझनें कम लगने लगती हैं.
2. शनि बीज मंत्र का जाप करें
“ओम शं शनैश्चराय नमः” का शांत मन से रोज 108 बार जाप करने से मन स्थिर होता है. यह तरीका दिमाग में चल रही बेचैनी को काफी हद तक कम कर देता है. मंत्र जाप रात के समय या सूर्योदय से पहले करना अच्छा माना जाता है.
3. हनुमान चालीसा का पाठ करें
हनुमान जी को शक्ति और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है. उनके नाम का स्मरण मानसिक डर, भ्रम और नकारात्मक विचारों को शांत करता है. रोज हनुमान चालीसा पढ़ने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
4. शनिवार को तेल का दीया जलाएं
शनि मंदिर में तिल या सरसों के तेल का दीया जलाना एक पारंपरिक उपाय है. इसका उद्देश्य डर हटाना नहीं, बल्कि मन में विनम्रता और संयम पैदा करना है. नियमितता के साथ किया गया यह छोटा सा काम मानसिक संतुलन बनाए रखता है.
5. पीपल या शमी के पेड़ पर चढ़ावा दें
शनिवार को पीपल या शमी के पेड़ के पास कुछ समय बैठना या वहां चढ़ावा देना मन को शांत करता है. प्राकृतिक वातावरण का साथ अपने आप में तनाव कम करने का ज़रिया बन जाता है.
नवंबर विनायक चतुर्थी कब है? रवि योग में होगी पूजा, लेकिन भद्रा भी, जानें तारीख और शुभ मुहूर्त
19 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवंबर विनायक चतुर्थी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को है. इस दिन रवि योग बन रहा है, लेकिन भद्रा का साया भी रहेगा. विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करने का विधान है. रात के समय में चंद्रमा का दर्शन नहीं करते हैं. इससे कलंक लगता है. विनायक चतुर्थी व्रत और पूजा से संकट दूर होंगे, गणेश जी के आशीर्वाद से आपके कार्य सफल सिद्ध होंगे और मनोकामनाएं पूरी होंगी. आइए जानते हैं कि नवंबर विनायक चतुर्थी कब है? विनायक चतुर्थी का मुहूर्त, रवि योग और भद्रा समय क्या है?
नवंबर विनायक चतुर्थी तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 23 नवंबर को शाम 7 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 24 नवंबर को रात 9 बजकर 22 मिनट पर होगा. व्रत के लिए उदयातिथि की मान्यता है, ऐसे में नवंबर विनायक चतुर्थी 24 नवंबर सोमवार को है. इसे कृच्छ चतुर्थी कहते हैं.
नवंबर विनायक चतुर्थी मुहूर्त
24 नवंबर को विनायक चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर में 1 बजकर 11 मिनट तक है. इस दिन आपको पूजा के लिए 2 घंटे से अधिक का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा.
पूजा से पहले शुभ-उत्तम मुहूर्त 09:29 ए एम से 10:49 ए एम तक है, वहीं ब्रह्म मुहूर्त 05:03 ए एम से 05:57 ए एम तक है. दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:47 ए एम से दोपहर 12:29 पी एम तक है. चतुर्थी का निशिता मुहूर्त रात 11:41 पी एम से देर रात 12:35 ए एम तक है.
रवि योग में नवंबर विनायक चतुर्थी
इस नवंबर की विनायक चतुर्थी पर रवि योग बन रहा है. रवि योग सुबह में 06 बजकर 51 मिनअ से बनेगा, जो रात में 09 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. रवि योग में सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं. उस दिन रवि योग के अलावा शूल योग बनेगा, जो प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगी, उसके बाद से गण्ड योग बन जाएगा. चतुर्थी पर प्रात:काल में पूर्वाषाढा नक्षत्र है, जो रात 9 बजकर 53 मिनट तक है, उसके बाद से उत्तराषाढा नक्षत्र है.
विनायक चतुर्थी पर लगेगी भद्रा
इस बार की विनायक चतुर्थी के दिन भद्रा का साया रहेगा. यह भद्रा सुबह में 08 बजकर 25 मिनट से लगेगी, जो रात में 09 बजकर 22 मिनट तक रहेगी. इस भद्रा का वास पाताल लोक में है.
विनायक चतुर्थी का चंद्रोदय
विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करते हैं. विनायक चतुर्थी पर चंद्रोदय सुबह में 10 बजकर 19 मिनट पर होगा और चंद्रास्त रात में 08 बजकर 34 मिनट पर होगा. इस दिन चांद न देखें, नहीं तो आपको झूठा कलंक लगेगा.
आपके हाथ में है यह शुभ निशान, तो कम आमदनी में भी बन जाएंगे करोड़पति! लेकिन लगता है इतना समय
19 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हस्तरेखा शास्त्र में कुछ ऐसे शुभ निशानों के बारे में बताया गया है, जो किसी व्यक्ति के हाथ में होते हैं तो वह आदमी करोड़पति बन जाता है. उस व्यक्ति का शुरूआती जीवन कैसा भी क्यों न हो, वह अपने दम पर धनवान बन जाता है, चाहें उसकी आमदनी कम ही क्यों न हो. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन लोगों के हाथ में मनी ट्रायंगल का शुभ निशान होता है, उन लोगों को करोड़पति होते देखा गया है. लेकिन इसमें समय लगता है. मनी ट्रायंगल कहां पर होता है और कैसे बनता है? आइए जानते हैं हस्तरेखा शास्त्र के विशेषज्ञ दर्शन पाठक से.
हाथ में मनी ट्रायंगल का शुभ निशान
हस्तरेखा विशेषज्ञ दर्शन पाठक का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के हाथ में बड़ा मनी ट्रायंगल का शुभ निशान है तो देखा गया है कि वह आदमी अपनी कम इनकम से भी करोड़पति बनता है. वह शख्स अपनी छोटी बचत से अपनी मनी का इतना कंपाउंडिंग करता है कि वह करोड़पति बन जाता है. वह व्यक्ति अपनी बचत से 30 साल के बाद करोड़पति बन जाता है. यह उसके मनी ट्रायंगल के साथ मनी कंपाउंडिंग का पावर होता है.
दर्शन पाठक बताते हैं कि मनी ट्रायंगल का होने का मतलब यह नहीं है कि अथाह पैसा आएगा या अमीर बन जाएगा. मनी ट्रायंगल का मतलब है कि वह आदमी मनी मैनेजमेंट में मास्टर होगा. उस व्यक्ति की आमदनी कम भी है तो भी वह अपनी मनी का मैनेजमेंट इतना शानदार तरीके से करता है कि वह उससे पैसा बना लेता है. अपने कम पैसे को अधिक पैसे में कैसे बदलना है, इसमें वह माहिर होता है.
मनी ट्रायंगल वाले व्यक्ति को समय के साथ-साथ मनी ग्रोथ मिलती है. जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे उसका पैसा भी बड़ा होता जाता है. वह अपने निवेश के तरीकों से मालामाल बन जाता है.
जिन लोगों के हाथ में मनी ट्रायंगल नहीं होता है, वे लोग काफी पैसा कमा सकते हैं, लेकिन उनके पास बचत नहीं होती है. ऐसे लोग कमाते 1 लाख महीना हैं और बचत 10 हजार का भी नहीं कर पाते हैं. कहने का मतलब यह है कि जिन हाथों में मनी ट्रायंगल नहीं होता है, वे लोग अपने मनी का सही से मैनेजमेंट नहीं कर पाते हैं, उनके पास धन आता है, लेकिन उसी तेजी के साथ खत्म भी हो जाता है.
कैसे बनता है मनी ट्रायंगल?
जब आपके भाग्यरेखा, मस्तिष्क रेखा और बुध रेखा से मिलकर कोई ट्रायंगल बनता है तो वह मनी ट्रायंगल कहलाता है. भाग्य रेखा नीचे से ऊपर की ओर जाती है, वहीं मस्तिष्क रेखा हृदय रेखा के नीचे और जीवन रेखा के ऊपर यानि हाथ के मध्य में होती है. वहीं बुध रेखा सबसे छोटी अंगुली से निकलकर नीचे की ओर जीवन रेखा, भाग्य रेखा या चंद्र पर्वत पर आती है. इन तीनों से ही मिलकर मनी ट्रायंगल बनता है.
मोक्षदा एकादशी कब है? रहेगा भद्रा का साया, दिन में लगेगा पंचक भी, जानें तारीख, मुहूर्त और पारण समय
19 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मोक्षदा एकादशी हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करते हैं. इस बार मोक्षदा एकादशी के दिन भद्रा का साया है और पंचक भी रहेगा. इस व्रत को करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. यदि आपके पितरों को मोक्ष नहीं मिला है तो आप मोक्षदा एकादशी पर उनका उद्धार करा सकते हैं. आइए जानते हैं कि मोक्षदा एकादशी कब है? मोक्षदा एकादशी का मुहूर्त, भद्रा, पंचक और पारण समय क्या है?
मोक्षदा एकादशी तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, मोक्षदा एकादशी के लिए मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ 30 नवंबर दिन रविवार को रात 9 बजकर 29 मिनट पर होगा. यह तिथि 1 दिसंबर दिन सोमवार को शाम 7 बजकर 1 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर सोमवार को रखा जाएगा.
इस साल की मोक्षदा एकादशी के दिन व्यतीपात योग और रेवती नक्षत्र है. व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर देर रात 12 बजकर 59 मिनट तक है. उसके बाद से वरीयान योग बनेगा. मोक्षदा एकादशी पर रेवती नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 11 बजकर 18 मिनट तक है, फिर अश्विनी नक्षत्र है.
मोक्षदा एकादशी मुहूर्त
1 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त 05:08 ए एम से 06:02 ए एम तक है. उस दिन का अभिजीत मुहूर्त यानि शुभ समय दिन में 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक है. मोक्षदा एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त अमृत-सर्वोत्तम समय में सुबह 06 बजकर 56 मिनट से सुबह 08 बजकर 15 मिनट तक है. इसके अलावा आप शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 09 बजकर 33 मिनट से सुबह 10 बजकर 52 मिनट के बीच पूजा कर सकते हैं. भद्रा से पूर्व पूजा कर लेना उत्तम रहेगा.
भद्रा में है मोक्षदा एकादशी, पंचक भी
इस बार मोक्षदा एकादशी पर भद्रा का साया है और पंचक भी लगा रहेगा. मोक्षदा एकादशी पर भद्रा सुबह में 8 बजकर 20 मिनट से शाम 7 बजकर 01 मिनट तक है. इस भद्रा का वास धरती पर होगा. ऐसे में आप भद्रा में कोई शुभ कार्य न करें. इस दिन पंचक 06:56 ए एम से रात 11:18 पी एम तक है. यह भद्रा गुरुवार से शुरू हो रही है, इसका अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है.
मोक्षदा एकादशी पारण समय
यदि आप 1 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी व्रत रखते हैं तो व्रत का पारण 2 दिसंबर दिन मंगलवार को होगा. पारण का समय सुबह 6 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 3 मिनट तक है. पारण वाले दिन द्वादशी तिथि का समापन दोपहर 3 बजकर 57 मिनट पर होगा.
मोक्षदा एकादशी का महत्व
मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत करने और विष्णु पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. जीवन के अंत में हरि कृपा से बैकुंठ में स्थान मिलता है. जीवात्मा को कष्ट और पाट मिट जाते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (19 नवंबर 2025)
19 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति, स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास, किसी तनावपूर्ण स्थित से बचें।
वृष राशि :- सफलता के साधन जुटायें, प्रभुत्व, मान-प्रतिष्ठा के योग बनेंगे, कार्य पर ध्यान अवश्य दें।
मिथुन राशि :- बेचैनी, मानसिक उद्विघ्नता एवं अनावश्यक विभ्रम होगा, समय पर कार्य करें।
कर्क राशि :- स्त्री-वर्ग से तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक बेचैनी होगी, समय का ध्यान अवश्य रखें।
सिंह राशि :- झूठे आश्वासनों पर विश्वास न करें, धन का लाभ तथा कार्यगति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन मिलेगा, योजनायें फलीभूत होंगी, समय का ध्यान अवश्य रखें।
तुला राशि :- मित्र-वर्ग से हानि संभव, संघर्ष से सफलता मिलेगी, कार्य पर विश्वास होगा।
वृश्चिक राशि :- धन की व्यर्थ हानि संभव है, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, ध्यान दें।
धनु राशि :- स्त्री-वर्ग से लाभ, मानसिक बेचैनी, मानसिक उद्विघ्नता, अनावश्यक व्यय होगा।
मकर राशि :- धन लाभ होकर हाथ से जाता रहेगा, विघटनकारी तत्व आपको परेशान करें।
कुंभ राशि :- मानसिक उद्विघ्नता, विरोधी तत्व कुछ परेशान करेंंगे, व्यर्थ भ्रमण होगा।
मीन राशि :- प्रयत्न से सफलता, स्वभाव में उद्विघ्नता से बचिये, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
यहां हर साल के साथ बढ़ रहा शिवलिंग का आकार, रात में अभी भी आते हैं घंटियां और मंत्र की आवाज
18 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में महादेव का एक ऐसा मंदिर है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. यहां स्थापित शिवलिंग किसी राजा या शिल्पी की देन नहीं, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक रूप से बना हुआ है. यहां का शिवलिंग स्वयंभू है, जो खुद पृथ्वी से ही प्रकट हुआ. खास बात यह है कि यह शिवलिंग हर साल धीरे-धीरे बढ़ता रहता है. हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से 3 किलोमीटर दूर मरौदा गांव में स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर की. मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन करने मात्र से ही सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. देश विदेश से लाखों की संख्या में भक्त इस शिवलिंग को देखने पहुंचते हैं. आइए जानते हैं इस रहस्यमी शिवलिंग के बारे में…
भूतेश्वर महादेव शिवलिंग आकार
भूतेश्वर महादेव शिवलिंग आकार में इसकी लंबाई लगभग 25 फीट और चौड़ाई 20 फीट है, जिस वजह से इसे देश का सबसे बड़ा शिवलिंग भी कहा जाता है. मंदिर की खासियत सिर्फ शिवलिंग के आकार में ही नहीं, बल्कि इसके पीछे की रहस्यमयी कहानियों में भी है. लोक कथाओं के अनुसार, गांव के कुछ चरवाहे जंगल में मवेशी चराने गए थे. उन्होंने देखा कि एक चट्टान पर गायें अपने आप दूध छोड़ देती हैं. यह खबर गांव के बुजुर्गों तक पहुंची और उन्होंने वहां खुदाई की. वहां एक विशाल शिवलिंग पाया गया. तब से इस स्थान को भूतेश्वर (भूतों के ईश्वर) के नाम से जाना जाने लगा.
प्राकृतिक चमत्कार का है प्रतीक
सावन, महाशिवरात्रि और सोमवती अमावस्या जैसे पावन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं. लोग मानते हैं कि रात में भी यहां से घंटियों की आवाज और ‘ऊं नमः शिवाय’ के मंत्र सुनाई देते हैं. छत्तीसगढ़ के घने जंगल और शांत पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक चमत्कार का भी प्रतीक है.
हर साल बढ़ता जा रहा आकार
वैसे तो भारत में देवाधिदेव महादेव के हजारों मंदिर हैं, जो अपनी-अपनी आध्यात्मिक मान्यता और चमत्कारों के लिए विख्यात हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के जंगलों में स्थित यह मंदिर अपने आप में बहुत खास है. इसे किसी राजा या शिल्पी ने नहीं बनवाया था, बल्कि ये खुद प्रकट हुआ था और हर साल इसका आकार बढ़ता ही जा रहा है. जब यह शिवलिंग खोजा गया था, तब महज 3 फीट का था, लेकिन अब यह लगभग 25 फीट का हो गया है.
खाना खाते समय भूलकर भी ना मांगे यह एक चीज, चाहें भोजन के लिए जरूरी ही क्यों ना हो?
18 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में खाने की थाली सिर्फ भोजन नहीं होती, यह घर की ऊर्जा, संस्कार और सकारात्मकता का एक हिस्सा मानी जाती है. घर के सदस्य या मेहमानों के सामने जब खाने की थाली रखी जाती है, तब उसमें बनाने वाले का प्यार भी दिखाई देता है. कई बार भोजन में कभी मिर्च तो कभी पानी आदि की जरूरत पड़ जाती है, तो ऐसे में मांग लिया जाता है. लेकिन क्या आपको पता है भोजन में अगर नमक की कमी हो जाए तो भूलकर भी नहीं मांगनी चाहिए. जी हां, आपने सही सुना. खाने खाते समय नमक मांगना ज्योतिष के अनुसार गलत कार्य है. अगर आप खाना खाते समय नमक मांगते हैं तो इससे कुंडली में चंद्रमा और शुक्र ग्रह की स्थिति खराब हो सकती है. आइए जानते हैं खाना खाते समय नमक क्यों नहीं मांगना चाहिए…
नमक ग्रहों की स्थिति और घर की ऊर्जा को करता है प्रभावित
सदियों से चली आ रही मान्यताओं के मुताबिक, नमक सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि यह व्यक्ति की किस्मत, ग्रहों की स्थिति और घर की ऊर्जा को भी प्रभावित करता है. ज्योतिष में नमक का सीधा संबंध चंद्रमा, शुक्र और राहु ग्रह से भी बताया गया है. कुंडली में चंद्रमा मन, भावनाओं और स्थिरता का तो शुक्र सुख-सुविधा, ऐशवर्य, धन के कारक ग्रह हैं. खाना खाते समय नमक मांगने को मन की अस्थिरता का संकेत माना जाता है और सुख सुविधाओं में भी कमी आती है. ऐसा माना जाता है कि इससे मन में चिड़चिड़ापन और कामकाज को लेकर बेचैनी बढ़ती है.
घर में अशांति लाता है नमक मांगना
ज्योतिष के अनुसार, भोजन करते समय नमक मांगने से घर में अशांति और झगड़े होने लगते हैं. साथ ही पारिवारिक सदस्यों में आपसी विश्वास खत्म होने लगता है और तरक्की भी रुक जाती है. वास्तु और ज्योतिष दोनों में नमक को एनर्जी क्लीनर माना गया है, यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखता है. खाना खाते समय नमक मांगना घर की पॉजिटिव एनर्जी को कम करने वाला माना जाता है. ऐसा करने से घर में अनजाने में खटपट, बहस और तनाव बढ़ने का संकेत माना जाता है.
धन संबंधित होती हैं समस्याएं
माना जाता है कि भोजन करते समय नमक मांगने वाला दरिद्र हो जाता है और उस पर आर्थिक संकट आने लगता है. नौकरी व कारोबार में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और राहु की वजह से बने बनाए कार्यों में अड़चन आ जाती है. बड़े बुजुर्गों और साधु संतों से आपने सुना होगा कि नमक का कर्ज हर व्यक्ति को चुकाना चाहिए.
ग्रहों की स्थिति हो जाती है असंतुलित
ज्योतिष के अनुसार, जो व्यक्ति नमक को फैलाता है या बर्बाद करता है, तो कुंडली में शुक्र, राहु और चंद्रमा की स्थिति खराब होने लगती है. भोजन के समय नमक मांगना या फैलाना ग्रहों की संतुलित स्थिति में हल्की गड़बड़ी का संकेत माना जाता है. माना जाता है कि इससे व्यक्ति की भाग्य-ऊर्जा पर हल्का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
महिषासुर का वध कर इन पहाड़ियों पर विराजी थीं मां चामुंडेश्वरी, माता सती का गिरा था यहां यह अंग
18 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विश्व भर में 18 महाशक्तिपीठ मंदिर हैं, जिनका उल्लेख आदि शंकराचार्य ने किया था. इन महाशक्तिपीठ को मां सती और भगवान शिव से जोड़ा गया है. माना जाता है कि जहां-जहां मां सती के अंग गिरे, वहां महाशक्तिपीठ स्थापित हुए. 18 महाशक्तिपीठ में से एक कर्नाटक की चामुंडी पहाड़ियों में प्रसिद्ध चामुंडेश्वरी मंदिर है, जिसे शक्ति का प्रतीक माना जाता है. यह मैसूर के वोडेयार राजवंश की कुलदेवी भी मानी जाती है. मान्यता है कि चामुंडेश्वरी माता के दर्शन करने मात्र से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और हर कार्य सफल होता है. आइए जानते हैं चामुंडेश्वरी मंदिर के बारे में खास बातें…
चामुंडेश्वरी देवी शक्तिपीठ
प्रसिद्ध चामुंडेश्वरी मंदिर कर्नाटक के मैसूर पैलेस से 13 किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर स्थित है, जहां सीढ़ियों से चढ़कर भक्त मां के स्वरूप के दर्शन के लिए जाते हैं. मंदिर परिसर तक पहुंचाने वाली सीढ़ियों का भी अपना महत्व है. सीढ़ियों की बनावट इतनी ऊंची और खड़ी है कि जैसे-जैसे भक्त एक-एक सीढ़ी को पार करते हैं, वैसे ही उनके पाप कटने लगते हैं. चामुंडेश्वरी देवी शक्तिपीठ को क्रौंच पीठम के नाम से जाना जाता है, क्योंकि प्राचीन काल में इस स्थान को क्रौंच पुरी के नाम से जाना जाता था.
यहां गिरे थे माता सती के केश
अगर मंदिर के इतिहास की बात करें तो यह मां सती के गिरे केश, राक्षस महिषासुर और राजा चामराजेंद्र वाडियार से जुड़ा है. माना जाता है कि इसी स्थल पर मां सती के केश गिरे थे और इस मंदिर की स्थापना की गई. पहाड़ियों में राक्षस महिषासुर की प्रतिमा भी बनी है. माना जाता है कि राक्षस महिषासुर का अहंकार और अत्याचार बढ़ गया था, तब त्रिदेव ने मां शक्ति का आह्वान किया और मां चामुंडेश्वरी प्रकट हुईं. महिषासुर को वरदान था कि वो त्रिदेव के हाथों से नहीं मरेगा और एक महिला उसका संहार करेगी. देवताओं ने जब त्रस्त होकर देवी दुर्गा की आराधना की, तो उन्होंने चामुंडा रूप धारण कर महिषासुर का संहार किया. कहा जाता है कि यह युद्ध कई दिनों तक चला और अंत में देवी ने राक्षस का वध कर धर्म की स्थापना की. इसी कारण से देवी को यहां चामुंडेश्वरी कहा जाता है और उन्हें महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है.
भगवान हनुमान भी मां की सेवा में
इसके अलावा, ये भी किंवदंती है कि 1573 में राजा चामराजेंद्र वाडियार मां भगवती की पूजा में लीन थे और तभी आसमान से उनके ऊपर बिजली गिरी. बिजली गिरने से सिर्फ उनके केश को नुकसान पहुंचा. लोगों का मानना है कि खुद मां भगवती ने राजा की रक्षा की थी और उन्होंने ही मंदिर का निर्माण कराया था. मां चामुंडेश्वरी के मंदिर में अन्य देवी-देवताओं को भी स्थान दिया गया है. मंदिर में प्रवेश करते ही भगवान श्रीगणेश की मूर्ति दिखाई देगी. थोड़ा आगे बढ़ने पर गर्भगृह के ठीक सामने नंदी महाराज की भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा विराजमान है. गर्भगृह के बाहर भगवान हनुमान भी मां की सेवा में विराजमान हैं. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित देवी की मूर्ति स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित रहती है.
श्रद्धालुओं को पार करनी होती हैं 1000 सीढ़ियां
माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में होयसल शासकों ने कराया था. मंदिर के प्रवेश द्वार पर चांदी के द्वार लगे हैं, जो द्रविड संस्कृति की वास्तुकला को खास बनाते हैं. मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 1000 सीढ़ियां पार करनी होती हैं और बीच-बीच में भक्तों को छोटे-छोटे उपमंदिर के भी दर्शन होते रहते हैं.
विवाह पंचमी से पहले घर में रखें ये चीजें, वैवाहिक जीवन में बढ़ेगा प्रेम और खुशहाली
18 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी मनाया जाता है. माना जाता है कि इसी दिन मिथिला में सीता स्वयंवर जीतकर भगवान श्री राम ने माता जानकी से विवाह रचाया था. इस शुभ अवसर पर श्री राम और माता सीता की विशेष पूजा का विधान है. इससे आपके सुख-सौभाग्य में तो बढ़ोतरी होगी ही, साथ ही आपके सारे काम भी सिद्ध होंगे.
इस दिन श्रीराम और माता सीता की पूजा विशेष रूप से की जाती है. पूजा पाठ के साथ-साथ विवाह पंचमी के दिन वैवाहिक जीवन में खुशहाली और प्रेम बढ़ाने के लिए कई उपाय किए जाते हैं. इस साल विवाह पंचमी का पर्व 25 नवंबर को मनाया जाने वाला है.उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, विवाह पंचमी से पहले इन चीजों को घर में रखना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है.
विवाह पंचमी से पहले ले आए यह शुभ वस्तु
अगर नकारात्मकता ऊर्जा के बीच फसे हुए है, तो विवाह पंचमी के पहले भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा घर में रखनी चाहिए. वैवाहिक जीवन में प्रेम और समझ बढ़ती है. सुबह और शाम को भगवान राम और माता सीता की पूजा करने से घर में सकारात्मक उर्जा आती है.
– बहुत प्रयास के बाद भी दाम्पत्य जीवन मे खुशहाली नही ठहर रही है तो, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर घर में रखनी चाहिए. ऐसा करने से घर में समृद्धि और स्थिरता आती है. विवाह पंचमी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करने से बड़ा लाभ मिलता है. इससे वैवाहिक जीवन में शांति बनी रहती है.
– हिन्दू धर्म में तुलसी को माता का दर्जा दिया गया है. इनकी पूजा से कई प्रकार की समस्या का हल होता है. इसलिए विवाह पंचमी से पहले एक राम तुलसी का पौधा घर लाकर रखना चाहिए. राम तुलसी का पौधा घर में रखने से घर में सुख, शांति और स्वास्थ्य आता है. साथ ही अगर इसकी नियमित पूजा की जाती है, तो वैवाहिक जीवन में तनाव कम होता है.
– पारिवारिक जीवन मे पति-पत्नी के रिश्ते मधुर नही रहते है तो विवाह पंचमी के पहले घर में कछुए की तस्वीर या छोटी मूर्ति लाना चाहिए. इससे परिवार मे स्थिरता आती है. साथ ही ये वैवाहिक जोड़ों में विश्वास बढ़ाती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (18 नवंबर 2025)
18 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- अपने आप पर नियंत्रण रखें, चिंता, विभ्रम, अशांति से बचिये, धैर्य रखें।
वृष राशि :- अधिकारियों के तनाव व क्रोध से बचें, सतर्कता से कार्य अवश्य करें।
मिथुन राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास, कार्य-कुशलता से संतोष, समृद्धि के साधन बनेंगे।
कर्क राशि :- विरोधी तत्व परेशान करेंगे, व्यवसायिक कार्यों में बाधा, चिन्ता बढ़ेगी।
सिंह राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी एवं भावनायें उदार बनेंगी, कार्य अवश्य बनेंगे।
कन्या राशि :- नवीन पद्यति से संतोष, तनाव से बचिये, अनायास आरोप-प्रत्यारोप होगा।
तुला राशि :- समय साधारण गति से बीतेगा, व्यवसाय में प्रगति अवश्य होगी ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- मनोवृत्ति अधिक संवेदनशील हो, कार्यवृत्ति में सुधार अवश्य होगा।
धनु राशि :- चिन्ता निवृत्ति, अर्थलाभ, योजनायें फलीभूत होंगी, स्त्री-सुख होगा।
मकर राशि :- अचानक यात्रा के प्रसंग बनेंगे, कार्य-योजना फलीभूत अवश्य ही होगी।
कुंभ राशि :- चिन्ता मन को उद्विघ्न रखे, स्वयं पर नियंत्रण रखें, स्त्री-वर्ग से तनाव व क्लेश होगा।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, आर्थिक योजना फलीभूत अवश्य ही होगी।
इस खास छिद्र वाले शिवलिंग से जाता है पाताल लोक का रास्ता, भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने की थी स्थापना
17 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 120 किलोमीटर दूर बसे खरौद में स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर न सिर्फ धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि रहस्यमयी कारणों से भी विख्यात है. यहां मौजूद शिवलिंग अन्य शिवलिंगों से काफी अलग और अद्भुत है, जिस वजह से भी दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं. इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की खासियत यह है कि यहां से पाताल लोक का रास्ता निकलता है. जी हां, आपने सही सुना. इस शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस शिवलिंग में छोटे छोटे छिद्र मौजूद हैं, जिससे इस शिवलिंग का लक्ष लिंग भी कहा जाता है.
शिवलिंग में एक लाख छोटे-छोटे छिद्र
माना जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने की थी. कहा जाता है कि जब भगवान राम ने खर और दूषण जैसे राक्षसों का वध किया, तब इस स्थान का नाम खरौद पड़ा और यहीं लक्ष्मण ने शिवलिंग स्थापित किया, जिसकी वजह से मंदिर का नाम लक्ष्मणेश्वर महादेव पड़ा. शिवलिंग की स्थापना कर ब्रह्म हत्या दोष का निवारण किया था. मंदिर की असली पहचान इसका अनोखा शिवलिंग है जिसमें लगभग एक लाख छोटे-छोटे छिद्र मौजूद हैं. इन्हीं छिद्रों की वजह से इसे लक्ष लिंग भी कहा जाता है. इस छिद्रों वाले शिवलिंग के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर आते हैं.
पाताल लोक से जुड़ा हुआ है यह शिवलिंग
कुछ ही लोग जानते हैं कि इस शिवलिंग में एक खास छेद है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह सीधा पाताल लोक से जुड़ा हुआ है. इस छेद में चाहे कितना भी पानी डालो, वह कभी भरता नहीं है. लोग मानते हैं कि पानी सीधे पाताल लोक में चला जाता
धर्म, इतिहास और रहस्य तीनों का अनोखा मेल
मंदिर की वास्तुकला भी अपने आप में बेहद आकर्षक है. पत्थरों से बनी इसकी पुरानी संरचना से पता चलता है कि यह मंदिर कितना प्राचीन होगा. यहां आने वाले भक्त पूरे मन से प्रार्थना करते हैं और मानते हैं कि यहां मांगी गई मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं. यह मंदिर सच में वह जगह है जहां धर्म, इतिहास और रहस्य तीनों का अनोखा मेल देखने को मिलता है. यहां का शांत वातावरण, कहानियां और शिवलिंग का रहस्य हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है.
घर के ठाकुरजी को भोग लगाते समय कितनी बार बजाएं घंटी? जानें नियम, तभी पहुंचेगा भगवान तक भोजन
17 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मंदिरों में पूजा-पाठ के तमाम नियम होते हैं. कुछ वैसे ही नियम शास्त्रों में घर के मंदिर में होने वाली डेली पूजा के लिए भी बताए गए हैं. तमाम घरों में ठाकुर जी को भोग लगाने का नियम है. शास्त्रों में भी कहा गया है कि यदि घर में विग्रह विराजमान है तो उनकी नित पूजा के साथ भोग लगाना भी अनिवार्य है. लेकिन, भगवान को भोग लगाते वक्त घंटी बजाने का भी विशेष महत्व बताया गया है. सिर्फ यही नहीं, घंटी कितनी बार बजानी है, इसका नियम भी है. इसका आध्यात्मिक सिद्धांत भी है, ताकि देवी-देवताओं का भोग उन तक आसानी से पहुंच सके.
घर पर भोग लगाते समय घंटी बजाने के नियम शास्त्रों मे बताए गए हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में लगे घंटे को लेकर मान्यता है कि जब सृष्टि का आरंभ हुआ था, तब जो स्वर गूंजा थे, इसमें से एक घंटे की ध्वनि थी. इसके अलावा यह भी कहा गया कि घंटी बजाने से ओंकार मंत्र का उच्चारण पूर्ण होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घंटी बजाने से मूर्तियों में चैतन्यता जागृत होती है. पूजा-अर्चना का प्रभाव बढ़ता है.
भोग के लिए वायु का आह्वान
उन्होंने बताया, माना जाता है कि भगवान भोग को वायु के माध्यम (महक) से स्वीकार करते हैं. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, वायु के मुख्य रूप से पांच तत्व माने गए हैं. व्यान वायु, उड़ान वायु, समान वायु, अपान वायु और प्राण वायु. ऐसे में भोग लगाते समय इन पांचों तत्वों का स्मरण किया जाता है. पांच बार घंटी बजाई जाती है. माना जाता है कि इस प्रकार देवी-देवता आपके भोग को स्वीकार करते हैं. वहीं, भगवान को नैवेद्य अर्पित करते समय भी घंटी बजाई जाती है.
मंदिर से लौटते समय न बजाएं घंटी
अक्सर देखा जाता है कि मंदिर में बहुत से लोग बहार निकलते समय घंटी बजाते हैं, उन्हें देखकर अन्य लोग भी मंदिर से बाहर निकलते समय घंटी बजाने लगते हैं, जो गलत है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर से बाहर निकलते समय घंटी नहीं बजानी चाहिए. क्योंकि, ऐसा करने से मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा को आप वहीं पर छोड़ देते हैं, इसलिए मंदिर से बाहर निकलते समय घंटी नहीं बजानी चाहिए. बल्कि, जब मंदिर में प्रवेश करें या भगवान के सामने पहुंचें तो घंटी जरूर बजाएं.
सफलता या गिरावट? दसवें भाव का बुध आपकी किस्मत तय करता है, बचने के लिए कर लें ये उपाय
17 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब कोई इंसान अपनी कुंडली में बुध ग्रह को दसवें भाव में देखता है, तो अक्सर यह सवाल मन में आता है- “क्या यह मुझे करियर में ऊंचाई देगा या दिमागी उलझनें बढ़ाएगा?” दरअसल, बुध ऐसा ग्रह है जो बुद्धि, तर्क, बात करने की कला, व्यापार, सोचने की क्षमता और प्लानिंग को दिखाता है. वहीं दसवां भाव कर्म, नौकरी, करियर, समाज में इज्जत और उपलब्धियों से जुड़ा होता है. जब बुध यहां आता है, तो व्यक्ति की काम करने की शैली, उसकी सोच, और दूसरों के साथ तालमेल बनाने का तरीका बिल्कुल अलग हो जाता है, अगर बुध मजबूत हो तो व्यक्ति का दिमाग तेज़ चलता है, फैसले सही समय पर लेता है और अपने दिमाग से बड़ा नाम बना सकता है, लेकिन अगर यह कमजोर या अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो, तो वही बुध व्यक्ति को हद से ज़्यादा सोचने वाला, संदेह करने वाला या बोलने में गलती करने वाला बना सकता है. दसवां भाव कर्म का घर है, और बुध वहां बैठकर इंसान को कर्म के प्रति समझदार तो बनाता है, पर कभी-कभी अधिक चतुराई भी नुकसान दे सकती है. तो आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह से बुध के दसवें भाव में होने के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव और ऐसे कौन से उपाय हैं जिनसे इसका गलत असर दूर किया जा सकता है.
बुध के दसवें भाव में सकारात्मक प्रभाव
-जब बुध मजबूत होता है और शुभ ग्रहों के साथ बैठता है, तो यह व्यक्ति के करियर को ऊंचाई तक ले जा सकता है. ऐसे लोग दिमाग से बहुत तेज़ होते हैं और बातों से किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं, ये लोग खासतौर पर उन क्षेत्रों में सफलता पाते हैं जहां दिमाग और कम्युनिकेशन दोनों की ज़रूरत होती है जैसे मीडिया, पब्लिक रिलेशन, मार्केटिंग, टीचिंग, एडवाइजिंग, फाइनेंस, या बिजनेस कंसल्टेंसी.
-बुध के इस स्थान पर होने से व्यक्ति की सोच साफ़ रहती है, वह प्लान बनाकर काम करता है और दूसरों को समझाने की कला उसमें होती है, ये लोग छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, इसलिए टीम में इनकी वैल्यू ज़्यादा होती है.
-कई बार ऐसे लोग बहुत कम उम्र में ही बड़ा नाम कमा लेते हैं क्योंकि इन्हें लोगों की मनोवृत्ति समझने की क्षमता होती है.
-अगर कुंडली में सूर्य या बृहस्पति का साथ मिल जाए, तो यह व्यक्ति को सरकारी या उच्च पद दिला सकता है.
-बुध यहां व्यक्ति को कर्म के प्रति जागरूक, समाज में प्रतिष्ठित और व्यवहारिक बनाता है. ऐसे लोग अपनी समझदारी से मुसीबत से भी निकल जाते हैं.
बुध के दसवें भाव में नकारात्मक प्रभाव
-अगर बुध अशुभ ग्रहों के प्रभाव में आ जाए या नीच का हो जाए, तो इसका असर व्यक्ति की सोच और व्यवहार दोनों पर पड़ता है. ऐसे लोग ज़रूरत से ज़्यादा सोचते हैं, जल्दी-जल्दी राय बदल लेते हैं और अपने फैसलों में स्थिरता नहीं रख पाते.
-कई बार ये अपनी बातों से खुद ही उलझ जाते हैं, जिससे लोगों में उनकी बात का भरोसा कम हो जाता है.
-नकारात्मक बुध व्यक्ति को बहुत चालाक या लालची भी बना सकता है, जिससे वो अपने फायदे के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचा सकता है.
-कई बार ऐसा व्यक्ति अपने काम या करियर में बार-बार बदलाव करता है, क्योंकि उसका मन एक जगह टिकता नहीं.
-अगर दसवें भाव में बुध कमजोर हो और शनि या राहु की दृष्टि हो, तो व्यक्ति अपनी बुद्धि का गलत इस्तेमाल करने लगता है जैसे दूसरों को बेवकूफ बनाना या गलत रास्तों से पैसा कमाना.
-इस स्थिति में दिमाग तो तेज़ होता है, लेकिन दिशा गलत हो जाती है.
-ऐसे लोगों को अपने बोल और फैसलों पर काबू रखना ज़रूरी होता है, वरना अच्छी सोच भी गलत रास्ते पर चली जाती है.
बुध के दोषों से बचने के उपाय
1. हर बुधवार को हरी चीज़ें दान करें- जैसे हरी मूंग, हरी सब्जियां या पन्ना रत्न पहनने से बुध को मज़बूती मिलती है.
2. गाय को हरा चारा खिलाएं- यह उपाय बुध के क्रोध को शांत करता है.
3. “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें- रोज़ कम से कम 108 बार जाप करने से बुध के बुरे असर कम होते हैं.
4. बोलने से पहले सोचें- बुध की खराब स्थिति का असर ज़्यादातर शब्दों और निर्णयों पर पड़ता है, इसलिए सोच-समझकर बोलना शुभ होता है.
5. हरे कपड़े पहनें या हरे रंग की चीज़ें अपने पास रखें- यह बुध को सकारात्मक ऊर्जा देता है.
6. गणेश जी की पूजा करें, क्योंकि वे बुध के स्वामी माने जाते हैं. बुधवार को गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करने से बुध मजबूत होता है.
इनको देना न भूले शादी का निमंत्रण, नहीं तो हो सकती है बड़ी अनहोनी, जानें परंपरा और धार्मिक मान्यता
17 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर आपके परिवार में भी किसी की शादी होने वाली है, तो आपको उसे निर्विघ्न संपन्न करवाने के लिए कुछ खास निमंत्रण सबसे पहले देने चाहिए. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के मुताबिक, शादी तय होने के बाद छपने वाले निमंत्रण पत्र सबसे पहले खास लोगों को देने चाहिए
हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत में सबसे पहले निमंत्रण देने का महत्व है. उन्हीं में से एक विवाह किसी भी व्यक्ति के जीवन का यादगार लम्हा होता है. वो इसके लिए कई स्तर पर तैयारियां करते हैं.
इसके लिए शानदार डिजाइन वाले निमंत्रण पत्र भी छपवाए जाते हैं. हर किसी की चाहत होती है कि उसका विवाह निर्विघ्न संपन्न हो जाए लेकिन ऐसा सभी के साथ हो, यह हमेशा संभव नहीं होता. कई बार कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो विवाह में विघ्न पैदा करती हैं.
अगर आपके परिवार में भी किसी की शादी होने वाली है, तो आपको उसे निर्विघ्न संपन्न करवाने के लिए कुछ खास निमंत्रण सबसे पहले देने चाहिए. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के मुताबिक, शादी तय होने के बाद छपने वाले निमंत्रण पत्र सबसे पहले खास लोगों को देने चाहिए. इसके बाद उन कार्ड को नाते-रिश्तेदारों में बांटना चाहिए.
रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश को मंगलकारी देवता माना गया है. विवाह के दौरान सबसे पहला निमंत्रण विघ्नहर्ता भगवान गणेश को दिया जाता है ताकि विवाह में कोई विघ्न न आए. विवाह के निमंत्रण पत्र छपने के बाद सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष निमंत्रण पत्र अर्पित किया जाता है.
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी- विवाह का दूसरा निमंत्रण जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को दिया जाता है क्योंकि विवाह जैसा कोई भी मांगलिक आयोजन इनके बिना पूर्ण नहीं होता है.
हनुमान जी- विवाह का तीसरा निमंत्रण हनुमान जी को दिया जाता है ताकि वैवाहिक आयोजन में किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव न पड़े और हर तरह की बुरी शक्तियों से बचाव होता रहे.
कुलदेवी/कुलदेवता- विवाह का चौथा निमंत्रण परिवार के कुलदेवी या कुलदेवता को दिया जाना चाहिए. न्योता देने के साथ ही उनसे प्रार्थना की जाती है कि वैवाहिक आयोजन में उनका आशीर्वाद बना रहे.
पितृ- घर में किसी भी शुभ कार्य में पितरों का आशीर्वाद बेहद जरूरी होता है, इसलिए पांचवां निमंत्रण पितरों को दिया जाता है. पितरों के आशीर्वाद के बिना कोई भी कार्य सफल नहीं होता, इसलिए पितरों को निमंत्रण देने के लिए पीपल के पेड़ के नीचे शादी का कार्ड रखना चाहिए.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (17 नवंबर 2025)
17 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- दैनिक व्यवसाय गति अनुकूल हो, भाग्य का सितारा साथ देगा, समय का ध्यान रखें।
वृष राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्यगति में उदासीनता बनी रहेगी।
मिथुन राशि :- योजनायें फलीभूत हों, विशेष कार्य स्थगित रखें, कार्य में परेशानी होगी।
कर्क राशि :- असमंजस कष्टप्रद होगा तथा किसी अरोप से बचें, चोटादि का भय।
सिंह राशि :- आकस्मिक विरोध, तनाव, अपवाद, आरोप, धन का व्यय, व्यर्थ यात्रा होगी।
कन्या राशि :- व्यवसायिक समृद्धि के साधन फलप्रद होंगे, तनाव, क्लेश व अशांति होगी।
तुला राशि :- संघर्ष से सफलता मिलेगी, कार्यगति अनुकूल होगी, कुछ समस्यायें सुलझेंगी ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- असमंजस कष्टप्रद होगा, किसी अरोप-प्रत्यारोप से बचकर चलें, लाभ होगा।
धनु राशि :- व्यवसाय गति अनुकूल, भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े कार्य बनेंगे।
मकर राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन जुटायें, इष्ट-मित्र सुखवर्धक अवश्य होंगे।
कुंभ राशि :- कहीं दुर्घटनाग्रस्त होने से बचें, कुटुम्ब की समस्यायें अवश्य सुलझेंगी।
मीन राशि :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, बेचैनी तथा दूसरों के कार्यों में भटकना पड़ेगा, ध्यान दें।
थमी हुई सप्लाई चेन को मिली रफ्तार, भारत आ रहे 41 जहाजों का रास्ता साफ
लोकसभा में गिरा 131वां संविधान संशोधन विधेयक, दो-तिहाई बहुमत जुटाने में रही नाकाम
मंडियों में भीगा 'पीला सोना': बेमौसम बरसात ने रोकी गेहूं की खरीद, उठान न होने से बढ़ी दिक्कत।
सरकारी रिकॉर्ड में नहीं थे कैमरे: लावारिस सीसीटीवी के जरिए लाइव जासूसी का अंदेशा, FIR दर्ज।
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कुरुक्षेत्र एनआईटी में सन्नाटा: लगातार आत्महत्याओं के बाद ठप हुई पढ़ाई, 19 अप्रैल की डेडलाइन तय।
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जांच एजेंसियों पर नकेल: रोककर रखने और गिरफ्तार करने के बीच का धुंधलापन कोर्ट ने किया साफ।
मिशन 2027: यूपी बीजेपी की नई टीम और मंत्रिमंडल विस्तार को जल्द मिल सकती है हरी झंडी
सांसद अमृतपाल सिंह की मुश्किलें बरकरार; जेल बदलने की मांग पर कोर्ट का फिलहाल इनकार
