धर्म एवं ज्योतिष
राम मंदिर में 25 नवंबर को ध्वजारोहण का शुभ योग, जानें किस खगोलीय संयोग के कारण चुनी गई यह तिथि
24 Nov, 2025 02:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Vivah Panchami Significance: अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद अब मंदिर शिखर पर धर्म ध्वजारोहण की तैयारी जोरशोर से की जा रही है. 25 नवंबर को राम जन्मभूमि मंदिर पर भगवा विजय ध्वज फहराने का भव्य समारोह आयोजित होगा, जो पूरे देश में मनाई जाने वाली विवाह पंचमी के साथ पड़ रहा है. ज्योतिष विद्वानों के अनुसार इस दिन अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया जाएगा, जो अत्यंत शुभ और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है.
25 नवंबर को मनाया जाएगा विवाह पंचमी का पर्व
पंचांग के मुताबिक मंगलवार, 25 नवंबर को विवाह पंचमी का पर्व पड़ रहा है और यह तिथि भगवान राम तथा माता जानकी से सीधी जुड़ाव रखती है. साधु-संतों का कहना है कि त्रेता युग में भगवान राम और सीता का विवाह मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ही हुआ था, और इस वर्ष भी वही पंचमी तिथि आई है. विवाह पंचमी हिंदू पंचांग में विवाह के लिए सबसे उत्तम और शुभ तिथियों में गिनी जाती है.
अभिजीत मुहूर्त में होगा राम मंदिर पर ध्वजारोहण
राम मंदिर पर ध्वजारोहण अभिजीत मुहूर्त में किया जाएगा, जिसका समय सुबह 11:45 से दोपहर 12:29 बजे तक निर्धारित किया गया है. ऐसा माना जाता है कि भगवान राम का जन्म भी इसी अभिजीत मुहूर्त में हुआ था, इसलिए ध्वज फहराने के लिए यही समय चुना गया है. मंगलवार का दिन भी इस आयोजन की पवित्रता बढ़ा रहा है, क्योंकि चैत्र नवमी के दिन जब भगवान राम का जन्म हुआ था, तब भी मंगलवार था. त्रेता युग में जब राम-सीता का विवाह संपन्न हुआ, तब भी पंचमी तिथि और मंगलवार का यही संयोग बना था. हनुमान जी के जन्म का दिन भी मंगलवार माना जाता है, इसलिए यह दिन रामभक्तों के लिए बेहद शुभ मानी जाती है.
सूर्यवंश और रघुकुल की गौरवशाली परंपरा का संकेत बनेगा ध्वज
25 नवंबर को राम मंदिर के शिखर पर फहराया जाने वाला ध्वज केवल भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह अयोध्या के सूर्यवंश और रघुकुल की गौरवशाली परंपरा का भी संकेत बनेगा. वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस दोनों में ध्वज, पताका और तोरणों को उत्सव और वैभव के प्रतीक के रूप में वर्णित किया गया है. त्रेता युग में उत्सव राम के जन्म का था, जबकि कलियुग में यह समारोह उनके मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का संदेश देगा. जब मंदिर की ऊंची चोटी पर विजय ध्वजा लहराएगी, तब दुनिया के सामने यह घोषणा होगी कि अयोध्या में रामराज की पुनर्स्थापना हो चुकी है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (23 नवंबर 2025)
23 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि, कार्य योजना फलीभूत होगी।
वृष राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, कार्यगति अनुकूल रहे, चिन्तायें कम होंगी, ध्यान दें।
मिथुन राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, कार्यगति अनुकूल रहे, चिन्तायें कम होंगी।
कर्क राशि :- कुटुम्ब में शत्रु समाचार, दैनिक व्यवसाय में अनुकूलता होगी ध्यान दें।
सिंह राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, कार्य-व्यवसाय में संतोष, स्त्री-वर्ग से कार्य सफल होगा।
कन्या राशि :- समय अनुकूल नहीं विशेष कार्य स्थगित रखें, लेन-देन के मामले में हानि होगी।
तुला राशि :- समय साधारण गति से बीते, व्यवसाय में प्रगति, स्त्री-वर्ग से प्रीत होगी।
वृश्चिक राशि :- प्रबलता, प्रभुत्व वृद्धि, कार्य-कुशलता से संतोष एवं योजनायें बनेंगी ध्यान दें।
धनु राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, सोचे हुये कार्य समय पर बनेंगे किन्तु धोखे से बचें।
मकर राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम, स्त्री-शरीर कष्ट होगा ध्यान दें।
कुंभ राशि :- समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थगित रखें, लेन-देन के मामले में हानि हो।
मीन राशि :- लेन-देन के मामले में हानि, अनावश्यक विवाद कष्टप्रद होगा, समय अनुकूल नहीं।
चंद्रकूप मंदिर का चमत्कारी कुआं! जिसमें झांककर होती है जीवन और मृत्यु की भविष्यवाणी
22 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काशी, जिसे भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, वहां मंदिरों की कमी नहीं है. जितने मंदिर काशी में भगवान शिव के मिल जाएंगे, उतने ही मंदिर मां पार्वती के अलग-अलग रूपों में मिल जाएंगे. वाराणसी में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जहां मात्र कुएं में झांकने से पता चल सकता है कि मृत्यु कब होगी? दूर-दूर से भक्त इस कुएं में अपनी परछाई देखने के लिए आते हैं.
100 साल पुराना है वाराणसी का चंद्रकूप मंदिर
वाराणसी में प्राचीन मां सिद्धेश्वरी का मंदिर मौजूद है, जिसे बहुत कम लोग ही जानते हैं. मंदिर को चंद्रकूप मंदिर और चंदेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. ये मंदिर विश्वनाथ गली के पास, सिद्धेश्वरी मोहल्ले में स्थित है. मंदिर को 100 साल से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है.
स्वयं प्रकट हुई थीं मां सिद्धिदात्री
ये मंदिर मां दुर्गा के नौवें रूप, मां सिद्धिदात्री को समर्पित है. माना जाता है कि मंदिर में विराजमान मां सिद्धियों की देवी हैं और उनकी प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी. मंदिर के गर्भगृह में मां के साथ चांदी के शिवलिंग के रूप में भगवान सिद्धेश्वर महादेव विराजमान हैं.
मंदिर में प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु और छोटे से परिसर में भगवान शिव का शिवलिंग भी विराजमान है. मंदिर बहुत प्राचीन है, जिसमें देखरेख के साथ बदलाव किए जा रहे हैं. इसी मंदिर के परिसर में चंद्रकूप है, जो बाकी कुओं से अलग है.
चंद्रकूप से ऐसे होती है भविष्यवाणी
माना जाता है कि मंदिर में सभी भक्तों को कुएं में झांक कर अपने प्रतिबिंब को देखना चाहिए. अगर कुएं में खुद का प्रतिबिंब दिखता है, तो ये संकेत है कि उम्र दीर्घायु होगी, लेकिन अगर प्रतिबिंब नहीं दिखता, तो ये माना जाता है कि आने वाले 6 महीनों में मृत्यु की आशंका है.
मृत्यु भय खत्म करने का उपाय
भक्तों का ये भी मानना है कि प्रतिबिंब न दिखने पर रोजाना कुएं के पास आकर भगवान का नाम जप कर अपने प्रतिबिंब को देखना चाहिए, इससे मृत्यु का भय कम होता है. भगवान चंदेश्वर भगवान शिव का ही रूप हैं, जो गर्भगृह में सिद्धेश्वरी के साथ विराजमान हैं.
चंद्र देव ने किया था कुएं का निर्माण
कुएं को लेकर किंवदंतियां भी मौजूद हैं. कहा जाता है कि कुएं का निर्माण खुद चंद्र देवता ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया था. उन्होंने भगवान शिव से कुएं को गुण प्रदान करने की प्रार्थना की थी.
सोमवार, पूर्णिमा और अमावस्या के दिन भक्त मंदिर में आकर इसी जल से भगवान चंदेश्वर की पूजा करते हैं और सभी दुखों और बीमारियों से मुक्ति पाने की प्रार्थना करते हैं.
गलत समय पर कमजोर बृहस्पति बिगाड़ देगा सब प्लान! छठा भाव बन सकता है लाइफ का संकट! समय रहते कर लें उपाय
22 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जन्मपत्री में छठा भाव ऐसा घर माना जाता है जो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाले संघर्ष, काम का बोझ, नौकरी, हेल्थ, कर्ज और कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों को दिखाता है. इस भाव को बहुत संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां ग्रहों का असर इंसान की लाइफ को सीधा छूता है-कभी कामयाबी मिलती है, तो कभी अचानक मुश्किलें सामने खड़ी हो जाती हैं. ऐसे में जब इस भाव में बृहस्पति जैसा बड़ा और शुभ ग्रह बैठता है तो इसके प्रभाव बेहद दिलचस्प हो जाते हैं. बृहस्पति ज्ञान, समझ, भरोसा, ग्रोथ और अच्छे कर्मों का कारक होता है. यह जहां भी बैठता है, वहां अपनी सकारात्मक ऊर्जा जरूर छोड़ता है, लेकिन अगर घर की स्थिति ठीक न हो, या बृहस्पति कमजोर हो जाए, तो इसके उल्टे असर भी देखने को मिलते हैं. छठे भाव में बृहस्पति का बैठना एक ऐसा योग बनाता है जिसे समझना जरूरी है, क्योंकि ये आपके करियर, हेल्थ, ऑफिस लाइफ, सोशल सर्कल और विरोधियों के व्यवहार तक को प्रभावित करता है. कई लोग सोचते हैं कि छठा भाव होने के कारण बृहस्पति कमजोर पड़ जाता है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. असल फर्क इस बात पर पड़ता है कि कुंडली में बाकी ग्रह कैसे हैं, बृहस्पति किस राशि में है और उसकी दृष्टि किन घरों पर पड़ रही है. यह ग्रह अगर मजबूत हो, तो दुश्मन भी दोस्त जैसे बर्ताव करने लगते हैं और काम में अचानक बढ़ोत्तरी दिखती है, लेकिन अगर कमजोर हो जाए, तो हल्की-सी गलती भी बड़ी परेशानी खड़ी कर देती है.
इसलिए इस आर्टिकल में आप जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह से बृहस्पति के सकारात्मक प्रभाव, इसके नकारात्मक असर और ऐसे आसान उपाय जो आपकी लाइफ को बेहतर बना सकते हैं.
छठे भाव में बृहस्पति के सकारात्मक असर
1. दुश्मन खुद पीछे हट जाते हैं
बृहस्पति यहां बैठकर विरोधियों की चाल कमजोर कर देता है. आपके खिलाफ कोई भी गलत प्लान लंबे समय तक टिक नहीं पाता.
2. नौकरी और ऑफिस में सम्मान बढ़ता है
अगर बृहस्पति मजबूत हो, तो बॉस या सीनियर्स के साथ रिश्ते बेहतर रहते हैं. काम में ग्रोथ मिलती है, अचानक प्रमोशन या नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है.
3. हेल्थ में सुधार और मन में पॉजिटिव सोच
छठा भाव हेल्थ से जुड़ा होता है, और बृहस्पति यहां बैठकर बीमारी से जल्दी उभरने की ताकत देता है. मानसिक स्ट्रेस भी कम होता है.
4. कर्ज या लोन से राहत
ऐसे लोग कर्ज लेना कम पसंद करते हैं, अगर कभी लेना भी पड़े तो जल्दी चुकाने की क्षमता रहती है. पैसा अटका हुआ हो तो धीरे-धीरे वापस मिलने लगता है.
5. कानूनी मामलों में जीत
कोर्ट-कचहरी वाले मामले लंबे न खिंचें, इसमें भी बृहस्पति मदद करता है. सच का साथ मिलता है और फालतू मामलों से राहत मिलती है.
छठे भाव में बृहस्पति के नकारात्मक असर
1. बहुत भरोसा करना नुकसान दे सकता है
कुछ लोगों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करके आप नुकसान उठा सकते हैं.
2. हेल्थ के छोटे-छोटे मुद्दे बार-बार परेशान करते हैं
जैसे गैस, वजन बढ़ना, थकान, और इम्यूनिटी कमजोर होना. ये चीजें खुद बड़ी न लगें, पर लाइफ को धीमा कर देती हैं.
3. ऑफिस पोलिटिक्स में फंसने का खतरा
अगर बृहस्पति कमजोर हो, तो लोग आपके खिलाफ बातें कर सकते हैं. खुद की मेहनत का पूरा फल नहीं मिलता.
4. कर्ज बढ़ सकता है
गलत जगह पैसा फंस सकता है या उधार देने पर पैसा देर से लौट सकता है.
5. अचानक खर्च बढ़ना
घर, हेल्थ या लीगल कामों में ऐसे खर्च आ सकते हैं जो प्लान में ही नहीं थे.
क्यों डरते थे राजा भी शिशुपाल की किस्मत से? क्यों गिन-गिनकर माफ कर रहे थे कृष्ण उनकी 100 गलतियां?
22 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाभारत सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसे अनगिनत रहस्यों से भरी हुई गाथा है जिन्हें सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं. हर घटना के पीछे कोई न कोई बड़ी वजह छुपी रहती है, खासकर जब बात आती है भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की. श्री कृष्ण को पूरे संसार का मार्गदर्शक, न्याय का रक्षक और धर्म को बचाने वाला माना जाता है. यही वजह है कि लोग अक्सर सोच में पड़ जाते हैं कि अगर कृष्ण इतने न्यायप्रिय थे, तो फिर उन्होंने शिशुपाल जैसे व्यक्ति को इतनी छूट क्यों दी? आखिर क्यों उन्होंने 100 अपराध होने तक उसे कुछ नहीं कहा? क्या वजह थी कि वही कृष्ण, जो गलत को कभी बर्दाश्त नहीं करते थे, वही शिशुपाल की गलतियां गिन-गिन कर माफ करते रहे? इस किले के पीछे सिर्फ एक भावुक कहानी ही नहीं, बल्कि एक गहरी सीख भी छुपी है. महाभारत में शिशुपाल का किरदार जितना कड़वा दिखता है, उतनी ही दिल को छूने वाली है उसकी जन्म से जुड़ी कहानी. उसके जन्म के साथ जो अनहोनी जुड़ी थी, उसने श्री कृष्ण के फैसले को एक अलग मोड़ दिया. इसी वजह से श्री कृष्ण ने शिशुपाल की गलतियों पर उस समय तक चुप्पी बनाए रखी, जब तक उसकी गालियों की गिनती 100 तक नहीं पहुंच गई.
आज हम उसी किस्से को सरल और साफ शब्दों में समझेंगे –
श्री कृष्ण ने शिशुपाल को आखिर 100 अपराधों की छूट क्यों दी?
और क्या था वह पल जब कृष्ण ने उसके जीवन का अंत किया?
शिशुपाल का अद्भुत और डराने वाला जन्म
शिशुपाल कृष्ण की बुआ का बेटा था. उसका जन्म बेहद अजीब हालात में हुआ. जब वह पैदा हुआ, तो उसके पास तीन आंखें और चार हाथ थे. यह देखकर उसके माता-पिता घबरा गए और सोचा कि यह बच्चा कहीं किसी बड़ी मुसीबत का संकेत तो नहीं. उसी समय आकाशवाणी हुई कि इस बच्चे को छोड़ना नहीं है, क्योंकि समय आने पर उसके एक हाथ और एक आंख अपने आप गायब हो जाएंगे. साथ ही यह भी बताया गया कि जिस व्यक्ति की गोद में आते ही ये अतिरिक्त अंग गायब होंगे, वही उसके जीवन का अंत करेगा.
श्री कृष्ण की गोद में आते ही हुआ चमत्कार
-कुछ समय बाद, जब शिशुपाल को कृष्ण की गोद में रखा गया, तो वही हुआ जिसकी आकाशवाणी में चेतावनी दी गई थी.
-उसकी एक आंख और एक हाथ गायब हो गए. यह देखकर कृष्ण की बुआ बेहद डर गईं. उन्होंने कृष्ण से विनती की कि वे उनके बेटे को बचाएं और उसकी गलतियों को माफ करें.
श्री कृष्ण ने अपनी बुआ को शांत करते हुए कहा-
“मैं शिशुपाल की 100 गलतियां माफ करूंगा, लेकिन 101वीं गलती पर वह दंड से नहीं बच पाएगा.”
यह वचन, कृष्ण के मन में प्रेम और जिम्मेदारी दोनों का मेल था.
त्रेतायुग के इन तीन मुख्य प्रतीक के साथ राम मंदिर के शिखर पर लगेगा भगवा झंडा, जानें ध्वज की खास बातें
22 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विवाह पंचमी के मौके पर अयोध्या के राम मंदिर में ध्वाजरोहण का कार्यक्रम किया जा रहा है. पीएम मोदी के साथ कई वीआईपी लोग इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और रामलला के दर्शन करेंगे. राम मंदिर के शिखर पर लगने वाले झंडे को खास तरह से तैयार किया गया है. आइए जानते हैं राम मंदिर पर लगने वाले झंडे के बारे में....
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है. विवाह पंचमी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर परिसर में विशेष रूप से तैयार किए गए दिव्य ध्वज का अनावरण और ध्वजारोहण करेंगे. यह ध्वज ना केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि भारतीय अध्यात्म, इतिहास और पर्यावरणीय संदेशों की गहराई भी समेटे हुए है. विशेष डिजाइन के इस ध्वज की लंबाई 11 फीट और चौड़ाई 22 फीट रखी गई है, जो अपने आप में भव्य और अनोखा है. ध्वज के डिजाइन और रिसर्च का जिम्मा ललित मिश्रा ने संभाला. आइए जानते हैं राम मंदिर के झंडे की क्या है खासियत...
त्रेता युग से है झंडे का संबंध - मिश्रा के अनुसार, यह ध्वज रामायण काल के त्रेता युग में प्रयुक्त ध्वजों की अनुकृति से प्रेरित है. ध्वज को आधुनिक तकनीक और पारंपरिक भावनाओं के संगम के साथ तैयार किया गया है, जिससे यह ना केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि शास्त्रीय संदर्भों का भी प्रमाण प्रस्तुत करता है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ध्वज का रंग केसरिया होगा, जो धर्म, त्याग और साहस का प्रतीक है. ध्वज में तीन मुख्य प्रतीकों ॐ, सूर्य और कोविदार वृक्ष को अंकित किया गया है, जो इसकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जा रही है.
अयोध्या कांड में कई बार मिलता है जिक्र - सूर्य भगवान राम के सूर्यवंशी वंश होने का प्रतीक है, जो शौर्य, तेज और पराक्रम की ऊर्जा दर्शाता है. वहीं ॐ सनातन संस्कृति के अध्यात्म, अनंतत्व और निरंतर गतिशीलता का प्रतीक है. डिजाइनर ललित मिश्रा बताते हैं कि ‘ॐ’ का समावेश यह संदेश देता है कि सनातन न कभी नष्ट होता है, न समाप्त, वह निरंतर परिवर्तन और सृजनशीलता के साथ आगे बढ़ता रहता है. सबसे कठिन लेकिन महत्वपूर्ण भाग था कोविदार वृक्ष की पहचान. त्रेता युग के इस वृक्ष का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में, विशेष रूप से अयोध्या कांड में कई बार मिलता है.
यहां तैयार किया गया है झंडा - मिश्रा के मुताबिक, कोविदार वृक्ष को ध्वज पर स्थान देना केवल पौराणिक अवधारणा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के महत्व का संदेश भी है. त्रेता काल के पवित्र वृक्ष को ध्वज पर अंकित करना ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से अत्यंत प्रतीकात्मक है. ध्वज गुजरात में तैयार किया गया है और इसमें विशेष प्रकार के कपड़े का उपयोग हुआ है. यह कपड़ा इस तरह विकसित किया गया है कि उस पर धूल, मिट्टी और पानी का असर कम से कम हो. यानी मौसम जैसी भी स्थिति हो, ध्वज सदैव स्वच्छ और सजीव दिखाई देगा.
आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षण का संदेश - साथ ही यह ध्वज 360 डिग्री घूमने की तकनीक के साथ स्थापित किया जाएगा, जिससे यह सदैव लहराता हुआ प्रतीत होगा. राम मंदिर में ध्वज फहराने का यह क्षण श्रद्धा और गौरव के साथ-साथ वैदिक इतिहास की पुनर्स्थापना का भी प्रतीक बनकर सामने आएगा. 25 नवंबर को पूरा देश और विश्व की हिंदू संस्कृति उस पल पर नजरें जमाए रहेगी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिव्य ध्वज का उद्घाटन करेंगे. यह ध्वज आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास, अध्यात्म और प्रकृति के संरक्षण का संदेश बनकर खड़ा रहेगा.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (22 नवंबर 2025)
22 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- दूसरों के झगड़ों में फंसने से बचिये, कार्य अवरोध होगा ध्यान अवश्य रखें।
वृष राशि :- धन देने पर वापिस न मिले, कहीं मानसिक बेचैनी से क्लेश अवश्य ही होगा।
मिथुन राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति हो तथा कार्य वृद्धि होगी।
कर्क राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, असमंजस, मानसिक विभ्रम, उद्विघ्नता बनेगी, ध्यान दें।
सिंह राशि :- दैनिक कार्यवृत्ति में सुधार, सफलता के साधन जुटायें, लाभ अवश्य ही होगा।
कन्या राशि :- स्त्री-वर्ग से सुख चिन्तायें कम हों, स्थिरतापूर्वक कार्य बन जायेंगे, ध्यान दें।
तुला राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, स्थिति में सुधार होगा, चिन्तायें कम हों, लाभ होगा।
वृश्चिक राशि :- स्थिति में सुधार, नियंत्रण करने में सफल होंगे, कुछ योजनायें पूर्ण अवश्य होंगी।
धनु राशि :- धन का व्यय, हीन भावना उत्पन्न होगी, कार्य अवरोध होगा धैर्य के साथ आगे बढ़ें।
मकर राशि :- स्त्री-शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी ध्यान दें।
कुंभ राशि :- कार्य-व्यवसाय में नवीन योजनायें बनेंगी, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष, कार्यवृत्ति में सुधार, चिन्तायें कम होंगी ध्यान दें।
अद्भुत है भगवान जगन्नाथ मंदिर की महिमा
21 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुरी का भगवान जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन इससे जुड़े कई रहस्य और परंपराएं भी हैं, जो आपको हैरान कर देंगी। इन्हीं में से एक है इस मंदिर का झंडा जो हवा की दिशा के विपरीत लहराता है। आम तौर पर झंडा हवा के साथ उड़ता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता। यही बात इस मंदिर को रहस्यमयी और अद्भुत बनाती है.
आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है कि मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है। स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ की दैवीय शक्ति का संकेत मानते हैं। कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता झंडा नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करता है और पूरे वातावरण में सकारात्मकता फैलाता है। इस झंडे को हर दिन बदला जाता है, लेकिन यह काम कोई साधारण नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति भक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। हर शाम लगभग सूर्यास्त के समय पुराना झंडा उतारकर नया त्रिकोणीय झंडा लगाया जाता है.
ऐसा भी मान्यता है कि अगर किसी दिन झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 सालों तक बंद हो सकता है। इसलिए चाहे बारिश हो या तूफान, यह परंपरा एक दिन के लिए भी नहीं रुकती। झंडा बदलने का यह कार्य एक विशेष परिवार, जिसे चुनरा सेवक या चोला परिवार कहा जाता है, के हाथों से ही होता है। इस परिवार के लोग लगभग पिछले 800 सालों से यह पवित्र जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
सबसे हैरानी की बात यह है कि वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 214 फुट ऊंचे मंदिर के शिखर पर चढ़ते हैं और वहां झंडा बदलते हैं। कहा जाता है कि आज तक इस परिवार के किसी भी सदस्य को इस काम के दौरान कोई चोट नहीं लगी। यह झंडा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है।
पूजा के दौरान धूपबत्ती जलाना शुभ
21 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में पूजा के दौरान धूपबत्ती जलाना शुभ माना जाता है जबकि अगरबत्ती नहीं । अगरबत्ती में बांस जलता है जो अशुभ है और स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है। धूपबत्ती ग्रह शांति और सकारात्मक ऊर्जा देती है। आइए जानें हर नियम ताकि पूजा का पूरा फल मिले।
हिंदू शास्त्रों में अगरबत्ती का कोई उल्लेख नहीं है और इसमें बांस जलता है, जो अंतिम संस्कार से जुड़ा है। बांस जलाने से पितृ दोष, वंश वृद्धि में रुकावट और दुर्भाग्य आता है। वैज्ञानिक रूप से बांस का धुआं सांस की बीमारी पैदा करता है। ऐसे में पूजा में अगरबत्ती ना जलाएं।
ज्योतिष में बांस जलाने से पितृ दोष उत्पन्न होता है और पूर्वजों की आत्मा अशांत रहती है। शव यात्रा व कपाल क्रिया में बांस का उपयोग होता है, इसलिए पूजा में इसे जलाना वर्जित है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और संतान सुख प्रभावित होता है।
धूपबत्ती चंदन, लकड़ी छाल और जड़ी-बूटियों से बनती है, जो ग्रहों को शांत करती है। रोज धूप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, वास्तु दोष दूर होता है और देव कृपा मिलती है। धूप की सुगंध मन शांत करती है और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
धूपबत्ती में उपयोगी सामग्री अलग-अलग ग्रहों से जुड़ी होती है। चंदन शुक्र ग्रह को, गूगल राहु ग्रह को और लोबान सूर्य को शांत करता है। धूप जलाने से कुंडली के दोष कम होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। शाम को धूप जरूर जलाएं।
धूपबत्ती का धुआं कीटाणुनाशक है और घर की हवा शुद्ध करता है, जबकि अगरबत्ती का धुआं हानिकारक है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (21 नवंबर 2025)
21 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास एवं योजनायें फलीभूत हों तथा धन लाभ अवश्य होगा।
वृष राशि :- लेन-देन के मामले स्थगित रखें, धन देने पर भी वापस न मिले, मानसिक चिन्ता रहेगा।
मिथुन राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
कर्क राशि :- योजनायें फलीभूत हों, सफलता के साधन जुटायें, कार्य कुशलता पूर्वक होंगे।
सिंह राशि :- प्रभुत्व वृद्धि, कार्य-कुशलता से संतोष, विशेष लाभप्रद योग बनेंगे, ध्यान देने से कार्य होगा।
कन्या राशि :- चिन्तायें परेशान रखें, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य होंगे ध्यान दें।
तुला राशि :- अधिकारी वर्ग से तनाव, क्लेश, मानसिक उद्विघ्नता होगी, धैर्य से कार्य करें।
वृश्चिक राशि :- दैनिक कार्यगति मंद, स्थिति में सुधार होगा, नियंत्रण करने में सफलता मिलेगी।
धनु राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित हों, सतर्कता से कार्य निपटा लें, कार्य बनेंगे।
मकर राशि :- हाथ में आया हुआ धन व्यर्थ जायेगा, कार्य-कुशलता से संतोष अवश्य होगा।
कुंभ राशि :- विलम्ब से बेचैनी संभव है, भाग्य आपका साथ देगा, रुके कार्य बना लें।
मीन राशि :- अनायास परेशानी, शत्रु से सतर्क रहें, मान-प्रतिष्ठा पर आंच आयेगी तथा कष्ट होगा।
मार्गशीर्ष दर्श अमावस्या आज, पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें ये 5 दान, हर कार्य में मिलेगी सफलता!
20 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मार्गशीर्ष की दर्श अमावस्या आज 19 नवंबर बुधवार को है. हर महीने पड़ने वाली अमावस्या अपने आप में विशेष होती है. मार्गशीर्ष के माह में आने वाली दर्श अमावस्या या मार्गशीर्ष अमावस्या बेहद खास होती है, क्योंकि इसे पितरों से जोड़कर देखा गया है. माना जाता है कि अगर पितृ अशांत हैं या उनकी तृप्ति के लिए तर्पण करना है, तो दर्श अमावस्या से बेहतर दिन नहीं हो सकता है. दर्श अमावस्या के अवसर पर आप पितृ दोष से मुक्ति के लिए 5 दान जरूर करें.
मार्गशीर्ष दर्श अमावस्या
मार्गशीर्ष के महीने में पड़ने वाली दर्श अमावस्या का मुहूर्त आज 19 नवंबर की सुबह 9 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर कल 20 नवंबर की दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक है. ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 20 नवंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या है, जबकि दर्श अमावस्या आज है.
पितृ दोष मुक्ति के लिए 5 दान
आज दर्श अमावस्या के दिन पितरों के नाम से दान-पुण्य करना और गरीबों को भोजन कराना शुभ माना जाता है. पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए दर्श अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और पितरों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए और फिर पितरों के नाम से गेंहू, चावल और काले तिलों का दान करना शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का दान करने से पितर शांत होते हैं और परिवार पर कृपा बरसाते हैं.
दर्श अमावस्या के दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए. अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं है तो घर पर ही बाल्टी में नदी का जल मिला लें. नहाते समय अपने पितरों का ध्यान करें. ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं. इसके साथ ही साबुत उड़द और कंबल का दान करना भी शुभ होता है. इससे पितर अपने स्थान पर सुखी और प्रसन्न रहते हैं. राहु और केतु का नकारात्मक प्रभाव भी कम होता है.
पक्षियों को दाना खिलाने का महत्व
दर्श अमावस्या के दिन पक्षियों को दाना खिलाना बहुत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पितर पक्षियों के रूप में आकर दाना ग्रहण करते हैं. ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है. इसके अलावा, अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण भी कर सकते हैं. पितृ की कृपा से घर-परिवार सुखी रहता है, करियर में सफलता मिलती है और वंश वृद्धि भी होती है.
ठीक 12 बजे शुरू होगा राम मंदिर का भव्य ध्वजारोहण, जानिए क्यों चुना गया है अभिजीत मुहूर्त?
20 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में 25 नवंबर को ध्वजारोहण का भव्य आयोजन होने जा रहा है. मंदिर पर इस धम्रध्वज का लहराना, राम मंदिर के ऐतिहासिक और दिव्य निर्माण के सफल समापन की घोषणा करेगा. सूर्यवंशी परंपरा से तैयार इस ध्वज को मंगलवार के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभिजीत मुहूर्त में लहराएंगे. ध्वजारोहण के अनुष्ठान का नेतृत्व व प्रसिद्ध विद्वान पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ करेंगे और उन्होंने ही यह मुहूर्त भी निकाला है. आइए जानते हैं, क्यों इस भव्य आयोजन के लिए अभिजीत मुहूर्त को ही चुना गया? साथ ही क्यों बनाया गया है इस ध्वज पर कोविंदर का वृक्ष, क्या है इसकी विशेषता. जानिए इस आयोजन के बारे में सबकुछ.
बिजली महादेव मंदिर: भगवान शिव का चमत्कार! जहां हर 12 साल में टूट जाता है शिवलिंग, फिर जुड़ जाता है, लेकिन कैसे? पढ़ें यह रोचक कथा
20 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिमाचल प्रदेश की वादियों में एक ऐसा मंदिर है, जिसमें विराजमान शिवलिंग हर 12 साल में चकनाचूर हो जाता है. इतना ही नहीं, इस शिवलिंग के वापस जोड़ने की विधि जानकर आप हैरान हो जाएंगे. हम बात कर रहे हैं कुल्लू जिले की ऊंची पहाड़ियों पर बने बिजली महादेव मंदिर की. यह शांत हवा और देवदार के जंगलों के बीच एक ऐसा स्थान है, जहां हर 12 साल में एक अद्भुत चमत्कार होता है. यहां स्थित शिवलिंग सचमुच टूट जाता है.
हर 12 वर्ष में शिवलिंग पर गिरती है बिजली
कुल्लू से करीब 20 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से लगभग 7874 फीट की ऊंचाई पर बना यह मंदिर दिखने में जितना साधारण है, इसकी परंपरा उतनी ही असाधारण है. स्थानीय लोग बताते हैं कि हर बारह वर्ष में शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है. यह कोई दुर्घटना नहीं मानी जाती, बल्कि इसे भगवान शिव की दिव्य लीला माना जाता है.
मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं बिजली को अपने ऊपर गिरने देते हैं, ताकि धरती पर आने वाले संकटों को पहले ही खत्म कर दिया जाए. जब बिजली गिरती है तो तेज धमाके के साथ शिवलिंग कई टुकड़ों में टूट जाता है, लेकिन यही टूटना यहां की परंपरा का सबसे अनोखा हिस्सा है.
मक्खन और सत्तू के लेप से जुड़ जाता है शिवलिंग
कुछ दिनों बाद मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग मिलकर मक्खन और सत्तू का लेप लगाकर टूटे हुए टुकड़ों को बड़ी निपुणता से जोड़ते हैं. धीरे-धीरे यह लेप सख्त हो जाता है और शिवलिंग फिर से पहले जैसा दिखाई देने लगता है. यह प्रक्रिया किसी चमत्कार से कम नहीं लगती.
बिजली महादेव मंदिर की कथा
मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है. कहा जाता है कि कुलांत नाम का एक राक्षस ब्यास नदी का रास्ता रोककर पूरी घाटी को डुबो देना चाहता था. उसने अजगर का रूप ले लिया और लोगों को आतंकित करने लगा, तभी भगवान शिव प्रकट हुए और उससे युद्ध किया.
कुलांत की हार हो गई और उसकी पूंछ में आग लगने से उसकी मृत्यु हो गई. माना जाता है कि जिस पर्वत पर उसका शरीर गिरा, वहीं पर बिजली महादेव मंदिर की स्थापना हुई, इसलिए इसे कुलांत पीठ भी कहा जाता है.
श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर: जहां कच्छप अवतार में हैं भगवान, रहस्यमयी सुरंग का गया-काशी से है कनेक्शन! पितरों के लिए खुलता है मोक्ष मार्ग
20 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को संसार का पालनकर्ता माना गया है और जब-जब मानव कल्याण या सृष्टि के उद्धार की बात आई है, तब-तब भगवान विष्णु ने अलग-अलग अवतार लिए हैं. उन्हें मत्स्य और नरसिंह अवतार में पूजा गया, लेकिन आंध्र प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु को कछुए के रूप में पूजा जाता है और दूर-दूर से भक्त भगवान विष्णु के इस अनोखे अवतार के दर्शन करने आते हैं.
कच्छप अवतार में पूजे जाते हैं श्रीहरि विष्णु
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पास समंदर से 2 किलोमीटर की दूरी पर श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर है. यह देश का पहला मंदिर है, जहां भगवान विष्णु के कछुए के अवतार की पूजा होती है. ये भगवान का दूसरा अद्भुत रूप है. पहले भगवान विष्णु ने पृथ्वी को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के साथ बड़े से कछुए की प्रतिमा भी है, जिसकी पूजा-अर्चना रोजाना मंदिर के पुजारियों द्वारा की जाती है.
दर्शन से पूरे होते हैं कठिन काम
भक्तों की मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन करने से बड़ा से बड़ा कार्य पूरा हो जाता है. हिंदू धर्म और फेंगशुई दोनों में भी कछुए को सुख-समृद्धि और भाग्य का प्रतीक माना जाता है.
मंदिर का सुरंग, काशी और गया से जुड़ा
मंदिर के अंदर एक सुरंग भी है. रहस्यमयी सुरंग को लेकर कहा जाता है कि ये सीधा काशी और गया जाती है. इसी वजह से पितरों के तर्पण के लिए भी श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर को महत्वपूर्ण माना गया है.
मोक्षधाम में पितरों का होता उद्धार
माना जाता है कि जो बिहार के गया या काशी जाकर पिंडदान नहीं कर सकते हैं, वे इस मंदिर में आकर तर्पण कर सकते हैं. इसे मोक्ष धाम भी माना जाता है. श्री कूर्मनाथ स्वामी की जमीन पर संत रामानुज, शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और चैतन्य महाप्रभु जैसे महासंतों के पैर पड़े हैं.
मंदिर परिसर में 100 प्रकार के कछुए
मंदिर की बनावट की बात करें तो मंदिर में 201 स्तंभ मौजूद हैं. इस पर कई भाषाओं में शिलालेख लिखे हैं. मंदिर की दीवारों पर मुगल शासन और अजंता एलोरा की झलक भी दिखती है. खास बात ये है कि मंदिर के भीतर एक बाड़ा बनाया गया है, जहां आज भी 100 अलग-अलग प्रजातियों के कछुओं को पाला जाता है. पर्यटक दूर-दूर से छोटे-छोटे कछुओं के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.
धार्मिक दृष्टिकोण की बात करें तो भगवान विष्णु ने समंदर मंथन के समय विशाल कछुए का रूप लिया था, क्योंकि मंदारांचल पर्वत समंदर में डूब रहा था और पर्वत को स्थिरता देने के लिए भगवान विष्णु कूर्म (कछुआ) रूप में प्रकट हुए.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (20 नवंबर 2025)
20 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्त्री-शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी, उद्वविघ्नता, आर्थिक संघर्षशीलता से बचिये।
वृष राशि :- भाग्य का सितारा अनुकूल रहे, बिगड़े कार्य बनेंगे, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
मिथुन राशि :- व्यवसायिक क्षमता में रुकावट, बेचैनी, मानसिक उद्विघ्नता तथा क्रोध होगा।
कर्क राशि :- मानसिक बेचैनी, तनाव से क्लेश व अशांति होते हुये भी स्थिति अनुकूल होगी।
सिंह राशि :- तनाव व अशांति से बचिये, विभ्रम, असमंजस क्लेशप्रद होगा, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- क्लेश व अशांति, व्यर्थ भ्रमण, चिन्तायें बनी रहें, इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे।
तुला राशि :- समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थगित रखें, कुटुम्ब की चिन्ता मन व्याग्र रखे।
वृश्चिक राशि :- अनायास तनाव, क्लेश व अशांति, उपद्रव, विरोध, विवाद कष्टप्रद होगा।
धनु राशि :- विघटनकारी तत्व परेशान करें, अनावश्यक बाधाओं से बचिये, कार्य होंगे।
मकर राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक उपद्रव, स्त्री-शरीर कष्ट, योजना बनेगी।
कुंभ राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार, कुछ नई चिंतायें मन को उद्विघ्न रखेंगी, धैर्य रखकर कार्य करें।
मीन राशि :- स्थिति में सुधार, कार्य-व्यवसाय अनुकूल, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा।
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