धर्म एवं ज्योतिष
नानवेज में क्या खाते-पकाते थे पांडव, वनवास में क्या था पसंदीदा खाना
2 Dec, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्या आपको मालूम है कि पांडवों को कैसा भोजन पसंद था. वो नान वेजेटेरियन थे या वेजेटेरियन यानि मांसाहारी या शाकाहारी. शोध कहती हैं कि महाभारत दौर में लोग दोनों तरह का खाना खाते थे. जमकर दूध पीते थे. पांडव क्या खाते-पीते थे. उन्हें कौन से व्यंजन पसंद थे. खासकर तब जबकि वो निर्वासन में वनवास में रहने गए. मांसाहार को युधिष्ठर अपरिहार्य स्थितियों में उचित मानते थे.
पांडव पूरी तरह से शाकाहारी नहीं थे. उन्होंने निर्वासन के दौरान मांसाहारी भोजन किया और शाकाहाऱी खाना भी. ऐतिहासिक ग्रंथों से पता चलता है कि वे वनवास के दौरान हिरण और अन्य जानवरों का शिकार करते थे, जो उस दौर में क्षत्रियों के बीच आमबात थी. निर्वासन के दौरान उनके खाने में विविधता और बढ़ी. वो इस दौरान जिन क्षेत्रों से गुजरे, जहां रुके, वहां का खाना खाने लगे.
वनपर्व में कई जगह संकेत मिलता है कि भीम वनवास के दौरान जंगल से हिरण और जंगली पशुओं को पकड़ते थे. वनपर्व के अध्याय 11–12 में भीम के वन में दौड़ते हुए हिरण को पकड़ने, उछालने और लाने का उल्लेख है. वहीं शांति पर्व में युधिष्ठिर खुद कहते हैं वनवास में शिकार और मांस खाना धर्म-विरोधी नहीं है. अनुशासन पर्व में भी युधिष्ठिर कहते हैं, “मुश्किल परिस्थिति में मांस खाओ. जीवन रक्षा के लिए मांस ग्रहण करना उचित है.” कई जगह लिखा है कि पांडव नदीतट पर रहते वक्त जाल से मछली पकड़ते थे.
वनपर्व में एक पूरा अध्याय “मांसाहार” पर है, जिसमें ऋषि अगस्त्य द्वारा मांस खाने के कारणों के बारे में बताया गया है. जिसमें ये साफ होता है कि मांस उस काल में आम और स्वीकार्य था.
मुर्गी और मछली खाते थे
महाभारत में उनके आहार के हिस्से के रूप में मुर्गी और मछली सहित विभिन्न मांसाहारी व्यंजनों का उल्लेख है. प्राचीन भारत में मिश्रित भोजन होता था यानि शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के. अनुष्ठानों और खास कार्यक्रमों में मांसाहारी खाना पकता था.
हिरण भी शिकार करके खाया
पांडवों का भोजन मिश्रित था, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के खाद्य पदार्थ शामिल थे. वनवास में वो फलों, जड़ों से जुड़े खाद्य पदार्थ और अनाज भी खाते थे. ऐतिहासिक ग्रंथों से पता चलता है कि वे शिकार भी करते थे. मांस भी खाते थे. वनवास के दिनों में उन्होंने मुख्य रूप से हिरण का मांस खाया और मछलियों का सेवन किया.
शिकार से काफी आहार जुटाते थे
हिरण के अलावा ये भी संभावना है कि उन्होंने अन्य खेल जानवरों और शायद मुर्गी का भी सेवन किया. महाभारत में उल्लेख है कि पांडव कुशल शिकारी थे, जिसने उन्हें जंगल में रहने के दौरान शिकार से भोजन के लिए काफी आहार जुटाया.
अक्षयपात्र भी देता था मनचाहे खाने
महाभारत में बताया गया है कि युधिष्ठिर को सूर्य देव ने एक अक्षय पात्र भेंट किया था, जो मांस सहित मनचाहे और भरपूर भोजन देता था.
यज्ञ के दौरान मांसाहारी व्यंजन भी
जब युधिष्ठिर ने राजसूर्य यज्ञ किया तो पांडवों ने कई राजाओं और गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया. भोज में मांस सहित कई तरह के व्यंजन थे. तब महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में मांस का भोजन जरूर होता था.
पांडव के पसंद के खाने क्या थे
कहा जाता है कि सफल शिकार के बाद या त्योहारों के दौरान पांडव बड़े भोज खुद तैयार करते थे जिसमें मांस के व्यंजन शामिल होते थे. द्रोण पर्व और अभिमन्यु बड़ा पर्व में इसकी जानकारी मिलती है. महाभारत में भोजन के लिए कई जानवरों के वध का उल्लेख है, विशेष रूप से शाही रसोई में.
पांडवों को कुछ खास तरह के मांस पसंद थे, खासतौर पर खास मौकों और दावतों के दौरान. भीम अपनी अत्यधिक भूख के लिए जाने जाते थे, मांस के विशेष शौकीन थे.
हिरण का मांस – महाभारत में सबसे ज़्यादा संदर्भित मांस हिरण है, जिसका शिकार पांडवों ने अपने वनवास के दौरान किया था. हिरण का मांस न केवल मुख्य भोजन था, बल्कि इसे एक स्वादिष्ट व्यंजन भी माना जाता था, खास तौर पर जब इसे सामूहिक दावतों के लिए तैयार किया जाता था.
मुर्गी और मछली – पांडव कई तरह की मुर्गी और मछली भी खाते थे. महाभारत में उल्लेख है कि वे इन मांस से बने व्यंजनों का आनंद लेते थे, जो दिखाता था ये समारोहों और उत्सवों के दौरान उनके आहार का हिस्सा थे.
क्षेत्रीय खाने- पांडवों ने विभिन्न राज्यों की यात्रा करते समय स्थानीय खानों का भी आनंद लिया. उदाहरण के लिए, काबुली पुलाव और गुजराती कढ़ी जैसे व्यंजनों का उल्लेख उनके द्वारा खाए जाने वाले विविध व्यंजनों के रूप में किया जाता है.
भीम को कौन सा खाना पसंद था
भीम को मांस बहुत पसंद था, खास तौर पर हिरण. ये मांस खाने की क्षत्रिय परंपरा से मेल खाता है. वह खीर खूब खाते थे. महाभारत में ऐसे उदाहरण हैं जहाँ उन्होंने बहुत ज़्यादा मात्रा में खीर खा ली.
भीम को अवियल बनाने का श्रेय दिया जाता है, जो इमली और नारियल की ग्रेवी में कई तरह की सब्ज़ियों से बनी एक दक्षिण भारतीय सब्जी है. कहा जाता है कि इस व्यंजन की उत्पत्ति तब हुई जब उन्हें राजा विराट के वनवास के दौरान उनके अप्रत्याशित मेहमानों के लिए खाना बनाना पड़ा.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (02 दिसंबर 2025)
2 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब की समस्याएं सुलझे, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य बन जाएंगे।
वृष राशि :- चिन्ताएं कम हो, स्त्रीवर्ग से सुखवर्धक स्थिति होगी तथा प्रभुत्व में वृद्धि अवश्य होगी।
मिथुन राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े हुए कार्य बनेंगे तथा रुके कार्य अवश्य बनेंगे।
कर्क राशि :- लेन देन के मामलें में हानि, व्यर्थ प्रयास न करें, किन्तु यात्र के प्रसंग बन सकते है।
सिंह राशि :- कार्यकुशलता से संतोष, मनोवृत्ति संवेदनशील बनी रहेगी, समय का ध्यान रखना अवश्य करेगा।
कन्या राशि :- मान प्रतिष्ठा प्रभुत्व वृद्धि, अधिकारियों का समर्थन फल प्रद होगा व्यवस्था का ध्यान रखेंगे।
तुला राशि :- व्यवसाय की चिन्ता कम, व्यवसाय गति उत्तम, कार्य सफल होगा, सफलता की साधन जुटाएंगे।
वृश्चिक राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा व विलंब, कलह तथा पीड़ा, स्थितियों को समझ कर कार्य निपटावें।
धनु राशि :- आर्थिक चिन्ताएं मन उद्विघ्न करें तथा प्रयत्नशील रहे, रुके कार्यों पर विेशष ध्यान देंवे।
मकर राशि :- धन लाभ आशानुकूल सफलता का हर्ष तथा कार्य शर्त में सुधार होगा, कार्य करें, कार्य न रोके।
कुंभ राशि :- धन लाभ आशानुकूल सफलता का हर्ष, रुके कार्य गति में सुधार अवश्य होवे, ध्यान रखेंगे।
मीन राशि :- अधिकारियों का सर्मथन फलप्रद रहेगा, कार्य व्यवसाय गति अनुकूल बनेगी, समय का ध्यान रखे।
मोक्षदा एकादशी का व्रत और पूजा से पितरों का होता है कल्याण, मोक्ष प्राप्ति के लिए कर लें बस ये 3 काम, जानें पूजा विधि
1 Dec, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि कल यानी सोमवार के दिन पड़ रही है. यह एकादशी सर्वपाप विनाशिनी, मोक्ष प्रदान करने वाली, तथा पितृ-उद्धार कराने वाली मानी गई है. शास्त्रों में बताया गया है कि इस एकादशी का व्रत रखने से सभी जन्मों के पाप भी मिट जाते हैं और भक्त को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. यह एकादशी मन को सत्त्वगुणी बनाती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं. ज्योतिष शास्त्र में इस एकादशी का महत्व बताते हुए कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं. इन उपायों को करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही इस पवित्र एकादशी पर क्या दान करना चाहिए. आइए जानते हैं एकादशी की पूजा विधि और महत्व…
मोक्षदा एकादशी पंचांग 2025
द्रिक पंचांग के अनुसार, सोमवार के दिन इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा रात 11 बजकर 18 मिनट तक मीन राशि में रहेंगे. इसके बाद मीन राशि में गोचर करेंगे. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 8 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. भद्रा सुबह 8 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा. पंचक काल सुबह 6 बजकर 56 मिनट से 11 बजकर 18 मिनट तक.
मोक्षदा एकादशी का महत्व
विष्णु पूजा, गीता पाठ और दान इस दिन विशेष रूप से मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं. मोक्षदा नाम इसीलिए पड़ा है क्योंकि कहा गया है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा पितरों को भी मोक्ष प्रदान करती है. यही कारण है कि लोग इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित व्रत रखकर अपने पूर्वजों का कल्याण करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री हरि ने अर्जुन को गीत का उपदेश दिया था, जिस वजह से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. इस दिन उपवास, पूजा और दान करने से पापों का नाश होता है और कई गुना फल मिलता है. यह एकादशी व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है.
मोक्षदा एकादशी व्रत विधि पूर्वक
मोक्षदा एकादशी पर व्रत विधि पूर्वक करना चाहिए. विधि-विधान से व्रत करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें. फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें. एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें. विष्णु भगवान की प्रतिमा स्थापित करें और अब भगवान को धूप, दीप, अक्षत और पीले फूल चढ़ाएं. व्रत कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें. उसके बाद आरती का आचमन करें. इसके बाद दिनभर निराहार रहें और भगवान का ध्यान करें. मंत्र जप और ग्रंथों का पाठ करें और शाम को तुलसी मैया पर दीपक जलाना न भूलें.
एक रात में पांडवों ने किया इस मंदिर का निर्माण, इच्छापूर्ति स्वरूप में विराजमान महादेव, कुंड का पानी हमेशा रहता है गर्म
1 Dec, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में महाभारत और रामायण होने के साक्ष्य देश और देश की सीमा के बाहर भी मिल जाते हैं. दक्षिण भारत में महाभारत काल के कई साक्ष्य मिलते हैं, लेकिन क्या आप उस मंदिर के बारे में जानते हैं जिसे पांडवों ने एक रात में बनाया था और मंदिर के निर्माण को अधूरा भी छोड़ दिया था? हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र में मुंबई के पास बने अंबरनाथ मंदिर की, जो भगवान शिव को समर्पित है. मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और हर इच्छा पूरी होती है क्योंकि यहां देव को देव महादेव इच्छापूर्ति स्वरूप में विराजमान हैं. आइए जानते हैं महाभारत कालीन अंबरनाथ मंदिर के बारे में…
वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध अंबरनाथ मंदिर
महाराष्ट्र में मुंबई के पास अंबरनाथ शहर में भगवान शिव को समर्पित मंदिर अंबरनाथ मंदिर है. अंबरनाथ मंदिर अपनी मान्यताओं के अलावा अपनी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है. मंदिर की बनावट बाकी मंदिरों से अलग है. मंदिर की बाहर की दीवारों पर मोटे पत्थर पर भगवान शिव के अनेक रूपों को उकेरा गया है और उनके साथ भगवान गणेश और कार्तिकेय भी बने हैं. मंदिर की दीवारों पर मां भवानी के राक्षस का संहार करते हुए भी मूर्तियां दीवार पर उकेरी गई हैं. मंदिर के गर्भगृह के पास एक कुंड भी बना है और कुंड से पहले पहरेदार के रूप में दो बड़ी नंदी महाराज विराजमान हैं.
हमेशा गर्म रहता है कुंड का पानी
कुंड की खासियत है कि कुंड का पानी हमेशा गर्म रहता है और किसी भी मौसम में पानी सूखता नहीं है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह तक पहुंचने के लिए नौ सीढ़ियां उतरकर नीचे की तरफ जाना होता है, जहां भगवान शिव त्रैमस्ति रूप में विराजित हैं. इस रूप को मां पार्वती और भगवान शिव का एकल रूप माना जाता है. हजार साल पुराने इस मंदिर को यूनेस्को ने सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया है.
मंदिर के भीतर रहस्यमी गुफा
मंदिर के भीतर रहस्यमी गुफा भी है. माना जाता है कि इस गुफा का रास्ता पंचवटी जाता है. मंदिर की खास वास्तुकला को देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. भगवान शिव के अंबरनाथ स्वरूप को इच्छापूर्ति स्वरूप माना जाता है. भक्तों का विश्वास है कि यहां आकर मांगी गई हर मुराद भगवान शंकर पूरी करते हैं और अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं.
पांडवों ने किया था स्थापित
माना जाता है कि यहां भगवान शिव को पांडवों ने स्थापित किया था. माना जाता है कि अज्ञातवास के समय पांडव इस स्थान पर कुछ समय के लिए रुके थे और एक ही रात में इस मंदिर को बना दिया था. मंदिर का कुछ हिस्सा अधूरा है, जिसे बनाया जाना था, लेकिन कौरवों द्वारा पकड़े जाने के डर से पांडवों को ये स्थान छोड़ना पड़ा. शिवरात्रि के मौके पर मंदिर के पास 4 दिन का मेला भी लगता है और दूर-दूर से भक्त अपनी इच्छाओं को लेकर मंदिर में आते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (01 दिसंबर 2025)
1 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्यकुशलता से संतोष, योजनाएं फलीभूत होगी, कार्य विशेष पर ध्यान देकर निपटा लें।
वृष राशि :- दूसरों की समस्याओं में फंसने से बचिए, किसी के कार्य में हस्तक्षेप करने से हानि होगी।
मिथुन राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि, प्रतिष्ठा, मानसिक वृद्धि के योग बनेंगे, विशेष कार्य निपटा लें।
कर्क राशि :- समय की अनुकूलता से लाभान्वित होंगे, तथा कार्य कुशलता से हर्ष अवश्य ही होगा, ध्यान दें।
सिंह राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि, मनोवृत्ति, संवेदनशील बनी रहेगी, स्थितियों को संभाले।
कन्या राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहेगा, मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी।
तुला राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, विशेष कार्य स्थिगित रखे, ध्यान रखे।
वृश्चिक राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, सामाजिक कार्यों में मान प्रतिष्ठा बढ़ जाएगी।
धनु राशि :- धन लाभ कार्यकुशलता से संतोष, सामाजिक कार्य में मान प्रतिष्ठा बढ़े, किन्तु कार्य अवरोध होगा।
मकर राशि :- सफलता के साधन जुटाए, सामान्य स्थिति में बिगड़े कार्य बनेंगे, कार्य सम्पन्न व लाभ होगा।
कुंभ राशि :- मित्र परेशान करें, मानसिक उद्विघ्नता व्यर्थ धन का व्यय तथा आरोप लगेगा।
मीन राशि :- चिन्ताएं कम हो, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य बन जाएंगे, ध्यान रखे।
अगहन में क्यों भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा मानी गई है सबसे शुभ? इस महीने में कही गई थी भागवत गीता
30 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में हर तिथि किसी न किसी देवी देवताओं को जरूर समर्पित रहती है. वहीं अभी हिंदू कैलेंडर के अनुसार अगहन या मार्गशीर्ष महीना चल रहा है. मान्यता है कि इस माह में किए गए स्नान, दान और दीपदान से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. धार्मिक ग्रंथ के अनुसार इसी महीने में भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद् भागवत गीता कही थी. इसलिए इस महीने में गीता जयंती भी मनाई जाती है. इसके साथ-साथ अगहन महीने में किस देवता की पूजा करना चाहिए और क्यों जानते हैं वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थ पुरोहित से?
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि अगहन को भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र महीना माना जाता है. इस महीने में भगवान विष्णु की धूमधाम से पूजा आराधना की जाती है. खासकर देवघर क्षेत्र में तुलसी पूजा, लक्ष्मी-नारायण की आराधना और गीता जयंती के आसपास विशेष पूजा का रिवाज़ है. गांवों में किसान अगहन में की कामना के लिए गोवर्धन पूजा और सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ मानते हैं. ऐसा करने से शारीरिक जो भी कष्ट है वह समाप्त हो जाएगी.
अगहन के महीने में भगवान विष्णु की पूजा क्यों की जाती है
इस महीने सुबह गंगाजल से स्नान, घर के आंगन की लिपाई-पुताई और तुलसी चौरा पर दीप जलाने की परंपरा है. भुनी हुई तिल-गुड़ की मिठाई और खीर का भोग लगाया जाता है. कई जगह महिलाएं सोमवार को शिव-पूजन और गुरुवार को विष्णु-पूजन करती हैं. शाम को घर में घी का दीप, धूप-अगरबत्ती और गीता पाठ करने की भी परंपरा है. देवघर जिले के गांवों में अगहन की पूजा धन-धान्य की वृद्धि, घर में शांति, परिवार की सेहत और समृद्धि के लिए करते हैं. किसान इस महीने को नई फसल की शुरुआत का समय मानते हैं, इसलिए लक्ष्मी-नारायण पूजा और सूर्य देव को अर्घ्य देकर अच्छी पैदावार और वर्षभर बरकत की कामना की जाती है.
भौम प्रदोष व्रत कब है? बन रहे 3 शुभ योग, जानें तारीख, शिव पूजा का शुभ मुहूर्त
30 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. यह मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत है. इस बार प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. जो लोग प्रदोष व्रत रखकर शिव जी की पूजा करते हैं, उनके कार्य सफल होते हैं, पाप, रोग और दोष मिट जाते हैं. शिव कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं कि भौम प्रदोष व्रत कब है? पूजा का मुहूर्त क्या है?
भौम प्रदोष व्रत की तारीख
दृक पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 2 दिसंबर को दोपहर में 3 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर होगा. प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर भौम प्रदोष व्रत 2 दिसंबर को रखा जाएगा.
इस बार भौम प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. प्रदोष के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 06:57 ए एम से बनेगा, जो रात में 08:51 पी एम तक रहेगा. वहीं अमृत सिद्धि योग भी 06:57 ए एम से 08:51 पी एम तक है. उस दिन रवि योग रात में 08:51 पी एम से लेकर देर रात 01:22 ए एम तक है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं. इस योग में प्रदोष व्रत की पूजा की जाएगी, जिससे आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
उस दिन वरीयान् योग प्रात:काल से लेकर रात 09:08 पी एम तक रहेगा, उसके बाद से परिघ योग बनेगा. प्रदोष के दिन अश्विनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 08:51 पी एम तक है, वहीं उसके बाद से भरणी नक्षत्र है.
भौम प्रदोष पूजा मुहूर्त
भौम प्रदोष के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 05:24 पी एम से लेकर रात 08:07 पी एम तक है. शिव पूजा के लिए आपको 02 घंटे 43 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. शिव जी की पूजा के समय लाभ-उन्नति मुहुर्त भी होगा, उसका समय शाम को 07:06 पी एम से रात 08:47 पी एम तक है.
भौम प्रदोष व्रत के फायदे
भौम प्रदोष का व्रत करने से व्यक्ति को धन, सुख, समृद्धि की प्राप्ति होती है. भगवान शिव की कृपा से कर्ज से मुक्ति मिलती है और कर्ज भी दूर होता है. जो लोग किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, उनको भी यह व्रत करना चाहिए, यदि उनके लिए संभव हो तो. इससे सेहत ठीक होती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (30 नवंबर 2025)
30 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि, किसी शुभ समाचार सके मिलने को योग बन जाएगा|
वृष राशि :- आकस्मिक बेचैनी स्वभाव में खिन्नता, थकावट असमजंस की स्थिति बन जाएगी|
मिथुन राशि :- बैचेनी से स्वभाव में खिन्नता, मन भ्रमित, मान प्रतिष्ठा में अपमान, कमी होगी|
कर्क राशि :- दैनिक कार्य वृत्ति में सुधार एवं योजनाएं फलीभूत होगी, कार्य बनेंगे, ध्यान रखें।
सिंह राशि :- विसंगति से हानि, आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य बन ही जायेंगे|
कन्या राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष उल्लास, सामाजिक कार्यों में मान प्रतिष्ठा होगी, ध्यान रखे|
तुला राशि :- मान प्रतिष्ठा में आंच आने का डर, विवाद ग्रस्त होने से बचिए, ध्यान अवश्य रखेंगे|
वृश्चिक राशि :- सामाजिक कार्यो में प्रभुत्व वृद्धि, संवृद्धि संघर्ष के योग बनेंगे, कार्य अवश्य करेंगे|
धनु राशि :- शुभ समाचार से संतोष, दैनिक कार्यगति अनुकूल, मनोकामना पूर्ण होगी, ध्यान दें|
मकर राशि :- विघटनकारी तत्व परेशान करें, अचानक यात्रा के प्रसंग अवश्य ही बनेंगे, ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी, परिश्रम से व्यवस्था अनुकूल अवश्य होगी|
मीन राशि :- समृद्धि के साधन जुटाए, अधिकारियों के समर्थन फलप्रद होगे, कार्य बन जायेंगे|
मासिक दुर्गाष्टमी आज, पूजा से मिलेगा नवरात्रि व्रत का फल, दूर होंगी सभी बाधाएं, जानें विधि, मुहूर्त, कन्या पूजा
29 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है. मार्गशीर्ष की मासिक दुर्गाष्टमी आज है. पौराणिक धर्म ग्रंथों में मासिक दुर्गाष्टमी का विशेष उल्लेख है, जिसमें बताया गया है कि इस दिन व्रत रखने और मातारानी की पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
मासिक दुर्गाष्टमी मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, शुक्रवार के दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा कुम्भ राशि में रहेंगे. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 9 मिनट तक रहेगा.
मासिक दुर्गाष्टमी व्रत और पूजा का महत्व
मासिक दुर्गाष्टमी का दिन माता भगवती को समर्पित है. मान्यता है कि यदि किसी जातक के जीवन में कोई परेशानी है या फिर कठोर मेहनत के बाद भी विशेष फल की प्राप्ति नहीं हो रही है तो ऐसे में मासिक दुर्गाष्टमी के दिन आदिशक्ति की पूजा और व्रत रखने से आपको लाभ हो सकता है. मासिक दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने का फल नवरात्रि के पूजन के बराबर होता है.
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. हो सके तो लाल रंग के वस्त्र पहनें.
माना जाता है कि माता को लाल रंग अत्यंत प्रिय है. फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें.
एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता की प्रतिमा स्थापित करें, साथ ही कलश की भी स्थापना करें.
देवी मां को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं, जिसमें लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत (चावल), लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल), चंदन, रोली आदि अर्पित करें.
इसके बाद उन्हें फल, मिठाई, या अन्य सात्विक भोग लगाएं (जैसे खीर या हलवा).
मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं और धूपबत्ती जलाएं. आप चाहें तो दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं और अंत में मां दुर्गा की आरती करें.
कन्या पूजा
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है. 9 कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र, फल, मिठाई और दक्षिणा देकर सम्मानित करें. यदि संभव न हो तो कम से कम एक कन्या का पूजन अवश्य करें. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करना भी शुभ माना जाता है.
शुरू होने वाला है खरमास, जल्दी निपटा लें अपने काम, नहीं तो करना होगा नए साल का इंतजार, देखें कितने हैं शुभ दिन
29 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसंबर का खरमास शुरू होने वाला है. सालभर में दो बार खरमास लगता है. एक दिसंबर में दूसरा मार्च से अप्रैल के बीच. यदि आपको कोई शुभ काम करना है तो खरमास के प्रारंभ होने से पहले ही उसे निपटा लें, नहीं तो आपको नए साल 2026 का इंतजार करना पड़ेगा. नए साल में भी खरमास की वजह से आपको दो सप्ताह तक कोई शुभ मुहूर्त प्राप्त नहीं होगा. खरमास दिसंबर में करीब 15 दिन और जनवरी में भी लगभग 15 दिन होता है. इस प्रकार से खरमास एक माह का हो जाता है. आइए जानते हैं कि खरमास कब से शुरू है? खरमास का समापन कब होगा? खरमास से पहले शुभ दिन कौन-कौन से हैं?
दिसंबर में खरमास कब से है?
इस साल दिसंबर में खरमास का प्रारंभ 16 दिसंबर को प्रात: 04 बजकर 27 मिनट पर लगेगा. उस समय से ही शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी. पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास शुरू हो जाता है. इस बार 16 दिसंबर को 04:27 एएम पर सूर्य का प्रवेश धनु राशि में होगा.
जनवरी में खरमास का समापन कब है?
16 दिसंबर से शुरू होने वाला खरमास जनवरी 2026 में मकर संक्रांति के दिन खत्म होगा. सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को दोपहर में 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में गोचर करेंगे, उस समय खरमास का समापन हो जाएगा. इस प्रकार से खरमास 16 दिसंबर 2025 से लेकर 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:13 पीएम तक रहेगा.
दिसंबर खरमास से पहले के शुभ दिन
29 नवंबर, शनिवार: मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी
रवि योग: पूरे दिन
अभिजीत मुहूर्त: 11:48 ए एम से 12:30 पी एम
30 नवंबर, रविवार: मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी
सर्वार्थ सिद्धि योग: 06:56 ए एम से 01:11 ए एम, दिसम्बर 01 रवि योग: 06:56 ए एम से 01:11 ए एम, दिसम्बर 01
अभिजीत मुहूर्त: 11:49 ए एम से 12:31 पी एम
2 दिसंबर, मंगलवार: मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी, प्रदोष व्रत
सर्वार्थ सिद्धि योग: 06:57 ए एम से 08:51 पी एम
अमृत सिद्धि योग: 06:57 ए एम से 08:51 पी एम
रवि योग: 08:51 पी एम से 01:22 ए एम, दिसम्बर 03
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:31 पी एम
3 दिसंबर, बुधवार: मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:59 पी एम से 06:59 ए एम, दिसम्बर 04
रवि योग: 05:59 पी एम से 06:59 ए एम, दिसम्बर 04
परिघ योग: प्रात:काल से 04:57 पी एम तक
शिव योग: शाम 04:57 बजे से
अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं
4 दिसंबर, गुरुवार: मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी, मार्गशीर्ष पूर्णिमा
शिव योग: प्रात:काल से 12:34 पी एम तक
सिद्ध योग: दोपहर 12:34 पी एम से
रवि योग: 06:59 ए एम से 02:54 पी एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:32 पी एम
5 दिसंबर, शुक्रवार: पौष कृष्ण प्रतिपदा
सिद्ध योग: प्रात:काल से 08:08 ए एम तक
साध्य योग: सुबह 08:08 बजे से पूरे दिन
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:33 पी एम
6 दिसंबर, शनिवार: पौष कृष्ण द्वितीया
शुभ योग: प्रात:काल से रात 11:46 पी एम तक
द्विपुष्कर योग: 07:00 ए एम से 08:48 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:33 पी एम
7 दिसंबर, रविवार: पौष कृष्ण तृतीया, अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत
शुक्ल योग: प्रात:काल से रात 08:07 पी एम तक
रवि पुष्य योग: 04:11 ए एम, दिसम्बर 08 से 07:02 ए एम, दिसम्बर 08
सर्वार्थ सिद्धि योग: 04:11 ए एम, दिसम्बर 08 से 07:02 ए एम, दिसम्बर 08
अभिजीत मुहूर्त: 11:52 ए एम से 12:33 पी एम
8 दिसंबर, सोमवार: पौष कृष्ण चतुर्थी
ब्रह्म योग: प्रात:काल से 05:01 पी एम तक, उसके बाद इन्द्र योग
सर्वार्थ सिद्धि योग: 07:02 ए एम से 02:52 ए एम, दिसम्बर 09
अभिजीत मुहूर्त: 11:52 ए एम से 12:34 पी एम
9 दिसंबर, मंगलवार: पौष कृष्ण पंचमी
इन्द्र योग: प्रात:काल से 02:33 पी एम तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: 07:02 ए एम से 02:22 ए एम, दिसम्बर 10
रवि योग: 02:22 ए एम, दिसम्बर 10 से 07:03 ए एम, दिसम्बर 10
अभिजीत मुहूर्त: 11:53 ए एम से 12:34 पी एम
12 दिसंबर, शुक्रवार: पौष कृष्ण अष्टमी
प्रीति योग: प्रात:काल से लेकर 11:12 ए एम तक
आयुष्मान् योग: 11:12 ए एम से रात तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:54 ए एम से 12:36 पी एम
13 दिसंबर, शनिवार: पौष कृष्ण नवमी
आयुष्मान् योग: प्रात:काल से 11:17 ए एम तक
सौभाग्य योग: 11:17 ए एम से रात तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:55 ए एम से 12:36 पी एम
14 दिसंबर, रविवार: पौष कृष्ण दशमी
सौभाग्य योग: प्रात:काल से 11:45 ए एम तक
शोभन योग: 11:45 ए एम से पूरी रात
सर्वार्थ सिद्धि योग: 07:06 ए एम से 08:18 ए एम
अमृत सिद्धि योग: 07:06 ए एम से 08:18 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:55 ए एम से 12:37 पी एम
15 दिसंबर, सोमवार: पौष कृष्ण एकादशी, सफलता एकादशी
शोभन योग: प्रात:काल से दोपहर 12:30 पी एम तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:56 ए एम से 12:37 पी एम
कोंडामेश्वरी मंदिर: जहां हर साल लगता है बिच्छुओं का मेला, एक दिन के लिए सारा जहर अपने अंदर खींच लेती हैं देवी!
29 Nov, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दक्षिण भारत में कई रहस्यमयी मंदिर और चमत्कारी स्थल हैं, जहां अलग-अलग मान्यताओं की वजह से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. दक्षिण भारत में एक ऐसा मंदिर है, जहां भक्त जहरीले बिच्छुओं के साथ खेलने के लिए मां के मंदिर में पहुंचते हैं. भक्तों का मानना है कि ऐसा करने से देवी कोंडामयी प्रसन्न होती हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. यह अद्भुत मंदिर कर्नाटक के यादगीर जिले में स्थापित है.
बिच्छुओं की देवी हैं मां कोंडामेश्वरी
मां कोंडामेश्वरी के मंदिर को बिच्छुओं की देवी कहा जाता है. नाग पंचमी के दिन दूर-दूर से लोग देवी कोंडामयी के दर्शन के लिए आते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि नाग पंचमी के दिन मां की विशेष पूजा अर्चना होती है और मंदिर में भक्तों के साथ बहुत सारे बिच्छू भी जाते हैं.
नाग पंचमी पर बिच्छुओं का मेला
भक्तों का मानना है कि पहाड़ पर बने इस मंदिर में साल में एक दिन यानि नाग पंचमी के दिन ही बड़ी संख्या में बिच्छू अपने बिलों से बाहर आते हैं. क्षेत्रीय लोग इस दिन को बिच्छुओं का मेला भी कहते हैं. भक्त मां के दर्शन के बाद बिच्छुओं के साथ खेलते हैं और उन्हें अपने शरीर पर भी चलाते हैं, लेकिन एक भी बिच्छू डंक नहीं मारता है.
मां कोंडामयी खींच लेती हैं बिच्छुओं का जहर!
माना जाता है कि एक दिन के लिए ही मां कोंडामयी बिच्छुओं का सारा जहर अपने अंदर ले लेती हैं, जिससे बिच्छुओं के अंदर जहर नहीं बचता. हालांकि, नाग पंचमी के अलावा किसी अन्य दिन अगर किसी को बिच्छू काट लेता है, तो उसकी मौत होने की आशंका बनी रहती है.
हर साल इस मेले में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में लोग आते हैं और इस अद्भुत मेले के साक्षी बनते हैं. कोंडामेश्वरी मंदिर में बिच्छू की एक अद्भुत प्रतिमा भी मौजूद है. नाग पंचमी के दिन बिच्छू की प्रतिमा की पूजा होती है. भक्तों का मानना है कि अगर किसी पर बिच्छू का जहर चढ़ भी जाता है तो उसे मां कोंडामेश्वरी के मंदिर में आकर भंडारा कराना होता है और मां के चमत्कार से बिच्छू का जहर भी उतर जाता है.
मां कोंडामेश्वरी के भक्त घाव पर हल्दी और अन्य जड़ी-बूटियों से बना लेप लगाते हैं. वहां बिच्छू काटने पर इलाज के लिए कोई भी डॉक्टर के पास नहीं जाता है, बल्कि लेप लगाकर और मां की आराधना कर खुद को ठीक करने की कोशिश की जाती है.
ग्रहों का सबसे जोखिम भरा संयोग, चाल बदलते ही बदलेगा भाग्य, 2026 में रिश्तों और पैसों के टूटने या बचने की शुरुआत हो गई 27 नवंबर से!
29 Nov, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
27 नवंबर 2025 को आसमान में एक ऐसी घट चुकी है, जिसका असर सिर्फ कुछ दिनों तक नहीं, बल्कि पूरे 2026 के प्रेम और धन जीवन पर रहेगा. इस दिन शनि और शुक्र का एक खास त्रिकोण बना है. ज्योतिष में यह घटना बेहद मूल्यवान मानी जाती है, क्योंकि यह दो ग्रहों की ऊर्जा को एक साझा दिशा में लाती है एक तरफ शनि का गंभीर, अनुभव आधारित, सटीक और लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव, और दूसरी तरफ शुक्र का भावनात्मक, रिश्तों को जोड़ने वाला और जीवन में खुशियां लाने वाला स्वरूप. नाड़ी ज्योतिष मानता है कि जब शनि और शुक्र इस तरह से मिलते हैं, तो यह पुराने फैसलों, बीते जन्मों के रिश्तों, अधूरे भावनात्मक मामलों और धन से जुड़े अनसुलझे चक्रों को खोल देता है. यह किसी डराने वाले समय जैसा नहीं, बल्कि सुधार, समापन और नई दिशा देने वाला दौर होता है. 2026 यही कर सकता है आपके प्रेम जीवन में ठहराव की जगह पर भरोसा ला सकता है, रिश्तों को दोबारा जोड़ सकता है, या किसी को यह समझने में मदद कर सकता है कि उन्हें किस तरह का साथी चाहिए.
इसी तरह धन संबंधी फैसलों में भी यह साल स्थिरता और नियंत्रण देने वाला समय बन सकता है. कई लोगों को रुका हुआ पैसा मिल सकता है, पुराने निवेश फिर से चल सकते हैं, या नया आर्थिक रास्ता बन सकता है जो लंबे समय तक सुरक्षा दे. यह वह समय है जब ब्रह्मांड आपसे कहता है “जो सिखा है, उसे अब सही दिशा में लगाओ.”
आइए अब जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से कि 2026 आपकी राशि के लिए प्रेम और धन दोनों मामलों में कैसा रहने वाला है.
राशि अनुसार 2026 का प्रभाव
मेष
प्रेम: कोई पुराना साथी वापस आकर बात पूरी कर सकता है. लंबे रिश्तों में सीमाएँ साफ़ करनी पड़ेंगी.
धन: रुका हुआ पैसा मिल सकता है. लगातार मेहनत का सीधा फायदा दिखेगा.
वृषभ
प्रेम: रिश्ता जिसकी बार-बार परीक्षा हुई है, अब आगे बढ़ने का मौका पाता है. अविवाहित लोग किसी समझदार साथी से मिल सकते हैं.
धन: बीते वर्षों में किए गए प्रयास अब स्थिर परिणाम देंगे. बड़े जोखिमों से बचें
मिथुन
प्रेम: परिवार से सीखे रिश्तों के पैटर्न दोबारा सामने आते दिखेंगे. पुराने बोझ छोड़कर संतुलित रिश्ता बनाने का समय है.
धन: साझा निवेश, पार्टनर की कमाई या संयुक्त काम बड़ी भूमिका निभाएंगे.
कर्क
प्रेम: भावनात्मक सुरक्षा पाने में राहत मिलेगी. आध्यात्मिक रूप से जुड़ी साझेदारियां मजबूत होंगी.
धन: परिवार, जमीन या किसी पुराने निवेश से फायदा संभव.
सिंह
प्रेम: रिश्तों में गहराई बढ़ेगी. सतही संबंध खुद हट जाएंगे. नया प्रेम शांत लेकिन भरोसेमंद होगा.
धन: अनुशासित कमाई स्थायी लाभ देगी. दिखावटी खर्च कम करें.
कन्या
प्रेम: मजबूत कर्म संबंध वाला कोई व्यक्ति जीवन में आ सकता है. यह रिश्ता आसान नहीं होगा, लेकिन बहुत सीख देगा.
धन: किसी की मदद करनी पड़ सकती है या आपको सहायता मिल सकती है. अपने कौशल को आगे रखें.
तुला
प्रेम: जिस रिश्ते को आपने धीरज से संभाला है, उसमें तरक्की दिखेगी. कई लोग लंबे समय की साझेदारी शुरू कर सकते हैं.
धन: आय स्थिर होगी. भावनात्मक खर्च से बचें.
वृश्चिक
प्रेम: पुरानी चोटें उभर सकती हैं, लेकिन इन्हीं से आपका आत्म-सम्मान बढ़ेगा. गहरा रिश्ता बनने की पूरी संभावना.
धन: ईमानदारी से सहयोग करने पर बड़ा फायदा मिल सकता है. पुराने लेन-देन साफ़ होने का समय.
धनु
प्रेम: अतीत से जुड़ा कोई रिश्ता दोबारा उभर सकता है. लंबी दूरी के रिश्ते मजबूत होंगे.
धन: मेहनत धीरे-धीरे लेकिन भरोसेमंद फल देगी. शिक्षा पर खर्च लाभ देगा.
मकर
प्रेम: दिल खोलने का समय है. गंभीर और स्थिर रिश्ता बनने की पूरी संभावना है.
धन: व्यापार, जमीन या निवेश से अच्छा लाभ संभव. लंबे समय की सुरक्षा बनेगी.
कुंभ
प्रेम: रिश्ते शांत लेकिन स्थिर दिखाई देंगे. आप ऐसे साथी की ओर बढ़ेंगे जो आज़ादी और भरोसा दोनों दे सके.
धन: किसी नए विचार या सहयोग से सुरक्षा बढ़ सकती है.
मीन
प्रेम: त्याग और आत्म-सम्मान के बीच संतुलन समझ में आएगा. आध्यात्मिक रिश्ता गहरा हो सकता है.
धन: कोई पुराना आर्थिक चक्र पूरा होगा. आपका अंतर्ज्ञान निवेश में मदद करेगा.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (29 नवंबर 2025)
29 Nov, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- किसी तनावपूर्ण स्थिति से बचकर चलें, अपने आप में निर्णय न करें, समय का ध्यान रखें।
वृष राशि :- कोई शुभ समाचार हर्षप्रद रखे, थकावट, बेचैनी, धन का व्यय होगा, ध्यान दें।
मिथुन राशि :- व्यर्थ क्लेश व अशांति में फंसने से बचिये, विरोधी तत्व परेशान करेंगे।
कर्क राशि :- स्वभाव में बेचैनी, तनाव, क्लेश व अशांति होते हुये आपको लाभ होगा।
सिंह राशि :- असमंजस क्लेशप्रद रखेगा, झूठे आश्वासनों पर विश्वास न करें, कार्य अवश्य करें।
कन्या राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगा, अधिकारियों से सर्मथन मिलेगा, योजना फलप्रद होगी।
तुला राशि :- संघर्ष से सफलता, कार्यगति अनुकूल होगी, समस्यायें सुलझेंगी ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- उपद्रव, विरोध व विवाद कष्टप्रद हो, धन का व्यर्थ व्यय संभव है, ध्यान दें।
धनु राशि :- मानसिक बेचैनी मन उद्विघ्न रखे, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी।
मकर राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक हों, अधिकारी से तनाव बनेगा, समय का ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- कुटुम्ब की चिन्तायें, मन व्यग्र रखें, धन का व्यर्थ व्यय होगा, ध्यान दें।
मीन राशि :- व्यर्थ भ्रमण से धन हानि, चिन्तायें मन को उद्वविघ्न रखें, कार्य अवरोध होगा।
नए साल में मकर संक्रांति कब है? जानें तारीख, स्नान-दान मुहूर्त, महा पुण्य काल, महत्व
28 Nov, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नए साल 2026 में मकर संक्रांति उस दिन होगा, जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. जिस क्षण सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा, वह सूर्य का मकर संक्रांति कहलाएगा. मकर संक्रांति को खिचड़ी, उत्तरायण आदि नामों से भी जानते हैं. मकर संक्रांति के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, कंबल आदि का दान करते हैं. इससे सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. आइए जानते हैं कि साल 2026 में मकर संक्रांति कब है? मकर संक्रांति पर स्नान और दान का मुहूर्त क्या है? मकर संक्रांति का महा पुण्य काल कब से है? मकर संक्रांति का महत्व क्या है?
2026 में मकर संक्रांति की तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर में 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में मकर संक्रांति का क्षण दोपहर 3:13 पीएम पर होगा. इस आधार पर नए साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार को मनाई जाएगी. मकर संक्रांति का स्नान और दान भी 14 जनवरी 2026 को ही होगा.
मकर संक्रांति का महा पुण्य काल
14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का महा पुण्य काल 1 घंटा 45 मिनट का होगा. महा पुण्य काल का प्रारंभ दोपहर में 3 बजकर 13 मिनट पर होगा और यह शाम को 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा.
मकर संक्रांति का पुण्य काल
नए साल में मकर संक्रांति का पुण्य काल 2 घंटे 32 मिनट तक रहेगा. उस दिन पुण्य काल दोपहर में 3 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा और शाम को 5 बजकर 45 मिनट तक मान्य होगा.
मकर संक्रांति का स्नान-दान मुहूर्त
मकर संक्रांति के दिन लोग ब्रह्म मुहूर्त से ही स्नान और दान करने लगते हैं. मकर संक्रांति वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल में 05:27 ए एम से 06:21 ए एम तक है. मकर संक्रांति पर आप महा पुण्य काल में स्नान कर सकते हैं. उस दिन स्नान के लिए महा पुण्य काल उत्तम माना जाता है.
2 शुभ योग में मकर संक्रांति
मकर संक्रांति के दिन 2 शुभ योग बनने वाले हैं. मकर संक्रांति को सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 07:15 ए एम से शुरू होगा, जो अगले दिन तड़के 03:03 ए एम तक रहेगा, वहीं अमृत सिद्धि योग भी 07:15 ए एम से 15 जनवरी को 03:03 ए एम तक है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किया गया स्नान और दान आपके लिए पुण्य फलदायी होगा.
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं. इस वजह से मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहते हैं. उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है.
मकर संक्रांति के अवसर पर लोग खिचड़ी खाते हैं. लगभग सभी लोगों के घरों में दाल और चाल को मिलाकर खिचड़ी बनाई जाती है, जिसे घी और दही के साथ खाते हैं. इस वजह से मकर संक्रांति को खिचड़ी भी कहा जाता है.
मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में आते हैं. इस वजह से लोग मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करते हैं.
पूर्णिया के 5 हनुमान मंदिर... कहीं नौकरी तो कहीं प्रमोशन के लिए पहुंचते भक्त, एक है बेहद प्रचीन
28 Nov, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्णिया में हनुमान जी के कई मंदिर हैं. इनमें पंचमुखी महावीर मंदिर, रजनी चौक स्थित महावीर मंदिर, खिरू चौक के महावीर मंदिर, आरएन साह चौक पर स्थित श्री राम जानकी महावीर मंदिर और थाना चौक स्थित रूद्र मारुति नंदन मंदिर प्रमुख हैं. मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती हैं.
पूर्णिया का पंचमुखी हनुमान मंदिर भी खूब फेमस है. दरअसल पूर्णिया का यह सबसे पुराना पंचमुखी हनुमान मंदिर है. वहीं यह मंदिर पूर्णिया के फोर्ड कंपनी चौक से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है. लाइन बाजार के समीप होने के कारण इस मंदिर में लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती है. मान्यता है कि पंचमुखी हनुमान मंदिर में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना हनुमान जी पूरी करते हैं. इस मंदिर में रोजाना शाम 7:00 बजे आरती का भव्य प्रोग्राम किया जाता है. इस मंदिर में रोजाना नई गाड़ियों की पूजा एवं नव विवाहित जोड़ भी आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.
पूर्णिया का रूद्र मारुति नंदन मंदिर भी खूब फेमस है. यह मंदिर पूर्णिया जिला मुख्यालय से महज कुछ ही दूर और थाना चौक के समीप स्थित है. बता दें इस मंदिर में महावीर हनुमान की लंबी मूर्ति है और 12 फीट से अधिक ऊंची गदा लेकर हनुमान जी खड़े हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस मंदिर में महावीर हनुमान के साथ महादेव का भव्य शिवलिंग है. जिस कारण लोगों की भीड इस मंदिर में भी हमेशा लगी रहती है और यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.
पूर्णिया का यह मन्दिर खूब प्रसिद्ध है. यह मन्दिर पूर्णिया के भट्ठा बाजार से आगे रजनी चौक पर स्थित है. मंदिर के पुजारी शुभंकर झा बताते हैं कि यह मंदिर लगभग 60 साल पुराना है. वह इस मंदिर में सबसे बड़ी खास बात यह है कि इस मंदिर में एक नहीं बल्कि दो हनुमान जी की मूर्ति है और दोनों हनुमान जी की मूर्ति की विशेष पूजा की जाती है. शनिवार और मंगलवार को इस मंदिर में दूर दराज से लोग आकर हनुमान जी का पूजन करते हैं और आरती में सम्मिलित होते हैं. इस मंदिर में आने वाले लोगों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.
पूर्णिया के खीरू चौक पर स्थित महावीर मंदिर भी खूब प्रसिद्ध है. बता दे यह मंदिर पूर्णिया के भट्ठा बाजार के बीचो-बीच होने के कारण इस मंदिर में लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती है. मंदिर के पुजारी पंडित संजय झा बताते हैं कि यह मंदिर 50 साल से अधिक पुराना मंदिर है. वह इस मंदिर के ऊपर सूर्य देव की प्रतिमा और सात घोड़े के साथ लगी है. जिसे देखकर लोग और भी आकर्षित होते हैं और यह मंदिर पूर्णिया के जिला स्कूल रोड से महज कुछ दूर ही चौक पर स्थित है. शनिवार और मंगलवार को इस मंदिर में खूब भीड़ लगती है. इस मंदिर में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.
पूर्णिया के फेमस हनुमान मंदिर में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर पूर्णिया के आरएन शाह चौक पर स्थित है. यह मंदिर श्री राम जानकी महावीर मंदिर है. बता दे इस मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा के साथ अन्य का देवी देवताओं की भी प्रतिमा लगी है. यह मंदिर जिला मुख्यालय से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है. जिस कारण इस मंदिर में लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती है. इस मंदिर में भी आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. मंदिर के पुजारी झा बताते हैं कि यह मंदिर 1986 में बनाई गई थी. यह मंदिर पूर्णिया का काफी प्राचीन मंदिरों में एक है. इस मंदिर में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.
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