धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
27 Apr, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :-किसी शुभ समाचार मिलने से प्रसन्नता, हर्ष होगा, कार्यगति एवं व्यावसाय उत्तम होगा।
वृष राशि :- मनोवृत्ति संतोषशील रहेगी, कार्यगति में अनुकूलता, चिंता कम होगी, ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- किसी प्रलोभन से हानि, मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, कार्यगति अनुकूल रहेगी।
कर्क राशि :- अनायास यात्रा में उद्विघ्नता बनेगी, स्त्री वर्ग से विवाद व परेशानी बनेगी।
सिंह राशि :- विरोधियों के षणयंत्र से मानसिक परेशानी बनेनी, सतर्कता से कार्य अवश्य निपटायें।
कन्या राशि :- शरीर कष्ट, लाभ, राजभय, उद्योग-व्यापार मेंं उलझन, आंशिक लाभ होगा।
तुला राशि :- धार्मिक लाभ, कष्ट, अनाप-सनाप व्यय होगा, परेशानी अवश्य ही बनेगी।
वृश्चिक राशि :- राज बाधा, उलझन, यात्रा से कष्ट, गृहकार्य, राजकार्य में रुकावट बनेगी।
धनु राशि :- शत्रुभय, मुकदमे में जीत, रोगभय किन्तु व्यापार में सुधार अवश्य होगा।
मकर राशि :- व्यापार में लाभ, शत्रुभय, धन सुख, धार्मिक खर्च बढ़ेगा, कुछ अच्छे कार्य होंगे।
कुंभ राशि :- कलह, व्यर्थ खर्च, कार्य सफलता, विरोधी असफल रहें, व्यापार में सुधार अवश्य होगा।
मीन राशि :- स्वजन सुख, पुत्र चिन्ता, सुख की हानि, व्यापार की स्थिति अच्छी नहीं रहेगी।
अक्सर सपने में दिखाई देती है कुल देवी? किसी बड़ी घटना का संकेत! ऐसा सपना दिखे तो क्या करें आप?
26 Apr, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर व्यक्ति के जीवन में सपनों का खास महत्व होता है. कई बार ऐसे सपने आते हैं जो सिर्फ कल्पना नहीं होते, बल्कि वे कोई खास संदेश लेकर आते हैं. अगर आपने हाल ही में या अक्सर सपने में अपनी कुलदेवी को देखा है, तो यह एक सामान्य बात नहीं है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, कुलदेवी का बार बार सपने में दिखना आपके जीवन से जुड़े कुछ खास इशारे देता है.
क्या मतलब है कुलदेवी का सपने में आने से
कुलदेवी को परिवार की रक्षक माना जाता है. जब वे सपने में बार बार नजर आती हैं, तो इसका मतलब होता है कि आपके जीवन में कुछ अच्छा होने वाला है या कोई परेशानी खत्म होने की ओर बढ़ रही है. यह सपना संकेत देता है कि कुलदेवी आपके साथ हैं और आपके ऊपर उनका आशीर्वाद है.
ये संकेत अच्छे होते है
अगर कुलदेवी आपके सपने में शांत भाव में दिखती हैं या मुस्कुरा रही होती हैं, तो यह बहुत ही शुभ संकेत होता है. यह आपके घर में सुख शांति और तरक्की की ओर इशारा करता है. अगर कोई काम लंबे समय से अटका हुआ है, तो वह अब पूरे होने लगेंगे.
क्या कुछ गलत होने की ओर इशारा कर रही है
कई बार कुलदेवी का अचानक बार बार सपने में आना किसी आने वाली परेशानी का संकेत भी हो सकता है. लेकिन डरने की जरूरत नहीं है. यह सपना आपको पहले से आगाह करता है कि आप सावधान हो जाएं और कुलदेवी से मन ही मन प्रार्थना करें. इससे आपको सही रास्ता मिल सकता है और मुश्किलें आसान हो सकती हैं.
इन छोटे छोटे आसान उपाय से कुल देवी को खुश करें
अगर आप बार बार ऐसे सपने देख रहे हैं, तो यह समय है जब आप अपनी कुलदेवी को प्रसन्न करें. इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं
1.रोज रात घी का दीपक जलाएं
रात को सोने से पहले कुलदेवी के सामने घी का दीपक जलाएं. आंखें बंद करके उनके सामने ध्यान लगाएं और घर की सुरक्षा की प्रार्थना करें.
2.कुल देवी को पीले चावल चढें
हल्दी में लिपटे हुए पीले चावल को पानी में भिगोकर कुलदेवी को चढ़ाना शुभ माना जाता है. इसके साथ चंदन और सिंदूर का तिलक भी करें.
3.पान भी भोग चढें
कुलदेवी को पान में इलायची, लौंग, सुपारी, गुलकंद और थोड़ी दक्षिणा रखकर अर्पित करें. इससे घर की दिक्कतें दूर होने लगती हैं.
4.सुपारी को भी पूजा में करें शामिल करें
अगर कुलदेवी की मूर्ति या तस्वीर उपलब्ध नहीं है, तो एक साफ सुपारी लेकर उस पर कलावा लपेटें और उसे कुलदेवी का प्रतीक मानकर पूजा करें.
कब है वट सावित्री व्रत? इस दिन कुंवारी कन्याएं जरूर करें ये काम, अगले लग्न तक मिल जाएंगे पिया!
26 Apr, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कई लड़कियों की कुंडली में कुछ दोष होने के कारण शादी में कई समस्याएं आती हैं. कभी रिश्ते बनते-बनते टूट जाते हैं, तो कभी रिश्ते बनने में बहुत देरी होती है. इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए एक शुभ तिथि आ रही है, जो है वट सावित्री व्रत. मान्यता है कि नई नवेली दुल्हन या सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर वट सावित्री के दिन वटवृक्ष की पूजा करती हैं, तो उन्हें अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है. लेकिन यह व्रत कुंवारी लड़कियां भी रख सकती हैं, जिससे शादी में आ रही समस्याएं समाप्त हो जाएंगी. वट सावित्री व्रत कब है और इस दिन कुंवारी लड़कियां कैसे पूजा करें,
क्या कहते हैं
कि इस साल 2025 में 26 मई को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा. वट सावित्री के दिन निर्जला व्रत रखकर सुहागिन महिलाएं वटवृक्ष की पूजा करती हैं. इसके साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
कुंवारी लड़कियां ऐसे करें वट सावित्री के दिन पूजा
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि वट सावित्री के दिन कुंवारी लड़कियां भी अपनी मनोकामना के लिए संध्या काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें. साथ ही माता पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करें. इसके साथ ही गौरी मंत्र का जाप करें. ऐसा करने से निश्चित रूप से अगले लग्न में विवाह तय हो जाएगा.
कौवे का घर पर आना शुभ संकेत होता है या अशुभ?
26 Apr, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कौवे से जुड़ा एक रहस्य हर किसी के मन में होता है. हम सभी ने कभी न कभी अपने घर के आसपास या छत पर कौवे को देखा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या कौवे का आना शुभ संकेत होता है या अशुभ? अधिकतर लोग कौवे को लेकर नकारात्मक सोच रखते हैं. कई लोग तो यह भी मानते हैं कि अगर कौवा किसी को छू ले, तो तुरंत स्नान करना चाहिए क्योंकि यह अशुद्धि का संकेत होता है. लेकिन क्या यह सच है? क्या वास्तव में कौवा अशुभ होता है?
कौवे के संकेतों का अर्थ
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कौवा भविष्य को देखने और संकेत देने में सक्षम होता है. अगर वह हमारे घर की छत, मुंडेर या पेड़ पर बैठता है, तो इसका एक विशेष अर्थ होता है.
कौवा अगर घर की छत पर पानी पीता हुआ दिख जाए तो यह संकेत है कि आपको जल्द ही धन लाभ होगा.
कौवा अगर आपको छत या घर के आंगन में दाना खाता हुआ दिखे तो यह समृद्धि और मान-सम्मान का प्रतीक है. इसका मतलब है आपको जल्द तरक्की मिलने वाली है.
कौवा आंगन में आकर ‘कांव-कांव’ करे तो यह बताता है कि कोई शुभ व्यक्ति या मेहमान आपके घर आने वाला है.
कौवा अगर सुबह-सुबह घर के सामने बोले तो यह धन, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य का संकेत है.
अशुभ संकेत
बहुत सारे कौवे शोर मचाते हुए छत या आंगन में आएं तो यह आर्थिक या शारीरिक संकट का संकेत हो सकता है.
कौवा सिर पर बैठ जाए या सिर को छू ले तो यह गंभीर शारीरिक संकट की चेतावनी हो सकती है.
यात्रा और कार्य के संदर्भ में कौवे के संकेत
आप कहीं काम से जा रहे हैं और पीछे से कौवे की आवाज आए तो यह संकेत है कि आपका कार्य सफल होगा और पुराने संकट समाप्त होंगे.
अगर दाईं ओर से कौवा आए और बाईं ओर निकल जाए तो यह भी कार्य की सफलता का शुभ संकेत है.
कौवा और पितरों का संबंध
कौवे को पितरों का प्रतीक भी माना जाता है. इसलिए यदि घर में कौवा आए, तो उसे रोटी, चावल, दही आदि का भोग लगाना चाहिए. इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
रात में करें ये 3 चमत्कारी उपाय, धनवृद्धि के साथ होगी मां लक्ष्मी की कृपा!
26 Apr, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन अक्षय तृतीया मनाया जाता है. शास्त्रों के अनुसार यह दिन बेहद शुभ व अबूझ मुहूर्त वाला माना जाता है, इस दिन किये गए हर शुभ कार्य सफल होते हैं व सतकर्मों का फल कई गुना होकर मिलता है. ऐसे में हर व्यक्ति अपने सामर्थ्य अनुसार अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य करते हैं और अक्षय पुण्य प्राप्त करते हैं.
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन मुख्यरूप से देवी लक्ष्मी व कुबेर देवता की पूजा का विधान है. इस शुभ दिन कई लोग सोना-चांदी व कीमती वस्तुएं खरीदते हैं. इसके अलावा कई लोग अक्षय तृतीया के दिन पैसों की तंगी से छुटकारा पाने के लिए उपाय भी करते हैं तो कई अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. ऐसे में आपको बता दें कि अगर आप भी लंबे समय से पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं और जल्द इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो अक्षय तृतीया की रात तीन चमत्कारी उपाय आपको धन संबंधित परेशानियों से छुटकारा दिला सकते हैं. अक्षय तृतीया के दिन किन तीन उपायों को करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
इस साल कब मनाई जाएगी अक्षय तृतीया?
हिन्दू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि इस बार 29 अप्रैल 2025 को शाम 5 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 30 अप्रैल 2025 को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर होगा. चूंकि उदयातिथि मान्य होती है इसलिए इस साल 30 अप्रैल 2025, बुधवार के दिन अक्षय तृतीया मनाई जाएगी.
अक्षय तृतीया के दिन करें ये अचूक उपाय
मां लक्ष्मी के आगे रखें ये लाल रंग की पोटली
अक्षय तृतीया के दिन विशेष फल प्राप्त करने के लिए शाम को मां लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है. पूजा के पश्चात लाल कपड़े में हल्दी की पांच गांठें बांधकर उसे मां लक्ष्मी के समक्ष रखें. फिर रात को सोने से पहले उस पोटली को घर की तिजोरी में रख दें. इस उपाय से न केवल मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है बल्कि आपको इससे आर्थिक समस्याओं से छुटकारा भी मिलता है.
स्फटिक की माला व गुलाब के फूल का उपाय
अगर घर में लंबे समय से पैसों की तंगी बनी हुई है, तो अक्षय तृतीया की रात को मां लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा साथ में करें. गुलाबी फूल और स्फटिक की माला मां लक्ष्मी को चढ़ाएं और घी का दिया जलाएं. फिर मां का कोई भी मंत्र 108 बार मन में जपें, ऐसा करने से देवी लक्ष्मी और कुबेर जी की कृपा प्राप्त होगी और आर्थिक स्थिति सुधरने लगेगी.
घर ले आएं सफेद रंग की ये चीज
अक्षय तृतीया के दिन शंख खरीदकर घर लेकर आएं और फिर सुबह और शाम को मां लक्ष्मी, कुबेर जी और शंख की पूजा करें. रात को सोने से पहले उसे लाल कपड़े में लपेटकर घर की तिजोरी में रख दें. इससे घर में बरकत आएगी, पॉजिटिव माहौल बनेगा और जो परेशानियां आपके घर में चल रही हैं, जल्द ही उनसे आपको राहत मिलेगी.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
26 Apr, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिथुन राशि :- वाहन भय, मातृ-पितृ कष्ट, हानि, व्यर्थ, अनाप-शनाप खर्च से परेशानी अवश्य ही होगी।
कर्क राशि :- सफलता, उन्नति, शुभ कार्य, विवाद, उद्योग, व्यापार में उलटफेर की स्थति बनेगी।
सिंह राशि :- शरीर कष्ट, उत्तम व्यय, सफलता, व्यवस्था में बाधा, व्यवधान, साधारण लाभ होगा।
कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री-कष्ट, विद्या लाभ, कुछ अच्छे कार्य होंगे, संतान प्राप्ति के योग।
तुला राशि :- यात्रा में हानि, राजभय, लाभ, शरीर कष्ट, व्यापार में सुधार, प्रगति की संभावना है।
वृश्चिक राशि :- यात्रा लाभ, संपत्ति लाभ, कारोबार में उबाल तथा कार्यवृत्ति उत्तम बनेगी।
धनु राशि :- अल्प लाभ, शरीर कष्ट, चोटादि का भय, शिक्षा से विशेष लाभ होगा।
मकर राशि :- शत्रु हानि पहुंचायेंगे, अपयश, शरीरिक सुख, समय अच्छा उद्योग-व्यापार के लिये प्रयास करें।
कुंभ राशि :- व्यय, संतान-सुख, कार्य सफलता, मित्र प्रगतिदायक रहें, संतोष कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय लाभ, हानि किन्तु जीवन संतोषप्रद बना ही रहेगा।
इस मंदिर में होती है बारिश की सटीक भविष्यवाणी, मानसून से पहले छत से टपकने लगती हैं बूंदें!
25 Apr, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैसे तो आपने भारत में कई अलग और अनोखे मंदिरों के बारे में सुना और पढ़ा होगा. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बारिश की भविष्यवाणी को लेकर प्रसिद्ध है. इसी मंदिर से आसपास रहने वाले लोग बारिश के आने का अंदाजा लगाते हैं. ये मंदिर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 120 किलोमीटर दूर, कानपुर जिले की घाटमपुर तहसील के बेहटा गांव में स्थित है. ये मंदिर भगवान जगन्नाथ का मंदिर है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में विस्तार से.
अनूठी बनावट
यह मंदिर देखने में कुछ अलग ही लगता है. इसका गुंबद बंगाल और ओडिशा के मंदिरों की तरह गोलाकार है. मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है और कई सालों से वैज्ञानिक और जानकार इस मंदिर के रहस्य को लेकर हैरान हैं. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में किया गया था.
किसानों की आस्था
मंदिर से 50-60 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले किसान इस भविष्यवाणी पर भरोसा करते हैं. वे मंदिर में जाकर बूंदों को देखते हैं और फिर अपने खेतों की तैयारी करते हैं. लोग मंदिर में विशेष पूजा-पाठ शुरू कर देते हैं और अच्छी फसल की उम्मीद करते हैं.
कैसे होती है मानसून की भविष्यवाणी?
मंदिर के के गर्भगृह की छत पर एक पत्थर की पट्टी है. ऐसा माना जाता है कि बारिश आने से कुछ दिन पहले वहां से पानी की बूंदें टपकने लगती हैं. अगर सिर्फ नमी होती है तो हल्की बारिश होती है. अगर बूंदें टपकने लगें, तो इसका मतलब होता है कि इस बार अच्छी बारिश होगी.
आज तक बना हुआ है रहस्य
अब तक कई पुरातत्वविद और वैज्ञानिक इस मंदिर के रहस्य को सुलझाने आए हैं, लेकिन अभी तक ये नहीं पता चल पाया कि पानी की बूंदें छत पर क्यों और कैसे बनती हैं. ये मंदिर बारिश की भविष्यवाणी को लेकर स्थानीय लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है.
पुरी जैसी रथ यात्रा
हर साल यहां पर पुरी की तरह रथ यात्रा होती है और एक बड़ा त्योहार मनाया जाता है. इस दौरान गांव में हजारों श्रद्धालु आते हैं.
शनिदेव की टेढ़ी नजर आपके ऊपर होने पर दिखते हैं ये संकेत, फौरन हो जाएं सावधान! करें ये उपाय
25 Apr, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनि देव, जो न्याय के देवता माने जाते हैं, हर व्यकित को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. नवग्रहों में शनि को सबसे कठोर और उग्र ग्रह माना गया है. हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है. शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छे लोग घबरा जाते हैं. लेकिन जिस प्रकार शनि पापियों को दंडित करते हैं, उसी प्रकार ईमानदार, परिश्रमी और धर्मनिष्ठ लोगों को धन, पद और सम्मान भी प्रदान करते हैं. ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के जीवन में कुछ विशेष घटनाएं घट रही हों तो यह संकेत हो सकता है कि शनिदेव उनसे नाराज हैं. आइए जानते हैं वे कौन से संकेत हैं जो बताते हैं कि शनि देव रुष्ट हैं.
मार्ग से भटकना
जब व्यक्ति जीवन के सही मार्ग से भटकने लगता है, निर्णय लेने में भ्रमित हो जाता है और उसे अच्छे-बुरे की पहचान नहीं रहती तो यह शनि की नाराजगी का संकेत हो सकता है.
गलत संगति में पड़ जाए
अगर कोई व्यक्ति गलत संगति में पड़ जाए, नशे आदि की लत लग जाए या पवित्र कार्यों से विमुख हो जाए तो यह पाप कर्मों का फल है और शनि की नाराजगी का सूचक है.
लगातार समस्याओं का आना
अगर एक समस्या खत्म नहीं होती और दूसरी शुरू हो जाती है तो यह संकेत हो सकता है कि शनिदेव आपसे नाराज हैं.
पीपल का बार-बार उगना
अगर आपके घर के पास या घर के अंदर पीपल का पेड़ बार-बार उग आता है, तो यह संकेत हो सकता है कि शनिदेव आपसे नाराज़ हैं.
कार्यक्षेत्र में परेशानी
अगर कार्यस्थल पर लगातार मुश्किलें आ रही हैं, तो यह भी शनिदेव की नाराजगी और परीक्षा का संकेत हो सकता है. ऐसे समय में धैर्य रखें और अच्छे कर्म करें.
जाले बार-बार लगना
अगर बार-बार सफाई करने के बावजूद घर में जाले लग जाते हैं, तो यह भी शनिदेव की नाराजगी का संकेत हो सकता है.
दीवारों में बार-बार दरारें आना
अगर घर की दीवारें बार-बार टूटती या फटती हैं, तो यह शनिदेव के अप्रसन्न होने का संकेत हो सकता है.
उपाय
शनिवार के दिन शनि मंदिर जाएं, शनि देव पर तिल का तेल चढ़ाएं और भूखे व गरीबों को भोजन या दान दें. अगर आपके यहां मकान बनने का कार्य चल रहा है तो मजबूरों को उनकी मजबूरी समय पर दें. शनिवार के दिन पैदल खूब चलें. इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और उनके दोष से मुक्ति मिलती है.
जब दिल-दिमाग पर हावी होने लगे क्रोध, तो अपनाएं गीता के ये 5 उपदेश, दिमाग को करेंगे स्थिर और शांत
25 Apr, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जीवन की यात्रा में हर मनुष्य कभी न कभी ऐसे पलों से गुजरता है जब क्रोध और असमंजस की स्थिति उसके अंदर एक बड़ा तूफान सा पैदा कर देते हैं. लेकिन इन परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति शांत और संतुलिन बनाकर रखता है, वहीं सुखी व समृद्ध रहता है. श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया है कि कर्म करो और फल की चिंता मत करो. ऐसे में भगवद्गीता उन लोगों के लिए भी बड़ी प्रेरणा बनती है जो अपने क्रोध के कारण परेशान रहते और अकसर उनका क्रोध रिश्तों को बिगाड़ देता है.
लेकिन गीता में भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा कई ऐसे सूत्र दिये गये हैं जो कि व्यक्ति को क्रोध के समय ध्यान में रखने पर उसके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है.
मन को करें नियंत्रित
मनुष्य का मन उसका सबसे बड़ा मित्र बन सकता है बस उसे साथ लेकर चलने की देरी है. लेकिन यही मन अनियंत्रित हो जाए तो यह उसका सबसे बड़ा शत्रु भी बन सकता है. यही कारण है कि आत्मसंयम और ध्यान का अभ्यास आवश्यक है. ध्यान से मन की शुद्धि होती है और विचारों में स्पष्टता आती है. साथ ही हम सही दिशा में निर्णय ले पाते हैं. शांत मन परिस्थितियों को सही तरीके से देख पाता है.
क्रोध लेकर आता है विनाश
श्रीकृष्ण के अनुसार “क्रोध से है और बुद्धि के नष्ट हो जाने पर व्यक्ति का पतन हो जाता है”. यह भीतर से धीरे-धीरे मनुष्य को कमजोर करता है. इतना ही नहीं क्रोध पर नियंत्रण केवल एक गुण नहीं बल्कि स्वयं की रक्षा का माध्यम है. जब हम संयम और विवेक से प्रतिक्रिया देना सीखते हैं तभी हमारा मन सच्ची शक्ति से भरता है.
सागर जैसी स्थिरता
गीता में एक सुंदर दृष्टांत दिया गया है जैसे नदियां निरंतर समुद्र में समा जाती हैं, फिर भी समुद्र अपनी मर्यादा नहीं छोड़ता वैसे ही जो व्यक्ति सुख-दुख, लाभ-हानि जैसे अनुभवों के बीच भी अडिग और शांत रहता है वही सच्ची शांति को प्राप्त करता है. इस उपदेश से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन की कठिनाइयों में भी अपनी स्थिरता बनाए रखना ही आत्मसंयम का सार है.
जब नीम करौली बाबा को कोच से उतारने पर हुआ चमत्कार, एक इंच तक नहीं हिली थी ट्रेन!
25 Apr, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नीम करौली बाबा, एक प्रसिद्ध हिंदू संत और हनुमान भक्त थे. उनके भक्त उन्हें महाराज जी कहकर बुलाते थे. उनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद ज़िले में हुआ था. नीम करौली बाबा ने अपने जीवन में कई चमत्कार किए, लेकिन एक चमत्कार जो सबसे प्रसिद्ध हुआ, वह था ट्रेन को रोक देना. यह घटना सिर्फ बाबा की चमत्कारी शक्ति को नहीं दर्शाती, बल्कि उनकी करुणा और सबके भले की भावना को भी दिखाती है. आइए जानते हैं ट्रेन रोक देने वाली इस चमत्कारी घटना के बारे में.
ट्रेन वाली चमत्कारी घटना
यह बात बाबा के युवावस्था की है, जब वे लगभग 28-30 वर्ष के रहे होंगे. एक दिन वे ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे. एक टिकट चेकर को यह बात पसंद नहीं आई कि एक साधु फर्स्ट क्लास में बैठे हैं. उसने गुस्से में आकर ट्रेन की इमरजेंसी ब्रेक खींच दी और बाबा को ट्रेन से उतरवा दिया. ट्रेन जहां रुकी थी, वह जगह बाबा का ही गांव था नीम करौली. बाबा चुपचाप पास के एक पेड़ के नीचे बैठ गए. इधर ट्रेन का ड्राइवर और गार्ड ट्रेन को दोबारा चलाने की कोशिश करने लगे, लेकिन ट्रेन एक इंच तक नहीं हिली.
ट्रेन चालू क्यों नहीं हुई?
रेलवे के इंजीनियर और अधिकारी ट्रेन में तकनीकी खराबी ढूंढते रहे, लेकिन कुछ भी गलत नहीं मिला. ट्रेन चलाने की हर कोशिश नाकाम रही. वहीं के एक स्थानीय अधिकारी ने रेलवे वालों से कहा कि अगर महाराज जी को दोबारा ट्रेन में बैठा दिया जाए, तो ट्रेन चल सकती है. कई घंटों की नाकाम कोशिशों के बाद वे बाबा के पास पहुंचे.
बाबा की दो शर्तें और समाधान
रेलवे अधिकारियों ने माफी मांगी और बाबा से दोबारा ट्रेन में बैठने की प्रार्थना की. बाबा मुस्कराए और कहा, “मैं ट्रेन में चढ़ूंगा, लेकिन मेरी दो शर्तें हैं”. पहला नीम करौली गांव में एक रेलवे स्टेशन बनाया जाए, ताकि गांव वालों को दूर नहीं जाना पड़े. आगे से किसी भी साधु-संत के साथ ऐसा अपमानजनक व्यवहार न हो. अधिकारियों ने शर्तें मान लीं, इसके बाद बाबा के चढ़ते ही ट्रेन चल पड़ी.
बनाया गया रेलवे स्टेशन
बाबा की शर्त के अनुसार, नीब करौली गांव में स्टेशन बना दिया गया और साधुओं के प्रति रेलवे अधिकारियों का व्यवहार बदल गया. यह घटना सिर्फ एक चमत्कार नहीं थी, बल्कि एक ऐसा पल था जिसने सैकड़ों लोगों की सोच को बदल दिया.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
25 Apr, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- राजभय, कष्ट, व्यापार बाधा, शुभ समाचार से प्रसन्नता, मित्र सहयोग करेंगे।
वृष राशि :- प्राय: रोग, शुभ समाचार की प्राप्ति, स्वजन से लाभ, दाम्पत्य जीवन में असमंजस।
मिथुन राशि :- वाहनभय, मातृ-पितृ कष्ट, हानि, व्यर्थ अनाप-शनाप खर्च से परेशानी बढ़ेगी।
कर्क राशि :- सफलता, उन्नति, शुभ कार्य, विवाद, उद्योग विवाद, समय का ध्यान रखें।
सिंह राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री-कष्ट, विद्या लाभ, कुछ अच्छे कार्य होंगे, संतान सुख।
कन्या राशि :- शरीर कष्ट, उत्तम व्यय, सफलता, व्यवसाय में बाधा, लाभ हो सकता है।
तुला राशि :- यात्रा से हानि, राजभय, लाभ, शरीर कष्ट, व्यापार में सुधार, प्रगति की संभावना है।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति से लाभ, यात्रा से संपत्ति का लाभ, कारोबार में उत्साह, कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- अल्प लाभ, शरीर कष्ट, चोटादि का भय, शिक्षा का लाभ तथा उन्नति होगी।
मकर राशि :- शत्रु हानि, अपयश, शारीरिक सुख, उद्योग-व्यापार के लिये प्रयत्न करें।
कुंभ राशि :- शुभ संतान, सुख कार्य में सफलता, मित्रों से सुख अवश्य होगा।
मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय लाभ, जीवन संतोषप्रद हो, क्रियाकलाप होंगे।
25 अप्रैल को पड़ेगा शुक्र प्रदोष व्रत
24 Apr, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हर महीने में 2 बार प्रदोष व्रत किया जाता है। इस व्रत में शाम के समय महादेव की पूजा का विधान है। इस माह शुक्र प्रदोष का संयोग बन रहा है। ये व्रत प्रत्येक महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। अप्रैल 2025 में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अप्रैल, शुक्रवार को है। शुक्रवार को प्रदोष व्रत होने से ये शुक्र प्रदोष कहलाएगा। जानें शुक्र प्रदोष में कैसे करें शिवजी की पूजा, मंत्र, मुहूर्त आदि की डिटेल…
25 अप्रैल, शुक्रवार को इंद्र और ध्वजा नाम के शुभ योग रहेंगे, जिसके चलते इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन ग्रहों की स्थिति भी शुभ फल देने वाली रहेगी। प्रदोष व्रत में शिवजी की पूजा शाम को की जाती है। इस व्रत में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 से 9 बजे के बीच रहेगा।
इस विधि से करें शुक्र प्रदोष व्रत
30 अप्रैल, शुक्रवार को जल्दी उठकर सबसे पहले शुद्ध जल से स्नान करें और हाथ में जल-चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन कुछ भी खाएं-पिए नहीं और व्रत के नियमों का पालन करें जैसे किसी के बारे में बुरा न सोचें, चुगली न करें आदि।
शाम को ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयार कर लें। इसके बाद पूजा शुरू करें। इसके पहले शिवलिंग का शुद्ध जल से अभिषेक करें, इसके बाद गाय के दूध से अभिषेक करें और एक बार फिर से शुद्ध जल चढ़ाएं। शिवलिंग के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
बिल्व पत्र, धतूरा, रोली, चावल आदि चीजें एक-एक करके शिवलिंग पर चढ़ाते रहें और मन ही मन ही में ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप भी करते रहें। महादेव को अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं और आरती करें। इस तरह प्रदोष व्रत की पूजा और व्रत करने से भक्तों की हर इच्छा पूरी हो सकती है।
अंगूठा बता देता है आपके अंदर का राज
24 Apr, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सभी को भविष्य में क्या छिपा है यह राज जानने की जिज्ञासा होती है। जन्मकुंडली के साथ ही हाथ की रेखाएं देखकर भी भविष्य के राज जाने जा सकते हैं।
हस्तरेखा विज्ञान में अंगूठे को चरित्र का आइना कहा जाता है। आप इसे देखकर व्यक्ति के बारे में कई गुप्त बातें जान सकते हैं। व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, बचत, काम वासना और रोगों का पता भी अंगूठे से लग जाता है।
अंगूठा लंबा
जिनका अंगूठा लंबा होता है वह बुद्धिमान और उदार होते हैं। ऐसे व्यक्ति शौकीन भी खूब होते हैं। अगर अंगूठा तर्जनी उंगली के दूसरे पोर तक पहुंच रहा है तो व्यक्ति नेक होता है और कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता।
अंगूठा छोटा
अंगूठा छोटा होना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे लोगों के उधार और कर्ज देने से बचना चाहिए क्योंकि पैसा डूबने का डर रहता है। इन्हें जीवन में कई बार हानि उठानी पड़ती और पारिवारिक जीवन में भी उथल-पुथल मचा रहता है।
अंगूठा अधिक चौड़ा
अगर अंगूठा अधिक चौड़ा हो तो व्यक्ति खर्चीले स्वभाव का होता है। ऐसे लोग अक्सर कोई न कोई बुरी लत अपना लेते हैं।
कम खुलने वाला अंगूठा
कम खुलने वाला अंगूठा हस्तरेखा विज्ञान में अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे लोगों के हर काम में बाधा आती रहती है और सफलता देर से मिलती है। ऐसे लोग चाहकर भी कमाई के अनुसार बचत नहीं कर पाते हैं।
ऊपर मोटा और गोल हो तो
अगर अंगूठा नीचे पतला और ऊपर मोटा और गोल हो तो ऐसा व्यक्ति शंकालु होते और इन्हे भी अपने काम में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन हाथ भारी हो तो उन्नति करते हैं।
अंगूठा हो लंबा पतला तो
अंगूठा पतला और लंबा हो तो व्यक्ति शांत स्वभाव का होता है। ऐसे व्यक्ति अपने काम वासना पर नियंत्रण रखने में कुशल होते हैं। इन्हें व्यवहारकुशल भी माना जाता है। ऐसे लोग भावुक भी खूब होते हैं।
ऐसे लोग धनी होते हैं
जिनका अंगूठा ज्यादा खुलता है ऐसे लोग धनी होते हैं। अपने व्यक्तित्व के कारण इन्हें समाज में खूब सम्मान मिलता है।
जीवन की समस्याआं का समाधान बताते हैं यंत्र
24 Apr, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म के अनेक ग्रंथों में कई तरह के चक्रों और यंत्रों के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है। जिनमें राम शलाका प्रश्नावली, हनुमान प्रश्नावली चक्र, नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र, श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र आदि प्रमुख हैं। कहते हैं इन चक्रों और यंत्रों की सहायता से लोग अपने मन में उठ रहे सवालों, जीवन में आने वाली कठिनाइयों आदि का समाधान पा सकते हैं। इन चक्रों और यंत्रों की सहायता लेकर केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि ज्योतिष और पुरोहित लोग भी सटीक भविष्यवाणियां तक कर देते हैं।
श्री राम शलाका प्रश्नावली
श्री राम शलाका प्रश्नावली का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में प्राप्त होता है। यह राम भक्ति पर आधारित है। इस प्रश्नावली का प्रयोग से लोग जीवन के अनेक प्रश्नों का जवाब पाते हैं। इस प्रश्नावली का प्रयोग के बारे कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए किसी सवाल को मन में अच्छी तरह सोच लिया जाता है।फिर शलाका चार्ट पर दिए गए किसी भी अक्षर पर आंख बंद कर उंगली रख दी जाती है। जिस अक्षर पर उंगली रखी जाती है, उसके अक्षर से प्रत्येक 9वें नम्बर के अक्षर को जोड़ कर एक चौपाई बनती है, जो प्रश्नकर्ता के प्रश्न का उत्तर होती है।
हनुमान प्रश्नावली चक्र
यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि हनुमानजी एक उच्च कोटि के ज्योतिषी भी थे। इसका कारण शायद यह हो सकता है कि वे शिव के ग्यारहवें अंशावतार थे, जिनसे ज्योतिष विद्या की उत्पत्ति हुई मानी जाती है। कहते हैं, हनुमानजी ने ज्योतिष प्रश्नावली के 40 चक्र बनाए हैं। यहां भी प्रश्नकर्ता आंख मूंद कर चक्र के नाम पर उंगली रखता है। अगर उंगली किसी लाइन पर रखी गई होती है, तो दोबारा उंगली रखी जाती है। फिर नाम के अनुसार शुभ-अशुभ फल का निराकरण किया जाता है। कहते हैं। रामायण काल के परम दुर्लभ यंत्रों में हनुमान चक्र श्रेष्ठ यंत्रों का सिरमौर है।
नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र
अनेक लोग, विशेष देवी दुर्गा के परम भक्त, यह मानते हैं कि नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र एक चमत्कारिक चक्र है, जिसे के माध्यम से कोई भी अपने जीवन की समस्त परेशानियों और मन के सवालों का संतोषजनक हल आसानी से पा सकते हैं। इस चक्र के उपयोग की विधि के लिए पहले पांच बार ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करना पड़ता फिर एक बार या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: मंत्र का जप कर, आंखें बंद करके सवाल पूछा जाता है और देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक दिया जाता है, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र
हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश प्रथमपूज्य हैं। वे सभी मांगलिक कार्यों में सबसे पहले पूजे जाते हैं। उनकी पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र के माध्यम से भी लोग अपने जीवन की सभी परेशानियों और सवालों के हल जानने की कोशिश करते हैं। जिसे भी अपने सवालों का जवाब या परेशानियों का हल जानना होता है, वे पहले पांच बार ऊँ नम: शिवाय: और फिर 11 बार ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करते हैं और फिर आंखें बंद करके अपना सवाल मन में रख भगवान गणेश का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
शिव प्रश्नावली यंत्र
इस यंत्र में भगवान शिव के एक चित्र पर 1 से 7 तक अंक दिए गए होते हैं। श्रद्धालु अपनी आंख बंद करके पूरी आस्था और भक्ति के साथ शिवजी का ध्यान करते हैं और और मन ही मन ऊं नम: शिवाय: मंत्र का जाप कर उंगली को शिव यंत्र पर घुमाते हैं और फिर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है1
इन प्रश्नावलियों और यंत्रों के अलावा अनेक लोग साईं प्रश्नावली का उपयोग भी अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब पाने के लिए करते हैं।
गुरुवार के दिन ये काम नहीं करना चाहिए
24 Apr, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आपने अक्सर बड़े-बुजुर्गों से सुना होगा कि गुरुवार के दिन ये काम नहीं करने चाहिए क्योंकि इनका नकारात्मक प्रभाव जीवन पर होता है और इसकी वजह से आर्थिाक तंगी हो सकती है।
ज्योतििषशास्त्रद में भी कुछ ऐसा ही माना गया है कि बृहस्पतित ग्रह की अनुकूलता के लिए कुछ ऐसे काम हैं, जो गुरूवार के दिन नहीं करने चाहिए. सुखद पारिवारिक जीवन, शिएक्षा, ज्ञान और धन इनकी कृपा से ही प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे काम हैं, जो गुरूवार के दिन नहीं करने चाहिए अन्यथा अनुकूल गुरू भी प्रतिवकूल प्रभाव देता है।
अगर आप पहले से ही आर्थिक परेशानी और दूसरी दिक्कतों से गुजर रहे हैं तो गुरुवार को भूलकर भी इन कामों को न करें.
जानिये कौन से हैं वो काम...
पिनता, गुरू और साधु-संत बृहस्पति का प्रतिनिधि करते हैं. कभी भी इनका अपमान न करें.
खिनचड़ी न तो घर में बनाएं और न खाएं.
नाखून नहीं काटने चाहिए।
महिलाओं को बाल नहीं धोने चाहिए. कहा जाता है की इससे संपत्ति और संपन्नता सुख में कमी आती है।
कपड़े नहीं धोने चाहिए।
क्या करें
गुरुवार को ये कार्य करने से घर में आती है शुभता और बन जाते हैं बिगड़े काम...
सूर्य उदय होने से पहले शुद्ध होकर भगवान विष्णु के समक्ष गाय के शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।
केसर अथवा हल्दी का तिलक मस्तक पर लगाएं1
पीली चीजों का दान करें।
संभव हो तो व्रत रखें।
भगवान शिव पर पीले रंग के लड्डू अर्पित करें।
केले के पेड़ का पूजन करें, प्रसाद में पीले रंग के पकवान अथवा फल अर्पित करें।
केले का दान करें।
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