महाराष्ट्र
पिंपरी-चिंचवड़ में लालच ने उगला जहर: जहरीली शराब कांड में पुलिसिया खुलासा, चंद पैसों की खातिर रची गई मौत की साजिश
3 Jun, 2026 11:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे | महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में जांच एजेंसियां लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रही हैं। अब तक बाईस लोगों की जान ले चुके इस दर्दनाक शराब कांड की कड़ियों को जोड़ते हुए पता चला है कि फुगेवाड़ी क्षेत्र में ही अवैध रूप से तैयार कच्ची शराब में जानलेवा केमिकल 'मेथनॉल' मिलाया जा रहा था। पुलिस और जांच दलों के मुताबिक, मुनाफा कमाने के चक्कर में आरोपियों ने अपने घर को ही इस जानलेवा धंधे का ठिकाना बना रखा था।
घर में तैयार हो रहा था मौत का सामान, जहरीला मेथनॉल मिलाने का खुलासा
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी कर्नेलसिंह विरका, उसकी पत्नी इंदरजीत विरका और बेटे गुरुचरण उर्फ विक्की विरका ने मिलकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। इन लोगों ने बाहर से मंगवाई गई कच्ची शराब की तीव्रता और मात्रा बढ़ाने के लिए अपने घर पर ही उसमें करीब दो सौ पंद्रह लीटर घातक मेथनॉल रसायन मिला दिया था। फॉरेंसिक और सीआईडी की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपियों ने चंद रुपयों के लालच और मामूली फायदे के लिए सैकड़ों लोगों की जिंदगी को जानबूझकर दांव पर लगा दिया, जिसके कारण कई परिवारों के चिराग बुझ गए।
सीन री-क्रिएशन के दौरान फूटा परिजनों का गुस्सा, पथराव की आई नौबत
मामले की गहराई से तफ्तीश करने और सबूत जुटाने के लिए जब सीआईडी की टीम आरोपियों को साथ लेकर फुगेवाड़ी स्थित घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां मौजूद लोगों का धैर्य जवाब दे गया। मृतकों के रोते-बिलखते परिजन और स्थानीय नागरिक आरोपियों को देखते ही भड़क उठे और उनके खिलाफ उग्र नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक बुजुर्ग महिला हाथ में चप्पल लेकर आरोपियों को सबक सिखाने आगे बढ़ी, जबकि कुछ आक्रोशित युवाओं ने पास पड़े पत्थर और सीमेंट के टुकड़े उठाकर आरोपियों पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, मुस्तैद पुलिस बल और सीआईडी के आला अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए भीड़ को पीछे धकेला और आरोपियों को सुरक्षित निकाल लिया।
अवैध कारोबार पर सियासी घमासान, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पिंपरी-चिंचवड़ के दापोडी और फुगेवाड़ी बस्तियों में अचानक कई लोगों की तबीयत बिगड़ने से संदिग्ध मौतें होने लगीं। स्थानीय निवासियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से बेची जा रही अवैध कच्ची शराब पीने की वजह से ही इतने बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है। इस वीभत्स कांड के बाद अब राज्य में राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। विपक्ष और कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अवैध शराब माफियाओं पर समय रहते नकेल न कसने को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। फिलहाल मामले की व्यापक जांच जारी है और पुलिस इस रैकेट से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू की पड़ताल कर रही है।
मानसून से पहले बर्बादी की मार: महाराष्ट्र में चक्रवाती हवाओं और बारिश ने मचाई तबाही, 3 मौतें और भारी नुकसान
3 Jun, 2026 11:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से मौसम के मिजाज में लगातार बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां कुछ इलाके भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्री-मानसून की तेज बारिश, ओलावृष्टि और चक्रवाती हवाओं ने भारी तबाही मचाई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून ने केरल के तट पर दस्तक दे दी है, लेकिन महाराष्ट्र तक इसके पहुंचने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। हालांकि, इस आधिकारिक आगमन से पहले ही राज्य के कई जिलों में अंधड़ और आकाशीय बिजली गिरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और खेती-किसानी को करारा झटका लगा है।
परभणी और बीड में आकाशीय बिजली का कहर, हादसों में मासूम की मौत
परभणी जिले में बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश और तेज आंधी के कारण एक मकान की दीवार ढह गई, जिसकी चपेट में आने से ग्यारह वर्षीय मासूम दीपाली नंदगे की दर्दनाक मौत हो गई। इसी जिले के गंगाखेड तालुका अंतर्गत गौंडगांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक काश्तकार के गाय और बैल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अंधड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई मकानों के छप्पर उड़ गए और रेलवे स्टेशन का टिन शेड उखड़कर बिजली के हाईटेंशन तारों पर जा गिरा। दूसरी ओर, बीड जिले के आष्टी तालुका में अचानक हुई भीषण ओलावृष्टि ने बागवानी करने वाले किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिससे केले और जामुन के बड़े-बड़े बगीचे पूरी तरह उजड़ गए।
बुलढाणा और सोलापुर में चक्रवाती तूफान से बागान तबाह, बुजुर्ग दंपति ने गंवाई जान
बुलढाणा जिले के शेगांव, संग्रामपुर और खामगांव इलाकों में आए चक्रवाती तूफान और बारिश ने हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में लहलहा रहे केले और संतरे के बागों को मटियामेट कर दिया। कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलें तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गईं। इसी तरह का खौफनाक मंजर सोलापुर के करमाला तालुका में भी देखने को मिला, जहां सैकड़ों एकड़ में फैले केले के पौधे उखड़ गए। सोलापुर के ही पोमलवाड़ी गांव में एक और दर्दनाक हादसा हुआ, जहां घर की दीवार धराशायी होने से मलबे में दबकर वृद्ध दंपति जगन्नाथ नवले और शालन नवले की जान चली गई।
मुआवजे की आस में पीड़ित किसान, प्रशासन ने शुरू किया सर्वेक्षण
मौसम के इस दोहरे वार ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। बेमौसम हुई इस तबाही से जहां फलदार पौधों और बागानों को स्थायी नुकसान पहुंचा है, वहीं खेतों में तैयार खड़ी फसलें भी मिट्टी में मिल गईं, जिससे किसानों की लाखों रुपये की गाढ़ी कमाई पानी में बह गई। कई क्षेत्रों में मवेशियों के हताहत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी तगड़ा झटका लगा है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित गांवों और खेतों में जाकर नुकसान का पंचनामा (आकलन) करना शुरू कर दिया है, ताकि रिपोर्ट तैयार की जा सके। वहीं, पाई-पाई को मोहताज हो चुके पीड़ित किसान सरकार से जल्द से जल्द विशेष आर्थिक पैकेज और उचित मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।
अहिल्यानगर के गंगा उद्यान में आमने-सामने आए दो गुट: नमाज के विरोध में हिंदू संगठनों ने पढ़ा हनुमान चालीसा, भारी पुलिस बल तैनात
2 Jun, 2026 03:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहिल्यानगर | महाराष्ट्र के अहिल्यानगर शहर में स्थित 'गंगा उद्यान' का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर भारी तनाव पैदा हो गया है। वायरल वीडियो में उद्यान परिसर के भीतर कुछ मुस्लिम महिलाओं को नमाज अदा करते हुए देखा जा सकता है, जिसे लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया और नमाज पढ़ने वाली महिलाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर पार्क में ही इकट्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन किया।
हनुमान चालीसा का पाठ, हवन और वराह देवता की पूजा के साथ शुद्धिकरण
वीडियो सामने आने के बाद आक्रोशित हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गंगा उद्यान पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने वहां नमाज स्थल पर बैठकर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद, संगठनों से जुड़े 15-20 कार्यकर्ताओं ने उस स्थान का 'शुद्धिकरण' करने के लिए बाकायदा वैदिक रीति-रिवाज से हवन-पूजन किया और पूरे परिसर में पवित्र जल का छिड़काव किया। इस अनूठे प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी अपने साथ एक सूअर (वराह) को भी घटना स्थल पर लेकर आए थे, जहां उन्होंने बकायदा वराह देवता की पूजा-अर्चना की।
विधायक संग्राम जगताप की मौजूदगी और उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे विरोध प्रदर्शन और शुद्धिकरण कार्यक्रम के दौरान स्थानीय विधायक संग्राम जगताप भी गंगा उद्यान में मौजूद रहे। इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विधायक संग्राम जगताप ने स्पष्ट लहजे में कहा कि सार्वजनिक पार्कों या उद्यानों का उपयोग किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि यदि भविष्य में सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की घटनाएं दोबारा दोहराई गईं, तो बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन और चक्का जाम (रास्ता रोको) किया जाएगा, और साथ ही विरोध स्वरूप ऐसे स्थलों पर सूअर छोड़े जाएंगे।
तोफखाना पुलिस अलर्ट, वायरल वीडियो के समय और पहचान की जांच शुरू
पार्क में हंगामे और नारेबाजी की सूचना मिलते ही स्थानीय तोफखाना थाने की पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रण में लिया। वायरल हो रहे वीडियो की बात करें तो उसमें बैकग्राउंड में बच्चे खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं और उसी के पास जमीन पर कुछ महिलाएं नमाज पढ़ती नजर आ रही हैं। पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए इस वीडियो की गहन तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस साइबर सेल की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वीडियो किस तारीख का है और इसमें दिख रही महिलाएं कौन हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी तफ्तीश के बाद ही स्थिति साफ होगी और नियमों के मुताबिक आगे कदम उठाए जाएंगे।
वीआईपी इलाके में नियमों की धज्जियां: बांद्रा के मैदान में 250 ड्रोन से हो रही थी अवैध शूटिंग, पुलिस ने लाखों के उपकरण किए जब्त
2 Jun, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | मायानगरी के बेहद हाई-प्रोफाइल इलाके बांद्रा पश्चिम से बिना किसी वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर ड्रोन उड़ाने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर द्वारा लागू की गई निषेधाज्ञा और सुरक्षा दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर, एक खेल के मैदान में करीब 200 से 250 ड्रोन एक साथ आसमान में उड़ाए जा रहे थे और विज्ञापन की शूटिंग चल रही थी। इसकी भनक लगते ही बांद्रा पुलिस की डिटेक्शन टीम ने फौरन छापेमारी की और मौके से एक निजी कंपनी के प्रबंधक (मैनेजर) को हिरासत में लेकर सैकड़ों ड्रोन और कीमती तकनीकी उपकरण जब्त कर लिए।
रात के अंधेरे में आसमान में उड़ रहे थे सैकड़ों ड्रोन, छापेमारी में दिल्ली का मैनेजर गिरफ्तार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह वाकया 28 मई की रात का है जब बांद्रा पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि बांद्रा पश्चिम में स्थित 'विंग्स स्पोर्ट्स क्लब ग्राउंड' में भारी तादाद में ड्रोन उड़ाकर एरियल वीडियो ग्राफी की जा रही है। सूचना मिलते ही जब पुलिस टीम ग्राउंड पर पहुंची, तो आसमान का नजारा देखकर हैरान रह गई, जहां सैकड़ों आधुनिक ड्रोन चक्कर काट रहे थे। पुलिस ने फौरन इस संचालन को रुकवाया और मौके से गोपाल नारायण सिंह (45) नामक व्यक्ति को दबोच लिया, जो मूल रूप से दक्षिण दिल्ली के संगम विहार का रहने वाला है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह 'बोल्डसन मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड' में मैनेजर है और कंपनी के एक नए विज्ञापन के लिए यह ड्रोन शो आयोजित किया गया था।
दस्तावेज और परमिशन गायब, लाखों रुपये के हाई-टेक ड्रोन जब्त
थाने लाकर जब मैनेजर गोपाल सिंह से ड्रोन उड़ाने का लाइसेंस, आवश्यक परमिशन और पुलिस कमिश्नर कार्यालय की लिखित मंजूरी के दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई भी वैध कागजात पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। तफ्तीश में कंपनी के एक अन्य अधिकारी सुनील गुप्ता का नाम भी सामने आया है, जो सरकारी विभागों से अनुमति लेने का काम संभालता था। पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए मौके से भारी मात्रा में एडवांस ऑपरेटिंग किट, कंट्रोल सिस्टम, एक लैपटॉप और सभी ड्रोन जब्त कर लिए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चार पंखों (क्वाडकोप्टर) और अत्याधुनिक कैमरों से लैस जब्त किए गए प्रत्येक ड्रोन की बाजार में कीमत करीब 80 हजार रुपये है।
सेंसिटिव जोन में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, गंभीर धाराओं में केस दर्ज
मुंबई पुलिस ने इस घटना को जन सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना है। पुलिस का कहना है कि मुंबई जैसे संवेदनशील और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण महानगर में आतंकी खतरों और सुरक्षा कारणों को देखते हुए बिना एडवांस क्लीयरेंस के किसी भी प्रकार का फ्लाइंग ऑब्जेक्ट (ड्रोन/ग्लाइडर) उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में वीवीआईपी इलाके के आसमान में एक साथ इतने सारे ड्रोन उड़ाना देश की आंतरिक सुरक्षा और आम जनता के जीवन के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता था। बांद्रा पुलिस ने नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोप में गोपाल नारायण सिंह और सुनील गुप्ता के खिलाफ सरकारी आदेशों की अवहेलना व जन सुरक्षा को जोखिम में डालने की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।
बुलडोजर एक्शन से थर्राए अतिक्रमणकारी: मुंबई के आरे में 70 हजार वर्ग फुट सरकारी जमीन से हटाया गया अनाधिकृत धार्मिक ढांचा
2 Jun, 2026 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | गोरेगांव (पूर्व) स्थित आरे मिल्क कॉलोनी (यूनिट 32) में बनी हजरत सैयद बरकत अली शाह बाबा दरगाह के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ी तोड़क कार्रवाई शुरू की है। बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन के अतिक्रमण और सुरक्षा कारणों के मद्देनजर प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है। परिसर के अवैध हिस्सों को ढहाने के लिए मौके पर 3 भारी बुलडोजर तैनात किए गए हैं, जिन्होंने सुबह 11 बजे से ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी। कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल मुस्तैद है।
हजारों वर्ग फुट सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप और स्थानीय निवासियों का पक्ष
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरे कॉलोनी की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके इस धार्मिक स्थल का निर्माण किया गया था। आरोप है कि दरगाह के नाम पर लगभग 70,000 वर्ग फुट की बेशकीमती सरकारी भूमि पर अवैध तरीके से निर्माण कार्य फैलाया गया था। दूसरी तरफ, स्थानीय निवासियों और दरगाह प्रबंधन से जुड़े लोगों का पक्ष इस दावे से बिल्कुल जुदा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दरगाह कई दशक पुरानी है और इसके वैध होने के पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने कागजी और जमीनी पैमाइश के बाद ही इसे हटाने का फैसला किया है।
भारी पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट
चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से पूरे आरे कॉलोनी क्षेत्र को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। हाल ही में बांद्रा के गरीबनगर इलाके में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर हुए पथराव की घटना से सबक लेते हुए, प्रशासन ने यहाँ पहले से ही अतिरिक्त सुरक्षा घेरा तैयार किया है। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने भी संभावित तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन को पहले ही लिखित चेतावनी दी थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए दंगा नियंत्रण पुलिस के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का कानून और किरीट सोमैया का हस्तक्षेप
इस पूरे विवाद को राजनीतिक और सामाजिक मंच पर उठाने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया की अहम भूमिका रही है। सोमैया ने अप्रैल 2026 में इस हरित क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया था और हाल ही में उन्होंने इस परिसर का मुआयना भी किया था। कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो आरे कॉलोनी को एक संरक्षित हरित क्षेत्र (ग्रीन जोन) और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का ही एक हिस्सा माना जाता है। इस पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी तरह का पक्का या कच्चा अतिक्रमण बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए गए दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जिसके चलते सभी न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही यह तोड़क कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
"कोस्टल रोड प्रोजेक्ट की बढ़ी कीमत: नए प्रोमेनेड और साइकिल ट्रैक को मिली मंजूरी, रफ्तार के साथ मिलेगा सैर-सपाटे का मजा"
1 Jun, 2026 04:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महानगर की महत्वाकांक्षी और बहुचर्चित कोस्टल रोड परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। इस बार चर्चा का कारण परियोजना के बजट में एक बार फिर हुआ इजाफा है। लोटस जेट्टी से समुद्र महल के बीच 320 मीटर लंबे नए विहारपथ (प्रोमेनेड) और साइकिल ट्रैक के निर्माण का फैसला लिया गया है, जिसके लिए 9 करोड़ 64 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि को मंजूरी दी गई है। जब यह पूरी परियोजना अपने मुकाम के बेहद करीब है, तब अचानक इस नए काम को शामिल किए जाने से प्रशासनिक हलकों में कई सवाल तैरने लगे हैं।
शुरुआती मास्टर प्लान से गायब था नया प्रोजेक्ट, उठे सवाल
सामने आई जानकारियों के अनुसार, समुद्र के किनारे बनने वाला यह नया ट्रैक कोस्टल रोड के मूल ब्लूप्रिंट या शुरुआती मास्टर प्लान का हिस्सा नहीं था। पहले तय किए गए खाके में इस निर्माण का कहीं कोई उल्लेख नहीं था, जिसे अब आखिरी वक्त पर जोड़ा जा रहा है। हालांकि, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस फैसले का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि यह अतिरिक्त निर्माण पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों की सुविधा और आपातकालीन सेवाओं की निर्बाध आवाजाही के लिए बेहद जरूरी है। इससे कोस्टल रोड का सफर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।
टैक्स पेयर्स पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ, विपक्ष ने साधा निशाना
कोस्टल रोड प्रोजेक्ट का कुल बजट पहले ही शुरुआती अनुमान से कई गुना आगे निकल चुका है। ऐसे में अंतिम चरण के दौरान नए-नए कामों को जोड़कर लागत बढ़ाने की इस नीति पर विपक्षी दलों और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों ने कड़ा ऐतराज जताया है। विशेषज्ञों का सवाल है कि जब देश की इतनी बड़ी एजेंसियां इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग कर रही थीं, तब शुरुआत में इन जरूरी सुविधाओं को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया? अचानक बढ़ रहे इस खर्च का सीधा वित्तीय बोझ मुंबई के आम करदाताओं (टैक्स पेयर्स) की जेब पर पड़ेगा।
समुद्र किनारे मिलेगा नया अनुभव, पर डेडलाइन को लेकर संशय
बीएमसी अधिकारियों का दावा है कि लोटस जेट्टी से समुद्र महल तक का यह 320 मीटर का हिस्सा मुंबईकरों के लिए समंदर के किनारे वॉक करने और साइकिल चलाने का एक बेजोड़ अनुभव साबित होगा। इस पूरे हिस्से को 'यूजर फ्रेंडली' बनाने के साथ-साथ बढ़ी हुई लागत पर पैनी नजर रखने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। मुंबई की इस लाइफलाइन परियोजना में शुरुआती दौर से लेकर अब तक दर्जनों तकनीकी संशोधन किए जा चुके हैं। अब देखना यह होगा कि इस नए ट्रैक के जुड़ने के बाद क्या काम यहीं थमेगा या भविष्य में कोई और नया बदलाव इसकी डेडलाइन को और आगे बढ़ाएगा।
"बीड में रफ्तार का कहर: मराठा आंदोलन से घर लौट रहे युवक की हादसे में मौत, दो अन्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे"
1 Jun, 2026 03:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीड। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में जारी विरोध प्रदर्शन को खत्म कर वापस लौट रहे कार्यकर्ताओं की कार भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई। घर वापसी के दौरान इन आंदोलनकारियों की तेज रफ्तार चार पहिया गाड़ी सड़क किनारे खड़े एक डंपर नुमा ट्रक में पीछे से जा घुसी।
खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी अनियंत्रित कार
प्राप्त विवरण के मुताबिक, मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल का अनशन खत्म होने के बाद इंदापुर के रहने वाले रामचंद्र शंकर जमदाड़े अपने साथी संतोष माने और बिपिन मोरे के साथ कार द्वारा वापस अपने घर लौट रहे थे। देर रात बीड जिले के मांजरसुंबा इलाके के पास पहुंचते ही उनकी कार अचानक अनियंत्रित हो गई और मार्ग किनारे खड़े एक भारी ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और वाहन में सवार लोग अंदर ही फंस गए।
एक आंदोलनकारी की मौके पर ही मौत, दो की हालत नाजुक
इस दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में इंदापुर निवासी रामचंद्र शंकर जमदाड़े ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उनके दोनों साथी संतोष माने और बिपिन मोरे लहूलुहान होकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। चीख-पुकार सुनकर दौड़े स्थानीय लोगों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को बाहर निकाला और बीड के एक निजी अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) में भर्ती कराया, जहां दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना की भनक लगते ही मराठा समाज के स्थानीय पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों के संपूर्ण उपचार का जिम्मा उठाया।
शोक की लहर, पीड़ित परिवार के लिए सरकारी नौकरी की मांग
इस दर्दनाक हादसे की खबर फैलते ही इंदापुर सहित पूरे मराठा समाज में मातम पसर गया है। सामाजिक संगठनों और आंदोलन के प्रतिनिधियों ने इस दुखद घड़ी में गहरा शोक व्यक्त किया है। साथ ही समाज के अगुआकारों ने राज्य सरकार से मांग की है कि हादसे का शिकार हुए मृतक के आश्रित परिवार को तुरंत उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार सरकारी सेवा में शामिल किया जाए।
"हैवानियत की सारी हदें पार: 'मम्मी को बताया तो मार डालूंगा'... डरा-धमकाकर अपने ही बच्चे का शोषण करता रहा कलयुगी बाप"
1 Jun, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के सतारा परिसर से एक दिल दहला देने वाली और बेहद गंभीर घटना सामने आई है, जहां एक 5 साल के मासूम बच्चे के यौन उत्पीड़न के आरोप में उसके सगे पिता के खिलाफ ही आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित बच्चे की मां द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर स्थानीय सतारा थाना पुलिस ने 32 वर्षीय आरोपी पिता के विरुद्ध पॉक्सो (POCSO) कानून की कड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा कायम कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
जन्मदिन पर बच्चे के बर्ताव से मां को हुआ शक
सामने आ रही जानकारियों के मुताबिक, घटना वाले दिन पीड़ित बच्चे का जन्मदिन था, लेकिन अपने इस खास दिन पर भी वह खुश होने के बजाय बेहद डरा-सहमा, उदास और एकांत में बैठा हुआ था। मासूम के इस असामान्य व्यवहार और मानसिक तनाव को देखकर उसकी मां का माथा ठनका। मां ने ममता का संबल देकर बच्चे को पूरी तरह अपने विश्वास में लिया और उससे इस कदर सहमे होने की असली वजह पूछी।
मासूम ने बयां की पिता की घिनौनी करतूत
जब मां ने प्यार से कुरेदा, तो बच्चे ने सिसकते हुए अपने साथ हुई उस हैवानियत का खुलासा किया जिसे सुनकर पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। मासूम ने बताया कि उसका पिता अक्सर उसके साथ गंदी हरकतें करता था और उसके नाजुक अंगों को गलत नीयत से छूता था। आरोपी पिता ने बच्चे को बुरी तरह डरा-धमका रखा था कि अगर उसने इस बारे में घर में किसी को भी कुछ बताया, तो अंजाम बहुत बुरा होगा।
रिश्तों को कलंकित करने वाले आरोपी पर कानूनी शिकंजा
इस खौफनाक हकीकत से पर्दा उठते ही मां ने बिना कोई वक्त गंवाए सीधे थाने का रुख किया और रक्षक के भक्षक बनने की पूरी कहानी पुलिस के सामने बयां कर दी। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित गति से कार्रवाई की और आरोपी पिता को नामजद करते हुए विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया। पुलिस अधिकारी अब इस मामले से जुड़े हर एक बिंदु की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि मासूम को न्याय दिलाया जा सके। यह वारदात समाज में बच्चों की सुरक्षा और पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
1947 के विभाजन पर RSS का मंथन: सुनील आंबेकर का दावा- मजबूत संघ बदल सकता था इतिहास, तब की परिस्थितियों पर रखी बात
30 May, 2026 03:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि वर्ष 1947 में संघ का सांगठनिक ढांचा अधिक मजबूत होता, तो देश का विभाजन कभी नहीं होता। आंबेकर ने भारत के बंटवारे को इतिहास की सबसे पीड़ादायक और दुखद घटनाओं में से एक करार दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि भले ही उस दौर में संघ उतना सामर्थ्यवान नहीं था जितना कि वह वर्तमान समय में है, फिर भी विपरीत परिस्थितियों में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने विस्थापित हिंदुओं की रक्षा करने और उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर बसाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी थी। गौरतलब है कि ब्रिटिश हुकूमत के भारत छोड़ने के दौरान धर्म के आधार पर देश का बंटवारा हुआ था, जिसमें मोहम्मद अली जिन्ना की हठधर्मिता के चलते पाकिस्तान का जन्म हुआ।
विभाजन के चलते तत्कालीन व्यवस्था के खिलाफ था जनआक्रोश, संघ नहीं करता किसी से द्वेष
एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान सुनील आंबेकर ने कहा कि आजादी के समय देश का बंटवारा एक बेहद कष्टकारी त्रासदी थी। उस कालखंड में संघ उतना व्यापक नहीं था जितना वह होना चाहता था। यदि संघ के पास आज जैसी शक्ति होती, तो देश को खंडित होने से बचाया जा सकता था। विभाजन की विभीषिका के कारण उस समय की प्रशासनिक व राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आम जनता के दिलों में गहरा असंतोष और भारी गुस्सा व्याप्त था। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए संघ के खिलाफ फैलाए जाने वाले दुष्प्रचारों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने में यकीन रखता है। संघ न तो किसी विचारधारा से नफरत करता है और न ही किसी को अपना शत्रु मानता है, बल्कि वह वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ सभी को गले लगाता है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के इस वैचारिक मातृ संगठन की कमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के हाथों में है।
पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक वार्ताओं पर संघ का रुख स्पष्ट, सरकार को सलाह देना काम नहीं
पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत को लेकर संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबले द्वारा दिए गए बयान पर आंबेकर ने संगठन का दृष्टिकोण साफ किया। उन्होंने कहा कि संघ के इस रुख को बहुत गहराई से समझने की आवश्यकता है क्योंकि आरएसएस हमेशा जमीनी हकीकत के आधार पर समस्याओं के स्थायी समाधान और जनता के बीच आपसी संपर्क की वकालत करता है। आंबेकर ने साफ शब्दों में कहा कि दो देशों के बीच किस स्तर पर बातचीत होनी चाहिए, यह पूरी तरह से एक राजनीतिक और कूटनीतिक विषय है। संघ ने कभी भी सरकार के ऐसे नीतिगत और कूटनीतिक मामलों में न तो कोई दखल दिया है, न कोई सलाह दी है और न ही भविष्य में उसकी ऐसी कोई मंशा है।
दत्तात्रेय होसबले का दृष्टिकोण: नागरिक स्तर पर खुली रहे खिड़की, आतंकवाद पर मिले करारा जवाब
संघ में द्वितीय सर्वोच्च स्थान रखने वाले दत्तात्रेय होसबले के पिछले वक्तव्यों का संदर्भ देते हुए बताया गया कि वे बेहद नपे-तुले शब्दों में अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा था कि विपरीत परिस्थितियों में भी संवाद का मार्ग कभी पूरी तरह अवरुद्ध नहीं होना चाहिए। चूंकि दोनों देशों के ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक संबंध बेहद पुराने हैं और वे कभी अखंड राष्ट्र का हिस्सा थे, इसलिए वीजा प्रक्रियाओं, व्यापारिक गतिविधियों और खेलकूद के आयोजनों पर पूरी तरह रोक नहीं लगनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं किया जा सकता, इसलिए शांति स्थापना के लिए वहां के प्रबुद्ध वर्ग, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) को आगे आना होगा। होसबले ने यह भी दृढ़ता से कहा था कि यदि सीमा पार से आतंकवाद या पुलवामा जैसी कोई भी कायराना हरकत होती है, तो भारत को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए दुश्मन को उसकी की भाषा में अत्यंत कठोर और मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल: छगन भुजबल का दिल्ली जाने का प्लान, सुनेत्रा पवार की खाली सीट पर नजर
30 May, 2026 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इस समय राज्यसभा की एक खाली सीट को लेकर सरगर्मी चरम पर है। राज्य के पास राज्यसभा की कुल 19 सीटें हैं, जिनमें से 18 पर सांसद काबिज हैं और केवल एक सीट रिक्त चल रही है। यह रिक्ति राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद आई है। इस खाली पद पर काबिज होने के लिए एनसीपी के कद्दावर और वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने अपना पूरा जोर लगा दिया है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस सीट के उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि भुजबल पर्दे के पीछे से अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से लॉबिंग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने भतीजे समीर भुजबल को राज्य मंत्रिमंडल में जगह दिलाने के लिए भी प्रयासरत हैं।
दो साल का कार्यकाल अभी है शेष, मंत्री पद छोड़ संसद जाने की तैयारी
छगन भुजबल महाराष्ट्र की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के एक बेहद प्रभावशाली और कद्दावर चेहरे माने जाते हैं। वे पूर्व में राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और 'समता परिषद' के माध्यम से ओबीसी संगठनों पर उनकी मजबूत पकड़ है। सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई इस राज्यसभा सीट का कार्यकाल अभी दो साल का बाकी है, यही वजह है कि भुजबल इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते। वर्तमान में वे राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री हैं और नासिक के येवला निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। यदि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला करती है, तो उन्हें मंत्री पद और विधायकी दोनों से इस्तीफा देना होगा। चर्चा है कि भुजबल अपने स्थान पर अपने भतीजे और नासिक के पूर्व लोकसभा सांसद समीर भुजबल को राज्य सरकार में मंत्री बनवाना चाहते हैं, जो पूर्व में एनसीपी (अजित पवार) की मुंबई इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
महाराष्ट्र की उच्च सदन सीटों का समीकरण और एनडीए का भारी पलड़ा
महाराष्ट्र में राज्यसभा की सीटों का मौजूदा गणित पूरी तरह से सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में दिखाई देता है। राज्य की कुल 19 सीटों में से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास कुल 14 सीटें हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के पास 8, एनसीपी के पास 3, शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 2 और आरपीआई (आठवले) के पास 1 सीट है। दूसरी ओर, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के खाते में केवल 4 सीटें हैं, जिनमें से कांग्रेस के पास 2, जबकि एनसीपी और शिवसेना (UBT) के पास 1-1 सीट है। ऐसे में संख्या बल के हिसाब से एनसीपी के कोटे की इस खाली सीट पर सत्ताधारी दल की जीत पूरी तरह से तय मानी जा रही है, जिससे इस आंतरिक उम्मीदवारी को लेकर खींचतान और अधिक बढ़ गई है।
परिवारवाद के आरोपों पर उठाए सवाल, नई पीढ़ी के नेतृत्व में भुजबल की परीक्षा
छगन भुजबल के समर्थक खेमे ने पार्टी के भीतर भाई-भतीजावाद या परिवारवाद के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भुजबल समर्थकों का तर्क है कि जब उपमुख्यमंत्री रहते हुए सुनेत्रा पवार को सांसद बनाया जा सकता है, सुनील तटकरे के सांसद होने के बावजूद उनकी बेटी को राज्य कैबिनेट में जगह मिल सकती है, और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद उपमुख्यमंत्री हैं जबकि उनके बेटे पार्थ पवार सांसद हैं; तो फिर भुजबल परिवार पर ही परिवारवाद के आरोप क्यों मढ़े जाते हैं? गौरतलब है कि भुजबल ने यह राजनीतिक घेराबंदी ऐसे समय में शुरू की है जब संगठन में अजित पवार के दौर के बाद नई पीढ़ी के हाथों में एनसीपी की कमान है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बदली हुई परिस्थितियों में क्या भुजबल अपनी राजनीतिक इच्छा पूरी कराने में सफल हो पाते हैं या नहीं।
वेस्टर्न रेलवे पैसेंजर्स ध्यान दें! मरीन लाइंस पर शनिवार रात रहेगा ब्लॉक, चर्चगेट से आने-जाने वाली लोकल ट्रेनों का शेड्यूल बदला
30 May, 2026 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | पश्चिम रेलवे के अंतर्गत सफर करने वाले मुंबईकरों के लिए एक जरूरी खबर है। मरीन लाइन्स स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 और 4 के मध्य स्थित फुट ओवर ब्रिज (FOB) के भारी-भरकम गर्डरों को रोड क्रेन की मदद से स्थापित (लॉन्च) करने का काम किया जाना है। इस तकनीकी कार्य को पूरा करने के लिए 30 और 31 मई,2026 की दरमियानी रात को एक विशेष मेजर ब्लॉक लिया जाएगा। रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, यह ब्लॉक मरीन लाइन्स स्टेशन से गुजरने वाली सभी अप और डाउन लाइनों पर लागू होगा, जिसके कारण देर रात और तड़के चलने वाली कुछ उपनगरीय लोकल ट्रेनें आंशिक या पूरी तरह से प्रभावित रहेंगी। राहत की बात यह है कि 31 मई को दिन के समय कोई ब्लॉक नहीं रहेगा।
चर्चगेट नहीं जाएंगी ये ट्रेनें, मुंबई सेंट्रल पर ही समाप्त और शुरू होंगी सेवाएं
मेजर ब्लॉक के चलते चर्चगेट स्टेशन तक जाने और वहां से छूटने वाली कई लोकल ट्रेनों को मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ही रोकने (शॉर्ट टर्मिनेट) और वहीं से वापस चलाने (शॉर्ट ओरिजिनेट) का निर्णय लिया गया है। प्रभावित होने वाली ट्रेनों की सूची इस प्रकार है:
ट्रेन संख्या BO91014: बोरीवली से रात 00:10बजे चलकर चर्चगेट जाने वाली लोकल केवल मुंबई सेंट्रल (01:15 बजे) तक जाएगी।
ट्रेन संख्या VR91018: विरार से रात 23:49 बजे छूटने वाली लोकल चर्चगेट के बजाय मुंबई सेंट्रल तक ही संचालित होगी।
ट्रेन संख्या BO91020: बोरीवली से रात 00:30बजे प्रस्थान करने वाली ट्रेन मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी।
ट्रेन संख्या VR91024: विरार से रात 00:05बजे रवाना होने वाली लोकल भी सिर्फ मुंबई सेंट्रल तक जाएगी।
वापसी की सेवाएं: सुबह चर्चगेट से चलने वाली ट्रेन संख्या VR90011 (सुबह 04:25बजे) और ट्रेन संख्या BO90015 (सुबह 04:28बजे) चर्चगेट के बजाय मुंबई सेंट्रल स्टेशन से ही अपनी यात्रा शुरू करेंगी।
नोट: उपर्युक्त सभी ट्रेनें मुंबई सेंट्रल और चर्चगेट स्टेशनों के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेंगी।
ब्लॉक के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए पहली और आखिरी ट्रेनों का समय
देर रात यात्रा करने वाले यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए रेलवे ने चर्चगेट स्टेशन के लिए आखिरी और ब्लॉक के बाद शुरू होने वाली पहली ट्रेनों की समय-सारणी जारी की है:
अंतिम ट्रेन (विरार से चर्चगेट): ब्लॉक शुरू होने से पहले विरार से चर्चगेट के लिए अंतिम लोकल (ट्रेन संख्या VR91012) रात 23:30बजे प्रस्थान करेगी और रात 01:10 बजे चर्चगेट पहुंचेगी।
पहली स्लो ट्रेन (चर्चगेट से): ब्लॉक समाप्त होने के बाद चर्चगेट से छूटने वाली पहली धीमी लोकल (ट्रेन संख्या BO90025) सुबह 04:46बजे अपने निर्धारित मार्ग पर रवाना होगी।
पहली फास्ट ट्रेन (चर्चगेट से): चर्चगेट स्टेशन से तड़के प्रस्थान करने वाली पहली तेज गति की लोकल (ट्रेन संख्या VR90021) सुबह 04:40 बजे पटरी पर दौड़ेगी।
यात्रियों से सहयोग की अपील, समय देखकर ही घर से निकलने की सलाह
पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क विभाग ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे ब्लॉक के समय को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बुनियादी ढांचे की मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुट ओवर ब्रिज का यह काम बेहद अनिवार्य है। देर रात और सुबह के इस ब्लॉक के दौरान मुंबई सेंट्रल से चर्चगेट के बीच सफर करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है, ताकि इस अवधि में होने वाली सीमित असुविधा को कम किया जा सके।
NEET-CBSE पेपर लीक और धांधली पर घिरी सरकार: आदित्य ठाकरे बोले- सिर्फ जांच काफी नहीं, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जरूरी
29 May, 2026 04:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर नीट (NEET) और सीबीएसई (CBSE) परीक्षाओं में सामने आई विसंगतियों को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की इन महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई लापरवाही न केवल परीक्षा आयोजित करने वाले बोर्ड और मंत्रालय की नाकामी को दर्शाती है, बल्कि यह देश के होनहार और कठिन परिश्रम करने वाले युवाओं के वैश्विक स्तर पर भरोसे, मान-सम्मान और रोजगार के अवसरों को भी गहरी ठेस पहुंचाती है।
शीर्ष अधिकारियों और जिम्मेदार बोर्ड सदस्यों को हटाने की मांग
आदित्य ठाकरे ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक इस बड़ी लापरवाही के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए जाते, तब तक पीड़ित छात्रों को न्याय मिलना नामुमकिन है। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान शिक्षा मंत्री, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और सीबीएसई बोर्ड के शीर्ष पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से बर्खास्त किया जाना चाहिए। युवा नेता ने कहा कि जिन लोगों ने नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा का पर्चा लीक किया और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में धांधली की या उसे ठीक से लागू करने में नाकाम रहे, उन्हें जब तक सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक साल 2047 के 'विकसित भारत' की बातें करना पूरी तरह से बेमानी है।
दोबारा परीक्षा और डिजिटल मार्किंग में गड़बड़ियों से छात्रों में रोष
यह तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब देश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं को लेकर भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित कराया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीबीएसई कक्षा 12वीं की कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग में बड़े पैमाने पर विसंगतियां पाई गई हैं। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान न होने, धुंधले स्कैन और नंबरों की गिनती में गंभीर त्रुटियों के मामले सामने आने के बाद हजारों विद्यार्थियों ने री-चेकिंग (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन किया है। ठाकरे ने चेताया कि जब तक पूरी शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार नहीं किए जाते, तब तक भविष्य में किसी बेहतर परिणाम की उम्मीद करना बेकार है।
विपक्षी दलों ने घेरा और छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देशभर के छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरा असंतोष और गुस्सा देखा जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने इसे देश की समूची शिक्षा प्रणाली की विफलता करार देते हुए केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। वर्तमान में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में छात्र संगठनों द्वारा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों ने भी इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि देश की मुख्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बार-बार होने वाली ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक खामियां न केवल युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही हैं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को भी कमजोर कर रही हैं।
नासिक TCS मामला: पुलिस ने दाखिल की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट, दो हजार पन्नों में दर्ज है जालसाजी की पूरी कहानी
29 May, 2026 03:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासिक | टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) परिसर से जुड़े कथित कार्यस्थल यौन उत्पीड़न, महिलाओं से अभद्रता, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के बेहद संवेदनशील मामले में नासिक सिटी पुलिस ने एक और बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस प्रशासन द्वारा इस बहुचर्चित प्रकरण में शुक्रवार को अदालत के समक्ष दूसरी चार्जशीट (आरोप पत्र) पेश कर दी गई है। यह नया आरोप पत्र करीब 2000 पन्नों का है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ कई पुख्ता सबूत और गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं।
विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश के बाद 2000 पन्नों का आरोप पत्र पेश
नासिक पुलिस के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विभिन्न महिला पीड़ितों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर मुंबई नाका और देवलाली कैंप पुलिस थानों में कुल 9 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए नासिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इसी एसआईटी की गहन पड़ताल के बाद राजा रफीक मेमन, शाह रुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी अशोक चैनानी, तौसिफ बिलाल अत्तार, शफी भिकन शेख, दानिश एजाज शेख, निदा एजाज खान और आसिफ आलम अंसारी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ यह 2000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट नासिक की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में दाखिल की गई है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एट्रोसिटी एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज
इस पूरे मामले में कानून की कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। मुंबई नाका थाने में दर्ज 8 मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी (FIR) दर्ज है, जिनमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, आपराधिक धमकी देने और महिलाओं की मर्यादा को ठेस पहुंचाने के आरोप शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर, देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अन्य मामले (क्राइम नंबर 156/2026) में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एट्रोसिटी एक्ट) की विशेष धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
सभी आरोपियों की जमानत खारिज, पूरक चार्जशीट की तैयारी
इस हाई-प्रोफाइल मामले में नासिक पुलिस द्वारा पहले ही 1500 पन्नों की एक प्राथमिक चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। सरकारी वकीलों की मजबूत दलीलों और पुलिस द्वारा जुटाए गए गंभीर साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने इस मामले के सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं पूरी तरह खारिज कर दी हैं, जिसके चलते सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में उपलब्ध वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर यह दूसरी चार्जशीट दी गई है, लेकिन मामले की जांच अभी रोकी नहीं गई है। एसआईटी की टीम कुछ अन्य नए साक्ष्य जुटाने में लगी है, जिसके आधार पर आने वाले समय में एक पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी कोर्ट में पेश की जा सकती है।
सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने पर बोले संजय राउत: सत्ता का खेल आसान नहीं, कर्नाटक के घटनाक्रम पर टिकी नजरें
29 May, 2026 03:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई | कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के घटक दल शिवसेना (यूबीटी) ने सिद्धारमैया के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र की राजनीति के परिदृश्य से इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी प्रतिक्रिया दी है। राउत के इस बयान को आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों और दोनों राज्यों के सीमा विवाद के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।
संजय राउत ने की सिद्धारमैया के कदम की सराहना, महाराष्ट्र के लिए बताया मिसाल
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से मुखातिब होते हुए सिद्धारमैया के फैसले को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बताया। राउत ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी इतनी सहजता और बिना किसी आंतरिक कलह के छोड़ देना आज के दौर की राजनीति में लगभग असंभव सा दिखता है। राउत के मुताबिक, इस गरिमापूर्ण सत्ता हस्तांतरण के बाद उनके मन में सिद्धारमैया के प्रति आदर और सम्मान बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
'कुर्सी के मोह' पर संजय राउत का तीखा तंज
महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से इस घटनाक्रम को जोड़ते हुए संजय राउत ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, "आज देश और विशेषकर महाराष्ट्र में जिस तरह सत्ता के लिए खींचतान और जोड़-तोड़ की राजनीति देखने को मिलती है, उसके विपरीत सिद्धारमैया ने पार्टी अनुशासन को सर्वोपरि रखा।" राउत का यह बयान सीधे तौर पर महाराष्ट्र के मौजूदा शासक दल और उन नेताओं पर एक परोक्ष हमला माना जा रहा है जिन पर विपक्ष लगातार 'कुर्सी के मोह' का आरोप लगाता रहा है।
पार्टी आलाकमान के निर्देश और अनुशासन की जीत
इस्तीफा देने के बाद स्वयं सिद्धारमैया ने भी यह साफ कर दिया था कि वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व (आलाकमान) के आदेश का पालन कर रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें दो दिन पहले ही पद छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसका सम्मान करते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंप दिया। महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय राउत द्वारा सिद्धारमैया के इस बयान और फैसले को इतनी प्रमुखता देना, महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर भविष्य में होने वाले गठबंधन और सामूहिक निर्णयों के लिए एक सकारात्मक संकेत देने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
BMC के फैसले से मचा बवाल, बकरीद से पहले मुंबई में गरमाया माहौल
28 May, 2026 03:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में बकरीद के त्योहार से ठीक पहले कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिल रही है। इस बीच एक नया मामला मुंबई के गोरेगांव क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ गोरेगांव पूर्व में स्थित गोकुलधाम के सैटेलाइट गार्डन फेज-1 की आजाद नगर डी-3 इमारत के परिसर में कुर्बानी के लिए एक शेड बनाया गया था, जहाँ बकरे भी लाकर रखे गए थे। हालांकि, त्योहार से ऐन एक रात पहले बीएमसी (BMC) ने सोसाइटी परिसर के भीतर बकरे रखने और कुर्बानी देने की दी गई अनुमति को अचानक रद्द कर दिया।
बीजेपी नगरसेविका ने नियमों का हवाला देकर जताई आपत्ति
इस मामले में स्थानीय बीजेपी नगरसेविका प्रीति साटम ने वार्ड ऑफिसर को एक शिकायत पत्र सौंपकर इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। अपने पत्र में नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने लिखा कि इस रिहायशी सोसाइटी के बिल्कुल पास में ही एक स्कूल और हिंदू धार्मिक स्थल मौजूद है। ऐसी जगह पर सोसाइटी के अंदर कुर्बानी की इजाजत देना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है। इस विरोध के बावजूद सोसाइटी परिसर में बकरे रखे गए हैं।
मुस्लिम समुदाय का आरोप: 'बीजेपी के दबाव में हुआ फैसला'
दूसरी तरफ, स्थानीय मुस्लिम समाज ने इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राजनीतिक दबाव के कारण ही बीएमसी ने आखिरी वक्त पर यह परमिशन रद्द की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन पिछले दो सालों से उनके साथ ऐसा ही बर्ताव किया जा रहा है, जो सरासर नाइंसाफी है।
त्योहार मनाने को लेकर उठे सवाल और नाराजगी
परमिशन रद्द होने से नाराज मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा, "क्या संविधान में यह लिखा है कि मुसलमान अपना त्योहार नहीं मना सकते? जब बाकी सभी धर्मों के लोग अपने-अपने त्योहार मनाते हैं, तो हमारे त्योहार मनाने से लोगों को क्या परेशानी है? कोई किसी के घर में झांकने नहीं जाता कि वहां क्या पक रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि जब सड़क पर लोग भूख से दम तोड़ते हैं, तब कोई राजनेता या बड़ा आदमी मदद के लिए आगे नहीं आता, लेकिन त्योहारों के वक्त राजनीति शुरू हो जाती है।
बीएमसी ने 119 जगहों पर दी मंजूरी, दो जगहों पर हुआ विरोध
इस पूरे विवाद पर उप महापौर संजय घड़ी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि बीएमसी ने इस साल बकरीद की कुर्बानी के लिए शहर भर में 119 ठिकानों को चिन्हित कर अनुमति दी है। उन्होंने जानकारी दी कि गोरेगांव और घाटकोपर, दो ऐसे इलाके थे जहाँ हाउसिंग सोसाइटी के परिसर के भीतर बकरे लाकर कुर्बानी देने की योजना थी। लेकिन स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों के विरोध व आपत्तियों को देखते हुए प्रशासन ने इन दोनों जगहों पर दी गई इजाजत को वापस ले लिया है।
पीवी सिंधू की वापसी के पीछे विराट कोहली की प्रेरणा, पति ने किया बड़ा खुलासा
NDA बैठक में जुटे सांसद, पीएम मोदी के सम्मान के साथ नए चेहरों का अभिनंदन
कीचड़ और दलदल से जूझ रहे लोग, सीएम ग्रिड निर्माण के कारण इन रास्तों पर बढ़ा खतरा
सीट बंटवारे को लेकर भाजपा और सहयोगी दलों में मंथन, सपा-रालोद मॉडल पर हो रही चर्चा
चार बड़े कारणों से फिसला बाजार, Sensex में गिरावट और Nifty पर दबाव
प्रोटेस्ट के दौरान उपद्रव पर बड़ा एक्शन, CJP मामले में FIR का सिलसिला शुरू
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