महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: दुकान में घुसकर युवक ने लहंगे पर निकाला गुस्सा, दी जान से मारने की धमकी
21 Jul, 2025 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र के कल्याण से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां कपड़े की दुकान में एक युवक ने गुस्से में दुकानदार के सामने 32 हजार रुपये का लहंगा फाड़ दिया. गुस्साए युवक ने दुकान में चाकू निकाला और दुकानदार को धमकाया. इतना ही नहीं उसने दुकानदार से फिरौती भी मांगी. ये पूरी घटना कल्याण पश्चिम स्थित ‘कलाक्षेत्र’ नामक फैशन स्टोर में हुई.
यहां 32,000 रुपये का लहंगा वापस न कर पाने से नाराज एक ग्राहक (युवक) दुकान पर आया. फिर चाकू निकालकर लहंगा फाड़ दिया और दुकानदार को धमकी दी. इस घटना को लेकर बाजारपेठ पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है. फैशन स्टोर पर ग्राहक और दुकानदार के बीच ये विवाद 19 जुलाई को हुआ.
लहंगा नहीं आया पसंद
दरअसल, कल्याण पश्चिम की निवासी मेघना मखीजा ने अपनी शादी के लिए 17 जून, 2025 को ‘कलाक्षेत्र’ स्टोर से करीब 32,300 का एक लहंगा खरीदा था. घर पहुंचने पर मेघना को वह लहंगा पसंद नहीं आया और उन्होंने दुकानदार को वापस करने के लिए संपर्क किया. दुकानदार ने बताया कि रिटर्न की सुविधा नहीं है, लेकिन उन्होंने मेघना को 31 जुलाई, 2025 तक का समय दिया कि वह उसी कीमत का कोई अन्य सामान खरीद सकती हैं.
दुकान पर जाकर जमकर हंगामा किया
19 जुलाई, 2025 को मेघना लहंगा वापस करने दुकान पर पहुंचीं. दुकानदार ने एक बार फिर नियमों को स्पष्ट करते हुए कहा कि लहंगा वापस नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसके बदले उसी कीमत का कोई और वस्त्र लिया जा सकता है. उस समय मामला शांत हो गया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद, मेघना का मंगेतर सुमित सयानी दुकान पर पहुंचा. मामूली बात पर दुकानदार से उसकी बहस हो गई. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि सुमित ने अचानक अपनी जेब से चाकू निकाला और दुकान के बीचो-बीच उस 32,300 के लहंगे को फाड़ डाला.
इतना ही नहीं, सुमित ने दुकानदार को धमकी दी, “इसी लहंगे की तरह ही तुमको भी फाड़ डालूंगा!” इसके बाद उसने दुकानदार से 3 लाख की फिरौती भी मांगी और धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए, तो दुकान की सोशल मीडिया पर धज्जियां उड़ा देगा. इस धमकी और तोड़फोड़ से घबराए दुकानदार प्रवीण समतानी ने तुरंत कल्याण के बाजारपेठ पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई.
इन धाराओं में केस दर्ज
इस घटना से दुकानदार प्रवीण समतानी और उनके कर्मचारियों में डर का माहौल है. वहीं घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने सुमित के खिलाफ भारतीय न्याय सहिंता धारा 352, 324(5), 351(3), 425 और मुंबई पुलिस एक्ट की धारा 37(1), 135 के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस घटना को लेकर आगे की जांच कर रही है.
सेंट्रल रेलवे सबसे खतरनाक, 17 हजार से ज़्यादा मौतें दर्ज
19 Jul, 2025 03:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन अब बन रही हजारों लोगों की मौत का कारण
आरटीआई से सामने आए भयावह आंकड़े, सेंट्रल रेलवे में सबसे अधिक हादसे
मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र में रेल पटरियों पर हो रही मौतों का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। जनवरी 2015 से मई 2025 के बीच कुल 26,547 लोगों की मौत रेलवे ट्रैक पर हुई है। यह जानकारी एक सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के माध्यम से सामने आई है।
ट्रैक पार करना बना सबसे बड़ा कारण
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 14,175 मौतें ट्रैक पार करते समय हुईं। इसके अलावा चलती ट्रेन से गिरना और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी प्रमुख कारण रहे। केवल इन तीन वजहों से ही लगभग 25,000 लोगों की जान गई है। अन्य कारणों में बिजली का झटका, प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसना, आत्महत्या और प्राकृतिक मौतें शामिल हैं।
सेंट्रल रेलवे में सबसे ज़्यादा मौतें
सेंट्रल रेलवे के तहत सबसे अधिक 17,212 मौतें दर्ज की गईं, जो इसके बड़े नेटवर्क को देखते हुए गंभीर चिंता का विषय है। वर्ष 2015 में सबसे ज़्यादा 3,304 और कोविड-काल 2020 में सबसे कम 1,116 मौतें हुईं।
मुंब्रा हादसे से उजागर हुई लापरवाही
यह आरटीआई उस हादसे के बाद दाखिल की गई थी, जिसमें मुंब्रा स्टेशन के पास 5 यात्रियों की चलती ट्रेन से गिरकर मौत हो गई थी। इस दुर्घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
'जीरो डेथ मिशन' पर उठे सवाल
रेलवे प्रशासन का दावा है कि 'जीरो डेथ मिशन' के तहत कई प्रयास किए गए हैं—जैसे फुट ओवरब्रिज, प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाना, एस्केलेटर और लिफ्ट, फेंसिंग, और अतिक्रमण हटाना—लेकिन ये प्रयास नतीजे देने में असफल साबित हो रहे हैं।
स्थायी समाधान की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए अब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करना ही काफी नहीं होगा। ट्रैक पार करने पर सख्त जुर्माना, जनजागरूकता अभियान, और स्थायी संरचनात्मक बदलाव समय की मांग हैं।
मराठी बनाम हिंदी विवाद पर उद्धव ठाकरे का जवाब – ‘भाषा से नहीं, बर्ताव से होता है विवाद’
18 Jul, 2025 09:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषा विवाद पर एक दिन पहले कहा था कि राज्य में त्रिभाषा फॉर्मूले में हिंदी लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार नए सिर से गठित समिति की रिपोर्ट पर फैसला लेगी। सीएम फडणवीस के बयान बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफकिया है कि जबरदस्ती हिंदी को लागू नहीं करने देंगे। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में उद्धव ठाकरे ने कहा कि .मैं मेरी भावनाओं पर कायम हूं। हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन सख्ती हम नहीं लागू करने देंगे। फडणवीस ने एक दिन पहले कहा था कि त्रिभाषा सूत्र 100% लागू होगा। कांग्रेस की तरफ से राज्य में मराठी पाठशाला की मांग की जा रही है। इसके जवाब में पिछले दिनों नितेश राणे भड़क गए थे। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में मदरसे बहुत हैं। वहां पर मराठी चालू करवाओ।
फिर छिड़ गया भाषा का विवाद
महराष्ट्र में छिड़े हिंदी-मराठी भाषा विवाद के बाद उद्धव ठाकरे ने अपने भाई राज ठाकरे केसाथ वर्ली में मंच को साझा किया था। इस कार्यक्रम में दोनोंने कहा था कि वे मराठी अस्मित के मुद्दों पर एक साथ आए हैं। महाराष्ट्र में भाषा विवाद के बढ़ने पर पहले फडणवीस सरकार ने स्कूलों में त्रिभाषा के तहत हिंदी अनिवार्य किए जाने के आदेश को वापस ले लिया था। इसे बाद सरकार ने एक समिति का गठन किया था। जो यह देख रही है कि त्रिभाषा को कैसे लागू किया जाए। फडणवीस ने कहा था कि तेलगु और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए छात्र नहीं मिलते हैं। ऐसे में हिंदी ही सिर्फ तीसरी भाषा हो सकती है। फडणवीस त्रिभाषा सूत्र के संदर्भ में नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। इसी बीच उद्धव और राज ने कहा है कि उन्हें हिंदी भाषा से विरोध नहीं है, लेकिन अगर हिंदी थोपी गई तो वे यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। गौरतलब हो कि मराठी भाषा नहीं बोलने पर मनसे के कार्यकर्ताओं ने मीरा रोड 29 जून को एक मारवाड़ी बिजनेसमैन को पीटा था। इसकी काफी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
महाराष्ट्र विधानसभा में झड़प के बाद आगंतुकों की एंट्री पर रोक
18 Jul, 2025 04:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र में विधानसभा परिसर में झड़प का मामला अब सियासी रूप ले चुका है. इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे विधान भवन पहुंचने वाले लोगों की पहचान भी हो रही है. इसमें नितिन देशमुख का नाम तेजी से चर्चा में आया है. आरोप लगाया जा रहा है कि बीजेपी विधायक गोपीचंद पडलकर ने नितिन देशमुख को वहां बुलाया था. अब इस मामले के जांच अधिकारी कोर्ट में दलील पेश करते हुए नितिन देशमुख की 7 दिन की कस्टडी की मांग की है.
जांच अधिकारी ने कहा कि नितिन देशमुख ने गैर कानून तरीके से विधान भवन परिसर में भीड़ इकट्ठा की थी और दूसरे पक्ष के सर्जराव टकले के बीच झड़प हुई. सर्जराव टकले पर 6 केस पहले से दर्ज है जबकि नितिन देशमुख पर 7 केस दर्ज है. टकले के पास विधान भवन का पास नहीं था. पुलिस का मानना है कि कुछ दिन पहले हुई झड़प को लेकर पुलिस को शक है कि प्लान करके इस घटना को अंजाम दिया गया है. पुलिस ने अदालत से 7 दिनों की कस्टडी की मांग की.
पुलिस ने आरोपियों के व्हाट्सएप चैट्स का किया जिक्र
अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के व्हाट्सएप चैट्स का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पास डिजिटल एविडेंस है कि विधान भवन की घटना को प्लान करके किया गया. वहीं, डिफेंस पक्ष ने अदालत में दलील दी की यह आकस्मिक घटना है. इसमें कोई प्लानिंग नहीं है. दोनों के बीच विवाद हुआ जिसके बाद यह घटना हुई. इसमें कोई बड़ी साजिश जैसा कुछ नहीं है.
गुरुवार को विधानसभा की लॉबी में जोरदार हंगामा हुआ, बीजेपी विधायक गोपीचंद पडलकर और एनसीपी विधायक जितेंद्र आव्हाड के समर्थक आपस में भिड़ गए, बात गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गई. चूंकि यह हंगामा विधानसभा की लॉबी में हुआ था, इसलिए अब इस मामले को विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने गंभीरता से लिया है. इस हंगामे के बाद राहुल नार्वेकर ने विधायकों को खरी-खोटी सुनाई है, साथ ही एक बड़ा फैसला भी लिया है.
विधानसभा में आगंतुकों के प्रवेश पर रोक
राहुल नार्वेकर ने फैसला किया है कि अब से विधानसभा में आगंतुकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में विधायकों का व्यवहार चिंता का विषय है, हमें पद की शपथ लेते समय संविधान का गंभीरता से पालन करना होगा. इसलिए, अब से केवल विधायकों और उनके अधिकृत निजी सहायकों को ही विधानसभा में प्रवेश की अनुमति होगी.
साथ ही ज्यादातर मंत्री विधानमंडल में बैठकें करते हैं, लेकिन अब मंत्रियों को भी निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे अपनी बैठकें मंत्रालय में ही करें. नार्वेकर ने यह भी कहा कि अगर असाधारण परिस्थितियों में बैठक होती है, तो आगंतुकों को अनुमति नहीं दी जाएगी.
18वीं मंजिल से गिरा युवक, टॉयलेट के लिए निकला था कमरे से बाहर
18 Jul, 2025 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : महाराष्ट्र के मुंबई से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. यहां 55 साल का शख्स टॉयलेट करने के लिए 18वीं मंजिल पर निर्माणाधीन लिफ्ट के पास गया. वहां उसका बैलैंस बिगड़ा और वो 18वीं मंजिल से गिर गया. आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया. मगर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
मृतक की पहचान प्रकाश शिंदे के तौर पर हुई है. बताया जा रहा है कि शिंदे पिछले कुछ दिन से वडाला में रहने वाली अपनी बहन के घर में ठहरे हुए थे. इस बीच वह डायरिया (दस्त) की बीमारी कि चपेट में आ गए. मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि रविवार को घटना के समय शिंदे शौच के लिए जाना चाहते थे, लेकिन फ्लैट में मौजूद वॉशरूम में पहले से ही परिवार का कोई सदस्य गया हुआ था. इस वजह से मजबूरन शिंदे इमारत के उस हिस्से में चले गए जहां लिफ्ट का काम चल रहा था.
पुलिस के अनुसार, उन्होंने लिफ्ट के गड्ढे के पास शौच किया और जब उठने की कोशिश कर रहे थे, तभी संतुलन बिगड़ने से वे सीधे 18वीं मंजिल से लिफ्ट की शाफ्ट में जा गिरे. घटना की सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और उन्हें बाहर निकाला गया। उन्हें तुरंत परेल के केईएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
परिवार का साजिश की आशंका से इनकार
इस संबंध में आरएके मार्ग पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. एक अधिकारी ने बताया कि परिजनों ने किसी भी तरह की साजिश की आशंका से इनकार किया है. इस वजह से मामले में दुर्घटनावश मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की गई है.
किसकी लापरवाही से हुआ हादसा?
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निर्माणाधीन क्षेत्र तक पीड़ित कैसे पहुंचा और किसकी लापरवाही से यह जानलेवा हादसा हुआ. पुलिस हर एंगल से मामले की आगे की जांच कर रही है. वहीं, इस घटना के बाद से मृतक के परिजनों में शोक व्याप्त है.
छांगुर बाबा के साम्राज्य पर जांच एजेंसियों की नजर, ED पहुंची मुंबई के ठिकानों पर
17 Jul, 2025 08:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: धर्मांतरण और हवाला ट्रांजैक्शन मामले में छांगुर बाबा का नाम विदेशी फंड से जुड़ने के बाद ईडी ने देश भर के 14 ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें से मुंबई के दो स्थान पर भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया। करोड़ों रुपए की हेराफेरी की बात सामने आने के बाद बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को मुंबई के बांद्रा और माहिम में सर्च ऑपरेशन किया। यह सर्च ऑपरेशन छांगुर बाबा के करीबी माने जाने वाले शहजादा के मुंबई निवास स्थान पर हुई।
मुंबई तक कैसे पहुंची जांच
सूत्रों के मुताबिक ईडी के दर्जन भर अधिकारी सुबह 5 बजे ही बांद्रा स्थित कनकिया पेरिस इमारत पर पहुंच गए थे। शहजादा के खाते में 2 करोड़ का ट्रांजैक्शन मिलने के बाद जांच की आंच मुंबई तक पहुंची थी। शहजादा के खाते में नवीन के बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर हुए थे। नविन भी छांगुर बाबा का करीबी माना जाता है। देश भर में कुल 14 ठिकानों पर एक साथ यह सर्च ऑपरेशन चलाया गया। सूत्रों की मानें तो अब तक ED को छांगुर बाबा के 18 बैंक अकाउंट्स की जानकारी मिली है। इनमें 68 -70 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
हवाला नेटवर्क की जांच
सूत्रों के अनुसार, इस रकम का इस्तेमाल छांगुर नेटवर्क की गतिविधियों और धर्मांतरण के लिए किया गया। ED अब मुंबई से लेकर बलरामपुर तक इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। ताकि मनी लॉन्ड्रिंग और कथित अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की जांच आगे बढ़ाई जा सके। छांगुर के हवाला नेटवर्क की जांच में अब तक 18 बैंक खातों का पता चला है।
कुछ खातों में 7-8 करोड़ रुपये का लेनदेन
पिछले तीन महीनों में ही कुछ खातों में 7-8 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। एजेंसियों के मुताबिक, छांगुर का नेटवर्क यूएई, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों तक फैला हुआ है। इन देशों के पांच बैंक अकाउंट्स के जरिए विदेशी फंडिंग की गई । विदेशों से कब, कितना और कहां पैसा भेजा गया, इसकी जांच जारी है।
महाराष्ट्र विधानसभा में आव्हाड-पडलकर समर्थकों की झड़प, सीढ़ियों पर मची अफरा-तफरी
17 Jul, 2025 07:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी एसपी के विधायक जितेंद्र आव्हाड और बीजेपी विधायक गोपीचंद पडलकर के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को आव्हाड और पडलकर समर्थकों ने विधान भवन में जमकर हंगामा किया। दोनों के कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई भी हुई। ये समर्थक विधान भवन की सीढ़ियों के पास भिड़ गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना विधान भवन परिसर में हुई। एक दिन पहले गोपीचंद पडलकर और आव्हाड के बीच तीखी बहस हुई थी। यह मामला गाली-गलौज तक बढ़ गया था। उसके बाद अब दोनों के कार्यकर्ता विधान भवन में आपस में भिड़ गए हैं। दोनों के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई और उन्होंने एक-दूसरे को गालियां भी दीं।
क्या हुआ?
इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई में इस समय मॉनसून सत्र चल रहा है। इसी बीच गुरुवार (17 जुलाई) दोपहर करीब 12 बजे गोपीचंद पडलकर और आव्हाड के कार्यकर्ता विधान भवन की सीढ़ियों के पास थे। इस दौरान उनके बीच हाथापाई हो गई। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को गालियां दीं और मारपीट की। हाथापाई हुई। मामला बढ़ता देख विधान भवन क्षेत्र में मौजूद सुरक्षा गार्डों ने बीच-बचाव कर विवाद सुलझाने की कोशिश की। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की गई। करीब पांच से दस मिनट तक विवाद चलता रहा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के साथ मारपीट और गाली-गलौज भी की।
जितेंद्र आव्हाड ने क्या कहा?
इस घटना के बाद जितेंद्र आव्हाड मीडिया के सामने आए। जब पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछे, तो उन्होंने पूछा कि हमला किसने किया? पत्रकारों ने कहा कि पडलकर समर्थकों ने किया। इसके बाद जितेंद्र आव्हाड भड़क गए। आव्हाड ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र ने देखा कि हमला किसने किया? हम इससे ज्यादा सबूत नहीं देना चाहते। अगर आप गुंडों को विधानसभा में घुसने देंगे, अगर वे हम पर हमला करेंगे, तो हमारे लोग सुरक्षित नहीं हैं। आव्हाड ने कहा कि उन्होंने मुझे गालियां दीं। जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने यह भी कहा कि वे सभी मुझे मारने आए थे।
विधायक विधान भवन में सुरक्षित नहीं
आव्हाड ने कहा कि अगर विधायक विधान भवन में सुरक्षित नहीं हैं, तो विधायक क्यों रहें, हमारा क्या गुनाह है? आव्हाड काफी गुस्से में नजर आए और कहा कि सत्ता इतनी मजबूत है, इतना अहंकारी है।
मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, BJP-UBT के बीच फिर नजदीकियां?
17 Jul, 2025 06:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ आया है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के बीच मुलाकात हुई है। यह मुलाकात फडणवीस के एक हल्के-फुल्के बयान के बाद हुई। इसमें उन्होंने उद्धव ठाकरे को सत्ता पक्ष में आने का न्योता दिया था। इस मुलाकात और फडणवीस के बयान ने राज्य की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। क्या शिवसेना (UBT) और बीजेपी फिर से साथ आ सकते हैं? क्या महाराष्ट्र में कोई नया राजनीतिक समीकरण बनने वाला है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिल सकते हैं।
देवेंद्र फडणवीस के उद्धव ठाकरे को सत्ता पक्ष में आने के न्योते के बाद गुरुवार को दोनों नेताओं ने मुलाकात की। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, फडणवीस और ठाकरे की यह मुलाकात विधान परिषद के अध्यक्ष राम शिंदे के कार्यालय में हुई। यह मुलाकात लगभग 20 मिनट तक चली। इससे पहले बुधवार को फडणवीस ने कहा था कि ठाकरे अलग तरीके से सत्ता पक्ष में आ सकते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा को संबोधित करते हुए CM ने कहा कि 2029 तक BJP के विपक्ष में आने की कोई संभावना नहीं है।
महाराष्ट्र सड़क हादसा: नासिक में बेकाबू कार ने बाइक को मारी टक्कर, 7 मृत
17 Jul, 2025 05:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासिक: महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक भीषण सड़क हादसे में सात लोगों की जान चली गई। इस हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने हादसे की जानकारी देते हुए बताया कि दुर्घटना वानी-दिंडोरी रोड पर दिंडोरी शहर की एक नर्सरी के पास हुई। जहां एक कार और मोटरसाइकिल की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों गाड़ियां सड़क के किनारे एक छोटी नहर में गिर गईं।
पुलिस को बुधवार रात 11:57 बजे दुर्घटना की सूचना मिली। पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई। दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस और आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दोनों वाहन सड़क के किनारे एक छोटी नहर में गिरे हुए थे।
एसपी ने क्या बताया
नासिक के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के मुताबिक, ये हादसा देर रात 12 बजे के करीब वाणी-डिंडोरी रोड पर हुआ। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो दोनों वाहन सड़क के किनारे एक छोटी सी नहर में गिरे हुए मिले। पुलिस ने नहर से शवों को बाहर निकाला और कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। साथ ही हादसे में घायल हुए दोनों लोगों को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया है। फिलहाल घटना की जांच जारी है और पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
19 जून को भी हुआ था भीषण सड़क हादसा
इससे पहले, 19 जून को महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित जेजुरी मोरगांव रोड पर एक कार और पिकअप ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई थी। इस भीषण हादसे में एक महिला समेत आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुणे सड़क हादसे पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख जताया था। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया था।
चलती बस में जन्मी मासूम जिंदगी, मां ने रास्ते में फेंक दी; घटना से यात्रियों में हड़कंप
17 Jul, 2025 05:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे : महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पाथरी पुलिस ने एक दंपत्ति पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 94 के तहत मामला दर्ज किया है। महिला ने चलती बस में बच्चे को जन्म दिया और उसके बाद बच्चे को कपड़े में लपेटकर चलती बस की खिड़की से बाहर फेंक दिया। पुलिस ने दंपत्ति को नोटिस जारी कर फिलहाल छोड़ दिया है। पाथरी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर महेश लांडगे ने इस घटना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना मंगलवार सुबह करीब 6 बजे हुई। दंपत्ति पुणे से एक प्राइवेट बस में परभणी जा रहे थे। नवजात शिशु मृत पाया गया था।
कपल है दिहाड़ी मजदूर
इंस्पेक्टर लांडगे ने दंपत्ति के बयान का हवाला देते हुए बताया कि वे पुणे के चाकन औद्योगिक क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं। उनका कहना है कि बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ था। उन्हें डर था कि इससे कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं। इसलिए उन्होंने बच्चे को ठिकाने लगाने का फैसला किया। प्रारंभिक जांच के दौरान, महिला ने बताया कि उसने पाथरी तालुका के देवनंद्रा गांव के पास चलती बस में बच्चे को जन्म दिया।
देवनंद्रा के पास हुई डिलीवरी
यह विवाहित जोड़ा पुणे से परभणी जा रहा था। उन्होंने सोमवार रात पुणे से एक प्राइवेट बस पकड़ी थी। जैसे ही बस देवनंद्रा के पास पहुंची, महिला को प्रसव पीड़ा हुई और उसने बस के अंदर ही बच्चे को जन्म दिया। कुछ ही मिनटों बाद, उसने नवजात शिशु को गहरे नीले और भूरे रंग के कपड़ों में लपेटा और कथित तौर पर चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया। एक स्थानीय निवासी ने यह सब देखा और तुरंत पाथरी पुलिस को सूचित किया। कांस्टेबल अमोल जायसवाल के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने बस का पीछा किया और उसे रोका। दंपत्ति को बस से उतारा गया और महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस को शक है कि यह जानबूझकर किया गया कृत्य था, जिसका मकसद बच्चे को त्यागना और उसे ठिकाने लगाना था। दंपत्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 94(3) और 94(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धाराएं बच्चे के शव को गुप्त रूप से ठिकाने लगाकर जन्म को छिपाने से संबंधित हैं।
पुणे से परभणी जा रहे थे दंपति
पुलिस ने दंपति को नोटिस जारी किए हैं और औपचारिक जांच शुरू कर दी है। इस घटना के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। पुलिस इंस्पेक्टर महेश लांडगे ने बताया कि ये घटना मंगलवार की सुबह हुई। ये जोड़ा पुणे से परभणी जा रहा था। बच्चे की लाश मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि बच्चे की मौत कैसे हुई। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
मरा बच्चा पैदा होने का दावा
पुलिस के अनुसार, पति-पत्नी ने बताया कि वे पुणे में मजदूरी करते हैं। उनका कहना है कि बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ था। उन्हें डर था कि पुलिस में शिकायत करने से वे मुसीबत में फंस जाएंगे। इसलिए उन्होंने बच्चे को फेंक दिया। महिला ने पुलिस को बताया कि उसने बस में ही बच्चे को जन्म दिया था।
चलती बस से ही फेंका
ये जोड़ा पुणे से परभणी जा रहा था। रास्ते में महिला को दर्द हुआ और उसने बस में ही बच्चे को जन्म दिया। फिर उन्होंने बच्चे को कपड़ों में लपेटा और बस से बाहर फेंक दिया। एक आदमी ने ये सब देख लिया और पुलिस को बता दिया। पुलिस ने बस को रोका और उस जोड़े को पकड़ लिया। महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस को लगता है कि इन्होंने जानबूझकर बच्चे को फेंका है। पुलिस ने इन पर IPC की धारा 94(3) और 94(5) लगाई है। ये धाराएं बच्चे के शव को छिपाने से संबंधित हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
रेलवे की नई सौगात: पुणे से हाई-स्पीड वंदे भारत कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
16 Jul, 2025 09:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेल यात्रियों को बड़ी सौगात, पुणे से चलेंगी चार नई वंदे भारत ट्रेनें
मुंबई।
महाराष्ट्र के पुणे शहर के यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। रेलवे जल्द ही पुणे से चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू करने जा रहा है, जिससे हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी को नया बल मिलेगा। इन ट्रेनों से न सिर्फ यात्रा तेज और आरामदायक होगी, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराज्यीय विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, पुणे से शुरू होने वाली ये चार वंदे भारत ट्रेनें शेगाव, वडोदरा, सिकंदराबाद और बेलगावी के लिए प्रस्तावित हैं। हालांकि, रेलवे द्वारा इन ट्रेनों की औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन जल्द ही इसके संचालन की तारीखों की जानकारी दी जा सकती है।
धार्मिक यात्रा के लिए पुणे-शेगाव वंदे भारत
यह ट्रेन विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी होगी। पुणे से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संत गजानन महाराज के दर्शन के लिए शेगाव जाते हैं। ट्रेन दौंड, अहिल्यानगर, छत्रपति संभाजीनगर, और जालना जैसे स्टेशनों पर रुक सकती है।
व्यवसायियों के लिए पुणे-वडोदरा वंदे भारत
यह ट्रेन महाराष्ट्र और गुजरात के बीच यात्रा को तेज बनाएगी। वर्तमान में यह सफर लगभग 9 घंटे का है, जिसे वंदे भारत 6-7 घंटों में पूरा कर सकती है। संभावित स्टॉपेज: लोनावला, पनवेल, वापी, और सूरत। यह रूट खासकर व्यापारियों और नौकरीपेशा यात्रियों के लिए उपयोगी रहेगा।
आईटी प्रोफेशनल्स को फायदा: पुणे-सिकंदराबाद वंदे भारत
दौंड, सोलापुर और गुलबर्गा होते हुए सिकंदराबाद तक की यात्रा अब 2 से 3 घंटे कम समय में पूरी हो सकेगी। यह ट्रेन विशेषकर आईटी और बिजनेस ट्रैवलर्स के लिए बेहद सुविधाजनक होगी, साथ ही महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।
कर्नाटक को भी फायदा: पुणे-बेलगावी वंदे भारत
इस रूट की वंदे भारत सातारा, सांगली, और मिरज जैसे स्टेशनों पर रुक सकती है। इससे पुणे और कर्नाटक के उत्तरी जिलों के बीच संपर्क अधिक तेज और सुलभ बनेगा। यात्रियों का सफर 2-3 घंटे तक कम हो सकता है।
पुणे-नागपुर स्लीपर वंदे भारत पर भी काम शुरू
रेलवे की योजना पुणे और नागपुर के बीच स्लीपर वंदे भारत ट्रेन शुरू करने की भी है। इससे पुणे (सांस्कृतिक राजधानी) और नागपुर (उप-राजधानी) के बीच व्यापार, शिक्षा और पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष:
इन चार वंदे भारत ट्रेनों के शुरू होने से पुणे की रेलवे कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा। यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर के साथ समय की भी बड़ी बचत होगी।
उर्दू हटाओ, मराठी लाओ: मदरसों को लेकर नितेश राणे का बयान बना सियासी मुद्दा
16 Jul, 2025 01:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी भाषा विवाद के बीच फडणवीस सरकार में मंत्री नितेश राणे ने बड़ा बयान दिया है। राणे ने कहा है कि मदरसों में मराठी पढ़ाई जानी चाहिए। राणे ने यह बयान मनसे द्वारा मराठी नहीं बोलने पर हिंदुओं की पिटाई और कांग्रेस द्वारा मराठी पाठशाला की मांग पर दिया है। राणे ने कहा है कि मदरसों में उर्दू की जगह मराठी चालू करो। इतना ही नहीं मुसलमानों को अजान भी मराठी में देनी चाहिए। नितेश राणे ने दावा किया कि वहां बंदूक चलाने वाले मिलते हैं। वहां उर्दू की जगह मराठी पढ़ाई जानी चाहिए। इससे पिहले नितेश राणे ने मनसे को मोहम्मद अली रोड पर जाकर टोपी वालों को मराठी बुलवाने की चुनौती दी थी। मराठी नहीं बोलने पर हिंदुओं की पिटाई पर नितेश राणे ने नौटंकी करार दिया था।
नितेश राणे ने रखी नई मांग
मीर रोड पर मारवाड़ी व्यापारी की पिटाई के बाद नितेश राणे ने खुद को हिंदुओं का चौकीदार बताया था। तब राणे ने कहा था कोई भी हिंदुओं को नहीं डरा सकता है। राणे ने यह नई मांग ऐसे वक्त पर रखी है जब महाराष्ट्र विधानमंडल का सत्र चल रहा है। इतना ही नहीं त्रिभाषा फॉर्मूले पर महायुति सरकार पहले ही पीछे हट चुकी है। सरकार ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के विरोध के बाद महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदू को अनिवार्य करने के आदेश को वापस ले लिया था। नितेश राणे की मांग पर महाराष्ट्र में नए सिरे से हंगामा हो सकता है। मीरा रोड पर मनसे के कार्यकर्ताओं ने एक मारवाड़ी व्यापारी को मराठी नहीं बोलने पर पीटा था। इसके बाद पालघर वसई विरार में ऐसी घटना सामने आई थी।
नौटंकी की जरूरत नहीं है
नितेश राणे का मदरसे पर दिया गया बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह कह रहे हैं कि मदरसा में उर्दू की जगह मराठी पढ़ाई जाए। अलग पाठशाला की जरूरत नहीं है। न ही मीडिया में न नौटंकी करने की जरूरत पड़ेगा। राणे ने कहा कि महाराष्ट्र में काफी मदरसा है। गौरतलब हो कि राज ठाकरे ने वर्ली के कार्यक्रम में कहा था कि अगर कोई नौटंकी करेगा और मराठी नहीं बोलेगा तो उसके कान नीचे मारा, लेकिन ऐसा करते हुए वीडियो न बनाए। नितेश राणे का बयान तेजी से वायरल हो रहा है।
आर्यन खान केस में घिरे समीर वानखेड़े बोले – 'सोशल मीडिया बना चुका है प्रोपेगेंडा का अड्डा'
15 Jul, 2025 06:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग केस में रिश्वत के आरोपों का सामना कर रहे समीर वानखेड़े ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए हुए एक इंटरव्यू में कहा है कि फैन क्लब उसी तरह से काम कर रहे हैं जो हिटलर के लिए गोएबल्स की भूमिका थी। वानखेड़े ने कहा है कि फैन क्लब चीजों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। वानखेड़े ने सोशल मीडिया पर मौजूद फैन क्लब पर बोलते हुए कहा कि हिटलर के जमाने में जोसेफ गोएबल्स झूठी खबरें फैलाते थे। उन्होंने ही ये तरीका निकाला था कि आप इतनी बार झूठ बोलें कि लोग उसे सच मानने लगें। आज भी ऐसा कई बार होता है। दर्शकों को ही ये तय करना होगा कि क्या सच है और क्या झूठ? समीर वानखेड़े का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब पिछले हफ्ते सीबीआई के वकील ने कोर्ट मे कहा था कि जांच एजेंसी अगले तीन महीने में रिश्वत मामले में जांच पूरी करेगी।
समीर वानखेड़े का छलका दर्द
समीर वानखेड़े ने कहा जनता को भी खबरों को सावधानी से देखना होगा। कि एक शख्स अपने फैन क्लबों के ज़रिए किस तरह नैरेटिव पर हावी हो जाता है। समीर वानखेड़े ने आगे बताया कि फैन क्लबों द्वारा निशाना बनाए जाने का लोगों और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मैं इससे गुजरा हूं। ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता नहीं था, लेकिन अब वे इसके बारे में बात कर रहे हैं। मैं इससे बहुत खुश हूं। उन्हें कोई सीमा नहीं पता, वे बिना किसी सीमा के महिलाओं और बच्चों के बारे में गंदी बातें कहते हैं। मैं इससे गुजरा हूं। इसने मुझे मजबूत बनाया है, लेकिन हर कोई इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। वे अवसाद में जा सकते हैं।
वानखेड़े बोले-कानून की नहीं जानकारी
समीर से पूछा गया कि कैसे अमीर लोगों ने सोशल मीडिया पर फ़ैन क्लबों में लाखों रुपये निवेश किए हैं। जो लोगों को गुमराह करके यह विश्वास दिलाते हैं कि देश उनके साथ है लेकिन साइबर सेल ऐसे फैन क्लबों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है? इस सवाल के जवाब में वानखेड़े ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि इसके लिए एक आईटी अधिनियम है। कुछ मामले भी सामने आए हैं, लेकिन यह एक बहुत ही नया अधिनियम है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विकसित हो रहे हैं और साथ ही क़ानून भी। वानखेड़े ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम इन चीज़ों की पहचान करें। इसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई करें। समीर वानखेड़े 2021 में आर्यन खान की गिरफ़्तारी में शामिल थे। उन्होंने शाहरुख खान के बेटे आर्यन को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने एक कथित ड्रग्स रैकेट के सिलसिले में गिरफ़्तार किया था। समीर उस समय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर थे।
जनहित में सरकार के खिलाफ लड़ने वाले ज़रूरी’ – गडकरी का बड़ा बयान
14 Jul, 2025 01:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरकार पर अंकुश जरूरी, नहीं तो बढ़ेगी मनमानी: गडकरी ने खुद की सरकार को दी नसीहत
नागपुर: केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर बेबाक टिप्पणी करते हुए कहा कि “सरकार में बैठे मंत्री कई बार मनमानी करते हैं, और ऐसे में सरकार पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।” नागपुर में आयोजित प्रकाश देशपांडे स्मृति कुशल संगठक पुरस्कार समारोह में बोलते हुए गडकरी ने कहा, “सरकार की नीतियों और फैसलों पर अंकुश लगाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले लोग और संस्थाएं समाज के लिए जरूरी हैं।”
गडकरी ने कहा, “सरकार को कई बार अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ता है, क्योंकि कुछ सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन कानूनी रास्ता अपनाकर जनहित के मुद्दों पर सरकार को चुनौती देते हैं। इन लोगों की वजह से सरकार में बैठे नेताओं को अनुशासन में रहना पड़ता है।”
जनहित बिल पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी?
गडकरी का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने जनहित और जनसुरक्षा बिल विधानसभा में पेश किया है, जिसे लेकर विवाद गहराया हुआ है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह कानून सामाजिक कार्यकर्ताओं और वामपंथी विचारधारा वाले संगठनों की आवाज दबाने के लिए लाया गया है।
हालांकि, गडकरी ने सीधे तौर पर इस बिल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को जनसुरक्षा बिल के संदर्भ में देखा जा रहा है।
न्यायपालिका की भूमिका को बताया अहम
गडकरी ने समाज सुधारक रवींद्र फडणवीस का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के गलत फैसलों के खिलाफ न्यायालय का सहारा लिया और जीत हासिल की। “कई बार जो काम सरकार के मंत्री नहीं कर पाते, वह न्यायालय के आदेश से संभव हो पाता है।”
भायखला के केबल-स्टे ब्रिज पर काम धीमा, जनता में बढ़ रही नाराजगी
14 Jul, 2025 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भायखला केबल-स्टे ब्रिज प्रोजेक्ट की पड़ताल: वादों की तारीख़ें बदलीं, निर्माण अब भी अधूरा
मुंबई: भायखला के 103 साल पुराने 'वाई-आकार' पुल की जगह अब एक आधुनिक केबल-स्टे ब्रिज बनने जा रहा है, जो पूर्व-पश्चिम मुंबई को जोड़ने का एक अहम संपर्क मार्ग होगा। इसमें अतिरिक्त 8 लेन, 916 मीटर लंबाई, और सेल्फी पॉइंट जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। हालाँकि, इस बहुप्रतीक्षित परियोजना की डेडलाइन एक बार फिर आगे बढ़ा दी गई है – अब 2026।
2024 से 2025 और अब 2026: तारीखें बदलती रहीं
इस प्रोजेक्ट को पहले 2024 में शुरू किया जाना था, फिर इसे 2025 तक पूरा करने की बात कही गई, लेकिन अब मार्च 2026 को डेडलाइन घोषित की गई है। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इसमें और भी देरी हो सकती है।
पुराने पुल की स्थिति और नया निर्माण
भायखला का मौजूदा पुल वर्ष 1922 में बना था और आईआईटी मुंबई की ऑडिट रिपोर्ट में इसे असुरक्षित घोषित किया गया था। इसके बाद इसे हटाकर नया केबल-स्टे ब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया। इसका निर्माण महाराष्ट्र रेल अधोसंरचना विकास निगम (MRIDC) यानी महारेल के जिम्मे सौंपा गया है।
ब्रिज की संरचना और रूट
यह ब्रिज सीएसएमटी के पास महानगर गैस स्टेशन से शुरू होकर दो हिस्सों में बंटेगा:
पहला हिस्सा: भायखला पूर्व – डेक्कन मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक के पास तक
दूसरा हिस्सा: भायखला पश्चिम – मुंबई फायर ब्रिगेड मुख्यालय तक
परियोजना की विशेषताएं
कुल लंबाई (एप्रोच सहित): 916 मीटर, ऊँचाई: 9.7 मीटर, अतिरिक्त लेन: 6 से बढ़ाकर 8 लेन,सेल्फी पॉइंट की भी योजना, कुल लागत: ₹280 करोड़
निर्माण कार्य की स्थिति
महारेल के अधिकारियों के अनुसार, ट्रैफिक बाधित किए बिना चरणबद्ध निर्माण कार्य किया जा रहा है। पहले चरण में मौजूदा पुल के समानांतर नया पुल तैयार किया जाएगा। उसके बाद पुराने पुल को हटाकर नए हिस्से से जोड़ा जाएगा। पहला चरण मार्च 2026 तक पूरा करने का अनुमान है, जबकि दूसरा चरण 280 दिनों में पूरा किया जाएगा।
स्थानीय जनता का असंतोष
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण की गति बहुत धीमी है और बार-बार बढ़ती डेडलाइन से जनता का भरोसा टूट रहा है। लोगों की मांग है कि इस महत्वपूर्ण ब्रिज को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि ट्रैफिक समस्या से राहत मिल सके।
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