महाराष्ट्र
IAS अफसरों के तबादले का बड़ा अपडेट, मुंबई और चंद्रपुर में नए नाम
13 Aug, 2025 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पलवल: भारतीय रेलवे की आधुनिक सुरक्षा तकनीक कवच प्रणाली ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की है। पलवल-मथुरा सेक्शन में हुए एक ट्रायल के दौरान दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आ गईं, लेकिन कवच तकनीक की वजह से टक्कर होते-होते बची। रेलवे अधिकारियों ने इसे तकनीक की बड़ी सफलता बताया है और कहा है कि यह प्रणाली भविष्य में कई बड़े हादसों को रोक सकती है। जानकारी के अनुसार, ट्रायल के दौरान दोनों ट्रेनें आमने-सामने की दिशा में एक ही ट्रैक पर दौड़ रही थीं। जैसे ही वे कवच प्रणाली के कवरेज एरिया में पहुंचीं, ऑटोमैटिक ब्रेक लग गए और ट्रेनें एक सुरक्षित दूरी पर रुक गईं।
रेलवे अधिकारियों ने बताई इसकी खासियत
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, कवच प्रणाली में लोको पायलट को समय रहते चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर ट्रेन को खुद रोकने की क्षमता है। अब इस प्रणाली का सफल ट्रायल नई दिल्ली-फरीदाबाद सेक्शन में करने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रायल भी पलवल-मथुरा सेक्शन की तरह ही महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इस रूट पर भी रोजाना भारी संख्या में ट्रेनें गुजरती हैं और सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है।
कवच प्रणाली स्वदेशी तकनीक
कवच प्रणाली भारतीय रेलवे की स्वदेशी तकनीक है, जिसे ट्रेन टक्कर से बचाने के लिए विकसित किया गया है। यह प्रणाली लोको पायलट को वास्तविक समय में ट्रेन की गति, सिग्नल की स्थिति और संभावित खतरों की जानकारी देती है। जरूरत पड़ने पर यह स्वत: ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देती है। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि कवच प्रणाली के उपयोग से न केवल यात्रियों की सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि रेलवे के संचालन में भी दक्षता बढ़ेगी। इससे मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाले हादसों में बड़ी कमी आएगी। रेल मंत्रालय का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश के सभी व्यस्त रेल मार्गों पर कवच प्रणाली को लागू करना है, ताकि भारतीय रेलवे को विश्वस्तरीय सुरक्षा मानकों के करीब लाया जा सके।मुंबई: महाराष्ट्र में आईएएस अधिकारियों के तबादलों का दौर जारी है। सरकार ने अब सात आईएएस अधिकारियों के तबादलों के आदेश जारी किए हैं। डॉ अशोक करंजकर को शेष महाराष्ट्र वैधानिक विकास बोर्ड का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। सुशील खोडवेकर को तुकाराम मुंधे के स्थान पर असंगठित श्रम विकास आयुक्त नियुक्त किया गया है। संजय कोल्टे अब मुंबई स्थित शिवशाही पुनर्वास परियोजना के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य करेंगे। राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इसके कारण प्रशासन में भी कुछ बदलाव हुए हैं।
ट्रांसफर अधिकारी और पद
1- डॉ अशोक करंजकर
डॉ अशोक करंजकर को अब मुंबई स्थित शेष महाराष्ट्र वैधानिक विकास बोर्ड का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
2- डॉ संजय कोल्टे
डॉ संजय कोल्टे भंडारा जिले के जिला कलेक्टर थे। उनका तबादला हो गया है और अब वे मुंबई स्थित शिवशाही पुनर्वास परियोजना के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य करेंगे।
3- सुशील खोडवेकर
सुशील खोडवेकर मुंबई में शेष महाराष्ट्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव थे। अब उन्हें मुंबई में असंगठित श्रम विकास आयुक्त के पद पर तैनात किया गया है।
4- सावन कुमार
सावन कुमार नंदुरबार जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। उनका तबादला कर दिया गया है और अब वह भंडारा जिले के जिला कलेक्टर के रूप में काम करेंगे।
5- नमन गोयल
नमन गोयल ITDP, भामरागड, गढ़चिरौली जिले के परियोजना अधिकारी और अट्टापल्ली उपखंड के सहायक जिला कलेक्टर थे। उन्हें अब नंदुरबार जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है।
6- जी.वी.एस. पवन दत्त
डॉ जी.वी.एस. पवन दत्त गढ़चिरौली जिले के देसाईगंज उपखंड के सहायक जिला कलेक्टर थे। उन्हें नासिक जिले के इगतपुरी उपखंड के सहायक जिला कलेक्टर के रूप में तैनात किया गया है।
7- लघिमा तिवारी
लघिमा तिवारी चंद्रपुर जिले के बल्लारपुर उप-मंडल की सहायक जिला कलेक्टर थीं। अब उनका तबादला चंद्रपुर जिले के गोंडपिपरी उप-मंडल के सहायक जिला कलेक्टर के पद पर किया गया है।
पिछले सप्ताह भी बदले से पांच आईएएस
पिछले सप्ताह पांच आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया। इनमें तुकाराम मुंडे, आशा अफजल खान पठान, अभय महाजन, ओमकार पवार और नितिन पाटिल शामिल थे।
युवाओं के लिए सुनहरा मौका, महाराष्ट्र पुलिस में 15,000 पद खाली
12 Aug, 2025 07:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के युवाओं के लिए खुशखबरी है। देवेंद्र फडणवीस कैबिनेट ने राज्य में 15000 पुलिसकर्मियों की भर्ती को मंगलवार को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी। कैबिनेट ने सोलापुर-पुणे-मुंबई मार्ग के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएपीएफ) को भी मंजूरी दी। साथ ही कैबिनट ने सामाजिक न्याय विभाग के अलग-अलग सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की ओर से संचालित योजनाओं के तहत लोन के गारंटर के लिए मानदंडों में ढील दी।
महाराष्ट्र पुलिस फोर्स में 15 हजार की भर्ती
महाराष्ट्र पुलिस फोर्स में लगभग 15 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती के फैसले को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। यह फैला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाले गृह मंत्रालय ने लिया। आइए जानते हैं आज हुई कैबिनेट मीटिंग में क्या-क्या फैसले लिए गए?
कैबिनेट में क्या फैसले लिए गए?
1. गृह विभाग
बैठक में महाराष्ट्र पुलिस फोर्स में लगभग 15 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती को मंजूरी देने का फैसला लिया गया।
2. खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग
राज्य में उचित मूल्य दुकानदारों का मार्जिन बढ़ा दिया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्ड धारकों को खाद्यान्न वितरित करने का फ़ैसला लिया गया है।
3. विमानन विभाग
सोलापुर-पुणे-मुंबई हवाई यात्रा के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ़) प्रदान करने का फैसला लिया गया है।
4. सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग
सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले निगमों द्वारा क्रियान्वित विभिन्न ऋण योजनाओं में गारंटर की शर्तों में ढील दी गई है। सरकारी गारंटी को पांच साल के लिए बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
अनधिकृत निर्माण पर जुर्माना माफ
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अवैध निर्माणों के कारण चर्चा में रहने वाले ठाणे नगर निगम क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पर जुर्माना माफ करने का फैसला किया है। नगर विकास विभाग ने सोमवार को इस संबंध में एक सरकारी फैसला लिया। बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नगर निगम चुनावों से पहले नगर विकास विभाग के माध्यम से अवैध निर्माणों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना माफ करके अपने गढ़ में वोटों की बारिश की है।
कब से बकाया था जुर्माना?
ठाणे नगर निगम क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर लगाया गया जुर्माना 2009 से बकाया था। इसके अलावा, लगाए गए जुर्माने की राशि मूल कर से अधिक थी। इस वजह से, संपत्ति मालिकों द्वारा जुर्माना नहीं भरा जा रहा था। इसका असर ठाणे नगर निगम को करों के रूप में मिलने वाले राजस्व पर पड़ रहा था। पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम की तर्ज पर ठाणे नगर निगम क्षेत्र में भी जुर्माना माफ करने का फैसला मानसून सत्र के दौरान हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया था, जिसका उद्देश्य अनधिकृत निर्माणों पर जुर्माना माफ करना था ताकि संपत्ति मालिक मूल कर का भुगतान करें।
इस निर्णय के अनुसार, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के अनुसार, ठाणे नगर निगम क्षेत्र में 31 मार्च, 2025 तक लगाए गए बकाया जुर्माने माफ कर दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने इसके लिए नियम और शर्तें निर्धारित की हैं। अवैध निर्माण वाले संपत्ति मालिकों को मूल कर का भुगतान करना होगा। तभी बकाया जुर्माना माफ किया जाएगा। अवैध निर्माण के जुर्माने माफ करने का मतलब यह नहीं होगा कि उक्त निर्माण नियमित हो गया है। सरकार के निर्णय में कहा गया है कि संबंधित नगर निगम जुर्माने की माफी के लिए राज्य सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या मुआवजे की मांग नहीं कर सकता है।
नागरिकता के लिए जरूरी है वैध सबूत, सिर्फ पहचान पत्र काफी नहीं – हाईकोर्ट
12 Aug, 2025 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सिर्फ आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी जैसे दस्तावेज रखने से कोई भारत का नागरिक नहीं बन जाता। कोर्ट ने यह टिप्पणी कथित तौर पर बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार करते हुए की। जमानत अर्जी दाखिल करने वाले उक्त व्यक्ति पर जाली और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में एक दशक से भी अधिक समय तक रहने का आरोप है।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अमित बोरकर की बेंच ने कहा कि नागरिकता अधिनियम के प्रावधान यह निर्धारित करते हैं कि भारत का नागरिक कौन हो सकता है और नागरिकता कैसे प्राप्त की जा सकती है तथा आधार कार्ड, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज केवल पहचान या सेवाओं का लाभ उठाने के लिए हैं। कोर्ट ने कथित बांग्लादेशी नागरिक बाबू अब्दुल रऊफ सरदार को जमानत देने से इनकार कर दिया। जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। उसने कथित तौर पर फर्जीवाड़ा कर आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और भारतीय पासपोर्ट जैसे दस्तावेज बनवा लिये थे।
नागरिकता पर क्या बोले?
जस्टिस बोरकर ने रेखांकित किया कि 1955 में संसद ने नागरिकता अधिनियम पारित किया, जिसने नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक स्थायी और पूर्ण प्रणाली बनाई। उन्होंने कहा कि मेरी राय में, 1955 का नागरिकता अधिनियम आज भारत में राष्ट्रीयता से जुड़े सवालों पर निर्णय लेने के लिए मुख्य और नियंत्रक कानून है। यह वह कानून है, जो यह निर्धारित करता है कि कौन नागरिक हो सकता है, नागरिकता कैसे प्राप्त की जा सकती है और किन परिस्थितियों में इसे खोया जा सकता है।
आधार कार्ड, पैन कार्ड पर बड़ा बयान
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज होने से कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं बन जाता। ये दस्तावेज पहचान या सेवाओं का लाभ उठाने के लिए हैं, लेकिन ये नागरिकता अधिनियम में निर्धारित नागरिकता की बुनियादी कानूनी आवश्यकताओं को समाप्त नहीं करते। पीठ ने कहा कि कानून वैध नागरिकों और अवैध प्रवासियों के बीच अंतर स्पष्ट करता है। अदालत ने कहा इसमें अवैध प्रवासियों की श्रेणी में आने वाले लोगों को नागरिकता अधिनियम में उल्लिखित ज्यादातर कानूनी मार्गों के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने से रोक दिया गया है।
दस्तावेजों का सत्यापन और जांच अब भी जारी
बेंच ने कहा कि यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की संप्रभुता की रक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकों के लिए निर्धारित लाभ और अधिकार उन लोगों द्वारा गलत तरीके से हासिल नहीं किये जाएं, जिनके पास भारत में रहने का कोई कानूनी दर्जा नहीं है। अदालत ने सरदार को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके दस्तावेजों का सत्यापन और जांच अब भी जारी है, तथा पुलिस को यह डर है कि जमानत मिलने पर वह फरार हो सकता है, जो वास्तविक आशंका है।
मामले में आरोप छोटे नहीं
पीठ ने कहा कि मामले में आरोप छोटे नहीं हैं और यह सिर्फ बिना अनुमति के भारत में रहने या निर्धारित समय से अधिक समय तक रहने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय नागरिक होने का दिखावा करने के उद्देश्य से फर्जी और जाली पहचान दस्तावेज बनाने और उनका उपयोग करने का मामला है। सरदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम और ‘फॉरेनर्स ऑर्डर’ के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया।
2013 से ठाणे जिले में रह रहा शख्स
सरदार ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया था कि वह भारत का वास्तविक नागरिक है और यह साबित करने के लिए कोई निर्णायक या विश्वसनीय सबूत नहीं है कि वह बांग्लादेश का नागरिक है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि उसके दस्तावेज जो आयकर और व्यवसाय पंजीकरण से संबंधित है और वह 2013 से मुंबई के पड़ोसी ठाणे जिले में रह रहा है। अदालत ने कहा कि जब भारत का संविधान तैयार किया जा रहा था, तब देश ऐतिहासिक परिवर्तन से गुजर रहा था और उस समय विभाजन के कारण लोगों का बड़े पैमाने पर सीमा पार आवागमन हुआ, जिससे यह निर्णय लेने की आवश्यकता महसूस हुई कि नए राष्ट्र के नागरिक के रूप में किसे स्वीकार किया जाए।
महाराष्ट्र की सियासत में फड़फड़ाए ध्वज, शिवसेना को झटका, फडणवीस-पवार आगे
12 Aug, 2025 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : देश के 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में सत्ता संघर्ष देखने को मिला। सोमवार को जारी आदेश के तहत रायगड जिले में अदिति तटकरे और नासिक में गिरीश महाजन ध्वजारोहण करेंगे। इसे शिंदे सेना को जोर का झटका माना जा रहा है। माना जा रहा है कि शिंदे गुट को पालकमंत्री पद के लिए चल रही जद्दोजहद में अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में यह मामला शिंदे सेना उठा सकती है।
पालकमंत्री पद को लेकर महागठबंधन में शीत युद्ध एक बार फिर सामने आ गया है। रायगड के पालक मंत्री का पद पाने के लिए संघर्ष कर रहे शिंदे गुट के मंत्री भरत गोगावाले को स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का अवसर नहीं मिला। इससे शिंदे गुट के विधायकों में गहरी नाराजगी है। शिंदे ने हाल ही में दिल्ली दौरे के जरिए राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन मुख्यमंत्री के अधीन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा घोषित ध्वजारोहण सूची ने शिंदे गुट को बड़ा झटका दिया है।
इनके नाम भी लिस्ट से गायब
ध्वजारोहण कार्यक्रम में बीजेपी, शिंदे सेना और अजित पवार गुट के एक-एक कैबिनेट मंत्री को किसी भी जिले का ध्वजारोहण करने का अवसर नहीं मिला। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, बीजेपी के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, अजित पवार गुट के बाबासाहेब पाटील शिंदे गुट के भरत गोगावले का नाम सूची में नहीं है।
सियासी गलियारे में चर्चे
साथ ही, महायुति में शामिल तीनों दलों के एक-एक राज्य मंत्री को भी यह अवसर नहीं मिला। इनमें बीजेपी की माधुरी मिसाल, शिंदे गुट के योगेश कदम और अजित पवार गुट के इंद्रनील नाइक शामिल हैं। इस निर्णय ने राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
सूची के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुंबई स्थित मंत्रालय में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि राज्यपाल पुणे में मौजूद रहेंगे। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अपने ठाणे जिले में ध्वजारोहण करने का अवसर मिला है, जबकि अजित पवार बीड में तिरंगा फहराएंगे।
मराठी और हिंदी में टकराव: पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में पूजा भाषा को लेकर बहस
12 Aug, 2025 12:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के सोलापुर में एक नया विवाद सामने आया है। यह विवाद मराठी और हिंदी भाषा को लेकर है। मामला पंढरपुर के विट्ठल मंदिर से जुड़ा है। आरोप है कि मंदिर में एक परिवार के लिए हिंदी में पूजा कराई गई। जबकि वहां 30-35 मराठी परिवार मौजूद थे। राहुल सातपुते नाम के एक व्यक्ति ने इस बारे में ट्वीट किया और मंदिर समिति से शिकायत की। मंदिर समिति के कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र शेळके ने जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से मंदिर में पूजा मराठी में ही होगी।
क्या है आरोप?
राहुल सातपुते ने आरोप लगाया है कि पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में तुलसी अर्चन पूजा का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा। उनके अनुसार, पूजा हिंदी में कराई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महाराष्ट्र के प्रमुख देवता के दरबार में भी हिंदी की अनिवार्यता हो गई है? राहुल सातपुते ने बताया कि उनके परिवार ने इस पूजा में भाग लिया था।
हिंदी में हुई पूजा
तुकाराम भवन में लगभग 30-35 परिवार पूजा के लिए जमा हुए थे। एक गुरुजी मंच पर बैठकर सभी को निर्देशों के माध्यम से पूजा करवा रहे थे। शुरुआत में उन्होंने मराठी में निर्देश दिए। तभी 30-35 परिवारों में से एक परिवार ने कहा कि उन्हें मराठी समझ नहीं आती, इसलिए हिंदी में पूजा कराई जाए। राहुल के अनुसार, गुरुजी ने तुरंत हंसते हुए हामी भर दी और पूरी पूजा हिंदी में शुरू कर दी।
मराठी पर कैसा रहा मिजाज
राहुल सातपुते ने आगे आरोप लगाया कि उन्होंने गुरुजी से कहा कि वे महाराष्ट्र में हैं और उनके परिवार को हिंदी समझ नहीं आती। उन्हें मराठी समझ आती है, जो महाराष्ट्र की राजभाषा है। इसलिए कृपया मराठी में निर्देश दें। लेकिन इस पर गुरुजी गुस्सा हो गए और माइक पर बोले, इस आदमी का क्या विषय है? सिक्योरिटी और समिति वाले इधर आओ और इस आदमी से बात करो। उसके बिना आगे पूजा शुरू नहीं की जा सकती। ऐसा कहकर उन्होंने माइक बंद कर दिया।
मंदिर समिति ने क्या कहा?
इस घटना के बाद मंदिर समिति हरकत में आई है। उन्होंने मामले की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने का आश्वासन दिया है। मंदिर समिति का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि मंदिर में सभी अनुष्ठान और पूजा मराठी भाषा में ही हों।
Sunburn 2025 की नई मंज़िल मुंबई, बदलाव ने बढ़ाई फेस्टिवल की धड़कन
7 Aug, 2025 02:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : भारत का फेमस EDM आयोजन सनबर्न फेस्टिवल पहली बार मुंबई में होने जा रहा है। सनबर्न फेस्टिवल हमेशा गोवा में होता था। यह पहली बार है जब यह गोवा से मुंबई शिफ्ट हो गया है। यह फेस्टिवल इसी साल आयोजित किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार के पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव अतुल पाटणे ने सनबर्न फेस्टिवल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र हमेशा से भारत की संस्कृति और मनोरंजन को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है। इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। अतुल पाटणे ने बताया कि मुंबई में सनबर्न फेस्टिवल जैसे बड़े इवेंट्स लाकर हम एक ऐसा माहौल बना रहे हैं जिससे म्यूजिक टूरिज्म को बढ़ावा मिले। इस इवेंट से पूरी दुनिया का ध्यान हमारी तरफ होगा। लोकल बिजनेस बढ़ेंगे और महाराष्ट्र एक शानदार डेस्टिनेशन के बनकर उभरेगा।
दिसंबर में होगा आयोजन
सनबर्न फेस्टिवल 19, 20 और 21 दिसंबर 2025 को मुंबई में आयोजित किया जाएगा। इस साल, सनबर्न फेस्टिवल को DJ Mag की 'टॉप 100 फेस्टिवल्स ऑफ 2025' लिस्ट में रखा गया है। यह लिस्ट में 8वें स्थान पर है। DJ Mag एक प्रसिद्ध मैगजीन है जो दुनिया के बेस्ट फेस्टिवल्स की लिस्ट निकालती है।
म्युजिक टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
सनबर्न के CEO करण सिंह ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि लगभग 20 साल पहले हमने एक सपना देखा। यह सपना था भारत में एक वर्ल्ड-क्लास EDM फेस्टिवल का होना। हमने इसी सपने के साथ सनबर्न फेस्टिवल शुरू किया। आज इस सनबर्न फेस्टिवल ने भारत को दुनिया के एंटरटेनमेंट मैप पर ला दिया है। इस फेस्टिवल ने म्यूजिक टूरिज्म को बढ़ावा दिया है।
सनबर्न फेस्टिवल के सीईओ क्या बोले
करण सिंह ने कहा कि गोवा सनबर्न फेस्टिवल की कहानी का एक अहम हिस्सा रहा है। गोवा में ही सनबर्न फेस्टिवल होता था। करण सिंह ने कहा कि लेकिन आगे बढ़ना भी जरूरी है। सनबर्न फेस्टिवल को मुंबई लाना सही फैसला है। इससे मुंबई में नई एनर्जी पैदा होगी और नए लोग हमने जुड़ेंगे। मुंबई हमेशा आगे बढ़ता रहता है और युवा दिलों की धड़कन है इसलिए इस फेस्टिवल के लिए यह परफेक्ट जगह है।
कई फेमस कलाकार देते हैं परफॉर्मेंस
करण सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को भारत की फेस्टिवल कैपिटल बनाने में मदद की है। इस साल इस महोत्सव का अलग ही एक्साइटमेंट है। 2007 से, मार्टिन गैरिक्स, स्क्रिलेक्स, स्वीडिश हाउस माफिया, एलन वॉकर, आर्मिन वैन बुरेन, डीजे स्नेक, टिएस्टो, द चेन्समोकर्स, डेविड गुएटा और हार्डवेल जैसे बड़े कलाकारों ने सनबर्न के स्टेज पर परफॉर्मेंस दी है। बड़े कलाकारों के इस मंच पर आने से य फेस्टिवल इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक के दीवानों के लिए एक खास जगह बन गया है।
गोवा बनाम मुंबई का खतरा
हालांकि सनबर्न फेस्टिवल के गोवा से मुंबई शिफ्ट होने के बाद मामला गोवा बनाम मुंबई का हो सकता है। कहा जा रहा है कि दोनों राज्यो के बीच तनाव हो सकता है क्योंकि बीते कुछ समय से गोवा टूरिज्म में गिरावट आ रही है। अब सनबर्न फेस्टिवल का भी गोवा से शिफ्ट होना यहां के लिए बड़ा झटका है।
एकनाथ शिंदे का बयान बना चर्चा का विषय, फाइटर प्लेन के बहाने क्या मांग ली बड़ी डील?
7 Aug, 2025 02:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बुधवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने अपने परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। शिंदे विशेष रूप से पीएम मोदी से मिलने के लिए ही परिवार के साथ दिल्ली आए था। इस मुलाकात की एक और खास बात थी, वह यह कि सबसे खास बात थी कि उनका पांच साल का पोता रुद्रांश परिवार के साथ नहीं आया था। उसकी अनुपस्थिति का जब कारण पूछा गया तो शिंदे ने जो कहा, उसका सियासी मायने निकाला जा रहा है। एकनाथ शिंदे अपकी पत्नी लता शिंदे, सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे और बहू वृषाली शिंदे के साथ आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब परिवार से मिलने आए तो उन्होंने देखा कि एकनाथ शिंदे का पोता नहीं है। पीएम ने रुद्रांश से बारे में पूछा।
पीएम मोदी से क्या बोले शिंदे
एकनाथ शिंदे जी ने पीएम मोदी को बताया कि रुद्रांश घर पर खेल रहा है। उन्होंने कहा कि रुद्रांश की एक डिमांड की है। उसने कहा है कि उसके दादा मोदी बाबा से फाइटर प्लेन और खिलौने लाएं। यह सुनकर प्रधानमंत्री मोदी खूब हंसे।
फाइटर प्लेन का जिक्र कर सियासी बोल
एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात की और यह सारी बातें बताईं। इस दौरान वह बोले कि उनके पोते ने अच्छी डिमांड की है। उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति और महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव की तरफ इशारा किया। शिंदे ने कहा कि फाइटर प्लेन का इस्तेमाल हमारी लड़ाई के लिए भी किया जा सकता है।
एक महीने में तीन बार दिल्ली पहुंचे शिंदे
एकनाथ शिंदे का दिल्ली दौरा खास था। एक महीने में यह तीसरी बार था जब वह दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने संसद भवन में गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों को राजनीतिक मायने से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो शिंदे और BJP के नेताओं के बीच सब ठीक नहीं चल रहा है।
पीएम ने श्रीकांत शिंदे की तारीफ की!
शिंदे परिवार ने प्रधानमंत्री को सावन के महीने में भगवान शिव की एक तस्वीर भेंट की। एकनाथ शिंदे ने बताया कि मोदी ने उनके बेटे श्रीकांत शिंदे की तारीफ भी की। हालांकि शिंदे ने उन अटकलों को खारिज किया कि उनकी दिल्ली यात्राएं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ मतभेदों के चलते हो रही हैं।
हिंदी न बोलने पर काजोल को मिली MNS की तारीफ या ताना? जानें क्या कहा पार्टी ने
7 Aug, 2025 01:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल के हिंदी बोलने से इनकार करने पर बवाल मचा हुआ है। इस बीच इस विवाद को राज ठाकरे की अगुवाई वाली मनसे ने भी लपकने की कोशिश की है। मनसे ने काजोल का वह वीडियो एक्स पर साझा किया है जिसमें वह हिंदी बोलने से मना कर रही हैं। दरअसल, काजोल ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान मराठी में बोल रही थीं। वह कुछ अंग्रेजी में भी बोली थी। इस मौके पर जब उनसे एक पत्रकार ने हिंदी में बोलने का आग्रह किया था तो वह भड़क गई थीं। मनसे ने काजोल के इसी वीडियो को मुद्दा बनाने की कोशिश करते लिखा है काजोल ने मना कर दिया। गौरतलब हो कि राज ठाकरे की अगुवाई वाली मनसे महाराष्ट्र में हिंदी को अनिवार्य करने का विरोध कर रही है। मराठी नहीं बोलने पर मनसे कार्यकर्ता गुंडागर्दी कर रहे हैं।
अभी मैं हिंदी में बोलूं
काजोल ने कहा था कि "अभी मैं हिंदी में बोलूं, जिसको समझना है, समझ लेगा.." काजोल काफी समय से अभिनय से दूर हैं। उनकी आखिरी फिल्म सरजमीं आई थी। काजोल जहां हिंदी नहीं बोलने के लिए ट्रोल हो रही हैं तो वहीं मनसे ने उनके हिंदी बोलने से इंकार को लपकने की कोशिश की है। मनसे की एक्स हैंडल से पोस्ट किए गए वीडियो पर रिएक्शन भी आ रहे हैं। एक प्रभा नाम की एक्स यूजर ने लिखा है कि महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार में काजाेल को सम्मानित किया गया। काजोल मराठी में बोलीं। यह उनका मराठी भाषा के प्रति प्रेम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उनके इस कदम ने मराठी भाषा को गौरवान्वित किया। उन्होंने भाषाई विविधता को प्रोत्साहित किया है।
शर्म नहीं आती...यूजर का गुस्सा फूटा
काजोल के यह कहने पर कि अब मैं हिंदी में बोलूं, जिसे समझना है वो समझेगा। एक यूजर ने खूब क्लास ली है। यूजर ने लिखा है कि अगर हिंदी बोलने में शर्म आती है तो बॉलीवुड में काम करना बंद कर दो। ये दोगलापन छोड़ दो। एक अन्य यूजर ने लिखा है कि 'हिंदी से हीरोइन बन गई। अब मराठी बोलकर नेता बन रही है। शर्म आनी चाहिए। यह विवाद ऐसे वक्त पर हुआ है जब काजोल के पति अजय देवगन की सन ऑफ सरदार 2' फिल्म आई है। इसके ट्रेलर लॉन्च पर काजोल के पति अजय देवगन ने महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी भाषा विवाद पर कहा था कि मैं आपको सिर्फ इतना कह सकता हूं-आता माझी सटकली।
मुंबई पुलिस कमिश्नर का जनता से जुड़ाव, बिना अपॉइंटमेंट मिलें और शिकायत करें
6 Aug, 2025 05:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: 1 मई को मुंबई पुलिस आयुक्त का कार्यभार संभालने के बाद 1994 बैच के आईपीएस देवेन भारती अब एक्शन में आ गए हैं। मुंबई पुलिस ने आयुक्त ने जनता दरबार की शुरुआत की है। देवेन भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जनता दरबार की कुछ फोटो साझा करके लिखा है कि नो अपॉइंटमेंट...हर मंगलवार को शाम साढ़े तीन बजे मैं शिकायतें सुनने के लिए उपलब्ध रहूंगा। भारती ने साफ किया है कि इसके लिए कोई अपॉइंटमेंट की जरूरत नहीं होगी। मुंबई पुलिस के शीर्ष अधिकारी के देवेन भारती ने साफ किया है कि इस पहल का मकसद न केवल शिकायतों का समाधान करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि मुंबईकरों को अपनी बात रखने के लिए एक सुलभ और पारदर्शी मंच मिले।
मुख्यालय में जनता दरबार
मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती की बड़ी पहल के बाद मुंबईकर अब अपनी शिकायतों को जरूरी होने पर शीर्ष स्तर पर भी रख सकेंगे। जनता दरबार में आने वाली शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाएगा। इस जनता दरबार की खास बात यह है कि इस मुलाकात के लिए किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। जिससे आम लोग बिना किसी औपचारिकता के अपनी बात सीधे पुलिस आयुक्त तक पहुंचा सकेंगे। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है।
सीधे जनता से होगा संवाद
मुंबई पुलिस में काफी समय बाद ऐसा हुआ है कि जब मुंबई पुलिस का सर्वोच्च अधिकारी इस तरह जनता के लिए सीधे उपलब्ध होंगे। इस दरबार में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह छोटी-मोटी शिकायत हो या गंभीर मुद्दा, सीधे पुलिस आयुक्त से मिलकर अपनी बात रख सकता है। मुंबईअपराध, ट्रैफिक, और सामाजिक समस्याएं आम हैं। मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के जनता दरबार को सोशल मीडिया पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। देवेन भारती 26/11 मुंबई हमले के दोषी कसाब को फांसी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। वह मूलरूप से बिहार के दरभंगा के रहने वाले हैं। उन्हें मुंबई की अच्छी समझ है क्योंकि उन्होंने अपनी पुलिस सेवा का लंबा वक्त मुंबई में बिताया है।
नंदनी मठ में फिर गूंजेगी महादेवी की चहलकदमी? CM से चर्चा के बाद उम्मीद जगी
6 Aug, 2025 05:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जैन मठ की हथिनी महादेवी उर्फ माधुरी को वापस लाने की मांग के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। बुधवार को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वनतारा के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुलाकात की। इसमें हाथिनी की वापसी को लेकर संवेदनशील और कानूनी रूप से संतुलित रास्ता निकालने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि वनतारा ने राज्य सरकार के प्रयासों को पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि वनतारा ने भरोसा दिलाया है कि वह उस याचिका का हिस्सा बनेगा। जिसे महाराष्ट्र सरकार महादेवी हाथिनी (माधुरी) को सुरक्षित रूप से नंदनी मठ वापस लाने के लिए दायर करने जा रही है। उधर दिल्ली में शिवसेना के नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाया। वनतारा के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया था। उनका मकसद हाथिनी को अपने पास रखने का नहीं था, बल्कि अदालत के निर्देश के अनुसार उसकी तुरंत चिकित्सा, व्यवहारिक देखभाल और भलाई सुनिश्चित करना था।
फडणवीस ने दिया बड़ा अपडेट
मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी बताया कि वनतारा ने राज्य सरकार को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया है, ताकि कोल्हापुर जिले के नंदनी मठ के पास वन विभाग द्वारा तय की गई जगह पर महादेवी के लिए एक पुनर्वास केंद्र बनाया जा सके। वनतारा ने एक बयान में कहा है कि यह निर्णय दिखाता है कि वनतारा ने न सिर्फ अदालत के आदेशों का ईमानदारी से पालन किया, बल्कि कोल्हापुर के लोगों की भावनाओं का भी पूरा सम्मान किया है। महादेवी की सेहत, सुरक्षा और भावनात्मक स्थिति को प्राथमिकता देकर वनतारा ने करुणा और संस्कृति के सम्मान के बीच एक सुंदर संतुलन दिखाया है। यह साझा प्रयास न सिर्फ कानून और भावनाओं को जोड़ता है, बल्कि महादेवी (माधुरी) को एक सुरक्षित, स्नेहमयी और गरिमापूर्ण भविष्य देता है। कोल्हापुर के लोगों के लिए यह एक भावनात्मक सुकून की घड़ी है। महादेवी नाम की हथिनी को जुलाई महीने के आखिर में कोल्हापुर से गुजरात जामनगर ले जाया गया था। इसके बाद लोगों का आक्रोश सामने आया था। बाद में लोगों के आंदोलन को साधु संतों का भी समर्थन मिल गया था। इसके बाद स्थानीय नेताओं ने मुख्यमंत्री फडणवीस के सामने यह मुद्दा उठाया था। तब सीएम फडणवीस ने कहा था कि नंदनी मठ के साथ सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगी।
वनतारा ने कहा, पीड़ा हुई तो माफ करें
वनतारा ने एक बयान में कहा है कि हम यह भलीभांति समझते हैं कि जैन मठ और कोल्हापुर के लोगों के लिए महादेवी (माधुरी) एक गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का विषय हैं। दशकों से वह आध्यात्मिक परंपराओं और सामाजिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा रही हैं। हम श्रद्धालुओं, जैन मठ के नेतृत्व और व्यापक समुदाय की भावनाओं, चिंताओं और माधुरी से जुड़ी गहराई को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं। इस विषय में वनतारा की भूमिका केवल माननीय सुप्रीम कोर्ट और माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने तक ही सीमित रही है। यदि न्यायालय अनुमति देता है, तो वनतारा माधुरी की सुरक्षित और गरिमामयी वापसी के लिए संपूर्ण तकनीकी और पशु चिकित्सा सहायता प्रदान करेगा। वनतारा ने बयान में कहा है कि यदि हमारी उपस्थिति जो कि पूरी तरह न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही रही है। किसी भी रूप में जैन समुदाय या कोल्हापुर के लोगों के लिए पीड़ा का कारण बनी हो, तो हम अपनी गहन क्षमा याचना करते हैं। इससे पहले अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में बेकाबू हुए हाथियों को संभालने और उनकी मानसिक स्थिति ठीक करने में भी वनतारा ने हाथ बढ़ाया था। तब हाथियों के वनतारा ले जाया गया था।
TCS ऑफिस के बाहर इंजीनियर की हालत देख लोग बोले– यह सिर्फ उसकी नहीं, हमारी भी हार है
6 Aug, 2025 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे : टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पुणे इन दिनों चर्चा में है। यहां का एक इंजीनियर सौरभ मोरे की तस्वीर वायरल हो गई है। यह इंजीनियर कंपनी के सह्याद्री पार्क ऑफिस के बाहर फुटपाथ पर लेटा हुआ नजर आ रहा है। वह एक चादर ओढ़े हुए है और सिर के लैपटॉप बैग है, जो तकिये की तरह रखा है। उसके हाथ में एक लेटर है, जिस पर उसने लिखा कि उन्हें सैलरी नहीं मिली। उसके पास रुपये नहीं है इसलिए फुटपाथ पर रहने के अलावा कोई चारा नहीं है। सौरभ मोरे की यह तस्वीर 2 अगस्त को 'beingpunekarofficial' नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट की गई। अब यह तस्वीर खूब वायरल हो रही है। यह जमकर शेयर की जा रही है। खूब लाइक्स मिल रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस भी छिड़ गई है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
सोशल मीडिया पर लोग कर्मचारियों के साथ कंपनी में होने वाले व्यवहार, उनकी बकाया सैलरी और कंपनी के अंदरूनी कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कुछ कंपनी के पक्ष में हैं तो अधिकांश इस इंजीनियर के साथ हमदर्दी रख रहे हैं।
TCS के सौरभ मोरे के लेटर में क्या लिखा?
सौरभ मोरे के हाथ में जो लेटर नजर आ रहा है। वह हाथ से लिखा गया है। उसमें लिखा है, 'मैंने 29 जुलाई को टीसीएस सह्याद्री पार्क के पुणे ऑफिस में रिपोर्ट किया था। अभी तक मेरा ID Ultimatix और TCS सिस्टम पर एक्टिव नहीं हुआ। मुझे मेरी सैलरी नहीं दी गई। 30 जुलाई 2025 की मीटिंग हुई थी। इसमें कहा गया था कि वेतन दे दिया जाएगा। एचआर ने उन्हें अगले दिन पेमेंट अकाउंट में भेजने को कहा था लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।'
सौरभ ने आगे लिखा, 'मैंने एचआर को बताया है कि मेरे पास रुपये नहीं हैं। मुझे TCS के बाहर फुटपाथ पर सोने और रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।' टीसीएस के एचआर ने सौरभ के मामले में कोई जवाब नहीं दिया। सौरभ 29 जुलाई से TCS के सामने फुटपाथ पर रह रहे हैं। सौरभ ने बताया कि वह छुट्टी पर गए थे। लौटे तो उनके इंटरनल सिस्टम का एक्सेस ब्लॉक कर दिया गया था। उनकी सैलरी रोक दी गई। वह अब सड़क पर आ गए हैं।
TCS ने क्या दिया जवाब?
TCS ने सौरभ मोरे के मामले पर एक बयान जारी किया है। कंपनी ने कह कि यह बिना परमिशन के छुट्टी पर जाने का मामला है। इंजीनियर ऑफिस में बिना किसी पूर्व सूचना के छुट्टी पर चला गया था। कंपनी के स्टैंडर्ड प्रोसेस के अनुसार उसकी सैलरी रोकी गई है। कंपनी ने कहा कि सौरभ मोरे अब काम पर लौट आया है। हमने फिलहाल उसे रहने की जगह दी है। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि अब वह ऑफिस के बाहर नहीं रह रहा है।
यात्रियों की मुश्किल बढ़ी! 6 से 8 अगस्त तक लोकल ट्रेन सेवा में बड़ा बदलाव
6 Aug, 2025 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : लोकल ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए जरूरी खबर है। मुंबई में मध्य रेलवे ने वाशी स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने का फैसला किया है। यह सिस्टम सिग्नल को कंट्रोल करने के लिए किया जा रहा है। इस इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के चलते कई लोकल ट्रेनें रद्द रहेंगी। कई के टाइम में परिवर्तन किया गया है तो कुछ ब्लॉक में प्रभावित होंगी। मध्य रेलवे का वाशी स्टेशन पर काम 6 अगस्त से 8 अगस्त तक रात चलेगा। इस कुछ लोकल ट्रेनें रद्द रहेंगी। कुछ ट्रेनों के समय पर परिवर्तन भी किया गया है। काम 6 अगस्त से 8 अगस्त तक रोज रात 10:45 से सुबह 3:45 तक चलेगा। इस दौरान अप और डाउन दोनों लाइनों पर काम होगा।
लोकल ट्रेनों को कहां रोक जाएगा
रात 8:54 की बेलापुर-सीएसएमटी लोकल ट्रेन वाशी स्टेशन पर ही रद्द कर दी जाएगी। यह आगे नहीं जाएगी। रात 9:16 की बेलापुर-सीएसएमटी लोकल वडाला स्टेशन पर ही रोक दी जाएगी। रात 10:00 बजे की बांद्रा-सीएसएमटी लोकल वडाला स्टेशन तक ही चलेगी। रात 10:50 और 11:32 की पनवेल-वाशी लोकल नेरुल स्टेशन पर ही रोकी जाएगी।
ये लोकल ट्रेनें कैंसल
7 और 8 अगस्त की सुबह लोकल ट्रेन के शेड्यूल में परिवर्तन रहेगा। सुबह 5:10 बजे की सीएसएमटी-गोरेगांव लोकल सीएसएमटी से नहीं बल्कि वडाला रोड स्टेशन से चलेगी। 6 से 8 अगस्त के बीच कुछ लोकल ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द किया गया है। सीएसएमटी से वाशी जाने वाली रात 9:50, 10:14 और 10:30 बजे की ट्रेनों को कैंसल कर दिया गया है। वाशी से सुबह 4:3 और 4:25 बजे सीएसएमटी जाने वाली ट्रेनें भी रद्द रहेंगी।
वेलंकणी उत्सव पर स्पेशल ट्रेनें
वहीं गुड न्यूज यह है कि वेलंकणी उत्सव के लिए पश्चिम रेलवे ने कुछ स्पेशल ट्रेनें भी चलाने का फैसला किया है। ये ट्रेनें बांद्रा टर्मिनस से वेलंकणी के बीच चलाई जाएंगी। इन ट्रेनों को 27 अगस्त से 9 सितंबर तक ये चलाने का फैसला लिया गया है। गाड़ी नंबर 09093/4 बांद्रा टर्मिनस से रात 8:40 बजे छूटेगी। यह ट्रेन 27 अगस्त और 6 सितंबर को भी चलेगी। गाड़ी नंबर 09094 वेलंकणी टर्मिनस से रात 12:30 बजे चलेगी। इन स्पेशल ट्रेनों के लिए रिजर्वेशन शुरू हो गया है।
कुत्ते पर जुल्म का वीडियो वायरल, गुस्साए लोगों ने युवक को सरेआम पीटा
6 Aug, 2025 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: नवी मुंबई के कोपरखैरने इलाके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक शख्स आवारा कुत्ते को लकड़ी के मोटे पट्टे से बेरहमी से पीट रहा है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। इस घटना का वीडियो मो. रईज़ नाम के यूजर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया था। वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपी युवक लकड़ी के मोटे प्लाईवुड से कुत्ते पर कई बार वार कर रहा है, जबकि कुत्ता बेबस होकर मार खाता रहा। इसके बाद लोगों ने आरोपी युवक को ढूंढा और फिर उसकी भी धुनाई कर डाली। वहीं बताया जा रहा है कि कुत्ते को बचा लिया गया है और उसका इलाज चल रहा है।
लोगों ने की आरोपी की धुनाई
रईज़ ने एक फॉलो-अप पोस्ट में बताया कि आरोपी युवक की मां ने इस हरकत को उकसाया और बाद में उसका समर्थन किया। उन्होंने कथित रूप से कहा कि ज़रूरत पड़ी तो फिर ऐसा करेंगे। इस बयान से सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा और भड़क गया। जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, स्थानीय लोगों ने आरोपी युवक को पहचान लिया और उसका सार्वजनिक रूप से विरोध किया। एक वीडियो क्लिप में एक महिला को आरोपी को चप्पलों से पीटते हुए देखा जा सकता है, जबकि दर्जनों लोग उसे घेरकर खड़े हैं।
एक्शन और रिएक्शन का वीडियो भी किया शेयर
घर के क्लेश नाम के एक यूजर ने इस पूरे मामले के एक्शन और रिएक्शन का वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो को 2 लाख से ज्यादा बार देखा गया है। इस वीडियो में पहले भाग में आरोपी कुत्ते को पीटता हुआ दिख रहा है। वहीं दूसरे भाग में आरोपी को लोगों की भीड़ पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं। भीड़ में महिलाएं भी मौजूद है जो चप्पलों से उसकी धुनाई करते हुए देखी जा सकती है।
आरती साठे की जज नियुक्ति पर विपक्ष हमलावर, राजनीतिक लिंक पर उठाए सवाल
6 Aug, 2025 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट के जज के रूप में एक नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह नियुक्ति है आरती अरुण साठे की। आरती साठे को बॉम्बे हाई कोर्ट जस्टिस की नियुक्ति का ऐलान सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 जुलाई को किया। अब उनका नाम सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है। महाराष्ट्र में सियासत गरमा गई है। आरती साठे की नियुक्ति को लेकर महाराष्ट्र में विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है। दरअसल आरती साठी कोई और नहीं बल्कि बीजेपी की नेता हैं। वह महाराष्ट्र बीजेपी की प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। आरती साठे का नाम लिस्ट में आने के बाद एक-दो दिन मामला शांत रहा क्योंकि किसी ने इस पर खास ध्यान नहीं दिया। जैसे-जैसे यह लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी, विपक्ष ने सवाल करने शुरू कर दिए। विपक्ष के नेताओं ने कहा है कि न्यायपालिका जैसे संस्थान में राजनीतिक बैकग्राउंड वाले की नियुक्ति नहीं होना चाहिए। आरती साठे की नियुक्ति को कैंसल करने की मांग उठने लगी है।
कौन हैं आरती साठे
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 जुलाई को बॉम्बे हाई कोर्ट में 3 नए जजों की नियुक्ति की। ये 3 नाम हैं अजित कडेथनकर, आरती साठे और सुरेश गोधेश्वर। विवाद आरती अरुण साठे के नाम को लेकर है। आरती साठे महाराष्ट्र के जानेमाने फैमिली कोर्ट के लॉयर क्रांति साठे की बेटी हैं। आरती के पति अरुण भी वकील हैं। अरुण टैक्सेशन लॉ के सीनियर काउंसल हैं।
सुनील दत्त के खिलाफ बीजेपी से चुनाव लड़े थे पिता
आरती साठे का परिवार मुंबई में ही रहता है। वह लंबे समय तक महाराष्ट्र बीजेपी की प्रवक्ता रही हैं। आरती ने जनवरी 2024 में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था। उनके क्रांति साठे भी बीजेपी नेता रहे हैं। वह 1989 में बीजेपी की टिकट से मुंबई लॉर्थ वेस्ट का लोकसभा चुनाव लड़े थे। हालांकि क्रांति साठे को कांग्रेस प्रत्याशी सुनील दत्त से हार का सामना करना पड़ा था।
क्रिप्टकरंसी की एक्सपर्ट
आरती साठे खुद सीनियर काउंसल प्रेसी परदीवाला के चैंबर में काम कर चुकी हैं। प्रेसी परदीवाला इनकम टैक्स के मामले देखता है। आरती साठे की उम्र 40 साल की है। वह टैक्सेशन लॉ की एक्सपर्ट हैं। वह क्रिप्टोकरंसी की लीगल रिजीम में हैं।
रोहित पवार ने उठाए सवाल
आरती साठे की एडिशनल जज की नियुक्ति ने सियासी बवाल मचा दिया है। शरद पवार की एनसीपी के नेता रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरती की नियुक्ति का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सत्ताधारी पार्टी का पक्ष रखता हो। किसी पार्टी का नेता हो, वह हाई कोर्ट का जज कैसे हो सकती है? उन्होंने आरती साठी की नियुक्ति को अनुचित बताते हुए कहा कि यह न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रभाव डालेगी।
नाना पटोले बोले- सीजेआई संज्ञान में लें
रोहित पवार ने कहा कि आरती साठे की न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा आघात है। उन्होंने कहा कि इससे न्यायिक प्रणाली की निष्पक्षता पर दूरगामी परिणाम होंगे। यह न्यायपालिका को राजनीतिक अखाड़े में बदल देगा। उन्होंने कहा कि जब किसी हाई कोर्ट का जज राजनीतिक पृष्ठभूमि हो, वह खुद किसी पार्टी में रहा हो तो कौन गारंटी देगा कि न्याय राजनीतिक पूर्वाग्रह वाला नहीं होगा। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी आरती साठे की नियुक्ति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला चिंताजनक है। यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। मुख्य न्यायाधीश को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
बीजेपी ने दी सफाई
वहीं बीजेपी के चीफ स्पोक्सपर्सन केशव उपाध्याय ने कहा कि आरती साठे ने डेढ़ साल पहले ही बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था। उनका इन वर्षों में पार्टी से कोई लेनादेना नहीं रहा। अब डेढ़ साल बाद उनकी नियुक्ति हुई है। उनका बेजीपी से कोई नाता नहीं है। रोहित पवार या कांग्रेस अगर उनकी नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं तो बता दूं कि उन्हें बीजेपी ने नियुक्त नहीं किया है। यह सुप्रीम कोर्ट कोलिजम की सिफारिश है।
MMRC का बड़ा दावा: आरे मेट्रो से फिल्म सिटी तक जल्द शुरू होगा रोपवे प्रोजेक्ट
6 Aug, 2025 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मुंबईकरों के लिए गुड न्यूज है। मुंबई में अब फिल्म सिटी जाना और भी आसान हो जाएगा। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) ने मेट्रो लाइन 3 पर आरे स्टेशन और गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी के बीच रोपवे कनेक्टिविटी का प्रस्ताव रखा है। भविष्य में इसे संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस रोपवे का मकसद है कि फिल्म सिटी जैसे व्यस्त इलाके में लोगों को आने-जाने में आसानी हो। क्योंकि वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा कम है।
प्रोजेक्ट की तैयारी कैसी?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि अभी यह प्रोजेक्ट प्लानिंग के शुरुआती दौर में है और न तो बजट और न ही समय-सीमा का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सिस्टम मोनो-केबल, बाई-केबल या ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला सिस्टम का इस्तेमाल कर सकता है। यह सब जांच के बाद तय होगा कि कौन सी तकनीक सही रहेगी।
PPP मॉडल से बनेगा रोपवे
यह रोपवे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बनेगा। इसमें प्राइवेट कंपनियां पैसा लगाएंगी और सरकार भी मदद करेगी। इसे डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन, हस्तांतरण (डीबीएफओटी) फ्रेमवर्क के तहत बनाया जा सकता है। कोलाबा-बांद्रा-सीप्ज मेट्रो कॉरिडोर को मेट्रो लाइन 3 के नाम से जाना जाता है। जो कि 33.5 किलोमीटर लंबी है। यह अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन है। इसका एक हिस्सा शुरू हो चुका है और दूसरा बन रहा है।
कितने यात्री कर सकेंगे सफर?
यह रोपवे मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की एक कोशिश है ताकि मेट्रो लाइन 3 स्टेशनों से दूर के इलाकों तक भी पहुंचा जा सके। अनुमान है कि यह कॉरिडोर 2-3 किलोमीटर लंबा होगा। इससे हर घंटे एक दिशा में 2,000-3,000 यात्री सफर कर सकेंगे। फिल्म सिटी संजय गांधी नेशनल पार्क के पास है। वहां हर दिन बहुत से लोग काम करने और घूमने आते हैं। लेकिन वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट की अच्छी सुविधा नहीं है। यहां अक्सर जाम लगा रहता है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
अधिकारियों का कहना है कि रोपवे से पर्यावरण को कम नुकसान होगा। सड़कों की जगह केबल का इस्तेमाल होगा। इससे जमीन कम चाहिए होगी और हरे-भरे इलाके बच जाएंगे। अगर यह प्रोजेक्ट पूरा होता है तो यह देश के उन कुछ रोपवे में से एक होगा जो मेट्रो से जुड़ा होगा और शहर में ट्रांसपोर्ट का एक अहम हिस्सा बनेगा।
राशिफल 21 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
लाल आतंक से विकास की ओर बढ़ता दारेली
सीएचसी पलारी के लैब में जांच सुचारू रूप से संचालित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की भेंट
ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार इनके हित की चिंता करेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
