बिहार-झारखण्ड
डिजिटल मैपिंग और मचान से निगरानी: पलामू टाइगर रिजर्व के जलाशयों पर जुटे सैकड़ों वन्यजीव, 14 घंटे की गणना में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
2 Jun, 2026 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लातेहार | झारखंड के प्रसिद्ध पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के कोर और बफर जोन में एक दिवसीय 'वाटरहोल गणना 2026' का महत्वपूर्ण अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के इस दौर में जंगल के भीतर मौजूद सभी प्राकृतिक और कृत्रिम जलाशयों पर प्यास बुझाने आने वाले वन्यजीवों की सटीक मैपिंग के लिए इस विशेष गणना का आयोजन किया गया था। इस बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान की सबसे बड़ी विशेषता अग्रिम पंक्ति के समर्पित वन कर्मियों के साथ-साथ पर्यावरण और प्रकृति से प्रेम करने वाले स्वयंसेवकों की सक्रिय जनभागीदारी रही।
मचानों से लगातार 14 घंटे निगरानी, डेटा शीट में दर्ज हुआ वन्यजीवों का पूरा ब्योरा
वन्यजीवों को बिना किसी व्यवधान या परेशानी के उनके प्राकृतिक आवास में गिनने के लिए यह चुनौतीपूर्ण अभियान लगातार 14 घंटों तक चलाया गया। गणना में जुटी टीमों को जंगलों में बने ऊंचे वॉचटावर (मचानों) और छलावरण (कैमफ्लाज) तकनीकों की मदद से तैनात किया गया था, ताकि जानवर इंसानी मौजूदगी से डरे बिना पानी पीने आ सकें। प्रत्येक जलस्रोत पर मुस्तैद वन रक्षकों, ट्रैकर्स और वालंटियर्स को एक विशेष वैज्ञानिक डेटा शीट सौंपी गई थी। इस शीट में वन्यजीवों के जलाशय पर पहुंचने का समय, उनकी सटीक प्रजाति, नर, मादा और शावकों का वर्गीकरण तथा संबंधित जलस्रोत के पानी के स्तर की पूरी जानकारी दर्ज की गई है।
हाथी, तेंदुआ और भालू समेत कई दुर्लभ स्तनधारी जीवों की भारी सक्रियता दर्ज
इस विशेष वाटरहोल गणना की शुरुआती रिपोर्ट से बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक संकेत मिले हैं। भीषण गर्मी के कारण पानी की तलाश में निकले कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ स्तनधारी जीवों की रिजर्व में भारी मौजूदगी रिकॉर्ड की गई है। इस 14 घंटे के निगरानी चक्र के दौरान पलामू के जंगलों में गजराज (हाथी), तेंदुआ, गौर (भारतीय बाइसन), चीतल, सांभर, कोटरा (भैंस जैसी प्रजाति), भालू और सियार जैसे वन्यजीवों को पानी पीते हुए लाइव ट्रैक किया गया है, जो रिजर्व के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को दर्शाता है।
वैज्ञानिक डेटा से तय होगा वाटरहोल मैनेजमेंट, शिकार विरोधी तंत्र को मिलेगी मजबूती
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने इस अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस गणना से मिले आंकड़े वन्यजीवों की मौसमी आवाजाही और उनकी आबादी का एक सटीक व्यावहारिक अनुमान प्रदान करते हैं। एकत्रित की गई डेटा शीट के वैज्ञानिक विश्लेषण से पीटीआर प्रशासन को यह समझने में मदद मिलेगी कि तपती गर्मियों में जंगल के कौन से हिस्से और कौन से वाटरहोल्स वन्यजीवों के लिए सबसे ज्यादा मददगार साबित हो रहे हैं। इस निष्कर्ष के आधार पर भविष्य में कृत्रिम जल आपूर्ति, नए जलाशयों के निर्माण और शिकार विरोधी (एंटी-पोचिंग) नेटवर्क को और अधिक चाक-चौबंद किया जाएगा।
रांची में 5 जून को सजेगा भाजपा का सियासी रणनीतिक मंच: विधायक दल की बैठक में राज्यसभा की सीटों को लेकर बनेगी तगड़ी प्लानिंग
2 Jun, 2026 04:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची | झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सत्ताधारी महागठबंधन और मुख्य विपक्षी खेमा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तमाम सिपहसालार अपने-अपने उम्मीदवारों को उच्च सदन भेजने के लिए गोटियां बिछाने में जुट गए हैं। इस सियासी महामुकाबले में एनडीए की मुख्य धुरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरी ताकत झोंक दी है। अंदरूनी सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, आगामी 5 जून को रांची में भाजपा विधायक दल की एक आपात और बेहद अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में प्रदेश भाजपा के सभी 21 विधायकों की मौजूदगी अनिवार्य की गई है, जिसे चुनाव के लिहाज से टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
वोटिंग के गणित और संगठनात्मक एकजुटता पर होगा मंथन
भाजपा विधायक दल की इस महाबैठक के एजेंडे में राज्यसभा चुनाव की बारीकियां, मतदान की तकनीकी प्रक्रिया और क्रास वोटिंग के खतरे से बचने के उपायों पर विस्तार से माथापच्ची की जाएगी। इस बैठक के जरिए पार्टी आलाकमान अपने सभी विधायकों को एकजुट रहने और व्हिप के मुताबिक मतदान करने के कड़े दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस चुनाव को महज संसद की एक सीट के रूप में नहीं देख रही है, बल्कि इसके जरिए वह विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अपनी संगठनात्मक ताकत और विपक्षी एकजुटता में सेंध लगाने की क्षमता का प्रदर्शन करना चाहती है।
नितिन नवीन का दो दिवसीय झारखंड दौरा, बढ़ेगा कार्यकर्ताओं का जोश
विधायक दल की इस रणनीतिक बैठक के ठीक अगले दिन, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिनों के संगठनात्मक दौरे पर झारखंड आ रहे हैं। उनके इस दौरे को राज्यसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने और एनडीए खेमे में जोश फूंकने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान वे प्रदेश कोर कमेटी, प्रमुख पदाधिकारियों और सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं के साथ बंद कमरे में मैराथन बैठकें करेंगे। इस शीर्ष दौरे का मुख्य उद्देश्य चुनाव के वक्त पार्टी की कमान को पूरी तरह दुरुस्त रखना और जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचाना है।
संख्या बल की कमी के बावजूद मैदान में उतरी भाजपा, सस्पेंस गहराया
इस समय झारखंड के राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा और कौतूहल इस बात को लेकर है कि पर्याप्त संख्या बल (बहुमत का आंकड़ा) न होने के बावजूद भाजपा ने इस रेस से पीछे हटने के बजाय चुनावी रण में उतरने का साहसिक फैसला क्यों किया। वर्तमान आंकड़ों के खेल में भाजपा के पास अपने दम पर जीत दर्ज करने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या कम है, जिसके चलते सियासी हलकों में विधायकों की संभावित खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) या सत्तापक्ष के असंतुष्ट विधायकों के गुप्त समर्थन को लेकर अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। अब सभी की निगाहें 5 जून को होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जहां से पार्टी के 'प्लान-बी' का खुलासा हो सकता है।
रांची विश्वविद्यालय के छात्रों को बड़ा झटका: एडमिशन के लिए लागू हो सकता है क्लस्टर सिस्टम, हाई कट-ऑफ से बढ़ेगी टेंशन
2 Jun, 2026 04:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची | इंटरमीडिएट (12वीं) के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद अब हजारों छात्र-छात्राओं की नजरें कॉलेज स्तर पर होने वाली स्नातक (ग्रैजुएशन) नामांकन प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। हालांकि, इस साल रांची विश्वविद्यालय (RU) के कॉलेजों में दाखिला पाना पहले के मुकाबले काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। राज्य सरकार की ओर से उच्च शिक्षा में अमूलचूल बदलाव के लिए लागू किए जा रहे 'क्लस्टर सिस्टम' के चलते इस बार स्नातक की सीटों में 10 से 15 फीसदी तक की बड़ी कटौती होने की आशंका जताई जा रही है।
क्लस्टर सिस्टम के पेच में फंसा दाखिला, इन्फ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से तय होंगी सीटें
यही मुख्य वजह है कि रांची विश्वविद्यालय के अंगीभूत (कांस्टीट्यूएंट) और संबद्ध (एफिलिएटेड) कॉलेजों में अब तक एडमिशन पोर्टल नहीं खोला जा सका है। विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल क्लस्टर सिस्टम के पूर्ण रूप से धरातल पर उतरने और उसके बाद सीटों के नए सिरे से निर्धारण (पुनर्निर्धारण) की प्रतीक्षा कर रहा है। इस नई नीति के तहत अब किसी भी कॉलेज में मनमाने ढंग से सीटें नहीं बढ़ाई जा सकेंगी। सीटों का आवंटन पूरी तरह से संबंधित कॉलेज में कार्यरत प्राध्यापकों (शिक्षकों) की संख्या, क्लासरूम की उपलब्धता, लैब और अन्य जरूरी आधारभूत संसाधनों के भौतिक सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।
40 हजार से घटकर 36 हजार रह सकती हैं सीटें, बढ़ेगी कट-ऑफ की मार
वर्तमान व्यवस्था की बात करें तो रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कॉलेजों में स्नातक स्तर पर करीब 40 हजार सीटों पर दाखिले होते रहे हैं। लेकिन नए नियमों की कैंची चलने के बाद यह आंकड़ा सिमटकर लगभग 36 हजार के आसपास पहुंच सकता है। सीटों की संख्या में इस गिरावट के कारण छात्र-छात्राओं के बीच एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिससे नामचीन कॉलेजों की कट-ऑफ लिस्ट भी काफी ऊपर जा सकती है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का तर्क है कि क्षमता से अधिक छात्रों के दाखिले से शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए, जिस विषय में पहले 150 सीटें आवंटित थीं, वहां अब केवल 130 छात्रों को ही प्रवेश मिल सकेगा।
लाखों पास आउट विद्यार्थियों के सामने संकट, संसाधनों को मजबूत करने की मांग
इस वर्ष झारखंड में मैट्रिक (10वीं) में चार लाख से अधिक और इंटरमीडिएट के तीनों संकायों (विज्ञान, वाणिज्य और कला) को मिलाकर लगभग पौने तीन लाख छात्र सफल घोषित हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में पास हुए छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए सीटों में कटौती का यह फैसला अभिभावकों और छात्र संगठनों की चिंता बढ़ा रहा है। इस विषय पर डोरंडा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. बी. एस. तिवारी ने अपनी राय रखते हुए कहा कि सीटों को कम करने से पहले सरकार को कॉलेजों में नए शिक्षकों की बहाली करनी चाहिए और भवनों का विस्तार करना चाहिए। वहीं, विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश साहू ने स्पष्ट किया है कि सीटों की अंतिम संख्या पर जैसे ही राज्य सरकार का अंतिम दिशा-निर्देश प्राप्त होगा, बिना समय गंवाए नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
बिहार MLC चुनाव: जदयू में टिकटार्थियों की रेस, जातीय समीकरण और संगठन के वफादारों को साधने में जुटे नीतीश कुमार
2 Jun, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना | बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया का आज दूसरा दिन है। पहले दिन किसी भी राजनीतिक दल के उम्मीदवार ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। इस बीच, प्रत्याशियों के चयन को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के खेमे में जबरदस्त राजनीतिक सरगर्मी देखी जा रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं। सुबह उन्होंने दोनों उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की, जिसके बाद मंत्री लेशी सिंह भी विचार-विमर्श के लिए उनके आवास पर पहुंचीं।
नीतीश कुमार को सौंपी गई संभावितों की सूची, अंतिम मंथन जारी
जदयू के अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विधान परिषद के संभावित प्रत्याशियों की एक सूची पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा नीतीश कुमार को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री अब इन नामों पर गहराई से विचार कर रहे हैं। दोनों उपमुख्यमंत्रियों और पार्टी के अन्य वरिष्ठ रणनीतिकारों के साथ दौर-ब-दौर चर्चा करने के बाद ही नीतीश कुमार अंतिम नामों पर अपनी मुहर लगाएंगे। माना जा रहा है कि पार्टी में आम सहमति बनते ही उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जल्द ही जारी कर दी जाएगी।
खाली हो रही सीटों का गणित और उपचुनाव की तैयारी
जिन सीटों पर चुनाव होना है, उनमें से चार सीटें वर्तमान में जनता दल यूनाइटेड के पास हैं। जदयू के सदस्य गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा का कार्यकाल आगामी 28 जून को समाप्त होने जा रहा है। इसके अतिरिक्त, जिस एक सीट पर उपचुनाव होना है, वह पहले नीतीश कुमार के पास थी। उनके राज्यसभा चले जाने के कारण यह सीट रिक्त हो गई है। इस खाली सीट पर भी जदयू अपना ही उम्मीदवार उतारने की पूरी तैयारी में है।
इन चेहरों पर टिकी हैं निगाहें, जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सामाजिक और जातीय समीकरणों को संतुलित करने के लिए इस बार कई नए और पुराने चेहरों पर दांव खेला जा सकता है। वर्तमान में जदयू की तरफ से कुर्मी समाज से निशांत कुमार, कोईरी समाज से राजीव कुमार सिंह, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) से ललन मंडल और अल्पसंख्यक समुदाय से गुलाम रसूल बलियावी के नामों की सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार इन चर्चित चेहरों में से किनके नाम पर अपनी अंतिम स्वीकृति देते हैं।
सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: सूरत से गिरफ्तार बदमाश भोला सिंह को बंगाल से लाया गया बिहार, आज होगी कोर्ट में पेशी
2 Jun, 2026 09:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना | बिहार के पटना जिले के पंडारक का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर और तीन लाख रुपये का इनामी अपराधी भोला सिंह आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उसे बीती 16 मई को गुजरात के सूरत से दबोचा था, जिसके बाद उसे बंगाल के रास्ते ट्रेन द्वारा हाथीदह स्टेशन लाया गया। वहां से कड़े सुरक्षा घेरे में सड़क मार्ग से उसे बाढ़ थाना पहुंचाया गया है, जहां अदालत खुलने के बाद आज उसकी पेशी की जाएगी।
पहचान बदलकर काट रहा था फरारी, अपहरण केस में हुई गिरफ्तारी
सीबीआई ने भोला सिंह को पश्चिम बंगाल के दो नागरिकों के अपहरण से जुड़े एक दशक से भी ज्यादा पुराने मामले में गिरफ्तार किया है। वह पिछले 12 सालों से कानून की आंखों में धूल झोंककर सूरत में 'गौतम' और 'अमित शर्मा' जैसे फर्जी नामों से छिपकर रह रहा था। बिहार के अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ मर्डर और जबरन वसूली (रंगदारी) जैसे 11 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था, जिसके कारण सरकार ने उस पर और उसके भाई मुकेश सिंह पर 3 लाख रुपये का इनाम रखा था। हालांकि, उसके भाई ने पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
कमांडो ट्रेनिंग लेने वाला देश का जवान ऐसे बना बिहार का बाहुबली
अपराध के दलदल में धंसने से पहले भोला सिंह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में एक सम्मानित जवान था, जहां उसने बाकायदा कमांडो की कठिन ट्रेनिंग भी हासिल की थी। पिछले 20 सालों से अपराध की दुनिया में दबदबा रखने वाले भोला सिंह की कहानी बिहार के पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह के साथ गहरे रिश्तों और बाद में पैदा हुई दुश्मनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उस पर विवेका पहलवान के भाई संजय सिंह की हत्या करने का भी संगीन आरोप है।
चर्चित AK-47 कांड, मुखिया और पुलिसकर्मियों की हत्या से कनेक्शन
भोला सिंह का नाम बिहार के सबसे चर्चित आपराधिक घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है। साल 2019 में जब पूर्व विधायक अनंत सिंह के पैतृक घर पर छापेमारी कर एक AK-47 राइफल जब्त की गई थी, तो उसके पीछे पुलिस को मिला वह इनपुट था जिसमें भोला सिंह को जान से मारने की साजिश रची जा रही थी। इसी मामले में पूर्व विधायक को 10 साल की जेल हुई थी। इसके अलावा, साल 2021 में पंडारक पूर्वी के मुखिया प्रियरंजन कुमार उर्फ गोरेलाल और पंडारक थाने के दो पुलिस अधिकारियों (राजेश कुमार और लाल बहादुर) की सनसनीखेज हत्याओं में भी भोला सिंह का नाम मुख्य रूप से सामने आया था।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पहला मुजफ्फरपुर दौरा, 288 करोड़ की विकास योजनाओं का करेंगे उद्घाटन और शिलान्यास
2 Jun, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर | बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आज राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक महत्वपूर्ण दौरा होने जा रहा है। वे यहां आयोजित एक विशेष सहयोग शिविर में सम्मिलित होने के लिए दोपहर 12 बजे हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंचेंगे, जिसके लिए प्रशासन द्वारा हेलीपैड तैयार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम मोतीपुर प्रखंड के परसौनी नाथ पंचायत के अंतर्गत आने वाले उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गोसाईंपुर के प्रांगण में आयोजित किया जा रहा है।
मुजफ्फरपुर को मिलेगी करोड़ों की सौगात और विकास योजनाओं का उपहार
मुख्यमंत्री अपने इस दौरे के दौरान मुजफ्फरपुर जिले को लगभग 288.16 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 109 विकास परियोजनाओं का बड़ा उपहार देंगे। इस भव्य समारोह में वे कई नई योजनाओं की नींव रखेंगे (शिलान्यास करेंगे) और पूरी हो चुकी परियोजनाओं का लोकार्पण (उद्घाटन) करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के साथ जिले के प्रभारी मंत्री और राज्य के भूमि सुधार विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
एक ही छत के नीचे 12 विभागों के स्टॉल और जन-समस्याओं का निपटारा
दोपहर 12 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सहयोग शिविर का मुआयना करेंगे और सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा करेंगे। इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ कुल 12 सरकारी विभागों के काउंटर (स्टॉल) लगाए जा रहे हैं। इन काउंटरों के माध्यम से आम जनता की शिकायतों और समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया जाएगा, साथ ही लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका सीधा लाभ एक ही स्थान पर मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा चाक-चौबंद, आला अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
मुख्यमंत्री के इस वीआईपी दौरे को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद और अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास के पूरे इलाके में भारी संख्या में मजिस्ट्रेट (दंडाधिकारियों) और पुलिस बल की तैनाती की गई है। तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जिला अधिकारी (डीएम) सुब्रत सेन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतेश कुमार मिश्र ने खुद देर शाम तक आयोजन स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।
"हजारीबाग में गुरुजी की पोस्टिंग का अजीब खेल; एक्सीलेंस स्कूल में शिक्षकों की 'बाढ़', ग्रामीण इलाकों में सूखा"
1 Jun, 2026 03:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक विसंगति उजागर हुई है। एक तरफ जहां सुदूर ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूल स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं और वहां महज एक शिक्षक पर 50 से 60 बच्चों को पढ़ाने का भारी बोझ है, वहीं दूसरी तरफ शहरी क्षेत्र के 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' में 7 से 12 छात्र-छात्राओं पर एक शिक्षक ऐश कर रहे हैं। शिक्षा विभाग का यह रवैया सरकार के उस अधिकारिक नियम की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है, जिसके तहत अनिवार्य रूप से प्रति 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की नियुक्ति का मानक तय किया गया है।
एक्सीलेंस स्कूल में जरूरत से ज्यादा स्टाफ, भूगोल में चौथे शिक्षक की एंट्री
जिले में सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र 'गवर्नमेंट गर्ल्स प्लस टू उच्च विद्यालय' (सीएम उत्कृष्ट बालिका विद्यालय) बना हुआ है। इस प्रतिष्ठित संस्थान में वर्तमान में कुल 308 छात्राएं ही पढ़ रही हैं, लेकिन उनके लिए 43 शिक्षकों का भारी-भरकम स्टाफ तैनात है। इस गणित के हिसाब से यहां महज 7 छात्राओं पर एक गुरुजी उपलब्ध हैं। हद तो तब हो गई जब पहले से ही भूगोल विषय के तीन शिक्षक मौजूद होने के बाद भी हाल ही में अंतर जिला स्थानांतरण के जरिए जागेश्वर प्रसाद को चौथे भूगोल शिक्षक के रूप में यहां भेज दिया गया। इससे पहले मई महीने में अनिल कुमार का भी इसी स्कूल में ट्रांसफर किया गया था। विषयवार शिक्षकों की इस अति-तैनाती ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहरी स्कूलों में शिक्षकों की 'मौज', ग्रामीण अंचल राम भरोसे
विभाग के अंदरूनी सूत्रों का संगीन आरोप है कि शहर के सुविधायुक्त और नामचीन स्कूलों में मलाईदार पोस्टिंग और प्रतिनियुक्ति पाने के लिए ऊंचे रसूख और अनुचित तौर-तरीकों का खेल खेला जाता है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण आरक्षी उच्च विद्यालय में 12 छात्रों पर और उत्क्रमित उच्च विद्यालय सिंदूर में भी 12 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। इसके विपरीत, जिले के देहाती इलाकों की तस्वीर बेहद चिंताजनक है। वहां कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में सालों से पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण एक ही शिक्षक को मजबूरी में सारे विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं और बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है।
मामला तूल पकड़ने पर उपायुक्त ने बुलाई रिपोर्ट, रैशनलाइजेशन की मांग
शिक्षा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यदि विभाग ईमानदारी से शिक्षकों का 'रैशनलाइजेशन' (युक्तिकरण) कर दे, तो ग्रामीण क्षेत्रों का संकट तुरंत खत्म हो सकता है। इस पूरे मामले की गूंज जब प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दी, तो हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने शिक्षा विभाग के आला अफसरों को कड़ी फटकार लगाते हुए सभी स्कूलों के छात्र-शिक्षक अनुपात की वास्तविक रिपोर्ट तलब की है। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया है कि रिपोर्ट सामने आते ही गैर-जरूरी जगहों पर जमे शिक्षकों को हटाकर उन्हें कमी वाले स्कूलों में भेजा जाएगा ताकि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
"सांसें रोक देने वाले फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स मार्केट की बादशाहत; SPL-2 की ट्रॉफी पर जमाया कब्जा"
1 Jun, 2026 03:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामगढ़। झारखंड के पतरातू कटिया पंच मंदिर स्थित चिल्ड्रन पार्क मैदान में रविवार, 31 मई को क्रिकेट प्रेमियों का भारी हुजूम उमड़ा, जहां शारदा प्रीमियर लीग (एसपीएल) सीजन-2 का हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबला खेला गया। पूरे सीजन में दर्शकों को बांधकर रखने वाले इस टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स मार्केट और हेसला नाइट राइडर्स के बीच कांटे की टक्कर हुई। अंततः रॉयल चैलेंजर्स मार्केट ने अपने उत्कृष्ट खेल के दम पर चमचमाती ट्रॉफी को अपने नाम कर लिया।
स्थानीय युवाओं के लिए बेहतरीन प्लेटफॉर्म: बड़कागांव विधायक
इस भव्य समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बड़कागांव क्षेत्र के विधायक रोशन लाल चौधरी शामिल हुए। उन्होंने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से हाथ मिलाकर उनका हौसला बढ़ाया, जिसके बाद आयोजन समिति ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे ग्रामीण व कस्बाई अंचलों में हुनरमंद खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें तराशने और सही मौका देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आईपीएल की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर एसपीएल का सफल आयोजन करना एक बड़ी उपलब्धि है, जो युवाओं में अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास करता है।
रॉयल चैलेंजर्स मार्केट ने खड़ा किया 164 रनों का विशाल लक्ष्य
फाइनल के महामुकाबले में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी रॉयल चैलेंजर्स मार्केट की टीम ने निर्धारित ओवरों में 9 विकेट खोकर 164 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से शुभम केसरी ने सूझबूझ से खेलते हुए 32 रन और आशुतोष कुमार ने तेजतर्रार 28 रन बनाए। दूसरी तरफ से हेसला नाइट राइडर्स के मुख्य गेंदबाज वैभव ने घातक गेंदबाजी का मुजाहिरा करते हुए अपने 4 ओवर के स्पेल में 4 बड़े विकेट झटके और विपक्षी टीम की रन गति पर अंकुश लगाने का प्रयास किया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ाई हेसला नाइट राइडर्स
जीत के लिए मिले 165 रनों के कड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी हेसला नाइट राइडर्स की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम लगातार दबाव में बिखरती चली गई। दिव्या अग्रवाल ने 27 रन बनाकर संघर्ष जरूर किया, लेकिन बाकी बल्लेबाजों का साथ न मिलने से टीम लक्ष्य से दूर रह गई। रॉयल चैलेंजर्स मार्केट के गेंदबाजों ने कसी हुई लाइन-लेंथ से विपक्षी टीम को बांधे रखा; जिसमें सनी कुमार ने 3 विकेट और आशुतोष कुमार ने 2 विकेट लेकर हेसला की उम्मीदों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। ऑलराउंड खेल दिखाने वाले सनी कुमार को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया।
टूर्नामेंट के अंत में व्यक्तिगत पुरस्कारों की भी घोषणा की गई, जिसमें सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज का खिताब शशांक को, सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक आलोक टुडू को, सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर दिव्य राउतरे को और पूरे टूर्नामेंट में धमाल मचाने वाले अरसद अंसारी को 'सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज' के साथ-साथ 'मैन ऑफ द सीरीज' के खिताब से नवाजा गया। इस सफल आयोजन को संपन्न कराने में अध्यक्ष चंदन कुमार, सचिव विश्वजीत दत्ता और कोषाध्यक्ष राहुल रंजन सहित पूरी प्रबंधन समिति का विशेष योगदान रहा।
"वित्त मंत्री का कड़ा रुख: पलामू में गरीबों की जमीन हड़पने वालों को चेताया, कहा—सलाखों के पीछे होगी जगह"
1 Jun, 2026 03:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पलामू। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सूबे में सक्रिय अपराधियों और भू-माफियाओं को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि सरकार कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। सोमवार को पाटन प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सुदूरवर्ती चेतमा पिकेट में सुरक्षाबलों के लिए विधायक निधि से 10 कूलर और एक वाटर प्यूरीफायर (आरओ) भेंट करते हुए उन्होंने दबंगों और जमीन हड़पने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए।
कमजोरों की जमीन हड़पने वालों की सही जगह जेल
वित्त मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि कुछ असामाजिक तत्व अपनी ताकत और रसूख के दम पर असहाय और गरीब ग्रामीणों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हेमंत सोरेन सरकार राज्य में पूरी तरह कानून का शासन लागू करने के लिए वचनबद्ध है और किसी भी अपराधी या भू-माफिया को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलेगा। जो लोग सुधरने को तैयार नहीं हैं, उन्हें पुलिसिया सख्ती झेलनी होगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देकर अपराध के बल पर अपना दबदबा बनाने की चाह रखने वालों के लिए सिर्फ जेल ही एकमात्र जगह है।
दबंगों पर कार्रवाई के लिए पुलिस और प्रशासन को खुली छूट
राधाकृष्ण किशोर ने जानकारी दी कि पलामू जिला प्रशासन और पुलिस महकमे को अपराधियों के मंसूबों को नेस्तनाबूद करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र कर दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस बल इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। सरकार का यह साफ रुख है कि सूबे के किसी भी आम नागरिक के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए। अगर कोई भी बाहुबली अवैध रूप से किसी की संपत्ति पर आंख उठाएगा, तो उसके खिलाफ कानून का डंडा सख्ती से चलेगा।
भीषण गर्मी में मुस्तैद जवानों के जज्बे को किया नमन
चेतमा पिकेट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने विषम परिस्थितियों में तैनात जवानों के अदम्य साहस और समर्पण की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि झारखंड को उग्रवाद के दंश से उबारने और यहां अमन-चैन का माहौल बनाने में हमारे सुरक्षा बलों का बलिदान अतुलनीय है। उन्होंने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वे देर रात अपने क्षेत्र के दौरों पर निकलते हैं, तब भी ये जवान मुस्तैदी से पहरा देते नजर आते हैं। ऐसे में उनकी बुनियादी सुविधाओं जैसे ठंडे पानी और हवा का ध्यान रखना सरकार का फर्ज है, जिसके तहत ये उपकरण मुहैया कराए गए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार समाज के हर तबके को न्याय और सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
"स्कूल बंद, पर हेडक्वार्टर में हाजिरी लाजमी; जानिए क्या है शिक्षा विभाग का नया कड़ा रुख"
1 Jun, 2026 01:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में सोमवार से ग्रीष्मकालीन अवकाश की शुरुआत हो चुकी है, जो आगामी 20 जून तक जारी रहेगा। हालांकि, इस बार शिक्षक इस छुट्टी का लाभ उठाकर अपने घर या किसी अन्य शहर की यात्रा पर नहीं जा सकेंगे। शिक्षा विभाग ने एक सख्त फरमान जारी करते हुए निर्देश दिया है कि गर्मी की छुट्टियों की पूरी अवधि के दौरान सभी शिक्षकों को अपने प्रतिनियुक्ति वाले क्षेत्र (मुख्यालय) में ही बने रहना होगा। यदि किसी बेहद आपातकालीन स्थिति में किसी शिक्षक को मुख्यालय से बाहर जाना पड़ता है, तो उन्हें इसके लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पहले लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी।
मुख्यालय में रहने की अनिवार्यता के मुख्य कारण
शिक्षा विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छुट्टियों के दिनों में भी शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य करने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण यह है कि इस छुट्टी के दौरान राज्य सरकार द्वारा कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन किया जाना तय हुआ है, जिनमें शिक्षकों की ड्यूटी वीक्षक (इन्विजिलेटर) और अन्य परीक्षा संबंधी कार्यों में लगाई जाएगी। दूसरा कारण यह है कि छुट्टी के दिनों में भी विद्यालय स्तर पर शिक्षा विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण निर्देशों और योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना है, जिसके लिए शिक्षकों की मौजूदगी बेहद जरूरी है।
चौबीसों घंटे मोबाइल ऑन रखने के निर्देश और कार्रवाई की चेतावनी
विभाग की ओर से जारी आदेश में यह भी साफ कहा गया है कि सभी शिक्षकों को न केवल अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद रहना होगा, बल्कि अपना मोबाइल फोन भी हर समय चालू (ऑन) रखना होगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि आपात स्थिति या परीक्षा ड्यूटी से जुड़े किसी भी कार्य के लिए विभाग उनसे तुरंत संपर्क साध सके और प्रशासनिक कार्यों में कोई बाधा न आए। इसके साथ ही विभाग ने सचेत किया है कि जो भी शिक्षक इस नियम की अनदेखी करेंगे या बिना पूर्व अनुमति के अपना मुख्यालय छोड़ेंगे, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के कड़े फरमान से शिक्षकों में भारी आक्रोश
शिक्षा विभाग के इस नए आदेश के बाद राज्य भर के शिक्षकों में गहरा असंतोष और गुस्सा देखा जा रहा है। विभागीय कार्रवाई के खौफ के कारण नाम गुप्त रखने की शर्त पर कई शिक्षकों ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे विभाग शिक्षकों को इंसान और उनका कोई परिवार ही नहीं समझता। शिक्षकों का कहना है कि चाहे कड़ाके की ठंड हो या भीषण गर्मी की लू, उनसे लगातार काम लिया जाता है। त्योहारों से लेकर छुट्टियों तक में उन्हें कोई राहत नहीं मिलती। पढ़ाई के अलावा जनगणना और अन्य सरकारी गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी उन्हीं के कंधों पर डाल दिया जाता है। शिक्षकों ने बेहद निराशा भरे शब्दों में कहा कि प्रशासन का रवैया उनके प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हो चुका है।
"हार्डवेयर की दुकान से IIT बॉम्बे के सफर तक: गया के शुभम बने देश के सबसे तेज दिमाग"
1 Jun, 2026 01:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गया। बिहार के गया जिले के एक बेहद सामान्य से इलाके से ताल्लुक रखने वाले शुभम कुमार ने देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसकी चर्चा आज पूरे भारत में हो रही है। नथरागंज के ब्राह्मणी घाट इलाके के रहने वाले शुभम ने जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) 2026 की परीक्षा में कुल 330 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR 1) हासिल की है। इस शानदार कामयाबी से पहले भी वे जेईई मेन (JEE Main) परीक्षा के दोनों सत्रों में पूरे 100 परसेंटाइल अंक लाकर अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय दे चुके थे।
गया के होनहार ने देश भर में गाड़े सफलता के झंडे
जैसे ही परीक्षा के परिणाम जारी हुए, नथरागंज और ब्राह्मणी घाट सहित पूरे गया जिले में जश्न का माहौल बन गया। शुभम कुमार की इस एतिहासिक कामयाबी की खबर मिलते ही स्थानीय लोग खुशी से झूम उठे और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर इस पल को यादगार बनाया। टॉपर बनने के बाद शुभम के घर पर शुभकामनाएं देने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और आम लोगों ने इसे पूरे सूबे के लिए एक गौरवमयी क्षण बताया है।
सीमित संसाधनों के बीच मेहनत से रचा नया इतिहास
आमतौर पर यह माना जाता है कि देश की इतनी कठिन परीक्षाओं में केवल बड़े शहरों या बड़े कोचिंग हब के छात्र ही बाजी मारते हैं, लेकिन शुभम ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया। उनकी यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि यह सालों की कड़ी तपस्या, अनुशासन और एकाग्रता का प्रतिफल है। जेईई मेन में 100 फीसदी अंक लाने के बाद से ही उनसे टॉपर बनने की उम्मीदें लगाई जा रही थीं, जिस पर उन्होंने जेईई एडवांस्ड में पहला स्थान पाकर पक्की मुहर लगा दी।
देश भर के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
शुभम कुमार की यह जादुई सफलता उन लाखों छात्र-छात्राओं के लिए एक मिसाल है, जो छोटे शहरों या सामान्य परिवारों से आते हैं और बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि अगर इरादे मजबूत हों और खुद पर भरोसा हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी देश के शिखर पर पहुंचा जा सकता है। शुभम की इस ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे बिहार का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमका दिया है।
"आरजेडी पोस्टर वॉर: पोस्टर में रोहिणी की एंट्री, तेजस्वी के लिए समर्थन या कोई छिपा हुआ संकेत?"
1 Jun, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों राबड़ी आवास को लेकर जारी खींचतान के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कार्यालय के बाहर लगा एक नया पोस्टर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है। इस पोस्टर में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी रोहिणी आचार्य की तस्वीरें लगी हैं, जिसके साथ लिखी कुछ पंक्तियां गहरे राजनीतिक मायने समेटे हुए हैं। जानकारों का मानना है कि इस पोस्टर के जरिए रोहिणी आचार्य के समर्थकों ने सीधे तौर पर राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।
पोस्टर की पंक्तियों में छिपा संदेश
राजद दफ्तर के बाहर लगे इस पोस्टर को किसने लगवाया है, इसका कोई आधिकारिक नाम तो सामने नहीं आया है, लेकिन इसकी भाषा से साफ है कि यह काम रोहिणी आचार्य के किसी कट्टर समर्थक का है। पोस्टर पर लिखी कविता में कहा गया है:"न हौसला टूटा है, न हिम्मत हारी है। मैं लड़ना जानती हूं, अकेले गद्दारों पर भारी हूं। मैं लालू जी की बेटी हूं, मेरा लहू बिहारी और रग-रग में खुद्दारी है।" इन आक्रामक पंक्तियों से साफ जाहिर होता है कि रोहिणी के समर्थक उनके सियासी हौसले को बुलंद दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव की तरफ इशारा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पोस्टर का सीधा निशाना कहीं न कहीं तेजस्वी यादव और उनके करीबियों पर है। इसके जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि चुनावी उतार-चढ़ाव के बाद भी रोहिणी का मनोबल कमजोर नहीं हुआ है और वह पार्टी या परिवार में 'गद्दारी' करने वालों से अकेले मुकाबला करने का माद्दा रखती हैं।
पारिवारिक तनाव और लालू यादव की मध्यस्थता
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लालू प्रसाद यादव अपने नियमित हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर में रोहिणी आचार्य के पास ही रुके हुए हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही रोहिणी आचार्य अपने परिवार और पार्टी के कुछ फैसलों से नाखुश चल रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी कई बार अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए तेजस्वी यादव के बेहद करीबी और सांसद संजय यादव पर तीखे हमले किए थे। माना जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव इस समय सिंगापुर में रोहिणी को मनाने और परिवार के भीतर की इस कलह को शांत करने की कोशिशों में जुटे हैं, ताकि विधानसभा चुनाव के बाद बिखरे हुए समीकरणों को फिर से समेटा जा सके।
सरकारी संपत्ति पर कब्जे की मानसिकता छोड़े राजद- संजय सरावगी
31 May, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा सरकारी आवास खाली नहीं करने संबंधी दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार में अब कानून का राज है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी बड़ा पदाधिकारी या पूर्व मुख्यमंत्री ही क्यों न रहा हो, नियमों और कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति या परिवार की निजी संपत्ति नहीं होती, बल्कि यह जनता के टैक्स के पैसे से निर्मित और संचालित सार्वजनिक संपत्ति है। सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के तहत ही आवासों का आवंटन और पुनः आवंटन किया जाता है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी आदेश की अवहेलना करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों का अपमान है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सरावगी ने कहा कि राजद और लालू परिवार की राजनीति हमेशा से सत्ता को निजी अधिकार समझने की रही है। यही कारण है कि आज भी वे सरकारी संसाधनों और संपत्तियों को जनता की धरोहर के बजाय अपने निजी अधिकार के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि लालू यादव के परिवार की आदत सरकारी संसाधनों और जनता के पैसे की लूट-खसोट की राजनीति से जुड़ी रही है। बिहार की जनता ने लंबे समय तक इस मानसिकता का दुष्परिणाम देखा है और अब प्रदेश की जनता ऐसी प्रवृत्तियों को स्वीकार करने वाली नहीं है। सरावगी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का यह कहना कि सरकार फोर्स लगाकर आवास खाली करवाए, उनके अहंकार और कानून के प्रति असम्मान को दर्शाता है। लोकतंत्र में नियम सभी के लिए समान होते हैं। यदि सरकार ने नियमों के अनुसार कोई निर्णय लिया है, तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए, न कि उसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार सुशासन, पारदर्शिता और कानून के शासन की नीति पर कार्य कर रही है। सरकार किसी के प्रति द्वेष की भावना से नहीं, बल्कि स्थापित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप निर्णय ले रही है। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने राजद नेताओं से आग्रह किया कि वे जनता को गुमराह करने और अनावश्यक राजनीतिक नाटक करने के बजाय कानून का सम्मान करें। बिहार की जनता अब परिवारवाद, विशेषाधिकार और सरकारी संसाधनों पर कब्जे की राजनीति नहीं, बल्कि जवाबदेही, सुशासन और विकास की राजनीति चाहती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार में कानून के शासन को चुनौती देने वाली किसी भी प्रवृत्ति को जनता उचित जवाब देगी। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम नीतीश कुमार की सरकार ने जो आदेश दिया था उसी को यह सरकार जमीन पर उतार रही है। पूर्व सीएम राबड़ी देवी को याद रखना चाहिए कि यह राजतंत्र नहीं लोकतंत्र है, लेकिन आप अभी भी खुद को रानी समझ रही है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में जनता ही मालिक होता है। ऐसे में उन्हें (राबड़ी देवी) को सरकारी आवास तो खाली करना ही पड़ेगा। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या राबड़ी देवी नहीं चाहती हैं कि कोई दलित समाज का व्यक्ति बड़े घर मे रंहे? क्या सिर्फ आपको ही को बड़े घर मे रहने का अधिकार है?
बस किराया में हुआ बढ़ोतरी, एक जून से लागू होगी नई दरें
31 May, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मधुबनी। बिहार सरकार ने राज्य में संचालित विभिन्न श्रेणी की बसों के यात्री किराये में वृद्धि कर दी है। परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई किराया दरें 1 जून से प्रभावी होंगी। मधुबनी के जिला परिवहन पदाधिकारी राम बाबू ने बताया कि वर्ष 2021 से लागू किराया दरों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। विभाग का कहना है कि प्रस्तावित वृद्धि पर एक माह तक आपत्ति एवं सुझाव आमंत्रित किए गए थे, लेकिन निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद किराया पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।
* बस किराये में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी
सामान्य, डीलक्स, एसी, वोल्वो तथा नगर बस सेवा सभी पर यह किराया में वृद्वि लागू हो जाएगी। दूरी के अनुसार प्रति किलोमीटर किराया तय किया गया. निर्धारित दर से अधिक किराया वसूलने पर कार्रवाई होगी। प्रत्येक बस एवं बस पड़ाव पर किराया सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
* यात्रियों को अब देना होगा अधिक किराया
परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा-67 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य में संचालित बसों के यात्री किराये का पुनर्निर्धारण किया गया है। विभाग की वेबसाइट पर 8 अप्रैल 2026 को जारी प्रारूप अधिसूचना के माध्यम से आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं। निर्धारित समय सीमा में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होने के कारण सरकार ने नई किराया दरों को अंतिम रूप दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत दूरी के अनुसार किराया वृद्धि का प्रतिशत निर्धारित किया गया है। 50 किलोमीटर तक की दूरी के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत, 100 किलोमीटर तक 14 प्रतिशत,150 किलोमीटर तक 13 प्रतिशत, 200 किलोमीटर तक 12 प्रतिशत, 250 किलोमीटर तक 11 प्रतिशत तथा 300 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए 10 प्रतिशत तक किराया वृद्धि की गई है। नई किराया दरें प्रति यात्री प्रति किलोमीटर इस प्रकार है-
साधारण बस सेवा
वर्तमान में 1.50 रुपये
नई दर 1.65 से 1.73 रुपये.
डीलक्स बस सेवा
वर्तमान में 1.70 रुपये
नई दर 1.87 से 1.96 रुपये.
डीलक्स वातानुकूलित बस सेवा
वर्तमान में 2.00 रुपये
नई दर 2.20 से 2.30 रुपये
वोल्वो श्रेणी बस सेवा
वर्तमान में 2.50 रुपये
नई दर 2.75 से 2.88 रुपये
- नगर बस सेवा
प्रथम चार किलोमीटर के लिए 1.60 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 1.84 रुपये प्रति किलोमीटर किया गया है। इसके बाद प्रत्येक दो किलोमीटर के चरण के लिए 1.50 रुपये की जगह 1.73 रुपये प्रति किलोमीटर किराया निर्धारित किया गया है।
* परिवहन विभाग ने जारी किए निर्देश
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि किराया निर्धारण प्वाइंट टू प्वाइंट आधार पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार द्वारा किया जाएगा. जिला एवं स्थानीय प्रशासन को प्रत्येक बस पड़ाव पर किराया सूची प्रमुखता से प्रदर्शित कराने का निर्देश दिया गया है। वहीं बस मालिकों और चालकों को भी अपने वाहनों में किराया तालिका लगाने को कहा गया है। परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि निर्धारित किराया अधिकतम सीमा होगी और किसी भी परिस्थिति में इससे अधिक किराया वसूल नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई बस संचालक निर्धारित बैठने की क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाता है तो उसे ओवरलोडिंग मानते हुए मोटरयान अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक बस में शिकायत पंजी रखना अनिवार्य किया गया है ताकि यात्रियों की शिकायतों का निस्तारण किया जा सके। विभाग ने वर्ष 2021 में जारी पूर्व अधिसूचना को संशोधित मानते हुए नई अधिसूचना को 1 जून 2026 से प्रभावी करने की घोषणा की है।
* यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर ?
- छोटी दूरी की यात्रा में किराया अपेक्षाकृत अधिक बढ़ेगा।
- लंबी दूरी के यात्रियों पर वृद्धि का प्रतिशत कम रहेगा।
- एसी और प्रीमियम बसों में सफर और महंगा होगा।
- सभी बस स्टैंड और बसों में किराया सूची लगने से मनमानी वसूली पर रोक लगेगी।
बीएसएनएल की भारत नेट योजना से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर
31 May, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मधुबनी। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की महत्वाकांक्षी भारतनेट योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति को गति देने के साथ-साथ शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। टीडीएम सुमन कुमार झा ने बताया कि योजना के माध्यम से गांव-गांव तक हाईस्पीड इंटरनेट सेवा पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर भारतनेट उद्यमी पार्टनर बनाए जाएंगे, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। बीएसएनएल द्वारा सभी प्रखंडों की ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है और अब पंचायतों को रिंग रूट से जोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है। इस योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत होने से शिक्षा, डिजिटल भुगतान, टेलीमेडिसिन और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा. श्री झा ने बताया कि भारतनेट उद्यमी योजना के तहत इच्छुक युवक-युवतियां कम निवेश में इंटरनेट सेवा प्रदाता बन सकते हैं. चयनित उद्यमियों को बीएसएनएल की ओर से तकनीकी प्रशिक्षण, नेटवर्क संचालन की जानकारी तथा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। साथ ही कनेक्शन उपलब्ध कराने वाले उद्यमी पार्टनरों को 50 प्रतिशत तक हिस्सेदारी एवं प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और युवाओं का शहरों की ओर पलायन भी कम होगा। उद्यमी पार्टनरों को ओएफसी (ऑप्टिकल फाइबर केबल) की खरीद और इंटरनेट नेटवर्क स्थापित करने का कार्य करना होगा तथा वे अपनी इच्छानुसार पंचायतों में सेवा उपलब्ध करा सकेंगे।
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