बिहार-झारखण्ड
सरकारी आवास खाली करने की तैयारी में राबड़ी देवी, भवन निर्माण विभाग से मांगी सरकारी सामानों की पूरी सूची
28 Jun, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने की प्रक्रिया के बीच भवन निर्माण विभाग से आवास का चार्ज रजिस्टर और विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए सभी सरकारी सामानों की विस्तृत सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इस संबंध में उनके सहायक ने भवन निर्माण विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि सरकारी आवास खाली करते समय विभागीय सामानों का सही तरीके से मिलान किया जा सके और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो, इसलिए आवास में उपलब्ध सभी सरकारी फर्नीचर, उपकरणों और अन्य सामानों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया जाए। इससे आवास हस्तांतरण की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सकेगी। सूत्रों के अनुसार, राबड़ी देवी की ओर से यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आवास खाली करने के बाद उन पर सरकारी सामान अपने साथ ले जाने या किसी प्रकार की अनियमितता का आरोप न लगाया जा सके। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए सामानों का रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध होने पर हस्तांतरण के समय किसी तरह का विवाद नहीं होगा। गौरतलब है कि 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने को लेकर भवन निर्माण विभाग पहले ही राबड़ी देवी को चौथा नोटिस जारी कर चुका है। विभाग ने उन्हें 29 जून तक हर हाल में सरकारी आवास खाली करने का अंतिम समय दिया है। इधर, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 39 हार्डिंग रोड स्थित नए सरकारी आवास में निर्माण कार्य पूरा होने की आधिकारिक सूचना अब तक प्राप्त नहीं हुई है। इसके बावजूद विभाग को सूचित किया गया है कि 10 सर्कुलर रोड का सरकारी आवास निर्धारित समय के भीतर खाली कर दिया जाएगा। इस बीच आवास खाली करने की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। शुक्रवार को परिसर के भीतर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों को हटा दिया गया, जबकि घरेलू और अन्य सामानों की पैकिंग का कार्य लगातार जारी है। हालांकि, लालू परिवार 39 हार्डिंग रोड स्थित नए सरकारी आवास में कब शिफ्ट होगा, इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। भवन निर्माण विभाग और राबड़ी देवी के बीच सरकारी आवास हस्तांतरण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। ऐसे में 29 जून की तय समयसीमा से पहले आवास खाली करने की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई जा रही है।
बिहार बोर्ड का बड़ा फैसला: हाई स्कूल और इंटर परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए अपार आईडी अनिवार्य, 30 जून तक बनवाना होगा
28 Jun, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार सरकार ने हाई स्कूल (मैट्रिक) और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) की बोर्ड परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले सभी छात्र-छात्राओं के लिए अपार आईडी अनिवार्य कर दी गई है। अपार आईडी के बिना किसी भी विद्यार्थी का परीक्षा पंजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि 30 जून 2026 तक हर हाल में सभी पात्र विद्यार्थियों की अपार आईडी बनवाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए, ताकि कोई भी छात्र-छात्रा बोर्ड परीक्षा के पंजीकरण से वंचित न रह जाए। पत्र में बताया गया है कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने विद्यालयों में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों की 30 जून 2026 तक अपार आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी के अनुरूप राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए बोर्ड परीक्षा पंजीकरण के दौरान अपार आईडी और विद्यालय का यू-डायस कोड अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड समिति ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों के विद्यालयों के माध्यम से अभियान चलाकर निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार कराएं। इसके बाद ही बोर्ड परीक्षा के लिए उनका पंजीकरण किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इससे पहले भी शिक्षा विभाग द्वारा सभी डीईओ को अपार आईडी निर्माण को लेकर निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि कई जिलों में यह कार्य अभी पूरी तरह पूरा नहीं हो पाया है। इसी वजह से विभाग ने एक बार फिर सख्त निर्देश जारी करते हुए 30 जून की समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि अपार आईडी लागू होने से विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और उनकी पढ़ाई से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इसके साथ ही भविष्य में प्रवेश, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं को भी अधिक पारदर्शी और सरल बनाया जा सकेगा। वहीं विभाग ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे समय रहते अपार आईडी बनवा लें, ताकि बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बिहार में जमीन की नापी हुई महंगी: सरकार ने बढ़ाई नई शुल्क दरें, अब पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
28 Jun, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में जमीन की नापी (मापी) कराने वाले लोगों को अब पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन की नापी के लिए नई शुल्क दरें लागू कर दी हैं। विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत कई मामलों में नापी शुल्क लगभग दोगुना तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही आवेदन से लेकर शुल्क भुगतान और नापी तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे लोगों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध सेवा मिलने की उम्मीद है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में इतनी होगी नई शुल्क दर
नई अधिसूचना के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की सामान्य नापी के लिए प्रति खेसरा 1,000 रुपये शुल्क देना होगा। अधिकतम शुल्क 4,000 रुपये तय किया गया है। इससे पहले सामान्य नापी के लिए अधिकतम 1,000 रुपये ही शुल्क लिया जाता था। वहीं तत्काल (तात्कालिक) नापी की सुविधा लेने पर प्रति खेसरा 2,000 रुपये शुल्क देना होगा और अधिकतम 8,000 रुपये तक भुगतान करना पड़ेगा।
- शहरी क्षेत्रों में और अधिक बढ़ा शुल्क
नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन की सामान्य नापी के लिए प्रति खेसरा 2,000 रुपये तथा अधिकतम 8,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं तत्काल नापी कराने के लिए प्रति खेसरा 4,000 रुपये और अधिकतम 18,000 रुपये तक शुल्क देना होगा।
- पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन की नापी की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब आवेदन जमा करने, शुल्क भुगतान और नापी से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएंगी। विभाग का कहना है कि इससे लोगों को अंचल कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनेगी।
- दो दिनों में पूरी होगी नापी
नई व्यवस्था के तहत संबंधित अमीन को आवेदन प्राप्त होने के बाद दो दिनों के भीतर जमीन की नापी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होगा और लोगों को समयबद्ध सेवा मिल सकेगी।
- पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन बढ़ेगा आर्थिक बोझ
सरकार का दावा है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से भ्रष्टाचार, अनावश्यक देरी और कार्यालयों की भागदौड़ पर काफी हद तक रोक लगेगी। लोग घर बैठे आवेदन करने और ऑनलाइन शुल्क जमा करने की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि, नई शुल्क दरों में हुई बढ़ोतरी से जमीन की नापी कराने वाले लोगों पर पहले की तुलना में अधिक आर्थिक बोझ पड़ेगा। ऐसे में जहां डिजिटल व्यवस्था लोगों को सुविधा देगी, वहीं बढ़े हुए शुल्क को लेकर आम नागरिकों की जेब पर अतिरिक्त असर भी देखने को मिल सकता है।
पटना हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की नई नियुक्ति का रास्ता साफ, सभी विधि पदाधिकारियों ने दिया स्वेच्छिक इस्तीफा
28 Jun, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना,। पिछले कई वर्षों से लंबित सरकारी वकीलों की नियुक्ति का रास्ता अब साफ हो गया है। पटना हाईकोर्ट में कार्यरत राज्य सरकार के सभी विधि पदाधिकारियों-अपर महाधिवक्ता, राजकीय अधिवक्ता, सरकारी वकील और स्थायी समापुदेशक-ने स्वेच्छा से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि नई नियुक्ति प्रक्रिया में उन्हें दोबारा अवसर दिया जाता है तो वे उसके लिए तैयार हैं। इससे पहले महाधिवक्ता एस. डी. संजय ने सभी विधि पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जल्द ही नए सिरे से विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति करेगी। महाधिवक्ता ने कहा कि नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसमें सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। साथ ही महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात भी कही गई। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसे सक्षम विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति करना है, जो अदालत में राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखें और मुकदमों के त्वरित निपटारे में योगदान दें। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सरकारी वकीलों की लंबित समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा। हालांकि सभी वर्तमान विधि पदाधिकारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उनके इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं किए गए हैं। महाधिवक्ता एस. डी. संजय ने बताया कि नई नियुक्तियां होने और वैकल्पिक व्यवस्था बनने तक सभी मौजूदा विधि पदाधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था जल्द लागू की जाएगी, लेकिन तब तक न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
नीतीश-RCP मुलाकात के क्या हैं मायने? सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर
27 Jun, 2026 01:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार की सियासत में शनिवार को उस समय एक बड़ा मोड़ देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कभी 'राम' कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद (आरसीपी) सिंह अचानक उनसे मिलने पटना स्थित सर्कुलर रोड आवास पर पहुंचे। लंबे समय के बाद दोनों बड़े नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात की तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में सामने आईं, राज्य की राजनीति में अटकलों का बाजार बेहद गर्म हो गया। राजनीतिक पंडित इस मुलाकात को आरसीपी सिंह की जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में दोबारा घर वापसी के एक बड़े और पुख्ता संकेत के रूप में देख रहे हैं।
चार साल बाद हुई सकारात्मक मुलाकात, आरसीपी सिंह ने नीतीश को बताया मजबूत
मुलाकात के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए आरसीपी सिंह ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद उनकी यह मुलाकात बेहद आत्मीय और सकारात्मक माहौल में हुई है। उन्होंने उन विरोधियों को भी कड़ा संदेश दिया जो मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में मुख्यमंत्री को कमजोर मान रहे हैं। आरसीपी सिंह ने साफ कहा कि कुछ लोग नीतीश कुमार को कम आंकने की भूल कर रहे हैं, जबकि वह कल भी राजनीतिक रूप से बेहद मजबूत थे और आज भी पूरी तरह सशक्त हैं। जदयू में दोबारा शामिल होने के सीधे सवाल पर उन्होंने पत्ता न खोलते हुए बस इतना कहा कि सही समय का इंतजार किया जाना चाहिए।
नीतीश के आवास के बाहर समर्थकों का जोरदार हंगामा
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर एक समय हाई-वोल्टेज ड्रामा भी देखने को मिला। आरसीपी सिंह के साथ आए समर्थकों ने गेट के बाहर जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। समर्थकों का सीधा आरोप था कि जदयू के कुछ अंदरूनी नेता, जिनमें संजय गांधी और ललन सर्राफ शामिल हैं, आरसीपी सिंह को मुख्यमंत्री से मिलने से रोकने का प्रयास कर रहे थे। समर्थकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि इन नेताओं के मन में आरसीपी सिंह का डर है, जिसकी वजह से वे दोनों पुराने सहयोगियों को दूर रखना चाहते हैं। हालांकि, बाहर हो रहे हंगामे को देखते हुए थोड़ी ही देर बाद आरसीपी सिंह को अंदर बुला लिया गया, जिसके बाद बाहर मौजूद समर्थक शांत हुए। समर्थकों के इस गुस्से पर आरसीपी सिंह ने कहा कि नेता से मिलने की चाहत में कभी-कभी ऐसी भावनाएं सामने आ जाती हैं, लेकिन अब सब कुछ पूरी तरह ठीक है।
जदयू के भीतर बदले सुर, घर वापसी का रास्ता लगभग साफ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी अब महज एक औपचारिकता रह गई है। हाल के दिनों में आरसीपी सिंह द्वारा मुख्यमंत्री की लगातार की जा रही तारीफों ने इस बात की जमीन पहले ही तैयार कर दी थी। पार्टी के भीतर भी अब उनके खिलाफ चल रहा पुराना गतिरोध लगभग खत्म हो चुका है और वरिष्ठ नेताओं के बीच उनके स्वागत के लिए सकारात्मक माहौल बन रहा है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने भी सार्वजनिक तौर पर बयान देकर इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जदयू आरसीपी सिंह का अपना पुराना घर है और अपने घर लौटने वाले का हमेशा स्वागत होता है। वरिष्ठ नेताओं की इस हरी झंडी के बाद माना जा रहा है कि बिहार के सत्ताधारी दल में जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
पेड़ से भिड़ी कार, शराब की बोतलें देख मौके पर मची लूट
27 Jun, 2026 01:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोपालगंज:बिहार के गोपालगंज जिले में भोरे-कटेया मुख्य मार्ग पर शनिवार के तड़के सुबह एक बेहद अजीबोगरीब सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक बेहद तेज़ रफ़्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई और भोरे थाना इलाके में हीरो एजेंसी के समीप सड़क किनारे एक बड़े पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी ज़ोरदार और भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हालांकि, इस पूरे वाकये में सबसे गनीमत की बात यह रही कि दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई खबर नहीं मिली है।
कार के भीतर दिखा 'मधुशाला' का नज़ारा, ग्रामीणों में मची लूटने की होड़
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह-सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने सड़क किनारे क्षतिग्रस्त हालत में इस लग्जरी कार को देखा। जब कुछ लोग मदद के इरादे से गाड़ी के करीब पहुंचे, तो कार के अंदर का नजारा देखकर दंग रह गए। कार के भीतर भारी मात्रा में विदेशी शराब की बोतलें ठंस-ठंस कर भरी हुई थीं। जैसे ही यह बात गांव में फैली, मौके पर देखते ही देखते लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्थानीय पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही वहां अफरा-तफरी मच गई और कई लोग कार के शीशे तोड़कर शराब की बोतलें निकाल-निकाल कर अपने घरों की तरफ भागने लगे।
पुलिस ने क्षतिग्रस्त गाड़ी को किया ज़ब्त, यूपी से जुड़े तस्करों के नेटवर्क की जांच शुरू
हादसे और उसके बाद मची लूटपाट की भनक लगते ही भोरे थाना पुलिस तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही कार सवार कथित तस्कर और शराब लूट रहे अधिकांश लोग वहां से नौ दो ग्यारह हो चुके थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त कार को अपने कब्जे में लेकर थाने पहुंचा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए उसके असली मालिक का पता लगाया जा रहा है। साथ ही पुलिस इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि शराब की यह बड़ी खेप उत्तर प्रदेश के किस इलाके से लाई जा रही थी और बिहार के भीतर इसे किस सिंडिकेट तक पहुंचाया जाना था।
सद्गुरु के आगमन पर बढ़ी सियासी गर्मी, स्वागत करते हुए कसा गया तंज
27 Jun, 2026 01:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए सूबे की एनडीए सरकार, मुख्यमंत्री और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर बेहद तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्या ने राजधानी पटना में बने एशिया के सबसे बड़े श्मशान घाट के प्रबंधन को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि सरकार अब मोक्ष धामों का भी 'आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग' यानी निजीकरण करने में जुट गई है।
'आइए ना हमरा बिहार में'— महंगे अंतिम संस्कार को लेकर कसा तंज
रोहिणी आचार्या ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सरकार की नीतियों को घेरते हुए लिखा कि "आइए ना हमरा बिहार में! करवाइए महंगा अंतिम संस्कार जग्गी के प्यार में!" उन्होंने आरोप लगाया कि महज 1 रुपये के टोकन अमाउंट पर देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्य बिहार में करोड़ों की सरकारी ज़मीन उद्योगपतियों और चहेतों में बांटी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की नीतियों का आधार बिहार का विकास करना है या फिर परदे के पीछे अधिकारियों और मंत्रियों को मिलने वाले उपहार हैं। रोहिणी ने इस पूरी व्यवस्था को 'जमीन बंदरबांट योजना' करार दिया।
क्या मोक्ष धाम भी अब सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं?
पटना के श्मशान घाट के आधुनिक प्रबंधन को बाहरी हाथों में सौंपने पर आपत्ति जताते हुए आरजेडी नेता ने कहा कि अब बिहार के श्मशान घाट भी निजी हाथों में जाने के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा लगता है कि मौजूदा सरकार को अपने खुद के विभागों और व्यवस्थाओं से ज्यादा भरोसा बाहरी बाबाओं और कॉर्पोरेट तंत्र पर है। उन्होंने जनता की तरफ से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या सरकार द्वारा दी जाने वाली बुनियादी जन-सुविधाएं अब सिर्फ निजी हाथों में ट्रांसफर करने के लिए ही बची हैं और क्या अब अंतिम संस्कार के स्थल भी इस राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं।
'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो' के नए मॉडल पर उठाए सवाल
रोहिणी आचार्या ने सरकार की इस कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए तंज कसा कि सरकार को आधिकारिक तौर पर अपना नया मंत्र घोषित कर देना चाहिए, जो है— 'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो'। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को हलफनामे के माध्यम से जनता को बताना चाहिए कि यह शासन का कौन सा नया मॉडल है, जिसमें श्मशान घाट का प्रबंधन भी ब्रांडेड बाबाओं के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार अपनी मूल जिम्मेदारियों का अंतिम संस्कार करके धीरे-धीरे सब कुछ दूसरों के हवाले सौंप रही है।
गोमिया में रिश्तों का कत्ल, डांट से नाराज बेटे ने पिता पर किया जानलेवा हमला
27 Jun, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोकारो (गोमिया):झारखंड के बोकारो जिले से रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। गोमिया प्रखंड के तिलैया पंचायत स्थित कारीपानी गांव (लुगू पहाड़ की तलहटी) में शुक्रवार देर रात एक कलयुगी बेटे ने मामूली विवाद के बाद कुल्हाड़ी (टांगी) से हमला कर अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
शराब की लत पर पिता ने लगाई थी डांट, गुस्से में खोया आपा
मृतक की पहचान 63 वर्षीय जयलाल करमाली के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, उनका 30 वर्षीय बेटा अर्जुन करमाली अपने ननिहाल में एक कार्यक्रम से देर रात घर लौटा था। वह शराब के नशे में पूरी तरह धुत था। बेटे की इस हरकत से परेशान पिता जयलाल ने उसे डांटते हुए कहा कि उसकी शराब की लत के कारण घर में रोज क्लेश होता है और इसी मारपीट से तंग आकर उसकी पत्नी भी मायके चली गई है। पिता की यही नसीहत अर्जुन को नागवार गुजरी। बहस इतनी बढ़ी कि अर्जुन ने तैश में आकर घर में रखी टांगी से पिता के सिर पर जोरदार वार कर दिया। चोट इतनी गंभीर थी कि जयलाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी, हत्यारे बेटे को बांधकर पुलिस को सौंपा
वारदात को अंजाम देकर भागने की कोशिश कर रहे आरोपी अर्जुन करमाली को ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। गांव वालों ने उसे रस्सी से घर में ही बांधकर रखा और तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही जगेश्वर बिहार थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हत्या में इस्तेमाल की गई टांगी को भी जब्त कर लिया है। थाना प्रभारी प्रकाश यादव ने बताया कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
नशे की लत पर मुखिया ने जताई गहरी चिंता
शनिवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही तिलैया पंचायत की मुखिया चिंता देवी भी पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। उन्होंने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे समाज को शर्मसार करने वाली वारदात बताया। मुखिया ने कहा कि युवाओं में बढ़ती नशे की लत आज के समय में हंसते-खेलते परिवारों और पूरे समाज को तबाह कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
रफ्तार बनी काल, कंटेनर की टक्कर में 13 महीने की बच्ची और पिता की मौत
27 Jun, 2026 10:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैशाली (भगवानपुर):बिहार के वैशाली जिले में शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। भगवानपुर थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार अनियंत्रित कंटेनर ने बाइक सवार परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक टक्कर में एक शख्स और उनकी महज 13 महीने की मासूम बेटी की मौत हो गई, जबकि पत्नी की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद आरोपी कंटेनर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।
हाजीपुर जाने के दौरान हुआ हादसा, पटना रेफर
मृतकों की पहचान भगवानपुर के बानथू गांव के रहने वाले 30 वर्षीय ज्ञानेंद्र कुमार (उर्फ नेपाली) और उनकी 13 माह की बेटी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, ज्ञानेंद्र अपनी पत्नी सविता देवी और बच्ची के साथ बाइक से हाजीपुर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार कंटेनर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
मासूम ने मौके पर तोड़ा दम, अस्पताल ले जाते समय पिता की मौत
टक्कर इतनी भयानक थी कि 13 महीने की बच्ची की मौके पर ही सांसें थम गईं। हादसे के बाद जुटे स्थानीय लोगों और राहगीरों की मदद से तीनों को तुरंत हाजीपुर सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने ज्ञानेंद्र और उनकी पत्नी की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना रेफर कर दिया। लेकिन बदकिस्मती से, पटना पहुंचने से पहले ही रास्ते में ज्ञानेंद्र ने भी दम तोड़ दिया। घायल सविता देवी का पटना में इलाज चल रहा है।
कंटेनर जब्त, फरार चालक की तलाश में पुलिस की छापेमारी
घटना की भनक लगते ही भगवानपुर के थानाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सत्यार्थी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें शोकाकुल परिजनों को सौंप दिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि दुर्घटना को अंजाम देने वाले कंटेनर को पुलिस ने जब्त कर लिया है। ड्राइवर मौके का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहा, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। मामले में केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
फैजल खान केस में नया मोड़, 30 जून तक गिरफ्तारी पर रोक जारी
27 Jun, 2026 08:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में मशहूर यूट्यूबर और शिक्षक फैजल खान उर्फ 'खान सर' की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सस्पेंस बरकरार रहा। इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय (डिस्ट्रिक्ट कोर्ट) में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, जिसके बाद अदालत ने अगली तारीख 30 जून तय की है। राहत की बात यह है कि तब तक खान सर की गिरफ्तारी या उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी।
केस डायरी कोर्ट में पेश, 30 जून को आएगा फाइनल फैसला
शनिवार सुबह जब अदालत की कार्यवाही शुरू हुई, तो पुलिस ने जिला जज के आदेश पर अपडेटेड केस डायरी कोर्ट के सामने पेश की। पिछली सुनवाई में अदालत ने इसी डायरी को तलब किया था। अब 30 जून को कोर्ट इसी अपडेटेड डायरी का अध्ययन करने के बाद खान सर की अग्रिम जमानत पर अपना आखिरी फैसला सुनाएगी। सिर्फ खान सर ही नहीं, बल्कि उनके दो पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड्स (निजी सुरक्षा कर्मियों) की किस्मत का फैसला भी इसी दिन होगा, क्योंकि उनकी जमानत याचिका पर भी शुक्रवार को कोई निर्णय नहीं हो पाया।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस को लगाई थी कड़ी फटकार
इससे पहले 25 जून (गुरुवार) को हुई सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद सख्त था। कोर्ट ने पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई थी। जांच एजेंसी द्वारा पेश की गई डायरी को 'अधूरा' बताते हुए जज ने पुलिस को जमकर फटकार लगाई थी और तुरंत पूरी केस डायरी सौंपने का अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच, मामले से जुड़े रौशन आनंद पक्ष के अभिषेक और गौरव को कोर्ट से जमानत मिल गई, जिसके बाद उन्हें बेउर जेल से रिहा कर दिया गया।
विरोधी पक्ष का दावा— 'कोचिंग के अंदर ही रची गई पूरी साजिश'
दूसरी ओर, विरोधी पक्ष के वकील निरंजन कुमार ने खान सर की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने अदालत में दलील दी कि इस पूरे विवाद का ताना-बाना 'खान ग्लोबल स्टडीज' के भीतर ही बुना गया था। वकील का आरोप है कि रौशन आनंद ने कदमकुआं थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुख्ता सबूत होने के बाद भी अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पीड़ित रौशन आनंद पर जेल के अंदर हमला करने की कोशिश की गई और उनके भाई प्रिंस के साथ भी वारदात हुई है, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष और हाई-लेवल जांच होना बेहद जरूरी है।
अधिकार की मांग पर डटे बौद्ध भिक्षु, महाबोधि महाविहार आंदोलन के 500 दिन पूरे
26 Jun, 2026 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोधगया (बिहार): विश्व धरोहर और बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आस्था केंद्र महाबोधि महाविहार के प्रबंधन से जुड़े 'बोधगया टेंपल एक्ट' (BT Act) 1949 को पूरी तरह समाप्त करने की मांग अब तेज हो गई है। महाविहार का पूरा नियंत्रण और प्रशासनिक अधिकार बौद्ध समाज को सौंपने के लिए चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन शुक्रवार को अपने 500वें दिन में प्रवेश कर गया। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर देश-विदेश से बोधगया पहुंचे सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं (लामाश्रणों) और अनुयायियों ने बीटीएमसी गोलंबर पर इकट्ठा होकर एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल की। प्रशासन द्वारा धरनास्थल से हटाए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष थमेगा नहीं।
वैश्विक आस्था का केंद्र है महाबोधि, दुनिया के कई देशों में भी सांकेतिक उपवास
बीटीएमसी गोलंबर पर आयोजित इस प्रदर्शन में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से आए बौद्ध प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई कि यह मुद्दा केवल किसी एक शहर या क्षेत्र का नहीं है, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों के अधिकारों और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा है। इसी के समर्थन में शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर कई अन्य देशों में भी बौद्ध समुदायों द्वारा प्रतीकात्मक उपवास रखकर एकजुटता प्रदर्शित की गई।
"जब मंदिर, मस्जिद और चर्च का प्रबंधन उनके समाज के पास, तो महाविहार का क्यों नहीं?"
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुख्य समन्वयक आकाश लामा ने प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश में हिंदू मंदिरों का संचालन हिंदू समाज, मस्जिदों का मुस्लिम समुदाय और चर्चों की देखरेख ईसाई समुदाय के हाथों में है; ठीक उसी तर्ज पर महाबोधि महाविहार की कमान भी शत-प्रतिशत बौद्ध समाज को मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1949 में बने वर्तमान बीटी एक्ट के तहत गठित प्रबंधन समिति में बौद्ध समुदाय को पर्याप्त हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है, जो इस अंतरराष्ट्रीय पवित्र स्थल की गरिमा और भावनाओं के खिलाफ है।
74 साल पुराने बीटी एक्ट को बताया असंवैधानिक, 12 फरवरी 2025 से जारी है मोर्चा
प्रदर्शनकारियों ने बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पूरी तरह अप्रासंगिक और असंवैधानिक करार दिया। आकाश लामा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि इस कानूनी विसंगति को दूर करने के लिए वर्ष 2012 में अदालत की शरण भी ली गई थी, लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस और न्यायसंगत समाधान नहीं निकल सका। इसी उदासीनता के खिलाफ 12 फरवरी 2025 से यह महा-अभियान लगातार चलाया जा रहा है, जिसे आज पूरे 500 दिन हो चुके हैं।
त्योहार के मद्देनजर प्रशासन ने नहीं दी अनुमति, भिक्षुओं को हटाया पर संकल्प अडिग
स्थानीय प्रशासन ने आगामी मुहर्रम त्योहार की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस भूख हड़ताल को आधिकारिक अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए धरनास्थल से बौद्ध भिक्षुओं को हटा दिया। हालांकि, इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी आंदोलनकारियों का हौसला नहीं डिगा। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की हिंसा का रास्ता नहीं चुनेंगे। लेकिन अपनी जायज मांगों को लेकर उनका यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार इस कानून को निरस्त नहीं कर देती।
निदेशक पद से विदाई के बाद डॉ. राजकुमार ने की गृह राज्य वापसी
26 Jun, 2026 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। पद छोड़ने के ठीक अगले ही दिन, यानी शुक्रवार को डॉ. राजकुमार रांची से अपने गृह प्रदेश के लिए रवाना भी हो गए हैं। उनके इस अचानक उठाए गए कदम के बाद से रिम्स और स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज है।
प्रभारी निदेशक को दिया प्रभार, बंगले की चाभी सौंपकर कराई वीडियोग्राफी
शुक्रवार सुबह डॉ. राजकुमार सीधे रिम्स स्थित निदेशक कार्यालय पहुँचे। वहाँ उन्होंने रिम्स के नवनियुक्त प्रभारी निदेशक डॉ. डी. के. सिन्हा को संस्थान से जुड़ी सभी प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां विधिवत रूप से सौंप दीं। इसके बाद उन्होंने रिम्स परिसर में स्थित सरकारी निदेशक बंगले को भी पूरी तरह खाली कर दिया। मकान खाली करने के बाद उन्होंने बिल्डिंग की चाभियां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के हवाले कीं। किसी भी तरह के भावी विवाद से बचने के लिए उन्होंने इस पूरी चाभी सौंपने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई और फिर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।
विवादों के बीच बेटे को भी ले गए साथ
डॉ. राजकुमार अपने साथ अपने बेटे को भी रांची से ले गए हैं। गौरतलब है कि रिम्स में उनके बेटे की ट्यूटर के पद पर हुई नियुक्ति पिछले कुछ समय से लगातार विवादों के घेरे में बनी हुई थी, जिसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे थे। गलियारों में यह चर्चा बेहद आम है कि डॉ. राजकुमार अपने गृह प्रदेश पहुँचने के बाद जल्द ही अपने बेटे का भी रिम्स के ट्यूटर पद से इस्तीफा दिलवा सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा था इस्तीफा, डॉ. सिन्हा बने नए कार्यवाहक निदेशक
इससे पहले गुरुवार को डॉ. राजकुमार ने सुबह-सुबह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के सरकारी आवास पहुँचकर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंपा था। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तत्परता दिखाते हुए एक तरफ जहाँ डॉ. राजकुमार का इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया, वहीं दूसरी तरफ बिना वक्त गंवाए एक नई अधिसूचना भी जारी कर दी। विभाग ने रिम्स के सर्जरी डिपार्टमेंट के प्राध्यापक (प्रोफेसर) डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को कार्यकारी व्यवस्था के तहत तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक संस्थान का नया कार्यवाहक निदेशक नियुक्त कर दिया है।
मुहर्रम की अकीदत के बीच युवाओं ने दिखाए पारंपरिक लाठी-डंडे के करतब
26 Jun, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामगढ़: जिले में मुहर्रम के पवित्र अवसर पर शुक्रवार को विभिन्न ग्रामीण अंचलों में भारी उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल देखा गया। सोलिया, उच्चारिंगा, पलानी, जयनगर और पतरातू बस्ती समेत कई गांवों के मुस्लिम समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार छोटी ताजिया के साथ भव्य जुलूस निकाला। इस मातमी जुलूस में बड़ी तादाद में ग्रामीण शामिल हुए, जो हाथों में मजहबी परचम (धार्मिक ध्वज) थामे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे। रास्ते भर लोगों ने आपसी भाईचारे, अमन-चैन और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की।
इकनॉमिक्स स्कूल मैदान में युवाओं की युद्ध कला का प्रदर्शन
निर्धारित रास्तों और चौराहों से गुजरते हुए यह जुलूस बिरसा मार्केट स्थित इकनॉमिक्स स्कूल के खेल मैदान में पहुँचा। यहाँ अखाड़ा दल से जुड़े युवाओं और खिलाड़ियों ने अपनी पारंपरिक युद्ध कला का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। अखाड़े में लाठी-डंडे और पारंपरिक हथियारों के साथ किए गए हैरतअंगेज करतबों को देखकर वहां मौजूद दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं और खिलाड़ियों की खूब हौसलाअफजाई की। इस मनमोहक प्रदर्शन को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी हजारों की भीड़ जुटी थी, जिससे पूरा मैदान काफी समय तक गुलजार बना रहा।
कड़े सुरक्षा घेरे में व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ आयोजन
मुहर्रम के इस आयोजन को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। संवेदनशील मोड़ों और जुलूस के रास्तों पर भारी संख्या में पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था। प्रशासनिक सतर्कता, पूजा कमेटियों के समन्वय और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के सक्रिय सहयोग के चलते पूरा कार्यक्रम बेहद अनुशासित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
सामाजिक एकता और आपसी तालमेल की दिखी मिसाल
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि रामगढ़ क्षेत्र में मुहर्रम का त्योहार हमेशा से ही आपसी एकता का प्रतीक रहा है। हर साल की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर जुलूस का स्वागत किया और व्यवस्था बनाने में अपना अमूल्य सहयोग दिया। पूरे आयोजन के दौरान न सिर्फ धार्मिक निष्ठा देखने को मिली, बल्कि विभिन्न वर्गों के बीच की सामाजिक एकजुटता भी साफ तौर पर उजागर हुई।
श्रद्धा में लीन दिखे ललन सिंह, बैद्यनाथ धाम में की पूजा-अर्चना
26 Jun, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देवघर: विश्वप्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में आज केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने हाजिरी लगाई। वे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच देवघर पहुँचे और बाबा मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। मंदिर प्रांगण में पहुँचने के बाद केंद्रीय मंत्री पूरी तरह भक्ति के रंग में डूबे नजर आए। उन्होंने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ महादेव का जलाभिषेक किया और देश व समाज की तरक्की तथा खुशहाली के लिए मंगल कामना की।
तीर्थ पुरोहित ने कराया संकल्प, कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
केंद्रीय मंत्री के देवघर आगमन पर मंदिर प्रशासन और स्थानीय पंडा धर्मरक्षिणी सभा की ओर से विशेष व्यवस्था की गई थी। मंदिर के पूर्व प्रशासनिक भवन में उनके पुश्तैनी तीर्थ पुरोहित ने शास्त्रोंक्त विधि के अनुसार मंत्रोच्चारण के साथ उनका संकल्प कराया। संकल्प पूरा होने के बाद उन्हें मुख्य मंदिर के गर्भगृह में ले जाया गया, जहाँ उन्होंने बाबा भोलेनाथ की विशेष आराधना की। पूजा संपन्न होने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में ही बाबा की आरती उतारी। इस धार्मिक यात्रा के दौरान उनके साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कई स्थानीय और प्रांतीय कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने मंत्री का जोरदार स्वागत किया।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम, आम भक्तों का भी रखा गया ख्याल
केंद्रीय मंत्री के वीआईपी (VIP) दौरे को देखते हुए देवघर जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन ने इस बात का भी पूरा ख्याल रखा कि मंत्री की पूजा के दौरान आम श्रद्धालुओं और कांवरियों को दर्शन करने में किसी तरह की असुविधा या लंबी रुकावट का सामना न करना पड़े। पूरा कार्यक्रम बेहद शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
युवक की हत्या से हड़कंप, पुलिस को प्रेम-प्रसंग के एंगल पर भी शक
26 Jun, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरा: भोजपुर जिले के आरा शहर में बेखौफ अपराधियों ने कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। नगर थाना क्षेत्र के धरहरा पुल के पास अपराधियों ने एक युवक की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। वारदात की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
नाश्ते के बहाने घर से ले गए थे साथ
मृतक की पहचान नवादा थाना क्षेत्र के श्री टोला (वार्ड संख्या-36) के रहने वाले 28 वर्षीय चंदन यादव के रूप में हुई है। चंदन की पत्नी गीता देवी ने बताया कि गुरुवार की रात कुछ लोग चंदन को नाश्ता करने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ घर से बुलाकर ले गए थे। इसके बाद धरहरा मुसहर टोली के पास घात लगाए अपराधियों ने चंदन पर बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली चंदन के पेट के दाहिने हिस्से में लगी, जिससे अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
साजिश के तहत हत्या का आरोप
इस घटना को लेकर मृतक की पत्नी गीता देवी ने कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चंदन का पहले भी कुछ स्थानीय लोगों के साथ विवाद चल रहा था। आरोप है कि उन्हीं विरोधियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत चंदन को घर से बाहर बुलाया और उसकी हत्या कर दी।
प्रेम-प्रसंग और पुराना विवाद: दोनों पहलुओं पर जांच तेज
दूसरी ओर, इस हत्याकांड को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले में प्रेम-प्रसंग का एंगल भी सामने आ रहा है। नगर थाना पुलिस का कहना है कि वे किसी एक नतीजे पर पहुँचने के बजाय हर संभावित पहलू को खंगाल रहे हैं। परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और उस आधार पर संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है।
जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे आरोपी
नगर थाना पुलिस ने स्थानीय निवासियों और परिजनों को आश्वासन दिया है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। डिजिटल साक्ष्य और गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस जघन्य हत्याकांड की असली वजह दुनिया के सामने आ जाएगी।
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