मध्य प्रदेश
MP News: भोपाल में खुला पहला लग्जरी ओल्ड एज होम, बुजुर्गों को मिलेंगी 5-स्टार सुविधाएं
24 Jun, 2025 08:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल में मध्यप्रदेश सरकार ने पहला लग्जरी पेड ओल्ड एज होम शुरू किया है, जहां बुजुर्गों को AC कॉटेज, वाई-फाई, लाइब्रेरी, योगा, फिजियोथेरेपी और मेडिकल सुविधा मिलेगी. किराया ₹49,000 से ₹80,000 तक है.
भोपाल में खुला पहला लग्जरी ओल्ड एज होम.
किराया ₹49,000 से ₹80,000 प्रति माह.
बुजुर्गों को मिलेंगी 5-स्टार सुविधाएं.
भोपाल: अक्सर जब हम वृद्धाश्रम की बात करते हैं तो एक उदासी भरा दृश्य आँखों के सामने आ जाता है पुरानी इमारत, सीमित सुविधाएं और मजबूरी में रह रहे बुजुर्ग. लेकिन अब भोपाल इस धारणा को पूरी तरह बदलने जा रहा है. मध्यप्रदेश सरकार ने राजधानी में राज्य का पहला लग्जरी पेड ओल्ड एज होम शुरू किया है, जहां बुजुर्गों को मिलेगा AC कॉटेज, पार्क, वाई-फाई, लाइब्रेरी, योगा, फिजियोथेरेपी और मेडिकल सुविधा जैसे तमाम हाई-एंड फीचर्स. ₹49,000 से ₹80,000 तक का किराया हैं .इस ओल्ड एज होम में 34 कमरे बनाए गए हैं, जहां 56 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है.
मध्यप्रदेश: कुएं में उतरे ग्रामीणों की दम घुटने से मौत, दो गंभीर
24 Jun, 2025 07:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
MP News: मध्यप्रदेश के गुना जिले में मंगलवार को एक बछड़े को बचाने के लिए कुएं में उतरे तीन व्यक्तियों की संदिग्ध जहरीली गैस से मौत हो गई, जबकि दो की हालत गंभीर है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि यह घटना धरनावदा गांव की है जहां 6 व्यक्ति एक बछड़े को बचाने के लिए कुएं में उतरे थे. गुना कलेक्टर किशोर कन्याल ने बताया कि घटना पूर्वाह्न करीब 11 बजे हुई. उन्होंने कहा, 'प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बछड़े को बचाने के लिए छह लोग कुएं में उतरे थे. उनमें से तीन की मौत हो गई, जबकि दो अन्य को गंभीर हालत में बचा लिया गया और उन्हें गुना जिला अस्पताल ले जाया गया. छह में से केवल एक व्यक्ति ही सुरक्षित बाहर निकल पाया.
मौत संदिग्ध रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की वजह से हुई
कलेक्टर ने बताया कि प्रथम दृष्टया तीनों की मौत संदिग्ध रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की वजह से हुई. उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि कुएं में करीब 12 फुट पानी है जिसकी वजह से गेल की केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) इकाई, राज्य आपदा आपातकालीन मोचन बल (SDRF) और विभिन्न एजेंसियों के दलों से बचाव अभियान में दिक्कतें आयीं. पुलिस गेल की CISF इकाई, SDERF की टीम कुएं में उतरे लोगों को निकालने में लगी है. कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल, और एसपी अंकित सोनी भी मौके पर पहुंचे. घटना के बाद गुस्साए लोगों ने कलेक्टर की गाड़ी घेर ली.
क्या है कार्बन मोनोऑक्साइड गैस?
बता दें, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एक रंगहीन और गंधहीन जहरीली गैस है जिसका उपयोग रासायनिक और धातु उद्योग में किया जाता है. यह रक्त में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है. इस गैस में कोई गंध, स्वाद या रंग नहीं होता, जो इसे खतरनाक बनाती है क्योंकि इसका पता लगाना मुश्किल होता है.
आपातकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला : विष्णुदत्त शर्मा
24 Jun, 2025 06:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विष्णुदत्त शर्मा लेखक- भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद
"कांग्रेस का लोकतंत्र में विश्वास तब तक है जब तक वह सत्ता में है। जब वह सत्ता से बाहर होती दिखाई देती है, वह संविधान और लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाने से नहीं चूकती। "डॉ. राममनोहर लोहिया के ये शब्द 25 जून 1975 को उस समय सत्य सिद्ध हुए, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने आज से 50 वर्ष पहले, 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल थोप दिया। यह घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटनाओं में से एक है। यह केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था। आपातकाल लगाने का उद्देश्य नेहरू-गांधी परिवार का सत्ता पर वर्चस्व बनाए रखने की लालसा में संविधान को रौंदने का कुत्सित प्रयास था। यह वह समय था जब संविधान को ताक पर रखकर व्यक्तिगत सत्ता की रक्षा के लिए पूरे देश को एक तानाशाही शासन के अधीन कर दिया गया था। 1970 के दशक की शुरुआत में भारत गंभीर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रहा था। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और असंतोष के कारण सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ रहा था। इंदिरा गांधी की सत्ता को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को उनके निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया और उन्हें छह वर्षों के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया। इस फैसले के बाद देश भर में इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग तेज हो गई। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में विपक्ष ने "संपूर्ण क्रांति" का नारा दिया। इन सबके बीच 25 जून 1975 की रात को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर देश में आपातकाल लागू कर दिया। इंदिरा गांधी ने कैबिनेट को विश्वास में नहीं लिया, आधी रात को राष्ट्रपति से चुपचाप आपातकाल लागू करवाया। कांग्रेस की संस्कृति रही है—परिवार पहले, संविधान बाद में। ‘इंडिया इज़ इंदिरा’ नारा कांग्रेस की लोकतंत्र विरोधी सोच का प्रतीक था। एक व्यक्ति, एक परिवार को देश से बड़ा समझना ही कांग्रेस की वैचारिक विकृति है। आपातकाल की घोषणा के साथ ही भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ रातों रात बंधक बना दी गईं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, और न्यायिक संरक्षण जैसे मौलिक अधिकार स्थगित कर दिए गए। मीडिया पर कठोर सेंसरशिप लागू कर दी गई। विरोध करने वाले हजारों नेताओं, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, साहित्यकारों को बिना मुकदमे के जेलों में ठूंस दिया गया। ‘इंदिरा इज़ इंडिया और इंडिया इज़ इंदिरा’ जैसे नारे लगाने वालों को पुरस्कृत किया गया, जबकि आलोचकों को देशद्रोही बताकर प्रताड़ित किया गया। आपातकाल के इस काले दौर में वामपंथियों ने इंदिरा गांधी का भरपूर समर्थन किया। इसके बदले में उन्हें प्रशासन और शिक्षा के क्षेत्र में ऊँचे पदों पर बिठाया गया। वे इतिहास, संस्कृति और पाठ्यक्रमों में अपने वैचारिक एजेंडे को लागू करने में सफल रहे। इससे देश की भावी पीढ़ी की सोच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जनसंख्या नियंत्रण के नाम परजबरन नसबंदी का अभियान चलाया। लाखों गरीब पुरुषों को जबरदस्ती नसबंदी के लिए बाध्य किया गया। दिल्ली में तुर्कमान गेट जैसी घटनाओं में, जब लोगों ने इसका विरोध किया, तो गोली चलवा दी गई, जिसमें अनेक लोग मारे गए। इस दौरान हजारों झुग्गियाँ और बस्तियाँ उजाड़ दी गईं, जिससे लाखों लोग बेघर हो गए। वर्ष 1985 में लोकसभा में राजीव गांधी ने कहा— “आपातकाल में कुछ भी गलत नहीं था।” यह बयान बताता है कि कांग्रेस के डीएनए में लोकतंत्र के लिए कोई सम्मान नहीं, केवल परिवार और सत्ता से प्रेम है। 21 महीनों तक देश को लोकतंत्र से वंचित रखकर कांग्रेस के एक परिवार की सत्ता बनाए रखने के लिए संविधान का गला घोंटा गया। कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर राष्ट्रवादी विचारधारा को कुचलने का कार्य किया। लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ने वालों को जेल में ठूंसा गया। लगभग 1 लाख 40 हजार लोगों को जेल में बंद किया गया और 22 कस्टोडियल डेथ हुईं। संविधान की आत्मा को कुचला गया। मीसा कानून में संशोधन कर प्राकृतिक न्याय की भावना का उल्लंघन किया गया।
कांग्रेस की प्रवृत्ति लोकतंत्र विरोधी रही है—जो विरोध करे, उसे समाप्त कर दो। नेताजी सुभाषचंद्र बोस को कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे लोकप्रिय नेता को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया गया। बाबा साहब अंबेडकर जैसे महापुरुष का कांग्रेस द्वारा निरंतर विरोध और अपमान किया गया। कांग्रेस ने संविधान में अब तक 75 बार संशोधन किए, कई संशोधन सत्ता को मजबूत करने हेतु थे। अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग करते हुए 90 बार चुनी हुई राज्य सरकारों को बर्खास्त किया।1973 में वरिष्ठता की परंपरा को तोड़ते हुए जस्टिस अजीतनाथ रे को चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार था। मीसा कानून के ज़रिए निर्दोष लोगों को कैद किया गया- क्या यही कांग्रेस का न्याय है? शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटकर कांग्रेस ने करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के अधिकार छीन लिए। राजीव गांधी ने वोट बैंक के लिए संविधान के साथ सौदा किया, यही कांग्रेस की असली सोच है। राहुल गांधी संसद में संविधान की प्रति लहराते हैं, लेकिन 2013 में उसी संसद के अध्यादेश को फाड़ कर संविधान की अवमानना करते हैं। कांग्रेस संविधान बचाने की बात करती है, लेकिन इतिहास गवाह है कि वही कांग्रेस बार-बार संविधान को बेरहमी से कुचलती रही है। कांग्रेस के लिए लोकतंत्र सिर्फ एक दिखावा है — असली सत्ता नेहरू-गांधी परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती है। जहां कांग्रेस ने संविधान के अनुच्छेदों का उपयोग केवल सत्ता में बने रहने के लिए किया, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रे मोदी जी की सरकार हर अनुच्छेद के महत्व को नागरिकों तक पहुंचाने की जागरूकता अभियान चला रही है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो संविधान देश को दिया, उसे कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए मोड़ा, तोड़ा और बदला। मोदी सरकार उसी संविधान को आधार बनाकर हर वर्ग के कल्याण और अधिकारों की गारंटी दे रही है— यही असली सम्मान है बाबा साहेब को। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—ये चार स्तंभ सिर्फ किताबों में नहीं, आज मोदी सरकार में नीति और शासन का आधार बन चुके हैं। कांग्रेस ने इन सिद्धांतों को दिखावे की बातें बनाकर रखा, जबकि मोदी सरकार इन्हें नीति, योजना और क्रियान्वयन के स्तर पर सशक्त कर रही है।
लोकतंत्र सेनानियों का ही संघर्ष है जिसके परिणाम स्वरुप भारत में लोकतंत्र पुर्नस्थापित हुआ। आज देश की प्रगति के पीछे लोकतंत्र सेनानियों का बलिदान आधार का पत्थर है। जिसके कारण लोकतंत्र पुर्नस्थापित हुआ और 2014 में भाजपा के श्री नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व के रूप में भारत को महान नायक मिला जिनके नेतृत्व में लोकतंत्र की जड़ें बहुत मजबूत व गहरी हुईं, तुष्टीकरण संतुष्टीकरण में बदला, पूरा भारत एक हुआ, आतंकवाद की कमर टूटी, 11 वीं अर्थव्यवस्था से देश विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बना, सीमाएं सुरक्षित हुईं, माताओं बहनों के सम्मान की रक्षा हुई, भ्रष्टाचार, घपले, घोटालों का अंत हुआ, भारत ने आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया, विकसित भारत-2047 के संकल्प की सिद्धि के लिए रात दिन एक करके सघन प्रयास प्रारंभ कर दिया। आज जब हम अमृतकाल की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, हमें यह संकल्प लेना होगा कि ऐसे काले दिन फिर कभी न लौटें। हमें अपनी संवैधानिक संस्थाओं को और सशक्त बनाना है, नागरिक अधिकारों की रक्षा करनी है और लोकतंत्र की नींव को और गहरा करना है। जो काम कांग्रेस ने दशकों तक नहीं किया, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व की सरकार ने उसे धरातल पर उतार कर संविधान की आत्मा को सम्मान दिया। आपातकाल के विरुद्ध लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष, बलिदान रंग लाया और भारत माता के सम्मान की रक्षा करने में सफल रहा।
ट्रेनिंग के दौरान डमी बम 400 फिट ऊपर से जवान के सिर पर गिरा, मौत
24 Jun, 2025 06:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ड्रोन से बम गिराने की ट्रैनिंग के दौरान हुआ हादसा
भोपाल। राजधानी भोपाल के सूखी सेवनिया थाना इलाके में स्थित सेना के फायरिंग रेंज में ड्रोन में अटैच बम को ट्रांसपोर्टेशन की ट्रैनिंग दिये जाने के दौरान हुए एक हादसे में जवान की मौत हो गई। सोमवार शाम को यहॉ सेना के जवान ड्रोन से बम गिराने की ट्रेनिंग ले रहे थे। ट्रेनिंग के दौरान लोहे का 4 किलो से अधिक वजन का डमी बम करीब 400 फिट की ऊचांई से एक जवान के सिर पर गिर गया जिससे जवान की मौके पर ही मौत हो गई। बम सीधे जवान के सिर पर गिरा, जिससे उसे घातक चोट आई थी। घायल जवान को फौरन ही सेना के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मिली जानकारी जानकारी के मुताबिक मूल रुप से उत्तराखंड के रहने वाले विजय सिंह पिता बेताल सिंह (37) भोपाल के बैरागढ़ में सेना कार्यालय में हवलदार के पद पर तैनात थे। और लालघाटी में स्थित रेजीमेंट के बैरक में ठहरे थे। बीती सुबह वह एक नियमित ट्रेनिंग के लिए फायरिंग रेंज पहुंचे थे।
यहां सेना के जवानों को ड्रोन से बम गिराने और उससे बचाव की तकनीक सिखाई जा रही थी। यहॉ सेना के अधिकारी ड्रोन से बम फेंकने की तकनीक के बारे में बता रहे थे। ट्रैनिंग के दौरान फायरिंग रेंज में ड्रोन में बम को लगाने फिर उसे उड़ाते हुए टारगेट तक पहुंचाने की तकनीक बताई जा रही थी। प्रैक्टिकल के लिये उड़ान भर रहे एक ड्रोन में लोहे का डमी बम रखा गया, जिसे एक निर्धारित स्थान पर गिराया जाना था। लेकिन अचानक ही भारी डमी बम को उठाकर हवा में उड़ा ड्रोन असंतुलित हो गया और हवलदार विजय सिंह के सिर पर आकर गिरा। गंभीर रुप से घायल जवान को इलाज के लिये बैरागढ़ स्थित आर्मी अस्पताल ले जाया गया। जहॉ काफी कोशिशो के बाद भी विजय सिंह की मौत हो गई। घटना की जानकारी सूबेदार मोहन सिंह से मिलने पर सूखी सेवनिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्यवाही कर मर्ग कायम करते हुएशव का पीएम कराया गया है। सेना के कई अधिकारी भी जवान के पोस्ट मार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे। हादसे में जहॉ मिलैट्री आपरेशन की तरफ से विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, वहीं पुलिस यह जानने में जुटी है, कि हादसा तकनीकी चूक के कारण हुआ या सुरक्षा इंतेजामो में बरती गई लापरवाही से हुआ है।
आपातकाल का ऐतिहासिक संदर्भ एक काला अध्याय : हितानंद शर्मा
24 Jun, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर 25 जून 1975 की आधी रात को देश पर थोपे गए ‘आपातकाल’ को 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की जनता ने तब तानाशाही के विरुद्ध स्वकतंत्रता की एक और लड़ाई लड़ी थी। इस बार लड़ाई अपने ही दिग्भ्रूमित सत्तालोलुप नेताओं से थी, जिसमें देश एक बार फिर विजेता बनकर उभरा था। पिछले कुछ वर्षों से कुछ विपक्षी नेता अक्सर संविधान की प्रति हाथ में लेकर भाषण देते दिखाई देते रहे हैं। बात-बात में संविधान की दुहाई देने का क्रम चल रहा है। भारत के स्वरस्थि और मजबूत लोकतांत्रिक वातावरण में भी ‘लोकतंत्र व संविधान बचाने’ के लिए सभाओं के प्रहसन चल रहे हैं। आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर यह अवसर है जब मुड़कर इतिहास को फिर से देखने की आवश्यकता है। आपातकाल का निर्णय किसी युद्ध या आंतरिक विद्रोह के कारण नहीं बल्कि एक प्रधानमंत्री के लोकसभा चुनाव रद्द होने और अपनी सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया राष्ट्रर विरोधी निर्णय था। कांग्रेस पार्टी ने आपातकाल के इस क्रूरकाल में न केवल संवैधानिक ढांचे को कुचला बल्कि उसके द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को भी भंग किया गया। 1971 के आम चुनावों में श्रीमती इंदिरा गांधी ने रायबरेली से जीत तो हासिल की लेकिन उनके निकटतम उम्मी दवार राजनारायण ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनाव में भ्रष्टाचार और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप लगाए। इधर देश की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में थी। आर्थिक विकास दर केवल 1.2% थी। देश का विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था (आज 640 बिलियन अमेरिकी डॉलर है)। महंगाई चरम पर थी। मुद्रास्फीति की दर 20% से भी ज्यादा थी। देश की 50% से ज्यादा जनता गरीबी रेखा के नीचे थी और जबरदस्त बेरोजगारी थी। भ्रष्टारचार की हालत ऐसी थी कि लाखों रुपए के घोटाले करने वाले मंत्री एवं सरकार से जुड़े नेताओं की रहस्म्य ढंग से हत्या हो रही थी। बिहार और गुजरात में छात्रों के नेतृत्व में नवनिर्माण आंदोलन चल रहा था। 8 मई 1974 को जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्चं में देशव्या पी रेल हड़ताल हो चुकी थी। बिहार, गुजरात में राष्ट्र पति शासन के बाद कांग्रेस चुनाव हार चुकी थी। इस सबसे कांग्रेस की केंद्र सरकार परेशान हो चुकी थी। 12 जून 1975 को न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने अपने निर्णय में इंदिरा गांधी की जीत को अवैध करार दिया और उन्हें 6 साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री नहीं रह सकती थीं। उनकी कुर्सी को गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। तेजी से बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता से घबराकर इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर मंत्रिपरिषद् की अनुसंशा के बगैर ही राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल लगाने की सिफारिश की, जिसे राष्ट्रपति ने 25 जून 1975 की आधी रात को मंजूरी दे दी।
आज संविधान की प्रतियां हाथ में लहराने का नाटक करने वालों को यह स्मदरण रखना ही होगा कि आपातकाल वास्तथव में भारतीय लोकतांत्रिक व्यहवस्थाण को कुचलने का प्रयास था। यहय संविधान की हत्याा की सोची-समझी रणनीति थी। इंदिरा गांधी ने ‘आंतरिक अशांति’ की आड़ लेकर संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग किया। जबकि न तो उस समय बाहरी आक्रमण या युद्ध की स्थिति थी, न विद्रोह ही हुआ था। आपातकाल किसी राष्ट्रीय संकट का परिणाम नहीं था, बल्कि यह एक डरी हुई प्रधानमंत्री की सत्ताा बचाने की जिद थी। संविधान की शपथ लेकर इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बनी थीं, किन्तु उसी संविधान की आत्मा को कुचलते हुए एक झटके में उन्होंंने लोकतंत्र को तानाशाही में बदलकर रख दिया और पूरी शासन व्यवस्था को कठपुतली की तरह उपयोग किया। कांग्रेस सरकार ने विधायिका और न्या यपालिका को बंधक बनाकर सत्ता् के आगे घुटने टेकने को विवश कर दिया था। प्रेस की स्वकतंत्रता पर कुठाराघात किया गया। बड़े-बड़े समाचार पत्र संस्थानों की बिजली काट दी गई। समाचार पत्रों के प्रकाशन पर सेंसरशिप लगा दी गई और पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया।
21 महीने के आपातकाल का क्रूर समय नागरिकों पर हुए अत्याचारों की दारुण गाथा है। केंद्र के साथ-साथ अधिकतर राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। ऐसे में जहां विरोध में स्वर उठे वहां क्रूरता के साथ दमन किया गया। लोकतंत्र में आस्था रखने वाली हर आवाज को दबाया गया। मीसा जैसे काले कानून में लगभग एक लाख लोगों को बिना किसी सुनवाई के जेलों में डाला गया। जयप्रकाश नारायण, अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह जैसे अनेक वरिष्ठ विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों यहां तक कि छात्रों तक को जेल में बंद करा दिया। जेलों में अमानवीय यातनाएं दी गईं। बीमार होने पर दवाएं तक नहीं दी गईं। महिला बंदियों के साथ असम्मानजनक और अमानवीय व्यवहार किया गया। आरएसएस, जनसंघ, एवीबीपी और कई अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगाकर कांग्रेस द्वारा कठोर दमन चक्र चलाया गया।‘इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा’ जैसे नारों से आपातकाल के समय में कांग्रेस ने देश को व्यक्ति पूजा और परिवारवाद की प्रयोगशाला बना दिया। किसी भी संवैधानिक पद पर और निर्वाचित जनप्रतिनिधि न होने पर भी संजय गांधी देश की नीतियों पर निर्णय ले रहे थे। वह आपातकाल में सत्ता का वास्तविक केंद्र बन चुके थे। देश के नागरिकों पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस आज भी इसी परिवारवाद के सीमित सांचे में सिमटकर रह गई है। इंदिरा गांधी की तानाशाही का सबसे भयावह चेहरा यह था कि उन्होंने अपने पुत्र के माध्यम से सत्ता को वंशवाद की जकड़ में पूरी तरह से कैद कर लिया था। यह सत्ता लोलुपता ही थी कि कांग्रेस ने लोकसभा का कार्यकाल 5 से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय साधारण कार्यकर्ता हुआ करते थे और उन्हीं की तरह लाखों स्वयंसेवकों ने आपातकाल विरोधी आंदोलन जारी रखा। रातों-रात रेलों में आपातकाल विरोधी पर्चे बांटे, मीसाबंदियों के परिवारों की देखरेख की, भूमिगत रहते हुए आंदोलन की गति बनाए रखी और कांग्रेस की सच्चायई घर-घर तक पहुंचाई। अंततः जनाक्रोश और नागरिकों के बढ़ते दबाव के कारण जनवरी 1977 में चुनावों की घोषणा हुई और मार्च 1977 में हुए चुनावों में जनता पार्टी को जबरदस्त समर्थन मिला। इंदिरा गांधी स्वयं रायबरेली से चुनाव हार गईं। लोकतंत्र फिर प्रतिष्ठित हुआ।आपातकाल इतिहास की एक राजनीतिक घटना मात्र नहीं हैं, बल्कि उस दूषित मानसिकता का प्रमाण है, जो संविधान और लोकतंत्र को केवल अपनी सत्ता पाने और बचाए रखने के लिए इस्तेमाल करती है। लोकतंत्र के साथ विश्वांसघात करने के बाद भी कांग्रेस ने न तो कभी माफी मांगी और न ही कोई पश्चाताप ही प्रकट किया। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जनता को अधिकार देने के लिए जिस संविधान का निर्माण किया, कांग्रेस ने उसी को हथियार बनाकर जनता के अधिकारों को छीना। स्वतंत्रता के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब सरकार ने राष्ट्र के शत्रु नहीं राष्ट्र की जनता को ही बंदी बना लिया। आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय है। आपातकाल के समय को स्मरण करना इसलिए आवश्यक है, ताकि भविष्य में संविधान और लोकतंत्र को सुरक्षित रखा जा सके, क्योंकि यह प्रत्येक भारतीय का नैतिक दायित्व भी है।
भेल की 2200 एकड़ जमीन लेने की तैयारी में एमपी सरकार, गुस्साए कर्मचारियों का प्रदर्शन
24 Jun, 2025 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: राज्य सरकार भोपाल में खाली पड़ी भेल की करीब 2200 एकड़ जमीन वापस लेने की तैयारी कर रही है. जिससे यहां गुजरात की गिफ्ट और मुंबई की बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स की तरह हाइटेक सिटी बनाई जा सके. हालांकि इससे पहले ही जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया. भेल कर्मचारी यह जमीन राज्य सरकार को देने का विरोध कर रहे हैं. भेल के कर्मचारी संगठनों ने सोमवार को फाउंड्री गेट के सामने प्रदर्शन कर इसका विरोध भी जताया.
सीटू यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने जताया विरोध
सोमवार को सीटू यूनियन (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) के पदाधिकारियों और भेल कर्मचारियों ने फाउंड्री गेट पर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. भेल की 2200 एकड़ जमीन को राज्य सरकार द्वारा वापस लिए जाने के निर्णय के खिलाफ भेल कर्मचारियों, श्रमिक संगठनों, सेवानिवृत्त कर्मियों और भोपाल के नागरिकों ने विरोध दर्ज कराया है. इस प्रदर्शन में कर्मचारी नेता दीपक गुप्ता के साथ अध्यक्ष लोकेंद्र शेखावत, शाहिद अली, नरेश जादौन, विनय सिंह, कुलदीप मौर्य, ध्रुव सिंह मरावी, सहित सैकड़ों भेल कर्मचारी उपस्थित हुए.
यह जमीन औद्योगिक और कर्मचारियों के उपयोग की
श्रमिक नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि, ''ये 2200 एकड़ जमीन जिसका बाजार मूल्य 30 हजार करोड़ से अधिक है और जो 60 वषों से भेल की संपत्ति रही है. इसका उपयोग कर्मचारियों की सुविधाओं, कल्याणकारी योजनाओं व औद्योगिक गतिविधियों के लिए होता रहा है. एक इंच जमीन भी राज्य सरकार को नहीं दी जाएगी. इस निर्णय से न केवल भेल की कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी संकट उत्पन्न होगा.''
कर्मचारियों ने की तत्काल रद्द करने की मांग
दीपक गुप्ता ने कहा कि, ''राज्य सरकार द्वारा भेल की जमीन वापस लेने का निर्णय तत्काल रद्द किया जाए.'' गुप्ता ने कहा कि ''विकास की नींव जनता के हित और औद्योगिक स्थिरता पर होनी चाहिए. इसकी पहचान देश प्रदेश के अलावा पूरे विश्व में है.''
दीपक गुप्ता ने बताया कि, "इससे पहले ही भेल की जमीन अमराई में झुग्गी विस्थापन के लिए 200 एकड़ हाउसिंग बोर्ड को आवंटित की जा चुकी है. फिर भेल ने आईएसबीटी के लिए 150 करीब जमीन दी, जिस पर कॉमर्शियल उपयोग किया जा रहा है.''
देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी बनाने की तैयारी
दरअसल, मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी बनाने की योजना पर राज्य सरकार काम कर रही है. यह सिटी गुजरात की गिफ्ट सिटी, दिल्ली की एयरोसिटी और मुंबई की बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स की तर्ज पर विकसित की जाएगी. इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में राजेगार पैदा करने के साथ एक ही स्थान पर रहवासियों और निवेशकों को सभी सुविधाएं देना है. इस हाईटेक सिटी में फाइनेंस, आईटी सेक्टर, डेटा सेंटर, मार्केट, हाउसिंग प्रोजेक्ट, हास्पिटिलिटी व अन्य सुविधाएं मिलेंगी.
भेल के साथ मिलकर काम करेगी राज्य सरकार
बता दें कि, देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी भोपाल स्थित भेल की खाली जमीन पर विकसित की जाएगी. इसमें जो भी राजस्व मिलेगा उसमें दोनों की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. बीएचईएल की भोपाल में साल 1964 में स्थापना हुई थी. इससे पहले केंद्र सरकार ने 1959 से 1962 के बीच भेल को करीब 6 हजार एकड़ जमीन दी थी.
लेकिन बीते 61 सालों में भेल केवल 3 हजार एकड़ जमीन का ही इस्तेमाल कर पाया. ऐसे में सरकार बची हुई जमीन को वापस लेने की तैयारी में है. इस संबंध में केंद्र व राज्य सरकार के बीच सहमति भी बन गई है.
सोनम रघुवंशी व राज कुशवाहा की पिस्टल और 5 लाख नगदी का राज खुला
24 Jun, 2025 08:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर केस में मेघालय की शिलांग पुलिस द्वारा गिरफ्तार उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके प्रेमी राज कुशवाहा को जेल भेज दिया गया है. इससे पहले तीनों सुपारी किलर को भी शिलांग पुलिस ने जेल भेज दिया था. वहीं, शिलांग पुलिस ने इंदौर में डेरा डालकर कई लोगों से पूछकर इस मामले में कुछ और सबूत जुटाए हैं.
ग्वालियर से प्रॉपर्टी कारोबारी लोकेंद्र तोमर गिरफ्तार
अब इस मामले में ग्वालियर से लोकेंद्र तोमर नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. प्रॉपर्टी कारोबारी लोकेंद्र सिंह तोमर की एंट्री के बाद इस केस के तार ग्वालियर से भी जुड़ गए हैं. लोकेंद्र तोमर को क्राइम ब्रांच ने ग्वालियर से गिरफ्तार किया है. ग्वालियर के गांधी नगर स्थित एनके प्लाजा सोसाइटी में अचानक दो गाड़ियां पहुंची. गाड़ी से सिविल ड्रेस में उतरे 5-6 लोग तेज़ी से सोसाइटी में पहुंचे और लोकेंद्र तोमर को उठाकर ले गए.
राजा मर्डर केस से जुड़े लोकेंद्र के तार
इस घटनाक्रम से लोग घबरा गए कि अचानक सोसाइटी का कामकाज देखने वाले लोकेंद्र तोमर को इस तरह पुलिस क्यों ले गई. दरअसल, शिलांग में हुए राजा रघुवंशी मर्डर केस से लोकेंद्र के तार जुड़े हैं. लोकेंद्र तोमर है दूरसंचार विभाग में ठेकेदारी करता है और प्रॉपर्टी कारोबारी भी है. वह अलोन इंफ्रा और डेलटॉप इंफ्रास्ट्रक्चर नाम से प्रॉपर्टी फर्म का संचालन करता है. आरोप है कि सोनम रघुवंशी और प्रेमी राज कुशवाह द्वारा छुपाई गई पिस्तौल और 5 लाख रुपये से भरा बैग इंदौर से लोकेंद्र ही लेकर फरार हुआ था.
बीते 3 साल से इंदौर में रह रहा था लोकेंद्र तोमर
लोकेंद्र सिंह तोमर मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला है, जोकि गांधीनगर के एनके प्लाजा सोसाइटी में फ्लेट न. 105 में अपने परिवार के साथ रहता है. लोकेंद्र के पड़ोसी ने बताया "सोसाइटी में नीचे आने पर उन्हें पता चला है कि सिविल ड्रेस में आई पुलिस लोकेंद्र तोमर को ले गई है, वह लंबे समय से अपने परिवार के साथ रह रहा था., लेकिन 3 साल पहले इंदौर शिफ्ट हो गया था. इसलिए उसे लंबे समय से किसी ने यहां नहीं देखा."
लोकेंद्र को शिलांग SIT को सौंपेगी ग्वालियर क्राइम ब्रांच
इस मामले में ग्वालियर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कृष्ण लाल चंदानी ने बताया "क्राइम ब्रांच की टीम ने लोकेन्द्र तोमर को उसके फ़्लैट से गिरफ़्तार किया है. कुछ ही समय में शिलांग से SIT टीम यहां पहुंचेगी. ग्वालियर क्राइम ब्रांच लोकेन्द्र तोमर को उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर सौंप देगी."
"जल गंगा संवर्धन अभियान" का समापन
23 Jun, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : प्रदेश में जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के लिये शुरू किया गया "जल गंगा संवर्धन अभियान" का 30 जून 2025 को समापन होगा। उल्लेखनीय है कि अभियान 30 मार्च से पूरे प्रदेश में शासन और समाज के सहयोग से चलाया गया था। सभी जिलों में 24 से 30 जून तक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में समापन के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस संबंध में सभी कलेक्टर्स एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।
इस समापन सप्ताह का उद्देश्य अभियान की उपलब्धियों और इसके जरिए हुए कार्यों के लाभों को जन-जन तक पहुँचाना है। साथ ही नागरिकों से मिले सुझावों के आधार पर भविष्य की नीतियों में सुधार करना और जनप्रतिनिधियों, जलदूतों व स्थानीय नागरिकों को आगे की योजनाओं में सहभागी बनाना भी इसका अहम हिस्सा है।
समापन सप्ताह के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी इनमें अभियान के दौरान हुए कार्यों और जनसहभागिता पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। जनप्रतिनिधियों और अन्य प्रमुख लोगों के साथ क्षेत्र का दौरा कर किए गए कार्यों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें जनता को समर्पित किया जाएगा।
ग्राम पंचायत स्तर पर जनसंवाद का आयोजन होगा, जिसमें अभियान की उपलब्धियों, जनभागीदारी और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होगी। "जल गंगा संवर्धन अभियान" में अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, सरपंचों और जलदूतों को सम्मानित किया जाएगा। बनाई गई जल संरचनाओं को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया भी की जाएगी। वहीं, हर दिन की गतिविधियों की फोटो और वीडियो रिपोर्ट बनाकर विभिन्न मीडिया माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
अभियान के समापन कार्यक्रमों में शामिल सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर द्वारा 24 से 30 जून तक हर दिन की गतिविधियों की रूपरेखा तैयार कर उसे जनप्रतिनिधियों से साझा किया जाएगा ताकि उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता, सेवा गुणवत्ता और जनविश्वास का समन्वय आवश्यक : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
23 Jun, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार के साथ-साथ स्वच्छता और साफ-सफाई भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल दवा और इलाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अस्पताल परिसर का वातावरण, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता और मरीजों को मिलने वाली संपूर्ण देखरेख भी उतनी ही आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं ने कायाकल्प, एन.क्यू.ए.एस., मुस्कान और लक्ष्य जैसे कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह प्रमाणित किया है कि हम सही दिशा में कार्य कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने स्वर्ण जयंती सभागार नारोन्हा प्रशासनिक अकादमी भोपाल में वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के कायाकल्प, एनक्यूएएस, मुस्कान एवं लक्ष्य कार्यक्रमों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं को सम्मानित किया।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह उपलब्धियाँ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ते कदम हैं। उन्होंने कहा कि यह सराहनीय है कि बड़ी संख्या में संस्थान इन मापदंडों पर खरे उतर रहे हैं, लेकिन हमारा प्रयास होना चाहिए कि शेष संस्थाओं को भी इन मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के संपूर्ण सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में 10 हज़ार करोड़ की लागत के स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास के कार्य प्रगति पर हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग में 3 हज़ार चिकित्सकों सहित कुल 35 हज़ार पदों पर नियुक्तियाँ की जा रही हैं, जिससे मैनपावर की कमी दूर होगी और सेवा प्रदाय की गुणवत्ता बेहतर होगी।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 12,000 से अधिक स्वास्थ्य संस्थान कायाकल्प, एन.क्यू.ए.एस., लक्ष्य और मुस्कान जैसे मानकों पर खरे उतरें, इसके लिए केवल बजट और संसाधनों की नहीं, बल्कि सतत मॉनिटरिंग, संस्थागत प्रशिक्षण और कर्मचारियों को प्रेरित करने की आवश्यकता है। हर संस्थान को सशक्त और उत्तरदायी बनाकर प्रदेश के हर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कराना हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘स्वस्थ भारत’ के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश लगातार उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कर रहा है। कायाकल्प अवार्ड जैसे कार्यक्रम इन प्रयासों को प्रोत्साहित करने वाले महत्वपूर्ण साधन हैं। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता और सेवा भावना की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता का आधार वही लोग हैं जो अस्पतालों में दिन-रात जनसेवा के लिए समर्पित रहते हैं।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर वर्ष 2020 के 175 के मुकाबले घटकर 159 पर आ गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। परंतु उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुधार पर्याप्त नहीं है और अभी हमें बहुत आगे जाना है। इस दिशा में उन्होंने गर्भवती माताओं के शत-प्रतिशत पंजीयन, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय पर पहचान और उनके समुचित उपचार के लिए ठोस, योजनाबद्ध और ज़मीनी स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकी सेवाओं को भी सशक्त बना रही है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में भी विशेषज्ञों की राय और इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कायाकल्प अभियान की शुरुआत वर्ष 2015-16 में हुई थी, जब केवल 9 संस्थाएं मापदंडों पर खरी उतर सकीं थीं, वहीं वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 675 स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुँच चुकी है। इससे स्पष्ट है कि राज्य की प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य संस्थाओं में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है। यह परिवर्तन मात्र संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनविश्वास का प्रतीक है।
सशक्त स्वास्थ्य से ही विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश का स्वप्न होगा पूर्ण: राज्य मंत्री पटेल
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि पूर्ण समर्पण से स्वास्थ्य विभाग का अमला कार्य करें। सशक्त स्वास्थ्य से ही हम विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश का स्वप्न पूर्ण कर पाएंगे। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों और चिकित्सकीय टीम को बधाई दी। उल्लेखनीय है कि कायाकल्प, एन.क्यू.ए.एस., लक्ष्य एवं मुस्कान पुरस्कारों का उद्देश्य प्रदेश की शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, सेवा गुणवत्ता एवं मातृ-शिशु देखभाल में उत्कृष्ट मानक सुनिश्चित करना है। इन पुरस्कारों की शुरुआत भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने हेतु की गई, जिनके तहत संस्थाओं का मूल्यांकन निर्धारित मापदण्डों के आधार पर किया जाता है। कायाकल्प अवार्ड स्वच्छता, ईको-फ्रेंडली उपायों, अपशिष्ट प्रबंधन और अस्पताल रखरखाव के लिए प्रदान किया जाता है। एन.क्यू.ए.एस. अवार्ड सेवा की गुणवत्ता, रोगी सुरक्षा और क्लिनिकल प्रोटोकॉल के पालन के आधार पर दिया जाता है। लक्ष्य अवार्ड सुरक्षित प्रसव सेवाओं के लिए और मुस्कान अवार्ड बाल रोग सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों से स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रतिस्पर्धात्मक सुधार को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार परिलक्षित हुआ है।
कायाकल्प अवार्ड
वर्ष 2023-24 के अंतर्गत महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय देवास को जिला चिकित्सालय श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (₹15 लाख), सिविल अस्पताल हजीरा (ग्वालियर) को सीएचसी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (₹10 लाख), पीएचसी अमलाहा (सीहोर) को सह-विजेता के रूप में (₹1 लाख), तथा मक्सी (शाजापुर) और संजयनगर (जबलपुर) स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार (₹2 लाख) से सम्मानित किया गया। वर्ष 2024-25 के अंतर्गत इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय सिवनी को जिला चिकित्सालय श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (₹15 लाख), सिविल अस्पताल पाटन (जबलपुर) को सीएचसी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (₹10 लाख), और पीएचसी पिटोल (झाबुआ) को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (₹2 लाख) प्रदान किया गया।
वर्ष 2023-24 में इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय, सिवनी को प्रथम रनर-अप (87.19%) तथा सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण-अनुकूल जिला चिकित्सालय (95.71%) श्रेणी में ₹10 लाख एवं ₹5 लाख का पुरस्कार प्रदान किया गया। सेठ गोविंद दास जिला चिकित्सालय, जबलपुर को द्वितीय रनर-अप (84.35%) के रूप में ₹5 लाख की राशि से सम्मानित किया गया। इसी वर्ष सीएचसी दौराहा, सीहोर को प्रथम रनर-अप (93.86%) के रूप में ₹5 लाख तथा सिविल अस्पताल हजीरा, ग्वालियर को सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण-अनुकूल सीएचसी (92.86%) श्रेणी में ₹2.5 लाख का पुरस्कार मिला। वर्ष 2024-25 में जिला चिकित्सालय बुरहानपुर को प्रथम रनर-अप (94.61%) श्रेणी में ₹10 लाख तथा जिला चिकित्सालय भिंड को द्वितीय रनर-अप (90.76%) और सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण-अनुकूल जिला चिकित्सालय (95%) श्रेणियों में ₹5 लाख-₹5 लाख के संयुक्त पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार सीएचसी मानपुर, इंदौर को प्रथम रनर-अप (91.07%) के रूप में ₹5 लाख तथा सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण-अनुकूल सीएचसी (96%) के लिए ₹2.5 लाख का पुरस्कार प्राप्त हुआ।
एन.क्यू.ए.एस., मुस्कान एवं लक्ष्य कार्यक्रमों में में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं को किया गया सम्मानित
जिला चिकित्सालय स्तर पर एन.क्यू.ए.एस. स्कोर के आधार पर 13 जिलों को सम्मानित किया गया, जिनमें जिला चिकित्सालय दतिया (93.60%), सागर (92.9%), पन्ना (90.43%), मुरैना (89.45%), छिंदवाड़ा (88.61%), रतलाम और झाबुआ (88%), अनूपपुर (87.12%), अलीराजपुर (85%), सीहोर (84%), धार (83.81%), जयप्रकाश चिकित्सालय भोपाल (83%) एवं बालाघाट (82.07%) शामिल हैं। इन सभी संस्थाओं के सिविल सर्जन सह अधीक्षक को सम्मानित किया गया।
सीएचसी/पीएचसी/यू.पी.एच.सी./उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर भी एन.क्यू.ए.एस. मापदंडों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली संस्थाओं को सम्मानित किया गया। इनमें सिविल अस्पताल सिवनी मालवा (95%), सीएचसी दौराहा सीहोर (95%), पीएचसी उमरधा नर्मदापुरम (97.58%), यू.पी.एच.सी. कोलुआकलां भोपाल (99.7%) और उप स्वास्थ्य केन्द्र आमाहिनौता जबलपुर (98.37%) प्रमुख हैं। इन संस्थाओं के इंचार्ज चिकित्सा अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, गुणवत्ता प्रबंधक, सहायक कार्यक्रम प्रबंधक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त 8 ज़िला अस्पताल, 21 सीएचसी, 73 पीएचसी और 51 सब हेल्थ सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) को कायाकल्प और एनक्यूएएस में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर सम्मानित किया गया।
मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि वर्ष-2018 में 14 संस्थानों से वर्तमान में 675 स्वास्थ्य संस्थान कायाकल्प मानकों के अनुरूप हैं। 2067 स्वास्थ्य संस्थान एनक्यूएएस मानक अनुरूप हैं। 266 नवजात एवं शिशु इकाइयों में से 27 और 247 प्रसव केंद्र उत्कृष्ट मानक अनुसार हैं। वर्ष-2030 तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों को मानक अनुरूप करने के सघन प्रयास जारी हैं। कार्यक्रम प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से आए चिकित्सकीय सहायक चिकित्सकीय अधिकारी और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना ही हमारा लक्ष्य : राज्यमंत्री गौर
23 Jun, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने से कार्य में कोई बाधा नहीं आती। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ जनता के सेवक हैं। जनप्रतिनिधि एक जनसेवक होता है और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना ही उसका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जनता का साथ और विकास का संकल्प - यही मेरी प्रतिबद्धता है। राज्यमंत्री गौर ने सोमवार को गोविंदपुरा क्षेत्र में 70 लाख रुपए लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया।
राज्यमंत्री गौर ने रजत विहार कॉलोनी में 5 लाख रुपए की लागत से पेविंग ब्लॉक निर्माण कार्य और 7 लाख रुपए की लागत से सी.सी. सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन कर विकास कार्यों का शुभारंभ किया। राज्यमंत्री गौर ने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रसेवा की अमर प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में लगभग 4 लाख रुपए की लागत पेवर ब्लॉक कार्य का निर्माण कराया जाएगा।
राज्यमंत्री गौर ने कहा कि गोविन्दपुरा क्षेत्र के वार्ड 54 के दुर्गा नगर मंदिर परिसर में पेवर ब्लॉक और मंदिर की छत डलने के निर्माण कार्य का भूमिपूजन क्षेत्रवासियों की उपस्थिति में किया। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि यह कार्य श्रद्धालुओं की सुविधा एवं परिसर के सौंदर्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने वार्ड 54 के स्टर्लिंग केसेल्स में 3 लाख रुपए की लागत से पेवर ब्लॉक निर्माण कार्य, कुंजन नगर में 22 लाख रुपये लागत के नाली निर्माण कार्य एवं पार्क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। बागसेवनिया में 24 लाख लागत के कबीरपंथी समाज भवन उन्नयन कार्य, पार्क निर्माण एवं सड़क निर्माण के कार्यों का भूमि-पूजन किया। इस दौरान पार्षद जितेन्द्र शुक्ला, शीला पाटीदार, अर्चना परमार, मोनिका ठाकुर, प्रताप वारे, रामबाबू पाटीदार, धर्मेंद्र पाटीदार, प्रदीप पाठक, अनिल मालवीय सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पद की लालसा न रखते हुए देश की अखंडता के लिए किया कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
23 Jun, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. मुखर्जी की भाजपा कार्यालय के निकट स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्र के नवनिर्माण में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे अनेक महापुरुष हुए, जिन्होंने कभी पद की लालसा नहीं रखी और देश की एकता एवं अखंडता के लिए कार्य किया। राष्ट्रीय एकता को समर्पित डॉ. मुखर्जी ने नारा दिया था कि एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे। उन्होंने देश को आंदोलित करते हुए स्वयं का बलिदान कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उनके प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महान शिक्षाविद् और हमारे मार्गदर्शक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पहली बार यह अहसास कराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, देश का मोर मुकुट है। डॉ. मुखर्जी युवाकाल में कुलपति बने और उन्होंने बंगाल के कई आंदोलनों में भाग लेकर नागरिकों को बताया कि देश के विकास में हमारा योगदान किस प्रकार का होना चाहिए। डॉ. मुखर्जी जब केंद्र में आपूर्ति एवं कपड़ा मंत्री बने तो उनका हर निर्णय सराहनीय रहा। मां भारती की सेवा, लोक-कल्याण और कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए उनका मार्गदर्शन भारत के निर्माण का आधार है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को धारा 370 से मुक्ति दिलाई और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पड़ोसी देश को स्पष्ट संदेश दिया। भारत सरकार के इस फैसले के साथ देश में हर वर्ग का व्यक्ति खड़ा था। कश्मीर में 1947 में ही विकास के द्वार खुल जाने चाहिए थे। अब प्रधानमंत्री मोदी ने रेलवे नेटवर्क, पर्यटन और धार्मिक पर्यटन सहित अनेक क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर की समृद्धि के लिए कार्य किए हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ सांसद वी.डी. शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, भोपाल की महापौर मालती राय, समाजसेवी हितानंद शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, सर्वरवींद्र यति, राहुल कोठारी सहित जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
खंडवा ने जल संचय में ऐतिहासिक उपलब्धि की हासिल
23 Jun, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत “कैच द रेन’’ की “जल संचय, जन भागीदारी” मुहिम से खंडवा जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की राष्ट्रीय रैंकिंग में खंडवा ने 1,29,046 से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण और पंजीकरण के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्षा जल संचयन और सामुदायिक सहभागिता के दृष्टिकोण को साकार करती है। इस पहल ने “जहां गिरे, जब गिरे-वर्षा का जल संचित करें” के मंत्र को चरितार्थ किया है। देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने की उपलब्धि से जिले में उत्साह का माहौल है। जनता और जिला प्रशासन जल संरक्षण के लिए कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे हैं।
जिला प्रशासन के प्रयासों से न केवल भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, बल्कि वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा को मजबूत किया गया है। स्थानीय निवासियों ने गर्व के साथ कहा, “हमारा जिला जल संचय और संरक्षण में देश में अव्वल है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है। हम प्रशासन के साथ मिलकर हर बूंद को संरक्षित करने के लिए और अधिक प्रयास करेंगे।”
जिला प्रशासन ने जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया है। खास तौर पर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए जिले में व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है। सभी शासकीय भवनों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद यह अभियान शासकीय आवासों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दो मंजिला आवासीय भवनों तक चरणबद्ध रूप से विस्तारित होगा।
खण्डवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने कहा “रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से हम जल संकट से निपट सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।” उन्होंने जिले की सभी पक्की छतों पर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने और जनता से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है।
इस अभियान को गति देने के लिए विगत दिवस एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग की तकनीकी जानकारी, लाभ और स्थापना प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह तकनीक भूजल स्तर को बढ़ाने के साथ-साथ वर्षा जल के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करती है।जिले में निरंतर जल संवाद किए जा रहे हैं।अब नुक्कड़ नाटक,कार्यशालाओं एवं संगोष्ठियों के माध्यम से भी जनता को जागरूक किया जाएगा।गांव-गांव में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से प्रभात फेरी और रंगोली बनाने जैसी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
जिले की यह उपलब्धि दर्शाती है कि सामूहिक प्रयासों से जल संरक्षण का लक्ष्य संभव है। जल संरक्षण सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की नींव भी रखता है।खंडवा की यह उपलब्धि और जनता-प्रशासन की संयुक्त प्रतिबद्धता पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रही है।
केंद्रीय मंत्री चौहान का उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किया स्वागत
23 Jun, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भोपाल स्थित निवास पर केंद्रीय कृषि एवं किसान तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के समग्र विकास, मुख्यत: किसानों के हित में चल रही योजनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल क्रांति
23 Jun, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं को मजबूती देने के साथ ही प्रकृति, पर्यावरण, जल संरक्षण की दिशा में देश भर में चलाए जा रहे अभियान को मध्यप्रदेश सरकार मिशन के रूप में चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल क्रांति हो रही है। इस क्रांति के अंतर्गत जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा खेत तालाब, अमृत सरोवर, डगवेल रिचार्ज बनाए जा रहे हैं। इन कार्यों से प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, साथ ही भू-जल स्तर में भी सुधार होगा और ग्रामीण आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा।
मनरेगा परिषद द्वारा जनवरी-फरवरी माह में ही शुरू कर दी गई थी तैयारी, प्लानर सॉफ्टवेयर से बनाई कार्ययोजना
बारिश के पानी का संचयन बड़े स्तर पर किया जा सके, इसके लिए मनरेगा परिषद द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू होने के तीन माह पहले जनवरी से ही तैयारी प्रारंभ कर दी गई थी। इसके लिए परिषद द्वारा प्लानर सॉफ्टवेयर तैयार कराया गया जिसमें कम से कम प्रविष्टि करते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर योजना को अंतिम रूप दिया जा सके। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत लिए जाने वाले नवीन कार्यों को इस प्लान में शामिल किया गया। इसके अलावा पिछले वर्ष के प्रगतिरत कार्यों को पूरा करने के लिए उन कार्यों को भी कार्ययोजना में जोड़ा गया गया। प्लानर सॉफ्टवेयर का मुख्य उद्देश्य था मनरेगा के उद्देश्यों एवं प्रावधानों का पालन कराते हुए कार्ययोजना को आसान तरीके से बनाया जाना। परिषद द्वारा साफ्टवेयर के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर कराए जाने वाले कार्यों की वार्षिक कार्ययोजना तैयार कराई। खास बात यह रही कि मध्यप्रदेश इस तरह का नवाचार करने वाला देश का पहला राज्य भी है।
सिपरी साफ्टवेयर से किया स्थल का चयन
तकनीक के साथ बारिश के पानी को संचय किया जा सके, साथ ही नई जल संरचनाओं के निर्माण के लिए स्थल चयन में भी आसानी हो, इसके लिए मनरेगा परिषद द्वारा सिपरी सॉफ्टवेयर बनाया गया। यह सॉफ्टवेयर (सॉफ्टवेयर फॉर आइडेंटीफिकेशन एंड प्लानिंग ऑफ रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर) एक उन्न्त तकनीक का साफ्टवेयर है, जिसे महात्मा गांधी नरेगा, मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद, भोपाल द्वारा MPSEDC और इसरो के सहयोग से तैयार कराया गया है। इस साफ्टवेयर का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के लिए उपयुक्त स्थलों की सटीक पहचान कर गुणवत्तापूर्ण संरचनाओं का निर्माण सुनिश्चित करना है। इसके अलावा यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित वैज्ञानिक पद्धतियों से जल सरंचना स्थलों के चयन को अधिक सटीक बनाता है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रदेश में बड़ी संख्या में नई जल संरचनाओं जैसे खेत तालाब, अमृत सरोवर और डगवेल रिचार्ज के निर्माण के लिए स्थल का चयन किया गया। प्रदेश में किए गए इस तरह के प्रयोग को देखने के लिए बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र से अधिकारियों का दल भी आ चुका है।
पारदर्शिता व नियमित मॉनिटरिंग के लिए बनाया गया डैशबोर्ड
जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा योजना के तहत होने वाले कार्यों की पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही नियमित तौर पर इसकी मॉनिटरिंग भी की जा सके, इसके लिए परिषद द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान का डैशबोर्ड बनाया गया। डैशबोर्ड के माध्यम के प्रत्येक जिले में क्या-क्या कार्य हो रहे हैं उसकी राशि कितनी है। यह सब आसानी से https://dashboard. nregsmp.org/report_jsm देखा जा सकता है। साथ ही कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रत्येक सप्ताह की प्रगति रिपोर्ट भी कलेक्टर को उपलब्ध कराई जा रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान के लिए बनाए गए डैशबोर्ड को नियमित 1 लाख 27 हजार से अधिक लोग देख भी रहे हैं।
30 मार्च से शुरू हुआ था जल गंगा संवर्धन अभियान
प्रदेश में बारिश के पानी का संचयन करने और पुराने जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत हुई थी। इसका समापन 30 जून को खंडवा में होगा। 90 दिन तक चलने वाले इस अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से की थी।
82 हजार 310 खेत तालाब, 1 हजार 283 अमृत सरोवर, 1 लाख 3 हजार कुओं में बनाया जा रहा रिचार्ज पिट
प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में 77 हजार 940 खेत तालाब, 1 लाख 3 हजार 900 डगवेल रिचार्ज और 992 अमृत सरोवर बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया था। इसे समय रहते पूरा कर लिया गया है। प्रदेश में 21 जून की स्थिति में 82 हजार 310 खेत तालाब, 1 हजार 283 अमृत सरोवर और 1 लाख 3 हजार कुओं में रिजार्च पिट (डगवेल रिचार्ज विधि) बनाने का काम चल रहा है। इसके अलावा 19 हजार 949 पुराने कार्य भी पूरे किए गए हैं। जबकि, जल गंगा संवर्धन अभियान को पूरा होने में एक सप्ताह का समय शेष है। यह सभी कार्य मनरेगा योजना से कराए जा रहे हैं, जिसमें 2334 करोड़ रुपये खर्च की जा रही है।
2 लाख 30 हजार से अधिक जल दूतों ने कराया पंजीयन
प्रदेश में जल संरक्षण के प्रति अधिक से अधिक लोग जागरूक हों, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा 1 लाख 62 हजार 400 जल दूत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। यह लक्ष्य भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक हो गया है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 30 हजार से अधिक जलदूतों ने पंजीयन कराया है।
पहली बार एआई, सिपरी और प्लानर साफ्टवेयर का किया गया है उपयोग
प्रदेश में पहली बार खेत तालाब, अमृत सरोवर और डगवेल रिचार्ज बनाने में सिपरी साफ्टवेयर, एआई और प्लानर सॉफ्टवेयर जैसी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे निर्धारित लक्ष्य को समय रहते प्राप्त करने में आसानी हुई है। साथ ही गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अब यह तकनीक देश के दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल रूप में विकसित हो रही है।
अभियान की प्रगति के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए डैशबोर्ड डाटा को AI के माध्यम से विश्लेषित कर सीधे संबंधित अधिकारियों को वाट्सऐप पर उपलब्ध कराई जा रही है। AI रिपोर्ट में जिले की विशेषताओं को अभियान के लक्ष्य के साथ अन्य जिलों की प्रगति से तुलना करते हुये जिले की प्रगति को दिखाया जाता है। जिससे अभियान की प्रगति में सुधार लाया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मुलाकात
23 Jun, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट कर प्रदेश में चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और उन्हें मध्यप्रदेश में विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि-पूजन कार्यक्रमों के लिए मध्यप्रदेश आने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जल संरक्षण के उद्देश्य से प्रदेश में 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान्तर्गत खंडवा जिला भूगर्भ-जल भंडारण में पूरे देश में प्रथम आया है और मध्यप्रदेश ने शीर्ष चार राज्यों में स्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की प्रेरणा गुजरात सरकार से मिली है, जहाँ पुराने कुएं, बावड़ियों, नदी तटों का जीर्णोद्धार कर भूगर्भ-जल भंडारण के विशेष काम किये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को अभियान के समापन कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से सम्मिलित होकर आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहर्ष स्वीकार किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चार स्तंभों-गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के विकास की दिशा में चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने और कृषि आधारित उद्योगों के नए अवसर सृजिन करने के उद्देश्य से आगामी 12-13 और 14 अक्टूबर को सीहोर जिले में 2 लाख से अधिक किसानों का वृहद सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को इस सम्मेलन के उद्घाटन करने के लिए निमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से जनजातीय अंचल धार में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने पार्क के भूमि-पूजन और औद्योगिक खंडों के आवंटन के लिए भी प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भोपाल में मेट्रो ट्रेन इस वर्ष अक्टूबर माह तक प्रारंभ हो जाएगी, प्रधानमंत्री मोदी को इसका करने का न्यौता भी दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नक्सलवाद समाप्त करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि विगत डेढ़ वर्ष में 10 से अधिक नक्सलवादी मारे गए हैं जिन पर एक करोड़ 62 लाख रुपए का इनाम था। प्रदेश का बालाघाट एकमात्र नक्सल प्रभावित जिला था, जिसमें तहसील स्तर पर ही कुछ नक्सल गतिविधियां रह गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुरूप मार्च 2026 तक प्रदेश में नक्सलवादी गतिविधियों पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार ने विगत नौ वर्षों से कर्मचारियों की रुकी हुई पदोन्नति का समाधान निकाला है। कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति के नए नियम बनाए गए हैं, जिससे लगभग 5 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा और 2 लाख से अधिक नवीन पदों की भर्ती का रास्ता खुलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि तीन हजार वर्ष पूर्व महाकाल की नगरी उज्जैन से कालगणना की जाती थी, जिसे औपनिवेशिक शक्तियों के कारण पहले पेरिस और फिर ग्रीनविच को स्टैंडर्ड टाइम बना दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एशिया के वैज्ञानिक सहमत हैं कि समय की शुद्ध गणना पूर्व दिशा से होनी चाहिए, जिसके लिए भारत सर्वोत्तम देश है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने उज्जैन के निकट एक नई वेधशाला स्थापित की है, जो भविष्य में समय गणना का केंद्र बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में जनवरी में स्टैंडर्ड टाइम के संबंध में एक वैश्विक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को इस सम्मेलन का भी आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने आदिकाल में सुशासन और गणतंत्र की स्थापना की थी। इनकी गौरव गाथा को महानाट्य के माध्यम से देश के विभिन्न शहरों में मंचन किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सहयोग का निवेदन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्र सरकार के मूलमंत्र ‘सबका साथ-सबका विकास’ सबका प्रयास और सबका विकास पर प्रदेश सरकार कदम से कदम मिलाकर कार्य कर रही है।
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