मध्य प्रदेश
नर्मदा खतरे से ऊपर बह रही, सामान्य जलस्तर से 4 फीट ऊपर बह रही नर्मदा नदी, निचले इलाकों में अलर्ट, शहडोल रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म तक भरा पानी
7 Jul, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बरगी बांध के 9 गेट खुले
- शिवपुरी, मंडला में बाढ़, घरों-दुकानों में घुसा पानी, सडक़ें बही, पुल टूटने से कई रास्ते बंद
-कटनी में सरस्वाही नदी उफान पर, कई गांवों का संपर्क टूटा, स्लीमनाबाद में 16 इंच से ज्यादा बारिश
भोपाल/जबलपुर। बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की वजह से मध्यप्रदेश में बाढ़ के हालात हैं। जबलपुर में बरगी डैम के 9 गेट खोल दिए गए हैं। इसे लेकर जिला प्रशासन और बरगी बांध प्रबंधन ने नर्मदा नदी के निचले इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। शहडोल रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म तक पानी भर गया है। रेलवे ट्रैक पूरी तरह से डूब गया है। मंडला और डिंडौरी जिलों में हो रही तेज बारिश के चलते इन दिनों नर्मदा नदी उफान पर है। अपस्ट्रीम में नर्मदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बरगी बांध में पानी की आवक भी तेजी से हो रही है। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए बांध प्रबंधन ने पानी छोडऩे का निर्णय लिया है। शिवपुरी और मंडला जिलों में बीते 24 घंटों से हो रही तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शिवपुरी के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए, घरों और खेतों में पानी घुस गया। वहीं मंडला में भी नदी-नाले उफान पर हैं, सडक़ें और पुल बहने से आवाजाही ठप हो गई है।
नर्मदापुरम में बारिश का दौर जारी है। नरसिंहपुर जबलपुर मंडला क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश की वजह से नर्मदा नदी में तीन से चार फीट पानी बढ़ गया है। नर्मदापुरम में सेठानी घाट पर नर्मदा नदी सामान्य जलस्तर से 4 फीट ऊपर बह रही है। आज जिले में मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी किया है। बरगी डैम से 5,000 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे नर्मदा नदी का जलस्तर 4 से 5 फीट तक बढ़ सकता है। इस वजह से जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, खंडवा, खरगोन, धार, बड़वानी और अलीराजपुर जैसे जिलों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे न जाने की सलाह दी है। जबलपुर के बरगी डैम के गेट इस साल 23 दिन पहले ही 9 गेट खोलने पड़े। रविवार को दोपहर 12 बजे बरगी डैम से पानी छोड़ा गया। डेम के गेट खोले जाने को लेकर जिला प्रशासन और बरगी बांध प्रबंधन ने नर्मदा नदी के निचले इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। दरअसल, मंडला और डिंडौरी जिलों में हो रही तेज बारिश के चलते इन दिनों नर्मदा नदी उफान पर है। अपस्ट्रीम में नर्मदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बरगी बांध में पानी की आवक भी तेजी से हो रही है। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए बांध प्रबंधन ने पानी छोडऩे का निर्णय लिया है। कटनी में साउथ रेलवे स्टेशन के रास्ते पर तीन फीट तक पानी भरा हुआ है। आर्डिनेंस फैक्ट्रीकर्मियों को लंबा फेरा लगाना पड़ रहा है। कुछ कर्मचारी पानी में से ही निकल रहे हैं। शहडोल जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड समेत तीन वार्डों में पानी भर गया है। जिले में 36 घंटे से लगातार तेज बारिश हो रही है। शहडोल से छत्तीसगढ़ जाने वाला रायपुर-पड़रिया मार्ग बंद हो गया है। यहां पोंडा नाला उफान पर है। नाले में कार बह गई। स्थानीय लोगों ने पानी में कूद कर कार सवारों की जान बचाई। शहडोल रेलवे पुलिस स्टेशन में पानी भर गया। थाने में रखे दस्तावेज, कम्प्यूटर, रिकॉर्ड फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को नुकसान पहुंचा है। पुलिसकर्मी बाल्टी से पानी निकाल रहे हैं।
जोहिला के 4, और सतपुड़ा डैम का एक गेट खोला
उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के रविवार दोपहर को 4 गेट खोल दिए गए। इससे पहले एक गेट से पानी छोड़ा जा रहा था। उमरिया के बिरसिंहपुर पाली में बारिश में सडक़ों पर पानी भरने लगा है। उधर, बैतूल में सतपुड़ा बांध का एक गेट सुबह साढ़े 5 बजे तक खुला रहा, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। नर्मदापुरम के इटारसी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश का दौर जारी है। तवा डैम के एसडीओ एन के सूर्यवंशी ने बताया, डैम का जलस्तर अभी 1125.60 फीट है।
मड़ीखेड़ा और मोहिनी सागर बांध के गेट खुले
नदियों और नालों में जलस्तर बढऩे से शिवपुरी जिले के मड़ीखेड़ा और मोहिनी सागर बांध में पानी की आवक तेज हो गई है। जलस्तर बढऩे के कारण दोनों बांधों के गेट खोलकर करीब 951 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे सिंध नदी उफान पर आ गई है। सिंध नदी का जलस्तर बढऩे से सेवढ़ा कस्बे में स्थित पुल पर पानी आ गया है। नदी पुल के ऊपर से बह रही है, जिससे सेवढ़ा-भिंड मार्ग पूरी तरह ठप्प हो गया है। भिंड, सेवढ़ा और आसपास के दर्जनों गांवों का आपसी संपर्क टूट गया है। कटनी जिले में पिछले दो दिनों से जारी भारी बारिश के कारण सरस्वाही नदी उफान पर है। एनकेजे थाना क्षेत्र में नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है। इससे सरस्वाही, खेरवा और आसपास के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन के लिए उफनती नदी को पार करना पड़ रहा है। पुल की कम ऊंचाई के कारण बारिश के मौसम में यह समस्या हर साल आती है।
शिवराज सिंह का गुस्सा फूटा नकली बीज पर, केंद्रीय मंत्री ने खेत में की जांच
7 Jul, 2025 08:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में किसानों को घटिया और अमानक बीज दिए जाने की गड़बड़ी का शिकार केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र के किसान ही हो गए. गंजबासौदा दौरे के दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद किसानों के खेतों में पहुंचे और देखा कि बीजों का अंकुरण ही नहीं हुआ. केन्द्रीय मंत्री ने मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
मंत्री ने खेत में पहुंचकर देखी स्थिति
केन्द्रीय कृषि मंत्री विदिशा संसदीय क्षेत्र में दौरे पर पहुंचे थे. इस दौरान जब वे गंजबासौदा पहुंचे तो केन्द्रीय मंत्री से किसानों ने अमानक बीज की शिकायत की. इसके बाद मंत्री खेतों में पहुंचे और खुद खेत से बीज निकालकर देखे. इस दौरान कई बीज बिना अंकुरण के और सड़े हुए मिले.
चर्चा के दौरान किसान ने बताया कि उन्होंने 7 बीघा में सोयाबीन की फसल के लिए 2 क्विंटल बीज बोया था, लेकिन यह पैदा ही नहीं हुआ. किसानों ने बताया कि इस तरह का धोखा यहां कई किसानों के साथ हुआ है. कई किसानों ने दूसरी बार नया बीज लेकर बुआई कराई है.
केन्द्रीय मंत्री बोले जांच कराएंगे
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि "कई किसानों की शिकायत के बाद वे यहां खुद खेत में आए हैं. इन किसानों की खेती बबार्द हो गई. कृषि मंत्री के तौर पर मैंने खुद बीज खोदकर देखे हैं, कई बीजों में अंकुरण नहीं हुआ है. यह किसान के साथ धोखा है. इसकी जांच कराई जाएगी कि यह बीज कहां से आया और किसने यह दिया है. जिसने यह घटिया बीज दिया है. उसके खिलाफ जांच कर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर ऐसी स्थिति बनी है कि बीज का अंकुरण नहीं हुआ है. कई जिलों में ऐसी स्थिति है.
दमोह में किसानों ने किया था हंगामा
उधर कुछ समय पहले दमोह जिले में भी किसानों ने बीज निगम द्वारा अमानक बीज दिए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था. दमोह जिले से 219 क्विंटल सोयाबीन बीज लैब में जांच के लिए भेजा गया था, जिसमें से 87 क्विंटल अमानक पाया गया था, लेकिन लापरवाही के चलते किसानों को अमानक बीज भी बांट दिया था.
ट्रेन की जनरल बोगी में पहुंचे शिवराज
बता दें रविवार सुबह केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पंजाब मेल एक्सप्रेस से गंजबासौदा पहुंचे. जहां वे ट्रेन की जनरल बोगी में गए, लेकिन वहां उनको जगह मिली. इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने यात्रा कर रहे यात्रियों से बात की, उनकी परेशानियों को जाना. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वहीं इस बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जनरल बोगियों में यात्रियों से बात करके उनकी परेशानियों का पता चला.
साथ ही उन्होंने कहा कि जनता के हर प्रतिनिधि को जनरल ही होना चाहिए. हम खान नहीं है, हम आम हैं. उनकी तकलीफों के बीच जाकर ही परेशानियों का पता चलता है. बतादें ट्रेन से उतरकर केंद्रीय मंत्री ने सबसे पहले गंजबासौदा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया.
वनवासियों के कल्याण के लिए करें सभी प्रबंध - मुख्यमंत्री डॉ. यादव
6 Jul, 2025 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्नेह का बंधन एकतरफा नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार हर पल वनवासियों के साथ खड़ी है, यह बात पूरी शिद्दत से उन तक पहुंचनी चाहिए। सभी वनवासियों को सरकार की योजनाओं से जोड़ें और उनके जीवन में विकास का प्रकाश लाने की दिशा में काम करें। वनवासियों के कल्याण के लिए हरसंभव प्रबंध किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग के अध्ययनरत एवं रोजगार कर रहे बच्चों का सामाजिक सम्मेलन बुलाएं। इस सम्मेलन के जरिए सरकार इन बच्चों को उन तक पहुंचने वाले लाभ का फीड-बैक भी लेगी और जिन्हें जरूरत है, उन तक सरकार की योजनाएं तथा सुविधाएं भी पहुंचाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम और पेसा एक्ट के क्रियान्वयन के लिए गठित की गई राज्य-स्तरीय टास्क फोर्स की शीर्ष समिति तथा इसी विषय के लिए गठित कार्यकारी समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय कार्य एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को वनाधिकार के व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों का तेजी से निराकरण कर 31 दिसंबर 2025 तक पेंडेसी जीरो करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पेसा एक्ट यानि पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 लागू है। इसमें पेसा मोबालाईजर्स के जरिए जनजातियों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देकर योजनाओं से लाभान्वित भी कराया जाता है। इन सभी पेसा मोबालाईजर्स की अपने काम पर उपस्थिति और उच्च कोटि का कार्य प्रदर्शन फील्ड में दिखाई भी देना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेसा मोबालाईजर्स को नियुक्त करने और संतोषजनक प्रदर्शन न करने पर इन्हें हटाने के अधिकार सरकार अब ग्राम सभाओं को देने जा रही है।इस निर्णय से एकरूपता आएगी और ग्राम सभाएं पेसा मोबालाईजर्स से अपने मुताबिक काम भी ले सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वनवासियों की बेहतरी के लिए संकल्पित है। उनके सभी हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि वन विभाग का मैदानी अमला यह सुनिश्चित करे कि वन भूमि पर अब कोई भी नये अतिक्रमण कदापि न होने पाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के सुचारू क्रियान्वयन के लिए महाराष्ट्र सरकार के 'जलयुक्त शिविर' अभियान की तरह समन्वय पर आधारित मॉडल मध्यप्रदेश में भी अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों द्वारा इस अधिनियम के अमल के लिए की जा रही कार्यवाही के सभी पहलुओं का अध्ययन कर लें और जो सबसे उपयुक्त है उसी मॉडल पर आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए विधायकों द्वारा विजन डॉक्यूमेंट बनाया गया है। वनाधिकार अधिनियम और पेसा कानून के अमल के लिए समुचित प्रावधान भी इसी विजन डॉक्यूमेंट में शामिल कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार क्रमबद्ध रूप से विशेष रूप से पिछड़े जनजातीय समूहों और अन्य जनजातीय बहुल गांव, मजरों-टोलों तक सड़कों का निर्माण कर रही है। ग्राम पंचायत विकास कार्ययोजना में पेसा कोष की राशि खर्च करने का अधिकार भी संबंधित पेसा ग्राम सभा को दिया जा रहा है।
बैठक में समिति के सदस्य एवं पूर्व विधायक श्री भगत सिंह नेताम ने बताया कि वनाधिकार अधिनियम के प्रभावी अमल के लिए बालाघाट जिले में पुलिस विभाग द्वारा सभी पुलिस चौकियों में एकल सुविधा केन्द्र स्थापित कर इसके जरिए कैम्प लगाकर जनजातियों को लाभान्वित किया जा रहा है। अब तक 450 वनाधिकार दावे भरवाए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी 88 जनजातीय विकासखंडों वाले जिलों के कलेक्टर को बालाघाट मॉडल भेजकर इसी अनुरूप कार्यवाही करने के लिए कहा जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र के सभी गांवों के विकास के लिए प्रस्ताव दिए जाएं। उन्होंने कहा कि यह कार्य एक्शन प्लान बनाकर किया जाए। उन्होंने कहा कि 31 दिसम्बर 2025 तक सभी गांवों के दावे प्राप्त कर लें और इसी दौरान इनका निराकरण भी कर लें। वन अधिकारियों की ट्रेनिंग का काम 15 अगस्त तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई तकनीकी परेशानी आ रही है तो इसके लिए वन और जनजातीय कार्य विभाग मिलकर एक नया पोर्टल भी विकसित कर लें।
वनांचल विकास केन्द्र को करें और अधिक सक्रिय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातियों के पारम्परिक ज्ञान को उनके विकास के लिए बनाई जा रही नीति निर्माण में भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को और भी सशक्त बनाने, सामुदायिक वन संसाधनों के समुचित प्रबंधन, जैव विविधता के संरक्षण और वन एवं वनोपज संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए वन/वनांचल विकास केन्द्रों को और अधिक भी सक्रिय कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि ये केंद्र वन अनुसंधान, प्रशिक्षण, मार्केट लिंकेज और कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व-सीएसआर/कैम्पा जैसे वित्त स्रोतों के समन्वय में महत्त्वपूर्ण भूमिका भी अदा करें।
सामुदायिक आजीविका पर करें फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजीविका सबसे पहली जरूरत होती है। सामुदायिक आजीविका के साधनों पर फोकस कर जनजातियों की नकद आय के साधन बढ़ाने की दिशा में उन्हें दुग्ध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्हें शासन की योजना के तहत अधिक से अधिक दुधारू पशु (मुख्यत: गाय, भैंस) उपलब्ध कराए जाएं। इससे वे आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि जनजातियों को कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की रोजगारमूलक योजनाओं से भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि चूंकि वनवासी वनोपजों पर विशेष रूप से आश्रित रहते हैं। इसलिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन गतिविधियों में जनजातीय समुदायों को लाभ का बड़ा हिस्सा मिलना चाहिए,इससे उनका जीवन स्तर सुधरेगा। औषधीय पौधों की खेती पर विशेष जोर दिया जाए ताकि जनजातीय वर्ग के उत्पाद सीधे बाजार से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्गों की स्थायी आजीविका विकास के लिए मूल्य संवर्धन केंद्र भी विकसित किए जाएं, जिससे जनजातियां रोजगार की तलाश में बाहर न जाएं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातियों द्वारा उत्पादित श्रीअन्न के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए। श्रीअन्न से बिस्किट, कुकीज, खीर और हलवा जैसे उत्पाद तैयार कर इन्हें खुले बाजार में बेचने के लिए जनजातियों को मार्केट लिंकेज प्रदान करें। उन्होंने कहा कि श्रीअन्न में कोदो-कुटकी को लोग उपवास में मोरधन के रूप में खाते हैं, यह अच्छी बात है इससे श्रीअन्न की खपत बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के अच्छे परिणाम पाने के लिए हमें समन्वित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। वन अधिकार अधिनियम, पेसा, बीडीए जैसे सभी कानूनों को एकीकृत रूप से ग्रामसभा स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए ग्रामसभा को ही निर्णय का केंद्र बिंदु संस्था बनाया जाना चाहिए। सभी विभागीय योजनाओं का समन्वय ग्रामसभा के माध्यम से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के ग्रामों के विकास के लिए ग्रामसभा, वन विभाग और निवेशक तीनों मिलकर पारदर्शिता और हितग्राहियों को लाभ वितरण तय करें। सभी विभाग आपसी समन्वय से ग्रामसभा के नेतृत्व में कार्य करें, जिससे समावेशी विकास और स्थायी पर्यावरण संरक्षण दोनों सुनिश्चित किए जा सकें।
बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा भी अपनी बात तथ्यात्मक रूप से रखी गई और वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के फील्ड में बेहतर क्रियान्वयन के लिए अपने-अपने सुझाव दिए गए।
अब तक 2.89 लाख से अधिक दावे मान्य किए गए
बैठक में प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य ने बताया कि वर्ष 2008 से 2023 तक कुल 2 लाख 89 हजार 461 वनाधिकार दावे मान्य किए गए हैं। लंबित दावों के निराकरण केलिए कार्यवाही की जा रही है। वन मित्रा पोर्टल के अनुसार जिलों द्वारा पूर्व में मान्य किए गए दावों के सत्यापन के उपरांत अपात्र पाए गए हितग्राहियों के वनाधिकार दावे अमान्य किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुन: परीक्षण के लिए 87 हजार 283 और एक लाख 86 हजार 224 नए प्राप्त दावे इस प्रकार कुल 2 लाख 73 हजार 457 दावे अभी लंबित स्थिति में है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के बड़वानी, धार, खरगोन, मंडला, बैतूल, छिंदवाड़ा, शहडोल, खंडवा, सिंगरौली, रायसेन, डिण्डौरी, अलीराजपुर, बुरहानपुर, सिवनी, उमरिया और बालाघाट जिले में 7-7 हजार से भी अधिक वनाधिकार दावे मान्य किए गए हैं।
टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की इस पहली बैठक में समिति उपाध्यक्ष तथा जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, समिति उपाध्यक्ष तथा वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, समिति के पदेन सदस्य सचिव तथा मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, समिति के पदेन सदस्य सह सचिव तथा प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, टास्क फोर्स कार्यकारी समिति के पदेन सदस्य तथा अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक वर्णवाल, पदेन सदस्य तथा प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, पदेन सदस्य तथा संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री छोटे सिंह, समिति के सदस्य पूर्व विधायक श्री राम डांगोरे, जनजातीय मंत्रणा परिषद के डॉ. रूपनारायण मांडवे एवं श्री कालू सिंह मुजाल्दा, समिति के सदस्य विधि विशेषज्ञ डॉ. मिलिंद दांडेकर, एक्सपर्ट मेम्बर श्री गिरीश कुबेर, विषय विशेषज्ञ श्री मिलिंद थत्ते, मुख्यमंत्री के अपर सचिव श्री लक्ष्मण सिंह मरकाम, अपर आयुक्त जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्थान श्रीमती रीता सिंह तथा अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे।
मध्यप्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, राजौरा की जगह नीरज मंडलोई बने मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव
6 Jul, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्यप्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के तहत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के दायित्व में बदलाव किया गया है। राजेश राजौरा की जगह अब नीरज मंडलोई को मुख्यमंत्री का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। नीरज मंडलोई अभी ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास ऊर्जा विभाग और लोक सेवा प्रबंधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार रहेगा।
रविवार रात को सरकार ने प्रदेश के 9 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर आदेश जारी किए है। राजेश राजौरा के पास नर्मदा घाटी विकास विभाग में अपर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी बनी रहेगी। जून 2024 में राजेश राजौरा को मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर मुख्य सचिव बनाया गया था।
सामान्य प्रशासन विभाग से जारी आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे को नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग में अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। उन्हें आईटी विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जबकि नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एसीएस संजय शुक्ला को एसीएस सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कर्मचारी चयन मंडल का अतिरिक्त प्रभार डीपी आहूजा पीएस मछुआ कल्याण को पीएस सहकारिता विभाग बनाया गया है। कृषि सचिव एम सेलवेंद्रम को सामान्य प्रशासन विभाग में सचिव बनाया गया है। उच्च शिक्षा आयुक्त निशांत वरवड़े को कृषि विभाग में सचिव बनाया गया। लोक सेवा आयोग से प्रबल सिपाहा को उच्च शिक्षा आयुक्त बनाया गया। राखी सहाय को सचिव मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग बनाया गया है।
बिना काम किए 12 साल से सैलरी ले रहा था सिपाही, प्रमोशन को बुलाया तो पकड़ाई चालाकी
6 Jul, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें एक आरक्षण पिछले 12 सालों से वेतन तो लेता रहा. लेकिन उसने काम एक भी दिन नहीं किया. इन 12 सालों के दौरान हर माह सिपाही के खाते में सैलरी पहुंचती रही. इन 144 महीनों के दौरान सिपाही के खाते में 28 लाख से ज्यादा की राशि पहुंची. मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रमोशन के लिए उसे बुलाया गया. पुलिस अब इस मामले में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है.
ट्रेनिंग पर लगा, फिर लौटा ही नहीं
बताया जाता है कि साल 2011 में विदिशा के रहने वाले आरक्षक की भर्ती सिपाही के पद पर हुई थी. नियुक्ति के बाद उसे ट्रेनिंग के लिए भोपाल पुलिस लाइन से सागर प्रशिक्षण केन्द्र भेजा गया था, लेकिन आरक्षक ट्रेनिंग सेंटर न जाकर विदिशा स्थित अपने घर चल गया. ट्रेनिंग छह माह चलती रही, लेकिन सागर प्रशिक्षण केन्द्र ने आरक्षक के सागर पहुंचने की सूचना ही नहीं दी.
इस तरह छह माह की ट्रेनिंग का समय बीत गया और प्रशिक्षण के बाद सभी आरक्षकों को भोपाल पुलिस लाइन भेज दिया गया. लेकिन भोपाल पुलिस लाइन में भी प्रशिक्षण के बाद वापस लौटे सिपाहियों की जांच नहीं की. सिपाही इस तरह ट्रेनिंग के बाद भी नहीं लौटा, लेकिन इससे बेखबर पुलिस प्रशासन हर माह सिपाही का वेतन उसके खाते में ट्रांसफर करता रहा. इस तरह करीबन 12 साल का समय गुजर गया.
प्रमोशन के दौरान हुआ खुलासा
इस मामले का खुलासा 2023 में तब हुआ, जब लगभग 10 साल की नौकरी के बाद 2011 बैच के सिपाहियों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई. समयमान वेतनमान के दौरान जब सिपाहियों को बुलाया गया तब पता चला कि सिपाही ड्यूटी से नियुक्ति के समय से ही गायब है. इसके बाद आरक्षक को फोन कर बुलाया गया. तब सिपाही ने मानसिक बीमारी से जुड़े दस्तावेज विभाग को सौंपे. सिपाही द्वारा बताया गया कि मानसिक बीमार होने से उसका इलाज चल रहा था. हालांकि बाद में सिपाही को निलंबित कर फिर बहाल कर दिया गया है.
गड़बड़ी करने वालों पर होगी कार्रवाई
उधर, 2023 में इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने जांच शुरू करा दी है. पूर्व में एडीशनल एसपी अंकिता खातरकर के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की जा चुकी है. भोपाल मुख्यालय की डीसीपी श्रद्धा तिवारी बताती हैं कि, ''इस मामले की जांच की जा रही है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. जांच में देखा जा रहा है कि किस-किस स्तर पर लापरवाही हुई है, जांच के आधार पर सभी जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी.''
मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश का कहर, कई जिलों में बाढ़ के हालात, अलर्ट पर अगले 5 दिन
6 Jul, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रांग सिस्टम होने की वजह से भारी बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग ने बीते 24 घंटों में हुई भारी बारिश के कारण जबलपुर, शिवपुरी, रीवा, छतरपुर, सागर और नरसिंहपुर समेत 26 जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया है. शिवपुरी में कई गावों में बाढ़ के कारण उनका मुख्य सड़क से संपर्क टूट गया है. सड़कों पर कार के ऊपर से पानी बह रहा है.
नदियों के उफान पर होने के कारण सागर से बेगमगंज और ग्यारसपुर जाने वाला मार्ग भी बंद कर दिया गया है. वहीं जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे पर बाढ़ के पानी की वजह से खेतों की मिट्टी आ गई है, जिससे कीचड़ में वाहन फंस रहे हैं.
शहडोल में बारिश के कारण गिरा मकान , 2 लोगों की मौत
शहडोल जिले में भारी बारिश के कारण एक जर्जर मकान गिर गया, जिसमें दबकर पति-पत्नि की मृत्यु हो गई. वहीं शिवपुरी के कई गांवों में बाढ़ आ गई है. लोगों के घरों में पानी भर गया है. इन क्षेत्रों में राहत और बचाव के लिए एसडीईआरएफ की टीमें लगी हुई हैं. शिवपुरी में सड़कों पर खड़ी कारें जलमग्न हो गईं, श्योपुर के बेनीपुरा गांव में क्वारी नदी भी उफान पर है, जिससे नदी का पानी लोगों के घरों में घुस गया. उमरिया में भी सिंदूरी नदी पुल के ऊपर से बह रही है.
इन जिलों में हुई मूसलाधार बारिश
बीते 24 घंटों में मध्य प्रदेश के 12 से अधिक जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई है. सबसे अधिक कटनी के रीठी में 9.1 इंच पानी गिरा. इसके साथ ही मंडला के निवास में 7.4 इंच और बीजाडंडी में 7.1 इंच, पन्ना के अमानगंज में 6.7 इंच, कटनी के उमरिया पान में 6.5 इंच, जबलपुर के कुंडम में 6.1 इंच, उमरिया के नौरोजाबाद में 5.5 इंच, श्योपुर में 6.9 इंच, ग्वालियर के भितरवार में 5.4 इंच के साथ डिंडौरी, दमोह, सागर, निमाड़ी और शहडोल में भी 4 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है.
अगले 24 घंटो में इन जिलों में बाढ़ का अलर्ट
पूर्वी मध्य प्रदेश के अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया जिले में भारी बारिश के कारण बाढ़ का रेड अलर्ट जारी किया गया है. वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के अशोकनगर, गुना, रायसेन, राजगढ़, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा जिले में भी बाढ़ का रेड अलर्ट जारी किया गया है.
बीहड़ में फिर ठांय-ठांय, पेट्रोल पंप लूट के आरोपियों का शॉर्ट एनकाउंटर
6 Jul, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिंड: मध्य प्रदेश के बीहड़ में एक बार फिर हुई ठांय-ठांय. शनिवार को मुठभेड़ में पुलिस ने 2 आरोपियों का शॉर्ट एनकाउंटर किया है, जिससे दोनों घायल हो गए. पुलिस ने लूट गिरोह के 4 लोगों को पकड़ने में सफलता हासिल की है. भिंड के पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव ने बताया कि, ''पुष्पेंद्र पवैया और आशीष उचादिया एक कार से भाग रहे थे, तभी पुलिस ने शनिवार तड़के भिंड जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर ऐचया इलाके के बीहड़ों में वाहन को रोक लिया.
शॉर्ट एनकाउंटर में 2 लुटेरे घायल
भिंड के पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव ने बताया कि, ''हथियारबंद बदमाशों ने 30 जून को गोहद कस्बे में एक पेट्रोल पंप पर लूट की वारदात को अंजाम दिया था. यहां से एक लाख रुपये और मोबाइल लूटकर फरार हो गए थे. तभी से पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू की और शुक्रवार रात संदिग्धों के स्थान के बारे में सूचना मिली. जानकारी मिली की आरोपी मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर ऐचया इलाके में देखे गए हैं और यहां से राजस्थान भागने की फिराक में हैं.''
गिरफ्तारी से बचने बदमाशों ने की पुलिस पर फायरिंग
जिसके बाद गोहद और अन्य थानों की पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां पुलिस को देखकर बदमाशों ने फायरिंग कर दी. पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें पुष्पेंद्र पवैया और आशीष उचादिया के पैर में चोट लग गई. दोनों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने उनके दो अन्य साथियों भानुप्रताप पवैया और आकाश कडेरे को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से देशी पिस्तौल, जिंदा कारतूस और कार बरामद की है.
पुष्पेंद्र पवैया कई डकैतियों का कथित मास्टरमाइंड है और उसके खिलाफ भिंड, मुरैना और ग्वालियर में 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. एसपी ने बताया कि पुलिस ने पहले उसकी गिरफ्तारी के लिए 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया था. तभी से पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी. पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरु कर दी है.
मैनेजर को बंधक बनाकर लूट
बता दें कि घटना 30 जून 2025 को रात करीब 3 बजे हुई थी. 3 बदमाश गोहद कस्बे में स्थित कनिष्का पेट्रोल पंप पहुंचे. जबकि उनका एक साथी बाहर निगरानी कर रहा था. आरोप है कि बदमाशों ने पेट्रोल पंप के मैनेजर रतन सिंह को नींद से जगाया और कट्टा दिखाकर उनके साथ मारपीट की. साथ ही दांतों से काटा भी. उससे तिजोरी खुलवाई और उसमें रखे एक लाख रुपये और एक मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए थे. घटना के बाद सुबह मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी थी. जिसके बाद से पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी थी.
मुख्यमंत्री कार्यालय में बदलाव से क्या बदलेगी शासन की दिशा?
6 Jul, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर प्रशासनिक मोर्चे पर बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय सहित कुल 9 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस फेरबदल में कुछ अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं, जबकि कुछ से उनके पूर्व कार्यभार वापस ले लिए गए हैं।
नीरज मंडलोई बने मुख्यमंत्री के नए अपर मुख्य सचिव
राज्य सरकार ने डॉ. राजेश राजौरा को मुख्यमंत्री कार्यालय से हटाकर उनकी जगह नीरज मंडलोई को नया अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) नियुक्त किया है। यह बदलाव प्रशासनिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है, जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय में नई कार्यशैली और ऊर्जा लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. राजौरा को नई जिम्मेदारियाँ
हालांकि डॉ. राजौरा को मुख्यमंत्री सचिवालय से हटाया गया है, लेकिन उन्हें निम्नलिखित प्रमुख जिम्मेदारियाँ दी गई हैं: अपर उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास विभाग , प्रबंध संचालक, नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट कंपनी लिमिटेड ,अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग (अतिरिक्त प्रभार)
अन्य प्रमुख तबादले इस प्रकार हैं: संजय दुबे – बने अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, संजय कुमार शुक्ल – नियुक्त अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD), राखी सहाय – बनीं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की नई सचिव, डीपी आहूजा – नियुक्त प्रमुख सचिव , सहकारिता विभाग , एम.सेलवेन्द्रन – बने सचिव, कार्मिक एवं सामान्य प्रशासन विभाग , निशांत वरवड़े – नियुक्त सचिव कृषि विभाग , प्रबल सिपाहा – बने आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग
राजनीतिक संकेत:
नीरज मंडलोई की मुख्यमंत्री कार्यालय में वापसी को प्रशासनिक संरचना में बदलाव और राजनीतिक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी राजेश राजौरा को हटाना यह दर्शाता है कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री सचिवालय में कार्यकुशलता और तीव्रता लाना चाहती है।
निष्कर्ष:
इन तबादलों से प्रशासनिक मशीनरी में नया संतुलन और गति आने की संभावना है। आने वाले समय में इसका प्रभाव मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग ने 8 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया, 23 अन्य जिलों में भारी बारिश की संभावना
5 Jul, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने की वजह से भारी बारिश का दौर चल रहा है। शनिवार को भी ऐसा ही मौसम बना रहा भोपाल समेत 34 शहरों में बारिश हुई। मंडला में नर्मदा नदी उफान पर है। यहां महिष्मति घाट के पास रपटा पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के दो गेट खोले गए हैं। दोनों गेट को एक-एक मीटर खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। शिवपुरी में बैराड के कई गांवों में बाढ़ आ गई है। घरों में पानी भर गया है। श्योपुर जिले के बेनीपुरा गांव में क्वारी नदी का पानी गांवों में घुस गया है। सागर से बेगमगंज और ग्यारसपुर जाने वाला मार्ग नदियों में बाढ़ के कारण बंद हो गया। नरसिंहपुर में शनिवार सुबह स्टेट हाईवे-22 पर पुलिया धंस गई, जिससे रास्ता बंद हो गया।
सीधी में 2 इंच हुई बारिश
मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को 9 घंटे में सीधी में 2 इंच, सागर में पौने 2 इंच, रीवा-सतना में 1 इंच, मंडला में पौन इंच, भोपाल, उज्जैन, शाजापुर, रायसेन, रतलाम, छिंदवाड़ा-नरसिंहपुर में आधा इंच हुई। वहीं, अन्य जिलों में हल्की बारिश हुई। जबकि सीधी, उमरिया, जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, शिवपुरी, शहडोल, इंदौर, मैहर, शाजापुर, धार, श्योपुर, रायसेन, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, उज्जैन, देवास, सीहोर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, मऊगंज, रीवा, सतना, मंडला, रतलाम, दमोह, छतरपुर, सिवनी, बालाघाट, बैतूल, गुना, खरगोन में तेज बारिश हुई।
24 घंटे में कटनी में 9 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे के दौरान 50 जिलों में बारिश दर्ज की गई। कटनी के रीठी में 24 घंटे के अंदर 230.5 मिमी यानी, 9 इंच से ज्यादा बारिश हो गई। श्योपुर जिले में सबसे ज्यादा 7 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं, प्रदेश के 250 से ज्यादा शहर या कस्बों में बारिश का दौर चला। कुल 26 शहर या कस्बे ऐसे रहे, जहां 4 से 8 इंच तक पानी गिरा। मंडला, पन्ना, जबलपुर, छतरपुर, उमरिया, डिंडौरी, श्योपुर और ग्वालियर में बहुत भारी बारिश, कटनी में अत्यधिक भारी बारिश और दमोह, सागर, निवाड़ी, शहडोल, टीकमगढ़, अनूपपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, शिवपुरी, अशोकनगर और रायसेन जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई।
तीन दिन एमपी में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि एक मानसून ट्रफ बीकानेर, जयपुर से मप्र के दतिया, सीधी से होती हुई आसनसोल, कोलकाता होते हुए जा रही है। वहीं, एक भी प्रदेश से गुजर रही है। इसके अलावा प्रदेश में ही एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम एक्टिव है। इन तीनों सिस्टम की वजह से अति भारी या भारी बारिश का दौर चल रहा है। अगले तीन दिन 8 जुलाई तक प्रदेश के आधे हिस्से में भारी बारिश का अलर्ट है। पूर्वी हिस्से में सिस्टम का असर ज्यादा रहेगा।
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इतने बेरहम हो गए अधिकारी, संवेदना नहीं बची": शिवराज का तीखा बयान
5 Jul, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विदिशा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को भारी बारिश के बीच अपने संसदीय क्षेत्र के खिवनी खुर्द गांव पहुंचे। कीचड़ भरे रास्तों पर पैदल चलते हुए उन्होंने बाढ़ और बारिश से प्रभावित आदिवासी परिवारों के घरों का निरीक्षण किया और नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों को भी आड़ेहाथ लिया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ितों से सीधे संवाद कर उनका हालचाल जाना और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं सांसद या मंत्री के रूप में नहीं, आपके सेवक के रूप में आया हूं, ताकि आपका दर्द बांट सकूं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों के साथ है और गरीब कल्याण ही उसका उद्देश्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी पीड़ित आदिवासी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
अफसरों पर गिरेगी गाज
शिवराज सिंह चौहान ने कुछ अधिकारियों पर अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे अधिकारी जिन्होंने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें दंडित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से इस विषय पर चर्चा हुई है और मुख्यमंत्री आदिवासियों के नुकसान को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं। जल्द ही सर्वे कराकर प्रभावितों को भरपाई दी जाएगी। तत्काल सहायता के लिए स्वेच्छानुदान से मदद की जाएगी।
निगमकर्मियों पर आरोप: तिरंगे की जलाने की घटना में कार्रवाई की मांग
5 Jul, 2025 08:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। राजधानी भोपाल के वार्ड नंबर 50 के 12 नंबर बस स्टॉप में निगम वार्ड ऑफिस के पास राष्ट्रीय ध्वज जलाने का मामला सामने आया है। इसका वीडियो वायरल होने के बाद विरोध शुरू हो गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से संबंधित पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। और इस पूरे मामले में शाहपुरा थाने में एफआरआई की मांग की गई है।
राष्ट्रध्वज जलाना राष्ट्र द्रोह की श्रेणी
राष्ट्रध्वज को जलाने के मामले में कांग्रेस ने वार्ड ऑफिस पहुंचकर विरोध किया। उन्होंने निगम ऑफिस में पहुंचकर हंगामा किया। वहीं, पुलिस से भी शिकायत की। कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष निक्की चौबे ने बताया कि वार्ड-50 के निगम ऑफिस के बाहर झंडे जलाए जा रहे थे। इस पर एक युवक ने ऐसा करने से रोका। इस मामले में शाहपुरा थाने में आवेदन दिया है। राष्ट्रध्वज जलाना राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में आता है।
दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग
कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होने बताया कि वार्ड कार्यालय के बाहर निगमकर्मी ही प्लास्टिक के करीब 50 ध्वज जला रहे थे। जिन्हें पकड़ लिया। पिछले चार दिन से वे ऐसा कर रहे हैं। थाने में भी शिकायत की है। ताकि, दोषियों पर कार्रवाई हो सके। हालांकि अफसरों ने निगमकर्मी के होने की बात से इनकार किया है। इस मामले में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की। कांग्रेस नेता अमित शर्मा ने भी आपत्ति जताई है। इस मामले में उन्होंने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट भी डाली है।
रेल मंत्रालय की बड़ी कार्रवाई: m‑आधार ऐप से पहचान होगी पुख्ता, फर्जी पहचान पर रोक
5 Jul, 2025 06:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। ट्रेनों में अक्सर देखा जाता है कि दूसरे के टिकट पर लोग यात्रा कर लेते हैं। लेकिन अब ट्रेन यात्रा के दौरान यात्री को अपनी पहचान साबित करने के लिए मोबाइल ऐप एम-आधार का सहारा लेना होगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी जोन को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। एमआधार ऐप के जरिए अब ट्रेनों में सफर के दौरान यात्रियों की पहचान तकनीकी रूप से सत्यापित की जाएगी।अब रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार "एम आधार एप" (mAadhaar एप्लीकेशन) का उपयोग कर यात्रा के दौरान यात्रियों की पहचान की जाएगी। किसी अन्य यात्री के टिकट पर या जाली आधार कार्ड का उपयोग कर अनाधिकृत रूप से ट्रेनों में यात्रा करने जैसे मामलों की रोकथाम हेतु आवश्यक है कि पहचान पत्रों की जांच की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाए। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा विकसित mAadhaar एप्लीकेशन इस दिशा में एक प्रभावी उपकरण है। उक्त एप्लीकेशन QR कोड आधारित पहचान सत्यापन की सुविधा प्रदान करता है, जिससे आधार कार्ड की वास्तविकता को त्वरित एवं विश्वसनीय रूप से सत्यापित किया जा सकता है। mAadhaar एप्लीकेशन को शीघ्र ही HHT डिवाइस पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। जिससे आरक्षित टिकटो एवं पहचान पत्रों के दुरुपयोग को रोकने तथा यात्रियों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित की जा सके।
दूसरों के नाम पर टिकट लेकर यात्रा करते हैं लोग
मिली जानकारी के अनुसार रेलवे को लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि कुछ लोग दूसरों के नाम पर टिकट लेकर यात्रा करते हैं या फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर ट्रेन में चढ़ जाते हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए रेलवे अब एमआधार ऐप का इस्तेमाल करेगा, जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने विकसित किया है।
जाने कैसे काम करेगे एम आधार एप
रेवले द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस ऐप में क्यूआर कोड स्कैन कर पहचान सत्यापन की सुविधा है। टीटीई इस ऐप के माध्यम से यात्री का आधार कार्ड स्कैन कर उसकी वास्तविकता को तुरंत जांच सकेंगे। इससे फर्जी आधार कार्ड की पहचान आसान हो जाएगी और टिकटों की कालाबाजारी पर भी नियंत्रण संभव होगा। रेलवे बोर्ड ने कहा है कि ऐप को जल्द ही HHT (हैंड हेल्ड टर्मिनल) डिवाइस से जोड़ा जाएगा, जिससे टीटीई को यह सुविधा सीधे उनके उपकरण में उपलब्ध होगी। इससे आरक्षित टिकटों का गलत इस्तेमाल रुकेगा और यात्रा के दौरान यात्रियों की असली पहचान सुनिश्चित हो सकेगी।
यात्री सुरक्षा और ट्रेनों में अनधिकृत यात्रा को रोकने का प्रयास
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम यात्री सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रेनों में अनधिकृत यात्रा को रोकने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। साथ ही डिजिटल इंडिया की दिशा में भी यह प्रयास मील का पत्थर साबित हो सकता है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता के अमर प्रहरी : हेमन्त खण्डेलवाल
5 Jul, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल
हेमन्त खण्डेलवाल लेखक भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के अध्यक्ष व बैतूल विधायक
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने विचारों, संघर्षों और बलिदानों से समय की धारा को मोड़ने का संकल्प रखते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही युगपुरुष थे, जिनकी राष्ट्रभक्ति, दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प ने भारत की एकता-अखंडता को सुदृढ़ किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही एक युगद्रष्टा थे, जिनका जीवन भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए समर्पित था। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि शिक्षाविद, समाज सुधारक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल प्रवक्ता थे। 6 जुलाई को उनका जन्मदिवस केवल एक स्मरण तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। देश की स्वतंत्रता के पश्चात जम्मू-कश्मीर को लेकर जो परिस्थितियाँ निर्मित हुईं, वे राष्ट्र की एकता के लिए चुनौती बन गईं थी। अनुच्छेद 370 और 35ए जैसे प्रावधानों ने जम्मू-कश्मीर को भारत से पृथक करने का प्रयास किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस वैचारिक विभाजन का डटकर विरोध किया। उनका स्पष्ट मत था कि "एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चल सकते।" यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि उनका जीवन दर्शन था। उन्होंने कहा था कि जब कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, तो वहाँ भी भारत के समान संविधान और शासन होना चाहिए। अपने इस सिद्धांत को सत्य सिद्ध करने के लिए उन्होंने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया, वर्षों बाद उनका सपना साकार हुआ जब 2019 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त किया गया। यह कदम केवल एक संवैधानिक सुधार नहीं था, बल्कि यह भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने का ऐतिहासिक संकल्प था। इस निर्णय के पीछे डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवाद की विचारधारा स्पष्ट रूप से झलकती है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय राजनीति में एक स्पष्ट और सशक्त राष्ट्रीय विचारधारा प्रस्तुत की। जब पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में वैचारिक प्रतिबद्धताएँ राष्ट्रहित से टकराने लगीं, तब उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। यह केवल पद का त्याग नहीं था, बल्कि राष्ट्रहित के लिए एक साहसिक और कर्त्तव्य निष्ठ कदम था। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो भविष्य में भारतीय जनता पार्टी के रूप में विकसित होकर देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनी। डॉ. मुखर्जी का सबसे बड़ा संघर्ष जम्मू-कश्मीर की 'परमिट प्रणाली' के खिलाफ था। यह व्यवस्था कश्मीर में भारतीय नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही को सीमित करती थी, जिससे भारत के अंदरूनी हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ना मुश्किल हो रहा था। 1953 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने का साहस दिखाया, जिसके पश्चात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। श्रीनगर की जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु 23 जून 1953 को हुई। अत्यंत पीड़ादायक है कि न उन्हें समुचित चिकित्सा व्य्वस्था प्रदान की गई और न ही उनकी मौत की निष्पक्ष जांच की गई। उनकी माता श्रीमती योगमाया देवी ने इसे ‘मेडिकल मर्डर’ करार दिया, पर सत्ता तंत्र मौन रहा। डॉ. मुखर्जी का यह बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके निधन के कुछ सप्ताहों के भीतर ही कश्मीर की परमिट प्रणाली समाप्त कर दी गई और धीरे-धीरे वह व्यवस्था बदली, जिसने देश के भीतर अलगाव और तनाव पैदा किया था। हालांकि कांग्रेस सरकारों ने दशकों तक उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया, परन्तु उनकी विचारधारा आज भी भारतीय राष्ट्रवाद का आधार है। 2004 के बाद जब देश में कांग्रेस की सत्ता रही, तब जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता देने की बातें पुनः उठी। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 2010 में जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता की बात कहकर भारत की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ किया। कांग्रेस ने पीडीपी की कठपुतली बनकर आतंकवादियों के प्रति नरमी बरती, जिससे कश्मीर में दशकों तक हिंसा और विस्थापन हुआ। हजारों नागरिक शरणार्थी बने और उनकी जिंदगी कठिन हुई। इस दौरान अलगाववादी शक्तियों को बढ़ावा मिला और भारत विरोधी गतिविधियां फलने-फूलने लगीं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद और अलगाववाद को दफन कर देश की एकता को मजबूत किया। डॉ. मुखर्जी के संघर्ष और बलिदान के कारण ही जम्मू-कश्मीर आज भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय जनसंघ से भाजपा तक की राजनीति का मूल राष्ट्रवाद रहा है, जिसने देश की अखंडता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा। शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. मुखर्जी ने अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा को भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि देश की युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आधुनिक ज्ञान प्राप्त कर सके। आज नई शिक्षा नीति में भी उनके विचारों की परछाई मिलती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाएं प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, तीन तलाक विरोधी कानून, डॉ. मुखर्जी के सामाजिक दृष्टिकोण और राष्ट्रहित के विचारों का प्रतिफल हैं। ये योजनाएं देश के गरीब और पिछड़े तबकों को सशक्त बनाने का प्रयास करती हैं, जैसा कि डॉ. मुखर्जी ने सदैव समर्थन किया। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी भारत के महान राष्ट्रवादी नेता थे, जिनका जीवन देशभक्ति और समर्पण की मिसाल है। वे पद, प्रतिष्ठा या स्वार्थ से ऊपर उठकर केवल देश की सेवा में लगे रहे। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा राष्ट्रवाद केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि सिद्धांतों और न्याय के लिए निरंतर संघर्ष है। आज जब भारत 2047 में स्वावलंबी और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है, तब उनकी शिक्षाएं और भी प्रासंगिक हो जाती हैं। डॉ. मुखर्जी का आदर्श और बलिदान हमारे लिए एक अमर प्रेरणा हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को एकजुट, मजबूत और आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
एम्स विशेषज्ञों द्वारा सावधानीपूर्वक दर्द प्रबंधन पर प्रशिक्षण: टेब माफ़ीन जैसी रणनीतियाँ अपनाई गईं
5 Jul, 2025 05:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। राजधानी स्थित एम्स में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक अच्छी पहल की गई है। यहां पेलिएटिव केयर यूनिट शुरू की गई है। यह यूनिट रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में आने वाले उन मरीजों के लिए तैयार की गई है, जो कैंसर या इस तरह के अन्य जीवन घातक रोग से ग्रसित हैं। यहां उन्हें इलाज के साथ मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक सहारा भी दिया जाएगा।
10 बेड से यूनिट की हुई शुरुआत
इस यूनिट की शुरुआत फिलहाल 10 बेड के साथ की गई है। एम्स के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने कहा कि पेलिएटिव केयर यूनिट केवल एक चिकित्सा सुविधा नहीं, बल्कि गरिमा, संवेदना और समग्र देखभाल का प्रतीक है। यह वार्ड कैंसर मरीजों और उनके परिजनों की पीड़ा को कम करने की कोशिश करेगा।
जाने क्यों तैयार हुई है यूनिट
कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझते मरीज शारीरिक नहीं, मानसिक और भावनात्मक रूप से भी टूट जाते हैं। ऐसे में पेलिएटिव केयर उन्हें एक ऐसा सहारा देती है, जो इलाज के पार भी साथ रहता है। इसमें सम्मान, समझदारी और सहजता के साथ मरीजों को डील करने पर फोकस होता है। जिससे गंभीर बीमारी के अंतिम चरण में भी मरीजों को गरिमापूर्ण और स्नेहभरा वातावरण मिल सके। यह चिकित्सा से आगे एक मानवीय पहल मानी जाती है।
डॉक्टर, नर्स, काउंसलर और सामाजिक कार्यकर्ता रहेंगे मौजूद
इस यूनिट की खास बात है टीम आधारित देखभाल प्रणाली। जिसमें डॉक्टर, नर्स, काउंसलर और सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर मरीज की सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं। यह टीम विशेष रूप से इस यूनिट के लिए तैनात की गई है। यहां केवल रोग का इलाज नहीं, बल्कि मरीज और परिवार के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से काम किया जाएगा।
क्या मिलेगी सुविधा
1- मानसिक और सामाजिक काउंसलिंग
2- परिवार से मिलने और समय बिताने की अलग व्यवस्था
3- मरीज की मौत पर परिजनों को परामर्श और सहयोग
4- मरीजों के लिए करुणामयी और गरिमामय वातावरण
CM मोहन यादव बोले–OBC आरक्षण पर सरकार का रुख स्पष्ट है, हम 27% आरक्षण के पक्ष में डटे हैं
5 Jul, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आंकड़ों के अनुसार कानून का मसौदा तैयार किया जाए, जिसे विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। 14 प्रतिशत बचे लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिले। प्रमोशन में सबको लाभ दिया गया। भाजपा सरकार आरक्षण भी ठोस काम कर रही हैं। भाजपा की सरकार ने तो सामान्य को भी 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सिर्फ भ्रम फैलाने का काम करती है। हमने जातिगत जनगणना की पहल की, लेकिन कांग्रेस अब उसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। सच ये है कि कांग्रेस ने कभी ओबीसी को न मुख्यमंत्री बनाया, न उन्हें आरक्षण देना चाहा। जनता अब सब जान चुकी है।
यहां कांग्रेस की दाल नहीं गलने वाली
राहुल गांधी के भोपाल दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी यहां आकर क्या करेंगे? उनकी और कांग्रेस की दाल अब मध्यप्रदेश में नहीं गलने वाली है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब आंबेडकर ने जीवन भर संघर्ष किया, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें कभी सम्मान नहीं दिया। हमारी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर चल रही है।
मध्यप्रदेश को बताया शांति का टापू
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस जितनी भी कोशिश कर ले, मध्यप्रदेश की शांति को भंग नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है और हमारी सरकार इस अमन-चैन को बनाए रखने के लिए पूरी तरह सजग है। सीएम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही सहकारिता के क्षेत्र को गंभीरता से ले रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सहकारिता विभाग का गठन किया गया है और मध्यप्रदेश में भी सरकार इस दिशा में प्रतिबद्धता से काम कर रही है।
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