मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री मोहन यादव के ससुर का निधन, सीएम पत्नी समेत विदेश दौरे पर
16 Jul, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रीवा : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के ससुर ब्रह्मादीन यादव का 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया है.ब्रह्मादीन यादव लंबे समय से उम्र संबंधित बीमारियों की वजह से बीमार चल रहे थे. उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में स्थित सुल्तानापुर में उनका उपचार चल रहा था.
चेकअप के बाद अस्पताल से लाया गया था घर
ताजा जानकारी के अनुसार मोहन यादव के ससुर ब्रह्मादीन यादव को हेल्थ चेकअप के बाद मंगलवार की शाम अम्बेडकर नगर स्थित उनके घर त्रिक निवास पर लगाया गया था लेकिन देर शाम उनका निधन हो गया.बुधवार की सुबह उत्तर प्रदेश से उनका पार्थिव शरीर मध्य प्रदेश के रीवा जिले में अंतिम संस्कार के लिए लाया जाएगा.
दोपहर तक होगा अंतिम संस्कार, मोहन यादव के आने पर संशय
मुख्यमंत्री मोहन यादव को उनके ससुर के निधन की सूचना फोन पर दी गई है. हालांकि, वे इस समय पत्नी के साथ विदेश दौरे पर हैं.सीएम अंतिम संस्कार में पहुंच सकेंगे या नहीं इसे लेकर संशय है, वहीं निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन यादव की रीवा स्थित ससुराल में लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई है. यहां भाजपा नेताओं के साथ-साथ आम जन भी शोक संवेदनाए व्यक्त करने के लिए रीवा स्थित निवास में पहुंच रहे हैं.
मुख्यमंत्री मोहन यादव के साले सदानंद ने जानकारी दी कि सीएम मोहन यादव और उनकी पत्नी के रीवा समय पर पहुंच पाने की संभावना बेहद कम. वहीं, रीवा के भाजपा जिला अध्यक्ष बीरेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के ससुर के निधन की पुष्टि की है.
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए
15 Jul, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने मंत्रालय में, उच्च शिक्षा विभाग के विभिन्न विभागीय विषयों एवं गतिविधियों की समीक्षा की।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में लंबित विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के निलंबन से संबंधित गंभीर एवं अनावश्यक रूप से लंबित विभागीय प्रकरणों को, सामान्य प्रशासन के नियमानुरूप समय पर निराकृत करने के निर्देश भी दिए। श्री परमार ने जनभागीदारी समिति के नियमों का पुनर्वलोकन कर, वर्तमान परिदृश्य अनुरूप समसामयिक बनाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा।
मंत्री श्री परमार ने सार्थक ऐप पर अनुचित रूप से फर्जी उपस्थिति दर्ज करने वाले प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और अतिथि विद्वानों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। श्री परमार ने क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करने को कहा। श्री परमार ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने की दृष्टि से, महाविद्यालयों में एकल संकाय को बहुसंकाय में उन्नयन करने की कार्यवाही को यथाशीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग में ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम संपन्न
15 Jul, 2025 08:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल, मंगलवार, 15 जुलाई, 2025 मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग में प्रतिवर्ष संचालित होने वाले शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन सत्रों में विधि संकाय के विद्यार्थियों के लिये एक माह का इंटर्नशिप कार्यक्रम कराया जाता है। इसी तारतम्य में ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम 16th जून से 15th जुलाई, 2025 तक की अवधि में देश के प्रतिष्ठित विधि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत विधि संकाय के विद्यार्थियों को मानव अधिकार एवं आयोग की कार्यप्रणाली सहित विभिन्न विषयों पर विभिन्न रिसोर्स पर्सन द्वारा प्रशिक्षण दिलाया गया। इस अवधि में मुख्य रूप से Maharashtra National Law University, Nagpur (M.H.), Career College Of Law, Bhopal, Renaissance Law College, Indore, LNCT University, Bhopal, Mumbai University, (KC College, Mumbai), Iswar Saran Degree College, University Of Allahabad, Prayagraj, U.P., Institute Of Law R.N.T.U, Bhopal, PIMR DAVV Indore, Barkatullah University, Department Of Legal Studies & Research Bhopal. ITM University, Gwalior, Govt. P.G. State Law College, Bhopal, Bhabha University, Bhopal के विद्यार्थीगण ने भाग लिया है। प्रशिक्षण के दौरान आयोग के माननीय अध्यक्ष(कार्यवाहक) श्री राजीव कुमार टण्डन ने 17 जून, 2025 को प्रशिक्षण का विधिवत शुभारंभ किया तथा अपने उद्बोधन में उपस्थित विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुये उन्हें पूर्ण लगन से प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए निर्देशित किया। प्रशिक्षण के प्रथम सप्ताह के दौरान श्री राजेश गुरु, उप पुलिस अधीक्षक द्वारा आयोग की गतिविधियों के बारे में अवगत कराया। श्री संजय कुमार विश्वकर्मा, शोध अधिकारी द्वारा आयोग कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का भ्रमण व अध्ययन कराया गया। श्री डी.एस. परमार(उच्च न्यायिक सेवा) उप सचिव, द्वारा “Concept Of Human Rights” के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया गया। श्री सरबजीत सिंह, पूर्व सदस्य म.प्र. मानव अधिकार आयोग द्वारा “Overview On Human Rights” के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। श्री दिनेश कुमार नायक(सेवानिवृत्त न्यायाधीश) द्वारा “Human Rights & Social Justice” विषय पर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। श्री आशीष सिंह, सहायक निदेशक, महिला एवं बाल विकास भोपाल द्वारा “Juvenile Homes & Human Rights” के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. अपूर्वा अग्रवाल, सहायक प्रोफेसर, जागरण लेक सिटी विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा “Report Writing & Skills” के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के द्वितीय सप्ताह के दौरान डॉ. हुमायूं राशिद खान, प्रोफेसर, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा “Arrest Detention & The Law in Arnesh Kumar Judgement” के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। कु. नीतिका जैन, रिसर्च फेलो, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा “Cybercrime & Human Rights Perspective” विषय पर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। पाईकर नासिर, फैकल्टी ऑफ लॉ, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा “AI & Legal Education” विषय के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. वीना सिंह (पूर्व संयुक्त निदेशक) स्वास्थ्य विभाग, भोपाल द्वारा “Health & Human Rights” के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। श्री अशोक अवस्थी, (से.नि. स्पेशल डी.जी. भोपाल) द्वारा “Police & Human Rights” विषय पर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. विजय कुमार सिंह द्वारा “IPR & Human Rights” के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया गया। श्री राजीव कुमार टण्डन, माननीय अध्यक्ष(कार्यवाहक) द्वारा State Human Rights Commission- An Overview Leading Case Law & Human Rights के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के तृतीय सप्ताह में श्री अन्वेष मंगलम, (से.नि. स्पेशल डी.जी. म.प्र.) द्वारा “New Laws On Criminal Justice- Major Changes & Protection Of Human Rights” विषय पर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। श्री ओम प्रकाश सोनी एवं श्री संतोष पांडे द्वारा “Discussion On The Recommendations Of MPHRC, Bhopal”, के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया गया। श्री मनोहर ममतानी, पूर्व अध्यक्ष(कार्यवाहक) मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग भोपाल द्वारा Overview On the Functioning Of The Commission के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया गया। श्री अमित प्रताप सिंह (सहा.प्रोफेसर) द्वारा Right To Safe & Affordable Food As Human Right विषय पर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। श्री अशोक गोयल, पुलिस महानिरीक्षक द्वारा पुलिस और मानव अधिकार के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया। श्री शैफाली तिवारी, जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल, बड़वानी, द्वारा Human Rights. Of Prisoners के संदर्भ में पीपीटी के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। श्री प्रणय एस. नागवंशी, ए.आई.जी., स्टेट सायबर सेल, भोपाल द्वारा Cyber Crime & Human Rights विषय पर पीपीटी के माध्यम से प्रेजेंटेशन दिया गया। डॉ. आसमा रिजवान, प्रोफेसर, पीपुल्स यूनिवर्सिटी भोपाल द्वारा Role Of Media In Upholding The Human Rights In India के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के चतुर्थ सप्ताह में प्रियांन सिंह बैस, अधिवक्ता द्वारा Discussion On Career In Law Field के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया गया। पाईकर नासिर, फैकल्टी, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा Overview On Human Trafficking के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। श्री सोनम जैन, सहा. प्रोफेसर, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा Gender Perspective In Access To Fair & Impartial Trial के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. अमित मल्होत्रा, प्रोफेसर, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा Contours Of Prisoners Rights के संदर्भ में पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। श्री गुरूचरण सिंह, साइबर फैकल्टी, CDTI चंडीगढ़ द्वारा Cyber Crime & Human Rights विषय पर एक Online Session द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही श्री राजेश गुरु, उप पुलिस अधीक्षक म.प्र. मानव अधिकार आयोग (प्रशिक्षण सत्र समन्वयक) के तौर पर एवं श्री संजय कुमार विश्वकर्मा, शोध अधिकारी द्वारा विद्यार्थियों को गोविंदपुरा पुलिस थाना भोपाल, बाल सुधार गृह भोपाल, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल की फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल एससीआरबी/सीसीटीएनएस/डायल-100/एमपी एफएसएल/डीएनए लैब एवं केंद्रीय जेल, भोपाल का भ्रमण व अध्ययन कराते हुये उन्हें विभिन्न शाखाओं की कार्यप्रणाली से अवगत कराया तथा आयोग में प्राप्त शिकायतों पर होने वाली कार्यवाही का भी अध्ययन कराया गया। सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कुल 36 विद्यार्थियों को आयोग की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये। प्रशिक्षण के अंतिम दिवस पर श्री ऋषि कुमार शुक्ला, पूर्व निदेशक, सी.बी.आई. भोपाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुये। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की कामना करते हुये उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु बधाई दी गई। साथ ही आयोग के अध्यक्ष (कार्यवाहक) श्री राजीव कुमार टण्डन द्वारा सभी विद्यार्थीयों को उज्जवल भविष्य की कामना करते हुये उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु बधाई दी गई। समस्त विद्यार्थीगण द्वारा उनके एक माह के इस प्रशिक्षण के दौरान दिये गये उन्मुखीकरण के लिये आयोग के अध्यक्ष(कार्यवाह) महोदय, प्रमुख सचिव महोदय, पुलिस महानिरीक्षक, उप सचिव, पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक एवं शोध अधिकारी सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों एवं आयोग के समस्त कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। समापन सत्र का संचालन करते हुये श्री राजेश गुरु, उप पुलिस अधीक्षक, द्वारा सत्र का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में एक प्रशिक्षणार्थी Khushi Tiwari B.A. LL.B (Honours) 5th Year, 10th Semester, Barkatullah University, Department Of Legal Studies & Research Bhopal (M.P.) द्वारा आभार-प्रदर्शन किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से अवगत कराया और प्रशिक्षण सत्र समन्वय उप पुलिस अधीक्षक श्री राजेश गुरु, शोध अधिकारी श्री संजय कुमार विश्वकर्मा आयोग के सहायक ग्रंथपाल श्री विक्रम पटेल, एवं जनसम्पर्क शाखा के श्री रोहित मेश्राम को पूरे एक माह के प्रशिक्षण सत्र के दौरान सभी इंटर्नस को अपेक्षित सहयोग प्रदान किये जाने के लिये आभार व्यक्त किया।
नशा केवल स्वास्थ्य नहीं सामाजिक ताने-बाने को भी करता है छिन्न-भिन्न : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
15 Jul, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नशा एक सामाजिक बुराई है। जो युवाओं, परिवार और समाज की जड़ों को खोखला बना रही है। नशे की जद में आकर कई परिवार उजड़ जाते हैं। नशा नाश की जड़ है, जो न केवल स्वास्थ्य को खत्म करता है बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में मंगलवार से 30 जुलाई तक प्रारंभ हुए नशामुक्ति अभियान - "नशे से दूरी है जरूरी" के शुभारंभ अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से यह विचार व्यक्त किए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अत्यंत दु:खद है कि युवाओं के बीच नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। युवा देश का भविष्य हैं, उन्हें इस दलदल से बचाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह संकल्पित है। "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान चलाने का उद्देश्य न केवल नशे को रोकना है बल्कि समाज में नई चेतना जागृत करना भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से म.प्र. पुलिस द्वारा संचालित नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने का आहवान किया है।
डीजीपी ने किया अभियान का शुभारंभ
पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में मंगलवार को वृहद नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ का शुभारंभ किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वीडियो संदेश तथा अभियान के पोस्टर का विमोचन भी किया। विशेष पुलिस महानिदेशक सी.आई.डी. श्री पवन श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स श्री के.पी. वेंकटेश्वर, पुलिस महानिरीक्षक ए.एन.ओ. डॉ. आशीष, पी.एस.ओ.टू. डीजीपी श्री विनीत कपूर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री संजीव कुमार कंचन एवं एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन उपस्थित थे।
डीजीपी श्री मकवाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से समाज में नशे की प्रवृत्ति की प्रभावी रोकथाम के लिए यह जनजागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन युवाओं को खोखला कर उनके परिवारों को भी बर्बाद कर रहा है। देश एवं प्रदेश के शीर्षस्थ राजनैतिक नेतृत्व भी इस विकराल समस्या से चितिंत एवं इसके निदान के लिये प्रयासरत है। समाज की ये नैतिक जिम्मेदारी है कि नशे के दुष्प्रभावों से विशेषकर किशोर बच्चों और युवाओं को अवगत कराएँ और नशे से दूर रखें। उन्होंने कहा कि ‘’हमारा है यही संदेश- नशा मुक्त हो मध्यप्रदेश’’।
अभियान में उच्च शिक्षा, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, खेल एवं युवा कल्याण, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास और स्कूल शिक्षा विभागों सहित एनजीओ और धार्मिक संस्थान की सक्रिय सहभागिता रहेगी।
हर दिन होंगी जागरूकता की गतिविधियां
अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में प्रतिदिन विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी जिनमें स्थानीय रेडियो और एफएम चैनलों के माध्यम से प्रसारण, सार्वजनिक स्थलों पर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स का प्रदर्शन और पंपलेट का वितरण शामिल है। प्रिंट मीडिया, बस अड्डों और प्रमुख चौराहों पर डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से वीडियो प्रचार किया जाएगा। सफाई वाहनों पर लगे पीए सिस्टम से नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हैशटैग #नशे_से_दूरी_है_जरूरी, #Say No To Drugs, #NashamuktMP के माध्यम से व्यापक संदेश भी प्रसारित किए जाएंगे।
अभियान के दौरान प्रत्येक आयोजन स्थल पर नशामुक्ति से संबंधित ‘सेल्फी पॉइंट’ बनाए जाएंगे जिससे आमजन की भागीदारी को और प्रोत्साहन मिल सके। नारकोटिक्स से संबंधित शिकायतों और परामर्श के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 एवं 14446 और वेबसाइट https://ncbmanas.gov.in का व्यापक प्रचार किया जाएगा। अभियान में प्रचार सामग्री जैसे कैप्स, रिस्ट बैंड्स, बैजेस, पोस्टर और बैनर भी वितरित किए जाएंगे।
प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों के छात्रावासों में ‘छात्रावास नशामुक्ति समितियों’ का गठन किया जाएगा। अभियान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था, अखिल भारतीय गायत्री परिवार, आर्ट ऑफ लिविंग, हार्टफुलनेस जैसे सामाजिक व धार्मिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है। सामाजिक न्याय एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्रशिक्षित "मास्टर वॉलंटियर्स" नागरिकों व छात्रों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करेंगे। "कला पथक दल" द्वारा नुक्कड़ नाटक, गीत, संगीत के माध्यम से भी जनजागरूकता फैलाई जाएगी।
अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं जैसे Alcoholics Anonymous और Narcotics Anonymous भी इस अभियान में अपना योगदान देंगी। शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "युवा संगम" के अंतर्गत "प्रहरी क्लब"/ "ओजस क्लब" और "उमंग मॉड्यूल" के माध्यम से छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित "Manhit App" के माध्यम से नशा पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मेडिकल और टेक्नीकल कॉलेजों सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सहयोग से पोस्टर, शॉर्ट मूवी और जागरूकता संदेश साझा किए जाएंगे।
मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार ब्रॉड गेज नेटवर्क से जुड़ी, ऐतिहासिक दिन दर्ज
15 Jul, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : वर्ष 2025 मिजोरम के इतिहास में एक मील का पत्थर बनकर दर्ज हुआ है। पहली बार इस पर्वतीय राज्य की राजधानी आइजोल को देश के ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि बइरबी–सायरंग ब्रॉड गेज रेल परियोजना के पूरा होने से संभव हो सकी है। यह न केवल मिजोरम, बल्कि समग्र पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और सामाजिक समरसता के लिए भी एक क्रांतिकारी कदम है।
मिजोरम भारत का एक दूरस्थ, पहाड़ी और सीमावर्ती राज्य है, जिसकी सीमाएं उत्तर में असम और मणिपुर, पश्चिम में त्रिपुरा और बांग्लादेश तथा पूर्व व दक्षिण में म्यांमार से मिलती हैं। समुद्र से कटा होने और ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक संरचना के कारण यह राज्य अब तक सड़क मार्ग पर ही निर्भर था। सीमित सड़क कनेक्टिविटी और अविकसित बुनियादी ढांचे के कारण यह क्षेत्र देश की मुख्यधारा से कटा-कटा महसूस करता था।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 29 नवंबर 2014 को बइरबी–सायरंग रेल परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसके बाद भूमि अधिग्रहण कार्य 2014–15 में पूर्ण किया गया और 2015–16 से निर्माण कार्य आरंभ हुआ। अनेक चुनौतियों को पार करते हुए यह परियोजना 2025 में पूरी हुई और जून 2025 में रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) ने इसके संचालन की अनुमति प्रदान की।
परियोजना के अंतर्गत 51.38 किमी लंबी ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का निर्माण किया गया है, जिस पर 100 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रेनों का परिचालन संभव है। इस रेल खंड पर बइरबी से सायरंग के बीच हॉर्तोकी, कवनपुई और मुआलखांग स्टेशन स्थित हैं। परियोजना में कुल 48 सुरंगें बनाई गई हैं, जिनकी कुल लंबाई 12.85 किमी है। इसके अलावा, 55 बड़े पुल और 87 छोटे पुल, 5 रोड ओवरब्रिज तथा 9 रोड अंडरब्रिज भी बनाए गए हैं। इनमें से सबसे ऊंचा पुल 104 मीटर ऊंचा है, जो दिल्ली की कुतुबमीनार से भी ऊंचा है।
इस परियोजना की कुल लागत ₹7,714 करोड़ आंकी गई है और इसके निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे (NFR) को दी गई थी।
यह परियोजना मिजोरम के आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सड़क मार्ग की सीमाओं से जूझते इन लोगों को अब तेज, सुरक्षित और सस्ता परिवहन विकल्प मिलेगा। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं और उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान होगी, बल्कि राज्य के युवाओं को रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी मिलेंगे।
कृषि क्षेत्र में भी इसका प्रभाव दूरगामी होगा। स्थानीय किसान अब अपने कृषि उत्पादों को देश के विभिन्न बाजारों तक कम लागत और कम समय में पहुंचा सकेंगे, जिससे उनकी आमदनी में इज़ाफा होगा। इससे राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा।
पर्यटन की दृष्टि से भी यह रेलवे लाइन अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिजोरम की मनोहारी प्राकृतिक छटा, सुरंगें, घाटियाँ और पुल इस रेल यात्रा को यादगार अनुभव में बदल देंगे। इससे न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका सामरिक महत्व है। म्यांमार सीमा के करीब होने के कारण यह रेलवे लाइन भारत की सामरिक रणनीति को भी मजबूती देती है। यह भविष्य में दक्षिण-पूर्व एशिया तक रेलवे संपर्क के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है और भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को गति देने वाला एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है।
अब मिजोरम की राजधानी आइज़ोल भी भारतीय रेल मानचित्र पर दर्ज हो चुकी है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर की अन्य राज्य राजधानियाँ – गुवाहाटी (असम), इटानगर (अरुणाचल प्रदेश), अगरतला (त्रिपुरा), और शिलांग (मेघालय) (हालांकि शिलांग आंशिक रूप से) ब्रॉड गेज नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं।
इस परियोजना के दौरान मौसम, भूगोल और संसाधनों की जो चुनौतियाँ सामने आईं, उन्होंने भारतीय रेल की इंजीनियरिंग क्षमता, प्रबंधन दक्षता और दूरदृष्टि को प्रमाणित किया। क्षेत्र में वर्षभर केवल 4–5 महीने ही निर्माण कार्य संभव था, शेष समय वर्षा और भूस्खलन के कारण कार्य अवरुद्ध रहता था। संकरी और तीव्र ढाल वाली सड़कों पर निर्माण सामग्री को बड़े ट्रकों से उतार कर छोटे वाहनों से ढोया गया। साथ ही, श्रमिकों की कमी, नेटवर्क की समस्याएं और भौगोलिक अलगाव जैसी बाधाओं के बावजूद परियोजना समयबद्ध रूप से पूरी की गई।
बइरबी–सायरंग रेलवे परियोजना मिजोरम के विकास की नई रेल बन चुकी है – जो कनेक्टिविटी से कहीं आगे, एक सामाजिक, आर्थिक और सामरिक बदलाव का वाहक बन चुकी है।
भोपाल मंडल को मिला नया एडीआरएम: अभिराम खरे ने संभाला कार्यभार
15 Jul, 2025 06:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। आज दिनांक 15 जुलाई 2025 को पश्चिम मध्य रेलवे, भोपाल मंडल के नए अपर मंडल रेल प्रबंधक (ए.डी.आर.एम.) के रूप में श्री अभिराम खरे ने विधिवत रूप से कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने यह जिम्मेदारी निवर्तमान ए.डी.आर.एम. श्रीमती रश्मि दिवाकर से संभाली।
श्री अभिराम खरे भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) के 2006 बैच के अधिकारी हैं। कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व वे पश्चिम मध्य रेलवे मुख्यालय, जबलपुर में वित्त सलाहकार (यातायात एवं निर्माण) के पद पर कार्यरत थे। इससे पूर्व वे भोपाल में निर्माण विभाग में उप वित्त सलाहकार के रूप में तथा जबलपुर में वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
आपने अपने रेलवे कैरियर की शुरुआत जबलपुर मंडल में सहायक मंडल वित्त प्रबंधक (ADFM) के पद से की थी। कार्यकुशलता और गहन प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें वित्त, निर्माण तथा प्रबंधन से संबंधित कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर प्राप्त हुआ।
श्री अभिराम खरे ने डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से फार्मेसी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने राजनीति शास्त्र एवं अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर तथा कानून (LLB) में भी स्नातक डिग्री हासिल की है। उनके पास बहुविषयी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता का भी समृद्ध अनुभव है।
भोपाल मंडल में ए.डी.आर.एम. के रूप में उनकी नियुक्ति पर मंडल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन्हें बधाई दी और आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। मंडल को उनके नेतृत्व में नव ऊर्जा, नयी दृष्टि और सुव्यवस्थित प्रबंधन की अपेक्षा है।
लाड़ली बहनों की चांदी, रक्षाबंधन पर मिलेगा बोनस, नवंबर में बढ़ेंगे पैसे
15 Jul, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव बड़ी सौगात देने जा रहे हैं. दरअसल, अब तक हर महीने लाड़ली बहनों को मिलने वाले 1250 रुपये में राज्य सरकार 250 रुपये की बढ़ोत्तरी करने जा रही है. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव पहले ही कर चुके हैं. लाड़ली बहनों को अगस्त महीने में मिलने वाली 27वीं किश्त बढ़कर आएगी. यानि राखी के त्योहार पर मोहन सरकार लाड़ली बहनों को 250 रुपए बोनस देगी. इसके बाद नवंबर से राशि में बढ़ोत्तरी होकर 1500 रुपए हर महीने आएंगे.
3,810 करोड़ रुपये आएगा अतिरिक्त भार
बता दें कि अब तक राज्य सरकार हर महीने करीब 1.27 करोड़ महिलाओं के खातों में करीब 1550 करोड़ रुपये की राशि खर्च करती है, लेकिन यदि राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना की किश्त में 250 रुपए का इजाफा करती है, तो हर महीने करीब 310 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होंगे. यानि लाड़ली बहना योजना कि किश्त 1500 रुपये करने पर अब राज्य सरकार पर करीब 3,810 करोड़ रुपये का हर महीने अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा.
कुल बजट की 5 प्रतिशत राशि होगी खर्च
बता दें कि अब तक मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहनों को 1250 रुपये दे रही है. जिससे हर साल राज्य सरकार लाड़ली बहनों के खातों में 18,612 करोड़ रुपये का हस्तांतरण करती आ रही है, लेकिन इसमें हर महीने 250 रुपये का इजाफा होने से सरकार को हर साल 22,425 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह मध्य प्रदेश सरकार के कुल बजट की 5 प्रतिशत राशि है. बता दें कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए 4.21 लाख रुपये का बजट जारी किया है.
सीएम बोले 3 हजार रुपये का वादा करेंगे पूरा
बीते कुछ दिनों पहले बैतूल के पाथाखेड़ा में आयोजित स्व सहायता समूहों के सम्मेलन में सीएम डा. यादव घोषण कर चुके हैं कि आने वाले 5 सालों में महिलाओं को 3 हजार रुपये महीने की किश्त दी जाएगी. महिलाओं को संबोधित करते हुए सीएम मोहन ने कहा था कि "जब हमारी सरकार बनी थी, तब लाड़ली बहनों को 1-1 हजार रुपये की किश्त दी जाती थी. पिछले साल इसे बढ़ाकर 1250 रुपये कर दिया गया. नवंबर महीने से यह राशि हर महीने 1500 रुपये की जा रही है. सीएम ने यह भी कहा था कि आप और चिंता मत करना, धीरे-धीरे लाड़ली बहनों को 3 हजार रुपये हर महीने मिलेंगे."
रक्षाबंधन से पहले खाते में राशि के साथ आएगा बोनस
मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहना योजना की 27वीं किश्त रक्षाबंधन से पहले जारी करेगी. दरअसल, अप्रैल 2025 के पहले तक लाड़ली बहनों के खातों में हर महीने की 10 तारीख से पहले सम्मान निधि भेजी जाती थी, लेकिन अप्रैल महीने से अब हर महीने 10 तारीख के बाद लाड़ली बहनों के खातों में किश्त भेजी जा रही है. लेकिन अगस्त की 9 तारीख को रक्षाबंधन होने की वजह से प्रदेश सरकार लाड़ली बहना की 27वीं किश्त 9 अगस्त से पहले भेजेगी. जिसके साथ रक्षाबंधन को बोनस 250 रुपए भी दिए जाएंगे.
इन राज्यों में एमपी से अधिक मिल रहा पैसा
भले ही देश में लाड़ली बहना योजना की शुरुआत मध्य प्रदेश से की गई हो, लेकिन अब इसको 8 से अधिक राज्यों में शुरू किया गया है. जिन राज्यों में ये स्कीम शुरु हुई, वहां लाड़ली बहनों को मध्य प्रदेश से अधिक राशि मिल रही है. महाराष्ट्र में महिलाओं को 1500 रुपये हर महीने मिल रहे हैं, जबकि हरियाणा में 2100 रुपये मिल रहे हैं. इसी प्रकार कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में भी लाड़ली बहनों को मध्य प्रदेश से अधिक राशि मिल रही है.
MP में राज्यव्यापी योजना, सामाजिक न्याय और पुलिस विभाग की संयुक्त पहल : “नशे से दूरी है जरूरी”
15 Jul, 2025 02:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, नशे के दुष्प्रभावों से किशोर बच्चों और युवाओं को अवगत कराएं और नशे से दूर रखें - डीजीपी मकवाणा
भोपाल, 15 जुलाई 2025। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने आज मंगलवार 15 जुलाई 2025 को पुलिस मुख्यालय, भोपाल में आयोजित प्रेस कॉंफ्रेंस में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 जुलाई से 30 जुलाई तक चलाए जाने वाले वृहद नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश तथा अभियान के पोस्टर का विमोचन कर किया। डीजीपी मकवाणा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा से समाज में नशे की प्रवृत्ति की प्रभावी रोकथाम के यह जनजागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स- ये शब्द सुनते ही दिमाग में कई दृश्य उभरते हैं- दुर्बल शरीर, नशीली आंखे, धुऐं का गुबार और अंधकार। मादक पदार्थों के सेवन की लत कई युवाओं को खोखला कर उनके परिवारों को भी बर्बाद कर रही है। देश एवं प्रदेश के शीर्षस्थ राजनैतिक नेतृत्व भी इस विकराल समस्या से चितिंत एवं इसके निदान हेतु प्रयासरत है। हम सभी की ये नैतिक जिम्मेदारी है कि इसके दुष्प्रभावों से विशेषकर किशोर बच्चों और युवाओं को अवगत कराएँ और नशे से दूर रखें। उन्होंने कहा कि ‘’हमारा है यही संदेश- नशा मुक्त हो मध्यप्रदेश’’। इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक सी आई डी पवन श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स के.पी.वेंकटेश्वर, पुलिस महानिरीक्षक ए.एन. ओ. डॉ. आशीष, पी एस ओ टू डीजीपी विनीत कपूर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक संजीव कुमार कंचन एवं एसओ टू डीजीपी मलय जैन उपस्थित रहें।
इनकी रहेगी महत्वपूर्ण भूमिका
अभियान में उच्च शिक्षा विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग सहित अन्य विभाग, एनजीओ, धार्मिक संस्थान आदि की सक्रिय सहभागिता रहेगी।
जन-जागरूकता अभियान नशे से दूरी- है जरूरी में प्रतिदिन की जाने वाली कार्यवाही
अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में प्रतिदिन विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी जिनमें स्थानीय रेडियो और एफएम चैनलों के माध्यम से प्रसारण, सार्वजनिक स्थलों पर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स का प्रदर्शन और पंपलेट का वितरण शामिल है। साथ ही, प्रिंट मीडिया, बस अड्डों और प्रमुख चौराहों पर डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से वीडियो प्रचार किया जाएगा। सफाई वाहनों पर लगे पीए सिस्टम से नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हैशटैग #नशे_से_दूरी_है_जरूरी, #Say No To Drugs, #NashamuktMP आदि के माध्यम से व्यापक जन-संदेश भी प्रसारित किए जाएंगे। अभियान के दौरान प्रत्येक आयोजन स्थल पर नशामुक्ति से संबंधित "सेल्फी पॉइंट" बनाए जाएंगे ताकि आमजन की भागीदारी को और प्रोत्साहन मिल सके। नारकोटिक्स से संबंधित शिकायतों और परामर्श के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933, 14446 एवं वेबसाइट https://ncbmanas.gov.in का व्यापक प्रचार किया जाएगा। इसके साथ ही, प्रचार सामग्री जैसे कैप्स, रिस्ट बैंड्स, बैजेस, पोस्टर और बैनर भी वितरित किए जाएंगे।
प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों के छात्रावासों में "छात्रावास नशामुक्ति समितियों" का गठन किया जाएगा। अभियान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था, अखिल भारतीय गायत्री परिवार, आर्ट ऑफ लिविंग, हार्टफुलनेस जैसे सामाजिक व धार्मिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है। सामाजिक न्याय एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्रशिक्षित "मास्टर वॉलेंटियर्स" नागरिकों व छात्रों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही, "कला पथक दल" द्वारा नुक्कड़ नाटक, गीत, संगीत आदि के माध्यम से भी जनजागरूकता फैलाई जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे Alcoholics Anonymous और Narcotics Anonymous भी इस अभियान में अपना योगदान देंगी। शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "युवा संगम" के अंतर्गत "प्रहरी क्लब"/ "ओजस क्लब" और "उमंग मॉड्यूल" के माध्यम से छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित "Manhit App" के माध्यम से नशा पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, मेडिकल और टेक्निकल कॉलेजों सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सहयोग से पोस्टर, शॉर्ट मूवी और जागरूकता संदेश साझा किए जाएंगे। यह जन-जागरूकता अभियान प्रदेशभर में एक सशक्त और संगठित प्रयास के रूप में नशे के विरुद्ध जनमत तैयार करेगा तथा नशामुक्त, स्वस्थ और सुरक्षित समाज की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पुलिस विभाग द्वारा अन्य विभागों के सहयोग से दिनांक 15.07.25 से 30.07.25 तक दिन-प्रतिदिन के कार्यक्रम
क्र दिनांक कार्यक्रम का विवरण
1. 15.07.2025 अभियान के शुभारंभ के पूर्व मीडिया को जानकारी देना व दैनिक समाचार पत्रों के साथ नशामुक्ति संदेश पम्पलेट का वितरण कराना । स्कूल / कॉलेज एवं शिक्षण संस्थाओं के छात्रों, ग्राम / नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों, एन.सी.सी., स्काउट गाइड एवं जनप्रतिनिधियों के साथ वृहद स्तर पर रैली / ड्रग अवेयरनेस रन का आयोजन एवं शपथ दिलवाना।
2. 16.07.2025 स्कूल / कॉलेज एवं शिक्षण संस्थाओं में नशा के प्रति जन-जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम - रील्स, शार्ट फिल्म इत्यादि का आयोजन एवं शपथ दिलवाना ।
3. 17.07.2025 स्कूल / कॉलेज एवं शिक्षण संस्थाओं में नशा के प्रति जन-जागरूकता संबंधी व्याख्यान एवं लघुकृत फिल्म का प्रदर्शन । स्कूल के आस-पास तम्बाकू / सिगरेट की गुमटी न हो, सुनिश्चित करवाना एवं शपथ दिलवाना।
4. 18.07.2025 झुग्गी झोपड़ी व चिन्हित स्थान (Hotspots) में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन । नशे के आदी व्यक्तियों एवं परिवार वालों को नशामुक्ति पुनर्वास केन्द्रों की जानकारी व सुझाव देने के साथ एवं शपथ दिलवाना। सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से नशे में लिप्त व्यक्तियों को परामर्श एवं चिकित्सीय सहायता उपलब्ध करवाना ।
5. 19.07.2025 ऑटो / शासकीय परिवहन के वाहनों पर पोस्टर चस्पा करवाना। सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटक कराया जाना।
6. 20.07.2025 नशे के विरुद्ध सार्वजनिक स्थानों पर मानव श्रृंखला निर्मित करना एवं जन जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन ।
7. 21.07.2025 स्कूल / कॉलेज एवं शिक्षण संस्थाओं में जागरूकता हेतु चित्रकला, निबंध, पेंटिंग, स्लोगन, रंगोली, पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन । छात्रों के माता-पिता/ अभिभावकों की जागरूकता हेतु सम्मिलित करना।
8. 22.07.2025 गणमान्य व्यक्ति, खिलाड़ी, और वरिष्ठ अधिकारियों के नशा के विरुद्ध रिकॉर्ड किये गये जन जागरूकता संदेश का सार्वजनिक स्थानों पर प्रचार प्रसार करना। सोशल मीडिया पर नशे से पीड़ित व्यक्ति द्वारा नशा छोड़ने की मोटिवेशनल स्टोरी को प्रसारित करना।
9. 23.07.2025 जन-जागरूकता की शॉर्ट मूवी व संदेशों को बसों, सार्वजनिक यातायात साधनों, नगर निगम द्वारा लगाई गई स्क्रीन पर प्रचार प्रसार करना।
10 . 24.07.2025 पुलिस थाना परिसर में ग्राम /नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों को शपथ दिलवाना।
11. 25.07.2025 महिला बाल विकास के शौर्य दल के सदस्य एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता / सहायिका, ग्राम / नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों की सशक्त भागीदारी कर जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन ।
12. 26.07.2025 व्यापारी वर्ग, एनजीओ, सोशल ग्रुप के सहयोग से शॉपिंग मॉल, मार्केट, हाट बाजार, सार्वजनिक स्थानों में नशा विरोधी जन संवाद का आयोजन ।
13. 27.07.2025 छात्रावास (शासकीय व अशासकीय), धार्मिक संस्थान, जेल, फैक्ट्री, कारखाने आदि स्थानों पर जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन ।
14. 28.07.2025 अंतरविभागीय (Custom, Excise, Forest, Social Welfare & Health) से समन्वय स्थापित कर जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन ।
15. 29.07.2025 स्थानीय खेल कोच के संयुक्त प्रयास से खिलाड़ियों के मध्य जन- जागरूकता का आयोजन ।
16. 30.07.2025 स्थानीय गणमान्य / जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में समापन कार्यक्रम का आयोजन । ग्राम / नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों एवं अन्य सक्रिय कार्यकर्ताओं को सम्मिलित किया जाएगा।
आधार कार्ड के बदले नियम, 5 साल से पहले बच्चे का बनवाना है आधार तो करना होगा ये काम
15 Jul, 2025 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सागर : आजकल आधार कार्ड के बिना कोई भी काम नहीं किया जा सकता है. चाहे बच्चे का एडमिशन हो या फिर समग्र आईडी जैसे दूसरे दस्तावेज तैयार करवाना हो, हर जगह आधार की जरूरत पड़ती है. जब बच्चों के स्कूल एडमिशन की बात आती है, तो पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी आधार कार्ड की जरूरत होती है. ऐसे में बच्चों के आधार कार्ड बनवाने के लिए सरकार ने नए नियम जारी किए हैं.
बच्चों के आधार कार्ड को लेकर नए नियम
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नियमों में बड़े फेरबदल करते हुए तय किया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों के आधार कार्ड के लिए जन्मप्रमाण पत्र की जरूरत तो होगी ही, साथ में उस अस्पताल का डिस्चार्ज सर्टिफिकेट भी देना होगा, जहां बच्चे का जन्म हुआ हो. इसके साथ ही माता-पिता को भी अपना आधार कार्ड पेश करना होगा, तब जाकर बच्चे का आधार कार्ड बन पाएगा.
पहले सिर्फ जन्मप्रमाण पत्र पर बन जाता था आधार कार्ड
5 साल तक के बच्चों के आधार कार्ड की बात करें, तो स्कूल में एडमिशन के वक्त हर अभिभावक को बच्चे का आधार कार्ड बनवाना होता है. पहले नियम था कि बच्चों के जन्मप्रमाण पत्र और फोटो के आधार पर आधार कार्ड बना दिया जाता था. इसे बाल आधार कार्ड का नाम दिया गया था, जिसे माता-पिता के आधार कार्ड से लिंक करके बनाया जाता था. लेकिन हाल ही में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नियमों में फेरबदल किया है और अब पहले की तरह बाल आधार कार्ड नहीं बन पाएगा.
अब ऐसे बनेगा छोटे बच्चों का आधार कार्ड
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मुताबिक अब बाल आधार कार्ड बनवाने के लिए माता पिता की विस्तृत जानकारी, बच्चे का जन्मप्रमाण पत्र और जिस अस्पताल में बच्चे ने जन्म लिया है, उस अस्पताल का डिस्चार्ज टिकट भी देना होगा, जिससे पता लग सकेगा कि बच्चे के माता-पिता कौन हैं. इसके साथ ही आधार बनवाते वक्त बच्चे का एक फोटो भी देना होगा. इसके साथ ही माता पिता के आधार कार्ड भी देना होगा, जिससे बाल आधार कार्ड लिंक होगा. 1 अक्टूबर 2023 के बाद जन्में बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के लिए जन्मप्रमाण पत्र जरूरी होगा.
पांच साल बाद आधार कराएं अपडेट
अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय ने बताया, '' सभी आधार केंद्र को नए नियमों के दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. बाल आधार कार्ड पांच साल की उम्र के बाद अपडेट होगा. पांच साल के पहले आधार कार्ड बनवाने में बच्चे के फिंगरप्रिंट और आखें स्कैन नहीं की जाती हैं. लेकिन पांच साल बाद होने वाले अपडेटेशन में बच्चे के फिंगरप्रिंट और आई स्केनिंग भी होगी.
राजनीतिक चर्चाओं पर उम्र सीमा की दीर्घकालिक प्रभाव,क्या बाप-महतारी को कचरे में डाल दोगे : कुसमारिया
15 Jul, 2025 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के 75 वर्ष पूर्ण होने पर रिटायर होने वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने परोक्ष रूप से वरिष्ठ नेताओं को संगठन में दरकिनार करने की चर्चाओं पर नाराजगी जताई और समाज में बुजुर्गों के सम्मान और भूमिका को लेकर तल्ख टिप्पणी की। कुसमारिया ने मीडिया के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि हमें कोई काम देगा तो करेंगे, नहीं देगा तो भी करेंगे। हम कोई कमजोर आदमी नहीं हैं। उन्होंने बुंदेलखंड की कहावत का हवाला देते हुए कहा कि अगर बुजुर्गों को साथ ले जाओ तो काम अच्छे से होता है। उन्होंने समाज और संगठन के लोगों से सवाल किया कि पार्टी में लोगों को सलाह लेनी चाहिए। क्या बाप-महतारी को कचरे में डाल दोगे? वृद्ध आश्रमों में भेज रहे हैं, सेवा करने से कतरा रहे हैं। हम भी बुजुर्ग हैं, क्या हमें भी फेंक दोगे? रामकृष्ण कुसमारिया ने साफ किया कि वे जनसेवा से हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं भी दी गई तो भी वे सेवा में जुटे रहेंगे। वह कुछ मांग नहीं रहे हैं।बता दें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी के बाद भाजपा में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा कि 75 साल की शॉल पहनाए जाने का अर्थ है कि "अब आप की उम्र हो गई, थोड़ा बाजू हो जाइये, अब हमें करने दीजिए। इस बयान के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में विधायक नागेंद्र सिंह- गुढ़, विधायक नाग्रेंद सिंह-नागोद, विधायक जयंत मलैया-दमोह, विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा-होशंगाबाद, विधायक बिसाहू लाल सिंह- अनूपपुर 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं। वहीं, आगामी चुनाव तक विधायक गोपाल भार्गव- रहली, विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल-तेदूखेड़ा, विधायक अजय विश्नोई- पाटन, विधायक रमाकांत भार्गव- बुधनी 75 साल की उम्र के पास पहुंच जाएंगे।
विधानसभा के सुझावों पर लेना होगा एक्शन, बढ़ने जा रहे अधिकार, पहली बैठक में आए सुझाव
15 Jul, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: विधानसभा की समितियों द्वारा दिए जाने वाले सुझावों को सरकार हल्के में नहीं ले सकेगी. सरकार और उनके विभागों को समय सीमा में उस पर एक्शन लेना होगा. विधानसभा की समितियों को पहले के मुकाबले और उपयोगी बनाने के लिए मध्य प्रदेश सहित 7 विधानसभाओं के अध्यक्षों की बैठक की गई. बैठक में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष और उनके अधिकारी शामिल हुए.
बैठक में समितियों को कुशल बनाने के लिए सभी ने अपने-अपने सुझाव दिए हैं. अब इसको लेकर देश की दूसरी विधानसभा अध्यक्षों को भी पत्र लिखकर उनके सुझाव मंगाए जाएंगे.
समितियां शासन से मांगती है जवाब
मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में 7 राज्यों की समिति की पहली बैठक भोपाल में हुई. दरअसल, जब विधानसभा की बैठकें नहीं होती उस वक्त विधानसभा की समितियां विधायिका के तौर पर काम करती हैं. नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि "मध्य प्रदेश में 4 वित्तीय समितियां हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग की 2 समितियां और बाकी 15 अलग-अलग समितियां हैं. जिसमें पक्ष और विपक्ष मिलकर सदस्यों को समितियों में नामांकित करती है.
यह समितियां विभिन्न विभागों से जुड़े कामों का निरीक्षण करती हैं, भ्रमण करती हैं और जरूरत पड़ने पर शासन को बुलाकर संबंधित विषय पर चर्चा भी करती है. सरकार की तरफ से दिए गए अपूर्ण उत्तर हो या फिर राज्य सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन उन पर समितियां निगरानी करती है, ताकि उन पर काम हो सके."
सभी विधानसभाओं को लिखा जाएगा पत्र
दरअसल अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी वर्ष सम्मेलन में विधानसभा की समितियों को और बेहतर बनाने के लिए 7 राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों की एक समिति बनाई गई है. इसकी पहली बैठक भोपाल में हुई. नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि "जैसे-जैसे देश की आबादी बढ़ रही है और तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है. उसी तरह विधानसभा का काम और जिम्मेदारी भी बढ़ रही है.
उन्होंने कहा कि विधानसभा समितियों को काम करने की और स्वतंत्रता देनी चाहिए. समितियों का काम सबके सामने आना चाहिए. साथ ही समितियों की अनुशंसा का समय सीमा में पालन होना चाहिए. इन सभी को लेकर पहली बैठक में कई तरह के सुझाव आए हैं. अब इसको लेकर देश की दूसरी विधानसभा अध्यक्षों को भी पत्र लिखकर उनसे सुझाव मांगे जाएंगे. समिति की अगली बैठक राजस्थान में होगी.
कोलार डैम में डूबे छात्र, पिकनिक की मस्ती पल में बदल गई मातम में
15 Jul, 2025 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीहोर। पिकनिक का मजा लेने कोलार डैम पहुंचे चार छात्रों की यात्रा रविवार को दर्दनाक हादसे में बदल गई। भोपाल से आए चार दोस्तों में से दो छात्र प्रिंस सिंह और उज्ज्वल त्रिपाठी डैम में नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए और डूबकर जान गंवा बैठे। इस घटना का एक लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सभी छात्र मस्ती करते दिख रहे हैं और अचानक दो युवक डूब जाते हैं। घटना की जानकारी मिलते ही बिलकिसगंज थाना पुलिस और एसडीआरएफ टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब 18 घंटे की मशक्कत के बाद सोमवार को दोनों युवकों के शव बरामद कर लिए गए।
डेढ़ किमी जंगल में जाकर डैम में उतरे थे छात्र
चारों युवक पहले डैम के दानेव बाबा क्षेत्र में पहुंचे थे, लेकिन पुलिस द्वारा नहाने से मना किए जाने के बाद वह डैम की पाल पार कर जंगल की ओर करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर चले गए और वहां डैम में नहाने लगे। इसी दौरान हादसा हुआ। मृतक छात्रों की पहचान प्रिंस सिंह (निवासी बिहार, छात्र बाला जी कॉलेज) और उज्ज्वल त्रिपाठी (निवासी छतरपुर, छात्र आईएएस कॉलेज) के रूप में हुई है।
प्रशासन ने जलस्त्रोतों पर प्रतिबंध के दिए आदेश
लगातार हो रही बारिश के चलते जिला प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए नदियों, झरनों और जलप्रपातों में आमजन के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। सीहोर कलेक्टर बालागुरू के. ने निर्देश जारी करते हुए संवेदनशील स्थलों पर कर्मचारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं।
रेहटी में सोलवी नदी में बहा पूरा परिवार
सीहोर जिले की रेहटी तहसील के ग्राम सुरई के समीप स्थित सोलवी नदी में पिकनिक मनाने गए एक परिवार के तीन सदस्य पानी के तेज बहाव में बह गए। ग्राम मालीबायां निवासी अताउर्रहमान (40), उनकी पत्नी रफत (35) और ढाई वर्षीय बेटा ओरम नदी में डूब गए। परिवार का 10 वर्षीय बेटा रिवजर किसी तरह बच गया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सोमवार सुबह नदी से सबसे पहले ढाई साल के बच्चे का शव बरामद हुआ। कुछ देर बाद महिला का शव भी घटनास्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर मिला। युवक अताउर्रहमान की तलाश अभी भी जारी है।
प्रशासन ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
रेहटी थाना प्रभारी राजेश कहारे, एसडीओपी रवि शर्मा और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। रविवार शाम से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार को सुबह फिर शुरू किया गया। अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि एक की तलाश अभी जारी है।
रीवा की महना नदी ने डुबाया पुल, ऑटो से अस्पताल जा रही गर्भवती की मौत
15 Jul, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रीवा: जवा तहसील से महना नदी में बाढ़ के पानी की वजह से रूह कंपाने वाली घटना सामने आई. बाढ़ का पानी पुल पर आ जाने से गर्भवती महिला अस्पताल नहीं पहुंच सकी. वह करीब 2 घंटे तक रास्ते पर तड़पती रही. समय पर इलाज न मिल पाने के चलते रास्ते में ही तड़प तड़प कर उसकी दर्दनाक मौत हो गई. प्रिया रानी कोल 8-9 महीने की गर्भवती थी. अचानक से उनको लेबर पेन शुरू हुआ. परिजन उन्हें ऑटो से अस्पताल लेकर जा रहे थे, लेकिन नदी उफान पर होने के कारण आगे नहीं जा सके और महिला की दर्द से तड़प तड़प पर बीच रास्ते में मौत हो गई.
जवा में गर्भवती महिला की दर्दनाक मौत
महिला के परिजन पंकज कोल ने बताया कि "महिला के शव को ससुराल तक ले जाने के लिए करीब 40 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा. बारिश के चलते यह सफर बहुत कष्टदायक था. हम लोग कच्ची और कीचड़ भरे रास्ते पर कुछ दूर ट्रैक्टर से तो कुछ दूर चारपाई तो कुछ दूर तक पैदल चलकर महना नदी भी पार किया, तब कहीं जाकर महिला के शव को लेकर ससुराल पहुंचे, जहां उसका सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया."
बाढ़ के चलते महिला नहीं पहुंच सकी अस्पताल
बीते दिनों हुई बारिश से जिले में बाढ़ जैसे हालात है. कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट गया है. नदी नालों उफान पर चल रहे हैं और रपटा पुल डूब गए हैं. गावों को जोड़ने वाली सड़कें पानी के तेज बहाव में बह गई हैं. ऐसी ही स्थिति जावा तहसील क्षेत्र में बनी हुई है. महना नदी तेज वेग में बह रही है. इसी दरमियान भनिगवां मे रहने वाले सोनू कोल की पत्नी प्रिया रानी कोल को लेबर पेन हुआ और वो घर से निकली थीं.
ससुराल में सड़क न होने के चलते महिला गई थी मायके
बारिश के दिनों में उसे डिलीवरी के लिए अस्पताल जाने में ज्यादा कठिनाई न हो इसके लिए वह कुछ दिन पूर्व ही ससुराल से 40 किलोमीटर दूर अपने मायके चली गई. क्योंकि ससुराल से अस्पताल जाने के लिए अच्छी सड़क और साधन नहीं था. वह चाहती थी सुरक्षित डिलीवरी हो जाए, लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि बारिश की वजह से मायके से अस्पताल तक जाने वाला रास्ता भी बंद हो गया और उसकी बीच रास्ते में दर्दनाक मौत हुई.
ससुराल में महिला का हुआ अंतिम संस्कार
गांव में ही एक क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टर को मौके पर बुलाया गया. उसने देखते ही महिला को मृत घोषित कर दिया. किसी तरह महिला के शव को वापस उसके मायके लाया गया, लेकिन जब अंतिम संस्कार के लिए उसे ससुराल ले जाने की बारी आई तब उसके परिजनों को बड़ी जद्दोजहद करना पड़ी. शव को मायके से ससुराल तक ले जाने के लिए परिजनों को 40 किलमीटर का लम्बा नर्क से भी बदत्तर कहे जाने वाले रास्ते का सफर तय करना पड़ा. सड़क पूरी तरह खस्ताहाल और कीचड़ भरे रास्तों से जैसे तैसे नदी पार करते हुए शव को ससुराल पहुंचाया गया, जहां उसका अंतिम संस्कार हुआ.
'सड़क अच्छी होती तो शायद नहीं होती मौत'
उर्मिला कोल ने बताया कि "प्रिया रानी का पहले से एक बेटा है. वह 8 से 9 महीने की गर्भवती थी. बाढ़ के चलते अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कतें आई. रास्ते में बाढ़ के चलते वाहन फंस गया, जिसके बाद ज्यादा तबीयत खराब होने से प्रिया रानी की मौत हो गई." बाढ़ के चलते नदी में उफान था और पुल में पानी आने के कारण परिवार के लोगों ने करीब 40 किलोमीटर का चक्कर काटकर दूसरे रास्ते से बहु के शव को मायके से ससुराल पहुंचाया है. उन्होंने कहा अगर गांव की मुख्य सड़क पक्की होती तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता."
'मामले की प्राथमिकती से करवाएंगे जांच'
घटना पर रीवा की कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा, "बरसात का समय चल रहा है. विषय के बारे में हम लोगों द्वारा जानकारी ली जाएगी. सामान्यतः किसी भी गांव की प्रधानमंत्री सड़क अन्य सुविधाओं से है या यदि कोई ग्राम पंचायत ऐसी है, जिसमें नदी या नाला पार करने को लेकर कोई दिक्कत है, तो उसका परीक्षण हम लोग प्राथमिकता से करवा लेंगे."
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने पहली ही बैठक में दिखाए तेवर, पार्टी में अनुशासन के साथ रहने की दी नसीहत
15 Jul, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : बीजेपी प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहली बार जिला अध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों से रूबरू हुए. अपने संबोधन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने पदाधिकारियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए बैठकों में समय का ख्याल रखने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि बैठकों के लिए समय निर्धारित किय जाता है ऐसे में समय का खास ध्यान रखने की जरूरत है.
सांसद विधायक के इंतजार में न रहें
उन्होंने कहा कि विधायकों और सांसदों के लिए बैठकें शनिवार और रविवार को ही रखी जाएं। यदि वे समय पर न आएं तो बैठक इंतजार में न रोकें. उसे तय समय पर शुरू कर दिया जाए. ऐसी परिपाटी डालनी होगी कि बैठक निर्धारित समय पर शुरू हो और तय समय पर खत्म हो.
परिवार में सिर्फ मैं राजनीति में, किसी पर न करें भरोसा : खंडेलवाल
पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, '' मेरे परिवार में अकेला मैं ही राजनीति में हूं. इसलिए मेरे नाम से या फिर किसी मेरे करीबी के नाम को लेकर बिलकुल भी भरोसा नहीं करें. पार्टी की जो लाइन है, वहीं मेरी भी लाइन है, मैं उससे अलग नहीं रहता. बीजेपी ही मेरा परिवार है. आप सभी लोग ही मेरे सहयोगी है. मेरी कोशिश रहेगी कि सत्ता और संगठन अलग-अलग न दिखे एक रूप में दोनों दिखाई दें.''
सभी जिलों में बनाएं कार्यालय
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, '' सभी को मिलकर संवाद, समन्वय और संपर्क के जरिए पार्टी को और ऊंचाईयों पर लेकर जाना है. जिला और मंडल स्तर पर जो काम अधूरे हैं, उन्हें पूरा करना है. जिन जिलों में पार्टी का जिला कार्यालय नहीं है, उन्हें जल्दी पूरा करना है. सभी जिला कार्यालय में वीडियो कांफ्रंसिंग की सुविधा भी होनी चाहिए. जिला कार्यालय सुविधाजनक बने, लेकिन यह लग्जरी बिलकुल भी दिखाई नहीं देना चाहिए. यह दिखाई देना चाहिए कि यह सबका कार्यालय है.''
जहां कमजोर हैं, उसे मजबूत करने में जुटें
इस दौरान बीजेपी प्रदेश प्रभारी ने भी पार्टी नेताओं को संबोधित किया. प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कहा, '' बीजेपी संगठन में जिला अध्यक्षों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. सभी अलर्ट रहकर काम करें और समन्वय बनाकर संगठन के कामों को करें. प्रदेश का संगठन देश का आदर्श संगठन है, लाखों करोड़ों कार्यकर्ता की मेहनत से यह संगठन खड़ा हुआ है. इस संगठन को सभी को मिलकर और मजबूत बनाना है.''
वहीं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने कहा, '' पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत से ही लोकसभा, विधानसभा में बड़ी सफलता मिली है. यह सिलसिला रूकना नहीं चाहिए. प्रदेश में जिन बूथ पर हम कमजोर रहे हैं, उसे मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.''
सीहोर : पिकनिक मनाना महंगा पड़ा, पांच डूबे, चार के शव बरामद, रेस्क्यू अभियान जारी
14 Jul, 2025 11:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
- रेहटी तहसील की सोलवी नदी में पति-पत्नी एवं बच्चा, कोलार डेम में दो दोस्त डूबे
- एसडीएम-एसडीओपी, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
सीहोर। जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में पांच लोग डूब गए। इनमें से चार के शव बरामद हो गए हैं। एक की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। ये सभी रविवार को पिकनिक मनाने के लिए नदी एवं डेम के किनारे पहुंचे थे, तभी ये हादसा हो गया। इस दौरान रेहटी तहसील की सोलवी नदी में डूबे पति-पत्नी एवं ढाई साल के बच्चे में से महिला एवं बच्चे का शव बरामद कर लिया गया है। युवक की तलाश जारी है। इसी तरह बिलकिसगंज थाना क्षेत्र के कोलार डेम में चार दोस्तों में से दो दोस्त नहाते समय गहरे पानी में चले गए और डूब गए। इनके शव भी सोमवार को बरामद कर लिए गए हैं। सोलवी नदी में चल रहे रेस्क्यू अभियान के दौरान एसडीएम बुधनी दिनेश सिंह तोमर, एसडीओपी रवि शर्मा, रेहटी के प्रभारी तहसीलदार युगविजय सिंह यादव, थाना प्रभारी राजेश कहारे सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद रहे। कलेक्टर बालागुरू के. भी लगातार रेस्क्यू अभियान का अपडेट लेते रहे। कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा, भाजपा नेता राजेश सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी यहां पहुंचे।
सोमवार को सुबह 6 बजे से शुरू किया रेस्क्यू अभियान-
जानकारी के अनुसार रेहटी तहसील स्थित ग्राम सुरई के समीप सोलवी नदी में ग्राम मालीबायां निवासी अताउर्रहमान 40 वर्ष, उनकी धर्मपत्नी रफत 35 वर्ष, बेटा ओरम उम्र ढाई वर्ष एवं बेटा रिवजर उम्र 10 वर्ष परिवार के अन्य लोगों के साथ में पिकनिक बनाने पहुंचे थे। इसी दौरान पति-पत्नी और उनका ढाई साल का बेटा डूब गया। एक 10 वर्षीय बेटे की जान बच गई। घटना की सूचना मिलते ही रेहटी थाना प्रभारी राजेश कहारे टीम के साथ मौके पर पहुंचे एवं रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। इसके बाद एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे। रविवार को देर शाम तक रेस्क्यू अभियान चलता रहा, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। रेस्क्यू अभियान सोमवार को सुबह 6 बजे से फिर शुरू किया गया। इस दौरान रेस्क्यू टीम को सबसे पहले ढाई साल का बच्चा मिला। उसका पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। घटनास्थल के करीब तीन किलोमीटर दूर महिला का शव भी मिल गया। युवक की तलाश जारी है।
चार दोस्त में से दो डूबे, शव बरामद-
एक अन्य घटना बिलकिसगंज थाना क्षेत्र में आने वाले कोलार डेम पर हुई। यहां भोपाल के चार युवक प्रिंस सिंह, उज्जवल त्रिपाठी अपने दो साथियों शैलेन्द्र धाकड़ और सत्यम पटेल के साथ पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि डेम की पाल पर चढ़कर ये चारों युवक लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में पहुंचे और डेम में उतरकर नहाने लगे। इस दौरान गहरे पानी में जाने से प्रिंस सिंह और उज्जवल त्रिपाठी डूब गए। उनके दोनों साथियों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद थाना बिलकिसगंज प्रभारी संदीप मीणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान चलाया। सोमवार को दोनों के शव बरामद हो गए। बताया जाता है कि चारों युवक भोपाल के कॉलेज में अध्ययनरत थे। इधर लगातार बारिश के चलते कलेक्टर बालागुरू के. ने आदेश जारी करते हुए सीहोर जिले के वॉटरफाल, नदियों, झरनों पर आमजनों के जाने पर रोक लगाते हुए कर्मचारियों को तैनात किया है।
इनका कहना है-
सोलवी नदी में तीन लोगों के डूबने की सूचना पर तत्काल मौके पर पुलिस टीम को भेजकर रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। रविवार को देर शाम तक टीम नदी में रेस्क्यू अभियान चलाती रही, लेकिन डूबे तीन लोगों को पता नहीं चल सका। इसके बाद सोमवार को सुबह 6 बजे से फिर से अभियान शुरू किया गया। अभी ढाई वर्ष का बालक एवं महिला का शव बरामद हुआ है। युवक की तलाश के लिए टीम सर्चिंग कर रही है।
- रवि शर्मा, एसडीओपी बुधनी
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