मध्य प्रदेश
"शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा दहाड़ेगा": युगांडा से लौटते ही बोले बाबा बागेश्वर
22 Aug, 2025 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छतरपुर: देश और दुनिया में सनातन संस्कृति का परचम लहराने वाले बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री युगांडा की अपनी पांच दिवसीय विदेश यात्रा पूरी कर भारत लौट आए हैं. खजुराहो एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जहां बाबा बागेश्वर ने सभी को आशीर्वाद दिया.
युगांडा में धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा
बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यह विदेश यात्रा 14 अगस्त से शुरू हुई थी. वे भारत से युगांडा के लिए रवाना हुए और वहां 15, 16 व 17 अगस्त को राजधानी कंपाला में तीन दिवसीय हनुमंत कथा व प्रवचन का आयोजन किया. इस दौरान युगांडा में रहने वाले सनातनी समुदाय ने उनका जोरदार स्वागत किया.
शिक्षा वह शेरनी का दूध, जिसने पिया वह दहाड़ा जरूर
युगांडा की प्रधानमंत्री ने बाबा बागेश्वर के सेवा कार्यों की सराहना की और उनसे युगांडा में बागेश्वर सनातन मठ स्थापित करने का आग्रह भी किया. साथ ही, उन्होंने बाबा द्वारा चलाए जा रहे "नर सेवा, नारायण सेवा" संकल्प की प्रशंसा की और उनका सम्मान भी किया. भारत लौटते ही बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने एक प्रेरणादायक संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया.
उन्होंने कहा, "शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जिसने भी पिया वह दहाड़ा जरूर है. रोटी दो खा लो, फटे कपड़े पहन लो, बिना छत के रह लो, लेकिन अपने बच्चों को पढ़ाना मत भूलो, शिक्षा जरूर देना. संपत्ति छोड़कर जाओ ना जाओ, लेकिन बच्चों को अच्छे संस्कार देकर जाना."
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह भी कहा कि, ''बदलते समय में बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि चरित्र और संस्कार देना भी माता-पिता का कर्तव्य है. उन्होंने समाज से अपील की कि वे शिक्षा को प्राथमिकता दें और अपने बच्चों को अच्छे नागरिक बनाने में योगदान करें.''
भारतीय संस्कृति का प्रभाव विश्वभर में बढ़ रहा
बागेश्वर धाम अब केवल आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि सनातन संस्कृति और गतिविधियों के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम बन चुका है. दुनिया भर के सनातनी समुदाय की आशाएं इस धाम से जुड़ी हैं. बाबा धीरेंद्र शास्त्री की विदेश यात्राओं से यह संदेश स्पष्ट हो रहा है कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव विश्वभर में बढ़ रहा है और सनातन धर्म के प्रति लोगों की आस्था मजबूत हो रही है.
25 अगस्त से मुंबई के सनातन मठ में रहेंगे धीरेंद्र शास्त्री
बाबा बागेश्वर 24 अगस्त तक बागेश्वर धाम में रहेंगे. इसके बाद वे 25 से 28 अगस्त तक मुंबई स्थित सनातन मठ में रहेंगे. अपने संदेश के अंत में बाबा ने शायरी भरे अंदाज में कहा-"ना नाज है जिंदगी, ना नाराज है जिंदगी, बस जो कुछ है आज है जिंदगी.'' उनके इस संदेश ने न केवल श्रद्धालुओं को शिक्षा के प्रति जागरूक किया बल्कि यह भी साबित किया कि संत समाज केवल आध्यात्मिक ही नहीं, सामाजिक बदलाव के लिए भी प्रेरक शक्ति बन सकता है.
पटवारी की सैलरी: न दिल जीत सकी, न दुल्हन… अर्चना पहुंची नेपाल बॉर्डर
22 Aug, 2025 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: एक पटवारी के चक्कर में अर्चना तिवारी मध्य प्रदेश से नेपाल तक पहुंच गई। उसके परिवारजनों ने उसकी शादी किसी पटवारी से तय कर दी थी और अर्चना को ये गवारा नहीं था। आखिर अर्चना को पटवारी क्यों पसंद नहीं था? पटवारी कौन होता है? इन सभी विषयों के बारे में हम आपको बताएंगे।
पटवारी से तय हुई थी अर्चना तिवारी की शादी
कटनी की अर्चना तिवारी काफी पढ़ी लिखी थी। वह वकालत कर रही थी। साथ ही सिविल जज की तैयारी करती थी। परिवार वालों ने शादी पटवारी से तय की थी। पेशे के हिसाब से देखें तो दोनों का प्रोफाइल मैच नहीं करता था। हालांकि अर्चना तिवारी करियर के लिहाज से अभी शादी के लिए तैयार नहीं थी।
राजस्व विभाग की रीढ़ होते हैं पटवारी
यूं तो पटवारी राजस्व विभाग की रीढ़ माने जाते हैं। जमीनी स्तर पर जमीन और अन्य काम संभालने की जिम्मेदारी उनके ऊपर ही होती है। आइए आपको बताते हैं कि मध्यप्रदेश में पटवारियों का काम क्या है। इसके साथ ही इन्हें सैलरी कितनी मिलती है।
23 से 24 हजार के बीच होती है शुरुआती सैलरी
मध्यप्रदेश में नवनियुक्त पटवारी का वेतन 23 से 24 हजार के बीच में होता है। हालांकि उन्हें अपने क्षेत्र में आने जाने और अन्य भत्तों का प्रावधान भी रहता है। एक वरिष्ठ पटवारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्तमान में सबसे वरिष्ठ पटवारी का वेतन अधिकतम ₹65000 है।
एमपी में अलग-अलग बंटा है काम
मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। सबसे पहले जिला होता है, जिसका प्रमुख कलेक्टर होता है। उसके बाद अनुभाग होते हैं, जिसे एसडीएम लीड करते हैं। उसके बाद तहसील कार्यालय में तहसीलदार प्रमुख होता है। इसके नीचे राजस्व न्यायालय होते हैं, जिसे नायब तहसीलदार लीड करते हैं। इसके बाद आता है राजस्व निरीक्षक कार्यालय। यहां राजस्व निरीक्षक तैनात होते हैं। राजस्व निरीक्षक कार्यालय के नीचे 'हल्का' होते हैं। अंतिम छोर में आने वाले हल्का का प्रमुख ही पटवारी कहलाता है। हल्का को दूसरे शब्दों में इस तरह समझा जा सकता है कि एक ग्राम पंचायत को एक हल्का माना जा सकता है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में औसत रूप में देखा जाए तो एक पटवारी के हिस्से में 3 से 5 गांव आते हैं। जिनकी राजस्व संबंधी संपूर्ण जानकारी, संपूर्ण कार्य पटवारी को निर्वहन करना होता है।
हल्का कार्यालय में बैठते हैं पटवारी
अपने काम को पूरा करने के लिए पटवारी अपने कार्य क्षेत्र के हल्का कार्यालय में भी जाते हैं। ग्राम पंचायत भवन में बैठते हैं। इसके अलावा राजस्व निरीक्षक कार्यालय, तहसील कार्यालयों में भी पटवारी अपने दायित्व का निर्वहन करते हैं। मध्यप्रदेश शासन ने प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक पटवारी हल्का का नाम दिया है। पटवारी हल्का में एक पटवारी की नियुक्ति किए जाने का प्रावधान है। इस लिहाज से मध्य प्रदेश में 23,000 ग्राम पंचायत हैं तो 23000 पटवारियों का होना जरूरी है, लेकिन वर्तमान में करीब 18000 पटवारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में 5000 पटवारियों के पद खाली हैं। इन 5000 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी भी पटवारियों को दी गई है।
ये है योग्यता
वर्तमान में पटवारी बनने के लिए आवेदक को स्नातक होना अनिवार्य है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की तरफ से आयोजित परीक्षा मैं मेरिट अंक आने पर ही आप पटवारी बन सकते हैं। इसके साथ ही आवेदक के पास कंप्यूटर आधारित दक्षता प्रमाण पत्र (CPCT) होना अनिवार्य है।
एक पटवारी सब पर भारी
राजस्व विभाग के जमीनी कार्यकर्ता को पटवारी कहा जाता है। यह कर्मचारी पूरे राजस्व विभाग की रीढ़ होता है। कई जगह पर तो मजाक में कहा जाता है- 'एक पटवारी सब पर भारी'। सुनने में भले यह मजाक लगे, लेकिन पटवारी के पास वाकई इतने अधिकार होते हैं कि उसकी कलम को बड़ा से बड़ा अधिकारी भी नहीं मिटा सकता। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि पटवारी अपने मन से कोई भी काम करते हों। वह नियम के अनुरूप ही काम को अंजाम देते हैं। पटवारी के बनाए पंचनामा रिपोर्ट को कलेक्टर हो या कोर्ट सभी मानते हैं। पटवारी को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से भी पहचाना जाता है। हालांकि पूरे देशभर में पटवारी नाम ज्यादा प्रचलित है।
हर राज्य में अलग हैं इनके नाम
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में इन्हें 'लेखपाल' कहा जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में 'तलाठी' पुकारा जाता है। दक्षिण भारत के राज्यों में पटवारी को 'कारनाम', 'शानबोगरु', 'पटेल' के नाम से भी जाना जाता है।
पटवारी का इतिहास
भारत में पटवारी का इतिहास 1882 से ज्ञात होता है। बॉम्बे प्रेसीडेंसी, 1882 के गजेटियर के अनुसार, तलाठी के जिम्मे आठ से दस गांव होते थे। तलाठी को उन गांवों में रहना पड़ता था। जब देश आजाद हुआ, तब भी पटवारी का पद बना रहा। ऐसा इसलिए क्योंकि राजस्व ग्राम और वन ग्रामों में रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए ग्राम स्तर की कर्मचारी की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है।
पटवारी का मूल काम
पटवारी का मूल काम राजस्व से जुड़े मामले ही होते हैं। किसी भूमि का क्रय विक्रय करवाना, जमीन का नाप कराना हो , नक्शा बनवाना हो, राजस्व अभिलेखों को अपडेट करना, भूमि का आवंटन करवाना, आपदाओं के दौरान आपदा प्रबंधन, एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के खेतों के हस्तांतरण करना, राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी सहयोग के साथ साथ कृषि गणना, पशु गणना, अन्य आर्थिक सर्वेक्षण में सहयोग, विकलांग पेंशन, वृद्धावस्था, आय व जाति प्रमाण पत्र देसी कई मामलों में कार्य करते हैं। खेतों में फसल की बुवाई, फसल बीमा योजना का सर्वे आदि कई कार्य पटवारी के जिम्मे होते हैं।
भोपाल में चौंकाने वाली घटना: रात को सोया लड़का सुबह मृत मिला, परिवार सदमे में
22 Aug, 2025 10:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: राजधानी भोपाल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के एक 16 वर्षीय लड़के ने रात में खाना गया और सो गया लेकिन सुबह नहीं उठ पाया। बिस्तर पर ही उसका शव मिला है। इस घटना के बाद से डॉक्टर भी हैरान हैं क्योंकि उसकी उम्र महज 16 वर्ष की थी। मामला भोपाल के उपनगर कोलार का है। पुलिस के अनुसार जय नमन वंशकार (16) पुत्र मुकेश वंशकार धोली खदान कोलार का रहने वाला था और नौवीं कक्षा में पढ़ता था।
दो भाइयों के साथ कमरे में सोया
पुलिस के अनुसार वह रात को खाना खाने के बाद अपने दोनों भाइयों के साथ कमरे में सोया था। सुबह काफी जगाने पर भी जब वह नहीं उठा। बेसुध हालत में परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी। डॉक्टर इस बात से हैरान हैं क्योंकि मृतक के शरीर पर किसी भी जहरीले कीड़े के काटने के निशान नहीं हैं। ऐसे में मौत के कारण अज्ञात हैं।
गरीब है परिवार
परिवार में मृतक अलावा दो और भाई है, जबकि उसके पिता इलेक्ट्रीशियन हैं, मां एक स्कूल में सफाई काम करती है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि नमन ने रात को खाना खाया और अपने कमरे में जाकर सो गया था। उसने किसी तरह की कोई शारीरिक समस्या का जिक्र नहीं किया था। उसके शरीर पर किसी भी जहरीले कीड़े के काटने का निशान भी नहीं हैं।
पीएम रिपोर्ट से होगी स्थिति साफ
अभी तक मौत के कारण अज्ञात हैं। शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं हैं। ऐसे में अभी डॉक्टरों को कारण के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। पीएम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी कि मौत कैसे हुई है।
कोर्ट परिसर में हिंसा: ITBP जवान ने पत्नी से की मारपीट, पुलिसकर्मी पर भी हमला
22 Aug, 2025 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैतूल: पति-पत्नी के बीच मारपीट के कई मामले सामने आते हैं, ऐसे ही एक हैरान कर देने वाली तस्वीर बैतूल कोर्ट परिसर से सामने आई है. यहां एक पति ने अपनी पत्नी के साथ जमकर मारपीट की उसे सड़क पर गिराकर घसीटा. मामला यहीं नहीं रुका कोर्ट परिसर में तैनात पुलिसकर्मी बीच बचाव के लिए आया तो उसे भी उठाकर पटक दिया. बता दें कि पति और पत्नी के बीच तलाक का केस चल रहा है. मारपीट करने वाला आईटीबीपी जवान पेशी के लिए आया था. मारपीट का यह वीडियो वायरल हो रहा है.
पेशी पर पहुंचे आईटीबीपी जवान ने की मारपीट
आईटीबीपी में पदस्थ पुलिस जवान तलाक केस की पेशी के लिए फैमिली कोर्ट पहुंचा था. पेशी के बाद पति और पत्नी दोनों कोर्ट से बाहर निकले और किसी बात पर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ा कि जवान ने अपनी पत्नी को सड़क पर गिराकर बेरहमी से मारपीट की. उसका मोबाइल छीन लिया और उसे जमीन पर गिराकर बाल पकड़कर घसीटा और लात घूसों से मारपीट की.
बीच बचाव करने पहुंचे पुलिसकर्मी को उठाकर पटका
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आईटीबीपी जवान बेहद गुस्से में था, मानो उसके सिर पर जैसे खून सवार हो चुका था. कोर्ट परिसर में हंगामा होते देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने पति पत्नी को रोकने की कोशिश की. इस बीच बचाव के दौरान आईटीबीपी जवान ने पुलिसकर्मी को उठाकर जमीन पर पटक दिया. न्यायालय में पदस्थ पुलिसकर्मी पर हमला होते देख कोर्ट के कई कर्मचारी भी गुस्से में आ गए और जवान की जमकर पिटाई कर दी. इस घटना से न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग बीच-बचाव के लिए दौड़े.
पीड़िता ने पुलिस में की शिकायत
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पति के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर लिया है. पीड़िता ने बताया कि "वह ग्राम पंचायत महेन्द्रवाड़ी में मोबिलाइजर के पद पर पदस्थ है. 20 अगस्त को कुटुंब न्यायालय बैतूल में तलाक के केस की पेशी पर कोर्ट आई थी. पति शिवपाल उइके जो आईटीबीपी में नौकरी करता है वह भी पेशी पर आया हुआ था.
न्यायालय में हमारी पेशी होने के बाद जब कोर्ट परिसर से बाहर निकली, उसी समय पति ने गाली गलौच कर मोबाइल छीन लिया. बाल पकड़कर जमीन पर गिरा दिया और मारने लगा. पैर से गर्दन दबा दी, जिससे गर्दन में, पीठ में, सीने में, बाएं पैर के घुटने के नीचे, बाएं गाल में चोटें आईं हैं. झूमाझटकी में कान के सोने की बाली और मंगलसूत्र गिर गया जो ढूंढने पर नहीं मिला."
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पुलिस ने पीड़ित पत्नी की शिकायत पर पति के खिलाफ भारतीय न्याय सहिंता की धारा 296, 115(2),351(2)के तहत प्रकरण दर्ज किया है. एएसपी कमला जोशी ने बताया कि "दंपति कोर्ट में पेशी पर आए थे. इसी दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था. जिस पर पति ने पत्नी से मारपीट की. पत्नी ने कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया है. न्यायालय परिसर में हुई इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है."
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का भोपाल के विकास में योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
21 Aug, 2025 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर ने प्रदेश के विकास के लिए सभी दिशाओं में अपने दायित्व का निर्वहन किया। उन्होंने श्रमिक, गरीब व कमजोर वर्ग के लिए आवाज उठाई और संघर्ष किया। साथ ही एक आदर्श विधायक के कर्तव्यों का निर्वहन किया। उनकी अनुशासित और समयबद्ध जीवनशैली तथा जनसामान्य से जीवंत सम्पर्क और जनता के रोजमर्रा के विषयों के प्रति संवेदनशीलता ने उन्हें अजेय जनप्रतिनिधि बनाया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर की पुण्यतिथि पर यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौर के 74 बंगला स्थित निवास पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिजन से संवेदनाएं साझा करते हुए उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित भी किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल ताल पर बना वीआईपी रोड श्रद्धेय गौर साहब की देन है। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल सदैव स्मरणीय रहेगा। जनसेवा का मार्ग चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन उनके व्यवहार और सबकी मदद के भाव के कारण लोगों का बाबूजी से आत्मीय संबंध था। उनकी मौलिक जीवन दृष्टि के कारण वे जनप्रतिनिधियों के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का स्त्रोत रहेंगे। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, अन्य जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे।
किसानों के कल्याण और पूरी अर्थव्यवस्था को लाभान्वित करने के लिए निरंतर बढ़ता रहे सिंचाई क्षेत्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
21 Aug, 2025 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सिंचाई क्षेत्र का निरंतर विस्तार आवश्यक है। इसके लिए जल संसाधन विभाग और सभी संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्य करें। वर्तमान में शासकीय स्रोतों से प्रदेश में सिंचाई प्रतिशत 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे शीघ्र ही दोगुना करने का लक्ष्य ध्यान में रखकर कार्य किया जाए जिससे आने वाले 3 वर्ष में प्रदेश में 100 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार हो जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ ही उद्योग क्षेत्र में पानी देने, पेयजल प्रबंध और ऊर्जा उत्पादन में जल का उपयोग जल संसाधन विभाग के स्रोतों से हो रहा है। सिंचाई के 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य के अनुसार जल संसाधनों के समुचित उपयोग को पूरी प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न परियोजनाओं से बढ़ रहे सिंचाई क्षेत्र की जानकारी भी प्राप्त की।
प्रधानमंत्री मोदी ने किए हैं लाभकारी प्रावधान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं जैसे केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, संशोधित पार्वती-काली-सिंध चंबल लिंक परियोजना को अति उपयोगी बताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश के लगभग आधे जिलों की तस्वीर बदल जाएगी। राज्य के अंदर भी नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा में कार्य प्रारंभ कर लाभ प्राप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों को जोड़ने का स्वप्न भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल ने देखा जिसे प्रधानमंत्री मोदी साकार कर हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा ऐसी परियोजनाओं के लिए 90% राशि देने का लाभकारी प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुसार राज्यों की ऐसी पहल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के कार्य जैसे-जैसे क्रियान्वित होंगे, सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा, साथ ही खुशहाली भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संसाधन विभाग की ओर से राज्य के अंदर नदी जोड़ो प्रकल्पों की संभावनाओं का सर्वेक्षण और अध्ययन कर प्रतिवेदन तैयार किया जाए। केन्द्र सरकार को ऐसे प्रस्ताव भेजकर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सिंहस्थ : 2028 के कार्यों की समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान शिप्रा शुद्धिकरण, नदी एवं जल निकायों के विकास और घाट निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्तमान में शिप्रा पर लगभग 30 किलोमीटर लंबाई में घाट निर्माण का कार्य हो रहा है, यह सभी कार्य वर्ष 2027 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। घाटों के निर्माण से सिंहस्थ के दौरान एक दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकेंगे। शिप्रा नदी पर बैराज निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई।
सिंचाई क्षेत्र में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि
बैठक में बताया गया कि रबी 2023-24 में प्रदेश में सिंचित रकबा 44.56 लाख हेक्टेयर था जो रबी 2025-26 में बढ़कर 52.06 हो गया है। इस तरह बीते डेढ़ वर्ष में प्रदेश के सिंचाई क्षेत्र में 7.50 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसमें जल संसाधन विभाग द्वारा 2.39 और नर्मदा घाटी विकास विभाग 5.11 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने में सफलता प्राप्त की गई है। बताया गया कि प्रदेश में आगामी पांच वर्ष में 200 करोड़ से अधिक लागत की 38 सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, जिसके फलस्वरूप 17 लाख 33 हजार 791 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा। इस वर्ष 2 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षेत्र बढ़ेगा, जो मोहनपुरा बांयीतट परियोजना जिला राजगढ़, चंदेरी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जिला अशोकनगर, पंचमनगर सिंचाई परियोजना जिला दमोह एवं सागर, त्योंथर बहाव योजना जिला रीवा और घोघरी मध्यम परियोजना जिला बैतूल के माध्यम से संभव होगा।
बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास डॉ. राजेश राजौरा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
ग्रामीण नलजल योजनाओं के संचालन-संधारण की नीति टिकाऊ, जनभागीदारी आधारित और दीर्घकालिक प्रभाव वाली हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
21 Aug, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता केवल हर घर तक नल से जल पहुँचाने की ही नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पेयजल सुविधा आने वाले वर्षों तक सतत और गुणवत्तापूर्ण रूप में उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नलजल योजनाओं के संचालन और संधारण की नीति को इस प्रकार तैयार किया जाय, जिससे हर गांव में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था बने और किसी भी परिवार को पानी के लिए कठिनाई न उठानी पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में ग्रामीण नल-जल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण नीति के प्रारूप पर हुई बैठक में यह बात कही।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन योजनाओं को निर्माण कार्य तक ही सीमित न रखकर संचालन और रखरखाव की ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे आने वाले वर्षों में भी योजनाएँ पूरी क्षमता से कार्य करती रहें। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए, जिससे ग्रामीण अपने स्तर पर भी योजनाओं की देखरेख कर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ किए गए जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा तैयार किये गये "ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति" को सक्षम स्वीकृति उपरांत 03 वर्षों के लिये लागू किया जाये। इस नीति के लागू होने से समूह जलप्रदाय योजनाओं की भांति एकल ग्राम नलजल योजनाओं का सुचारू एवं दीर्घकालिक संचालन हो सकेगा। इस नीति के अनुसार ग्रामीण नलजल योजनाओं का संचालन, संधारण एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जायेगा।
प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि ने बताया कि प्रदेश में अगस्त 2019 तक जहाँ केवल 12.11 प्रतिशत अंतर्गत 13 लाख 53 हजार ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल मिल रहा था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 78 लाख 64 हजार से अधिक हो गई है। इस प्रकार 70.41 प्रतिशत ग्रामीण परिवार नल से जल सुविधा से जुड़ चुके हैं। कुल 1 करोड़ 11 लाख 69 हजार परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। जल जीवन मिशन का कार्य वर्ष 2027 तक पूर्ण कर लिया जायेगा। समूह नलजल की 147 इसी प्रकार कुल योजनाओं में से अब तक 52 योजनाएँ पूर्ण की जा चुकी हैं जिनसे 4 हजार 285 ग्रामों में जलापूर्ति की जा रही है। शेष 95 योजनाएँ प्रगति पर हैं।
प्रमुख सचिव नरहरि द्वारा प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित हो रही नलजल योजनाओं के दीर्घकालिक एवं प्रभावी संचालन हेतु विभाग द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित विभिन्न स्तरों पर विचार विमर्श उपरांत तैयार की गई "ग्रामीण नलजल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नीति" की विस्तार से जानकारी दी गई। इस नीति के प्रावधानों के अनुसार ग्रामीण नलजल योजना का संचालन पूर्व की भांति संबंधित ग्राम पंचायत के द्वारा किये जाने तथा ग्राम पंचायतों को योजना के संचालन में सहयोग देने हेतु तथा योजना संचालन की व्यवस्था को सदृढ करने के उददेश्य से योजना के संधारण से संबंधित कार्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से किये जाने की जानकारी दी गई।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव, वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास दीपाली रस्तोगी, प्रबंध संचालक जल निगम के. वी.एस. चौधरी कोलसानी भी उपस्थित थे।
हरित ऊर्जा के लिए प्रतिबद्ध बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए मध्यप्रदेश बन रहा है आकर्षण का केन्द्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
21 Aug, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहा है। हरित ऊर्जा के लिए प्रतिबद्ध बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए मध्यप्रदेश आकर्षण का केन्द्र बन रहा है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियां यहां अपनी निर्माण इकाइयां स्थापित करने की इच्छुक हैं। उद्योगों के साथ कृषकों और जनसामान्य को सौर ऊर्जा व अन्य वैकल्पिक स्त्रोतों से किफायती दर पर विद्युत उपलब्ध कराने की दिशा में हो रहे शोध और नवाचारों को राज्य सरकार हरसंभव सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेक्का क्लाइमेट फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट क्ले स्ट्रेंजर और सुसीमा पॉल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफोर्निया बर्कले के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर (आईईसीसी) के सीनियर एडवाइजर मोहित भार्गव से मंत्रालय में हुई सौजन्य भेंट के दौरान यह बात कही। बैठक में सहयोग के उद्देश्यों पर चर्चा के साथ स्वच्छ एवं सतत् भविष्य के लिये साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने बताया कि यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले के सहयोग से नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग और मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल के बीच एमओयू हुआ है। इसके अंतर्गत मैनिट में गुरुवार को ‘सेंटर फॉर मिशन ऑन एनर्जी ट्रांजिशन’ (सीएमइटी) का शुभारंभ हुआ। यह केन्द्र भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता के क्षेत्र में कार्य करेगा और अकादमिक-नीतिगत और औद्योगिक आवश्यकताओं के दृष्टिगत आवश्यक सुझाव एवं रणनीतियां निर्धारित करने में सहयोग देगा। मैनिट भोपाल के निदेशक के.के. शुक्ला ने कहा कि कैलेफोर्निया विश्वविद्यालय बर्कले एवं ग्लोबल पार्टर्नर Sequoia Climate Fondation के सहयोग से प्रारंभ केन्द्र भारत में ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिये अकादमिक नीति निर्माण तथा औद्योगिक क्षेत्रों के बीच उत्कृष्ट सहयोग को दर्शाती है। कार्यक्रम में ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी संस्थाएं जीआईज़ेड, सीईईडब्ल्यू, डब्ल्यूआरआई, सीएसआईएस और शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
ऊर्जा परिवर्तन मिशन केन्द्र (CMET) के प्रारंभ होने से स्वच्छ एवं नवकरणीय ऊर्जा प्रणालियों पर उन्नत शोध किया जा सकेगा। नीति निर्माताओं को डेटा आधारित सुझाव एवं समाधान उपलब्ध कराये जा सकेंगे। ग्रिड स्थिरता, ऊर्जा भंडारण और डिमांड साइड प्रबंधन के लिए नवाचारों का विकास किया जा सकेगा। साथ ही प्रशिक्षण कार्यशालाओं और वैश्विक ज्ञान विनिमय के माध्यम से क्षमता निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।
प्रबंध निदेशक मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड अमन बीर सिंह बैंस ने बताया कि नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग और मैनिट के हुये एमओयू से मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
राज्यपाल पटेल ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले राहवीरों को किया सम्मानित
21 Aug, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने गुरुवार को सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले हिमांशु साहू और गगन सनोडिया को राहवीर योजनान्तर्गत सर्किट हाउस सिवनी में सम्मानित किया। उन्हें प्रशस्ति पत्र और 25 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। राज्यपाल पटेल ने यातायात प्रबंधन में सराहनीय कार्य के लिए ट्रॉफिक वॉर्डन दल प्रभारी विजय नायक एवं शिवांशु नाग परिहार को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, कलेक्टर सुसंस्कृति जैन, पुलिस अधीक्षक सुसिमाला प्रसाद सहित अन्य उपस्थित थे।
राज्यपाल पटेल प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही से मिले
21 Aug, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल गुरुवार को सिवनी जिले की कुरई विकासखण्ड के ग्राम थांवरझोड़ी प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही राजेन्द्र कुमार उइके के घर पहुँचें। उन्होंने परिवारजनों से आत्मीय चर्चा की।
राज्यपाल पटेल ने राजेन्द्र कुमार और परिजनों से शासन की योजनाओं के मिले लाभ की जानकारी ली। उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को जाना। राज्यपाल पटेल ने राजेन्द्र कुमार उइके के बेटों को मेहनत कर परिवार और समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी नागरिक शासन की योजना का लाभ लेकर समाज की मुख्य धारा से जुडे़ं। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
इस अवसर पर विधायक बरघाट कमल मर्सकोले, विधायक सिवनी दिनेश राय, मीना बिसेन, कलेक्टर सुसंस्कृति जैन, पुलिस अधीक्षक सुसिमाला प्रसाद, सीईओ जिला पंचायत नवजीवन विजय सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्यपाल पटेल सिवनी के थांवरझोड़ी में ग्राम परिचय कार्यक्रम में हुए शामिल
21 Aug, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल गुरुवार को सिवनी जिले के कुरई विकासखण्ड के ग्राम थांवरझोड़ी पहुँचे। राज्यपाल पटेल यहां ग्राम परिचय कार्यक्रम में शामिल हुए। ग्रामवासियों ने परंपरागत कलश यात्रा और गोंडी नृत्य से राज्यपाल का आत्मीय स्वागत किया। राज्यपाल पटेल ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया। उन्होंने ग्रामीणों को जाति प्रमाण पत्र, आजीविका मिशन की बहनों को कैश क्रेडिट लिंक योजना का चैक और विद्यार्थियों को नि:शुल्क सायकल का वितरण किया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर योजनाएं संचालित कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं से मुक्ति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाई है। आजीविका मिशन से जुड़ी बहनें आर्थिक स्वावलंबन का अभूतपूर्व उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री जन मन योजना को जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से जोड़कर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने का सशक्त माध्यम है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री धरती आबा योजना, जनजातीय परिवारों को आवास, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इन योजनाओं से जनजातीय जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।
ग्रामवासियों को दिलाया नशामुक्ति का संकल्प
राज्यपाल मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में ग्राम में परंपरागत खाट बैठक के तहत ‘पेसा’ पंचायत आयोजित हुई। राज्यपाल पटेल ने ग्रामवासियों को नशामुक्ति का संकल्प दिलाया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि नशे की लत से न केवल व्यक्ति, बल्कि उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि थांवरझोड़ी ग्राम नशामुक्त बनकर अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। पेसा पंचायत में नशा करने वालों पर 1000 रूपये का जुर्माना लगाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। यह राशि ग्राम विकास कार्यों में उपयोग होगी।
सिकल सैल जागरूकता कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता जरूरी
राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल वंशानुगत रोग है। इससे पीड़ित व्यक्ति को अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि विवाह से पहले वर-वधू दोनों के जेनेटिक कार्ड का मिलान अनिवार्य रूप से किया जाए। यदि दोनों ही रोगग्रस्त अथवा वाहक हों तो विवाह नहीं करें, ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ रहे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को सिकल सैल मुक्त बनाने में सभी का सक्रिय सहयोग आवश्यक है। इसके लिए जन-जागरूकता शिविरों और परीक्षण कार्यक्रमों में सभी की अधिक से अधिक भागीदारी होनी चाहिए।
जिले के नवाचार 'मिशन जीवन पर्यंत' की सराहना की
राज्यपाल पटेल ने सिवनी जिला प्रशासन के नवाचार “मिशन जीवन पर्यंत” नाटक का मंचन देखा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की अनेक योजनाओं से माताओं-बहनों का भविष्य सुरक्षित हो रहा है। उन्होंने इस पहल की सराहना की और इसे महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
राज्यपाल को छात्रों ने स्मृति चिन्ह स्वरूप मोगली की पैंटिंग भेंट की। आभार प्रदर्शन सीईओ जिला पंचायत नवजीवन विजय द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया, विधायक सिवनी दिनेश राय, मीना बिसेन, कलेक्टर सुसंस्कृति जैन, पुलिस अधीक्षक सुसिमाला प्रसाद सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्यपाल पटेल ने बिरवा में ईमलाबाई के घर किया भोजन
21 Aug, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल गुरूवार को बालाघाट जिले के बैहर के ग्राम बिरवा में प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही ईमलाबाई मरकाम के घर पहुंचे। उनके बच्चों के साथ आत्मीय चर्चा की। शासन की योजनाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। परिवार के साथ सहभोज में शामिल हुए।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ईमलाबाई के बच्चों के साथ चर्चा कर उनके बारे में जानकारी प्राप्त की। उनको बड़ी बेटी भावगती ने बताया की वह आईटीआई की पढ़ाई कर रही है। छोटी बेटी सोमवती ने बताया की उसने दसवीं के बाद पढ़ाई रोक दी है। बेटे दीपक मरकाम ने बताया की उसने नवमी कक्षा तक पढ़ाई की है। अब वह खेती कर रहा है। उसने बताया की वह सर्विस सेंटर खोलना चाहता है। राज्यपाल पटेल ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल पटेल द्वारा ईमलाबाई से शासन की योजनाओं के लाभों के संबंध में जानकारी ली गई। ईमलाबाई ने बताया कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत उन्हें आवास स्वीकृत किया गया था। शौचालय निर्माण के लिये भी राशि मिली है। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन मिलती है, मनरेगा जॉब कार्ड भी उनके पास है। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, आयुष्मान भारत योजना, संबल योजना का लाभ भी मिल रहा है। उसने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में भी अपना बीमा कराया हैं।
राज्यपाल पटेल का घर पहुंचने पर ईमलाबाई ने पारंपरिक रीति रिवाज के साथ उनका स्वागत किया। पारंपरिक भोजन परोसा, जिसमें कोदो का भात, कुटकी की खीर, चैच भाजी, चिरोटा भाजी, करील की सब्जी व भोंडों पिहरी की सब्जी शामिल थी।
राज्यपाल पटेल के साथ जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, सांसद भारती पारधी, विधायक गौरव पारधी और ईमलाबाई की बेटियों भागवती, सोमवती एवं बेटे दीपक मरकाम ने भी भोजन किया।
"25 करोड़ की कोठी थी शान, मोहन सरकार ने बना दिया मैदान!"
21 Aug, 2025 03:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: जिस चार मंजिला आलीशान कोठी पर किसी समय में बड़े-बड़े मंत्री और उनके संतरियों का आना-जाना था। उस 'मछली' की आलीशान कोठी पर आज बुलडोजर चल गया। खबर लिखे जाने तक चार मंजिला कोठी के आधे हिस्से को मिट्टी में मिलाया जा चुका था। यह आलीशान कोठी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई गई थी।
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा का पूर्व जिला अध्यक्ष
यह अवैध निर्माण भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष शहरयार उर्फ शेरू अहमद के परिवार ने किया था। भोपाल में ड्रग्स और यौन शोषण के गंभीर मामले सामने आने के बाद भतीजे यासीन मछली और भाई शाहवर अहमद के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज गंभीर धाराओं वाला मामला दर्ज किया गया था। उन्हें जेल भेज दिया गया था। मछली परिवार पर भोपाल में ड्रग्स रैकेट, दुष्कर्म और अवैध कारोबार के आरोप हैं।
पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई
आज की ताजा कार्रवाई में राजस्व विभाग और भोपाल नगर निगम की टीम ने भारी पुलिस बल्कि मौजूदगी में मछली की चार मंजिला भाव कोठी को धराशायी कर दिया। यहां पर नगर निगम की जेसीबी के साथ ही पोकलेन मशीनों ने पक्के निर्माण को गिराया। इस आलीशान हवेली में कई कमरे बने हुए थे।
सीएम ने दी थी चेतावनी
यह कार्रवाई तब की गई है जबकि 14 अगस्त को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से कहा था कि कोई भी हो किसी की कितनी भी बड़ी सेटिंग क्यों ना हो किसी को नहीं बख्शा जाएगा। इसके बाद आज प्रशासन ने उस हवेली को तोड़ दिया, जो पिछले दिनों की गई कार्रवाई में छोड़ दी गई थी।
100 करोड़ की संपत्ति पर चला बुलडोजर
बुधवार रात तक शारिक मछली के कुनबे की लगभग 100 करोड़ रुपए की संपत्ति पर बुलडोजर चला दिया। राजस्व विभाग के अफसरों ने बताया कि अतिक्रमणकर्ता ने सरकारी भूमि में फार्महाउस, मकान बना लिया था। इसके अलावा कहीं शादी हॉल बनाया तो कहीं बाउंड्रीवॉल बना ली थी। इसके अलावा होटल बनाकर धंधा भी संचालित किया जा रहा था।
कहां किसकी संपत्ति पर चला बुलडोजर
1. शकील अहमद पिता शरीफ अहमद का फार्म हाउस, कीमत 55 करोड़।
2. शारिक पिता शरीफ अहमद का वेयर हाउस, कीमत 10 करोड़।
3. शकील अहमद पिता शरीफ अहमद का सुमन फार्म, कीमत 5 करोड़।
4. इरशाद अहमद पिता सरफराज मोहम्मद खान का कारखाना, कीमत 10 करोड़।
5. अता उल रहमान पिता मुफ्ती रईस अहमद खान अवैध मदरसा एवं अवैध दुकान, कीमत 5 करोड़।
6. शरीक पिता शरीफ अहमद द्वारा अवैध बकरा और मुर्गी फार्म, कीमत 8 करोड़।
7. शारिक अहमद उर्फ मछली, सोहेल अहमद, शफीक अहमद तीनों के पिता शरीफ अहमद तीन मंजिल कोठी को अधिपत्य में लिया, कीमत 10 करोड़।
कुल कीमत लगभग 100 करोड़ आंकी गई।
क्यों शुरू हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि पिछले दिनों ड्रग्स जिहाद और लव जिहाद के आरोप शारिक मछली पर लगे थे। शारिक और उसके चाचा पर दुष्कर्म और धमकाने के आरोप में FIR दर्ज हुई है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
"अर्चना तिवारी का 'चक्रव्यूह' भेदने वाला योद्धा – सामने आया IPS राहुल का असली प्रोफाइल"
21 Aug, 2025 03:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: चलती ट्रेन से लापता लेडी अर्चना तिवारी की मिस्ट्री सॉल्व हो गई है। वह परिजनों के साथ घर चली गई है। बीते 13 दिनों तक कई तरह की अटकलें लगती रही। वहीं, अर्चना तिवारी भी बचने के लिए दिमाग लगा रही थी। उसकी सारी चाल को आईपीएस राहुल लोढ़ा ने अपनी टीम के साथ विफल कर दिया है। साथ ही इस रहस्यमयी केस को उन्होंने सुलझा दिया है। आइए आपको बताते हैं कि अर्चना तिवारी मिस्ट्री को सुलझाने वाले रेल एसपी राहुल लोढ़ा कौन हैं।
कौन हैं आईपीएस राहुल लोढ़ा
दरअसल, राहुल लोढ़ा 2011 बैच के आईपीएस अफसर हैं। उनकी गिनती तेज तर्रार अधिकारियों में होती है। भोपाल में रेल एसपी के रूप में पोस्टिंग से पहले वह रतलाम जिले के एसपी थे। वहां बजरंग दल के साथ कुछ विवादों की वजह से रातोंरात उनका ट्रांसफर हो गया था। सितंबर 2024 में उन्होंने रेल एसपी के रूप में कमान संभाली थी।
आईबीएम की नौकरी छोड़कर शुरू की यूपीएससी की तैयारी
आईपीएस अफसर राहुल लोढ़ा मूल रूप से महाराष्ट्र स्थित जलगांव के रहने वाले हैं। 2008 में बीई कंप्लीट करने के बाद उन्होंने आईबीएम में नौकरी शुरू की थी। लेकिन मन हमेशा यूपीएससी की तैयारी में लगा रहता था। उन्होंने 2009 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी।
गुरुद्वारे में रातें बिताई
आईबीएम की नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी के लिए राहुल लोढ़ा दिल्ली पहुंच गए। दिल्ली के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी। कोचिंग की तलाश के लिए शुरुआती दिनों में चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारें में उन्होंने रातें बिताई। कई बार धर्मशाला में रुकना पड़ा। किसी तरह से लोगों से कोचिंग के बारे में पता करते-करते वह वहां तक पहुंचे। पहली बार में उनका दाखिला नहीं हुआ लेकिन हार नहीं मानी।
स्कॉलरशिप मिलने के बाद कोचिंग दाखिला
इस बीच उन्हें एक कोचिंग की स्कॉलरशिप मिल गई। इसकी वजह से उनकी पढ़ाई और रहना खाना फ्री हो गया। इसके बाद तैयारी में जुट गए। शुरुआती दिनों में जब उन्हें दाखिला नहीं मिल रहा था, तब वह कोचिंग के बाहर खड़े होकर छात्रों से बुक्स और नोट्स के बारे में पूछते थे, जिससे वह तैयारी करते थे।
कोचिंग में ही हुआ प्यार
वहीं, पढ़ाई के दौरान जोधपुर की रहने वाली शुभी से उनकी मुलाकात हुई। वह भी स्कॉलरशिप के जरिए ही कोचिंग में आई थी। दोनों के बीच अच्छी जान पहचान हो गई थी। एक-दूसरे से नोट्स शेयर करते थे। थर्ड अटेम्पट के बाद राहुल लोढ़ा घर गए तो अपनी मां को शुभी के बारे में बताया। इसके बाद मां ने हामी भर दी। मां की हामी के बाद उन्होंने शुभी को प्रपोज कर दिया। कुछ दिनों बाद हां में जवाब आया। फिर दोनों परिवारों ने बात की और शादी पक्की हो गई। राहुल लोढ़ा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 2011 में जब मेरा चयन आईपीएस के रूप में हुआ तो शुभी ने ही मुझे कॉल कर बताया था। मैं सिलेक्ट हो गया हूं। आईपीएस में चयन होने के बाद 2012 में हमदोनों की शादी हो गई।
गौरतलब है कि राहुल लोढ़ा के पिता बिजनेसमैन हैं और मां हाउस वाइफ हैं। अर्चना तिवारी की मिस्ट्री सॉल्व कर उन्होंने खूब वाहवाही लूटी है। विदेश जानें के बाद उन्होंने अपनी ट्रिक से उसे बॉर्डर के इस पार बुलवाया और लखीमपुर खीरी की पुलिस ने हिरासत में लिया।
"छात्र नेता से लेकर सिविल जज की तैयारी तक – अर्चना का 'धाकड़' सफर"
21 Aug, 2025 03:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: शादी फिक्स होने के बाद कटनी की अर्चना तिवारी अपने दोस्त की मदद से काठमांडू भाग गई थी। वह विदेश में रहकर नई जिंदगी शुरू करना चाहती थी। मगर मंसूबों पर रेल पुलिस ने पानी फेर दिया है। अर्चना तिवारी को नेपाल बॉर्डर से पुलिस ने बरामद कर लिया है। साथ ही अब परिजनों के हवाले कर दिया है। अर्चना तिवारी अब कटनी पहुंच गई है। वहीं, अर्चना तिवारी काफी पढ़ी लिखी थी। लेकिन घर लोग उसकी शादी पटवारी से कर रहे थे।
कटनी से की है पढ़ाई
लखीमपुर खीरी से उसकी बरामदगी के बाद रेल पुलिस ने बताया था कि अर्चना तिवारी ने अपनी पढ़ाई कटनी से की है। उसने कटनी से ही ग्रेजुएशन किया था। ग्रेजुएशन के बाद अर्चना तिवारी ने एलएलबी किया है। इसके बाद वह हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती थी। जबलपुर में भी अर्चना कुछ दिनों तक प्रैक्टिस के लिए रही है।
स्टूडेंट पॉलिटिक्स में भी सक्रिय रही
वहीं, रेल एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया था कि अर्चना तिवारी छात्र पॉलिटिक्स में भी सक्रिय रही है। वह कटनी में स्टूडेंट लीडर रही है। यही वजह है कि छात्र नेताओं से भी उसके अच्छे संपर्क रहे हैं।
सिविल जज की कर रही थी तैयारी
कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ ही अर्चना तिवारी सिविल जज की भी तैयारी कर रही थी। वह इंदौर में रहकर एक निजी संस्थान में दाखिला ले ली थी। वहां हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती थी। साथ ही राज्य में अलग-अलग जगहों पर प्रैक्टिस के लिए जाती थी। वकालत से भी अच्छी कमाई हो जा रही थी।
पटवारी से तय हुई थी शादी
वहीं, एकेडमिक रूप से अर्चना तिवारी का प्रोफाइल काफी धाकड़ था। वह आगे चलकर जज बनना चाहती थी। साथ ही जोर शोर से तैयारी में लगी थी। इस बीच परिवार के लोगों ने उसकी शादी एक पटवारी के साथ फिक्स कर दी। इसके लिए अर्चना कतई तैयार नहीं थी। वह विरोध भी जता चुकी थी लेकिन घर वाले उसकी बात मानने को तैयार नहीं थे।
मां से हुआ था झगड़ा
रेल पुलिस ने बुधवार को बताया था कि घर के लोग काफी दिनों से शादी का दबाव बना रहे थे। अर्चना तिवारी इसके लिए तैयार नहीं हो रही थी। इस दौरान वह कई बार शादी का प्रस्ताव रिजेक्ट कर चुकी है। शादी की बात को लेकर मां के साथ उसकी कहासुनी भी हुई थी। इसके बाद ही घर छोड़ने का फैसला किया था। हरदा स्थित ढाबे पर बैठकर उसने भागने की प्लानिंग की थी। इसमें दोस्त सारांश जोगबंद ने उसकी मदद की थी।
रिश्ते से नहीं थी खुश
अर्चना तिवारी का मानना था कि पहले वह करियर में सेट हो जाएगी। इसके बाद शादी पर विचार करेगी। हालांकि जहां शादी तय हो रही थी, वह लड़का अर्चना के प्रोफाइल से मैच नहीं कर रहा था। ऐसे में यह भी हो सकता है कि वह इसकी वजह से शादी के लिए तैयार नहीं रही हो। लेकिन परिवार के लोगों ने इस पर कोई बात नहीं की है।
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