मध्य प्रदेश
सेवा की मिसाल: मुस्लिम युवक बोले – प्रेमानंद जैसे लोग जिंदा रहें, ये जरूरी है
23 Aug, 2025 03:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नर्मदापुरम: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज के लिए नर्मदापुरम के एक मुस्लिम युवक ने अपनी किडनी दान करने की पेशकश की है। युवक ने नर्मदापुरम कलेक्टर और प्रेमानंद जी के वृंदावन स्थित आश्रम को डाक से पत्र भेजकर यह इच्छा जताई है। युवक ने पत्र में प्रेमानंद जी को महान संत बताते हुए हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया है और कहा है कि वह आज के नफरती माहौल में कौमी एकता की अनूठी मिसाल हैं। युवक का कहना है कि वह भविष्य में वृंदावन जाकर प्रेमानंद जी के दर्शन करना चाहता है और यदि अनुमति मिलती है तो किडनी दान करने को तैयार है।
संत प्रेमानंद के विचारों से प्रभावित है युवक
आरिफ खान चिश्ती नाम के इस युवक ने नफरत भरे माहौल में सांप्रदायिक एकता का संदेश देने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने इस बारे में नर्मदापुरम कलेक्टर और वृंदावन स्थित प्रेमानंद जी के आश्रम को पत्र भेजा है। चिश्ती, प्रेमानंद जी के विचारों से बहुत प्रभावित हैं और उन्हें कौमी एकता की मिसाल मानते हैं। अपने पत्र में चिश्ती ने प्रेमानंद महाराज को एक महान संत बताया है। उन्होंने कहा कि वे आज के नफरत के माहौल में एकता की मिसाल हैं। चिश्ती के अनुसार, देश में भाईचारे का संदेश देने के लिए उन्होंने यह पहल की है।
सोशल मीडिया से लगी जानकारी
उन्होंने सोशल मीडिया से प्रेमानंद जी के स्वास्थ्य के बारे में जाना और किडनी दान करने का फैसला किया। चिश्ती ने कहा कि वे भविष्य में वृंदावन जाकर प्रेमानंद जी के दर्शन करना चाहते हैं। अगर प्रेमानंद जी अनुमति देते हैं, तो वे उन्हें अपनी किडनी दान करने के लिए तैयार हैं। चिश्ती ने बताया कि वे एक कंसल्टेंसी फर्म चलाते हैं और एक NGO के माध्यम से बेसहारा लाशों के कफन दफन का काम भी करते हैं।
'प्रेमानंद जी का रहना आवश्यक'
चिश्ती ने पत्र में लिखा है कि संत प्रेमानंद जी देश में हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं। उनके अनुसार, 'आज के नफरती दौर में उनका संसार में रहना आवश्यक है। मैं रहूं या न रहूं, लेकिन उनकी समाज और संसार को जरूरत है।' चिश्ती, संत प्रेमानंद के फैन हैं और उनकी वाणी से प्रेरित हैं।
कौन हैं वृंदावन के संत प्रेमानंद
प्रेमानंद महाराज प्रवचन देने वाले संत हैं, जो वृंदावन में निवास करते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी काफी अच्छी फैन-फॉलोइंग है। वह लंबे समय से किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं। उनके उपदेश देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। खासकर युवाओं में उनके प्रति रुझान बढ़ रहा है। चिश्ती ने अपना पत्र श्री हित राधा केली कुंज आश्रम, वृंदावन के पते पर भेजा है।
कांग्रेस के बयान से भड़कीं महिलाएं, BJP बोली- बहनों का अपमान नहीं सहेंगे
23 Aug, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता यशवंत गुर्जर के लाडली बहना को लेकर दिए बयान के बाद सियासी संग्राम शुरू हो गया है। भाजपा महिला मोर्चा कांग्रेस नेता के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है। महिला मोर्चा ने कहा कि अगर हिम्मत है तो कांग्रेस नेता बहनों को बोरे में भरकर दिखाएं। अपने बयान के लिए यशवंत गुर्जर तुरंत माफी मांगें।
ये बहनों का अपमान है, कांग्रेस नेता को शर्म आनी चाहिए
कांग्रेस नेता यशवंत गुर्जर के लाडली बहनों को लेकर दिए बयान के खिलाफ सड़क पर उतरीं भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने राजधानी भोपाल में जमकर प्रदर्शन किया। भाजपा महिला मोर्चा ने रेड क्रॉस से कांग्रेस दफ्तर तक पैदल मार्च निकाली। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि कांग्रेस नेता का ये बयान बहनों का अपमान है।यशवंत गुर्जर को शर्म आनी चाहिए, कांग्रेस का चरित्र ही महिलाओं का अपमान करने का रहा है।
कांग्रेस नेता ने दिया था ये बयान
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में बुधवार यानी 20 अगस्त को राजगढ़ जिले से नव-नियुक्त कांग्रेस जिला अध्यक्ष बनने पर पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह का स्वागत कार्यक्रम आयोजित हुआ था। जिसमें मंच से जिला पंचायत सदस्य एवं जिला कृषि समिति अध्यक्ष यशवंत गुर्जर ने लाडली बहनों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, अबकी बार एक साथ जीतेंगे और लाडली बहनों को बोरियों में भर देंगे। वहीं कांग्रेस नेता के बयान के बाद भाजपा लगातार हमलावर है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस नेता लाडली बहना को बोरियों में भरने की बात कह रहे हैं और उनकी खुद की पत्नी भाजपा सरकार की लाडली बहना योजना का लाभ ले रही हैं।
"बीहड़ों से बुडापेस्ट तक: कैनो वर्ल्ड चैंपियनशिप में दम दिखाएगा शिखर"
23 Aug, 2025 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिंड: मध्य प्रदेश का सबसे बदनाम इलाका रह चुका भिंड अपनी पहचान प्रदेश के उभरते हुए वाटर स्पोर्ट्स के खिलाड़ियों के गढ़ के रूप में बना रहा है. यहां हर साल कैनो और कयाकिंग जैसे खेलों में नए खिलाड़ी निकल रहे हैं, जो देश दुनिया में प्रदेश और भिंड का नाम रोशन कर रहे हैं. ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं शिखर दुबे, जो अगले महीने हंगरी में आयोजित होने वाली वर्ल्ड कैनो मैराथन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं. भिंड का बेटा जल्द विदेश की धरती पर भारत का परचम लहराने को तैयार है.
अगले महीने हंगरी में आयोजित होगी चैंपियनशिप
महज 17 साल की उम्र और हौसला देश के लिए कुछ कर गुजरने का, ये जज्बा दिखा रहे हैं भिंड के शिखर दुबे. जिन्होंने पानी पर अपनी नाव ऐसे दौड़ाई कि अगले महीने दुनिया के सामने खेल जगत में भारत का प्रतिनिधत्व विदेशी धरती हंगरी के बुडापेस्ट में करने जा रहे हैं. शिखर दुबे एक कैनो प्लेयर हैं और 4-7 सितंबर तक आयोजित होने वाली कैनो मैराथन विश्व चैंपियनशिप में भारत की ओर से खेलने वाले हैं.
पिता ने किया शिखर को प्रेरित
भिंड शहर के बीटीआई रोड इलाके में पले-बढ़े शिखर एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं. मां कविता गृहणी हैं और पिता राकेश दुबे एक सरकारी शिक्षक हैं. भिंड में उनके पिता गौरी सरोवर में खिलाड़ियों को अक्सर ड्रैगन बोट और कैनो कयाकिंग चलाते देखते थे. उन्होंने शिखर को इस खेल में आगे आने के लिए प्रेरित किया और उनके कहने पर शिखर ने ड्रैगन बोट में हाथ आजमाया.
ढाई साल में जीते कई मेडल्स
स्थानीय कोच राधे गोपाल यादव से ड्रैगन बोट और कैनो कयाकिंग की ट्रेनिंग शुरू की और सिर्फ ढाई साल की मेहनत में इस युवा खिलाड़ी ने ड्रैगन बोट में 6 नेशनल खेले और सभी में सिल्वर मेडल जीता है. इसके अलावा केनो में भी एक बार नेशनल चैंपियनशिप खेली है हालांकि उस चैंपियनशिप में वे चौथे नंबर पर रहे थे.
'सिलेक्शन पर पैरेंट्स को लगा मजाक कर रहा हूं'
शिखर का खेल के प्रति जनून लगातार बढ़ रहा है. यही वजह है उन्होंने चंडीगढ़ में 2-3 अगस्त को हुए कैनो मैराथन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए ट्रायल्स में भाग लिया था. 5 अन्य खिलाड़ियों के साथ उन्होंने भी इसमें सफलता हासिल की. शिखर बताते हैं कि "जब उनका नाम फाइनल हुआ और उन्होंने माता-पिता को बताया तो वे मानने को तैयार ही नहीं थे. उन्हें लगा की ये मजाक है लेकिन जब हंगरी से वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेने लिए वहां के केनो प्रेसिडेंट का इनविटेशन उनके घर पहुंचा तब घर वालों को यकीन हुआ. इसके बाद तो घर का माहौल ही बदल गया." पिता ने खुशी में सभी रिश्तेदारों को कॉल कर इस उपलब्धि की जानकारी दी.
सपनों के बीच आर्थिक संकट बन रहा रुकावट
शिखर के लिए यह चैंपियनशिप बहुत महत्वपूर्ण है और विदेश में होने की वजह से कुछ आर्थिक समस्याएं भी आ रही हैं. शिखर ने बताया कि "इस चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए उन्हें एसोसिएशन या सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है. ऐसे में इसमें भाग लेने के लिए खुद ही खर्च उठाना पड़ेगा. जिसमें करीब 2 से ढाई लाख का खर्चा होगा. लेकिन उनका परिवार सीमित और मध्यम वर्ग से है, जिसकी वजह से अब आर्थिक परेशानी हो रही है. हालांकि वे इसके लिए समाजसेवियों से फंड अरेंज करने की कोशिश कर रहे हैं."
विश्व पटल पर नाम रोशन करने को तैयार भिंड का बेटा
शिखर आने वाली 4 सितंबर को दिल्ली से हंगरी के लिए रवाना होंगे और वे बुडापेस्ट में 6 सितंबर को इस कैनो मैराथन वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेंगे. उन्हें उम्मीद है कि ये प्रतिस्पर्धा उनके खेल को जीवन में एक नया मुकाम देगी और वे देश-विदेश में भिंड का नाम रोशन करेंगे.
"थाईलैंड से भारत तक का ड्रग ट्रेल: भोपाल-बेंगलुरु में डीआरआई की छापेमारी में करोड़ों की बरामदगी"
23 Aug, 2025 09:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: राजधानी भोपाल में एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री का भंडाफोड करने के बाद भोपाल में दो आरोपियों से 24.186 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की है. यह दोनों आरोपी बेंगलुरु से राजधानी ट्रेन में सवार हुए थे. डीआरआई यानी राजस्व खुफिया निदेशालय की टीम ने दोनों को भोपाल जंक्शन पर नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार कर लिया.
प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो के मुताबिक, डीआरआई ने देशभर में ऑपरेशन वीड आउट चलाकर हाइड्रोपोनिक वीड की तस्करी में शामिल इस पूरे गिरोह का खुलासा किया है. देश भर में एक साथ की गई कार्रवाई में मास्टरमाइंड सहित 5 यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है.
एक साथ की गई छापामार कार्रवाई
डीआरआई के अधिकारियों ने क्रांतिवीर सांगोली रायन्ना रेल्वे स्टेशन बेंगलुरु और भोपाल जंक्शन पर एक साथ छापामार कार्रवाई की. कार्रवाई के दौरान दिल्ली के लिए रवाना हुई राजधानी ट्रेन (22691) में सफर कर रहे दो यात्रियों की बेंगलुरु में तलाशी ली गई तो इनके पास से 29.88 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुई.
इसी दौरान 19 अगस्त को बेंगलुरु से राजधानी ट्रेन में सवार हुए दो यात्रियों से भोपाल जंक्शन पर 24.186 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की गई. उधर, डीआरआई की एक अन्य टीम ने नई दिल्ली में इसके मास्टर माइंड को दबोच लिया. इसके पास से 1.02 करोड़ की राशि बरामद की गई. यह राशि मादक पदार्थ की तस्करी की थी.
थाईलैंड के यात्री से भी हुई पूछताछ
उधर, छापामार कार्रवाई के दौरान मिली जानकारी के बाद डीआरआई की टीम ने थाईलैंड से बेंगलुरु पहुंचे एक यात्री को बेंगलुरू के होटल में रोका गया. इसके पास से टीम ने 17.958 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की है. डीआरआई ने कार्रवाई के दौरान कुल 72 करोड़ रुपए कीमत का कुल 72.024 किलो हाइड्रोपोनिक बरामद किया है. इसके अलावा 1 करोड़ रुपए की अवैध आय भी जब्त की गई है, जो तस्करी से जुड़ी थी.
युवाओं को बनाते थे निशाना
पूछताछ में पता चला है कि गिरोह के सदस्य हाइड्रोपोनिक को खपाने के लिए युवाओं को निशाना बनाते थे. खासतौर से कॉलेज छोड़ चुके युवाओं, नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगारों तक इसे पहुंचाता था. इसके लिए यह सोशल मीडिया का सहारा लेते थे.
क्या होता है हाइड्रोपोनिक वीड
यह बेहद महंगा नशीला पदार्थ माना जाता है. इसकी अंतरराष्ट्रीय मूल्य एक करोड़ रुपए किलो तक होता है. यह एक तरह का गांजा होता है, लेकिन यह सामान्य गांजे से अलग होता है. इसका नाम हाइड्रोपोनिक वीड इसलिए होता है, क्योंकि इस गांजा की खेती मिट्टी में नहीं होती, बल्कि इसे बिना मिट्टी के हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाया जाता है. इसे उगाने के दौरान अधिक पोषक तत्व दिए जाते हैं और इसलिए इस तकनीक से उगाया गया गांजा में उच्च टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल पाया जाता है. इससे यह सामान्य गांजे से ज्यादा नशीला होता है.
“मेक इन इंडिया“ के तहत रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी बनने को तैयार
22 Aug, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मध्यप्रदेश रक्षा और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए नई पहचान बना रहा है। अनुकूल औद्योगिक माहौल, मजबूत बुनियादी ढांचा और अग्रणी नीतियों के बल पर राज्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार का नया केंद्र बनता जा रहा है। इसी उद्देश्य से रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और नए अवसरों पर चर्चा के लिए रक्षा इंडस्ट्री इंटरेक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया।
रक्षा उत्पादन विभाग, भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत ने कहा कि मध्यप्रदेश में रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण का हब बनने की अपार संभावनाएं हैं। हमारा प्रयास है कि एमएसएमई और स्टार्टअप को मजबूत सहयोग देकर उन्हें राष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भागीदार बनाया जाए। उद्योग, अकादमिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच निरंतर सहयोग ही इस क्षेत्र में नवाचार को गति देगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा। संयुक्त सचिव डॉ. भगत ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम एमएसएमई को रक्षा पीएसयू और बड़े प्राइवेट सेक्टर से सीधे जोड़ते हैं जिससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट वेंचर और महत्वपूर्ण प्रणालियों के सह-विकास के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि एसआरआईजन पोर्टल पर अब तक 39 हजार से अधिक प्रोडक्ट स्वदेशीकरण के लिए सूचीबद्ध हैं, जो निवेशकों और स्टार्टअप के लिए बड़े अवसर पैदा करते हैं। कार्यक्रम के दौरान जबलपुर के रक्षा उद्योग के मजबूत ईकोसिस्टम और वेंडर बेस पर विशेष चर्चा हुई। डॉ. गरिमा भगत ने बताया कि जबलपुर में 300 करोड़ रु. की लागत से एक मैन्युफैक्चरिंग, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा स्थापित की जा रही है, जिससे स्थानीय उद्योगों के लिए बड़े अवसर तैयार होंगे।
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और अनुकूल औद्योगिक वातावरण के कारण रक्षा निर्माण में निवेश के लिए देश का सबसे स्वाभाविक और सर्वोत्तम स्थान है। राज्य में ऑटो क्लस्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, तकनीकी वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स सैक्टर रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से विकसित हो रहे हैं। राज्य की एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी 2025 के अंतर्गत भूमि रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही पूंजीगत निवेश पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी और आरएंडडी, टेस्टिंग जैसी सुविधाओं पर आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश अपनी प्रगतिशील नीतियों, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचे और भारत सरकार के साथ मजबूत साझेदारी के माध्यम से रक्षा उत्पादन और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आयुक्त एमएसएमई सुप्रीति मैथिल ने भी एमएसएमई में डिफेंस सैक्टर के संबंध में जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें रक्षा पीएसयू, निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां, एमएसएमई, स्टार्टअप, शिक्षाविद और शोध संस्थान शामिल थे। प्रतिभागियों में अदाणी डिफेंस, बीईएल, हिंदुस्तान शिपयार्ड, गन कैरिज फैक्ट्री, ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज, फोर्स मोटर्स, एचईजी, जेबीएम, विनायक इंजीनियरिंग, सीआईपीईटी भोपाल, आईआईएसईआर भोपाल और सीएसआईआर-एएमपीआरआई जैसी अग्रणी इकाइयां शामिल रहीं।
संवाद सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने वाहनों, पुर्जों, प्रोटेक्टिव गियर, टेलीकॉम सिस्टम, एम्युनिशन और एडवांस मटेरियल्स के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर बातचीत की।
पेयजल व्यवस्था और सीवेज लाइन के कार्य दिसम्बर तक पूर्ण करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
22 Aug, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कलेक्ट्रेट रीवा के बाणसागर सभागार में नगर निगम में अमृत-2 योजना के तहत किए जा रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की। शुक्ल ने कहा कि अमृत-2 योजना से स्वीकृत पेयजल व्यवस्था से जुड़े सभी निर्माण कार्य दिसम्बर माह तक अनिवार्य रूप से पूरा करें। वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और 12 टंकियों का निर्माण सितम्बर माह तक पूरा कराकर इनकी टेस्टिंग शुरू कर दें। अमृत-2 योजना से 15 हजार घरों में नए नल कनेक्शन होंगे तथा पहले के घरों में पानी की आपूर्ति बेहतर होगी। इससे शहर के सभी वार्डों में मीठा पानी पर्याप्त मात्रा में पहुंचने लगेगा। आम जनता की मीठे पानी की वर्षों की मांग इससे पूरी होगी। निर्माण कार्य होने पर 94 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो सकेगी, जो शहर की आगामी 30 साल की जरूरत को पूरा कर सकेगी।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सीवेज लाइन का निर्माण तय समय सीमा में करें। बारिश समाप्त होते ही रोड रेस्टोरेशन का कार्य तेजी से कराएं। शेष बचे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण पूरा कराकर सितम्बर माह से सीवेज लाइन से घरों का कनेक्शन शुरू कर दें। कनेक्शन देने के बाद सड़कों के निर्माण का कार्य तेजी से पूरा कराएं। बिछिया नदी में मिलने वाले नालों के पानी को भी साफ करने की व्यवस्था करें। सीवेज लाइन निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद शहर की स्वच्छता में वृद्धि होगी। पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण और नदियों को स्वच्छ रखने का उद्देश्य भी इससे पूरा होगा।
आयुक्त नगर निगम डॉ. सौरभ सोनवड़े ने बताया कि पेयजल व्यवस्था से जुड़े सभी निर्माण कार्य 31 दिसम्बर तक पूरे हो जाएंगे। सीवेज लाइन में जयंती कुंज एसटीपी को छोड़कर शेष सभी का निर्माण अक्टूबर माह तक पूरा हो जाएगा। बाबा घाट एसटीपी का कार्य पूरा हो गया है तथा यहाँ अब गंदे पानी का शोधन करके साफ पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। बैठक में निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
एक देश एक चुनाव वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग और चुनौती : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
22 Aug, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में “एक देश एक चुनाव” संगोष्ठी में कहा कि एक देश एक चुनाव वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग और चुनौती है। देश में 1952 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ हुए हैं। अलग-अलगर कारणों से सरकारें भंग हुई और मध्यावधि चुनाव की नौबत आई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुन: एक देश एक चुनाव का कठिन संकल्प लिया है। जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी के अन्य संकल्प पूरे हुए उसी तरह यह संकल्प भी पूरा होगा। लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने पर हजारों करोड़ रुपए की बचत होगी। विकास कार्यों के लिए अधिक राशि और अधिक समय मिलेगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए हर व्यक्ति और हर मतदाता को जागरूक करके इसमें शामिल करना होगा। संगोष्ठी का आयोजन जेएनसीटी इंजीनियरिंग कालेज रीवा में किया गया।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में नशे की लत बड़ी सामाजिक बुराई के रूप में हमारे सामने कठिन चुनौती की तरह है। कोरेक्स और अन्य नशीले पदार्थों के कारण युवा पीढ़ी अपने उद्देश्य से भटक रही है। नशा तन, मन और धन तीनों का विनाश करता है। भावी पीढ़ी को नशे से बचाकर ही समाज और देश का विकास होगा। भावी पीढ़ी यदि नशे की राह में चली गई तो हर तरह का विकास बेमानी हो जाएगा। आज विकास के जो कार्य हो रहे हैं उनका सर्वाधिक उपभोग भावी पीढ़ी ही करेगी। नशे पर नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने करोड़ो रुपए के नशीले पदार्थ जप्त किए हैं तथा 600 से अधिक नशे के सौदागरों को जेल भेजा है। नशे की बुराई को समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों विशेषकर युवाओं को योगदान देना आवश्यक है। हर व्यक्ति जागरूक होकर और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझकर नशे का विरोध करे। जो नशे की गिरफ्त में हैं उन्हें उपचार और समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।
सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि एक देश एक चुनाव बहुत आवश्यक है। दुनिया के कई देशों में तीन-चार तरह के चुनाव एक साथ होते हैं। बेल्जियम में मतदाता एक बार मतदान करके पाँच अलग-अलग तरह के जनप्रतिनिधि चुनता है जिनसे लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय की सरकारों का गठन होता है। देश में भी प्रथम आम चुनाव से ही लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहाँ सर्वाधिक मतदाता हैं। यदि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने लगें तो करोड़ों मतदाता एक ही चुनाव में दो सरकारों के प्रतिनिधि चुन लेंगे। इससे परिश्रम, धन और समय तीनों की बचत होगी। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, पूर्व महापौर वीरेन्द्र गुप्ता, समाजसेवी डॉ. राजेन्द्र मिश्रा, राम सिंह, राजेश पाण्डेय, पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, कालेज के संचालक एस.एन. तिवारी, प्राध्यापकगण तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पशुपालन से किसानों की बढ़ेगी आय, बनेंगे आत्मनिर्भर
22 Aug, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें पशुपालन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह हमारा संकल्प है कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन निरंतर बढ़े और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की 'मिल्क कैपिटल' बनाया जाये। गो- संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किये जा रहे हैं।
प्रदेश में पशुपालन विभाग को गो-पालन विभाग का नाम दिया गया है। प्रदेश में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9% होता है, जिसे 20% तक ले जाने का सरकार का लक्ष्य है। प्रदेश में गोवंश के लिए आहार की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रतिमाह दी जाने वाली राशि को ₹20 से बढ़कर ₹40 कर दिया गया है। 'हर घर गोकुल' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश में 946 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना में प्रदेश के ग्रामों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के लिए प्रत्येक जनपद में एक वृंदावन ग्राम बनाया जा रहा है।
दुग्ध उत्पादन से अधिक आय के लिए मध्यप्रदेश दुग्ध संघ के सांची ब्रांड को अधिक लोकप्रिय बनाया जा रहा है, इसके लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से करार भी किया गया है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ दुग्ध उत्पादों की बेहतर ब्राडिंग, गोवंश की समुचित देखभाल, वेटनरी क्षेत्र में आवश्यक प्रशिक्षण और उन्नत अधोसंरचना स्थापित करने में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की विशेषज्ञता का हरसंभव लाभ लिया जा रहा है। वर्ष 2030 तक प्रदेश के 26 हजार गांवों तक डेयरी नेटवर्क का विस्तार सुनिश्चित किया जाना है। इससे 52 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन होगा। बढ़े हुए दुग्ध संकलन का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए आधुनिकतम दुग्ध प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित की जाएगी। प्रदेश में निर्मित होने वाले दुग्ध उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर ब्राडिंग सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश में पशुपालन और डेयरी विकास के लिए सरकार द्वारा नई योजनाएं शुरू की गई हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना में पशुपालक को 25 दुधारू पशु गाय, संकर गाय, भैंस की इकाई प्रदान की जाएगी। इस इकाई की लागत 36 से 42 लाख रुपए के बीच रहेगी। योजना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों के लिए 33 प्रतिशत एवं अन्य वर्ग के लिए 25% अनुदान की व्यवस्था की गई है। सरकार अब सिर्फ भैंस का नहीं गाय का दूध भी खरीदेगी। गाय के दूध की खरीद की कीमत बढ़ाई जाएगी। प्रदेश में "स्वावलंबी गो-शालाओं की स्थापना नीति 2025" भी लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में उपलब्ध गो वंश के आश्रय एवं भरण पोषण के लिए 05 हजार गो-वंश से अधिक की क्षमता वाली वृहद गो-शालाएं नगर निगम ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, भोपाल और जबलपुर में स्थापित की जा रही हैं।
गो-संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, नस्ल सुधार कार्यक्रम के साथ ही विभिन्न केंद्रीय योजनाओं का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में न केवल गोवंश का समुचित पालन-पोषण किया जा रहा है, अपितु दुग्ध उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
प्रदेश में स्वाबलंबी गो-शालाओं की स्थापना नीति पर तेज गति से कार्य किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत प्रदेश में 28 स्थान चिन्हित किए गए हैं तथा 8 स्वयं सेवी संस्थाओं को भूमि भी आबंटित भी की जा चुकी है। योजना में 5000 एवं अधिक गो-वंश के पालन पर शासन की ओर से 130 एकड़ तक भूमि आवंटित किए जाने का प्रावधान है। गो-शालाओं के लिए चारा-भूसा अनुदान योजना के अंतर्गत इस वित्त वर्ष में विभिन्न गो-शालाओं को 133.35 करोड रुपए दिए गए हैं। गत वर्ष इस योजना में 270.40 करोड़ रुपए गो-शालाओं को अनुदान के रूप में दिए गए थे।
प्रदेश में गो संवर्धन बोर्ड के अंतर्गत 2942 गो-शालाएं पंजीकृत हैं, जिनमें 2828 गो-शालाएं संचालित हैं। इन गो-शालाओं में 04 लाख 22 हजार गो-वंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। गत एक वर्ष में प्रदेश में कुल 623 गौशालाएं पंजीकृत हुई हैं, जिनमें 596 गौशालाएं मनरेगा योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं तथा 27 का संचालन स्वयंसेवी संस्थाएं कर रही हैं।
प्रदेश में अति पिछड़े बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारु पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा 90% अनुदान पर प्रत्येक हितग्राही को दो-दो मुर्रा भैंस/ गाय प्रदान की जाती है। योजना में गत वर्ष 660 के विरुद्ध 639 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया था तथा इस वर्ष 483 को पशु प्रदान किए जाने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर विदिशा तथा रायसेन जिलों में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में कुल 1500 " मैत्री" की स्थापना के लिए 12 करोड़ 15 लख रुपए की राशि प्राप्त हुई है। प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशु नस्ल सुधार के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
“स्पोर्ट्स साइंस सेंटर” मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर देगा नयी पहचान
22 Aug, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : भोपाल अब स्पोर्ट्स साइंस और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग का राष्ट्रीय हब बनने जा रहा है। खेल विभाग द्वारा नाथु बरखेड़ा स्थित स्पोर्ट्स सिटी में लगभग 25 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एवं हाई-परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र नवीनतम खेल प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक शोध से लैस होगा, जिससे खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ मानसिक दृढ़ता, चोट से बचाव और प्रदर्शन सुधार का भी संपूर्ण सहयोग मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं खेलों में गहरी रूचि रखते हैं और युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिये प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि आज के दौर में खिलाड़ियों को केवल पारंपरिक प्रशिक्षण से सफलता नहीं मिल सकती, उन्हें वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों का सहयोग भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ भोपाल में स्पोर्ट्स साइंस और हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की स्थापना की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई खेलों में गहन ध्यान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्कता होती है। अक्सर प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल तकनीकी कमी, मनोवैज्ञानिक दबाब या चोटो के कारण लक्ष्य हासिल करने में असफल हो जाते हैं। वर्तमान में खेलों में केवल कौशल या अच्छी कोचिंग ही पर्याप्त नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कढ़ी प्रतिस्पर्धा में खिलाड़ियों को हर उस कमी पर काम करना पड़ता है, जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती है। जैसे मनोविज्ञान, पोषण, बॉयोमेकेनिक्स। ऐसे परिदृश्यों को देखते हुए भोपाल में बड़े पैमाने पर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की आवश्यकता महसूस की गई।
केंद्र की मुख्य विशेषताएँ
भोपाल में बन रहा यह स्पोर्ट्स साइंस सेंटर देश का पहला ऐसा मॉडल होगा, जहां एक ही परिसर में खिलाड़ियों को फिजियोलॉजी, बॉयोमेकेनिक्स, काइन्सियोलॉजी, मनोविज्ञान, बॉयोकेमिस्ट्री और पोषण विज्ञान का समन्वित प्रशिक्षण उपलब्ध होगा। केन्द्र में खिलाड़ियों के लिये अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ और इकाइयां बनाई जा रही हैं। इसमें फिजियोलॉजी लैब, जिसमें VO2 मेक्स टेस्टिंग, बॉडी कंपोजीशन एनालिसिस, बॉयोमेकेनिक्स लैब जिसमें मोशन कैप्चर, गेट एनालिसिस, फोर्स-प्लेट टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त मनोविज्ञान इकाई जिसमें खिलाड़ियों की मानसिक दृढता, तनाव एवं चिंता प्रबंधन पर काम किया जायेगा। सेंटर में पोषण और बॉयोकेमिस्ट्री सपोर्ट यूनिट की स्थापना भी की जायेगी, जिसमें ब्लड मार्कर टेस्टिंग और वैज्ञानिक डाईट सपोर्ट से खिलाड़ियों पर निगरानी रखी जायेगी। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिये रिकवरी सूट की भी व्यावस्था की गई है, जिससे हाईड्रोथेरेपी, क्रायोथेरेपी और फिजियोथेरेपी की जा सकेगी।
केंद्र में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, पोषण विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट और डेटा विश्लेषक खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रोफाइल बनाकर उनके प्रदर्शन सुधार के लिए सलाह देंगे। खिलाड़ी की कमजोरियों और आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार होंगे।
स्पोर्ट्स साइंस सेंटर न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई ऊँचाई देगा, साथ ही प्रदेश के उभरते हुए खिलाड़ियों को भी वैज्ञानिक प्रशिक्षण का लाभ उपलब्ध कराएगा। यह पहल भोपाल को स्पोर्ट्स साइंस का राष्ट्रीय हब बनायेगी और भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने की दीर्घकालिक रणनीति को गति देगी।
निवेशकों को करायेंगे प्रदेश की खनिज संपदा और निवेश नीतियों से अवगत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
22 Aug, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 23 अगस्त को कटनी मे 'मध्यप्रदेश माइनिंग कॉनक्लेव 2.0' का आयोजन किया जा रहा है। कॉनक्लेव का मुख्य फोकस क्षेत्र कोयला एवं ऊर्जा, ऊर्जा एवं हाइड्रोकार्बन, प्रौद्योगिकीय प्रगति, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और चूना पत्थर एवं सीमेंट होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समिट में शामिल होने वाले विषय-विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे। कॉन्क्लेव में लगभग 2 हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिनमें देश के विभिन्न राज्यों के निवेशक और उद्योगपति शामिल हैं। कॉन्क्लेव में मिनरल एवं माईनिंग से संबंधित विभिन्न सत्रों के दौरान चर्चा होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश खनन और खनिज संसाधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। प्रदेश खनिजों की प्रचुरता और सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों के कारण देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खनन क्षेत्र न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृण करेगा, अपितु देश के औद्योगिक विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
खनिज सम्पदा पर केन्द्रित प्रदर्शनी
मध्यप्रदेश खनिज संपदा से भरपूर है। खनन क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्पादन में मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान हैं। यहां राष्ट्रीय उत्पादन का 73% तांबा, 29% रॉक फॉस्फेट, 26% मैंगनीज, 9% चूना पत्थर, 8% कोयला, 3% बॉक्साइट और एक प्रतिशत लोह अयस्क मिलता है। प्रदेश में मौजूद खनिज संपदा को प्रदर्शित करते हुए कॉन्क्लेव स्थल पर प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
देश के बड़े औद्योगिक घरानों ने कॉन्क्लेव में दिखाई दिलचस्पी
कटनी माईनिंग कॉन्क्लेव में देशभर के बड़े औद्योगिक घरानों ने दिलचस्पी दिखाई है। कॉन्क्लेव में डायरेक्टर जनरल जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया राजेश जोशी, चीफ कंट्रोलर ऑफ माइन्स इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स नागपुर पंकज कुलश्रेष्ठ, सीएमडी एचसीएल संजीव कुमार सिंह, डायरेक्टर (फाइनेंस) एमईसीएल सुरेन्द्र सिंह क्षत्रिय, जीएम बिजनेस डेवलपमेंट सीआईएल चंद्र शेखर सिंह, डायरेक्टर एसईसीएल बिलासपुर बिरांची दास, डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ एंड एनवायरमेंट साइंसेस के प्रो. डॉ. प्रीतम नासपुरी एवं प्रो. डॉ. ए.के. तिवारी, टेक्समिन के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर एमडी दानिश और प्रोजेक्ट डायरेक्टर धीरज कुमार, आईबीएम नागपुर के चीफ ओर ड्रेसिंग ऑफिसर एंड डायरेक्टर दिलीप रंजन कानुगो, सीईओ आई-एनर्जी नीरज गुप्ता, डायरेक्टर एलीटेक अजीत चौधरी, एकेएस यूनिसर्विटी के प्रो. जी.के. प्रधान, एग्जीक्युटिव डायरेक्टर डेलोइट तुशार चक्रवर्ती, एग्जीक्युटिव डायरेक्टर एचसीएल नागेश शिनोय, एमडी रामनिक पॉवर एंड एलोयस हर्ष व्ही. त्रिवेदी एवं डायरेक्टर निष्क्षल के. त्रिवेदी, डायरेक्टर एमओआईएल एमएम अब्दुल्ला, ऑनर विनमीर रिसोर्सेस प्रा.लि. गोविंद ए. शोरेवाला, डायरेक्टर सिंघाल बिजनेस प्रा.लि. राहुल अग्रवाल, डायरेक्टर लोहम एंड सीईओ चिदंबरम मदन, सीनियर मैनेजर (टेक्नीकल) आईआरईएल बी.एस. तलवार, चीफ स्ट्रेटजी एंड बिजनेस डेवलपमेंट अडानी सीमेंट भीमसी कचोट, एमडी माइनवेयर एडवाइजर्स प्रा.लि. कौशिक बोस, डायरेक्टर (माइनिंग एंड स्ट्रेटजिक प्रोजेक्ट) एरसेलोर मित्तल आलोक मेहता, डायरेक्टर महाकौशल रिफ्रैक्टरीज प्रा.लि. मयंक गुग्गली और सीईओ ऑरो नेचुरल रिसोर्सेस प्रा.लि. अफरोज शामिल हों
खनिज कंपनियों, उद्योग प्रतिनिधियों और हितधारकों को मिलेगा मंच
कटनी का माइनिंग कॉन्क्लेव खनिज कंपनियों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाएगा, जिससे सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। इस आयोजन का उद्देश्य मध्य प्रदेश के समृद्ध खनिज संसाधनों को प्रदर्शित करना है, जिससे राज्य में निवेश को आकर्षित किया जा सके। इसमें कोयला, चूना पत्थर, तेल और गैस, सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही खनन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग की भूमिका पर भी जोर दिया जाएगा।
इस आयोजन में डिजिटल परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें खनन कार्यों में ऑटोमेशन के साथ एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग पर चर्चा होगी। कोल गैस (सीबीएम) जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया जाएगा। सीमेंट, ऊर्जा, और खनिज-आधारित उद्योगों से संबंधित मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। कॉन्क्लेव में कई संस्थानों के साथ एमओयू भी होंगे, जिससे राज्य के खनन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए सभी निवेश प्रस्ताव फलीभूत होंगे।
इनके बीच होगा एमओयू
माइनिंग कॉन्क्लेव में कोल इंडिया लिमिटेड, संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, म.प्र. शासन तथा मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम लिमिटेड के मध्य क्रिटिकल मिनरल एवं अन्य खनिजों के पूर्वेक्षण एवं खनन के लिए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किये जाएगें। इसके अलावा संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, मध्यप्रदेश शासन, मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम लिमिटेड एवं टैक्समिन के बीच समझौता ज्ञापन तथा संचालनालय, भौमिकी तथा खनिकर्म, मध्यप्रदेश राज्य खनन निगम लिमिटेड और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल (आई.आई.एस.ई.आर.बी.) के मध्य समझौता ज्ञापन कया जायेगा।यह समझौता ज्ञापन भारत की खनिज अन्वेषण महत्वाकांक्षाओं को मज़बूत करने और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग, समन्वित प्रयासों और संसाधन साझाकरण की नींव रखेगा।
म.प्र. माइनिंग कॉन्क्लेव 1.0 में मिले थे 19,650 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
प्रदेश में पहली खनिज कॉन्क्लेव 17 एवं 18 अक्टूबर 2024 को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न 11 औद्योगिक संस्थानों की ओर से 19 हजार 650 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
मध्यप्रदेश को बना रहे हैं देश का नया फूड बॉस्केट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
22 Aug, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बीते 20 सालों में मध्यप्रदेश का परिदृश्य बड़ी तेजी से बदला है। हम मध्यप्रदेश को देश का 'मॉडल स्टेट' बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। हमारी सरकार मध्यप्रदेश को देश का 'न्यू फूड बॉस्केट' बनाने के लिए तेजी से प्रयत्नशील हैं। हमारे अन्नदाता किसानों की मेहनत से प्रदेश के अनाज भंडार अन्न से भरे पड़े हैं। मध्यप्रदेश वह प्रदेश है, जहां तेजी से जिलों में मैडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। हमारी सरकार पीपीपी मॉडल पर मैडिकल कॉलेज खोलने के लिए निवेशकों को मात्र एक रूपए में 25 एकड़ जमीन और 10 साल के लिए अपना जिला-संभागीय अस्पताल भी देने को तैयार है। निवेशक मेडिकल कॉलेज के लिए जब अपना खुद का अस्पताल तैयार कर लेंगे, तब 10 साल बाद हम अपना जिला चिकित्सालय उनसे वापस ले लेंगे। यह निवेशकों को सरकार की ओर से दोहरी मदद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नई दिल्ली में एक निजी मीडिया समूह द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ मध्यप्रदेश से हुआ। करीब एक लाख करोड़ रूपए की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड के सारे जिले और लगभग 70 हजार करोड़ रूपए लागत की पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से मालवा और चंबल के सभी जिलों में सिंचाई और पेयजल की स्थाई सुविधा उपलब्ध कराएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारी पूरे जोर-शोर से जारी है। श्रीमहाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन की तस्वीर ही बदल गई है। उज्जैन शहर की आबादी फिलहाल 7 लाख है, पर अब देश-विदेश से हर साल 7 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालु श्रीमहाकाल बाबा और श्रीमहाकाल लोक के दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्री महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन शहर में ही 200 से अधिक होटल खुल गये हैं, इससे शहर और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए एक हजार एकड़ जमीन भी पूरी उपयोग में आ गई, इसलिए अब हम एक हजार एकड़ जमीन का लैण्ड बैंक पुन: आरक्षित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी पर हमारा पूरा फोकस है। हम मध्यप्रदेश में नई एविएशन पॉलिसी लेकर आए हैं। इस पॉलिसी के अंतर्गत हमारे खुद के प्लेन प्रदेश में शुरू करने के लिए इंसेंटिव भी दिए जा रहे हैं। गंभीर रोग के इलाज के लिए बड़े शहर जाने की आवश्यकता पड़ने पर हम समर्थ को सशुल्क और आयुष्मान कार्डधारियों को नि:शुल्क एयर एम्बुलेंस उपलब्ध करा रहे हैं। इनके लिए हमारी हेलीकॉप्टर सेवा भी जारी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। मानवता के विकास के लिए सड़क हादसे के घायलों की सहायता के लिए राहवीर योजना के तहत मददगार व्यक्ति को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में शहरीकरण को बढ़ावा दे रही है। इंदौर मेट्रो की शुरूआत के बाद भोपाल मेट्रो पर काम तेजी से चल रहा है। इसके बाद हम जबलपुर और ग्वालियर शहर में भी मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए आगे बढ़ेंगे। इंदौर और भोपाल में मेट्रोपोलिटन सिटी एरिया बनाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए हमारी सरकार निवेशकों को तरह-तरह के इंसेंटिव दे रही है। यही कारण है कि फरवरी 2025 में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मध्यप्रदेश सरकार को 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उज्जैन में इलेक्ट्रानिक्स क्लस्टर भी तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना पर हमारा पूरा फोकस है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति मजबूत है। इसे और मजबूत करने के लिए बजट को डबल करने की योजना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। श्रम कानूनों में सुधार किया गया है। देश में सर्वाधिक तीव्र गति से खर्च करने में राज्य देश के तीन राज्यों में से एक है। देश को आत्मनिर्भर बनाने में मध्यप्रदेश अपना योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में देश में नई शिक्षा नीति लागू करने में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। हमने टूरिज्म में अवॉर्ड जीते और शासकीय संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सबसे अधिक सस्ती बिजली म.प्र. द्वारा प्रदान की जा रही है। वर्ष 2003 से बाद राज्य ने अपनी विशेष पहचान स्थापित की है। देश में सर्वाधिक सिंचित भूमि राज्य में है। हम प्रदेश में उत्पादित अनाज की फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की ओर भी आगे बढ़ रहे है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। मध्यप्रदेश नदियों का मायका भी है। यहां से 247 से अधिक नदियां निकलती हैं। प्रदेश में जंगल, पर्यटन, खनिज और धार्मिक पर्यटन की अपार क्षमताएं हैं। राज्य सरकार अब हैल्थ टूरिज्म पर भी कार्य कर रही है। राज्य ने 66 हजार करोड़ का निर्यात किया है, मध्यप्रदेश की ग्रोथ 6 प्रतिशत रही है। ये हमारी क्षमता का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में पहली बार इसी साल फरवरी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की गई। लेकिन सरकार बनने के बाद हमने प्रदेश के विभिन्न शहरों में क्षेत्र की क्षमताओं के अनुरूप रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से उद्योग घरानों को जोड़ा जा रहा है। राज्य में खनिज के भंडार हैं। उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है। प्रदेश में पानी पर्याप्त है। मध्यप्रदेश के पास बिजली क्षमता सरप्लस है। पहले उद्योग शुरू करने के लिए 29 प्रकार की अनुमतियां लेनी पड़ती थीं, अब उन्हें घटाकर 10 कर दिया गया है। निवेशकों को उद्योग प्रोस्साहन का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग लगाने पर प्रति श्रमिक 5000 हजार की सहायता 10 साल के लिए दी जा रही है। भारी उद्योग और एमएसएमई को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योग केन्द्रित 18 नई नीतियां लागू की हैं। इसके अंतर्गत अलग-अलग कमेटी गठित की गई हैं। उद्योगपतियों के प्रस्तावों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बिजली, पानी और भूमि आवंटन में छूट देते हैं। प्रदेश सरकार ने एक साल में 285 उद्योगों को भूमि आवंटन की है। मैट्रो कोच निर्माण फैक्ट्री के लिए बीईएमएल को लैंड आवंटित करने के बाद उसका भूमिपूजन भी हो गया है। सभी सेक्टर्स में सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से सरलीकृत व्यवस्था लागू है। उद्योगपरक कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए हमें सिर्फ 15 महीने मिले। इसमें से तीन महीने सरकार ने उद्योगों को बढ़ाने के लिए कार्य किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 4 लाख करोड़ से अधिक का बजट पेश किया है और इसे 5 साल में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। हर साल बजट को लगभग 15 प्रतिशत की दर से बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के आधार पर लाड़ली बहना योजना को राशि दी जा रही है। अगर लाड़ली बहन रोजगार परक उद्योग में कार्य करती है तो उसे 1500 रुपए की मासिक सहायता के साथ वेतन में 5000 रुपए प्रोत्साहन अलग से प्रदान किया जा रहा है। सरकार ने श्रम कानून में जरूरी बदलाव किए हैं। बहनें भी अब नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं। काम के घंटे और छुट्टियों में संशोधन किए गए हैं। वित्तीय व्यवस्था के लिए राज्य को 3 प्रतिशत की लिमिट मिली है और इसी सीमा के अंदर सारे काम किए जा रहे हैं। यह हमारी स्वयं की पूंजीगत व्यय की क्षमता है। वर्तमान में देश में सिर्फ 3 राज्य- मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश हैं, जिनकी ग्रोथ तेज गति से हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशा है कि हमारा देश स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग की राह पर चलते हुए आत्मनिर्भर बने। मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार के साथ पूरी ताकत से सहयोगी बन रहा है। हम गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करेंगे। मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू की। पर्यटन कॉरपोरेशन और अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी का चेयरमैन रहते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया और न्यूनतम खर्च में अधिकतम कार्य करके दिखाया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली सरप्लस है। दिल्ली की मैट्रो हमारी बिजली से भी चलती है। राज्य सरकार मेहनत कर रही है। सभी सैक्टर्स में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश की ग्रोथ पहले थोड़ी चुनौतीपूर्ण रही है पर अब हम तेजी से आग्र बढ़ रहे है। वित्त वर्ष 2002-03 के बाद मध्यप्रदेश ने अपनी नई पहचान बनाई है। अब हम सभी सैक्टर्स में कई गुना आगे बढ़ रहे हैं। देश के 10 अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल हो चुका है। मध्यप्रदेश के पास सबसे अधिक सिंचित क्षेत्र है।
“गांव की पगडंडियों पर जो सुकून है, वो शहर की गलियों में कहां”
22 Aug, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : सतपुड़ा की वादियों में बसे छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन-ग्राम अब पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण बन गये हैं। ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, पहाड़ी ट्रैकिंग और लोक नृत्य सब कुछ एक ही जगह पर्यटकों को मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों में यहां बनाये गये होम-स्टे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है। मध्यप्रदेश में होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति तथा ग्रामीण जीवन के अनुभव कराने के उद्देश्य से ग्रामीण पर्यटन परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के 100 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है।
होम-स्टे से रूका पलायन
मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किये गये छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे देश-प्रदेश के पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। हर सप्ताह यहां हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। जिले के 12 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित किया गया है। इनमें से 7 गांव सावरवानी, देवगढ़, काजरा, गुमतरा, चोपना, चिमटीपुर और धूसावानी में 36 होम-स्टे पर्यटकों के लिये खोले जा चुके हैं। होम-स्टे खुलने से ग्रामीण रोजगार और उच्च शिक्षा का रूझान बढ़ा है। साथ ही जनजातीय परिवारों का पलायन भी रूक गया है। गांव के युवा गाइड के रूप, लोक नृत्य और भजन मंडली की प्रस्तुति और बैलगाड़ी संचालन से सैलानियों को ग्रामीण जन-जीवन से अवगत कराते हुए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।
हर पर्यटन ग्राम की अपनी पहचान
छिंदवाड़ा जिले के हर पर्यटन ग्राम की अपनी विशेषता है। भोपाल मार्ग पर साल के जंगल के बीच बसे चोपना में देवना नदी का अद्भुत नजारा, पातालकोट के चिमटीपुर गांव की रहस्यमयी वादियां, पेंच नेशनल पार्क के करीब ऑफबीट डेस्टीनेशन गुमतारा, देवगढ़ में गोंड शासन का ऐतिहासिक किला, काजरा में बंधान डेम के बेकवॉटर्स का सौंदर्य और धूसावानी गांव के चौरागढ़ महादेव मंदिर का दृश्य और आम के बागान पर्यटकों को यहां बार-बार आने के लिये प्रेरित करते हैं। होम-स्टे में पर्यटक गाय का दूध दोहने, खेत के कामों में हाथ बटाने और पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करने जैसे अनुभव जीते हैं। ढोलक-मंजीरे के साथ भजन और कर्मा नृत्य मंडलियों की प्रस्तुति भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। अब छिंदवाड़ा सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि सतत ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।
SIT जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, आरिफ मसूद को मिली राहत, विरोधियों को झटका
22 Aug, 2025 05:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। मप्र हाईकोर्ट जबलपुर ने 4 दिन पहले एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी जांच के आदेश दिए थे, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया है। उनकी तरफ से कबिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने पक्ष रखा था। बता दें कि कॉलेज की मान्यता फर्जी दस्तावेज लगाकर लिए जाने संबंधी शिकायत पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद और इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता मामले को लेकर बड़ी राहत दी है। एससी में जस्टिस जेके माहेश्वरी की बैंच में मसूद की तरफ से अधिवक्ता कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा और वरुण तन्खा ने पक्ष रखते हुए जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश को लेकर तर्क रखे थे। कोर्ट ने सुनवाई के बाद जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर और एसआईटी जांच के आदेश पर स्टे जारी किया है।
कॉलेज की मान्यता और फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा है मामला
दरअसल भोपाल के खानू गांव में इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज स्थिति है। आरिफ मसूद इसकी समिति में सचिव हैं। कॉलेज की मान्यता को लेकर पूर्व विधायक ध्रुवरानायण शुक्ला ने शिकायत की थी कि कॉलेज प्रबंधन और समिति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता ली है। मामले में जांच बाद उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त ने यह माना था कि अमन सोसाइटी ने कॉलेज संचालन के लिए फर्जी दस्तावेज के आधार पर एनओसी व मान्यता प्राप्त की थी।
कोहेफिजा थाने में मसूद पर धोखाधड़ी का केस दर्ज
मामले में जबलपुर हाईकोर्ट की बैंच ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज मान्यता मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद बीते सोमवार को भोपाल कमिश्नर को आदेश दिए थे कि तीन दिन में एफआईआर दर्ज कराई जाए। इस मामले में एसआईजी जांच के आदेश कोर्ट ने दिए थे। इसके बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। इधर कॉलेज में नए प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
हाईकोर्ट ने SIT से जांच व 90 दिन में रिपोर्ट मांगी है
बता दें कि कॉलेज को कूटरचित व फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता मामले में हाईकोर्ट ने एसआईटी गठित कर जांच के आदेश देते हुए 90 दिन में एसआईटी को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। वहीं उच्च शिक्षा ने कॉलेज की मान्यता रद्द की दी थी, लेकिन विद्यार्थियों का हित देखते हुए कॉलेज में पढ़ाई को जारी रखा गया था। आरिफ मसूद कॉलेज की संचालन समिति में सचिव हैं।
कौन है सारांश की ‘सपना’? अर्चना तिवारी केस में नया ट्विस्ट
22 Aug, 2025 01:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: अर्चना तिवारी को काठमांडू भागने में शुजालपुर के सारांश जोगचंद ने मदद की थी। सारांश जोगचंद से ही रेल पुलिस को अर्चना तिवारी के बारे में जानकारी मिली थी। वह मूल रूप से शाजापुर जिले के शुजालपुर का रहने वाला है। अर्चना तिवारी ने बरामदगी के बाद पुलिस को बताया था कि सारांश उसका दोस्त है। वहीं, सारांश के पिता जोगचंद्र ने बेटे का नाम सामने आने के बाद यह जरूर कहा था कि उसका किसी के साथ अफेयर है। उसका नाम उसने सपना बताया था।
कौन है सारांश की सपना?
सारांश के पिता की माने तो बेटे ने तीन महीने पहले अपने प्रेम संबंध का जिक्र किया था। वह इंदौर में ही रहता था। लेकिन उसने लड़की का नाम सपना बताया था। सपना पेशे से वकील है। मैंने उसे सलाह दी थी कि कुछ गलत नहीं करना। सारांश ने अपने पिता को बताया था कि सपना नाम की लड़की है। वह भी वकील है। मैंने उससे कई कागज बनवाए हैं।
अर्चना का नाम नहीं सुने
वहीं, पिता ने कहा था कि मैंने उससे अर्चना तिवारी का नाम नहीं सुना है। कागज के काम से ही वह सपना के संपर्क में था। ऐसे में सवाल है कि क्या अर्चना ही सपना है क्या। पुलिस ने अर्चना की बरामदगी के बाद कहा था कि वह सारांश के संपर्क में काम के दौरान आई थी। सारांश ने अर्चना से अपनी कंपनी के दस्तावेज भी बनवाए थे। लेकिन परिवार और अर्चना खुद भी सारांश से प्रेम संबंध की बात को खारिज की। हालांकि इस मामले में जांच जारी है।
सारांश के पिता हमेशा यह कहते रहे हैं कि मैं अर्चना को नहीं जानता हूं। वह सात और आठ अगस्त को चेन्नई में था। फोन पर बेटे से बात होते रहती थी। मैं सिर्फ हालचाल पूछते रहता था। मां को भी सारांश ने सपना के बारे में ही बताया। वहीं, मां ने इनकार कर दिया था कि हम इतने बड़े परिवार में शादी नहीं करेंगे।
सारांश ने ही की अर्चना की मदद
वहीं, अर्चना तिवारी की साजिश में खुलकर सारांश जोगचंद ने ही मदद की थी। इटारसी रेलवे स्टेशन से ले जाने से लेकर काठमांडू भिजवाने तक में सारांश जोगबंद ने की मदद की। साथ ही काठमांडू में रहने की व्यवस्था भी उसी ने करवाई थी। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि सब कुछ दाव पर लगाकर सारांश जोगचंद ने क्यों मदद की। क्या दोनों सिर्फ दोस्ती तक की सीमित हैं। दोनों की बातें सिर्फ व्हाट्सएप कॉल पर होती थी।
सीहोर वेयरहाउस में आग का तांडव, ट्रक चपेट में; दमकलकर्मियों ने समय रहते पाया काबू
22 Aug, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीहोर । सीहोर शहर के जमुनिया रोड स्थित साइलो वेयर हाउस पर खड़े एक खाली ट्रक में गुरुवार-शुक्रवार की देर रात अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना करीब रात 12:45 बजे की है। देखते ही देखते लपटें इतनी तेज हो गईं कि पूरा ट्रक जलकर खाक हो गया। आगजनी का यह मंजर आसपास के लोगों के लिए दहशत का कारण बन गया।
आग लगते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना पाते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड चालक आरिफ खान और फायरमैन अतीक खान ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया। उनकी तत्परता से आसपास खड़े अन्य ट्रक और वेयरहाउस सुरक्षित बच गए, वरना नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
घटना का वीडियो मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने अपने मोबाइल से बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह आग की लपटें रात के अंधेरे में आसमान तक उठ रही थीं और फायर ब्रिगेड की टीम उसे काबू करने में लगी हुई थी।
बड़ा खतरा टला
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वेयरहाउस परिसर में अन्य ट्रक भी खड़े हुए थे। अगर आग उन तक पहुंच जाती तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन समय रहते दमकलकर्मियों के पहुंचने और सक्रियता से आग को काबू में कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में आगजनी का कारण ट्रक की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट कारणों की पुष्टि नहीं की है। जांच जारी है और विशेषज्ञ टीम भी घटना स्थल का निरीक्षण कर रही है।
पुलिस कर रही है जांच
घटना के समय ट्रक में कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि ट्रक किसका है और उसे वहां क्यों खड़ा किया गया था। मंडी थाना प्रभारी सुनील मेहर ने बताया कि पुलिस ट्रक के नंबर के आधार पर मालिक की पहचान कर रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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