मध्य प्रदेश
म.प्र. के पर्यटन स्थलों ने वैश्विक पटल पर बनाई पहचान
28 Aug, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विरासत से विकास’ के मार्ग पर चल कर सांस्कृतिक अभ्युदय और वैश्विक पुनर्जागरण के नए युग में प्रवेश कर रहा है। इसमें पर्यटन की भूमिका भी अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री का मानना है कि पर्यटन आर्थिक लाभ का साधन होने के साथ ही भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने का साधन है।
मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। यहां की ऐतिहासिक धरोहर, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल और लोक परंपराओं की समृद्धि इसे विश्व पर्यटन मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिला रही हैं। एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ने विगत वर्ष मध्यप्रदेश को दुनिया के टॉप-10 टूरिज्म डेस्टिनेशन में शामिल किया, जो हमारे लिए गौरव का विषय है। इस संदर्भ का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 25 दिसम्बर को खजुराहो में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती कार्यक्रम में करते हुए प्रदेश के प्रयासों की सराहना की थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश का पर्यटन क्षेत्र अभूतपूर्व विरासत से विकास के विस्तार पथ पर चल कर नये युग में प्रवेश कर चुका है। मध्यप्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में ऊंची छलांग लगाकर न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है।
इस परिवर्तन की आधारशिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में बनी 'मध्यप्रदेश पर्यटन नीति-2025' है। यह नीति पर्यटन के संचालन और निवेश के क्षेत्र को नया आकार देने वाली व्यापक रणनीति है। इस नीति का उद्देश्य राज्य में पर्यटन ईकोसिस्टम विकसित करना है, जो पर्यटन को बढ़ावा देने वाली अधोसंरचना विकसित करने में सहायक सिद्ध हुई है। साथ ही इस नीति ने प्रदेश को ग्लोबल संपर्क बढ़ाने की दिशा का रोडमैप भी उपलब्ध कराया है। यह नीति निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करती है, साथ ही ईको टूरिज्म, आध्यात्मिक पर्यटन और धरोहरों के संरक्षण के लिए व्यापक अवसर प्रदान करती है।
प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को मिली अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि
खजुराहो नृत्य समारोह, तानसेन संगीत समारोह, भगोरिया उत्सव और लोकरंग जैसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।
विक्रमोत्सव जैसे आयोजन उज्जैन को विश्व सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दे रहे हैं और भारतीय पुनर्जागरण के वाहक बन रहे हैं।
उज्जैन में डमरू वादन, ग्वालियर में ताल दरबार (तबला वादन), भोपाल में गीता पाठ और खजुराहो में कथक कुंभ (नृत्य मैराथन) ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है।
ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, चित्रकूट का राम वन पथ गमन, जानापाव और संदीपनि आश्रम जैसे केंद्र आध्यात्मिक पर्यटन की पहचान बन चुके हैं।
प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के विभिन्न स्थलों में लोक एवं स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें सागर में संत रविदास लोक, जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक, सीहोर में देवी लोक सलकनपुर, ओरछा, जिला निवाड़ी में रामराजा लोक, पांढुर्णा में जाम सॉवली हनुमान लोक, मंदसौर में पशुपतिनाथ लोक, ग्वालियर में अटल स्मारक, महू जिला इंदौर में परशुराम लोक जानापाव, भोपाल में महाराणा प्रताप लोक, नीमच में भादवामाता लोक, जबलपुर में रानी अवंतीबाई स्मारक, अमरकंटक जिला अनूपपुर में माँ नर्मदा महालोक, खरगौन में देवी अहिल्या लोक और बड़वानी में नागलवाडी लोक बनाया जा रहा है।
ग्रामीण, साहसिक और जलीय पर्यटन
होम-स्टे योजना से ग्रामीणों को सीधा आर्थिक लाभ और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव हो रहा है।
साहसिक पर्यटन में उज्जैन स्काई-डाइविंग फेस्टिवल, पचमढ़ी और भोपाल मैराथन प्रमुख आकर्षण केन्द्र बने।
नर्मदा नदी पर जल पर्यटन परियोजनाएं, महेश्वर की पर्यावरण-अनुकूल नावें और पोंटून जेटी नई पहचान गढ़ रहे हैं।
डबल-इंजन सरकार की सिनर्जी
स्वदेश दर्शन 2.0 और प्रसाद योजनाओं के तहत 2024-25 में 118.91 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई।
अमरकंटक, दतिया पीताम्बरा पीठ, ग्वालियर फूलबाग और चित्रकूट घाटों का विकास हो रहा है।
ओरछा और मांडू को ‘चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन’ के रूप में चुना गया है।
वैश्विक पहचान
जापान में आयोजित विश्व गुलाब सम्मेलन और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलनों में मध्यप्रदेश की सक्रिय भागीदारी रही।
आगामी 29-30 अगस्त 2025 को ग्वालियर में होने वाला क्षेत्रीय पर्यटन सम्मेलन राज्य की नीतियों और निवेश संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच देगा। आज मध्यप्रदेश पर्यटन केवल आर्थिक वृद्धि का साधन नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को दुनिया तक ले जा रहा है।
मध्यप्रदेश पर्यटन की उपलब्धियां
वर्ष 2024 में अक्टूबर तक 10.70 करोड़ पर्यटक आए। यह संख्या वर्ष 2022 के 3.41 करोड़ से तीन गुना अधिक है।
मध्यप्रदेश में देश के सबसे अधिक 785 बाघ, 11 राष्ट्रीय उद्यान, 8 टाइगर रिजर्व और 25 वन्य अभयारण्य हैं।
राज्य के पास 14 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। ग्वालियर को “सिटी ऑफ़ म्यूज़िक” का दर्जा मिला है।
पर्यटन नीति 2025 के तहत 214 करोड़ रुपये से अधिक निजी निवेश आकर्षित हुए और लगभग 2 लाख रोजगार सृजित हुए।
महिला सुरक्षा हेतु ‘महिला सुरक्षित पर्यटन स्थल’ योजना को निर्भया फंड से समर्थन मिला है।
132 फिल्म परियोजनाओं की शूटिंग से मध्यप्रदेश फिल्म पर्यटन का केंद्र बना है।
ग्रामीण पर्यटन के लिए 100 गांवों में 1000 से अधिक होम-स्टे विकसित किये गये हैं।
भोपाल का मिंटो हॉल 99.4 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय MICE केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
जापान के विश्व गुलाब सम्मेलन से लेकर ग्वालियर में होने वाले क्षेत्रीय पर्यटन सम्मेलन तक मध्यप्रदेश की वैश्विक उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।
ग्वालियर 29 एवं 30 अगस्त 2025 को होने वाली रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव, की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। कॉन्क्लेव में निवेश नीति निर्धारक, निवेशक, उद्योगपति और पर्यटन के अन्य अनेक हितधारक मध्यप्रदेश की अभिनव पर्यटन नीतियों तथा पहलुओं से परिचित होंगे एवं विचार-मंथन करेंगे।
मध्यप्रदेश में खेलों की 70 वर्षों की यात्रा : परंपरा से आधुनिकता तक
28 Aug, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : स्वतंत्रता से लेकर आज तक मध्यप्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक लंबी और प्रेरणादायक यात्रा तय की है। शुरुआती दशकों में जहाँ खेल केवल एक सीमित दायरे में थे, वहीं धीरे-धीरे यह प्रदेश खेल प्रतिभा का गढ़ बन गया। खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर प्रदेश और देश का नाम रौशन किया। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहर धीरे-धीरे खेल प्रतिभा के गढ़ बनते गए और आज स्थिति यह है कि मध्यप्रदेश, भारत के खेल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान बना चुका है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों ने क्रिकेट, हॉकी और मल्लखम्ब जैसे खेलों को पहचान दिलाई। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी मैदानों तक खेलों ने युवाओं के बीच ऊर्जा और आत्मविश्वास पैदा किया।
वर्ष 1950 से 1980 का दौर क्रिकेट और पारंपरिक खेलों का रहा। होलकर क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी में लगातार जीत हासिल कर मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई, वहीं ग्वालियर और उज्जैन ने मल्लखम्ब को एक नई पहचान दी। वर्ष 1980 से 2000 के बीच कराटे और बैडमिंटन जैसे खेलों का विस्तार हुआ और मध्यप्रदेश ने पहली बार ओलंपिक स्पर्धाओं में प्रतियोगी खेलों की तरफ गंभीर कदम बढ़ाए। इसके बाद 21वीं सदी ने खेलों को पूरी तरह बदल दिया।
हॉकी की नर्सरी
जब भी हॉकी की बात आती है तो भोपाल का विशेष उल्लेख आता है। भोपाल को लंबे समय से “हॉकी की नर्सरी” कहा जाता है। यहाँ से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं। वर्ष 1950 और 60 के दशक से ही यहाँ हॉकी की परंपरा मजबूत रही और यही वजह है कि ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले कई नामचीन खिलाड़ी भोपाल से जुड़े रहे। अशोक कुमार (हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बेटे) और ज़फर इक़बाल जैसे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश का नाम ऊँचा किया। वर्ष 1975 के विश्व कप में स्वर्ण पदक विजेता और वर्ष 1976 के ओलिंपिक टीम के सदस्य असलम शेरखान, वर्ष 1968 मैक्सिको ओलिंपिक के कास्य पदक विजेता इवाम-उर-रहमान, नई सदी में सिडनी 2000 ओलिंपिक के फॉरवर्ड प्लेयर समीर दाद भोपाल की परंपरा के जीवित साक्ष्य है। शहर का आइकॉनिक ऐशबाग स्टेडियम और स्थानीय क्लब कल्चर इस नर्सरी की धड़कन रहे हैं। भोपाल में कई हॉकी टर्फ और प्रशिक्षण केंद्र हैं, जिन्होंने इस खेल को पीढ़ी दर पीढ़ी पोषित किया। राज्य की अकादमी व्यवस्था ने इस विरासत को संस्थागत रूप दिया। महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर की स्थापना वर्ष 2006 से हुई, जहां से भारतीय हॉकी टीम की दिग्गज महिला हॉकी खिलाड़ी सुशीला चानू, मोनिका और रीना खोखर जैसे खिलाड़ी निकले। भोपाल के पुरूष हॉकी अकादमी का शुभारंभ जनवरी 2007 में हुआ। मध्यप्रदेश की हॉकी अकादमी से इटारसी के प्रतिभाशाली 17 वर्षीय विवेक सागर भारतीय टीम में पदार्पण कर भारत के सबसे युवा खिलाड़ियों में से एक बने। विवेक सागर ने टोक्यो-2020 और पेरिस ओलिंपिक-2024 में भारतीय हॉकी टीम को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि भारतीय हॉकी इतिहास में भोपाल का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है।
खेल अधोसंरचना विकास
राज्य सरकार ने खेलों के लिए अवसंरचना विकसित कर खेल संस्कृति को नया आयाम दिया। भोपाल और इंदौर अब खेल अकादमी, हॉकी टर्फ और एथलेटिक ट्रैक के लिए पहचाने जाते हैं। वर्ष 2013 में मल्लखम्ब को राज्य खेल घोषित करना केवल एक परंपरा का सम्मान नहीं इस बात का भी प्रतीक था कि राज्य अपने पारंपरिक खेलों को भी आधुनिक मंच पर लाना चाहता है। इसी क्रम में “विक्रम अवॉर्ड” जैसी परंपराएँ शुरू हुईं, जिनके जरिए खिलाड़ियों को न केवल सम्मान मिला बल्कि सरकारी नौकरियों और प्रोत्साहन राशियों से उनके भविष्य को भी मजबूत किया गया। भोपाल की मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी ऑफ एक्सलेंस को विशेष रूप से रेखांकित किया जा सकता है। जनवरी 2007 में स्थापित इस परिसर में 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर राइफल/पिस्टल रेंज के साथ ट्रैप स्कीट के समर्पित शॉटगन रेंज भी है। फाइनल शूटिंग रेंज अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है तथा दर्शकों के बैठने की भी सुव्यवस्था है। यह अकादमी अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर गढ़ी गई है और राज्य के शूटरों की लगातार कामयाबी का प्रमुख आधार बनी है।
वॉटर स्पोर्टस
वॉटर स्पोर्टस में भी भोपाल ने एक अलग पहचान गढ़ी है। बड़े तालाब में वॉटर स्पोर्टस अकादमी ऑफ एक्सलेंस की स्थापना की गई, जिसमें कयाकिंग-केनोइंग, रोइंग और सेलिंग की अत्याधुनिक सुविधाएं खिलाड़ियों को दी जा रही हैं। इसी तरह भोपाल स्थित छोटे तालाब का ईको सिस्टम पैरा-कयाकिंग/केनोइंग में देश का अग्रणी केन्द्र बना, जहां प्राची यादव जैसी खिलाड़ी एशियन पैरा गेम्स में इतिहास रचती दिखी।
पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में रहा। शूटर ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर गौरव बढ़ाया। आज स्थिति यह है कि प्रदेश में 18 उत्कृष्टता अकादमियाँ, 22 हॉकी टर्फ और 15 से अधिक एथलेटिक ट्रैक सक्रिय हैं। खेल प्रदर्शन के अद्यतन सूचकांक भी इस दावे को पुष्ट करते हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 (बिहार) में मध्यप्रदेश ने 32 पदक लेकर शीर्ष दस में स्थिति दर्ज कराई।
स्पोर्ट्स साइंस सेंटर
आधुनिक तकनीक के दौर में खेल विज्ञान (Sports Science) की भूमिका भी अहम होती जा रही है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में भी अग्रसर होकर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर और अत्याधुनिक हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग अकादमी की स्थापना की है। यहाँ खिलाड़ियों को फिजियोथेरेपी, बायो-मैकेनिक्स, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन और साइकोलॉजिकल कॉउंसलिंग जैसी सेवाएँ दी जाती हैं। उन्नत जिम्नेशियम, रिकवरी पूल, एंटी-ग्रैविटी रनिंग मशीन और वीडियो एनालिटिक्स लैब खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने के लिए तैयार कर रही हैं। इन तकनीकी सुविधाओं का असर अब साफ दिखने लगा है। खिलाड़ी केवल खेल कौशल ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती के आधार पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। थ्रॉबॉल, एथलेटिक्स और पैरा-खेलों में हालिया सफलता इस आधुनिक दृष्टिकोण की ही देन है। आने वाले वर्षों में स्पोर्ट्स साइंस से जुड़ी ये अकादमियाँ न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रतिभा निर्माण का केंद्र बन सकती हैं। नवीनतम परिणाम जैसे कि वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाले खिलाड़ी एशियाई चैंपियनशिप स्वर्ण विजेता शूटर, खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शीर्ष पाँच राज्यों में मध्यप्रदेश का स्थान और पैरा-कैनोइंग में प्राची यादव जैसे खिलाड़ी— ये सब आधुनिक रणनीति और बुनियादी संरचना का परिणाम हैं।
यह उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 2028 के नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिये बोली लगाई है। भोपाल के नाथू बरखेड़ा में बहुखेल अंतर्राष्ट्रीय परिसर और इंटरनेशनल स्पोर्टस साइंस सेंटर की परिकल्पना पर काम चल रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में जल-पर्यटन, एशियन रोइंग चैम्पियनशिप जैसी घोषणाएं और एक समर्पित खेल विश्वविद्यालय की योजना, राज्य की दीर्घकालीन खेल रणनीति की झलक देती है।
मध्यप्रदेश सरकार ने दिया विशेष सम्मान
मध्यप्रदेश सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का हमेशा सम्मान किया है। राज्य सरकार की नीति रही है कि ऐसे खिलाड़ियों को न केवल नगद पुरस्कार दिया जाये बल्कि उन्हें प्रतिष्ठित शासकीय सेवाओं में नियुक्ति भी प्रदान की जाये। इस कड़ी में ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद को एक करोड़ की पुरस्कार राशि के साथ पुलिस सेवा में डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया। साथ ही राज्य पुरस्कार से सम्मानित विक्रम अवार्ड प्राप्त खिलाड़ियों को भी शासकीय सेवा में नौकरी का प्रावधान किया गया है। समग्र रूप से कहा जाए तो पिछले सात दशकों की यह यात्रा इस बात की गवाही देती है कि मध्यप्रदेश ने खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें संस्कृति, परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम बना दिया है। प्रदेश ने अब न केवल राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर बल्कि वैश्विक खेल जगत में भी अपनी मजबूत पहचान बनाली है।
MP सरकार ने चीफ सेक्रेटरी को दिया एक साल का कार्यकाल विस्तार
28 Aug, 2025 08:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश के मौजूदा चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन को 1 साल का एक्सटेंशन मिल गया है। अब वो साल 2026 में रिटायर होंगे, डीओपीटी जल्द ही एक्सटेंशन देने के संबंध में आदेश जारी करेगा। अब कई अधिकारियों को मुख्य सचिव बनने के लिए अनुराग जैन के रिटायरमेंट का इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उन्हें बधाई दी मुख्य सचिव इसी महीने की आखिरी तारीख यानी 31 अगस्त को रिटायर होने वाले थे, लेकिन अब वह एक साल और इस पद पर बने रहेंगे। अनुराग जैन ने सितंबर 2024 में ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव में पदभार संभााला था।
सीएम डॉ मोहन यादव ने दी बधाई
सीएम ने लिखा, मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव अनुराग जैन आपको कार्यकाल के एक वर्ष बढ़ाए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, नवाचारों और सतत् प्रयासों से प्रदेश की विकास यात्रा निरंतर नए प्रतिमान स्थापित करे, मेरी मंगलकामनाएं।
कलेक्टर पर क्यों ताना मुक्का? बीजेपी विधायक नरेंद्र कुशवाह ने बताया हर पल का ब्यौरा
28 Aug, 2025 05:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिंड: कलेक्टर को मुक्का दिखाकर सुर्खियां बटोरने वाले भिंड के विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह वर्तमान में चर्चाओं के केंद्र में हैं। कोई उनकी हरकत को सही बता रहा है तो वहीं, कुछ लोग कलेक्टर को भी लगातार कोसे जा रहे हैं। भिंड विधायक और कलेक्टर की बीच हुई जमकर बहस और हाथापाई तक पहुंची नौबत को लेकर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह से चर्चा की। आइए जानते हैं, उन्होंने क्या कहा-
कलेक्टर-विधायक का वायरल वीडियो
गौरतलब है कि बुधवार को भिंड के एक विधायक का वीडियो जमकर वायरल हुआ, जिसमें कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह के बीच जमकर बहस होते नजर आ रही थी। इस बहस ने बाद में झड़प का रूप लिया तो मामला मारपीट तक पहुंच गया। नौबत यहां तक आ गई कि कलेक्टर ने विधायक को उंगली दिखाकर औकात दिखाने कि बात कही। इस पर विधायक ने भी कलेक्टर को मारने के लिए हाथ उठा लिया। इसके बाद से ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में माहौल गर्म हो गया।
विधायक से की बात
इस मामले में विधायक से जब चर्चा की तो उन्होंने बताया कि जिलेभर में जनता खाद की समस्याओं को लेकर परेशान है। कई बार लोग कलेक्टर के पास पहुंचे तो लोगों को सुना तक नहीं। यहां तक कि हमने लोगों के लिए कलेक्टर को फोन भी किया। लेकिन कलेक्टर ने फिर भी लोगों से मिलना तक जरूरी नहीं समझा।
लोगों ने विधायक से किए सवाल-जवाब
कलेक्टर ने जब लोगों से बात नहीं की तो लोग मेरे पास दोबारा आए और कहा कि हमने आपको इसी तरह परेशान होने के लिए वोट दिए थे। ताकि खाद की दो बोरियों के लिए रात दिन घंटों तक लाइनों में खड़ा होना पड़े। आप हमारे जन प्रतिनिधि हो फिर भी हमें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चर्चा के लिए गए थे कलेक्टर के बंगले
विधायक कुशवाह ने बताया कि इन्हीं समस्याओं को लेकर हम कलेक्टर बंगले पर चर्चा करने गए थे। लेकिन वह चर्चा करने के बजाए विवाद करने लगे। मुझे उकसाने लगे। मैं किसानों के लिए खाद की बात करने गया था। वो मामले को मोड़ने के लिए रेत की बात करने लगे। मुझे उंगली तक दिखाने लगे। इसी बात पर विवाद शुरु हुआ था।
जनप्रतिनिधि का दायित्व निभाया
भिंड विधायक का कहना है कि एक तरफ जहां लोग परेशान हैं, तो वहीं दूसरी तरफ भिंड का खाद अन्य जिलों में भेजा जा रहा है। इसकी शिकायतें भी उनके पास आई हैं। यहां तक कि लोगों ने पर्चियां तक दिखाई हैं। अब ऐसे में एक जनप्रतिनिधि के दायित्व का वहन तो मुझे करना ही होगा।
गणेश जी ने खुद दी मौजूदगी की निशानी? जेसीबी से खुदाई में निकलीं मूर्तियां, लोगों में उमड़ा आस्था का ज्वार
28 Aug, 2025 05:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दमोह: गणेशोत्सव में भक्तों की आस्था और श्रद्धा के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं। कभी-कभी आराध्य अपने भक्तों को चमत्कृत भी कर देते हैं। मध्य प्रदेश के दमोह जिले से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। इसमें एक व्यक्ति को काफी दिन से स्वप्न में भगवान गणेश की प्रतिमाएं जमीन में दबे होने का आभास हो रहा था। खुदाई करने पर वहां से गणेश और नंदी महाराज की प्राचीन प्रतिमाएं निकली हैं।
जानकारी अनुसार दमोह जिले के नरसिंहगढ़ में मराठा कालीन सदियों पुराना रामबाग स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर है। यहां बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर भी पहुंचे थे। मंदिर जर्जर हो चुका था, इसलिए समिति बनाकर इसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। मंदिर समिति के कैलाश मिश्र को कुछ दिन से एक सपना आ रहा था कि मंदिर के पास स्थित बावड़ी के पास एक जगह पर गणेश जी की प्रतिमा दबी हुई है। पहले उन्होंने ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में समिति सदस्यों को जानकारी दी थी।
गणेशोत्सव प्रारंभ होते ही समिति सदस्यों और कैलाश मिश्र ने सोचा कि स्वप्न में जो दिख रहा है, वहां खुदाई करके देखते हैं। जेसीबी बुलाकर बावड़ी के पास तय स्थान पर खुदाई करवाई गई तो सभी हैरान रह गए। जमीन में कई फीट नीचे से भगवान गणेश की प्रतिमा निकली। इसी दौरान एक और प्रतिमा नजर आई। उसे निकाला गया तो वे नंदी महाराज निकले।
चमत्कार मान रहे लोग, विधि-विधान से स्थापना होगी
प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर समिति परिसर से प्राचीन संगमरमर की प्रतिमाएं खुदाई में निकलने के बाद लोग इसे ईश्वर का चमत्कार मान रहे हैं और शुभ संकेत से जोड़कर देख रहे हैं। मंदिर समिति ने प्रतिमाओं की सफाई कराकर उन्हें स्थापना तक के सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया है। लोग गणेश जी के दर्शन करने के लिए ललायित भी दिख रहे हैं।
काफी दिन से टलता जा रहा था मामला
मंदिर समिति के कैलाश मिश्र ने बताया कि उन्हें कई दिन से स्वप्न में गणेश जी की प्रतिमा जमीन में दबे का अभास हो रहा था। कई बार समिति वालों को बताया भी था। गणेशोत्सव प्रारंभ होते ही समिति सदस्यों ने कहा कि जो स्थान दिखता है, वहां खुदाई करवाकर देखते हैं। पूजा-पाठ करने के बाद जेसीबी से खुदाई करने के बाद गणेश जी और नंदी की प्रतिमा निकली है। दोनों काफी प्राचीन प्रतिमाएं हैं। हम पर गजानन स्वामी ने कृपा की है।
हाथ में बर्बाद फसल, सड़क पर किसानों की चुप्पी ने कहा सब कुछ – अनोखा प्रदर्शन देख प्रशासन भी हिला
28 Aug, 2025 05:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में किसानों का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला है। फसल की बीमा की राशि नहीं मिलने से परेशान किसानों ने खराब फसल को लेकर सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि फसल की बीमा की राशि के रूप में सिर्फ 100 से 200 रुपए मिले हैं।
रैली निकालने के बाद लोट लगाकर किया प्रदर्शन
दरअसल, पूरा मामला सीहोर जिले के पीपलनेर गांव का है। यहां के किसानों ने सड़क पर लोट लगाकर अपना विरोध जताया है। इसके पहले किसानों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए लंबी रैली भी निकाली थी बाद में सड़क पर लोटकर और हाथ में फसल लेकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को देख हर कोई हैरान रह गया। बताया जा रहा है कि जिले में अलग-अलग जगहों पर किसानों ने प्रदर्शन किया।
खराब फसलों की सर्वे कराने की मांग
किसानों का कहना है कि वे पिछले एक सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 5 साल से फसलें खराब हो रही हैं। इसके बाद भी किसानों को बीमा की पूरी राशि नहीं मिल रही है। किसी को 100 तो किसी को 250 रुपए मिल रहे हैं। किसानों की मांग है कि सरकार खराब फसलों का सर्वे कराए और उन्हें उचित मुआवजा मिले। किसानों ने डिप्टी कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है।
खाद के बाद अब बीमा का संकट
बता दें कि प्रदेश में एक तरफ किसानों का कहना है कि खाद का संकट है तो वहीं दूसरी तरफ अब फसलों की बीमा राशि को लेकर किसान सड़क पर उतर गए हैं। हालांकि सरकार के तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
IPS अधिकारियों के बेटा-बेटियों को पढ़ाई में मिलेगा आर्थिक सहारा
28 Aug, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अफसर के बच्चे 11वीं से लेकर स्नातक मेडिकल, तकनीकी कोर्स में अच्छे अंक लेकर आएंगे तो उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप पुलिस मुख्यालय पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन राशि देगा। इस संबंध में प्रस्ताव बनाया जा रहा है। पिछले साल भी प्रोत्साहन राशि दिए जाने पर विचार हुआ था, लेकिन तब इस प्रस्ताव को डीजीपी की ओर से मंजूरी नहीं मिल सकी थी। इस बार माना जा रहा है कि प्रस्ताव को मंजूर कर लिया जाएगा। इसी शिक्षा सत्र से लागू किया जाएगा या अगले साल से यह अभी तय नहीं किया गया है।
आवार्ड पाने वाले IPS के बच्चों को योजना का लाभ
सूत्रों की मानी जाए तो इसमें आईपीएस अफसर की वेतन के आधार पर लाभ मिलेगा या नहीं यह तय नहीं किया जाएगा। इसमें अवसर की सालाना आय के अनुसार बच्चों को प्रोत्साहन राशि दी जा सकती है। इसमें सालाना वेतन को पार करते ही आईपीएस अफसर के बच्चों को इस योजना से बाहर कर दिया जाएगा। इसमें यह माना जा रहा है कि आईपीएस अफसर के सीनियर पद पर जाते ही बच्चों को प्रोत्साहन राशि मिलना बंद हो जाएगी। इसमें राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस अवार्ड होने वाले अफसर के बच्चों को भी इस योजना का लाभ मिल सकता है।
डिप्लोमा करने पर भी मिलेगी प्रोत्साहन राशि
पुलिस मुख्यालय की कल्याण शाखा ने तय किया है कि आईपीएस अफसर के बच्चे जो 11वीं 12वीं में 85% से अधिक अंक लाते हैं। उन्हें 4 हजार प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 60% से 84% तक अंक लाता है तो उसे ढाई हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा यदि कोई बच्चा डिप्लोमा करना चाहता है और उसमें 60% से अंक अधिक आते हैं तो 10 हजार और 55 से 60% अंक लाने पर 6 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
एमबीबीएस पर 50 हजार रुपए
एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स को भी इसमें जोड़ा जाएगा। एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में 60% या उससे अधिक होने पर 50 हजार रुपए और 60 से 70% अंक होने पर तीस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय ने तैयार किया है।
आरक्षक से एसपीएस के बच्चों के बच्चों को मिलता था लाभ
पुलिस मुख्यालय की कल्याण शाखा अभी तक बच्चों के लिए प्रोत्साहन राशि का लाभ आरक्षक से लेकर एसपीएस के बच्चों को ही दिया करती थी। उसमें आरक्षक से लेकर आईपीएस तक के होनहार बच्चों को प्रोत्साहन राशि एक जैसी ही रहेगी। इस व्यवस्था में पुलिस मुख्यालय ने प्रोत्साहन राशि का नियम सभी के लिए एक बराबर कर दिया गया है।
कृषि विस्तार अधिकारी से लेकर रोजगार सहायक तक, लोकायुक्त ने रिश्वतखोरों को पकड़ा रंगे हाथ, मचा हड़कंप
28 Aug, 2025 04:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: एमपी में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लोकायुक्त का एक्शन जारी है। गुरुवार को तीन जिलों में कार्रवाई करते हुए तीन भ्रष्ट सरकारी कर्मियों को रिश्वत के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। रतलाम में कृषि विस्तार अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ा है तो झाबुआ में रोजगार सहायक को दबोचा है। वहीं, नर्मदापुरम में पीडब्ल्यूडी के क्लर्क को पकड़ा गया है।
कृषि विस्तार अधिकारी 30000 रुपए की मांग की
दरअसल, उज्जैन लोकायुक्त ने आवेदक विजय सिंह राठौर ने शिकायत की थी। शिकायतकर्ता को उसके गांव में कीटनाशक और खाद-बीज की दुकान खोलना है, जिसके लाइसेंस के लिए उसने मई में लोकसेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन किया था। जुलाई में उसे लाइसेंस बनने का मैसेज मोबाइल पर मिल गया था। तीनों लाइसेंस की असल कॉपी लेने के लिए वह कृषि विस्तार अधिकारी सैलाना मगन लाल मेडा से मिला। तीनों लाइसेंस की असल कॉपी देने के लिए 30 हजार रुपए रिश्वत की मांग की गई। आवेदक के निवेदन पर लाइसेंस हेतु मगन लाल मेडा 25 हजार रिश्वत लेने पर राजी हुए।
10000 की रिश्वत के साथ गिरफ्तार
कृषि विस्तार अधिकारी मगन लाल मेडा ने आवेदक से 15 हजार रुपए ले लिए थे। शिकायत की तस्दीक के बाद लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप की तैयारी की। मगन लाल मेडा को आवेदक से रिश्वत के शेष 10 हजार रुपए लेते हुए सैलाना स्थित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में रंगे हाथों पकड़ा है। वहीं, नर्मदापुरम जिले में ठेकेदार अवधेश कुमार पटेल ने भोपाल लोकायुक्त से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि उनके एफडी और जमा राशि को वापस करने के बदले में 12,000 रुपए की रिश्वत की मांग पवन सक्सेना कर रहे हैं। वह लोक निर्माण विभाग नर्मदापुरम में वरिष्ठ लेखा लिपिक हैं। आवेदक की शिकायत को लोकायुक्त की टीम ने सत्यापित किया तो मामला सही पाया गया। इसके बाद 7000 रुपए की रिश्वत के साथ आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया है।
झाबुआ में पकड़ा गया रोजगार सहायक
इंदौर लोकायुक्त की टीम ने आवेदक कमल सिंह निंगवाल की शिकायत पर झाबुआ में कार्रवाई की है। आवेदक रानापुर तहसील के डिग्गी गांव का रहने वाला है। उसे अपने सात वर्षीय बेटे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाना था। इसके लिए रोजगार सहायक दिनेश कुमार पचाहा से बात की। जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए रोजगार सहायक ने 1600 रुपए की मांग की। इसके बाद फरियादी ने लोकायुक्त में शिकायत दी। शिकायत के सत्यापन के बाद आरोपी दिनेश कुमार पचाहा को 1250 रुपए की रिश्वत के साथ पकड़ा गया है।
महाभारत से जुड़ा गणेश मंदिर बना आस्था का प्रतीक, चतुर्थी पर बाणगंगा कुंड में दिखी श्रद्धा की बाढ़
28 Aug, 2025 04:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिवपुरीः मध्य प्रदेश के शिवपुरी में महाभारत कालीन एक प्राचीन गणेश मंदिर है। गणेश महोत्सव में यह लोगों की बड़ी आस्था का केंद्र होता है। शिवपुरी के बाणगंगा मंदिर परिसर में महाभारत काल के दौरान पांडवों ने यहां अपना अज्ञातवास गुजारा गया था। इस दौरान यहां पर अर्जुन ने अपने बाण से 52 कुंड बनाए थे।इन 52 कुंडों में से एक कुंड पर गणेश मंदिर की स्थापना भी की गई थी। महाभारत काल से ही गणेश प्रतिमा कुंड के ऊपर स्थापित है। वर्तमान में यह प्राचीन गणेश मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। गणेश महोत्सव के दौरान इस मंदिर पर लोग दूर-दूर से भगवान गणेश की पूजा करने के लिए आ रहे हैं।
कुंड के ऊपर बना है गणेश मंदिर
बाणगंगा मंदिर क्षेत्र परिसर के आसपास 52 पवित्र कुंड है। ऐसा माना जाता है कि यहां पांडवों में से एक अर्जुन ने भीम की प्यास बुझाने के लिए अपने बाढ़ से गंगा निकाली थी। शिवपुरी के सीनियर लेखक और इतिहासकार अशोक मोहिते का कहना है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय शिवपुरी के घने जंगलों में गुजारा था। शिवपुरी के पास ही बैराड़ नगर है जो उस समय का विराट नगर कहलाता था। विराटनगर में भी महाभारत काल के दौरान पांडवों ने अपना काफी समय गुजारा। जंगलों में कुछ समय गुजारने के दौरान पांडवों ने बाणगंगा से सिद्धेश्वर तक कुल 52 कुंडों का निर्माण किया। उन्हीं में से एक कुंड है जिस पर भगवान गणेश विराजे हैं।
गणेश महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
बाणगंगा क्षेत्र परिसर में स्थित गणेश मंदिर को इच्छा पूर्ण करने वाला मंदिर भी कहते हैं। इस समय गणेश महोत्सव चल रहा है। ऐसे में दूर-दूर से लोग भगवान गणेश की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। शिवपुरी के धर्मप्रेमी मनीष शिवहरे बताते हैं कि इस समय गणेश महोत्सव के दौरान जहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गणेश महोत्सव के पहले दिन ही यहां रामधन प्रारंभ की गई है और यहां गणेश महोत्सव में प्रतिदिन कई धार्मिक कार्यक्रम व पूजा पाठ होगी।
सलाइन के साथ बाइक की सवारी! बीमार दोस्त को लेकर दो युवकों का अजीब कारनामा, लोगों ने कहा ‘ये कैसा मज़ाक?’
28 Aug, 2025 03:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: एमपी के ग्वालियर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां अस्पताल में भर्ती एक युवक अपने दोस्तों के साथ बाइक पर सैर करता नजर आया। इस पूरे वाक्ये का 16 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवक अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद ड्रिप लगी हालत में ही बाइक पर बैठकर अपने साथियों के साथ घूमने निकला।
चंद्रवदनी इलाके की है घटना
जानकारी के अनुसार यह घटना झांसी रोड थाना क्षेत्र के नाका चंद्रवदनी इलाके की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में दो बाइक सवारों के बीच बीमार युवक बैठा हुआ है, जिसके हाथ में सलाइन (ड्रिप) लगी है। पीछे बैठे युवक ने ड्रिप की बोतल हाथों में पकड़ रखी है और तीनों बाइक पर सड़क पर घूमते नजर आते हैं।
सड़क पर घूमने के बाद अस्पताल लौट आया
सूत्रों के मुताबिक बीमार युवक अस्पताल में भर्ती था और उसने अपने दोस्तों को फोन लगाकर अस्पताल बुलाया। इसके बाद दोनों साथी उसे बीच में बैठाकर बाइक पर घुमाने ले गए। कुछ देर तक सड़कों पर चक्कर लगाने के बाद वे युवक को वापस अस्पताल लेकर लौट आए। इस दौरान वहां से गुजर रहे किसी राहगीर ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।
देखते ही देखते यह वीडियो जमकर वायरल हो गया और लोगों में चर्चा का विषय बन गया। यह घटना न सिर्फ लापरवाही को दर्शाती है बल्कि अस्पताल प्रबंधन पर भी सवाल खड़े करती है। ड्रिप लगी हालत में मरीज को इस तरह बाहर ले जाना उसकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता था। वहीं इस तरह की हरकत से सड़क पर अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।
पुलिस कर रही जांच
पुलिस के अनुसार मामला झांसी रोड थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अब इसकी जांच में जुट गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि युवक किस अस्पताल में भर्ती था और दोस्तों ने उसे कैसे बाइक पर ले जाकर घुमाया।
सर्वदलीय बैठक में उठा OBC आरक्षण का मुद्दा, बनी एकजुट राय
28 Aug, 2025 02:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, प्रदेश सरकार में मंत्री समेत कई कानूनविद शामिल हुए। ये बैठक करीब एक घंटे चली, इस मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक में सभी नेताओं ने तय किया है कि हम सभी को ओबीसी आरक्षण 27% दिलाना है।
वकीलों के साथ बैठकर एक राय पर चर्चा होगी
सीएम मोहन यादव ने कहा कि हम सब की भावना है कि कोर्ट के स्टे पर सभी पार्टी अपनी विधानसभा को अपना पक्ष रखें। 27 प्रतिशत आरक्षण प्लान तैयार है कोर्ट में अलग-अलग वकील लड़ रहे हैं, कोर्ट ने निर्णय किया है कि 22 सितंबर से लगातार सुनवाई होगी। सर्वदलीय बैठक के बाद क्या बोले मुख्यमंत्री सभी वकीलों का मत भी इकट्ठा एक साथ आए इस विषय पर सहमति बनी है। सर्वदलीय संकल्प पारित किया है जिसके आधार पर ओबीसी आरक्षण देने के लिए एक फोरम पर आए। न्यायपालिका और कार्यपालिका एक साथ 10 सितंबर के पहले सभी वकीलों के साथ बैठकर एक राय पर चर्चा होगी। उन्होंने आगे लिखा कि जल्द ही कोर्ट इसका निर्णय करता है तो 13% होल्ड विद्यार्थी हैं उनको भी जगह दी जाएगी। जो लोग ओवर ऐज हो रहे हैं, उनको भी इसका लाभ दिया जाएगा। आरक्षण से कोई बचना नहीं चाहिए, सभी को इसका लाभ मिले, सब लोगों ने एक साथ राय बनाई है।
खोदा पहाड़, निकली चुहिया
सर्वदलीय बैठक में शामिल होने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया. कांग्रेस ने 5 साल पहले ही ओबीसी आरक्षण को लेकर घर बनाया था, बीजेपी सरकार ने आज फल फोड़ दिया। श्रेय लेने की होड़ लगी है, भगवान गणेश ने भाजपा सरकार को सद्बुद्धि दी, देर आए दुरुस्त आए। कांग्रेस पार्टी ने ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबी लाडाई लड़ी है, कांग्रेस के वकील सरकार के साथ बैठकर आगे पक्ष रखेंगे। सीएम हाउस में आयोजित इस बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक कमलेश्वर पटेल, कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद पटेल, सतना सांसद गणेश सिंह, आम आदमी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष रानी जायसवाल और एसपी प्रदेश प्रमुख मनोज यादव शामिल हुए।
284 रैंक का दावा और पूरे दस्तावेज, फिर भी AIIMS में दाखिले की जगह गिरफ्तार हुआ छात्र, जानें क्यों
28 Aug, 2025 02:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मेडिकल की पढ़ाई के लिए एम्स में एडमिशन पाने की खातिर एक छात्र ने शातिरपना किया है। यह देखकर एम्स प्रबंधन भी हतप्रभ है। मामला भोपाल एम्स से जुड़ा हुआ है। यहां पर एडमिशन लेने के लिए एक युवक ने फर्जी रास्ता का इस्तेमाल किया। उत्तर प्रदेश निवासी 22 वर्षीय लवकुश प्रजापति नाम का यह छात्र नीट परीक्षा में लगातार फेल हो रहा था। परिवार के दबाव और असफलता से परेशान होकर उसने एम्स में एडमिशन पाने की तरकीब निकाली।
फोटोशॉप की मदद से बदल लिए दस्तावेज
इसके लिए उसने अपराध का वह रास्ता अपनाया जो उसे पुलिस तक ले आया। लवकुश ने अपने दोस्त की अलॉटमेंट पत्र को सोशल मीडिया से कॉपी कर लिया और फोटोशॉप की मदद से उसमें रोल नंबर अंक और रैंक बदल दिया। उसने खुद को 284 रैंक का उम्मीदवार दिखाया। जबकि इस रैंक का एक छात्र पहले ही एम से भुवनेश्वर में एडमिशन ले चुका था।
दस्तावेजों की जांच में खुलासा
जैसे ही भोपाल एम्स में इस पत्र पर शक हुआ तो प्रबंधन ने उसके दस्तावेजों की कड़ाई से जांच की और यही उसकी चोरी पकड़ी गई। एम्स प्रबंधन ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया है। पुलिस के अनुसार लवकुश प्रजापति उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के किशनपुर गांव का निवासी है। उसने वर्ष 2021 में 12वीं की परीक्षा पास की थी। इसके बाद डॉक्टर बनने का सपना देखा।
हताश होकर यह रास्ता चुना
वर्ष 2021 से लेकर 2024 तक लगातार उसने नीट की परीक्षा दी लेकिन बेहतर रैंक हासिल नहीं कर पाया। हताश होकर उसने अपराध का रास्ता चुन लिया। उसने फोटोशॉप की मदद से मेडिकल काउंसिल कमेटी की वेबसाइट का हूबहू नकली पत्र तैयार कर लिया और उसमें खुद का नाम फोटो और रोल नंबर बदल दिया और 630 अंक लिखकर खुद की रैंक 284 दर्शा दी।
24 अगस्त को लव कुश मुंबई से भोपाल आया और एम्स के रजिस्ट्रार कार्यालय में एडमिशन के डॉक्यूमेंट जमा कराया। यहीं पर उसकी चोरी पकड़ी गई। जब वेरिफिकेशन किया गया तो पता चला कि एम्स भुवनेश्वर में एक छात्र पहले ही इस रैंक में एडमिशन ले चुका है। बाद में उसे बाग सेवनिया थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां पुलिस ने उसे पर अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
कलेक्टर पर ताना, IPS को थप्पड़ – सत्ता के गुरूर में चूर 12वीं पास विधायक नरेंद्र कुशवाहा की विवादित छवि
28 Aug, 2025 01:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिंड: मध्य प्रदेश के भिंड विधानसभा क्षेत्र से विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा एक बार फिर से चर्चा में हैं। इस बार भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के साथ उनका वीडियो वायरल हो रहा है। विधायक खाद को लेकर कलेक्टर आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कलेक्टर आए तो बहस शुरू हो गई। बहस के दौरान विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने कलेक्टर पर मारने के लिए मुक्का तान दिया। अब सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, विवादों से उनका पुराना नाता रहा है।
IPS को है थप्पड़ मारने का आरोप
कथित रूप से भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा पर रेत के कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगता है। इसी वजह से जिले में कुछ अधिकारियों से इनकी बनती नहीं है। साल 2012 में तत्कालीन भिंड एएसपी जयदेवन ए को थप्पड़ जड़ने का आरोप इन पर है। आईपीएस जयदेवन ए अवैध शराब की बिक्री की सूचना मिलने पर वहां छापेमारी करने गए थे।
अब कलेक्टर पर ताना मुक्का
भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव पर मुक्का तान दिया है। विवाद की शुरुआत खाद की किल्लत को लेकर हुई। कुशवाह कलेक्टर आवास के बाहर धरना दे रहे थे। इसी दौरान कलेक्टर से बात हुई। नरेंद्र सिंह कुशवाह तल्ख हुए तो कलेक्टर ने कहा कि औकात में रहकर बात करो। इसी दौरान विधायक ने कहा कि औकात किसे बता रहे हो, तू हमें नहीं जानता। इस पर कलेक्टर ने कहा कि रेत चोरी नहीं चलने दूंगा। विधायक ने पलटकर कहा कि तू सबसे बड़ा चोर है। फिर दोनों में बात बिगड़ गई।
12वीं पास हैं नरेंद्र सिंह कुशवाह
2023 विधानसभा चुनाव के चुनावी हलफनामे के अनुसार विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा 12वीं पास हैं। हालांकि उन्होंने ग्रेजुएशन के फर्स्ट इयर में दाखिला लिया था लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं की है। भिंड जिले में इनकी छवि दबंग विधायक के रूप में है।
तीसरी बार बने हैं विधायक
वहीं, नरेंद्र सिंह कुशवाह तीसरी बार विधायक बने हैं। सबसे पहली बार 2003 में विधायक बने थे। इसके बाद 2013 में चुने गए। फिर 2023 के विधानसभा में चुनाव में तीसरी बार जीते हैं। विवादों से पुराना नाता रहा है। सरकार में रहते हुए सवाल उठाते रहते हैं। इसकी वजह से पार्टी भी असहज हो जाती है।
दर्ज हैं कई आपराधिक मुकदमे
चुनावी हलफनामे के अनुसार विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। लोकसेवक पर हमले को लेकर उन्हें छह महीने की सजा भी हो चुकी है। इसके साथ ही भिंड देहात थाना क्षेत्र में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा-342, 506 बी, 504 और 34 के तहत एक मामला लंबित है। साथ ही एससी एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज है। यही नहीं, अपहरण कर मारपीट का मामला भी दर्ज है।
तिलमिलाहट की वजह क्या है
वहीं, कहा जा रहा है कि खाद तो बहाना है। कलेक्टर से विवाद की असली वजह तो रेत है। कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने विधायक के क्षेत्र में दो नाके लगवा दिए हैं, जहां रेत भरी गाड़ियों की चेकिंग होती है। ऐसे में विधायक का सवाल है कि हमारे क्षेत्र में ही नाके क्यों लगवाए गए। बहस के दौरान कलेक्टर ने भी कहा था कि रेत की चोरी मैं चलने नहीं दूंगा।
आईएएस एसोसिएशन नाराज
कलेक्टर के साथ घटित घटना को लेकर आईएएस एसोसिएशन भी नाराज है। एसोसिएशन विधायक के खिलाफ कार्रवाई चाहती है। साथ ही सीएम के सामने इस घटना को रखेगी।
मुरैना में फैक्ट्री में भीषण आग, आसमान तक उठी लपटें, मजदूरों ने दिखाई बहादुरी
28 Aug, 2025 01:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरैना: बानमौर औद्योगिक क्षेत्र स्थित खेड़ापति सर्जिकल कॉटन फैक्ट्री में बुधवार की शाम आग लग गई. धुएं का गुबार देख फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों में हड़कंप मच गया. सभी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. उन्होंने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई. आग इतनी विकराल थी कि चंद मिनटों में ही पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया. अंदर रखा सारा माल और बड़ी-बड़ी मशीनें जल गई. इस घटना में करोड़ों का नुकसान बताया जा रहा है.
शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग
राजस्थान के बाड़ी में रहने वाले व्यवसाई दिनेश गोयल की बानमौर औद्योगिक क्षेत्र में खेड़ापति सर्जिकल के नाम से फैक्ट्री है. यहां सर्जिकल कॉटन का निर्माण किया जाता है. बुधवार की शाम फैक्टरी में मजदूर काम कर रहे थे, तभी अचानक शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई. फैक्टरी प्रबंधन द्वारा तत्काल बानमोर थाना पुलिस के साथ फायर बिग्रेड और बिजली विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई. हालांकि आग बड़ी तेजी से फैल रही थी.
2 घंटे में 6 टैंकर पानी से बुझाई गई आग
घटनास्थल से महज साढ़े 3 किलोमीटर दूर होने के बावजूद बानमौर नगर परिषद का दमकल वाहन लगभग 1 घंटे बाद मौके पर पहुंचा. तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी. बाद में मुरैना से भी 2 दमकल गाड़ियां पहुंची. 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. आग बुझाने में 6 टैंकर पानी का इस्तेमाल हुआ. हालांकि तब तक फैक्ट्री में करोड़ों का माल चलकर खाक हो चुका था. घटना में 1 करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. फायर ब्रिगेड ने देरी से पहुंचने का कारण नेशनल हाईवे पर भीषण जाम बताया.
बानमौर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने जताई नाराजगी
बानमौर थाना प्रभारी अमित सिंह भदौरिया ने बताया कि "खेड़ापति कॉटन फैक्ट्री में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी. दमकल ने आग पर काबू पा लिया. नुकसान का आकलन किया जा रहा है. हालांकि फैक्ट्री मालिक ने करोड़ों का नुकसान बताया है."
बानमौर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि "क्षेत्र में लंबे समय से जाम की समस्या बनी हुई है. यहां फ्लाईओवर निर्माण की मांग कई बार की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. नतीजा यह रहा कि दमकल जाम में फंस गया और समय से न पहुंचने के कारण करोड़ों का नुकसान हो गया."
‘ईदगाह के राजा’ नाम पर शुरू हुआ विवाद, भोपाल में लगे गणेशजी के पोस्टर हटाए गए, सोशल मीडिया पर बहस तेज
28 Aug, 2025 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: राजधानी भोपाल में गणेश पर्व के दौरान पोस्टर विवाद हो गया है। यहां पर एक पोस्टर लगाकर गणपति को ईदगाह का राजा बताया गया। जैसे ही इस पोस्टर को मुस्लिम समुदाय ने देखा तो उन्होंने तत्काल आपत्ति जताई। जबकि इस मामले में भाजपा नेताओं ने कहा है कि अगर किसी को समस्या है तो ईदगाह का नाम बदल दें।
पोस्टर लगने पर विवाद
मामला भोपाल गेट स्थित स्टेट बैंक चौराहे का है। यहां पर बुधवार को एक पोस्टर लगने से विवाद खड़ा हो गया। इस पोस्ट को समस्त सिंधु मित्र मंडल के द्वारा लगाया गया है। पोस्टर में गणेश उत्सव ईदगाह के राजा लिखा था। इस पोस्टर में भाजपा मंडल के अध्यक्ष राकेश कुकरेजा का नाम लिखा था। हालांकि उन्होंने खुद के नाम को लिखे जाने की जानकारी से इनकार किया है।
ईदगाह हिल्स का कोई राजा नहीं हो सकता
बताया जा रहा है कि भोपाल गेट पर लगे इस पोस्ट पर अनवर पठान नाम के व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा कि ईदगाह हिल्स का कोई राजा नहीं हो सकता। यह इलाका सभी के लिए है और इस प्रकार के शब्दों से समाज में आक्रोश हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
हिंदू धर्म के राजा हैं गणेश जी
इस बात पर भाजपा नेता राकेश कुकरेजा ने विरोध करते हुए कहा कि गणेश जी हिंदू धर्म के राजा हैं। जब गणेश जी का नाम किसी स्थान के साथ जोड़ा जाता है तो इसमें कोई गलत बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों ने ईदगाह हिल्स की राजा का नाम लिखा है तो उसमें किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। कुकरेजा ने प्रशासन से अपील की है कि अगर किसी को ईदगाह हिल्स के नाम से आपत्ति है तो ईदगाह का नाम बदल दिया जाना चाहिए। हालांकि इस मामले में विवाद बढ़ते देख प्रशासन ने पोस्ट को हटा दिया है।
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