मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमएसएमई इकाइयों को अंतरित करेंगे 200 करोड़ रूपये की अनुदान राशि
12 Oct, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार 13 अक्टूबर को होटल ताज फ्रंट में एमएसएमई सम्मेलन 2025 में शामिल होंगे। सम्मेलन एमएसएमई के विकास एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सम्मेलन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमएसएमई विकास नीति के अंतर्गत प्रदेश के 48 जिलों की 700 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सिगंल क्लिक के माध्यम से ₹200 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि अंतरित करेंगे। इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रदेश के 80 से अधिक स्टार्टअप को ₹1 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण भी किया जाएगा।
सम्मेलन दोपहर डेढ़ बजे प्रारंभ होगा। इस दौरान स्टार्टअप और निर्यात प्रोत्साहन पर दो विषयगत सत्र होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बालाघाट और टीकमगढ़ के उद्यमियों और उद्योग संघों से वर्चुअली संवाद करेंगे। उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह भी उपस्थित रहेंगे।
औद्योगिक भूखंड आशय पत्र और उद्यम क्रांति ऋण वितरण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमएसएमई विभाग के आधिपत्य के औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न उद्यमों को 200 से अधिक भूखण्डों के आवंटन का आशय पत्र वितरित करेंगे। मुख्यमंत्री ₹113.78 करोड़ की लागत के 03 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का वर्चुअली शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा सेवा पखवाड़ा अंतर्गत अभियान चलाया जाकर मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत 350 से अधिक हितग्राहियों को ऋण उपलब्ध कराया गया है। कार्यक्रम में 100 से अधिक हितग्राहियों को हितलाभ वितरण भी किया जाएगा।
सम्मेलन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग एवं ओएनडीसी के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। 7.57 करोड़ रूपये की परियोजना लागत के तीन नवीन कार्यालय भवनों का शिलान्यास किया जाएगा। विभाग की एमएसएमई और स्टार्टअप गतिविधियों के अंतर्गत उद्यमियों व स्टार्टअप द्वारा अपने अनुभव भी साझा किये जाएंगे। शाम को विशेष रूप से स्वदेशी एवं स्वावलंबन पर विशेष परिचर्चा सत्र भी होगा।
पंडित धीरेन्द्र शास्त्री को शहडोल अदालत ने दी क्लीन चिट, जानिए क्या था मामला?
12 Oct, 2025 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शहडोल: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को शहडोल अदालत ने बड़ी राहत दी है. उनके खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से शहडोल कोर्ट ने इनकार कर दिया. साथ ही याचिका को खारिज कर दिया है. कथा वाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर याचिका दायर हुई थी.
पंडित धीरेन्द्र शास्त्री को कोर्ट से राहत
शहडोल कोर्ट में यह याचिका एडवोकेट संदीप तिवारी ने दायर की थी. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रयागराज महाकुंभ के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला बयान दिया था. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि "जो महाकुंभ में नहीं आएगा वो पछताएंगे और देशद्रोही कहलाएगा.'' इस बयान पर परिवादी संदीप तिवारी ने इसे असंवैधानिक आपत्तिजनक और भड़काऊ बताया और कार्रवाई की मांग की थी. इस मामले को शहडोल कोर्ट ने बाबा बागेश्वर धीरेंद्र को राहत दे दी है.
यहां हुई मामले की सुनवाई
मामले की सुनवाई शहडोल न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सीताशरण यादव की अदालत में हुई, जहां पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से अधिवक्ता समीर अग्रवाल ने पैरवी की और उन्हें कहा कि सभी कथन धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवचन की मर्यादा में थे. ना तो किसी वर्ग या व्यक्ति का अपमान हुआ ना किसी को उकसाया गया था. अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनी, उसके बाद पाया कि परिवाद में कोई ठोस प्रमाण नहीं है और धीरेंद्र शास्त्री के विरुद्ध संज्ञान लेने से इनकार करते हुए परिवाद निरस्त कर दिया.
पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को क्लीन चिट
पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता समीर अग्रवाल ने कहा, "पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विरुद्ध शहडोल कोर्ट में एक परिवाद दायर हुआ था. जिसमें मुख्य बिंदु ये था कि जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने के लिए गए थे. वहां उनके द्वारा कहा गया था कि जो व्यक्ति महाकुंभ नहीं आएगा वो पछताएगा और देशद्रोही कहलाएगा. इस संबंध में परिवादी ने अपने आप को व्यथित मानते हुए एक परिवाद पत्र शहडोल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया था."
याचिका पर संज्ञान लेने से किया इनकार
समीर अग्रवाल ने कहा, "उस मामले में न्यायालय द्वारा शनिवार को आदेश पारित करते हुए परिवादी की याचिका को खारिज कर दिया है. विशेष रूप से उन्होंने यह पाया है कि धीरेंद्र शास्त्री के द्वारा व्यक्त किए गए, जो शब्द थे. उससे ना कोई व्यक्ति आहत हुआ, ना ही धार्मिक भावनाओं का अपमान होता है. इस आधार पर परिवाद पत्र को निरस्त कर दिया और संज्ञान लेने से इनकार कर दिया."
नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले में हाईकोर्ट ने कहा, गर्भपात से नाबालिग के जीवन को खतरा
12 Oct, 2025 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जबलपुर : नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले में गर्भपात की अनुमति अस्वीकार करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने मामले का निराकरण किया है. कोर्ट में बताया गया कि गर्भावस्था 36 सप्ताह से अधिक है. ऐसे में भ्रूण जीवित है और गर्भपात में पीड़ित व भ्रूण की जान को खतरा हो सकता है. इसी वजह से पीड़िता व उसके परिजनों ने बच्चे के जन्म पर सहमति प्रदान की है.
मेडिकल बोर्ड ने पेश की थी रिपोर्ट
सतना जिला न्यायालय ने 15 साल 8 माह की दुष्कर्म पीड़िता के गर्भवती होने के संबंध में हाईकोर्ट को पत्र के माध्यम से सूचित किया था. हाईकोर्ट ने पत्र की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में करते हुए नाबालिग पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे. मेडिकल बोर्ड के द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़िता की गर्भावस्था 36 सप्ताह की है और उसका हिमोग्लोबिन निर्धारित से कम है.
अभिभावकों को बताए गए गर्भपात के खतरे
पीड़िका व उसके अभिभावक को गर्भपात के सभी पहलुओं के संबंध में बताया गया. गर्भावस्था अधिक होने के कारण गर्भपात में पीड़िता व भ्रूण दोनों को जान का खतरा है, जिसके बाद पीड़िता व उसके अभिभावक ने बच्चे को जन्म देने के लिए सहमति प्रदान कर दी है. हालांकि, वह बच्चे को साथ में नही रखना चाहते हैं.
परिवार बच्चे को नहीं रखेगा साथ
हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा कि भ्रूण लगभग 9 माह का है और जीवित है. ऐसी परिस्थिति में गर्भपात की अनुमति प्रदान करना व्यवहारिक नहीं होगी. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बच्चे के जीवित पैदा होने पर स्तनपान के लिए 15 दिनों तक पीड़िता के पास रखा जाए. इसके बाद उसे सीडब्ल्यूसी सतना के अधिकारियों को सौंप दिया जाए. बच्चे के पालन-पोषण के लिए हर संभव सावधानी बरती जाए. सीडब्ल्यूसी को बच्चे को बच्चे को किसी भी इच्छुक परिवार को गोद देने या राज्य सरकार को सौंपने की स्वतंत्रता होगी.
कभी देखी है बंदर जैसी दिखने वाली मकड़ी, पेंच टाइगर रिजर्व में आराम फरमाते दिखी घोस्ट स्पाइडर
12 Oct, 2025 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिवनी: देश में वैसे तो आपने अपने आसपास कई प्रकार की मकड़ियां देखीं होंगी लेकिन आज हम एक ऐसी मकड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बंदर जैसी दिखती है. इसके पैर कांटों की तरह होते हैं. इसे घोस्ट स्पाइडर भी कहा जाता है. इस मकड़ी का शिकार करने का तरीका अनोखा होता है. जो एशिया में पाए जाने वाली रात में गोलाकार जाल बनाने वाली प्रजाति है. इससे मिलते जुलते प्रजाति की मकड़ी फिलीपींस में भी पाई जाती है.
मंकी ऑर्ब वीवर स्पाइडर
पेंच नेशनल पार्क में फॉरेस्ट गार्ड मनोज सलामे गस्ती कर रहे थे. तभी अचानक उन्हें लगा कि पत्तों के ऊपर कोई छोटा सा बंदर का बच्चा बैठा हुआ है. जैसे ही गार्ड पास में पहुंचा तो देखा कि ये तो बंदर नहीं बल्कि बंदर जैसी दिखने वाली मकड़ी है. जिसके कांटेदार पैर हैं. ऐसा अनोखा जीव पहले कभी भी इलाके में नहीं देखा गया था. बताया गया कि यह अपने शरीर पर बने चमकीले धब्बों से शिकार को आकर्षित करती है और कांटेदार पैर से उसे दबोच लेती है. इस मकड़ी को 'मंकी ऑर्ब वीवर स्पाइडर' के नाम से जाना जाता है.
आराम के समय दिखती है बंदर जैसी
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. अंकित मेश्राम ने बताया कि "बंदर जैसी दिखने वाली मकड़ी (Neoscona punctigera) एशिया में पाई जाने वाली एक रात्रिचर गोलाकार जाल बनाने वाली प्रजाति है. आराम के समय यह बंदर जैसी दिखती है. इसी वजह से इसका नाम "मंकी ऑर्ब वीवर स्पाइडर" पड़ा. इसके कवच में एक छोटा गड्ढा या नाली जैसी होती है जिससे पेट की मांसपेशियां अंदर से जुड़ी रहती हैं.
दिन में करती है आराम और रात में शिकार
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. अंकित मेश्राम ने बताया कि "मंकी स्पाइडर रात में गोलाकार जाल बनाकर शिकार करती है. यह अपने कांटेदार पैरों से शिकार पकड़ती है और दबोच लेती है. दिन के समय पत्तों पर सिकुड़कर या छिपकर आराम करती है. ये दिन के समय पेड़ की छाल पर बैठने पर भी अच्छी तरह से छिप जाती है. इस तरह की मादा मकड़ी की लंबाई लगभग 1.1 सेमी यानि 0.43 इंच और नर मकड़ी की लंबाई लगभग 0.7 सेमी यानि 0.28 इंच तक होती है.
फिलीपींस में मिलती है मंकी ऑर्ब वीवर स्पाइडर
रात में शिकार करते समय यह जाल में बैठकर पेट के नीचे अपने चमकीले धब्बों से कीटों को आकर्षित करती है. इस मकड़ी की प्रजाति आमतौर पर फिलीपींस में भी देखी जाती है. जहां मादाओं को अक्सर नर मकड़ी से लड़ते हुए देखा जाता है. जब यह मकड़ी आराम करती है तो खुद को बंदर जैसी आकृति में बना लेती है. जिससे यह इतनी डरावनी दिखती है कि दूर से यदि रात में कोई इसे देख ले तो डर जाए. इसलिए इसे घोस्ट स्पाइडर यानी भूत मकड़ी भी कहा जाता है.
'जंगल देखो, जंगल वालों की नजर से'
पेंच टाईगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि "पेंच टाइगर रिजर्व में एक अभियान चलाया जा रहा है. जिसका नाम है 'जंगल वालों की नजर से'. जिसका मतलब है कि जंगल देखो, जंगल वालों की नजर से. इसके तहत पेंच टाइगर रिजर्व और वन विभाग में काम करने वाले कोई भी कर्मचारी अपने मोबाइल कैमरा से जंगल के कोई भी जीव, पेड़-पौधे या यूनिक तस्वीर लाता है तो उसे इनाम भी दिया जाता है.
इसी के तहत अलग-अलग कर्मचारी अपने काम के साथ-साथ इन पर भी नजर रखता है. इसका उद्देश्य जंगल की बेहतर देखरेख के साथ ही जंगल की हर चीज से कनेक्टिविटी करने का है, क्योंकि जंगल के चप्पे चप्पे की नजर और जानकारी जंगल के कर्मचारियों को होती है.
अनोखे जीवों का संसार है पेंच नेशनल पार्क
सिवनी और छिंदवाड़ा जिले के अंतर्गत आने वाला पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के प्रमुख आकर्षणों में से एक है. पेंच नेशनल पार्क, पेंच टाइगर रिजर्व का ही हिस्सा है, जो 1180 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. इसमें से 768 वर्ग किलोमीटर का बफर जोन भी शामिल है और 411.33 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया है. यह पार्क अपने समृद्ध जीवों के लिए प्रसिद्ध है. दुर्लभ से लेकर लुप्तप्राय कई जंगली प्रजातियों का स्थान है.
रिसर्च के लिए दुनिया भर से आते हैं शोधकर्ता
पेंच टाईगर रिजर्व में टाइगर के अलावा भी अद्भुत पक्षियों, तितलियों और अन्य जीवों का डेरा है. जो शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है. इसलिए दुनिया भर के कई देशों के शोधकर्ता पेंच टाइगर रिजर्व में कई-कई दिनों तक अपनी रिसर्च के लिए रुकते हैं.
शाकाहारी हैं अधिकांश जीव
पेंच टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार पेंच टाइगर रिजर्व में शाकाहारी जीव ज्यादा हैं. इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में बाइसन, सांभर, बार्किंग हिरण, चौसिंघा, चिंकारा और जंगली सुअर हैं. अन्य जानवरों में सियार, लोमड़ी, पाम सिवेट, छोटा भारतीय सिवेट, जंगली बिल्ली, सामान्य नेवला, छोटा भारतीय नेवला, रूडी नेवला, लकड़बग्घा, साही, रैटल शामिल हैं.
325 से अधिक प्रवासी पक्षियों का डेरा
यहां स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की 325 से ज्यादा प्रजातियां हैं, जिनमें मालाबार पाइड हॉर्नबिल, इंडियन पिटा, ऑस्प्रे, ग्रे-हेडेड फिशिंग ईगल, व्हाइट आईड बज़र्ड, गिद्धों की प्रजातियां आदि शामिल हैं. सर्दियों में ब्राह्मणी बत्तख, पिंटेल बत्तख, बारहेडेड गीज, कूट्स, पोचार्ड्स, विगॉन, गैडवॉल, मैलार्ड आदि सहित हजारों प्रवासी जलपक्षी पार्क के भीतर स्थित तालाबों में आते हैं.
कृषि विकास में नया अध्याय लिखेगी प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
11 Oct, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पी एम धन-धान्य कृषि योजना कृषि विकास के क्षेत्र में नया अध्याय लिखेगी। मुख्यमंत्री डॉ यादव शनिवार को इंदौर से केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा दिल्ली में आयोजित 'अन्नदाताओं का सम्मान, समृद्ध राष्ट्र का निर्माण" कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संबोधित किया और इंदौर में 30 लाख टन क्षमता के अत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण संयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इंदौर, ग्वालियर सहित अन्य सहकारी संघों को पैक्स से जोड़े जाने को भी ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार माना।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर से वर्चुअली श्रवण किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल, विधायकगण मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, मनोज पटेल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, मध्यप्रदेश दुग्ध महासंघ के एमडी डॉ. संजय गोवानी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
कार्यक्रम के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के किसानों के लिए दो बड़ी योजना - प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्म-निर्भरता मिशन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना देश के कृषि विकास और इससे जुड़े सेक्टर्स में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 10 हजार एफपीओ के अंतर्गत 50 लाख किसान सदस्यता ले चुके हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण कृषि मिशन में एक लाख किसानों का प्रमाणन, 4275 मैत्रीय का प्रमाणन, कंप्युटराइजेशन में 10 हजार से अधिक बहुउद्देशीय पैक्स को मंजूरी, डेयरी, मत्यपालन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण जैसे कई प्रकार के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के इंदौर में 30लाख टन की क्षमता और 79 करोड़ रुपये की लागत वाले आत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण सयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया है। साथ ही प्रदेश के इंदौर और ग्वालियर सहकारी संघों को पैक्स से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार माना।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से जहां कम उपज वाले देश के 100 जिलों में पैदावार बढ़ाने के प्रयासों को बल मिलेगा, वहीं दालों के उत्पादन में भी तेजी आएगी। इस विशेष कार्यक्रम में कृषि और इससे जुड़े सेक्टर्स की करीब 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं शामिल हैं। इनसे न केवल देश के किसान भाई-बहनों के जीवन में नई खुशहाली आएगी, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी और मजबूत होगा।
वर्चुअल कार्यक्रम की समाप्ति के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर जिले के किसानों द्वारा आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया गया।
न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
11 Oct, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि न्याय पाना देश के हर नागरिक का मौलिक, बुनियादी, मानवीय, नागरिक और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत की संघीय शासन व्यवस्था का आधार ही सबके जीवन, भोजन और स्वास्थ्य के अधिकारों की समान रूप से न्यायपूर्ण रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि लोक कल्याणकारी राज्य का पहला दायित्व है कि देश का कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे। न्याय और सुशासन न केवल राष्ट्र और समाज को मजबूत करते हैं, बल्कि शासन व्यवस्था को जवाबदेह भी बनाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का नया दौर न्याय का पथ गौरवान्वित करने वाला है। उच्चतम न्यायालय द्वारा बीते कुछ सालों में दिए गए कई निर्णयों ने देश को नई दिशा दी है। इससे न्याय व्यवस्था पर हमारी आस्था को और बल मिला है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि युग बदले, दौर बदले, परंतु न्याय की आत्मा हमेशा वही रहेगी। समानता, पारदर्शिता, विनम्रता और सबको समय पर न्याय दिलाना ही न्यायपालिका की मूल आत्मा रही है और आगे भी रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा है हमारे देश में न्याय की प्राचीन परंपरा रही है। न्याय देने की स्थापित व्यवस्था को और बेहतर बनाना हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब तो न्याय की देवी की आंखों की पट्ठी भी खोल दी गई है। इसका आशय यह है कि अब न्याय की देवी खुली आंखों से न्याय कर सकेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित "इवोल्विंग होराइजन्स: नेविगेटिंग कॉम्प्लेक्सिटी एंड इनोवेशन इन कमर्शियल एंड आर्बिट्रेशन लॉ इन द डिजिटल वर्ल्ड" विषय पर आयोजित विधि विशेषज्ञों की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस) के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्चतम न्यायलय के न्यायमूर्तिगणों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर इस संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए इंदौर पधारे उच्चतम न्यायालय के सभी सम्मानीय न्यायमूर्तियों और देश-विदेश से आए विधि विशेषज्ञों, न्यायविदों तथा विद्यार्थियों का आभार जताते हुए कहा कि देश के सबसे स्वच्छतम शहर में न्याय प्रणाली के मंथन पर ऐसी विद्वत सभाओं का आयोजन हमें नई उम्मीद देता है, साथ ही और बेहतर करने की प्रेरणा भी देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार न्याय प्रणाली को और अधिक सुलभ, सरल और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। राज्य में प्रादेशिक और जिला स्तर के न्यायालयों की सुदृढ़ स्थापना के साथ-साथ मध्यप्रदेश में ग्राम न्यायालयों की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय न्याय परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हम सम्राट वीर विक्रमादित्य को कैसे भूल सकते हैं, जिन्होंने अपने बाल्यकाल से ही तत्समय भारत देश में न्याय और सुशासन की व्यवस्था का सूत्रपात किया था। हम उन्हीं के बताए मार्ग पर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में कानून के क्षेत्र में अनेक नवाचार हो रहे हैं, जिससे नागरिकों को अधिक अधिकार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ दायित्वों का पालन भी आवश्यक है उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली जितनी सहज और सरल होगी, नागरिक को उतनी ही जल्दी न्याय मिलेगा। हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक नागरिक को सुगमता से न्याय मिले और उसकी आस्था न्यायिक व्यवस्था पर सदैव बनी रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष ज़ोर देकर कहा कि आज के तेज़ी से विकसित होते तकनीकी युग में, न्यायपालिका को निरंतर मूल्यांकन और अनुकूलन उपायों पर काम करना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि न्याय प्रदान करना नवाचार में बाधा डाले बिना निष्पक्ष और पारदर्शी बना रहे। इससे भारत की अर्थव्यवस्था का विकास हो सके और साथ ही व्यापार करने में आसानी भी सुनिश्चित हो।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी ने कहा कि न्यायपालिका का लक्ष्य कानून का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के विचार को सीमित किए बिना निष्पक्षता की सीमाओं का विस्तार करना है। उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था में, डेटा पर नियंत्रण केवल फर्मों या कंपनियों के स्वामित्व से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, और इसलिए, आर्थिक विकास को बाधित किए बिना पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कानूनी पेशा तकनीकी प्रगति का अपवाद नहीं रह सकता। प्रौद्योगिकी-संचालित और स्वचालित अनुबंधों के उदय के साथ, न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तकनीकी विकास के कारण न्याय से समझौता न हो और इन प्रगति के साथ विकसित होना चाहिए।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि जैसे-जैसे व्यापार का विस्तार होता है, विवाद स्वाभाविक रूप से बढ़ते हैं और इसका समाधान न्यायपालिका में ही निहित है। चूँकि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, इसलिए हमारी मानसिकता में बदलाव लाने और सभी हितधारकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपयोगी तो है, लेकिन यह पेटेंट और पंजीकरण जैसे क्षेत्रों में नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का केवल एक भागीदार ही नहीं, बल्कि एक निर्माता भी है। न्याय से समझौता किए बिना, व्यापार में सुगमता और नवाचार को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने न्यायनिर्णयन से सहयोग और मध्यस्थता से नवाचार की ओर बदलाव पर ज़ोर दिया और कानूनी बिरादरी के लिए तदनुसार अनुकूलन की आवश्यकता पर बल दिया।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने "विकसित होते क्षितिज: डिजिटल दुनिया में वाणिज्यिक और मध्यस्थता कानून में जटिलता और नवाचार को नेविगेट करना" विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण और अन्य न्यायाधीशगणों और विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने पारदर्शिता, दक्षता और कानून के शासन को बनाए रखते हुए तकनीकी परिवर्तन के अनुकूल होने में न्यायपालिका की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मध्यप्रदेश कानूनी और तकनीकी नवाचार का केंद्र बनने के लिए अच्छी स्थिति में है, जो वाणिज्य एवं व्यापार करने में आसानी के राष्ट्रीय लक्ष्य के बेहद अनुरूप है।
भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपने संबोधन में कहा कि कानूनों को तकनीकी प्रगति के अधीन हुए बिना उनके साथ विकसित होना चाहिए। मध्यस्थ दायित्व और एआई-सहायता प्राप्त याचिकाओं के प्रारूपण जैसे उभरते मुद्दों पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस संगोष्ठी की सराहना ऐसी उभरती चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय पहल के रूप में की।
डेनिश पेटेंट एवं ट्रेडमार्क कार्यालय की उप महानिदेशक सुमारिया स्कोउ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और डेनमार्क के बीच वाणिज्यिक और मध्यस्थता संबंधी मामलों में परस्पर सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं बड़ी तेज़ी से आपस में जुड़ती जा रही हैं।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की तीन नई तकनीकी पहलों का भी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा उद्घाटन किया गया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर पीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया द्वारा सभी अतिथियों का परिचय कराया गया। संगोष्ठी में ऑनलाइन इंटर्नशिप फॉर्म जमा करने का सॉफ्टवेयर, केस डायरी की ऑनलाइन संचार प्रणाली, और समझौता योग्य अपराधों के लिए "समाधान आपके द्वार" के बारे में बताया गया। संगोष्ठी के शुभारंभ सत्र के समापन पर मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित किया गया।
इंदौर में दो दिवसीय यह अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी देश के प्रतिष्ठित न्यायाधीशों, कानूनी विद्वानों और वैश्विक विशेषज्ञों को डिजिटल परिवर्तन से उभरने वाली कानूनी चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए आयोजित की गई है। संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में प्रौद्योगिकी के युग में वाणिज्यिक कानून, इंटरनेट मध्यस्थ दायित्व, ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा, भारत-यूरोपीय संघ मध्यस्थता परिप्रेक्ष्य, ऑनलाइन अवैधताओं का आपराधिक प्रवर्तन और बौद्धिक सम्पदा एवं नवाचार के बीच संबंध सहित महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। यह संगोष्ठी न्यायिक क्षमता को मजबूत करने और डिजिटल युग में कानूनी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए उच्च न्यायालय की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। यह आयोजन तेजी से विकसित हो रहे वाणिज्यिक परिदृश्य की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी भविष्य के लिए तैयार न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संगोष्ठी में देश-विदेश से आए विधि विशेषज्ञों, न्यायविदों, न्यायिक अधिकारियों और विधि छात्रों ने सहभागिता की। संगोष्ठी में न्यायिक नवाचार, विधिक सुधार और डिजिटल न्याय प्रणाली सहित कमर्शियल लॉ एंड आर्बिट्रेशन पर भी विचार-विमर्श किया गया। शनिवार, 11 अक्टूबर और रविवार, 12 अक्टूबर को आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठी में कुल छह तकनीकी सत्र होंगे।
किसानों को आर्थिक रूप से बनाया जा रहा है सशक्त: कृषि मंत्री कंषाना
11 Oct, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के उददेश्य से "प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना", दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये "नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग" का शुभारम्भ किया जाना भारत सरकार की नई पहल है। मंत्री कंषाना ने यह बात कृषि उपज मंडी करोंद के प्रांगण में आयोजित प्रधानमंत्री के लाइव कार्यक्रम के दौरान कही। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किसान भाई-बहनों को 42 हजार करोड़ से अधिक की कृषि परियोजनाओं का उपहार दिया गया।
कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना भारत सरकार की एक नई पहल है जो किसानों को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सशक्त कर कृषि उत्पादकता एवं ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देगी। इस योजना के तहत 100 आकांक्षी जिलों को सम्मिलित कर किसानों को वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच प्रदान की जायेगी। इसी के साथ भारत संकल्पित है कि दलहन उत्पादन में भारत आत्मनिर्भरता प्राप्त करे। हमें दलहनों के लिये किसी पर निर्भर न होना पड़े। अभी वर्तमान में दाल उत्पादन 24.2 मिलियन टन है जिसे बढ़ाकर आगामी पांच सालों में पैंतीस मिलियन टन करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार भी प्रधानमंत्री का संकल्प पूरा करने के लिये वचनबद्ध है।
कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश के समस्त जिलों में इस मिशन को लागू कर आत्मनिर्भरता के उददेश्य की पूर्ति के लिए अरहर, उड़द एवं मसूर जैसी फसलों को प्राथमिकता के आधार पर बढ़ावा दिया जायेगा। सरकार इन उत्पादित फसलों को शत- प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जैविक खेती के क्षेत्र में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन प्रारंभ किया गया है। मिशन का उददेश्य सभी के लिये सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ प्राकृतिक खेती को बढावा देना है। इस मिशन के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश को 1513 क्लस्टर में 75000 हैक्टेयर भूमि को सम्मिलित करते हुये 189125 किसानों को लाभांवित किया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत प्रत्येक किसान को चार हजार रूपये प्रति एकड़ अनुदान प्रदान किया जायेगा। इसी के साथ मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भारत सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2025 में सोयाबीन खरीदी हेतु भावांतर भुगतान योजना लागू की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं होगी। डबल इंजन की सरकार किसानों के चहुंमुखी विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
कार्यक्रम में महापौर मालती राय, कृषि सभापति अशोक मीणा सम्राट, अध्यक्ष अनाज मंडी समिति हरीश ज्ञानचंदानी, जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और किसान भाई- बहन उपस्थित थे।
प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने चलाया गया "दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान"
11 Oct, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दोगुना से अधिक करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रदेश में निरंतर गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया गया। अभियान के अंतर्गत गांव गांव में घर-घर जाकर पशुपालकों को पशुओं में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं के टीकाकरण, उनकी स्वास्थ्य रक्षा, संतुलित पशु आहार, पशु पोषण आदि के बारे में तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी गई। पशुपालकों को उपलब्ध संसाधनों में कम खर्च पर अधिक दूध उत्पादन करने और ज्यादा लाभ कमाने के बारे में जागरूक किया गया।
प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी श्री उमाकांत उमराव द्वारा पशुपालन संचालनालय में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के प्रथम चरण के पूर्ण होने पर अभियान के अंतर्गत की गई कार्यवाही एवं मैदानी स्तर पर किए गए विभिन्न कार्यों की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने प्रथम चरण में प्राप्त विभिन्न प्रकार के सुझावों पर क्रियान्वयन और द्वितीय चरण की तैयारी के संबंध में आवश्यक निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए.
बैठक में बताया गया कि अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत विभाग के अधिकारी–कर्मचारियों द्वारा 10 या अधिक गौवंश–भैंस वंश पालने वाले पशुपालकों से संवाद करने के लक्ष्य अनुसार समस्त जिलों में लगभग 370000 पशुपालकों से उनके घर पहुंचकर भेंट की और उन्हें पशुपालन के संबंध में जानकारी दी, साथ ही उनकी समस्याओं का निराकरण भी किया। अभियान के दौरान मुख्य फोकस पशुओं के दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने पर रहा.
अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधि, संभागीय आयुक्त, जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों और समाज के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा भी विभिन्न स्थानों पर पशुपालकों से भेंट की गई और उन्हें दूध उत्पादन और पशुपालन से ज्यादा लाभ उठाने के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान की गई एवं पशुपालकों के अनुभव भी साझा किए गए। किसानों और पशुपालकों ने भी उत्साहपूर्वक इस अभियान में सहभागिता की.
बैठक में डॉ. उमेश चंद्र शर्मा प्रेसिडेंट वेटरनरी कौंसिल ऑफ़ इंडिया न्यू दिल्ली, संचालक पशुपालन डॉ. पी.एस. पटेल, डॉ. अनुपम अग्रवाल, राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम भोपाल के प्रबंध संचालक डॉ. सत्यनिधि शुक्ला, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. प्रवीण शिंदे एवं जिलों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।
भिलाला समाज ने जगाई सामाजिक चेतना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
11 Oct, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग का समग्र कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी कोशिश है कि जनजातीय वर्ग का कोई भी व्यक्ति शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि भिलाला समाज एक साहसी और संस्कारित समाज है, जिसने मां नर्मदा के आशीर्वाद से नशामुक्ति और मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नशा नाश की जड़ है, जो कई पीढ़ियों को बर्बाद कर देता है। समाज की कुरीतियों को खत्म करने का प्रयास एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को धार के किला मैदान में जय ओमकार आदिवासी भिलाला समाज संगठन द्वारा आयोजित 12वें प्रांतीय वार्षिक सामाजिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम शुभारंभ किया। सम्मेलन के तहत भिलाला समाज द्वारा युवक-युवती वैवाहिक परिचय सम्मेलन, रोजगार पंजीयन शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, नशामुक्ति जागरूकता शिविर, कैरियर मार्गदर्शन शिविर सहित सामाजिक कुरीतियों के निवारण के लिए जागरुकता शिविर भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीथमपुर थाना (बगदून) के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया।
जनजातीय नायकों का सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धार जिले की भिलाला समाज की जुझारू महिला नेत्री को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान देकर समाज का गौरव बढ़ाया है। राज्य सरकार ने अलीराजपुर का नाम परिवर्तन कर आलीराजपुर कर दिया है। क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना और महाराजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह की जयंती को भव्य रूप से मनाकर हमारी सरकार ने जनजातीय नायकों और परम्पराओं को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का राष्ट्ररक्षा और स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान रहा है। भगोरिया के उल्लास को हमने राज्यस्तरीय पर्व का दर्जा देकर जनजातीय लोक परंपराओं को सम्मानित किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक समाज को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्योग के क्षेत्र में तेज़ी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब भारत माता के लाल हैं, ऐसे में भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। राज्य सरकार ने समाज के वंचित वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया है। हमारी सरकार ने सबको विकास की मुख्यधारा में जोड़ने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भिलाला समुदाय की सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता आज समाज के दूसरे वर्गों को विकास की दिशा में नई प्रेरणा दे रही है। समाज की विभिन्न मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भिलाला समाज को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए हम कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे। मांगों की पूर्ति के लिए जितना अधिक हो सकेगा वो बेहतर से बेहतर तरीके से करेंगे।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं, किसानों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि आज ही प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के माध्यम से देशभर के किसानों को बड़ी सौगात मिली है। धार लोकसभा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम के बाद जनजातीय वर्ग के भाइयों-बहनों की जमीन सुरक्षित हुई है, जिससे समाज को बड़ी राहत मिली है। भिलाला समाज ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए सरकार के प्रति आभार जताया है। उन्होंने बताया कि खरगोन और बड़वानी जिले में भिलाला समाज के सामुदायिक भवनों का निर्माण राज्य सरकार की आर्थिक सहायता से किया जा रहा है। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, देवेंद्र पटेल, पूर्व सांसद छतर सिंह दरबार, समाज के सभी विधायक एवं अन्य निर्वाचित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। कार्यक्रम के आरंभ में जय ओमकार आदिवासी भिलाला समाज संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष बीएस जामोद ने सम्मेलन की रूपरेखा और भावी गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
किसानों को मिलेगी राहत! मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा ग्रस्तों के लिए खोला मुआवजे का खज़ाना
11 Oct, 2025 06:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्य प्रदेश में दिवाली से पहले लाड़ली बहनों को मिलेगी सहायता राशि, CM मोहन यादव का ऐलान
मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ है, आपदा ग्रस्त प्रत्येक किसान को मदद दी जाएगी. विपत्ति में आए हर एक किसान को राहत राशि मिलेगी और एक-एक खेत का सर्वे किया गया है. सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावांतर योजना का लाभ भी दिया जाएगा. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 133 करोड 80 लाख रुपए की लागत के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण किया.
इनमें 127. 63 करोड रुपए लागत के 23 किलोमीटर से अधिक लंबाई के इंगोरिया से उन्हेल टू लेन मार्ग निर्माण का भूमि-पूजन सम्मिलित है. साथ ही 1.26 करोड़ के नवीन नगर परिषद कार्यालय भवन निर्माण एवं 2.17 करोड़ के चिड़ी से रावदिया मार्ग निर्माण का भूमि पूजन तथा 2.74 करोड रुपए के करनावद विद्युत उपकेंद्र निर्माण का लोकार्पण भी किया गया.
इमली व मावा उद्योग को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हेल क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई, जिनमें उन्हेल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन, रामगढ़ बिहारिया मार्ग पर नारायण धाम को जोड़ने के लिए पुल का निर्माण तथा उन्हेल में विश्रामगृह का निर्माण सम्मिलित है. उन्हेल में इमली तथा मावा उद्योग से जुड़े हुए व्यक्तियों एवं उनके व्यापार विकास के लिए भी कार्य किया जाएगा.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हेल-इंगोरिया टू लेन मार्ग निर्माण के लिए नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हेल क्षेत्र का विकास लगातार किया जा रहा हैं. गंभीर नदी परियोजना का लाभ भी उन्हेल क्षेत्र के नागरिकों तथा किसानों को मिलेगा. राज्य शासन द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के हित में भावांतर योजना लागू की गई है. किसानों को घर बैठे योजना का लाभ दिया जाएगा. प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों के मामले में प्रभावित किसानों को राहत राशि दी जा रही है.
किसानों को मिलने लगी सम्मान निधि
जैसे-जैसे जिला कलेक्टरों से रिपोर्ट प्राप्त होती जा रही है, वहां के किसानों को राहत राशि का वितरण किया जा रहा है. किसानों को सम्मान निधि मिल रही है. बहनों को लाडली बहना योजना के तहत सहायता राशि दी जा रही है. यह राशि दीपावली के पूर्व उपलब्ध कराएंगे. गोपालन गौशाला योजना अंतर्गत 25 देसी गायों के पालन पर 40 लाख रुपए के प्रोजेक्ट में अधिकतम 10 लाख रुपए अनुदान शासन देगा. प्रदेश में गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनाई जाएगी.
100 करोड़ के होंगे कार्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के सराहनीय कार्य लगातार किए जा रहे हैं. प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण पथ का विकास किया जा रहा है. ओरछा में आगामी 15 अक्टूबर को 100 करोड रुपए से ज्यादा लागत के कार्यों की शुरुआत की जा रही है. प्रदेश के चित्रकूट का भी विकास किया जा रहा है.
सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि प्रदेश में किसान हितैषी मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किसानों के हित में भावांतर योजना लागू की गई है, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा. सरकार सदैव किसानों के साथ है. आपदा प्रभावित प्रत्येक किसान को शासन द्वारा मुआवजा दिया जाएगा. इसके साथ ही बीमा दावा राशि भी दिलाई जाएगी.
विधायक सतीश मालवीय ने कहा कि क्षेत्र को लगातार विकास की सौगात मिल रही है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया. किसान हितैषी कार्यों के लिए क्षेत्रीय किसानों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को हल भेंट किया गया.
ग्वालियर में मिले 8 संदिग्ध बांग्लादेशी, वापस भेजने की तैयारी! पुलिस कर रही वेरिफिकेशन
11 Oct, 2025 02:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर। मध्य प्रदेश में अवैध प्रवासियों के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है। राज्य सरकार ऐसे विदेशी नागरिकता वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है, जिनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। इस मुहिम के तहत ग्वालियर में भी अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे लोगों को खोजा जा रहा है जो बिना अनुमति और वैध दस्तावेज के शहर में रहे हैं. पुलिस ने ऐसे 8 बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाया है, जिनकी भूमिका संदिग्ध है।
‘नागरिकों को डिपोर्ट कराया जाएगा’
ग्वालियर SSP धर्मवीर सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन और डीजीपी के निर्देश पर सर्चिंग की जा रही है। ग्वालियर में कई सारे लोगों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है, जिसकी एक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत कोई विदेशी नागरिकता का व्यक्ति अवैध तरीके से रहता पाया जाता है तो उसे निष्कासित करने का काम किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में महाराजपुरा थाना क्षेत्र में कुछ लोगों को चिह्नित किया गया है। उनका वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसके बाद इसकी सूचना राज्य सरकार को दी जाएगी। यदि इनकी नागरिकता विदेशी होगी तो इन्हें डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
6 जिलों में मिले थे 386 संदिग्ध बांग्लादेशी
इससे पहले भी संदिग्ध बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इसी साल जुलाई में 6 जिलों (ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, कटनी और शाजापुर) में 386 संदिग्ध बांग्लादेशी मिले थे। इनमें से 94 ग्वालियर में ही पाए गए थे। पुलिस की पूछताछ में इन लोगों ने राशन कार्ड, पहचान पत्र और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज पेश किए थे। जिन 94 लोगों को पकड़ा गया था, सभी ने अपने आप को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया था. इसमें एक बांकुरा, एक पूर्व मिदनापुर, 30 पश्चिम मिदनापुर और हुगली से 62 व्यक्ति थे। पुलिस ने सभी के दस्तावेजों को जांच के लिए उनके बताए पते पर भेजा था।
कफ सिरप विवाद पर सख्त हुई सरकार, जांच के लिए बनी हाई लेवल कमेटी
11 Oct, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। कफ सिरप मामला सामने के बाद से राज्य सरकार लगातार कड़े एक्शन ले रही है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब सरकार ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे। ये समिति दवाओं के दुरुपयोग, अवैध ड्रग व्यापार और मादक पदार्थों की खेती पर रोक लगाने समेत कई कार्य करेगी।
कफ सिरप से जुड़े मामले में निगरानी
ये कमेटी राज्य में ड्रग कानूनों को पूरे राज्य में लागू कराने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगी। राज्य सरकार का मानना है कि इससे ड्रग्स खरीद-बिक्री पर नियंत्रण और एंटी नार्कोटिक्स मामले में मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही कफ सिरप और अन्य नशीली दवाओं से जुड़े मामले में निगरानी रखी जा सकती है।
समिति क्या-क्या करेगी?
राज्य में नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन
नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए रणनीति बनाना
मादक पदार्थों के खेती के विकल्प के बारे में कार्यक्रम तैयार करना
नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर से जुड़ी नीतिगत और रीजनल समस्याओं का समाधान करना
इस कमेटी में कौन-कौन रहेगा?
इस समिति में राज्य और केंद्र दोनों सरकारों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे. इस समिति की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (होम, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, फॉरेस्ट, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, वाणिज्यिक कर, एजुकेशन डिपार्टमेंट), पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल), अतिरिक्त महानिदेशक (डीआरआई) समेत कई अधिकारी रहेंगे।
ग्वालियर में BIS का कॉनक्लेव, लोगों को बताया कैसे पहचानें उत्पादों की गुणवत्ता
10 Oct, 2025 06:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भारतीय मानक ब्यूरो ने गुरुवार को स्टेकहोल्डर्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया. इसमें भितरवार विधायक मोहन सिंह राठौड़ और भारतीय मानक ब्यूरो नोएडा शाखा के निदेशक विक्रांत ने लोगों को किसी भी वस्तु और उत्पाद की जानकारी को लेकर जागरूक होने की बात कही. वहीं इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे.
बीआईएस ने आयोजित कराया जागरूकता कार्यक्रम
भारत में तेजी से बढ़ती औद्योगिक प्रगति और बाजार में वस्तुओं की गुणवत्ता को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है रही है. लेकिन सरकार का मानना है उद्योग जगत से लेकर आम उपभोक्ता तक गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सामाजिक उत्तरदायित्व भी जरूरी है. ऐसे में हर उपभोक्ता को जागरूक होना जरूरी है. वह यह जान सके कि बाजार में जो भी वस्तु उपलब्ध है उसकी गुणवत्ता की कितनी गारंटी है. इसी उद्देश्य के साथ ग्वालियर में भारतीय मानक ब्यूरो का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ.
तहसील स्तर पर कराएं कार्यक्रम: मंत्री राकेश शुक्ला
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि "वस्तुओं की गुणवत्ता को जनसाझेदारी से सुनिश्चित करना समाज का दायित्व है. उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो की कार्यप्रणाली की सराहना की. साथ ही शुक्ला ने कहा कि "उपभोक्ताओं को जागरूक करने वाले ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन तहसील स्तर पर भी होना चाहिए." इस दौरान उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो को आने वाले समय में भिंड जिले में भी इस तरह के कार्यक्रम तहसील स्तर पर आयोजित कराने का आमंत्रण भी दिया.
नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक आयोजन से दिया संदेश
इस आयोजन में उद्योग जगत से जुड़े कई बड़े प्रतिनिधि भी शामिल हुए. उनके समक्ष भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से छात्र छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम और नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया. जिसमें बीआईएस केयर ऐप और गुणवत्ता उत्पादों के बारे में प्रस्तुति देकर लोगों को जागरूक किया गया.
'समृद्ध भविष्य सिर्फ साझेदारी से संभव'
कार्यक्रम के अंत में भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक एवं प्रमुख विक्रांत ने कहा, "भारतीय मानक ब्यूरो की नीति एवं कार्य प्रणाली आमजन के लिए उपयोगी है. समृद्ध भविष्य केवल सहयोग और साझेदारी के माध्यम से ही संभव है. बीआईएस इसी साझा प्रयास से देश को नेतृत्व प्रदान करता है"
ऊर्जा मंत्री नहीं आए तो शुक्ला को बुलाया
पूर्व निधारित कार्यक्रम के अनुसार BIS के इस कॉनक्लेव में कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया था. लेकिन अंतिम समय में वे किसी निजी कराणों के नहीं आ सके, तो आनन फानन में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला से संपर्क कर उन्हें बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया.
छतरपुर के तुलसीदास सोनी रखते हैं करवा चौथ का व्रत, 18 साल से पत्नी के साथ निभा रहे रस्म
10 Oct, 2025 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छतरपुर: करवा चौथ पर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चांद देखने के बाद खाना खाती हैं. सुहागिन महिलाएं चौथ माता से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. आमतौर पर यह व्रत महिलाएं ही रखती हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी पति होते हैं, जो इस कठिन व्रत में अपनी पत्नी का बराबरी से साथ देते हैं, वे भी उनकी तरह व्रत रखते हैं. छतरपुर में एक शख्स पिछले 18 साल से अपनी पत्नी की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रख रहे हैं. इनकी चर्चा आज पूरे शहर में हो रही है.
पत्नी के लिए 18 सालों से व्रत रख रहे तुलसीदास सोनी
आप को सुनकर अजीब लगेगा, लेकिन ये हकीकत है. बुंदेलखंड के खजुराहो में रहने वाले तुलसीदास सोनी अपनी पत्नी के लिए करवा चौथ का व्रत पिछले 18 सालों से रखते चले आ रहे हैं. वह पत्नी की लंबी उम्र की कामना और दोनों में प्रेम बढ़ता रहे, खुशहाल जीवन के लिए ये रस्म निभा रहे हैं. तुलसीदास सोनी की शादी रचना सोनी से 22 अप्रैल 2008 में हुई थी. तभी से तुलसीदास ने भी कसम खाई थी, अगर तुम मेरी उम्र के लिए व्रत रखोगी तो हम तुम्हारी लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगे. बस तभी से तुलसीदास ये परंपरा निभा रहे हैं.
पतियों का भी कर्तव्य, अपनी पत्नी के लिए रखें व्रत
खजुराहो की बस्ती में रहने बाले तुलसीदास पेशे से पत्रकार हैं ओर फोटोग्राफर का काम भी करते हैं. तुलसीदास सोनी बखूबी जानते हैं कि अधिनिकता के दौर में महिला और पुरुष को बराबरी का दर्जा रखते हैं. वहीं तुलसीदास सोनी ने बताया कि "पत्नी का ही कर्तव्य नहीं होता की वह पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखे बल्कि करवा चौथ का व्रत पति को भी अपनी पत्नी के लिए रखना चाहिए. ऐसा करने से प्रेम बढ़ता है. जो महिला अपने पति के लिए पूरे दिन भूखे प्यासे रहकर व्रत रख सकती है, तो पति का भी फर्ज है, साल में एक बार पत्नी की उम्र के लिए व्रत रखें.
पति-पत्नी के रिश्तों में बना रहता है प्यार और सम्मान
तुलसीदास सोनी यह भी कहते हैं ऐसा करने से आपस में मान सम्मान बढ़ता है. आजकल तलाक के केस काफी ज्यादा आ रहे हैं. अगर पति-पत्नी आपस में एक-दूसरे की इज्जत करें तो यह रिश्ता और मजबूत होगा. साल में एक दिन ही ऐसा होता है. जिसमें पति पत्नी एक दूसरे के प्रति प्यार को समर्पित करते हैं. तुलसीदास सोनी के बताते हैं मोहल्ले के लोग भले ही हंसे, लेकिन करवा चौथ का व्रत रहने से पति पत्नी में प्रेम बना रहता है." वहीं इस पर पत्नी रचना सोनी कहती हैं " पुरुषों को भी व्रत रखना चाहिए."
रिन्यूएबल एनर्जी और अन्य सेक्टर्स में भारी निवेश, CM मोहन यादव ने निवेशकों से अपील की
10 Oct, 2025 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए व्यवस्थाओं को सरल बनाया गया है. प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत इस वर्ष सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, भोपाल के दौरान 18 नई नीतियां लागू की गईं. सरलीकृत की गई व्यवस्थाओं के कारण मध्यप्रदेश में तेज गति से निवेश आ रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराष्ट्र के उद्यमियों से मध्यप्रदेश में निवेश का अनुरोध करते हुए कहा कि प्रगति के क्षेत्र में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जोड़ीदार राज्य हैं. अतीत के गौरवशाली पृष्ठ को देखें तो महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश का गहरा संबंध रहा है.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुम्बई में “इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज इन पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग एंड वाइट गुड्स इन मध्यप्रदेश” को संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि व्यापारियों को नई पॉलिसियों का लाभ दिया जा रहा है. बिजनेस और निवेश को लेकर निरंतर सीसीआई की बैठकें आयोजित की जाती हैं. प्रदेश में संभागीय स्तर पर इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर छोटे शहरों को इंडस्ट्री से जोड़ा गया है.
कार्यक्रम में कौन कौन थे मौजूद
कार्यक्रम में सन फार्मा के अध्यक्ष दिलीप सांघवी, सीआईआई के अध्यक्ष नील सी. रहेजा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी), ईसीजीसी सृष्टिराज अम्बष्ठा, हिंडाल्को के प्रबंध निदेशक सतीश पाई, हेत्तिच (Hettich) के प्रबंध निदेशक आंद्रे एकहोल्ट, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी (एमडी एवं सीएफओ), आईपीसीए लैब अजीत कुमार जैन और एफआईईओ के उपाध्यक्ष रविकांत कपूर विशेष रूप से मौजूद थे.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिवाजी महाराज और प्रदेश के सिंधिया, होल्कर, पवार इतिहास के उस दौर में भारतीय समाज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका में रहे. उज्जैन में बाबा महाकाल की ध्वजा जिस शान से लहराती है, उसके अतीत में शिवाजी महाराज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के मध्य उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में संबंध अधिक सशक्त होंगे.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मुंबई में इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अर्पोच्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. भारत की आर्थिक राजधानी में उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ हमारा यह संवाद सत्र अत्यंत सकारात्मक और परिणामोन्मुखी रही. महाराष्ट्र की औद्योगिक विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश की अनंत संभावनाएं मिलकर देश की प्रगति को नई गति देंगे. हमारा लक्ष्य महाराष्ट्र के निवेशकों को मध्यप्रदेश की विकास यात्रा में एक रणनीतिक भागीदार के रूप में जोड़ना है.
मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट
डॉ. यादव ने कहा कि आज के इस इंटरेक्टिव सत्र का मुख्य उद्देश्य था नर्मदापुरम जिले के मोहासा-बाबई में स्थित, भारत के पहले अत्याधुनिक ‘मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट’ के बहुप्रतीक्षित फेज़ 2 में निवेश आकर्षित करना. इस ज़ोन में भूमि आवंटन के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि निकट, 12 अक्टूबर 2025, है, जिससे निवेशकों को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए एक स्पष्ट दिशा मिली. यह हमारी दूसरी मुंबई यात्रा है. विगत वर्ष, निवेशकों से चर्चा के दौरान हमें प्रदेश की नीतियों और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव मिले थे.
उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए गर्व है कि हमने उन सुझावों पर गंभीरता से काम किया है और अपनी नई औद्योगिक नीतियों में उन्हें शामिल किया है. हमने अपनी ‘उद्योग और रोजगार वर्ष 2025’ की प्रतिबद्धता और इस वर्ष लॉन्च की गई 18 नई, प्रगतिशील नीतियों को विस्तार से साझा किया. हमने न केवल जेनेरिक अवसर, बल्कि सेक्टर-स्पेसिफिक, रेडी-टू-इन्वेस्ट प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तुत किए—जिनमें नर्मदापुरम का पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, टेक्सटाइल पार्क, आईटी पार्क्स, फ़ूड पार्क्स एवं मेडिकल डिवाइस पार्क प्रमुख हैं.
संवाद कार्यक्रम में मुंबई और आसपास के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से 400 से अधिक शीर्ष निवेशक, उद्योगपति और विभिन्न औद्योगिक संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए. आयोजन के माध्यम से उन सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो मध्यप्रदेश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, आईटी, व्हाईट गुड्स, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, फार्मा, पर्यटन, फ़िल्म पर्यटन एवं लॉजिस्टिक्स आदि.
कार्यक्रम में 2 राउंडटेबल मीटिंग का आयोजन किया गया. पहली डिप्लोमेट्स के साथ राउंड टेबल मीटिंग हुई, जिसमें विभिन्न देशों के राजनयिकों के साथ द्विपक्षीय व्यापार और विदेशी निवेश बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई . दूसरी नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माताओं के साथ राउंड टेबल मीटिंग हुई, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा निर्माताओं को प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित ‘मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट’ के फेज़ 2 में निवेश के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया. साथ ही पॉवर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में प्रदेश की अन्य विशेषताओं और संभावनाओं पर भी चर्चा की गई.
वनटूवन मीटिंग
कार्यक्रम में 20 से अधिक प्रमुख उद्योगपतियों और एसोसिएशन / संस्थानों के साथ वन-टूवन मीटिंग की गई . इन गहन चर्चाओं में, टेक्सटाईल, ऑटोमोबाईल, इलेक्ट्रानिक्स, नवकरणीय उर्जा एवं फार्मास्युटिकल्स एवं कॉस्मेटिक्स जैसे प्रतिष्ठित समूहों ने विशेष रुचि दिखाई. हमने उनकी निवेश योजनाओं को समझा और उन्हें प्रदेश में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस सत्र के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में ₹19,900 करोड़ रूपए से अधिक के निवेश एवं अन्य सभी सेक्टर्स में ₹54,400 करोड़ रूपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इस प्रकार कुल 74,300 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश एवं जिनके माध्यम से लगभग 7000 से अधिक रोजगार सृजित होंने की संभावना है. इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने हेतु हम हर संभव प्रयास करेंगे, ताकि प्रदेश में पूंजी निवेश बढ़े और हमारे युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित हों.
समय से पहले 'जून' का अहसास: देश में गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड
अफगानिस्तान में आया 5.0 तीव्रता का भूकंप, कश्मीर में भी लगे झटके
ध्रुव योग का खास संयोग: इस साल मोहिनी एकादशी पर बन रहे हैं कई मंगलकारी मुहूर्त
बेड के सामने न रखें शीशा: वास्तु के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकती हैं ये चीजें
दुर्लभ दर्शन: यहाँ विराजते हैं मूंछों वाले प्रभु श्रीराम, 'कर्ज मुक्ति' के लिए प्रसिद्ध है यह धाम
अक्षय तृतीया पर बन रहा खास संयोग, आज करें ये शुभ कार्य और पाएं अक्षय फल
