मध्य प्रदेश
साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का टोल-फ्री नंबर 1930 का स्टीकर जारी
1 Jan, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिलासपुर। पुलिस ग्राउंड में चेतना जागरूकता अभियान के तहत, चेतना विरुद्ध साइबर अपराध के तारतम्य में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों के प्रति जन-जागरूकता फैलाना और नागरिकों को इससे बचाव के उपाय सिखाना था। इस अवसर पर साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के टोल-फ्री नंबर 1930 के स्टीकर जारी किए गए, जो लोगों को साइबर अपराध की रिपोर्टिंग के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इन स्टीकर्स को पुलिस अधिकारियों ,पेट्रोलिंग के वाहन, चेतन मित्रों, मीडियाकर्मियों तथा आमजन के निजी वाहनों पर लगाया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने इस अवसर पर कहा कि साइबर अपराधों का बढ़ता खतरा हमारे समाज और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। जागरूकता और सतर्कता से ही हम इस खतरे को कम कर सकते हैं। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे किसी भी साइबर अपराध का सामना करने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करें।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु आईपीएसड़सुमित कुमार ने आमजन को साइबर अपराधों के विभिन्न रूपों जैसे डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल्स से बचने के लिए जरूरी उपायों की जानकारी दी। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि सभी वर्गों तक यह संदेश पहुंचे।
इस अभियान में शहर के प्रमुख सामाजिक संस्थानों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे जनजागरूकता को व्यापक स्तर पर फैलाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती अर्चना झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदयन बेहार, नगर पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) अक्षय प्रमोद सभद्रा, नगर पुलिस अधीक्षक (सिविल लाइन) निमितेश सिंह, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (कोटा) नूपुर उपाध्याय, उप पुलिस अधीक्षक यातायात संजय साहू, प्रशिक्षु आईपीएस सुमित कुमार, प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक रोशन आहुजा सहित शहर के सभी थानों के थानाप्रभारी एवं अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
नेता पुत्रों की कब खुलेगी किस्मत?
1 Jan, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मप्र भाजपा की राजनीति में नेता पुत्रों के राजनीतिक भविष्य पर तथाकथित तौर पर ताला लगा हुआ है। परिवारवाद पर भाजपा और विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रोक ने मप्र के उन नेता पुत्रों को मायूस कर दिया है, जो राजनीतिक विरासत पाकर अपना भविष्य संवारना चाहत थे। आलम यह है कि चुनावी राजनीति के साथ ही संगठन में भी नेता पुत्रों के लिए फिलहाल दरवाजे बंद हैं। ऐसे में हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि नेता पुत्रों की किस्मत का ताला कब खुलेगा?गौरतलब है कि मप्र में नेता पुत्रों की बड़ी पौध राजनीति में हाथ आजमान को तैयार है। लेकिन पीएम मोदी के सख्त रुख के चलते विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव तक में नेता पुत्रों को टिकट नहीं मिला, बल्कि विधायक बेटे आकाश का टिकट कटने पर पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और मप्र सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को चुनाव लडऩा पड़ा। वहीं अब संगठन चुनाव में भी उनकी पूछपरख नहीं हो रही है। चनावों में टिकट न मिलने के बाद अब संगठन चुनाव में भी इन नेता पुत्रों की कोई पूछपरख नहीं है। बता दें, पिछले दिनों लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली जीत को पार्टी ने परिवारवाद को बढ़ावा न देने की उपलब्धि भी करार दिया। यही वजह है कि जो नेता पुत्र हमेशा से राजनीति में आगे दिखाई देते थे, वे अब मैदान से ही गायब हैं।
राजनीति में सक्रिय नहीं नेताओं के पुत्र
भाजपा में आधे दर्जन से अधिक दिग्गज नेताओं ने कई वर्षों पहले से अपनी राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन परिवारवाद के कारण कईयों की मंशा पूरी नहीं हो पाई है। पहले राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में अपनी उपस्थिति का लोहा मनवाने वाले नेता पुत्र अब राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर पार्टी के कोई भी नेता खुल कर बोलना नहीं चाहते हैं। हर किसी का यह कहना है कि राजनीतिक विरासत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्पष्ट संदेश के बाद कहने के लिए कुछ नहीं बचता। इसका असर दिखने लगा है। पहले नेताओं के पुत्र सक्रिय रहते थे वे अब नजर नहीं आ रहे हैं। यदि परिवारवाद पर रोक का असर टिकट वितरण पर भी नजर आया तो दिग्गजों और उनके पुत्रों के राजनीतिक अरमान ठंडे हो जाएंगे। उधर, चुनावों में किस्मत आजमाने की आस लगाए बैठे नेता-नेता पुत्रों को पार्टी का यह दावा भी निराश करने वाला है कि पिछले दिनों जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, वहां भाजपा को मिली जीत परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देने की वजह से हुई है।
चुनाव लडऩे की मंशा धरी की धरी रह गई
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, जयंत मलैया, गौरीशंकर बिसेन और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा जैसे राजनेताओं के पुत्र-पुत्री पहले राजनीति में जमकर सक्रिय थे, वे अब कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मप्र में पार्टी के दिग्गजों पर अपनी राजनीतिक विरासत पुत्रों को देने की मंशा पर संकट गहरा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले से सक्रिय हैं। इस लोकसभा चुनाव में उन्होंने विदिशा में जनसभाएं की भी कीं। शिवराज सिंह चौहान ने यहां से चुनाव लड़ा है। हालांकि, पहले उन्होंने कहा था कि जनता योग्य समझेगी तभी टिकट की दावेदारी के बारे में सोचूंगा। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री व विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र देवेंद्र सिंह तोमर (रामू) भी लगभग 10 वर्ष से राजनीति में सक्रिय हैं। विधानसभा चुनाव 2023 में उन्हें टिकट मिलने की अटकलें थी पर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने नरेंद्र सिंह तोमर को ही प्रदेश की राजनीति में लाकर विधानसभा चुनाव लड़ाया। सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से नौ बार के विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव भी बेटे अभिषेक को स्थापित करना चाहते हैं। वह दमोह या खजुराहो से इस बार लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे, पर पार्टी ने दमोह से राहुल सिंह लोधी का उतारा। उधर, दमोह से वर्ष 2023 में सातवीं बार विधायक बने और पूर्व मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ वर्ष 2021 के उपचुनाव में यहां भाजपा से टिकट की दावेदारी भी कर रहे थे, पर पार्टी ने कांग्रेस से आए राहुल लोधी को उतारा। राहुल चुनाव हारे तो मलैया परिवार पर भितरघात का आरोप लगा। सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया गया था। वह दोबारा अप्रैल 2023 में पार्टी में शामिल तो हो गए, पर पार्टी ने उनकी जगह फिर जयंत मलैया हो ही यहां से टिकट दिया। बालाघाट से विधायक व पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को आगे बढ़ा रहे थे। उन्हें विधानसभा का टिकट भी मिला था, पर लडऩे से मना कर दिया तो अंतत: गौरीशंकर को ही चुनाव लडऩा पड़ा। अब नेता पुत्रों की किस्मत कब खुलेगी इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
मोहन सरकार के नए साल का लक्ष्य निर्धारित
1 Jan, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार ने नए साल के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए रोड मैप बनाया है। चार साल और विजन का बड़ा खाका तैयार किया गया है। आइए जानते है एमपी सरकार के रोड मैप के अहम बिंदु प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दोगुना किया जाएगा। एक लाख 25 हजार अस्थाई विद्युत कनेक्शन लेने वाले कृषकों को सौर ऊर्जा के पम्प प्रदाय किये जाएंगे। अगले 4 वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प प्रदाय कर किसानों को विद्युत आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। कृषि फसलों के विविधीकरण की पहल की जाएगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ौत्तरी हो। अधिक दाम प्रदान करने वाली फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
सिंचाई, एजुकेशन को लेकर
एमपी में वर्तमान में 50 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है..अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना एक 1 करोड़ हेक्टेयर किया जाएगा। वर्तमान में 17 शासकीय मेडिकल कॉलेज है और 13 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है। पीपीपी मोड पर 12 और 8 शासकीय मेडिकल कॉलेज चालू किये जाएंगे। प्रदेश में दुग्ध समितियों का विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में प्राथमिक दुग्ध समितियां 8,500 गांवों में ही है। एक वर्ष में 15 हजार गांवों तथा 4 वर्षों में प्रदेश के समस्त गांवों तक दुग्ध समितियां गठित की जाएंगी।
एक लाख सरकारी भर्तियां
महिला स्व-सहायता समूह को जन आंदोलन बनाया जाएगा। वर्तमान में 25 लाख महिलाएं स्व-सहायता समूह से जुड़ी है यह संख्या चार वर्ष में 50 लाख तक बढ़ाई जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रदेश में बसों के लिये परिवहन कंपनी बनाकर संचालन किया जाएगा। वर्ष-2025 को उद्योग एवं रोजगार-वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। जिसमें युवाओं को शासकीय नौकरी के साथ स्व-रोजगार से जोडऩे का वृहद स्तर पर कार्य होगा। एक लाख सरकारी भर्तियां की जाएंगी।
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का गठन
प्रदेश में मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (महानगर) का गठन किया जाएगा। इंदौर-उज्जैन-देवास-धार को मिलाकर एक और भौपाल-सीहोर रायसेन विदिशा-ब्यावरा (राजगड) को मिलाकर दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाया जाएगा। संभाग, जिला, तहसीलों और अनुविभागों का पुनर्गठन किया जाएगा। भारत सरकार के विजन के अनुरूप राज्य के सभी संभाग मुख्यालयों जैसे ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदपुरम, शहडोल आदि को भी क्षेत्रीय आर्थिक विकास केंद्र के रूप में विकसित करने की अवधारणा के साथ कार्य योजना बनाई जाएगी। प्रदेश में संतुलित नगरीय विकास को गति देने और आर्थिक विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए पुनर्घनत्वीकरण और पुनर्विकास नीति के अतिरिक्त एकीकृत टाउनशिप नीति तैयार की जाएगी। इसमें निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।
दिग्विजय के गढ़ में आरएसएस का शक्ति संगम
1 Jan, 2025 08:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100वें वर्ष में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गढ़ राधौगढ़ में तीन दिवसीय राघौदय शक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 3, 4 और 5 जनवरी 2025 को पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में होगा।
इस कार्यक्रम में खंड-कुंभराज, चाचौड़ा, मधुसूदनगढ़ और राधौगढ़ से 3,000 से अधिक स्वयंसेवकों की भागीदारी रहेगी। गुना विभाग के अंतर्गत राधौगढ़ जिले में पहली बार इस तरह के विशाल और भव्य शक्ति संगम का आयोजन किया जा रहा है। 3 जनवरी को महापुरुषों के जीवन चरित्र पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। 4 जनवरी को राधौगढ़ नगर में स्वयंसेवकों का विशाल पथ संचलन होगा। 5 जनवरी को शिविर स्थल पर शारीरिक प्रदर्शन के साथ शक्ति संगम का समापन होगा।
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