मध्य प्रदेश
खेल हमें जीवन को अनुशासित होकर जीने की प्रेरणा देता है : मंत्री सिंह
17 Oct, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि खेल हमें अपने जीवन को अनुशासित होकर जीने की प्रेरणा देता है। अनुशासित व्यक्ति ही आगे बढ़कर देश सेवा का काम करता है। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल बच्चों से कहा कि खेल के क्षेत्र में भी अच्छी संभावनाएँ हैं। यहाँ पर भी कॅरियर बनाया जा सकता है। मंत्री सिंह शुक्रवार को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में 69वीं राज्य स्तरीय शालेय व्हॉलीबॉल क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
समापन समारोह में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि विद्यार्थी अपने मन को एकाग्र कर लक्ष्य पर केन्द्रित करें, तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने बच्चों से प्रतियोगिता में खेल भावना के साथ शामिल होने की अपील की। अतिथियों ने विजेता और उप विजेता टीम सहित उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया।
ओंकारेश्वर में सिंहस्थ से जुड़े कार्यों की हुई समीक्षा
17 Oct, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे ने शुक्रवार को खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में सिंहस्थ से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागवार किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त कर संबंधितों को निर्देश दिये कि सभी कार्य गुणवत्ता के साथ टाइम फ्रेम में पूरे किये जायें।
आयुक्त ने कहा कि सिंहस्थ-2028 में उज्जैन के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुँचेंगे। श्रद्धालुओं को सभी आवश्यक सुविधाएँ मिलें, इस बात को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य पूरे किये जायें। उन्होंने गुरुवार 16 अक्टूबर को कार्य स्थल पहुँचकर प्रगति की जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान उन्होंने पीएचई, पीडब्ल्यूडी, एमपीईबी, पर्यटन विकास द्वारा किये जा रहे निर्माण कार्यों के बारे में अधिकारियों से चर्चा की।
एनएचडीसी के प्रशासनिक भवन में हुई बैठक में कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने सिंहस्थ-2028 में मंजूर हुए कार्यों की जानकारी दी। बैठक में खण्डवा, बुरहानपुर एवं खरगौन जिलों के मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने अपने जिले में किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
विश्व के सबसे बड़े हैंडीक्राफ्ट मेले में चमका मध्यप्रदेश का बाग प्रिंट
17 Oct, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : दिल्ली-एनसीआर के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित 60वें इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स एंड गिफ्ट्स दिल्ली फेयर 2025 में भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प की अनूठी झलक ने सभी का मन मोह लिया। इस अंतरराष्ट्रीय मेले में देश-विदेश से आए हजारों खरीदारों, डिजाइनरों और व्यवसायियों के बीच मध्यप्रदेश के बाग प्रिंट आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। यह फेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स द्वारा आयोजित किया गया और इसे दुनिया के सबसे बड़े B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) ट्रेड फेयर्स में गिना जाता है।
पारंपरिक बाग प्रिंट की बारीकियों और प्राकृतिक रंगों की तकनीक को बाग शिल्पकार आरिफ खत्री ने अपने स्टॉल पर देशी और विदेशी मेहमानों के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया कि लकड़ी के ब्लॉक से कपड़े पर बाग प्रिंट की अनूठी छपाई की जाती है। कई विदेशी प्रतिनिधि उनके पास रुककर बाग प्रिंट के इतिहास, प्रक्रिया और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप के बारे में विस्तार से जानकारी लेते नजर आए। बाग प्रिंट सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे आज भी प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तरीकों से जीवित रखा गया है।
पांच दिवसीय मेले में करीब 3,000 से अधिक भारतीय निर्माता और निर्यातक शामिल हुए। 110 से अधिक देशों के खरीदारों ने भाग लिया, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, स्पेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और यूके जैसे प्रमुख देशों के आयातक भी शामिल थे।
प्रदर्शनी में विदेशी खरीदारों ने बाग उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई और बाग प्रिंट को वैश्विक बाजार में आगे बढ़ाने के लिए सहयोग की इच्छा जताई।
भारत सरकार द्वारा जीआई टैग प्राप्त है बाग प्रिंट मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। यह कला न केवल पर्यावरण-अनुकूल है बल्कि भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सच्ची मिसाल भी है। इस प्रिंट की खासियत है कि इसमें उपयोग किए जाने वाले सारे रंग पूरी तरह प्राकृतिक स्रोतों से तैयार किए जाते हैं। बाग प्रिंट ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)’ योजना के तहत धार जिले का प्रतिनिधि उत्पाद भी है।
आदि कर्मयोगी अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में मप्र का देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन
17 Oct, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नईदिल्ली के विज्ञान भवन में आदि कर्मयोगी अभियान पर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश को सम्मानित किया। प्रदेश के प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा ने म.प्र. के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार ग्रहण किया। उन्होंने जनजातीय समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुति दी। मध्यप्रदेश को आदि कर्मयोगी अभियान के क्रियान्वयन में देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम पांच राज्यों में स्थान मिला है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय द्वारा आदि कर्मयोगी अभियान जनजाति समुदायों के सामाजिक आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य जनजाति क्षेत्र में ग्राम स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना, योजनाओं का प्रभावी अमल सुनिश्चित करना और शासन को और ज्यादा जवाबदेह बनाना है। यह अभियान सेवा, संकल्प और समर्पण जैसे मूल्यों पर आधारित है जो जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रमुख सचिव जनजाति कार्य गुलशन बामरा ने मध्य प्रदेश में जनजातीय विकास की स्थिति की पर जानकारी देते हुए कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान में 1 लाख 41 हजार आदि सहयोगी काम कर रहे हैं। इसके साथ एक लाख 92 हजार आदि साथी और 1210 अशासकीय संगठन जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसका लक्ष्य तीन लाख चेंज लीडर्स तैयार करना है जो निचले स्तर पर जनजातीय विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद कर रहे हैं। जनजातीय बंधुओं की मदद के लिए 13,000 आदि सेवा केंद्र बनाए गए हैं।
जनजाति क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शाला छोड़ने वाले बच्चों पर निगरानी रखी जा रही है। वर्तमान में माता शबरी आवासीय बालिका शिक्षा कंपलेक्स, हॉस्टल, आदर्श आवासीय स्कूल, एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल, आश्रम स्कूल, खेल परिसर मिलाकर 2,913 संस्थाएं संचालित है जिनमें 2 लाख 30 हजार विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। मलेरिया, टीबी, एनीमिया की रोकथाम के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए जा रहे हैं।
इस साल जून से लेकर सितंबर तक सिर्फ तीन माह में 81000 से ज्यादा आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए। मातृत्व सुरक्षा के लिए भी विशेष पहल की गई। इसके अलावा नौ हजार से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य स्वास्थ्य केंद्र में टेलीमेडिसिन सेवाओं का संचालन किया गया। स्व-सहायता समूहों का गठन कर उन्हें रोजगार निर्माण एवं आजीविका की गतिविधियों से जोड़ा गया है। उन्हें आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के लिए साख सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
पीएम जनमन योजना के अंतर्गत हितग्राही मूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश में उत्कृष्ट कार्य हुआ है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराने में 100% उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड जारी करने में शिवपुरी, मैहर, रायसेन, कटनी और भिंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
पीएम जनमन में शिवपुरी को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। आदि कर्मयोगी अभियान में देश स्तरीय उत्कृष्ट जिलों में मध्यप्रदेश के बैतूल जिले को सम्मानित किया गया। प्रदेश की उत्कृष्ट मास्टर ट्रेनर श्रेणी में सहायक शोध अधिकारी सारिका धौलपुरिया सम्मानित की गई। आदि कर्मयोगी अभियान में अन्य उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों में बैतूल, धार, पूर्वी निमाड़ और बड़वानी का विशेष उल्लेख किया गया।
राज्य स्तरीय सुपर कोच और मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रदेश के उपायुक्त आदिवासी विकास जेपी यादव को भी सम्मानित किया गया। एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों बड़वानी, बैतूल और शिवपुरी को उल्लेखनीय गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए सम्मानित किया गया। धरती आबा जन भागीदारी अभियान में गुना, बुरहानपुर और विदिशा को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसी गुना और एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसी विदिशा को उत्कृष्टतम प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि आदि कर्मयोगी अभियान में 14 हजार गांवों के विलेज एक्शन प्लान बन चुके हैं। ग्राम सभा से इनका अनुमोदन कराया गया है। इन गांवों में 13 हजार से ज्यादा आदि सेवा केंद्र स्थापित हो चुके हैं। आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पीएम किसान, जन धन, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, राशन कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज जारी किए गए है।
चिकित्सक समय का पालन और मरीजों से करें संवेदनशील व्यवहार : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
17 Oct, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जिला चिकित्सालय सीधी का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं एवं अस्पताल की व्यवस्थाओं का मुआयना किया। उन्होंने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद कर उपचार सेवाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि समाज में चिकित्सकों को भगवान का दर्जा प्राप्त है, इसलिए मरीजों के प्रति उनका व्यवहार भी संवेदनशीलता एवं सेवा भाव से परिपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी डॉक्टर एवं स्टाफ समय का पालन करते हुए मरीजों को समर्पित भाव से उपचार प्रदान करें। इमरजेंसी कक्ष में निर्धारित ड्यूटी के अनुसार डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की सतत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीधी जिला चिकित्सालय में 100 बिस्तरीय एमसीएच विंग प्रारंभ होने से अस्पताल की क्षमता 300 से बढ़कर 400 बिस्तरों तक हो गई है, जिसके लिए पर्याप्त मानव संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि 16 करोड़ रुपये की लागत से क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉक का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है, वहीं आईपीएचएल लैब का निर्माण फरवरी 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है, जिससे जिलेवासियों को 136 प्रकार की जांचों की सुविधा एक ही स्थान पर प्राप्त होगी। उन्होंने जिले में आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया की जटिलताओं को दूर कर इसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि समय पर पंजीयन एवं नियमित जांचें अनिवार्य रूप से की जाएं जिससे हाई रिस्क गर्भवती माताओं की पहचान समय से हो सके। प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित जांच शिविरों में महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा समुचित परीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री ने अस्पताल परिसर में स्वच्छता व्यवस्था, साफ-सफाई तथा आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी शीघ्र पूरी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक समय पर गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करे। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जिला चिकित्सालय में अधोसंरचना और उपकरणों के लिए अन्य मदो से राज्य शासन से प्राप्त राशि के उपयोग की पारदर्शी जांच के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए। अस्पताल प्रबंधन में पाई गई कमियों पर आवश्यक सुधार तत्काल करने के निर्देश दिए। उन्होंने सिविल सर्जन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए शासन की मंशानुसार उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं आमजन को उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक रीती पाठक एवं देवकुमार सिंह चौहान सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव भी प्रस्तुत किए।
अमृतसर ही नहीं ग्वालियर में भी है स्वर्ण मंदिर, दीवारों से छत तक जड़ा है 100 करोड़ का सोना
17 Oct, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: आपने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बारे में तो खूब सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश में भी एक गोल्डन टेम्पल है, जो 300 साल पुराना है. इस मंदिर के निर्माण में 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत के सोने का इस्तेमाल किया गया है.
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है स्वर्ण मंदिर जो वास्तविकता में अपने नाम की तरह ही सोने से बना है. मंदिर की बेदी हो दीवारें या छत हर जगह सोने की कारीगरी नज़र आती है. सोने के साथ साथ इस मंदिर में कांच की कलाकारी और बारीक चित्रकारी भी देखने लायक है. ये एक जैन मंदिर है जिसका निर्माण जैन अनुयायियों ने सन 1761 में कराया था. हालांकि इसे ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत का एक छुपा हुआ नगीना कहा जा सकता है. आज भी यह मंदिर उसी सूरत में है. हर दिन श्रद्धालु यहाँ पूजा-अर्चना और सैलानी इसकी खूबसूरती देखने पहुचते हैं.
मंदिर में खंभों और दीवारों पर एक खास किस्म का काँच लगा है, इसे बेल्जियम ग्लास बोलते हैं. ये छोटे-छोटे काँच एक साथ डिज़ाइन में खंभों पर लगाए गए हैं. इसकी खासियत ये है कि अगर आप पास खड़े होकर देखते हैं तो सभी कांच मिलकर भी आपका एक अक्स बनाते हैं लेकिन अगर आप थोड़ा सा दूर हो जायें तो इसके हर काँच में अलग-अलग अक्स नज़र आता है. ये काँच चारों कोनों पर सपाट लेकिन बीच में उभरा हुआ है जो इसकी ख़ूबसूरती को बढ़ाता है.
पत्थरों पर सोने की कलाकारी
इस मंदिर में काँच ही नहीं बल्कि शुद्ध सोने का भी काम हर जगह दिखता है. हर तरफ़ दीवारों, छत और शमोषण में सोने की बारीक कारीगरी है. समोषण वह बेदी है जहाँ भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजमान है. इस बेदी पर पहले मार्बल लगा हुआ है, इसके बाद उस मार्बल के पत्थर पर सोने से फूल, पत्ती, बेल और बूटे बनाये गए हैं. साथ ही सोने से कई डिज़ाइन भी बनाये गए हैं. कहा जाए तो ये पूरी बेदी सोने से बनी है.
45 वर्ष में पूरा हुआ था मंदिर का निर्माण
जैन स्वर्ण मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रवीण गंगवाल बताते हैं, "इस मंदिर का निर्माण संवत् 1761 में शुरू हुआ था और इसको पूरा होने में 45 वर्ष लगे थे. इसके बाद 1861 में यहाँ मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा स्थापित हुई. इस मंदिर में भगवान का समवशरण भी अपने आप में अनोखा और देखने लायक है जो अति सुंदर और सोने से बना है."
दिन में तीन बार स्वरूप बदलती है भगवान की प्रतिमा
इस मंदिर में विराजमान 1008 पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा भी अपने आप में बेहद अनूठी है. समिति के अध्यक्ष बताते हैं कि, यह मूर्ति दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती है. सुबह इसका स्वरूप एक बालक के समान होता है, दोपहर में एक मध्यम आयु की प्रतिमा दिखती है. शाम को भगवान में एक बुजुर्ग की छवि दिखाई देती है. जो भी यहाँ अपनी मनोकामना लेकर आता है वह पूरी होती है.
अनमोल कलाकारी का ऐतिहासिक नमूना है यह मंदिर
इस मंदिर के परिसर में अलग-अलग तरह की कारीगरी की गई है. इसी वजह से इसे बनाने में बरसों लग गए. मंदिर की कलाकृतियों को सहजने के लिए भी राजस्थान से कलाकार आते हैं. जिनका परिवार कई पीढ़ियों से इस मंदिर की सेवा में लगा है. मंदिर को देखने पर समझ आता है कि इतने बड़े स्तर पर इतनी बारीक कलाकारी और चित्रकारी उस दौर में कैसे की गई होगी. हर चित्रकारी में अनमोल रत्न लगाए गए हैं, सोने से बेलबूटे बनाए गए हैं. बीच में प्राकृतिक रंगों से चित्रकारी और ग्लास भी लगाये गए हैं. इसके अलावा इस मंदिर का ड्रेनेज सिस्टम भी अनूठा है. बरसात में कितना भी पानी आ जाए लेकिन मंदिर के चौक में पानी कहाँ से आता है और कहाँ चला जाता है किसी को पता नहीं चलता.
अस्सी किलो सोने से सजा है मंदिर
मंदिर समिति के अध्यक्ष की मानें तो इस मंदिर के निर्माण में दो मन यानी 80 किलो से ज़्यादा सोने का इस्तेमाल किया गया है. जो इस मंदिर की दीवारों, बेदी और छतों पर अलग-अलग स्थानों पर दिखाई देता है. छत और दीवारों पर की गई कलाकृतियाँ में भी सोने का इस्तेमाल किया गया है. इनके साथ ही दीवारों पर 5 विशेष चित्र सोने से बनाए गए हैं. ये सभी चित्र अलग-अलग जैन तीर्थांकरों की कथा दर्शाते हैं. मंदिर मे लगे सोने की कीमत वर्तमान में लगभग 100 करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुकी है.
क्यों हुआ होगा इतने सोने का इस्तेमाल ?
अब सवाल आता है कि आज से तीन सौ साल पहले इतना भव्य मंदिर और उसमें अस्सी किलो सोना लगाने के पीछे क्या उद्देश्य रहा होगा. यह सवाल जब हमने समिति के अध्यक्ष से पूछा तो उन्होंने कहा, उस दौर में दानदाता बहुत होते थे. राजा महाराजाओं की तरह इस मंदिर के उस समय ट्रस्टी भी धनधान्य से संपन्न थे. उनमें दान करने की भावना थी. उनके इस विचार ने यह मंदिर निर्मित कराया.
भव्यता देखते रह जाते हैं विदेशी पर्यटक
इतनी भव्यता के बावजूद यह मंदिर आज भी छिपा हुआ है क्योंकि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में आज भी पता नहीं है. हालांकि हर महीने कुछ टूर ऑपरेटर्स यहाँ विदेशी पर्यटकों को ग्वालियर के इस स्वर्ण मंदिर जरूर लाते हैं. जो इस मंदिर की भव्यता और सोने को देख कर दंग रह जाते हैं.
पुजारी ने सिगरेट की दुकान को लेकर युवती को सरेआम पीटा, लोग देखते रहे तमाशा
17 Oct, 2025 03:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रीवा: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रीवा (Rewa) का एक वीडियो (Video) सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक पुजारी (Priest) युवती (Young Woman) की सरेआम पिटाई (Public Beating) करता हुआ दिखाई दे रहा है. पूरी घटना अमहिया थाना क्षेत्र (Amhiya Police Station Area) में स्थित पीके स्कूल के सामने दिनदहाड़े हुई बताई जा रही है. विवाद सिगरेट (Cigrate) और पान की दूकान (Pan Shops) को लेकर शुरू हुआ.
पुजारी देवेंद्र चतुर्वेदी नहीं चाहते थे कि मंदिर के सामने चाय सिगरेट का ठेला लगे जबकि युवती का कहना था कि वह उसकी रोजी रोटी है. बस इसी बात को लेकर दोनों के बीच पहले कहासुनी और गालीगलौच हुई और फिर पुजारी ने युवती के साथ जमकर मारपीट की.
पुजारी युवती के साथ सरेआम मारपीट करते हुए दिख रहा है. युवती भी प्रतिरोध में पुजारी का कॉलर पकड़ते हुए पत्थर फेंकने की कोशिश करते हुए सिखाई दे रही है. राहगीरों ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है. मामले की शिकायत दोनों पक्षों द्वारा पुलिस से की गयी है.
अमहिया थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल ने बताया- वीडियो कल का है और दोनों पक्षों द्वारा थाने में मारपीट की शिकायत दर्ज कराई गयी है. पुजारी और युवती के बीच मामूली सी बात को लेकर झगड़ा हुआ था. दोनों पक्षों के बयान के बाद कार्रवाई की जाएगी.
भोपाल की इस यूनिवर्सिटी में छात्रों का टोटा, हिंदी की पढ़ाई में नौकरी का डर, 134 में से 78 कोर्स बंद
17 Oct, 2025 03:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: साहित्य और संस्कारों की भाषा हिंदी रोजगार की भाषा नहीं बन पा रही है. यही कारण है कि युवा हिंदी माध्यम से पढ़ाई नहीं करना चाहते हैं. उनको डर है कि कहीं हिंदी मीडियम से इंजीनियरिंग और मेडिकल करने के बाद नौकरी मिलेगी या नहीं. यही कारण है कि हिंदी मीडियम के स्कूल और कॉलेजों के दिन लदते जा रहे हैं. यहां न तो स्टूडेंट आना चाह रहे हैं और न ही यहां पर्याप्त फैकल्टी है. इन्ही हालातों के कारण भोपाल में बना मध्य प्रदेश का पहला हिंदी विश्वविद्यालय बदहाली की तस्वीर बन चुका है.
ऐसी बदहाली, 14 साल में 78 कोर्स बंद
शैक्षणिक वर्ष 2012-13 में अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय का पहला सत्र शुरु हुआ था. उस समय यहां करीब 60 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था. तब विश्वविद्यालय प्रशासन ने यहां मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी कोर्स सहित करीब 134 कोर्स हिंदी माध्यम से शुरु किया था. लेकिन अब हिंदी मीडियम में इन डिग्रियों के लिए छात्र नहीं मिल रहे. इसके कारण हिंदी विश्वविद्यालय में कई कोर्स बंद हो चुके हैं. बीते 14 सालों में ही यहां 78 कोर्स बंद हो गए, अब केवल यूजी, पीजी और डिप्लोमा समेत 56 कोर्स का संचालन किया जा रहा है.
बिना तैयारी शुरु की इंजीनियरिंग, बंद करनी पड़ी
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय था, जहां साल 2016 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी तरह से हिंदी में शुरू की गई थी. इसका मकसद था आमतौर पर अंग्रेजी क्षेत्र से जोड़ कर देखे जाने वाली इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा मिल सके. इंजीनियरिंग के 3 कोर्स में 90 सीटें थी. लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हिंदी में इंजीनियरिंग तो शुरु कर दी, लेकिन ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन यानि एआईसीटीई की अनुमति नहीं ली. जिसे कारण बाद में यह कोर्स बंद करना पड़ा.
हिंदी में जॉब अपार्च्युनिटी को लेकर संशय
हिंदी से पढ़ाई करने वाले छात्रों की सबसे बड़ी चिंता जॉब अपार्च्युनिटी को लेकर होती है. हिंदी से पढ़ाई करने वाले छात्रों को डर होता है कि उनको रोजगार मिलेगा या नहीं. क्योंकि अधिकतर हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने वालों को मेडिकल, इंजीनियरिंग या अन्य प्रोफेशनल कंपनियों में नौकरी मिलने में दिक्कत होती है. वहीं इस विश्वविद्यालय में कई प्रोफेशनल कोर्स का संचालन किया जा रहा है, लेकिन कैंपस नहीं आने से भी स्टूडेंट में हिंदी की पढ़ाई पर भरोसा नहीं हो रहा है.
छात्रों की संख्या बढ़ाने के हो रहे प्रयास
अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु देव आनंद हिंडोलिया ने बताया कि, ''हिंदी माध्यम से शुरु किए गए कई कोर्स बाद में एआईसीटीई समेत अन्य संस्थाओं से अनुमति नहीं मिलने के कारण शुरु नहीं हो सके या उनको बंद करना पड़ा. हालांकि अब एक बार फिर हिंदी में इंजीनियरिंग शुरु करने की तैयारी की जा रही है. विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. सभी स्टूडेंट को बस परिवहन की सुविधा भी दी जा रही है.''
यूजीसी के नियमों का नहीं हो रहा पालन
यूजीसी (University Grants Commission) के नियमानुसार विवि की वेबसाइट में पाठ्यक्रम, सीटों की संख्या, फैकल्टी आदि की जानकारी होनी चाहिए, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है. इधर अनुवाद किए हुए सिलेबस और किताबों से स्टूडेंट का पढ़ाई करनी पड़ रही है. हिंदी मीडियम के छात्रों को स्टडी मटेरियल नहीं मिल पा रही है. वहीं विश्वविद्यालय में हिंदी माध्यम में पढ़ाने वाले योग्य प्रोफेसरों की भी कमी है.
56 कोर्स पढ़ाने के लिए 35 फैकल्टी
हिंदी विश्वविद्यालय में एडमिशन कम होने का एक बड़ा कारण नियमित प्रोफेसरों की कमी है. बीते 14 सालों में विश्वविद्यालय द्वारा साल 2023 में 13 नियमित असिस्टेंड प्रोफेसरों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन अनियमितता के आरोप के कारण इनके प्रकरण भी कोर्ट में चल रहे हैं. हालांकि ये असिस्टेंड प्रोफेसर विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इनके अलावा विश्वविद्यालय में पढ़ाने के लिए 22 अतिथि विद्वान भी नियुक्त किए गए हैं. फिर भी 56 कोर्स को पढ़ाने के लिए केवल 35 फैकल्टी ही विश्वविद्यालय में मौजूद हैं.
हिंदी में 4 स्टूडेंट ने लिया एडमिशन, कुल 174 प्रवेश
अटल बिहारी बाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र में कुल 174 सीटों पर प्रवेश हुआ है. इनमें पीजी के 27 कोर्स में 63 और यूजी के 11 पाठ्यक्रमों में 99 स्टूडेंट ने प्रवेश लिया है. वहीं, 13 सर्टिफिकेट व डिप्लोमा कोर्सेस में केवल 12 एडमिशन हुए हैं. सबसे खास बात यह है कि यह मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां सभी कोर्सेस का संचालन हिंदी भाषा में ही किया जाता है, इसके बावजूद यहां हिंदी के पाठ्यक्रमों में ही प्रवेश लेने वाले बच्चों की कमी है. इस सत्र में केवल 4 बच्चों ने प्रवेश लिया है. वहीं 11 पाठ्यक्रम ऐसे हैं, जहां केवल एक-एक स्टूडेंट ने एडमिशन लिया है.
जहरीले कफ सिरप मामले में अब तक 5 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी, SIT ने चेन्नई में डाला डेरा
17 Oct, 2025 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छिंदवाड़ा: एक महीने से चल रहे कफ सिरप कांड के बाद गुरुवार को जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह छिंदवाड़ा पहुंचे और उन्होंने परिजनों से मिलने के साथ ही कलेक्टर कार्यालय में समीक्षा बैठक ली. साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री सहायता कोष से स्वीकृत की गई राशि उनके खाते में पहुंच चुकी है या नहीं इसकी जानकारी भी ली. लगातार कांग्रेस बीजेपी पर सवाल उठा रही थी कि अभी तक प्रभारी मंत्री लापता क्यों हैं.
अधिकारियों से पूछा-सीएम के निर्देश पर क्या हुई कार्रवाई
जिले में कफ सिरप से मासूमों की मौत पर प्रभावित परिवारों के दुःख में शामिल होने बीते दिनों मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव छिंदवाड़ा पहुंचे थे. उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाहियों के सम्बन्ध में निर्देश दिए गए थे. उनके निर्देशों में जिले में अभी तक क्या-क्या कार्यवाहियां की गई हैं, उनकी समीक्षा के लिए प्रदेश के लोक निर्माण विभाग एवं छिंदवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह छिंदवाड़ा पहुंचे. बैठक के पहले उन्होंने परासिया क्षेत्र में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया.
दोबारा ना घटे ऐसी दुखद घटना
प्रभारी मंत्री राकेश सिंह ने कफ सिरप मामले में जिले में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली. कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने बताया कि, ''मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार कार्यवाही करते हुए पहले के सभी प्रकरणों में मुख्यमंत्री सहायता कोष से 4 - 4 लाख रुपए की राशि परिजनों के खाते में पहुंच चुकी है. बाकि में कार्यवाही जारी है. सीएम के छिंदवाड़ा दौरे के दौरान दिए गए निर्देशानुसार नागपुर में इलाजरत बच्चों के इलाज के लिए 1-1 लाख रूपये की राशि उसी समय स्वीकृत कर दी गई थी, इलाज की बाकी राशि का भुगतान भी परिजनों को नहीं करना पड़ा है. जिला प्रशासन द्वारा सीधे सभी अस्पताल से बिल लेकर पैमेंट किया जा रहा है.
99 प्रतिशत कफ सिरप किए गए बरामद
प्रभारी मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि, ''टीम बनाकर घर-घर सर्वे, मुनादी, दवा दुकानों की रिकॉर्ड चेकिंग करने के बाद मार्केट में उपलब्ध 99 प्रतिशत कफ सिरप की ट्रैकिंग की जा चुकी है. जिले में मौजूद लगभग 68 तरह के कफ सिरप भी जांच के लिए टेस्टिंग लैब भेजे गए हैं.'' प्रभारी मंत्री ने इलाज के सभी बिलों का पैमेंट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही कहा कि इस तरह की दुखद घटना दोबारा न घटे, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग सहित सभी अधिकारी पूरी तरह सजग व सक्रिय रहकर जिम्मेदारी से अपना काम करें.
अब-तक 5 लोगों की हुई गिरफ्तारी
एसपी अजय पांडे ने बताया कि, ''5 अक्टूबर को मुकदमा कायम कर दिया गया था. एसआईटी का गठन कर 6 तारीख को ही टीम रवाना कर दी गई थी. संबंधित फार्मा कंपनी के मालिक को गिरफ्तार कर परासिया लाया गया था. इसके पहले डॉ. प्रवीण सोनी को भी हिरासत में ले लिया गया था. फिलहाल एसआईटी चेन्नई में है. छिंदवाड़ा के जिस थोक व्यापारी और रिटेलर द्वारा सिरप के सम्बन्ध में प्रॉपर हिसाब किताब नहीं दिया गया था, उन दोनों को भी आरोपी बनाकर हिरासत में लिया गया है. कल शाम को ही संबंधित फार्मा कंपनी के केमिकल एनालिस्ट को भी पुलिस रिमांड पर लिया गया है. इस तरह से अभी तक 5 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. टीम अभी भी वहीं पर है, और जल्द ही और लोगों की भी गिरफ्तारी की जाएगी.''
बाबा महाकाल के आंगन में ऐसे मनेगी दीवाली, कब लगेगा 56 भोग? जानें कब उपवास रखेंगे भोले भंडारी
17 Oct, 2025 11:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में प्रतिवर्ष की तरह ही इस वर्ष भी दीपावली पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। 18 अक्टूबर को धनतेरस शनि प्रदोष के संयोग में आ रही है, जिससे दीपपर्व का शुभारंभ होगा। इस दिन पुजारी, पुरोहित राष्ट्र में सुख, समृद्धि व आरोग्यता की कामना को लेकर बाबा महाकाल की महापूजा करेंगे। मंदिर में 20 अक्टूबर को दीपावली मनाई जाएगी। 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा होगी। दीपपर्व पर राजा का आंगन रंगोली से सजेगा। आकर्षक विद्युत व पुष्प सज्जा की जाएगी।
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर में इस वर्ष दीपपर्व की शुरुआत शनि प्रदोष के संयोग में आई धनतेरस से हो रहा है। शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने से शनि प्रदोष का संयोग बनता है। महाकालेश्वर मंदिर की पूजन परंपरा में शनि प्रदोष का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान महाकाल उपवास रखते हैं तथा शाम को 4 बजे विशेष मंत्र व पाठ से उनका अभिषेक पूजन किया जाता है।
यह संपूर्ण पूजन विधि पुजारी लोकमंगल व राष्ट्र कल्याण के लिए संपन्न करते हैं। इस बार 18 अक्टूबर धनत्रयोदशी पर सुबह पुरोहित समिति की ओर से पूजा अर्चना की जाएगी। शाम को 4 बजे शनि प्रदोष की परंपरागत पूजा होगी। इसके बाद धनतेरस पर पुरोहित समिति द्वारा भगवान महाकाल की महापूजा की जाएगी। राष्ट्र में सुख, समृद्धि के लिए भगवान को चांदी का सिक्का अर्पित कर पूजा अर्चना की जाएगी। मान्यता है भगवान महाकाल की इस प्रकार पूजा अर्चना करने से राष्ट्र में धन धान्य व सुख समृद्धि बनी रहती है। महाकाल की महापूजा के बाद मंदिर समिति द्वारा चिकित्सा इकाई में आरोग्यता के लिए भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाएगा।
महाकाल मंदिर में रूप चतुर्दशी पर दीपावली मनाने की परंपरा है। इस बार 20 अक्टूबर को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि का महासंयोग बन रहा है। तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल को केसर चंदन का उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान कराएंगे। पश्चात नवीन वस्त्र सोने, चांदी के आभूषण से विशेष शृंगार किया जाएगा। भगवान को अन्नकूट में पारंपरिक छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की जाएगी।
महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा की परंपरा है। इस बार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 22 अक्टूबर को रहेगी। मंदिर की चिंतामन स्थित गोशाला में गो पूजा होगी। मंदिर में गोवर्धन पूजा भी की जाएगी। गायों की विशेष साज सज्जा तथा उन्हें विशेष प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाएगा।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा दीपावली पर्व के अवसर पर पारंपरिक विधि-विधान एवं धार्मिक मर्यादाओं के सम्यक निर्वहन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली पर्व के उपलक्ष्य में भगवान श्री महाकालेश्वर जी की आरती-पूजन के दौरान प्रत्येक आरती प्रातः भस्म आरती, अभ्यंग स्नान के पश्चात आरती, संध्या आरती एवं शयन आरती में पूजा-अर्चना के अभिन्न भाग के रूप में केवल एक फूलझड़ी जलाई जाएगी। यह प्रक्रिया मंदिर की पारंपरिक एवं धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न की जाएगी। इसके अतिरिक्त गर्भगृह, कोटीतीर्थ कुण्ड, मंदिर परिक्षेत्र तथा श्री महाकाल महालोक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आतिशबाज़ी, पटाखों का फोड़ना, ज्वलनशील पदार्थ, अनार, फूलझड़ी या अन्य आतिशबाज़ी सामग्री लाना एवं प्रयोग करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति पर नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
MP पुलिस भर्ती में ट्रांसजेंडर भी भर सकेंगे फॉर्म, जानिए कब और कैसे करें आवेदन
17 Oct, 2025 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में आने वाले दिनों में पुलिस विभाग (Police Department) में बड़ी संख्या में भर्ती होने जा रही है. कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) जल्द ही उप निरीक्षक (SI) और सहायक उप निरीक्षक (ASI) के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा. इस बार की भर्ती खास इसलिए भी है क्योंकि राज्य सरकार ने पहली बार ट्रांसजेंडर वर्ग को भी मौका देने का निर्णय लिया है. अब पुलिस सेवा में यह वर्ग भी शामिल हो सकेगा. चयन मंडल ने आवेदन फॉर्म में जेंडर के साथ नया विकल्प ‘ट्रांसजेंडर’ जोड़ा है, जिससे वे भी अब एसआई और एएसआई भर्ती परीक्षा में भाग ले सकेंगे.
भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक और बड़ी राहत यह है कि आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है. पहले जहां अंतिम तिथि 22 अक्टूबर थी, अब उसे बढ़ाकर 29 अक्टूबर 2025 कर दिया गया है. इससे हजारों अभ्यर्थियों को आवेदन करने का अतिरिक्त मौका मिल गया है. वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग इस फैसले को लेकर खुश हैं, क्योंकि यह कदम समान अवसर और सामाजिक स्वीकृति की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.'
गृह विभाग ने बताया कि इस भर्ती अभियान के तहत कुल 7500 पदों पर नियुक्ति की जाएगी. उम्मीदवार एमपी कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. सूबेदार (स्टेनोग्राफर), सहायक उप निरीक्षक (ASI) और उप निरीक्षक (SI) जैसे पदों पर यह भर्ती की जाएगी. सरकार का यह फैसला पुलिस विभाग में विविधता और समावेश बढ़ाने की दिशा में सराहनीय कदम माना जा रहा है.
कैसे करें आवेदन?
1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं.
2. होम पेज पर Online Form पर Police Constable Recruitment Test 2025 पर क्लिक करें.
3. आवेदन के लिए मांगी गई डिटेल भरकर पंजीकरण कर लें.
4. पंजीकरण के बाद लॉग इन करें. इसके बाद मांगी गई डिटेल को भरकर आवेदन को पूरा कर लें.
5. आवेदन पूरा होने के बाद अपने निर्धारित वर्ग के अनुसार फॉर्म का शुल्क जमा कर दें.
6. सबसे आखरी में फॉर्म को सबमिट करने के बाद चेक कर लें, फिर प्रिंटआउट निकाल लें.
मुरैना में दिवाली से पहले मिलावटखोरी पर एक्शन, 600 किलो पनीर जब्त
17 Oct, 2025 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरैना: दीपावली के त्योहारी माहौल में जहां शहर की गलियां रोशनियों और खुशियों से जगमगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मिलावटखोरों की नींद उड़ी हुई है. दिवाली से पहले मुरैना प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. संयुक्त टीम ने गुरुवार को शहर के शिकारपुर क्षेत्र में चल रही एक नकली पनीर फैक्ट्री पर छापा मारा. इस दौरान मौके से करीब 6 क्विंटल नकली पनीर और दूध जब्त किया गया. नकली पनीर का सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल भेज दिया गया है.
टीम ने जब्त की नकली पनीर
खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के इंस्पेक्टर अवनीश गुप्ता ने बताया कि "पिछले कुछ दिनों से सूचनाएं मिल रही थीं कि शिकारपुर रोड पर धर्मेंद्र गुर्जर द्वारा डेयरी संचालित किया जा है. यहां से मुरैना, ग्वालियर सहित राजस्थान के धौलपुर तक पनीर सप्लाई हो रही थी. दुकानदार द्वारा घरेलू सिलेंडरों का उपयोग दूध उबालने और पनीर तैयार करने के लिए किया जा रहा था."
जांच के लिए सैंपल भेजे गए भोपाल
टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को सील कर दिया है. मौके पर मौजूद पनीर को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रख दिया गया. पनीर और दूध के सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल भेज दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. मौके से 9 घरेलू सिलेंडर भी जब्त किए गए. इस कार्रवाई ने चंबल क्षेत्र में मिलावटखोरों की नींद उड़ा दी है.
मुरैना एसडीएम भूपेंद्र कुशवाहा ने बताया "हमारे पास बीते कुछ दिनों से सूचना आ रही थी कि शिकारपुर रोड पर नकली पनीर बनाने की गतिविधियां चल रही हैं. दीपावली के मौके पर हम टीम के साथ मौके पर पहुंचे और फैक्ट्री को सील कर दिया. इस कार्रवाई में करीब 600 किलो पनीर और दूध जब्त किया गया. हमारी टीम ने पनीर के नमूने लेकर जांच के लिए भोपाल भेज दिए हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी."
कटनी में अवैध खनन का विरोध करने पर दलित युवक की पिटाई, सरपंच के बेटे ने किया पेशाब
17 Oct, 2025 08:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी में हैरान करने वाला एक मामला सामने आया है. बहोरीबंद थाना क्षेत्र के ग्राम मटवारा में अवैध खनन का विरोध करना एक दलित युवक को भारी पड़ गया. आरोप है कि उसके खेत के पास खनन करने का विरोध करने पर गांव के दबंगों ने उसके साथ मारपीट करते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया. इतना ही नहीं गांव के सरपंच के बेटे ने युवक पर मूत्र त्याग जैसी घटना को अंजाम दिया.
कटनी जिले के बहोरीबंद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मटवारा की घटना
जानकारी के मुताबिक घटना कटनी जिले के बहोरीबंद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मटवारा की है. पीड़ित ने बताया कि उसने अपने खेत के पास चल रहे अवैध खनन का विरोध किया था. इस पर गांव के सरपंच रामानुज पांडेय, उनका पुत्र पवन पांडेय, भतीजा सतीश पांडेय और अन्य लोगों ने उसको पकड़कर बेरहमी से पीटा. जब उसकी मां बीच-बचाव के लिए आगे आई, तो उसको भी बाल पकड़कर घसीटा गया और जमकर मारपीट की गई.
दबंगों ने शिकायत करने पर गंभीर अंजाम भुगतने की दी चेतावनी
पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान सरपंच के बेटे ने उस पर पेशाब किया. आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और शिकायत करने पर गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी. घायल अवस्था में वह अपनी मां के साथ कटनी जिला अस्पताल पहुंचा, जहां तीन दिन तक भर्ती रहा.
युवक ने पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार
इसके बाद युवक पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचा और न्याय की गुहार लगाई. युवक ने बताया कि सरपंच की दबंगई के कारण वह अब गांव लौटने से भी डर रहा है. वहीं एडिशन एसपी संतोष डेहरिया ने कहा कि पीड़ित द्वारा उनको शिकायत दी गई है. पूरे मामले की जानकारी संबंधित थाने को दी गई है. मामले की जांच कराई जा रही है, जांच में जो भी दोषी होगा उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
राहतगढ़ सिविल अस्पताल में शीघ्र होगी ब्लड स्टोरेज की सुविधा
16 Oct, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी शीघ्र दूर होगी। स्वास्थ्य विभाग में भर्ती प्रक्रिया प्रगतिरत है और शीघ्र ही पर्याप्त चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय स्टाफ की पूर्ति की जाएगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सागर जिले के राहतगढ़ सिविल अस्पताल का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल में तत्काल ब्लड स्टोरेज फ्रिज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आपातकालीन स्थिति में रक्त की उपलब्धता बनी रहे।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि माह की 9 एवं 25 तारीख को आयोजित होने वाले गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में शत-प्रतिशत जांच सुनिश्चित की जाए। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है। हर गर्भवती महिला तक समय पर जांच और उपचार की सुविधा पहुँचे इसके लिए पूरे मनोयोग से प्रयास करें। उन्होंने अस्पताल में स्वच्छता और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन-उपयोगी समस्त आवश्यक औषधियों की उपलब्धता हर समय बनी रहे।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। टेलीमेडिसिन सेवा से डॉक्टरों की अनुपलब्धता की समस्या काफी हद तक दूर होगी और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा।
डॉक्टर्स की इमरजेंसी कक्ष में उपस्थिति सुनिश्चित करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
16 Oct, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने जिला चिकित्सालय सागर के निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए हैं कि सभी डॉक्टर समय का पालन करते हुए मरीजों का उपचार करें। इमरजेंसी कक्ष में ड्यूटी के अनुसार डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क गर्भवती माताओं की जांच और उपचार समय पर होना चाहिए। प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित जांच शिविरों में महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा समुचित परीक्षण किए जाएं।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अस्पताल में साफ-सफाई, स्वच्छता और आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी शीघ्र पूरी की जाएगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले। उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसिन व्यवस्था से विशेषज्ञ डॉक्टर्स की सलाह ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही है, जिससे उपचार में पारदर्शिता और गति आई है। उन्होंने यह भी कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। कुपोषित बच्चों के पोषण हेतु पोषण पुनर्वास केंद्रों में लक्षित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान विधायक शैलेंद्र जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, बीएमसी डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर सहित जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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