मध्य प्रदेश
गंगा नदी में गिरे मध्य प्रदेश के इंजीनियर, मुख्यमंत्री यादव ने की उत्तराखंड के सीएम से बात
21 Oct, 2025 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (Dr. Mohan Yadav) ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से कल देर रात दूरभाष पर चर्चा कर मध्य प्रदेश के सॉफ्टवेयर इंजीनियर पृथ्वीपुर निवासी श्री हेमंत सोनी की तलाश के लिए आग्रह किया है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर निवासी श्री हेमंत सोनी जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, अपने दोस्तों के साथ ऋषिकेश गए थे। हेमंत सोनी 16 अक्टूबर को ऋषिकेश में बजरंग सेतु पुल से गंगा नदी में गिरकर लापता हो गए हैं। बचाव दल और स्थानीय पुलिस द्वारा खोजबीन जारी है। गंगा जी में तेज बहाव के कारण बचाव अभियान मुश्किल हो रहा है। दो-तीन दिवस पूर्व उनके दुर्घटना वश गिर जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। अभी श्री हेमंत सोनी के बारे में पता नहीं चला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मध्य प्रदेश के युवक की तलाश और एनडीआरएफ द्वारा बचाव कार्य करने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने का व्यक्तिगत रूप से आग्रह किया है।
प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के भाव से मनाएं आगामी त्यौहार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
19 Oct, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के लिए आगामी 21 और 22 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और गौशालाओं में गोवर्धन पूजा का आयोजन धूमधाम से किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियों का संचालन किया जाए। इन आयोजनों में मंत्री, सांसद, विधायक, नगरीय निकायों के पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हों। स्थानीय स्तर पर सक्रिय सांस्कृतिक मंडलों को सम्मिलित करते हुए कार्यक्रमों को उत्सव के रूप में मनाया जाए। पशुपालन विभाग इन आयोजनों के लिए नोडल विभाग रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगामी त्यौहारों के संबंध में रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से सांसद, विधायक, सहित सभी जिलों के कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक-नगरीय निकायों के पदाधिकारी और अधिकारियों को वीसी के माध्यम से संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी दीपावली मनाते हुए आत्मनिर्भर भारत के भाव को सशक्त करने के उद्देश्य से त्यौहारों में स्वदेशी वस्तुओं के क्रय विक्रय को प्रोत्साहित किया जाए। आत्मनिर्भर भारत और जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आगामी 25 दिसंबर तक जारी रहेंगे। सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी मंत्रीजनप्रतिनिधि और कलेक्टर्स परस्पर समन्वय से तिथियां निर्धारित करते हुए आत्मनिर्भर भारत/जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आयोजित करें। इन आयोजनों में स्वदेशी वस्तुओं के प्रदर्शन एवं क्रय-विक्रय को बढ़ावा दिया जावे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक जिले में सामाजिक समरसता के आयोजन सम्पन्न किए जायें। इन आयोजनों में सामाजिक चेतनाशील प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए और सामाजिक समरसता की दिशा में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए विचार-विमर्श भी हों।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिवाली पर्व हम सबके लिए है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से आहवान किया कि वे दीपावली पर वृद्धाश्रम, गरीब बस्तियों और अनाथ आश्रम जाकर उनके साथ दिवाली मनाएं। दिवाली के दूसरे दिन मजदूर मैदान, मजदूर हाट में जाकर श्रमिकों के साथ दिवाली की खुशियां साझा की जाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर्स द्वारा संवेदनशील घटनाओं और खबरों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। कलेक्टर्स की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं और समाचारों के संबंध में प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद तथा विधायकगण को वस्तुस्थिति से तत्काल अवगत करायें, उनके द्वारा आवश्यकतानुसार मौका स्थल का भ्रमण भी किया जाए। जिला कलेक्टर्स ऐसी सूचनाओं और खबरों पर तत्काल फैक्ट चेक और आवश्यकता हो तो खंडन जारी करें। प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री, सांसद, विधायक भी भ्रामक और समाज में सद्भावना बिगाड़ने वाली खबरों के संबंध में सही स्थिति रखें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस आवश्यक रूप से घनी बस्ती और चौराहों पर रहे, पुलिस बल भी इलाके में घूमें, पुलिस की उपस्थिति जनता के बीच दिखना चाहिए, जिससे जनता में सुरक्षा की भावना महसूस हो। विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा और विधायक भगवानदास सबनानी ने भी अपने विचार रखे।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधायक अनूपपुर के पुत्र के निधन पर व्यक्त किया शोक
19 Oct, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज अनूपपुर जिले के प्रवास के दौरान ग्राम पंचायत पारसी पहुंचकर विधायक अनूपपुर बिसाहूलाल सिंह के पुत्र के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। इस अवसर पर विंध्य विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, राम दास पूरी, पूर्व जनपद अध्यक्ष पुष्पराजगढ़ हीरा सिंह श्याम सहित जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रदेश सरकार किसानों के जीवन को बेहतर करने के लिए कर रही है लगातार कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
19 Oct, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों, गरीबों, युवाओं, महिलाओं सहित सभी के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। प्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार हैं। किसानों की जिंदगी बेहतर हो, इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अतिवृष्टि से किसानों को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिये प्रदेश में अबतक 1800 करोड़ रुपये की राहत राशि वितरित की जा चुकी हैं। किसानों की फसलों को किसी भी कारण से क्षति होने पर सहायता दी जायेगी। किसान खून-पसीना एक कर कड़ी मेहनत से फसलें पैदा करता हैं। यदि प्राकृतिक कारणों से फसलों को क्षति होती हैं तो हमारा दायित्व है हम उनकी मदद करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को उज्जैन जिले की तराना तहसील में आयोजित राहत राशि वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति के लिए आगर-मालवा जिले के किसानो के लिए 138 करोड़ रुपये एवं उज्जैन जिले के किसानों के लिए 265 करोड रुपए इस प्रकार कुल 403 करोड़ रुपये की राहत राशि तथा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की हितग्राहियों सहित गैर उज्ज्वला, विशेष पिछड़ी जनजाति की प्रदेश की कुल 29 लाख बहनों को 45 करोड़ रुपए की सहायता राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदान की। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगभग 31 करोड़ रुपए के 30 कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण भी किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सोलर पम्प लगाने पर अब किसानों को केवल प्रोजेक्ट लागत की 10 प्रतिशत राशि ही देना होगी, शेष राशि सरकार द्वारा दी जायेगी। सोलर पम्प लगाने के बाद किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने बताया कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को दुग्ध उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। देशी गाय पालन पर सरकार द्वारा अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहरीले रासायनिक खाद एवं दवाइयों की बजाय किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा सम्मान निधि भी दी जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य हैं कि किसानों की आय बढ़े और वे आर्थिक रूप से मजबूत हों।
30 कार्यो का लोकार्पण एवं भूमि पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में 31 करोड़ रुपये लागत के 30 कार्यों का भूमि पूजन एवं लोकार्पण किया। इसमें 14 करोड़ रुपये के 21 कार्यों का लोकार्पण एवं लगभग 17 करोड़ रुपये लागत के 09 कार्यों का भूमिपूजन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तराना को शाजापुर से जोड़़ने के लिए नई सड़क बनेगी वही अब आगर रोड़ से तराना सीधे जुड़ेगा। प्रदेश मे अब अधिकतर सड़कें फोरलेन ही बन रही है। उन्होंने कहा कि कायथा में महाविद्यालय का भूमि-पूजन किया गया है, जिससे अब कायथा के विद्यार्थियों को महाविद्यालय की सुविधा मिलेगी। उन्होंने तराना में आईटीआई के लोकार्पण पर बधाई भी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कनासिया-बरडंवा क्षेत्र में लगभग 08 हजार करोड़ रुपये लागत का कारखाना स्थापित हो रहा है, जिससे क्षेत्र के लगभग दो से तीन हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावांतर भुगतान योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सोयाबीन का केन्द्र सरकार द्वारा 5328 रुपये मूल्य घोषित किया गया है। मंडी मे पंजीकृत किसानो द्वारा सोयाबीन विक्रय करने पर उन्हें मंडी मूल्य एवं घोषित मूल्य के अंतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जायेगी।
सांसद अनिल फिरोजिया एवं आगर-मालवा विधायक माधव (मधु) गहलोत ने भी सबोधित किया। कार्यक्रम में प्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री तथा जिला प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालुहेडा, सतीश मालवीय, तेज बहादुर सिंह, डॉ. जितेंद्र पण्डया, शाजापुर विधायक अरूण भीमावद, राजेश धाकड़, राजपाल सिसोदिया, जयसिंह उमठ सहित जनप्रतिनिधि गण एवं गणमान्य नागरीक बडी सख्या में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. प्रकाशचंद्र सेठी की जयंती पर किया नमन
19 Oct, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी की जयंती पर विधानसभा पहुंचकर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र तोमर द्वारा प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों को स्मरण करने की परम्परा आरंभ की गई है। मध्यप्रदेश विधानसभा में आरंभ हुई यह पहल सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री सेठी का स्मरण करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। राजस्थान के झालावाड़ में जन्में सेठी के राजनैतिक जीवन की शुरुआत उज्जैन से हुई, वे उज्जैन के सांसद भी रहे, इस नाते उनसे सदा विशेष संबंध की अनुभूति होती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेठी का स्मरण करते हुए कहा कि सेठी ने समर्पित राजनीतिक जीवन और राष्ट्रसेवा के माध्यम से देश और प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने कार्यकाल में उन्होंने औद्योगिक विकास, प्रशासनिक सुधार और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया। प्रदेश की राजनीति के अलावा उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। वे केन्द्र सरकार में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, इस्पात खान एवं धातु मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभारी मंत्री और वित्त मंत्रालय में राजस्व एवं व्यय मंत्री रहे। वे आज भी उनकी मध्यप्रदेश और भारतीय राजनीति के कुशल, विनम्र और समर्पित नेताओं में गिने जाते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सतना में पूर्व विधायक स्व. तिवारी को दी श्रद्धांजलि
19 Oct, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को सतना पहुंचकर पूर्व विधायक स्व शंकरलाल तिवारी के निधन पर शोक श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने टाउन हाल सतना में श्रद्धांजलि सभा में स्व. तिवारी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए दिवगंत आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. तिवारी बहुत ही कर्मठ और जनता के कल्याण के लिए सदैव संघर्ष करने वाले जनप्रतिनिधि थे। तिवारी ने सदैव गरीबों की आवाज बुलंद की। उनके देहावसान से अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से उनकी पवित्र आत्मा की शांति के लिए कामना की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. तिवारी के पैतृक आवास जाकर उनके परिजन से भेंट की। मुख्यमंत्री ने परिजन को सांत्वना देते हुए कहा कि दुख की इस घडी में हम सब परिवार के साथ है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करें। इस दौरान नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह, महापौर योगेश ताम्रकार, जिला पंचायत अध्यक्ष रामखेलावन कोल, स्पीकर नगर निगम राजेश चतुर्वेदी, जिलाध्यक्ष भगवती प्रसाद पाण्डेय सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक और दिवंगत तिवारी के परिजन उपस्थित रहे।
गोवर्धन पर्वः प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का उत्सव
19 Oct, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : आप सभी को दीपोत्सव, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव की शुभकामनाएं और बधाई...दीपावली के उत्सव की श्रृंखला में आरोग्य, आर्थिक समृद्धि, परिवार एवं समाज समन्वय और पर्यावरण संरक्षण का संदेश है।
दीपावली के अगले दिन होने वाला गोवर्धन पर्व प्रकृति, पर्वत और गौ-वंश संरक्षण की भारतीय प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। इस परंपरा का साक्षात दर्शन हमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण करने से मिलता है। मानवता की रक्षा के इसी पावन स्मृति में गोवर्धन पूजन किया जाता है। इस पर्व में गौ-धन के संवर्धन की प्रेरणा है जो भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें भारतीय समाज की वह जीवनदृष्टि समाहित है, जिसमें प्रकृति, पशु, मनुष्य और देवत्व का संतुलन देखने को मिलता है।
मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हम प्रदेशभर में गोवर्धन पर्व का आयोजन कर रहे हैं। यह पर्व सभी जिलों में लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जा रहा है। आयोजन में पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया जायेगा। इस अवसर पर पशुपालन, कृषि और सहकारिता विभाग की जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के साथ लोगों को जोड़ने और ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार की गतिविधियों का संचालन शुरू किया गया है।
हमारे पर्व-परंपराओं में प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का भाव है। इसी कड़ी में गोवर्धन पर्व प्रकृति और प्राणियों के बीच समन्वय और संरक्षण से जुड़ा है। इस दिन गोबर से पर्वत का प्रतीक बनाकर उसकी पूजा की जाती है। पर्वत का प्राकृतिक संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान है। पर्वत जल संरक्षण, संवर्धन और ऋतुओं के संतुलन का समन्वय करते हैं। इससे नदी, तालाब तथा अन्य जलस्रोत सुरक्षित रहते हैं। गोवर्धन पूजन में पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प भी है। हमारा प्रयास है कि इस पर्व के माध्यम से प्रकृति और पशुधन का महत्व नई पीढ़ी तक पहुंचे।
मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ गौ-वंश से समृद्ध है। गौ-माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। हमने वर्ष 2024-25 को गौ-संरक्षण एवं संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया। हम पशुपालक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रयासरत हैं। देश के दुग्ध उत्पादन का 9 प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है इसे 20 प्रतिशत तक करना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के गांव-गांव में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत घर-घर जाकर पशुपालकों को पशुओं में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं के टीकाकरण, स्वास्थ्य रक्षा, संतुलित पशु आहार, पशु पोषण आदि के बारे में तकनीकी और व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है। इन सभी प्रयासों से हम मध्यप्रदेश को दुग्ध केपिटल बनायेंगे।
मुझे इस बात का संतोष है कि मध्यप्रदेश सरकार गौ-पालन, गौ-संवर्धन के लिए संकल्पित है। हमने गौ-शालाओं के लिए अनुदान को 20 रुपये प्रति गौ-वंश प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गौ-वंश प्रतिदिन किया है। गौ-वंश के भरण-पोषण के लिए दो वर्ष पहले बजट 90 करोड़ रुपये था, जिसे 250 करोड़ रुपये किया गया और अब यह राशि बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है।
मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ग्वालियर में देश की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौ-शाला परिसर में कम्प्रेस्ड बायो गैस संयंत्र की स्थापना की गई है। प्रदेश में नवीन गौ-शालाओं का निर्माण, प्रति गाय अनुदान राशि बढ़ाने, गौ-उत्पादकों को प्रोत्साहन, गोबर से सीएनजी निर्मित करने वाले आधुनिक प्लांट की स्थापना तथा नेशनल डेयरी विकास बोर्ड के साथ करार जैसे नवाचार किये गये हैं।
हमारे लिए खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश में किसानों और पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिये 2900 गौ-शालाएं हैं। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के अंतर्गत 2203 गौ-शालाओंका संचालन हो रहा है। विगत एक वर्ष में एक हजार से अधिक नवीन गौ-शालाएं प्रारंभ की गई हैं। गौ-वंश के आश्रय एवं भरण-पोषण के लिए नगर पालिक निगम ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर में गौ-शालाएं खोली गई हैं। भोपाल में 69.18 एकड़ भूमि पर 10 हजार गौ-वंश क्षमता की गौ-शाला का निर्माण किया जा रहा है। गौ-अभयारण्य अनुसंधान एवं उत्पादन केन्द्र, सालरिया, जिला आगर-मालवा में वर्तमान में 6500 गौ-वंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गौ-वंश का संवर्धन दुग्ध उत्पादन से रोज़गार और स्वरोज़गार का बड़ा स्रोत होगा। महिलाओं की आत्मनिर्भरता में भी दुग्ध व्यवसाय का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रदेश में जिस तरह खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये किसानों को प्रोत्साहित किया गया और हमारे किसान भाइयों ने उपज का भंडार भर दिया, उसी तरह दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे प्रदेश में गौ-वंश पालन बढ़ेगा, कृषि की पारंपरिक व्यवस्था को आधार प्राप्त होगा और प्राकृतिक खेती को सहयोग मिलेगा। रसायन रहित पौष्टिक अन्न तथा अन्य वस्तुओं का उत्पादन जहां स्वास्थ्य के लिये लाभदायी होगा, वहीं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
गौ-संवर्धन रोज़गार सृजन के साथ समाज को सांस्कृतिक मजबूती प्रदान करता है और सु-संस्कृत, स्वस्थ और सबल समाज का निर्माण करता है, जिससे सतत और समर्थ अर्थव्यवस्था का विकास संभव है। यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि यहां विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत की विपुल वन संपदा है। प्रदेश की समृद्धि और आत्मनिर्भरता पर्वतों और गौ-वंश के संरक्षण से जुड़ी है, जो मध्यप्रदेश और देश की प्रगति का आधार है। मुझे प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार गौ-सेवा, जैविक कृषि और दुग्ध उत्पादन से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है।
गोवर्धन पर्व के अवसर पर मेरा प्रदेश की जनता से आग्रह है कि हम सब मिलकर गोवर्धन पर्व-परंपरा के संकल्प को आत्मसात करें और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें।
प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए होगा चित्रकूट का विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
19 Oct, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि चित्रकूट के प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए इसका विकास किया जाएगा। चित्रकूट में बड़े निर्माण कार्यों की आवश्यकता नहीं है। मंदाकिनी नदी स्वच्छ और सदानीरा बनी रहे, भगवान कामतानाथ के सुगमता से दर्शन हो सके और भक्तों को सरलता से भोजन प्रसाद मिल सके ऐसे निर्माण कार्य किए जाएंगे। चित्रकूट का विकास प्रबुद्धजन, संतों और आमजन के सुझाव के आधार पर होगा। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट को धार्मिक पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन का केंद्र बनायेंगे। चित्रकूट में सड़क चौड़ीकरण, परिक्रमा पथ के सौदर्यीकरण और धार्मिक स्थलों के विकास के कार्य तेजी से पूरे किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को चित्रकूट में आरोग्यम में प्रबुद्धजन से चित्रकूट के विकास पर चर्चा के दौरान यह बात कही।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चित्रकूट में विकास के लिए 163 स्थानों पर लोगों ने स्वेच्छा से अपने भवन तोड़कर जमीन उपलब्ध कराई हैं। यह बहुत सराहनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय तथा दीनदयाल शोध संस्थान किसानों और युवाओं को पशुपालन की आधुनिक तकनीक देकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहयोग करें। चित्रकूट के विकास के लिए जारी 2800 करोड रूपये के निर्माण कार्य अगले वर्ष अप्रैल माह तक पूरे हो जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि होम-स्टे को बढावा देकर ग्रामीण पर्यटन विकास के साथ रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने सभी को दीपावली की शुभकामनायें दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर सतना संतो, प्रबुद्ध और आमजनता से चित्रकूट के विकास के लिए सुझाव प्राप्त कर उसके अनुरूप कार्य योजना तैयार करें। मुख्यमंत्री ने आरोग्य में भारतरत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किये।
सांसद गणेश सिंह ने कहा कि दौरी सागर निर्माण की बाधाएँ दूर की जाएं, जिससे निर्माण कार्य शुरू हो सके। दौरी सागर बांध बनने से मंदाकिनी नदी को नया जीवन मिलेगा। चित्रकूट के विकास के लिए शानदार ब्लूप्रिन्ट तैयार किया गया है। इसका क्रियान्वयन होते ही चित्रकूट शानदार धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो जाएगा। बैठक में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने चित्रकूट के विकास के लिए बनाई गई कार्ययोजना की जानकारी देते हुए बताया कि चित्रकूट में समग्र विकास के लिए 5 हजार करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें से 2800 करोड रुपए के निर्माण कार्य आगामी माह अप्रैल तक पूरे हो जाएंगे। कार्ययोजना में नगर वन निर्माण, घाट निर्माण, सड़कों के विकास, सौदर्यीकरण मंदाकिनी नदी की साफ-सफाई तथा घाट निर्माण परिक्रमा पथ के विकास जैसे कार्य शामिल हैं। कार्ययोजना में मझगवां में औद्योगिक इकाइयों और शिक्षण संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव भी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा प्रकाशित पुस्तिका 'रामचन्द्र' श्रीराम राजा सरकार के चरित्र की चित्रकथा का विमोचन किया। समारोह में डीआरआई के संगठन सचिव अभय महाजन ने मुख्यमंत्री और अतिथियों का स्वागत करते हुए चित्रकूट के विकास के संबंध में किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खडेलवाल, विधायक चित्रकूट सुरेन्द्र सिंह गहरवार, नगर पंचायत अध्यक्ष साधना पटेल, कुलगुरू ग्रामोदय विश्वविद्यालय प्रो. भरत मिश्रा, पद्मडॉ. बीके जैन, सीताराम बाथम, गायत्री परिवार के प्रतिनिधि रामनारायण त्रिपाठी, कमिश्नर रीवा संभाग बी.एस. जामोद, आईजी गौरव राजपूत सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया दीपदान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चित्रकूट प्रवास के दौरान दीपावली मेला के अवसर पर आरोग्य धाम में मां मंदाकिनी के पंचवटी घाट पर दीपदान किया। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना के साथ दीपावली की शुभकामनायें दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की सनातन संस्कृति समृद्ध हो रही है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सरकार मिलकर चित्रकूट के आध्यात्मिक, पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विकास के लिए अनेक कार्य कर रही है। आगामी समय में चित्रकूट का वैभव तथा गौरव और भी बढ़ेगा।
बच्चों के साथ बांटी दीपावली की खुशियाँ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचवटी घाट पर श्रीराम के गुणों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर दीवारी नृत्य कर रहे कलाकार दलों के बच्चों को प्रोत्साहित किया और बच्चों के बीच पहुंचकर मिष्ठान और उपहार देकर दीपावली की खुशियाँ बांटी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचवटी में चित्रकूट के साधु-संतों से भेंटकर उनका सम्मान भी किया।
खरगोन में सब-इंस्पेक्टर ने होटल में लगाई फांसी, जांच में जुटी पुलिस
19 Oct, 2025 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खरगोन. मध्य प्रदेश (MP) के खरगोन (Khargone) से दर्दनाक खबर सामने आई है. शहर के होटल में अशोक नगर (Ashok Nagar) थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर (Sub-inspector) अक्षय कुशवाह (Akshay Kushwaha) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस का कहना है कि अक्षय कुशवाह एक दिन पहले ही अशोक नगर से खरगोन पहुंचे थे. यहां होटल के कमरा नंबर 202 में रुके हुए थे.
जब कमरे का दरवाजा काफी समय तक नहीं खुला तो होटल के कर्मचारियों ने आवाज दी, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद भी दरवाजा बंद रहने पर कर्मचारियों को शक हुआ और उन्होंने होटल मैनेजर को इसकी जानकारी दी. मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी.
शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़ा गया. दरवाजा खोलते ही सभी हैरान रह गए. कमरे के अंदर सब इंस्पेक्टर अक्षय कुशवाह होटल की चादर से फंदा बनाकर पंखे से लटके मिले. तुरंत शहर कोतवाली थाना प्रभारी बी.एल. मंडलोई को सूचना दी गई. पुलिस टीम के साथ फोरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया गया और जांच की गई. इसके बाद शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया.
थाना प्रभारी बी.एल. मंडलोई ने बताया कि मृतक सब इंस्पेक्टर अशोक नगर थाने में पदस्थ थे. चेकआउट के समय जब होटल स्टाफ ने कई बार दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब नहीं मिला तो मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी.
टीम के साथ मौके पर पहुंचकर वीडियोग्राफी कराई गई और दरवाजा खोला गया, जहां अक्षय कुशवाह का शव फंदे से लटका मिला. होटल रजिस्टर से पहचान की गई. इसके बाद अशोक नगर थाने के अधिकारियों से संपर्क कर परिजनों को सूचित किया गया है. अभी तक आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है. फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है.
पटाखों से आंखें हुई डैमेज, बीएचएमआरसी में 3 मरीज भर्ती, एम्स ने बताया ऐसे करें बचाव
19 Oct, 2025 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: बिना पटाखों की आतिशबाजी के दीवाली का मजा अधूरा है. लेकिन आतिशबाजी से उतनी ही अधिक सावधानी भी बरतने की जरूरत है. पटाखों के आतिशबाजी में थोड़ी सी लापरवाही भी आपके लिए गंभीर साबित हो सकती है. हाल में ही भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर यानि बीएचएमआरसी में ऐसे 3 मरीज पहुंचे, जिनकी पटाखों के कारण आंखें खराब हो चुकी हैं. अब इनका इलाज चल रहा है. वहीं पटाखा गन चलाने की वजह से 11 साल के बच्चे की आंख डैमेज हो गई है. इसका हमीदिया अस्पताल में इलाज चल रहा है.
दीपावली में बढ़ जाती हैं त्वचा से संबंधित समस्याएं
एम्स भोपाल के त्वचा रोग विभाग के सहायक प्रोफेसर, डॉ. मनीष खंडारे ने बताया कि दीपावली का पर्व रोशनी, उल्लास और खुशियों का प्रतीक है. इस दौरान त्वचा लगातार धुएं, तेल के दीयों और सजावटी उत्पादों के संपर्क में आती है. जिससे एलर्जी या जलन की संभावना बढ़ जाती है. कुछ सरल सावधानियों को अपनाकर त्वचा को सुरक्षित रखा जा सकता है. पटाखों के धुएँ, प्रदूषण और मेकअप के अत्यधिक उपयोग के कारण त्वचा पर दाने, खुजली या जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
ऐसे करें पटाखों और धुएं से सुरक्षा
धुएँ और पटाखों के अवशेषों के सीधे संपर्क से बचें, यह एलर्जी या जलन का कारण बन सकता है. बाहर के उत्सवों के बाद चेहरे और खुली त्वचा को माइल्ड क्लींजर से धोएँ. बाहर जाने से पहले हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं, यह एक सुरक्षात्मक परत की तरह कार्य करता है. त्वचा को अच्छी तरह मॉइस्चराइज़ करें, दीपावली के दौरान मौसम शुष्क हो जाता है. दिन के समय होने वाले कार्यक्रमों में भी सनस्क्रीन का उपयोग करें. संवेदनशील त्वचा वाले लोग बिना सुगंध वाले उत्पादों का इस्तेमाल करें ताकि परफ्यूम या रंगों से जलन न हो.
त्योहार के बाद त्वचा की सफाई
आहार और हाइड्रेशन से भी करें बचाव
मेकअप और ग्लिटर से सावधानियाँ
दीये और तेल से जलन से बचाव
सप्ताह में एक या दो बार हल्के एक्सफोलिएंट का प्रयोग करें ताकि प्रदूषण हटाया जा सके.
हयालुरोनिक एसिड या सेरामाइड युक्त सीरम से त्वचा को हाइड्रेट करें.
यदि लगातार खुजली, दाने या एक्ने की समस्या दिखे तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें.
मिठाइयों का सीमित सेवन करें. अधिक शक्कर और तले खाद्य पदार्थ मुहांसों को बढ़ा सकते हैं.
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल (जैसे संतरा, पपीता, अनार) अपने आहार में शामिल करें.
नॉन-कॉमेडोजेनिक और डर्मेटोलॉजिकली टेस्टेड मेकअप उत्पादों का उपयोग करें.
मेकअप उत्पाद दूसरों के साथ साझा न करें ताकि संक्रमण से बचा जा सके.
सोने से पहले मेकअप पूरी तरह हटाएँ. माइसेलर वाटर या माइल्ड क्लींजर का उपयोग करें और उसके बाद मॉइस्चराइज़र लगाएँ.
हल्की जलन की स्थिति में तुरंत ठंडे पानी से 10-15 मिनट तक धोएं. फिर सिल्वर सल्फाडियाज़ीन या एलोवेरा जेल लगाएँ.
टूथपेस्ट या मक्खन लगाने से बिल्कुल बचें.
दीयों को त्वचा और बालों से दूर रखें. गरम तेल के छींटे जलन का कारण बन सकते हैं.
मालवा के फूलों से सजती है पूरे देश की दिवाली, हफ्ते भर में हो जाता है करोड़ों का कारोबार
19 Oct, 2025 09:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उज्जैन: त्योहारी सीजन में फूलों की खूब डिमांड रहती है. घरों को सजाने के साथ-साथ मंदिरों में भगवान की पूजा के लिए ताजे फूलों की जरूरत पड़ती है. एमपी के मालवा क्षेत्र में बड़े स्तर पर फूलों की खेती होती है और उज्जैन में सबसे बड़ी फूलों की मंडी है. यहां इन दिनों प्रतिदिन 300-400 टन फूल देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर सहित देश के अन्य राज्यों में भेजे जा रहे हैं. सबसे ज्यादा डिमांड गेंदा के फूल की होती है जो अलग-अलग रंगों में मिल जाता है. इस आर्टिकल में विभिन्न प्रकार के फूलों के मंडी तक आने और फिर उसकी पैकिंग और देश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई की पूरी प्रक्रिया को जानेंगे.
70 साल से चल रही है उज्जैन की फूल मंडी
उज्जैन शहर के दूधतलाई, इंदौर गेट पर फूलों की विशाल मंडी है. यहीं पर मालवा क्षेत्र के लगभग सभी किसान अपने फूल बेचने आते हैं. मंडी अध्यक्ष कैलाश चंद्र सोलंकी उर्फ गजा दादा बताते हैं कि "लगभग 70 सालों से ये मंडी संचालित है. मालवा क्षेत्र में लगभग 300 किसान बड़े स्तर पर फूलों की खेती करते हैं.
सभी किसान इसी मंडी में अपने फूल बेचने आते हैं. त्योहारी सीजन में किसान रात में ही गाड़ियों से फूल लेकर पहुंच जाते हैं. मंडी सुबह करीब 5 बजे खुलती है और 12 बजे तक किसान व्यापारियों को अपना फूल बेचकर चले जाते हैं. यहां लगभग 30 व्यापारी हैं जो फूलों की खरीद-बेच का काम करते हैं. सारा काम होलसेल में होता है."
3 दिन तक खराब नहीं होते मालवा के फूल
व्यापारी नंद लाल बारोड ने बताया कि "हम यहां 1980 से व्यापारी का काम कर रहे हैं. हमारा पूरा परिवार फूलों के व्यापार में है. फूलों की खेती करने वाले मालवा के हजारों किसान हमारे संपर्क में हैं. हम देशभर में होलसेल में सप्लाई करते हैं. इसमें हम पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट में होने वाले खर्च का अलग से चार्ज करते हैं." व्यापारी गोपाल बारोड ने बताया कि "दीपावली के समय यहां से प्रतिदिन 300 टन फूल बाहर जाता है.
इसके अलावा सामान्य दिनों में ये मात्रा 5 टन से लेकर 17 टन तक रहती है. देश के किसी भी कोने में हम 18 घंटे के अंदर सप्लाई कर देते हैं." व्यापारी मुकेश ने बताया कि "मालवा के फूलों की एक खासियत ये होती है कि ये 3 दिनों तक खराब नहीं होते हैं. इस वजह से हम इसे देश के विभिन्न हिस्सों तक भेज पाते हैं."
कुबेर और यक्षिणी की 2200 साल पुरानी प्रतिमा, धनतेरस के दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
19 Oct, 2025 08:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विदिशा: हर साल धनतेरस के दिन विदिशा का जिला पुरातत्व संग्रहालय श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन जाता है. एक दिन के लिए यह म्यूजियम मंदिर के रूप में बदल जाता है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान कुबेर जी की विशेष पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. इस प्रतिमा का चित्र दिल्ली स्थित आरबीआई के प्रतीक में भी है. कुबेर जी के साथ उनकी पत्नी यक्षिणी की प्रतिमा भी रखी है. धनतेरस पर श्रद्धालुओं की भीड़ यहां आध्यात्मिक सुकून पाने आती है.
पुरातत्व संग्रहालय में कुबेर की विशेष पूजा
जिला पुरातत्व संग्रहालय में पूजन की शुरुआत करने वाले श्रद्धालु अर्पित उपाध्याय बताते हैं कि "हमने पहली बार साल 2008 में धनतेरस के दिन विशेष अनुमति लेकर जिला पुरातत्व संग्रहालय में भगवान कुबेर जी का पूजन किया था. उसके बाद हर साल धनतेरस के दिन भगवान कुबेर जी की पूजा होती है. ऐसे लगता है जैसे हम पुरातत्व संग्रहालय में नहीं, बल्कि किसी मंदिर में आए हैं, क्योंकि यहां श्रद्धालु भी आते हैं, पूजन होता है और बहुत अच्छा लगता है. मन को शांति मिलती है. बिल्कुल एक दिन का यह मंदिर बन जाता है."
पुरातत्व संग्रहालय में कुबेर जी की 12 फीट लंबी प्रतिमा स्थापित
जिला पुरातत्व संग्रहालय के वरिष्ठ मार्गदर्शक रामनिवास शुक्ला ने बताया कि "आज धनतेरस का दिन है और आज धन के देवता कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है. हमारे जिला पुरातत्व संग्रहालय में यक्ष की 12 फीट लंबी विशाल प्रतिमा फ्रंट गेट पर स्थापित है. इस प्रतिमा में सिर पर पगड़ी, हाथों में बाजूबंद, गले में ताबीज और हाथ में धन की गठरी दिखाई देती है. यह प्रतिमा सफेद बलुआ पत्थर की बनी हुई है.
यह प्रतिमा वर्ष 1962 में बेतवा और बेस नदी के संगम में मिली थी, जिसे वर्तमान में त्रिवेणी घाट कहा जाता है. वहां पर यक्ष और यक्षिणी का शायद बहुत विशाल मंदिर रहा होगा, जो कालांतर में ध्वस्त हो गया. जब नदी का जलस्तर कम हुआ तो प्रतिमा दिखाई देने लगी. उस समय लोगों ने उसे चट्टान समझकर उस पर कपड़े धोए. बाद में जब आकृति स्पष्ट हुई, तब 1962 में प्रतिमा को वहां से लाया गया और 1965 में पुरातत्व संग्रहालय की इमारत बनने पर उसे यहां स्थापित किया गया.
यक्षिणी और कुबेर की प्रतिमा त्रिवेणी घाट में हुई थी प्राप्त
इसी तरह विष्णु गैलरी में यक्षिणी की प्रतिमा है, जो यक्ष (कुबेर) की पत्नी हैं. उनके एक हाथ में धन का थैला और दूसरे हाथ में लेखा-जोखा की किताब है. उनके बाल खुले हुए हैं, पैरों में कड़े हैं और हाथों में बाजूबंद बंधे हुए हैं. यह प्रतिमा लगभग 2200 वर्ष पुरानी बताई जा रही है. इसकी लंबाई 7 फीट है. जबकि कुबेर (यक्ष) की प्रतिमा 12 फीट लंबी है. जो दिखाई दे रही है. लेकिन वास्तव में उसकी पूरी ऊंचाई 17 फीट है. यक्षिणी की प्रतिमा भी बेतवा और बेस नदी के संगम, त्रिवेणी घाट से ही प्राप्त हुई थी.
जिला पुरातत्व संग्रहालय के वरिष्ठ मार्गदर्शक रामनिवास शुक्ला ने बताया कि "जन समुदाय की धार्मिक आस्था को देखते हुए हम लोग यहां कुछ समय के लिए पूजा-अर्चना करने की अनुमति देते हैं. वैसे तो पुरातत्व विभाग के नियमों में पूजा-अर्चना निषिद्ध है, लेकिन लोगों की भावनाओं और धार्मिक आस्था को देखते हुए कुछ समय के लिए पूजन करने दिया जाता है. म्यूजियम शाम 5 बजे बंद हो जाता है, उसके बाद पूजन संभव नहीं है. सुबह 10 बजे जैसे ही म्यूजियम खुलता है, श्रद्धालुओं का पूजन और आस्था का सिलसिला लगातार चलता रहता है."
मध्य प्रदेश सरकार देगी सोलर पंप पर 90% सब्सिडी, 3 HP वाले किसान भी होंगे लाभान्वित
18 Oct, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
MP News: धनतेरस पर मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए कई घोषणाएं की हैं. अब सोलर पंप 10% कीमत पर मिलेंगे, बाकी 90% सरकार देगी. 3 हॉर्स पावर कनेक्शन वाले किसान भी लाभ ले सकेंगे.
धनतेरस पर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर है. उन्हें अब सोलर पंप के लिए 40 फीसदी नहीं, बल्कि केवल 10 फीसदी दाम ही देने होंगे. बाकी 90 फीसदी राशि मध्य प्रदेश सरकार वहन करेगी. इतना ही नहीं 3 हॉर्स पावर कनेक्शन वाला किसान भी इस योजना का लाभ ले सकेगा. इसके अलावा भविष्य में कम दाम की वजह से किसानों को फसलें सड़कों पर नहीं फेंकनी होंगी, सरकार उनकी फसलें खरीद लेगी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 अक्टूबर को सीएम हाउस में इन घोषणाओं के साथ ही अन्नदाता को बड़ी राहत दी.
उन्होंने कहा कि सारे पुण्य एक तरफ और अन्नदाता की सेवा एक तरफ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं. मौका था मुख्यमंत्री निवास में आयोजित किसान सम्मेलन का. इस दौरान सीएम डॉ. मोहन कांग्रेस पर भी जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों ने जनकल्याण में बाधा डालकर पाप किया है.
गौरतलब है कि, धनतेरस के मौके पर मुख्यमंत्री निवास पर किसान सम्मेलन आयोजित किया गया. कार्यक्रम में जिलों से हजारों किसान पहुंचे. इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पहले आपदा के समय किसानों को सर्वे पूरा होने के बाद राहत राशि मिलती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने ये पद्धति बदली. हमारे प्रदेश में सोयाबीन तो अभी कटकर आई है, जबकि उसके नुकसान का पैसा किसानों के अकाउंट में पहुंच चुका है. जैसे-जैसे किसानों की जानकारी आती जा रही है, वैसे-वैसे उनके खातों में राहत राशि पहुंचती जा रही है. यह किसानों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावना के अनुरूप प्रदेश सरकार किसानों का सम्मान कर रही है. हमारी सरकार ने संकल्प पत्र के अनुसार किसानों को गेहूं का 2600 रुपये भाव दिया. इसे अभी और बढ़ाएंगे. मध्य प्रदेश पूरे देश में गेहूं का भाव सबसे ज्यादा देता है. किसान की बात किसान परिवार का बेटा ही समझ सकता है. किसान के घर के बच्चे सभी काम कर सकते हैं.
जान की बाजी लगाते हैं किसान
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि कांग्रेसी कान खोलकर सुन लें. कांग्रेस ने देश-प्रदेश में कभी किसी किसान के बेटे को मुख्यमंत्री नहीं बनाया. 1956 में मध्य प्रदेश की स्थापना हुई, लेकिन एक भी किसान का बेटा मुख्यमंत्री नहीं बना. कांग्रेस ने यह पाप किया. ये बीजेपी ही है, जिसने किसान के बेटे को प्रदेश का मुखिया बना दिया. हमारे किसान धूप में मेहनत की पराकाष्ठा करते हैं. वे ओला-पाला-सूखा-बाढ़ सहन करके, अपनी जान की बाजी लगाकर अन्न उपजाते हैं और लोगों का पेट भरते हैं. उन्होंने कहा कि जीवन के सारे पुण्य एक तरफ और किसानों की सेवा एक तरफ. कांग्रेस इस बात पर माफी मांगे कि उसने नर्मदा के पानी का पूरा इस्तेमाल ही नहीं करने दिया. प्रदेश नदियों का मायका है. यहां से 250 से ज्यादा नदियां निकलती हैं. मां नर्मदा से निमाड़-मालवा-मध्य भारत का क्षेत्र पीने के लिए, खेत के लिए-उद्योग के लिए पानी मिलता है. लेकिन, 1956 से 2003 तक कांग्रेस ने नर्मदा के पानी का उपयोग ही नहीं करने दिया.
सीएम ने कांग्रेस को लिया आड़े हाथ
सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि नर्मदा घाटी परियोजना 1977 में बन गई थी, लेकिन कांग्रस की सरकारों ने काम नहीं किया. कांग्रेसी मजाक उड़ाते थे. कहते थे कि कहां नर्मदा नीचे की तरफ, कहां ऊपर पानी पहुंचा देंगे, संभव ही नहीं है. जबकि, आज हमारे सामने इतिहास बना है. 1956 में मध्य प्रदेश बना और 2002-03 तक केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर में ही सिंचाई होती थी. गेहूं का दाम 1956 में 100 रुपये क्विंटल था और इन कांग्रेसियों की वजह से 2002-03 तक इसका भाव 500 रुपये क्विंटल ही हो सका. इतने सालों में केवल 400 रुपये ही बढ़ाए गए. कांग्रेस ने यह पाप किया. हमें इस बात की खुशी है कि साल 2005 में जो गेहूं का भाव 500 रुपये था, वह आज 2600 रुपये क्विंटल हो गया है. उन्होंने कहा कि यह भाजपा के काम करने का तरीका है. 20 साल में 2000 रुपये बढ़े और 55 साल में 400 रुपये बढ़े. अगर यही रुपये हमारे पूर्वजों को मिल जाते, तो उनका जीवन कितना बदल जाता. कांग्रेस की सरकारों के वक्त किसानों को डीजल के लिए लाइन में लगना पड़ता था, बिजली भी नहीं मिलती थी. कांग्रेस शासनकाल में हालात बेहद खराब थे. जबकि, आज प्रदेश में बिजली सरप्लस है. हमारी शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाक
किसान कल्याण के संकल्पित प्रदेश सरकार
सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि किसानों को 6 हजार रुपये किसान सम्मान निधि मिलती है, 6 हजार रुपये प्रधानमंत्री की तरफ से आता है. 5 हॉर्स पावर के कनेक्शन पर किसान को साढ़े सात हजार बिल आता है. इस पर सरकार 51 हजार रुपये की सब्सिडी भरती है. अब हम सोलर पंप की योजना लेकर आए हैं. अभी तक सोलर पंप खरीदने पर उसकी कीमत का 40 फीसदी किसान और 60 फीसदी दाम सरकार देती थी. मैं इस बात की मंच से ही घोषणा करता हूं कि अब किसानों को सोलर पंप खरीदने के लिए महज 10 फीसदी कीमत देनी होगी, बाकी 90 फीसदी कीमत सरकार देगी. जिन किसानों के कनेक्शन 3 हॉर्स पावर के हैं उन्हें भी 5 हॉर्स पावर के सोलर पंप दस फीसदी कीमत पर ही मिल जाएगा. किसान अपने घर में बिजली जलाएगा. ये हमारी किसानों के प्रति वचनबद्धता है.
100 लाख करेंगे सिंचाई का रकबा
प्रदेश के मुखिया ने कहा कि नदी जोड़ो योजना के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध करा रहे हैं. किसानों की फसल को पानी मिल जाए, फसल सोने की हो जाती है. राज्य सरकार ने सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है. संतरा-मसाला-लहसुन-धनिया-दलहम-तिलहन में मध्य प्रदेश नंबर-1 पर है. मटर-प्याज-मिर्च, अमरूद उत्पादन में दूसरे नंबर पर है. औषधी-सुगंधित पौधों में तीसरे नंबर पर है. हमारे प्रदेश में कुछ फसलें ज्यादा हो जाती हैं, तो किसानों को उन्हें फेंकना पड़ता है. लेकिन, किसानों को अब फसल फेंकनी नहीं पड़ेगी.
उन्होंने कहा कि भविष्य में सरकार की जगहों पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर उनकी फसल खरीद लेगी. किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा. हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मध्य प्रदेश का नक्शा लेकर बैठें और कहां-कौन सी फसल होती है उस पर रिसर्च करें. हमारे पैर भी अन्न का दाना लगता है तो हम अपमान समझते हैं. उसमें देवताओं का वास होता है. इस स्थिति में जब फसल फेंकनी पड़े तो यह बहुत गंभीर बात है. इसलिए हम अन्न का अपमान नहीं होने देंगे.
दोस्तों की हर हाल में करें मदद
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सभी गोपालक किसान धूमधाम से गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाएं. राज्य सरकार शासकीय स्तर पर गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाएगी. प्रदेश में प्रभु श्री राम के ओरछा धाम को भव्य रूप दिया जा रहा है. राम वन गमन पथ भी विकसित कर रहे हैं. भगवान श्री कृष्ण से जुड़े हर स्थान को तीर्थ के रूप में विकसित कर रहे हैं. किसान भाई अपने बच्चों को पढ़ाएं. हमें अपने दोस्तों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ये मुख्यमंत्री निवास नहीं किसानों का आवास है. पिछले साल 2 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, भावांतर योजना दोबारा शुरू होने पर आज तक 9 लाख सोयाबीन किसानों से पंजीयन करा लिया है. लाड़ली बहनों को इसी भाई दूज से 250 रुपए अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा. मेरी ओर से सभी को दीपावली की बधाई.
MP में बदल गया स्टाम्प सिस्टम! अब नहीं मिलेंगे मैनुअल स्टाम्प पेपर, होगी 34 करोड़ की बचत
18 Oct, 2025 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। जिस तरह कभी टेलीग्राम और मनीऑर्डर चलते और समय के साथ बंद हो गए थे. ठीक उसी तरह अब मध्य प्रदेश में मैनुअल स्टाम्प पूरी तरह से बंद होने वाले हैं। सरकार की ओर से अब पूरे प्रदेश में सिर्फ ई-स्टाम्प सिस्टम लागू किया जाएगा. नई व्यवस्था कुछ ही महीनों में लागू हो जाएगी. इस व्यवस्था से प्रदेश सरकार के करीब 34 करोड़ रुपए की सालाना बचत होगी। यह पैसे स्टाम्प की छपाई, ढुलाई और सुरक्षा पर खर्च होते थे।
अब सिर्फ ई-स्टाम्प पेपर होंगे उपल्बध
जमीन, मकान की रजिस्ट्री, शपथ-पत्र और किरायानामा जैसे दस्तावेजों के लिए स्टाम्प पेपर अब केवल डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। मध्य प्रदेश में कागजी स्टाम्प पेपर की छपाई को पूरी तरह बंद करने की तैयारी है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने इस संबंध में मध्य प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा है. मंजूरी मिलते ही इस पर तेजी से अमल शुरू हो जाएगा।
बंद हो चुके100 रुपए से अधिक मूल्य के स्टाम्प पेपर
लगभग 10 साल पहले साल 2015 में 100 रुपए से ज्यादा मूल्य के स्टाम्प पेपर की छपाई बंद कर दी गई थी. तब से 100 रुपए से अधिक मूल्य के स्टाम्प केवल डिजिटल रूप में उपलब्ध है।. ई-स्टाम्प सिस्टम को लेकर पंजीयन विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही कागजी स्टाम्प पेपर पूरी तरह बंद हो जाएंगे.स्टाम्प पेपर की छपाई और वेंडर्स तक पहुंचाने में हर साल करीब 30 से 35 करोड़ रुपए का खर्च आता है। डिजिटल स्टाम्प के उपयोग से यह खर्च बचेगा. यानी सरकार को करीब 34 करोड़ रुपए के सालाना खर्च की बचत होगी।
रुकेगा स्टाम्प का दुरुपयोग
मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) जुलाई 2013 से लागू है. इस सिस्टम के तहत अधिकृत वेंडर्स के माध्यम से स्टाम्प पेपर ऑनलाइन खरीदे जा सकते हैं। ईएसएस से स्टाम्प की ट्रैकिंग आसान होती है और दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलती है।
ऑनलाइन कैसे खरीदें ई-स्टाम्प?
ई-स्टाम्प खरीदने के लिए मध्य प्रदेश के ई-स्टाम्पिंग पोर्टल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाना होगा.
इसके बाद आवश्यक दस्तावेज (जैसे बिक्री विलेख, किराया समझौता) चुनें और लेनदेन का विवरण भरें.
इसके बाद नेट बैंकिंग, UPI या कार्ड किसी भी ऑनलाइन तरीके से भुगतान करें.
पेमेंट सक्सेसफुल होने के बाद तुरंत डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र मिल जाएगा.
MP स्कूलों में 3 नवंबर से 9वीं से 12वीं तक छमाही परीक्षाएं, बोर्ड पैटर्न पर होंगे प्रश्नपत्र
18 Oct, 2025 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। सरकारी स्कूलों में नौवीं से 12वीं तक की छमाही परीक्षाएं तीन नवंबर से आयोजित की जा रही है। इसमें अक्टूबर तक के करीब 70 फीसद पाठ्यक्रम से सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है, इससे कुछ स्कूलों का पाठ्यक्रम करीब 40 से 50 फीसद पूरा हुआ है। स्कूलों में 18 से 23 अक्टूबर तक दीपावली का अवकाश है। इसको देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों को अतिरिक्त कक्षाएं संचालित कर पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
अब कई स्कूलों ने अवकाश में भी रेमेडियल कक्षाएं लगाकर पाठ्यक्रम पूरा कराने की योजना पर काम कर रहे हैं। विभाग ने सरकारी स्कूलों में होने वाली छमाही परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है। इनमें पाठ्यक्रम 70 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की वार्षिक के हिसाब से तैयारी हो सके। वहीं बोर्ड व वार्षिक परीक्षा फरवरी में होगी। प्रश्नपत्र ईमेल के माध्यम से स्कूलों में भेजे जाएंगे और वहीं से प्रिंट निकालकर विद्यार्थियों में वितरित किए जाएंगे। प्रश्नपत्र बोर्ड के पैटर्न पर तैयार होंगे। रिजल्ट में देखा जाएगा कि जिन सवालों में अधिकांश विद्यार्थी गलती कर रहे हैं, उनके लिए अलग से कक्षा लगाई जाएगी, ताकि वे वार्षिक परीक्षा में इस गलती को न दोहराएं। विद्यार्थियों के लिए रेमेडियल और विशेष कक्षाएं भी लगाई जाएंगी, ताकि वार्षिक परीक्षा के लिए उनकी पर्याप्त तैयारी हो सके।
अवकाश में भी लग रही कक्षाएं
सांदीपनि विद्यालय बरखेड़ी के प्राचार्य ने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए दीपावली की छुट्टियों में भी कक्षाएं संचालित की जाएंगी। विद्यार्थी अपने मन से कक्षाओं में आएंगे। वहीं सांदीपनि विद्यालय निशातपुरा के प्राचार्य ने बताया कि 60 फीसद पाठ्यक्रम पूरा कर लिया गया है। रविवार और दीपावली के अवकाश में भी कक्षाएं लगाई जाएंगी।इसके अलावा रेमेडियल कक्षाएं भी संचालित की जा रही है।
इस बार फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं
अधिकारियों ने बताया कि पेपर बोर्ड पैटर्न पर तैयार किया जाएगा और कठिनाई स्तर का भी ध्यान रखेंगे। इसे मध्यम स्तर पर तैयार करेंगे ताकि छात्रों को वार्षिक परीक्षा का पूर्वाभ्यास हो जाए। इस बार 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी के पहले सप्ताह से शुरू हो रही हैं। इस वजह से भी अधिकतम पाठ्यक्रम को कवर करेंगे।
विद्यार्थियों को उत्तरपुस्तिकाएं दिखाएंगे
परीक्षा के दौरान ही उत्तरपुस्तिकाएं चेकिंग का काम भी शुरू हो जाएगा। जिस विषय का पेपर होता जाएगा, उसकी उत्तरपुस्तिकाएं भी जांचनी शुरू कर दी जाएंगी। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि परीक्षा समाप्ति के दो-तीन दिन के भीतर ही छात्रों को उनकी उत्तरपुस्तिकाएं दिखा दी जाए। अधिकारियों ने बताया कि विद्यार्थियों को कक्षाओं में संबंधित विषय के शिक्षक यह भी बताएंगे कि उन्होंने कहां गलती की है और वार्षिक परीक्षा में इस तरह के प्रश्नों के उत्तर कैसे लिखने हैं। अभी से स्कूलों में रेमेडियल कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इसी के साथ छमाही परीक्षा के परिणाम के आधार पर भी स्कूलों में विशेष कक्षाएं लगाकर उनकी समस्या दूर की जाएगी। स्कूल स्तर पर भी पेपर तैयार करवाकर विद्यार्थियों से हल करवाएंगे। छमाही परीक्षाओं के लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
ध्रुव योग का खास संयोग: इस साल मोहिनी एकादशी पर बन रहे हैं कई मंगलकारी मुहूर्त
बेड के सामने न रखें शीशा: वास्तु के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकती हैं ये चीजें
दुर्लभ दर्शन: यहाँ विराजते हैं मूंछों वाले प्रभु श्रीराम, 'कर्ज मुक्ति' के लिए प्रसिद्ध है यह धाम
अक्षय तृतीया पर बन रहा खास संयोग, आज करें ये शुभ कार्य और पाएं अक्षय फल
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
दिशा दर्शन भ्रमण आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
