मध्य प्रदेश
जल संचय के क्षेत्र में श्रेष्ठ पहल के लिए गुना नगरीय निकाय को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित
18 Nov, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : गुना नगरीय निकाय को जल संचय के क्षेत्र में जन भागीदारी के साथ श्रेष्ठ कार्य करने पर देश की चयनित 50 नगरीय निकाय में स्थान मिला है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज यहां विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में गुना नगरीय निकाय को पुरस्कृत किया।नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोडवें ने गुना नगर पालिका परिषद एवं उनकी टीम को श्रेष्ठ नगरीय निकायों की श्रेणी में चयन होने पर बधाई दी है। इस अवसर पर कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी,आर, पाटिल मौजूद थे।
लक्ष्य से अधिक तैयार की गई पुनर्भरण जल संरचनाएँ
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने देश में जनभागीदारी से जल संचय की बेहतर पहल के लिये प्रशासन तंत्र में हर स्तर पर पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की थी। गुना नगर पालिका परिषद ने जल संचय के लिये कार्ययोजना बनाकर नगरीय क्षेत्र में 2 हजार 231 रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जियो टैग फोटो पोर्टल पर अपलोड किये। यह तय लक्ष्य से अधिक है। इसी के साथ गुना शहरी क्षेत्र के कुंओं का भी जीर्णोद्वार कर उनका पुनर्जीवन का कार्य किया गया।
दल का गठन
गुना नगर पालिका ने जल संचय के कार्य को करने के लिये दल का गठन किया था। गठित दल ने इस वर्ष मई माह के दौरान शासकीय और निजी परिसर, स्कूल, कॉलेज, छात्रावास और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स, निजी कॉलोनियां, कुंआ और बावड़ी का सर्वे करवाया गया। सर्वे रिपोर्ट के बाद जनभागीदारी से 2 हजार 231 रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किये गये और पहले से उपलब्ध सिस्टम की मरम्मत सुनिश्चित की गई।
उल्लेखनीय है कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के तहत कुल 46 विजेताओं (संयुक्त विजेताओं सहित) की घोषणा की । ये पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जा रहे हैं जिनमें सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ स्कूल या कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ उद्योग, सर्वश्रेष्ठ जल उपयोक्ता संघ, सर्वश्रेष्ठ संस्था (स्कूल या कॉलेज के अतिरिक्त), सर्वश्रेष्ठ सिविल सोसायटी और जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति श्रेणी में शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चला रहा है।
इसी उद्देश्य से लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और उन्हें जल उपयोग के सर्वोत्तम तौर तरीकों को अपनाने को प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी।
वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार का शुभारंभ 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर किया गया था। कुल 751 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी समीक्षा और मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति द्वारा किया गया। चयनित आवेदनों का परीक्षण केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा किया गया। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2024 के 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए कुल 46 विजेताओं का चयन किया गया।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य देश में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की पहचान करना और सरकार के ‘जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करना है। ये पुरस्कार जल के महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जल के सर्वोत्तम उपयोग के प्रयासों को अपनाने के लिये प्रेरित करते हैं। यह पहल सभी नागरिकों और संगठनों को जल संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन गतिविधियों में एक मजबूत साझेदारी और जन सहभागिता को और सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है।
जल संचय जन भागीदारी पहल में भी अग्रणी मप्र
जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार : कैच द रेन के अंतर्गत साउथ जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ जिले को तथा श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुना को, ज़िलों में श्रेणी तीन में दूसरी रैंक में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है।
इस पहल के अंतर्गत राज्यों को पाँच ज़ोन में बाँटा गया है। जिलों को न्यूनतम 10,000 कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण एवं संचयन संरचनाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के जिलों के लिए यह लक्ष्य 3,000 संरचनाएँ है, जबकि देशभर के नगर निगमों के लिए यह संख्या 10,000 निर्धारित की गई है। इन संरचनाओं में वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) के अलावा झीलों, तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन भी शामिल है।
शहरी जल संरक्षण प्रयासों को सशक्त करने के लिए, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जल शक्ति मंत्रालय के साथ साझेदारी की है। नगरीय निकायों को कम-से-कम 2,000 पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें तीन सर्वश्रेष्ठ राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम, एक नगरीय स्थानीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय/विभाग, दो उद्योग, तीन गैर-सरकारी संगठन, दो परोपकारी व्यक्ति और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।
भगवान बिरसा मुंडा राष्ट्र भक्ति के प्रखर पुंज : राज्यपाल पटेल
18 Nov, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय आन-बान और शान के प्रतीक है। वे जनजातीय अस्मिता और राष्ट्र भक्ति के प्रखर पुंज थे। उन्होंने मात्र 25 वर्ष की अवस्था में जनजातीय समाज के अधिकारों के लिए ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लिया। अपने संघर्ष और बलिदान से दुनिया की सर्वशक्तिशाली ताकत को झुकने पर मजबूर कर दिया। महापुरुष के रूप में इतिहास में अमर हो गए। राज्यपाल पटेल मंगलवार को सतना जिले के मझगवाँ विकासखंड के ग्राम बांका में भगवान बिरसा मुंडा प्रतिमा अनावरण समारोह और जनजातीय विकास सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजाति समाज के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए हमारे जननायकों ने जो महान कार्य किए हैं। हमें उनसे प्रेरणा लेकर समाज को आगे बढ़ाने के प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार की जनजाति कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनमन योजना के तहत केंद्र सरकार ने 24 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसी प्रकार धरती आबी ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 80 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजाति क्षेत्रों में आदि कर्मयोगी योजना के माध्यम से भी जनजाति कल्याण के विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जनजाति समुदाय की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। जनजातीय क्षेत्रों में अनुवांशिक बीमारी सिकल सेल एनीमिया की जांच और उपचार के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। अब तक प्रदेश में एक करोड़ 25 लाख व्यक्तियों की सिकल सेल जांच और एक करोड़ डिजिटल कार्ड वितरित किए गए हैं।
केंद्रीय जनजाति राज्यमंत्री दुर्गादास उईके ने कहा कि देश में भगवान बिरसा मुंडा की 150 वी जयंती को उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। बिरसा मुंडा स्वाभिमान, सांस्कृतिक एकता और गौरव के प्रतीक है। प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण और जनजाति विकास सम्मेलन स्थानीय जनजाति समुदाय के सहयोग से किया गया है।
राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रतिमा स्थल पर पौधारोपण किया। भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने जनजाति नायकों और गौरव पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, दीनदयाल शोध संस्थान के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पूर्व सीएम का बयान- किसानों के हित में सही फैसला, एमपी में कानून हुआ वापस
18 Nov, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्यप्रदेश | Uma bharti मध्यप्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए स्थायी रूप से जमीन लेने के लिए लाए गए लैंड पुलिंग एक्ट को सरकार ने वापस ले लिया है। सोमवार को देर रात किसान संघ से मीटिंग के बाद सीएम मोहन यादव ने इसका ऐलान किया। जमीनों के स्थायी अधिग्रहण के एक्ट को राज्य सरकार द्वारा वापस लेने के फैसले को भारतीय किसान संघ ने किसानों की बड़ी जीत बताया है। इधर कांग्रेस ने सरकार के इस निर्णय पर भी सवाल उठाए हैं। तराना विधायक महेश परमार और उज्जैन कांग्रेस शहर अध्यक्ष मुकेश भाटी ने भोपाल में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूछा कि लैंड पुलिंग एक्ट केवल उज्जैन के लिए वापस लिया है कि प्रदेशभर में इसे वापस लिया गया है! इस बीच वरिष्ठ बीजेपी नेत्री और राज्य की पूर्व सीएम उमा भारती ने भी लैंड पुलिंग एक्ट को वापस लेने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा है कि सरकार ने लोकलाज की मर्यादा का सम्मान रखा।
पूर्व सीएम उमा भारती प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंची। अर्से बाद उन्हें यहां देखकर कार्यकर्ताओं ने आश्चर्यमिश्रित उत्साह जाहिर किया। उमा भारती ने प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। उनसे अपने गौ पालन एवं गौ संवर्धन अभियान के लिए सहयोग मांगा।
बीजेपी नेत्री उमा भारती ने उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए जमीन लेने के लैंड पुलिंग एक्ट को वापस लेने पर भी बयान दिया। उन्होंने इसे किसानों के हित में लिया फैसला करार दिया। पूर्व सीएम उमा भारती ने कहा कि राज्य सरकार ने लोकलाज की मर्यादा का सम्मान रखा। इसके लिए उन्होंने सीएम मोहन यादव का सम्मान करने की भी बात कही।
इससे पहले उमा भारती सीएम मोहन यादव से भी मिल चुकी हैं। उन्होंने सीएम से गौ पालन एवं गौ संवर्धन के लिए नीतियां लागू करने की मांग की। मुलाकात के संबंध में उमा भारती ने मंगलवार को अपने एक्स हेंडल पर जानकारी दी। उन्होंने लिखा-
माता बेटी बाई सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा विराट गौ संवर्धन सभा में किसानों एवं गौ भक्तों के द्वारा पारित प्रस्तावों का ज्ञापन मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी को सौंपा, साथ में कार्यक्रम के संयोजक श्री अशोक त्रिपाठी जी भी शामिल रहे। मुझे मोहन यादव जी पर विश्वास है कि गौ पालन एवं गौ संवर्धन संबंधी यह मांगे सरकारी नीतियों में परिवर्तित होकर लागू हो जाएंगी।
प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में संशोधन की स्वीकृति
18 Nov, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में सिंचाई के लिये सोलर पम्प स्थापना की योजना में संशोधन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। संशोधन अनुसार कृषकों को स्वीकृत सोलर पम्प स्थापना क्षमता से एक क्षमता अधिक तक का विकल्प प्रदाय किया जायेगा। अब 3 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 5 एच.पी. और 5 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 7.5 एच.पी. का सोलर पंप प्रदाय करने का विकल्प दिया जाएगा।
योजना के प्रथम चरण में अस्थायी विद्युत कनेक्शन संयोजन वाले किसानों अथवा अविद्युतीकृत किसानों को सोलर पम्प का लाभ दिया जाएगा। योजना अनुसार 7.5 एचपी क्षमता तक का सोलर पम्प पम्प लगाने के लिए अस्थाई विद्युत कनेक्शन धारी कृषक का अंश 10% रहेगा। शासन द्वारा 90% की सब्सिडी दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की कुसुम-ब योजना को प्रदेश में "प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना" नाम से 24 जनवरी 2025 से लागू किया गया है। इसका क्रियान्वयन राज्य में मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। इस निर्णय से सोलर पंप की स्थापना से विद्युत पंपों को विद्युत प्रदाय के लिए राज्य सरकार पर अनुदान के भार को सीमित किया जा सकेगा एवं विद्युत वितरण कम्पनियों की वितरण हानियों को कम किया जा सकेगा।
मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत गैर संस्थागत सेवा योजना संचालित करने की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत गैर संस्थागत सेवा योजना यथा स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर, आफ्टर केयर को आगामी 5 वर्षों तक प्रदेश के समस्त जिलों में संचालित करने की स्वीकृति दी गयी है। योजना के तहत पात्र बच्चे को 4 हजार रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जायगी। इसके साथ ही 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर बाल देखभाल संस्थान छोड़ने वाले बच्चों को ऑफटर केयर के माध्यम से रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जायेगा। योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्त माता के बच्चे, अनाथ एवं विस्तारित परिवार के साथ निवासरत बच्चे, असाध्य बीमारी से पीड़ित माता-पिता के बच्चे, बच्चे की शारीरिक और आर्थिक रूप से देखभाल करने में असमर्थ माता पिता के बच्चे, किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार देख रेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे (बेघर, प्राकृतिक आपदा से पीड़ित, बाल श्रमिक, बाल वेश्यावृति के शिकार, एड्स पीड़ित, बाल भिक्षुक, सड़क पर रहने वाले, घर से भागे, निर्योग्यत वाले, लापता, शोषण और दुर्व्यवहार के शिकार श्रेणी के बच्चे) लाभान्वित होंगे।
मिशन वात्सल्य योजना क्रियान्वयन के लिए कुल 1,022 करोड़ 40 लाख रुपये का व्यय होगा। इसमें राज्यांश 408 करोड़ 96 लाख रुपये और केंद्रांश 613 करोड़ 44 लाख रुपये होगा। इससे प्रदेश के 33 हजार 346 बच्चे लाभान्वित होंगे। यदि योजना अन्तर्गत निर्धारित स्वीकृत अवधि में भारत सरकार द्वारा योजना मापदण्डों में कोई परिवर्तन किए जाते है तो उक्त अवधि में परिवर्तित मापदण्ड प्रभावशील होंगे।
आयुष चिकित्सालयों में 373 नवीन पदों की स्वीकृतिे
मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के 12 जिलों भोपाल, इन्दौर, नरसिंहपुर, मण्डलेश्वर (खरगौन), बालाघाट, गुना, भिण्ड, सीहोर, अमरकंटक (अनूपपुर), पन्ना, श्योपुर एवं शुजालपुर (शाजापुर) में 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सलयों एवं बड़वानी जिले में 30 बिस्तरीय चिकित्सालय के संचालन के लिए 373 पद एवं 806 मानव संसाधन सेवाएं ऑन कॉल की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत नवीन पदों में प्रथम श्रेणी के 52 पद, द्वितीय श्रेणी के 91 और तृतीय श्रेणी के 230 पद शामिल है। नियमित पदों पर वार्षिक वित्तीय भार 25 करोड़ 57 लाख रूपये आयेगा। इसके साथ ही स्वीकृत मानव संसाधन सेवाओं मे द्वितीय श्रेणी के 91, तृतीय श्रेणी के 117 और चतुर्थ श्रेणी के 598 पद शामिल है। मानव सेवाओं का प्रबंधन भारत सरकार के राष्ट्रीय आयुष मिशन से किया जायेगा।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् में भर्ती के लिए सेवा शर्ते एवं नियम अनुमोदित
मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्के वैज्ञानिकों/अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम 2025 का अनुमोदन प्रदान किया गया।विज्ञान, तकनीकी, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में वर्तमान समय में हो रहे अनुप्रयोगों के दृष्टिगत् प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् की गतिविधियों में सुदूर संवेदन उपयोग केन्द्र, ग्रामीण प्रौद्योगिकी उपयोग केन्द्र, मौसम परिवर्तन अनुसंधान केन्द्र, अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान केन्द्र एवं उन्नत शोध एवं उपकरण सुविधा केन्द्र कार्यरत् है, के लिए उत्कृष्ट वैज्ञानिकों की आवश्यकता बनी रहती है।
निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में गैर वैज्ञानिक संवर्ग के लिए, सेवा संरचना एवं भर्ती नियमों को अंगीकृत किया गया है। वैज्ञानिक संवर्ग के लिए चूंकि केडर का प्रावधान नहीं होने एवं वैज्ञानिक संवर्ग के पदों को भविष्य में होने वाले वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधानों के हुए मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में वैज्ञानिक संवर्ग के केडर का उन्नयन किया जायेगा। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के लिए योग्य वैज्ञानिकों की सेवाएं प्रदेश को प्राप्त हो सकेगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 11 मई, 2015 द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में नवीन पदों की भर्ती पर लगाई गई रोक हटाये जाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्र में वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् नोडल एजेन्सी के रूप में कार्यरत है।
मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को पुनरीक्षित (सातवें) वेतनमान का वास्तविक लाभ प्रदान किये जाने की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को पुनरीक्षित वेतनमान (सातवां वेतनमान) का वास्तविक लाभ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के संवर्ग के समान 1 जनवरी 2016 से प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है। शासन के समस्त विभागों में पुनरीक्षित वेतनमान (सातवां वेतनमान) का वास्तविक लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रदान किया गया है। उसी अनुक्रम में मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को भी लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया है। लाभ दिये जाने पर एरियर राशि का अनुमानित वित्तीय भार 93 लाख रुपये आएगा।
प्रदेश में क्रियान्वित सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड योजना में संशोधन किये जाने की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में क्रियान्वित सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड (एसआईबी) योजना में संशोधन किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार आयुक्त, संस्थागत वित्त को राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति का सदस्य सचिव के रूप में नामित किया गया है। योजनान्तर्गत 100 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान सामाजिक न्याय विभाग के स्थान पर वित्त विभाग के बीसीओ, आयुक्त संस्थागत वित्त में किया गया है। साथ ही तकनीकी एजेंसी के चयन के लिए परियोजना क्रियान्वयन विभाग को अधिकृत किया गया है। योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक विभाग वित्त विभाग को बनाया गया है
नव गठित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आगर-मालवा के लिए नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा लिए गए निर्णय अनुसार नवगठित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगर-मालवा के लिये कुल 9 नवीन पदों का सृजन किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी। इसमें सचिव का 1 पद, जिला विधिक सहायता अधिकारी का 1 पद, सहायक ग्रेड-2 का 1 पद, सहायक ग्रेड-3 के 2 पद, आदेश तामीलकर्ता के 2 पद और भृत्य के 2 पद स्वीकृत किये गए है। इन पदों पर वार्षिक वित्तीय भार 59 लाख 42 हजार रूपये आयेगा। मंत्रि-परिषद की बैठक वंदे मातरम गायन के साथ शुरू हुई।
पिपरिया के आयुष घुरका की पहल “ट्यूटर-ओलॉजी” ने बदली ऑनलाइन शिक्षा की दिशा, अब 5+ देशों के छात्र कर रहे हैं भारतीय शिक्षकों से अध्ययन
18 Nov, 2025 07:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पिपरिया। कोविड के बाद पूरी दुनिया में ऑनलाइन शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा। इसी बदलाव ने कई युवाओं को शिक्षा-तकनीक (EdTech) में नए प्रयोग करने का मौका दिया। मध्यप्रदेश के पिपरिया शहर से निकलकर आयुष घुरका ने भी इसी परिवर्तन को समझा और 2022 में “Tutor-ology (ट्यूटर-ओलॉजी)” नामक एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की, जो आज अमेरिका, यूके, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे देशों के छात्रों को भारतीय शिक्षकों से लाइव, एक-से-एक ऑनलाइन सत्र उपलब्ध करवा रहा है।
इंजीनियरिंग छात्र से शिक्षा-तकनीक उद्यमी तक का सफर
आयुष ने अपनी पढ़ाई एसजीएसआईटीएस इंदौर से इंजीनियरिंग में की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने महसूस किया कि कई बच्चों को विषयों की मूलभूत समझ में सहायता की आवश्यकता है। यहीं से उन्होंने पढ़ाने की शुरुआत की—पहले ऑफलाइन ट्यूशन, फिर ऑनलाइन सत्र और शैक्षणिक वीडियो। उनके यूट्यूब पर अपलोड किए गए निःशुल्क गणितीय वीडियो हजारों छात्रों तक पहुँचे और यह अनुभव आगे चलकर ट्यूटर-ओलॉजी की नींव बना।
विदेशी अभिभावकों में भारतीय शिक्षकों की बढ़ती माँग
वैश्विक स्तर पर भारतीय शिक्षकों की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है। कारण स्पष्ट हैं:
* विषय की गहराई पर फोकस
* कंसेप्ट को सरल भाषा में समझाने की क्षमता
* धैर्यपूर्ण और सुधारमुखी दृष्टिकोण
* तार्किक और चरणबद्ध शिक्षण
* व्यक्तिगत ध्यान
इन्हीं खूबियों की वजह से कई देशों में माता-पिता अपने बच्चों के लिए भारतीय शिक्षकों को पसंद करते हैं। ट्यूटर-ओलॉजी इस आवश्यकता को संरचित तरीके से पूरा करने का प्रयास है, जहाँ छात्र अपनी सीखने की गति के अनुसार सत्र ले सकते हैं।
ऑनलाइन शिक्षा में संरचित 1-on-1 मॉडल की बढ़ती प्रासंगिकता
कोविड के बाद ऑनलाइन ट्यूटोरिंग की वैश्विक डिमांड में वृद्धि हुई है। कई शोधों में पाया गया है कि व्यक्तिगत सत्र (1-on-1) सीखने की क्षमता और समझ बढ़ाने में प्रभावी साबित होते हैं। ट्यूटर-ओलॉजी का मॉडल इसी आवश्यकतानुसार तैयार किया गया—जहाँ छात्र लाइव इंटरैक्शन, स्क्रीन-शेयरिंग और डिजिटल टूल्स की मदद से पढ़ाई करते हैं।
शिक्षकों को रोज़गार और स्थिरता देने वाली पहल
आज इस प्लेटफ़ॉर्म से
* 40+ भारतीय शिक्षक
* 13 सदस्यीय संचालन टीम
* 1,000+ अंतरराष्ट्रीय छात्र
जुड़े हुए हैं। अधिकांश शिक्षक घर से पढ़ाते हैं, जिससे उन्हें काम-जीवन संतुलन, स्थायी आय और आत्मनिर्भरता मिलती है।
दिलचस्प बात यह है कि इस पहल में कई छोटे शहरों और कस्बों के शिक्षक शामिल हैं, जो अब वैश्विक छात्रों से सीधे जुड़ पा रहे हैं।
बिना निवेश के शुरू हुआ बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप
ट्यूटर-ओलॉजी पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड है न कोई निवेशक, न कोई फंडिंग। सीमित संसाधनों और स्थानीय टीम के साथ शुरू हुई यह यात्रा आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों को भारतीय शिक्षण शैली से जोड़ रही है।
आयुष का कहना है,
“मेरे लिए यह मंच एक सीखने-सिखाने की संस्कृति बनाने का प्रयास है, जहाँ शिक्षक और छात्र दोनों अपनी गति से आगे बढ़ सकें।”
युवाओं को मार्गदर्शन देने में सक्रिय भूमिका
आयुष को अक्सर एसजीएसआईटीएस इंदौर और कई अन्य संस्थानों में छात्रों को कैरियर मार्गदर्शन, स्टार्टअप अनुभव, और ऑनलाइन शिक्षा की बदलती ज़रूरतों के विषय पर बोलने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इससे उन्हें जमीनी चुनौतियों और युवाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है।
पिपरिया से वैश्विक मंच तक — नई दिशा में बढ़ता कदम
आयुष घुरका की कहानी यह दर्शाती है कि आज छोटे शहरों के युवा भी वैश्विक शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में गंभीर योगदान दे रहे हैं।
यह यात्रा सिर्फ एक स्टार्टअप की सफलता नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि “ज्ञान और सोच, किसी शहर की सीमा से बंधे नहीं होते।” पिपरिया से शुरू हुआ यह प्रयास अब दुनिया के कई देशों में छात्रों को भारतीय शिक्षण परंपरा की गहराई और सरलता से जोड़ रहा है।
About Tutor-ology (संदर्भ के लिए)
ट्यूटर-ओलॉजी एक ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म है जो K-12 और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए लाइव 1-on-1 पाठ्यक्रम, लैंग्वेज कक्षाएँ और कौशल-आधारित गतिविधियाँ उपलब्ध कराता है।
प्लेटफ़ॉर्म पर प्रमाणित भारतीय शिक्षक वैश्विक छात्रों को विभिन्न विषयों में व्यक्तिगत सत्र के माध्यम से मार्गदर्शन करते हैं।
वेबसाइट: https://www.tutor-ology.com
अनाथ बच्चों को चार हजार रुपए, 12 जिलों में खुलेंगे आयुष अस्पताल; MP कैबिनेट में आज हुए बड़े फैसले
18 Nov, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में किसानों, बच्चों, स्वास्थ्य सेवाओं (Farmers, Children, Health Services) और वैज्ञानिक शोध जैसे कई क्षेत्रों को लेकर बड़े फैसले लिए गए। बैठक के सभी निर्णय लोगों के जीवन से सीधे जुड़े हुए हैं और आने वाले समय में इनके व्यापक प्रभाव देखने की उम्मीद है। बैठक में प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में संशोधन को मंजूरी दी गई। अब किसान अपने अस्थायी बिजली कनेक्शन की क्षमता से एक स्टेप अधिक क्षमता वाला सोलर पंप लगवा सकेंगे। यानी 3 एचपी बिजली कनेक्शन वाले किसानों को 5 एचपी सोलर पंप और 5 एचपी बिजली कनेक्शन वालों को 7.5 एचपी सोलर पंप का विकल्प दिया जाएगा। योजना के तहत किसानों को सोलर पंप पर 90% सब्सिडी मिलेगी, जबकि किसान को सिर्फ 10% राशि देनी होगी। इससे सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भरता घटेगी और किसानों को स्थायी ऊर्जा का फायदा मिलेगा। सोलर पंप लगने से सरकार पर बिजली सब्सिडी का भार भी कम होगा और वितरण कंपनियों की हानियां घटेंगी।
मिशन वात्सल्य योजना के तहत गैर-संस्थागत सेवा योजना को अगले 5 वर्षों तक जारी रखने की सहमति दी गई। इस योजना में उन बच्चों को मदद मिलेगी जिनकी देखभाल माता-पिता किसी कारणवश नहीं कर पा रहे हैं। पात्र बच्चों को हर महीने 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। 18 वर्ष के बाद संस्थानों से बाहर होने वाले बच्चों को आफ्टर केयर के माध्यम से रोजगार प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इस योजना से पूरे प्रदेश में 33,346 बच्चों को सीधा लाभ होगा। इसके लिए कुल 1,022 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च होगी। केंद्र और राज्य दोनों इसका भार उठाएंगे।
प्रदेश के 12 जिलों भोपाल, इन्दौर, नरसिंहपुर, मण्डलेश्वर (खरगौन), बालाघाट, गुना, भिण्ड, सीहोर, अमरकंटक (अनूपपुर), पन्ना, श्योपुर एवं शुजालपुर (शाजापुर) में 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सलयों एवं बड़वानी जिले में 30 बिस्तरीय चिकित्सालय खोला जाएगा। इसके संचालन के लिए 373 पद एवं 806 मानव संसाधन सेवाएं ऑन कॉल की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत नवीन पदों में प्रथम श्रेणी के 52 पद, द्वितीय श्रेणी के 91 और तृतीय श्रेणी के 230 पद शामिल है। नियमित पदों पर वार्षिक वित्तीय भार 25 करोड़ 57 लाख रूपये आयेगा। इसके साथ ही स्वीकृत मानव संसाधन सेवाओं मे द्वितीय श्रेणी के 91, तृतीय श्रेणी के 117 और चतुर्थ श्रेणी के 598 पद शामिल है। मानव सेवाओं का प्रबंधन भारत सरकार के राष्ट्रीय आयुष मिशन से किया जायेगा।
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में भर्ती के सेवा नियमों को मंजूरी दे दी। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 11 मई, 2015 द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में नवीन पदों की भर्ती पर लगाई गई रोक हटाये जाने का निर्णय लिया गया है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए योग्य विशेषज्ञों की नियुक्ति संभव होगी और शोध तथा नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। परिषद अब प्रदेश में विज्ञान व तकनीक क्षेत्र की मुख्य नोडल एजेंसी की भूमिका और प्रभावी ढंग से निभा सकेगी।
मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को 1 जनवरी 2016 से सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ देने का फैसला लिया गया। इससे कर्मचारियों में लंबे समय से चल रही वेतन विसंगति दूर होगी। शासन के समस्त विभागों में पुनरीक्षित वेतनमान (सातवां वेतनमान) का वास्तविक लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रदान किया गया है। उसी अनुक्रम में मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को भी लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया है। लाभ दिये जाने पर एरियर राशि का अनुमानित वित्तीय भार 93 लाख रुपये आएगा।
प्रदेश में क्रियान्वित सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड योजना में संशोधन किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। आयुक्त, संस्थागत वित्त को राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट, पहले जहां सामाजिक न्याय विभाग में रखा गया था, अब उसे वित्त विभाग आयुक्त संस्थागत वित्त में स्थानांतरित कर दिया गया है। तकनीकी एजेंसी के चयन का अधिकार अब परियोजना क्रियान्वयन विभाग को दिया गया है। योजना को आगे बढ़ाने और लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी अब वित्त विभाग की होगी।
जहरीली शराब कांड : 5 साल बाद मिला न्याय, 14 दोषियों को 10-10 साल की सजा और 17.73 लाख का जुर्माना!
18 Nov, 2025 04:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
MP News: मुरैना जिले में जनवरी 2021 में हुई जहरीली शराब त्रासदी के मामले में स्थानीय कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 14 आरोपियों को दोषी करार दिया है. अदालत ने प्रत्येक को दस साल की सज़ा और कुल 17.73 लाख रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया है. जानकारी के मुताबिक इस मामले में पुलिस ने 15 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है.
घटना के समय 28 लोगों की मौत की खबरें आई थीं, लेकिन केस डायरी में 24 मृतकों का उल्लेख किया गया. सरकारी पक्ष के सहायक जिला अभियोजन अधिकारी प्रवीण सिंह सिकरवार के अनुसार, 11 दोषियों पर 1.32 लाख रुपये और अन्य तीन पर 1.07 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
छैरा मनपुर गांव में हुआ था हादसा
यह हादसा छैरा मनपुर गांव में तब हुआ जब ग्रामीणों ने सस्ती देसी शराब का सेवन किया, जिसमें मेथिल अल्कोहल मिला हुआ था. तीन दिनों के भीतर 24 लोगों की जान चली गई और कई लोगों की आंखों की रोशनी तक चली गई थी. इस दर्दनाक प्रकरण के पांच साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया.
कोर्ट ने सुनाया दस साल की सजा और जुर्माने का फैसला
अपर सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत रघुवंशी ने मुकेश, राहुल, गिरिराज उर्फ गजराज, प्रदीप राठौर, ब्रजमोहन उर्फ कल्ला, सुरेंद्र, अंतराम, दिनेश, कार्तार, मनजीत और सतीश को 1.32 लाख रुपये के जुर्माने के साथ दस साल की कैद की सज़ा दी है. वहीं मनमोहन, खुशी लाल और रामवीर को दस साल की कैद और 1.07 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
शराब में मिली थी मेथिल अल्कोहल
फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम रहे. आरोपियों को पुलिस की निगरानी में अम्बाह कोर्ट ले जाया गया. इंदौर और ग्वालियर में जांची गई विसरा रिपोर्ट में शराब में मेथिल अल्कोहल की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिसे कोर्ट ने महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया. इस घटना के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की थी और भारी मात्रा में अवैध शराब नष्ट की गई थी. पुलिस ने आरोपियों पर धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी कई धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया था. त्रासदी के बाद तत्कालीन कलेक्टर अनुराग वर्मा और एसपी अनुराग सुजानिया को भी हटाया गया था.
एमपी में होमस्टे की बढ़ती लोकप्रियता: क्यों पर्यटक हो रहे हैं आकर्षित?"
18 Nov, 2025 03:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
MP Tourism: देश के दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश को अपनी प्राकृतिक सुंदरता, वाइल्ड लाइफ और खासतौर पर धार्मिक टूरिज्म के लिए एक नई और खास पहचान मिलती जा रही है. ये पहचान है इको फ्रेंडली टूरिज्म के ट्रेंड में आए ‘होमस्टे’. होमस्टे टूरिज्म का एक ऐसा नया मॉडल है जिसने लग्जरी होटल्स तकी की डिमांड कम कर दी है.
दरअसल, आज के समय में यूथ से लेकर फैमिली तक को ग्रामीण अंचल और ग्रामीण परिवेश का अहसास खूब पसंद आ रहा है. ऐसे में एमपी में वाइल्ड लाइफ से लेकर धार्मिक टूरिज्म तक हर एक क्षेत्र में पर्यटक होमस्टे में से काफी अट्रैक्ट हो रहे है. जिस कारण घूमने के बाद भी पर्यटक इस जगहों में दो-चार दिन एक्स्ट्रा बिता रहे हैं.
सरकार दे रही हाेमस्टे को बढ़ावा
बता दें कि, मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में प्रदेश भर में 241 नए होम स्टे लॉन्च किए हैं. यही कारण है कि प्रदेश के 37 जिलों के 100 से अधिक गांव एमपी टूरिज्म मैप पर तेजी से उभर रहे हैं. यही कारण है जाे ओरछा के शांत घाट हों, अमरकंटक की धुंधली सुबह, पचमढ़ी की पहाड़ियां या कान्हा, पेंच, पन्ना, बांधवगढ़ के जंगल, हर जगह अब होमस्टे तैयार हैं. एमपी सरकार का लक्ष्य है कि 2025-26 तक प्रदेश में 1000 से अधिक होमस्टे तैयार हों. वहीं जिनमें से कई को हेलिकॉप्टर और डिजिटल बुकिंग से जोड़े जाने की तैयारी भी है.
इतना ही नहीं कई ग्रामीणों ने भी अपने ही घरों में कम वक्त में छोटे-छोटे लेकिन खूबसूरत ठहराव तैयार कर लिए हैं. खास बात ये है कि यहां न तो रिसेप्शन की औपचारिकता है, न ही होटल वाली दूरी. यहां हर एक मेहमान ‘अतिथि देवो-भव:’ के भाव के साथ उनका स्वागत होता है.
टूरिस्ट को क्यों भा रहे होमस्टे
प्रकृति की गोद और ग्रामीण अंचलों में बसे ये होमस्टे पर्यटकों को पसंद आने के पांच मुख्य कारण है.
शांति की खोज में आए पर्यटकों को यहां होटल जैसी लग्जरी सुविधा के साथ घर जैसी गर्माहट मिलती है. यहां का देसी व्यंजन, लोकगीत, मिट्टी और भूसे से बने घर पर्यटकों को खूब पसंद कर रहे हैं.
कम दाम में भारी अनुभव लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है. जहां होटल में 5 से 7 हजार का खर्च आता है. वहीं होमस्टे में 1500-2500 में वैसी ही सुविधाओं के साथ-साथ लोकल टूर, होस्ट की गाइडेंस भी बोनस के रूप में मिलती है.
इन होमस्टे से प्रदेश की लोकल इकॉनमी को भी सीधा फायदा मिल रहा है. किसी ग्रामीण के होमस्टे में खर्च किए गए पैसा सीधे उसे और उसके परिवार को लाभ पहुंचाते है.
एमपी टूरिज्म बोर्ड ने होमस्टे को ‘Responsible Tourism Mission’ से जोड़ा है। यहां प्लास्टिक कम, स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल ज्यादा यानी ये होमस्टे हर टूरिस्ट की इको फ्रेंडली यात्रा का जरिया बन रहे हैं.
ऐसे बुक करें होमस्टे
अगर आप भी एमपी सरकार की इस योजना का लाभ लेकर कुछ दिन सुकून भरे पल बिताना चाहते है तो आप सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर बुकिंग कर सकते है. इसे लिए MP Tourism Homestay Scheme की वेबसाइट https://mphomestay.mponline.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें.
यहां आपको होमस्टे की जिले के हिसाब से लिस्ट देखने को मिलेगी. जिसमें आपको होमस्टे का नाम, दाम, उपलब्ध सुविधाएं, होस्ट की प्रोफाइल और मोबाइल नंबर भी दिया गया है. आप फोन और वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से बुकिंग कर सकते हैं.
मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला...बच्चों को 4000 रुपये महीना, 12 आयुष अस्पतालों की स्थापना को मंजूरी!
18 Nov, 2025 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
MP Cabinet Meeting: सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग हुई. इस मीटिंग में कई प्रस्तावों पर मुहर लगी हैं. मंत्रिपरिषद की बैठक में मिशन वात्सल्य के तहत राज्य सरकार अब बच्चों को 4 हजार रुपये महीने देगी. मीटिंग लिए निर्णयों के बारे में जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि वात्सल्य योजना के तहत विधवा और तलाकशुदा महिला के 33 बच्चे हैं. इस राशि में 60 फीसदी हिस्सा केंद्र का रहेगा, वहीं 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य का होगा. इसके लिए एक हजार करोड़ की लागत आएगी.
मध्य प्रदेश में जल दर्पण पोर्टल का शुभारंभ...घर-घर नल-जल सुविधा की ऑनलाइन निगरानी शुरू!
18 Nov, 2025 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Jal Jeevan Mission: मध्य प्रदेश में घर-घर नल से जल पहुंचाने को लेकर चल रहे जल जीवन मिशन को अब डिजिटल निगरानी से जोड़ा गया है. राज्य सरकार ने इसके लिए ‘जल दर्पण’ नाम का पोर्टल शुरू किया है, जिसके माध्यम से हर गांव की नल-जल योजना की वास्तविक स्थिति रोजाना ऑनलाइन दर्ज होगी. लंबे समय से ग्रामीण इलाकों में यह शिकायत सामने आ रही थी कि योजनाएं बनने के बाद भी कई जगहों पर जलापूर्ति नियमित नहीं हो रही है, जबकि कई सवाल विधानसभा में भी उठे हैं.
फील्ड स्टाफ से ली जाएगी जानकारी
शिकायतों को ध्यान में रखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने फील्ड स्टाफ से रोजाना यह जानकारी लेने का निर्णय किया है कि योजना चालू है या बंद, पानी की सप्लाई सुचारू है या नहीं, और पाइपलाइन में कोई तकनीकी खराबी तो नहीं. इस डेटा पर वरिष्ठ अधिकारी सीधे नजर रखेंगे ताकि झूठी जानकारी देने की गुंजाइश न रहे.
प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत नल-जल योजना स्वीकृत
प्रदेश में अब तक जल जीवन मिशन के तहत 27,990 एकल नल-जल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 15,947 पूरी हो चुकी हैं और 12,043 पर काम जारी है. आकलन में हुई त्रुटियों के चलते 8,358 परियोजनाओं की लागत में 2,813 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि सामने आई, जिसे केंद्र द्वारा वहन करने से इनकार कर दिया गया. अब यह भार राज्य सरकार ने उठाया है और दोषी इंजीनियरों को नोटिस जारी किए गए हैं.
जल दर्पण पोर्टल से रखी जाएगी योजना पर नजर
सरकार का जोर इस बात पर है कि पंचायतों को सौंपी गई योजनाएं ठीक से संचालित हों और लोगों तक नियमित जलापूर्ति पहुंचे. जल दर्पण पोर्टल के जरिए 28 हजार गांवों से प्रतिदिन फीडबैक लिया जाएगा. यदि किसी जगह सप्लाई बंद पाई जाती है तो कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा. जैसे बिजली कटना, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होना या अन्य तकनीकी वजहें. इन सूचनाओं के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई भी योजना के अंतर्गत होगी.
विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर घर तक नल का जल पहुंचाना है. कई बार शिकायतें मिलने के बाद अब संचालन, रखरखाव और निगरानी को मजबूत बनाया गया है. नए पोर्टल से दैनिक स्थिति स्पष्ट होगी और जहां भी समस्या मिलेगी, वहां तुरंत समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे.
भावांतर योजना में बदलाव: सोयाबीन 4255 रुपए प्रति क्विंटल
18 Nov, 2025 12:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 4255 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। सोयाबीन के मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए तथा 17 नवंबर को 4236 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी। भावान्तर का मॉडल रेट बढऩे का आशय यह है कि मंडी में सोयाबीन का भाव बढ़ रहा है। नमी कम होने से सोयाबीन की गुणवत्ता ठीक होने से रेट का बढऩा स्वाभाविक है। किसानों को मंडी में अच्छा भाव मिल रहा है। वैसे भी मॉडल भाव पिछले चौदह दिन के सोयाबीन के बाजार भाव का भारित औसत है। एमएसपी से ऑक्शन भाव / मॉडल भाव के अंतर की राशि सरकार दे रही है और किसान के नुक़सान की भरपाई कर रही है। प्रदेश में भावांतर योजना के सफल क्रियान्वयन ने किसानों को एमएसपी की राशि मिलने की गारंटी दी है। व्यापारियों को मंडी से व्यापार मिल रहा है, जो उपार्जन की वजह से प्रभावित हो जाता है।
MP में भी SIR का विरोध… कांग्रेस नेता ने लगाई रोक की गुहार, HC ने सरकार और EC से मांगा जवाब
18 Nov, 2025 09:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) के समक्ष एसआईआर (SIR) पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई है। अदालत में आगामी शहरी निकाय चुनाव (Municipal elections) के लिए मतदाता सूची (Voter list) के पुनरीक्षण कार्यक्रम पर रोक लगाने की गुहार एक कांग्रेस नेता ने की है। इस याचिका पर अदालत ने सोमवार को राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और अन्य प्रतिवादियों से संक्षिप्त जवाब मांगा। याचिकाकर्ता के एक वकील ने यह जानकारी दी।
इंदौर में कांग्रेस के निर्वाचन कार्य विभाग के प्रभारी और पूर्व पार्षद दिलीप कौशल के वकील जयेश गुरनानी ने संवाददाताओं को बताया कि उनके मुवक्किल ने शहरी निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम की कथित विसंगतियों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
उन्होंने बताया कि याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग, इंदौर के जिला निर्वाचन अधिकारी और शहर के सभी क्षेत्रों के मतदाता पंजीयन अधिकारियों से संक्षिप्त जवाब मांगा है।
याचिका पर अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 26 नवंबर की तारीख तय की है। गुरनानी ने बताया कि कांग्रेस नेता की याचिका में मध्य प्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम 1994 के उप नियमों को ‘त्रुटिपूर्ण’ करार दिया गया है।
याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान जोड़े और घटाए जाने वाले मतदाताओं के आवेदनों को सार्वजनिक नहीं किए जाने, अपात्र कर्मचारियों को बूथस्तरीय अधिकारी (बीएलओ) बनाए जाने और इंदौर नगर निगम क्षेत्र में कथित भवन क्रमांक ‘शून्य’ पर बड़ी तादाद में मतदाताओं के नाम दर्ज होने के आरोप शामिल हैं।
गुरनानी ने बताया कि याचिका में उच्च न्यायालय से गुहार लगायी गई है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम पर रोक लगाई जाए और प्रतिवादियों को निर्देश दिए जाएं कि वे याचिका का निपटारा होने तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन न करें।
MP : सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला, उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए लैंड पुलिंग निरस्त, सरकार ने वापस खींचे कदम
18 Nov, 2025 08:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल/उज्जैन. मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) की सरकार (government) ने उज्जैन सिंहस्थ (Ujjain Simhastha) 2028 के संबंध में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने किसानों (farmers) के भारी विरोध के चलते सिंहस्थ के लिए लाई गई लैंड पूलिंग (land pooling) योजना को निरस्त कर दिया है। यह फैसला मंगलवार को भारतीय किसान संघ के प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले लिया गया है।
CM मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर भारतीय किसान संघ के बैनर तले आए किसानों से मुलाकात की। चर्चा के बाद सिंहस्थ लैंड पूलिंग को निरस्त करने का निर्णय लिया गया. मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन विकास विभाग और जिला प्रशासन को आदेश जारी करने के निर्देश दिए.
क्या था सिंहस्थ लैंड पूलिंग?
उज्जैन में साल 2028 में सिंहस्थ कुंभ होना है. इसके लिए उज्जैन में 2 हजार 376 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था और स्थायी निर्माण होना था. लेकिन किसान संगठन स्थायी निर्माण का विरोध कर रहे थे. उज्जैन विकास प्राधिकरण इसके लिए किसानों की कृषि योग्य जमीन को अधिग्रहित करती जहां 60 फीट, 80 फ़ीट और 200 फीट तक की स्थायी रोड बनती जो सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन में बड़ी भूमिका अदा करती.
ऐसा पहली बार हो रहा था कि जब सिंहस्थ भूमि पर स्थायी सड़कें, बिजली के पोल और अन्य निर्माण कार्य किए जाते, जबकि अभी तक सिंहस्थ में सिर्फ 2 महीनों के लिए अस्थायी निर्माण जैसे टैंट, तंबू, अस्थायी शेड और अखाड़े लगते थे.
लैंड पूलिंग के तहत जिस किसान की ज़मीन अधिग्रहित होती उसका 50 फीसदी मालिकाना हक किसान के पास ही रहता. हालांकि, किसान संगठनों ने इसका विरोध किया और मांग की थी कि सिंहस्थ को पहले के ही तरह के स्वरूप में किया जाए और सिंहस्थ भूमि पर किसी भी प्रकार का अस्थायी निर्माण न हो, क्योंकि 12 साल में आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए किसान और ग्रामीण स्वेच्छा से अपनी भूमि सदियों से देते आये हैं तो फिर लैंड पूलिंग क्यों करना?
माना जा रहा है कि मंगलवार को यदि किसान संगठन उज्जैन पहुंचकर प्रदर्शन शुरू करते तो उन्हें वहां से हटाना बेहद मुश्किल हो जाता और बड़ी संख्या में देश भर के किसान संगठन उज्जैन की ओर कूच कर सकते थे लिहाज़ा इसकी भनक लगते ही सरकार ने लैंड पूलिंग पर अपने कदम वापस खींच लिए.
कांग्रेस ने कहा- ये किसानों की जीत
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने खुशी जताते इस फैसले को किसानों की जीत बताया है. कांग्रेस नेता ने X पर लिखा, ”सिंहस्थ लैंड पुलिंग पर किसानों की जीत! उज्जैन के किसानों की जमीन छीनने की कोशिश के खिलाफ जबरदस्त जनविरोध के बाद आखिरकार सरकार को पीछे हटना पड़ा.
सिंघार ने लिखा, हमने शुरुआत से कहा था कि किसानों पर अन्याय करोगे तो जवाब देना पड़ेगा. आज वही हुआ. सरकार को लैंड पुलिंग नीति निरस्त करनी पड़ी. मैंने लगातार किसानों के इस मुद्दे को विधानसभा में भी और जनता के बीच भी उठाया और उनकी आवाज़ को मजबूती देने की कोशिश की. किसानों के हक़ की लड़ाई में हम हमेशा साथ खड़े हैं.”
लैंड पूलिंग एक्ट खत्म, सिंहस्थ 2028 की तैयारी जोरों पर, CM का बड़ा ऐलान!
18 Nov, 2025 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लैंड पूलिंग एक्ट को निरस्त कर दिया है. अब उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट के तहत किसानों की जमीन अधिग्रहित नहीं की जाएगी. किसानों ने इस एक्ट पर विरोध जताया था. इसके बाद राज्य सरकार ने निर्णय लिया है.
सिंहस्थ 2028 के कार्य जारी रहेंगे
दरअसल, मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं. यहां लैंड पूलिंग एक्ट के तहत किसानों की जमीन ली जा रही थी. जिसका किसानों ने विरोध किया था. इसके बाद सोमवार को भोपाल स्थित सीएम हाउस में अहम बैठक हुई. मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि लैंड पूलिंग एक्ट लागू नहीं होगा. इसके साथ ही ये भी निर्णय लिया गया कि मेला क्षेत्र में सीवरेज-नाली और अन्य कार्य जारी रहेंगे. सिंहस्थ के लिए 50 किमी की सड़क का निर्माण कार्य भी जारी रहेगा.
सीएम ने कहा कि साल 2028 में होना वाला सिंहस्थ कुंभ मेला भव्य और दिव्य होगा. साधु-संतों और किसानों की भावना का सम्मान करते हुए काम जारी रहेगा. सीएम हाउस में मीटिंग में भारतीय किसान संघ प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, किसान संघ के सदस्य महेश चौधरी समेत कई सदस्य शामिल हुए.
अब स्थायी निर्माण नहीं होंगे
राज्य सरकार सिंहस्थ 2028 के लिए हरिद्वार की तर्ज पर स्थायी निर्माण करने जा रही थी. जहां पक्की सड़क, सीवरेज, लाइट्स आदि की व्यवस्था होती, लेकिन अब स्थायी निर्माण नहीं किया जाएगा. लैंड पूलिंग एक्ट के तहत किसानों की जमीन ली जाती है और यूज के बाद 50 फीसदी जमीन लौटा दी जाती है. बाकी, 50 फीसदी जमीन पर सरकार निर्माण कार्य करती है . स्थायी निर्माण करके सरकार स्पिरिचुअल सिटी बनाने जा रही थी.
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग ने भेल के साथ 23 हजार करोड़ रूपए का किया अनुबंध
17 Nov, 2025 11:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं को दीर्घकालिक रूप से पूर्ण करने और राज्य में विद्युत उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी लिमिटेड ने 660-660 मेगावाट की दो नई ताप विद्युत इकाइयों की स्थापना के लिए भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल-भेल) के साथ अनुबंध किया गया है। हस्ताक्षरित अनुबंधों का कुल मूल्य 23 हजार 600 करोड़ रूपये है। यह दो नई इकाइयां सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी और अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई में स्थापित होंगी।
दोनों इकाइयां सुपर क्रिटिकल तकनीक से विद्युत उत्पादन करेंगी
सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी व अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई में 660-660 मेगवाट की दोनों इकाइयों में विद्युत उत्पादन जून 2030 से प्रारंभ किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ये दोनों ताप विद्युत इकाइयों अत्याधुनिक, उच्च दक्षता वाली सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित रहेंगी। बीएचईएल (भेल) इन इकाइयों के लिये बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर एवं अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी संरचनाओं की आपूर्ति और निर्माण का कार्य करेगा।
ताप विद्युत उत्पादन क्षमता में 1320 मेगावाट की होगी बढ़ोत्तरी
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृहों की कुल उत्पादन क्षमता वर्तमान में 4570 मेगावाट है। सारणी व चचाई में 660-660 मेगावाट की इकाइयों की स्थापना के बाद ताप विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 5890 मेगावाट हो जाएगी।
सारणी व अमरकंटक की विद्युत क्षमता में होगी बढ़ोत्तरी
सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है। यहां 250-250 की दो इकाइयां कार्यशील हैं। वहीं अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई में 210 मेगावाट की इकाई विद्युत उत्पादन कर रही हैं। नई इकाइयों की स्थापना के पश्चात् सारनी की उत्पादन क्षमता बढ़कर 1160 मेगावाट व चचाई की 870 मेगावाट हो जाएगी।
अनुबंध दोनों परियोजनाओं के लिए अहम पड़ाव
प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस अनुबंध को दोनों परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम पड़ाव बताया तथा बीएचईएल की तकनीकी विशेषज्ञता पर विश्वास व्यक्त किया। परियोजना पूर्ण होने पर MPPGCL की ताप व जल विद्युत की संयुक्त उत्पादन क्षमता बढ़कर 6,812 मेगावाट हो जाएगी। इससे प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक स्थिरता एवं मजबूती प्राप्त होगी।
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