राजनीति
INDIA गठबंधन ने तेजस्वी को बनाया CM फेस, NDA पर बोला हमला, कहा- नीतीश को एकनाथ शिंदे ना बना देना
25 Oct, 2025 02:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस (Congress) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Elections 2025) के लिए तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को महागठबंधन (India Alliance) की तरफ से मुख्यमंत्री पद (Chief Minister post) का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बाद से कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल एनडीए से उनका चेहरा के बारे में पूछ रहे हैं। इस सबके बीच कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की तरह हाशिए पर करने की साजिश रच रही है।
उदित राज ने कहा, “जब बार-बार एनडीए से पूछा जा रहा था कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे या नहीं, तो हमने करके दिखा दिया। अब आप बताइए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाएंगे या नहीं? साफ कहिए कि उन्हें ‘एकनाथ शिंदे’ बना देंगे। बिहार के ‘एकनाथ शिंदे’ तो नीतीश कुमार हैं। उनके साथ धोखा हुआ है, साजिश की गई है।” उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को कमजोर करने की पूरी रणनीति बना ली है, जैसे महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे को उपमुख्यमंत्री पद पर सीमित कर दिया गया था।
आपको बता दें कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के गठबंधन महायूति ने निर्णायक जीत हासिल की थी। हालांकि, एकनाथ शिंदे, जो जून 2022 से मुख्यमंत्री थे, चुनाव के बाद उपमुख्यमंत्री पद पर आ गए, जबकि भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इसी घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उदित राज ने कहा कि भाजपा सत्ता में रहते हुए अपने सहयोगियों को कमजोर करती है और बिहार में भी वही दोहराया जा रहा है।
INDIA गठबंधन ने तेजस्वी यादव को बनाया सीएम फेस
दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन ने बिहार में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की घोषणा कर दी है। यह ऐलान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने गुरुवार को किया, जिन्होंने राज्य में सहयोगियों के बीच चल रही तनातनी को दूर करने के लिए पटना का दौरा किया था। अशोक गहलोत के ऐलान के बाद गठबंधन में शामिल कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के कुछ उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए, ताकि सीटों पर मित्रवत मुकाबले की स्थिति खत्म हो सके। तेजस्वी यादव ने इस मौके पर कहा, “हम उस अक्षम और भ्रष्ट डबल इंजन सरकार को हराएंगे, जिसका एक इंजन अपराध है और दूसरा भ्रष्टाचार।”
एनडीए का पलटवार
तेजस्वी के नामांकन से चिंतित एनडीए ने विपक्षी गठबंधन को भ्रष्टाचार और अवसरवाद की शर्मनाक साजिश बताया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि तेजस्वी पंजीकृत अपराधी हैं। उनके पिता लालू प्रसाद यादव के दबाव में सीएम उम्मीदवार घोषित किया गया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि आरजेडी अपने सहयोगियों को भी प्रताड़ित कर रही है और यह गठबंधन बिहार को जंगलराज की ओर ले जाएगा।
25 साल बाद फिर चर्चा में ‘सीताराम केसरी’, मोदी के हमले और राहुल की श्रद्धांजलि से सियासत गरमाई
25 Oct, 2025 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही हैं, वैसे-वैसे चुनाव प्रचार (election campaign) ने अब जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने आज बेगूसराय में एक चुनावी रैली को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के भूतपूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी (Sitaram Kesri) की चर्चा की। दरअसल, आज (शुक्रवार को) सीताराम केसरी की 25वीं पुण्यतिथि है। इसी बहाने पीएम मोदी ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया और कहा, ‘‘कांग्रेस में एक परिवार है जो देश का सबसे भ्रष्ट परिवार है। उन्होंने अपने ही पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी को बाथरूम में बंद कर दिया था और फिर सड़क पर फेंक दिया था। ऐसे लोग लोकतंत्र और सम्मान की बात करते हैं।’’
दूसरी तरफ, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीताराम केसरी को उनकी पुण्यतिथि के मौके पर याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के पुराने मुख्यालय ’24 अकबर रोड’ पहुंचे और वहां केसरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। केसरी बिहार में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में से एक रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच केसरी की पुण्यतिथि पर पिछले 25 साल में शायद पहला अवसर है, जब गांधी ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए हैं।
कौन थे सीताराम केसरी?
सीताराम केसरी का जन्म 15 नवंबर, 1919 को पटना जिले के दानापुर में हुआ था। वह अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कांग्रेस में कई पदों पर रहे और 1996 से 1998 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। केसरी के बाद सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान संभाली थी। केसरी का निधन 24 अक्टूबर, 2000 को हुआ था। केसरी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार कांग्रेस के युवा तुर्कों का हिस्सा थे। वह कई बार जेल गए थे। 1973 में वह बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सात साल बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष बने। इस पद पर वह लंबे समय तक रहे। केसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नरमिन्हा राव के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री भी रहे।
कांग्रेस अध्यक्ष पद पर ताजपोशी फिर अपमान
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। सोनिया गांधी ने कोई पद लेने से इनकार कर दिया था, इसके बाद राव ही कांग्रेस के अध्यक्ष भी बन गए। लेकिन पांच साल के कार्यकाल में सोनिया और राव के बीच कई मुद्दों पर मतभेद गहरे हो गए। इनमें बोफोर्स कांड में राजीव गांधी के खिलाफ मामला खारिज करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देना और बाबरी विध्वंस रोक पाने में अनिच्छा और नाकामी भी शामिल है। 1996 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो सोनिया गांधी ने चुनाव प्रचार करने से इनकार कर दिया। इससे कांग्रेस पार्टी हार गई। फिर राव ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया। इसके बाद सीताराम केसरी की ताजपोशी कांग्रेस अध्यक्ष पद पर हुई।
चचा केसरी से बढ़ी लालू-मुलायम की नजदीकियां
सीताराम केसरी राजनीतिक गलियारों में खासकर यूपी-बिहार में चचा केसरी नाम से मशहूर थे। कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यकाल में चचा केसरी की नजदीकी मुलायम सिंह यादव, कांशीराम, लालू यादव, रामविलास पासवान और नीतीश कुमार जैसे यूपी-बिहार के पिछड़ी जाति के नेताओं से बढ़ी तो कांग्रेस खेमे में यह बात उठी कि वह कांग्रेस का मंडलीकरण कर रहे हैं। जब उन्होंने 1997 में एचडी देवगौड़ा की सरकार से समर्थन वापस ले लिया तो उनकी दूरियां सोनिया से और बढ़ गईं। हालांकि, उन्होंने फिर इन्दर कुमार गुजराल सरकार को समर्थन दिया।
ऐसे गिरी गुजराल सरकार
नवंबर 1997 में एक और घटना घटी। राजीव गांधी की हत्या में साजिश के पहलू की जाँच करने वाली जैन आयोग की रिपोर्ट का एक अंश प्रेस में लीक हो गया ता। खबर यह थी कि जैन आयोग ने डीएमके को हत्या में शामिल लिट्टे के साथ संबंधों के लिए दोषी ठहराया था। डीएमके के तीन सदस्य उस समय गुजराल के मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। केसरी ने डीएमके के मंत्रियों को हटाने की माँग की, लेकिन प्रधानमंत्री गुजराल इससे सहमत नहीं हुए। इसके बाद कांग्रेस ने संयुक्त मोर्चा सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। 1998 में जब लोकसभा चुनाव होने लगे तब, सोनिया ने पार्टी के मुख्य प्रचारक की भूमिका ले ली, जबकि सीताराम केसरी को प्रचार से दूर रखा गया।
भीड़ जुटी, पर कांग्रेस हार गई
सोनिया की सभाओं में भीड़ जुटी लेकिन पार्टी हार गई। इसके लिए सीताराम केसरी को जिम्मेदार ठहराया गया। शरद पवार, प्रणब मुखर्जी, जितेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं ने बैठकें लेनी शुरू कर दीं। 5 मार्च 1998 को CWC की बैठक हुई। इसके चार दिन बाद केसरी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। हालांकि, फिर उसे वापस ले लिया। फिर 14 मार्च 1998 को कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड में ऐसा कुछ हुआ जो सीताराम केसरी की कल्पना से परे था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जह केसरी पार्टी दफ्तर पहुंचे तो किसी ने उनका स्वागत नहीं किया। कोई खड़ा भी नहीं हुआ। केसरी तब लाल हो गए, जब प्रणब मुखर्जी ने सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पेश कर दिया। इससे नाराज होकर केसरी वहां से जाने लगे। कुछ लोगों को कहना है कि तभी वहां मौजूद कुछ लोगों ने सीताराम केसरी की धोती खींची थी। यह भी कहा जाता है कि सोनिया के कमान संभालने तक केसरी को घंटों बाथरूम में बंद रखा गया था, जिसकी पीएम मोदी चर्चा कर रहे थे।
केसरी की चर्चा क्यों जरूरी, क्या मजबूरी?
दरअसल, सीताराम केसरी की चर्चा बिहार चुनावों से ऐन पहले इसलिए की जा रही है ताकि चुनावों में पिछड़े वर्ग का ध्रुवीकरण हो सके और यह कोशिश दोनों तरफ से हो रही हैं। चूंकि केसरी पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते थे। इसलिए उनके बहाने पीएम मोदी पिछड़ी जातियों को यह बताना चाहते हैं कि कांग्रेस उनकी शुभचिंतक नहीं है, जबकि राहुल गांधी चचा केसरी को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देकर यह बताना चाहते हैं कि पार्टी केसरी के साथ-साथ पिछड़ों का भी सम्मान करती है। बता दें कि बिहार में EBC और OBC की कुल आबादी 63 फीसदी है। इनमें OBC 27 और EBC करीब 36 फीसदी है। बहरहाल, बिहार चुनाव में इस बड़ी आबादी को अपनी-अपनी तरफ खींचने की कोशिशें जारी हैं।
चिराग पासवान ने खोला राज़: पिता की कुर्बानी के बावजूद मुस्लिम वोट बैंक ने साथ नहीं दिया
25 Oct, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार(Bihar) में महागठबंधन(Grand Alliance) की तरफ से तेजस्वी यादव(Tejashwi Yadav) को मुख्यमंत्री और वीआईपी चीफ मुकेश सहनी(VIP Chief Mukesh Sahni) को डिप्टी सीएम(Deputy CM) का उम्मीदवार घोषित किया गया है। इस घोषणा के साथ ही मुस्लिम समुदाय की तरफ से अपनी भागीदारी की मांग उठाई जा रही है। कुछ मुस्लिमों ने सोशल मीडिया में महागठबंधन के फैसले की आलोचना भी की है। इसके लिए उन्होंने अपनी जनसंख्या का हवाला दिया।
डिप्टी सीएम फेस को लेकर जारी बहस के बीच लोजपा (रामविलास) के चीफ और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुस्लिमों को अपने पिता रामविलास पासवान के उस फैसले की याद दिलाई है जिसमें उन्होंने बिहार में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी। चिराग ने इस बात को लेकर भी दुख जताया कि इसके बावजूद बिहार के मुसलमानों ने उनकी पार्टी का साथ नहीं दिया।
चिराग पासवान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा पर लिखते हैं, “2005 में मेरे नेता मेरे पिता स्व. रामविलास पासवान जी ने मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपनी पार्टी तक कुर्बान कर दी थी। तब भी आपने उनका साथ नहीं दिया। राजद 2005 में भी मुस्लिम मुख्यमंत्री के लिए तैयार नहीं था, आज 2025 में भी न मुस्लिम मुख्यमंत्री देने को तैयार है, न उपमुख्यमंत्री! अगर आप बंधुआ वोट बैंक बनकर रहेंगे, तो सम्मान और भागीदारी कैसे मिलेगी?”
इससे पहले पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चिराग पासवान ने कहा था, “ इंडिया गठबंधन यादवों और सहनी समाज के नाम पर राजनीति कर रहा है, लेकिन मुसलमानों की बात वह केवल वोट के समय करता है। मुसलमानों की जनसंख्या बिहार में लगभग 18 फीसदी है, फिर भी इंडिया गठबंधन ने किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या किसी प्रमुख पद का उम्मीदवार नहीं बनाया।”
उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव, यादव समाज से हैं, जिनकी आबादी करीब 13 फीसदी है, जबकि मुकेश सहनी, साहनी समाज से आते हैं, जिनकी आबादी लगभग 2 फीसदी है। लेकिन 18 फीसदी मुस्लिम आबादी के बावजूद, मुसलमानों को सत्ता की भागीदारी से वंचित रखा गया है। ये लोग सिर्फ मुसलमानों को डराकर और भावनात्मक मुद्दों पर भड़का कर वोट लेना जानते हैं, उन्हें असली प्रतिनिधित्व देने की उनकी नीयत कभी नहीं रही।”
हरियाणा के कांग्रेस नेता राव नरेंद्र सिंह ने सीएलयू मामले में कम्युनिस्ट पार्टी के नेता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं
25 Oct, 2025 10:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । चेंज ऑफ लैंड यूज (change of land use) सीडी कांड(CD scandal) ने हरियाणा की सियासत(Haryana politics) में एक बार फिर हलचल मचा(stirred up) दी है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने गुरुवार को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को इस मामले में आरोपी बनाते हुए नारनौल कोर्ट में चालान (आरोपपत्र) पेश किया। 12 साल पुराने इस मामले की जड़ें भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के कार्यकाल से जुड़ी हैं। उस समय राव नरेंद्र सिंह स्वास्थ्य मंत्री थे।
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर राव नरेंद्र पर सीएलयू के बदले करोड़ों की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। इनेलो ने स्टिंग का वीडियो और ऑडियो जारी करते हुए एक सीडी लोकायुक्त को सौंपी थी।
स्टिंग में सामने आए थे कई बड़े नाम
लोकायुक्त को शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने मामले की जांच की थी और रिपोर्ट लोकायुक्त को रिपोर्ट सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद जनवरी 2016 में एंटी करप्शन ब्यूरो गुरुग्राम ने मामला दर्ज किया था। चालान में आरोप है कि राव नरेंद्र सिंह ने पलवल में 30 एकड़ जमीन की सीएलयू मंजूरी के एवज में 30 से 50 करोड़ रुपये की मांग की थी। यह बातचीत एक रिकॉर्डिंग में सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उस वक्त इस सीडी कांड में कुल छह नेताओं के नाम सामने आए थे। इस मामले की जांच नारनौल यूनिट के डीएसपी अशोक डागर कर रहे हैं। उन्होंने अतिरिक्त जिला एवं न्यायधीश हर्षाली चौधरी की अदालत में चालान पेश किया।
भाजपा की बौखलाहट है : राव नरेंद्र सिंह
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने हिन्दुस्तान से बातचीत में बताया कि यह सब भाजपा की बौखलाहट का परिणाम है। मैं झुकूंगा नहीं, न ही डरूंगा। 12 साल पुराने मामले को फिर से उछालना एक साजिश है। यह सब राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जबकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। मुझे भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है सच्चाई की जीत होगी।
12 साल बाद चार्जशीट
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि चालान ऐसे वक्त पर क्यों दाखिल हुआ, जब राव नरेंद्र सिंह को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक से प्रेरित बता रहा है। वहीं, भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का यह सही समय है।
पार्टी अनुशासन पर सीएम मोहन यादव का जोर, कहा—‘व्यवहार से पहचान बनती है’
25 Oct, 2025 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा की नई टीम बनने के 24 घंटे बाद शुक्रवार देर रात प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, सह-प्रभारी सतीश उपाध्याय और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा शामिल हुए. जानकारी के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव में व्यस्तता के कारण यह बैठक ऑनलाइन रखी गई. बैठक में शामिल वरिष्ठ नेताओं ने नई टीम के सदस्यों को अनुशासन, व्यवहार और सार्वजनिक आचरण को लेकर सख्त हिदायतें दी हैं.
नए सदस्यों को डाउन टू अर्थ होकर चलना है
बैठक में पदाधिकारियों को समझाया गया कि संगठन के प्रतिनिधि के रूप में उनका आचरण पार्टी की छवि को बनाता या बिगाड़ता है. वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आपकी छवि भाजपा की रीति-नीति के अनुरूप होनी चाहिए. किसी भी पदाधिकारी को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे या कार्यकर्ताओं के मनोबल पर विपरीत असर पड़े. साथ ही उन्हें ‘डाउन टू अर्थ’ रहते हुए सबको साथ लेकर चलने की सलाह दी गई.
बिहार में RJD फिर से जंगलराज लाना चाहती है… चुनावी रैली में बोले अमित शाह
24 Oct, 2025 05:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिवान: विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए बिहार (Bihar) अब सियासी अखाड़ा बन चुका है. राजनीतिक दलों (Political Parties) के नेताओं की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है. शुक्रवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने दो बड़ी रैलियां कीं. पहली रैली बिहार के सिवान जिले के बड़हरिया में हुई जबकि दूसरी रैली बक्सर में हुई. दोनों ही रैलियों में अमित शाह ने लालू-राबड़ी और आरजेडी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी के जंगलराज को सालों तक इस सिवान की भूमि ने सहा है. शहाबुद्दीन का खौफ, अत्याचार, हत्याओं को इस सिवान ने सहा है.
शाह ने आगे कहा कि इसी शहाबुद्दीन के बेटे को बैजनाथपुर से लालू यादव ने खुद टिकट देने का काम किया है. लेकिन मैं आज सिवान वालों को कहने आया हूं कि अब नरेंद्र मोदी जी और नीतीश कुमार जी का राज है, सौ शहाबुद्दीन आ जाए किसी का बाल-बांका नहीं कर सकते. शहाबुद्दीन के खौफ, अत्याचार, हत्याओं से सिवान की भूमि लहूलुहान हो गई लेकिन सिवान वालों ने झूकने का नाम नहीं लिया. लालू-राबड़ी राज को समाप्त कर दिया. ये सिवान की भूमि महान राजेन्द्र बाबू की भूमि है. राजेन्द्र बाबू हमारे देश के पहले राष्ट्रपति बने, संविधान सभा के अध्यक्ष रहे.
उन्होंने आगे कहा कि लालू यादव ने शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट देकर ये साबित कर दिया है कि वो बिहार में फिर से जंगलराज लाना चाहते हैं. जिस शहाबुद्दीन ने 75-75 जघन्य हत्याओं से सिवान की भूमि को लहूलुहान किया, वो शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट देकर डराना चाहते हैं. ये यही बताता है कि महागठबंधन बिहार को जंगलराज की ओर ले जाना चाहता है और एनडीए गठबंधन आनंद मिश्रा को टिकट देकर सुशासन की ओर ले जा रहा है.
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि मैं छठी मईया से यही आशीर्वाद चाहता हूं कि छठ मईया बिहार के लोगों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखना, ताकि कभी यहां जंगलराज ना आए. राहुल बाबा कहते हैं कि घुसपैठियों को बिहार में रहने दो. आप लोग बताओ कि घुसपैठियों को यहां से भगाना चाहिए या नहीं?
उन्होंने कहा कि मैं वादा करता हूं कि अभी तो चुनाव आयोग ने SIR किया है, फिर से एक बार एनडीए सरकार ला दो एक-एक घुसपैठिए को देश से चुन-चुन कर बाहर करने का काम हमारी सरकार करेगी. अभी हाल ही पहलगाम में पाकिस्तान के आतंकियों ने हमला किया, जब केंद्र में सोनिया-लालू की सरकार थी, तो आतंकवादियों को बिरयानी खिलाई जा रही थी, लेकिन इस बार मोदी जी की सरकार थी, हमने ऑपरेशन सिंदूर करके पाकिस्तान के घर में घुसकर आतंकियों का सफाया करने का काम किया.
बिहार में अबकी बार ‘NDA और सुशासन सरकार’, नीतीश के नाम पर चर्चा के बीच पीएम मोदी
24 Oct, 2025 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समस्तीपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) बिहार (Bihar) के दौरे पर हैं. उन्होंने समस्तीपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए महागठबंधन (Grand Alliance) पर निशाना साधा. साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में एक बार फिर एनडीए (NDA) और सुशासन की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि इस बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्व में एनडीए जीत के अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा. बिहार एनडीए को अब तक का सबसे बड़ा जनादेश देगा.
जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, लोकतंत्र के महापर्व का बिगुल बन चुका है और पूरा बिहार कह रहा है, फिर एक बार एनडीए सरकार, फिर एक बार सुशासन सरकार, जंगलराज वालों को दूर रखेगा बिहार. बता दें कि महागठबंधन सीएम फेस को लेकर एनडीए पर निशाना साधता रहता है. तेजस्वी और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि बीजेपी सीएम के चेहरे के लिए नीतीश के नाम की घोषणा क्यों नहीं करती है. एनडीए में नीतीश के साथ अन्याय हो रहा है.
प्रधानमंत्री ने कहा, इस समय आप जीएसटी बचत उत्सव का भी खूब आनंद ले रहे हैं और कल से छठी मईया का महापर्व भी शुरू होने जा रहा है. ऐसे व्यस्त समय में भी आप इतनी विशाल संख्या में यहां आए हैं, समस्तीपुर का जो ये माहौल है, मिथिला का जो मूड है उसने पक्का कर दिया है नई रफ्तार से चलेगा बिहार, जब फिर आएगी एनडीए सरकार.
पीएम ने कहा कि आज का दिवस मेरे जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस है. यहां आने से पहले मैं कर्पूरी ग्राम गया था, वहां मुझे भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को श्रद्धापूर्वक उन्हें नमन करने का अवसर मिला. ये उनका ही आशीर्वाद है कि आज हम जैसे पिछड़े और गरीब परिवारों से निकले लोग इस मंच पर खड़े हैं.
उन्होंने कहा, वो मां भारती के अनमोल रत्न थे. उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने का सौभाग्य हमारी सरकार को मिला. ये हमारे लिए सम्मान की बात है. हमारी सरकार भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को प्रेरणापुंज मानती है. वंचितों को वरीयता, पिछड़ों को प्राथमिकता, गरीब की सेवा हम इस संकल्प के साथ आगे बढ़े हैं.
MP भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में इंदौर का दबदबा, गौरव, चावड़ा सहित चार पदाधिकारी
24 Oct, 2025 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर। भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में इस बार इंदौर को महत्व मिला है। पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे और पूर्व आईडीए अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा सहित इंदौर के चार नेता कार्यकारिणी में शामिल हुए है। सबसे चौकाने वाला नाम सांवेर के भगवान सिंह परमार का रहा। उन्हें एससी मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। इस पद के लिए प्रदेश के अन्य जिलों के नेता भी दौड़ में थे, लेकिन संगठन ने परमार पर भरोसा जताया।। पिछली प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी में इंदौर से कविता पाटीदार और जीतू जिराती थे। इस बार दोनों को टीम हेमंत खंडेलवाल में जगह नहीं मिल पाई। जिराती का नाम आईडीए अध्यक्ष पद के लिए भी चल रहा है।
भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे को महामंत्री बनाया गया है। गौरव के अलावा इंदौर के कई नेता उपाध्यक्ष या महामंत्री पद के लिए प्रयास कर रहे थे। इसमें दो भाजपा नेत्रियां भी शामिल थी, लेकिन संगठन और संघ की पसंद रहे गौरव को महामंत्री बनाया गया है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खास समर्थक डाॅ. निशांत खरे को उपाध्यक्ष बनाया गया है। निमाड़ से इस बार कम नेता कार्यकारिणी में शामिल हो पाए है। सुमेर सिंह सोलंकी को उपाध्यक्ष बनाया गया है।
सांवेर के भगवान सिंह परमार को अनुसूचित जाति मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। परमार विधासनाभ चुनाव में सांवेर से दावेदारी भी जता चुके है और जिला पंचायत सदस्य भी रहे है। पिछली कार्यकारिणी में वे मोर्चा महामंत्री थे। संगठन का पुराना अनुभव होने के कारण इस बार उन्हें अध्यक्ष बनाया गया है।
संघ में वर्षों तक अलग-अलग जिम्मेदारी निभा चुके जयपाल सिंह चावड़ा को किसान मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया है। वे इंदौर के संगठन मंत्री व आईडीए अध्यक्ष रह चुके है, हालांकि उनका कार्यक्षेत्र देवास भी रहा है। चावड़ा को किसानों को साधने की जिम्मेदारी दी गई है। सिंहस्थ के लिए ली जा रही किसानों की जमीन, इंदौर के नए बायपास सहित निर्माण सहित कई मुद्दों पर किसान नाराज है। जयपाल को उन्हें साधना बड़ी चुनौती रहेगी।
राजनीति से संन्यास ले लूंगा…कांग्रेस नेता ने बीजेपी के किसान नेताओं को दिया खुला चैलेंज
24 Oct, 2025 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (PCC Chief Jitu Patwari) हाल ही में धान की बोरी लेकर शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के बंगले पर पहुंचे थे। इसे लेकर राजनीति गरमाई हुई है। कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने बीजेपी के किसान नेताओं को खुला चैलेंज दिया हैं। उन्होंने कहा कि 50 किलो का बोरा उठाकर पीसीसी से केंद्रीय कृषि मंत्री के बंगले तक चलता है तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इस चैलेंज को स्वीकार किया है।
एमपी कांग्रेस के मीडिया मुकेश नायक ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को बड़ा चैलेंज दे दिया। मुकेश ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने कांधे पर 50 किलो का बोरा उठाकर चले थे। पीसीसी से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले तक गए थे। उन्होंने कहा कि बीजेपी का कोई नेता 50 किलो का बोरा कंधे पर उठाकर पीसीसी से शिवराज सिंह के बंगले तक लेकर चल दे तो मैं राजनीति से सन्यास ले लूंगा।
कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह भी कहा कि भारत में दीवाली निराशाजनक और नीरस रही। 20 प्रतिशत लोगों ने दीवाली मनाई। 80 प्रतिशत ने इसके सिर्फ दर्शन किए, हाथ मलते रह गए। ऐसी कोई वजह नहीं थी जिससे अच्छी दीवाली मने। लोग दीप जलाने के लिए 180 रुपए लीटर का तेल नहीं खरीद पाए। राजगीर के लड्डुओं से दीवाली मनी, फसल खराब होने और राहत नहीं मिलने से ऐसा हुआ।
मुकेश नायक ने आगे कहा कि शिवराज सिंह चौहान ने कृषि को लाभ का धंधा बनाने के ऐलान किया था, ऐसा नहीं हुआ इसलिए दीवाली फीकी रही। कृषि उपकरण, डीजल महंगा होने से ऐसा हुआ। फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से ऐसा हुआ। खाद की कालाबाजारी होने से ऐसा हुआ। वहीं कांग्रेस मीडिया प्रभारी ने उमा भारती के चुनाव लड़ने के ऐलान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उमा भारती को चुनाव लड़ना चाहिए और बीजेपी को टिकट देना चाहिए। वैसे बीजेपी को धरती वाले नेता अब पसंद नहीं हैं, पॉवर शेयरिंग वाले नेता पसंद हैं।
वहीं कांग्रेस नेता मुकेश नायक के चैलेंज को भाजपा ने सशर्त स्वीकार किया। बीजेपी प्रवक्ता डॉ गुलरेज शेख ने कहा कि जीत पटवारी की तरह 50 किलो का बोरा लेकर मैं चलूंगा। पीसीसी से शिवराज जी के बंगले तक चलने को तैयार हूं। डॉ गुलरेज ने कहा कि मुकेश नायक यह स्वीकार करें कि ऐसा होने पर वो फूल सिंह बरेया की तरह मुंह काला करेंगे और बीजेपी प्रदेश कार्यालय में आकर मुंह काला करने को तैयार हैं।
बिहार चुनाव में करोड़पति उम्मीदवारों की बहार, NDA के 92 और महागठबंधन के 86 प्रत्याशी अमीर
24 Oct, 2025 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के पहले चरण में 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर खड़े एनडीए (NDA) और इंडिया गठबंधन (India alliance) के 73 फीसदी यानी 178 उम्मीदवार (candidate) करोड़पति हैं। मात्र 35% यानी 65 उम्मीदवारों की संपत्ति ही एक करोड़ रुपये से कम है।उम्मीदवारों ने शपथ पत्र के माध्यम से चुनाव आयोग को यह जानकारी दी है। करोड़पतियों की सूची में एनडीए के सबसे अधिक 92 उम्मीदवार, जबकि महागठबंधन के 86 उम्मीदवारों का नाम है।
लखपति 64 उम्मीदवारों में 35 इंडिया, जबकि 29 एनडीए गठबंधन से जुड़े हैं। इंडिया के 35 लखपतियों में 14 वाम दल के उम्मीदवार हैं। शपथ पत्र के मुताबिक, बरबीघा से जदयू के कुमार पुष्पंजय सबसे अमीर, जबकि आरा विस से माले के क्यामुद्दीन अंसारी सबसे गरीब उम्मीदवार हैं। कुमार पुष्पंजय के पास कुल 71.57 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है। क्यामुद्दीन के पास मात्र 37 हजार रुपये की चल संपत्ति है।
उनके, पत्नी या परिजनों के नाम पर कोई अचल संपत्ति नहीं है। पहले चरण के टॉप पांच अमीर उम्मीदवारों की सूची में हाजीपुर से राजद के देव कुमार चौरसिया (67 करोड़ रुपये), बिक्रम से भाजपा के सिद्धार्थ सौरभ (42.87 करोड़ रुपये), बड़हरिया से राजद के अरुण कुमार गुप्ता (40.9 करोड़ रुपये) और मोकामा से जदयू के अनंत सिंह (37.88 करोड़) का नाम शामिल हैं।
श्याम भारती, महेश पासवान की कुल संपत्ति एक लाख से भी कम
चुनाव आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक, हायाघाट से माकपा उम्मीदवार श्याम भारती ने मात्र 39 हजार, जबकि अगिआंव से भाजपा उम्मीदवार महेश पासवान ने मात्र 55 हजार की कुल संपत्ति बताई है।
श्याम भारती के पास संपत्ति के नाम पर सिर्फ एक पुरानी बाइक है। उनकी पत्नी के पास 2.36 लाख की चल और 55.63 लाख की अचल संपत्ति है। महेश पासवान के पास आठ लाख की कृषि योग्य भूमि है। दरौली से लोजपा (रा) के विष्णुदेव पासवान के पास 3.62 लाख की चल संपत्ति है।
बिहार : तेजस्वी यादव ही हैं महागठबंधन के CM फेस, प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले आई एक तस्वीर…
24 Oct, 2025 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार (Bihar) विधानसभा चुनाव (assembly elections) को लेकर सियासी सरगर्मी सिर चढ़कर बोल रहा है. सत्तारूढ़ NDA में पहले से ही किसी तरह का नेतृत्व संकट नहीं रहा. सीट शेयरिंग (seat sharing) का मसला भी समय रहते सुलझा लिया गया था. विपक्षी महागठबंधन में नेतृत्व से लेकर सीट शेयरिंग तक को लेकर खींचतान मची रही. लेकिन एक कहावत है – अंत भला तो सब भला. अब महागठबंधन में भी सबकुछ पटरी पर आता दिख रहा है. इन सबके बीच यह भी साफ हो गया है कि महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भी संशय लगभग खत्म हो चुका है. दरअसल, तेजस्वी को खुले तौर पर गठबंधन का सीएम फेस मानने से कांग्रेस ना-नुकुर करती रही, पर पार्टी नेतृत्व RJD नेता को महागठबंधन का नेता मान लिया है. अब इस बात की तस्दीक एक तस्वीर भी कर रही है. महागठबंधन का आज यानी गुरुवार 23 अक्टूबर 2025 को महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाला है. इसको लेकर एक पोस्टर जारी किया गया है, जिसमें सिर्फ तेजस्वी यादव की ही तस्वीर है. इस तरह यह तय हो गया है कि महगठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ही हैं.
महागठबंधन में सीट बंटवारे से लेकर नेतृत्व तक को लेकर संकट के बादल छाए रहे, पर लगता है अब सबकुछ साफ हो गया है. आरजेडी के नेतृत्व को खुले तौर पर मानने से इनकार करने वाली कांग्रेस ने अब वो बात मान ली है, जिसको लेकर वह लंबे समय से ना-नुकुर करती आ रही थी. कांग्रेस ने आरजेडी के सामने घुटने टेक दिए हैं और महागठबंधन की ओर से तेजस्वी का नेतृत्व स्वीकार कर लिया है. सार्वजनिक रूप से सामने आई एक तस्वीर ने सभी महागठबंधन के सभी गांठ खोल दिए हैं. कांग्रेस ने बिहार में तेजस्वी यादव को अपना नेता मान लिया है. महागठबंधन की ओर से 23 अक्टूबर 2025 को होने वाले प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए एक पोस्टर जारी किया गया है. इसमें सिर्फ तेजस्वी यादव की ही तस्वीर है. महागठबंधन के किसी और नेता का फोटो इसमें नहीं है.
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार यानी 22 अक्टूबर 2025 को महागठबंधन में किसी भी तरह के विवाद से इनकार करते हुए कहा था कि 23 अक्टूबर तक सब कुछ साफ हो जाएगा. तेजस्वी यादव ने पटना में महागठबंधन में कांग्रेस और RJD के बीच जारी मतभेद पर कहा था कि कोई विवाद नहीं है. कल यानी 23 अक्टूबर को सारे जवाब मिल जाएंगे. उसके बाद अब यह पोस्टर सामने आया है. साथ ही तेजस्वी ने इस दौरान घोषणा की है कि बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी संविदा कर्मियों और करीब दो लाख ‘जीविका दीदियों’ में शामिल कम्युनिटी मोबिलाइजर को महागठबंधन (I.N.D.I.A. गठबंधन) की सरकार बनने पर स्थायी किया जाएगा. आरजेडी नेता ने कहा कि अगर विपक्षी गठबंधन राज्य में सरकार बनाता है, तो इन जीविका दीदियों को प्रति माह 30,000 रुपये का वेतन दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव एलायंस (इंडिया) गठबंधन राज्य में सत्ता में आता है तो जिन ‘जीविका दीदियों’ ने लोन लिया है उनके ब्याज को माफ कर दिया जाएगा.
अशोक गहलोत-तेजस्वी यादव की मुलाकात
इससे पहले 22 अक्टूबर को अशोक गहलोत ने तेजस्वी यादव के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी. करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद गहलोत बाहर निकले तो उन्होंने इतना ही कहा कि सब ठीक हो जाएगा. RJD और कांग्रेस के अलावा इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दल यानी वाम दल, वीआईपी आदि के नेताओं की भी आपस में बैठक होने की पूरी संभावना है. महागठबंधन के घटक दल गुरुवार को एकता प्रदर्शित करने के साथ ही संयुक्त रूप से प्रचार अभियान की शुरुआत भी करेंगे. दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के अशोक गहलोत ने कहा कि 5 से 10 सीटों पर फ्रेंडली फाइट हो सकती है.
बिहार के चुनावी रण में आज से पीएम मोदी की ग्रैंड एंट्री, कर्पूरी ठाकुर के गांव से करने जा रहें प्रचार का आगाज
24 Oct, 2025 08:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समस्तीपुर : बिहार विधानसभा चुनाव का शंखनाद पीएम मोदी समस्तीपुर से पूर्न मुख्यमंत्री और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के गांव से शुरू करने जा रहे है . आज पीएम कर्पूरी ठाकुर के गांव पंहुचेंगे और वंहा से करीब तीन किलोमीटर दूर दुधपुरा में जनसभा को संम्बोधित करेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव अभियान आज से : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए अपना प्रचार अभियान आज से शुरू कर रहे हैं. उन्होंने समस्तीपुर और बेगूसराय में अपनी पहली रैलियों से पहले भारत रत्न से सम्मानित कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देने के लिए कर्पूरी ग्राम का दौरा करने का फैसला किया है .
कर्पूरी ग्राम से शुरूआत के निकाले जा रहे सियासी मायने :माना जा रहा है कि ये फैसला अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को लुभाने की कोशिश माना जा रहा है.बता दें कि बिहार की आबादी में ईबीसी समुदाय 36 प्रतिशत है और यही वर्ग अक्सर चुनावों के नतीजे तय करता है. कर्पूरी ठाकुर के बेटे और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि पीएम मोदी का यह दौरा अचानक तय हुआ है और यहां से चुनाव प्रचार का आगाज एडीए में नई जोश भरेगा.
पीएम के आगमन को लेकर सुरक्षा सख्त : पीएम के आगमन को लेकर जंहा सुरक्षा सख्त है. पीएम के आगमन को लेकर जंहा एनडीए घटक दल का जोश हाई है , वहीं इस कार्यक्रम को देखते हुए एसपीजी से लेकर केंद्रीय और राज्य से जुड़ी एजेंसी सुरक्षा व्यवस्था में जुटी है. जानकारी के अनुसार आज यानि 24 अक्टूबर को पीएम पहले जननायक कर्पूरी ठाकुर के गांव पंहुचेंगे. जहां वो कर्पूरी स्मृति भवन जाने के बाद , सड़क मार्ग से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित दुधपुरा हवाई अड्डा मैदान पंहुचेंगे. जंहा वे जनसभा को संबोधित करेंगे.
प्रशासन और सुरक्षा एजेंसी ने तैयारी की समीक्षा की : पीएम के आगमन को लेकर गुरुवार को जिला प्रशासन समेत ,कई सुरक्षा एजेंसी ने तमाम तैयारियों की समीक्षा की. वहीं एनडीए घटक दल के बड़े नेता भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर बैठक करते दिखे. इसी कड़ी में केंद्रीय शिक्षा मंत्री व बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भी कार्यक्रम स्थल पर एनडीए घटक दलों के साथ बैठक की.
देश में एक ही जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर- धर्मेंद्र प्रधान : इस मौके पर धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा कि , पूरे देश के एक ही जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर हैं. वंही उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ओर इशारा करते हुए कहा कि , आज उनकी पदवी को छीनने का प्रयास किया जा रहा है.
पीएम का कार्यक्रम : अब तक कार्यक्रम को लेकर मिल रही जानकारी के अनुसार , पीएम करीब 10 बजे कर्पूरी ग्राम पंहुचेंगे. वंहा वो जननायक कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देंगे करीब आधे घंटे रुकने के बाद दुधपुरा स्थित कार्यक्रम स्थल पंहुचेंगे.
महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं दिखी राहुल गांधी की तस्वीर, भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कसा तंज
23 Oct, 2025 05:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद को लेकर काफी खींचतान हुई. आखिरीकार तेजस्वी यादव के नाम पर मुहर लग गई. महागठबंधन ने गुरुवार (23 अक्टूबर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी के नाम की घोषणा की, लेकिन इस दौरान राहुल गांधी की तस्वीर प्रेस कॉन्फ्रेंस से नदारद दिखी. भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसको लेकर सवाल उठा दिया. उन्होंने महागठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि यह कौनसा गठबंधन है.
रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने कहा, ”राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की तस्वीर प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं थी. ये कौन सा गठबंधन (Alliance) है, जो 243 सीट हैं और 255 पर चुनाव लड़ रहा है. आपके भ्रष्टाचार को देखकर ही नीतीश कुमार आपसे अलग हुए थे. आज तेजस्वी ने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस अपनाएंगे, तो आप बताइए किसके भ्रष्टाचार पर – माता, पिता या अपने लोगों के. आपके पिता लालू जी को चारा घोटाले में 32 साल की सजा हो चुकी है.”
उन्होंने कहा, ”चारा घोटाले के साथ-साथ लालू पर 4 अलग-अलग घोटाले के मामले दर्ज हैं. लालू प्रसाद यादव को अदालत ने 32.5 साल की सजा सुनाई है. तेजस्वी यादव पर आईपीसी की धारा 420 का आरोप है. वो कह रहे हैं कि हम नौकरी देंगे, उनके पास एक समय-परीक्षित मॉडल है. वे नौकरी देंगे और आपकी जमीन ले लेंगे. उनका कोई भी काम भ्रष्टाचार के बिना नहीं होता. न तो हिमाचल प्रदेश में और न ही तेलंगाना में, वे अपनी घोषणाएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं.”
रविशंकर प्रसाद ने कहा, ”बिहार में 2 करोड़ 60 लाख परिवार हैं. तेजस्वी ने घोषणा की है कि हम हर घर में एक सरकारी नौकरी देंगे. कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसा कहां से आएगा? एनडीए का विजन आरजेडी और गठबंधन को बेनकाब करना है. तेजस्वी यादव ने जो भी घोषणाएं की हैं, वे सिर्फ हवाबाजी हैं और कुछ नहीं.”
महाराष्ट्र NDA में घमासान, सहयोगी दल शिवसेना-NCP ने ही दे डाली भाजपा सांसद पर लगाम लगाने की नसीहत
23 Oct, 2025 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सत्ताधारी NDA गठबंधन की गांठ ढीले पड़ गए हैं और गठबंधन के अंदर ही घमासान छिड़ गया है। हालात, यहां तक पहुंच गए हैं कि दो सहयोगी दलों (शिवसेना और NCP) ने भाजपा (BJP) को अपनी ही सांसद पर लगाम लगाने की नसीहत दे डाली है। दरअसल, ये विवाद एक शुद्धिकरण समारोह से जुड़ा हुआ है, जिसे अंजाम दिया है भाजपा की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी (Rajya Sabha MP Medha Kulkarni) ने। कुलकर्णी ने रविवार को पुणे के शनिवार वाड़ा में ‘शुद्धिकरण समारोह’ आयोजित किया था।
पुणे के ऐतिहासिक शनिवार वाड़ा में मुस्लिम महिलाओं द्वारा पेशवाओं के गढ़ रहे पुणे के किले में नमाज पढ़े जाने के विरोध में भाजपा सांसद की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ताओं और हिन्दूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने वहां गोमूत्र छिड़क कर उसका शुद्धिकरण किया था। इस घटना की दोनों उप मुख्यमंत्री यानी एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने निंदा की है और भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी की इस हरकत की आलोचना की है। दोनों ही सहयोगी दलों ने भाजपा सेअपनी राज्यसभा सांसद पर लगाम लगाने को कहा है।
भाजपा सांसद पर FIR दर्ज करने की मांग
एक रिपोर्ट के मुताबिक, NCP प्रवक्ता रूपाली पाटिल थोम्ब्रे ने कहा, “हम भाजपा से उन पर लगाम लगाने की मांग कर रहे हैं। हम पुलिस से भी मांग कर रहे हैं कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश के लिए उन पर मामला दर्ज किया जाए। वह हिंदू बनाम मुस्लिम का मुद्दा उठा रही हैं, इसलिए उनके खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए, भले ही वह सांसद ही क्यों न हों। पुणे में हिंदू और मुसलमान भाई-भाई की तरह रहते हैं और उन्हें ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी।” थोम्ब्रे ने सोमवार की शाम पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कुलकर्णी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर एक आंदोलन भी चलाया।
अल्पसंख्यक समुदाय पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश
दरअसल, महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय चुनावों से पहले एनसीपी अल्पसंख्यक समुदाय पर अपनी पकड़ फिर से बनाने की कोशिश कर रही है, जिसे भाजपा-शिवसेना सरकार में शामिल होने के बाद झटका लगा है। भाजपा सांसद के किलाफ FIR और सख्त कार्रवाई की मांग NCP की इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है।
गलतफहमी न पालें कि सरकार में हैं
दूसरी तरफ, भाजपा के हिंदुत्व विचारों की सहयोगी शिवसेना ने भी मेधा कुलकर्णी पर निशाना साधा है। शिवसेना नेता नीलम गोरहे ने कहा, “शनिवार वाड़ा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसके कुछ नियम हैं और इन नियमों का पालन किया जाना चाहिए। अगर इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो राज्य पुलिस और जिला कलेक्टर को कार्रवाई करनी चाहिए।” उन्होंने दो टूक कहा कि किसी को भी यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वह सरकार में हैं।
भाजपा सांसद का अल्टीमेटम
गोरहे और थोम्ब्रे की यह आलोचना उस घटना के बाद आई है जब कुलकर्णी ने कुछ हिंदू संगठनों के साथ मिलकर रविवार को उस जगह पर गोमूत्र छिड़का जहाँ मुस्लिम महिलाएँ नमाज़ पढ़ रही थीं। इतना ही नहीं कुलकर्णी ने शनिवार वाड़ा के बाहर स्थित एक मज़ार और दरगाह को एक सप्ताह के भीतर हटाने का अल्टीमेटम भी दिया था। दूसरी तरफ, भाजपा सांसद के आंदोलन के बाद, पुलिस ने संरक्षित स्थल पर नमाज़ अदा करने के आरोप में अज्ञात महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
कांग्रेस का तंज और सवाल
कांग्रेस ने भी भाजपा के शुद्धिकरण कार्यक्रम और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, “शनिवार वाड़ा को शुद्ध करने का कार्य वास्तव में हास्यास्पद है। शनिवार वाड़ा कोई धार्मिक स्थल नहीं है।” उन्होंने कहा, “यह दरगाह पेशवा काल से ही वहाँ मौजूद है। पेशवाओं ने खुद इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी।” कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “शनिवार वाड़ा में इतना कुछ हो चुका है कि भाजपाइयों, आपके तर्क के अनुसार, तो पूरे वाड़ा को ही गोमूत्र से धोना चाहिए। इस तरह जनता को भी पता चल जाएगा कि आपकी मानसिकता कितनी पिछड़ी है।”
बिहार चुनाव से बाहर हुए 467 प्रत्याशी, महागठबंधन-NDA को लगा तगड़ा झटका
23 Oct, 2025 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Elections 2025) की रंगमंच पर नामांकन पत्रों की जांच ने राजनीतिक दलों (Bihar Political parties) को हिलाकर रख दिया है. दरअसल, पहले चरण की 121 सीटों के लिए कुल 467 नामांकन रद्द हुए हैं, जबकि दूसरे चरण की स्क्रूटनी में भी दर्जनों प्रत्याशियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है. चुनाव आयोग के अनुसार नामांकन रद्द इसलिए किए गए की आवेदन करने वाली विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों में किसी का ने शपथ-पत्र अधुरा दाखिल किया था. किसी के पास पर्याप्त प्रस्तावक नहीं थे तो किसी की मतदाता सूची में दो जगह एंट्री थी. बता दें पहले चरण में नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2025 थी. 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान होना है.
राजनीतिक जानकारों की मानें तो नामांकन महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए चुनौती बन गया है, क्योंकि कई प्रमुख चेहरों के नाम खारिज होने से सीट-समझौते पर इसका असर पड़ सकता है. हाल ही में RJD प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन रद्द हुआ है, वह मोहिनया विधानसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी थीं और उन्होंने अपना प्रचार भी शुरू कर दिया था. बताया जा रहा है कि उन्होंने मूल निवास और जाति प्रमाण-पत्र को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं दी थी.
पहले चरण में सारण जिले की मढ़ौरा विधानसभा सीट पर एनडीए गठबंधन को सबसे पहले धक्का लगा. यहां लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की उम्मीदवार और भोजपुरी अभिनेत्री सीमा सिंह का नामांकन तकनीकी आधार पर रद्द किया गया था. इसी तरह पूर्वी चंपारण की मधुबन सीट पर तीन निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवारों रणधीर कुमार (निर्दलीय), अभिषेक कुमार (भारतीय आम जनता विकास पार्टी) और लक्ष्मण साह (राष्ट्रीय सद्भावना पार्टी) का नामांकन ये कहकर रद्द कर दिया गया कि उन्होंने दस्तावेज पूरे नहीं हैं.
चुनाव आयोग ने महागठबंधन के सुगौली विधानसभा क्षेत्र से विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के शशि भूषण सिंह का नामांकन रद्द किया, आयोग का कहना था कि उन्होंने अपने प्रस्तावकों की डटेल नहीं दी. बता दें फिलहाल जहानाबाद में महागठबंधन के प्रत्याशी राहुल शर्मा की मतदाता सूची की जांच हो रही है. उन पर दो जगह मतदाता सूची में नाम होने का अरोप है.
चुनाव आयोग के अनुसार नियमों के अनुसार ही कुछ नामांकन रद्द किए गए हैं. रद्द किए गए नामांकन में कमी होने के कारण ऐसा किया गया है, वहीं इससे पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है. उधर, राजनीतिक हलकों में इससे हड़कंप मचा हुआ है. एनडीए ने इसे ‘नियमों की जीत’ कहा तो महागठबंधन ने इसे ‘दबाव की राजनीति’ करार दिया है.
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