राजनीति
बंगाल में SIR पर अभिषेक बनर्जी की भाजपा और EC को चेतावनी, बोले- अगर एक भी वोटर कटे तो होगा बड़ा आंदोलन
30 Oct, 2025 09:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता । तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में मतदाता सूची (voter list) के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा को लेकर मंगलवार को भाजपा (BJP) और निर्वाचन आयोग ( Election Commission) पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कवायद वास्तविक मतदाताओं को बाहर करने और 2026 के राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ने के लिए की गई है। अभिषेक ने इस पहल को साइलेंट इनविजिबल रिगिंग (एसआईआर) बताते हुए दावा किया कि इसे मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
बनर्जी ने दावा किया कि एसआईआर का आदेश केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा दिया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा के सहयोगी संगठन, निर्वाचन आयोग ने कल एसआईआर की घोषणा की है। यह प्रक्रिया (नाम) शामिल करने की नहीं, बल्कि बाहर करने के बारे में है। डायमंड हार्बर के सांसद ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के समय पर कटाक्ष करते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि केवल डेढ़ साल पहले ही लोकसभा चुनाव हुए थे। अगर अब मतदाता सूची में विसंगतियां हैं, तो लोकसभा भंग कर नए चुनाव कराए जाने चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले बनर्जी ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि बांग्लादेश से घुसपैठ और रोहिंग्याओं के बंगाल में प्रवेश के कारण संशोधन की जरूरत पड़ी। उन्होंने पूछा कि पांच पूर्वोत्तर राज्य बांग्लादेश और म्यांमा के साथ सीमा साझा करते हैं। तो फिर बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की मौजूदगी का हवाला देते हुए केवल पश्चिम बंगाल में ही एसआईआर की घोषणा क्यों की जा रही है?
सत्यापन कार्य के लिए निर्वाचन आयोग की समयसीमा को चुनौती देते हुए बनर्जी ने कहा कि 2002 में, एसआईआर बंगाल में दो साल की अवधि में किया गया था। निर्वाचन आयोग इस विशाल कार्य को एक या दो महीने में कैसे पूरा कर लेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य प्रशासन पर नियंत्रण करना चाहता है ताकि सरकार काम न कर सके।
टीएमसी नेता ने मंगलवार सुबह पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में नागरिकता के मुद्दे को लेकर कथित तौर पर दहशत के कारण एक व्यक्ति की मौत के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि एनआरसी के खतरे को लेकर चिंता के कारण पनिहाटी निवासी प्रदीप कर की मृत्यु हो गई और इसके लिए अमित शाह और ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने एनआरसी और एसआईआर को लेकर चिंता को वजह बताया है। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक भी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया तो बंगाल के एक लाख लोग दिल्ली में निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर धरना देंगे। तृणमूल नेता ने जोर देकर कहा कि एसआईआर के बावजूद अगले साल विधानसभा चुनावों में पार्टी की सीटों की संख्या बढ़ेगी।
पहले चरण की लड़ाई में दागियों का दबदबा, 432 उम्मीदवार मैदान में, दो नेता 80+ उम्र के हैं
30 Oct, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार(Bihar) विधानसभा चुनाव(assembly elections) के पहले चरण के 121 विधानसभा क्षेत्रों (Assembly constituencies)में उतरे 1303 उम्मीदवारों में 40 फीसदी करोड़पति हैं। औसतन एक उम्मीदवार के पास 3.26 करोड़ रुपये की संपत्ति है। एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) और बिहार इलेक्शन वॉच ने पहले चरण के उम्मीदवारों के शपथ पत्र के आधार पर जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में कुल 1314 में से 1303 उम्मीदवारों द्वारा घोषित वित्तीय, आपराधिक, शिक्षा, लिंग एवं अन्य विवरणों के आधार पर विश्लेषण किया गया है। चुनाव के पहले चरण में नौ फीसदी (121) महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ रही हैं। इस चरण में 432 दागी मैदान में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कुल उम्मीदवारों में आठ फीसदी (103) के पास दस करोड़ से अधिक, जबकि सात फीसदी (93) के पास पांच से दस करोड़ रुपये की संपत्ति है। इनके अलावा 25 फीसदी (323) उम्मीदवारों के पास एक से पांच करोड़, 32 फीसदी (417) उम्मीदवारों के पास 20 लाख से एक करोड़ और 28 फीसदी (367) उम्मीदवारों के पास 20 लाख रुपये से भी कम की संपत्ति होने की जानकारी दी गयी है।
इस चरण में मुंगेर से भाजपा उम्मीदवार कुमार प्रणय (170 करोड़ की संपत्ति) को सबसे धनी उम्मीदवार बताया गया है। दूसरे स्थान पर सीवान से निर्दलीय राजकिशोर गुप्ता (137 करोड़) और तीसरे स्थान पर मोकामा के जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह (100 करोड़) का नाम है।
भाजपा के 48 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 11.30 करोड़, राजद के 70 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 10.37 करोड़, जदयू के 57 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 8.75 करोड़, कांग्रेस के 23 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 5.85 करोड़ रुपये और जन सुराज पार्टी के 114 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 5.72 करोड़ रुपये है।
उम्र : 41 से 60 की आयु के 51 % उम्मीदवारों की
रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल उम्मीदवारों में 36 फीसदी (463) की आयु 25 से 40 वर्ष के बीच की है। 51 फीसदी (669) उम्मीदवारों ने अपनी आयु 41 से 60 वर्ष के बीच बताई है। 13 प्रतिशत (169) उम्मीदवारों ने 61 से 80 वर्ष के बीच आयु घोषित की है। दो उम्मीदवारों की उम्र 80 वर्ष से भी अधिक है।
तीन सबसे अमीर प्रत्याशी
1. कुमार प्रणय (भाजपा) मुंगेर : 170 करोड़
2. राजकिशोर गुप्ता (निर्दलीय), सीवान : 137 करोड़
3. अनंत सिंह (जदयू), मोकामा : 100 करोड़
योग्यता : 40% उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 50 फीसदी (651) उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक या उससे अधिक की है। 105 उम्मीदवार डिप्लोमाधारक, 105 साक्षर और आठ असाक्षर हैं। 40 फीसदी (519) उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच की है।
ADR रिपोर्ट का खुलासा: बिहार में 30% उम्मीदवार दागी, RJD सबसे आगे
29 Oct, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले साफ-सुथरी राजनीति और मजबूत कानून व्यवस्था का वादा करने वाली पार्टियों के दावों पर नई रिपोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव में प्रथम चरण के दौरान चुनाव मैदान में उतरने वाले 32 फीसदी उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यानी हर तीसरा प्रत्याशी दागदार है।
रिपोर्ट में कई उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले
कुल 1,314 उम्मीदवारों के हलफनामों की जांच में सामने आया कि इनमें से 423 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है। वहीं 354 प्रत्याशियों पर गंभीर आपराधिक धाराओं में केस चल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 33 उम्मीदवारों पर हत्या, 86 पर हत्या की कोशिश, 42 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध और 2 पर दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप हैं।
जानिए राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले
राजनीतिक दलों की बात करें तो राजद के 70 में से 53 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो कुल का 76 प्रतिशत है। भाजपा के 48 में से 31 (65 प्रतिशत), कांग्रेस के 23 में से 15 (65 प्रतिशत), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 13 में से 7 (54 प्रतिशत) और जनसुराज पार्टी के 114 में से 50 (44 प्रतिशत) उम्मीदवारों के खिलाफ भी केस दर्ज हैं। जदयू के 57 में से 22 प्रत्याशी यानी 39 प्रतिशत उम्मीदवारों ने भी अपने ऊपर आपराधिक मामले स्वीकार किए हैं। CPI के सभी तीनों उम्मीदवारों पर केस दर्ज हैं. बिहार से बाहर की पार्टियां भी इस सूची में पीछे नहीं हैं। बहुजन समाज पार्टी के 89 में से 18 (20 प्रतिशत) और आम आदमी पार्टी के 44 में से 12 उम्मीदवार (27 प्रतिशत) दागी हैं।
40 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 40 प्रतिशत यानी 519 उम्मीदवार करोड़पति हैं। वहीं, 519 उम्मीदवारों की शिक्षा 5वीं से 12वीं तक सीमित है, जबकि 651 उम्मीदवार स्नातक या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं। इन आंकड़ों से यह साफ झलकता है कि बिहार की राजनीति में स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को मौका देने के वादे अब भी हकीकत से काफी दूर हैं। चाहे फिर राजद, भाजपा, कांग्रेस, वाम दल या जनसुराज कोई भी हो, सबने अपराध के दाग वाले चेहरों को ही टिकट देने में उदारता दिखाई है।
कांग्रेस की बैठक में बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाए जाने का आरोप, सरकार ने दिए जांच के आदेश
29 Oct, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम सरकार (Assam Government) ने अधिकारियों को कांग्रेस (Congress) की एक बैठक में कथित तौर पर बांग्लादेश (Bangladesh) का राष्ट्रगान गाने (National Anthem) के मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि श्रीभूमि जिले में कांग्रेस सेवा दल (Congress Seva Dal) की एक हालिया बैठक में कथित तौर पर बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाया गया। हालांकि कांग्रेस ने भाजपा सरकार की आलोचना की और कहा कि सरकार गैर जरूरी विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है।
श्रीभूमि जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की और बताया कि राज्य सरकार के मंत्री कृष्णेंदु पॉल ने मामले की जांच करने के मौखिक निर्देश दिए हैं। जिसके बाद जांच की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को श्रीभूमि शहर में कांग्रेस जिला कार्यालय इंदिरा भवन में कांग्रेस सेवा दल की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक की शुरुआत में बांग्लादेश के राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ की दो लाइनें गायी गईं। नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय कवि रविंद्रनाथ टैगोर ने बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखा है। टैगोर ने ही भारत का भी राष्ट्रगान लिखा है।
आरएसएस को लेकर सिद्धारमैया सरकार को कर्नाटक हाईकोर्ट से फटकार........उन्हें इसका संवैधानिक अधिकार कहां से मिला
29 Oct, 2025 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर कर्नाटक सरकार के आदेश पर अब हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस एम नागाप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कर्नाटक सरकार और हुबली पुलिस कमिश्नर के आदेश पर अंतरिम रोक लगाकर कहा है कि उन्हें इसका संवैधानिक अधिकार कहां से मिल गया। 18 अक्टूबर को राज्य सरकार ने कहा था कि बिना इजाजत के 10 से ज्यादा लोगों का इकट्ठा होना अपराध है। इसके अलावा पार्क, सड़कों और खेल के मैदान में ज्यादा लोगों के इकट्ठे होने पर कार्रवाई होगी।
हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 19 (1)(ए),19 (1) (बी) के तहत दिए गए अधिकारों पर सरकार रोक नहीं लगा सकती है। कोर्ट ने कहा कि सभी को अभिव्यक्ति का अधिकार और शांतिपूर्ण ढंग से सभा करने का अधिकार मिला है और इसमें सरकार देखल नहीं दे सकती। इस मामले में अभी आगे की सुनवाई होनी है। फिलहाल कोर्ट के इस आदेश से आरएसएस को अंतरिम राहत मिल गई है।
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा था कि संघ के खिलाफ ये सारे कदम प्रियांक खरगे के इशारे पर उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, आरएसएस अपनी गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से करता है। वह जुलूसी भी शांति से निकालता है। वहीं कर्नाटक की कैबिनेट ने आरएसएस के कार्यक्रमों और शाखाओं पर रोक लगाने के लिए एक आदेश को मंजूरी दी थी। इसमें कहा गया था कि सरकारी जगहों पर बिना इजाजत इकट्ठा होना अपराध होगा और इसपर कार्रवाई की जाएगी।
इसके पहले प्रियंक खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर कहा था कि राज्य में संघ की गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत है। बीजेपी ने कहा था कि कांग्रेस यह सब केवल राजनीतिक बदले की भावना की वजह से करना चाहती है। इसके बाद कांग्रेस ने जवाब देकर कहा था कि 2013 में बीजेपी सरकार ने भी इसी तरह का आदेश देकर कहा था कि स्कूल का परिसर और खेल के मैदान का इस्तेमाल केवल शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए होगा।
तेजस्वी का प्रशांत किशोर पर तंज..........वे नेता नहीं, कंसल्टेंट, जनता के बीच कभी नहीं रहे
29 Oct, 2025 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में विधानसभा चुना को लेकर सियासी माहौल में गर्मी बढ़ चुकी है और महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे तेजस्वी यादव ने फिर रोजगार देने वाले अपने वादे की चर्चा छेड़ दी है। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले, उन्होंने इंटरव्यू में अपने विजन, विपक्षी हमलों और विकास के मॉडल पर खुलकर बात की। इसके अलावा उन्होंने जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर पर भी जमकर प्रहार किया है।
एक इंटरव्यू में तेजस्वी ने कहा कि बिहार को राजनीति नहीं, रोजगार की जरूरत है। उन्होंने अपने पुराने वादे, हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देने पर कहा, “हम रोजगार को खर्च नहीं, निवेश मानते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में जान आएगी और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में गुणात्मक सुधार होगा।”
तेजस्वी ने विपक्ष द्वारा मुफ्तखोरी कहने पर पलटवार करते हुए कहा, “लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी करना रेवड़ी बांटना नहीं, मानव गरिमा का हिस्सा है। जब तक ढांचा और रोजगार नहीं बनता, तब तक राहत जरूरी है। उन्होंने एनडीए के महिला वोटरों के लिए 10000 रुपये की घोषणा पर तंज कसते हुए कहा, “हमने ‘माई बहन मान योजना’ के तहत हर महिला को 2,500 देने की योजना बनाई है, यह कम नहीं, स्थायी राहत।”
वहीं पीके पर तंज कसते हुए तेजस्वी बोले, “वे नेता नहीं, कंसल्टेंट हैं। जनता के बीच कभी नहीं रहे। असली राजनीति जमीनी जुड़ाव से बनती है, मीडिया साउंडबाइट्स से नहीं।”
तेजस्वी ने फिर कहा कि रोजगार ही उनकी राजनीति का केंद्र है। उन्होंने कहा, “2020 में 10 लाख नौकरियों के वादे पर जनता ने भरोसा किया था। जब मैं डिप्टी सीएम था, तब 5 लाख नौकरियां दी भी गईं।” अपने भाई तेज प्रताप यादव के खिलाफ उम्मीदवार उतारने को लेकर उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति को अपनी राय और चुनाव लड़ने का अधिकार है। लोकतंत्र में विविधता ही ताकत है।”
तेजप्रताप का बयान, लालू जी की राहुल गांधी और तेजस्वी पर छत्र छाया......हमारे ऊपर नहीं
29 Oct, 2025 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। इनदिनों देश की राजनीति में बिहार चुनाव को लेकर काफी हलचल है। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। मीडिया से बात करते हुए तेजप्रताप ने कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मेरे छोटे भाई तेजस्वी यादव पर लालू प्रसाद यादव की छत्रछाया है, मुझपर नहीं है।
जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप ने कहा, कर्पूरी ठाकुर, महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर और गांधी जी जननायक थे... लालू जी की राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर छत्र छाया है। हमारे ऊपर उनकी छत्र छाया नहीं है। हमारे ऊपर बिहार के गरीबों और नौजवानों की छत्र छाया है। हम इस छत्रछाया को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हम अपने बल पर पूरे बिहार को करके दिखाएंगे।
बता दें कि पिता लालू यादव ने तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से निकाल दिया है। तेज प्रताप और उनके पिता के बीच ताजा विवाद की वजह सोशल मीडिया ‘पोस्ट’ बनी थी जिसमें तेजप्रताप ने अदालत में तलाक का मामला लंबित होने के बावजूद एक महिला से 12 साल से रिश्ते में होने का दावा किया था।
पार्टी और परिवार से निकालने के बाद तेजप्रताप अब अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ के बैनर तले चुनाव मैदान में हैं। तेज प्रताप ने कहा था कि “उस पार्टी (राजद) में लौटने से अच्छा मौत को चुनना’’ होगा। महुआ ने 2015 में तेज प्रताप को पहली बार विधायक चुना था, लेकिन 2020 में उन्हें समस्तीपुर जिले की हसनपुर सीट से चुनाव में उतारा गया था। ऐसी चर्चा थी कि लोकप्रियता में कथित कमी के कारण महुआ उनके लिए “असुरक्षित” हो गया था।
पीएम मोदी की उपस्थिति में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार पटेल के वंशज भी होंगे शामिल
29 Oct, 2025 09:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद | नर्मदा जिले के केवड़िया स्थित एकता नगर में विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक लगातार बड़ी संख्या में आ रहे हैं। हर साल की भांति इस वर्ष भी सरदार पटेल की जयंती पर एक दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया है| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में होनेवाले इस समारोह में सरदार वल्लभभाई पटेल के वंशज भी शामिल होंगे| बता दें कि लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकता नगर आ रहे हैं| इस विशेष अवसर पर सरदार पटेल के वंशज भी उपस्थित रहेंगे और राष्ट्रीय एकता दिवस के समारोह में भाग लेंगे। सरदार वल्लभभाई पटेल के वंशजों में गौतम डाह्याभाई पटेल (सरदार पटेल के पौत्र) वर्तमान में 80 वर्ष के हैं और वे परिवार के वरिष्ठ सदस्य के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी पत्नी डॉ. नंदिता गौतम पटेल 79 वर्ष की हैं। सरदार पटेल के प्रपौत्र के रूप में केदार गौतम पटेल (आयु 47 वर्ष) भी अपने परिवार सहित समारोह में भाग लेंगे। उनकी पत्नी रीना पटेल (आयु 47 वर्ष) और उनकी पुत्री कुमारी करीना केदार पटेल (आयु 13 वर्ष), जो सरदार पटेल की प्रप्रपौत्री हैं, भी एकता नगर पहुँचेंगी। इसके अतिरिक्त, गौतम डाह्याभाई पटेल के चचेरे भाई समीर इंद्रकांत पटेल (आयु 68 वर्ष) और उनकी पत्नी रीता एस. पटेल (आयु 66 वर्ष) भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे और राष्ट्रीय गौरव के इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। सरदार पटेल के वंशजों की उपस्थिति प्रधानमंत्री की यात्रा को और अधिक यादगार और ऐतिहासिक बनाएगी। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ देश की एकता, अखंडता और संकल्प का प्रतीक है, और इस अवसर पर सरदार साहब के परिवार की कई पीढ़ियों का एक साथ एकता नगर में उपस्थित होना अपने आप में राष्ट्रीय गौरव का क्षण है। एकता नगर अब केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। सरदार पटेल के वंशजों की उपस्थिति से इस आयोजन में देशभक्ति और पारिवारिक गौरव की भावना और अधिक प्रबल होगी।
महाराष्ट्र में अमित शाह के ‘बैसाखी’ बयान से बढ़ी सियासी हलचल, CM फडणवीस ने दी सफाई
29 Oct, 2025 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के बैशाखी वाले बयान के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने शाह के बयान पर सफाई देते हुए कहा कि दोस्त बैशाखी नहीं होते हैं। दरअसल, आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए अमित शाह ने सोमवार को कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी को बैसाखियों की जरूरत नहीं है, पार्टी अब अपने बल पर चलती है।
राजनीतिक हलकों में अमित शाह के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे थे। हालांकि शाम होते-होते मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सफाई सामने आ गई। एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ तीन दलों की गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे फडणवीस ने कहा, “जो लोग इस टिप्पणी पर सवाल उठा रहे हैं, वे ‘बैसाखी’ का मतलब नहीं समझते। दोस्त बैसाखी नहीं होते।”
क्या कहा था केंद्रीय गृहमंत्री ने
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दक्षिण मुंबई के चर्चगेट स्टेशन के पास भाजपा के नए कार्यालय के उद्घाटन के लिए आए हुए थे। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्ष का इस तरह सफाया हो कि वे दूरबीन से भी नजर न आएं। उन्होंने कहा, “हमने साबित कर दिया है कि परिवारवाद वाली पार्टियों की राजनीति अब इस देश में नहीं चलेगी। काम करने की राजनीति ही देश को आगे ले जाएगी। मोदी जी इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं। एक साधारण चाय बेचने वाले के घर में पैदा हुआ बच्चा अपने समर्पण, त्याग और कड़ी मेहनत के बल पर भारत का प्रधानमंत्री बना।’’
शाह ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जो पार्टी अपने कामकाज में लोकतंत्र को कायम नहीं रख सकती, वह देश के लोकतंत्र की रक्षा कभी नहीं कर सकती। यह सभी वंशवादी पार्टियों के लिए एक कड़ा संदेश है।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर चलती है और कड़ी मेहनत करने वाले तथा प्रदर्शन के आधार पर पार्टी कार्यकर्ता पार्टी पदानुक्रम में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बूथ अध्यक्ष था और राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक गरीब परिवार से आते हैं और अपनी प्रतिबद्धता तथा त्याग के कारण तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे हैं।’’
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि 2014 में भाजपा ने सम्मानजनक सीट बंटवारे की मांग की थी, लेकिन गठबंधन टूट गया। शाह ने कहा, ‘‘हमने लंबे समय के बाद अपने दम पर चुनाव लड़ा और देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के साथ हम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे। पहले हम राज्य की राजनीति में चौथे स्थान पर थे, लेकिन आज हम पहले नंबर की पार्टी हैं।’’
प्रियांक खड़गे पर असम भाजपा का तंज......हेलो, टेडी बॉय निबंध लिखने से आप सेमीकंडक्टर विशेषज्ञ नहीं बन सकते
28 Oct, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तंज कसने के बाद कांग्रेस नेता को राज्य के प्रतिभा भंडार पर सवाल उठाने के लिए बेवकूफ कहने पर वाकयुद्ध छिड़ा हुआ है। जवाब में, असम भाजपा इकाई ने आईटी मंत्री खड़गे का मजाक उठाकर चुटीला तंज हेलो, टेडी बॉय कहा और कहा कि सोशल मीडिया पर लंबे निबंध लिखने से विशेषज्ञ नहीं बन जाते। दरअसल यह विवाद सोमवार को तब शुरू हुआ जब प्रियांक खड़गे ने कथित तौर पर बताया कि उनके राज्य के लिए होने वाले सेमीकंडक्टर निवेश को केंद्र द्वारा बाधित करने बाद गुजरात और असम की ओर मोड़ दिया जा रहा है।
खड़गे ने दावा किया, सेमीकंडक्टर उद्योग असम और गुजरात क्यों जा रहे हैं, जबकि वे वास्तव में बेंगलुरु आना चाहते हैं? कर्नाटक के लिए होने वाले सभी निवेशों को केंद्र दवारा बाधित किया जा रहा है। इसके जवाब में, सीएम हिमंत सरमा ने उन्हें बेहतरीन मूर्ख कह कर कहा कि कांग्रेस मंत्री की टिप्पणी असम के शिक्षित, युवा लोगों का अपमान है। सीएम सरमा ने कहा कि उनकी सरकार खड़गे के खिलाफ मामला दर्ज करने पर विचार कर रही है।
इसके बाद कर्नाटक के मंत्री खड़गे ने सीएम सरमा पर अपने बयानों को राजनीतिक रंग देकर अपनी असफलताओं को छिपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस बात पर विचार करना चाहिए कि युवा लोग काम की तलाश में पूर्वोत्तर राज्य क्यों छोड़ रहे हैं।
प्रिंयाक खड़गे ने कहा कि कैसे सेमीकंडक्टर कंपनियों पर गुजरात और असम में स्थापित होने का दबाव डाला जा रहा था, जबकि उन्होंने हमारी इंजीनियरिंग प्रतिभा और स्थापित पारिस्थितिकी तंत्र के कारण कर्नाटक में दिलचस्पी दिखाई थी... श्री सरमा केवल अपनी संपत्ति ही बढ़ा पाए हैं। हर बड़ा घोटाला या भ्रष्टाचार का मामला उनके ही दरवाजे से जुड़ा हुआ लगता है, जबकि असम के युवा बिना नौकरी या अवसरों के रह गए हैं।
खड़गे ने कहा कि असम में भाजपा के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर 2026 के राज्य चुनावों के बाद कांग्रेस सत्ता में लौटती है, तब वह कौशल, रोज़गार और शासन में जनता का विश्वास फिर से बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने कहा, हम ऐसा माहौल बनाएंगे जहाँ राज्य के हर कोने में प्रतिभाएँ फल-फूल सकें और युवा भ्रष्ट शासन और घटिया दर्जे के बदमाशों की विभाजनकारी राजनीति की गिरफ्त से मुक्त हों। आग में घी डालते हुए, असम भाजपा भी खड़गे का मज़ाक उड़ाने में कूद पड़ी।
देशभर में एक लाख हिंदू सम्मेलन करेगी RSS, हर घर तक विचारधारा ले जाने का प्लान
28 Oct, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जबलपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जबलपुर में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारिणी की वार्षिक बैठक का एजेंडा मूल रूप से संघ का विस्तार है. आरएसएस के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने बताया "हम देश के हर घर तक संघ की बात पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए अलग-अलग स्तर पर कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं. उन सभी पर इस बैठक में चर्चा होगी. जनसंपर्क के साथ ही हिंदू सम्मेलन किए जाएंगे. सार्वजनिक सभाएं की जाएंगी. देश के महान व्यक्तियों से जुड़े हुए अच्छे कामों को भी संघ अपने कार्यक्रम में शामिल करेगा."
एक लाख हिंदू सम्मेलन करने की तैयारी
आरएसएस के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने बताया "संघ अपने 100 साल पूरे होने के बाद विस्तार करने जा रहा है. इसी के लिए हम अलग-अलग तरह के कार्यक्रम तय कर रहे हैं. इन सभी कार्यक्रमों पर बैठक में चर्चा होगी. एक लाख हिंदू सम्मेलनों की चर्चा होगी. पहले चरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रचार सामग्रियों के साथ देश के हर घर तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है. इसी जनसंपर्क के दौरान यह देखा जाएगा कि गली मोहल्लों और छोटे गांव में कौन-कौन सी छोटी समितियां हैं. यहां तक कि छोटे-छोटे मंदिरों की समितियां को भी संघ संपर्क करेगा. इन सभी को एक साथ लाकर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा."
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सार्वजनिक सभाएं
सुनील अंबेकर ने बताया "छोटे स्थान पर हिंदू सम्मेलन होंगे और बड़े स्थान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत सार्वजनिक सभाएं भी करेंगे, जिस तरह का एक आयोजन अभी दिल्ली में हुआ है. इस तरह का एक आयोजन मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में भी किया जाएगा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने विस्तार के लिए व्यक्तिगत संपर्क के साथ ही नए सामाजिक संगठनों से भी जुड़ने के लिए कार्यक्रम तय कर रहा है. गुरु तेग बहादुर से जुड़े हुए कार्यक्रम पर चर्चा की जा रही है. भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान को भी संघ लोगों तक पहुंचाने के लिए रणनीति बना रहा है."
कुटुंब प्रबोधन पर रहेगा जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी वार्षिक बैठक मे हिंदुओं के छोटे परिवारों पर भी चर्चा की जा रही है. आरएसएस प्रमुख ने बीते दिनों कुटुंब प्रबोधन के बारे में जानकारी दी थी और उसमें यह स्पष्ट है कि हिंदुओं को अपने परिवारों को बड़ा करना चाहिए. बैठक में पच परिवर्तन पर चर्चा की जा रही है. इसमें कुटुंब प्रबोधन भी एक है और जाहिर सी बात है कि इसमें हिंदू परिवारों के छोटे होने पर भी चर्चा होगी.
मथुरा और काशी पर चर्चा
राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख का कहना है "इस मीटिंग के दौरान देश के समसामयिक विषयों पर भी चर्चा होगी. आरएसएस चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करती. इसलिए बिहार चुनाव से हमारा सीधा कोई लेना-देना नहीं है. बैठक में मथुरा का और काशी पर भी चर्चा की जाएगी. इसके साथ ही भारत में विदेशी घुसपैठ भी चर्चा का विषय रहेगा." संघ की बैठक 30 तारीख से शुरू होगी और 1 नवंबर तक चलेगी. 1 नवंबर को इस बैठक में क्या-क्या तय हुआ, इस पर भी जानकारी दी जाएगी.
झारखंड : घाटशिला उपचुनाव में सोरेन बनाम सोरेन के बीच भिड़ंत, दो दिग्गजों की प्रतिष्ठा लगी दांव पर
28 Oct, 2025 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घाटशिला । झारखंड (Jharkhand) की राजनीति में एक बार फिर ‘सोरेन बनाम सोरेन’ (Soren vs Soren) की लड़ाई देखने को मिल रही है। घाटशिला विधानसभा उपचुनाव (Ghatsila Assembly by-election) न सिर्फ दो नेताओं की साख का सवाल है, बल्कि कोल्हान की सियासी दिशा भी तय करने वाला रण बन चुका है। दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के निधन से खाली हुई सीट पर झामुमो ने उनके बेटे सोमेश सोरेन (Somesh Soren) को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के कभी कद्दावर नेता रहे चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन (Babulal Soren) पर फिर दांव लगाया है। दोनों ही संथाल समाज से हैं, इसलिए यह मुकाबला सामाजिक संतुलन और राजनीतिक परंपरा दोनों की परीक्षा बन गया है। बाबूलाल को पिछले चुनाव में भी भाजपा ने इस सीट से उम्मीदवार बनाया था।
राजनीतिक मायने गहरे
11 नवंबर को होने वाले मतदान के नतीजे न सिर्फ घाटशिला की नई सियासी तस्वीर तय करेंगे, बल्कि यह भी संकेत देंगे कि झारखंड की जनता आने वाले विस चुनाव से पहले किस दिशा में सोच रही है। घाटशिला की धरती इस बार सत्ता, साख और सामाजिक समीकरणों की सबसे बड़ी परीक्षा का मैदान बन चुकी है।
सोमेश के लिए झामुमो ने लगाई पूरी ताकत
झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए घाटशिला सीट प्रतिष्ठा की पहचान बन चुकी है। पार्टी इसे हर हाल में बरकरार रखना चाहती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छठ पर्व के बाद खुद प्रचार की कमान संभालेंगे और उनके साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी महिला मतदाताओं के बीच जनसंपर्क अभियान चलाएंगी। झामुमो की महिला सांसद और विधायकों की टीमें भी गांव-गांव जाकर महिला मतदाताओं को साधने में जुटी हैं।
भाजपा का मिशन ‘कोल्हान वापसी’
भाजपा इस उपचुनाव को हेमंत सरकार की नाकामियों पर जनमत संग्रह मान रही है। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अर्जुन मुंडा जैसे दिग्गजों को प्रचार अभियान में झोंकने की रणनीति बनाई है। भाजपा का नारा साफ है “अबकी बार बदलाव की बारी”। पार्टी को उम्मीद है कि बाबूलाल सोरेन के चेहरे से संथाल समाज में पैठ बनेगी, साथ ही गैर-आदिवासी और शहरी मतदाताओं का समर्थन भी मिलेगा।
मैं तो लड़ाई के लिए तैयार हूं, तुम लोग थोड़े कांग्रेसी हो जाओ…किसानों के बीच पहुंचकर बोले जीतू पटवारी
28 Oct, 2025 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच पहुंचे। जहां उन्होंने कहा कि मैं तो लड़ाई के लिए तैयार हूं, तुम लोग थोड़े कांग्रेसी हो जाओ। इसका वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
दरअसल, सोमवार को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी पचमढ़ी में होने वाले ट्रेनिंग कैंप का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पिपरिया में चल रहे किसानों के चक्काजाम का पता चला। फिर क्या जीतू पटवारी ने खाद के डबल लॉक गोदाम पहुंचकर किसानों से बातचीत की।
इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किसानों से कहा कि ‘भैया मैं तो लड़ाई लड़ूंगा पर तुम भी थोड़ा कांग्रेसी हो जाओ यार हाथ जोड़कर बोल रहे है, अब बहुत हो गया पलटों रे पलटों किसान भाइयों पलटों।’ वहीं किसानों ने यह सुनकर जय जवान जय किसान का नारा लगाया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आपको बता दें कि किसान यहां खाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
डी. के. शिवकुमार का बयान, बोले- मैं दिल्ली आते-जाते रहता हूँ, मंत्रिमंडल फेरबदल पर CM से बात करूंगा
28 Oct, 2025 09:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु । कर्नाटक (Karnataka) के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार (Deputy Chief Minister D. K. Shivakumar) ने रविवार को कहा कि वह नई दिल्ली (Delhi) आते-जाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल (cabinet) फेरबदल के बारे में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) बात करेंगे। सिद्धारमैया ने शनिवार को संकेत दिया कि मंत्रिमंडल में फेरबदल नवंबर के बाद होगा जब उनकी सरकार ढाई साल पूरे कर लेगी।
शिवकुमार ने राष्ट्रीय राजधानी रवाना होने से पहले संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं नियमित रूप से वहां (नयी दिल्ली) जाता हूं। जब भी काम होता है, मैं वहां जाता हूं। मैं आलाकमान से मिलने, आराम के लिये, खरीदारी करने और अदालती मामलों के लिए भी वहां जाता हूं।’’
बेंगलुरु की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘हमें मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार करना है। केंद्र परियोजना की कुल लागत का केवल 13 से 14 प्रतिशत ही देगा। बाकी सब कुछ हम वहन करेंगे। फिर भी हम यह काम कर रहे हैं। हम अपना काम करेंगे।’’
नागरिक हितधारकों के साथ बातचीत पर शिवकुमार ने कहा, ‘‘मैंने मोहनदास पई और किरण मजूमदार शॉ से मुलाकात की। मैंने उनकी राय ली। हम उन्हें सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ सकते क्योंकि वे हमारी आलोचना करते हैं। वे बेंगलुरु का हिस्सा हैं। उन्होंने कुछ अच्छे सुझाव दिए हैं। हमें उन्हें लोकतांत्रिक और नौकरशाही व्यवस्था के भीतर पूरा करना होगा। वे करदाता हैं। हमें उनकी बात सुननी होगी।’’
सुरंग सड़क परियोजना के विरोध का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सुरंग सड़क का विरोध कोई और नहीं बल्कि तेजस्वी सूर्या कर रहे हैं। उन्होंने मुझसे मुलाकात का समय मांगा है। मैंने उन्हें मुलाकात के लिए समय दिया है। वह एक जनप्रतिनिधि हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें आकर चर्चा करने दीजिए। आलोचना करना महत्वपूर्ण नहीं है – उन्हें ऐसा करने दीजिए – लेकिन साथ ही उन्हें समाधान भी सुझाना चाहिए। जब वे स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ कहते हैं, तो उन्हें समाधान भी बताना चाहिए। यदि उनका सुझाव व्यावहारिक है, तो हम उस पर विचार करेंगे।’’
बेंगलुरु में संपत्ति कर और संपत्ति खाता के मुद्दों को स्पष्ट करते हुए, शिवकुमार ने कहा, ‘‘बेंगलुरु में ए-खाता और बी-खाता पर बयान केवल एक टिप्पणी है और समाधान नहीं है। हमने इसकी पूरी जांच की है। भाजपा सरकार ने बी-खाता प्रणाली शुरू की थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब लोगों ने भूमि उपयोग परिवर्तन के बाद राजस्व भूमि खरीद ली है, लेकिन सुधार शुल्क का भुगतान नहीं किया है। इसलिए कोई उन्हें ऋण नहीं दे रहा है। मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे इमारत गिरा देनी चाहिए? इस तरह की समस्याएं हैं। हम संपत्तियों को नियमित नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें मजबूत बना रहे हैं।’’
पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के इस आरोप पर कि सरकार अत्यधिक शुल्क लगाकर जनता को लूट रही है, शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा, ‘‘अगर हम लूट रहे हैं तो उन्हें मेरी जेब से निकालने दीजिए।’’
“‘अगर चुनाव पारदर्शी होते तो थरूर अध्यक्ष होते’, राहुल गांधी पर BJP का तीखा हमला
28 Oct, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) पिछले कुछ महीनों से चुनाव आयोग (election Commission) और भाजपा (BJP) के ऊपर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भी उनके इन आरोपों का कड़ा जवाब दिया जा रहा है। अब भाजपा प्रवक्ता जयदीप शेरगिल (Jaideep Shergill) ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनावों में पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर के बीच में हुआ चुनाव अगर निष्पक्ष तरीके से होता तो आज कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शशि थरूर (Shashi Tharoor) होते। राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए शेरगिल ने कहा, “जिनके खुद के घर कांच के होते हैं, वह दूसरों के घरों में नुक्स नहीं निकालते।”
एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में भाजपा नेता ने दावा किया कि अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे नेताओं को तो मतदाता सूची ही नहीं बताई गई। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को बहुत कुछ जवाब देना है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के चुनाव हुए और खड़गे जीत गए। उस समय पर शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि मतदाता सूची कहाँ है? मनीष तिवारी ने खुलकर कहा कि मतदाता सूची सार्वजनिक करो। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने ऐसा नहीं किया। बाद में दोनों नेताओं ने कहा कि लगभग 500 नाम हटाए गए या जोड़े गए। इस पर पार्टी नेतृत्व ने जवाब दिया कि ‘नहीं’। कांग्रेस का हाल यह है कि वह पारदर्शिता की बात करेंगे, लेकिन थरूर, तिवारी, आपको वह मतदाता सूची नहीं मिलेगी।”
शेरगिल ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें वोट चोरी का आरोप लगाने से पहले अपनी पार्टी के चुनावों में पारदर्शिता बरतने की शुरुआत करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के वकील शेरगिल ने कहा, “कांग्रेस का संविधान कहता है कि हर तीन साल में मतदाता सूची में संशोधन किया जाना चाहिए। अगर कांग्रेस पार्टी में निष्पक्ष चुनाव होते, तो फिर थरूर को कांग्रेस पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष होते। अगर राहुल गांधी वोट चोरी के मुद्दे पर अड़े हुए हैं, तो बाकी आरोपों को भूल कर उन्हें सबसे पहले अपनी पार्टी की तरफ ध्यान देना चाहिए। अगर कांग्रेस पार्टी की मतदाता सूची में सब कुछ सही था, तो फिर उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?”
गौरतलब है कि 2022 में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कांग्रेस पार्टी के भीतर ही मतदान की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए पोस्ट में लिखा, “बहुत सम्मान के साथ, मधुसूदन मिस्त्री जी, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मतदाता सूची के बिना निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे हो सकते हैं? एक निष्पक्ष और स्वतंत्र प्रक्रिया का सार यह है कि मतदाताओं के नाम और पते पारदर्शी तरीके से पार्टी की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाने चाहिए।”
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