राजनीति
राजनाथ सिंह ने सराहा पुलिस का बलिदान और योगदान, नक्सलवाद पर कही ये बात
21 Oct, 2025 06:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने मंगलवार को दिल्ली (Delhi) स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial) पर पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम (Memorial Day Event) में हिस्सा लिया. यहां उन्होंने जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सेवा में पुलिसकर्मियों की ओर से दिए गए सर्वोच्च बलिदान (Ultimate Sacrifice) पर बात की.
राजनाथ ने कहा कि अगर सेना, देश की रक्षा करती है, तो पुलिस समाज की रक्षा करती है. सेना भारत की भौगोलिक अखंडता की रक्षा करती है, तो पुलिस भारत की सामाजिक अखंडता की रक्षा करती है.
उन्होंने कहा, “सेना हो या पुलिस, ये दोनों ही देश की सुरक्षा के अलग-अलग pillars हैं. इसलिए मेरा ऐसा मानना है, कि दुश्मन कोई भी हो, चाहे सीमा पार से आए, या हमारे बीच छिपा हो, जो भी व्यक्ति भारत की सुरक्षा के लिए खड़ा है, वह एक ही आत्मा का प्रतिनिधि है. सेना और पुलिस में बस मंच अलग है, लेकिन इनका मिशन एक ही है, राष्ट्र की रक्षा करना.
राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर लोग रात को चैन से सो पाते हैं, तो इसलिए कि उन्हें विश्वास होता है कि सीमा पर सेना है, और गली-मोहल्ले में पुलिस मुस्तैद है. यह विश्वास ही सुरक्षा की सबसे बड़ी परिभाषा है. यह विश्वास ही देश की स्थिरता की पहली शर्त है. आज देश के नागरिकों को भरोसा है, कि अगर मेरे साथ कुछ गलत हुआ, तो पुलिस खड़ी होगी. यह जो भरोसा है, यही हमारे देश की stability की नींव है.
नक्सलवाद पर बोलते हुए सिंह ने कहा, “एक लंबे समय तक, नक्सलवाद हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए समस्या रहा. एक समय था जब छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र इन सभी राज्यों के कई जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे. गांवों में स्कूल बंद थे, सड़कें नहीं थीं और लोग भय में जीते थे. लेकिन हमने ठान लिया कि इस समस्या को आगे नहीं बढ़ने देंगे. हमारी पुलिस, CRPF, BSF और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर जिस तरह संगठित तरीके से काम किया वह काबिल-ए-तारीफ है.
बिहार चुनाव से बाहर हुई झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और RJD पर धोखा देने का आरोप
21 Oct, 2025 01:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) से बाहर हो गई है. झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने महागठबंधन के प्रमुख दल कांग्रेस और आरजेडी पर धोखा देने का आरोप लगाया है. मंत्री ने कहा कि झामुमो इसका बदला जरूर लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी अब न तो बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगी और न ही महागठबंधन के किसी भी प्रत्याशी के प्रचार में भाग लेगी. माना जा रहा है कि आने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन महागठबंधन से इसका बदला लेंगे.
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि बिहार में कांग्रेस और राजद ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया. इन दोनों दलों ने उनके साथ राजनीतिक चालबाजी कर चुनावी मैदान में उतरने से रोका है. यह जेएमएम का नहीं, बल्कि झारखंड की जनता और आदिवासी जनता का अपमान है. उन्होंने कांग्रेस और राजद पर कांग्रेस पर राजनीतिक धोखा और अपमान करने का आरोप लगाया है.
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन ने आरेजेडी को सम्मान दिया था. उनकी पार्टी के विधायक को अपनी सरकार में मंत्री बनाया है. आरजेडी को हर सम्मान से नवाजा गया, लेकिन उन्हें इसका सिला नहीं मिला. राजद ने बिहार में उन्हें न तो सम्मान दिया और न ही उचित सीटें दी गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने जानबूझकर जेएमएम को चुनाव से दूर रखने के लिए चाल चली है.
मंत्री ने कहा कि 2019 में राष्ट्रीय जनता दल का झारखंड में एक ही विधायक था, फिर भी हमने उसे सम्मान दिया. आज चार विधायक होने के बाद भी उन्हें सरकार में जगह दी गई. इसके बाद भी उनके साथ राजद ने इस तरह बर्ताव किया. राजद ने बड़े ही शातिर तरीके से झारखंड मुक्ति मोर्चा को बिहार विधानसभा चुनाव से बाहर होने पर मजबूर किया है. आने वाले दिनों में राजद को इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी.
जेएमएम के बिहार विधानसभा चुनाव से बाहर होने के बाद महागठबंधन में दरार एक बड़ी दरार पड़ गई है. इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने स्पष्ट कहा कि अब पार्टी बिहार में महागठबंधन से अलग होकर अपनी राजनीतिक रणनीति बनाएगी. उन्होंने कहा कि झारखंड में भी गठबंधन पर दोबारा समीक्षा की जाएगी. यह दोहरी नीति अब नहीं चलेगी. एक तरफ झारखंड में हमारी ताकत से सरकार चले और दूसरी तरफ बिहार में हमें धोखा दिया जाए. अब यह स्वीकार नहीं किया जाएगा. बिहार में धोखा देने वालों को भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.
बिहार विधानसभा चुनाव में JMM के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि पार्टी ने मात्र दो दिन पहले अपने केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य के माध्यम से 6 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. फिर आखिर एकाएक ऐसा क्या हुआ जो इन्हें इस तरह का फैसला लेना पड़ा.
महागठबंधन के सीट शेयरिंग फॉर्मूले का ऐलान, जानें RJD-कांग्रेस में किसकी सीटें बढ़ी-घटीं
21 Oct, 2025 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: चुनाव (Election 2025) के आखिर में ही सही अब महागठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सामने आ गया है लेकिन इन में दिलचस्प बात यह है की 243 विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन के घटक दल 252 विधानसभा क्षेत्र में अपने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिया है यानि करीब 9 विधानसभा की सीट ऐसी है जहां महागठबंधन के घटक दल आपस में ही फाइट कर रहें है और उनके सामने है एनडीए का उम्मीदवार. किसी विधानसभा में राजद और कांग्रेस तो किसी पर कांग्रेस और VIP और किसी पर LEFT और कांग्रेस आमने-सामने अपने उम्मीदवारों को उतार दिया है.
महागठबंधन की सीट शेयरिंग, 2025 vs 2020
राजद ने अब 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, पिछले चुनाव में 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 75 जीती थीं
कांग्रेस ने अब 61 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, पिछले चुनाव में 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 19 जीती थीं
CPI ML ने अब 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, पिछले चुनाव में 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 12 जीती थीं
CPI ने अब 09 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, पिछले चुनाव में 06 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 2 जीती थीं
CPM ने अब 04 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, पिछले चुनाव में 04 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 2 जीती थीं
इस बार मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी ने 15 सीट पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जोकि पहली बार महागठबंधन के साथ जुड़ी है.
महागठबंधन के मुख्य दल राजद की ओर से तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव ने एक साथ 143 प्रत्याशियों के नामों की सूची जारी कर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए कि चाहे कुछ हो जाए, इस बार पार्टी 140 से ज्यादा सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी. लिस्ट में तेजस्वी यादव का नाम पहले नंबर पर है और वे खुद वैशाली जिले की राघोपुर सीट से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 लड़ेंगे. छपरा से भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव, कांटी से इस्माइल मंसूरी, दरभंगा से ललित यादव, मुंगेर से मुकेश यादव और हाजीपुर से देव कुमार चौरसिया को टिकट दिया है, हालांकि टिकट न मिलने से गुस्साए बागी नेता चुनावों में सिरदर्दी बन सकते हैं।
महागठबंधन में बगावत के सुर, टिकट से लेकर सड़क तक मचा भारी घमासान
21 Oct, 2025 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार(Bihar) विधानसभा चुनाव (assembly elections)के दूसरे और अंतिम चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया (Enrollment Process)पूरी होने में अब केवल एक दिन शेष है, लेकिन महागठबंधन (‘इंडिया’ गठबंधन) के भीतर असंतोष और मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस दोनों प्रमुख घटक दलों में टिकट वितरण को लेकर नाराज दावेदारों ने नेतृत्व पर टिकट बेचने तक के आरोप लगा दिए हैं। छह सहयोगी दलों वाले इस बहुदलीय गठबंधन ने अब तक मुख्यमंत्री पद के चेहरे और सीट बंटवारे का अंतिम फार्मूला भी स्पष्ट नहीं किया है।
इस बीच राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद अपने आवास पर लगातार प्रत्याशियों को पार्टी का चुनाव चिह्न दे रहे हैं, जिससे संगठन के भीतर असंतोष और बढ़ गया है। राजद महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल ने पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में परिहार सीट से नामांकन करने की घोषणा कर दी। उन्होंने ‘फेसबुक’ पर किए गए पोस्ट में भावनात्मक अंदाज में लिखा कि परिहार सीट से राजद प्रत्याशी स्मिता पूर्वे के ससुर रामचंद्र पूर्वे 2020 के चुनाव में उनकी हार के लिए जिम्मेदार थे। रामचंद्र पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।
पटना स्थित 10, सर्कुलर रोड बंगला रविवार को टिकट के दावेदारों और समर्थकों से खचाखच भरा रहा। जिनके नाम तय हुए वे जश्न मनाते नजर आए, जबकि उपेक्षित दावेदार आक्रोश प्रकट करते दिखे। यह सरकारी बंगला पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवंटित है और अब राजद का कार्यकारी कार्यालय बन गया है।
मधुबन सीट से पिछला चुनाव मामूली अंतर से हार चुके मदन प्रसाद साह टिकट नहीं मिलने की खबर सुनते ही रोने लगे। उन्होंने गुस्से में अपने कपड़े फाड़ डाले और सड़क पर लोटने लगे। रोते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह 1990 के दशक से लालू प्रसाद के समर्थक रहे हैं और “2020 का चुनाव लड़ने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी थी।”
साह ने तेजस्वी यादव पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “अहंकारी” बताया और आरोप लगाया कि टिकट एक “भाजपा एजेंट” को दिया गया है क्योंकि “राजद के एक राज्यसभा सदस्य ने अमित शाह से सौदा कर लिया है।” उनकी इस हरकत पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा, “लालू जी को चाहिए कि अपने घर के दरवाजे बंद रखें, कहीं ऐसा न हो कि गुस्साए कार्यकर्ता उनके कपड़े फाड़ दें।”
इसी तरह, बाराचट्टी सीट से टिकट की उम्मीद लगाए बैठी एक अन्य दावेदार उमा देवी भी 10, सर्कुलर रोड के बाहर रोती नजर आईं। उन्होंने कहा, “मैं 2005 से पार्टी से जुड़ी हूं। लालू जी, राबड़ी जी, मीसा दीदी और तेजस्वी भैया-सभी ने भरोसा दिलाया था कि मुझे टिकट मिलेगा। लेकिन टिकट ऐसे व्यक्ति को दे दिया गया है जो पैराशूट से उतरा है।” हालांकि उमा देवी ने टिकट के बदले धन लेन-देन के आरोप नहीं लगाए, लेकिन दोनों ने ही लालू प्रसाद पर विश्वास जताया और बगावत से इनकार किया।
कांग्रेस में भी स्थिति बेहतर नहीं रही। पार्टी के कसबा से मौजूदा विधायक मोहम्मद अफाक आलम को चौथी बार टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से असंतोष जताया। संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने आरोप लगाया कि कटिहार के एक मौजूदा विधायक ने “व्यक्तिगत दुश्मनी” के चलते उनका नाम काटवाया।
इस बीच एक ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है, जिसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसमें कथित रूप से आलम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार राम के बीच हुई बातचीत सुनी जा सकती है।
क्लिप में राम ने पूरी गड़बड़ी के लिए एआईसीसी के बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावरु को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि वह पुर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की सलाह पर काम कर रहे हैं, जिनकी पत्नी रंजीत रंजन छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य हैं।
उधर, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में भी सब कुछ ठीक नहीं दिखा। जद(यू) ने अमौर सीट से पूर्व सांसद साबिर अली को उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर अचानक सबको चौंका दिया था, लेकिन जल्द ही पार्टी ने यह निर्णय वापस ले लिया क्योंकि मौजूदा प्रत्याशी सबा जफर पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके थे और पर्चा वापस लेने के मूड में नहीं थे।
इस बीच राजग ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों से उसका चुनाव अभियान अगले सप्ताह से रफ्तार पकड़ लेगा।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के अनुसार, मोदी 24 अक्टूबर को समस्तीपुर में पहली चुनावी रैली करेंगे और उसी दिन बेगूसराय में दूसरी सभा को संबोधित करेंगे।
BJP नेता सिरवाल का अपनी ही पार्टी पर हमला, कहा- कश्मीरी पंडितों को राजनीतिक फायदे के लिए किया इस्तेमाल
21 Oct, 2025 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू । अपनी ही पार्टी पर विस्थापित कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) का पॉलिटिकल फायदे के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए, नाराज बीजेपी नेता जहांजैब सिरवाल (BJP leader Jahanzaib Sirwal) ने रविवार को पार्टी लीडरशिप (Leadership) से समुदाय के साथ लंबे समय से हो रहे अन्याय को दूर करने के लिए सही कदम उठाने की अपील की। पिछले साल अप्रैल में कांग्रेस (Congress) छोड़ने के बाद बीजेपी में शामिल हुए सिरवाल ने कहा, “यह समुदाय BJP के लिए सबसे मजबूत, फिर भी बिना पैसे वाले, बिना पहचाने और बिना पहचाने कैंपेन करने वालों में से रहा है। बीजेपी लीडरशिप ने पॉलिटिकल फायदे के लिए पार्लियामेंट में उनकी तकलीफ का 500 से ज्यादा बार जिक्र किया है और हर पॉलिटिकल दुश्मन के खिलाफ एक टूल के तौर पर इस्तेमाल किया है।”
उन्होंने कहा, “मैं पार्टी लीडरशिप से (कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ) लंबे समय से हो रहे अन्याय को दूर करने के लिए पक्के और सही कदम उठाने की अपील करता हूं। वे सिर्फ दिखावे या पार्लियामेंट्री बहसों में बार-बार जिक्र से ज्यादा के हकदार हैं।” इससे पहले, 3 अक्टूबर को, सिरवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुसलमानों के खिलाफ पुलिस के बदले वाले रवैये का हवाला देते हुए पार्टी से इस्तीफा देने की धमकी दी थी।
बीजेपी नेता ने कहा कि लीडरशिप को ऐसी पॉलिसी को प्राथमिकता देनी चाहिए जो कश्मीरी पंडितों की उनके वतन सुरक्षित वापसी पक्की करें, उनके अधिकार वापस दिलाएं, और उन्हें वह सुरक्षा और मौके दें जिनसे उन्हें बहुत लंबे समय से वंचित रखा गया है। सिरवाल ने यहां एक बयान में कहा, “वे ठोस कार्रवाई के हकदार हैं, जिसकी शुरुआत सीनियर नेताओं द्वारा उनके कैंपों का दौरा करके उनके संघर्षों को खुद देखने से हो, उसके बाद समुदाय के प्रतिनिधियों, जिनमें पार्टी के कुछ सदस्य भी शामिल हैं, के साथ मिलकर बातचीत हो, ताकि उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए एक पूरा रोडमैप बनाया जा सके।”
सिरवाल ने कहा कि उनके कैंपों के हालात, जिनमें सही घर, हेल्थकेयर और आर्थिक और सामाजिक तौर पर फिर से जुड़ने के मौके नहीं हैं, यह तीन दशकों से ज्यादा समय से चले आ रहे मानवीय संकट को सुलझाने में नाकामी को दिखाता है। कश्मीरी पंडितों के जाने को गहरी मानवीय त्रासदी बताते हुए, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं था। सिरवाल ने बयान में कहा, “परिवारों को उनके घरों से निकाल दिया गया, उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को उखाड़ फेंका गया, और उन्हें अपने ही देश में देश निकाला में रहने के लिए मजबूर किया गया, और अपर्याप्त सुविधाओं और अनदेखी वाले कैंपों में दशकों तक मुश्किलें झेलनी पड़ीं।” उन्होंने समुदाय की शिकायतों को दूर करने या उनके पुनर्वास की दिशा में काम करने के लिए उनके साथ सार्थक बातचीत की कमी की निंदा की।
UP में सियासी विवाद? अयोध्या दीपोत्सव से नदारद हुए दोनों डिप्टी सीएम
21 Oct, 2025 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की रामनगरी अयोध्या (Ayodhya) में भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम (Grand Diwali Festival) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को निमंत्रण न मिलने की वजह से वो नाराज बताए जा रहे हैं. वहीं, केशव प्रसाद मौर्य को निमंत्रण मिला था लेकिन सरकारी विज्ञापन में उनका नाम नहीं था. इसको लेकर उनकी नाराजगी है, जिसके कारण उन्होंने अयोध्या जाने का प्रोग्राम रद्द कर दिया. सरकार द्वारा जारी सरकारी विज्ञापन में भी दोनों के नाम नदारद हैं, जो इस विवाद को और हवा दे रही है.
दीपोत्सव 2017 से लगातार छोटी दीपावली के दिन मनाया जाता रहा है, जिसमें हमेशा राज्यपाल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम और पर्यटन मंत्री की मौजूदगी रहती है. लेकिन इस बार पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री जयवीर सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी सीएमों को दरकिनार करने की बात उठ रही है. सूत्रों के अनुसार, यह राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. आयोजन से जुड़े सरकारी विज्ञापन और प्रचार सामग्री में मुख्यमंत्री योगी की प्रमुखता से तस्वीरें तो हैं, लेकिन बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य का नाम या फोटो कहीं नजर नहीं आ रहा. यह आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा प्रायोजित है और जयवीर सिंह के पास इसकी पूरी जिम्मेदारी है.
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसको लेकर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि जनता पूछ रही है कि उप्र भाजपा सरकार में ‘उप मुख्यमंत्री’ के दोनों पद समाप्त कर दिये गए हैं क्या…विज्ञापन में कनिष्ठ मंत्रियों के नाम तो दिख रहे हैं लेकिन डिप्टी सीएम साहब लोगों के नहीं कहीं यहां भी ‘हाता नहीं भाता’ या ‘प्रभुत्ववादी सोच’ तो हावी नहीं हो गई. वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय ने इसे ‘राजनीतिक अपमान ‘ करार देते हुए कहा है कि भाजपा में आंतरिक कलह सतह पर आ रही है. यह दोनों डिप्टी सीएम का अपमान है. दोनों के पास कोई कोई पावर नहीं है.
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 143 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी राजद ने
21 Oct, 2025 08:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । बिहार विधानसभा चुनाव के लिए (For the Bihar Assembly Elections) राजद ने 143 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी (RJD released the list of 143 Candidates) ।
राजद की सूची में कई ऐसी सीटें हैं, जहां कांग्रेस भी उम्मीदवार उतार चुकी है। इस सूची में तेजस्वी यादव को राघोपुर विधानसभा सीट से राजद का प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं, बिहारीगंज से रेणु कुशवाहा, वारसलीगंज से अनिता देवी महतो, अलीनगर से विनोद मिश्रा और हाजीपुर से देव कुमार चौरसिया को प्रत्याशी बनाया गया है। सिवान से राजद ने अवध बिहारी चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा है। भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता शत्रुघ्न कुमार उर्फ खेसारी लाल छपरा से चुनावी मैदान में होंगे। जबकि, गरखा से सुरेंद्र राम, महुआ से मुकेश रौशन, बाढ़ से कर्मवीर सिंह, मोकामा से वीणा देवी, मनेर से भाई वीरेंद्र, हिलसा से शक्ति सिंह तथा दानापुर से राजद ने एक बार फिर रीतलाल राय को उम्मीदवार बनाया है।
इसी तरह राजद ने सुल्तानगंज से चंदन सिन्हा, रामगढ़ से अजित सिंह, कहलगांव से रजनीश भारती, रुपौली से बीमा भारती, शाहपुर से राहुल तिवारी और नरकटियागंज से दीपक यादव को चुनावी मैदान में उतारा है। इसके अलावा, राजद ने मोहनिया से श्वेता सुमन, भभुआ से बीरेंद्र कुशवाहा, चैनपुर से बृजकिशोर बिंद, सासाराम से सतेंद्र शाह, गोह से अमरेंद्र कुशवाहा, ओबरा से ऋषि कुमार और नबीनगर से अमोद चंद्रवंशी को प्रत्याशी बनाया है। जमुई से शमशाद आलम, बेलागंज से विश्वनाथ कुमार सिंह और टेकारी से अजय दांगी चुनावी मैदान में होंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। वहीं, मतगणना 14 नवंबर को होगी। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है।
उद्धव सेना की सलाह, कहा- तेजस्वी को बनाएं CM चेहरा, वरना बिहार में हो जाएगी महाराष्ट्र जैसी गलती
19 Oct, 2025 07:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार (Bihar) में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को महागठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी एक “बेहद लोकप्रिय उम्मीदवार” हैं और उनकी अगुवाई में महागठबंधन को मजबूती मिलेगी। साथ ही, प्रियंका ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन में हुई गलतियों को बिहार में दोहराए जाने के खिलाफ चेतावनी दी। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान दो चरणों में 6 नवंबर और 11 नवंबर को होगा, जबकि परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “महाराष्ट्र चुनाव में जो गलतियां हुईं, जैसे कि मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा न करना, साथ ही तीन गठबंधन सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर विवाद… ऐसी गलतियों को बिहार में नहीं दोहराया जाना चाहिए। तेजस्वी यादव एक बहुत लोकप्रिय उम्मीदवार हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “तेजस्वी यादव वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य तथाकथित मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के साथ कांटे की टक्कर में हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शानदार काम किया है। इसलिए यही समय है कि इंडिया गठबंधन के हिस्से के रूप में और इसकी भावना को ध्यान में रखते हुए, हम उस पार्टी का समर्थन करें जो मजबूत स्थिति में है। तेजस्वी यादव को समर्थन दिया जाना चाहिए, उनकी मदद की जानी चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में घोषित किया जाना चाहिए।”
कांग्रेस ने जारी की 48 उम्मीदवारों की पहली सूची
इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपने 48 उम्मीदवारों की पहली सूची गुरुवार को जारी की। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) प्रमुख राजेश राम कुटुंबा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) नेता शकील अहमद खान कदवा निर्वाचन क्षेत्र से अपनी किस्मत आजमाएंगे।
कुल 48 उम्मीदवारों में से 24 पहले चरण और 24 दूसरे चरण के चुनाव में हिस्सा लेंगे। पार्टी ने कहा कि शेष उम्मीदवारों के नाम जल्द ही घोषित किए जाएंगे। केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) द्वारा अनुमोदित सूची में बगहा से जयेश मंगल सिंह, नौतन से अमित गिरी, चनपटिया से अभिषेक रंजन, बेतिया से वसी अहमद, रीगा से अमित कुमार सिंह ‘टुन्ना’, खगड़िया से डॉ. चंदन यादव और भागलपुर से अजीत कुमार शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।
‘वे सनातन से जितना दूर जाएंगे, मतदाता उनसे उतना ही दूर होंगे’, कर्नाटक सीएम के बयान पर संघ का पलटवार
19 Oct, 2025 06:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगलूरू। कर्नाटक (Karnataka) के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (CM Siddaramaiah) के सनातन (Sanatana) को लेकर दिए गए बयान पर विवाद हो गया है। भाजपा (BJP) और संघ (RSS) के नेताओं ने सीएम सिद्धारमैया के बयान पर पलटवार किया है। दरअसल सीएम सिद्धारमैया ने अपने एक बयान में लोगों से सनातनियों की संगति से दूर रहने की अपील की है। भाजपा और संघ के नेताओं ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और दावा किया कि सिद्धारमैया अपनी सरकार की विफलता से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।
सिद्धारमैया के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद जगदीश शेट्टार ने सीएम पर निशाना साधते हुए कहा, ‘केवल अपनी सुविधा के लिए वह ये सभी बयान दे रहे हैं, क्योंकि उनका प्रशासन और कानून-व्यवस्था विफल है। भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है, इसलिए, ध्यान भटकाने के लिए, वे आरएसएस के खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत के आरोप लगा रहे हैं।’
विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने सीएम के बयान पर कहा, ‘कर्नाटक के मुख्यमंत्री, जिनके माता-पिता के नाम में ‘राम’ है, जिनकी पत्नी का नाम ‘पार्वती’ है और जो खुद सिद्धारमैया कहलाते हैं, लोगों को ‘सनातनियों’ की संगति से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। उनके मंत्रिमंडल के मंत्री क्या कहते हैं? सनातन को खत्म कर दो क्योंकि यह डेंगू और मलेरिया फैलाता है और वे आरएसएस और बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाते हैं। यह कैसी मानसिकता है? वे सनातन से जितना दूर जाएंगे, उनके मतदाता उनसे उतना ही दूर होते जाएंगे। वे यह बात क्यों नहीं समझ पा रहे?’
दरअसल सीएम सिद्धारमैया ने अपने एक बयान में लोगों से अपील करते हुए कहा कि, ‘अपनी संगति सही रखें। उन लोगों के साथ जुड़ें जो समाज के लिए खड़े हैं, न कि उन लोगों के साथ जो सामाजिक बदलाव का विरोध करते हैं, जैसे सनातनी’। सिद्धारमैया ने नागरिकों से समाज में प्रगतिशील और तार्किक ताकतों के साथ जुड़ने का आग्रह किया।
हमारे पूर्वजों ने दुनिया को संस्कृति-विज्ञान की शिक्षा दी, धर्मांतरण नहीं किया, संघ प्रमुख का बयान
19 Oct, 2025 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने रविवार को कहा कि प्राचीन काल (Ancient Times) में भारतीयों (Indians ) ने संस्कृति (Culture) और विज्ञान का प्रचार करने के लिए दुनिया भर की यात्रा की, लेकिन कभी किसी पर विजय प्राप्त नहीं की और न ही किया धर्मांतरण किया। ‘आर्य युग विषय कोष विश्वकोश’ के विमोचन के अवसर पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि कई आक्रमणकारियों ने भारत को लूटा और गुलाम बनाया, और हम पर आक्रमण करने वाले अंतिम आक्रमणकारियों ने भारतीयों के मन को लूटा।
मोहन भागवत ने कहा, ‘हमारे पूर्वजों ने मेक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की और दुनिया को विज्ञान और संस्कृति की शिक्षा दी। उन्होंने न किसी का धर्मांतरण किया और न ही किसी पर विजय प्राप्त की। हम सद्भावना और एकता का संदेश लेकर गए।’ उन्होंने कहा, ‘कई आक्रमणकारी आए और हमें लूटा और गुलाम बनाया। आक्रमण करने वाले अंतिम आक्रमणकारियों (अंग्रेजों ने) ने हमारे मन को लूटा। जिससे हम अपनी ताकत और दुनिया के साथ साझा करने की क्षमता भूल गए।’ भागवत ने कहा, ‘आध्यात्मिक ज्ञान अभी भी फल-फूल रहा है और आर्यव्रत के वंशज होने के नाते हमारे पास विज्ञान और हथियार, शक्ति और सामर्थ्य, विश्वास और ज्ञान है।’
राहुल गांधी को ‘राष्ट्रीय आपदा’ बताने वाले अनुपम को कांग्रेस ने बिहार में दिया टिकट, पुराना पोस्ट वायरल
19 Oct, 2025 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार चुनाव (Bihar chunav) में सुपौल विधानसभा क्षेत्र (Supaul Assembly) से कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने अनुपम (Anupam) को अपना उम्मीदवार (candidate) बनाया है। पार्टी की तरफ से टिकट की घोषणा होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi), कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) का आभार व्यक्त किया। लेकिन इसी सोशल मीडिया पेज से अनुपम का एक पुराना पोस्ट भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह राहुल गांधी को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की वकालत करते नजर आ रहे हैं। हालांकि अब उनकी तरफ से यह पोस्ट डिलीट कर दिया गया है।
जून 2023 के इस पोस्ट में अनुपम सवाल पूछते हुए देखे जा रहे हैं, जिसमें वह लिखते हैं, “क्यूं न राहुल गांधी को ही राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया जाए।” अनुपम के इस पोस्ट पर अभी तक पार्टी की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अनुपम के सोशल मीडिया हैंडल से अब उस पोस्ट को हटा दिया गया है।
आपको बता दें सितंबर 2024 में कांग्रेस में शामिल होने से पहले अनुपम ‘युवा हल्ला बोल’ नामक आंदोलन के अध्यक्ष थे। वह लगातार बेरोजगारी, युवाओं की समस्याएं, नीट पेपल लीक और पांच अभिशाप जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में हैं। पिछले साल सितंबर में बकौल अनुपम उन्होंने राहुल गांधी के विचारों से प्रेरित होकर कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि सुपौल सीट पर 2020 के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के ब्रिजेंद्र प्रसाद यादव ने जीत दर्ज की थी।
इससे पहले कांग्रेस पार्टी की तरफ से टिकट मिलने के बाद अनुपम ने राहुल गांधी को न्याय योद्धा बताते हुए मौका देने के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने लिखा, “यह सिर्फ एक टिकट भर नहीं है, ये सम्मान हर उस इंसान का है जिसने मुझे अपने गांव घर माटी की सेवा करने लायक बनाया। आंदोलन की ऊर्जा को पार्टी में लगाने और फिर मेरे गृहक्षेत्र सुपौल से बतौर उम्मीदवार मौका देने के लिए न्याय योद्धा राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी का दिल से आभार।”
बिहार में महागठबंधन को झटका, इस पार्टी ने तोड़ा नाता, अकेले लड़ेगी चुनाव
19 Oct, 2025 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बिहार चुनाव (Bihar elections) में महागठबंधन में तकरार के बीच अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गठबंधन ने नाता तोड़ने का ऐलान किया है. झारखंड (Jharkhand) में सत्तारूढ़ झामुमो ने शनिवार को घोषणा की कि वह बिहार विधानसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगा और छह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा. बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए चुनाव 6 नवंबर और 11 नवंबर को होंगे और मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी. झामुमो महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “पार्टी ने बिहार चुनाव अपने दम पर लड़ने का फैसला किया है. वह छह विधानसभा सीटों – चकाई, धमदाहा, कटोरिया (एसटी), मनिहारी (एसटी), जमुई और पीरपैंती – पर चुनाव लड़ेगी.” इन सीटों पर दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा.
बिहार चुनाव को लेकर JMM ने 20 स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी किया. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्टार प्रचारकों का नेतृत्व करेंगे. झामुमो के एक वरिष्ठ नेता ने शनिवार को कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने महागठबंधन से सीटों की मांग की थी, लेकिन महागठबंधन की ओर से उन्हें सीटें आवंटित नहीं की गयी. इस कारण पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
जेएमएम के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने यहां मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा, “हम महागठबंधन के साथ हैं और गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे. हम बिहार में महागठबंधन के नेताओं से आग्रह करते हैं कि वे गठबंधन में जेएमएम की हिस्सेदारी की घोषणा जल्द से जल्द करें, क्योंकि नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.”
उन्होंने कहा कि पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपनी तैयारियां भी पूरी कर ली हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड चुनाव में, जेएमएम ने अपने गठबंधन सहयोगियों – कांग्रेस, राजद, भाकपा (माले) एल – को “सम्मानजनक हिस्सा” दिया था. भट्टाचार्य ने कहा, “इसलिए, हम बिहार चुनाव में भी जेएमएम के लिए सम्मानजनक सीटों की उम्मीद करते हैं.”
उन्होंने कहा कि 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को सात सीटें दी गईं, लेकिन वह केवल एक चतरा सीट ही जीत पाई. भट्टाचार्य ने कहा, “लेकिन, हमने झारखंड में गठबंधन सरकार में राजद के एक विधायक को पांच साल के लिए मंत्री बनाया. 2024 के चुनाव में, हमने झारखंड की पांच प्रतिशत सीटें, यानी छह, राजद को दीं. चुनाव जीतने वाले चार सदस्यों में से एक को गठबंधन धर्म निभाते हुए मंत्री बनाया गया.”
उन्होंने कहा कि झामुमो मजबूती से चुनाव लड़ना जानता है, खासकर भाजपा के खिलाफ. उन्होंने कहा, “हम गठबंधन सहयोगियों के बीच किसी भी तरह का भ्रम नहीं चाहते हैं, क्योंकि इससे दूसरों को फायदा उठाने का मौका मिल सकता है. इसलिए, हम चाहते हैं कि हमारी केंद्रीय समिति की बैठक तक सब कुछ सुलझा लिया जाए. बिहार में कई सीटें ऐसी हैं जहां अगर हम उनकी मदद नहीं करते हैं और हमारे नेता प्रचार नहीं करते हैं, तो इससे महागठबंधन को भारी नुकसान होगा.”
कर्नाटक में RSS के साथ अन्य संगठनों पर भी लागू होगा बैन वाला निर्णय, सिद्धारमैया सरकार ने दी सफाई
19 Oct, 2025 09:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु । कर्नाटक (Karnataka) में सार्वजनिक और सरकारी स्थलों पर आयोजित करने पर प्रतिबंध केवल आरएसएस (RSS) के लिए नहीं है। यह बात कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) ने कही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इजाजत के बिना किसी भी संगठन को ऐसे आयोजन की अनुमति नहीं है। सिद्धारमैया ने कहा कि वास्तव में यह नियम भाजपा के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने बनाया था। गौरतलब है कि कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए नियम बनाने का निर्णय लिया। इन गतिविधियों में सड़कों पर मार्च करना और सार्वजनिक स्थानों तथा सरकारी परिसरों में कार्यक्रम आयोजित करना भी शामिल है।
फैसले की हो रही आलोचना
कर्नाटक सरकार के इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खरगे द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को लिखे गए एक पत्र के आधार पर लिया गया, जिसमें उन्होंने आरएसएस और इससे संबद्ध संगठनों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। वहीं, इस मामले पर भाजपा की आलोचना का जवाब देने के लिए, सरकार ने तत्कालीन भाजपा प्रशासन द्वारा जारी 2013 का एक सर्कुलर पेश किया। इसमें स्कूल परिसर और उससे जुड़े खेल के मैदानों का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए सीमित किया गया था।
प्रियंक खरगे ने क्या कहा था
इससे पहले इस नियम पर आरएसएस का नाम लिए बिना प्रियंक खरगे ने कहा था कि हम किसी संगठन को नियंत्रित नहीं कर सकते। लेकिन अब से आप सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर जो चाहे नहीं कर सकते। आपको जो भी करना है, वह सरकार की अनुमति लेने के बाद ही करना होगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार पर निर्भर करेगा कि वह ऐसी गतिविधियों को अनुमति देती है या नहीं।
मंत्री ने कहा कि अनुमति देने के लिए कुछ मानक हैं। उन्होंने कहा कि आप केवल अधिकारियों को सूचना देकर सड़क पर लाठी लहराते हुए नहीं चल सकते या पथ संचलन नहीं कर सकते। ये सभी चीजें हमारे द्वारा लागू किए जाने वाले नियमों का हिस्सा होंगी।
शिवाजी पार्क में साथ नजर आए ठाकरे ब्रदर्स, दीपोत्सव में एकता का संदेश, गठबंधन की चर्चा तेज
19 Oct, 2025 08:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) के राजनैतिक गलियारों में ठाकरे भाइयों (Thackeray brothers) की बढ़ती नजदीकी साफ तौर पर देखी जा रही है। इसी बीच विरोधियों के सामने एकता का मजबूती के साथ प्रदर्शन करने के लिए उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) शुक्रवार शाम मुंबई के शिवाजी पार्क में एक साथ दीपोत्सव कार्यक्रम मनाते नजर आए। आगामी बीएमसी चुनावों के ठीक पहले मराठी बहुल दादर इलाके में आयोजित यह कार्यक्रम ठाकरे भाइयों के बीच सुलह का संकेत दे रही थी।
शुक्रवार को सबसे पहले उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे के निज निवास शिवतीर्थ पर जाकर दिवाली थीम कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके बाद दोनों एक ही कार से शिवाजी पार्क पहुंचे। यहां भीड़ ने दोनों नेताओं का उनके परिवार समेत जोरदार जयकारों के साथ स्वागत किया। उद्धव ने समारोह के दौरान कहा कि आज की दिवाली खास है। मराठी मानुष की एकता और उसका प्रकाश सभी के जीवन में खुशियां लाएगा।
इस कार्यक्रम से पहले शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लिखा, “छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क एक बार फिर चकाचौंध भरी रोशनी में जगमगाने के लिए तैयार है! ख़ास बात यह है कि इस दीपोत्सव के दौरान होने वाली रोशनी हमारे पार्क की सुंदरता को और बढ़ा देती है, और इसे और भी ख़ास बना देती है।”
इस कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह की कोई राजनैतिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस कार्यक्रम ने राजनैतिक विश्लेषकों के सामने ठाकरे परिवार की एकता को लेकर कोई संदेह नहीं छोड़ा है।
गौरतलब है कि 1997 से बीएमसी पर अपना दबदबा कायम रखने वाली शिवसेना को टूट के बाद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के लिए, राज की मनसे के साथ एक संभावित समझौता मराठी वोटों को एकजुट करने में मदद कर सकता है, जो 2005 में अविभाजित शिवसेना से राज के बाहर होने के बाद विभाजित हो गए थे।
विश्लेषकों का कहना है कि मनसे का कुल वोट शेयर सीमित है, लेकिन मराठी भाषी वार्डों में इसका केंद्रित प्रभाव करीबी मुकाबलों में निर्णायक साबित हो सकता है – खासकर मुंबई के लगभग 90 वार्डों में। मनसे और सेना (यूबीटी) दोनों को 2024 के विधानसभा चुनावों में चुनावी झटका लगा, जिसमें मनसे एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। तब से, दोनों नेता कई बार मिल चुके हैं और कथित तौर पर सहयोग का रास्ता तलाश रहे हैं।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ली चुनावी बैठक, भाजपा कार्यकर्ताओं को दिया जीत का मंत्र
18 Oct, 2025 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। विधानसभा चुनाव प्रचार में बिहार पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, लोकसभा सांसद एवं छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज लालगंज विधानसभा क्षेत्र (जिला वैशाली) में महत्वपूर्ण चुनावी बैठक ली.इस बैठक में लालगंज के वर्तमान विधायक और भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री सतीश द्विवेदी, मंडल अध्यक्ष, पार्टी पदाधिकारी एवं युवा मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संगठन मजबूती को लेकर हुई चर्चा
बैठक में विधानसभा क्षेत्र में संगठन की मजबूती, आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति और बूथ स्तर तक पार्टी के जनसंपर्क अभियान को गति देने पर विस्तृत से विचार-विमर्श हुआ. सांसद अग्रवाल ने कहा कि भाजपा की सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे जनता के बीच जाकर केंद्र सरकार की उपलब्धियों और विकास योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाएं।
‘कार्यकर्ता ही रीढ़ की हड्डी हैं’
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ की हड्डी है और एकजुट होकर ही बिहार में भाजपा सरकार बनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं।
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