राजनीति
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस: 70 वर्षों की गौरवगाथा पर झूम उठा भोपाल, लोक कलाकारों ने बांधा समां
1 Nov, 2025 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्यप्रदेश आज 1 नवंबर 2025 को 70 साल का हो गया है. 70वें स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी जिलों में धूमधाम से अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. इस मौके पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजिक कार्यक्रम में CM डॉ. मोहन यादव पहुंचे. यहां लोक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्यों से उनका स्वागत किया.
विकास प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
मध्यप्रदेश के 70वें स्थापना दिवस के मौके पर CM डॉ. मोहन यादव ने विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. इस मौके पर CM मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं.
‘राज्य ने 70 साल की यात्रा में प्रगति और उन्नति की‘
इस मौके पर CM डॉ. मोहन यादव ने कहा- ‘देशवासियों और प्रदेशवासियों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. राज्य ने 70 साल की यात्रा में प्रगति और उन्नति की. मध्य प्रदेश समृद्ध राज्य बना.योजना की दृष्टि से अलग प्रकार का हमारा राज्य निकालकर आया. कई क्षेत्रों में हमने नए-नए लक्ष हासिल किए. हमारे 20 साल की यात्रा 55 साल पर भारी पड़ती है. ईरान के अंदर अगर कोई मंदिर है तो उसको प्रदर्शनी के माध्यम से यहां दिखाया जा रहा है. विक्रम आदित्य जीवन काल को बताने के लिए सरकार काम कर रही है.’
‘देश के साथ कदम से कदम मिलाकर मध्य प्रदेश’
उन्होंने आगे कहा- ‘प्रदेश के अतीत को भी बताने का प्रयास प्रदर्शनी के माध्यम से किया जा रहा है.सभी गौरवशाली मध्य प्रदेश की अतीत को देखें. देश के साथ कदम से कदम मिलाकर मध्य प्रदेश जैसे चल रहा है उसकी लघु प्रदर्शनी यहां दिखाई दे रही है. युवाओं को रोजगार देने पर प्रमोशन देने पर सरकार कम कर रही है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के जन्मदिन तक प्रदेश में कई विकास के काम किए जाएंगे. हम उद्योग और रोजगार वर्ष मना रहे हैं. आज देव दिवाली है. मेरी अपनी ओर से सभी को देव दिवाली की बधाई. संस्कृति धाराओं को विकसित करने का काम कर रहे हैं. कल विक्रमादित्य के महानाट्य का मंचन होगा.’
कांग्रेस में ढाई साल का फॉर्मूला? सिद्धारमैया से कुर्सी छीन सकते हैं DK शिवकुमार!
1 Nov, 2025 12:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक की सियासत में इन दिनों एक सवाल हर जुबान पर है कि अगला सीएम कौन? मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा हो रहा है. इसके ठीक बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को कमान सौंपने की खबरें जोरों पर हैं. स्थानीय मीडिया में दावा है कि 21 या 26 नवंबर को शिवकुमार विधानसौध में सीएम पद की शपथ ले सकते हैं. लेकिन जब ये सवाल सिद्धारमैया से पूछा गया, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा. आइए क्या है पूरा मामला विस्तार से जानते हैं.
ढाई साल का फॉर्मूला–सच या अफवाह?
2023 में कांग्रेस ने कर्नाटक जीता था. उस वक्त पार्टी के अंदर दो बड़े चेहरे थे, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार. दोनों के बीच कथित तौर पर एक समझौता हुआ था कि पहले ढाई साल सिद्धारमैया, अगले ढाई साल शिवकुमार. अब जब 20 नवंबर को सिद्धारमैया का आधा कार्यकाल खत्म हो रहा है, तो ये फॉर्मूला फिर से चर्चा में है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये लिखित समझौता था या सिर्फ राजनीतिक गलियारे की बातें?
सिद्धारमैया ने क्या कहा?
शुक्रवार को विधानसौध में पत्रकारों ने सिद्धारमैया से पूछा, “सर, खबर है कि 21 या 26 नवंबर को शिवकुमार सीएम बन जाएंगे?” बस इतना सुनते ही सिद्धारमैया भड़क गए. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “ये किसने बताया? क्या शिवकुमार ने तुम्हें फोन करके कहा? ये सब बकवास है.” फिर बिना कुछ और बोले, वो चले गए. ये पहली बार नहीं जब सिद्धारमैया ने ऐसी खबरों पर नाराजगी जताई हो. लेकिन इस बार उनकी बौखलाहट ने सबको हैरान कर दिया.
शिवकुमार चुप, लेकिन दावा मजबूत
दूसरी तरफ डीके शिवकुमार खामोश हैं. न उन्होंने सिद्धारमैया पर कोई तंज कसा, न ही कोई बयान दिया. लेकिन उनके करीबी कहते हैं कि डीके ने हाईकमान से साफ कह दिया है कि 20 नवंबर के बाद कुर्सी उनकी है.” शिवकुमार वोक्कलिगा समुदाय के बड़े नेता हैं. उनके पास पार्टी संगठन की कमान है. 2023 में उन्होंने सिद्धारमैया को सीएम बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. अब वो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. सिद्धारमैया खेमे के नेता खुलकर सामने आ गए हैं. आवास मंत्री बीजेड जमीर अहमद खान ने कहा कि सिद्धारमैया 2028 तक सीएम रहेंगे. शिवकुमार को इंतजार करना चाहिए. वो बीजेपी में नहीं जाएंगे, उनका खून कांग्रेस का है. समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा ने कहा, “हमें दलित सीएम चाहिए. आंदोलन जारी रहेगा. लेकिन फैसला हाईकमान करेगा.” यानी एक तरफ शिवकुमार की दावेदारी, दूसरी तरफ दलित चेहरों की मांग और बीच में सिद्धारमैया की कुर्सी.
हाईकमान की चुप्पी
सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है. कांग्रेस आलाकमान अभी तक चुप हैं. पिछले हफ्ते खड़गे बेंगलुरु आए थे, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ. सूत्र बताते हैं कि हाईकमान 10 नवंबर तक स्थिति साफ कर सकता है. अगर शिवकुमार सीएम बने, तो सिद्धारमैया को क्या मिलेगा? क्या दलित नेताओं की नाराजगी पार्टी को नुकसान पहुंचाएगी और सबसे बड़ा सवाल कि क्या ये ढाई साल का फॉर्मूला सच में था?
एमपी स्थापना दिवस: तीन दिन तक रोशनी, रंग और रिदम का मेला, जुबिन नौटियाल देंगे लाइव परफॉर्मेंस
1 Nov, 2025 08:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश आज अपना 70वां स्थापना दिवस मना रहा है. इस मौके पर भोपाल में आयोजित अभ्युदय मध्य प्रदेश का शुभारंभ होगा, जिसमें समृद्ध, विकसित और सशक्त मध्य प्रदेश की झलक दिखेगी. इस बार स्थापना दिवस पर 3 दिन तक बिग इवेंट्स होंगे. पहले दिन उज्जैन के लिए पर्यटन हेलीकॉप्टर उड़ान भरेगा. वहीं, शाम को सिंगर जुबिन नौटियाल परफॉरमेंस देंगे. यही पर 2000 ड्रोन के जरिए मध्यप्रदेश की विरासत की झलक भी दिखेगी. स्थापना दिवस पर डॉ. मोहन यादव कई बड़ी घोषणाएं भी कर सकते हैं.
‘सरदार पटेल भी हैरान हो जाते…’, लौह पुरुष की जयंती पर कांग्रेस ने BJP-RSS पर साधा निशाना
31 Oct, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की जयंती पर कांग्रेस (Congress) ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि उनके निस्वार्थ नेता भी हैरान हो जाते हैं, अगर उन्हें पता चलता कि उनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। खुद पटेल के शब्दों में इस विचारधारा ने ऐसा माहौल बनाया, जिससे महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की हत्या जैसी खौफनाक घटना संभव हो सकी।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश (Jairam Ramesh) कहा, खासकर 2014 से दो लोगों का समूह (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह) और उनका तंत्र 2014 से इतिहास को बेधड़क तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। रमेश ने एक्स पर लिखा, आज जब कृतज्ञ राष्ट्र सरदार पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है, हमें याद रखना चाहिए कि 13 फरवरी 1949 को जवाहर लाल नेहरू ने गोधरा में सरदार पटेल की मूर्ति का अनावरण किया था, जहां उन्होंने अपना वकालत का करियर शुरू किया था। इस अवर नेहरू का भाषण दोबारा पढ़ना चाहिए, ताकि उनकी तीन दशकों से अधिक की मजबूत और गहरी साझेदारी को समझा जा सके।
रमेश ने कहा, सरदार पटेल की 75वीं जयंती के मौके पर नेहरू ने कहा था कि पटेल ने अपने लंबे और उल्लेखनीय सेवा रिकॉर्ड के बावजूद देश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला और उन्होंने राष्ट्रीय गतिविधियों में उनके साथ तीस वर्षों का साथ साझा किया। इन वर्षों में उठापटक और बड़ी घटनाओं के बीच पटेल एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे, जिनसे बड़ी संख्या में लोग मार्गदर्शन की उम्मीद रखते थे।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि 19 सितंबर 1963 को तत्कालीन राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन ने संसद भवन और चुनाव आयोग कार्यालय के पास नई दिल्ली के प्रमुख गोल चौराहे पर सरदार पटेल की मूर्ति का अनावरण किया था। नेहरू भी उस समय मौजूद थे और उन्होंने मूर्ति पर ‘भारत की एकता के शिल्पकार’ का सरल लेकिन शक्तिशाली शब्द चुना। उन्होंने याद दिलाया कि 31 अक्तूबर 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की शताब्दी वर्ष समापन समारोह की अध्यक्षता की और उनकी अनेक उपलब्धियों और योगदानों को व्यापक रूप से याद किया।
रमेश ने कहा, 2014 से खासकर, इतिहास दो लोगों के समूह (जी2) और उनके तंत्र द्वारा बेधड़क विकृत और गलत पेश किया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने आगे कहा, निस्वार्थ नेता उनके गलत इस्तेमाल से हैरान हो जाते, क्योंकि इस विचारधारा स्वतंत्रता संग्राम या संविधान निर्माण में कोई भूमिका नहीं निभाई और पटेल के शब्दों में, इसने ऐसा माहौल बनाया जो 30 जनवरी 1948 की खौफनाक त्रासदी को संभव बना सका।
‘सारे बवाल की जड़ RSS, लगना चाहिए बैन’, मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
31 Oct, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर फिर से प्रतिबंध (Banned) लगाया जाना चाहिए क्योंकि देश में कानून व्यवस्था (Law and Order) से जुड़ी ज्यादातर गड़बड़ियों के लिए यही संगठन जिम्मेदार है. उन्होंने यह भी कहा कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं.
खरगे ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा, ”मेरा व्यक्तिगत विचार है कि प्रतिबंध लगाना चाहिए.” उन्होंने दावा किया कि देश में कानून व्यवस्था से जुड़ी ज्यादातर गड़बड़ियों के लिए आरएसएस और भाजपा जिम्मेदार हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी झूठ को सच में बदलने में माहिर हैं. उन्होंने कहा कि पटेल ने भारत के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक स्वरूप की रक्षा के लिए आरएसएस को प्रतिबंधित किया था. उन्होंने कहा, ”आप हर चीज के लिए कांग्रेस को दोष देते हैं तो अपनी करतूत को भी देख लीजिए.”
खरगे ने कहा, ”सच को जितना मिटाने की कोशिश कर लो, वह नहीं मिटेगा.” उनका कहना था, ”वे (प्रधानमंत्री और भाजपा) हमेशा स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के बीच झगड़ा दिखाने की कोशिश करते हैं, जबकि नेहरू और पटेल के बहुत अच्छे रिश्ते थे और पटेल ने नेहरू को जनता का नेता बताया था.”
उन्होंने कहा, ”भाजपा से कहना चाहता हूं कि दही में कंकड़ मत ढूंढो. आपका इतिहास सबको मालूम है. नेहरू ने ही सबसे पहले गुजरात में पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया था और सरदार सरोवर बांध की बुनियाद रखी थी.”
तमिलनाडु में ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाला, वसूले गए ₹888 करोड़; BJP नेता ने बताई एक-एक बात
31 Oct, 2025 02:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैन्नई। तमिलनाडु की राजनीति (Politics of Tamilnadu) में इन दिनों ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाले (‘Cash for Jobs’ scam) का बोलबाला है। इस मुद्दे पर सियासी हंगामा तेज हो गया है और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। मामले के खुलासे के बाद भाजपा ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी सिलसिले में भाजपा नेता के अन्नामलाई ने बुधवार को डीएमके सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी अब भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुकी है। इसी को लेकर अन्नामलाई ने एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें दो समाचार लेखों का जिक्र करते हुए दावा किया कि नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति (MAWS) विभाग में 2538 पदों के लिए भारी-भरकम ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाला हुआ। आरोप है कि प्रत्येक पद के लिए उम्मीदवारों से 35 लाख रुपये की रिश्वत वसूली गई।
उन्होंने आगे बताया कि 2024 की शुरुआत में इन पदों के लिए 1.12 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, लेकिन हजारों योग्य युवाओं को मौका नहीं मिला क्योंकि वे इतनी मोटी रकम नहीं दे पाए। अन्नामलाई ने जोर देकर कहा कि यह ताजा खुलासा कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के शासनकाल में व्याप्त व्यवस्थित भ्रष्टाचार का एक चिंताजनक हिस्सा है।
एक्स पोस्ट में अन्नामलाई ने लिखा कि स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार एक के बाद एक घोटालों की बाढ़ ला रही है। अब ईडी ने एक और बड़े कांड का पर्दाफाश किया है। MAWS विभाग के 2538 पदों से जुड़ा बेशर्म ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाला, जहां प्रति पद 35 लाख रुपये की रिश्वत ली गई। 2024 में 1.12 लाख आवेदकों में से हजारों मेहनती युवाओं के सपने कुचल दिए गए, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे इस लालच की भेंट नहीं चढ़ सके। यह 888 करोड़ का घोटाला स्टालिन राज की पहचान, व्यवस्थित भ्रष्टाचार का हिस्सा है।
इस दौरान भाजपा नेता ने डीएमके पर ‘भ्रष्टाचार का नेटवर्क’ चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने उल्लेख किया कि 6 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री स्टालिन ने ‘नौकरी सृजन’ का उत्सव मनाते हुए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे और फोटो खिंचवाईं। अन्नामलाई के मुताबिक, ये पद हवाला नेटवर्क से जुड़े व्यापक भ्रष्टाचार के जरिए बेचे गए थे। ईडी ने विभाग में ‘व्यवस्थित भ्रष्टाचार नेटवर्क’ उजागर किया, जो मंत्री केएन नेहरू के भाई एन रविचंद्रन और उनके ट्रू वैल्यू होम्स (टीवीएच) समूह से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले की जांच में सामने आया।
अन्नामलाई ने स्टालिन और उनके प्रशासन से जवाब मांगा तथा न्यायपालिका की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की। पोस्ट में वे लिखते हैं कि यह विडंबना ही है कि स्टालिन ने खुद इन उम्मीदवारों को पत्र सौंपे, लेकिन हकीकत में पद हवाला और भ्रष्टाचार के बाजार में बिके। डीएमके के बार-बार घोटालों से तंग आ चुके तमिलनाडु के लोगों को न्याय मिले, इसके लिए सीबीआई की जांच जरूरी है।
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ के अचानक इस्तीफे के 100 दिन पूरे, कांग्रेस ने मांगी सम्मानजनक विदाई
31 Oct, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस (Congress) ने एक बार फिर से पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) के इस्तीफे का मुद्दा उठाया और मांग की कि वे एक कम से कम फेयरवेल के हकदार हैं। कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि धनखड़ अपने इस्तीफे के 100 दिनों से पूरी तरह से चुप हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Congress General Secretary Jairam Ramesh) ने कहा कि भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक ऐसी घटना को ठीक 100 दिन हो गए हैं, जो पहले कभी नहीं हुई।
रमेश ने एक्स पर कहा, “अचानक और चौंकाने वाली बात यह है कि 21 जुलाई की देर रात, भारत के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। यह साफ था कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था – भले ही वह दिन-रात पीएम की तारीफ करते थे।” कांग्रेस नेता ने कहा कि 100 दिनों से, पूर्व वाइस प्रेसिडेंट जो रोजाना सुर्खियों में रहते थे, पूरी तरह चुप – अनदेखे और अनसुने हैं। रमेश ने आगे कहा कि पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, राज्यसभा के चेयरमैन के तौर पर, विपक्ष के अच्छे दोस्त नहीं थे।
कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, “वह लगातार और गलत तरीके से विपक्ष की खिंचाई करते थे। फिर भी, डेमोक्रेटिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, विपक्ष कह रहा है कि वह कम से कम एक फेयरवेल फंक्शन के हकदार हैं, जैसा कि उनके पहले के सभी नेताओं के साथ हुआ था। ऐसा नहीं हुआ है।” धनखड़ के इस्तीफे के बाद, कांग्रेस ने दावा किया था कि उपराष्ट्रपति पद से उनके इस्तीफे के पीछे के कारण उनके द्वारा बताई गई हेल्थ प्रॉब्लम से कहीं ज्यादा गहरे है। विपक्षी पार्टी ने सरकार से धनखड़ के इस्तीफे पर सफाई देने के लिए भी कहा था।
बता दें कि अचानक से बड़ा कदम उठाते हुए धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा और कहा कि वह तुरंत पद छोड़ रहे हैं। 74 साल के धनखड़ ने अगस्त 2022 में पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। वे राज्यसभा के चेयरमैन भी थे और उन्होंने संसद के मॉनसून सेशन के पहले दिन इस्तीफा दे दिया था। राज्यसभा चेयरमैन के तौर पर अपने अहम कार्यकाल में, धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ, जिसने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था। यह प्रस्ताव, जो आजाद भारत में किसी वाइस प्रेसिडेंट को हटाने का पहला प्रस्ताव था, बाद में राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने खारिज कर दिया था।
मोकामा में चुनावी तकरार, अनंत सिंह मर्डर केस में नामजद, दुलारचंद यादव हत्या से जुड़ा विवाद
31 Oct, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार(Bihar) विधानसभा चुनाव(assembly elections) की वोटिंग से पहले मोकामा(Mokama) से जेडीयू के प्रत्याशी एवं बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह(Former MLA Anant Singh) मर्डर केस (Murder Case)में फंस गए हैं। मोकामा से जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्षी के समर्थन में प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है। गुरुवार को मोकामा के टाल इलाके में स्थित हुए इस हत्याकांड के बाद क्षेत्र से मोकामा में विधानसभा का चुनाव खूनी रंजिश में बदल गया। टाल क्षेत्र में तनाव का माहौल है, पुलिस गांवों में कैंप कर रही है।
गुरुवार देर रात मृतक दुलारचंद यादव के पोते के बयान पर पुलिस ने अनंत सिंह, उनके दो भतीजों रणवीर और कर्मवीर समेत 5 लोगों पर हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज की। मृतक के परिजनों का आरोप है कि अनंत सिंह के लोगों ने पहले गोली मारी और फिर गाड़ी चढ़ाकर दुलारचंद की हत्या कर दी। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने बताया कि मोकामा के तारतर गांव के पास दो पक्षों के बीच मारपीट हुई। पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां 2 से 3 गाड़ियां खड़ी मिलीं। गाड़ियों के शीशे टूटा हुआ था। इसमें से एक गाड़ी में दुलारचंद यादव का शव पाया गया। दुलारचंद इस क्षेत्र के पूर्व में अपराधी रहे हैं। उन पर हत्या और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं।
हालांकि, जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह ने हत्या के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जब वह चुनाव प्रचार कर लौट रहे थे तो आगे निकल गए। पीछे रह गई उनके काफिले की गाड़ियों को जन सुराज पार्टी समर्थकों ने घेर लिया और ईंट पत्थर से हमला कर दिया था। अनंत सिंह ने इसे राजद नेता सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। वहीं, सूरजभान ने अनंत सिंह के आरोप पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। अनंत सिंह ने यह भी कहा कि झगड़े की पहल दुलारचंद यादव ने की थी।
मोकामा में कैसे हुआ बवाल?
दुलारचंद यादव का बाढ़ और मोकामा के टाल इलाके में काफी दबदबा था। खुशहाल चक के निकट प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी गुरुवार दोपहर बाद करीब 3:30 बजे अपने समर्थकों के साथ प्रचार कर रहे थे। दुलारचंद यादव भी उनके साथ थे। उसी रास्ते से अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ गुजर रहे थे। बताया जाता है कि दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच गाली गलौज शुरू हो गई। बात बढ़ने पर ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया। बाद में गोली भी चली और दुलारचंद यादव की मौत हो गई।
8 पूर्व मुख्यमंत्रियों के 10 रिश्तेदार मैदान में, लालू-राबड़ी के दोनों बेटे कर रहे जोरदार प्रचार
31 Oct, 2025 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । इस बार बिहार विधानसभा(Bihar Legislative Assembly) के चुनावी मैदान(electoral field) में आठ पूर्व मुख्यमंत्रियों के दस रिश्तेदार किस्मत आजमा(try your luck) रहे हैं। रसूखदार राजनीतिक घरानों से जुड़े ये वारिस आठ जिलों की दस सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं। इससे मधुबनी, वैशाली, जमुई, गया, सारण, बेगूसराय, पश्चिम चंपारण और समस्तीपुर में चुनावी लड़ाई हाईप्रोफाइल हो गई है। इन दावेदारों में से दो महिला प्रत्याशी हैं, जो पहली बार चुनाव लड़ रही हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पोती डॉ. करिश्मा राय और जननायक कर्पूरी ठाकुर की पोती डॉ. जागृति ठाकुर शामिल हैं।
राजद के टिकट पर डॉ. करिश्मा राय परसा (सारण) और मोरवा (समस्तीपुर) सीट पर डॉ. जागृति ठाकुर जन सुराज की उम्मीदवार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पोती डॉ. करिश्मा राय तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय की चचेरी बहन हैं। डॉ. जागृति केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर की भतीजी हैं। इनके अलावा, पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के तीन रिश्तेदार चुनावी रेस में हैं।
इनमें समधन ज्योति गुप्ता बाराचट्टी (गया), बहू दीपा मांझी इमामगंज (गया) और दामाद प्रफुल्ल मांझी सिकंदरा (जमुई) की सीट पर हम के प्रत्याशी हैं। पूर्व सीएम सतीश प्रसाद सिंह के पुत्र सुशील कुमार बेगूसराय की चेरिया बरियारपुर सीट से राजद के प्रत्याशी हैं। पूर्व सीएम केदार पांडेय के पोते शाश्वत नरकटियागंज से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय के पोता शाश्वत केदार नरकटियागंज से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। शाश्वत ने पहली बार विधानसभा सीट पर अपनी दावेदारी पेश की है।
पिछले लोकसभा चुनाव में शाश्वत कांग्रेस के टिकट पर वाल्मीकिनगर सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। शाश्वत के पिता मनोज पांडेय बेतिया से सांसद रहे हैं। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा झंझारपुर सीट से भाजपा के प्रत्याशी हैं। झंझारपुर विस सीट बिहार के चुनाव में खास महत्व रखती है। कभी इसी सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले जगन्नाथ मिश्र तीन बार मुख्यमंत्री बने। नीतीश अब तक तीन बार निर्वाचित हो चुके हैं।
● लालू-राबड़ी के दोनों पुत्र वैशाली में राजद व जजद से लड़ रहे
● इनमें दो महिला प्रत्याशी पहली बार लड़ रहीं चुनाव
● दारोगा प्रसाद राय और कर्पूरी ठाकुर की पोती शामिल
● सर्वाधिक जीतनराम मांझी के तीन रिश्तेदार उम्मीदवार
● पूर्व सीएम सतीश प्र. सिंह के पुत्र सुशील कुमार भी रेस में
● वारिस आठ जिलों की दस सीटों पर कर रहे हैं दावेदारी
वैशाली जिले की दो सीटों महुआ और राघोपुर पर पूरे देश की नजर है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के दोनों पुत्र अलग-अलग सीटों पर दो विभिन्न दलों से प्रत्याशी हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राघोपुर विस सीट पर राजद के उम्मीदवार हैं। उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव (विधायक) अपनी नवगठित जनशक्ति जनता दल से महुआ सीट से प्रत्याशी हैं।
बिहार में फायरिंग से मचा हड़कंप, लालू यादव के करीबी की गोली लगने से मौत
31 Oct, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बिहार (Bihar) के मोकामा विधानसभा क्षेत्र (Mokama Assembly Constituency) में गोलीबारी का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि इस गोलीबारी में आरजेडी के प्रमुख लालू यादव के करीबी और यादव महासंघ के अध्यक्ष दुलारचंद यादव को गोली लगने से मौत हो गई. गुरुवार की शाम को मोकामा विधानसभा क्षेत्र में जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया गया.
इस हमले में उनके चाचा एवं इलाके के पुराने बाहुबली दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि कई अन्य समर्थक घायल बताए जा रहे हैं. फायरिंग की यह घटना घोसवरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई है. मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि मृतक दुलारचंद यादव पहले आरजेडी में थे और लालू यादव के करीबी थे.
जानकारी के अनुसार, जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी अपने समर्थकों के साथ प्रचार अभियान से लौट रहे थे. इसी दौरान दूसरे प्रत्याशी के समर्थकों के साथ किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई. कहासुनी के बाद देखते ही देखते मामला बढ़ गया और हिंसक झड़प में बदल गया. जिसके बाद दोनों तरफ से अचानक गोलियां चलने लगीं. जिसमें एक गोली दुलारचंद यादव को लगी. गोली लगते ही वे मौके पर गिर पड़े और उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई.
गोलियों की आवाज से इलाके में दहशत फैल गई. इस दौरान कई वाहनों के शीशे भी टूट गए और मौके पर भगदड़ की स्थिति बन गई. स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने लगातार फायरिंग कर उन्हें भी पीछे हटा दिया. घटना की सूचना मिलते ही घोसवरी और मोकामा थाना पुलिस के साथ ही पटना जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे.
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. चुनावी माहौल में इस हमले से पूरे मोकामा क्षेत्र में तनाव व्याप्त है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की तलाश में छापेमारी जारी है.
तेज प्रताप यादव के बागी तेवर पर राबड़ी देवी का बड़ा बयान, बोलीं- वो अपनी जगह सही है
31 Oct, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। बिहार (Bihar) में जैसे-जैसे चुनाव (Election) की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (CM Rabri Devi) ने एक बड़ा सियासी बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) फिर से बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे। राघोपुर पूर्व में पत्रकारों से बात करते हुए राबड़ी देवी ने कहा, “नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।”
राबड़ी देवी से जब उनके बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेज प्रताप यादव के चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया, जो इस चुनाव में अपनी अलग पार्टी से मैदान में हैं, तो उन्होंने कहा, “यह ठीक है, उसे चुनाव लड़ने दो, वह अपनी जगह सही है।”
बता दें कि तेज प्रताप यादव इस बार राष्ट्रीय जनता दल से अलग होकर अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं। तेज प्रताप यादव इस बार वैशाली जिला की महुआ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। तेज प्रताप ने 2015 में इसी महुआ सीट से चुनाव लड़कर अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। पिछली बार 2020 के चुनाव में वह हसनपुर सीट से विधायक थे।
पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन अब बनेगे मंत्री, तेलंगाना कैबिनेट में होगी शामिली
30 Oct, 2025 04:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन का राजनीति में कद बढ़ने जा रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो अजहरुद्दीन जल्द ही तेलंगाना सरकार की कैबिनेट शामिल हो सकते हैं। अजहरुद्दीन जो पहले लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं और अब राज्य सरकार में भा शामिल होने जा रहे हैं। इस कदम को कांग्रेस पार्टी का ‘पॉलिटिकल सिक्सर’ माना जा रहा है, खासकर तब जब राज्य में जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर होने वाले बाय इलेक्शन को लेकर माहौल गर्म है।
इस दिन ले सकते हैं शपथ
बताया जा रहा है कि अजहरुद्दीन शुक्रवार 31 अक्टूबर को मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इस फैसले को तेलंगाना के सीएम ए. रेवंत रेड्डी के मंत्रिमंडल का विस्तार माना जा रहा है। यदि ऐसा होता है पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन को हाल ही में एमएलसी के रूप में नामित किया गया था। लेकिन अभी तक राज्यपाल से उनके नाम को मंजूरी नहीं मिली है। अब मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने से उनकी राजनीतिक हैसियत और बढ़ जाएगी, वो पहले लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं।
कांग्रेस का बड़ा दाव
कांग्रेस पार्टी के इस कदम को जुबली हिल्स विधानसभा सीट के बाय इलेक्शन से पहले बड़ा दाव माना जा रहा है। बता दें कि जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को बाय इलेक्शन होने हैं। इस सीट पर मुस्लिन समाज की आबादी 30 प्रतिशत है,जिसके चलते इसे कदम को अहम माना जा रहा है। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि अजहरुद्दीन की कैबिनेट में एंट्री से न केवल मुस्लिम मतदाताओं का पार्टी पर भरोसा बढ़ेगा। बता दें की सीएम रेवंत रेड्डी की कैबिनेट में फिलहाल 15 सदस्य हैं, अजहरुद्दीन के जुड़ने से कुल संख्या 16 की हो जाएगी।
अजहरुद्दीन होंगे तेलंगाना सरकार में पहले मुस्लिम मंत्री
तेलंगाना की मौजूदा कैबिनेट में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी समेत कुल 15 सदस्य हैं, लेकिन इसमें एक भी अल्पसंख्यक नहीं हैं। तेलंगाना में कांग्रेस के पास मोहम्मद अजहरुद्दीन एक बड़ा मुस्लिम चेहरा हैं। ऐसे में अजहरुद्दीन को कैबिनेट में शामिल करना एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे कांग्रेस 11 नवंबर को जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में एक लाख से ज्यादा मुस्लिम मतदाताओं को लुभा सकती है। जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर कुल करीब 3.90 लाख मतदाता हैं, जिसमें से लगभग 1.20 से 1.40 लाख मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं। यानी करीब 30% वोट मुस्लिमों के हैं. ऐसे में यहां जिस भी पार्टी को मुस्लिम वोट मिलते हैं, उसकी जीत की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए कांग्रेस ने अजहरुद्दीन को तेलंगाना सरकार में मंत्री बनाने का फैसला किया है। हालांकि, अजहर को मंत्री बनने के बाद 6 महीने के अंदर MLC या MLA बनना होगा।
अजहरुद्दीन का राजनीति करियर
अजहरुद्दीन ने साल 2009 में राजनीति में कदम रखा था. कांग्रेस ने उन्हें युपी के मुरादाबाद सीट से लोकसभा चुनाव में टिकट दिया था। वह पार्टी के उम्मीदों पर खरे उतरे और चुनाव जीता। लेकिन इसके बाद 2014 और 2023 के चुनाव में उन्हें हार मिली थी। 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर सीट से टिकट दिया, जहां उन्हें हार मिली। इसके बाद उन्हें 2018 में तेलंगाना कांग्रेस प्रदेश कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं। फिर उन्होंने तेलंगाना की जुब्ली हिल्स विधानसभा से चुनावा लड़ा, लेकिन वे बीआरएस उम्मीदवार मगंती गोपीनाथ से 16,337 वोट से हार गए थे। बीआरएस उम्मीदवार को 80,549 और अजहरुद्दीन को 64,212 वोट मिले थे। हालांकि, अब वे तेलंगाना सरकार के कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी संभालते हुए नजर आएंगे।
लखीसराय में गरजे शाह—“राहुल ने PM मोदी नहीं, छठी मैया का अपमान किया”
30 Oct, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित ने लखीसराय में एनडीए की एक रैली को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला. शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने पीएम मोदी का अपमान करने के साथ-साथ छठी मैया का भी अपमान किया और इसका बदला बिहार की जनता हर एक वोट से लेगी.
अमित शाह ने अपने बयान में कहा, “कल राहुल बाबा आए और उन्होंने PM मोदी का अपमान करने के लिए कुछ शब्द कहे. लेकिन PM मोदी का अपमान करते-करते उन्होंने छठी मैया का भी अपमान किया. उन्होंने कहा कि जो लोग छठ पूजा मनाते हैं, वे ड्रामा करते हैं,” सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “राहुल बाबा, आप छठी मैया का महत्व और आस्था नहीं समझेंगे और न ही आपकी मां समझेंगी.”
मोदी से अपशब्द बोलने पर कांग्रेस का हार
केंद्रीय मंत्री ने अपनी रैली के दौरान कहा कि राहुल गांधी ने PM मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर अपना इतिहास देखेगी, तो पता चलेगा कि जब-जब उसने पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया है, कांग्रेस खत्म हो गई है.
14 नवंबर को महागठबंधन साफ
शाह ने कहा कि इतना ही नहीं, कुछ दिन पहले कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मोदी जी की मां का भी अपमान किया था. उन्होंने कहा कि इन सबका बदला बिहार की जनता चुनाव के दौरान लेगी. जब 14 नवंबर को बक्से खुलेंगे, तो महागठबंधन खत्म हो जाएगा.
बता दें कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था. यह प्रेस कॉन्फ्रेंस शुक्रवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को लेकर आयोजित की गई है. इस दौरान भी शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और कहा कि यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि आजादी के बाद कांग्रेस ने पटेल को भुलाने की कोई कसर नहीं छोड़ी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पटेल के लिए अपने कार्यकाल के दौरान कुछ नहीं किया, न ही उनकी कोई समाधि बनवाई और न ही कोई स्मारक बनवाया.
अमित शाह को एनाकोंडा बताने पर उद्धव पर शिंदे का पलटवार, बोले- मुंबई की तिजोरी निगल ली, पेट नहीं भरा
30 Oct, 2025 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । महाराष्ट्र (Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy Chief Minister Eknath Shinde) ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि उद्धव खुद ही एनाकोंडा हैं, जो मुंबई की तिजोरी पर कब्जा कर लिया है। दरअसल, शिवेसना (यूबीटी) प्रमुख ने एक दिन पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) को एनाकोंडा बताया था। इसे लेकर राज्य में सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।
शिंदे ने कहा, ‘कल अमित शाह जी आए थे और गहरे समुद्र में मछलियां पकड़ने के लिए मछुआरों को दो नौकाएं दी। ऐसी कई नौकाएं केंद्र सरकार के जरिए दी जाएंगी। कल प्रधानमंत्री जी भी आ रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘वह (उद्धव ठाकरे) एनाकोंडा के बारे में बात करते हैं। वह खुद ही एनाकोंडा हैं, जो मुंबई की तिजोरी को लपेट कर बैठे हैं। एनाकोंडा की विशेषता यह है कि उसका पेट नहीं भरता है। ये मुंबई की तिजोरी को निगल गए, मुंबई निगल गए, भूखंड निगल गए, मरीज की खिचड़ी निगल गए, डेड बॉडी बैग में पैसे खाए, डामर में पैसे खाए। यहां पर मीठी नदी का कचरा भी निगल गए। इनका पेट ही नहीं भरता है। ऐसा यह एनाकोंडा है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘अभी मुंबई का चुनाव है। चुनाव के बीच उनकी घिसी पिटी कैसेट चलती है और यह उसी का पार्ट है। मुंबई वासी बहुत ही समझदार हैं। पिछले 20-25 सालों से जो हालत बनाकर रखी है। जब मैं मुख्यमंत्री बना, महायुति सरकार बनी, तब क्रांक्रीट की सड़कें बनीं, सौंदर्यीकरण शुरू हुआ, मेट्रो का काम इन्होंन रोक दिया था, वह शुरू हुआ। लोग जानते हैं कि विकास करने वाले कौन हैं और मुंबई को निगलने वाले कौन हैं। मुंबई का सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझने वाले कौन हैं।’
उन्होंने कहा, ‘… सभी चुनावों में महायुति जीतने वाली है… इनकी(विपक्ष) सरकार स्थगित सरकार है और हमारी सरकार प्रगति सरकार है। हमने 2.5 से 3 सालों में जो काम किए हैं, वे सभी जनता के सामने है। उन्हें(विपक्ष) अपनी हार पता चल गई है। हम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं और वे अपनी हार की तैयारी कर रहे हैं…।’
PM नरेंद्र मोदी आज छपरा-मुजफ्फरपुर में करेंगे चुनावी सभा, राहुल-प्रियंका गांधी की कुल 15 रैलियां
30 Oct, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. बिहार (Bihar) विधानसभा चुनाव (assembly elections) 2025 में सियासी जंग तेज होती जा रही है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) आज मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) और छपरा (Chhapra) में जनसभाएं करेंगे। वहीं कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) राज्य में कुल 15 रैलियों को संबोधित करेंगे।
NDA की भव्य जीत का जताया भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि वे गुरुवार को मुजफ्फरपुर और छपरा में दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे। उन्होंने लिखा मेरे बिहार के परिवारजन इस चुनाव में बीजेपी-एनडीए की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित करेंगे। मुझे जनता से संवाद का सौभाग्य मिलेगा। प्रधानमंत्री ने इससे पहले 24 अक्तूबर को समस्तीपुर और बेगूसराय में रैलियां कर एनडीए के प्रचार अभियान की शुरुआत की थी।
कांग्रेस अध्यक्ष भी करेंगे तीन रैलियों का संबोधित
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी बिहार में तीन रैलियों और कुछ प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रचार अभियान में शामिल होंगे। राहुल गांधी ने बुधवार को मुजफ्फरपुर और दरभंगा से अपने चुनावी दौरे की शुरुआत की, जबकि प्रियंका गांधी इस हफ्ते के अंत तक बिहार पहुंचेंगी।
कांग्रेस के 40 स्टार प्रचारकों की सूची में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कन्हैया कुमार और पप्पू यादव जैसे नाम शामिल हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सचिन पायलट, भूपेश बघेल, रणदीप सुरजेवाला और अशोक गहलोत भी चुनाव प्रचार में उतरेंगे। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा सकरा और दरभंगा में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की रैलियों ने बिहार में महागठबंधन के अभियान को नई ऊर्जा दी है। जनता बदलाव चाहती है और इस बार हम निश्चित रूप से जीत दर्ज करेंगे।
गौरतलब है कि 18वीं बिहार विधानसभा के लिए दो चरणों में चुनाव 6 और 11 नवंबर को होंगे। पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों और दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होगा। इन दोनों चरणों में कुल 2616 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1085 प्रत्याशी यानी करीब 41 प्रतिशत पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।
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