राजनीति
राहुल गांधी के सेना संबंधी बयान पर बवाल, बीजेपी बोली – 'अब सेना में जाति ढूंढ रहे हैं'
5 Nov, 2025 01:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सेना पर बयान देकर फिर विवादों में घिर गए हैं. उन्होंने बिहार के औरंगाबाद में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि देश की 10 प्रतिशत आबादी सेना को नियंत्रित करती है. राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता लंबे समय से जाति जनगणना की बात करते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब राहुल ने इसमें सेना का जिक्र किया.
राहुल के इस बयान के बाद बीजेपी हमलावर हो गई. पार्टी ने कहा, ‘राहुल गांधी अब सेना में जाति खोज रहे हैं और कह रहे हैं कि 10% लोग इसे नियंत्रित करते हैं. प्रधानमंत्री मोदी से अपनी नफरत में उन्होंने भारत से नफरत की हदें पार कर दी हैं.’ ये कोई पहली बार नहीं है कि सेना को लेकर राहुल गांधी के बयान पर विवाद हुआ हो.
सेना पर राहुल के बयान पर कब-कब विवाद?
2016 में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सैनिकों के खून के पीछे छिपकर और उनके बलिदान पर ‘दलाली’ करने का आरोप लगाया था. ये मामला कोर्ट भी पहुंचा था. हालांकि राहुल को इसमें राहत मिल गई थी. इसके बाद 2020 में गलवान झड़प के बाद भी राहुल गांधी ने सेना को लेकर एक बयान दिया था.
कांग्रेस सांसद ने कहा था कि चीन ने हमारे क्षेत्र के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया है. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा कि क्या आप वहां थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सामग्री है? बिना किसी सबूत के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं… अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब नहीं कहते.
जहां दिया बयान पर वहां क्या है जातिगत कहानी?
राहुल ने मंगलवार (4 नवंबर) को जो बयान दिया वो औरंगाबाद जिले में दिया. वो औरंगाबाद जहां राजपूतों की संख्या सबसे ज्यादा है. इसे बिहार का चित्तौड़गढ़ भी कहा जाता है. यहां पर इनकी आबादी 2.5 लाख से ज्यादा है. वहीं यादवों की संख्या 2 लाख है. कुशवाहा जाति भी यहां अच्छी खासी संख्या में रहती है. इनकी आबादी 1.75 लाख है. भूमिहारों की बात करें तो इनकी संख्या 1 लाख है. मुस्लिम की आबादी 1 लाख 25 हजार है. रविदास 1.5 लाख, EBC 4.5 लाख, पासवान 1.25 लाख संख्या में रहते हैं.
बिहार से कितने लोग सेना में?
भारतीय सेना में बिहार के लोगों की संख्या अच्छी खासी है. कुल सैन्य कर्मियों में बिहार का हिस्सा लगभग 11 प्रतिशत है. ये आंकड़े 2011 के हैं. किस राज्य के कितने लोग सशस्त्र बल में हैं, इसकी जानकारी सरकार ने 2022 में संसद में दी थी. सरकार की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक, JCO रैंक के 8152 अधिकारी बिहार के हैं. अन्य रैंक की संख्या 65 हजार से ज्यादा है. ऑफिसर्स की बात करें तो इनकी संख्या 540 है.
नौकरी चाहिए, वादा नहीं: नीतीश‑तेजस्वी के वादों के बीच Gen Z ने रखी अपनी शर्तें और उम्मीदें
5 Nov, 2025 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बिहार(Bihar) विधानसभा चुनावों(assembly elections) में इस बार रोजगार का मुद्दा(employment issue) सबसे बड़ा और ज्वलंत सवाल(Burning Question) बनकर उभरा है। 2020 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने पहली कैबिनेट बैठक में 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया था, जिसने युवाओं को खासा आकर्षित किया।
इसके जवाब में, NDA को 20 लाख नौकरियों के सृजन की घोषणा करनी पड़ी थी। पांच साल बाद भी सरकार और विपक्ष दोनों के बड़े-बड़े वादों के बावजूद, अबकी बार बिहार की युवा पीढ़ी (Gen Z) इन घोषणाओं पर आसानी से यकीन नहीं कर रही है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने, पेपर लीक होने और कई मौकों पर छात्रों और पुलिस के बीच झड़पों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं।
इस बार तेजस्वी यादव ने सत्ता में आने पर हर परिवार में एक सरकारी नौकरी देने का वादा किया है, जबकि NDA ने अगले पांच वर्षों में 2 करोड़ सरकारी नौकरियों और नए निवेश के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा देने का वादा किया है। इसके बावजूद, युवाओं में गहरी नाराजगी है और वे इन वादों को केवल चुनावी ‘जुमला’ मान रहे हैं।
बिहार के 7.43 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 3.78 करोड़ मतदाता 20 से 40 वर्ष की आयु के हैं, जो कुल वोटरों का 51% हिस्सा हैं। इनका उबलता आक्रोश राज्य में सरकार बनाने वाले किसी भी दल के लिए परेशानी का संकेत है।
मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से बीटेक कर चुके अरुण गुप्ता (34) भी सरकारी शिक्षक की नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए वे कहते हैं, “सरकारी नौकरी तो सरकारी नौकरी होती है। सरकार ने TRE-3 तो पूरा कर लिया, लेकिन TRE-4 की घोषणा करके भी हम अभी तक इंतजार कर रहे हैं। हम बदलाव चाहते हैं, लेकिन किसे चुनें? सब एक जैसे हैं।” उनके दोस्त मनीष यादव इसे खोखला वादा बताते हुए सवाल करते हैं कि करोड़ों नौकरियों का वादा करने वाले यह बताएं कि उन्होंने पिछले पांच साल में क्या किया?
वादा या ‘जुमला’? युवा पूछ रहे सवाल
पूर्णिया के अभिषेक कुमार BPSC की तैयारी कर रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कहते हैं कि सभी पार्टियों ने अब चुनाव के दौरान ‘जुमला’ इस्तेमाल करना सीख लिया है। तेजस्वी यादव हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देने की बात कह रहे हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि इसका पैमाना क्या होगा? SC/ST में साक्षरता दर 10% से भी कम है और पूर्णिया में महिला साक्षरता दर 51% है। आप इन अनपढ़ परिवारों को किस तरह की नौकरी देंगे?
खगड़िया के विकास कुमार के लिए समय पर और लीक-प्रूफ परीक्षाएं ही प्राथमिकता हैं। वे कहते हैं, “हमें NDA द्वारा वादा की गई 2 करोड़ नौकरियां नहीं चाहिए, लेकिन कम से कम परीक्षा समय पर और बिना धांधली के सुनिश्चित हो। हम गरीब परिवार से हैं और बाहर जाकर प्रोफेशनल कोर्स नहीं कर सकते। सरकारी नौकरी ही एकमात्र विकल्प है।” पटना में रहने के लिए हर महीने करीब 9,000 का खर्च चलाने के लिए विकास हर दिन तीन-चार घंटे ऊबर बाइक भी चलाते हैं।
बिहार के Gen Z का संदेश स्पष्ट और जोर से है। रोजगार केवल एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल है। वे अब कोरे वादों पर यकीन करने को तैयार नहीं हैं।
पचमढ़ी में कांग्रेस जिला अध्यक्षों की पाठशाला, 8 नवंबर को शिविर में आ सकते हैं राहुल गांधी
5 Nov, 2025 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) मध्य प्रदेश में सक्रिय हो सकते हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (Umang Singhar) ने आज खुलासा किया है कि 8 नवंबर को राहुल गांधी पचमढ़ी (Pachmarhi) के कांग्रेस शिविर में पहुंचने वाले हैं। यह दौरा पार्टी के संगठनात्मक मजबूती के लिए अहम साबित हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी दिल्ली से भोपाल एयरपोर्ट पर लैंड करेंगे और फिर हेलीकॉप्टर से सीधे पचमढ़ी रवाना हो जाएंगे। वहां वे दो दिनों के इस दौरे पर नाइट स्टे भी करेंगे। उमंग सिंघार ने कहा, “8 नवंबर को राहुल गांधी के पचमढ़ी आने की पूरी संभावना है। यह जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग का हिस्सा होगा, जो 11 नवंबर तक चलेगी।”
उमंग सिंघार ने कहा कि राहुल जी का यह दौरा हमारे कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। ट्रेनिंग कैंप में वे संगठन को मजबूत करने पर फोकस करेंगे। पचमढ़ी में चल रहे इस ट्रेनिंग कैंप का मकसद प्रदेश स्तर पर जिला अध्यक्षों को नई रणनीतियां सिखाना है। राहुल गांधी का आगमन निश्चित रूप से कार्यकर्ताओं में जोश भर देगा।
“‘बांग्लादेश सीमा से हटेंगे कंटीले तार’, बीजेपी सांसद के बयान से पार्टी में मुश्किलें खड़ी, टीएमसी को मिला मौका
5 Nov, 2025 08:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता । पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। रानाघाट से बीजेपी सांसद जगन्नाथ सरकार (BJP MP Jagannath Sarkar) के एक बयान ने न केवल विपक्ष (Opposition) को हथियार दे दिया है, बल्कि उनकी अपनी पार्टी को भी असहज कर दिया है। एक वायरल वीडियो में सरकार ने कहा कि अगर 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता में आती है, तो भारत-बांग्लादेश सीमा (India-Bangladesh border) पर कंटीली तारों (barbed wire) की बाड़ नहीं रहेगी। यह बयान न केवल सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि बीजेपी की उस नीति पर भी तंज कस रहा है, जिसमें वे अवैध घुसपैठियों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर लगातार हमलावर हैं। फिलहाल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साध रखी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
रानाघाट से सांसद जगन्नाथ सरकार ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा कि उनका आशय सीमा सुरक्षा से नहीं, बल्कि विकास और समृद्धि से था। उन्होंने कहा कि मेरा रुख वही है। अभी भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीली तारों की जरूरत है, लेकिन जब बीजेपी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आएगी और बंगाल तरक्की करेगा, तब बांग्लादेश खुद देखेगा कि हम कितने आगे बढ़ गए हैं। तब सीमा पर तार की कोई जरूरत नहीं रह जाएगी।
वायरल वीडियो से उठा विवाद
30 अक्टूबर को कृष्णागंज में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिए गए उनके भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वह कहते सुने गए, ‘हम वादा करते हैं कि अगर इस बार हम चुनाव जीतते हैं, तो भारत और बांग्लादेश के बीच की कांटेदार तार वाली बाड़ खत्म हो जाएगी। हम पहले एक थे और भविष्य में फिर से एक हो जाएंगे।’
इस बयान के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बीजेपी की दोहरी नीति अपने चरम पर है। एक ओर रानाघाट के सांसद कहते हैं कि बीजेपी की सरकार बनने पर भारत-बांग्लादेश की सीमाएं खत्म हो जाएंगी और दोनों देश फिर एक हो जाएंगे, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसी सीमा की ‘सुरक्षा’ के लिए राज्य सरकार को दोष देते हैं। बीजेपी की चुप्पी यह संकेत देती है कि यह बयान शीर्ष नेतृत्व की सहमति से दिया गया है।
बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है- जगन्नाथ सरकार
अभिषेक बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए जगन्नाथ सरकार ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से अलग पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय हम एक ही थे। बांग्लादेश का जन्म भारत से ही हुआ। जब बंगाल फिर ‘शोनार बांग्ला’ बनेगा, तब बांग्लादेश खुद हमारे विकास को देखकर महसूस करेगा कि उन्हें भी हमारे साथ होना चाहिए। तब सीमा पर कांटेदार तार की कोई जरूरत नहीं रह जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का लक्ष्य विकास है, न कि धार्मिक या साम्प्रदायिक राजनीति।
भाजपा सांसद ने आगे कहा कि कम्युनिस्ट और टीएमसी ने मुसलमानों के बीच यह प्रचार किया है कि बीजेपी मुस्लिम-विरोधी है। लेकिन गुजरात जैसे बीजेपी शासित राज्य में बड़ी मुस्लिम आबादी विकास का लाभ उठा रही है। हम सबके विकास में विश्वास करते हैं।
बीजेपी नेतृत्व की चुप्पी
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पार्टी विधायक अग्निमित्रा पॉल ने केवल इतना कहा कि हमारे वरिष्ठ नेता इस मामले पर ध्यान देंगे।
चुनावी संदर्भ और राजनीतिक असर
जगन्नाथ सरकार का यह बयान उस समय आया है जब पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर बीजेपी और टीएमसी के बीच टकराव तेज है। बीजेपी इस प्रक्रिया को बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाने का तरीका बता रही है, जबकि टीएमसी इसे गुपचुप एनआरसी (NRC) कह रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान बीजेपी के लिए एक दुविधा भरा क्षण है। एक ओर पार्टी बांग्लादेश से घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख अपनाती रही है, वहीं दूसरी ओर सांसद का यह बयान उसी नैरेटिव के विपरीत जाता है।
बीजेपी ने पिछले साल झारखंड विधानसभा चुनाव में भी घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, लेकिन उसे ज्यादा सफलता नहीं मिली। अब बिहार के सीमांचल क्षेत्र में भी पार्टी ने घुसपैठियों का मुद्दा फिर से उठाया है। हालांकि, बंगाल में मतुआ समुदाय की नाराजगी को देखते हुए पार्टी को बेहद सावधानी से कदम उठाने पड़ रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में मतुआ वोटरों की मदद से बीजेपी ने बंगाल में 18 सीटें जीती थीं, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इस समुदाय में अपनी पकड़ फिर मजबूत कर ली।
सीएम मोहन यादव का बड़ा बयान: ‘मुझे रोकने के लिए रास्ते और हेलीपैड खोदे गए’
4 Nov, 2025 07:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधानसभा चुनान के लिए प्रचार करने पहुंचे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने महागठबंधन पर जमकर निशाना साधा. पटना के गांधी मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा, ‘मुझे यहां आने से पहले रोकने की कोशिश की गई, रास्ते और हेलीपैड को खोद दिया गया। लेकिन मुझे कोई नहीं रोक सकता है. मैं आपके लिए जान की बाजी लगाने के लिए भी तैयार हूं।’
‘बिहार में NDA की लोकप्रियता से घबराया महागठबंधन’
वहीं बीजेपी का आरोप है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को रोकने की महागठबंधन ने साजिश की है। मुख्यमंत्री की सभा को रोकने की हरकत शर्मनाक है. मुख्यमंत्री को पटना की मनेर विधानसभा के गांधी मैदान में जनसभा करना था लेकिन उसके पहले ही विपक्ष ने सभा स्थल मार्ग और हेलीपैड को खुदवा दिया। बिहार में एनडीए की लोकप्रियता से महागठबंधन घबरा गया है।
3 विधानसभाओं में जनसभा और रोड शो
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आज बिहार में 3 विधानसभाओं में जनसभा और रोड शो है. जिनमें मनेर विधानसभा भी शामिल थी। लेकिन भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री की जनसभा से डरकर विपक्ष ने रास्ते को खुदवा दिया। पटना में जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम सब जानते हैं, जब मैं आपके बीच में आया और मुझे मालूम पड़ा कि आपसे मिलने के लिए रास्ते खोद दिए गए हैं। हमने कहा जो मर्जी आए वो करो लेकिन आपके बीच में आने के लिए मैं जान की बाजी लगा के भी आपके बीच आने को तैयार हूं।’
राज ठाकरे से संभावित गठबंधन पर नाराजगी, किसान नेता किशोर तिवारी ने शिवसेना UBT से दिया इस्तीफा
4 Nov, 2025 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । कृषि कार्यकर्ता किशोर तिवारी (Kishore Tiwari) ने राज ठाकरे (Raj Thackeray) के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से संभावित गठबंधन (Alliance) का विरोध करते हुए शिवसेना (यूबीटी) से इस्तीफा दे दिया। तिवारी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि मनसे हिंदी भाषियों, अन्य भाषाई अल्पसंख्यकों और मुसलमानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ये सभी वर्ग महाविकास आघाडी और विपक्षी गठबंधन इंडिया की मुख्य रीढ़ हैं। तिवारी ने कहा कि उन्होंने रविवार को शिवसेना (UBT) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
किशोर तिवारी ने दावा किया कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना यूबीटी ने जो 20 सीट जीतीं, उनमें से 10 सीट पर उसकी जीत मुख्य रूप से हिंदी भाषी, मुसलमान, दलित और ओबीसी मतदाताओं के समर्थन के कारण ही संभव हुई। फरवरी में शिवसेना UBT के प्रवक्ता पद से हटाए गए तिवारी ने इससे पहले उद्धव ठाकरे को खुला पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने आग्रह किया कि वह अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ गठबंधन न करें। उन्होंने कहा था कि राज ठाकरे महाराष्ट्र में गैर-मराठी और मुसलमानों के खिलाफ एजेंडा चला रहे हैं।
अपील को नजरअंदाज करने का आरोप
किसान नेता तिवारी ने कहा कि उनकी अपील को नजरअंदाज किया गया, इसलिए उन्होंने अब पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, ‘अब भाषाई प्रादेशिकता की सुरक्षा और सामंजस्य तथा राष्ट्रीय हित के लिए मैं शिवसेना यूबीटी से अलग हो रहा हूं।’ कुछ साल पहले, राज्य सरकार ने तिवारी को किसानों की आत्महत्या रोकने और कृषि सुधार लाने के तरीकों पर सुझाव देने के लिए गठित कार्यबल का प्रमुख नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें इस पद से हटा दिया गया।
वंशवाद पर शशि थरूर के बयान से कांग्रेस में बवाल, उदित राज और राशिद अल्वी ने जताई कड़ी आपत्ति
4 Nov, 2025 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद और सीनियर लीडर शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने ऐसा मुद्दा छेड़ा है, जिससे पार्टी में ही घमासान मच गया है. कांग्रेस (Congress) के कई नेता थरूर पर हमलावर हो गए हैं तो कुछ पार्टी के बचाव में उतर आए हैं. शशि थरूर ने एक लेख में वंशवाद को लोकतंत्र (Democracy) के लिए खतरा बताया है. इसके बाद बीजेपी (BJP) को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया और गांधी परिवार निशाने पर आ गया. वंशवाद की राजनीति पर थरूर के रुख के बाद कांग्रेस नेताओं ने पार्टी सांसद को टारगेट पर ले लिया है. कुछ ने पार्टी का बचाव किया है तो कुछ ने भाजपा पर हमला बोला है. बता दें कि अभी देशभर में बिहार विधानसभा चुनाव का शोर है, ऐसे में शशि थरूर की ओर से वंशवाद पर करारा प्रहार कांग्रेस को असहज स्थिति में ला दिया है.
दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ‘गंभीर खतरा’ है और अब समय आ गया है कि भारत वंशवाद की जगह योग्यता को स्वीकार्यता प्रदान करे. शशि थरूर ने लेख लिखकर आगे कहा कि जब राजनीतिक सत्ता का निर्धारण योग्यता, प्रतिबद्धता या जमीनी स्तर पर जुड़ाव के बजाय वंशवाद से होता है, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है. अब उनके इस बयान से कांग्रेस में खलबली मची हुई है. वंशवाद की बात होते ही गांधी परिवार निशाने पर आ जाता है, ऐसे में कांग्रेस नेता पार्टी और अपने टॉप लीडर्स की बचाव में उतर आए. इन नेताओं ने न केवल कांग्रेस का बचाव किया बल्कि भाजपा पर भी निशाना साधा.
वंशवाद पर तकरार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट’ नाम के ओपिनियन पोर्टल पर वंशवाद को लेकर अपनी राय रखी है. कांग्रेस नेता उदित राज ने शिश थरूर के स्टैंड पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, ‘एक डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, व्यापारी का बच्चा व्यापार संभालता है और राजनीति भी इससे अछूती नहीं है. अगर कोई नेता आपराधिक पृष्ठभूमि वाला है, तो यह हमारे समाज की वास्तविकता को ही दर्शाता है. चुनावी टिकट अक्सर जाति और पारिवारिक आधार पर बांटे जाते हैं. नायडू से पवार तक, डीएमके से ममता बनर्जी और मायावती तक ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. नुकसान यह है कि अवसर केवल परिवारों तक ही सीमित रह जाते हैं.’
योग्यता और नेतृत्व का मुद्दा
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी पंडित जवाहरलाल नेहरू और भारतीय राजनीति में गांधी परिवार के प्रमुख नेताओं का बचाव किया और कहा कि नेतृत्व योग्यता से आता है. उन्होंने कहा, ‘पंडित जवाहरलाल नेहरू इस देश के सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे. इंदिरा गांधी ने अपने प्राणों की आहुति देकर खुद को साबित किया. राजीव गांधी ने भी अपने जीवन का बलिदान देकर देश की सेवा की. अगर कोई गांधी परिवार को वंशवाद कहता है, तो बताइए भारत में कौन सा दूसरा परिवार है जिसके पास इतना बलिदान, समर्पण और क्षमता रही है? क्या वह भाजपा है?’ कांग्रेस के एक अन्य नेता राशिद अल्वी ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता ही नेताओं को सत्ता में भेजती है और किसी को उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण राजनीति में आने से नहीं रोका जा सकता. उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में फैसला जनता करती है. आप यह प्रतिबंध नहीं लगा सकते कि कोई चुनाव नहीं लड़ सकता क्योंकि उसके पिता सांसद थे. ऐसा हर क्षेत्र में हो रहा है. फिर आप इसके लिए क्या रास्ता निकालेंगे?’
शशि थरूर ने आखिर क्या कहा?
शशि थरूर ने कहा है कि वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ‘गंभीर खतरा’ है और अब समय आ गया है कि भारत वंशवाद की जगह योग्यता को स्वीकार्यता प्रदान करे. थरूर ने कहा कि जब राजनीतिक सत्ता का निर्धारण योग्यता, प्रतिबद्धता या जमीनी स्तर पर जुड़ाव के बजाय वंशवाद से होता है, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है. ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट’ के लिए लिखे एक लेख में तिरुवनंतपुरम के सांसद थरूर ने बताया कि नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस से जुड़ा है, लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में वंशवाद का बोलबाला है. ‘इंडियन पॉलिटिक्स आर ए फैमिली बिजनेस’ शीर्षक वाले लेख में थरूर ने कहा कि दशकों से एक परिवार भारतीय राजनीति पर हावी रहा है और नेहरू-गांधी परिवार का प्रभाव भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ा हुआ है. उनका कहना था, ‘लेकिन यह विचार पुख्ता हुआ है कि राजनीतिक नेतृत्व एक जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है. यह विचार भारतीय राजनीति में हर पार्टी, हर क्षेत्र और हर स्तर पर व्याप्त है.’ थरूर ने कहा कि बीजू पटनायक के निधन के बाद उनके बेटे नवीन ने अपने पिता की खाली लोकसभा सीट जीती. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने यह पद अपने बेटे उद्धव को सौंप दिया और अब उद्धव के बेटे आदित्य भी प्रतीक्षारत हैं.
बिहार चुनाव: ‘जंगलराज’ से लेकर ‘कट्टा-मंत्रालय’ तक, बदलती गई नेताओं की भाषा
4 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में चुनाव प्रचार चरम पर है. 6 नवंबर को पहले चरण में 121 सीटों पर होने वाली वोटिंग के लिए सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. NDA की ओर से जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमान संभाल रखी है तो महागठबंधन के लिए तेजस्वी और राहुल गांधी रैलियां कर वोट मांग कर रहे हैं. एनडीए विकास के नाम पर चुनाव जीतने की आस लगा बैठा है. वहीं, वो बार-बार बिहार की जनता को जंगलराज की भी याद दिला रहा है. ये एक ऐसा मुद्दा है जिसको महागठबंधन ने भी पकड़ा हुआ है और सूबे में जब भी कोई भी अपराध होता है तो इस शब्द को उछाल देता है.
चुनाव प्रचार की शुरुआत ही इस शब्द के साथ हुई थी और जैसे-जैसे रैलियों की संख्या बढ़ी वैसे-वैसे नए शब्द भी नेताओं की जुबां से निकलते गए. इसमें कट्टा से लेकर मंत्रालय तक जुड़ते गए. ये लिस्ट लंबी है. चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में जिन शब्द की सबसे ज्यादा चर्चा हुई वो कट्टा और मंत्रालय हैं. 30 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर की जनसभा में पीएम मोदी ने कहा कि कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन और करप्शन जंगलराज की पहचान है. यही आरजेडी की पहचान है. यही उनके साथियों की भी पहचान बन गई है. इसके बाद पीएम मोदी ने 2 नवंबर को आरा की रैली में कहा कि आरजेडी ने कांग्रेस की कनपटी पर कट्टा सटाकर मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कराया.
तेजस्वी ने किया पलटवार
पीएम मोदी के इस बयान पर तेजस्वी ने कहा कि उन्हें ऐसी भाषा नहीं बोलनी चाहिए. किसी पीएम के द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया गया. कट्टा शब्द को लेकर बयानबाजी हो ही रही थी कि इसी बीच मंत्रालय शब्द को चर्चा में ला दिया गया. इसको सबसे पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने उछाला.
उन्होंने एक रैली में कहा कि मैं पीएम को सुझाव देना चाहती हूं, क्योंकि उनका समय बहुत महत्वपूर्ण है. पीएम का समय रोजगार उपलब्ध कराने, विकास को बढ़ाना देने और बड़े उद्दोग स्थापित करने में लगना चाहिए. मेरा एक सुझाव है कि वे एक नया मंत्रालय बनाएं और उसका नाम अपमान मंत्रालय रखें, ताकि उनका समय बर्बाद ना हो. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि तेजस्वी को सत्ता मिली तो बिहार में हत्या, अपहरण और रंगदारी के तीन नए मंत्रालय बनाए जाएंगे.
‘पप्पू-टप्पू और अक्कू‘
बिहार में एक रैली को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए कहा, पप्पू, टप्पू और अक्कू इंडिया गठबंधन के तीन बंदर हैं. उधर, लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप ने राहुल गांधी द्वारा जलेबी बनाने और तालाब में गोता लगाकर मछली पकड़ने पर कहा, राहुल को राजनेता नहीं, बल्कि रसोईया होना चाहिए.
बिहार का चुनावी मैदान अब खुला हो गया है जहां नेता अपने प्रतिद्वंद्वियों के लिए तरह-तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. बिहार की सियासत को करीब से देखने वाले पत्रकार अजय प्रकाश ने कहा कि मैं 1990 के चुनावों से बिहार को कवर कर रहा हूं. मैंने राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और जॉर्ज फर्नांडीस, सभी अच्छे वक्ताओं को सुना है, लेकिन उनमें से किसी ने भी अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया. हालांकि, इन दिनों स्थिति परेशान करने वाली है जहां हर तरह के नेता अपने प्रतिद्वंद्वियों पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने और उनका मज़ाक उड़ाने में लगे हैं. इस प्रक्रिया में, वे घटिया भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं.
गुजरात में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट्स में पायलट प्रोडक्शन शुरू हो चुका है – केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
4 Nov, 2025 11:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर । केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Union Minister Ashwini Vaishnav) ने कहा कि गुजरात में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट्स में (In Three Semiconductor Plants in Gujarat) पायलट प्रोडक्शन शुरू हो चुका है (Pilot production has Started) ।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और आईटी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के साथ सोमवार को गुजरात में विकसित हो रहे चारों सेमीकंडक्टर प्लांट्स की समीक्षा की। समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वैष्णव ने कहा कि चारों प्रोजेक्ट्स पर काम काफी तेजी से चल रहा है। कायन्स और सीजी के प्लांट में पायलट प्रोडक्शन शुरू हो चुका है और अगले दो से तीन महीनों में उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है।
उन्होंने आगे कहा कि माइक्रोन के मिनी प्लांट में पायलट प्रोडक्शन पहले से ही जारी है और आगे उत्पादन में और बढ़त होने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, धोलेरा में बन रहे फैब प्रोजेक्ट में भी काफी तेजी से काम चल रहा है। आने वाले समय में धोलेरा हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा हब बनेगा। देश में कई सेमीकंडक्टर प्लांट्स का निर्माण हो रहा है। पहली मेड-इन-इंडिया 28-90 एनएम चिप जल्द बाजार में आने की संभावना है।
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में छोटे नैनोमीटर (एनएम) का माप अधिक कॉम्पैक्ट ट्रांजिस्टर डिजाइन को दर्शाता है, जिससे निर्माताओं को एक ही चिप पर अधिक ट्रांजिस्टर फिट करने की सुविधा मिलती है। 28-90 एनएम चिप का उपयोग ऑटोमोटिव, दूरसंचार, बिजली और ट्रेनों में किया जाता है। इससे पहले शनिवार को केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने ओडिशा के भुवनेश्वर के इन्फो वैली में सिक्सेम प्राइवेट लिमिटेड के कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और एटीएमपी फैसिलिटी के भूमि पूजन और ग्राउंडब्रेकिंग सेरेमनी में भाग लिया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युक्चरिंग छह गुना बढ़ी है, जबकि एक्सपोर्ट आठ गुना बढ़ा है। आज, इलेक्ट्रॉनिक्स भारत से सबसे अधिक निर्यात होने वाली वस्तुओं की लिस्ट में तीसरे स्थान पर है। इस सेमीकंडक्टर फैसिलिटी जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ ओडिशा जल्द ही इस ग्रोथ में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला राज्य बन जाएगा।
ब्रिटिश प्रोफेसर के निर्वासन पर बोले शशि थरूर, “भारत सरकार को और अधिक सहनशील होने की जरूरत”
4 Nov, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । लंदन की प्रोफेसर फ्रांसेस्का ओरसिनी (Professor Francesca Orsini) को वीजा शर्तों (Visa conditions) के कथित उल्लंघन के कारण दिल्ली हवाई अड्डे (Delhi Airport) से निर्वासित किए जाने के कुछ दिनों बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर (Congress leader Shashi Tharoor) ने रविवार को कहा कि भारत सरकार को अधिक सहनशील, व्यापक सोच और बड़ा दिल वाला होने की जरूरत है। तिरुवनंतपुरम से सांसद ने कहा कि मामूली वीजा उल्लंघन के कारण विदेशी विद्वानों और शिक्षाविदों को निर्वासन के तहत वापस भेजने के लिए हवाई अड्डे के आव्रजन काउंटर पर असम्मानजक रवैया दिखाना देश को विदेशी शैक्षणिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किसी भी नकारात्मक लेख से कहीं अधिक नुकसान पहुंचा रहा है।
थरूर की यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद स्वपन दासगुप्ता के एक पोस्ट के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने एक अखबार में प्रकाशित अपने लेख को साझा करते हुए तर्क दिया था कि वीजा शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है, लेकिन किसी प्रोफेसर की छात्रवृत्ति का मूल्यांकन करना उसका काम नहीं है। दासगुप्ता ने ओरसिनी विवाद वीजा निगरानीकर्ताओं के खतरे को दर्शाता है शीर्षक से लिखे अपने लेख में कहा कि अब जबकि ब्रिटेन में रहने वालीं प्रतिष्ठित हिंदी विद्वान ओरसिनी को प्रवेश नहीं दिए जाने से जुड़ा हंगामा शांत हो गया है, तो इस विवाद से उत्पन्न कुछ मुद्दों पर विचार करना उचित होगा।
दासगुप्ता के पोस्ट को टैग करते हुए थरूर ने कहा, ‘एक बार के लिए, मैं स्वपन (55) से सहमत हूं। मामूली वीजा उल्लंघनों के कारण विदेशी विद्वानों और शिक्षाविदों को निर्वासित करने के लिए हमारे हवाई अड्डों के आव्रजन काउंटरों पर ‘अस्म्मानजनक रवैया’ अपनाना एक देश, एक संस्कृति और एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में हमें विदेशी अकादमिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किसी भी नकारात्मक लेख से कहीं अधिक नुकसान पहुंचा रहा है।’
उन्होंने कहा, ‘भारत सरकार को अधिक सहनशील, व्यापक सोच और बड़ा दिल वाला होने की जरूरत है।’ पिछले महीने कांग्रेस ने कहा था कि ओरसिनी को देश से बाहर करने का फ़ैसला आव्रजन संबंधी औपचारिकता का मामला नहीं था, बल्कि ‘स्वतंत्र, गंभीर विचार वाले, पेशेवर विद्वता के प्रति मोदी सरकार की शत्रुता का प्रतीक’ था। गृह मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि हिंदी की विद्वान और स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (एसओएएस) में ‘प्रोफेसर एमेरिटा’ ओरसिनी को पिछले महीने हांगकांग से आने के तुरंत बाद निर्वासित कर दिया गया था।
सूत्र ने बताया कि वीजा शर्तों के उल्लंघन के कारण ओरसिनी को मार्च 2025 से ‘काली सूची’ में रखा गया है। ‘एक्स’ पर ओरसिनी के निर्वासन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा, ‘बिना किसी कारण के उन्हें निर्वासित करना एक ऐसी सरकार की निशानी है जो असुरक्षित, बेसुध और यहां तक कि मूर्ख है।’ उन्होंने ओरसिनी को भारतीय साहित्य की एक महान विद्वान बताते हुए कहा कि उनके कार्यों ने हमारी अपनी सांस्कृतिक विरासत की समझ को समृद्ध रूप से प्रकाशित किया है।
बिहार चुनाव : इस चुनाव में जंगलराज वाले हार का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाएंगे, आरा में बोले पीएम मोदी
4 Nov, 2025 09:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना. प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आरा (aara) में विशाल जनसभा को संबोधित करने के लिए मंच पर पहुंचे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं ने उनका जमकर स्वागत किया। लोगों की भीड़ ने पीएम के समर्थन में नारेबाजी की। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने उनका स्वागत किया। कहा कि इस बार फिर से एनडीए की सरकार बनने जा रही है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने भोजपुरी में कहा कि बाबू वीर कुंवर सिंह की धरती को मैं प्रणम करता हूं। आप इतनी संख्या में एनडीए (NDA) के प्रत्याशियों को आशीर्वाद देने आए हैं, इसके लिए मैं आप सभी को धन्यवाद करता हूं। उन्होंने कहा कि विकसित बिहार ही विकसित भारत का आधार है। मैं जब विकसित बिहार की बात करता हूं कि बिहार का औद्योगिक विकास। बिहार के युवाओं को बिहार में ही रोजगार। मैं आरा के इस मंच से कह रहा हूं कि आपका सपना हमारा संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए मैं आज आपका साथ मांगने आया हूं।
‘इस बार एनडीए भारी बहुमत से जीतने जा रहा है’
पीएम मोदी ने कहा कि इस बार एनडीए भारी बहुमत से जीतने जा रहा है और जंगलराज वाले हार का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। आपका यह उत्साह कह रहा है कि फिर एक बार एनडीए सरकार। इसलिए आप छह नवंबर को एनडीए सरकार को वोट करें। एक तरफ एनडीए का ईमानदार घोषणा पत्र है। दूसरी तरफ जंगलराज वालों ने अपने घोषणा पत्र को भी झूठ, छल-कपट और लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाला दस्तावेज बना दिया है। जनता से ऊपर कोई नहीं है। यह पब्लिक है सब जानती है। एनडीए के संकल्प पत्र में बच्चों की पढ़ाई, परिवार की दवाई, नौजवानों की कमाई और किसानों की सिंचाई पर सबसे ज्यादा बल दिया है। इसके अलावा बहनों बेटियों के लिए अनेक मजबूत प्रावधान किए गए हैं। पीएम ने कहा कि हमारा संकल्प है कि बिहार का युवा बिहार में ही काम करेगा और बिहार का नाम करेगा। इसलिए आने वाले वर्षों में एक करोड़ रोजगार देने का एलान किया गया है
‘दिल्ली वालों को यहां आकर यह देखना चाहिए’
पीएम मोदी ने महागठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली में बैठने वालों को यहां आकर देखना चाहिए कि हवा का रूख क्या है? यहां बड़ी कंपनियों के डाटा सेंटर बनेंगे। बिहार में यहीं रहते हुए लोग दुनिया की कंपनियों के लिए काम करेंगे। एनडीए के संकल्प पत्र में गांव की समृद्धि के लिए एक सशक्त योजना बनाई गई है। अब हमलोग बिहार में फूड पार्क का विस्तार करने जा रहे हैं। छोटे किसानों को केंद्र सरकार छह हजार रुपया देती है। लेकिन, बिहार की नई एनडीए सरकार अपनी तरफ से तीन हजार रुपये और बढ़ाने वाली है। पीएम मोदी ने कहा कि मोदी जब आपकी बातों को सुनता है तो सोता नहीं बल्कि जग जाता है। आपके कहने पर हमलोगों ने अरवा की जगह उसना चावल देना शुरू कर दिया। मोदी की गारंटी थी कि हर गरीब परिवार को पक्का घर मिलेगा। आप देखिए बिहार के 60 लाख गरीब परिवारों को पक्का घर मिल गया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने केंद्र सरकार की कई विकास योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।
पीएम मोदी बोले- राजद ने कांग्रेस कनपटी पर कट्टा रखकर ऐसा किया
पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में देश की सेना की इतनी बड़ी सफलता कांग्रेस और राजद को पसंद नहीं आई। धमाके पाकिस्तान में हो रहे थे और नींद कांग्रेस के शाही परिवार की उड़ी हुई थी। आज तक कांग्रेस और राजद के नामदार ऑपरेशन सिंदूर के सदमे से बाहर नहीं निकल पाए। आज विकसित बिहार के संकल्प के साथ पूरा एनडीए एकजुट होकर आगे बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और राजद के अंदर घमासन मचा हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि आपको एक अंदर की बात बता रहा हूं। नामांकन वापस लेने से एक दिन पहले बंद कमरे में गुंडागर्दी का खेल खेला गया। कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि सीएम पद पर राजद के उम्मीदवार का नाम तय हो। लेकिन, राजद ने कांग्रेस की कनपटी पर कट्टा रखकर सीएम पद चोरी कर ली। राजद और कांग्रेस में झगड़ा भयंकर बढ़ गया। घोषणा पत्र से लेकर प्रचार तक में राजद वालों ने कांग्रेस से कुछ भी नहीं पूछा। चुनाव के बाद यह लोग एक-दूसरे का सिर फोड़ने लगेंगे। इसलिए हमेशा याद रखिए ऐसे लोग बिहार का भला कभी नहीं कर सकते हैं। एक तरफ सुशासन है। वहीं दूसरी तरफ जंगलराज का कुशासन। जंगलराज ने बिहार को खोखला कर दिया।
जंगलराज के दौरान बिहार में 37 हजार अपहरण हुए
पीएम मोदी ने कहा कि कट्टा, कटुता, क्रूरता, कुशासन और करप्शन ही जंगलराज की पहचान है। बेटियों से छेड़खानी, व्यापारियों से लूटपाट समेत सबकुछ राजद वाले मौका मिलते ही करने लगते हैं।नवंबर 2004 में तरारी ब्लॉक एक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर साहब बच्चों को पोलियों की ड्रॉप पिलवा रहे थे। जब वह रात को घर के लिए निकले तो रास्ते में हथियार बंद लोगों ने उनका अपहरण कर लिया। जंगलराज के दौरान ऐसे ही 37 हजार लोगों का अपहरण हुआ था। दूसरे के जीवन बचाने वालों डॉक्टरों को अपना जीवन बचाने के लिए बॉडीगार्ड लेकर चलना पड़ता था। सीएम नीतीश कुमार और एनडीए सरकार ने बहुत कोशिश करके उस मुश्किल दौर से बिहार को बाहर निकाला है। राजद ने तुष्टिकरण की राजनीति की। बिहार में जंगलराज लाया। वहीं कांग्रेस की पहचान सिखों के कत्लेआम से है। कांग्रेस के लोगों ने सिखों को नरसंहार किया था। आज भी कांग्रेस नरसंहार के आरोपियों को पूरे सम्मान के साथ अपनी पार्टी में आगे बढ़ा रही है। राजद और कांग्रेस को अपने किए गए कृत्यों का पछतावा नहीं है। राजद और कांग्रेस बिहार की पहचान खत्म करने में लगी हुई है। अब यह लोग घुसपैठियों को यहां घुसाने में लगे हैं।
पीएम बोले- राजद-कांग्रेस वालों से सावधान रहना
पीएम मोदी ने कहा कि राजद और कांग्रेस वालों के इरादे बेहद ही खतरनाक हैं। इसलिए आपको इनसे सावधान रहना है। यह लोग सिफ जंगलराज की पाठशाला में पढ़कर निकले हैं। इनके कारण उद्योग बंद हो गए। फैक्ट्रियों में ताले गए गए। इनका रिकॉर्ड ही निवेशकों को भगाने का है। जब निवेशकों को लालटेन और लाल झंडा दिखेगा तो क्या वह अपना पैसा लगाएगा क्या? निवेशक सिर्फ एनडीए सरकार ही ला सकती है। एनडीए सरकार विकास और विरासत दोनों को महत्व देते हुए आगे बढ़ रही है। हमारी सरकार बाबू वीर कुंवर सिंह की जन्मस्थली का कायाकल्प करने जा रही है। जिन लोगों ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा में लगा दिया, उसे कांग्रेस और राजद वालों ने कभी सम्मान नहीं दिया। कांग्रेस ने हमेशा बाबा साहेब का अपमान किया। बाबू जगजीवन राम और सीताराम केसरी को भी कांग्रेस ने बेईज्जत किया।
राजद और कांग्रेस वालों ने छठ महापर्व का अपमान किया
पीएम मोदी ने कहा कि राजद और कांग्रेस वालों ने पहले महाकुंभ का अपमान किया। अब छठ महापर्व को नौटंकी कह रहे हैं। आप बताइए क्या कोई छठ महापर्व का अपमान कर सकता है क्या? बिहार की रफ्तार अब हमें रुकने नहीं देनी है। इस बार भोजपुर की हर सीट और हर बूथ पर एनडीए को विजयी बनाना है। इस बार छठ महापर्व पर बड़ी संख्या में हमारे भाई-बहन घर आए हैं। उनसे आग्रह है कि अगर आपका मतदान सूची में नाम है तो आप मतदान करके के बाद ही वापस लौटें। पीएम मोदी ने सभी एनडीए प्रत्याशियों को मंच पर आगे बुलाया और उन्हें वोट देने की अपील की।
डीएम और एसपी खुद तैयारियों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं
कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है। डीएम और एसपी खुद तैयारियों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सभा स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है और ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए कई रूट डायवर्जन भी जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर एसपीजी की टीम भी पहुंच चुकी है और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर सभी व्यवस्थाओं का जायजा ले रही है। वहीं पीएम के कार्यक्रम को लेकर एनडीए कार्यकर्ताओं में प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया। भाजपा और जदयू के नेताओं का कहना है कि मोदी की सभा से जिले के राजनीतिक माहौल में बड़ा असर पड़ेगा।
Haryana में कांग्रेस को बड़ा झटका… पूर्व मंत्री संपत सिंह ने छोड़ी पार्टी
4 Nov, 2025 08:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस (Haryana Congress) को बड़ा झटका लगा है। पूर्व मंत्री संपत सिंह (Former minister Sampat Singh) ने कांग्रेस (Congress) छोड़ दी है। आज उन्होंने अपना इस्तीफा (Resign) कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) को भेज दिया। पार्टी छोड़ने का फैसले को उन्होंने पूरी तरह से व्यक्तिगत बताया है और किसी अन्य पार्टी में जाने पर अभी कोई विचार नहीं किया है। संपत सिंह ताऊ देवीलाल के जन्मदिवस पर 25 सितंबर को रोहतक में हुई इनेलो की रैली में गए थे। वह इनेलो से ही कांग्रेस में आए थे। हालांकि अभी उन्होंने किसी भी पार्टी को ज्वाइन करने के बारे में नहीं बताया है। उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर भी सवाल उठाए थे। संपत सिंह का इस्तीफा हरियाणा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित होगा।
लगातार अनदेखी और राज्य नेतृत्व पर सवाल उठाए
संपत सिंह ने चार पेज के अपने लंबे-चौड़े इस्तीफे में लगातार अनदेखी, विधानसभा क्षेत्र बदलने, टिकट न देने, जीतने पर मंत्री मंडल में जगह न देने, इलाके के विकास कार्यों के लिए सरकार होते हुए भी बजट न देने जैसे कई कारण गिनाए हैं। साथ ही राज्य नेतृत्व पर भी सवाल उठाए हैं। इसके अलावा कांग्रेस से लगातार हो रही दिग्गज नेताओं की अनदेखी और पलायन का उल्लेख करते हुए इसके कांग्रेस के लिए खतरनाक बताया है। कुलदीप बिश्नोई, धर्मबीर सिंह, किरण चौधरी, श्रुति चौधरी, अरविंद शर्मा, अशोक तंवर, अवतार भड़ाना, सावित्री जिंदल, नवीन जिंदल जैसे बड़े नेताओं के कांग्रेस छोड़ने का जिक्र किया है।
पार्टी की लगातार हार पर कोई जवाबदेही तय नहीं हुई
संपत सिंह ने लिखा कि लोकसभा चुनावों में दलित मतदाताओं ने भारी समर्थन देकर कांग्रेस को पांच सीटें जिताईं, परंतु राज्य नेतृत्व ने अहंकार और पारिवारिक हितों के कारण कुमारी सैलजा को हाशिये पर डाल दिया। उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां और आपत्तिजनक वीडियो फैलाए गए। उनके समर्थकों को टिकट से वंचित कर दिया गया। परिणामस्वरूप दलित वर्ग ने कांग्रेस का बहिष्कार कर दिया। 2009 से 2024 तक पार्टी की लगातार हार पर कोई जवाबदेही तय नहीं हुई। वोट चोरी या टिकट चोरी के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 2005 में भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस ने 67 सीटें जीती थीं और उसके बाद से पराजयों का सिलसिला जारी है। हरियाणा की जनता अब राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व दोनों से निराश है। 2024 की हार के बाद स्वयं राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि राज्य नेतृत्व ने व्यक्तिगत हितों को पार्टी से ऊपर रखा। फिर भी वही नेतृत्व बना रहा। इन परिस्थितियों में, मुझे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उस क्षमता पर विश्वास नहीं रहा कि वह हरियाणा की जनता के हितों का प्रतिनिधित्व कर सकती है। मैं एक गर्वित हरियाणवी हूं और अपने प्रदेश की जनता को निराश नहीं कर सकता। हरियाणा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता अटूट है परंतु वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व में मेरा विश्वास समाप्त हो गया है। अतः मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना त्यागपत्र देने के लिए विवश हूं।
‘RJD वालों ने बिहार को बर्बाद किया, मनमोहन-सोनिया ने गुस्से में बंद कर दिए थे सभी प्रोजेक्ट’- PM मोदी
3 Nov, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सहरसा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सहरसा रैली (Saharsa Rally) में महागठबंधन (Grand Alliance) पर जमकर हमला बोला. पीएम मोदी ने कहा कि आरजेडी-कांग्रेस का (RJD-Congress) विकास से दूर-दूर तक नाता नहीं है. आरजेडी ने बिहार (Bihar) को बर्बाद कर दिया. पीएम ने कहा कि केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार और सोनिया गांधी ने गुस्से में आकर बिहार के सभी प्रोजेक्ट्स पर ताला लगा दिया था.
पीएम मोदी ने कहा कि आरजेडी और कांग्रेस के नेताओं के पास राम मंदिर जाने का समय नहीं, लेकिन विदेश यात्रा के लिए फुर्सत है. उन्हें अपने देश के आस्था स्थलों से नहीं, घुसपैठियों से मोहब्बत है. उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जो बिहार के लोगों की जमीन और सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने बिहार के मछली पालक और मखाना किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं. उन्होंने बताया कि एनडीए सरकार ने मछली पालन मंत्रालय और मखाना बोर्ड की स्थापना की है. पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा कि जब मैं विदेश जाता हूं तो बिहार के मखाने को गर्व से उपहार में देता हूं.
प्रधानमंत्री ने बताया कि बिहार की ‘जीविका दीदी’ योजना आज पूरे देश में मिसाल बन चुकी है. हमने 1 करोड़ 40 लाख महिलाओं के खातों में सीधे 10 हजार रुपये भेजे हैं. यह महिलाओं के सशक्तिकरण की असली ताकत है. उन्होंने महिला क्रिकेट टीम की वर्ल्ड कप जीत पर भी बधाई दी और कहा कि हमारी बेटियों ने 25 साल बाद कप जीता है. अब ये बेटियां खेतों से लेकर मैदान तक इतिहास लिख रही हैं .
मोदी ने कहा कि बिहार का युवा अब बाहर नहीं जाएगा, बल्कि बिहार में ही रोजगार और सम्मान दोनों पाएगा. यह हमारा संकल्प है. अब बिहार का युवा अपने राज्य में ही बिहार का नाम रोशन करेगा.
रैली के अंत में प्रधानमंत्री ने जनता से अपील की कि पहले चरण का मतदान नजदीक है. अपने हर वोट से बिहार को मजबूत बनाइए. जंगलराज वालों को हराकर एनडीए को जिताइए. एनडीए की सरकार ही बिहार के विकास और स्थिरता की गारंटी है.
‘राहुल बाबा ने अभी छठी मैया का अपमान किया था, ये लोग…’, अमित शाह का महागठबंधन पर बड़ा अटैक
3 Nov, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिवहर: बिहार (Bihar) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सोमवार (3 नवंबर) को शिवहर (Shivhar) में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत मां सीता की जन्मस्थली को नमन करते हुए की और कहा कि वे इस पवित्र भूमि को प्रणाम करते हैं. अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में आज अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन चुका है, जिसे बनने से ‘लालू एंड कंपनी’ ने 550 सालों तक रोके रखा था. उन्होंने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर भी मां गंगा के अपमान का आरोप लगाया.
अमित शाह ने सीतामढ़ी को लेकर बड़ी घोषणा करते हुए कहा, “जिस दिन सीतामढ़ी में मां जानकी का भव्य मंदिर बनेगा, उसी दिन अयोध्या से लेकर सीतामढ़ी तक वंदे भारत ट्रेन भी शुरू कर दी जाएगी.” उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी और अयोध्या का धार्मिक संबंध बहुत गहरा है और अब यह संबंध विकास की गाड़ी से भी जुड़ जाएगा.
गृह मंत्री ने विपक्ष पर करारा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “14 नवंबर को जब मतगणना होगी, तब दोपहर एक बजे तक लालू-राहुल एंड कंपनी का सूपड़ा साफ हो जाएगा.” उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता एक बार फिर एनडीए पर भरोसा करेगी और राज्य में विकास की गंगा बहती रहेगी.
अमित शाह ने महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए की पांचों पार्टियां ठीक पांडवों की तरह सभी 243 सीटों पर एकजुट होकर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि दूसरी ओर महाठगबंधन में खुद उनके नेताओं को नहीं पता कि कौन किस सीट से चुनाव लड़ रहा है.
अमित शाह ने कहा, “राहुल बाबा ने अभी छठी मैया का अपमान किया था. राहुल बाबा मोदी जी का अपमान करते करते छठी मैया का अपमान कर रहे हैं. जब जब राहुल ने मोदी जी अपमान किया है, तब तब जनता ने इनको सबक सिखाया है और अब तो इन्होंने छठी मैया को भी अपमानित कर दिया. यह लोग सनातन को बदनाम करने में लगे हुए हैं.”
उन्होंने राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी ने हर जीविका दीदी के खाते में 10,000 रुपये जमा किए हैं. इसके संदर्भ में उन्होंने आरजेडी के सांसद मनोज झा पर भी सवाल उठाया और कहा कि मनोज झा ने लोगों से यह कहा कि वे ये पैसे ले लें. लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं कि उनके दादा भी आ जाएं तो भी आपसे यह पैसे नहीं लेने वाले.”
RSS बैन की मांग पर अमित शाह का खरगे को जवाब, बोले- जनता बिहार चुनाव में देगी जवाब
3 Nov, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Congress President Mallikarjun Kharge) के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने आरएसएस (RSS) पर बैन लगाने की बात कही थी। शाह ने साफ किया कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) चल रहा है और जनता इसी चुनाव में इसका जवाब दे देगी। गृह मंत्री ने कहा कि आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है और इसकी स्थापना को 100 साल पूरे हो गए हैं।
एक कार्यक्रम में अमित शाह ने खरगे की आरएसएस पर बैन लगाने की बात पर कहा, ‘उन्होंने (खरगे) कोई वजह नहीं बताई। आरएसएस ऐसी संस्था है, जिसने हम लोगों जैसे करोड़ों युवाओं को देश बनाने के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया है। देशभक्ति के संस्कार दिए हैं और हमें यह भी देखना चाहिए कि आरएसएस से निकले हुए दो लोग इस देश के प्रधानमंत्री भी बने हैं और दोनों सबसे अच्छे प्रधानमंत्री रहे हैं। आरएसएस का योगदान देश के विकास, समाज को सही दिशा दिखाने में बहुत बड़ा है। खरगे जी की मंशा समझ रहा हूं।’
उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस की स्थापना को 100 साल हो गए हैं और बहुत बड़ा योगदान संघ का इन 100 साल में रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। संघ के पास हजारों लोग हैं, जिनके पास न तो अपना घर है और न ही अपना बैंक अकाउंट और न ही परिवार है। केवल और केवल भारत माता की सेवा करने के लक्ष्य के साथ निकले हैं। जो लोग इस पर बैन लगाने की बात करते हैं, उनको मालूम नहीं है कि चुनाव चल रहा है, जनता इसका जवाब इसी मतदान में दे देगी।
खरगे ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर फिर से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि देश में कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए यही संगठन जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है। खरगे ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘मेरा व्यक्तिगत विचार है और खुलकर बोलूंगा कि (आरएसएस पर प्रतिबंध) लगना चाहिए। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जो चीजें (आरएसएस को लेकर) हमारे सामने रखी हैं, अगर उसकी मर्यादा प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) और शाह (गृह मंत्री अमित शाह) रखते हैं तो यह (प्रतिबंध) होना चाहिए।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया, ‘आज देश में जो गड़बड़ियां हो रही हैं और कानून-व्यवस्था की समस्यां पैदा हो रही हैं, ये सब भाजपा और आरएसएस की वजह से हैं।’
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