राजनीति
हटा देंगे साले को…. CM मोहन यादव ने किसके लिए कही ये बात? कांग्रेस को बैठे-बिठाए मिल गया मुद्दा
14 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में सरपंच महासम्मेलन (Sarpanch General Conference) का आयोजन हुआ, जिसे संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने ऐसा कुछ कह दिया कि जो ना केवल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि उसने विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) को भी बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया है। अपने संबोधन के दौरान सीएम ने सचिव और सहायक सचिवों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘कोई सचिव अगर काम नहीं करके दे रहा तो हटा देंगे साले को, चिंता क्यों कर रहे हो। जहां कोई तकलीफ देगा तो हटा देंगे। सचिव है, सहायक सचिव है, इनकी क्या औकात।’
मुख्यमंत्री ने आगे बोलते हुए कहा, ‘देखो अगर लगता है कि सरपंच के मामले में कोई दिक्कत आ रही, सरकार ने निर्णय लिया है, तो उसको ठीक करने का काम हमारा है। ये कोई चिंता की बात थोड़ी है। ताली-वाली बजाकर बताओ, अगर मैं आपके हित की बात कर रहा हूं तो।’
कांग्रेस ने लगाया पद की गरिमा गिराने का आरोप
सीएम यादव की इस भाषाशैली की आलोचना करते हुए प्रदेश कांग्रेस ने अपने एक्स अकाउंट पर इसका वीडियो भी शेयर किया और इसके साथ उसने लिखा, ‘हां, मोहन बाबू आपके राज में माफियाओं के अलावा और किसी की #औकात भी क्या है! गिरती भाषा और हल्के शब्दों का प्रयोग कर अपने पद की गरिमा को और कितना गिराएंगे मुख्यमंत्री जी!’
सरपंच करा सकेंगे 25 लाख रुपए तक का काम
सरपंच महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने कहा, ‘पंचायत व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से पंचायतों को 25 लाख रुपए तक के कार्य करने का अधिकार दिया जा रहा है। साथ ही इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए 50-50 हजार रुपए की राशि अंतरित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के समान पंचायतों में भी विकास योजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिये सक्षम बनाया जाएगा।’
सीएम बोले- पंचायतों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता
सीएम यादव ने सरपंचों की महत्ता बताते हुए कहा कि जो काम सरपंच कर सकता है, वो कोई नहीं कर सकता। जमीन पर काम सरपंच करता है, इसलिए पंचायतों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने कहा, ‘प्रदेश सरकार हर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के साथ शांति धाम स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। पंचायतों के माध्यम से रोजगार आधारित उद्योगों की स्थापना कर ग्राम स्वावलंबन को भी सशक्त बनाया जा रहा है।’
मुख्यमंत्री बोले- सरपंचों की मदद से ग्राम विकास का कारवां चल रहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में सरपंच के पास पर्याप्त शक्तियां हैं। सरपंच अपनी पंचायत को नई ऊंचाइयों पर लेकर जा सकते हैं। सरपंचों के माध्यम से ही प्रदेश में ग्राम विकास का कारवां चल रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सभी कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों का क्रियान्वयन पंचायतों के माध्यम से ही हो रहा है।’
BJP को मिल गया एकनाथ शिंदे का तोड़? कौन हैं गणेश नायक
14 Nov, 2025 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में सबकुछ ठीक नहीं है। इसके संकेत हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (Mumbai Metropolitan Region) में की चुनाव प्रभारी की नियुक्ति से मिलते हैं। दरअशल, भाजपा (BJP) ने राज्य सरकार में वन मंत्री गणेश नाइक (Ganesh Naik) को 7 जिलों का प्रभारी बनाया है, जिनमें ठाणे भी शामिल है। खास बात है कि नाइक को उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) का प्रतिद्वंद्वी भी माना जाता है।
कौन हैं गणेश नाइक
रिपोर्ट के अनुसार, नाइक को बड़े नेताओं को चुनौती देने और मुश्किल राजनीतिक हालात में खड़े रहने वाला माना जाता है। खास बात है कि वह अविभाजित शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से अलग हो गए थे और इसके बाद भी ठाणे में अपनी पार्टी के लिए खड़े रहे। इस सीट पर शिंदे के गुरु माने जाने वाले आनंद दीघे का दबदबा था।
कहा जाता है कि उनका मजबूत जनाधार युवाओं और मजदूरों के बीच है। उनके समर्थन से ही नाइक वाशी, नेरुल, एरोली, तुर्भे, घंसोली और TTC बेल्ट यानी ट्रांस ठाणे क्रीक में शिवसेना के चेहरे बन गए थे। 1980 के दशक में वह नवी मुंबई में बड़े नेता के तौर पर स्थापित हो चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे शिवसेना का विस्तार हो रहा था, तो नाइक का क्षेत्र दीघे से ज्यादा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ठाकरे को हस्तक्षेप करना पड़ा और नवी मुंबई को नाइक का क्षेत्र घोषित किया गया।
NDA के घटक दलों के कितनी सीटें मिलने का अनुमान
सर्वे में कहा गया है कि भाजपा दूसरे से तीसरे नंबर की पार्टी के रूप में खिसक सकती है और उसे 50 से 56 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। NDA के अन्य घटक दलों में चिराग पासवान की LJPR को 11 से 16 सीटें, जीतनराम मांझी की हम को 2-3 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की RLM को 2-4 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं।
महागठबंधन में किसी कितनी सीटें?
विपक्षी महागठबंधन के अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस को 17-21, लेफ्ट को 10 से 14, VIP को 3-5, IIP को 0-1 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा प्रशांत किशोर की जनसुराज को 0-2 सीटें, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को 0-2 सीटें और अन्य को 0-5 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।
NDA को कुल 43 फीसदी वोट शेयर
वोट शेयर के मामले में भी राजद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के आसार जताए गए हैं। एक्सिस माई इंडिया के सर्वे के मुताबिक, राजद को 24% वोट शेयर मिल सकता है, जबकि भाजपा और जेडीयू दोनों को 18-18% वोट शेयर मिलने के आसार जताए गए हैं। कांग्रेस को 10 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है। NDA को कुल 43 फीसदी और महागठबंधन को 41 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि जनसुराज को 4%, AIMIM को 1% और अन्य को 11% वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
ममता बनर्जी ने एसआईआर को बताया वोटबंदी.. कहा- उनका गला भी काट सकती है…
14 Nov, 2025 08:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने निर्वाचन आयोग (Election Commission) द्वारा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) (Special Intensive Revision (SIR) of Electoral Rolls) कराने को ‘वोटबंदी’ करार दिया। साथ ही उन्होंने आयोग से यह प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की। बनर्जी ने कहा कि भाजपा (BJP) एसआईआर के खिलाफ बोलने पर उन्हें जेल भेज सकती है या उनका गला भी काट सकती है। बनर्जी ने यह भी कहा कि वह चुनाव से ठीक पहले एसआईआर कराने की जल्दबाजी को समझ नहीं पा रही हैं।
ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में मीडिया से कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एसआईआर के नाम पर लोगों को परेशान कर रही है। जैसे कुछ मुद्राओं को चलन से बाहर करना ‘नोटबंदी’ थी, वैसे ही एसआईआर ‘वोटबंदी’ है। उन्होंने कहा कि यह ‘सुपर इमरजेंसी’ का ही एक और रूप है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले एसआईआर कराने की इतनी जल्दी मुझे समझ नहीं आ रही। निर्वाचन आयोग को यह प्रक्रिया तुरंत बंद करनी चाहिए। मतदाता सूची का पुनरीक्षण दो या तीन महीने में पूरा नहीं हो सकता। इसे जबरन अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से लोगों के मताधिकार पर अंकुश नहीं लगाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने जीएसटी की आलोचना की और इसे एक भूल बताया और कहा कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनता को जीएसटी के नाम पर लूट रही है। बता दें कि पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर में राहत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने पेश किया गया। वकील ने कि याचिका को मंगलवार को सूचीबद्ध किए जाने का यह कहते हुए अनुरोध किया कि अन्य राज्यों में एसआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर कल सुनवाई होनी है।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पहले से ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित है, जहां याचिकाकर्ता ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने और प्रक्रिया की अदालत की निगरानी में निगरानी की मांग की है। हाई कोर्ट ने हाल ही में चुनाव आयोग को संशोधन के लिए अपनाई जा रही प्रक्रियाओं की व्याख्या करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
बिहार में काउंटिंग से एक दिन पहले राजद नेता तेजस्वी यादव ने महागठबंधन नेताओं की हाई लेवल बैठक बुलाई
14 Nov, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में काउंटिंग से एक दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार शाम को अचानक से राबड़ी आवास पर महागठबंधन के नेताओं की हाई लेवल बैठक बुला ली। इस बैठक में शामिल होने के लिए भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, विकासशील इंसान पार्टी के चीफ मुकेश सहनी और राजद के कई सीनियर नेता पहुंचे हैं।
काउंटिंग से ठीक एक दिन पहले राजद नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को दिन में महागठबंधन के प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं के साथ ऑनलाइन बैठक की। इस बैठक में उन्होंने चुनावी गड़बड़ी पर नजर बनाए रखने का आदेश दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं को आदेश दिया कि किसी भी काउंटर पर गिनती के दौरान उन्हें लगता है कि गड़बड़ी हो रही है तो वह तुरंत पार्टी हाईकमान को इसकी जानकारी दें।
महागठबंधन के उम्मीदवारों के साथ बैठक के दौरान तेजस्वी ने कहा कि “काउंटिंग वाले दिन किसी भी परिस्थिति में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हमारे पोलिंग एजेंट हर टेबल पर मौजूद रहें और फॉर्म 17C से लेकर ईवीएम की सील तक हर चीज की बारीकी से जांच करें।” उन्होंने यह भी कहा कि मतगणना की गति को प्रभावित करने या किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिशें हो सकती हैं, इसलिए सबको अलर्ट रहना होगा।
बिहार: महागठबंधन को अब भी उम्मीद.. विधायकों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने की तैयारी
13 Nov, 2025 08:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में तमाम एग्जिट पोल (All Exit Polls) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) की अगुआई में एनडीए की भारी जीत बता रहे हैं, वहीं महागठबंधन (Grand Alliance) को अभी भी खुद पर भरोसा है। ऐसे में महागठबंधन (Grand Alliance) ने नतीजों के फौरन बाद अपने विधायकों को सुरक्षित रखने की योजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके तहत महागठबंधन के विधायकों को जीत के फौरन बाद दूसरे राज्यों में शिफ्ट किया जा सकता है।
कांग्रेस यह कहती रही है कि बिहार में मुकाबला दो महागठबंधनों के बीच है। ऐसे में किसी तीसरी पार्टी के लिए कोई जगह नहीं है। चुनाव में अधिक मतदान को दोनों गठबंधन अपने पक्ष में मान रहे हैं। ऐसे में महागठबंधन को भरोसा है कि चुनावी मुकाबला बहुत करीबी भी हो सकता है। इसलिए, नतीजों के बाद हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए महागठबंधन अपने विधायक शिफ्ट कर सकता है।
छोटी पार्टियों को लेकर चिंता
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनता दल ने अपने सभी विधायकों को जीत के फौरन बाद पटना बुलाने की तैयारी शुरू कर दी है। हॉर्स ट्रेडिंग की स्थिति में सबसे ज्यादा खतरा छोटी पार्टियों से रहता है। ऐसे में वीआईपी और राजद के विधायकों को पश्चिम बंगाल शिफ्ट किया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस भी अपने विधायकों को जीत के फौरन पटना बुला सकती है। उन्हें तेलंगाना या कर्नाटक भेजा जा सकता है।
हार-जीत का अंतर बहुत कम होने की उम्मीद
प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसी संभावना कम है कि बंपर वोटिंग के बावजूद किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिले। पर जमीन पर जिस तरह दोनों गठबंधनों के बीच करीबी मुकाबला दिखाई पड़ा है, उससे साफ है कि हार-जीत का अंतर बहुत कम होगा। वहीं, जन सुराज पार्टी की भूमिका भी अहम होगी। प्रशांत किशोर की अगुआई वाली जन सुराज पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है।
BJP को मिल गया एकनाथ शिंदे का तोड़? कौन हैं गणेश नायक
13 Nov, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में सबकुछ ठीक नहीं है। इसके संकेत हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (Mumbai Metropolitan Region) में की चुनाव प्रभारी की नियुक्ति से मिलते हैं। दरअशल, भाजपा (BJP) ने राज्य सरकार में वन मंत्री गणेश नाइक (Ganesh Naik) को 7 जिलों का प्रभारी बनाया है, जिनमें ठाणे भी शामिल है। खास बात है कि नाइक को उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) का प्रतिद्वंद्वी भी माना जाता है।
कौन हैं गणेश नाइक
रिपोर्ट के अनुसार, नाइक को बड़े नेताओं को चुनौती देने और मुश्किल राजनीतिक हालात में खड़े रहने वाला माना जाता है। खास बात है कि वह अविभाजित शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से अलग हो गए थे और इसके बाद भी ठाणे में अपनी पार्टी के लिए खड़े रहे। इस सीट पर शिंदे के गुरु माने जाने वाले आनंद दीघे का दबदबा था।
कहा जाता है कि उनका मजबूत जनाधार युवाओं और मजदूरों के बीच है। उनके समर्थन से ही नाइक वाशी, नेरुल, एरोली, तुर्भे, घंसोली और TTC बेल्ट यानी ट्रांस ठाणे क्रीक में शिवसेना के चेहरे बन गए थे। 1980 के दशक में वह नवी मुंबई में बड़े नेता के तौर पर स्थापित हो चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे शिवसेना का विस्तार हो रहा था, तो नाइक का क्षेत्र दीघे से ज्यादा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ठाकरे को हस्तक्षेप करना पड़ा और नवी मुंबई को नाइक का क्षेत्र घोषित किया गया।
सरकार और बाल ठाकरे दोनों से असहमति जताई
1990 के विधानसभा चुनाव में नाइक ने बेलापुर से पहली बार बड़ी चुनावी जीत हासिल की थी। इसके 5 साल बाद वह मनोहर जोशी की अगुवाई वाली सरकार में मंत्री भी बने। हालांकि, यहां भी जोशी और ठाकरे से उनका टकराव जारी रहा। रिपोर्ट के अनुसार, नाइक ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था और बाद में जोशी ने उन्हें सरकार से बाहर कर दिया।
एनसीपी से मिलाया हाथ
1990 में नाइक ने अविभाजित NCP यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से हाथ मिलाया, लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में हार गए। साल 2004 में उन्हें फिर सफलता मिली और वह एक्साइज मंत्री बन गए। 2014 में उन्हें भाजपा उम्मीदवार मंदा म्हात्रे के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2019 में उन्हें भाजपा से हाथ मिला लिया और एरोली में जीत हासिल की।
क्यों है भाजपा के लिए खास
रिपोर्ट के अनुसार, टीटीसी में लंबे समय से मौजूदगी, कामगारों और ठेकेदारों से संपर्क के चलते माना जाता है कि वह जल्द समर्थन जुटा सकते हैं। वहीं, कई बड़े नेताओं से सीधी टक्कर लेने की उनकी क्षमता भी उन्हें चुनिंदा नेताओं में से एक बनाती है, जो शिंदे को उनके ही गढ़ में चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा नाइक के जरिए भाजपा नवी मुंबई और ठाणे के उन इलाकों में समर्थन मिलता है, जहां शिंदे की पहुंच सीमित है।
अलग-अलग चुनाव लड़ने के संकेत
अक्तूबर में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल भाजपा ने ठाणे और नवी मुंबई में आगामी नगर निकाय चुनाव अकेले लड़ने का संकेत दिया है, जिसका उद्देश्य इन नगर निकायों में अपने महापौर बनाना है। मुंबई के इन दो बड़े नगरों में भाजपा द्वारा अकेले चुनाव लड़ने के इस संकेत के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी इसका जवाब देने के लिए ऐसी ही रणनीति तैयारी करनी शुरू कर दी है। शिवसेना का ठाणे क्षेत्र में खासा प्रभाव है।
बिहार में NDA की सरकार… लेकिन एक्सिस माई इंडिया के सर्वे में सबसे बड़ी पार्टी RJD
13 Nov, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly elections) पर एक्सिस माई इंडिया (Axis My India) के भी एग्जिट पोल (Exit Polls) में NDA की सरकार बनने का दावा किया गया है। सर्वे में कहा गया है कि राज्य की कुल 243 सीटों में से सत्ताधारी NDA गठबंधन को 121 से 141 सीटें मिल सकती हैं, जबकि विपक्षी महागठबंधन को 98 से 118 सीटें मिलने की संभावना है। इस सर्वे में जन सुराज को 0 से 2 सीटें और अन्य के खाते में 1-7 सीटें जाने के आसार जताए गए हैं।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि मुख्य विपक्षी दल राजद एक बार फिर से राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल्स के नतीजों में कहा गया है कि राजद को 67 से 76 सीटें मिल सकती हैं, जबकि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जेडीयू को 56 से 62 सीटें मिल सकती हैं। यह जेडीयू के लिए अच्छा संकेत है। वह तीसरे पायदान से दूसरे पायदान पर खिसकती दिख रही है।
NDA के घटक दलों के कितनी सीटें मिलने का अनुमान
सर्वे में कहा गया है कि भाजपा दूसरे से तीसरे नंबर की पार्टी के रूप में खिसक सकती है और उसे 50 से 56 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। NDA के अन्य घटक दलों में चिराग पासवान की LJPR को 11 से 16 सीटें, जीतनराम मांझी की हम को 2-3 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की RLM को 2-4 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं।
महागठबंधन में किसी कितनी सीटें?
विपक्षी महागठबंधन के अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस को 17-21, लेफ्ट को 10 से 14, VIP को 3-5, IIP को 0-1 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा प्रशांत किशोर की जनसुराज को 0-2 सीटें, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को 0-2 सीटें और अन्य को 0-5 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।
NDA को कुल 43 फीसदी वोट शेयर
वोट शेयर के मामले में भी राजद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के आसार जताए गए हैं। एक्सिस माई इंडिया के सर्वे के मुताबिक, राजद को 24% वोट शेयर मिल सकता है, जबकि भाजपा और जेडीयू दोनों को 18-18% वोट शेयर मिलने के आसार जताए गए हैं। कांग्रेस को 10 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है। NDA को कुल 43 फीसदी और महागठबंधन को 41 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि जनसुराज को 4%, AIMIM को 1% और अन्य को 11% वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
पदयात्रा में नरोत्तम मिश्रा का बयान: ‘सनातन अमृत है, कई लोग लोगों को हजम…
13 Nov, 2025 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पलवल। मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार (12 नवंबर) को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की “सनातन हिंदू एकता पदयात्रा” में हिस्सा लिया। यह यात्रा पूरे उत्तर भारत में हिंदू एकता, जातिवाद के उन्मूलन और हिंदू राष्ट्र की स्थापना के संदेश के साथ निकाली जा रही है।
‘सनातन अमृत है…कई लोगों को हजम नहीं होता’
पदयात्रा के छठवें दिन शामिल हुए नरोत्तम मिश्रा ने जनसनूह को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग सनातन का विरोध कर रहे हैं, वे कीचड़ और लीचड़ के समान हैं। कीचड़ तन खराब करता है और लीचड़ मन खराब करता है, इसलिए इनसे दूर रहना ही बेहतर है।सनातन अमृत है, लेकिन जैसे देशी घी, शहद और मिश्री औषधि हैं, फिर भी जिन्हें नहीं हजम होती, वे मर जाते हैं। वैसे ही सनातन भी अमृत है, लेकिन कई लोगों को हजम नहीं होता।
‘सनातन धर्म महान है’
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि वे किसी की तुलना जानवरों से नहीं कर रहे हैं बल्कि यह उदाहरण देना चाहते हैं कि सनातन धर्म की महानता इतनी गहरी है कि उसे हर कोई समझ नहीं सकता। डॉ. मिश्रा ने कहा कि महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जो अभियान चला रहे हैं, वह भारत की आत्मा को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है। सनातन विरोधी समाज में जहर घोलना चाहते हैं लेकिन सनातन सच्चाई, सद्भाव और आत्मबल का प्रतीक है।
मथुरा पहुंचेगी पदयात्रा
बाबा बागेश्वर की पदयात्रा का आज (गुरुवार)सातवां दिन है. यात्रा 7 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर के कात्यायनी मंदिर से शुरू हुई थी और 16 नवंबर को वृंदावन में समाप्त होगी। सातवें दिन पदयात्रा मथुरा में प्रवेश करेगी कोटवन बॉर्डर होते हुए वृंदावन जाएंगे, अगले 4 दिन यात्रा मथुरा जिले में ही रहेगी।
एग्जिट पोल्स में सच साबित होता दिख रहा भाजपा का सपना, लेकिन दूसरे में अभी भी महारोड़ा
13 Nov, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जारी करीब सभी एग्जिट पोल्स में एनडीए की वापसी होती दिख रहा है। हालांकि, एक ऐसा एग्जिट पोल भी आया है, जिसमें महागठबंधन को बहुमत मिलने का दावा किया है। इस एग्जिट पोल्स में दावा किया गया है कि महागठबंधन को 130 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि एक दूसरे सर्वे में कहा गया है कि दोनों गठबंधनों के बीच कांटे की टक्कर होती है। इसके मुताबिक एनडीए के खाते में 121, जबकि महागठबंधन के खाते में 119 सीटें आ सकती हैं।
बहरहाल, अधिकांश सर्वे में ये दावा भी किया गया है कि इस बार के चुनाव में भाजपा का बड़ा सपना सच हो सकता है। वह सपना है, राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने का। अधिकांश सर्वे में इस बात की पुष्टि हुई हैं कि भाजपा न केवल एनडीए गठबंधन में अब बड़ा भाई बनने की राह पर है, बल्कि सबसे ज्यादा सीटें जीतकर बड़ी पार्टी बनने जा रही है।
हालांकि, भाजपा का अपना मुख्यमंत्री बनाने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है और रास्ते में एक महारोड़ा आ गया है। ये महारोड़ा नीतीश कुमार ही हैं, जो भाजपा के मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में खेला कर सकते हैं। उनका पलटीमार इतिहास रहा है, चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में उन्होंने पीएम मोदी की रैलियों से खुद को अलग किया था। एक चर्चा यह भी है कि अगर भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री का सपना साकार करने की कोशिश की, तब राज्य की सत्ता हाथ से निकल सकती है और नीतीश फिर से महागठबंधन के साथ जा सकते हैं। तमाम एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा नंबर वन पार्टी हो सकती है और जेडीयू दूसरे नंबर की पार्टी हो सकती है, जबकि राजद अब तीसरे नंबर पर रह सकती है।
पीपुल्स इनसाइट्स के सर्वे में कहा गया है कि भाजपा को 68-72 सीटें मिल सकती हैं, जबकि मैट्रिज ने 65-73 सीटें, पी मार्क ने 68- 78 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, न्यूज18 के सर्वे में जेडीयू को नंबर वन पार्टी के रूप में दिखाया गया है। उसके मुताबिक जेडीयू को 60 से 70 और भाजपा को 55 से 65 सीटें मिल सकती हैं।
वहीं विपक्षी राजद को लेकर पीपुल्स इनसाइट्स के सर्वे में कहा गया है कि 65-72 सीटें मिल सकती हैं, जबकि मैट्रिज ने 53-58 सीटें, पी मार्क ने 63-79 सीटें मिलने का दावा किया है। इन दोनों ने भी राजद को तीसरे नंबर की पार्टी बनने की संभावना जाहिर की है। न्यूज18 के सर्वे में भी कहा गया है कि राजद तीसरे नंबर की पार्टी बन सकती है और 50 से 60 सीटें मिल सकती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2020 में 75 सीटें जीतक राजद नंबर वन पार्टी रही थी, जबकि 74 सीटें जीतकर भाजपा नंबर दो और 43 सीटें जीतकर जेडीयू तीसरे नंबर की पार्टी रही थी।
बिहार में वोटिंग के बाद, बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव पर बीजेपी का फोकस
13 Nov, 2025 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बिहार में विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही भाजपा ने अब अपना फोकस अगले साल होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव पर केंद्रित कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। महाराष्ट्र में राज्य की सत्ता में काबिज भाजपा ने मुंबई इकाई में चार नए महासचिव नियुक्त किए हैं। इसमें राजेश शिरवाडकर, गणेश खापरकर, आचार्य पवन त्रिपाठी और श्वेता पारुलेकर शामिल हैं। ये नियुक्तियां भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष और विधायक अमीत साटम ने की हैं।
बता दें कि जनवरी 2026 में बीएमसी चुनाव होने हैं। सभी दलों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य का सत्ताधारी गठबंधन महायुति मिलकर चुनाव लड़ने की बात कह रहा है, जबकि विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाड़ी में मुद्दे पर एकता नहीं दिखाती। अभी दो दिन पहले हीं महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि उनकी पार्टी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।
उन्होंने कहा, हमारे बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के नेताओं ने फ़ैसला किया है कि हम स्थानीय निकाय चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने वाले है। आलाकमान से चर्चा के बाद स्थानीय स्तर पर यह फ़ैसला लिया गया है। हमें बीएमसी में हमेशा 30 से 35 सीटें मिलती हैं।
शिवसेना-एनसीपी चुनाव चिन्ह विवाद पर 21 जनवरी को सुनवाई
13 Nov, 2025 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चुनाव चिन्ह विवादों की अंतिम सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2026 तय की है। दोनों मामलों को एक साथ सुना जाएगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि जरूरत पडऩे पर 22 जनवरी को भी सुनवाई की जा सकती है।
शिवसेना (उद्धव गुट) ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग के फरवरी 2023 के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें एकनाथ शिंदे के गुट को असली शिवसेना माना गया और उन्हें ‘धनुष-बाण’ का चुनाव चिन्ह दिया गया। उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि चुनाव आयोग ने पार्टी के संगठन में कौन ज्यादा मजबूत है, यह देखने के बजाय सिर्फ विधायकों की संख्या को महत्व दिया। इसी तरह, एनसीपी (शरद पवार गुट) ने भी फरवरी 2024 में चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अजित पवार गुट को असली एनसीपी माना गया और उन्हें ‘घड़ी’ का चुनाव चिन्ह दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जाएगी।
भाजपा सांसद कंगना पर आगरा में चलेगा राष्ट्रद्रोह का केस
13 Nov, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आगरा। आगरा में कंगना रनोट के खिलाफ किसानों के अपमान और राष्ट्रद्रोह का केस चलेगा। बुधवार को जिला अदालत ने कंगना के खिलाफ दायर रिवीजन को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा- जिस निचली अदालत ने कंगना के वाद को निरस्त किया था। अब उसी कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी।
हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनोट के खिलाफ किसानों के अपमान और राष्ट्रद्रोह का वाद दायर है। उन पर राष्ट्रद्रोह का केस दर्ज कराने की मांग की गई है। आगरा में स्पेशल जज एमपी-एमएलए लोकेश कुमार की कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई। वकील रमाशंकर शर्मा ने 11 सितंबर 2024 को कंगना रनोट के खिलाफ अदालत में राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाकर वाद दायर किया था। आरोप लगाया था कि कंगना ने 26 अगस्त 2024 को एक इंटरव्यू में किसानों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। जिससे उनकी और लाखों किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। दो दिन पहले, यानी 10 नवंबर को कंगना की सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनुसूया चौधरी, उनकी जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान और अधिवक्ता विवेक शर्मा कोर्ट पहुंचे। वादी वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, बीएस फौजदार, दुर्गे विजय सिंह, सुरेंद्र लाखन, उमेश जोशी पहुंचे। स्पेशल जज एमपी-एमएलए लोकेश कुमार की कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। फिर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया और 12 नवंबर की तारीख तय की। बता दें कि कंगना आज तक कोर्ट में पेश नहीं हुई हैं, उनको 6 समन जारी हो चुके हैं।
उत्तराखंड में गणेश गोदियाल बने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, हरक और प्रीतम सिंह को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
12 Nov, 2025 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड में कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है. ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने आज बड़ा फैसला लेते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा की जगह पार्टी के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस संगठन की कमान सौंप दी है. कांग्रेस पार्टी के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी किए गए पत्र में चकराता से विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन व पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है.
गणेश गोदियाल की राजनीतिक इतिहास: गणेश गोदियाल के राजनीतिक इतिहास पर नजर डाले तो वो इससे पहले भी उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके है. गोदियाल ने साल 2002 में थैलीसैंण विधानसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें जीत मिली.
अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में गणेश गोदियाल ने भाजपा के दिग्गज नेता रमेश पोखरियाल निशंक को करारी हार दी थी. इसके बाद साल 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में गणेश गोदियाल को हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद साल 2012 में हुए परिसीमन के बाद थलीसैंण, श्रीनगर विधानसभा का हिस्सा बन गया.
साल 2012 में भी गणेश गोदियाल ने श्रीनगर विधानसभा से चुनाव लड़ा. इस बार भाजपा से उनके सामने धन सिंह रावत थे. इस चुनाव में गणेश गोदियाल ने धन सिंह रावत को हराया. गणेश गोदियाल की इस जीत के बाद कांग्रेस में उनकी कद बढ़ता चला गया. गणेश गोदियाल कभी सतपाल महाराज के करीबी माने जाते थे. हालांकि सतपाल महाराज के भाजपा में शामिल होने के बाद गोदियाल को कांग्रेस में आगे बढ़ने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.
इसके बाद साथ 2017 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हुए. गणेश गोदियाल श्रीनगर विधानसभा से चुनाव लड़े. तमाम विकास कार्यों के बाद भी इस चुनाव में गणेश गोदियाल मोदी लहर के सामने नहीं टिक पाये. इस चुनाव में बीजेपी के धन सिंह रावत ने उन्हें हराया.
साल 2021 में कांग्रेस ने गणेश गोदियाल को बड़ी जिम्मेदारी दी. 22 जुलाई 2021 में कांग्रेस ने गणेश गोदियाल को उत्तराखंड कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था. इसके बाद साल 2022 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव हुये. जिसमें गणेश गोदियाल ने फिर से श्रीनगर विधानसभा से ताल ठोकी. इस बार भी गोदियाल को हार का सामना करना पड़ा. 2022 में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद गणेश गोदियाल को अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ा था. साल 2024 में गणेश गोदियाल कांग्रेस के टिकट पर गढ़वाल लोकसभा सीट से लड़े थे, लेकिन उन्हें बीजेपी नेता अनिल बलूनी ने हरा दिया था. गणेश गोदियाल मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के कंडारस्यूं भहेड़ी गांव के रहने वाले है.
दिग्विजय सिंह ने दिल्ली धमाकों को बताया बिहार चुनाव में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का प्रयास!
12 Nov, 2025 11:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। दिल्ली (Delhi) में लालकिले (Red Fort) के बाहर हुए धमाके को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Congress leader Digvijay Singh) ने केंद्र सरकार (Central Government) पर हमला बोला है। वो इस घटना को बिहार चुनाव (Bihar elections) में हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण (Hindu-Muslim polarization) करने का प्रयास के रूप में देख रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर पीएमओ और अमित शाह को टैग कर लिखा, ”अमित शाह जी आप #BiharElection2025 में व्यस्त हैं और दिल्ली में लाल क़िले पर बम फट रहा है। NSA IB CP-दिल्ली क्या कर रहे थे? क्या इन लोगों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी? क्या इन पर कोई कार्रवाई होगी? या फिर इसे बिहार चुनाव में हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण करने का प्रयास होगा? देखते हैं। जिन निर्दोष लोगों की जान चली गई उन सभी के परिवार जनों को हमारी संवेदनाएं। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। शासन उनके परिवार जनों को पूर्ण न्याय दिलायें।”
विस्फोट में 9 लोगों की मौत और 20 घायल, कई वाहन जलकर खाक
दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास धीमी गति से गुजर रही एक कार में सोमवार शाम जबर्दस्त विस्फोट हुआ, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 20 घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि भीड़भाड़ वाले इलाके में व्यस्त समय में हुए विस्फोट के कारण आसपास मौजूद कई वाहन जलकर खाक हो गए, जबकि कई गाड़ियों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। उन्होंने बताया कि विस्फोट में घायल लोगों को लोक नायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि जिस कार में विस्फोट हुआ, उसमें 3 लोग सवार थे और इस बात की जांच की जा रही है कि क्या यह आत्मघाती हमला था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘विस्फोट एक चलती हुंडई आई20 कार में हुआ, जिसमें तीन लोग सवार थे। हमें घायलों के शरीर में कोई छर्रा या ‘पंचर’ नहीं मिला है, जो बम विस्फोट में असामान्य है। हम सभी एंगल से जांच कर रहे हैं।’’
अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने देर शाम कार मालिक मोहम्मद सलमान को हिरासत में लिया और उससे वाहन के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बताया कि उसने डेढ़ साल पहले ओखला में देवेंद्र नामक एक व्यक्ति को यह वाहन बेच दिया था। अधिकारी ने बताया कि बाद में वाहन को अंबाला में किसी को बेच दिया गया और फिर इसे पुलवामा में तारिक नामक व्यक्ति को बेच दिया गया। पुलिस उन लोगों का पता लगा रही है। दिल्ली में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, साथ ही वाहनों की जांच भी तेज कर दी गई है। विस्फोट के बाद जलती कारों से आग की लपटें उठने से इलाके में दहशत फैल गई।
ममता बनर्जी ने एसआईआर को बताया वोटबंदी.. कहा- उनका गला भी काट सकती है…
12 Nov, 2025 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने निर्वाचन आयोग (Election Commission) द्वारा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) (Special Intensive Revision (SIR) of Electoral Rolls) कराने को ‘वोटबंदी’ करार दिया। साथ ही उन्होंने आयोग से यह प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की। बनर्जी ने कहा कि भाजपा (BJP) एसआईआर के खिलाफ बोलने पर उन्हें जेल भेज सकती है या उनका गला भी काट सकती है। बनर्जी ने यह भी कहा कि वह चुनाव से ठीक पहले एसआईआर कराने की जल्दबाजी को समझ नहीं पा रही हैं।
ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में मीडिया से कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एसआईआर के नाम पर लोगों को परेशान कर रही है। जैसे कुछ मुद्राओं को चलन से बाहर करना ‘नोटबंदी’ थी, वैसे ही एसआईआर ‘वोटबंदी’ है। उन्होंने कहा कि यह ‘सुपर इमरजेंसी’ का ही एक और रूप है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले एसआईआर कराने की इतनी जल्दी मुझे समझ नहीं आ रही। निर्वाचन आयोग को यह प्रक्रिया तुरंत बंद करनी चाहिए। मतदाता सूची का पुनरीक्षण दो या तीन महीने में पूरा नहीं हो सकता। इसे जबरन अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से लोगों के मताधिकार पर अंकुश नहीं लगाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने जीएसटी की आलोचना की और इसे एक भूल बताया और कहा कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनता को जीएसटी के नाम पर लूट रही है। बता दें कि पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर में राहत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने पेश किया गया। वकील ने कि याचिका को मंगलवार को सूचीबद्ध किए जाने का यह कहते हुए अनुरोध किया कि अन्य राज्यों में एसआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर कल सुनवाई होनी है।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पहले से ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित है, जहां याचिकाकर्ता ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने और प्रक्रिया की अदालत की निगरानी में निगरानी की मांग की है। हाई कोर्ट ने हाल ही में चुनाव आयोग को संशोधन के लिए अपनाई जा रही प्रक्रियाओं की व्याख्या करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
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