राजनीति
आज 10वीं बार सीएम की शपथ लेंगे नीतीश
20 Nov, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार को वे 10वीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे। शपथ समारोह सुबह 11.30 बजे गांधी मैदान में होगा। समारोह के लिए 2 मंच बनाए गए हैं। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी समेत 11 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। साथ ही 150 मेहमानों को भी निमंत्रण भेजा गया।
इससे पहले बिहार विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया। वहीं, सुबह 11 बजे पटना के भाजपा ऑफिस में विधायक दल की बैठक हुई। इसमें सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना गया है। विजय सिन्हा को विधानमंडल का उपनेता चुना गया है। मतलब सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा दोनों डिप्टी ष्टरू होंगे। जानकारी के मुताबिक, नीतीश के साथ-साथ सम्राट और विजय सिन्हा भी डिप्टी सीएम की शपथ ले सकते हैं। इधर, भाजपा के विधायक दल की बैठक से पहले जदयू के विधायक दल की बैठक हुई जिसमें नीतीश कुमार को नेता चुना गया।
मुख्यमंत्री ही तय करेंगे कैबिनेट भी
वहीं बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने सरकार गठन की प्रक्रिया पर जानकारी देते हुए कहा कि कैबिनेट का गठन मुख्यमंत्री तय करेंगे। हम पहले राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इसके बाद ही बाकी बातें स्पष्ट होंगी। जदयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बैठक के बाद कहा कि शपथ ग्रहण समारोह गुरूवार को होगा। एनडीए नेता का चयन हो चुका है। सभी एनडीए सहयोगियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता व सीवान सदर के विधायक मंगल पांडेय ने नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व व मार्गदर्शन में प्रदेश का समावेशी विकास हुआ है। उनके नेतृत्व में विकास व सुशासन का राज स्थापित हुआ है।
बिहार परिणाम के बाद सपा का बदला तेवर: अब मायावती पर नहीं होंगे निजी हमले
20 Nov, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों को देखते हुए सपा ने अपने तेवर बदल लिए हैं। इसके चलते अब मायावती पर किसी भी तरह के निजी हमले नहीं करने के सख्त निर्देश अखिलेश यादव ने दिए हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। यह कदम भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सभी मीडिया पैनलिस्टों को साफ निर्देश दे दिए हैं कि बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती पर किसी भी प्रकार के निजी हमले नहीं किए जाएं। यह फैसला बिहार चुनाव 2025 में विपक्षी महागठबंधन की करारी हार के बाद लिया गया बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय में सपा द्वारा मायावती और बसपा को लगातार भाजपा की बी टीम कहकर निशाने पर लिया जाता रहा है। लेकिन पार्टी के भीतर अब यह समझ बन रही है कि मायावती पर हमले दलित वोट बैंक पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं, जो आने वाले चुनावों में सपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि सपा के कई प्रवक्ताओं को अखिलेश यादव ने खुद यह निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक सपा के लगभग 20 प्रवक्ता विभिन्न टीवी चैनलों पर पार्टी का पक्ष रखते हैं, इन्हीं में से कुछ ने पुष्टि की है कि बिहार चुनाव के बाद पार्टी हाईकमान की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है, कि मायावती पर निजी हमला नहीं करना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बिहार चुनाव में महागठबंधन द्वारा बसपा और एआईएमआईएम को बी टीम कहकर खारिज करने की कोशिश उलटी पड़ गई। वहीं ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीतीं और 10 पर दूसरे स्थान पर रही, जबकि बसपा भी एक सीट जीतने में सफल रही। इसके उलट महागठबंधन की मुख्य पार्टियां खराब प्रदर्शन कर गईं। इससे स्पष्ट हुआ कि जिन दलों को बी टीम कहा जा रहा था, उन्होंने विपक्षी दलों से बेहतर प्रदर्शन कर लिया। जानकार कह रहे हैं कि सपा समझ रही है, कि यूपी का चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरणों पर लड़ा जाएगा। लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति ने भाजपा को कठिन चुनौती दी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में दलित वोटों का बिखराव सपा के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। मायावती पर निजी हमले करने से दलित समाज खुद को निशाना बना हुआ महसूस करता है, जिससे दलित वोट भाजपा के खिलाफ एकजुट होने के बजाय बसपा की ओर लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी में दलित मतदाताओं की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव अब किसी भी परिस्थिति में इस वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहेंगे। इसलिए सपा की रणनीति में बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है—अब मायावती पर निजी हमले नहीं होंगे और दलित समाज को साधने की कोशिश तेज होगी।
राजनीतिक गलियारों में यह कदम सपा की 2027 की तैयारी का अहम संकेत माना जा रहा है।
‘चुनाव आयोग को बदनाम कर रहे राहुल गांधी’, जजों और ब्यूरोक्रेट्स समेत 272 हस्तियों ने लिखा लेटर
19 Nov, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के 272 पूर्व शीर्ष अधिकारियों, जजों, राजनयिकों और सेना के अफसरों ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इन लोगों ने एक खुला पत्र जारी कर कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी ‘चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं.’
‘Assault on National Constitutional Authorities’ नाम के टाइटल वाले पत्र में कहा गया कि कुछ विपक्षी नेता ‘जहरीली बयानबाजी’ और ‘बिना सबूत के आरोपों’ के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि देश की संस्थाएं ठीक तरह काम नहीं कर रहीं. साइन करने वालों ने आरोप लगाया कि सेना, न्यायपालिका और संसद के बाद अब कांग्रेस का निशाना चुनाव आयोग है.
पत्र में कहा गया कि राहुल गांधी बार-बार वोट चोरी के आरोप लगाते रहे, लेकिन उन्होंने आज तक कोई आधिकारिक शिकायत या एफिडेविट जमा नहीं किया. उनके ‘100% प्रूफ’, ‘एटम बम’ और ‘देशद्रोह’ जैसे दावों को भी ‘बिना आधार’ बताया गया.
पूर्व अधिकारियों ने कहा कि कांग्रेस, विपक्ष और उससे जुड़े NGOs बार-बार चुनाव आयोग को ‘BJP की B-टीम’ बताकर बदनाम करते रहे, जबकि ECI लगातार अपने तरीके, डेटा और प्रक्रियाएं सार्वजनिक कर रही है. पत्र में लिखा गया कि अदालत की निगरानी में हुई जांच, प्रकाशित डेटा और हटाए गए अवैध नाम इस तरह के आरोपों को गलत साबित करते हैं.
साइन करने वालों ने इसे चुनावी नाकामी से उपजा हताशा भरा गुस्सा बताया. उन्होंने लिखा, ‘जब नेता जनता से दूर हो जाते हैं, तो वे अपनी कमजोरियों की जगह संस्थाओं पर हमला करने लगते हैं. विश्लेषण की जगह नाटकीयता आ जाती है. जनसेवा की जगह सार्वजनिक तमाशा ले लेता है.’ पत्र में कहा गया कि देश को आज भी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन सेशन और एन. गोपालस्वामी जैसी शख्सियतें याद हैं, जिन्होंने बिना लोकप्रियता की चाहत के निष्पक्ष और सख्त चुनाव कराए.
अंत में पत्र ने चुनाव आयोग से कहा कि वह डेटा सार्वजनिक करता रहे, जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़े और ‘पीड़ित बनने वाली राजनीति’ को दरकिनार करे. साथ ही राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे बिना सबूत के आरोप लगाने की जगह नीतियों पर प्रतिस्पर्धा करें और चुनाव परिणामों को शालीनता से स्वीकार करें.
‘जब से नतीजे आए हैं, तबसे…’, बिहार में करारी हार के बाद छलका प्रशांत किशोर का दर्द
19 Nov, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार विधानसभा चुनावों में जन सुराज पार्टी को मिली करारी हार ने प्रशांत किशोर की नींद उड़ा दी है. प्रशांत किशोर ने खुद स्वीकार किया कि यह नतीजा उनके लिए बहुत बड़ा झटका है. उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद से उन्हें ठीक से नींद नहीं आई है क्योंकि जन सुराज ने अपेक्षा से कहीं कम प्रदर्शन किया.
पीके ने कहा कि मैं ईमानदारी से कहूं तो नतीजे आने के बाद मैं ठीक से सो नहीं पाया हूं, लेकिन जब तक आप हार नहीं मानते तब तक आप हारे नहीं हैं. चुनावी रणनीतिकार से राजनीति में एंट्री करने वाले प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी राजनीति किसी चुनावी जीत-हार से आगे की है. उन्होंने कहा कि अगर हम बिहार को बदलना चाहते हैं तो एक चुनाव से हारकर पीछे नहीं हट सकते. यह लंबी लड़ाई है और मैं इसे पूरी ताकत के साथ जारी रखूंगा.
शताब्दी समारोह में PM मोदी बोले- ‘सत्य साईं बाबा आज भले हमारे बीच में नहीं लेकिन उनका प्रेम…’
19 Nov, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सत्यसाईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के श्री सत्यसाईं जिले में आयोजित कार्यक्रम में दिवंगत आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साईं बाबा को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह के मौके पर उनकी स्मृति में एक सिक्का और डाक टिकटों का सेट भी जारी किया। पीएम मोदी ने आध्यात्मिक गुरु को याद करते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं और सेवा संसार में उनके लाखों अनुयायियों का मार्गदर्शन हमेशा करती रहेंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्री सत्य साईं बाबा का शताब्दी समारोह कार्यक्रम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक दिव्य वरदान है। भले ही साईं बाबा भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं, फिर भी उनका प्रेम और सेवा भावना करोड़ों लोगों के लिए मार्गदर्शक शक्ति है।” उन्होंने ये भी कहा कि 140 देशों में सत्य साईं बाबा के लाखों भक्तों को नई रोशनी और दिशा मिल रही है। उनके अनुयायी लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि श्री सत्य साईं बाबा ने सेवा को मानव जीवन के फोकस में रखा। हमारी अलग-अलग आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराएं एक ही विचार की तरफ ले जाती हैं, चाहे कोई भक्ति, ज्ञान या कर्म के रास्ते पर चले। गरीबों के कल्याण के लिए अपनी सरकारी योजनाओं को बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब उनपर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा हो रही है।
शशि थरुर की पोस्ट पर सुप्रिया श्रीनेत का पलटवार, मुझे पीएम मोदी के भाषण में कुछ भी सराहनीय नहीं लगा
19 Nov, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर सांसद शशि थरूर द्वारा की गई सकारात्मक समीक्षा को खारिज कर कहा कि उन्हें भाषण में सराहना लायक कुछ भी नहीं लगा। कांग्रेस सांसद थरूर के पोस्ट का जवाब देकर श्रीनेत ने कहा कि मुझे प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सराहना लायक कुछ भी नहीं लगा। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को कई बातों का जवाब देना चाहिए।
श्रीनेत ने कहा कि वे एक अखबार के कार्यक्रम में थे। उन्हें हमें बताना चाहिए था कि निष्पक्ष पत्रकारिता से उन्हें क्या दिक्कत है। उन्हें बताना चाहिए था कि वे सच दिखाने और बोलने वालों से खुश क्यों नहीं हैं। श्रीनेत ने कहा कि मुझे उनकी सराहना करने का कोई कारण नहीं दिखा। मुझे नहीं पता कि उन्हें (शशि थरूर) इसकी कोई वजह कैसे मिल गई। मुझे वहां एक तुच्छ भाषण लगा। उन्होंने वहाँ भी कांग्रेस की आलोचना की।
उनकी टिप्पणी थरूर की पोस्ट के माध्यम से की गई प्रतिक्रिया से बिल्कुल विपरीत थी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रकाश डाला था। थरूर ने लिखा कि उन्होंने व्याख्यान में भाग लिया था और उन्होंने देखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के लिए भारत की रचनात्मक अधीरता की बात की थी और उपनिवेशवाद-विरोधी मानसिकता पर ज़ोर दिया था। कांग्रेस नेता थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत को उभरता हुआ बाज़ार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक उभरता हुआ मॉडल बताया, देश के आर्थिक लचीलेपन पर ज़ोर देकर कहा कि वह लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए चुनावी मूड में नहीं, बल्कि भावनात्मक मूड में हैं।
थरूर ने कहा कि भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैकाले की 200 साल पुरानी गुलामी मानसिकता की विरासत को पलटने और भारत की विरासत, भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों में गौरव बहाल करने के लिए 10 साल के राष्ट्रीय मिशन की अपील पर केंद्रित था। उन्होंने कहा, बुरी सर्दी और खांसी से जूझने के बावजूद दर्शकों के बीच उपस्थित रहकर खुशी हुई!
एनडीए की वापसी से बिहार में लोग खुश......उन्हें इस बात का सुकुन जंगल राज पार्ट 2 नहीं आया
19 Nov, 2025 05:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने दिया बयान
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने बिहार में महागठबंधन पर निशाना साधकर दावा किया कि बिहार में सरकार गठन से पहले लोगों ने अपनी खुशी जाहिर की है और जंगल राज पार्ट 2 की वापसी न होने से निश्चिंत हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के राजनीतिक विरोधियों के पास कोई विकल्प नहीं है और इसकारण उन्होंने अपनी हार के लिए ईवीएम और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को ज़िम्मेदार माना है, जबकि एनडीए बदले में लोगों को जनादेश देने के लिए बधाई दे रहा है।
बीजेपी नेता हुसैन ने बताया कि बिहार में एनडीए की सरकार बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से, नीतीश कुमार के नेतृत्व में, एनडीए ने शानदार चुनाव लड़ा। और अब, एनडीए से पहले, भाजपा विधायक दल की बैठक होगी... और फिर एनडीए की बैठक होगी। उसमें नेता का चुनाव होगा। बिहार में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। जनता के मूड के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, लोग बहुत खुश हैं, अधिकत्तर लोग इसलिए खुश हैं क्योंकि उन्हें इस बात का सुकून है कि जंगलराज पार्ट 2 नहीं आया है, और हमारे विरोधियों के पास कोई विकल्प नहीं है। वे ईवीएम को दोष दे रहे हैं, महोदय, और हम जनता का शुक्रिया अदा करते हैं।
एनडीए विधायक दल के नेता नीतीश होने की उम्मीद है, जिन्होंने पहले बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, और गुरुवार को दसवीं बार शपथ लेने वाले हैं। गठबंधन के कई नेताओं ने 20 नवंबर को होने वाले ऐतिहासिक शपथ ग्रहण को लेकर उत्साह व्यक्त किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होने वाले है।
जो कोई भी भारत पर गर्व करता है, वह हिंदू : भागवत
19 Nov, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू धर्म धार्मिक अर्थों से बंधा नहीं है, बल्कि समावेशी है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान और ईसाई इस देश की पूजा करते हैं, भारतीय संस्कृति का पालन करते हैं, यहाँ तक कि अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं को छोड़े बिना भी, तब वे भी हिंदू हैं। आरएसएस के शताब्दी समारोह के तहत असम की अपनी यात्रा के दौरान बुद्धिजीवियों, विद्वानों, संपादकों, लेखकों और उद्यमियों के समूह को संबोधित कर भागवत ने कहा कि जो लोग मातृभूमि के प्रति समर्पण, हमारे पूर्वजों के गौरव और हमारी संस्कृति की विरासत को आगे बढ़ाते हैं, वे सभी हिंदू हैं। हिंदू धर्म को धार्मिक अर्थों में नहीं लिया जाना चाहिए। हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति केवल भोजन और पूजा नहीं है। यह समावेशी है।
भागवत ने कहा कि जो कोई भी भारत पर गर्व करता है, वह हिंदू है। संघ प्रमुख भागवत ने दावा किया कि हिंदू केवल एक धार्मिक शब्द नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक निरंतरता में निहित एक सभ्यतागत पहचान है। उन्होंने कहा कि भारत और हिंदू पर्यायवाची हैं। भारत को हिंदू राष्ट्र होने के लिए किसी आधिकारिक घोषणा की आवश्यकता नहीं है। इसकी सभ्यतागत प्रकृति पहले से ही इस बात को दर्शाती है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आरएसएस की स्थापना किसी का विरोध करने या नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने और भारत को वैश्विक नेता बनाने में योगदान देने के लिए की गई थी।
इनमें से, आरएसएस प्रमुख ने परिवार संस्था को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया और हर परिवार से अपने पूर्वजों की कहानियों को संजोने और युवा पीढ़ी में ज़िम्मेदारी और सांस्कृतिक गौरव का संचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लचित बोरफुकन और श्रीमंत शंकरदेव जैसे आदर्शों से सभी भारतीयों को प्रेरणा मिलनी चाहिए, भले ही उनका जन्म किसी विशेष प्रांत में हुआ हो, लेकिन वे हमारे राष्ट्रीय आदर्श हैं।
भागवत ने स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया और असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन में डॉ. हेडगेवार के कारावास और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश भर के अनगिनत स्वयंसेवकों के योगदान को याद किया
बीजेपी का बड़ा फैसला: पुराने सीएम, डिप्टी सीएम की जोड़ी ही करेगी वापसी
19 Nov, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद नीतीश कुमार का सीएम बनना तय है. वहीं डिप्टी सीएम को लेकर भी तस्वीर साफ हो गई है. नीतीश कुमार जेडीयू विधायक दल के नेता चुने गए हैं. वहीं सम्राट चौधरी बीजेपी विधायक दल के नेता और विजय सिन्हा उपनेता चुने गए हैं. इसके साथ ही साफ हो गया है कि वही तिकड़ी एक बार फिर नई सरकार में नजर आएगी. पिछले तीन विधानसभा चुनाव की अगर बात करें, तो हर बार भाजपा अपने डिप्टी सीएम को बदल देती है. ऐसे में सवाल ये भी था कि क्या डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा पद पर बने रहेंगे या बदल दिए जाएंगे. नई सरकार गठन की तैयारी जोरों पर है. आज बुधवार को एनडीए के विधायक दल की बैठक भी होनी है. गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में शपथ समारोह रखा गया है. लेकिन, इसके पहले बीजेपी और जेडीयू विधायक दल की बैठक में नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ हो गई है.
2005 से डिप्टी सीएम बनाने की परंपरा
बिहार में नीतीश कुमार जब से सत्ता में आए हैं, तब से डिप्टी सीएम बनाने की परंपरा चली आ रही है. 2005 में सुशील मोदी भाजपा के कोटे से डिप्टी सीएम बने थे. ये जोड़ी 2013 तक चली. नीतीश कुमार इसके बाद आरजेडी में शामिल हो गए. 2017 में जब नीतीश कुमार दोबारा एनडीए के साथ आए तो फिर सुशील मोदी डिप्टी सीएम बने. हालांकि इसके बाद से कोई दोबारा डिप्टी सीएम नहीं बन पाया.
तीन बार से बदलते रहे डिप्टी सीएम
2020 में सुशील मोदी की जगह पर दो डिप्टी सीएम बनाए गए. बीजेपी कोटे से तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को डिप्टी सीएम बनाया गया. लेकिन ज्यादा दिन तक ये पद पर नहीं रह पाए. नीतीश ने पाला बदला तो पूरा गेम पलट गया. लेकिन एक बार फिर 2024 में एनडीए की सरकार बनी तो फिर नए चेहरों को डिप्टी सीएम बनाया गया. वर्तमान में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा डिप्टी सीएम के पद पर हैं और अब नई सरकार में भी यही तिकड़ी नजर आएगी.
बीएल संतोष की एंट्री बेअसर, निगम-मंडलों में पेंच फँसा
19 Nov, 2025 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मप्र सरकार और संगठन की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। दरअसल प्रदेश कार्यकारिणी घोषित करने के तुरंत बाद राज्य सरकार निगम-मंडलों की सूची जारी करने की रणनीति बना रही थी। दिल्ली से आए बीएल संतोष ने लिस्ट पर अपनी सहमति भी दे दी। लेकिन अब पता चल रहा है कि लिस्ट को लेकर पार्टी में विवाद खड़े हो गए हैं। क्योंकि अभी तक सरकार और संगठन ने अपने हिसाब से लिस्ट तैयार की थी। लेकिन संघ ने बीच में हस्तक्षेप कर सरकार और संगठन के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार संघ ने हर संभाग से एक नेता को निगम-मंडल में शामिल करने का निर्देश दिया है। संघ के हस्तक्षेप के बाद सूची को दोबारा तैयार किया जा रहा है। ऊपर से पूर्व सीएम उमा भारती का प्रदेश कार्यालय पहुंचना और अपने पसंदीदा समर्थकों को निगम-मंडल में शामिल करने के लिए कहना पार्टी के लिए समस्या का सबब बनता जा रहा है। गौरतलब है कि मंगलवार को उमा भारती भाजपा के प्रदेश कार्यालय पहुंची थी जहां उन्होंने करीब आधे घंटे तक प्रदेश अध्यक्ष से गुप्त वार्ता की थी। जब वो बाहर आई तो मुस्कुरा रहीं थीं और प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल टेंशन में लग रहे थे। मतलब साफ है कि निगम-मंडल की नियुक्ति सरकार और संगठन के लिए टेढी खीर बनता जा रहा है। वहीं निगम-मंडलों की सूची में जितनी देरी होती जा रही है उतना ही संगठन पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भोपाल में डेरा जमा कर बैठ गए हैं। इस बीच जिस प्रकार से सीएम मोहन यादव लगातार दिल्ली दौड़ लगा रहे हैं उससे सरकार की बेचैनी का आलम भी समझा जा सकता है। मंगलवार को भी सीएम यादव दिल्ली दौरे पर थे जहां उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। माना यही जा रहा है कि निगम-मंडल पर सहमति बनाने और सूची को अंतिम टच देने के लिए सीएम दिल्ली गए थे। उम्मीद है सरकार और संगठन मिल कर हफ्ते भर के अंदर निगम-मंडलों की सूची को जारी कर देंगे।
महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले महायुति सरकार में बढ़ी तानातनी
19 Nov, 2025 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैबिनेट बैठक में नहीं पहुंचे शिवसेना के मंत्री
शिंदे की पार्टी भाजपा से नाराज, कार्यकर्ताओं को पाले में करने का आरोप
मुंबई। महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले मंगलवार को महायुति सरकार की साप्ताहिक कैबिनेट मीटिंग हुई। इसमें शिवसेना के ज्यादातर मंत्रियों नहीं पहुंचे। इससे महाराष्ट्र में राजनीति हलचल बढ़ गई है। सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में केवल शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मौजूद थे। सोर्स ने बताया कि शिवसेना अपने सहयोगी भाजपा को यह संदेश देना चाहती है कि उसे भाजपा का शिवसेना के कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपने पाले में लाना पसंद नहीं है।
हाल ही में कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना के नेताओं के भाजपा में जाने की घटनाओं को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। हालांकि इसके बाद शिवसेना के मंत्री मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिले और डोंबिवली की घटनाओं पर नाराजगी जताई।
मंत्रालय में मौजूद मंत्री बैठक में नहीं गए
सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान शिवसेना के सभी मंत्री मंत्रालय में मौजूद थे। इसके बावजूद कैबिनेट मीटिंग का हिस्सा नहीं बने। बैठक के बाद शिवसेना के सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बातचीत की।
कोई एक-दूसरे के कार्यकर्ता नहीं लेंगे
इस दौरान शिवसेना मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि हमने फडणवीस से मुलाकात की। उन्हें नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ करने के मामले के बारे में बताया। वे बहुत सहयोगी हैं। ये गलतियां जमीनी स्तर पर होती हैं। इन्हें सुधारा जाएगा। वहीं, भाजपा नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यह तय हुआ है कि वे एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को नहीं लेंगे। कुछ नाराजगी हो सकती है। हमारे मंत्री स्थानीय चुनावों में व्यस्त हैं। भाजपा के आठ मंत्री भी कैबिनेट बैठक में नहीं आए। किसी भी मंत्री ने बैठक का बहिष्कार नहीं किया।
43 नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजकर 21 नवंबर तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा बिहार कांग्रेस ने
19 Nov, 2025 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । बिहार कांग्रेस (Bihar Congress) ने 43 नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजकर (Issued Show-cause Notices to 43 Leaders) 21 नवंबर तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा (Seeking written Explanations by November 21) ।
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल कांग्रेस ने अब चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले नेताओं पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है। इसके तहत मंगलवार को 43 नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है, इनमें पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। बताया गया कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के कारण कांग्रेस पार्टी की अनुशासन समिति ने कई नेताओं को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज नोटिस) जारी किया है। चुनावी अवधि में इन व्यक्तियों द्वारा मीडिया सहित अन्य सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की आधिकारिक लाइन से हटकर बयान दिए गए थे, जिससे पार्टी की छवि, प्रतिष्ठा तथा चुनावी प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिल देव प्रसाद यादव के अनुसार संबंधित सभी व्यक्तियों को निर्देशित किया गया है कि वे 21 नवंबर को दोपहर 12 बजे तक अपना लिखित स्पष्टीकरण समिति के समक्ष प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा में उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में अनुशासन समिति विवश होकर कठोर कार्रवाई करेगी, जिसमें कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से लेकर छह वर्षों के लिए निष्कासन भी सम्मिलित है।
प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने कहा है कि पार्टी अनुशासन और एकता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा पार्टी को क्षति पहुँचाने वाले किसी भी प्रकार के कृत्य को गंभीरता से लिया जाएगा। जिन्हें नोटिस जारी किया गया है, उनमें पूर्व मंत्री अफाक आलम, पूर्व प्रवक्ता आनंद माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, पूर्व मंत्री वीणा शाही, पूर्व एमएलसी अजय कुमार सिंह, पूर्व विधायक गजानंद शाही उर्फ मुन्ना शाही, सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी, बांका जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कंचना कुमारी, सारण जिला अध्यक्ष बच्चू कुमार बीरू, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष राज कुमार राजन भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस छह सीटें जीत पाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम को भी इस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा।
भाजपा एसआईआर का इस्तेमाल हथियार के रूप में करने की कोशिश कर रही - मल्लिकार्जुन खड़गे
19 Nov, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विषय पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की और कहा कि निर्वाचन आयोग को यह साबित करना होगा कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छाया में काम नहीं कर रहा है।
उन्होंने यह दावा भी किया कि भाजपा एसआईआर का इस्तेमाल हथियार के रूप में करने की कोशिश कर रही है और यदि आयोग इसकी उपेक्षा करता है तो उसकी भी संलिप्तता मानी जाएगी। खड़गे ने उन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारियों, राज्य इकाई प्रमुखों, कांग्रेस विधायक दल के नेताओं और सचिवों के साथ समीक्षा बैठक की, जहां मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद जारी है। पार्टी मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में हुई इस बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे।
न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले के साथ एफटीए पर चर्चा की केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने
19 Nov, 2025 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Union Minister Piyush Goyal) ने न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले के साथ (With New Zealand Trade Minister Todd McLay) एफटीए पर चर्चा की (Discussed FTA) ।
मुंबई में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चल रही वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जिसमें दोनों मंत्रियों ने वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार से संबंधित प्रमुख विषयों में अभिसरण पर ध्यान केंद्रित किया। दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि हालिया दौर की वार्ता में ठोस प्रगति हुई है, जिसमें कई पहलुओं पर सहमति बनी है और समझौते के शीघ्र और पारस्परिक रूप से संतोषजनक समापन के लिए एक स्पष्ट साझा समझ उभरी है।
मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो लगभग 49 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक व्यापक और संतुलित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) न केवल व्यापार प्रवाह को गति देगा, बल्कि निवेश संबंधों को भी गहरा करेगा, आपूर्ति-श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करेगा और दोनों देशों में व्यवसायों के लिए एक पारदर्शी, स्थिर और पूर्वानुमानित ढांचा प्रदान करेगा।
एक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी साझेदारी के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, दोनों मंत्रियों ने विश्वास व्यक्त किया कि मुक्त व्यापार समझौते में सेवाओं, नवाचार और प्रौद्योगिकी सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसरों के द्वार खोलने की क्षमता है। वे रचनात्मक गति को बनाए रखने और समझौते को शीघ्र, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी रूप से संपन्न करने के लिए आने वाले हफ्तों में प्रयासों को तेज करने पर सहमत हुए।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उन्होंने टॉड मैक्ले के साथ खासदार क्रीड़ा महोत्सव में डॉक्टर्स के लिए एक स्पेशल क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन किया। केंद्रीय मंत्री गोयल ने एक्स पर लिखा, “मैंने मेरे मित्र और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले के साथउत्तरी मुंबई में खासदार क्रीड़ा महोत्सव में डॉक्टरों के लिए विशेष क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन किया।” उन्होंने आगे लिखा, “हमने आदिवासी नृत्यों और मल्लखंब जैसे हमारे पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन का भी आनंद उठाया। यह खेल की भावना, सांस्कृतिक गौरव और भारत और न्यूजीलैंड के बीच गहरी होती दोस्ती का एक यादगार उत्सव रहा।”
बिहार में नई सरकार: नीतीश कुमार के नाम पर आज लग सकती है मुहर , गृह विभाग और स्पीकर पद पर सियासी खींचतान
19 Nov, 2025 09:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं और शपथ समारोह से पहले एनडीए के सहयोगी दलों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। सत्ता साझेदारी के इस नए अध्याय में सभी दल अपने-अपने हिस्से को मजबूत बनाना चाहते हैं, जिसको लेकर बातचीत का दौर लगातार चल रहा है। आज इस मुद्दे पर भाजपा की अहम बैठक पटना कार्यालय में आयोजित की जा रही है, जहां संभावित मंत्रिमंडल पर चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार, जेडीयू गृह मंत्रालय अपने पास रखना चाहती है, जिसे लेकर एनडीए घटक दलों में खींचतान बढ़ गई है। यह मंत्रालय राज्य सरकार की शक्तिशाली विभागों में से एक माना जाता है, इसलिए पार्टियों के बीच सहमति बनना थोड़ा चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। वहीं भाजपा विधानसभा अध्यक्ष का पद अपने पास रखने के लिए दृढ़ है और इस पर भी बातचीत का दौर जारी है।
एनडीए की अंदरूनी राजनीति के बीच यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि शाम तक विभागों के बंटवारे पर अंतिम सहमति बन सकती है। गठबंधन की कोशिश है कि शपथ समारोह से पहले सभी मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया जाए, ताकि नई सरकार सुचारू रूप से काम शुरू कर सके।
राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि नई सरकार में किस दल को कौन-सा मंत्रालय मिलेगा और गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन कैसे स्थापित होगा। बिहार नई सरकार के आने के साथ ही राजनीतिक समीकरण एक बार फिर तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं, और आज होने वाली बैठक से तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
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