राजनीति
बीजेपी सरकार ने अरावली पर्वतमाला के 100 मीटर फॉर्मूले को क्यों मान्यता दी
22 Dec, 2025 06:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्व सीएम गहलोत ने उठाए सवाल, भविष्य को खतरे में डालने के लगाए आरोप
जयपुर। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अरावली की परिको लेकर उपजे विवाद के बीच सवाल किया कि बीजेपी सरकार ने उस 100 मीटर फॉर्मूले को क्यों मान्यता दी, जिसे उच्चतम न्यायालय ने 2010 में ही खारिज कर दिया था। उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर अरावली को खनन माफिया के हवाले करने की कोशिश कर राज्य के भविष्य को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
गहलोत का 100 मीटर फॉर्मूले से तात्पर्य केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक समिति की अरावली पर्वतमाला की परिसंबंधी हालिया सिफारिशों से था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने 20 नवंबर को स्वीकार कर लिया था। अरावली पर्वतमाला निर्दिष्ट अरावली जिलों में स्थित ऐसी स्थलाकृति है जिसकी ऊंचाई स्थानीय भू-भाग से 100 मीटर या उससे ज्यादा हो और 500 मीटर की दूरी के अंदर स्थित दो या दो से अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह है।
गहलोत ने दोहराया कि नई परिसे राज्य की 90 फीसदी पर्वतमाला नष्ट हो जाएगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुमोदित परिसे अरावली क्षेत्र का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ‘संरक्षित क्षेत्र’ के अंतर्गत आ जाएगा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौर ने भी दिन में गेहलोत के दावे को ‘बेबुनियाद और भ्रामक’ बताते हुए कहा था कि नया ढांचा ‘पहले से ज्यादा सख्त’ और ‘वैज्ञानिक’ है।
गहलोत ने राठौर के बयान के बाद कहा कि 2003 में एक विशेषज्ञ समिति ने आजीविका और रोजगार के परिप्रेक्ष्य से 100 मीटर की परिकी सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि इस सिफारिश पर अमल करते हुए तत्कालीन राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2010 को कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। हालांकि कोर्ट ने केवल तीन दिनों के अंदर ही इस परिको खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी तत्कालीन सरकार ने न्यायपालिका के आदेश को स्वीकार किया और बाद में भारतीय वन सर्वेक्षण के जरिए अरावली क्षेत्र का मानचित्रण करवाया।
उन्होंने कहा कि हमारी कांग्रेस सरकार ने अरावली में अवैध खनन का पता लगाने के लिए रिमोट सेंसिंग के इस्तेमाल के निर्देश दिए थे। 15 जिलों में सर्वेक्षण के लिए सात करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। पूर्व सीएम ने साथ ही यह भी बताया कि पुलिस अधीक्षकों और जिलाधिकारियों को अवैध खनन पर अंकुश लगाने की सीधी जिम्मेदारी दी गई थी। गहलोत ने कहा कि अब सवाल यह है कि राजस्थान की वर्तमान सरकार ने केंद्र की एक समिति को उसी परिका समर्थन और सिफारिश क्यों की, जिसे कोर्ट ने 2010 में पहले ही खारिज कर दिया था। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे दबाव या कोई बड़ी साजिश रही होगी।
चुनाव में पैसों की बारिश हुई, क्या यही हमारा लोकतंत्र है: संजय राउत
22 Dec, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत ने कहा कि भाजपा को 120-125 सीटें मिलीं, शिंदे ग्रुप को 54 मिलीं और अजित पवार को 40-42 सीटें मिलीं। ये नंबर असेंबली वाले ही हैं, है ना? वहीं मशीन, वहीं सेटिंग और वहीं पैसा। यही हमारा लोकतंत्र है। नंबरों में बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। भाजपा ने मशीनें उसी तरह सेट की हैं। इस कारण वहीं नंबर दिख रहे हैं। उन्हें कम से कम नंबर तब बदलने चाहिए थे।
उन्होंने कहा कि चुनाव में पैसों की बारिश हुई। उस बारिश से कौन बचेगा? हमारे उगाए और बोए हुए खेत भी उसके आगे झुक गए हैं। भाजपा और शिंदे ग्रुप 30 करोड़ के बजट वाली म्युनिसिपैलिटी पर 150 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। राउत ने कहा कि अभी तक हमने म्युनिसिपल इलेक्शन में कैंपेनिंग के लिए हेलिकॉप्टर और प्राइवेट प्लेन का इस्तेमाल नहीं किया है। हमने ये इलेक्शन वर्कर्स पर छोड़ दिए थे। लेकिन यहां मुकाबला रूलिंग पार्टियों के अंदर था। मुकाबला हमारे साथ नहीं था। पावर में बैठी 3 पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ खेलती रहीं। इससे बहुत सारा पैसा बना। इससे सचमुच पैसों की बारिश हुई। लोगों को भी पैसे से वोट देने की आदत हो गई है।
वहीं भाजपा ने नागपुर में सबसे अधिक स्थानीय निकाय सीटें जीतीं, जिसमें 22 नगर परिषद और नगर पंचायतें शामिल हैं। इसके बाद पुणे में राष्ट्रीय समिति ने 10 सीटें जीतीं। इन दोनों के अलावा, किसी भी अन्य पार्टी ने किसी जिले में सात से अधिक सीटें नहीं जीतीं। शिवसेना ने जलगांव जिले में सबसे अधिक (छह सीटें) जीतीं। चंद्रपुर जिले में कांग्रेस ने सबसे अधिक सीटें जीतीं, सात सीटों पर कब्जा जमाया। एमवीए पार्टियों में, कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने एक जिले में पांच से अधिक सीटें जीतीं। एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) एक जिले में दो से अधिक सीटें नहीं जीत पाईं, जिनमें से शिवसेना ने यवतमाल में दो सीटें जीतीं।
विपक्ष मनरेगा के नाम पर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा: शिवराज
22 Dec, 2025 05:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे मनरेगा के नाम पर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जबकि सच्चाई इसके ठीक उलट है।
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत–ग्राम रोजगार योजना मनरेगा से पीछे हटने का नहीं, बल्कि उससे एक कदम आगे बढ़ने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ग्रामीण मजदूरों को केवल 100 दिन नहीं, बल्कि 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही बेरोजगारी भत्ते के प्रावधानों को और मजबूत किया गया है तथा मजदूरी भुगतान में देरी होने पर अतिरिक्त मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाया है और लक्ष्य आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण के जरिए विकसित भारत की नींव मजबूत करना है। उन्होंने दो टूक कहा कि यह बिल गरीबों, मजदूरों और विकास के पक्ष में है, न कि उनके खिलाफ, जैसा कि विपक्ष प्रचार कर रहा है।
भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष से मिले सीएम
22 Dec, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डॉ. मोहन यादव ने नितिन नवीन को दी बधाई
भोपाल। मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की है। साथ ही सीएम ने उन्हें यशस्वी कार्यकाल के लिए बधाई भी दी है। नितिन नवीन के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सीएम मोहन यादव की यह पहली मुलाकात है। इस मुलाकात को लेकर सीएम ने एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए जानकारी दी है।
मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी में यह एक नए दौर की शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने नई पीढ़ी को अवसर दिया है। भारत युवाओं का देश है और विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष यदि युवा बनता है, तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है और उसी दिशा में मध्यप्रदेश भी सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस दौरान सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं, केंद्रीय विधि एवं न्याय और संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल से भी सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात की है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले— एसआईआर का विरोध करने वाले हैं खुद कंफ्यूज
22 Dec, 2025 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जोधपुर। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुंबई से जोधपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने गोवा में आयोजित हालिया कला उत्सव की सराहना की। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी यह अनूठा कला उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उत्सव में प्रस्तुत कार्यक्रमों ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया और कला प्रेमियों को भावविभोर कर दिया।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। शेखावत ने कहा कि जो लोग आज एसआईआर का विरोध कर रहे हैं, वे ही कुछ समय पहले इसकी मांग कर रहे थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विरोध करने वालों को खुद यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस बात का विरोध कर रहे हैं। केवल विपक्ष में होने के कारण विरोध करना ही उन्होंने अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी समझ ली है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो थोड़े दिन पहले तक एसआईआर लागू करने की मांग कर रहे थे और अब उसी प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि वे खुद कंफ्यूज हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार और चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं और हर कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
संसद में विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे को लेकर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा, कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है, जहां जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतियों को धरातल पर उतारने को लेकर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। दुर्भाग्य से कुछ लोग संसद को चर्चा का मंच बनाने के बजाय अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति का अखाड़ा बना देते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह रवैया न तो लोकतंत्र के हित में है और न ही जनता के। सरकार की प्राथमिकता देश के विकास और आम नागरिकों के हितों को आगे बढ़ाने की है, जबकि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री बोले- धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे, नया कानून बनाएंगे
22 Dec, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की कि राज्य सरकार अन्य धर्मों का अपमान करने या गाली-गलौज करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा के प्रावधान हेतु विधानसभा सत्र में एक नया अधिनियम प्रस्तुत करेगी। साथ ही, अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कानूनों में उचित संशोधन भी किए जाएंगे। हैदराबाद के एलबी स्टेडियम में आयोजित क्रिसमस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने सभी धर्मों के प्रति आपसी सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए धार्मिक घृणा फैलाने तथा हमलों की घटनाओं के खिलाफ सरकार पहले से ही सख्त कदम उठा रही है।
धर्मनिरपेक्षता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक समुदाय राज्य की सभी कल्याणकारी योजनाओं के पूर्ण लाभार्थी हैं। उन्होंने ईसाई और मुस्लिम समुदायों से जुड़े कब्रिस्तानों के लंबित मुद्दों को शीघ्र हल करने का पूरा आश्वासन दिया। क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने ईसा मसीह के उन अमर उपदेशों की याद दिलाई, जिनमें प्रेम, शांति, क्षमा और मानवता की सेवा का संदेश निहित है। विशेष रूप से, उन्होंने नफरत करने वालों से भी प्रेम करने के दिव्य संदेश पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दिसंबर माह को तेलंगाना तथा कांग्रेस पार्टी के लिए विशेष और चमत्कारिक बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि तेलंगाना राज्य का गठन तथा सोनिया गांधी का जन्मदिन दोनों इसी माह में पड़ते हैं। सरकार द्वारा लागू की जा रही प्रमुख योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने इंदिराम्मा आवास योजना, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा सुविधा तथा गरीब परिवारों को निःशुल्क बिजली जैसी पहलों की सराहना की। अंत में, रेवंत रेड्डी ने विश्वास व्यक्त किया कि तेलंगाना राइजिंग 2047 विजन के तहत राज्य विकास, समृद्धि और जनकल्याण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
सीएम उमर ने कहा- भ्रम में मत रहिए मैं दिल्ली और कश्मीर में अलग-अलग बात नहीं करता
22 Dec, 2025 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपने बयानों से लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। जहां एक ओर विपक्षी गठबंधन केंद्र सरकार पर पूर्ण रूप से हमलावर रुख अपनाना चाहता है, वहीं उमर अब्दुल्ला समय-समय पर केंद्र की सराहना करके उस दबाव को कम कर देते हैं। हाल ही में उन्होंने एक बार फिर केंद्र सरकार द्वारा राज्य को दी जा रही फंडिंग की खुलकर तारीफ की है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी यह सराहना किसी को प्रसन्न करने के लिए नहीं है और वे स्थान के अनुसार अपनी बात नहीं बदलते।
एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने अपनी नीति को बिल्कुल साफ शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि वे उन नेताओं में से नहीं हैं जो राजनीति में लोगों को गुमराह करें। जहां केंद्र सरकार अच्छा कार्य करती है, वहां वे उसकी प्रशंसा करते हैं और जहां कमी दिखती है, वहां खुली आलोचना भी करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, मैं किसी को खुश करने के लिए झूठ नहीं बोलता। मैं अपनी बात दिल्ली में भी वही कहता हूं जो कश्मीर में कहता हूं।
मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद में भी उमर अब्दुल्ला लगातार जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा बहाल करने की मांग उठाते रहे हैं। इसी मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार की उदारता पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि राज्य दर्जे की बहाली को छोड़कर अन्य सभी मामलों में केंद्र सरकार ने उन्हें कोई शिकायत का मौका नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, सच कहूं तो पूर्ण राज्य के मुद्दे को छोड़ दें तो केंद्र सरकार ने हमें शिकायत करने का कोई अवसर नहीं दिया। सिर्फ इसी एक मामले में वे आगे नहीं बढ़ रहे, वहां हमें केवल शिकायतें ही मिली हैं। यह पूरा विवाद उमर अब्दुल्ला के हालिया बयानों और साक्षात्कारों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की उदार फंडिंग और सहयोग की प्रशंसा की थी। उनकी अपनी पार्टी के सहयोगी और कश्मीर के कुछ अन्य नेता उन पर केंद्र सरकार के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। कुछ का कहना है कि दिल्ली में वे केंद्र की तारीफ करते हैं और कश्मीर आकर आलोचना शुरू कर देते हैं। इन आरोपों का जवाब देते हुए उमर ने कहा कि वे कभी भी स्थान के आधार पर अपनी बात नहीं बदलते। वे हमेशा से केंद्र की उदार फंडिंग की सराहना करते आए हैं और जहां गलती है, वहां आलोचना भी करते हैं। उमर अब्दुल्ला ने दोहराया कि वे विधानसभा हो या सार्वजनिक मंच, हर जगह एक ही बात कहते हैं। वे किसी के दबाव में या प्रसन्नता के लिए अपनी राय नहीं बदलते। उनकी यह स्पष्टवादिता उनकी राजनीतिक शैली का हिस्सा रही है, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है। राज्य के विकास और केंद्र से सहयोग के मामले में वे सकारात्मक रुख रखते हैं, लेकिन पूर्ण राज्य दर्जे की मांग पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।
केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र, तेलंगाना की ‘छह गारंटियों’ पर उठाए सवाल
22 Dec, 2025 08:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद । केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि राज्य में कांग्रेस सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बावजूद चुनावी घोषणापत्र में की गई छह गारंटियां अब तक पूरी क्यों नहीं हुईं।
किशन रेड्डी ने पत्र में हाल ही में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात कर ‘तेलंगाना राइजिंग–2047 विजन डॉक्यूमेंट’ प्रस्तुत करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सोनिया गांधी ने सरकार के दो साल के कार्यकाल की सराहना की और मुख्यमंत्री के विकास दृष्टिकोण की प्रशंसा की, लेकिन इससे एक गंभीर सवाल खड़ा होता है। उन्होंने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में तेलंगाना विधानसभा चुनाव के दौरान तुक्कुगुड़ा में आयोजित जनसभा में सोनिया गांधी ने कांग्रेस का घोषणापत्र ‘अभय हस्तम’ जारी किया था और सत्ता में आते ही छह गारंटियां लागू करने का आश्वासन दिया था। रेड्डी ने पूछा कि क्या कांग्रेस की जीत और दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सोनिया गांधी ने कभी इन वादों की स्थिति की समीक्षा की या मुख्यमंत्री से इस पर सवाल किया। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार चुनावी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के बजाय नए विजन डॉक्यूमेंट के जरिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और पार्टी नेतृत्व खुद की तारीफ में व्यस्त हैं, जबकि जवाबदेही तय नहीं की जा रही।
रेड्डी ने यह भी सवाल किया कि क्या कांग्रेस पार्टी अब चुनाव के समय की गई गारंटियों को छोड़ चुकी है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जनता को यह स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए कि ये वादे कहां गए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों, महिलाओं, बेरोजगार युवाओं, छात्रों, दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया, तो जनता भविष्य में इसका करारा जवाब देगी। पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि नई योजनाओं और विजन से पहले सरकार को पुराने वादों को पूरा कर अपनी विश्वसनीयता साबित करनी चाहिए, क्योंकि तेलंगाना की जनता सब देख और समझ रही है।
RSS को BJP के नजरिए से समझना बहुत बड़ी गलती : मोहन भागवत
21 Dec, 2025 07:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना या राजनीतिक नजरिए से समझने की कोशिश से अक्सर गलतफहमियां पैदा होती हैं.
कोलकाता में आरएसएस के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आरएसएस को सिर्फ एक और सेवा संगठन के रूप में देखना गलत होगा. उन्होंने कहा, "अगर आप 'संघ' को समझना चाहते हैं, तो तुलना करने से गलतफहमियां पैदा होंगी. अगर आप 'संघ' को सिर्फ एक और सेवा संगठन मानते हैं, तो आप गलत होंगे."
भागवत ने आरएसएस को सिर्फ बीजेपी से जोड़ने के खिलाफ भी आगाह किया. भागवत ने कहा, "बहुत से लोग 'संघ' को बीजेपी के नजरिए से समझते हैं, जो एक बहुत बड़ी गलती है."
उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग संघ के बारे में "झूठी बातें और सरासर झूठ" फैलाते हैं. "जैसे-जैसे संघ बढ़ेगा, कुछ लोगों को डर है कि उनके फायदे खतरे में पड़ जाएंगे.
उन्होंने कहा, "बहुत से लोग संघ का नाम जानते हैं, लेकिन उसके काम को नहीं, जिससे गलतफहमियां होती हैं. हम किसी को संघ को मानने के लिए मजबूर नहीं करना चाहते. लोग अपने विचार बनाने के लिए आजाद हैं, लेकिन वे विचार तथ्यों पर आधारित होने चाहिए, न कि कल्पना या सेकेंडरी सोर्स पर."
भागवत ने कहा कि संघ का कोई दुश्मन नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं "जिनकी छोटी-मोटी स्वार्थ की दुकानें" संगठन के बढ़ने पर बंद हो जाएंगी. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को आरएसएस के बारे में राय बनाने का अधिकार है, लेकिन वह असलियत पर आधारित होनी चाहिए, न कि "कहानियों और सेकेंडरी सोर्स की जानकारी" पर.
भागवत ने कहा, "लोगों के सामने असलियत लाने के लिए देश के चार शहरों में लेक्चर और बातचीत के सेशन रखे गए हैं."
उन्होंने कहा कि आरएसएस का कोई पॉलिटिकल एजेंडा नहीं है, और संघ हिंदू समाज की बेहतरी और सुरक्षा के लिए काम करता है. उन्होंने कहा कि देश फिर से 'विश्वगुरु' बनेगा, और "संघ का यह कर्तव्य है कि वह समाज को इस मकसद के लिए तैयार करे." आरएसएस शताब्दी समारोह के हिस्से के तौर पर कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में ऐसे सेशन कर रहा है.
कांग्रेस देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है, वह चाहती है कि अवैध अप्रवासी असम में बसें: पीएम मोदी
21 Dec, 2025 06:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नामरूप (असम) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए पार्टी पर देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और राज्य में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बसने में मदद करने का आरोप लगाया.
असम के डिब्रूगढ़ के नामरूप में 10,601 करोड़ रुपये के फर्टिलाइजर प्लांट का उद्घाटन करने के बाद एक पब्लिक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने यहां के पुराने प्लांट को मॉडर्न बनाने और किसानों की समस्याओं का समाधान खोजने की कोई कोशिश नहीं की.
पीएम ने दावा किया, "कांग्रेस देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है. वे चाहते हैं कि अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी असम में बस जाएं." उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी को असमिया लोगों की पहचान, अस्तित्व और गौरव की कोई चिंता नहीं है, जिसे बीजेपी बचाने की कोशिश कर रही है.
मोदी ने कहा, "कांग्रेस वोटर लिस्ट में बदलाव का विरोध कर रही है, क्योंकि वह सिर्फ सत्ता हथियाना चाहती है... मैं जो भी अच्छा काम करने की कोशिश करता हूं, वे उसका विरोध करते हैं... बीजेपी सरकार हमेशा असमिया लोगों की पहचान, ज़मीन, गर्व और अस्तित्व की रक्षा के लिए काम करेगी."
प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य असम को उतना ही शक्तिशाली बनाना है, जितना सदियों पहले अहोम राजवंश के दौरान था. मोदी ने कहा, "इंडस्ट्रियलाइजेशन और कनेक्टिविटी असम के सपनों को पूरा कर रहे हैं. बीजेपी की डबल इंजन सरकार युवाओं को नए सपने देखने के लिए मजबूत बना रही है."
उन्होंने कहा कि नामरूप यूरिया प्लांट से स्थानीय किसानों को मदद मिलेगी और असम के युवाओं के लिए हजारों नौकरियां पैदा होंगी. पीएम ने कहा, "असम में नामरूप फर्टिलाइजर प्लांट देश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ की पहचान बनेगा. यह दुख की बात है कि कांग्रेस ने प्लांट को मॉडर्न बनाने और किसानों की समस्याओं का हल ढूंढने की कोशिश नहीं की."
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत तभी तरक्की करेगा जब किसान खुशहाल होंगे और बीजेपी सरकार ने उनके उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं. मोदी ने कहा, "कांग्रेस के राज में कई फर्टिलाइजर फैक्ट्रियां बंद हो गईं. जब हम सत्ता में आए, तो बीजेपी सरकार ने पूरे देश में कई नए प्लांट लगाए." पीएम ने यह भी कहा कि केंद्र का पाम ऑयल मिशन आने वाले दिनों में नॉर्थ-ईस्ट को खाने के तेल में आत्मनिर्भर बनाएगा और किसानों की इनकम बढ़ाएगा.
पीएम ने असम के डिब्रूगढ़ में 10,601 करोड़ रुपये के उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखी
पीएम मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में 10,601 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ‘ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया संयंत्र’ की नींव रखी. असम वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड (एवीएफसीसीएल) की वार्षिक यूरिया उत्पादन क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन होगी, और इसका संचालन 2030 में शुरू होने की उम्मीद है.
इस वर्ष जुलाई में, डिब्रूगढ़ जिले के नामरूप में एवीएफसीसीएल को स्थापित किया गया था। मार्च में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजॉर कॉर्प लिमिटेड (बीवीएफसीएल) के मौजूदा परिसर में एक नया संयंत्र स्थापित करने को मंजूरी दी थी. एवीएफसीसीएल असम सरकार, ऑइल इंडिया, नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल), हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) और बीवीएफसीएल का एक संयुक्त उपक्रम है.
महाराष्ट्र कांग्रेस बीएमसी में अकेले चुनाव लड़ेगी
21 Dec, 2025 12:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी चुनाव को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्निथला ने कहा है कि पार्टी बीएमसी में अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय के चुनाव जमीनी स्तर पर होते हैं और जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी। ऐसे में सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि क्या महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन टूट गया है?
रमेश चेन्निथला ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव हम महाविकास अघाड़ी के साथ मिलकर लड़े थे, लेकिन चूंकि यह स्थानीय चुनाव है, इसलिए हम इसे अकेले ही लड़ेंगे।
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि आज बैठक में आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनावों के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। इसमें हमने सभी 227 सीटों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया है। अब हमारी एक स्क्रीनिंग कमेटी गठित की जाएगी, जो उम्मीदवारों का चयन करेगी।
कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि उनकी पार्टी अगले महीने होने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ेगी और मतदाता भाजपा के धार्मिक एजेंडे के झांसे में नहीं आएंगे। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने बीएमसी में नियुक्त प्रशासक के माध्यम से कुछ पसंदीदा ठेकेदारों और उद्योगपतियों के लिए निकाय निधि का दुरुपयोग और हेराफेरी की थी।
PM के साथ प्रियंका के चाय पीने से बढ़ी सियासी हलचल, क्या राहुल को आएगा रास? कांग्रेस में उभरते दो पावर सेंटर
21 Dec, 2025 11:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । संसद सत्र (Parliament session) के समापन के बाद होने वाली पारंपरिक ‘चाय पे चर्चा’ (Discussion over tea) इस बार सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं रही, बल्कि इसने कांग्रेस (Congress) की आंतरिक राजनीति में उभरते नए समीकरणों की झलक भी दे दी। लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री (Prime Minister) का अग्रिम पंक्ति में बैठना सामान्य बात है, लेकिन इस बार पहली बार सांसद बनीं प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) का उसी पंक्ति में बैठकर चाय पीना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। खास बात यह रही कि संसदीय दल में किसी औपचारिक पद पर न होने के बावजूद प्रियंका को प्रमुख स्थान मिला, जबकि एनसीपी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले उनसे पीछे बैठी नजर आईं। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान प्रियंका गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच उनके संसदीय क्षेत्र वायनाड को लेकर शालीन बातचीत भी हुई।
जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी अक्सर ऐसी अनौपचारिक बैठकों से दूरी बनाए रखते हैं, वहीं प्रियंका गांधी की मौजूदगी उनकी राजनीतिक समझ और सार्वजनिक छवि की अहमियत को दर्शाती है। इस दौरान उनके चेहरे पर सहज मुस्कान और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। इससे ठीक एक दिन पहले प्रियंका ने लोकसभा में हल्के-फुल्के अंदाज में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से वायनाड में एक हाईवे को लेकर मुलाकात का अनुरोध किया था। गडकरी ने सत्र समाप्त होते ही उन्हें अपने कार्यालय आने का आमंत्रण दे दिया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी की अनुपस्थिति में प्रियंका गांधी ने इस सत्र में प्रभावी ढंग से संसदीय कमान संभालती नजर आईं। वह रोज सुबह करीब 9:30 बजे संसद पहुंचीं, मीडिया में सक्रिय रहीं और यह सुनिश्चित किया कि कांग्रेस की आवाज दबने न पाए। हालांकि, उनकी रणनीति सिर्फ मौजूदगी तक सीमित नहीं दिखी। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी ने पार्टी के भीतर ‘बिग टेंट’ अप्रोच अपनाने की पहल की। यानी अलग-थलग पड़े नेताओं को फिर से साथ लाना।
कांग्रेस के बागी आवाजों की वापसी?
बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी के प्रयास से ही मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे नेताओं को दोबारा प्रमुख बहसों में आगे लाया गया। पार्टी के भीतर यह महसूस किया गया कि अनुभवी वक्ताओं को दरकिनार करना कहीं न कहीं बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो रहा था। इसके बाद मनीष तिवारी ने SHANTI विधेयक समेत कई अहम मुद्दों पर सदन में कई बार अपनी बात रखी, जबकि शशि थरूर ने VB-G RAM G बिल पर बोलने के साथ-साथ नेशनल हेराल्ड मुद्दे पर मकर द्वार पर हुए विरोध प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया।
सोनिया गांधी की झलक?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, प्रियंका गांधी का यह समावेशी तरीका उनकी मां सोनिया गांधी की राजनीतिक शैली की याद दिलाता है। वह पार्टी के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक टकराव बनने से पहले ही संभाल लेती हैं।
लोकसभा के भीतर भी प्रियंका ने सीधे टकराव से परहेज नहीं किया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री को घेरने का साहस दिखाया। यह एक ऐसा विषय जिसे छूने से पार्टी के कई नेता कतराते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने संयम, दृढ़ता और हल्के हास्य के मिश्रण से सरकार को जवाब देने पर मजबूर किया।
बीजेपी मान रही नई चुनौती
बीजेपी खेमे में भी यह धारणा बनती दिख रही है कि जहां राहुल गांधी को निशाना बनाना आसान रहा है, वहीं प्रियंका गांधी एक ज्यादा जटिल और संतुलित राजनीतिक चुनौती पेश करती हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है कि वह लंबी राजनीतिक नाराजगियां नहीं पालतीं और संवाद के रास्ते खुले रखती हैं। इसी बीच, रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ उनके रिश्तों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। गौरतलब है कि बिहार अभियान के दौरान प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी की आलोचना की थी, लेकिन प्रियंका गांधी को लेकर वह हमेशा सम्मानजनक रुख अपनाते रहे।
कांग्रेस में दो पावर सेंटर?
शीतकालीन सत्र के समापन के साथ ही कांग्रेस में दो शक्ति केंद्रों का उभरना अब नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि जहां राहुल गांधी वैचारिक आंदोलनों और जन-आंदोलनों का चेहरा बने रहेंगे, वहीं रणनीति, संवाद और रोजमर्रा के राजनीतिक प्रबंधन की जिम्मेदारी धीरे-धीरे प्रियंका गांधी के हाथों में जा सकती है।
सिद्धारमैया के ढाई साल सीएम वाली बात पर डीके शिवकुमार बोले- पालन करेंगे
21 Dec, 2025 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री (Karnataka Deputy Chief Minister) डी के शिवकुमार (D K Shivakumar) ने शुक्रवार को कहाकि वह ऐसा कोई बयान नहीं देना चाहेंगे कि राज्य में मुख्यमंत्री का बदलाव होगा या नहीं। शिवकुमार ने कहा कि उनके और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया (Chief Minister Siddaramaiah) के बीच कांग्रेस आलाकमान के कहने पर कुछ सहमति बनी है और दोनों इसका पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया आलाकमान के निर्णय के अनुसार मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यकाल पर कभी कोई टिप्पणी नहीं की है।
डीके ने कहाकि हम दोनों के बीच कुछ सहमति बनी है। आलाकमान ने हमारे बीच वह सहमति कायम की है। इसके अनुसार हम दोनों ने चर्चा की है और कई बार कहा है कि हम इसका पालन करेंगे और आगे बढ़ेंगे। हालांकि, शिवकुमार ने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि मुख्यमंत्री पद में कोई बदलाव होगा या नहीं। मुख्यमंत्री के बदलाव की चर्चाओं पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहाकि यह आप (मीडिया) लोग बात कर रहे हैं, हमारे बीच इस बारे में कोई चर्चा नहीं है। हम पार्टी के फैसले का पालन करेंगे।
उपमुख्यमंत्री शुक्रवार को उत्तर कन्नड़ जिले के विभिन्न मंदिरों के दौरे पर थे। उत्तर कन्नड़ जिले के अंकोला स्थित देवी जगदीश्वरी मंदिर की उनकी यात्रा का मुख्यमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षाओं से संबंध होने से संबंधित प्रश्न के उत्तर में, शिवकुमार ने कहाकि मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता, यह मेरे और देवी मां के बीच का मामला है। यह भक्त और देवी के बीच का मामला है। मैंने देवी से क्या प्रार्थना की और उन्होंने मुझे क्या बताया, यह हम दोनों के बीच का मामला है।
डीके शिवकुमार ने कहाकि पांच साल पहले वह अपने परिवार से संबंधित किसी समस्या को लेकर मंदिर आए थे और उनकी मनोकामना पूरी हुई थी। डिप्टी सीएम ने कहाकि इसलिए मैं कृतज्ञता व्यक्त करने और अपने लिए, राज्य के लिए और मुझ पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए मंदिर आ रहा हूं। मैं यहां से खुशी-खुशी वापस जा रहा हूं।
इससे पहले दिन में, सिद्धारमैया ने कहा था कि वह पूरे पांच साल के अपने कार्यकाल के लिए पद पर बने रहेंगे। उन्होंने कहाकि उन्हें कांग्रेस आलाकमान के समर्थन पर पूरा विश्वास है। विधानसभा में उत्तर कर्नाटक के विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के दौरान भी सिद्धारमैया ने कहाकि उन्होंने कभी यह जिक्र नहीं किया कि वह केवल ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री हैं। शिवकुमार ने यहां पत्रकारों से कहाकि मैंने कभी नहीं कहा कि वह (सिद्धारमैया) पांच साल तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। मैंने कभी नहीं कहा कि आलाकमान उनके साथ नहीं है। आलाकमान उनके साथ है, इसीलिए वह आज मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया पार्टी के फैसले के अनुसार मुख्यमंत्री पद पर हैं।
कांग्रेस का आरोप…. संसद के शीत सत्र की शुरुआत गुरुदेव और समापन गांधीजी के अपमान से हुई
21 Dec, 2025 09:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) ने संसद (Parliament) का शीतकालीन सत्र (Winter session) संपन्न होने के बाद शुक्रवार को आरोप लगाया कि इस सत्र की शुरुआत सत्तापक्ष द्वारा गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (Gurudev Rabindranath Tagore) की मानहानि किए जाने से हुई और समापन राष्ट्रपिता “महात्मा गांधी के अपमान” से हुआ और इस दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू पर भी प्रहार किए गए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया यह शीतकालीन सत्र नहीं “प्रदूषणकालीन सत्र” था और वह सरकार वायु प्रदूषण पर चर्चा से भाग गई, जो यह मानती है कि वायु प्रदूषण का फेफड़े पर कोई असर नहीं होता।
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद रमेश ने संवाददाताओं से कहा, “हमसे सर्वदलीय बैठक में कहा गया कि 14 विधेयक पेश होंगे, जिनमें दो विधेयक औपचारिकता निभाने वाले थे। यानी कुल 12 विधेयक की जानकारी दी गई थी। लेकिन इनमें से पांच विधेयक नहीं लाए गए।”
आखिरी दो दिनों में जी राम जी विधेयक
उन्होंने कहा कि ‘वीबी जी राम जी विधेयक’’ आखिरी दो दिनों में पेश किया गया। जी राम जी विधेयक पर लोकसभा में बुधवार देर रात तक चर्चा हुई इसे बृहस्पतिवार को पारित किया गया जबकि राज्यसभा में इस पर कल करीब छह घंटे से अधिक की चर्चा के बाद 18 दिसंबर को देर रात पारित किया गया। रमेश ने दावा किया, “इस सत्र की शुरुआत गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के अपमान से हुई… वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान इतिहास को तोड़मरोड़कर पेश किया गया।”
पंडित जवाहरलाल नेहरू का भी अपमान
उनका कहना था कि सत्ता पक्ष भूल गया कि टैगोर के सुझाव पर वंदे मातरम् के दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था। लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरा होने के अवसर पर हुई चर्चा का प्रारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन से हुआ जबकि राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने इस चर्चा की शुरुआत की थी। रमेश ने कहा कि सत्ता पक्ष ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का भी अपमान किया।
उन्होंने जी राम जी विधेयक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इस सत्र की समाप्ति महात्मा गांधी के अपमान से हुई। रमेश ने कहा कि विपक्ष की ओर से वायु प्रदूषण पर चर्चा की मांग की गई थी, लेकिन इसे अनसुना किया गया। उन्होंने कहा, “हमने सरकार को यह जानकारी दी थी कि हम वायु प्रदूषण पर चर्चा होनी चाहिए। हमें उम्मीद थी कि आज चर्चा होगी, लेकिन यह नहीं हुआ।”
कपिल सिब्बल बोले- संसद की प्रासंगिकता हो रही कम.. सत्ता में बैठे लोगों को इसकी परवाह नहीं
21 Dec, 2025 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल (Rajya Sabha member Kapil Sibal) ने शुक्रवार को दावा किया कि संसद (Parliament) की प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम हो रही है, क्योंकि सत्ता में बैठे लोगों को इसकी ज्यादा परवाह नहीं है। वे सिर्फ उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो मौजूदा समय के लिए अप्रासंगिक हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है क्योंकि संसद में वास्तविक मुद्दों पर चर्चा नहीं की जाती है।
कपिल सिब्बल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारी संसद की प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम हो रही है। अब कम बैठकें होती हैं और लोग सोचते हैं कि वहां कुछ नहीं होता है। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि वास्तविक मुद्दों पर चर्चा नहीं की जाती है। इसके बजाय, ऐसे विषय उठाए जाते हैं जो आज के समय के लिए अप्रासंगिक हैं।’ उन्होंने इस बात का उल्लेख्र किया कि शीतकालीन सत्र एक से 19 दिसंबर तक आयोजित किया गया था, जिसके दौरान 15 बैठकें हुईं।
कपिल सिब्बल की क्या है शिकायत
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘जब हम पहले संसद में थे तो शीतकालीन सत्र 20 नवंबर को शुरू होता था। 2017 में 13 बैठकें हुईं, 2022 में 13 बैठकें हुईं, 2023 में 14 बैठकें हुईं। अगर यही जारी रहा तो जो चर्चा होनी चाहिए वह नहीं हो सकेगी। ऐसा लगता है कि सत्ता में बैठे लोगों को संसद की ज्यादा परवाह नहीं है।’ कपिल सिब्बल ने कहा कि विपक्ष 1 दिसंबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा चाहता है क्योंकि एसआईआर आज देश में सबसे बड़ा मुद्दा है, लेकिन सरकार ने शर्त रख दिया कि पहले वंदे मातरम् पर चर्चा होगी। उन्होंने दावा कि संसद की प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम हो रही है।
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