राजनीति
100 साल बाद संघ में खत्म हो रही प्रांत प्रचारक की व्यवस्था..........अब संभाग प्रचारक
30 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100 साल पूरे कर चुका है। देश के सबसे बड़े गैर-राजनीतिक संगठन ने इस बीच बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। इसके तहत वह अपने संगठन की संरचना में बदलाव करने जा रहा है। इस बदलाव के तहत अब प्रांत प्रचारक की व्यवस्था आरएसएस में समाप्त होगी। आरएसएस की कार्य पद्धति में प्रांत प्रचारक को बड़ा महत्व मिलाता रहा है, लेकिन अब उनके स्थान पर संभाग प्रचारक की व्यवस्था लागू होगी। अब तक संघ अपनी सुविधा के अनुसार एक राज्य में कई प्रांत रखता था। जैसे यूपी में ही मेरठ प्रांत, ब्रज प्रांत, अवध प्रांत, गौरक्ष प्रांत, काशी प्रांत, कानपुर प्रांत रहे हैं। इस प्रकार यूपी में 6 प्रांत होते थे, लेकिन अब प्रांत नहीं संभाग होगा।
संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में यह फैसला हुआ था। इस फैसले को अब मार्च में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में रखा जाना था। लेकिन इसके पहले ही इसकी जानकारी मीडिया में आ गई है। संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक ने बताया कि 2026-27 से इस नई व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। इसके तहत अब प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक लेने वाले हैं जिसके तहत दो कमिश्नरी को मिलाकर एक संभाग प्रचारक होगा। अब तक प्रांत प्रचारक का क्षेत्र बड़ा होता था, लेकिन संभाग प्रचारक का क्षेत्र थोड़ा कम होगा। इससे समन्वय और जमीनी स्तर तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं क्षेत्र प्रचारक की व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है।
अब क्षेत्र प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक होगा। आरएसएस की व्यवस्था में ऐसा पहली बार होगा। इससे पहले क्षेत्र प्रचारक होते थे, जो कई बार दो, तीन या फिर उससे अधिक प्रांतों को मिलाकर बने क्षेत्र में काम देखते थे। अब राज्य प्रचारक होगा और इनका काम राज्य स्तर पर होगा। इसके तहत एक राज्य में एक राज्य प्रचारक होगा और पहले की तरह दो क्षेत्र प्रचारक नहीं। माना जा रहा है कि इससे पूरे राज्य का समन्वय बेहतर होगा। जैसे यूपी का ही उदाहरण लें तब अब तक एक क्षेत्र प्रचारक पूर्वी यूपी का होता था, जिसके अंतर्गत अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर प्रांत आते थे।
इस प्रकार पश्चिम यूपी का एक क्षेत्र प्रचारक होता था। इसके तहत मेरठ, ब्रज और उत्तराखंड प्रांत आते थे। अब यह व्यवस्था समाप्त होगी। यूपी का एक राज्य प्रचारक और उत्तराखंड का एक अलग राज्य प्रचारक होगा। वहीं राजस्थान प्रांत को उत्तर क्षेत्र में मिलाने की तैयारी है। अब तक उत्तर क्षेत्र में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर ही शामिल थे। अब राजस्थान को भी इसी का हिस्सा बनाने की तैयारी है। माना जा रहा है कि इससे पूरे राज्य का एक यूनिट के तौर पर काम देखा जा सकेगा। इसके अलावा प्रांत की बजाय संभाग के तौर पर काम करने से निचले स्तर तक निगरानी तंत्र बेहतर होगा। नई व्यवस्था के तहत देशभर में 9 क्षेत्र प्रचारक और कुल 75 संभाग प्रचारक बनाए जाएगें।
उद्धव गुट ने खोला कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा..........इस बार कांग्रेस मुक्त मुंबई का नारा चल रहा
30 Dec, 2025 08:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव के कुछ दिनों पहले ही इंडिया गठबंधन में दरार पड़ती दिख रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) ने दो टूक कहा कि इस बार कांग्रेस मुक्त मुंबई का नारा चल रहा है। पार्टी ने कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी के गठबंधन पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही कांग्रेस पर पीठ में छुरा भोंकने के आरोप लगाए हैं। 15 जनवरी को बीएमसी सहित महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों में चुनाव होने हैं।
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, कांग्रेस पार्टी ने हमारी पीठ में छुरा भोंका है। पहले भाजपा ने भोंका और अब कांग्रेस ने भोंका दिया है। ये महाराष्ट्र और मुंबई की जनता ने देखा है। कांग्रेस पार्टी केवल तुष्टिकरण की राजनीति चाहती है। जिस वंचित अघाड़ी से पूरे जीवन कांग्रेस लड़ती आई। आज उसी साथ खड़ी है और 60 से ज्यादा सीटें देकर वंचित अघाड़ी को बड़ा भाई बनाना चाह रही है। जबकि, वंचित के पास उम्मीदवार नहीं है पूरी मुंबई में।
उन्होंने कहा, किसी से नाम पूछ लो कि वंचित बहुजन अघाड़ी का क्या इतिहास है, तब मुंबई की जनता बता नहीं पाएगी। लेकिन उसी वंचित अघाड़ी के साथ कांग्रेस जा रही है। यह सब बड़ा मुंबई में खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है और हमें लग रहा है कि ये सब भाजपा करा रही है। ये वंचित अघाड़ी हो या कांग्रेस हो, भाजपा की बी टीम बनकर जो काम कर रही हैं। इनका सूपड़ा 16 को साफ होगा। शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता दुबे ने कहा, एमवीए और इंडिया गठबंधन राज्य और केंद्र सरकार के लिए बना था। यह मुंबई महानगरपालिका का चुनाव है। इस चुनाव में राज और उद्धव ठाकरे साथ है। जो हमारे साथ आ रहा है, उसका स्वागत है।
बीएमसी चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की 66 उम्मीदवारों की पहली सूची
29 Dec, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बीएमसी चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने पहली सूची जारी कर दी है। चुनाव में भाजपा बीएमसी की 227 सीटों में से 140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, शिंदे की सेना 87 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बीजेपी ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव के लिए अपने 66 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। ये चुनाव अगले साल जनवरी में होने हैं। महायुति के नेतृत्व वाली भाजपा राज्य में हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में मिली सफलता से उत्साहित है और नगर निगम चुनावों में भी उसी प्रदर्शन को दोहराना चाहती है। भाजपा, उपमुख्यमंत्री शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन में बीएमसी चुनाव लड़ रही है। भाजपा बीएमसी की 227 सीटों में से 140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, शिंदे की सेना 87 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार शिवसेना का समर्थन करते रहे हैं और उन्होंने भाजपा नेताओं को शिंदे की पार्टी पर हमला न करने का निर्देश भी दिया था। उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था, “भाजपा और शिवसेना एकजुट हैं। सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है। हमें औपचारिक रूप से गठबंधन की घोषणा करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित कर कहा कि महायुति आगामी मुंबई नगर निगम चुनाव जीतेगी। उन्होंने कहा था, मुंबई नगर निगम में महायुति सरकार बनाने और अंधकार छंटेगा, सूर्य उदय होगा और कमल खिलेगा के नारे को साकार करने का संकल्प है। यह चुनाव नगर निकाय में पारदर्शी और ईमानदार शासन स्थापित करने के उद्देश्य से लड़ा जा रहा है।
चौहान ने वीबी- जी राम जी योजना के बारे में मंत्रियों को बताया, विपक्ष के झूठा का पर्दाफार्श करने की तैयारी
29 Dec, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस द्वारा यूपीए सरकार के एमजीएनआरईजीए की जगह लागू की गई वीबी-जी राम जी योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू करने की तैयारी को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नई योजना प विस्तृत रिपोर्ट सभी केंद्रीय मंत्रियों को भेजी है, इसका हवाला देकर वे चुनावी और दूसरी जनसभाओं में विपक्ष का मुकाबला कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कैबिनेट बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रियों को वीबी-जी राम जी योजना की प्रमुख विशेषताओं और यह पिछली ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से कैसे ठीक है, इस बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंत्रियों से नई योजना के प्रावधानों से पूरी तरह अवगत होने का आदेश दिया था।
केंद्रीय मंत्री नई योजना के तहत गारंटीकृत 125 दिनों के रोजगार में वृद्धि पर प्रकाश डालने, जबकि पहले यह प्रावधान 100 दिनों का था। साथ ही, वे वेतन व्यय पर संकीर्ण जोर देने के बजाय टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी जोर दे। वे बताएंगे कि यह योजना किस प्रकार स्थानीय आजीविका के मजबूत मौके पैदा करेगी, जिससे संकटग्रस्त पलायन को कम करने में मदद मिलेगी। विपक्ष के आरोपों का खंडन करने के लिए, मंत्रियों को सूचित किया गया है कि मानक वित्तपोषण के तहत, केंद्र पूर्वनिर्धारित मानदंडों के आधार पर राज्यों को धनराशि आवंटित करती है, जिससे पूर्वानुमान, राजकोषीय अनुशासन और बेहतर बजटीय योजना होती है। इसके विपरीत, मांग-आधारित मॉडल अक्सर अनिश्चित आवंटन और राजकोषीय असंतुलन का कारण बनते हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कांग्रेस पर ग्रामीण रोजगार, ग्राम पंचायतों की शक्तियों और वीबी-जी-आरएएम जी अधिनियम के तहत श्रमिकों की सुरक्षा के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाकर उसके आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया। जिस दिन कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) को निरस्त करने के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की, उसी दिन चौहान ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल का विरोध राजनीतिक है और दावा किया कि सरकार ने मांग आधारित रोजगार को कमजोर नहीं किया है।
'बांग्लादेशी घुसपैठिए कांग्रेस के लिए वोट बैंक', असम में गरजे अमित शाह
29 Dec, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोरदुवा (असम): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानती है. चुनाव वाले राज्य असम के अपने दौरे के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को विरोधी कांग्रेस पर कड़ा हमला किया.
उन्होंने कांग्रेस को बांग्लादेशी घुसपैठियों का रक्षक बताया. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने की पॉलिसी ने असम के मूल निवासियों, उनकी पहचान और उनकी पुरखों की जमीनों को खतरा पैदा कर दिया है.
यहां नागांव जिले के बोरदुवा (बटद्रवा) में एक रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र न केवल असम से बल्कि पूरे भारत से भी पड़ोसी देश से आने वाले सभी अवैध अप्रवासियों की पहचान करेगा. शाह ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल असम के लोगों की सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि राज्य के हर तरह के विकास पर भी ध्यान दिया है.
बता दें कि, गृह मंत्री अमित शाह ने यहां नागांव जिले में वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान, बटद्रवा थान के 227 करोड़ रुपये के पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया. इस दौरान शाह ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है कि श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान को 'अतिक्रमण से मुक्त' कर दिया गया है. शाह ने आगे कहा कि, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की नेतृत्व वाली असम सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों से 1 लाख बीघा से ज्यादा जमीन मुक्त करवाया है.
असम में 2026 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए शाह ने लोगों से भाजपा को वोट देने की अपील करने का मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने रैली में लोगों से कहा, "असम को घुसपैठियों से मुक्त बनाने के लिए भाजपा को और पांच साल दीजिए." उन्होंने कहा, ''हम न सिर्फ असम से बल्कि पूरे भारत से भी सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करेंगे.'' शाह ने आगे कहा कि शंकरदेव ने 'एक भारत' का नारा दिया था, जिसे अब प्रधानमंत्री मोदी पालन कर रहे हैं.
इस बात पर जोर देते हुए कि असम पूर्वोत्तर का ग्रोथ इंजन बन गया है और इस इलाके को विकास की ओर ले जा रहा है, शाह ने बताया कि इन 11 सालों में पीएम मोदी 80 बार पूर्वोत्तर इलाकों का दौरा किया, जिसमें से मोदी 36 बार वे असम आए हैं, जिससे पता चलता है कि भाजपा सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर ध्यान दे रही है.
रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, प्रधानमंत्री ने असम में शांति और विकास पक्का करने के लिए कदम उठाए हैं, जो सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि हकीकत है. उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में भाजपा सरकार ने राज्य में अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप के साथ शांति समझौते किए हैं और इन समझौतों के 92 प्रतिशत क्लॉज पूरे किए गए हैं.
कर्नाटक में नेतृत्व की रार: डीके शिवकुमार का सत्ता के स्थायित्व पर प्रहार
29 Dec, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा हाल ही में दिए बयानों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुट में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस स्थापना दिवस के मौके पर शिवकुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, इस बयान को सीधे तौर पर सिद्धारमैया के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। डिप्टी सीएम शिवकुमार ने इतिहास का हवाला देकर कहा कि सिकंदर महान और सद्दाम हुसैन जैसे शक्तिशाली लोग भी हमेशा के लिए नहीं रहे। उनके इस बयान के पीछे दो प्रमुख संकेत छिपे हैं। जहां शिवकुमार यह जताना चाहते हैं कि ढाई साल का कार्यकाल (मिड-टर्म) पूरा होने के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन का समय आ गया है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद कहा कि वे केवल भाषण देने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि उन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है। यह सिद्धारमैया की तुलना में खुद को अधिक निष्ठावान पार्टी कैडर दिखाने की कोशिश है। 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से ही सत्ता-साझाकरण समझौते की चर्चाएं जोरों पर हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद का गुप्त समझौता हुआ था। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल निभाएंगे। उन्होंने हाल ही में एक गुप्त समझौते की ओर इशारा किया है, हालांकि उन्होंने इसके विवरण साझा नहीं किए।
भले ही दोनों नेता कैमरे के सामने एकजुट होने का दावा करते हों, लेकिन शिवकुमार की टिप्पणियां साफ करती हैं कि कांग्रेस के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। नेतृत्व के इस भ्रम से शासन व्यवस्था और पार्टी की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस आलाकमान पर टिकी हैं कि क्या वे 2026 की शुरुआत में किसी बड़े बदलाव की अनुमति देगा या यथास्थिति बनाए रखेगा।
बिहार की सियासत गरमाई: BJP पर RJD विधायकों को तोड़ने की तैयारी के आरोप
29 Dec, 2025 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में बयानबाजी की वजह से एक बार फिर से सियासी पारा चढ़ गया है। विधानसभा चुनाव के करीब डेढ़ महीने बाद अब राजद (RJD) में बड़ी टूट की खबरें गलियारों में तैर रही हैं। तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा को भाजपा और जदयू ने पलायन करार दिया है, वहीं नीतीश सरकार में कृषि मंत्री रामकृपाल यादव और BJP प्रवक्ता नीरज कुमार के बयानों ने राजद में संभावित टूट की चर्चाओं को और हवा दे दी है।
तेजस्वी यादव जीरो पर आउट हो जाएंगे - रामकृपाल यादव
बिहार के कृषि मंत्री और कभी लालू यादव के बेहद करीबी रहे रामकृपाल यादव ने राजद के भविष्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद तेजस्वी यादव हताशा में हैं। उनके पास न दिशा है, न नेतृत्व। राजद के विधायक हताश हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव पार्टी संभालें, वरना जीरो पर आउट हो जाएंगे। उनके पास अब कुछ बचा नहीं है।
रामकृपाल यादव ने कहा, "तेजस्वी यादव की पार्टी खत्म हो चुकी है। वे विदेश के दौरे पर हैं। हार बर्दाश्त नहीं हुआ और जनता के बीच जाने में उनको शर्म आ रही है इसलिए भाग कर विदेश चल गए हैं। मैं गंभीरता के साथ कह रहा हूं कि उनके 25 के 25 विधायक हमारी पार्टी के संपर्क में हैं। कभी भी 25 विधायक भाजपा में शामिल होंगे।"
नीरज कुमार का तंज
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "बेचारे तेजस्वी यादव, चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद अपना चेहरा छिपाने के लिए परिवार के साथ विदेश भाग गए हैं। उनके विधायक यहां नेतृत्व की कमी, वंशवाद की राजनीति, भाई-भतीजावाद और मौजूदा अराजकता को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। उनके सभी विधायक NDA के संपर्क में हैं। RJD विधायकों का नेतृत्व या मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं है। पार्टी में कभी भी बड़ी फूट पड़ सकती है।"
RLM में घमासान, पार्टी में विभाजन की अटकलें; विधायक माधव आनंद विदेश गए
29 Dec, 2025 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bihar Politics: उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) में चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के तीन विधायकों की नाराजगी की चर्चाओं के बीच, मधुबनी के विधायक माधव आनंद अचानक विदेश चले गए हैं। माधव आनंद ने इस बात की पुष्टि की है कि वह फिलहाल भारत से बाहर हैं। पार्टी के अंदर चल रहे विवादों के बीच उनके जाने से इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक है या कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है।
लिट्टी-चोखा पार्टी में गैरहाजिरी से जन्मा विवाद
हाल ही में पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर हुई लिट्टी-चोखा पार्टी को संगठनात्मक एकता का प्रतीक माना जा रहा था। हालांकि, इस कार्यक्रम में RLM के तीनों विधायक गैरमौजूद थे। अपनी गैरमौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर माधव आनंद ने साफ किया कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी थी, लेकिन खराब सेहत के कारण वह शामिल नहीं हो सके। वह दिल्ली गए थे और अब विदेश में हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में अफवाहें हैं कि उन्हें मंत्री पद न मिलने से वह नाखुश हैं।
बीजेपी नेता से मुलाकात ने भी विवाद खड़ा किया
लिट्टी चोखा पार्टी के अगले ही दिन माधव आनंद और अन्य विधायकों की बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ फोटो सामने आई। इस मुलाकात ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया था। हालांकि, माधव आनंद ने इस मुलाकात को सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट बताया। उन्होंने कहा कि नितिन नवीन से उनके पुराने संबंध हैं और इस मुलाकात को ज्यादा राजनीतिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद, पार्टी के अंदर असंतोष के माहौल के बीच इस मुलाकात ने कई सवाल खड़े किए।
रामेश्वर महतो के बयान ने आग में घी डाला
RLM के अंदर असंतोष की सबसे मजबूत आवाज बाजपट्टी के विधायक रामेश्वर महतो की तरफ से आई है। उन्होंने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाया है और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे (दीपक प्रकाश) को मंत्री बनाए जाने के फैसले में सुधार की मांग की है। महतो ने साफ कहा कि पार्टी वंशवाद की राजनीति का शिकार हो रही है और पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान कम हो रहा है। रामेश्वर महतो ने दावा किया कि पार्टी के तीनों विधायक नाखुश हैं और स्थिति गंभीर है।
RLM में घमासान तेज, टूट की अटकलों के बीच विधायक माधव आनंद पहुंचे विदेश
29 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bihar Politics: उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) में चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के तीन विधायकों की नाराजगी की चर्चाओं के बीच, मधुबनी के विधायक माधव आनंद अचानक विदेश चले गए हैं। माधव आनंद ने इस बात की पुष्टि की है कि वह फिलहाल भारत से बाहर हैं। पार्टी के अंदर चल रहे विवादों के बीच उनके जाने से इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक है या कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है।
लिट्टी-चोखा पार्टी में गैरहाजिरी से जन्मा विवाद
हाल ही में पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर हुई लिट्टी-चोखा पार्टी को संगठनात्मक एकता का प्रतीक माना जा रहा था। हालांकि, इस कार्यक्रम में RLM के तीनों विधायक गैरमौजूद थे। अपनी गैरमौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर माधव आनंद ने साफ किया कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी थी, लेकिन खराब सेहत के कारण वह शामिल नहीं हो सके। वह दिल्ली गए थे और अब विदेश में हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में अफवाहें हैं कि उन्हें मंत्री पद न मिलने से वह नाखुश हैं।
RSS की तारीफ पर राहुल का दिग्विजय पर तंज, बोले– आपने गलत किया
29 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने RSS और भाजपा की तारीफ को लेकर रविवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से आपत्ति जताई। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय 'इंदिरा भवन' में पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान दोनों नेता आमने-सामने हुए थे।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, दिग्विजय सिंह से हाथ मिलाते समय राहुल गांधी ने उन्हें मजाकिया लहजे में कहा, 'कल आपने गलत व्यवहार कर दिया।' यह सुनकर आसपास मौजूद नेताओं की हंसी छूट गई। वहां सोनिया गांधी भी मौजूद थीं। वे भी हंसने लगीं। फिर राहुल और दिग्विजय के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई।
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने 27 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए RSS और BJP के संगठनात्मक ढांचे की सराहना की थी। तस्वीर में नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी दिखाई दे रहे हैं।
अपने पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने लिखा था- यह बहुत ही प्रभावशाली तस्वीर है। किस प्रकार RSS का जमीनी स्वयं सेवक और भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं की चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की ताकत को दिखाता है।
कांग्रेस नेताओं ने दिग्विजय सिंह की आलोचना की
दिग्विजय सिंह के पोस्ट के बाद पार्टी के भीतर उनकी आलोचना होने लगी। उधर, कांग्रेस स्थापना दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिग्विजय का नाम लिए बिना कहा- कांग्रेस ने कभी संविधान, धर्मनिरपेक्षता और गरीबों के अधिकारों से समझौता नहीं किया है।
खड़गे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने कभी धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगे और न ही मंदिर-मस्जिद के नाम पर नफरत फैलाई। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दिग्विजय के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कांग्रेस को गोडसे की विचारधारा से जुड़े संगठन से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा- RSS नफरत के आधार पर बना एक संगठन है और यह नफरत फैलाता है। नफरत से कुछ सीखने को नहीं मिलता। क्या आप अल-कायदा से कुछ सीख सकते हैं? अल-कायदा नफरत फैलाने वाला संगठन है। उस संगठन से क्या सीखा जा सकता है?
दिग्विजय की सफाई- RSS-मोदी की नीतियों का घोर विरोधी हूं
इधर, विवाद बढ़ने के बाद दिग्विजय सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने सिर्फ संगठन की तारीफ की थी। उन्होंने कहा- मैं संगठन का समर्थन करता हूं। मैं RSS, PM मोदी और उनकी नीतियों के खिलाफ हूं
दिग्विजय सिंह ने कहा- विचारधारा को लेकर कोई मतभेद नहीं है। हम सभी कांग्रेस में एकजुट हैं। नेहरू-गांधी परिवार ऐसा परिवार है, जिसमें दो लोगों ने शहादत दी है। भाजपा नेहरू-गांधी परिवार के भीतर मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रही है।
भाजपा बोली- दिग्विजय सिंह ने RSS की ताकत को समझा
भाजपा के कई नेताओं ने दिग्विजय सिंह के बयान की सराहना की। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिग्विजय सिंह के बयान का स्वागत किया। उन्होंने कहा- RSS लगातार सामाजिक समानता और राष्ट्रीय प्रगति के लिए काम करता रहा है। धीरे-धीरे लोग समझ रहे हैं कि RSS देश को आगे ले जाने का प्रयास कर रहा है, इसलिए उसके आलोचक भी उसकी सराहना कर रहे हैं।
भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा- दिग्विजय सिंह ने संगठन की ताकत को समझा है, लेकिन कांग्रेस अब भी इसे नहीं समझ पाई है। कांग्रेस एक ही परिवार तक सीमित है और पार्टी में फैसले लेने का अधिकार भी उसी परिवार के पास है। संगठन के लिए काम करने वाले लोगों को पहचान और आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए, जो कांग्रेस में नहीं दिखता।
दिग्विजय सिंह के बयान पर बंटी कांग्रेस! पवन खेड़ा ने किया ‘गोडसे’ का जिक्र, थरूर का मिला समर्थन
28 Dec, 2025 05:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) की ओर से आरएसएस (RSS) और भाजपा (BJP) की तारीफ किए जाने के मामले ने पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिग्विजय सिंह ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि वह संघ की विचारधारा के घोर विरोधी हैं। हालांकि, उनके इस बयान पर कांग्रेस में ही कई नेताओं की राय बंटी हुई नजर आ रही है।
दिग्विजय सिंह ने शनिवार को एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी की तस्वीर साझा की थी। इसके साथ उन्होंने कहा था कि भाजपा-आरएसएस जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को संगठन के भीतर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष पदों तक पहुंचने का मौका देते हैं। गौरतलब है कि इस तस्वीर में पीएम मोदी जमीन पर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं।
आरएसएस पर तीखा प्रहार करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने संघ को 1948 में महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे से जोड़ा। पवन खेड़ा ने कहा, ‘आरएसएस से सीखने को कुछ नहीं है। गोडसे के लिए कुख्यात संगठन गांधी की ओर से स्थापित संगठन को क्या सिखा सकता है?’
कांग्रेस नेता मनिकम टैगौर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘गोडसे के संगठन से नफरत के अलावा और कुछ सीखा नहीं जा सकता है। कांग्रेस 140 वर्ष की हो गई है, जो अभी भी युवा है और नफरत के खिलाफ लड़ती है।’ इसी के साथ टैगौर ने एक अन्य पोस्ट में एक फुटबॉल मैच का वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में खिलाड़ी अपने गोल पोस्ट में गोल करता दिख रहा है। उन्होंने इस पर लिखा कि मशहूर सेल्फ गोल। हमारे पास एक है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह के बयान पर कहा, ‘मैं भी चाहता हूं कि हमारा संगठन मजबूत हो। हमारे संगठन में अनुशासन होना चाहिए। दिग्विजय सिंह खुद इसका उदाहरण हैं।’ इसके साथ ही शशि थरूर ने कहा, ‘हमारी पार्टी का 140 साल का इतिहास है. हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम खुद से भी बहुत सी चीजें सीख सकते हैं। अनुशासन बहुत जरूरी चीज है।’
वहीं, पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘भाजपा उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। हमें आरएसएस से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है। हमने ब्रिटिश राज और उसके अन्याय के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम लड़ा। हमने इसे जन आंदोलन में बदल दिया, इसलिए हमें किसी से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है; बल्कि लोगों को कांग्रेस से सीखना चाहिए।’
धीरेंद्र शास्त्री पर भड़के पूर्व सीएम बघेल, बोले- वे ‘भाजपा के एजेंट, केवल पैसा बटोरने आते हैं’
28 Dec, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) उर्फ बागेश्वर बाबा (Bageshwar Baba) इन दिनों छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में हैं। वे यहां पर पांच दिवसीय हनुमंत कथा (Hanumant Katha) कहने के लिए गुरुवार को पहुंचे। इस बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उन पर बुरी तरह भड़क गए हैं। बघेल ने उन्हें ढोंगी बताते हुए भाजपा का एजेंट कहा है। धीरेंद्र शास्त्री पर भड़कते हुए बघेल ने कहा कि जब उसका जन्म नहीं हुआ था, तब से हम हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं और वह हमें हनुमान चालीसा और सनातन धर्म के बारे में बताएंगे।
बघेल ने यह भी कहा कि सच्चे कथावाचक अपना घर और आश्रम मुश्किलों से चला पाते हैं, दूसरी तरफ ये लोग करोड़ों अरबों के मालिक बन बैठे हैं। इसके अलावा बघेल ने कहा कि ये लोग छत्तीसगढ़ में सिर्फ पैसा बटोरने आते हैं और ऐसा कहते हुए उन्होंने शास्त्री को छत्तीसगढ़ के किसी भी संत महात्मा के साथ शास्त्रार्थ करने की चुनौती भी दी। बघेल ने ये सारी बातें शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहीं।
‘वह भाजपा के एजेंट, केवल पैसा बटोरने आते हैं’
इस बारे में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भूपेश बघेल के कुछ वीडियो शेयर किए, जिनमें प्रदेश के पूर्व सीएम बागेश्वर बाबा पर अपना गुस्सा निकालते दिखे। इनमें से एक वीडियो में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा, ‘सीधी सी बात है ये उनका धंधा है, भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के रूप में काम करते हैं, यही उनका धंधा है, इसके अलावा है क्या उनके पास, इसके अलावा क्या गाते हैं। कौन से दर्शन की बात करते हैं, कौन से अध्यात्म की बात करते हैं। मैं चुनौती देता हूं, हमारे छत्तीसगढ़ में इतने महापुरुष हैं, इतने दर्शन शास्त्री हैं, आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं, हमारे मठ-मंदिरों में बैठे हुए किसी भी साधु-महात्माओं के साथ शास्त्रार्थ कर के दिखाएं। मैं चुनौती देता हूं। मैं तो इस क्षेत्र का नहीं हूं, लेकिन ऐसे बहुत मिलेंगे हमारे छत्तीसगढ़ में उनके शास्त्रार्थ कर लें। ये छत्तीसगढ़ में केवल पैसा बटोरने आते हैं।’
‘संत ऐसे होते हैं क्या, उम्र क्या है उसकी?’
इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री के दिए बयान पर नाराजगी जताते हुए बघेल ने कहा, ‘ये छत्तीसगढ़ है, यहां कबीरदासजी और गुरु घासीदासजी जैसे संत-महात्माओं की वाणी गूंजती है। उसी हिसाब से यहां छत्तीसगढ़ के लोग शांतिप्रिय हैं और यह शांति का टापू है। उन्होंने कहा था कि भूपेश बघेल को विदेश चले जाना चाहिए। यह धीरेंद्र के शब्द हैं ना और क्या यही संत-महात्माओं के शब्द होते हैं, ऐसे ही होते हैं संत।’
‘जब उसका जन्म नहीं हुआ था, तब से हनुमान चालीसा पढ़ रहा’
इसके बाद शास्त्री पर भड़कते हुए बघेल बोले, ‘अरे जब उसका जन्म नहीं हुआ था, तब से हम हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं। कल का बच्चा है, क्या उम्र है उसकी, मेरा बेटा भी उससे 10-12 साल बड़ा है, उसके बाप भी शायद मेरी उम्र से छोटे होंगे। वह मुझे हनुमान चालीसा के बारे में बताएंगे। उसका जन्म नहीं हुआ तब से हनुमान चालीसा, हनुमान बाण पढ़ रहे हैं। वह हमको सिखाएंगे सनातन धर्म क्या है। मेरे ससुराल में पांच-पांच साधु हैं, लेकिन इसके जैसे ढोंगी नहीं है। सारे संत महात्मा हुए हैं मेरे परिवार में। वो हमको सीख दे रहे हैं और वो कहते हैं कि भूपेश बघेल को विदेश चला जाना चाहिए, देश छोड़ देना चाहिए। यही बात दूसरे प्रदेश में जाकर किसी पूर्व मुख्यमंत्री के बारे में नहीं बोल पाएंगे, यह तो छत्तीसगढ़ है, इसलिए उसने बोल दिया और सुन लिए हम लोग।’
‘सरकारी जहाज में घूम रहे, बड़े-बड़े अस्पताल खोल रहे’
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम ने इसके आगे कहा, ‘हमारे छत्तीसगढ़ में बहुत से कथावाचक हैं, वे लोग बहुत मुश्किल से अपना आश्रम या घर चला पा रहे हैं, भगवत भजन करते हैं और भक्ति-ज्ञान के बारे में बताते हैं। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े कथावाचक पवन दीवान जी रहे हैं, उनके आश्रम के हालात देख लीजिए। जिंदगी भर उनसे ज्यादा कथा वाचक नहीं हुआ। वो मंत्री रहे, सांसद रहे, विधायक रहे, जिंदगी भर कथावाचन किए, लेकिन उनकी स्थिति देख लो और दूसरी तरफ इन धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा की स्थिति देख लो। सरकारी जहाज में घूम रहे हैं, बड़े-बड़े हॉस्पिटल खोल रहे हैं, मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं, करोड़ों-अरबों के मालिक बन गए हैं।’
‘मरीजों को दिव्य दरबार लगाकर ठीक क्यों नहीं कर देते’
आगे बघेल ने कहा, ‘ये ना हिंदू धर्म के हिसाब से और ना दर्शन के हिसाब से सही हैं। यदि हिंदू धर्म या सनातन धर्म आज टिका हुआ है तो अपने दर्शन और आध्यात्मिकता के कारण से टिका हुआ है। जब इनके झाड़-फूंक से, दिव्य दरबार से लोग ठीक हो रहे हैं तो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल क्यों खोल रहे हैं? जरूरत ही क्या है, कैंसर तो ऐसे ही फूंक मार के ठीक हो जाता है, मतलब अपनी ही बात का खुद खंडन कर रहे हैं। बैठ जाते, कैंसर अस्पताल खोलने की जरूरत क्या, दिव्य दरबार में सबको बुलाते, सब वहीं ठीक हो जाते।’
केरल में BJP की ऐतिहासिक जीत, तिरुवनंतपुरम में बना पार्टी का पहला मेयर, 45 साल बाद CPM का कब्जा टूटा
28 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम । दक्षिणी राज्य केरल (Kerala) में भाजपा (BJP) ने इतिहास रच दिया है। वहां पहली बार भाजपा का मेयर बना है। भाजपा के वरिष्ठ नेता वी.वी. राजेश (V V Rajesh) शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम (Thiruvananthapuram Municipal Corporation) के पहले भाजपा मेयर (Mayor) चुने गए हैं। यह दक्षिणी राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक और अहम घटना मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में अब तक BJP को कभी सत्ता नहीं मिली थी। पद संभालने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में उन्होंने कहा, “हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। सभी 101 वार्डों में विकास किया जाएगा… तिरुवनंतपुरम को एक विकसित शहर में बदला जाएगा।”
इससे पहले शुक्रवार की सुबह हुए मेयर चुनाव में 45 साल के राजेश को कुल 51 वोट मिले। उन्हें एक निर्दलीय पार्षद (एम. राधाकृष्णन) का भी समर्थन मिला, जबकि एक निर्दलीय पार्षद ने वोट नहीं दिया। इस तरह 100 सदस्यों की उपस्थिति वाले सदन में राजेश के पक्ष में 51 वोट हो गए। उनके खिलाफ खड़े CPIM के आरपी शिवाजी को 29 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के केएस सबरिनाथन को कुल 19 वोट मिले। बता दें कि BJP ने दिसंबर की शुरुआत में हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में 50 सीटें जीतीं थीं।
केरल में भाजपा के लिए क्या संकेत?
राजेश का मेयर के रूप में पदभार ग्रहण करना ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य में आगामी छह महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा को लंबे समय से संघर्ष करना पड़ रहा है। पार्टी ने इस राज्य में कभी भी जीत हासिल नहीं की है। भाजपा ने 2016 में सिर्फ एक सीट जीती थी। ओ राजगोपाल ने 2016 में तब नेमोम सीट जीती थी। इसके बाद 2024 में पार्टी के एक सांसद अभिनेता सुरेश गोपी ने त्रिशूर से जीत हासिल की थी। इसलिए, राजेश का मेयर बनना केरल की शहरी राजनीति में बीजेपी के लिए एक नए अध्याय का संकेत है।
CPM का 45 साल का कब्जा टूटा
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले 45 वर्षों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर CPM का कब्जा था। BJP की यह जीत उस परंपरा को न सिर्फ तोड़ती है बल्कि दक्षिणी राज्य में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करती है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि CPM और कांग्रेस ने मिलकर शहर को पीछे धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था और पिछले कई वर्षों में ड्रेनेज, पानी और कचरा प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, “आज से हमारा काम शुरू होता है। हमारा लक्ष्य तिरुवनंतपुरम को देश के शीर्ष तीन शहरों में शामिल करना है।” BJP का कहना है कि यह जीत केरल में शहरी राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं।
नितिन नबीन 20 को बनेंगे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष!
28 Dec, 2025 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नितिन नबीन भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार उनकी नियुक्ति का ऐलान 20 जनवरी को किया जा सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 18 से 20 जनवरी के बीच पूरी होने की संभावना है। नितिन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है तो वे इस पद पर पहुंचने वाले सबसे युवा होंगे। नबीन का कार्यकाल जनवरी 2026 से जनवरी 2029 तक रहेगा। 2029 में लोकसभा चुनाव प्रस्तावित होने के कारण उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। पार्टी देशभर के प्रदेश अध्यक्षों को 15 जनवरी के बाद दिल्ली बुलाने की तैयारी में है।
संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पार्टी शासित आधे से ज्यादा राज्यों में पूरी हो चुकी है। 37 में से 29 राज्यों में आंतरिक चुनावों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इन राज्यों के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नबीन के समर्थन में नामांकन पत्रों का एक सेट जमा करेंगे। इसके अलावा भाजपा की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य भी नितिन नबीन के पक्ष में एक अलग सेट में नामांकन दाखिल करेंगे। सूत्रों ने बताया कि नितिन नबीन के समर्थन में दाखिल नामांकन पत्रों पर पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दस्तखत भी होंगे। चूंकि नितिन नबीन ही एकमात्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले हैं, इसलिए भाजपा के मुख्य चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण नामांकन पत्रों की जांच के बाद उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। इस मौके पर भाजपा शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी की तस्वीर शेयर की..........बीजेपी-आरएसएस के संगठन की शक्ति की ताकत
28 Dec, 2025 08:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की शनिवार को हुई अहम बैठक से ठीक पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। कांग्रेस नेता सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें मोदी वरिष्ठ नेताओं के चरणों के पास फर्श पर बैठे दिखाई दे रहे हैं।
इस तस्वीर के साथ कांग्रेस नेता सिंह ने लिखा, मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयं सेवक व जनसंघ बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं की चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संघटन की शक्ति की ताकत है...........जय सिया राम।
पोस्ट आते ही इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने इस पोस्ट को प्रधानमंत्री मोदी पर तंज के तौर पर देखा, तब कुछ ने संगठनात्मक राजनीति पर टिप्पणी माना। लेकिन बाद में दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि उनका इरादा किसी तरह की आलोचना करने का नहीं था। उन्होंने कहा कि यह पोस्ट आरएसएस और बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे की ताकत को दिखाने के लिए थी।
इस दिन सिंह ने कांग्रेस संगठन के अंदर सुधार और पावर डिसेंट्रलाइजेशन की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने 19 दिसंबर को राहुल गांधी के वीडियो को रीट्वीट करते हुए लिखा, राहुल गांधी आप सोशियो-इकोनॉमिक इश्यूज के मामलों में बिल्कुल सही हैं। फुल मार्क्स, लेकिन अब प्लीज आईएनसी को देखिए।
साथ ही उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा माहौल पर कमेंट कर कहा, जैसे ईसीआई को रिफॉर्म्स की जरूरत है, वैसे ही इंडियन नेशनल कांग्रेस को भी। आपने संगठन क्रिएशन से शुरुआत की है लेकिन हमें और प्रैक्टिकल डिसेंट्रलाइज्ड फंक्शनिंग की जरूरत है। मुझे यकीन है कि आप ऐसा करे, क्योंकि मुझे पता है कि आप ऐसा कर सकते हैं। बस प्रॉब्लम यह है कि आपको मनाना आसान नहीं है...........जय सिया राम।
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