राजनीति
नए साल में राजस्थान कांग्रेस को मिला टास्क
3 Jan, 2026 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर । बीते दिसंबर माह अरावली के मुद्दे पर प्रदेश में सडक़ों पर धरने-प्रदर्शन कर चुकी कांग्रेस अब नए साल में भी मुखरता से धरने-प्रदर्शन करेगी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के मुद्दे पर कांग्रेस को मोदी सरकार और भाजपा के खिलाफ सडक़ों पर उतरने के निर्देश दिए है 5 जनवरी से इन धरने-प्रदर्शनों की शुरुआत होगी, जोकि 30 जनवरी तक चलेंगे।
मनरेगा के नाम बदलने और कई अन्य बदलावों को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है और अब इसी कड़ी में सभी राज्यों में धरने-प्रदर्शनों को लेकर सर्कुलर जारी कर दिया गया है राजस्थान में भी 5 जनवरी से कांग्रेस सडक़ों पर उतरेगी और इसके लिए रोड मैप भी तैयार कर लिया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि मनरेगा के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी पूरे जनवरी माह धरने-प्रदर्शन करेगी, जो प्रदेश, जिला, ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर पर आयोजित होंगे. उन्होंने कहा कि इसका रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है कि कहां पर कितने और किस तरह से आंदोलन किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इस पर खास फोकस रखा जाएगा. ग्रामीण इलाकों में जन जागरण अभियान चलाए जाएंगे, क्योंकि मनरेगा में ग्रामीण इलाकों के लोगों को ही रोजगार मिलता रहा है और अब उनका रोजगार छीना जा रहा है. पहले प्रदेश स्तर पर धरना आयोजित होगा, उसके बाद जिलों में धरने-प्रदर्शन आयोजित होंगे। पीसीसी अध्यक्ष का कहना है कि मनरेगा के नाम बदलने और उसमें कई प्रकार के संशोधन किए जाने को लेकर कांग्रेस पार्टी धरना-प्रदर्शन करेगी. हालांकि प्रदेश स्तर पर धरने-प्रदर्शन की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन 10 जनवरी के बाद प्रदेश स्तर पर धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा. उसके बाद सभी जिलों में जिला मुख्यालय पर धरने आयोजित किए जाएंगे. उसके बाद मंडल, बूथ और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन होंगे, जिसमें राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देकर मनरेगा के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं करने और जो बदलाव केंद्र सरकार ने किए हैं उन्हें वापस लेने की मांग की जाएगी।
RJD नेता मनोज झा ने इंदौर मामले पर सरकार को घेरा, बोले– यह सिर्फ डेटा नहीं
3 Jan, 2026 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित सरकारी पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, करीब 200 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 4 की हालत गंभीर बनी हुई है. इस पूरे संकट से लगभग 1500 लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश के अलावा कई राज्यों में इस मामले पर प्रतिक्रियाएं तेज है. बिहार से आरजेडी नेता मनोज झा ने इंदौर जल प्रदूषण त्रासदी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के लिए ये मौतें बस सरकारी आंकड़े हैं।
आपको चुनाव जीतने की कला आती है- मनोज झा
मनोज झा ने कहा, "कभी कभी शब्दों से पेट नहीं भरता, आपके भाव में परिलक्षित नहीं हुआ, आपकी कार्यशैली में परिलक्षित नहीं हुआ. उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय पर निशाना साधते हुए कहा, 'बाकी चीजें छोड़ दीजिए.. एक पत्रकार के सवाल पूछने पर मंत्री (कैलाश विजयवर्गीय) के जवाब देने का तरीका... उसमें जरा भी सहानुभूति नहीं दिखी' उसमें मजाक दिखता है क्योंकि आपको पता है कि आपको चुनाव जीतने की कला आपको आती है। "
आप खुद वो पानी कभी नहीं पीएंगे- मनोज झा
उन्होंने आगे पीटीआई को दिए बयान में कहा, "आप खुद वो पानी कभी नहीं पीएंगे और जो मर जाएगा उसे मुआवजा देंगे... मरने वाले सिर्फ एक आंकड़ा नहीं हैं. हर मौत आपके सरकार फाइल में आंकड़ा है. लेकिन वो परिवार के लिए आंकड़ा नहीं है. आप मुआवजा दे देते हैं फिर हम अगले आंकड़े का इंतजार करते हैं। "
रेखा आर्य के पति के बयान पर बोले मनोज झा
उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति के बयान पर मनोज झा ने कहा देखिए इस तरह का बयान कोई पहली बार नहीं आया है. ये सोच ही घटिया है और इस सोच के लोग बड़े-बड़े ओहदे पर पहुंच गए है या यूं कहे पहुंचाए गए हैं. मेरे लिए ये चिंता नहीं है कि मेरे राज्य के बारे में ऐसा कहा गया है और इतनी अशोभनीय टिप्पणी की गई क्योंकि एक बड़े मंत्री में सदन के अंदर मेरे से बात चीत के क्रम में मेरे राज्य के अशोभनीय टिप्पणी की थी. उन्होंने सवाल करते हुए कहा, "इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री जी क्यों चुप हैं? ये कौन सा निजाम गढ़ा जा रहा है और ये जो डबल इंजन में हमारे राज्य के कई मंत्री हैं क्या उन्हें चोट नहीं पहुंचती ऐसे टिप्पणियों से? अगर नहीं पहुंची तो आईना सामने रखी है और ऐलान करिए की आपकी संवेदना मर चुकी है। "
असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले नई स्कीम से वोटरों को रिश्वत दे रही बीजेपी- कांग्रेस का बड़ा आरोप
3 Jan, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस को डर है कि बिहार जैसी स्थिति असम में आने वाले विधानसभा चुनावों में भी दोहराई जा सकती है, जहां विधानसभा चुनावों से पहले और उसके दौरान लाखों महिलाओं को करीब 10000 रुपये दिए गए थे, जिससे विपक्ष को नुकसान हुआ था.
असम में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होंगे और राज्य सरकार ने 1 जनवरी को पेमेंट का अनाउंसमेंट किया था. चल रही ओरुनोदोई स्कीम के तहत 2020 से 37 लाख महिला लाभार्थियों को टारगेट किया गया. उन्हें हर महीने 1250 रुपये दिए गए. अब राज्य सरकार 20 फरवरी को इस स्कीम के तहत हर लाभार्थियों को 8000 रुपये का बिहू फेस्टिवल एडवांस देने का प्लान बना रही है.
राज्य सरकार 1 फरवरी से एक नई स्कीम भी शुरू करेगी जिसके तहत योग्य पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को हर महीने 2,000 रुपये और योग्य अंडरग्रेजुएट को हर महीने 1,000 रुपये दिए जाएंगे. ऐसे स्टूडेंट की घरेलू इनकम हर साल 4 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. कांग्रेस पार्टी असम बीजेपी सरकार द्वारा बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए हाल ही में घोषित की गई आर्थिक सहायता राशि योजना को चुनाव से ठीक पहले वोटरों को रिश्वत देने जैसा मानती है और जल्द ही इन कल्याणकारी योजनाओं का मुकाबला करने के लिए एक अभियान शुरू करने की योजना बना रही है.
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पार्टी का अभियान अप्रैल में होने वाले चुनाव से कुछ महीने पहले घोषित की गई आर्थिक सहायता की टाइमिंग पर सवाल उठाएगा और वोटरों को बताएगा कि राज्य सरकार पिछले पांच सालों में यह सब क्यों नहीं कर सकी. इसके अलावा, कांग्रेस का अभियान मतदाताओं को यह भी बताएगा कि आखिरी समय में पेमेंट यह दिखाता है कि राज्य सरकार युवाओं में बेरोजगारी की समस्या को हल करने और महिला लाभार्थियों की मदद करने में नाकाम रही है और वह पेमेंट के जरिए अपनी पॉलिसी की नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है, जिसे चुनाव के बाद रोका या कम किया जा सकता है.
यह सबसे पुरानी पार्टी वोटर्स को यह भी बताएगी कि कांग्रेस ने हमेशा अपने वादे पूरे किए हैं और वोटर्स से अपने ऑप्शन ध्यान से चुनने के लिए कहेगी. 'बीजेपी महिलाओं और युवाओं को पैसे का लालच देकर वोट खरीदने की साजिश कर रही है, लेकिन असम के लोग इस धोखे को समझते हैं. जब हम अगली सरकार बनाएंगे तो हर महिला, हर युवा और हर परिवार को पक्के और सही फायदे मिलेंगे. जनता की हर मांग बिना किसी बहाने के पूरी की जाएगी.
हम जल्द ही बीजेपी का कड़ा जवाब देंगे जो वोटरों को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है. हम वोटरों को बताएंगे कि चुनाव से ठीक पहले ऐसी योजनाओं की घोषणा क्यों की जा रही थी और राज्य सरकार ने उन्हें पहले लागू क्यों नहीं किया. हम उन्हें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में हमारी सरकारों द्वारा किए गए वादों और उन्हें पूरा करने के बारे में भी बताएंगे.' असम के एआईसीसी इंचार्ज जितेंद्र सिंह ने ईटीवी भारत को बताया.
एआईसीसी के असम इंचार्ज सेक्रेटरी पृथ्वीराज साठे ने ईटीवी भारत को बताया,'कांग्रेस के अंदर के लोगों ने आरोप लगाया कि यह पैटर्न पहले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हाल ही में बिहार जैसे दूसरे बीजेपी शासित राज्यों जैसा ही है, जहाँ 10000 रुपये के पैसे ट्रांसफर ने चुनाव के नतीजे एनडीए के पक्ष में कर दिए. चुनावी साल में गरीबों, महिलाओं और युवाओं को धोखा देना, वादे करना और फिर उनसे मुकर जाना, यह बीजेपी की आम रणनीति है.
उन्होंने मध्य प्रदेश में महिलाओं के भत्ते से शुरुआत की, फिर महाराष्ट्र में भी यही आइडिया आजमाया लेकिन बाद में किसी न किसी बहाने या तो रकम कम कर दी या लाभार्थियों की संख्या कम कर दी. उन्होंने दिल्ली में भी ऐसा ही वादा किया था लेकिन सत्ता में आने के बाद इसे भूल गए. बिहार में राज्य सरकार पुरुषों के खातों में गलत तरीके से दिए गए पैसे वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है.'
उन्होंने कहा, 'बिहार में एनडीए सरकार ने वोट पाने के लिए चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए. वे अब असम में भी ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह सब पहले भी किया जा सकता था. असल में उनका मकसद कभी भी विकास नहीं रहा, बल्कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल करके सिर्फ वोट हथियाना रहा है.
यह पब्लिक फंड का इस्तेमाल उन चुनावों को प्रभावित करने जैसा है जो निष्पक्ष होने चाहिए.' असल में कांग्रेस नेतृत्व वाला विपक्ष एनडीए को हटाने के लिए बेताब है जो 2016 से सत्ता में है. हालांकि, यह काम उस पुरानी पार्टी के लिए मुश्किल है जो 2021 के चुनावों में कुल 126 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 29 सीटें जीत सकी थी. इसके उलट, बीजेपी ने 60 सीटें जीती थी. 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस असम की कुल 14 लोकसभा सीटों में से सिर्फ 3 जीत सकी, जबकि भगवा पार्टी ने 9 सीटें जीती.'
कांग्रेस सरकार के सर्वे में ही राहुल के दावे फेल, कर्नाटक में जनता ने ईवीएम पर जताया भरोसा
3 Jan, 2026 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंगलुरु, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए एक आधिकारिक सर्वे के नतीजों ने देश में ईवीएम की विश्वसनीयता पर चल रही बहस को नया मोड़ दे दिया है। सर्वे के मुताबिक कर्नाटक की जनता का एक बड़ा हिस्सा ईवीएम से चुनाव को सुरक्षित और सटीक मानता है। इन नतीजों के सामने आने के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपों को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। इस सर्वे को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के जरिए कराया गया था। इसमें 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों की राय ली गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल 83.61फीसदी लोगों ने कहा कि वे ईवीएम को भरोसेमंद मानते हैं। 69.39फीसदी लोग इस बात से सहमत थे कि ईवीएम सटीक परिणाम देती है, जबकि 14.22फीसदी ने इस पर अपनी पूर्ण सहमति जताई। ईवीएम को लेक कलबुर्गी में सबसे ज्यादा भरोसा देखा, जहां 94.48 लोग वोटिंग मशीन के पक्ष में थे। मैसूर में 88.59फीसदी लोगों ने इसकी विश्वसनीयता पर मुहर लगाई। बेंगलुरु में भी 63.67फीसदी लोग इससे सहमत थे।
सर्वे के नतीजे सार्वजनिक होते ही बीजेपी ने इसे कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने एक्स पर लिखा- सालों से राहुल गांधी देश भर में एक ही कहानी सुना रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है और ईवीएम अविश्वसनीय है। लेकिन खुद कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सर्वे ने एक अलग कहानी बयां की है। यह कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाती है और जीतने पर उसी सिस्टम का जश्न मनाती है। उन्होंने इसे सुविधा की राजनीति करार दिया। यह सर्वे ऐसे समय में सामने आया जब सीएम सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का तर्क है कि जनता का ईवीएम से भरोसा कम हो रहा है। बीजेपी ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि जब उनका अपना सर्वे जनता का भारी भरोसा दिखा रहा है, तो सरकार राज्य को पीछे की ओर क्यों ले जा रही है?
बता दें राहुल गांधी ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी उन्होंने ब्लैक बॉक्स और वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की थी। हालांकि, उनकी अपनी ही राज्य सरकार के इस सर्वे ने अब कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।
जयशंकर की दो टूक, आप पानी की मांग करते........दूसरी ओर आंतकवादियों को भेजते हैं
3 Jan, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिंधु जल समझौते के बहाने पाकिस्तान को फिर खरी-खोटी सुना दी है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि भारत के पास बुरे पड़ोसियों से खुद की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। विदेश मंत्री ने कहा कि आप हमसे पानी बांटने का आग्रह नहीं कर सकते हैं, वहां भी तब जब आप (पाकिस्तान) हमारे यहां आतंकवाद फैला रहे हैं। वहीं, भारत ने जम्मू-कश्मीर में निलंबित सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान के हिस्से वाली चेनाब नदी पर नया पावर प्रोजेक्ट (दुलहस्ती स्टेज-दूसरा पावर प्रोजेक्ट) बनाने का फैसला किया है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान फिर से रोने लगा है। पड़ोसी देश ने कहा कि नई दिल्ली की ओर से चेनाब नदी पर पावर प्रोजेक्ट बनाने का ऐलान किया गया, लेकिन हमें इसकी जानकारी तक नहीं है। पाकिस्तान ने भारत के फैसले के खिलाफ दुनियाभर में जाकर शिकवा-शिकायतें कीं, पर कुछ लाभ नहीं हुआ। भारत के नए कदम से इस्लामाबाद को और मिर्ची लगी है।
जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना पड़ोसी देश पर तीखा हमला कर कहा है कि भारत का एक ‘बुरा पड़ोसी’ है, जो लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और इसके बाद भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया कैसी होगी, यह फैसला केवल नई दिल्ली करेगी, किसी बाहरी दबाव या नसीहत को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में कई देशों के पड़ोसी मुश्किल हो सकते हैं, लेकिन भारत की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है, क्योंकि उसके पड़ोस में एक ऐसा देश है जिसने आतंकवाद को सुनियोजित तरीके से अपनी नीति के रूप में अपनाया है।
जयशंकर ने कहा, ‘जब बात इसतरह के बुरे पड़ोसी की हो जो आतंकवाद को जारी रखता है, तब भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने जोड़ा कि भारत यह स्वीकार नहीं कर सकता कि कोई देश एक ओर पानी साझा करने की मांग करे और दूसरी तरफ भारत में आतंकवाद फैलाए। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति और कार्रवाई पूरी तरह संप्रभु निर्णय हैं।
जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे के समझौतों का जिक्र कर कहा कि इसतरह के समझौते अच्छे पड़ोसी संबंधों की बुनियाद पर टिके होते हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत ने कई दशक पहले पानी साझा करने की व्यवस्था पर सहमति दी थी, लेकिन यह मानकर कि दोनों देशों के बीच न्यूनतम स्तर की सद्भावना और अच्छे संबंध होते है।
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा -शिंदे सेना के 24 उम्मीदवार निर्विरोध जीते
3 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र में जलगांव चुनाव में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने इतिहास रचते हुए 6-6 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। इसके अलावा भिवंडी व धुले में 4-4 और पुणे व अहिल्यानगर में एक-एक प्रत्याशी को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया गया है। वोटिंग से पहले ही मिली इस जीत से गठबंधन में जश्न का माहौल है। हालांकि सोलापुर में विवाद और हंगामा भी देखने को मिला।
जलगांव महानगरपालिका में नामांकन वापसी के अंतिम दिन 12 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, जिनमें भाजपा के 6 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 6 प्रत्याशी शामिल हैं।
भिवंडी महानगरपालिका चुनाव में भी बीजेपी ने मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है। यहां नामांकन प्रक्रिया खत्म होने तक अब तक पार्टी के 4 उम्मीदवार निर्विरोध विजयी घोषित किए जा चुके हैं।
“समय रहते सप्लाई क्यों नहीं रोकी?” इंदौर मामले पर राहुल गांधी का सवाल
2 Jan, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। इंदौर दूषित पानी का मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दे रही है. लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में गंदे पानी की वजह से हुई मौत के मामले शासन और प्रशासन दोनों को घेरा है. सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करके उन्होंने लिखा कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा।
‘सीवर पीने के पानी में कैसे मिला?’
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान. जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया. लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने सवाल पूछते हुए लिखा कि सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?
‘ये जवाबदेही की मांग है’
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लिखा कि ये ‘फोकट’ सवाल नहीं – ये जवाबदेही की मांग है. साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है. मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है, कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।
महापौर पर उमा भारती ने साधा निशाना
मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं. जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!
सुशासन, संवेदना और महिला सशक्तिकरण : मध्यप्रदेश में ‘मोहन मॉडल’ का सजीव अनुभव : श्रीमती संपतिया उइके
2 Jan, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीमती संपतिया उइके
जब आज से दो वर्ष पूर्व डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी, तभी यह आभास होने लगा था कि उनका नेतृत्व केवल प्रशासनिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह शासन को एक *नैतिक, सामाजिक और मानवीय दिशा* देने का प्रयास करेगा। सत्ता की बागडोर संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर यह स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र मुख्यमंत्रियों की सूची में शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान सुनिश्चित करेंगे। इसका कारण केवल राजनीतिक सामंजस्य नहीं, बल्कि *नीति, नीयत और क्रियान्वयन*—तीनों का संतुलन था। मैं स्वयं एक साधारण श्रमिक पृष्ठभूमि से आती हूँ। जीवन में संघर्ष, अभाव और श्रम का अनुभव मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा मुझे मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह उस *समावेशी सोच* का प्रमाण था, जिसमें पृष्ठभूमि नहीं, प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता को महत्व दिया जाता है। मंत्रिमंडल में उन्होंने सभी साथियों के साथ समभाव और समानता का व्यवहार रखा और व्यवहार में उस लोककथन को चरितार्थ किया—
“मुखिया मुख सो चाहिए, खान-पान सब एक।”
यह केवल कहावत नहीं, बल्कि उनके शासन का स्वभाव बन चुका है।
आज डॉ. मोहन यादव की पहचान केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि *“सबके भैया”* के रूप में बन चुकी है। मेरे मंडला जिले में आयोजित एक सामूहिक कार्यक्रम के दौरान मैंने सहज भाव से कहा था—“हमारे भैया आज सब बहनों के भाई बन गए हैं।” आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो गर्व होता है कि वह नारा प्रदेश की लाखों बहनों की भावना बन गया। यह पहचान किसी प्रचार अभियान से नहीं बनी, बल्कि उनके *व्यवहार, संवाद और संवेदना* से निर्मित हुई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यकाल के आरंभ में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि महिला सशक्तिकरण उनकी सरकार के लिए केवल एक योजनागत प्राथमिकता नहीं, बल्कि *नैतिक प्रतिबद्धता* है। यही कारण है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं को न केवल निरंतरता दी गई, बल्कि उन्हें और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष आग्रह पर कई नई योजनाओं की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सशक्त बनाना था।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा लिखे गए ब्लॉग में यह दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए यह भरोसा दिलाया कि सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जब महिलाएँ आर्थिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त होंगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होंगे। लाडली बहना योजना आज मध्यप्रदेश सरकार की पहचान बन चुकी है। लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये की राशि का नियमित अंतरण न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि *राज्य और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु* है। इस राशि को चरणबद्ध रूप से 3000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस योजना को अल्पकालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में देख रही है। इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इससे महिलाएँ डिजिटल लेन-देन से जुड़ रही हैं और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हाल ही में योजना की 31वीं किश्त जारी करते हुए मुख्यमंत्री का यह कहना कि “बहनों का आशीर्वाद हमारी सबसे बड़ी ताकत है”, उनके नेतृत्व की भावनात्मक गहराई को दर्शाता है। महिला सशक्तिकरण को केवल प्रत्यक्ष सहायता तक सीमित न रखते हुए सरकार ने महिलाओं को *उद्यमिता और आत्मनिर्भरता* की ओर अग्रसर करने पर विशेष ध्यान दिया है। लखपति दीदी योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री उद्यम शक्ति योजना महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आज यह तथ्य अत्यंत उत्साहवर्धक है कि प्रदेश में 47 प्रतिशत स्टार्टअप्स महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में कार्यरत महिलाओं को 5000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देना और “एक बगिया माँ के नाम” योजना के अंतर्गत फलदार पौधरोपण—ये सभी पहल इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि *आर्थिक भागीदार* बनाना चाहती है। महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सुरक्षा और अवसर भी उतने ही आवश्यक हैं। इसी सोच के तहत राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। संपत्ति पंजीयन शुल्क में एक प्रतिशत की छूट और कामकाजी महिलाओं के लिए सखी निवास के रूप में सुरक्षित आवास सुविधाओं का विस्तार—ये सभी निर्णय महिला हितों के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा अपने पुत्र का विवाह सार्वजनिक सामूहिक विवाह समारोह में संपन्न कराना आज के समय में एक विरल उदाहरण है। जब विवाह सामाजिक प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हों, तब यह कदम उन परिवारों के लिए आशा का संदेश है, जो सीमित साधनों में बच्चों के भविष्य की चिंता करते हैं। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो कार्य हुए हैं, वे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। फिर भी मुख्यमंत्री मोहन यादव कहते हैं कि उन्हें प्रशंसा नहीं चाहिए उन्हें केवल बहनों का आशीर्वाद चाहिए। यही आशीर्वाद उन्हें निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा देता है। एक मंत्री, एक महिला और एक जनप्रतिनिधि के रूप में मुझे गर्व है कि मैं इस परिवर्तनकारी यात्रा की सहभागी हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज सुशासन, संवेदना और समावेशी विकास की दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है
(लेखिका ,लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मध्यप्रदेश सरकार में केबिनेट मंत्री है)
‘पैजान’ मुद्दे पर CM हिमंता का आरोप, बोले—गोगोई परिवार के PAK से संबंध
2 Jan, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस नेताओं को लेकर बड़ा बयान दिया है. हालांकि उन्होंने बयान को लेकर जल्द ही जनता के सामने सबूत भी पेश करने की बात कही है. सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की छवि हिंदू नेता के रूप में है. वे कई बार अल्पसंख्यकों और विपक्ष के नेताओं पर बड़े बयान दे चुके हैं. अब उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई पर पाकिस्तान से संबंध होने के आरोप लगाए हैं. वहीं, गौरव गोगोई ने सीएम के इन आरोपों को खारिज किया है।
क्या है मामला?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा, जिसमें ‘पैजान’ शब्द का प्रयोग किया गया है. चर्चा है कि यह शब्द गौरव गोगोई के लिए इस्तेमाल किया गया था. जब सीएम से ‘पैजान’ को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हमें सोशल मीडिया की खबरों की कोई जानकारी नहीं है. इसके बाद उन्होंने साफ तौर पर कहा कि गौरव गोगोई और उनके परिवार का पाकिस्तान से संबंध जरूर है. हम इसका जल्द ही खुलासा भी करेंगे।
पहले भी लगा चुके हैं आरोप
इस दौरान सीएम हिमंता बिस्वा सरमा यहीं नहीं रुके उन्होंने यह भी कहा कि हम तो पहले ही गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित संबंधों का आरोप लगा चुके हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इन आरोपों के बाद एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी. जिसकी रिपोर्ट जांच टीम ने पिछले साल सितंबर में सीएम को सौंपी थी. इस दौरान जांच एजेंसियों ने ऐसे सबूतों का पता लगाया था, जिससे देश की संप्रभुता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की बात
हिमंता सरमा ने कहा कि इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी से कराया जाएगा ताकि निष्पक्ष और उचित जांच हो सके. दरअसल, यह मामला सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ. जिसमें पैजान नाम के दिखने वाले शख्स को गौरव की तरह दिखाया गया है, जिसमें उसका और उसकी पत्नी का पाकिस्तान से कनेक्शन है. हालांकि यह वीडियो एआई से बनाया गया है लेकिन इससे सियासत में गर्मी जरूर बढ़ गई है. वीडियो को लेकर हिमंता सरमा गौरव सरमा पर हमलावर हैं. फिलहाल, अभी सिर्फ आरोप और सफाई तक ही मामला है. अब देखना यह होगा कि जांच होती है या नहीं और होती है तो क्या परिणाम निकलते हैं।
कर्नाटक: चुनाव आयोग के सर्वे में EVM सही, BJP ने कांग्रेस को घेरा
2 Jan, 2026 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव पर सर्वे में ईवीएम पर जनता ने मजबूत भरोसा दिखाया है। इस सर्वे के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। सर्वे का शीर्षक 'नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार पर किए गए अंतिम सर्वे का मूल्यांकन' था। इसमें 83.61 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें ईवीएम पर भरोसा है। कुल मिलाकर 69.39 फीसदी प्रतिभागियों ने माना कि ईवीएम सही नतीजे देती है, जबकि 14.22 फीसदी ने इस बात से पूरी तरह सहमति जताई। यह सर्वे 5,100 प्रतिभागियों के बीच 102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। इसमें बंगलूरू, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूर प्रशासनिक क्षेत्रों को शामिल किया गया। कर्नाटक सरकार ने सर्वे को मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार के माध्यम से कराया गया था। आंकड़ों में सबसे अधिक भरोसा कलबुर्गी में देखा गया, जहां 83.24 फीसदी ने सहमति और 11.24 फीसदी ने पूरी सहमति जताई कि ईवीएम भरोसेमंद हैं। मैसूर में 70.67 फीसदी ने सहमति और 17.92 फीसदी ने पूर्ण सहमति जताई। बेलगावी में 63.90 फीसदी ने सहमति और 21.43 फीसदी ने पूरी सहमति जताई। बंगलूरू में पूर्ण सहमति सबसे कम 9.28 फीसदी रही। हालांकि 63.67 फीसदी ने सहमति जताई। बंगलूरू में तटस्थ मत सबसे अधिक 15.67 फीसदी रहे।
भाजपा ने किया पलटवार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कई बार भाजपा और केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर ईवीएम में हेराफेरी और 'वोट चोरी' का आरोप लगाया है। इस सर्वे के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने एक्स पर लिखा, वर्षों से राहुल गांधी पूरे देश में यही कहानी सुनाते रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र 'खतरे' में है, ईवीएम 'अविश्वसनीय' हैं और हमारे संस्थानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लेकिन कर्नाटक ने बिल्कुल अलग कहानी बताई है। भाजपा ने कहा कि राज्यव्यापी सर्वे ने यह दिखाया कि लोग चुनाव, ईवीएम और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा, यह कांग्रेस के मुंह पर 'एक तमाचा' है। भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनाव मतपत्रों का उपयोग कर रही कर्नाटक सरकार की आलोचना की। पार्टी ने कहा, जनता का स्पष्ट भरोसा होने बावजूद सिद्धारमैया सरकार कर्नाटक को पीछे ले जा रही है। स्थानीय चुनावों में के मतपत्रों की घोषणा कर रीह है, जो हेरफेर, देरी और दुरुपयोग के लिए जाना जाता है। वहीं, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी कर्नाटक सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया पर किए गए ताजा सर्वे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी और (सांसद) राहुल गांधी ने कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने कहा, कर्नाटक निगरानी एवं मूल्यांकन प्राधिकरण यानी केएमईए ने 2024 के लोकसभा चुनावों पर यह सर्वे किया, जिसमें 5,100 लोग शामिल हुए। सर्वे बंगलूरू से लेकर बेलगाम और मैसूर तक पूरे राज्य में102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया और 91.3 फीसदी लोगों ने माना कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं। शाइना एनसी ने आगे कहा, इससे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और चुनाव आयोग पर सभी संदेह खत्म हो जाते हैं। मुझे लगता है कि अब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए देश से माफी मांगने का समय आ गया है, क्योंकि उन्होंने उन्होंने केवल झूठ फैलाए हैं और यहां आपने देखा है कि इससे इन दावों का हमेशा के लिए अंत हो जाता है। एक सशक्त लोकतंत्र की स्वतंत्रत एजेंसियों और न्यायसंगत कार्यप्रणाली के मामले में यह उनके मुंह पर करारा तमाचा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ा कदम, भारत-पाक ने सौंपी न्यूक्लियर साइट्स की जानकारी
1 Jan, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । साल 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया था. इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया. इन घटनाओं के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल बन गया. इसी बीच भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे से परमाणु ठिकानों की लिस्ट साझा की है।
दोनों देशों के बीच 35 बार लिस्ट का आदान-प्रदान
भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार (1 जनवरी) को अपने-अपने परमाणु ठिकानों और संस्थानों की सूची साझा की है. ये लिस्ट का आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच एटम ठिकानों और संस्थानों पर हमलों के निषेध से संबंधित समझौते के तहत किया गया है. विदेश मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके महत्वपूर्ण जानकारी दी है. दोनों देशों के बीच परमाणु ठिकानों की लिस्ट का आदान-प्रदान अब तक 35 बार किया जा चुका है. इसकी शुरुआत 1 जनवरी 1992 को हुई थी।
इस समझौते तहत लिस्ट होती है अदला-बदली
भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के निषेध का समझौता (Agreement on the Prohibition of Attack against Nuclear Installations and Facilities), 31 दिसंबर 1988 को हुआ था. ये एग्रीमेंट 27 जनवरी 1991 से लागू हुआ था. इस समझौते के तहत ये प्रावधान किए गए थे कि दोनों देश परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचाने, नष्ट करने और ऐसी किसी भी तरह की कार्रवाई करके उकसाने की कोशिश नहीं करेंगे. इस समझौते में परमाणु विद्युत संयंत्र, रिसर्च रिएक्टर, यूरेनियम संवर्धन सेंटर, फ्यूल निर्माण यूनिट्स और रेडियोएक्टिव सामग्री के स्टोरेज प्वॉइंट शामिल हैं।
रेलवे का बड़ा ऐलान: पहली वंदे भारत स्लीपर गुवाहाटी से कोलकाता तक
1 Jan, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का परीक्षण और प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को घोषणा की कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी और कोलकाता के बीच चलाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले कुछ ही दिनों में इस ऐतिहासिक रूट पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
रात के सफर में मिलेगी वर्ल्ड-क्लास सुविधा
रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी की रात की यात्राओं के लिए डिजाइन की गई है। यह ट्रेन यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा और एक आधुनिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। इसे भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जो प्रीमियम यात्रा को और सुगम बनाएगी।
15 अगस्त 2027 को चलेगी पहली बुलेट ट्रेन
वंदे भारत के साथ-साथ रेल मंत्री ने देश की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2027 को भारत को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। वैष्णव ने मजाकिया अंदाज में कहा, "आप अभी से बुलेट ट्रेन की टिकट खरीद लीजिए, अगले साल बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता से जुटी हुई है।
पीएम मोदी ने लिया तैयारियों का जायजा
प्रोजेक्ट की प्रगति को लेकर रेल मंत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गुजरात दौरे के दौरान मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निरीक्षण किया था। पीएम मोदी सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन पहुंचे थे, जहां उन्होंने काम की बारीकी से जांच की और वहां मौजूद इंजीनियरों व कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कर्मचारियों से बातचीत करते हुए कहा था कि यह प्रोजेक्ट न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के गर्व का विषय है। यह हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाने में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी, जिससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सफर का लाभ मिलेगा।
परीक्षा पे चर्चा’ में टूटा रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, मोदी से गुरुमंत्र लेने को उत्साहित छात्र
1 Jan, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों के साथ ‘परीक्षा पे चर्चा’ करते हैं. इस साल ‘परीक्षा पे चर्चा’ (PPC) 2026 के 9वें संस्करण का आयोजन होना है, जिसने रिकॉर्ड तोड़ दिया है. PM मोदी की पाठशाला में उनसे ‘गुरुमंत्र’ लेने के लिए अब तक करीब 3 करोड़ रिजस्ट्रेशन हो चुके हैं. ये पंजीयन 11 जनवरी तक जारी रहेंगे. माना जा रहा है कि इस बार ये आंकड़ा 4 करोड़ पार हो सकता है.
परीक्षा पे चर्चा 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ (Pariksha Pe Charcha) अपने 9वें संस्करण के लिए पूरी तरह तैयार है. बोर्ड परीक्षाओं के तनाव को कम करने और छात्रों में नई ऊर्जा भरने वाला यह कार्यक्रम इस बार भी जबरदस्त उत्साह बटोर रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक 2.92 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं और माना जा रहा है कि इस बार 4 करोड़ का आंकड़ा आसानी से पार हो जाएगा. पिछले साल इस कार्यक्रम ने 3.53 करोड़ आवेदनों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया था. इस बार भी रिकॉर्ड टूटने की पूरी संभावना है.
परीक्षा पे चर्चा 2026: रजिस्ट्रेशन के ताजा आंकड़े
कुल रजिस्ट्रेशन: 2,92,85,623 से ज्यादा
छात्रों की संख्या: 2.73 करोड़ से ज्यादा
शिक्षकों की संख्या: 16.25 लाख से ज्यादा
अभिभावकों की संख्या: 3.28 लाख से ज्यादा
पीएम मोदी से ‘गुरुमंत्र’ लेने का मौका
अगर आप भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलना चाहते हैं. उनसे परीक्षा संबंधी सवाल पूछना चाहते हैं या कार्यक्रम का हिस्सा बनना चाहते हैं तो 11 जनवरी 2026 से पहले रजिस्ट्रेशन जरूर कर लें.
रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में शामिल होना बेहद आसान है. इसके लिए आप मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी या फिर डिजिलॉकर के जरिए रजिस्टर कर सकते हैं. जानें सभी स्टेप्स-
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट innovateindia1.mygov.in पर जाएं.
होमपेज पर दिख रहे ‘Participate Now’ बटन पर क्लिक करें.
यहां आपको चार विकल्प दिखेंगे – छात्र, शिक्षक, अभिभावक आदि. अपनी श्रेणी चुनें और संबंधित बटन पर क्लिक करें.
अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी डालकर लॉगिन करें.
स्कूल का नाम, कक्षा और अन्य जरूरी जानकारी भरें.
फॉर्म पूरा करके सबमिट कर दें.
मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ मीटिंग में अभिषेक बनर्जी की तीखी बहस
1 Jan, 2026 01:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तृणमूल कांग्रेस(TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत 10 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ मीटिंग की. बैठक के दौरान अभिषेक बनर्जी और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच तीखी बहसबाजी देखी गई. बैठक के बाद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए.
‘सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम के जरिए वोट चोरी की जा रही’
टीएमसी के सांसदों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच करीब ढाई घंटे तक मीटिंग चली. मीटिंग के बाद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ईवीएम के बजाय ‘सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम’ के जरिए वोटर लिस्ट में हेराफेरी की जा रही. जिससे वोट चोरी की जा रही है. उन्होंने कहा कि ईसीआई ऐप में गड़बड़ी की गई है. वहीं केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए टीएमसी नेता ने कहा कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर बंगाल को बदनाम कर रहे हैं. इस तरह का झूठा प्रचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अभिषेक बनर्जी और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच तीखी बहसबाजी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ हुई मीटिंग को लेकर चर्चा की. बनर्जी ने कहा, ‘मीटिंग के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने उंगली उठाकर बात की. जिसपर मैंने कहा कि आप उंगली नीचे करके बात करो. हम निर्वाचित होकर आए हैं. किसी के गुलाम नहीं हैं. इतना ही नहीं अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो मीटिंग की फुटेज मीडिया के सामने दिखाएं.
‘चाहें जितनी ताकत लगा लो, चुनाव हम ही जीतेंगे’
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार पहले कोऑपरेटिव मंत्रालय में सचिव थे. संवैधानिक संस्था और देश को बर्बाद करने के लिए ज्ञानेश कुमार को अचानक मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया गया. बनर्जी ने आगे कहा कि बीजेपी चाहें जितनी ताकत लगा ले, लेकिन विधानसभा चुनाव तो हम ही जितेंगे.
नीतीश कुमार से कितने अमीर हैं उनके दोनों डिप्टी सीएम? जानें सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा की संपत्ति
1 Jan, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार सरकार के कैबिनेट सचिवालय विभाग ने साल 2025 के अंतिम दिन नीतीश सरकार के मंत्रिमंडल की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया है. जिसके अनुसार, सीएम नीतीश कुमार से ज्यादा अमीर उनके दोनों डिप्टी सीएम हैं. जहां नीतीश कुमार के पास कुल 20 हजार 552 रुपए नकदी है तो वहीं डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास 1 लाख 35 हजार रुपए विजय कुमार सिन्हा के पास 88 हजार 560 रुपए की नकदी है. यहां जानें कितने अमीर हैं नीतीश कुमार समेत बिहार सरकार के दोनों डिप्टी सीएम? सीएम नीतीश कुमार के पास हलफनामे में दी गई जानकारी के अनुसार, कुल तीन बैंक खाते हैं. जिसमें से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पटना सचिवालय शाखा में उनके खाते में कुल 27 हजार 217 रुपए जमा हैं. वहीं एसबीआई पार्लियामेंट हाउस दिल्ली ब्रांच में 3 हजार 358 रुपए और पीएनबी बोरिंग रोड ब्रांच में कुल 27 हजार 191 रुपए जमा हैं. यानी नीतीश कुमार के खाते में कुल 57,666 रुपए जमा हैं. अगर उनकी चल और अचल संपत्ति की बात करें तो उनके पास कुल चल संपत्ति 17 लाख 66 हजार रुपए की है, जबकि अचल संपत्ति के रूप में उनके पास एक फ्लैट है, जिसकी बाजार में लगभग 1 करोड़ 48 लाख रुपए कीमत है.
कितने अमीर हैं डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा
नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के पास हलफनामे के अनुसार कुल 88 हजार 560 रुपए की नगदी है. इसके अलावा उनके बैंक खातों में 55 लाख रुपए से ज्यादा की राशि जमा है. शेयर बाजार में उन्होंने निवेश किया है. उनके पास नगदी और बैंक खातों में जमा राशि के अलावा 90 ग्राम सोना भी है, जिसकी वर्तमान में कीमत करीब 11 लाख रुपए है. यह सिर्फ डिप्टी सीएम विजय कुमार की सिन्हा की प्रापर्टी है.
सम्राट चौधरी के पास कितनी संपत्ति?
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास कुल 1 लाख 35 हजार रुपए की नकदी है. वहीं उनकी पत्नी के पास भी 35 हजार रुपए की नकदी है. बैंक खातों की अगर बात करें तो कई खातों को मिलाकर लाखों रुपए जमा हैं. रिपोर्ट के अनुसार, एसबीआई खाते में कुल 15 लाख 35 हजार 789 रुपए और HDFC बैंक में 2,09,688 रुपए जमा हैं. इसके अलावा डिप्टी सीएम की पत्नी और बच्चों के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों पर पैसा जमा है. उन्होंने शेयर बाजार में भी निवेश किया है. इसके अलावा सम्राट चौधरी के पास 2023 मॉडल की बोलेरो नियो गाड़ी है, जिसकी कीमत करीब 7 लाख रुपए है. उनके और उनकी पत्नी के पास 200-200 ग्राम सोना भी है, जिसकी बाजार में कीमत करीब 50 लाख रुपए है. पत्नी के नाम पर पटना के गोला रोड पर एक फ्लैट है, जिसकी बाजारू कीमत करीब 29 लाख रुपए है. इसके अलावा एनपी बोर राइफल और एक रिवॉल्वर भी है.
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